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हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की ₹18000 करोड़+ की फंडिंग पर रोक, कैंपस में इस्लामी कट्टरपंथ के उभार को देख ट्रंप ने लिया फैसला

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की 2.2 अरब डॉलर (लगभग ₹18 हजार करोड़) की फंडिंग रोक दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ये फैसला यूनिवर्सिटी में लगातार बढ़ते इस्लामी कट्टरपंथ के चलते किया है। यूनिवर्सिटी में लगातार यहूदियों के खिलाफ घृणा फ़ैलाने की शिकायतें सामने आ रहीं थी।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यूनिवर्सिटी में हमास के समर्थन में प्रदर्शन हुए है और यूनिवर्सिटी का प्रशासन इन्हें रोक नहीं पाया है। ट्रम्प प्रशासन ने यूनिवर्सिटी पर यहूदी प्रोफ़ेसर और छात्रों के साथ भेदभाव करने का आरोप भी लगाया है।

ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि यूनिवर्सिटी का यह रवैया अमेरिका के कानूनों का उल्लंघन है। इसी पर कदम उठाते हुए उन्होंने यूनिवर्सिटी की फंडिंग तत्काल प्रभाव से रोकरोक दी है। उसको अलग से दी जाने वाली 9 अर्ब डॉलर की फंडिंग रोकने पर भी विचार चल रहा है।

यह फैसला लेने से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन से कई बड़े बदलाव करने को कहा था। उन्होंने कहा था प्रशासन को उन छात्रों को पहचानना होगा जो आतंकियों के समर्थक हैं, इसके अलावा यूनिवर्सिटी के भीतर आतंक की वकालत बंद करने को भी ट्रंप ने कहा था।

यूनिवर्सिटी में एडमिशन प्रक्रिया में भी सुधार करने की माँग ट्रंप ने की थी। शुक्रवार (11 अप्रैल, 2025) को हार्वर्ड ने यह माँगे मानने से इनकार कर दिया। आतंक समर्थक छात्रों को ढूँढने को यूनिवर्सिटी ने स्वतंत्रता पर हमला बताया। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने यह फैसला लिया।

इस बीच हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के कुछ प्रोफेसरों ने राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया है। प्रोफेसरों का कहना है कि ये यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता पर हमला है और असंवैधानिक है। प्रोफेसरों के दो ग्रुप ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मैसाचुसेट्स की फेडरल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में केस दर्ज कराया है। इसमें कहा गया है कि यूनिवर्सिटी की फंडिंग रोकना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है।

गौरतलब है कि इजरायल और हमास के बीच युद्ध के दौरान हार्वर्ड में कई रैलियाँ निकाली गई थीं। इनमें अमेरिका के इजरायल से दोस्ती तोड़ने को कहा गया था। कई जगहों पर यहूदियों को गैस चैम्बर में डाल कर मार देने की बातें भी कही गईं थी। राष्ट्रपति ट्रंप के सत्ता में आने के बाद ऐसे तत्वों पर कार्रवाई हो रही है।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पर हाल के दिनों में यह भी आरोप लगे हैं कि यहाँ गैर यहूदी और गैर माइनॉरिटी को वरीयता दी जा रही है। ट्रंप प्रशासन ने ऐसे रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन वाले कार्यक्रमों को खत्म करने की मांग की है और दाखिले के लिए पूरी तरह मेरिट बेस्ड सिस्टम अपनाने को कहा है।

ट्रंप प्रशासन का मानना है कि हार्वर्ड जैसी जानी-मानी यूनिवर्सिटी को जवाबदेह होना चाहिए और जब ये निष्पक्ष नहीं हैं तो उन्हें सरकारी फंडिंग नहीं दी जानी चाहिए।

मुर्शिदाबाद में इस्लामी हिंसा पर भड़के ‘बाबा बागेश्वर’, हिन्दुओं के पलायन पर जताई चिंता: कहा- इसके पीछे साजिश, लेकिन जल्दी सब बंद हो जाएगा

