Home Blog Page 4054

कॉन्ग्रेस नेता के पास 10 लाख की गाड़ी, 15 लाख का सोना… घर में शौचालय नहीं: नामांकन हो गया रद्द

गुजरात के अहमदाबाद में एक कॉन्ग्रेस उम्मीदवार का नामांकन इसलिए रद्द कर दिया गया क्योंकि उनके घर में शौचालय नहीं था। चौंकाने वाली बात तो यह है कि महिला उम्मीदवार के पास 15 लाख रुपए का सोना, नरोदा में एक फ्लैट है और 10 लाख रुपए की एसयूवी भी है… लेकिन उनके घर में शौचालय नहीं है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला अहमदाबाद जिला पंचायत के लिए सिंगरवा सीट का है। कॉन्ग्रेस की उम्मीदवार कृना पटेल ने पंचायत चुनाव के लिए सोमवार को अपना नामांकन दाखिल करने पहुँचीं थीं, लेकिन घर में टॉयलेट (Toilet) न होने की वजह से उनका नामांकन रद्द कर दिया गया। कॉन्ग्रेस नेता अब पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकती क्योंकि कंभा गाँव स्थित उनके घर में टॉयलेट नहीं है।

जानकारी के मुताबिक, कृना पटेल के नॉमिनेशन फॉर्म की जाँच करने के दौरान बीजेपी उम्मीदवार ने उनके हलफनामे को लेकर आपत्ति जताई थी। प्रतिद्वंद्वियों का कहना था कि कॉन्ग्रेस प्रत्याशी ने अपने एफिडेविट में झूठ बोला है कि कंभा गाँव में उनके घर में टॉयलेट है।

दरअसल, 47 वर्षीय कृना पटेल ने उसी गाँव से अपना नॉमिनेशन फाइल किया था, जिसको लेकर दस्करोई के रिटर्निंग ऑफिसर कोमल पटेल ने बताया कि बीजेपी के एक सदस्य ने कॉन्ग्रेस उम्मीदवार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। जिसको गंभीरता से लेते हुए इस मामले की जाँच की गई।

कोमल ने बताया, “कृना ने शपथ में घोषणा की थी कि उसके घर पर शौचालय है, मैंने उससे पूछा कि क्या वह सही बोल रही हैं। इससे वह चिंतित हो गई और उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। एक कॉन्ग्रेसी नेता भी उनके साथ मौजूद थे। कॉन्ग्रेस नेता ने जब उनसे पूछा कि क्या उनके घर पर शौचालय है। फिर उन्होंने कहा कि उनके कंभा स्थित घर में शौचालय नहीं है।”

वहीं इस मामले को कृना ने भी स्वीकार किया कि उनके घर में शौचालय नहीं है। एसडीएम ने कहा, “हमने उनसे यह बात लिखित रूप में देने के लिए कहा। कृना से लिखित लेने के बाद उनका नामांकन अस्वीकार कर दिया गया।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जमा किए गए एफिडेविट में उल्लेख है कि कृना ने बारहवीं कक्षा पास की है। क्रीना पटेल के पास एक फ्लैट, 15 लाख रुपए का सोना, 10 लाख रुपए की एसयूवी कार है।

मात्र चुनाव लड़ने के लिए नामांकन भरे जाने को लेकर बीजेपी ने कॉन्ग्रेस उम्मीदवार पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि वह रहती तो नरोदा में थीं, लेकिन कागज पर कंभा की रहने वाली थी। इसलिए उन्होंने कभी भी अपने गाँव के घर में शौचालय बनवाना जरूरी नहीं समझा।

गौरतलब है कि गुजरात सरकार ने अक्टूबर 2017 में दावा किया था कि उनके सभी गाँव अब खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं। केंद्रीय पीने के पानी और सेनिटाइजेशन मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक 92.46 फीसदी गाँवों को खुले में शौच मक्त घोषित किया गया था। 15842 गाँव में से 14,647 गाँव को खुले में शौच से मुक्त सत्यापित किया गया था।

DCP भी लगा सकेंगे गुंडा ऐक्ट, 2 जिलों के लिए योगी कैबिनेट की मंजूरी: 14 दिन के बजाय 60 दिन की पुलिस रिमांड

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने लखनऊ व गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट के लिए बड़ा निर्णय किया है। कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिए उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक, 2021 को मंजूरी दी गई है। इसके तहत अब लखनऊ और गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट में पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) भी अपराधियों के विरुद्ध गुंडा ऐक्ट निरुद्ध करने की कार्रवाई कर सकेंगे। पहले यह अधिकार पुलिस कमिश्नर के पास था।

क्या हैं गुंडा ऐक्ट के प्रावधान?

