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रं$, चु$, ब$… वजाहत खान की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, कामाख्या देवी और भगवान कृष्ण को दी थी गालियाँ: शर्मिष्ठा पर FIR कराने वाली ‘जेहादी’ की हिंदू घृणा की पूरी डिटेल

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (23 जून 2025) को वजाहत खान की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। वजाहत के खिलाफ पश्चिम बंगाल सहित कई अन्य राज्यों में FIR दर्ज थी। उसे हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

यह अंतरिम आदेश जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि 14 जुलाई 2025 तक वजाहत के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।

सुनवाई के दौरान जस्टिस केवी विश्वनाथन ने कहा, “नफरत भरे भाषण हमें कहीं नहीं ले जाते।” उन्होंने आगे कहा कि आग की वजह से लगे घाव भर सकते हैं, लेकिन शब्दों से लगे घाव कभी नहीं भरते। वजाहत खान के वकील दामा शेषाद्रि नायडू ने दलील दी थी कि आरोपित ने जैसा बोया है, वैसा ही काट रहा है और सजा से उसने सबक भी सीखा है।

बता दें कि वजाहत खान की शिकायत पर ही ऑपरेशन सिंदूर को लेकर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भड़काऊ पोस्ट करने पर सोशल मीडिया इफ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली को पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार किया था। शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी के बाद बंगाल पुलिस ने वजाहत के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था।

जहाँ एक ओर शर्मिष्ठा को दो हफ्ते तक जेल में रखने के बाद भी उसकी बेल को नामंजूर कर दिया गया था। वहीं वजाहत ने उसकी गिरफ्तारी का जश्न मुस्लिम समुदाय के साथ मनाया था।

वजाहत के सोशल मीडिया पर हिंदू धर्म के देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट दिखा थे। इसके बाद लोगों ने उसकी गिरफ्तारी की माँग की थी। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में वजाहत ने लिखा था “कामाख्या देवी मंदिर में ब्राह्मण को अन्य हिंदुओं से कटी हुई योनि की पूजा करवानी पड़ती है। इसमें अंतर करना बहुत मुश्किल है कि यह अंधभक्ति है या कोई मानसिक बीमारी।”

उसने ट्वीट किया था “एक हिंदू अपनी साली को अंग-अंग पर रंग लगाते हुए और अपने दोस्तों को भी उसके साथ ऐसा करने का निमंत्रण देते हुए…हिंदू.. यहीं है इनकी असलियत… बलात्कारी संस्कृति।”

एक अन्य पोस्ट में उसने लिखा था, “नहीं वो उसकी बात कर रहा है जिसकी 16108  रखैलों के साथ रंग रसिया मनाता था…या चुपके-चुपके लड़कियों को नहाते हुए देखता था..”

ऐसे ही उसने एक पोस्ट में लिखा था, “मेरे पास तुम्हारे लिए कुछ है… पहले अपने धर्म के बारे में पढ़ो। मूत्र पीने वाले बदमाश”

हिंदूओं को गाली देते हुए वजाहत ने एक पोस्ट में लिखा था “तुझ जैसी रं* पेट की औलाद रसूल के बारे में मेरी बात करे ये जेब नहीं देता…तू इसकी बात कर, तेरा कृष्णा कैसा रंगीला था देख…सच्चाई देख वहम में मत जी…झं$% सा&% तूने जो भी कहा वो सब तो झूठ और बहुत है लेकिन ये तेरे ही किताब का है सच पढ़, सु*& के पि*%$”

इंस्टाग्राम पर एक आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए उसने लिखा “अबे भो**, ब**… अपनी बहन से जाकर सीख तेरा धर्म ला**, तेरा धर्म जो तेरी बहन कोठे में बैठ कर सिखाती है… या फिर वही धर्म तेरे घर पे आकर सिखाती है, चु** कर ब**… अपनी बीवी को तुझ जैसा संघी काम चो* है दूसरे के लिए चो* देता है और अपनी बहन चो* है… ब*… सुन रं* पेट का जाना… मेरे अबाओ अजदाद कन्वर्ट हुए भी ते ना तो हमें उनपर फक्र है…के गंदा धर्म शैतानों का पूजा करने वाला, लिंग का पूजा करने वाला धर्म चो* कर… पाक साफ धर्म अपना और हक धर्म अपना…फखर है उनपे…जा तू लिंगम पूजा कर…लौ*

वजाहत खान कोलकाता में रशीदी फाउंडेशन चलाता है। सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने और दो धर्मों के बीच दुश्मनी पैदा करने के आरोप में वजाहत के खिलाफ काफी साक्ष्यों और दस्तावेजों के होने के बावजूद पश्चिम बंगाल पुलिस ने उसे शुरउआत में गिरफ्तार नहीं किया था।

बाद में सोशल मीडिया पर लोगों के उसके खिलाफ आक्रोश को देखने और अन्य राज्यों में वजाहत के खिलाफ दर्ज हुई FIR के बाद जब दबाव बढ़ने लगा तो 9 जून 2025 को पुलिस ने  उसे गिरफ्तार किया। इसके बाद उसे 23 जून तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया था।

हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ उसकी गंदी टिप्पणियों को देखने के बावजूद किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न करके और पश्चिम बंगाल के बाहर के राज्यों में दर्ज FIR के तहत उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने के सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से साफ समझा जा सकता है कि कोर्ट ने वजाहत के मामले में अनावश्यक नरमी दिखाई है।

हिंदू लड़कियों का रेप करने के लिए कमरे देता था अबरार, 65 दिन बाद हुआ गिरफ्तार: यहीं नशा देकर दरिंदगी करता था भोपाल का ‘मुस्लिम गैंग’, फिर Video बनाकर करता था ब्लैकमेल

राजधानी भोपाल के एक कॉलेज में हिंदू छात्राओं के साथ रेप, ब्लैकमेलिंग और धर्मांतरण (लव-जिहाद) के दबाव से जुड़े एक सनसनीखेज मामले में फरार चल रहा छठा आरोपित अबरार गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने 65 दिन बाद इटारसी के एक होटल से अबरार को दबोचा और कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया।

