करीब 14,000 करोड़ के PNB घोटाले का आरोपित भगोड़ा मेहुल चोकसी को बेल्जियम में गिरफ़्तार किए जाने के बाद उसे भारत लाने की तैयारी चल रही है। वहीं हीरा व्यापारी ने प्रत्यर्पण से बचने के लिए बीमारी का बहाना बनाना शुरू कर दिया है।
मेहुल चोकसी की गिरफ़्तारी के बाद बारबरा जबारिका नामक महिला एक बार फिर से चर्चा में आ गई है। बता दें कि चोकसी को लेकर ये बात सुर्ख़ियों में आई थी कि उसे ‘हनी ट्रैप’ में फँसाया गया था और उसका अपहरण किया गया था। इसी दौरान उसने बारबरा जबारिका नामक हंगरी की एक महिला का नाम भी लिया था।
दरअसल, 2018 में चोकसी भारत से फरार हो गया और बैंक धोखाधड़ी के बाद कार्रवाई से बचने के लिए एंटीगुआ और बारबुडा में उतरा। उसने कुछ निवेश करके वहाँ की नागरिकता हासिल की। 2021 में वह डोमिनिका में दिखाई दिया और अवैध तरीके से प्रवास के लिए गिरफ्तार किया गया। हालाँकि कुछ दिनों तक जेल में रहने के बाद उसे रिहा कर दिया गया।
तभी बारबरा जबारिका का मामला सामने आया था। चोकसी ने दावा किया था कि उसे अगवा किया गया, प्रताड़ित किया गया और एक नाव पर बिठाया गया जो उसे एंटीगुआ से डोमिनिका ले गई और बारबरा पूरी साजिश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी।
कौन है बारबरा जबारिका?
जानकारी के मुताबिक हंगरी की नागरिक बारबरा जबारिका एक ‘प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट एजेंट’ है। खुद को सेल्स नेगोशिएटर बताती है। बारबरा रियल एस्टेट और डायरेक्ट सेल्स के क्षेत्र में काम कर चुकी है।
मेहुल चोकसी ‘हनी ट्रैप’ में फँसा था
मेहुल चोकसी ने खुद को ‘हनी-ट्रैप’ और अपहरण की साजिश का शिकार बताया था। इस दौरान उसने बारबरा जबारिका का नाम लिया। चोकसी ने कहा, ” हंगरी की रहने वाली बारबरा जबारिका ने हनी-ट्रैप में फँसाया।” वहीं 2020 में मेहुल चौकसी की पत्नी प्रीति चौकसी के दावा किया था कि बारबरा जबारिका के प्यार में मेहुल चोकसी फँस गए हैं।
मैं चौकसी की गर्लफ्रेंड नहीं- बारबरा
मेहुल चोकसी ने दावा किया था कि बारबरा जबारिका ने उससे झूठी दोस्ती की और उसकाअपहरण करवाया। चौकसी के मुताबिक अपहरण से ठीक पहले उसे रात के डिनर पर बुलाया गया और जबरन पकड़ कर ले जाया गया। हालाँकि बारबरा ने इन दावों को खारिज कर दिया और कहा कि वह चौकसी की गर्लफ्रेंड नहीं है।
‘राज’ बन कर मिला चौकसी- बारबरा
बारबरा ने दावा किया कि उसके पास नौकरी है, पैसे है। उसे किसी की मदद की कोई जरूरत नहीं है। उसने आगे दावा किया कि मेहुल चोकसी ने अपनी पहचान को गलत बताया और खुद को ‘राज’ कहा।
बारबरा ने ये भी दावा किया, “राज ने ही सबसे पहले मुझसे संपर्क किया था। उसने मेरा नंबर माँगा और मुझसे दोस्ती की। उसकी पत्नी जो कह रही हैं, वो सच नहीं है।”
कर्नाटक में जाति जनगणना रिपोर्ट लीक होने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है। ख़ासकर वोक्कालिगा और लिंगायत जैसी प्रभावशाली समुदायों के नेताओं और विधायकों ने रिपोर्ट पर गहरी नाराजगी जताई है। लिंगायत समुदाय की प्रमुख संस्था अखिल भारतीय वीरशैव लिंगायत महासभा ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और नयी जनगणना कराने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
कर्नाटक सरकार को गुरुवार (10 अप्रैल, 2025) को जाति आधारित जनगणना रिपोर्ट सौंपी गई थी, लेकिन इसे अभी आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया गया है। इस रिपोर्ट के कुछ हिस्से लीक हो गए हैं, जिससे कई समुदायों में असंतोष पैदा हो गया है।
लीक हुई रिपोर्ट के अनुसार, वोक्कालिगा समुदाय की आबादी 61.6 लाख (कुल आबादी का 10.3%) बताई गई है। इनके लिए 7% आरक्षण की सिफारिश की गई है। वहीं लिंगायत समुदाय की आबादी 66.3 लाख (11%) बताई गई है। इनके लिए 8% आरक्षण की सिफारिश की गई है। जबकि मुस्लिम समुदाय की आबादी 75.2 लाख (12.6%) बताई गई है और उनके आरक्षण को 4% से बढ़ाकर 8% करने की सिफारिश की गई है।
क्या है लिंगायत समुदाय की आपत्ति?