विधेयक में मानव तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग, गोहत्या, बंधुआ मजदूरी और पशु तस्करी पर सख्ती से लगाम लगाने का प्रावधान है। इसके अलावा जाली नोट, नकली दवाओं का व्यापार, अवैध हथियारों का निर्माण व व्यापार और अवैध खनन जैसे अपराध पर भी गुंडा ऐक्ट लगाने का प्रावधान है।

गुंडा ऐक्ट के तहत ऐसे अपराधियों की आसानी से जमानत नहीं हो सकेगी। अपराधियों की संपत्तियाँ भी जब्त होंगी। पुलिस आरोपियों को 14 दिन के बजाय अधिकतम 60 दिन के लिए रिमांड पर ले सकती है।

बता दें कि उत्तर प्रदेश में इस बार विधानसभा, विधानमंडल का बजट सत्र पूरी तरह से डिजिटल होने जा रहा है। इसके लिए बीते दिनों सभी सदस्यों की स्पेशल ट्रेनिंग भी करवाई गई। यूपी सरकार ने 18 फरवरी से शुरू होने वाले विधानसभा के बजट सत्र के लिए राज्यपाल आनंदी पटेल के अभिभाषण को मंजूरी दे दी है।

गौरतलब है कि यूपी में बीते एक साल में पुलिस और बदमाशों के बीच संघर्ष की कई घटनाएँ सामने आई हैं। फिर चाहे वो कानपुर का बिकरू कांड का मसला हो या फिर हाल ही में कासगंज मामला हो, जिसमें अपराधियों द्वारा पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग की गई थी और कई जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे। ऐसे में अपराधियों पर नकेल कसने के लिए गुंडा ऐक्ट से जुड़ा फैसला काफी अहम माना जा रहा है।

इसके अलावा मेरठ से प्रयागराज तक बनने वाले एक्सप्रेस-वे के लिए योगी सरकार ने 2900 करोड़ के ऋण को मंजूर किया है। सरकार का दावा है कि मेरठ से प्रयागराज तक प्रस्तावित यह एक्सप्रेस-वे देश में सबसे बड़ा होगा। इसके लिए हाल ही में जमीन अधिग्रहण व खरीद की प्रक्रिया शुरू हुई है। इस बड़ी परियोजना के वित्त पोषण के लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) कई विकल्पों पर विचार कर रहा है।

यूपीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा कि इस प्रक्रिया के लिए हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (हुडको) से 2900 करोड़ रुपए का ऋण लिया जाएगा। औद्योगिक विकास विभाग के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

मुस्लिम लड़कियों से शादी की सजा: हाई कोर्ट नहीं दे रहा गैर-मुस्लिम भाइयों को बेल, पिता को भी पाकिस्तान में जमानत नहीं

पाकिस्तान की एक उच्च न्यायालय द्वारा सोमवार (15 फरवरी, 2020) को मुस्लिम महिलाओं से शादी करने वाले दो अहमदी भाइयों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया। बता दें कि इस्लामिक राष्ट्र पाकिस्तान में अहमदी मुसलमानों को गैर-मुस्लिमों की श्रेणी में रखा जाता है।

रबवाह टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायमूर्ति सैयद अरशान अली ने मामले के सिलसिले में अपना फैसला सुनाते हुए ज़ैद और ज़ाहिद के साथ उनके पिता साजिद को भी जमानत देने से इनकार कर दिया।

जैद और जाहिद ने पिछले साल जून में पाकिस्तान के पेशावर में शेख मुहम्मदी इलाके में सोबिया और सलमा नाम की महिलाओं से निक़ाह किया था। जिसके बाद 29 सितंबर को उन पर निक़ाह का झाँसा देकर धोखाधड़ी और ईशनिंदा का आरोप लगाया गया, और पुलिस द्वारा हिरासत में ले लिया गया था।

दोनों भाइयों के खिलाफ पाकिस्तान दंड संहिता (PPC) की धारा 298C (अहमदी/क़ादियानी खुद को मुस्लिम या उसमें विश्वास रखने वाले) और 493A (धोखेबाजी से शादी) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है, जब इस तरह की घटना लोगों के संज्ञान में आई है।

इससे पहले पिछले साल अक्टूबर में खबर आई थी कि एक पाकिस्तानी अहमदी प्रोफेसर को उत्तर-पश्चिम शहर पेशावर में एक अन्य मुस्लिम प्रोफेसर ने गोली मार दी थी। आरोप था कि दोनों के बीच धार्मिक मुद्दे को लेकर बहस छिड़ गई थी। मृतक अहमदी प्रोफेसर की पहचान डॉ. नईमुद्दीन खट्टक उर्फ ​​नईम खट्टक के रूप में हुई थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉलेज आते समय प्रोफेसर फारूक माद और बंदूक लिए एक अन्य आदमी द्वारा अहमदी प्रोफेसर की हत्या को अंजाम दिया गया था।