बंगाल में वक्फ कानून के विरोध में हिंसा जारी हैं। मुर्शिदाबाद के अलावा राज्य के कई जिले इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा की आग में झुलस रहे हैं, जिसके चलते हिंदुओं का पलायन भी हुआ है। मुर्शिदाबाद हिंसा को लेकर बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ‘बाबा बागेश्वर’ चिंतिंत है।

पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने कहा, “मैंने सुना है कि वहाँ से हिंदू पलायन कर रहे हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात से भी हिंदू पलायन करेंगे।”

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने आगे कहा “देश में हिंदू डरे हुए हैं। यह सब पहले से ही योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा है। यह देश और खासकर हिंदुओं के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि हिंदू एकजुट नहीं हैं। लेकिन, मेरा मानना है कि जल्द ही ये सब बंद हो जाएगा।”

दक्षिण 24 परगना में पुलिस से भिड़े आईएसएफ समर्थक

कोलकाता रैली में शामिल होने जा रहे आईएसएफ समर्थकों को जब दक्षिण 24 परगना में बसंती राजमार्ग पर भोजेरहाट के पास रोका गया। उस दौरान वहाँ पर मीनाखान और संदेशखाली से भी बड़ी संख्या में आईएसएफ समर्थक भी इकट्ठा थे। पुलिस द्वारा रोके जाने पर भीड़ ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, जिससे तनाव बढ़ गया। इसके बाद हिंसा शुरू हो गई। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शकारियों ने कुछ पुलिस वाहनों में आग लगा दी। इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।

मुर्शिदाबाद में कैसे भड़की हिंसा 

बता दें कि, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में 8 और 11 अप्रैल को वक्फ कानून के विरोध के दौरान प्रदर्शन ने हिंसा का रूप ले लिया। अब तक मुर्शिदाबाद हिंसा में 3 लोगों के मौत हो चुकी हैं। वहीं भाजपा नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी की याचिका पर सुनवाई के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने जिले में केंद्रीय बलों की तैनाती के आदेश दिए थे। इस्लामी कट्टरपंथी हिंसा के चलते सैकड़ों हिंदू नदी पार करके पास के मालदा जिले में शरण लेने को मजबूर हुए हैं।

ISF के उपद्रवियों की आगजनी, पुलिस पर भी हमला: मालदा, मुर्शिदाबाद और सिलीगुड़ी के बाद अब दक्षिणी 24 परगना में भड़की हिंसा

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के भांगर में सोमवार (14 अप्रैल 2025) को वक्फ (संशोधन) कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क उठी। जहाँ इस्लामी कट्टरपंथी तत्वों की मौजूदगी से भरे इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के कार्यकर्ताओं ने पुलिस के साथ जमकर झड़प की।

इंडियन सेक्युलर फ्रंट के हिंसक प्रदर्शन में कई पुलिस वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया, जिसमें एक वैन और कई दोपहिया वाहन जलकर खाक हो गए। पुलिस ने बताया कि इस झड़प में आठ पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि एक ISF कार्यकर्ता के सिर में चोट लगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ISF समर्थक कोलकाता के रामलीला मैदान में वक्फ कानून के खिलाफ रैली के लिए जा रहे थे। इस रैली को भांगर के विधायक और ISF नेता नौशाद सिद्दीकी संबोधित करने वाले थे। पुलिस ने बिना अनुमति के रैली की जानकारी मिलने पर बसंती हाईवे के पास भोजेरहाट में बैरिकेड्स लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोका। इससे नाराज इस्लामी भीड़ ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की और पथराव शुरू कर दिया। हालात बेकाबू होने पर पुलिस को लाठीचार्ज और आँसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर हमला किया और वाहनों में आग लगा दी। कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।” प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ISF कार्यकर्ताओं ने बसंती हाईवे पर धरना देकर रास्ता जाम कर दिया, जिससे घंटों ट्रैफिक बाधित रहा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल और वरिष्ठ अधिकारियों को तैनात किया गया। कुछ देर बाद प्रदर्शनकारी तितर-बितर हुए और इलाके में शांति बहाल हो गई।