अबरार 65 दिन से पुलिस से बच रहा था। वह गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपनी जगह बदल रहा था। पुलिस ने उसे कोलकाता में तलाशा, तो वह बिहार में छिपा मिला। फिर वह भोपाल के पास आया, तो पुलिस ने तलाशी शुरू की, लेकिन वह फिर कोलकाता भाग गया।

कोलकाता से वह झारखंड के रास्ते मुंबई भागने की कोशिश में था। पुलिस को सूचना मिली कि वह जबलपुर से इटारसी होते हुए मुंबई जाने वाली ट्रेन में है। भोपाल पुलिस की तीन अलग-अलग टीमों ने इटारसी रेलवे स्टेशन पर घेराबंदी की। अबरार ट्रेन छोड़कर एक होटल में छिपा था, जहाँ से उसे आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया।

भोपाल मुस्लिम गैंग का है सरगना अबरार

अबरार, कोलकाता का रहने वाला है। अबरार मुस्लिम गैंग का एक्टिव मेंबर था। पुलिस के मुताबिक, अबरार सिर्फ हिंदू लड़कियों को अपने प्रेमजाल में फँसाने में ही शामिल नहीं था, बल्कि उनके आपत्तिजनक वीडियो और सोशल मीडिया अकाउंट्स के ज़रिए ब्लैकमेलिंग में भी उसकी बड़ी भूमिका थी।

अबरार पर दो सगी बहनों के साथ रेप करवाने का आरोप है। अबरार ने मुख्य आरोपित फरहान और अली को कमरा दिलवाया था। अबरार, नबील नाम के एक और आरोपित का रूम पार्टनर था। ये दोनों एक किराए के कमरे में रहते थे। इसी कमरे में हिंदू लड़कियों को बुलाया जाता था। वहाँ उन्हें नशीला पदार्थ दिया जाता और उनके साथ गैंगरेप कर वीडियो बनाए जाते थे।

पुलिस को उम्मीद है कि अबरार की गिरफ्तारी से गिरोह के पूरे नेटवर्क और डिजिटल चैट्स से जुड़े कई अहम सबूत सामने आ सकते हैं।

भोपाल का ‘मुस्लिम गैंग’ क्या करता था काम?

अप्रैल 2025 महीने में भोपाल के कोकता थाना क्षेत्र में स्थित एक निजी कॉलेज की हिंदू छात्राओं के साथ हुए इस भयानक अपराध का खुलासा हुआ था। यह गिरोह खासकर कॉलेज की हिंदू छात्राओं को निशाना बनाता था।

मुस्लिम गैंग के आरोपित पहले हिंदू लड़कियों से दोस्ती करते और उन्हें अपने प्रेमजाल में फँसाते थे। फिर लड़कियों को नशीले पदार्थ पिलाकर उनके साथ गैंगरेप किया जाता था।

आरोपित रेप के आपत्तिजनक वीडियो बनाते थे और इन वीडियो के ज़रिए पीड़िताओं को ब्लैकमेल करते थे। वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पीड़िताओं पर धर्म बदलने (धर्मांतरण) का दबाव बनाया जाता था। हिंदू छात्राओं को ज़बरदस्ती मांस खिलाया जाता और बुर्का पहनने के लिए मजबूर किया जाता था।

हिंदू धर्म के खिलाफ गंदी बातें भी की जाती थीं। आरोपित बारी-बारी से छात्राओं का यौन शोषण करते थे।

शॉर्ट एनकाउंटर में पकड़ा था मुख्य आरोपित फरहान

इस गिरोह का मुख्य आरोपित फरहान खान है, जिसे पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस हिरासत में फरहान का एक शॉर्ट एनकाउंटर भी हुआ था, जिसमें उसके पैर में गोली लगी थी। फरहान के अलावा, उसके साथी अली, साहिल, साद और नबील भी पहले ही पकड़े जा चुके हैं। अबरार इस गिरोह का छठा आरोपित है।

पुलिस ने फरहान के फोन की जाँच की, तो उसमें 8 अन्य लड़कियों के वीडियो मिले। इनमें से ज़्यादातर उसी कॉलेज की छात्राएँ थीं। पुलिस ने इस मामले में पॉक्सो एक्ट, IT एक्ट और मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम जैसी कई गंभीर धाराएँ लगाई हैं।

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी इस मामले को संगठित अपराध और धार्मिक दबाव का बताया है। पुलिस अब अबरार से पूछताछ कर रही है, ताकि गिरोह के पूरे नेटवर्क और अन्य डिजिटल सबूतों का पता लगाया जा सके।

संत तुकाराम-संत ज्ञानेश्वर की पालकी लेकर पुणे में यात्रा कर रहे थे हिंदू, मुस्लिम महिला ने फेंके माँस-हड्डियों के टुकड़े: कहा- किसी से डरती नहीं, जो करना है कर लो


पुणे के कैंप इलाके में हिन्दुओं में काफी गुस्सा है। दरअसल 21 जून को साल में एक बार निकलने वाली आषाढ़ी वारि तीर्थयात्रा निकली थी। इस दौरान 57 साल की नसीम शेख ने तीर्थयात्रियों पर हड्डियाँ और माँस के टुकड़े फेंक दिए।

नसीम शेख सोलापुर रोड पर मम्मा देवी चौक के पास गैबीपीर दरगाह के पास अपनी झोपड़ी के बाहर खड़ी थी। सालाना आषाढ़ी वारि इस रास्ते से होकर गुजरता है जो पंढरपुर तक जाता है। इसे पंढरपुर आषाढ़ी वारि भी कहा जाता है। महाराष्ट्र में इस जुलूस का हिन्दुओं के लिए काफी महत्व है। सदियों पुरानी इस परंपरा में भक्त संत तुकाराम और संत ज्ञानेश्वर की पालकी लेकर जाते हैं। इसका समापन आषाढ़ी एकादशी के दिन भगवान विट्ठल मंदिर में होता है।

