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थूक लगा कर तंदूरी रोटी सेंकने वाला नौशाद उर्फ सोहैल गिरफ्तार, शादी में कई लोगों ने खाया था खाना

मेरठ में एक शादी समारोह में थूक लगा कर रोटी बनाने वाले एक शख्स को गिरफ्तार किया गया है। आरोपित का नाम नौशाद उर्फ़ सुहैल है, जिसका वीडियो वायरल होने के बाद उसे मेरठ पुलिस ने दबोचा। इस मामले में ‘हिन्दू जागरण मंच’ के सचिन सिरोही ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। उक्त वीडियो अरोमा गार्डन गढ़ रोड का है, जिसके बारे में हाजा थाने में मामला दर्ज कराया गया था।

उन्होंने अपनी लिखित तहरीर में बताया था कि नौशाद उर्फ़ सोहैल शादी समारोह में तंदूर की रोटियाँ बनाते समय थूक कर तंदूर में सेंक रहा था। उन्होंने अपनी शिकायत में कोरोना वायरस संक्रमण महामारी का भी जिक्र किया था। ऐसे कृत्यों को महामारी एक्ट के तहत जानबूझ कर संक्रमण फैलाने के प्रयास में गिना जा सकता है। साथ ही उन्होंने इसे समाज के विरुद्ध भी करार दिया था। पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर कार्रवाई की।

महामारी अधिनियम के तहत इस मामले को पंजीकृत कर पुलिस ने विवेचना की। कई हिन्दू संगठनों और कार्यकर्ताओं ने इस मामले में रोष जताया। पुलिस ने बताया है कि कानून-व्यवस्था को बनाने रखने के लिए कार्रवाई की गई और इस दौरान ये तथ्य सामने आया कि ये वीडियो मंगलवार (फरवरी 16, 2021) का है। आरोपित लिसाड़ी गेट मेरठ थाना क्षेत्र स्थित डहर स्मार गार्डन मोहल्ला का निवासी है।

मेरठ में थूक लगा कर रोटी बनाने के मामले में गिरफ्तार नौशाद के पिता का नाम अख्तर है। हिरासत में लेकर जब पुलिस ने उससे पूछताछ की तो उसने कबूल किया कि इस वीडियो में दिख रहा शख्स वही है और उसने ही इस तरह की हरकत की है। पुलिस ने बताया कि उसकी गिरफ़्तारी के बाद आगे की कार्रवाई की जा रही है। ये वीडियो मेडिकल क्षेत्र स्थित एक मैरिज हॉल का है। फ़िलहाल नौशाद उर्फ़ सुहैल को जेल भेज दिया गया है और उससे कड़ी पूछताछ की गई है।

निकाह के लिए मना करने पर 17 साल की लड़की का मर्डर, हथौड़े से मारने वाला लईक खान फरार: दिल्ली में ‘लव जिहाद’

दिल्ली के बेगमपुर इलाके में शुक्रवार (फरवरी 19, 2021) को ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया। 17 वर्ष की नाबालिग लड़की की उसके घर में ही हथौड़े से वार कर के हत्या कर दी गई। वारदात के बाद आरोपित घर में ताला लगा कर फरार हो गया। लड़की का परिवार छोटा-मोटा काम कर के पेट पालता था, जबकि आरोपित लईक खान एक फैक्ट्री में कार्यरत है। दोनों के परिवार एक-दूसरे को जानते हैं।

आरोपित युवक ने लड़की के सामने शादी का प्रस्ताव रखा था, जिसे लड़की ने ठुकरा दिया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर के उसकी तलाश शुरू कर दी है। पुलिस ने कहा है कि लईक खान ने हथौड़े से मृतका के सर पर वार किया था, जिससे उसकी जान चली गई। जब ये वारदात हुई, तब मृतका के परिजन सामान लेने बाजार गए हुए थे। माता-पिता जब वापस आए तो लड़की को जल्दी-जल्दी में अस्पताल लेकर गए, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

रोहिणी के डीसीपी पीके मिश्रा ने बताया कि बवाना में आरोपित और लड़की के परिवार पड़ोसी थे। एक वर्ष पूर्व से लड़की का परिवार बेगमपुर में रहने लगा था। उन्होंने जानकारी दी कि लईक खान को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की कई टीमों का गठन किया गया है। हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है। कहा जा रहा है कि शादी का प्रस्ताव ठुकराने के कारण गुस्से में आकर लईक खान ने इस वारदात को अंजाम दिया।