नौशाद सिद्दीकी ने वक्फ कानून को “मुसलमानों और संविधान पर हमला” करार देते हुए इसे वापस लेने की माँग की। उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी ने कहा है कि बंगाल में यह कानून लागू नहीं होगा, फिर पुलिस हमें शांतिपूर्ण रैली क्यों रोक रही है?” ISF ने बीजेपी पर सांप्रदायिक तनाव भड़काने और तृणमूल कॉन्ग्रेस पर विरोध दबाने का आरोप लगाया।

वहीं, तृणमूल कॉन्ग्रेस के विधायक शौकत मोल्ला ने ISF को ‘महत्वहीन पार्टी’ बताते हुए कहा, “ये लोग अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। इनका कोई जनाधार नहीं है।” बीजेपी ने हिंसा के लिए ममता सरकार को जिम्मेदार ठहराया। बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने इसे “जिहादी ताकतों का सुनियोजित हमला” बताया और केंद्र से हस्तक्षेप की माँग की।

यह हिंसा मुर्शिदाबाद की घटनाओं के बाद हुई, जहाँ वक्फ कानून के विरोध में शुक्रवार और शनिवार को इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा में तीन लोग मारे गए। वहाँ 200 से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए गए। मुर्शिदाबाद के सुती, धुलियान और जंगीपुर में दुकानें, घर और होटल जलाए गए। हिंसा के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने केंद्रीय बल तैनात करने का आदेश दिया।

बता दें कि ममता बनर्जी ने शनिवार (12 अप्रैल 2025) को ऐलान किया था कि उनकी सरकार बंगाल में वक्फ कानून लागू नहीं करेगी। उन्होंने सभी धर्मों से शांति बनाए रखने की अपील की। फिर भी भांगर की घटना ने साबित कर दिया कि राज्य में तनाव कम नहीं हुआ है। पुलिस ने हाई अलर्ट जारी कर इलाके में निगरानी बढ़ा दी है।

हरियाणा के इस शख़्स को ख़ुद PM मोदी ने पहनाए जूते, जानिए क्यों 14 सालों से नंगे पाँव थे रामपाल कश्यप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने जमीन से जुड़े स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। उन्हें कई बार मजदूरों पर फूल बरसाते और सफाईकर्मियों के पाँव धोते भी देखा गया है। सोचिए, अगर किसी व्यक्ति को देश का प्रधानमंत्री ख़ुद जूते पहनाए, तो उसे कैसा लगेगा। हरियाणा में यही हुआ है। कैथल के रामपाल कश्यप ने डेढ़ दशक पहले प्रण लिया था कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बन जाने और उनसे मिलने के बाद ही वो जूते पहनेंगे, वरना नंगे पाँव रहेंगे। अब ख़ुद पीएम मोदी ने उनकी मुराद पूरी कर दी है।

इतना ही नहीं, इस वीडियो को ख़ुद पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर करते हुए लिखा, “हरियाणा के यमुनानगर में कैथल के रामपाल कश्यप जी से मिलने का सौभाग्य मिला। इन्होंने 14 वर्ष पहले एक व्रत लिया था कि ‘मोदी जब तक प्रधानमंत्री नहीं बन जाते और मैं उनसे मिल नहीं लेता, तब तक जूते नहीं पहनूँगा।’ मुझे आज उनको जूते पहनाने का अवसर मिला। मैं ऐसे सभी साथियों की भावनाओं का सम्मान करता हूँ, परंतु मेरा आग्रह है कि वो इस तरह के प्रण लेने के बजाए किसी सामाजिक अथवा देशहित के कार्य का प्रण लें।”

प्रधानमंत्री ने सलाह दी है कि उनके लिए कोई ऐसे प्रण न ले, लेना भी हो तो देशहित व समाज कल्याण में ऐसे शपथ लें। वीडियो में उन्होंने रामपाल कश्यप को नए जूते देने के बाद पूछा, “ठीक से आ गया?”, जिसपर रामपाल ने जवाब दिया – “हाँ”। प्रधानमंत्री ने ख़ुद जूते पहनाने में उनकी मदद की। साथ ही उन्हें सलाह दी थी जूते पहनते रहना। रामपाल कश्यप ने कहा कि आपके दर्शन हो गए, अब जूते पहनूँगा। इसके बाद पीएम मोदी ने पूछा कि क्या उन्हें मन में पूरा यकीन था कि पीएम से मुलाकात होगी?