नसीम शेख के खिलाफ छत्रपति संभाजीनगर के रहने वाले अक्कलवंत राठौड ने एफआईआर दर्ज कराई है। एफआईआर के मुताबिक, ” ये घटना दिनदहाड़े हुई जब जुलूस इलाके से गुजर रहा था। राठौड़ ने बताया कि माया धूमल नाम की भक्त जुलूस में शामिल थी जिसे नसीम शेख की फेंकी गई एक पोटली से चोट लगी। इसमें हड्डियाँ और माँस के टुकड़े थे। जब राठौड़ ने शेख से बात की तो वह गालियाँ देने लगी और कहा, ” जो चाहो करो, मैं डरने वाली नहीं हूँ। ” इस घटना से भक्तों में काफी गुस्सा है।

महाराष्ट्र सरकार ने आषाढ़ी वारि जुलूस के लिए कई नियम लागू किए हैं। इस दौरान जुलूस के गुजरने वाले क्षेत्र में माँस और शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अलावा पंढरपुर में भी माँस-मदिरा की बिक्री बंद है।

वारि जुलूस में दूर-दूर से आकर लोग शामिल होते हैं। हर समुदाय में लोकप्रिय इस जुलूस पर सुरक्षा व्यवस्था का खास ख्याल रखा जाता है। लेकिन नसीम शेख के फेंके गए माँस और हड्डियों के टुकड़े ने लोगों को उकसाने का काम किया है।

पिछले कई सालों से इस तरह की घटनाएँ सामने आई हैं, जहाँ हिन्दू मंदिरों के बाहर या धार्मिक कार्यक्रम में माँस, हड्डियाँ, गाय के सिर फेंके गए। असम के धुबरी जिले में मुस्लिम कट्टरपंथियों ने इस साल बकरीद के दौरान दो बार हनुमान मंदिर के बाहर गाय के सिर फेंके गए। घटना के बाद राज्य सरकार ने देखते ही गोली मारने के आदेश देने पड़े। बदरपुर और लखीपुर के शिव मंदिरों के पास भी माँस के टुकड़े मिले थे। इसके बाद कई मुस्लिम कट्टरपंथियों को गिरफ्तार किया गया था।

यूपी के लखनऊ, प्रयागराज, अमेठी और सोनभद्र के मंदिरों के बाहर भी ऐसी ही घटनाएँ सामने आईं। इसके बाद इलाके में तनाव फैल गया। इस साल मार्च में भी महाकुंभ मेले के बाद हिन्दू घरों के बाहर गाय के कटे सिर मिले, जो सोची-समझी साजिश की ओर इशारा करती है।

ये पूरा पैटर्न यूपी से असम तक फैल गया है। राजस्थान, दिल्ली, मध्यप्रदेश और झारखंड के पास हिन्दू समारोह में माँस फेंकने की खबरें आई हैं। कई बार सीसीटीवी फुटेज में पुलिस ने आरोपियों को ऐसा कर बाइक या पैदल भागते हुए देखा गया।

दरअसल कुछ इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन लगातार हिन्दू धार्मिक स्थलों, समारोहों को अपवित्र करने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने की साजिश कर रहे हैं। बार-बार ऐसी होने वाली घटनाओं के बावजूद सख्ती बरतने में राजनीतिक हिचकिचाहट ऐसे तत्वों को बढ़ावा देता है।

इजरायल में भी शुरू हुआ ‘ऑपरेशन सिंधु’, 161 लोग पहुँचे दिल्ली: भारतीयों को लगातार वापस ला रही सरकार, ईरान से अब तक 2003 लोग सकुशल पहुँचे देश

इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बीच दोनों देशों में फँसे भारतीयों को वापस देश लाने के लिए सरकार ऑपरेशन सिंधु मिशन के तहत लोगों को रेस्क्यू कर रही है। इसके तहत अब तक 2003 लोग सकुशल भारत लाए जा चुके हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (23 जून 2025) को ईरान के मशहद से 290 भारतीय नागरिकों के साथ एक श्रीलंका के नागरिक को भी सकुशल दिल्ली पहुँचाया गया है। ईरान के अलावा ऑपरेशन सिंधु के तहत अब इजरायल से भी भारतीयों को निकाला जा रहा है। इजरायल से 161 भारतीय नागरिकों का पहला जत्था 24 जून को दिल्ली पहुँच चुका है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि 23 जून 2025 की शाम को 290 भारतीय नागरिकों और एक श्रीलंकाई नागरिक को मशहद से निकाला गया है।

12 दिनों से संघर्ष जारी

इजरायल और ईरान के बीच 13 जून 2025 से ही संघर्ष चल रहा है। दोनों देश एक दूसरे पर मिसाइल और ड्रोन्स से हमला कर रहे हैं। इससे वहाँ कई लोगों के मरने और हताहत होने की खबरें सामने आईं। इसी बीच जम्मू-कश्मीर समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से ईरान गए लोगों के परिवारों ने उन्हें वापस लाने के लिए केंद्र सरकार से गुहार लगाई।

इसके बाद भारत सरकार ऑपरेशन सिंधु चलाकर अपने लोगों को वापस लाने का जतन शुरू किया। इसके तहत पहले जत्थे में ईरान से 110 लोगों को अर्मेनिया के रास्ते भारत लाया गया। इसके बाद से लगातार लोगों को वापस लाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है।

केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गरिटा ने बताया कि भारत सरकार की ओर से ऑपरेशन सिंधु के हिस्से के तहत अगले दो से तीन दिनों में ईरान से तीन अतिरिक्त उड़ानें (एक्ट्रा एवैक्यूवैशन फ्लाइट्स) निर्धारित की गई है ताकि भारतीयों को वापस लाया जा सके।

लगातार बढ़ते हमलों से इजराइल में भी काफी लोग घायल हो रहे हैं और कई लोगों की मौत भी हो गई है। इसके बाद ऑपरेशन सिंधु के तहत इजरायल से भी लोगों को भारत लाया जा रहा है। सोमवार को इस ऑपरेशन के तहत 604 भारतीय नागरिकों को मिस्र (इजिप्ट) और जॉर्डन के रास्ते से होकर इजरायल से निकाला गया है।

ऑपरेशन सिंधु का यह सफर आसान नहीं रहा है। इजरायल से जॉर्डन और फिर अम्मान से रवाना हुई उड़ान को कुवैत से डायवर्ट कर दिया गया था। सोमवार की रात को ईरान की ओर से अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों के कारण कुवैत का एयरस्पेस बंद कर दिया गया।

इजरायल और ईरान के संघर्ष के बीच तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिका ने रविवार (22 जून 2025) की तड़के ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ चलाकर ईरान के तीन प्रमुख परमाणु सुविधाओं पर हवाई हमले कर दिए।

इसके जवाब में ईरान ने कतर और इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर कई मिसाइलें दागीं, जिनमें कतर का अल-उदेइद एयरबेस भी शामिल था। ये इस क्षेत्र में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है। इशके बाद कतर ने एयरस्पेस कुछ घंटों के लिए बंद कर दिया था।

ट्रंप ने बड़बोलेपन में कर दिया ‘सीजफायर’ का दावा, ईरान ने कर दिया इंकार: इजरायल की ओर से हमला रुका तो शिया मुल्क ने दिया शांति का संकेत, संघर्ष पर अब लग सकता है विराम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार (23 जून 2025) को बताया कि उनके दोस्तों, इजरायल और ईरान के बीच पूरी तरह से युद्ध रुकने पर सहमति बन गई है। ट्रंप ने कहा कि यह 24 घंटों के अंदर सीजफायर धीरे-धीरे लागू हो जाएगा।

शुरुआत में थोड़ी गड़बड़ हो गई, क्योंकि ईरान ने तुरंत कहा कि उन्हें युद्ध रोकने का ऐसा कोई प्रस्ताव मिला ही नहीं और मंगलवार (24 जून 2025) सुबह तेहरान में कई ज़ोरदार धमाकों के बाद, ईरान के विदेश मंत्री ने इशारा दिया है कि युद्धविराम समझौता लागू हो गया है।

ईरान ने कतर और इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर कई मिसाइलें दागीं, जिसमें कतर में अल-उदीद एयर बेस भी शामिल था, जो इलाके में सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य अड्डा है।

12 दिन बाद युद्ध विराम- ट्रंप

ट्रंप ने सोमवार (23 जून 2025) को अपनी सोशल मीडिया साइट ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि इजरायल और ईरान के बीच 12 दिन से चल रहा युद्ध अब रुक जाएगा। ट्रंप ने आगे कहा, “सभी को बधाई! इजरायल और ईरान के बीच यह मान लिया गया है कि पूरी तरह से युद्ध रुक जाएगा। यह 12 घंटों के लिए होगा, जिसके बाद युद्ध खत्म मान लिया जाएगा।”

ट्रंप के मुताबिक, ईरान युद्ध रोकना शुरू करेगा और 12 घंटे बाद इजरायल इसमें शामिल होगा, और अगले 12 घंटों के बाद, ’12 दिन के युद्ध का अंत पूरी दुनिया मनाएगी।’ ट्रंप ने दोनों देशों को इस लड़ाई को खत्म करने के लिए उनकी ‘मजबूती, हिम्मत और समझदारी’ के लिए शाबाशी दी।

ट्रंप ने यह भी कहा कि इजरायल और ईरान मेरे पास लगभग एक साथ आए और ‘शांति!’ बोले। ट्रंप ने ईरान का धन्यवाद किया कि उन्होंने हमें पहले से जानकारी दी, जिससे किसी की जान नहीं गई और कोई ज़ख्मी नहीं हुआ।

ट्रंप ने कहा कि शायद अब ईरान इलाके में शांति और दोस्ती की ओर बढ़ सकता है और उन्होंने इजरायल को भी ऐसा करने के लिए बढ़ावा दिया।

ईरान का जवाब

ट्रंप के युद्धविराम के दावे के तुरंत बाद, ईरान ने कहा कि उन्हें अमेरिका से युद्ध रोकने का कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। ईरानी विदेश मंत्री ने ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर कहा, “अभी तक, युद्ध रोकने या सैन्य कार्रवाई खत्म करने पर कोई ‘सहमति’ नहीं बनी है।”

ईरानी विदेश मंत्री ने आगे कहा, “हालाँकि, अगर इजरायली सरकार तेहरान के समय के अनुसार सुबह 4 बजे तक ईरानी लोगों के खिलाफ अपनी गैरकानूनी हमला बंद कर देती है, तो हमारा उसके बाद अपनी कार्रवाई जारी रखने का कोई इरादा नहीं है। हमारी फौजी कार्रवाई खत्म करने का आखिरी फैसला बाद में लिया जाएगा।”

हालाँकि, मंगलवार (24 जून 2025) सुबह तेहरान में कई ज़ोरदार धमाकों के बाद, ईरान के विदेश मंत्री ने इशारा दिया कि युद्धविराम समझौता लागू हो गया है।

इजरायल का जवाब

इजरायल ने युद्धविराम के दावे पर चुप्पी साध रखी है और अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

इजरायली मीडिया के अनुसार, इजरायली अधिकारियों ने कहा है कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू ट्रंप की युद्धविराम योजना के साथ हैं, लेकिन शर्त यह है कि ‘ईरान अपने मिसाइल हमलों को रोकने का वादा करे।’

’12 दिन का युद्ध’ कैसे शुरू हुआ

इजरायल-ईरान के बीच लड़ाई 13 जून 2025 को तब शुरू हुई जब इजरायल ने ईरानी फौजी और परमाणु ठिकानों पर ‘ऑपरेशन राइजिंग लायन‘ नाम का एक बड़ा हवाई हमला किया।

जवाब में, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 3’ नाम से ड्रोन और मिसाइलों से बड़ा हमला किया, जिसमें इजरायली लड़ाकू विमान के ईंधन बनाने वाले ठिकाने और बिजली सप्लाई के केंद्र निशाने पर थे।

तनाव तब और बढ़ गया जब अमेरिका ने रविवार (22 जून 2025) सुबह ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के तहत ईरान के तीन बड़े परमाणु ठिकानों पर हवाई हमले किए।

युद्धविराम के दावों के बीच भी हमले जारी रहे

युद्धविराम के दावों के बीच भी हमले जारी रहे। इजरायल के रक्षा बलों (IDF) ने बताया कि ईरान से इजरायल की ओर मिसाइलें दागी गई हैं।

IDF ने ‘एक्स’ पर लिखा, “IDF ने पक्का किया है कि कुछ देर पहले ईरान से इजरायली इलाके की ओर मिसाइलें दागी गई हैं। बचाव करने वाली मशीनें खतरे को रोकने के लिए काम कर रही हैं।”

इसके अलावा, ट्रंप की युद्धविराम घोषणा के घंटों बाद मंगलवार (24 जून 2025) तड़के तेहरान में ज़ोरदार धमाकों से हमला हुआ।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोमवार (23 जून 2025) को कहा कि अमेरिकी हमलों से उसके बुनियादी ढाँचे को तोड़ने के बाद ईरान अब परमाणु हथियार बनाने में सक्षम नहीं है। यह देखने वाली बात होगी कि यह युद्धविराम कितना टिक पाता है और क्या इजरायल और ईरान के बीच शांति कायम हो पाएगी।

कर्नाटक में जिस घोटाले पर सिद्धारमैया ने निकाली थी पदयात्रा, CM बनते ही भूल गए: कॉन्ग्रेसी मंत्री ने दिलाई अधूरे वादे की याद, कर डाली SIT बनाने की डिमांड

कर्नाटक में अवैध खनन का पुराना घाव फिर हरा हो गया है। वैसे, इस बार सवाल उठाने वाले कोई और नहीं, बल्कि सिद्धारमैया सरकार के अपने कानून मंत्री एच के पाटिल हैं। पाटिल ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को सात पन्नों का तीखा पत्र लिखकर सरकार की नीयत और नाकामी पर सवाल खड़े किए हैं।

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार के कानून मंत्री एचके पाटिल ने कहा कि 2007 से 2011 के बीच अवैध खनन से राज्य को 1.5 लाख करोड़ का चूना लगा, लेकिन अब तक सिर्फ 7.6% मामलों की जाँच पूरी हुई। बाकी मामले सरकारी फाइलों में धूल खा रहे हैं। पाटिल ने चेताया कि जनता में सरकार की इस सुस्ती से गुस्सा है, और अगर जल्द कदम नहीं उठे, तो लोगों का भरोसा टूट जाएगा।

पाटिल ने साफ कहा कि सरकार दोषियों को सजा दिलाने और लूटी गई दौलत वसूलने में ईमानदारी नहीं दिखा रही। उन्होंने कई बड़े सुझाव दिए – जैसे दोषियों की संपत्ति जब्त करने के लिए विशेष आयुक्त की नियुक्ति, एक नया विशेष जाँच दल (SIT) बनाने और अवैध खनन के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत शुरू करने की माँग की।

उन्होंने यह भी कहा कि पुराने सबूतों को सुरक्षित रखा जाए, वरना वे गायब हो सकते हैं। पाटिल का यह पत्र ऐसे वक्त आया है, जब हाल ही में सीबीआई की अदालत ने पूर्व मंत्री गली जनार्दन रेड्डी को ओबुलापुरम माइनिंग कंपनी (OMC) से जुड़े मामले में दोषी ठहराया।

दरअसल, कॉन्ग्रेस ने 15 साल पहले अवैध खनन के खिलाफ बेंगलुरु से बेल्लारी तक पदयात्रा की थी और सत्ता में आने का वादा किया था कि दोषियों को सजा दिलाएँगे। लेकिन अब सत्ता में होने के बावजूद कॉन्ग्रेस चुप्पी साधे बैठी है। पाटिल का यह पत्र उस वादे की याद दिलाता है, जिसे कॉन्ग्रेस भूलती नजर आ रही है।

बीजेपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने पाटिल का समर्थन करते हुए तंज कसा कि अब देखना है सिद्धारमैया अपने ही मंत्री के सवालों का क्या जवाब देते हैं। बोम्मई ने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने वालों का उनकी पार्टी में कोई सम्मान नहीं।

यह मामला सिर्फ खनन घोटाले तक सीमित नहीं है। यह सरकार की जवाबदेही और इच्छाशक्ति पर भी सवाल उठाता है। पाटिल ने लिखा कि 12,000 से ज्यादा अवैध खनन के मामले दर्ज हैं, लेकिन सिर्फ 0.2% में ही फैसला हुआ। हालाँकि यह विवाद 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल को भी गर्म कर सकता है।

अब सवाल यह है कि क्या सिद्धारमैया इस बार कान में तेल डाले बैठे रहेंगे या अपनी ही सरकार के मंत्री की पुकार पर कुछ ठोस कदम उठाएँगे?

चचेरे भाई से जबरन निकाह कराना चाहते थे चाचू, गुजरात से जान बचाकर भागी रुकसाना: दिल्ली में की घर वापसी, समृद्धि बनकर प्रेमी से रचाई शादी

गुजरात की मुस्लिम लड़की रुकसाना ने परिवार के जुल्म और जबरन चचेरे भाई से निकाह के दबाव से तंग आकर अपनी जिंदगी का बड़ा फैसला लिया। उसने अपने प्रेमी भारत के साथ भागकर दिल्ली में घर वापसी कर ली और हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कर लिया। अब वह समृद्धि नाम से नई पहचान के साथ खुशहाल जिंदगी जी रही है।

यह मामला एक तरफ जहाँ धार्मिक स्वतंत्रता और महिला आजादी का मिसाल बन रहा है, वहीं दूसरी ओर यह ‘परिवारों में जबरन निकाह’ जैसे मामलों और घर वापसी के मुद्दे पर भी समाज में चर्चा का केंद्र बन गया है।

सनातन की ओर झुकाव

रुकसाना का बचपन से हिंदू धर्म की ओर खास झुकाव था। उसे हिंदू पूजा-पाठ, आरती और सनातन संस्कृति बहुत पसंद थी। लेकिन मुस्लिम परिवार में पलने की वजह से उस पर तमाम पाबंदियाँ थीं। उसके अब्बू-अम्मी की मौत हो चुकी थी और वो चाचा, भाई-भाभी और बहनों के साथ रहती थी।

रुकसाना ने बताया कि उसके तीनों भाई और चाचा उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते थे। उसकी बड़ी बहन का भी निकाह जबरदस्ती ही किया गया था और अब उसके साथ मारपीट होती थी। अब परिवार रुकसाना की शादी चचेरे भाई से करवाना चाहता था, जिसके लिए उसे धमकियाँ और मारपीट का सामना करना पड़ रहा था।

प्रेम और सुरक्षा की तलाश में भागकर पहुँची दिल्ली

इन अत्याचारों से तंग आकर रुकसाना ने अपने प्रेमी भारत से मदद माँगी। दोनों पहले से एक-दूसरे से प्यार करते थे। जब हालात बेकाबू हो गए, तो रुकसाना और भारत ने गुजरात छोड़कर दिल्ली का रुख किया। यहाँ उन्होंने मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से शादी की। रुकसाना ने हिंदू धर्म को पूरे दिल से अपनाया और समृद्धि नाम रखा। उसने साफ कहा कि वह मुस्लिम धर्म में कभी वापस नहीं जाएगी, क्योंकि हिंदू धर्म की शांति और खुलापन उसे हमेशा से आकर्षित करता था।

रुकसाना का यह फैसला उसकी मर्जी से लिया गया है, और वह अपनी नई जिंदगी से खुश है। यह मामला सोशल मीडिया और समाज में चर्चा का केंद्र बन गया है। कुछ लोग इसे महिला सशक्तिकरण और धार्मिक स्वतंत्रता की जीत मान रहे हैं, तो कुछ इसे मुस्लिम परिवारों में महिलाओं पर होने वाले अत्याचार के मामलों की खिलाफत का संदेश भी मान रहे हैं। बहरहाल, रुकसाना और भारत अब दिल्ली में नई शुरुआत कर चुके हैं।

PM मोदी विरोधी कार्टूनिस्ट मंजुल को ममता बनर्जी पर पुराने कार्टून के लिए बंगाल पुलिस का नोटिस, सेंसरशिप का इल्जाम: क्या फ्रेंडली मैच खेल रही TMC सरकार?

मोदी सरकार की आलोचना के लिए पहचाने जाने वाले कार्टूनिस्ट मंजुल अब पश्चिम बंगाल पुलिस की कार्रवाई के निशाने पर हैं। उन्हें 2019 में ममता बनर्जी पर बनाए गए दो कार्टून के लिए नोटिस मिला है। मंजुल ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया और सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया।

मंजुल को बुधवार (18 जून 2025) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स से एक ईमेल मिला, जिसमें बताया गया कि उनके अकाउंट @MANJULtoons के दो ट्वीट को पश्चिम बंगाल साइबर अपराध शाखा ने आपत्तिजनक माना है।

एक्स ने मंजुल को सूचित किया कि इन ट्वीट्स को भारतीय कानूनों का उल्लंघन माना गया है, लेकिन प्लेटफॉर्म ने अभी कोई कार्रवाई नहीं की। एक्स ने कहा कि वे अपने यूजर्स की आवाज का सम्मान करते हैं और कानूनी अनुरोध की जानकारी देना उनकी नीति है।

स्क्रीनशॉट: मंजुल को प्राप्त ईमेल

ये पोस्ट मई 2019 के हैं। पहला ट्वीट 28 मई 2019 का है, जब टीएमसी के दो विधायक और 50 से ज्यादा नगर पार्षद भाजपा में शामिल हुए थे। इसमें ममता बनर्जी पर एक व्यंग्यात्मक कार्टून था।

स्क्रीनशॉट: मंजुल द्वारा अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट किए गए कार्टून

दूसरा ट्वीट 15 मई 2019 का है, जिसमें चिटफंड घोटाले पर ममता को निशाना बनाया गया था।

स्क्रीनशॉट: मंजुल द्वारा अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट किए गए कार्टून

22 जून 2025 को मंजुल को एक और ईमेल मिला, जिसमें कोलकाता पुलिस ने फिर से उसी 6 साल पुराने कार्टून को फ्लैग किया।

स्क्रीनशॉट :मंजुल को प्राप्त ईमेल

मंजुल ने निराशा जताते हुए एक्स पर ट्वीट किया, “लगता है कोलकाता पुलिस के पास अब कोई काम नहीं बचा।” उन्होंने इसे सेंसरशिप का प्रयास बताया और कहा कि पुराने पोस्ट को बार-बार निशाना बनाना सत्ता का गलत इस्तेमाल है।

मंजुल पहले भी विवादों में रहे हैं। ऑपइंडिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि मंजुल ने मोदी सरकार की छवि खराब करने के लिए फर्जी खबरें फैलाईं और सुभाष चंद्र बोस की विरासत को कमतर दिखाने की कोशिश की। हालाँकि मंजुल के समर्थकों का कहना है कि यह कार्रवाई उनकी आलोचनात्मक आवाज को दबाने की कोशिश है।

अमेरिका-इजरायल ही नहीं और भी देशों की है ईरान में सत्ता-परिवर्तन की चाहत: जानिए – सुप्रीम लीडर खामेनेई की जगह लेने को कौन से लोग और संगठन हैं आतुर, वो कितने मजबूत

‘मेक ईरान ग्रेट अगेन’ ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ये बयान दिया था। दरअसल अमेरिका ऐसा कह कर ईरान में सत्ता परिवर्तन की संभावना तलाश रहा है।

अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा, “सत्ता परिवर्तन शब्द का उपयोग करना राजनीतिक रूप से सही नहीं है, लेकिन अगर वर्तमान शासन ईरान को फिर से महान बनाने में समर्थ नहीं है, तो सत्ता परिवर्तन क्यों नहीं होगा?? MIGA (Make Iran Great Again)!”

अमेरिका ने ईरान में सुप्रीम लीडर खामेनेई को सत्ता से हटाने की कई बार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोशिश की है। लेकिन मुस्लिम शिया धर्म के सुप्रीम लीडर खामेनेई को हटाना संभव नहीं हो सका। इस वक्त भी ईरान में सत्ता परिवर्तन की माँग उठ रही है। खुद खामेनेई के परिवार से इसकी माँग उठने लगी है।

कौन हैं महमूद मोरदखानी

महमूद मोरादखानी ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के भतीजे हैं। वह 1986 में ईरान छोड़कर फ्रांस चले गए थे और निर्वासन की जिंदगी जी रहे हैं। महमूद मोरदखानी ने कहा है कि वह युद्ध के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन ईरानी सरकार का खात्मा ही यहाँ स्थायी शांति के लिए जरूरी है।

उन्होंने कहा, ” जो भी इस शासन को मिटा सके, वह जरूरी है।” उनका मानना है कि कई ईरानी लोग खामेनेई के कमजोर होने से ईरान में खुश हैं।

कौन हैं रजा पहलवी

ईरान के पूर्व शहजादे रजा पहलवी ने भी शासन में बदलाव पर जोर दिया है। उनका कहना है कि तेहरान में सत्ता पतन जरूरी है।

रजा पहलवी ईरान के अंतिम पहलवी शासक मोहम्मद शाह पहलवी के बड़े बेटे हैं। उनका परिवार अमेरिका में निर्वासन की जिंदगी गुजार रहा है। 1979 में देश छोड़कर भागे पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी इस वक्त काफी सक्रिय हैं।

रजा अमेरिका में रहते हैं और खुद को ईरान के शासक के रूप में देखना चाहते हैं। 2016 में पहली बार जब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति बने थे तो शाह ने ईरान में धर्मनिरपेक्ष सरकार बनाने और लोकतंत्र की बहाली की वकालत की थी।

इसके बाद फिर जब ट्रंप दूसरी बार राष्ट्रपति बने तो पहलवी ने ईरान में लोकतंत्र की वकालत करते हुए पश्चिमी राष्ट्रों से उसके संबंध सुधारने पर जोर दिया था। अब जब इजरायल ने ईरान पर हमला किया तो वह इजरायल का पक्ष लेते हुए नजर आए। उन्होंने कहा कि ईरान में अभी कई ऐसे लोग हैं जो इजरायल के इस कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं और खामनेई को सत्ताच्युत करना चाहते हैं।

माना जा रहा है कि अब राष्ट्रपति ट्रंप ईरान में सत्ता परिवर्तन में रजा पहलवी को समर्थन दे सकते हैं और ईरान में लोकतंत्र की स्थापना की पहल कर सकते हैं। हालाँकि खामनेई ने अपने विकल्प के तौर पर तीन उत्तराधिकारियों को चुन लिया है। ये तीनों ही मौलवी हैं यानी ईरान को इस्लामिक राष्ट्र बनाए रखने की व्यवस्था खामेनेई ने कर दी है।

खामेनेई के खिलाफ सड़कों पर उतरे कई संगठन

ईरान में अभी कई संगठन एक्टिव हैं जो चाहते हैं कि सत्ता परिवर्तन हो। इनमें पीपुल्स मुजाहिदीन या मोजाहिदीन ए खल्क यानी एमईके, ग्रीन मूवमेंट प्रमुख हैं। एमईके ऐसा संगठन है जिसे गोरिल्ला युद्ध लड़ने में महारत हासिल है। लेकिन अमेरिका इसे नहीं पसंद करता क्योंकि ये संगठन रूस के नजदीक रहा है। अमेरिका विरोध के बावजूद खामेनेई को उखाड़ फेंकने की कोशिश में ये संगठन लगा हुआ है।

दरअसल खामेनेई ने ही इस संगठन को कुचला था। धीरे-धीरे खुद को खड़ा करने के दौरान संगठन अमेरिका के संपर्क में भी आ गया। इस दल के नेता को अल्बानिया में स्थापित करने में अमेरिका ने अहम भूमिका निभाई। हालाँकि आज की तारीख में ये कहना काफी मुश्किल है कि संगठन ईरान की इस्लामिक सत्ता को उखाड़ फेंकने में सक्षम है।

ग्रीन मूवमेंट ईरान में 2009 में सुर्खियों में आया। राष्ट्रपति चुनाव में धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए संगठन ने आंदोलन चलाया। देश में लोकतांत्रिक सुधारों की बात करने वाला ये संगठन खामेनेई को सत्ता से हटाना चाहता है और अक्सर विरोध प्रदर्शन करता रहता है।

इस संगठन ने 2010 में बड़ा आंदोलन खड़ा किया था। इस्लामिक राष्ट्र का विरोध करने के कारण इसके आंदोलन को दबा दिया गया और इसके नेताओं को गिरफ्तार किया गया। आज की परिस्थिति में ये उम्मीद करना मुश्किल है कि ये संगठन ईरान में इस्लामिक सत्ता को हटा सकता है।

खामेनेई के विरोध में महिलाएँ

ईरान में इस्लामिक शासन के दौरान वर्षों से महिलाओं का दमन किया जाता रहा है। हिजाब के खिलाफ महिलाएँ सड़कों पर उतरती रही हैं और सरेआम इसे उतार कर फेंकती रही हैं। विरोध प्रदर्शन में हिजाब जलाना, खामेनेई की तस्वीर जलाकर ‘मुल्ला भाग जाओ’ का नारा बुलंद करना आम रहा है। अब इन महिलाओं को खामेनेई को सत्ता से हटाने का विकल्प सामने दिखने लगा है।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस का बयान

इधर अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान में सत्ता परिवर्तन पर बड़ा बयान दिया। उनका कहना है कि वो ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना चाहते हैं। वे सत्ता परिवर्तन नहीं चाहते।

अमेरिका और इजरायल के अलावा भी कई देश हैं जो खामेनेई को सत्ता से बेदखल होते हुए देखना चाहते हैं। इनमें इराक, सऊदी अरब, लेबनान, मिस्र जैसे पड़ोसी इस्लामिक देश भी शामिल हैं। दरअसल इन राष्ट्रों का झगड़ा शिया-सुन्नी को लेकर है। ईरान एकमात्र शिया इस्लामिक देश है, जबकि बाकी देश सुन्नी इस्लामिक राष्ट्र हैं।

लाउडस्पीकर-माइक लगाओ या नहीं लगाओ, अनुमति लिए बिना घर को नहीं बना सकते ‘प्रार्थना स्थल’: पादरी की याचिका HC ने की खारिज, जानिए क्यों दोहराया अपना पुराना फैसला

मद्रास हाई कोर्ट ने फिर साफ कर दिया कि बिना सरकार की इजाजत कोई भी घर प्रार्थना सभा का अड्डा नहीं बन सकता। कोर्ट ने कहा कि आप की प्रार्थना सभा से शोर हो या ना हो, किसी को कोई समस्या हो ना हो लेकिन बिना अनुमति लिए किसी भी घर को प्रार्थना सभा नहीं बनाया जा सकता है। तिरुवर जिले के पादरी एल जोसेफ विल्सन के मामले में कोर्ट ने ये फैसला सुनाया।

क्या है नया मामला

तिरुवर जिले के कोडावसल के पादरी एल जोसेफ विल्सन के घर को उनके क्षेत्र के जिला कलेक्टर ने साल 2024 में सील करने और वहाँ प्रार्थना सभाएँ आयोजित ना करने का आदेश दिया था। जिसके बाद विल्सन ने मद्रास हाई कोर्ट का सहारा लिया और कोर्ट से इस आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया था।

विल्सन ने अपनी याचिका में कहा था कि वह ‘वर्ड ऑफ गॉड मिनिस्ट्रीज ट्रस्ट’ के नाम से एक ट्रस्ट चला रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2023 में एक संपत्ति खरीदी थी तब से नियमित तौर पर उसमें प्रार्थना सभाएँ आयोजित की जाती हैं। हालाँकि विल्सन ने घर में चर्च के निर्माण के लिए परमिशन और प्लान अप्रूवल के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन जिला कलेक्टर ने इसे खारिज कर दिया था।

कुछ दिनों बाद तहसीलदार ने एक नोटिस जारी कर विल्सन को 10 दिनों में प्रार्थना कक्ष बंद करने को कहा। जब विल्सन ने इसे रद्द करने की अपील की तो कलेक्टर ने कोर्ट में दलील दी कि विल्सन बिना अनुमति के प्रार्थना कक्ष नहीं चला सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनके प्रार्थना सभा के समय होने वाले शोर और लोगों के जमा होने से आस-पास के लोगों को परेशानी हो रही है।

मामले में मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस एन आनंद वेंकटेश ने कहा, “याचिकाकर्ता की ओर से जारी हलफनामे में उसने भरोसा दिया है कि वह लाउडस्पीकर और माइक्रोफोन का उपयोग किए बिना शांतिपूर्ण तरीके से घर में प्रार्थना करेगा। लेकिन लाउडस्पीकर और माइक्रोफोन का उपयोग न करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। मुद्दे की जड़ यह है कि याचिकाकर्ता प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए घर को प्रार्थना कक्ष में नहीं बदल सकता।”

कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए स्पष्ट रुप से कहा है कि किसी हॉल में प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए संबंधित नियमों के तहत संबंधित प्राधिकरण से अनुमति प्राप्त करना आवश्यक है। इसलिए, याचिकाकर्ता अधिकार के तौर पर बिना अनुमति के प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए प्रार्थना हॉल नहीं रख सकता।

पुराने मामले में कन्याकुमारी के जिला कलेक्टर ने टी विल्सन नाम के एक शख्स के खिलाफ एक याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि वह बिना किसी अनुमति के लोगों की भीड़ जमाकर प्रार्थना सभा कर रहें हैं। उनका कहना था कि विल्सन के घर में नियमित तौर पर सुबह के 9 बजे से दोपहर के 12 बजे तक क्रिश्चियन रिलीजियस ट्रस्ट की ओर से प्रार्थना सभा का आयोजन होता था। इस दौरान स्पीकर और माइक्रोफोन का भी इस्तेमाल होता था। इससे आस-पास के लोगों को भी दिक्कत होती है।

इस पर टी विल्सन ने भी खुद को बचाते हुए एक याचिका दायर की थी और कहा था कि सांप्रदायिक सद्भावना को ठेस पहुँचाते हुए उनकी निजी प्रार्थना को लेकर झूठी शिकायत की गई है। हालाँकि जिला कलेक्टर ने अदालत के सामने फोटोग्राफ्स और अन्य सबूत पेश किए, जिसमें इकट्ठा हुई भीड़ देखी जा सकती थी और स्पीकर भी चलता दिख रहा था।

इसके बाद मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के जस्टिस एन आनंद वेंकटेश ने 29 अप्रैल 2021 को टी विल्सन की याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि इस तरह की सार्वजनिक प्रार्थना के लिए याचिकाकर्ता को तमिलनाडु पंचायत भवन नियमावली, 1997 के नियम 4 (3) के तहत जिला कलेक्टर से अनुमति लेनी चाहिए थी।

देखा जाए तो किसी को भी इस तरह घर को प्रार्थना सभा बनाने की अनुमति होनी भी नही चाहिए। हाल के ही दिनों में कई ऐसे मामले देखने को मिले हैं, जहाँ घर के अंदर ईसाइयों की प्रार्थना सभा होती है। इतना ही नहीं, कई मामले ऐसे भी रहें हैं, जिसके तहत प्रार्थना सभा के नाम पर ईसाइयों के अलावा हिंदू धर्म के लोगों को आमंत्रित किया जाता है और फिर उनका धर्म परिवर्तन करा दिया जाता है। ऐसे में यह फैसला आवश्यक भी था ताकि कम से कम यह सरकार के संज्ञान में हो कि कौन से ऐसे घर हैं, जो बाहर से तो सामान्य घर ही लगते हैं, लेकिन अंदर का माहौल एक चर्च का है।