जमात-ए-अहमदिया पाकिस्तान के प्रवक्ता सलीमुद्दीन ने इस घटना को लेकर एक बयान में कहा कि प्रोफेसर खट्टक को उनकी अहमदी विश्वास के कारण मौत के घाट उतार दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि नईम को अतीत में धमकियों और बहिष्कार का सामना भी करना पड़ा था। नईम गवर्नमेंट सुपीरियर साइंस कॉलेज पेशावर में एक फैकल्टी मेंबर थे। उनके घर में अब उनकी विधवा पत्नी, दो बेटे और तीन बेटियाँ हैं।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में लंबे समय से अहमदिया समुदाय पर अत्याचार हो रहा है। उन्हें साल 1974 में संविधान में संशोधन के साथ अहमदियों को गैर मुस्लिम घोषित कर दिया गया था। इसके बाद 1984 में जनरल मुहम्मद जिया-उल-हक के शासन में एक सख्त अध्यादेश जारी किया गया था। जिसमें कहा गया था कि अगर कोई अहमदिया खुद को मुस्लिम बताएगा, तो वो अपराध की श्रेणी में आएगा और ऐसा करने वाले को 3 साल की सजा और जुर्माने की सजा का प्रावधान किया गया है। तब से उन पर हिंसा, भेदभाव और ईशनिंदा के झूठे मामले दर्ज किए जा रहे है।

टूलकिट मामले में शिवसेना कनेक्शन: जिस शांतनु के खिलाफ गैरजमानती वारंट, उसके पिता-चाचा-भाई सब हैं पार्टी में

कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे ‘किसान’ आंदोलन की चर्चा अब टूलकिट पर आकर टिक गई है। किसानों के समर्थन में ट्वीट करने वाले जाने-पहचाने नाम साजिश का हिस्सा बताए जा रहे हैं। जाँच एजेंसियों का कहना है कि किसान आंदोलन के नाम पर देश को बदनाम करने का षड्यंत्र रचा गया, लिहाजा इस प्रकरण में शामिल लोगों की गिरफ्तारियाँ की जा रही हैं।

दिशा रवि फिलहाल गिरफ्तार हो चुकी हैं और निकिता जैकब व शांतनु मुलुक के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया गया है। जानकारी ये भी सामने आई है कि 20 जनवरी से 27 जनवरी तक शांतनु टिकरी बॉर्डर पर मौजूद था और किसानों के आंदोलन में शामिल हुआ था।

इस बीच महाराष्ट्र में भाजपा नेता राम कदम ने खुलासा करते हुए बताया कि शांतनु मुलुक का शिवसेना से संबंध है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “शांतनु मुलुक बीड से शिवसेना जिला प्रमुख का चचेरा भाई है। शिवसेना का असली चेहरा आया सामने।”

राम कदम ने बताया कि शांतनु के चाचा सचिन मुलुक, शिवसेना के जिला अध्यक्ष हैं। शांतनु के पिता शिवलाल मुलुक शिवसेना से ही नगर पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं। शांतनु का चचेरा भाई चुलत भाऊ भी बीड में शिवसेना का जिला प्रमुख है।

दिल्ली पुलिस की तरफ से दी गई नई जानकारी के मुताबिक, शांतनु 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई दिल्ली हिंसा के समय तक टिकरी बॉर्डर पर था लेकिन इसके बाद वह वहाँ से चला गया। दिशा रवि के अलावा शांतनु और बॉम्बे हाईकोर्ट की वकील निकिता जैकब पर भारत की छवि को धूमिल करने के इरादे से किसानों के प्रदर्शन से जुड़ी टूलकिट बनाने का आरोप है।

गौरतलब है कि 15 फरवरी को इस पूरे मामले के बारे में विस्तार से दिल्ली पुलिस ने जानकारी दी। दिल्ली पुलिस साइबर सेल के ज्वाइंट सीपी प्रेम नाथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, “11 जनवरी 2021 को पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन (PJF) ने एक जूम मीटिंग का आयोजन किया। इस मीटिंग में निकिता जैकब, शांतनु, एमओ धालीवाल व अन्य शामिल हुए। इस मीटिंग में निर्णय लिया गया कि इस कैंपेन को विश्व स्तर पर फैलाया जाए। धालीवाल का मकसद इस मुद्दे को बड़ा बनाना और किसानों के बीच असंतोष व गलत जानकारी फैलाना था। यहाँ तक कि एक किसान की मौत को भी गोली से हुई मौत बताया गया।”

दिल्ली पुलिस ने बताया कि विवादित टूलकिट निकिता और उसके साथी शांतनु व दिशा ने तैयार की थी। इस टूलकिट गूगल डॉक्यूमेंट को शांतनु के ईमेल अकाउंट से बनाया गया था। पुलिस ने बताया कि ये लोग एक वॉट्सऐप ग्रुप पर जुड़े थे, ये ग्रुप 6 दिसंबर को बनाया गया था।