इसपर रामपाल कश्यप ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास था। पीएम मोदी ने (सोमवार 14 अप्रैल, 2025) को हरियाणा को हिसार में पहले एयरपोर्ट की भी सौगात दी। आंबेडकर जयंती के अवसर पर उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने बाबासाहेब की प्रेरणा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने के लिए अनेक कदम उठाए हैं, लेकिन संविधान के नाम पर राजनीतिक रोटी सेंकने वालों ने उनसे जुड़े पवित्र स्थानों का ना सिर्फ अपमान किया, बल्कि इतिहास से मिटाने का प्रयास भी किया।

ग्रेटर नोएडा में फॉक्सकॉन लगाएगा 300 एकड़ का मैन्युफैक्चरिंग प्लांट, 40 हजार नौकरियाँ मिलेंगी: चीन पर अमेरिकी टैरिफ से भारत को फायदा

चीनी उत्पादों पर अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले टैरिफ से भारत को फायदा हो सकता है। दुनिया भर में आईफोन की सबसे प्रसिद्ध कंपनी एप्पल अब टैरिफ के कारण चीन से अपने मैनुफैक्चरिंग प्लांट को हटाने पर विचार कर रही है। इसके लिए आईफोन बनाने वाली कंपनी फॉक्सकॉन अब उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में मैनुफैक्चरिंग प्लांट लगाने की योजना बना रहा है।

मैनुफैक्चरिंग के मेगा प्लांट लिए यमुना एक्सप्रेस के पास 300 एकड़ की जमीन खोजी जा रही है। उत्तर भारत में फॉक्सकॉन की ये पहली सुविधा होगी। भारत के दक्षिणी राज्यों में से बेंगलुरू, श्रीपरंबुदुर और हैदराबाद में मैनुफैक्चरिंग प्लांट पहले से ही लाए जा चुके हैं। साथ ही ग्रेटर नोएडा में शुरू होने वाली यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सुविधा होगी।

40 हजार नई नौकरियाँ

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नया प्लांट के शुरू होने के बाद 40 हजार से भी अधिक नौकरियाँ निकलेंगी। साथ ही प्लांट के परिसर में ही में लोगों को रहने की भी सुविधा मिलेगी। फॉक्सकॉन एप्पल के साथ सोनी और माइक्रोसॉफ्ट के लिए भी उत्पाद तैयार करती है। एक खास बात ये भी है कि दुनिया भर के लगभग 50 प्रतिशत मोबाइल फोन ग्रेटर नोएडा में तैयार होकर भारत से निर्यात किए जाते हैं। ऐसे में इस जगह को चुनना कंपनी के लिए फायदेमंद सिद्ध हो सकता है।

नोएडा में प्लांट की खास वजह

नोएडा में कई मैनुफैक्चरिंग यूनिट हैं। ऐसे में यहाँ इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ सप्लायर और काम के लिए स्थानीय लोग भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा यमुना एक्सप्रेसवे से लगे होने के कारण नोएडा आसानी से पहुँचा जा सकता है। एक्सप्रेसवे, जेवर में बन रहे नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को भी ग्रेटर नोएडा और आसपास के इलाकों से जोड़ता है।

ग्रेटर नोएडा में मैनुफैक्चरिंग यूनिट खोलने से फॉक्सकॉन (Foxconn) को आगे चलकर इलेक्ट्रॉनिक्स मैनुफैक्चरिंग सर्विसेज के लिए बेहतर अवसर मिल सकते हैं। इससे कई अन्य कंपनियों के लिए भी कंपनी उत्पाद तैयार कर सकती है।

तेलंगाना ने SC आरक्षण में लागू किया वर्गीकरण का फैसला, अब 3 श्रेणियों में मिलेगा रिजर्वेशन: जानिए क्या है पूरा फैसला

