Homeदेश-समाज'ईसाइयों का कभी नहीं हो सकता भारत से सफाया': केरल कैथोलिक बिशप क्लेमिस के...

‘ईसाइयों का कभी नहीं हो सकता भारत से सफाया’: केरल कैथोलिक बिशप क्लेमिस के बोल, मणिपुर हिंसा पर PM से कहा- चुप्पी तोड़ो

आदिवासी कुकी और मेइती समुदाय आमने-सामने आ गए और एक-दूसरे को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इस हिंसा में अब तक लगभग 125 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, 3000 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। हिंसा को देखते हुए हजारों परिवार अपने घरों से विस्थापित हो गए हैं।

पिछले ढाई महीनों से पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर हिंसा की आग में जल रहा है। इसमें अब केरल का ईसाई संगठन कूद पड़ा है। केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल (KCBC) के अध्यक्ष कार्डिनल मार बेसिलियोस क्लेमिस ने इस धार्मिक चश्मे से देखते हुए कहा कि किसी को ये नहीं सोचना चाहिए कि वह भारत से ईसाई धर्म को खत्म कर सकता है।

साइरो-मलंकारा कैथोलिक चर्च के आर्कबिशप क्लेमिस (Cardinal Mar Baselios Cleemis) ने रविवार (9 जुलाई 2023) को केरल में कही। दरअसल, मणिपुर में जारी हिंसा को लेकर कॉन्ग्रेस विधायक के नेतृत्व में एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया था। केरल में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में आर्कबिशप बोल रहे थे।

क्लेमिस ने केंद्र सरकार से पूछा कि मणिपुर में दो समुदायों के बीच 65 दिनों से दंगे हो रहे हैं, लेकिन जो सरकार सर्जिकल स्ट्राइक करने के लिए जानी जाती है, वह इन दंगों को नियंत्रित करने में सक्षम क्यों नहीं है। केरल के अन्य ईसाई बिशपों ने इस मामले में केंद्र की मोदी सरकार से हस्तक्षेप करने की माँग की है।

आर्कबिशप क्लेमिस ने कहा, “हमारे संविधान में लिखा धर्मनिरपेक्षता कोई सजावटी शब्द नहीं है, बल्कि एक अधिनियमित दर्शन है। हमारा महान संविधान ,जो किसी भी धर्म को मानने और आचरण करने का अधिकार देता है, उसे छुपाया क्यों जा रहा है? मणिपुर में शांति बहाल करने में हस्तक्षेप करना चाहिए।”

एर्नाकुलम जिले के मुवत्तुपझा में कॉन्ग्रेस विधायक मैथ्यू कुझालनदान द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में बोलते हुए क्लेमिस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए। पीएम मोदी के लिए यह दुनिया को संदेश देने का सबसे अच्छा मौका है कि भारत में लोकतंत्र कायम है।

बताते चलें कि मणिपुर में मेइती समुदाय अपने लिए अनुसूचित जनजाति (एसटी) के दर्जा देने की माँग कर रहा है। इस माँग को लेकर उसने 3 मई 2023 को आदिवासी आदिवासी एकजुटता मार्च निकाला गया था। इसके बाद राज्य में हिंसा भड़क उठी।

आदिवासी कुकी और मेइती समुदाय आमने-सामने आ गए और एक-दूसरे को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इस हिंसा में अब तक लगभग 125 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, 3000 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। हिंसा को देखते हुए हजारों परिवार अपने घरों से विस्थापित हो गए हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।

संभल की डेमोग्राफी: हिंदू 13 हजार से हुए 47 हजार, मुस्लिम 23 हजार से हो गए 1 लाख 71 हजार – मुस्लिम भीड़ की...

2011 की जनगणना के अनुसार संभल शहर की डेमोग्राफी 77.67% मुस्लिम आबादी जबकि हिंदू आबादी सिर्फ 22% वाली बताई गई है। वर्तमान में मुस्लिम 80% तक।
- विज्ञापन -