ज्वाइंट कमिश्नर प्रेम नाथ ने बताया कि दिशा के फोन से जानकारी मिली है कि उसने अपने साथी शांतनु और निकिता के साथ मिलकर टूलकिट डॉक्यमेंट बनाया। दिशा की जो दोस्त फ्राइडे फॉर फ्यूचर नामक पर्यावरण नामक आंदोलन से जुड़ी हैं, उसमें एक ग्रेटा थनबर्ग हैं, उनको टेलीग्राम पर यह टूलकिट भेजी गई। यानी पुलिस के मुताबिक, जिस टूलकिट को लेकर ये पूरा विवाद है, वो दिशा की तरफ से ग्रेटा थनबर्ग को भेजी गई थी।  

पुलिस ने दिशा के फोन से जुड़ी अपनी जाँच के आधार पर ये भी बताया कि 3 फरवरी को ओनर्स राइट लेकर टूलकिट डॉक्यूमेंट से जुड़े लिंक हटा दिए गए। इन तथ्यों के आधार पर 13 फरवरी को दिशा को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया गया।

अब्बा सरकारी मास्टर, खुद अलीगढ़ कॉलेज से पढ़ाई और धंधा… आतंकियों को पिस्टल की सप्लाई: बिहार से धराया जावेद

बिहार के सारण से एक आतंकी कनेक्शन का खुलासा हुआ है। पुलिस ने मढ़ौरा थाना इलाके में देव बहुआरा निवासी रिटायर शिक्षक महफूज अंसारी के 25 वर्षीय पुत्र जावेद को गिरफ्तार किया है। पुलिस को जावेद के आतंकियों के साथ संबंध होने की सूचना मिली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जावेद ने आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कश्मीर के मुश्ताक नाम के एक युवक को 7 पिस्टल मुहैया कराई थी, जिसे पाक के आतंकवादियों तक पहुँचाया गया। बिहार और जम्मू-कश्मीर की एसटीएफ की संयुक्त ने जॉइंट आपरेशन के तहत सोमवार (15 जनवरी, 2021) को उसके पैतृक घर से उसे धर दबोचा है।

जानकारी के अनुसार, जावेद की दोस्ती अलीगढ़ के एक कॉलेज में आतंकी कनेक्शन वाले कश्मीर के मुश्ताक नामक एक युवक से हुई। जावेद पर सारण से करीब 7 पिस्टल मुश्ताक को मुहैया कराने का भी आरोप है।

मुश्ताक ने बाद में पाकिस्तान के इशारे पर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वाले हिदायतुल्लाह को ये पिस्तौलें सौंप दीं। इस बात की भनक लगते ही पुलिस की स्पेशल टीम ने जावेद को उसके घर से दबोच लिया।

जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने रविवार को आंतकी गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया था कि घाटी में हथियार की सप्लाई बिहार से की जा रही है। जिसके लिए पंजाब में पढ़ने वाले कुछ कश्मीरी छात्रों का इस्तेमाल किया जा रहा था, ताकि बिना किसी परेशानी के अवैध हथियारों को घाटी तक लाया जा सके।

हाल ही में स्वयंभू प्रमुख कमांडर हिदायतुल्ला मलिक और जहूर अहमद राथर की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे लिंक का पर्दाफाश हुआ था। जिसके बाद से पुलिस और सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट पर हैं।

ग्रामीणों का कहना है लगभग 40-50 जवान इस पूरे ऑपरेशन में शामिल थे। जिन्होंने पूरे गाँव की घेराबंदी करते हुए उसे गिरफ्तार किया। इस दौरान जावेद ने भागने का भी प्रयास किया था।

स्थानीय मुखिया ने बताया कि जावेद लगभग एक महीने पहले ही अपने घर लौटा था। वह कहीं बाहर रह कर पढ़ाई पूरी कर रहा था और बहुत कम ही घर आता था। जावेद कुल 5 भाई और एक बहन है। पड़ोस के एक युवक से जावेद की सारी जानकारी लेने के बाद पुलिस ने उसके घर पर धावा बोला था।

पुडुचेरी में कल राहुल गाँधी का दौरा, आज कॉन्ग्रेस ने खोया बहुमत: CM ने कहा – ‘किरण बेदी की साजिश’

पुडुचेरी में कॉन्ग्रेस की सरकार अल्पमत में आ गई है क्योंकि पार्टी के एक विधायक ने इस्तीफा दे दिया है। मुख्यमंत्री वेलु नारायणसामी (Velu Narayanasamy) सरकार ने एक विधायक के जाने से बहुमत खो दिया है। विधायक ए जॉन कुमार ने मंगलवार (फरवरी 16, 2021) को विधानसभा से अपना इस्तीफा स्पीकर वीपी शिवाकोलुन्थु को सौंप दिया है। कॉन्ग्रेस यहाँ DMK (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) के साथ गठबंधन बना कर सत्ता में है।

अब 33 सदस्यीय विधानसभा में सत्ताधारी गठबंधन के भी 14 ही सदस्य हैं और भाजपा-अन्नाद्रमुक गठबंधन के बाद भी इतनी ही संख्या में विधायक हैं। चूँकि विधानसभा में 3 नॉमिनेटेड विधायक होते हैं और 5 उपलब्ध नहीं हैं, इसीलिए फ़िलहाल विधानसभा की संख्या 28 ही है। कॉन्ग्रेस के पास 10 विधायक हैं और उसके साथी DMK के पास 3 हैं। उन्हें 1 निर्दलीय का समर्थन भी प्राप्त है। विपक्ष में भाजपा के पास 3 नॉमिनेटेड विधायक हैं।

उसकी साथी ‘NR कॉन्ग्रेस’ के पास 7 विधायक हैं और AIADMK के 4 विधायकों को मिला कर ये संख्या 14 पहुँचती है। विपक्षी दलों ने माँग की है कि उप-राज्यपाल किरण बेदी जल्द ही सरकार को सदन में बहुमत साबित करने को कहें। जॉन कुमार हाल ही में दिल्ली में कुछ भाजपा नेताओं से मिले थे। 2016 में नेल्लीथोपे विधानसभा क्षेत्र से जीतने वाले जॉन ने मुख्यमंत्री नारायणसामी के लिए ये सीट छोड़ दी थी।

उन्हें सीएम का करीबी भी माना जाता था। बाद में वो कामराज नगर से उपचुनाव में 2019 में विजयी रहे थे। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मल्लादी कृष्णा ने भी 1 दिन पहले ट्विटर के माध्यम से अपना इस्तीफा सार्वजनिक किया था। ये सब तब हो रहा है, जब कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी 1 दिन बाद ही पुडुचेरी में मई में होने वाले विधानसभा चुनाव की रणनीति बनाने जा रहे हैं। केंद्र शासित प्रदेश में पार्टी के सत्ता में आने के बाद ये उनका पहला दौरा है।

पुडुचेरी के सीएम वी नारायणसामी के कार्यकाल को उप-राज्यपाल किरण बेदी से उनकी लड़ाई को लेकर लेकर भी याद किया जाता है। अब भी उन्होंने किरण बेदी पर ही साजिश के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कि वो राष्ट्रपति से शिकायत करेंगे कि किरण बेदी उनकी सरकार को अस्थिर कर रही हैं और अधिकारियों को धमका रही हैं। पिछले कुछ दिनों में 4 कॉन्ग्रेस विधायक इस्तीफा दे चुके हैं। नारायणसामी ने कहा कि किरण बेदी ने कई सरकारी योजनाओं को भी रोक दिया है।

दिल्ली बॉर्डर से लौट रहे किसान, नहीं मिल रहा समर्थन: ‘बदली हुई रणनीति’ की दुहाई दे रहे किसान नेता

दिल्ली की सीमा से अब किसानों का जमावड़ा कम होने लगा है और भीड़ भी नहीं है, जिसे कई किसान नेता ‘बदली हुई रणनीति’ का हवाला देकर बचाव कर रहे हैं। किसानों का लौटना तो गणतंत्र दिवस के दिन हुई हिंसा के बाद से ही शुरू हो गया था लेकिन राकेश टिकैत के रोने के बाद नया ड्रामा शुरू कर के महापंचायत बुला ली गई थी। वहीं अब फिर से किसानों के लौटने के बाद अलग-अलग बातें की जा रही हैं।

दिल्ली की सीमा पर इस आंदोलन के 3 महीने होने वाले हैं। अब गाजीपुर और सिंघु बॉर्डर पर किसानों का जमावड़ा कम होता जा रहा है और प्रदर्शन में वो उत्साह भी नहीं रहा। पिछले कुछ दिनों में जितने किसानों को यहाँ देखा जा सकता था, अब उसके आधे प्रदर्शनकारी भी मौजूद नहीं हैं। किसान नेता और वामपंथी मीडिया पोर्टल इसे देश भर में आंदोलन को फैलाने की रणनीति बताते नहीं थक रहे। वो कह रहे कि लड़ाई लंबी चलेगी।

नई रणनीति के तहत देश के सभी राज्यों में बड़ी-बड़ी रैलियाँ आयोजित कर के आंदोलन के लिए समर्थन जुटाने की कवायद शुरू होने वाली है। किसान नेता राकेश टिकैत ने देश भर में महापंचायतों का आयोजन करने की योजना बनाई है, जिसके तहत अलग-अलग इलाकों को टारगेट किया जाएगा। अगले 10 दिनों में वो हरियाणा, महाराष्ट्र और राजस्थान में कई सभाओं को संबोधित करेंगे। सरकार अभी भी बातचीत के प्रस्ताव पर कायम है।