तेलंगाना सरकार ने राज्य में अनुसूचित जाति आरक्षण व्यवस्था में वर्गीकरण लागू किया है। यह फैसला आरक्षण के ढाँचे में बड़ा बदलाव लाने वाला है। अब एससी समुदायों को तीन समूहों में बाँटा जाएगा ताकि आरक्षण का लाभ जरूरतमंदों तक सही तरीके से पहुँचे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार (14 अप्रैल 2025) को राज्य के सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने घोषणा की कि राज्य सरकार ने न्यायमूर्ति शमीम अख्तर (सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज) की अध्यक्षता में बनी आयोग की सिफारिशों के आधार पर सरकारी आदेश (जीओ) जारी कर दिया है।

नए आरक्षण वर्गीकरण के अनुसार

समूह I: सबसे पिछड़े 15 समुदाय – 1% आरक्षण

समूह II: मध्यम रूप से लाभान्वित 18 समुदाय – 9% आरक्षण

समूह III: अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति वाले 26 समुदाय – 5% आरक्षण

कुल मिलाकर, एससी वर्ग के लिए पहले से मौजूद 15% आरक्षण को अब इन तीन समूहों में बाँट दिया गया है।

इस फैसले की घोषणा बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती (14 अप्रैल) पर की गई। मंत्री रेड्डी ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा, “पहले की सरकारों ने केवल प्रस्ताव पास किए, हमने उसे जमीन पर उतारा है।”

अब राज्य में होने वाली सभी सरकारी भर्तियाँ और शैक्षिक दाखिले इसी नए मॉडल के तहत होंगे। साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि 2026 की जनगणना में एससी की आबादी बढ़ने पर आरक्षण प्रतिशत को फिर से तय किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने खोला रास्ता

इस कदम की नींव अगस्त 2024 में सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की संविधान पीठ के ऐतिहासिक फैसले ने रखी थी। कोर्ट ने 6:1 बहुमत से यह स्पष्ट किया था कि एससी/एसटी समुदायों के भीतर उप-वर्गीकरण किया जा सकता है ताकि असल में वंचित समूहों को अधिक फायदा मिल सके। 2004 के ई.वी. चिन्नैया फैसले को पलटते हुए कोर्ट ने कहा कि सभी जातियाँ समान रूप से पिछड़ी नहीं होतीं, इसलिए आरक्षण का बँटवारा भी समान रूप से नहीं हो सकता।

चरक पूजा में श्रद्धालुओं पर हमला: मालदा-मुर्शिदाबाद के बाद अब सिलीगुड़ी में मुस्लिम भीड़ का उत्पात, साधुओं को भी नहीं छोड़ा

मालदा व मुर्शिदाबाद के बाद बाद अब पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में हिन्दू विरोधी हिंसा शुरू हो गई है। साधुओं पर भी हमले की ख़बर है। स्थानीय भाजपा विधायक शंकर घोष ने जानकारी दी कि रविवार (13 अप्रैल, 2025) को वार्ड संख्या 4 के 2 लड़के चरक पूजा के लिए महानंदा नदी का जल लेने गए थे, लेकिन नदी किनारे बैठे 5 लड़कों ने उन दोनों हिन्दू लड़कों पर बोतल फेंके। जब उन दोनों ने इसका विरोध किया तो उन्हें बुरी तरह पीटा गया। शंकर घोष ने कहा कि पश्चिम बंगाल में अब हिन्दू होना पाप हो गया है।

विधायक शंकर घोष ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ऐसा माहौल बनाया है। दोनों घायल हिन्दू लड़कों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। शंकर घोष ने याद दिलाया कि कैसे शमशेरगंज में हरगोविंद दास और उनके बेटे चन्दन दास को घर में घुसकर मार डाला गया। उधर ‘रिपब्लिक बांग्ला’ ने अपनी ख़बर में 2 साधुओं पर हमले की ख़बर दी है। पीड़ित लड़कों में से एक माणिक सरकार ने बताया कि वो लोग चरक पूजा में लगे हुए थे, उसी दौरान उनपर बोतलों से हमला किया गया।