दिल्ली के पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दिल्ली में हुआ ये भयानक हत्याकांड दर्दनाक भी है और सबक भी। उन्होंने कहा कि ये एक ऐसा कड़वा सच है, जिसके बारे में बात करना भी गुनाह है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में अब तक यौन शोषण की कोई बात सामने नहीं आई है। पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को शव सौंप दिया गया। लड़की का अंतिम संस्कार भी हो चुका है।

कासगंज में सिपाही का हत्यारा UP पुलिस एनकाउंटर में ढेर: पुलिसकर्मियों को नंगा कर की थी पिटाई, ₹1 लाख का था इनाम

कासगंज कांड के मुख्य आरोपित मोती सिंह यूपी पुलिस के साथ हुए एनकाउंटर में ढेर हो गया। दरोगा की गायब पिस्टल भी उसके पास से बरामद की गई है। मोती सिंह सिढ़पुरा थाने के सिपाही की हत्या और दरोगा को गंभीर रूप से जख्मी करने के मामले में फरार चल रहा था। इस मामले में वो मुख्य आरोपित था और पिछले कई दिनों से पुलिस को उसकी तलाश थी। पुलिस की कई टीमें आस-पास के जिलों में दबिश दे रही थी।

मोती सिंह 1 लाख रुपए का इनामी बदमाश था। शनिवार (फरवरी 20, 2021) को हुई मुठभेड़ के बाद पुलिस उसे लेकर अस्पताल गई, जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया। कासगंज मामले का एक अन्य आरोपित भी एनकाउंटर में मारा जा चुका है। मोती के भाई एलकार को पुलिस ने कावी नदी के किनारे घेरा था, जहाँ उसने गोलीबारी शुरू कर दी तो पुलिस को भी जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। एलकार भी मारा गया था।

इस मामले मे अन्य अपराधियों कि गिरफ़्तारी भी हुई है। मामला तब का है, जब सिढ़पुरा के धीमर में अवैध शराब बनाने की खबर सुन कर पुलिस छापेमारी के लिए पहुँची थी। वहाँ सिपाही देवेन्द्र सिंह की हत्या कर दी गई थी। मुख्य आरोपित की माँ रूपमती को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। ओ सरावल के पास से जिला छोड़ कर भागने की फिराक में थी, लेकिन पुलिस ने उसे धर-दबोचा। उसके पास से वो भाला भी बरामद हुआ, जिससे सिपाही की हत्या की गई थी।

खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले को संज्ञान में लिया था और आरोपितों के खिलाफ NSA लगाने का निर्देश दिया था। दरोगा अशोक पाल शराब माफिया के खिलाफ छापेमारी का नेतृत्व कर रहे थे। आरोपितों ने लाठी और भाले से पुलिसकर्मियों को लहूलुहान कर दिया था। मोती और उसके साथियों ने छापेमारी करने आए पुलिसकर्मियों को बंधक बना कर नंगा किया, फिर उनकी पिटाई की थी।

जहाँ इस मामले में सिपाही देवेन्द्र सिंह ने अस्पताल में उपचार के दौरान ही दम तोड़ दिया था, दरोगा अशोक पाल को स्थिति गंभीर होने के कारण अलीगढ़ रेफ़र कर दिया गया था। अभी भी उनका इलाज वहीं चल रहा है। घटना के बाद STF की पांच टीमों समेत पुलिस और SOG की कुल 12 टीमें गठित की गई थीं और DGP एचसी अवस्थी मामले की निगरानी कर रहे थे। घटना के 12 दिन बाद पुलिस को ये सफलता मिली।

इससे पहले उत्तर प्रदेश के कासगंज में शराब माफिया को पकड़ने गई पुलिस पर बेरहमी से हुए हमले और हत्याकांड के मामले में पुलिस ने नवाब नाम के एक आरोपित को गिरफ्तार किया था। वो भी कांस्टेबल देवेंद्र सिंह की हत्या में शामिल था। नवाब इस खौफनाक कांड के मुख्य आरोपित मोती सिंह का दाहिना हाथ था। नवाब ने अपने आका के कहने पर ही पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला किया था।

इंडिया टुडे ने PFI के ‘हेट परेड’ को दी क्लीन चिट, RSS की वर्दी में जंजीरों में जकड़े होने को बताया ‘सामान्य’

कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने केरल के मलप्पुरम में एक हेट परेड का आयोजन किया। जिसमें कुछ लोगों को आरएसएस के यूनिफॉर्म में जंजीर से जकड़ कर परेड करते हुए दिखाया गया। यह परेड मोपला नरसंहार के ‘शताब्दी समारोह’ को मनाने के लिए प्रदर्शन किया गया था। अब, इंडिया टुडे ने उन्हें अपराधमुक्त करने के लिए उसके बचाव में सामने आया है।

इंडिया टुडे ने सभी को यह बताने के लिए एक ’फैक्ट चेक’ प्रकाशित किया है कि आरएसएस की वर्दी में सड़कों पर परेड करने वाले लोग वास्तव में आरएसएस के सदस्य नहीं थे और पीएफआई ने अपने इवेंट के लिए संगठन के सदस्यों को आरएसएस की वर्दी में तैयार किया। हैरानी की बात यह है कि किसी भी शख्स ने यह दावा नहीं किया कि आरएसएस की वर्दी वाले लोग वास्तव में आरएसएस के सदस्य थे। ऐसा लगता है कि इंडिया टुडे का ‘एंटी फेक न्यूज वॉर रूम’ (AWRA) को पीएफआई द्वारा हेट परेड को व्हाइटवॉश करने के लिए उपयुक्त पोस्टों का उपयोग करने के लिए इंटरनेट की गहराइयों को खँगालना होगा।

The India Today ‘fact check’

चौंकाने वाली बात यह है कि इंडिया टुडे को इसमें कुछ भी गलत नहीं लगा। ऐसा लगता है कि यह उनके लिए पूरी तरह स्वीकार्य है कि मुस्लिम पुरुष आरएसएस की वर्दी पहने लोगों को जंजीरों में जकड़ के ले जा रहे हैं। ‘फैक्ट चेक’ यह बताता है कि पीएफआई के कार्यों में कुछ भी गलत नहीं है क्योंकि इसमें आरएसएस का कोई भी सदस्य शामिल नहीं था।

फैक्ट चेक में कहा गया है, “दो पुरुषों ने औपनिवेशिक युग की ब्रिटिश वर्दी पहन रखी है और पारंपरिक मालाबार मुस्लिम पोशाक पहने और पीएफआई झंडे ले जाने वाले समूह द्वारा परेड की जा रही है।” यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि इंडिया टुडे ने सोशल मीडिया अकाउंट्स के सबसे अस्पष्ट ‘फैक्ट चेक’ जाँचने में कामयाबी हासिल की है।

यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि इंडिया टुडे ने इस घटना पर कोई अन्य रिपोर्ट नहीं की है। इस प्रकार, संपादकों ने अपने ‘धर्मनिरपेक्ष’ एजेंडे से समझौता किए बिना कहानी को कैसे कवरअप किया जाए, इस पर गहन विचार किया जा सकता है।

निष्कर्ष के रूप में रिपोर्ट में कहा गया, “17 फरवरी को, पीएफआई ने उनकी सालगिरह के रूप में मार्च आयोजित किया था। मार्च शांतिपूर्ण था और हिंसा की कोई घटना नहीं हुई। जो वीडियो वायरल हुआ है वह मार्च के हिस्से के रूप में आयोजित एक प्रदर्शन था। हमें पीएफआई कार्यकर्ताओं द्वारा आरएसएस कार्यकर्ताओं पर हमला करने की किसी भी घटना के बारे में नहीं पता चला है।”

यहाँ तक ​​कि इंडिया टुडे ने संघ की केरल इकाई से भी संपर्क किया। उनके वरिष्ठ अधिकारियों में से एक ने रिपोर्टर को बताया, “सोशल मीडिया पोस्ट में इस तरह की कोई घटना हमारे संज्ञान में नहीं आई है। अगर पीएफआई ने वायरल वीडियो में हमारे सदस्यों को जबरन मार्च कराने की कोशिश की होती, तो हम निश्चित रूप से प्रतिक्रिया देते। वीडियो में दिख रहे पुरुष आरएसएस के सदस्य नहीं हैं। यह PFI का कुछ प्रदर्शन रहा होगा।” पूरा ‘फैक्ट चेक’ निश्चित रूप से पीएफआई के हेट परेड को व्हाइटवॉश करने की एक कोशिश है।

गौरतलब है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने केरल में एक रैली निकाली थी। इस रैली में कुछ लोगों ने RSS की यूनिफॉर्म पहनी थी। परेड में आरएसएस की यूनिफार्म में शामिल लोगों को जंजीर से भी बाँधा गया था। इस रैली के कई वीडियो और फोटो सामने आए हैं, जिसमें देखा जा सकता है कि इस दौरान अल्लाह-हू-अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर रसूलुल्लाह जैसे कई अन्य इस्लामी नारे लगाए गए।