‘अखिल भारतीय वीरशैव लिंगायत महासभा’ के अध्यक्ष और पूर्व DGP शंकर बिदरी ने रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि लिंगायतों की संख्या 35% के करीब है। उनका दावा है कि राज्य के 31 में से लगभग 15 जिलों में लिंगायतों की संख्या 10 लाख से अधिक है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में लिंगायत समुदाय को विभिन्न उप-समुदायों में बाँटकर उनकी संख्या को जानबूझकर कम करके दिखाया गया है। महासभा ने माँग की है कि एक नई, निष्पक्ष और पारदर्शी जाति जनगणना कराई जाए।
वोक्कालिगा नेताओं का विरोध
वोक्कालिगा समुदाय के कई नेता और संत इस रिपोर्ट का खुलकर विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी जनसंख्या को कम आँककर उनके साथ अन्याय किया गया है। डिप्टी सीएम DK शिवकुमार, जो स्वयं वोक्कालिगा समुदाय से हैं, ने कॉन्ग्रेस पार्टी के वोक्कालिगा विधायकों की मंगलवार (15 अप्रैल, 2025) शाम 6 बजे बैठक बुलाई है। उनका कहना है कि उन्होंने अभी रिपोर्ट पूरी तरह नहीं पढ़ी है, लेकिन सभी की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए आगे की रणनीति तय की जाएगी।
सरकार ने क्या दी प्रतिक्रिया?
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस मुद्दे पर अब तक चुप्पी साधी हुई है और कहा है कि इस पर फैसला विशेष कैबिनेट बैठक में लिया जाएगा। वहीं गृहमंत्री G परमेश्वर ने बताया कि गुरुवार (17 अप्रैल, 2025) को होने वाली कैबिनेट बैठक में सिर्फ जाति जनगणना रिपोर्ट पर ही चर्चा होगी। उन्होंने कहा, “यह केवल एक शुरुआत है। अभी इस पर विचार किया जाएगा।”
इधर, वन मंत्री ईश्वर खांड्रे, जो लिंगायत समुदाय से हैं, ने कहा कि वह अपने समुदाय के नेताओं से राय लेकर कैबिनेट बैठक में साझा करेंगे। BJP से निष्कासित विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने कहा कि अगर मुस्लिम आबादी सबसे ज़्यादा है, तो उन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा क्यों दिया जाए? उन्होंने ब्राह्मण समुदाय को भी अल्पसंख्यक दर्जा देने की माँग की, जिनकी संख्या मात्र 2% बताई गई है।
Vijayapura MLA @BasanagoudaBJP rejected the caste census survey, alleging it was not conducted properly.
“We are not going to accept the report,” Yatnal said, questioning how Muslims could be classified as minorities when their population was the highest after Scheduled Castes.… pic.twitter.com/qk0XIPgU5x
लुब्ब-ए-लुबाब ये कि कर्नाटक की राजनीति में जाति जनगणना रिपोर्ट एक बड़ा मुद्दा बन गई है। वोक्कालिगा और लिंगायत समुदाय की नाराज़गी ने कॉन्ग्रेस सरकार को मुश्किल में डाल दिया है। आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक बयानबाज़ी और गहराएगी या सरकार किसी आम सहमति पर पहुँचेगी।
यह गुरुवार (17 अप्रैल, 2025) की बैठक के बाद साफ हो सकेगा। यदि सरकार इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करती है और सभी समुदायों की राय लेकर संतुलन बनाती है, तो यह सामाजिक न्याय की दिशा में एक मजबूत क़दम माना जा सकता है। लेकिन, अगर असंतोष और विरोध ऐसे ही चलता रहा, तो यह राज्य में जातीय ध्रुवीकरण को भी बढ़ा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (15 अप्रैल 2025) को इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया, जिसमें हाई कोर्ट ने रेप पीड़िता को ही जिम्मेदार ठहराते हुए आरोपित को जमानत दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमानत देना जज का अधिकार है, लेकिन पीड़िता को दोषी बताने वाली टिप्पणी गलत है। कोर्ट ने जजों से संवेदनशीलता बरतने और अपने शब्दों पर ध्यान देने को कहा।
रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की टिप्पणी को असंवेदनशील बताया। जस्टिस गवई ने कहा कि जमानत देना अलग बात है, लेकिन पीड़िता पर ऐसी टिप्पणी क्यों? उन्होंने जजों से सावधानी बरतने को कहा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी कहा कि ऐसी टिप्पणियाँ आम लोगों के बीच गलत संदेश देती हैं। लोगों को लगता है कि न्याय नहीं हुआ।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को चार हफ्ते बाद सुनवाई के लिए टाल दिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी टिप्पणियाँ पीड़िताओं के लिए न्याय की राह को और मुश्किल बना देती हैं।
बता दें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट में जस्टिस संजय कुमार सिंह ने इस मामले की सुनवाई की थी। उन्होंने कहा कि अगर पीड़िता के आरोप सही भी मान लिए जाएँ, तो भी वह खुद इस घटना के लिए जिम्मेदार है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़िता एमए की छात्रा है, इसलिए उसे अपने कदमों की नैतिकता और परिणाम समझने चाहिए थे। मेडिकल जाँच में पीड़िता का हाइमन टूटा हुआ पाया गया, लेकिन डॉक्टर ने यौन हिंसा की पुष्टि नहीं की। इस आधार पर कोर्ट ने आरोपित को जमानत दे दी थी।
यह मामला सितंबर 2024 का है, जब नोएडा की एक यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली एमए की छात्रा ने अपने पुरुष मित्र पर रेप का आरोप लगाया था। पीड़िता ने बताया कि वह अपनी सहेलियों के साथ दिल्ली के हौज खास में एक बार में गई थी। वहाँ शराब पीने के बाद वह नशे में थी। सुबह तीन बजे तक बार में रहने के बाद वह आरोपित के साथ चली गई, जो उसे अपने घर ले जाने की बात कह रहा था।
पीड़िता का आरोप है कि आरोपित उसे नोएडा के बजाय गुरुग्राम में अपने रिश्तेदार के फ्लैट में ले गया। वहाँ उसने पीड़िता के साथ दो बार रेप किया। पीड़िता ने 23 सितंबर 2024 को नोएडा के सेक्टर-126 थाने में शिकायत दर्ज की। इसके बाद पुलिस ने 11 दिसंबर 2024 को आरोपित को गिरफ्तार किया।
यह पहला मौका नहीं है जब इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर सवाल उठे हैं। इससे पहले मार्च 2025 में हाई कोर्ट ने कहा था कि एक नाबालिग लड़की का स्तन पकड़ना और उसका पायजामा तोड़ना रेप की कोशिश नहीं है। उस फैसले पर भी सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी।
पश्चिम बंगाल में वक्फ कानून के विरोध में हुई इस्लामी हिंसा के चलते हिन्दू पलायन जारी है। बड़ी संख्या में हिन्दू पश्चिम बंगाल से भाग कर झारखंड पहुँचे हैं। यह लोग इस्लामी कट्टरपंथियों से बचने के लिए अपने रिश्तेदारों के यहाँ भाग गए हैं। कई लोग बचने के लिए एम्बुलेंस आदि में छुपते हुए मुर्शिदाबाद से भागे हैं। झारखंड भागने वालों में हिंसा के दौरान मारे गए चन्दन दास के परिवार के लोग भी शामिल हैं। झारखंड के साहिबगंज, राजमहल और पाकुड़ समेत बाकी सीमाई इलाकों में बड़ी संख्या में हिन्दू भाग कर आ रहे हैं।
गले पर धारदार हथियार रख करते हैं लूट
मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा के चलते भाग कर पहुँची लिली मंडल ने ईटीवी भारत को बताया है कि उनके यहाँ इस्लामी कट्टरपंथी गले पर धारदार हथियार रखते हैं। इसके बाद वह घरों में लूटपाट करते हैं। पीड़िता कल्पना साहा ने बताया है कि उनके घर में बेटियाँ हैं इसलिए सुरक्षा के चलते वह हिंसा के बाद भाग कर झारखंड आई हैं जहाँ उनके पिता का घर है।
कल्पना ने बताया कि कट्टरपंथियों की हिंसा के चलते वह छुपने को भी मजबूर थे। एक और पीड़ित मौमिता मंडल ने बताया है कि BSF ने आने के बाद कई लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुँचाया है। एक और युवक ने बताया कि कट्टरपंथियों ने इतनी लूटपाट की है कि वह लोग सहम गए हैं।
मुर्शिदाबाद से हिन्दू भाग कर मालदा और झारखंड जा रहे हैं (फोटो साभार: Bhaskar & Majorpoonia/X)
सबसे अधिक लोग मुर्शिदाबाद के धुलियान, सूती और शमशेरगंज से भागे हैं। धुलियान और शमशेरगंज के कई लोगों ने अपने घर की महिलाओं को भी रिश्तेदारों के यहाँ भेज दिया है। उन्होंने सुरक्षित रास्ते से रिश्तेदारों के यहाँ पहुँचाया है। पाकुड़ के अलावा राजमहल में भी बड़ी संख्या में परिवार पहुँचे हैं। इन्होने अपने जान परिचय वालों के यहाँ शरण लिए हैं।
एक रिपोर्ट में बताया गया है कि लगभग 170 परिवार झारखंड के राजमहल इलाके में मुर्शिदाबाद से पलायन करके पहुँचे हैं। पलायन करके झारखंड पहुँचे लोगों ने बताया है कि इस्लामी कट्टरपंथियों का उद्देश्य सिर्फ हिन्दुओं को लूटना-मारना और महिलाओं के साथ दुराचार करना है। पलायन करने वालों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिनके घर दुकान जलाए गए हैं।
एक और पीड़ित मोहन मंडल ने बताया है कि वह एम्बुलेंस में छुप कर झारखंड के पाकुड़ पहुँचे। उन्होंने बताया कि इस्लामी कट्टरपंथियों ने उनकी दुकान और बाइक जलाने का प्रयास किया था लेकिन तब तक सुरक्षाबल आ गए। उनकी पत्नी ने बताया कि दंगाइयों के निशाने पर विशेष रूप से महिलाएँ थी।
एम्बुलेंस में छिप कर किसी तरह बचाई जान
इस्लामी कट्टरपंथियों ने मुर्शिदाबाद में वृद्ध हरिगोविन्द दास और उनके बेटे की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी थी। उनका परिवार भी शरण लेने के लिए झारखंड पहुँचा है। चंदन दास का परिवार एक एम्बुलेंस में छुप कर झारखंड पहुँचा है। चंदन दास के भतीजे ह्रदय दास के साथ 12 और लोग इस एम्बुलेंस में छुप कर साहिबगंज पहुँचे।
ETV भारत को उन्होंने बताया, “मेरी 85 वर्षीय बुजुर्ग माँ को मरीज बनाकर एंबुलेंस में 12 सदस्य सवार होकर किसी तरह राजमहल स्थित अपने रिश्तेदार के घर पहुँचे। बीते जुमे की नमाज के बाद एकाएक हिंसा भड़की थी जिस दौरान चंदन दास के घर पर हमला हुआ था। दूसरे दिन सुबह 11 बजे बम और धारदार हथियार से लैस, नकाब पहनकर 50-60 लोगों ने उनके घर पर हमला कर दिया और उनके भाई हरगोविंद दास और भतीजा चंदन दास की हत्या कर दी।”
मुर्शिदाबाद से झारखंड पहुँचने वाले लोगों ने बताया है कि उन्हें अब बंगाल पुलिस पर भरोसा नहीं है और वहाँ वह सुरक्षित महसूस नहीं करते। लोग अपना सामान और घरबार छोड़ कर भागे हैं। पलायन करने वालों में एक भाजपा नेता का परिवार भी है। भाजपा नेता के भाई की दुकान पर हमला हुआ है।
मालदा में स्कूल बने शरणार्थी कैम्प
मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा के बाद बड़ी संख्या में हिन्दू अलावा बंगाल के ही मालदा भी पहुँचे हैं। इनमें से कईयों ने नदी पार करके मालदा के स्कूलों में शरण ली है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि मालदा का परलालपुर इस समय सबसे बड़ा शरणार्थी कैम्प बन गया है।
इसमें वर्तमान में 400-500 लोग रुके हुए हैं। यह सभी इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा के बाद भागे हैं। यहाँ पहुँची एक पीड़ित ने बताया है कि उनके पास बस अब वही कपड़े बचे हैं, जो उन्होंने पहन कर रखे हैं। पीड़ित महिला ने बताया कि वह अपनी ही जमीन में शरणार्थी बन गए हैं।
पीड़ितों ने कहा है कि वह अब BSF का स्थायी कैम्प अपने इलाके में चाहते हैं। परलालपुर में पहुँचने वालों लोगों में से कई के घर जला दिए गए हैं। अब उन्हें इस स्कूल में स्थानीय लोग खाना खिला रहे हैं। उन्हें स्कूल के भीतर एक रसोई में खाना बना कर खिलाया जा रहा है, कपड़ो के लिए भी पलायन कर चुके हिन्दू स्थानीय लोगों पर निर्भर हैं।
शरणार्थी कैम्प में रुकी एक और हिन्दू महिला ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। पीड़िता ने मुर्शिदाबाद में हिंदू महिलाओं को दी जाने वाली धमकियों को याद करते हुए बताया, “हमारे (मुसलमानों) द्वारा बलात्कार करवाओ, हम तुम्हारे पतियों और बच्चों को छोड़ देंगे।”
उसने आगे कहा, “यह हमारी स्थिति है। मैं आपको और क्या बताऊँ? ऐसी परिस्थितियों में हम घर कैसे लौट सकते हैं? और हम और कहाँ जाएँगे?”
हिन्दुओं के हत्यारे बांग्लादेश सीमा से हुए गिरफ्तार
मुर्शिदाबाद में हिन्दू हरगोविंद दास और चंदन दास की हत्या करने वाले इस्लामी कट्टरपंथियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इनका नाम कालू नदाब और दिलदार नदाब है। यह दोनों भाई हैं। इन्होने मुर्शिदाबाद में दोनों को घर से खींच कर मार दिया था। दोनों की चाकू मार कर हत्या की गई थी।
यह लोग मूर्तियाँ बनाने का काम करते थे। इनकी हत्या के आरोप में पकड़े गए दोनों लोग भाई हैं। इनमें से एक बांग्लादेश सीमा से पकड़ा गया है। इन पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
ऐसा लगता है जैसे समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव हिन्दू विरोध के ही मुद्दे पर लड़ने का मन बना लिया है। तभी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन ने राज्यसभा में मेवाड़ के राणा सांगा को ‘गद्दार’ कहा लेकिन उनपर कार्रवाई के बदले उनका समर्थन किया जा रहा है। उधर अब सपा के एक अन्य नेता इंद्रजीत सरोज ने हिन्दू धर्म का मखौल उड़ाना शुरू कर दिया है। अखिलेश यादव अक्सर PDA फॉर्मूले की बात करते हैं, शायद इसमें हिन्दुओं के लिए कोई जगह नहीं है।
विधायक इंद्रजीत सरोज ने हिन्दू देवी-देवताओं को बताया शक्तिहीन
मंझनपुर विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के विधायक इंद्रजीत सरोज ने अब इतिहास से गड़े मुर्दे उखड़ते हुए सन् 711-15 में सिंध पर मुहम्मद बिन क़ासिम के हमले से अपनी बात शुरू की है। उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रांता अरब से आकर यहाँ लूटपाट करके चले गए, महमूद गजनी सोमनाथ लूटकर चला गया, मुहम्मद ग़ोरी ने पहली बार यहाँ इस्लामी शासन की स्थापना की। इंद्रजीत सरोज ने इस दौरान सवाल पूछा कि उस समय देवी-देवता क्या करते रहे, उन्हें तो श्राप दे देना चाहिए था।
सपा के नेशनल जनरल सेक्रेटरी इंद्रजीत सरोज ने आगे कहा, “देवी-देवता श्राप दे देते तो मुसलमान भस्म हो जाते, मर जाते, अंधे हो जाते, अपाहिज हो जाते, लुल्हे-लंगड़े हो जाते। इसका मतलब है कि हमारे देवी-देवता उतने ताक़तवर नहीं थे, कुछ न कुछ कमी है। हमारे PDA के लोगों के लिए तो डॉ आंबेडकर ही भगवान हैं, हमें उन्हें ही मानना चाहिए।” ANI को सफाई देते हुए इंद्रजीत सरोज ने ये बातें कहीं। इससे पहले उन्होंने कहा था कि भारत के मंदिरों में ताक़त होती तो लुटेरे यहाँ नहीं आते।
#WATCH | Prayagraj, UP: On his reported remark on temples of India, Samajwadi Party MLA Indrajeet Saroj says "…Our gods and goddesses were not that powerful…In 712 AD, Muhammad Bin Qasim came to this country from Arabia and looted the country…Muhammad Ghori came to this… pic.twitter.com/9kM8PjrmFn
बता दें कि इंद्रजीत सरोज जिस मंझनपुर से विधायक हैं, वो कौशाम्बी लोकसभा क्षेत्र में आता है। 2024 में सपा ने उनके बेटे पुष्पेंद्र सरोज को यहाँ से टिकट दिया और वो विजयी हुए। उन्होंने लोगों से राम का नारा छोड़कर ‘जय भीम’ का नारा लगाने के लिए कहा। उन्होंने ये भी कहा कि गोस्वामी तुलसीदास की मुस्लिम आक्रांताओं के ख़िलाफ़ लिखने की हिम्मत नहीं हुई। इंद्रजीत सरोज यूपी विधानसभा में सपा के उपनेता भी हैं। वो 5 बार विधायक रहे हैं। इससे पहले वो बसपा में हुआ करते थे।
‘हर मंदिर के नीचे एक बौद्ध मठ है’: रामजीलाल सुमन
उधर राणा सांगा का अपमान करने वाले रामजीलाल सुमन ने ‘करणी सेना’ के आगरा में उनके ख़िलाफ़ प्रदर्शनों के बावजूद कहा है कि 19 अप्रैल को अखिलेश यादव आगरा आ रहे हैं और उसके बाद लड़ाई का मैदान तैयार होगा जिसमें दो-दो हाथ होंगे। उन्होंने ‘करणी सेना’ से पूछा कि अगर मुस्लिमों में बाबर का DNA है तो तुम भी बता दो कि तुम्हारे अंदर किसका DNA है। उन्होंने कहा कि ये लड़ाई उनसे है जिन्होंने अखिलेश यादव के CM पद से हटने के बाद मुख्यमंत्री आवास को गंगाजल से धुलवाया, जो हिंदुस्तान के मुस्लिमों को बाबर की औलाद बताते हैं।
उन्होंने दावा किया कि मुस्लिमों ने ये साबित कर दिया है कि इस देश की मिट्टी से जितनी मोहब्बत हिन्दुओं को है उतनी ही उन्हें भी है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पैगंबर मुहम्मद को ही अपना आदर्श मानते हैं। रामजीलाल सुमन ने दावा किया कि हर मंदिर के नीचे एक बौद्ध मठ है। उन्होंने ‘करणी सेना’ से कहा कि अगर देश से प्यार है तो चीन से लड़ने जाएँ। हाथरस में जन्मे रामजीलाल सुमन 1977 में मात्र 26 की उम्र में जनता पार्टी की लहर में सांसद बने थे। फिरोजाबाद से वो 4 बार सांसद रह चुके हैं।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी (GGU) में पढ़ने वाले 155 हिंदू छात्रों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रों का दावा है कि यूनिवर्सिटी की ओर से आयोजित NSS (राष्ट्रीय सेवा योजना) कैंप में उन्हें जबरन नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया गया। यह कैंप कोटा ब्लॉक के शिवतराई में 26 मार्च से 1 अप्रैल 2025 तक चला था, जिसमें कुल 159 छात्र शामिल थे, इनमें से 4 छात्र मुस्लिम थे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान उन्हें मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए ब्रेन वॉश किया गया और विरोध करने पर डराया-धमकाया गया। इस मामले में यूनिवर्सिटी के प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. बसंत कुमार और कोऑर्डिनेटर दिलीप झा सहित अन्य स्टाफ पर कार्रवाई की माँग की गई है।
छात्रों ने बताया कि NSS कैंप के दौरान उन्हें रोज सुबह 6:15 से 7:00 बजे तक योगा क्लास में शामिल होने को कहा गया। लेकिन इस योगा क्लास में उन्हें नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया गया। एक छात्र ने कहा, “हमें बताया गया कि अगर हम नमाज नहीं पढ़ेंगे, तब हम पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। जो लोग मंच पर नमाज अदा करने की प्रक्रिया में शामिल हुए, उन्हें जस का तस दोहराने और सीखने का आदेश दिया गया।” छात्रों का कहना है कि इस दौरान उनका मोबाइल जमा कर लिया गया था, ताकि वे इसका वीडियो या फोटो न ले सकें और कोई रिकॉर्ड उपलब्ध न हो।
छात्रों ने यह भी बताया कि 31 मार्च 2025 को मुसलमानों की त्योहार ईद-उल-फितर था। इस दिन कोऑर्डिनेटर ने चार मुस्लिम छात्रों को मंच पर बुलाया और बाकी छात्रों को उनके द्वारा नमाज अदा करने की प्रक्रिया को दोहराने का निर्देश दिया। छात्रों ने कहा, “हमें डराया-धमकाया गया और अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई। हमें यह भी कहा गया कि अगर हमने इसका विरोध किया, तो हमें सर्टिफिकेट नहीं दिया जाएगा।” इस मामले की शिकायत कोनी थाने में दर्ज की गई है, जहाँ से जाँच शुरू हो गई है।
छात्रों द्वारा दी गई शिकायत की प्रति(फोटो साभार: भास्कर)
कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल ने मामले में फौरन संज्ञान लेते हुए 4 सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की है, जिसे 24 घंटे में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, यूनिवर्सिटी के मीडिया प्रभारी MN त्रिपाठी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “यूनिवर्सिटी के छात्रों ने NSS कैंप में जबरन नमाज पढ़ने का आरोप लगाया है, जो पूरी तरह से गलत है। हमें इस मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन से कोई जानकारी नहीं मिली है।”
हालाँकि, कोनी थाना टीआई लक्ष्मी नारायण केवट ने कहा कि यूनिवर्सिटी के छात्रों ने शिकायत दर्ज कर NSS कैंप में नमाज पढ़ने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन से जानकारी ली जा रही है। अगर अपराध सिद्ध होता है, तो कार्रवाई की जाएगी।” छात्रों की माँग है कि इस मामले की गहन जाँच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा पर भाजपा का एक एक्स (पहले ट्विटर) पर किया गया पोस्ट हटा दिया गया है। इसके पीछे एक्स ने कानून माँग, यानी किसी सरकार की माँग पर ऐसा करना बताया है। कयास हैं कि भाजपा के पोस्ट को ममता बनर्जी की बंगाल सरकार ने हटवाया है।
बीजेपी की ओर से यह पोस्ट हाल ही में हुई मुर्शिदाबाद में हिंसा की घटनाओं के बीच की गई थी। इस पोस्ट में बताया गया था कैसे बीते कुछ सालों से लगातार इस्लामी कट्टरपंथी हिन्दू त्योहारों को निशाना बना रहे हैं। इस पोस्ट में भाजपा ने कई जगह हिंसा की तस्वीरें एक साथ शामिल की थीं।
भाजपा ने एक्स पर की गई इसी पोस्ट में एक बंगाली कहावत भी लिखी थी। इसका अर्थ था कि ममता बनर्जी के वोटबैंक को बस हिंसा करने का बहाना चाहिए। इस पोस्ट में मुस्लिमों को ममता बनर्जी के लिए दुधारू गाय जैसा बताया गया था।
बंगाल भाजपा की पोस्ट अब दिखाई नहीं दे रही है। एक्स की ओर से इस पोस्ट को लेकर एक सन्देश दिया गया है। इसमें कहा गया, “बीजेपी4बंगाल की यह पोस्ट कानूनी माँग के जवाब में भारत में ब्लॉक कर दी गई है।” इससे पहले पश्चिम बंगाल पुलिस ने इसका फैक्ट चेक किया भी किया।
इस पोस्ट में शामिल तस्वीरों को अलग कर रिवर्स सर्च भी किया गया और बताया गया कि वे अलग-अलग त्योहारों की थी। भाजपा की पोस्ट में कुछ तस्वीरें बंगाल से संबंधित नहीं थीं, कुछ तस्वीरें अन्य राज्यों में हुई हिंसा की थीं। यह तस्वीरें हिंदू त्योहारों के दौरान होने वाली हिंसा से ली गई या फिर या 2019 में होने वाले CAA विरोध प्रदर्शन की।
पश्चिम बंगाल पुलिस के अलावा TMC के नेता और कार्यकर्ता इसी तरह की तस्वीरें पोस्ट कर रहे हैं, ‘फैक्ट चेक’ कर रहे हैं। वह लिख रहे हैं कि भाजपा द्वारा चीजों को मिलाकर एक साथ पोस्ट किया गया पोस्ट कथित तौर पर ‘फर्जी’ है।
भाजपा बंगाल द्वारा इसी पोस्ट में एक बंगाली कहावत भी पोस्ट की गई थी। इस कहावत में मुस्लिमों को ममता बनर्जी की गाय बताया गया था। गाय का तात्पर्य वोटबैंक से था। जब पश्चिम बंगाल पुलिस ने इसका फैक्टचेक किया तो उन्होंने यह बंगाली कहावत भी हटा दी।
दरअसल, भाजपा के पोस्ट करने के पीछे ममता बनर्जी का एक पुराना बयान था जिसमें उन्होंने कहा था कि वह मुस्लिमों के हर कार्यक्रम में भाग लेंगी। उन्होंने कहा था कि दूध देने वाली गाय लात मारती ही है। यह स्पष्ट नहीं है कि आखिर बंगाल पुलिस ने अपने पोस्ट में उस टेक्स्ट मैसेज को मिटाने पर विशेष ध्यान क्यों दिया है।
संभवतः वह नहीं चाहते थे कि CM ममता के बयान को याद रखें।
X कब हटाता है पोस्ट?
एक्स किसी न्यायालय या सरकारी आदेश के बाद किसी पोस्ट को हटाता है। एक्स यह पोस्ट उस देश के लिए प्रसारित होने से रोक देता है, जहाँ पर इसकी माँग की जाती है। एक्स द्वारा झूठी जानकारियाँ फ़ैलाने वाली या फिर हिंसा को बढ़ावा देने वाली पोस्ट को हटाया जाता है।
हालाँकि एक्स पुलिस शिकायत के बाद भी किसी पोस्ट को हटाने के लिए बाध्य नहीं होता। इसलिए संभावना जताई जा रही है कि बंगाल सरकार ने बंगाल भाजपा द्वारा उस पोस्ट को डिलीट या रोक लगाने के लिए X को एक आधिकारिक पत्र भेजा होगा।
मुर्शिदाबाद से शुरू हुई थी CAA विरोधी हिंसा
बंगाल के मुर्शिदाबाद में यह पहली हिंसा नहीं है, साल 2019 में भी सीएए विरोध प्रदर्शन में ऐसी हिंसा देखी गई थी, जहाँ इस्लामी भीड़ ने कई ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर हमला किया था, जिससे भारतीय रेलवे को करोड़ों का नुकसान हुआ था और राज्य में ट्रेन सेवाएँ बाधित हुई थी।
इसके अलावा भी हिंदू त्योहारों और धार्मिक जुलूसों पर इस्लामी भीड़ द्वारा हमला करना कई राज्यों में लगातार एक समस्या देखी जा रही है। बंगाल में बड़े पैमाने पर हिंदुओं के खिलाफ होने वाली हिंसा सबसे बड़ी समस्या देखी है। चाहे वे आम चुनाव हो, विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव या फिर हिंदू त्योहार ही क्यों ना हो।
ममता बनर्जी अपने ही राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था का अप्रत्यक्ष रूप से ‘जश्न’ मनाती हुई भी देखी जा रही हैं, जो निंदनीय और दुखद है। उन्होंने न केवल वक्फ अधिनियम और CAA के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का खुला आह्वान किया था, बल्कि उनकी पुलिस और प्रशासन ऐसे विरोध प्रदर्शनों की आड़ में बंगाल में आगजनी, तोड़फोड़ और हत्याओं को रोकने में भी विफल दिखाई देती है।
2021 के चुनावों में भी मुख्यतौर से हिंदुओं को निशाना बनाया गया था, उन्होंने डायरेक्ट एक्शन डे की सालगिरह पर “खेला होबे” दिवस मनाया, जहाँ 1946 में जिन्ना के इशारे पर मुस्लिम भीड़ ने हज़ारों बंगाली हिंदुओं का कत्लेआम किया था।
वक़्फ़ संशोधन विधेयक के दोनों सदनों से पारित होकर और राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षर के बाद क़ानून बनने के बाद भी ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जो बताते हैं कि इस क़ानून की देश को कितनी आवश्यकता थी। अब तमिलनाडु के एक गाँव में 150 परिवारों को अपनी जमीनें खाली करने के लिए वक़्फ़ बोर्ड ने नोटिस जारी किया है। ये कृषि वाली भूमि है, जिसके सहारे इन परिवारों का पेट पलटा था। मामला वेल्लोर जिले के अनईकट्टु तालुका के कट्टुकोलै गाँव का है। लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
150 ग्रामीण परिवारों की जमीन पर वक़्फ़ का दावा, माँगा रेंट
वक़्फ़ बोर्ड ने इन 150 परिवारों की जमीनों को वक़्फ़ की संपत्ति घोषित कर दी है। पीड़ितों ने वेल्लोर के डीएम को ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है। सैयद अली सुल्तान शाह के नाम से ये नोटिस जारी किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि ये जमीनें दरगाह की हैं – या तो ग्रामीण जमीन खाली करें या फिर दरगाह को टैक्स देना शुरू कर दें। पिछली 4 पीढ़ियों से वहाँ रह रहे इन ग्रामीणों की आजीविका कृषि पर ही आधारित है। उनके पास काम का कोई दूसरा जरिया नहीं है।
इन ग्रामीणों में से अधिकतर के पास सरकार द्वारा जारी किया गया दस्तावेज है। इन्होंने डीएम से संरक्षण और स्पष्टता की माँग की है। ग्रामीणों में भय का माहौल है। वो आशंकित हैं कि उनसे उनकी आजीविका का एकमात्र साधन भी छीन लिया जाएगा। ‘हिन्दू मुन्नानी’ संगठन के नेता महेश 330/1 सर्वे नंबर के तहत आने वाली जमीनों को वक़्फ़ की संपत्ति घोषित कर दी गई है। उन्होंने प्रशासन से तुरंत इन जमीनों का पट्टा (मालिकाना हक़ के पक्के दस्तावेज) ग्रामीणों को सौंपने की माँग की।
कॉन्ग्रेस MLA ने कहा – एक बार जो जमीन वक़्फ़ की हो गई, वो हमेशा वक़्फ़ की
उधर तमिलनाडु के कॉन्ग्रेस विधायक हसन मौलाना ने आश्वासन दिया है कि किसी को भी उनकी जमीन से नहीं हटाया जाएगा। हालाँकि, उन्होंने इस दौरान ग्रामीणों को ये भी कहा कि अगर उनकी जमीन वक़्फ़ बोर्ड की साबित होती है तो उन्हें दरगाह को किराया देना होगा। उन्होंने कहा कि एक बार जो जमीन वक़्फ़ की हो जाती है, वो सदा के लिए वक़्फ़ की ही रहती है। बालाजी नाम के एक शख्स के तो घर और दुकान पर भी वक़्फ़ ने दावा ठोक दिया है। सैयद सद्दाम स्थानीय मस्जिद और दरगाह का केयरटेकर है, जिसने नोटिस भिजवाया है।
2021 में सैयद सद्दाम के अब्बा की मृत्यु हुई थी। उसका कहना है कि 1954 से ही ये संपत्ति वक़्फ़ की है और ये साबित करने के लिए उसके पास सरकारी दस्तावेज भी हैं। उसने कहा कि उसके अब्बा उतने पढ़े-लिखे व जागरूक नहीं थे, इसीलिए उन्होंने ग्रामीणों से किराया नहीं लिया। उसने कहा कि वो पुरानी ग़लती को ठीक कर रहा है। सद्दाम ने धमकाया कि 2 नोटिस और भेजे जाएँगे, इसके बाद हाईकोर्ट का रुख किया जाएगा। डीएम ने ग्रामीणों को फिलहाल रेंट न देने के लिए कहा है।
याद हो कि इसी तमिलनाडु में वक़्फ़ बोर्ड 1500 वर्ष पुराने मंदिर पर भी दावा ठोक चुका है। ख़ास बात ये है कि 1500 वर्ष पूर्व तक इस्लाम भी अस्तित्व में नहीं था। तमिलनाडु में त्रिची के नजदीक स्थित पूरे तिरुचेंथुरई गाँव को ही वक़्फ़ की संपत्ति बता दिया गया था। यह पूरा मामला तब सामने आया, जब राजगोपाल नाम के एक व्यक्ति ने अपनी 1 एकड़ 2 सेंट जमीन राजराजेश्वरी नामक व्यक्ति को बेचने का प्रयास किया। राजगोपाल जब अपनी जमीन बेचने के लिए रजिस्ट्रार ऑफिस पहुँचे, तो उन्हें पता चला कि जिस जमीन को बेचने के बारे में वह सोच रहे हैं वह उनकी है ही नहीं बल्कि, जमीन वक्फ हो चुकी है और अब उसका मालिक वक्फ बोर्ड है।
गाँव में मानेदियावल्ली समीथा चंद्रशेखर स्वामी मंदिर है। यह मंदिर 1500 साल पुराना है। मंदिर के पास तिरुचेंथुरई गाँव और उसके आसपास 369 एकड़ की संपत्ति है। ग्रामीणों का सवाल था कि क्या यह मंदिर संपत्ति भी वक्फ बोर्ड के स्वामित्व में है और इसका आधार क्या है? गाँव के लोगों के पास जमीन के दस्तावेज भी मौजूद थे। वक़्फ़ ने राजस्व विभाग को पत्र भेजकर कहा था कि जो व्यक्ति गाँव की जमीन के लिए रजिस्ट्रेशन कराने के लिए आते हैं, उन्हें वक़्फ़ बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करना पड़ेगा।
इस्लामी आतंकी संगठन तालिबान ने कहा है कि सजा के रूप में सरेआम हत्या करना इस्लाम का हिंसा है। तालिबान ने यह बात अफगानिस्तान में हाल ही में 4 लोगों को सरेआम गोलियों से भून कर सजा देने के बाद कही है। तालिबान ने कहा है कि उन्हें पश्चिमी देशों के कानूनों की कोई आवश्यकता नहीं है।
अफगानिस्तान इस्लामी अमीरात के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इसको लेकर एक ऑडियो जारी किया है। यह ऑडियो तालिबान के मुखिया और अफगानिस्तान के अमीर हिबैतुल्लाह अखुँदजादा कहते हैं, “हमें सिर्फ नमाज या इबादत तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इस्लाम एक पूरा जीवन पद्धति है, जिसमें अल्लाह के सारे हुक्म शामिल हैं। इनमें सजाएँ देना भी जरूरी है।”
کندهار کې د حجاجو کرامو معلمینو ته په جوړ شوي سیمېنار کې د عالیقدر امیرالمؤمنین شیخ القران والحدیث مولوي هبة الله اخندزاده حفظه الله تعالی وینا https://t.co/HeGTPdlbjP
— Zabihullah (..ذبـــــیح الله م ) (@Zabehulah_M33) April 13, 2025
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फाँसी की आलोचना पर अखुँदज़ादा ने कहा कि अल्लाह ने लोगों को इबादत करने और सजा चुनने का आदेश दिया है। तालिबान का संघर्ष कभी सत्ता या धन के लिए नहीं था, बल्कि ‘इस्लामी कानून’ को लागू करने के लिए था। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों के कानूनों की अफगानिस्तान में कोई जरूरत नहीं है।
ये बातें तालिबान मुखिया ने दक्षिणी कंधार प्राँत में हज प्रशिक्षकों के एक सेमिनार में 45 मिनट के भाषण के दौरान कहीं। उन्होंने ये भी कहा कि इस्लाम का एक भी आदेश अधूरा नहीं छोड़ा जाना चाहिए। गौरलतब है कि शुक्रवार (11 अप्रैल, 2025) को तालिबान ने 4 लोगों की फायरिंग करके हत्या कर दी थी।
तालिबान ने अफगानिस्तान के तीन राज्यों में 4 लोगों को यह सजाएँ दी थीं। इनमें से बडघीस के काला-ए-नौ में 2 लोगों की गोली मार कर हत्या कर दी थी। इसके अलावा एक को निमरोज के जरांज और एक को फराह में मार दिया गया था। इन्हें 6-7 बार गोली मारी गई।
तालिबान ने यह सजाएँ दिखने के लिए यहाँ के लोगों को बुलाया भी था। यहाँ तक कि मृतकों के रिश्तेदारों को भी इस दौरान शामिल किया गया था। बताया गया है कि इन पर हत्या का आरोप सिद्ध हुआ था और तभी इन्हें मौत की सजा दी गई थी। इन लोगों ने माफी भी माँगी थी लेकिन कोई राहत नहीं दी गई थी।
अमेरिका से भारत लाया गया आतंकी तहव्वुर राणा सिर्फ मुंबई ही नहीं बल्कि देश की राजधानी दिल्ली पर भी आतंकी हमला करवाने वाला था। इसके लिए उसने साजिश रच ली थी। यह खुलासा उसके प्रत्यर्पण के बाद चल रही अदालती कार्रवाई में हुआ है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विशेष NIA जज चंदरजीत सिंह ने 10 अप्रैल, 2025 को अपने आदेश में कहा कि NIA द्वारा पेश की गई जानकारी से यह साफ है कि यह मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा है और जाँच को पूरी गंभीरता के साथ अंजाम दिया जाना चाहिए।
जज के 12 पन्नों के आदेशनुसार, “जाँच एजेंसी ने जो सामग्री कोर्ट में पेश की है। उससे पता चलता है कि यह एक गहरी और अंतरराष्ट्रीय स्तर की साजिश है, जिसमें राजधानी दिल्ली समेत भारत के कई शहरों को टारगेट करने की योजना बनाई गई थी।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि राणा से गहराई से पूछताछ की ज़रूरत है। जज ने कहा, “उससे गवाहों, जब्त दस्तावेजों और फॉरेंसिक सबूतों के साथ आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जानी चाहिए ताकि इस साजिश की पूरी परतें खुल सकें।”
तहव्वुर राणा को इसी आधार पर कोर्ट ने 18 दिन की NIA हिरासत में भेजने का आदेश दिए हैं। इस दौरान जाँच एजेंसी उसे उन जगहों पर भी ले जा सकती है, जहाँ उसकी गतिविधियाँ पहले से रिकॉर्ड में हैं। ताकि घटनाओं को दोबारा जोड़ा जा सके और सच्चाई सामने लाई जा सके।
अदालत ने राणा की सेहत को लेकर भी दिए थे निर्देश
इससे पहले दिल्ली की एक अदालत में NIA की तरफ से वरिष्ठ वकील दयान कृष्णन और विशेष लोक अभियोक नरेंद्र मान ने पक्ष रखते हुए राणा की सेहत को लेकर भी निर्देश जारी किए थे। उसका हर 48 घंटे में मेडिकल चेकअप कराने को कहा गया है। आदेश में कहा गया है, “चूंकि आरोपित ने अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की जानकारी दी है और प्रत्यर्पण प्रक्रिया में भारत ने उचित इलाज का आश्वासन दिया है, इसलिए उसके इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।”
बता दें कि 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले में 166 लोग मारे गए थे। आतंकी समुद्र रास्ते पाकिस्तान से आए थे और उन्होंने मुंबई में कई जगह पर हमला कर 60 घंटे तक दहशत फैलाई थी। इसमें 166 लोग मारे गए थे। तहव्वुर राणा ने इन हमले वाली जगहों की रेकी और प्लानिंग में मदद की थी।