उन्होंने बताया कि विरोध करने पर कुछ देर बाद वो लोग ख़तरनाक हथियारों के साथ लौटे। घटनास्थल पर पत्थर और डंडे पड़े हुए देखा जा सकते हैं। वहीं साधुओं पर हमले के वीडियो में क्षतिग्रस्त गाड़ी देखी जा सकती है। घटना सिलीगुड़ी के ज्योतिनगर की है। ‘उत्तर बांग्ला संवाद’ के अनुसार, कई घरों में भी तोड़फोड़ की गई। टोटो क्षतिग्रस्त कर दिया गया। ईंट-पत्थर फेंके गए। सिलीगुड़ी के कमिश्नर C सुधाकर और डिप्टी कमिश्नर (हेडक्वार्टर) तन्मय सरकार मौके पर पहुँचे।

घटनास्थल पर बड़ी संख्या में पुलिस के जवान कैम्प कर रहे हैं। शहर को अलर्ट पर रखा गया है, पुलिस स्थिति के नियंत्रण में होने की बात कह रही है। उधर मुर्शिदाबाद में राज्य के 23 दक्ष पुलिस अधिकारियों को मामला सँभालने के लिए भेजा गया है। मुर्शिदाबाद और मालदा में लगभग 400 हिन्दू परिवारों ने पलायन किया है। वक्फ कानून के विरोध के नाम पर दंगे हुए। मुस्लिम भीड़ ने रेलवे सेवा ठप्प कर दी। सार्वजनिक व प्राइवेट वाहनों को आग के हवाले किया गया।

गुना में बुलडोजर एक्शन को लेकर हिंदुओं का प्रदर्शन, पुलिस ने किया लाठीचार्ज: हनुमान जयंती शोभायात्रा पर मस्जिद के पास हुई थी पत्थरबाजी

मध्य प्रदेश के गुना में हनुमान जयंती के जुलूस पर हुए पथराव के बाद तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा। सोमवार (14 अप्रैल 2025) को विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल ने हिंसा करने वालों के खिलाफ हनुमान चौक पर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ता हमलावरों के घरों पर बुलडोजर चलाने की माँग कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान कुछ नकाबपोश युवकों ने बस्तियों में पथराव किया, जिससे हालात और बिगड़ गए। पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए हल्का लाठीचार्ज किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एसपी संजीव कुमार सिन्हा ने खुद लाठी लेकर उपद्रवियों को खदेड़ा। उन्होंने कहा, “स्थिति सामान्य है, पुलिस तैनात है। असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई होगी।” कलेक्टर किशोर कान्याल ने भी अफवाहों से बचने की अपील की।

बता दें कि शनिवार (12 अप्रैल 2025) को कर्नलगंज इलाके में मदीना मस्जिद के पास जुलूस पर हमला हुआ। डीजे बजाने को लेकर शुरू हुआ विवाद पथराव और हिंसा में बदल गया। हमलावरों ने पत्थर, बेल्ट और धारदार हथियारों से हमला किया। बीजेपी पार्षद ओमप्रकाश कुशवाह (गब्बर) के 11 साल के बेटे अकुल सहित कई लोग घायल हुए। हनुमान की वेशभूषा में समर्थ नामक युवक पर बेल्ट से हमला हुआ, उनके कपड़े फाड़े गए और गालियाँ दी गईं। एक वायरल वीडियो में युवक तलवार लहराता दिखा। पुलिस ने मुख्य आरोपित विक्की खान, यूसुफ खान समेत 17 लोगों को गिरफ्तार किया है।

पार्षद कुशवाह ने शिकायत में बताया कि आमीन पठान ने उनके ड्राइवर रजत ग्वाल पर पिस्तौल से गोली चलाई, जो कान के पास से निकली। रजत पर लाठी-डंडों से हमला हुआ, जिसमें उनके हाथ में चोट आई। हिंदू संगठनों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर सख्त कार्रवाई की माँग की। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने देर रात एसपी से बात कर हालात की जानकारी ली और कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।

लोगों का कहना है कि त्योहारों के समय माहौल खराब करने की कोशिश की गई। प्रशासन ने ड्रोन और फ्लैग मार्च से निगरानी बढ़ा दी है। कर्नलगंज में शांति है, लेकिन तनाव बरकरार है। फिलहाल, पुलिस ने अतिरिक्त बल तैनात कर हालात पर काबू पा लिया है।