किसानों की भीड़ कम होने पर रणनीति की दुहाई दे रहे किसान नेता (वीडियो साभार: लाइव हिंदुस्तान)

गाजीपुर प्रोटेस्ट कमेटी के प्रवक्ता जगतार सिंह बाजवा ने कहा, “शुरू में आंदोलन सीमाओं पर केंद्रित था। लेकिन, किसान नेता भी अब रणनीति बदलने जा रहे हैं, ताकि यह आंदोलन गाँव-गाँव में हर घर तक पहुँचे। हम अलग-अलग जगहों पर महापंचायतें आयोजित करने वाले हैं।” एक किसान नेता ने कहा कि यहाँ 10 लाख प्रदर्शनकारी भी आ जाएँ तो सरकार तीनों कृषि कानून वापस नहीं लेगी, इसीलिए देश भर में प्रदर्शन हो।

सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात ये है कि महापंचायत के लिए उत्तर प्रदेश को ही फोकस में रखा जा रहा है, जहाँ इस साल पंचायत चुनाव और अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। कई जगहों पर भी छोटे-मोटे आयोजन की योजना बनाई जा रही है। ‘किसान आंदोलन’ दिल्ली के आस-पास के इलाकों तक सीमित रहा और अन्य राज्यों से समर्थन नहीं मिला, इसीलिए नेता नाराज हैं। अब देखना ये है कि ये ‘बदली हुई रणनीति’ कैसे काम आती है।

उधर दिल्ली पुलिस अब ग्रेटा टूलकिट तह तक पहुँच रही है। लेकिन, इसके आरोपितों के पक्ष में वामपंथी गोलबंद होने लगे हैं और समर्थन में उतर आए हैं। जहाँ ‘द प्रिंट’ ने दिशा रवि की महिमा के गुण गाए हैं, वहीं कविता कृष्णन सरीखे पीटर फ्रेडरिक के बचाव में उतर आए। उन्होंने दावा किया कि पीटर अमेरिका और दुनिया को RSS की ‘तानाशाही नीतियों’ के बारे में बताता है। कई अन्य वामपंथी इन दोनों के समर्थन में बयान दे रहे हैं।

कृषि कानूनों का समर्थन करने वालों को रेप+मौत की धमकी, कनाडा के PM और सुरक्षा मंत्री से गुहार

कनाडा में रहने वाले भारतीयों के दो दर्जन से अधिक संगठनों ने इंडो-कनाडाई के राष्ट्रीय गठबंधन के तहत सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री बिल ब्लेयर को एक पत्र भेजा। पत्र में उन्होंने भारत में पारित नए कृषि कानूनों को अपना समर्थन देने के लिए समुदाय पर समन्वित हमलों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। इस पत्र पर 28 सामुदायिक निकायों के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए हैं।

समूह ने कहा, “खालिस्तान बनाने की माँग करने वाले अलगाववादी तत्व कनाडा में किसान कानून विरोधी आंदोलन में शामिल हैं और कनाडा में रहने वाले भारतीयों पर हमला ने अब सांप्रदायिक मोड़ ले लिया है।”

पत्र में आगे कहा गया है कि यह बहुत ही चिंताजनक है कि कनाडा में आतंकवाद की सबसे बुरी घटना एयर इंडिया-182 ‘कनिष्क’ पर बमबारी के लिए जिम्मेदार समूह भारत में नए लागू किए गए कानूनों का विरोध करने की आड़ में हिंदूफोबिया में लिप्त है। 

इस विमान हादसे की वजह आतंकी हमला था। इसे इतिहास के बड़े विमान हादसों में एक माना जाता है। यह विमान 23 जून, 1985 को बम ब्लास्ट का शिकार हुआ था। खालिस्तानी आंतकवादियों द्वारा किए गए इस हमले में प्लेन में सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई थी।

जल्दी और प्रभावी कार्रवाई की माँग की गई

पत्र में, हस्ताक्षरकर्ताओं ने हिंदू-कनाडाई लोगों को आश्वस्त करने के लिए कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा विभागों से जल्दी और प्रभावी कार्रवाई की माँग की, जो इस हालिया घटना के कारण भविष्य से डरते हैं। उनका कहना है कि वो नहीं चाहते हैं कि कनिष्क त्रासदी को फिर से दोहराया जाए।

