Homeराजनीतिअमरावती नहीं, विशाखापत्तनम होगी आंध्र प्रदेश की नई राजधानी: CM जगन मोहन रेड्डी का...

अमरावती नहीं, विशाखापत्तनम होगी आंध्र प्रदेश की नई राजधानी: CM जगन मोहन रेड्डी का ऐलान, सुप्रीम कोर्ट में भी चल रही सुनवाई

बता दें कि आंध्र प्रदेश से तेलंगाना अलग होने के बाद साल 2015 में अमरावती को राज्य की राजधानी बनाया गया था। इसके बाद, साल 2020 में तीन राजधानी बनाने की योजना बनाई गई थी।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने प्रदेश की राजधानी में बदलाव करने का ऐलान किया। अब, आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती नहीं बल्कि विशाखापत्तनम होगी। रेड्डी ने मंगलवार (31 जनवरी 2023) को यह ऐलान किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च में विशाखापत्तनम में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट होना है। इसकी तैयारियों के लिए बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक को संबोधित करते हुए जगन मोहन रेड्डी ने कहा है कि आने वाले दिनों में विशाखापत्तनम राजधानी होगी।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने कहा है, “मैं आपको विशाखापत्तनम आने के लिए आमंत्रित कर रहा हूँ। आने वाले दिनों में यह हमारी राजधानी बनने जा रहा है। मैं खुद भी आने वाले महीनों में विशाखापत्तनम शिफ्ट हो जाऊँगा। हम 3 और 4 मार्च को ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट विशाखापत्तनम में आयोजित करने जा रहे हैं।”

बता दें कि आंध्र प्रदेश से तेलंगाना अलग होने के बाद साल 2015 में अमरावती को राज्य की राजधानी बनाया गया था। इसके बाद, साल 2020 में तीन राजधानी बनाने की योजना बनाई गई थी। इसमें अमरावती को विधायी राजधानी, विशाखापत्तनम को कार्यकारी राजधानी और कुर्नूल को न्यायिक राजधानी बनाने का प्रस्ताव रखा गया था। हालाँकि, बाद में यह प्रस्ताव रदद् हो गया था।

मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने नई राजधानी का ऐलान ऐसे समय किया है जब सुप्रीम कोर्ट अमरावती को राजधानी बनाए जाने के मामले की सुनवाई कर रहा है। इससे पहले आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने अमरावती को राजधानी बनाए जाने का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। यही नहीं, इस मामले की पहली सुनवाई मंगलवार (31 जनवरी, 2023) को सुनवाई भी हुई।

जगन मोहन रेड्डी से इससे पहले दो बार विशाखापत्तनम को आंध्र प्रदेश की राजधानी बनाने का प्लान बना चुके थे। हालाँकि दोनों ही बार मामला कोर्ट में फँसने के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -