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मुख्तार अंसारी पर POTA लगाने वाले DSP को मुलायम सरकार ने भेज दिया था जेल, योगी सरकार ने वापस लिया केस

उत्तर प्रदेश के खूँखार माफिया नेता मुख्तार अंसारी के खिलाफ POTA (आतंकवाद निरोधक अधिनियम, 2002) के तहत कार्रवाई करने वाले पूर्व डिप्टी SP शैलेन्द्र कुमार सिंह को यूपी सरकार से बड़ी राहत मिली है। उनके खिलाफ दर्ज मुकदमा योगी सरकार ने वापस ले लिया है। जनवरी 2004 में वे यूपी STF की वाराणसी यूनिट के प्रभारी डिप्टी एसपी थे। उन्होंने भाजपा विधायक कृष्णनंदन राय हत्याकांड में अहम खुलासा किया था।

उन्होंने पता लगाया था कि इस हत्याकांड के लिए मुख्तार अंसारी ने ‘लाइट मशीनगन (LMG)’ की खरीद की थी। साथ ही उन्होंने उस LMG को बरामद करने में भी सफलता प्राप्त की थी। तब राज्य में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में सपा की सरकार थी। तत्कालीन राज्य सरकार शैलेन्द्र के इस कदम से नाराज़ हो गई थी और उन पर POTA वापस लेने का दबाव बनाया जाने लगा था। इसके आगे झुकने से इनकार करते हुए शैलेन्द्र सिंह ने यूपी पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया था।

इस्तीफा देने के कुछ महीने बाद ही वाराणसी के कैंट थाने में उनके खिलाफ DM कार्यालय के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी लालजी की तरफ से डीएम दफ्तर के रेस्ट रूम में घुसकर तोड़फोड़, मारपीट और हंगामा करने की FIR दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने तुरंत चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी और शैलेन्द्र को जेल जाना पड़ा था। अब इस केस को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने वापस ले लिया है। शैलेन्द्र ने इस पर ख़ुशी जताते हुए कहा:

“राजनीति से प्रेरित होकर मेरे ऊपर वाराणसी में आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया गया था और मुझे जेल में डाल दिया गया था। लेकिन, जब योगी जी की सरकार बनी तो उक्त मुकदमे को प्राथमिकता के साथ वापस लेने का आदेश पारित किया गया, जिसे CJM न्यायालय द्वारा मार्च 6, 2021 को स्वीकृति प्रदान की गई। न्यायालय के आदेश की प्रति आज ही प्राप्त हुई। मैं और मेरा परिवार योगी जी की इस सहृदयता का आजीवन ऋणी रहेगा।”

शैलेन्द्र सिंह ने संघर्ष के दिनों में साथ देने वाले सभी लोगों को भी धन्यवाद दिया। सहायक अभियोजन अधिकारी की तरफ से दी गई रिपोर्ट के आधार पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (वाराणसी) ने मुकदमा वापस लेने का आदेश जारी किया। फरवरी 2004 में ततकालीन राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री को भेजे पत्र में शैलेन्द्र ने आरोप लगाया था कि LMG जब्ती केस में मुख़्तार अंसारी का नाम हटाने के लिए उन पर ऊपर से बड़ा दबाव बनाया जा रहा है।

गौरतलब है कि पंजाब की जेल में बंद मुख़्तार अंसारी के उत्तर प्रदेश प्रत्यर्पण में वहाँ की कॉन्ग्रेस सरकार कई महीनों से अड़ंगा लगा रही थी। 5 दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि गैंगस्टर मुख्तार अंसारी दो सप्ताह के भीतर उत्तर प्रदेश की बांदा जेल में शिफ्ट किया जाए। कोर्ट ने कहा था कि बांदा जेल के अधीक्षक चिकित्सा सुविधाओं की देखरेख करेंगे। पंजाब सरकार की तरफ से दावा किया गया था कि किसी राज्य को इस प्रकार के स्थानांतरण का कोई मौलिक अधिकार नहीं है।

नंदीग्राम में हार रहीं ममता बनर्जी, खुद प्रशांत किशोर का सर्वे हुआ लीक: सोशल मीडिया पर तेजी से फैली खबर – Fact Check

ममता बनर्जी नंदीग्राम में हारने वाली हैं। खुद प्रशांत किशोर का सर्वे लीक हो गया है। – ये दोनों लाइन लीक हुए सर्वे के स्क्रीनशॉट के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है।

I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी) के सर्वे का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। नंदीग्राम में ममता बनर्जी के हारने के अलावा बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे फेज में भाजपा के आगे बढ़ने (30 में से 23 सीटों पर BJP की जीत) को लेकर भी दावे किए जा रहे हैं। यह सब कुछ उसी लीक हुए स्क्रीनशॉट में दिख रहे आँकड़ों को आधार पर किया जा रहा है।

नंदीग्राम में ममता की हार: दावे और प्रतिक्रिया

ममता बनर्जी नंदीग्राम में हारने वाली हैं – इसको लेकर सोशल मीडिया पर जो स्क्रीनशॉट शेयर किया जा रहा है, उससे एकदम अलग एक स्क्रीनशॉट को फेक बताते हुए 29 मार्च को तृणमूल कॉन्ग्रेस ने एक ट्वीट किया था।

तृणमूल के अनुसार भाजपा के लोग फेक खबरों को फैला रहा हैं। तब उन्होंने उस दिन के स्क्रीनशॉट को फेक बताया था। प्रशांत किशोर की I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी) ने तृणमूल के इस ट्वीट को रिट्वीट किया था।

ममता की नंदीग्राम में हार, नए दावे का क्या?

सबसे ऊपर जो दो ट्वीट में ममता बनर्जी के नंदीग्राम हारने और बंगाल चुनाव के दूसरे फेज में भाजपा के आगे बढ़ने को लेकर दावे किए जा रहे हैं, उस पर अभी तक TMC या I-PAC की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। जिस पर प्रतिक्रिया आई थी, वो स्क्रीनशॉट भी अलग है।

जब तक तृणमूल कॉन्ग्रेस या खुद प्रशांत किशोर की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आती है, तब तक इस दावे को झुठलाना आसान नहीं – यह पूरी तरह सच भी हो सकता है और पूरी तरह झूठ भी।

SIMI के ‘इंजीनियरिंग’ सेल को उम्रकैद: गोधरा का बदला लेने निकले थे सज्जाद, आकिब, रफीक सहित 12 आतंकी… बम बनाने का था जखीरा

राजस्थान में प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘Students’ Islamic Movement of India (SIMI)’ के 12 आतंकियों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई है। वहीं 1 को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। जयपुर की जिला अदालत ने मंगलवार (मार्च 30, 2021) को दोषियों को आतंकी करार दिया और आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई। दोषी करार दिए गए आतंकियों में ज्यादातर इंजीनियरिंग के छात्र थे।

ये आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन के लिए काम करते थे। 2014 में ATS (आतंक निरोधी दस्ता) और SOG (स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप) ने गिरफ्तार किया था। इनमें से 6 सीकर के, 3 जोधपुर के, एक-एक जयपुर और पाली के और एक बिहार के गया का है। वहीं जोधपुर के एक आरोपित को बरी कर दिया गया। ये मामला SIMI के स्लीपर सेल से जुड़ा हुआ है। ये राजस्थान में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए बम वगैरह बना रहे थे।

ATS के अनुसार, सिमी की स्लीपर सेल को एक्टिव करने के लिए जयपुर से गिरफ्तार हुए मारुफ के रिश्तेदार उमर ने इंटरनेट के जरिए संपर्क कर इन युवकों को संगठन से जोड़ा था। फिर इन्होंने आतंकी गतिविधियों में सक्रियता बढ़ा दी थी। इससे पहले कि ये किसी बड़ी साज़िश को अंजाम देते, सभी पकड़े गए। 7 साल तक कोर्ट में चले ट्रायल में अभियोजन पक्ष ने 178 गवाह और 506 डॉक्यूमेंट्री एविडेंस पेश किए।

फर्जी दस्तावेजों से सिम खरीदने, जिहाद के नाम पर फंड जुटाने, आतंकियों को शरण देने और बम विस्फोट के लिए रेकी करने जैसे आरोपों में कोर्ट ने इन्हें दोषी पाया। गोपालगढ़ में हुई पुलिस फायरिंग की एक घटना के कारण ये बौखलाए हुए थे। उनके पास से लैपटॉप, फोन, पेन ड्राइव, किताबें, दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान जब्त किए गए थे। मार्च 28, 2014 को इस मामले में FIR दर्ज की गई थी। ‘दैनिक भास्कर’ की खबर के अनुसार, 12 आतंकियों के डिटेल्स इस प्रकार हैं:

  • 1. मोहम्मद अम्मार यासर, पुत्र मोहम्मद फिरोज खान, उम्र 22 साल, निवासी काजी मोहल्ला शेरघाटी, गया (बिहार)
  • 2. मोहम्मद सज्जाद, पुत्र इकबाल चौहान (32), अन्जुम स्कूल के पास, मोहल्ला कुरैशीयान, सीकर – इसे वकार और आकिब ने अपने साथ जोड़ा था।
  • 3. मोहम्मद आकिब, पुत्र अशफाक भाटी (22), मोहल्ला जमीदारान वार्ड 13, सीकर – सिविल इंजीनियरिंग का छात्र था। पहले मारूफ, फिर वकार से जुड़ा। मुंबई में आतंकी ट्रेनिंग ली। मारूफ के साथ मिल कर सीकर के कई जगह की रेकी कर नक़्शे बनाए।
  • 4. मोहम्मद उमर, पुत्र डॉ. मोहम्मद इलियास (18), जमीदारान वार्ड 2, सीकर – कोटा में मेडिकल की तैयारी कर रहा था। मारूफ व बरकत इसके परिजन ही हैं।
  • 5. अब्दुल वाहिद गौरी, पुत्र मोहम्मद रफीक (26), मोहल्ला कुरैशियान, वार्ड 31, सीकर – तहसील में टाइपिस्ट था। नक़्शे इसी ने बनाए।
  • 6. मोहम्मद वकार, पुत्र अब्दुल सत्तार (22), मोहल्ला रोशनगंज, वार्ड 13, सीकर – सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में छोड़ आतंक का रास्ता चुना।
  • 7. अब्दुल माजिद उर्फ अद्दास, पुत्र असरार अहमद (21), मोहल्ला जमीदारान वार्ड 12, सीकर – 21 वर्ष की उम्र में स्लीपर सेल से जुड़ गया था।
  • 8. मोहम्मद मारुफ, पुत्र फारुक इंजीनियर, डी 105, संजय नगर, झोटवाड़ा, जयपुर
  • 9. वकार अजहर, पुत्र मोहम्मद तस्लीम रजा, 20 पुराना चूड़ीघरों का मोहल्ला, पाली
  • 10. बरकत अली, पुत्र लियाकत अली (28), मकान नं 8, हाजी स्ट्रीट, शान्तिप्रिय नगर, जोधपुर – कंस्ट्रक्शन का ठेकेदार था।
  • 11. मोहम्मद साकिब अंसारी, पुत्र मोहम्मद असलम (25), ए 45, बरकतुल्ला कॉलोनी, जोधपुर – कम्प्यूटर का जानकार था। फर्जी सिम व फोन का जुगाड़ किया। अभिजीत नाम की फर्जी पहचान से काम करता था।
  • 12. अशरफ अली खान, पुत्र साबिर अली (40), 653, लायकान मोहल्ला, जोधपुर – उसने अपने ठिकानों का इस्तेमाल आतंकी हरकतों के लिए किया।

वहीं मशरफ इकबाल पुत्र छोटू खां (32), नई सड़क, गुलजारपुरा, जोधपुर को कोर्ट ने बरी कर दिया। ये आतंकी गोधरा और भरतपुर में हुए दंगों का बदला लेना चाहते थे। दिल्ली में गिरफ्तार आतंकी मोहम्मद वकास ने पूछताछ में खुलासा किया था कि इंडियन मुजाहिदीन के तहसीन भटकल और यासीन भटकल ने जयपुर में कुछ लोगों को बम बनाने की ट्रेनिंग दी है, जिसके बाद जाँच शुरू की गई थी। 

इनके कब्जे से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री व बम बनाने के उपकरण जब्त किए गए थे। इन सभी के तार पाकिस्तान से जुड़े हुए थे। 6 अन्य नामजद भी हैं, जिनकी अब तक गिरफ़्तारी नहीं हो पाई है। ये राष्ट्रीय महत्व की इमारतों व शॉपिंग मॉल्स को निशाना बनाने वाले थे। इंजीनियरिंग छात्र होने के कारण उन्हें तकनीक की जानकारी थी। आरोपितों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ढाई महीने से नियमित सुनवाई हो रही थी।

तीन तलाक के खिलाफ आतिया साबरी की एक और बड़ी जीत: मिलेगा ₹13,44000 की एकमुश्त राशि, 21 हजार/महीने गुजारा भत्ता

तीन तलाक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़कर जीतने वाली आतिया साबरी ने एक और बड़ी जीत हासिल की है। दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर के मुताबिक, परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश नरेंद्र कुमार ने अतिया को प्रार्थना पत्र की तारीख से देय 13 लाख 44 हजार रुपए का एकमुश्त देय राशि गुजारा भत्ते के रूप में देने का आदेश दिया है।

इसके अलावा अदालत ने अतिया साबरी को 21 हजार रुपए महीना और दो बेटियों को सात-सात हजार रुपए गुजारा भत्ता देने के आदेश दिया है।

गौरतलब है कि हरिद्वार की लक्सर कोतवाली क्षेत्र के सुल्तानपुर निवासी अतिया को उसके पति ने वर्ष 2016 में तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया था। इसके खिलाफ आवाज उठाते हुए आतिया ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके बाद साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर दिया था।

आतिया की लंबी लड़ाई के बाद केंद्र सरकार ने तीन तलाक के खिलाफ कानून भी बनाया। तभी से अतिया अपनी दोनों बच्चियों के साथ पिता के पास सहारनपुर उत्तर प्रदेश रहती आ रही हैं। अतिया ने अपनी दो बच्चियों और अपने गुजारा भत्ता के लिए सहारनपुर के परिवार न्यायालय में एक केस दायर किया था।

बता दें कि आतिया की शादी में परिवार वालों ने कार, जेवर सहित 25 लाख रुपए खर्च किए थे। इसके बावजूद ससुराल वालों ने 20 लाख रुपए की माँग पूरी न होने पर अतिया को जहर देकर मारने की भी कोशिश की थी, लेकिन वह बचकर अपने मायके लौट आई थी।

गुजारा भत्ता मिलने के फैसले से अतिया के परिवार वालों बेहद खुश नजर आ रहे हैं। उन्होंने इसे सच की जीत बताया है।

पीएम मोदी के बधाई संदेश का इमरान ने दिया जवाब, कहा- शांति और स्थिरता के लिए जम्मू-कश्मीर समेत सभी मुद्दों का हल जरूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों पाकिस्तान के नेशनल डे (23 मार्च) पर इमरान खान को बधाई देते हुए पत्र भेजा था। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने पीएम मोदी को बधाई संदेश का जवाब दिया है। उन्‍होंने लिखा है, ”दक्षिण एशिया में स्‍थायी शांति और स्थिरता के लिए भारत-पाकिस्‍तान के बीच जम्मू और कश्मीर विवाद समेत सभी बकाया मुद्दों को हल करना जरूरी है।”

उन्होंने आगे लिखा है कि पाकिस्तान के लोग भारत समेत सभी पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण रिश्ता चाहते हैं। रचनात्मक बातचीत के लिए सकारात्मक माहौल का निर्माण जरूरी है। पाकिस्तानी मीडिया के हवाले से आई खबर के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान के बीच के रिश्तों में सुधार के जो संकेत मिले थे वो और पुख्ता हो गए हैं।

इमरान खान ने पीएम मोदी को लिखा पत्र (आज तक )

बता दें कि पिछले दिनों पीएम मोदी ने इमरान खान को पत्र लिख कर दोनों देशों के अच्छे संबंधों की कामना भी की थी। मोदी ने इमरान खान को लिखा, ”पाकिस्तान के राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर मैं पाकिस्तान की अवाम को अपनी शुभकामनाएँ देता हूँ। एक पड़ोसी देश के तौर पर भारत पाकिस्तान के लोगों के साथ सौहार्दपूर्ण रिश्ते की इच्छा रखता है। इसके लिए भरोसा और आतंकवाद एवं आक्रमकता से मुक्त माहौल बेहद जरूरी है।”

पीएम मोदी ने लिखा कि मान्यवर, मानवता के इस बेहद कठिन काल में मैं आपको और पाकिस्तान की जनता को कोविड-19 महामारी से निपटने की शुभेच्छा देना चाहूँगा।

गौरतलब है कि हाल ही में इमरान खान ने कहा था कि अगर भारत और इस्लामाबाद के बीच शांति स्थापित होती है तो इससे नई दिल्ली को संसाधन संपन्न मध्य एशिया तक पहुँचने में मदद मिलेगी। पाकिस्तान के पीएम ने दावा किया कि वर्ष 2018 में सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार ने भारत के साथ संबंधों को बेहतर करने के लिए काफी कदम उठाए, लेकिन दिल्ली से उन्हें कोई भी सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

मच्छिंद्रनाथ मंदिर में घुसकर 50-60 मुस्लिमों की भीड़ ने लगाए ‘अल्लाह-हू- अकबर’ के नारे, आरती की बाधित : वीडियो वायरल

लगभग 50 से 60 मुस्लिम कट्टरपंथियों ने मलंग गढ़ किले के ऊपर बने मच्छिंद्रनाथ के प्राचीन मंदिर में घुसकर हिंदू श्रद्धालुओं द्वारा की जा रही आरती को बाधित करने के लिए ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाए। शिवसेना के मुखपत्र सामना में प्रकाशित रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, 28 मार्च को, हिंदू भक्त पारंपरिक आरती कर रहे थे, तभी मुस्लिमों की भीड़ ने मच्छिंद्रनाथ मंदिर में प्रवेश किया और कार्यवाही को बाधित करने का प्रयास किया। आक्रोशित मुस्लिम भीड़ ने ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाए। इतना ही नहीं हिंदुओं को उनकी वार्षिक परंपरा को निभाने से रोकने के लिए वो उनके चारों तरफ घूम-घूम कर चिल्लाने लगे।

Source: YouTube

यह वीडियो अब इंटरनेट पर वायरल हो गया है। वीडियो में, मुसलमानों की भीड़ को ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाते हुए हिंदू भक्तों को उनके अनुष्ठान करने के खिलाफ धमकाते हुए देखा जा सकता है।

बता दें कि हर साल, मछिंद्रनाथ के भक्त मछिंद्रनाथ के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए मलंग गढ़ किले तक माघ पूर्णिमा श्रीमालंग यात्रा नामक एक धार्मिक यात्रा करते हैं। हालाँकि, कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण, इस वर्ष की यात्रा रद्द कर दी गई थी। लेकिन शिवसेना के आग्रह पर, हिंदू परंपराओं के अनुसार, हिंदुओं को मछिंद्रनाथ के मंदिर में सभी धार्मिक अनुष्ठान करने की अनुमति दी गई। सरकारी नियमों के अनुसार- वार्षिक स्नान, पालकी, गण्डमाला, नैवेद्य, महा आरती- को सरकारी अधिकारियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों सहित 50 भक्तों की उपस्थिति की अनुमति दी गई।

हालाँकि, कट्टरपंथियों को यह रास नहीं आया और उन्होंने आरती को बाधित करने की योजना बनाई। जैसे ही हिंदू संगठनों को इस बारे में पता चला, उन्होंने पुलिस को इसके बारे में सूचित किया। पुलिस ने कोरोना वायरस प्रतिबंधों का हवाला देते हुए केवल सात हिंदू भक्तों को आरती के लिए मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति दी। आरती शुरू होने के पाँच मिनट बाद, 50-60 मुस्लिम कट्टरपंथियों की एक हिंसक भीड़ ने मंदिर में प्रवेश किया और ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाए, उन्होंने हिंदुओं से अपने धार्मिक अनुष्ठान को रोकने के लिए कहा।

हिंदू संगठनों ने मंदिर में तोड़-फोड़ करने वाले मुस्लिमों के खिलाफ हिल रोड पुलिस स्टेशन में शिकायत की। हालाँकि, पुलिस ने आश्वासन दिया कि वे मामला दर्ज किए बिना ही जाँच करेंगे। हिंदू समूहों ने पुलिस को घटना की जाँच करने और अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए 4 दिनों का अल्टीमेटम दिया, इसमें विफल रहने पर उन्होंने व्यापक आंदोलन शुरू करने की बात कही।

यह घटना 28 मार्च को रात 8 बजे हुई। बताया जा रहा है कि जब पुलिस ने हस्तक्षेप करने की कोशिश की, तो मुस्लिम भीड़ ने पुलिसकर्मियों के कॉलर पकड़ लिए और उन्हें धक्का दे दिया। मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

जगह के स्वामित्व को लेकर हिंदू और मुसलमानों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है

हिंदू भक्तों का मानना है कि यह स्थान नाथ संप्रदाय के बाबा मछिंद्रनाथ का विश्राम स्थल है और पेशवाओं ने पूजा करने के लिए केतकर नामक एक ब्राह्मण परिवार को सौंपा था। हर साल हिंदू रीति-रिवाजों से यहाँ पूजा की जाती है, खासकर माघ पूर्णिमा पर भव्य आरती का आयोजन किया जाता है। हालाँकि, मुसलमानों का दावा है कि यह सूफी फकीर हाजी अब्दुल रहमान शाह मलंग उर्फ मलंग बाबा का पवित्र स्थान है। उनका दावा है कि वह 13वीं शताब्दी में यमन से आए थे।

पुडुचेरी में कॉन्ग्रेस एक आपदा थी, चप्पलें उठाना, अपने नेता के लिए गलत अनुवाद काम नहीं आया: PM मोदी का नारायणसामी पर तंज

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता वी नारायणसामी पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (मार्च 30, 2021) को कहा कि उनके नेतृत्व वाली पार्टी की पिछली सरकार एक ‘आपदा’ थी और यह सरकार सभी मोर्चों पर नाकाम थी। मोदी ने साथ ही राज्य में विकास सुनिश्चित करने के लिए राजग की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

एआईएनआरसी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री एन रंगासामी, अन्नाद्रमुक और भाजपा नेताओं की मौजूदगी में राजग की एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि उन्हें चुनावी राज्यों असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और इस केंद्र शासित प्रदेश में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के समर्थन में ‘बड़ी लहर’ देखी है। यहाँ 6 अप्रैल को एक चरण में मतदान होना है।

एक के बाद एक इस्तीफों के चलते अपनी सरकार के अल्पमत में आने से पिछले महीने मुख्यमंत्री के पद से त्यागपत्र देने वाले नारायणसामी पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, “सालों तक काम न करने वाली कॉन्ग्रेस सरकारों की लंबी सूची में पुडुचेरी की पिछली सरकार का विशेष स्थान है। आला कमान की सरकार, पुडुचेरी की दिल्ली के आलाकमान की सरकार सभी मोर्चों पर नाकाम थी।”

पीएम मोदी ने पुडुचेरी में कहा की दिल्ली हाई कमान की सरकार सभी मोर्चों पर विफल रही, चाहे कोई सा भी क्षेत्र ले लों शिक्षा, मेडिकल, एससी-एसटी का कल्याण। पीएम मोदी ने आगे कहा कि यहाँ हमारी सरकार बनने पर एनडीए बेस्ट पुडुचेरी (BEST Puducherry) बनाने के लिए काम करेगा। BEST का मतलब बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि B से बिजनेस हब, E से एजूकेशन हब, S से आध्यात्मिक हब और T का मतलब पर्यटन हब है। वहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने पुडुचेरी में कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़े विधायक के भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया।

मोदी ने आरोप लगाया कि नारायणसामी के नेतृत्व वाली सरकार शिक्षा, चिकित्सा सीटों को भरने, अनुसूचित जाति/जनजाति समुदाय के कल्याण जैसे सभी क्षेत्रों में नाकाम रही और यहाँ सिर्फ लूट ही लूट थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस विधायक पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार से सीधे संबंधित भ्रष्टाचार के बारे में खुले तौर पर बात कर रहे हैं।

मोदी ने कहा कि उनका “राजनीति में काफी लंबा अनुभव है” और उन्होंने कई चुनाव देखे हैं लेकिन इस साल यहाँ हो रहे चुनाव ‘खास’ हैं। मोदी ने नारायणसामी के बारे में कहा, “क्योंकि निवर्तमान मुख्यमंत्री को टिकट नहीं दिया गया। कई सालों की वफादारी, नेताओं की चप्पलें उठाना, अपने नेता (राहुल गाँधी) को खुश करने के लिये गलत अनुवाद करना- इसके बावजूद टिकट नहीं- यह दिखाता है कि उनकी सरकार कितनी बड़ी आपदा थी।”

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनिल देशमुख के खिलाफ जाँच की अनुरोध वाली याचिका पर लगाई फटकार, कहा- सस्ती प्रसिद्धि पाने का तरीका

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख और पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के खिलाफ सीबीआई जाँच का अनुरोध करने वाली याचिका को लेकर एक वकील को फटकार लगाई। जस्टिस एस एस शिंदे और जस्टिस मनीष पिताले की पीठ ने कहा कि इस प्रकार की याचिकाएँ अक्सर सस्ती प्रसिद्धि के लिए दायर की जाती हैं।

यह याचिका एक सप्ताह पहले डॉक्टर जयश्री लक्ष्मणराव पाटिल द्वारा दायर की गई थी। पाटिल को फटकार लगाते हुए न्यायमूर्ति शिंदे ने कहा, “आप कहते हैं कि आप कानून में डॉक्टरेट हैं, कृपा करके आप हमें आपके द्वारा लिखा एक भी पैराग्राफ दिखाएँ। आपकी पूरी याचिका पैराग्राफ निकालने पर आधारित है। याचिका में केवल राज्य के गृह मंत्री एवं सिंह के बीच हुई बातचीत को ही पेश किया गया है। आप अपनी याचिका में कोई मौलिक अनुरोध कीजिए। आपका क्या योगदान है? इससे आपका क्या लेना-देना है? आपने किस कारण याचिका दायर की है।”

वहीं याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया उन्होंने इस पूरे मामले में मालाबार हिल पुलिस स्टेशन में भी शिकायत दर्ज कराई है। दरअसल, पाटिल ने याचिका में अदालत से अनुरोध किया है कि वह गृह मंत्री देशमुख पर लगे आरोपों की जाँच सीबीआई से करवाने का निर्देश दें। पाटिल का कहना है कि देशमुख और परमबीर सिंह ने मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित आवास के बाहर मिली विस्फोटक सामग्री युक्त SUV, मनसुख हिरेन की हत्या, सचिन वाजे की गिरफ्तारी और संबंधित घटनाक्रमों के दौरान अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया।

हाईकोर्ट ने इसके बाद आशुतोष कुंभकोणी से इस मामले से संबंधित सभी यचिकाओं को एक साथ जोड़ने को कहा, ताकि कोई अनुचित आदेश पारित न हो सके। अदालत पाटिल की याचिका और अन्य संबंधित याचिकाओं पर एक अप्रैल को सुनवाई करेगी।

महबूबा मुफ्ती को श्रीनगर HC से भी झटका, पासपोर्ट जारी करने का निर्देश देने की अर्जी कोर्ट ने की खारिज

जम्मू और कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के पासपोर्ट मामले में नया मोड़ आ गया है। महबूबा मुफ्ती पासपोर्ट का रिन्यूअल खारिज करने के खिलाफ श्रीनगर हाई कोर्ट पहुँच गई और उन्होंने कोर्ट से निर्देश देने की माँग की। हालाँकि, उन्हें इसका कोई फायदा नहीं मिला, क्योंकि हाई कोर्ट ने महबूबा मुफ्ती की अपील को खारिज कर दिया और कहा कि ये मामला उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर का है। 

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

महबूबा मुफ्ती के मामले की सुनवाई करते हुए श्रीनगर हाई कोर्ट के जस्टिस अली मोहम्मद माग्रे ने कहा कि पासपोर्ट ऑफिसर ने पुलिस वेरीफिकेशन की रिपोर्ट के आधार पर पासपोर्ट का रिन्यूअल रद्द किया है। ऐसे मामले में मैं कोई निर्देश नहीं दे सकता। उन्होंने कहा कि पासपोर्ट जैसे मामलों में कोर्ट के पास सीमित अधिकार क्षेत्र ही बनता है। उन्होंने कहा कि ये पूरी तरह से प्रशासनिक मामला है। कोर्ट ने भी कहा कि वो इस मामले में हस्तक्षेप के लिए कोई वजह नहीं जान पाए हैं।

पासपोर्ट ऑफिस ने भेजा था रिन्यूवल के रिजेक्शन का पत्र

बता दें कि 27 मार्च को श्रीनगर स्थित पासपोर्ट ऑफिस ने पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को पत्र के माध्यम से ये जानकारी दी थी कि आपका पासपोर्ट रिन्यू नहीं हो सकता। क्योंकि पुलिस रिपोर्ट आपके अनुकूल नहीं है। इसके बाद महबूबा मुफ्ती भड़क गई थी। 

बौखलाई महबूबा मुफ्ती

विदेश मंत्रालय का पत्र मिलने के बाद महबूबा मुफ्ती ने सरकार पर जोरदार हमला बोला था। उन्होंने लिखा, “पासपोर्ट ऑफिस ने मुझे पासपोर्ट इश्यू करने से मना कर दिया, क्योंकि सीआईडी की रिपोर्ट में मुझे हिंदुस्तान की सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया। ये है कश्मीर में सामान्य हालात की असलियत।” उन्होंने कहा कि कश्मीर में अगस्त 2019 के बाद से सब कुछ सामान्य बताया जा रहा है, जिसमें अब एक पूर्व मुख्यमंत्री का पासपोर्ट रखना इतने ताकतवर देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन गया है।

महबूबा मुफ्ती ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर उस पत्र को भी पोस्ट किया। ये पत्र श्रीनगर स्थित विदेश मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय से भेजा गया है। जिसमें महबूबा मुफ्ती के पासपोर्ट को रिन्यू न करने की वजह बताई गई है। हालाँकि पत्र में ये भी लिखा गया है कि अगर आप इसके विरोध में अपील करना चाहती हैं, तो आप कर सकती हैं। बता दें कि अगर किसी को पासपोर्ट रिन्यू कराना होता है, तो स्थानीय पुलिस की एलआईयू की रिपोर्ट लगती है। जम्मू और कश्मीर में ये काम स्थानीय सीआईडी करती है।

गौरतलब है कि महबूबा मुफ्ती पर मनी लाँन्ड्रिंग का केस चल रहा है। इसी केस में बीते गुरुवार को ईडी की टीम ने उनसे 5 घंटे तक पूछताछ भी की थी। प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने मुफ्ती के श्रीनगर स्थित घर से 23 दिसंबर 2020 को एक डायरी बरामद की थी, जिसमें कई प्रकार के वित्तीय लेनदेन का जिक्र था। जाँच एजेंसी इसी की पड़ताल में लगी हुई है।

‘जो करना है करो’: ममता ने लोगों को ‘मॉब जस्टिस’ के लिए उकसाया, कहा- देखना चाहती हूँ कि कौन हारता और कौन जीतता है

पश्चिम बंगाल राज्य विधान सभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मंगलवार (मार्च 30, 2021) को ‘मॉब जस्टिस’ की वकालत करती हुई नजर आईं और नंदीग्राम के लोगों को अपनी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भाजपा के खिलाफ हिंसा भड़काने के लिए उकसाया।

नंदीग्राम में एक बड़ी सभा को संबोधित करते हुए, ममता बनर्जी ने चुनाव के दौरान सामाजिक अशांति पैदा करने के लिए उकसाया। यह मानते हुए कि उनकी प्रतिद्वंद्वी पार्टी असामाजिक गतिविधियों में लिप्त होगी, पश्चिम बंगाल के सीएम ने लोगों को कानून व्यवस्था को दरकिनार करने और मामले को अपने हाथों में लेने के लिए उकसाया।

(Video Courtesy: Youtube/News18 Bangla)

अपने भाषण में लगभग 6 मिनट में, उन्होंने कहा, “आज से, गुंडों (भाजपा का जिक्र करते हुए) को (अपने इलाके में) प्रवेश करने की अनुमति नहीं दें। घड़ी में शाम के 6 बजे के बाद, सभी बाहरी लोगों को अलविदा बोल दें। 6 बजे के बाद केवल इनसाइडर रहेंगे।” उन्होंने डर को व्याप्त करने और ‘मॉब जस्टिस’ को बढ़ावा देने के लिए भाजपा को ‘बाहरी लोगों’ और ‘गुंडों’ के रूप में संदर्भित किया।

पश्चिम बंगाल के सीएम ने लोगों को कानून अपने हाथ में लेने के लिए उकसाया

ममता बनर्जी ने इसके बाद 2007 में नंदीग्राम में पुलिस की बर्बरता के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों का हवाला देते हुए लोगों के मन में बीजेपी के प्रति डर बैठाने की कोशिश की। उन्होंने जोर देकर कहा, “अपने घरों से समूहों में निकलें। यदि वे किसी को भी छूते हैं, विशेष रूप से महिला को, तो लाखों माताएँ हाथ में रसोई के बर्तन के साथ बाहर आ जाएँ।”

उन्होंने आगे कहा, “अगर वे किसी भी आदमी पर हमला करते हैं, तो सभी बुजुर्गों को समूहों में एकजुट होना चाहिए।” पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने हिंसा के विचार पर कटाक्ष करते हुए कहा, ”मैं देखना चाहती हूँ कि कौन इस खेल को हारता है और कौन जीतता है।” ममता बनर्जी यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने सुझाव दिया कि लोग ‘बाहरी लोगों’, सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं।

ममता बनर्जी ने बताया कि सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ क्या करना चाहिए

ममता बनर्जी ने सिफारिश की, “वे आपको अधिकतम 2 दिनों के लिए डरा सकते हैं। केवल दो दिन बचे हैं (मतदान के लिए)। सुरक्षाकर्मियों की बात सुनो, जो बाहर से आए हैं, सिर्फ इन 2 दिनों के लिए … मैं उनसे निष्पक्ष रूप से काम करने का अनुरोध करूँगी।” इसके तुरंत बाद, पश्चिम बंगाल के सीएम के स्वर में बदलाव आया। 9:42 मिनट में उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में भाषण देते हुए कहा, “यदि वे पालन नहीं करते हैं, तो, सभी माँ और बेटियाँ एक साथ में आएँ और जो करना है, करें।”

इसके बाद ममता बनर्जी ने भाजपा का डर और उन पर गुंडागर्दी का सहारा लेने का आरोप लगाते हुए पूछा, “क्या तुमने पहले ही गेम / मैच गँवा दिया है? क्या इसीलिए तुम गुंडागर्दी का सहारा ले रहे हो और लोगों में डर पैदा कर रहे हो?” इसके बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने भाजपा को उनके कथित ‘गुंडागर्दी’ पर सबक सिखाने की धमकी दी।