बलात्कार और मौत की धमकी

जो लोग कृषि कानूनों के पक्ष में हैं, उन्हें कैलगरी, मेट्रो वैंकूवर, ग्रेटर टोरंटो एरिया और एडमॉन्टन सहित कनाडा के कई हिस्सों में बलात्कार और मौत की धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। इस तरह के हमलों के पीड़ितों ने कई पुलिस शिकायतें दर्ज करवाई हैं।

‘तिरंगा रैली’ के प्रतिभागियों को टारगेट किया गया

10 फरवरी को, इंडो-कनाडाई समुदाय के सदस्यों ने कृषि कानूनों के समर्थन और 26 जनवरी के दंगों में खालिस्तानी तत्वों की भूमिका के खिलाफ मेट्रो वैंकूवर में ‘तिरंगा रैली’ का आयोजन किया। रैली में सर्रे से वैंकूवर तक लगभग 350 कारों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने भारतीय वाणिज्य दूतावास भवन के सामने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज लहराया।

रैली के कुछ ही घंटों के भीतर प्रतिभागियों को धमकी भरे फोन आने लगे और कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शनकारी उनके कार्यालयों के बाहर घूमने लगे। हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए, तिरंगा रैली के स्वयंसेवकों में से एक ने कहा कि वह और उसके पति का बिजनेस सर्रे में टारगेट किया गया।

समूह ने 26 जनवरी की हिंसा की निंदा करने के लिए पीएम ट्रूडो से आग्रह किया था

रिपोर्टों के अनुसार इंडो-कैनेडियन संगठन का प्रतिनिधित्व करने वाले एक संगठन ने कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को गणतंत्र दिवस पर नई दिल्ली में कृषि कानूनों के विरोध के दौरान हुई हिंसा की निंदा करने के लिए आग्रह किया था। बता दें कि हाल ही में उन्होंने वाशिंगटन डीसी में हुई हिंसा का विरोध किया था।

ट्रूडो को लिखे पत्र में इंडो-कनाडाई के नेशनल अलायंस के अध्यक्ष आजाद कौशिक ने कहा कि वह पीएम को इंडो-कैनेडियन समुदाय की भावनाओं को प्रतिबिंबित करने के लिए लिख रहे हैं। ट्रूडो के जनवरी में कैपिटल हिल हिंसा को ‘दंगाइयों द्वारा लोकतंत्र पर हमला’ बताया था। इसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने कहा है कि ‘भारतीय लोकतंत्र पर इसी तरह का हमला और हिंसा’ हुई है। किसानों की आड़ में चरमपंथी तत्वों द्वारा ऐसी हरकत की गई, लेकिन कनाडा ने इसकी निंदा नहीं की।

ट्रूडो से आह्वान किया गया कि वे इसकी निंदा करें और इसको लेकर बयान जारी करें। आजाद कौशिक ने कहा, “यह किसानों की आड़ में चरमपंथी तत्वों को बड़े पैमाने पर मौन समर्थन में इंडो-कैनेडियन समुदाय और कनाडा में धारणा से बचने में मदद करेगा।”

वहीं भारत के मुख्य न्यायाधीश को लिखे एक खुले पत्र में कनाडाई प्रांत ब्रिटिश कोलंबिया के पूर्व प्रमुख उज्जल दोसांझ ने उनसे नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर होने वाले आयोजनों का स्वत: संज्ञान लेने का आग्रह किया। विशेष जाँच दल द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के सिटिंग जज द्वारा निगरानी कराने की गुजारिश की।

,

भगवान गणेश की लॉकेट और कमर के ऊपर नंगी रिहाना… पैसे लेकर ट्वीट करने वाली ‘किसान’ हितैषी को पड़ रही गाली

पॉप स्टार सिंगर से किसान हितैषी बनी रिहाना ने मंगलवार को अपनी आधी नंगी टॉपलेस तस्वीर को ट्विटर पर पोस्ट किया। इस दौरान उन्होंने भगवान गणेश वाला एक पेंडेंट अपने गले में डाल रखा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह तस्वीर उन्होंने लॉन्जरी ब्रांड सैवेज एक्स फेंटी (Savage X Fenty) के प्रचार के लिए खिंचवाई।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीर में आप रिहाना को नीचे बैंगनी रंग के कपड़े के साथ, एक बैंगनी रंग के हार को पहने हुए देख सकते हैं, जिस पर भगवान गणेश बने हुए हैं।

इस तरह से हिंदू देवता के छवि को खुलेआम अपने प्रचार के लिए इस्तेमाल करना सोशल मीडिया यूज़र्स को नागवार गुजरा। लोगों ने इस पर आपत्ति जताते हुए रिहाना पर उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया।

हिंदुओ की मान्यताओं के साथ इस कदर खिलवाड़ करने पर ट्विटर यूज़र्स ने उन्हें जमकर लताड़ा और खूब खरी-खोटी सुनाई।