बक्कल उतारने की धमकी देने वाले राकेश टिकैत डरे एक फर्जी कॉल से, यवतमाल का ‘किसान रैली’ किया रद्द

दिल्ली की सीमाओं पर ‘किसान विरोध प्रदर्शन’ का नेतृत्व कर रहे भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत को महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में एक मेगा रैली करनी थी। हालाँकि, एक अज्ञात फर्जी कॉल की वजह से बक्कल उतारने की धमकी देने वाले को अपनी यात्रा को मजबूरन रद्द करना पड़ा। दरअसल, फर्जी कॉल करने वाले ने खुद को SP बताया और यहाँ आने पर उन्हें 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन में रखने की चेतावनी दी। जिसके बाद राकेश टिकैत को अपना फैसला बदलना पड़ा।

कार्यक्रम के आयोजकों के अनुसार, बीकेयू नेता राकेश टिकैत द्वारा संबोधित एक रैली में भाग लेने के लिए शनिवार (फरवरी 20, 2021) को राज्य भर से 1 लाख से अधिक किसान यवतमाल पहुँचने वाले थे। चूँकि, महाराष्ट्र में फिर से कोरोना का प्रकोप बढ़ रहा है तो इसे देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने रैली के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया। 

इसके बाद किसान मोर्चा ने नया आवेदन देते हुए कहा कि रैली में 50 से अधिक लोग शामिल नहीं होंगे। हालाँकि, दूसरे आवेदन को भी महाराष्ट्र सरकार ने खारिज कर दिया। हालाँकि, आयोजन के आयोजकों ने एसपी के नाम पर एक फर्जी कॉल को कार्यक्रम को रद्द करने के लिए जिम्मेदार ठहराया, जिन्होंने टिकैत को राज्य में आने पर 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन में भेजने की चेतावनी दी थी। 

किसान मोर्चा के महाराष्ट्र विंग से संदीप गिद्दी पाटिल के अनुसार, टिकैत को एक कॉल आई थी, जिसने खुद को यवतमाल का एसपी बताया था। उन्होंने टिकैत को जिले का दौरा करने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि अगर बीकेयू नेता यवतमाल का दौरा करते हैं, तो उन्हें दो सप्ताह के लिए क्वारंटाइन में रखा जाएगा। जिसके बाद राकेश टिकैत ने डर से यहीं रखने का फैसला किया कि क्वारंटाइन में रहने पर गाजीपुर साइट पर विरोध प्रदर्शन बाधित हो जाएगा।

पाटिल ने आगे कहा कि जब यह पुष्टि की गई कि यवतमाल एसपी दिलीप भुजबल द्वारा कॉल नहीं किया गया था, तो यह स्पष्ट हो गया कि टिकैत को महाराष्ट्र में एक रैली को संबोधित करने से रोकने के लिए एक फर्जी कॉल किया गया था। हालाँकि, पाटिल ने कहा कि टिकैत अब एक ऑनलाइन संबोधन करेंगे और बाकी के कार्यकर्ता यवतमाल में बैठक में भाग लेंगे।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए, यवतमाल एसपी ने कहा कि उन्होंने केवल आयोजकों को कॉल कर उनसे कड़ा रुख अपनाने को कहा था। भुजबल ने कहा कि उन्होंने आयोजकों से कहा था कि अगर वे अपनी बैठक को आगे बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, तो पुलिस इस स्थिति से निपट लेगी। लेकिन, भुजबल ने यह भी कहा कि उन्होंने नेताओं को एक जिम्मेदार फैसला लेने और टिकैत को यवतमाल न आने के लिए मनाने की सलाह दी थी। भुजबल ने स्वीकार किया कि राकेश टिकैत को ढोंगी ने जिले का दौरा करने से मना कर दिया।

TIME ने की भाजपा समर्थक महिलाओं को #डी कहने वाले चंद्रशेखर की तारीफ़, 100 प्रभावशाली लीडर में किया शामिल

TIME पत्रिका ने बुधवार (17 फरवरी 2021) को 2021 TIME-100 Next जारी की, TIME फ्रैंचाइज़ी का मुख्य संस्करण जिसमें 100 प्रभावशाली लोगों की सूची मौजूद है। 100 ऐसे लोग जो TIME के मुताबिक़ आने वाले कल की रूपरेखा तय करने में अहम भूमिका निभाएँगे। मज़े की बात है कि सूची में भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ का नाम भी मौजूद है।

सूची में यूके के वित्त मंत्री ऋषि सुनक (Rishi Sunak), ट्विटर के मुख्य अधिवक्ता विजया गड्डे, इन्स्टाकार्ट (instacart) के संस्थापक और सीईओ अपूर्व मेहता, डॉक्टर और नॉन प्रॉफिट GET US PPE की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर शिखा गुप्ता और नॉन प्रॉफिट अपसॉल्व (Upsolve) के संस्थापक रोहन पवुलूरी का नाम भी मौजूद है। सूची के बारे में बात करते हुए TIME-100 के एडिटोरियल डायरेक्टर डैन मैक्सी ने कहा, “सूची में शामिल हर नाम इतिहास बनाने के लिए तैयार है, बल्कि कुछ ने बना भी दिया है।” 

TIME के अनुसार हाथरस मामले में चंद्रशेखर ने चलाया था अभियान

TIME के भीतर चंद्रशेखर के लिए कहा गया है कि वो भीम आर्मी का नेता है और दलितों के लिए स्कूल चलाता है, जिससे वह अत्याचार के विरुद्ध मुखर हो सकें। इसके अलावा वह गाँवों में जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव से पीड़ित लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाता है। 

इसके बाद चंद्रशेखर के बारे में कहा गया है कि उसने उत्तर प्रदेश के हाथरस में 19 वर्षीय युवती के साथ हुए रेप के मामले में न्याय दिलाने के लिए अभियान चलाया था क्योंकि पुलिस इस मामले की जाँच में देरी कर रही थी। TIME के मुताबिक़ चंद्रशेखर ने तमाम कथित देशहित के आंदोलनों का समर्थन भी किया था, इसमें हालिया किसान आंदोलन भी शामिल है। चंद्रशेखर के ‘औरा’ का वर्णन करते हुए TIME में कहा गया है, “आज़ाद की शानदार मूछें, प्रतिरोध का प्रतीक हैं।”      

कैसे चंद्रशेखर ने किया हाथरस मामले में दखल 

चंद्रशेखर की भीम आर्मी ने हाथरस मामले की जाँच को प्रभावित करने का पूरा प्रयास किया था। यह तब पता चला जब ये बात सामने आई कि भीम आर्मी के 3 लोग पीड़िता के परिवार वालों के साथ रह रहे थे और सच्चाई सामने आने पर कहने लगे कि वह पीड़िता के रिश्तेदार हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इन तीन लोगों में एक महिला भी शामिल थी जो मूल रूप से मध्य प्रदेश की रहने वाली थी। पीड़िता की मृत्यु के 2 दिन पहले (27 सितंबर 2020) चंद्रशेखर ने उससे मुलाक़ात की थी और मामले का राजनीतिकरण करने का प्रयास किया था। 

पीड़िता के परिवार के साथ रह रहे तीन लोग लगातार मीडिया को बयान दे रहे थे और प्रदेश सरकार, प्रशासन को निशाना बना रहे थे। जैसे ही पीड़िता के परिवार के हर सदस्य को सुरक्षा देने की बात हुई वैसे ही पुलिस को पूरे मामले पर शक हुआ और पुलिस ने सभी को संदेह की दृष्टि से देखना शुरू किया। ठीक यहीं पर भीम आर्मी पूरे मामले से गायब हो गई।

जब वायरल हुए थे चंद्रशेखर के गाली भरे ट्वीट 

पिछले साल जून में ट्विटर पर चंद्रशेखर के गाली वाले कई ट्वीट वायरल हुए थे। इसमें ज़्यादातर ट्वीट 2018 के थे जिसमें उसने बेहद अपमानजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था। उसने अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का समर्थन करने वाली हर महिला के लिए “दल्ला” और #डी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। ट्वीट में यह भी लिखा था कि इन सभी ने खुद को भाजपा को बेच दिया है। ट्वीट पर विवाद बढ़ने के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने इनका संज्ञान लिया था। 

ठीक इसी महीने में चंद्रशेखर पर आरोप लगा था कि उसने दिल्ली एम्स में अपने ब्लड कैंसर के बारे में डॉक्टर्स को बताए बिना रक्त दान किया था। चंद्रशेखर के फिजिशियन डॉ हरजीत सिंह भाटी ने भी यह बताए छुपाए रखी, बाद में यह पता चला कि वह एक तरह के ब्लड कैंसर (polycythemia vera) से पीड़ित है। इसी तरह पिछले साल TIME ने सीएए और एनआरसी का विरोध करने वाली 82 वर्षीय बिलकिस 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया था।         

लाल किला हिंसा में कार्रवाई हुई तेज: दिल्ली पुलिस ने जारी की 20 अन्य उपद्रवियों की तस्वीरें

गणतंत्र दिवस पर देश की राजधानी दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान दिल्ली के लाल किला पर हिंसा फैलाने वालों की पुलिस पहचान कर रही है। दिल्ली पुलिस ने हिंसा में कथित तौर पर शामिल 20 अन्य उपद्रवियों की तस्वीर जारी की है।

इसके पहले दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार (फरवरी 19, 2021) को लाल किला हिंसा मामले में 200 लोगों की तस्वीर जारी की थी। इन सभी पर हिंसा में शामिल होने का आरोप है। दिल्ली पुलिस ने बताया कि उसने विभिन्न स्रोतों से मिले वीडियो को स्कैन करने के बाद आरोपितों की तस्वीर जारी की है।

पुलिस ने बताया कि तस्वीरें जारी करने के साथ ही इनकी पहचान करने का काम भी किया जा रहा है। इसके लिए पुलिस की टीमें जुट गई हैं। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने 26 जनवरी को जब देश का गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा था उसी दिन ट्रैक्टर परेड निकाला था। ट्रैक्टर परेड के दौरान हिंसा भड़क गई थी और एक गुट लाल किले पर पहुँच गया था। इस दौरान वहाँ पुलिस वालों के साथ मारपीट करते हुए लाल किले पर निशान साहिब फहरा दिया गया था। दिल्ली में अन्य कई जगहों पर भी पुलिस और किसानों के बीच संघर्ष हुआ था।

ट्रैक्टर परेड के दौरान हिंसा एक सुनियोजित साजिश के तहत की गई थी। इसका प्रमाण है कि पुलिस को जो फुटेज मिले हैं उसमें से ज्यादातर हमलावर नकाबपोश थे। पुलिस अधिकारियों की माने तो इसमें पचास से अधिक लोग नकाबपोश थे। पुलिस उन फोटोग्राफ को फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक के जरिए बेनकाब करने में जुट गई है। साथ ही पुलिस डंप डाटा के जरिए भी संदिग्धों के लोकेशन तलाशने में जुटी है।

बता दें कि नकाबपोश उपद्रवियों को लाल किला में हिंसा के दौरान पुलिस कर्मियों पर हमला करते हुए देखा गया है। कई तो पुलिसकर्मियों को घेरकर उन पर हमला कर रहे थे। पुलिस फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक और मुखबिर के जरिए इन आरोपितों की पहचान करने में जुटी है। ज्यादातर फोटोग्राफ में नकाबपोश उपद्रवियों के पास हथियार या फिर लाठी डंडे थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए क्राइम ब्रांच को अब तक डेढ़ हजार वीडियो मिल चुके हैं। जिसके जरिए हिंसा में शामिल एक-एक लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। 

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने हिंसा करने वाले 12 उपद्रवियों की तस्वीरें जारी की थी। चिन्हित किए गए इन उपद्रवियों को हिंसा के दौरान हाथ में लाठी डंडे लिए, पत्थरबाजी, तोड़फोड़ और लाल किला समेत कई जगहों पर जमकर उत्पात और पुलिस वालों पर हमला करते हुए देखा गया।

शिवसेना ने सजायाफ्ता हत्यारों रहमतुल्ला खान, इंडिन शेख और अनवर शेख को पार्टी में किया शामिल: पैरोल रद्द करने की माँग

आरपीआई के वरिष्ठ नेता नरेश गायकवाड़ की हत्या के लिए दोषी तीन लोगों को मंगलवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा शिवसेना में शामिल किया गया है। इस फैसले ने विवादों को हवा दे दी है।

रिपोर्टों के अनुसार, तीनों दोषी – रहमतुल्ला खान उर्फ पापा खान, इंडिन शेख और अनवर शेख पार्टी नेता विधायक बालाजी किणीकर और ठाणे ग्रामीण अध्यक्ष गोपाल लांडगे की उपस्थिति में शिवसेना में शामिल हुए हैं। तीनों दोषी फिलहाल COVID-19 के कारण पैरोल पर हैं। तीनों अपराधी अंबरनाथ नगरपालिका परिषद चुनाव से पहले पार्टी में शामिल हुए हैं।

ठाणे जिले के दलित नेता नरेश गायकवाड़ को 2000 में 6 मुस्लिम लोगों ने मार डाला, जिनमें तीन मुस्लिम युवक शामिल थे, जो अब शिवसेना में शामिल हो गए हैं। सभी 6 आरोपितों को दलित नेता की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

दलित नेता के बेटे ने जताया शोक

नरेश गायकवाड़ के बेटे कबीर गायकवाड़ ने हत्याकांड में शामिल तीन लोगों को अपनी पार्टी में शामिल करने के लिए शिवसेना की निंदा की। नरेश गायकवाड़ राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) से जुड़े हैं। गायकवाड़ ने कहा, “मैं शिवसेना के फैसले से हैरान हूँ जिन्होंने तीन दोषियों को अपनी पार्टी में शामिल किया। उन्होंने मेरे पिता को मार डाला।”

दिवंगत नेता के बेटे ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सीएम उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी शिवसेना से इन गुंडों को बाहर निकालने के लिए कहेंगे। उन्होंने जेल अधिकारियों से दोषियों की पैरोल को रद्द करने की भी अपील की।

शहर के एक वरिष्ठ शिवसेना नेता ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए कहा कि पार्टी को नागरिक चुनाव में दलित वोटों का नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को अपने फैसले के बारे में सोचना चाहिए। इस बीच, शिवसेना विधायक बालाजी किणीकर ने कहा कि इन दोषियों को पार्टी में शामिल होने की अनुमति देना उनके वरिष्ठ नेताओं का निर्णय था।

मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा ने राम मंदिर के लिए दिया ₹11 लाख का दान, कहा- ‘अतीत के लिए मैं जिम्मेदार नहीं’

अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण के सहयोग के लिए राजनीति से तमाम चेहरे आगे आए हैं। समाजवादी पार्टी के संरक्षक और बतौर मुख्यमंत्री कारसेवकों पर गोली चलवाने के आरोपित मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव ने राम मंदिर निर्माण के लिए 11 लाख रुपए का आर्थिक सहयोग किया है। इसके बाद उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया भी दी, अपर्णा यादव ने कहा कि उन्होंने ये काम अपनी स्वेच्छा से किया है। वह अपने परिवार की जिम्मेदारी नहीं ले सकती हैं, अतीत कभी भी आने वाले कल के बराबर नहीं हो सकता है। 

इसके बाद अपर्णा यादव ने यह भी कहा, “राम भारत के चरित्र, संस्कार और सभी की आस्था का केंद्र हैं। यह सिर्फ राम का मंदिर ही नहीं बल्कि राष्ट्र का मंदिर है। मुझे ऐसा लगता है कि भारत के हर नागरिक को श्रीराम मंदिर के लिए दान करना चाहिए इसलिए मैंने भी दान किया है। मैं आशा करता करती हूँ अयोध्या में श्रीराम का भव्य मंदिर निर्मित होगा।” अपर्णा यादव ने स्पष्ट किया कि वह अतीत के लिए जिम्मेदार नहीं हैं, ये दान उनकी जिम्मेदारी थी। यानी ये आर्थिक सहयोग उनके परिवार की तरफ से नहीं है। 

यहाँ अतीत से अपर्णा यादव का तात्पर्य सम्भवतः बाबरी मस्जिद विध्वंस के दौरान मुलायम सिंह यादव का कारसेवकों पर गोली चलवाने का आदेश था। उन्होंने कहा, “अतीत कभी भविष्य के बराबर नहीं हो सकता है इसलिए समझा जाना चाहिए कि मैंने अपनी जिम्मेदारी निभाई है। मैं अपने परिवार की जिम्मेदारी नहीं ले सकती हूँ।” अपर्णा यादव के विचार अक्सर उनकी पार्टी लाइन से हट कर ही होते हैं। उन्होंने कई बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यों की प्रशंसा की है। इसके अलावा उन्होंने कई बार उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सार्वजनिक रूप से आलोचना भी की है। 

अपर्णा यादव सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव की पत्नी हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी के ही टिकट पर 2017 के दौरान लखनऊ कैंट विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें भाजपा नेता रीता बहुगुणा जोशी ने उन्हें हरा दिया था। वहीं दूसरी तरफ अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए देशव्यापी धन संग्रह अभियान चल रहा है। देश भर से तमाम लोग आर्थिक सहयोग करने के लिए आगे आ रहे हैं। अब तक लगभग 1500 करोड़ से अधिक की धनराशी इकट्ठा हो चुकी है। 

‘केरल में PFI ने RSS के लोगों को हथकड़ी लगाकर निकाली रैली’: अल्लाह-हू-अकबर नारे के साथ मोपला हिन्दू नरसंहार की दिलाई याद

कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने केरल में एक रैली निकाली। इस रैली में कुछ लोगों ने RSS की यूनिफॉर्म पहनी थी। परेड में आरएसएस की यूनिफार्म में शामिल लोगों को जंजीर से भी बाँधा गया था। इस रैली के कई वीडियो और फोटो सामने आए हैं, जिसमें देखा जा सकता है कि इस दौरान अल्लाह-हू-अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर रसूलुल्लाह जैसे कई अन्य इस्लामी नारे लगाए गए।

रैली केरल के मलप्पुरम जिले के तेनियापलम शहर में आयोजित की गई थी और वीडियो में शहर के मुख्य वाणिज्यिक केंद्र चेलारी से गुजरने वाले जुलूस को दिखाया गया है।

जुलूस के दौरान कुछ नारे काफी भड़काऊ और उत्तेजक थे। इसमें आरएसएस के यूनिफार्म वाले सदस्यों को जंजीर में बँधा हुआ दिखाना भी शामिल है। रैली में आरएसएस की यूनिफार्म में लोगों के साथ कुछ लोग ब्रिटिश अधिकारियों की भी भेष-भूषा में थे। इन लोगों के हाथ में भी रस्सी बँधी और इसका दूसरा छोर लूँगी और जालीदार टोपी (skullcaps) पहने लोगों के हाथ में थी। आरएसएस और ब्रिटिश अधिकारियों का कपड़ा पहने लोग जालीदार टोपी और लूँगी पहने लोगों का अनुसरण कर रहे थे। उनके हाथ में लाठियाँ भी थी।

कुछ सूत्रों का कहना है कि पीएफआई की रैली आज ‘1921 मालाबार हिंदू नरसंहार’ या मोपला नरसंहार की शताब्दी को ‘मनाने’ के लिए की गई थी, जिसे इतिहास में 1921 के मालाबार विद्रोह के रूप में जाना जाता है। मोपला नरसंहार में तकरीबन 10,000 हिंदुओं को मौत के घाट उतारा गया। यह माना जाता है कि दंगों के मद्देनजर 1,00,000 हिंदुओं को केरल छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था। इस दौरान हिंदू मंदिरों को ध्वस्त किया गया। जबरन धर्मांतरण हुए और कई प्रकार के ऐसे अत्याचार हिंदुओं पर किए गए, जिन्हें शब्दों में बयान कर पाना लगभग नामुमकिन है।

एनी बेसेंट ने इस घटना का जिक्र अपनी किताब ‘द फ्यूचर ऑफ इंडियन पॉलिटिक्स’ में करते हुए बताया कि कैसे धर्म न त्यागने पर हिंदुओं पर अत्याचार हुए। उन्हें मारा-पीटा गया। उनके घरों में लूटपाट हुई। एनी बेंसेंट ने अपनी किताब में बताया कि करीब लाख से ज्यादा हिंदू लोगों को उस दौरान अपने घरों को तन पर बाकी एक जोड़ी कपड़े के साथ छोड़ना पड़ा था। उन्होंने लिखा, “मालाबार ने हमें सिखाया है कि इस्लामिक शासन का क्या मतलब है, और हम भारत में खिलाफत राज का एक और नमूना नहीं देखना चाहते हैं।”

बाबा साहेब अंबेडकर अपनी किताब में इस नरसंहार का जिक्र करते हैं। वे पाकिस्तान ऑर पार्टिशन ऑफ इंडिया नाम की अपनी किताब में लिखते हैं कि हिन्दुओं के खिलाफ मालाबार में मोपलाओं द्वारा किए गए खून-खराबे के अत्याचार अवर्णनीय थे। दक्षिणी भारत में हर जगह हिंदुओं के ख़िलाफ़ लहर थी। जिसे खिलाफत नेताओं ने भड़काया था।

पिछले साल जनवरी में, यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एंटी-सीएए दंगों के दौरान पीएफआई द्वारा की गई हिंसा के कारण पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने के लिए कहा था। केंद्र सरकार ने एंटी-सीएए हिंसा के कारण पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने को स्थगित कर दिया था।