‘मुस्लिमों के लिए संविधान से पहले शरीयत’: आंबेडकर जयंती पर झारखंड के मंत्री हफीजुल हसन अंसारी का ऐलान, कहा – हमारे सीने में है क़ुरान

झारखंड के खेल एवं युवा मामले व अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन अंसारी ने शरीयत को संविधान के ऊपर बताया है। बड़ी बात ये है कि उन्होंने ये बयान बाबासाहेब डॉ भीमराव आंबेडकर की जयंती के अवसर पर सोमवार (14 अप्रैल, 2025) को दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शरीयत उनके लिए सबसे बड़ा है। मुस्लिमों की बात करते हुए हफीजुल हसन अंसारी ने कहा कि हम सीने में क़ुरान और हाथ में संविधान रखते हैं। ‘News11 डिजिटल’ से बात करते हुए उन्होंने ये बयान दिया।

उन्होंने कहा कि पहले हम शरीयत को पकड़ेंगे, इसके बाद संविधान को – इस्लाम में वही है। झारखंड की जिस गठबंधन सरकार में वो मंत्री हैं, उसका हिस्सा कॉन्ग्रेस भी है। एक तरफ राहुल गाँधी अपने हर कार्यक्रम में संविधान का रट्टा लगते रहते हैं, वहीं दूसरी हफीजुल हसन अंसारी के बयान को लेकर उनकी पार्टी ने चुप्पी साधी हुई है। 2024 का पूरा लोकसभा चुनाव संविधान बचाने के नाम पर लड़ा गया। आज I.N.D.I. गठबंधन का मंत्री खुलेआम शरीयत की वकालत कर रहा।

झारखंड की प्रदेश भाजपा ने मंत्री के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “जिनके सीने में शरीया है, उनके लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश के रास्ते खुले हैं। हिंदुस्तान सिर्फ बाबासाहेब डॉ भीमराव आंबेडकर के संविधान से चलेगा और सबसे ऊपर रहेगा।” वहीं गोड्डा से भाजपा संसद निशिकांत दुबे ने कहा, “कॉन्ग्रेस तथा उनके सहयोगियों के लिए बाबासाहेब आंबेडकर जी के संविधान का कोई मूल्य नहीं है। यह हैं झारखंड सरकार के मंत्री हफीजुल अंसारी, इनके अनुसार पहले शरिया क़ानून यानी मुस्लिम संविधान, फिर कोई संविधान। मीडिया कुछ नहीं बोलेगा क्योंकि यह इंडी गठबंधन कह रहा है।”

हफीजुल हसन अंसारी 2021 से ही गोड्डा के मधुपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। उससे पहले 4 बार उनके अब्बा हाजी हुसैन अंसारी यहाँ से MLA रह चुके हैं। वो झारखंड में मंत्री बनने वाले पहले व एकमात्र मुस्लिम थे। उनके बाद उनके बेटे को अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय सौंपा गया। हाजी हुसैन अंसारी कोरोना पीड़ित होने के बाद चल बसे थे। उनकी ओपन हार्ट सर्जरी भी हुई थी। झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठियों द्वारा जनजातीय समाज की जमीनें हड़पने व उनकी लड़कियों को फँसाने के मामले सामने आते रहे हैं।

हाल ही में संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित किए गए वक्फ संशोधन क़ानून को लेकर भी हफीजुल हसन अंसारी ने विरोध जताया। उन्होंने वक्फ को 1400 वर्ष पुराना कॉन्सेप्ट बताते हुए केंद्र सरकार पर मुस्लिमों को जेल में भेजने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वक्फ एक्ट भाजपा का एक राजनीतिक स्टंट है, कल को ईसाई व जनजातीय समाज को निशाना बनाते हुए भी क़ानून बनाए जाएँगे। उन्होंने देश-दुनिया में अराजकता की धमकी देते हुए कहा कि मुस्लिम सब्र में है, कब्र में नहीं।