बता दें कि कुछ दिनों पहले ही लॉन्जरी ब्रांड फेंटी के प्रचार-प्रसार के लिए एक मॉडल को एक हिंदू मंदिर में अपना फोटोशूट कराते हुए पाया गया था।

दिलचस्प बात यह है कि पिछले साल उसने अपने लॉन्जरी ब्रांड फेंटी के वर्चुअल रनवे शो में हदीस के गाने बजाने के लिए मुस्लिम समुदाय से माफी माँगी थी।

गौरतलब है कि रिहाना ने इस महीने की शुरुआत में भारत में चल रहे ‘किसान’ विरोध पर ट्वीट किया था। इससे वो वामपंथियों की चहेती बन गई थीं, उनका दिल जीता था। हालाँकि बाद में यह पता चला कि रिहाना द्वारा किया गया ट्वीट पूर्व नियोजित था, जिसके लिए उसे मोटी रकम भुगतान की गई थी।

यह खुलासा तब हुआ, जब छोटी-मोटी प्रदर्शनकारी ग्रेटा थनबर्ग ने एक टूलकिट को ट्वीट किया था, जिसमें भारत को बदनाम करने वाली योजनाओं का पूरा ब्यौरा था।

उल्लेखनीय है कि रिहाना को लेकर एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था ​​कि स्काईरॉकेट (Skyrocket), जो एक पीआर फर्म है और जिसका डायरेक्टर एक खालिस्तानी एमओ धालीवाल है, ने आंदोलन के पक्ष में ट्वीट करने के लिए पॉप स्टार रिहाना को 2.5 मिलियन डॉलर का भुगतान किया था। भारतीय करेंसी में यह 18 करोड़ रुपए से अधिक है।

चमोली आपदा: 10 दिन में मिले 58 शव, 146 लापता – जिंदगी की तलाश अब भी जारी

उत्तराखंड में आए जल प्रलय के दसवें दिन मंगलवार (16 फरवरी, 2021) को तपोवन जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में मलबा हटाने का कार्य जारी है। मलबे में फँसी जिंदगियों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे बचावकर्मियों ने अपनी पूरी जी जान लगा दी है।

ताजा जानकारी के मुताबिक, तपोवन में स्थित NTPC टनल में भी सेना, आईटीबीपी और एनडीआरएफ ‘मिशन जिंदगी’ में जुटी हुई है लेकिन अभी तक टनल से एक भी शख्स जिंदा नहीं मिल पाया है। तपोवन जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग से दो और शव मिले हैं।

न्यूज़ एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट्स के अनुसार, अब कुल मृतकों की संख्या 58 हो गई है। वहीं लापता 206 लोगों में से अभी भी 146 लापता है। सुरंग से अब तक 11 शव निकाले जा चुके हैं। वहीं परियोजना के बैराज की ओर मलबा जमा है, जिसमें शवों के दबे होने की आशंका है।

कहा जा रहा है कि एनटीपीसी टनल के अंदर से शवों के मिलने का सिलसिला जारी है। कल यानी सोमवार को टनल के अंदर से जवानों ने 3 शवों को बरामद किया था। हालात इतने दर्दनाक हैं कि खोजबीन के दौरान जवानों को सुरंग की छत पर शव चिपके मिले हैं। 10 दिन से घंटों की मशक्कत के बाद निकाले गए मजदूरों के शव पानी और मलबे की वजह से फुले मिले हैं।

ज्यादतर मृतकों की उम्र 30 से 35 साल के बीच है। अनुमान लगाया जा रहा है कि भयंकर तबाही के दौरान ये सभी अपनी जान बचाने के लिए बाहर की तरफ भागे होंगे। लेकिन अचानक से आए मलबे ने रास्ते को जाम कर दिया, जिससे उन्हें बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। बाढ़ के दबाव से उनका शव सुरंग की छत पर चिपक गया।

वहीं अब इस बात में कोई दो राय नहीं है कि आपदा के इतने दिन बीत जाने के बाद टनल में फँसे किसी भी व्यक्ति का जिंदा बचना बहुत मुश्किल है।

बता दें कि विगत सात फरवरी को उत्तराखंड के चमोली जिले में आपदा आ गई थी। आपदा में कुल 206 लोग लापता हुए थे। ऋषिगंगा और धौली गंगा में आई भीषण आपदा से ऋषिगंगा प्रोजेक्ट पूरी तरह से तहस-नहस हो गई है।

रेस्क्यू टीम टनल में अंदर के हाल जानने के लिए ड्रोन और रिमोट सेंसिंग उपकरणों की मदद भी ले रही है। इस टनल की लंबाई करीब ढाई किलोमीटर है। इसका ज्यादातर हिस्सा आपदा में आए मलबे से भरा पड़ा है। तपोवन में चौबीसों घंटे एंबुलेंस, हेलीकॉप्टर तैनात किया गया है।