निकाह से किया इनकार तो बांग्लादेश ने अपनी ही मॉडल को बताया राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा, 30 दिन के लिए जेल में ठूँस दिया: जानिए क्यों मेघना आलम के पीछे पड़ी यूनुस सरकार

2020 में ‘मिस अर्थ बांग्लादेश’ बनीं मॉडल मेघना आलम को गिरफ़्तार कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि उन्होंने मुल्क़ के कूटनीतिक संबंधों को गंभीर नुकसान पहुँचाया है। वहीं उनके अब्बा ने अरब मुल्क़ के एक राजनयिक पर इस मामले का ठीकरा फोड़ा है। पुलिस का कहना है कि फ़िलहाल बिना किसी चार्ज के मेघना आलम को हिरासत में रखा गया है, क्योंकि उन्होंने कुछ ‘महत्वपूर्ण शख़्सियतों’ पर ग़लत आरोप लगाकर बांग्लादेश के कूटनीतिक संबंधों को बिगाड़ा है।

पुलिस के प्रवक्ता मोहम्मद तालेबुर रहमान ने कहा कि जिन शख़्सियतों पर आरोप लगाया गया है वो विदेशी नागरिक हैं। 30 वर्षीया मॉडल के अब्बा ने कहा कि ढाका में एक अरब मुल्क़ के पूर्व राजदूत के साथ संबंधों के कारण उनकी बेटी को गिरफ़्तार किया गया है। उनका कहना है कि उनकी बेटी और उक्त राजदूत रिलेशनशिप में थे, लेकिन उसके बीवी-बच्चे होने के कारण मेघना आलम ने निकाह के प्रस्ताव को नकार दिया था। वहीं मेघना आलम ने लाइव स्ट्रीम के जरिए दिखाया कि उनके घर में पुलिस घुस गई है।

पुलिस का कहना है कि मेघना आलम ने अपनी हरकतों से राज्य की सुरक्षा को बाधित किया है और वित्तीय हितों को भी नुकसान पहुँचाया है। बांग्लादेश के ‘स्पेशल पॉवर्स एक्ट’ के तहत उन्हें गिरफ़्तार किया गया है। इसके तहत किसी भी व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक जेल में रखा जा सकता है। मानवाधिकार संगठनों ने इसकी निंदा की है। ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ ने इस गिरफ़्तारी को ‘कठोर’ बताते हुए कहा कि या तो मेघना आलम को किसी अंतरराष्ट्रीय मुहर वाले क़ानून के तहत आरोपित किया जाए, या उन्हें रिहा किया जाए।तक

यहाँ तक कि बांग्लादेश की नई सरकार के क़ानूनी सलाहकार आसिफ नज़रुल ने भी कहा कि ये गिरफ़्तारी उचित नहीं है। हालाँकि, इस पूरे मामले में जो बातें निकलकर आ रही हैं वो किसी रोमांचक फ़िल्मी कहानी से कम नहीं हैं। जिस अरब मुल्क़ की बात उनके पिता ने की, वो सऊदी अरब है। पुलिस का कहना है कि राजदूत एसा आलम को ब्लैकमेल कर उनसे मेघना आलम ने 5 मिलियन डॉलर (43.04 करोड़ रुपए) वसूलने की कोशिश की थी। एसा युसूफ अपने मुल्क़ वापस लौट चुके हैं।

एक फेसबुक पोस्ट के जरिए मेघना आलम ने आरोप लगाया था कि एसा युसूफ उन्हें डरा रहे हैं, ताकि वो सच्चाई पोस्ट न करें। बाद में बांग्लादेशी मॉडल ने इस पोस्ट को डिलीट कर दिया था। मेघना का कहना था कि उन्हें धमकियाँ मिल रही हैं और वो सुरक्षित नहीं हैं। सोशल मीडिया पर उनकी रिहाई के लिए ‘फ्री मेघना’ भी ट्रेंड कराया गया। कोर्ट ने फ़िलहाल उन्हें 1 महीने जेल में रखने की अनुमति दी है। रेजाउल करीम मलिक नामक पुलिस अधिकारी को गिरफ़्तारी सही तरीके से न करने के लिए निलंबित भी किया गया है। मेघना आलम ब्यूटी संगठन भी चलती हैं।