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‘लाल पानी’ पिलाकर बनाया ईसाई, दिन बदलने का दिया था झाँसा, 4 साल बाद भी झोपड़े में कट रहे दिन… मीना ने की घर वापसी, बताया- चर्च के लोग ही हमसे लेते थे पैसा

राजस्थान के बाँसवाड़ा में ईसाई धर्म अपनाए लोग खुद ही घर वापसी कर रहे हैं। वहाँ की चर्च को मंदिर में बदला जा रहा है। सोडलदूधा गाँव के मंदिर में भैरवनाथ, भगवान राम आदि देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित की जा रही हैं। इस गाँव के चर्च के पादरी सहित 30 से अधिक ईसाइयों ने घर वापसी कर ली है। इन लोगों का दावा है कि बाकी के बचे हुए कुछ लोग जल्दी ही घर वापसी कर कर लेंगे।

गौतम गरासिया 30 साल पहले ईसाई धर्म में परिवर्तित हो गए थे। इसके बाद उनके साथ गाँव के 45 से अधिक लोगों ने ईसाई धर्म अपना लिया। उन्होंने धर्म का प्रचार करने के लिए मिशनरियों के सहयोग से एक चर्च भी बनवाया। उन्हें इस चर्च का पादरी बना दिया। चर्च के बदले उन्हें 1500 रुपए मासिक मिलते थे। यहीं पर हर रविवार को प्रार्थना सभा का आयोजन होता था। हालाँकि, वे घर वापसी कर चुके हैं।

भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, पाँचवीं कक्षा तक पढ़े गौतम ने बताया कि वे मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। इससे छुटकारा पाने के लिए वे हॉस्पिटल से लेकर देवी-देवताओं के चक्कर काटे, लेकिन फायदा नहीं हुआ। आखिरकार उनकी मुलाकात ईसाई धर्म का प्रचार करने वाले मिशनरियों से हुई। गौतम का कहना है कि मिशनरी के लोगों ने कहा कि यीशु की आराधना करो, शांति मिलेगी।

गौतम ने बताया कि मिशनरी के लोगों ने कुछ समय के बाद लाल रंग का दाकरस (खास प्रकार का जूस) पिलाते और मन परिवर्तन की बात करते थे। इस तरह उन लोगों ने इन्हें झाँसे में लेकर ईसाई धर्म में परिवर्तन करा दिया। चर्च बनाने के लिए पैसे देने के साथ-साथ किराया के रूप में 1500 महीना देने का लालच देकर अन्य लोगों को भी ईसाई धर्म से जोड़ने के लिए कहा। गौतम ने ऐसा ही किया।

गौतम का कहना है कि पिछले 30 सालों में ऐसा कुछ नहीं लगा कि उन्हें मानसिक शांति मिली है। उनका कहना है कि मानसिक से लेकर आर्थिक हालात आज भी जस के तस है। तीस साल में पक्की छत तक नहीं बना पाया। उन्होंने कहा कि ईसाई बन जाने के बाद अपने लोगों ने उनसे बोलना तक बंद कर दिया था। गौतम की 6 बेटियाँ और 5 बेटे सहित कुल 30 लोगों का परिवार है।

गौतम का कहना है कि कुछ समय पहले उन्होंने अन्य लोगों के साथ घर वापसी कर ली है। हालाँकि, उनकी पत्नी ईसाई धर्म छोड़ने के तैयार नहीं है। गौतम का कहना है कि ईसाई धर्म से सबसे ज्यादा वही प्रभावित थी। अब वह कहती है कि पति को छोड़ देगी, लेकिन ईसाई धर्म नहीं छोड़ेगी। फिलहाल वह गौतम को छोड़कर अपने मायके में है। इस तरह गौतम का परिवार भी बर्बाद हो गया।

वहीं, धर्मांतरण करने वाली मीना गरासिया ने बताया कि उसके पति मजदूरी करते हैं। प्रार्थना सभा में आने वाले लोग बच्चों की पढ़ाई, इलाज और रोजगार की बातें करते थे। इससे मीना को लगा कि उसके परिवार का भी भला हो जाएगा। इसके बाद मीना ने अपने पति और बच्चों के साथ ईसाई धर्म अपना लिया। अब मीना का कहना है कि ईसाई बने चार साल हो गए, लेकिन उसका जीवन नहीं बदला।

मीना का कहना है कि वह और उसका पति आज भी मजदूरी ही करते हैं। मीना ने बताया मिशनरियों के आने वाले लोगों की सेवा करने के कारण उसके घर गहने भी बिक गए। वे पैसा नहीं देते थे और आने-जाने के लिए पेट्रोल एवं खाने-पीने के पैसे अलग से माँगते थे। मीना का कहना है कि इससे परेशान होकर वह वापस अपने धर्म में लौट आई। इसी तरह एक हिंदू लड़के शादी करने के लिए एक ईसाई हिंदू बन गई।

विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय सह-मंत्री स्वामी रामस्वरूप का कहना है कि इस इलाके में पिछले 150 साल से ईसाई धर्मांतरण का काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि बांसवाड़ा और डूंगरपुर में धर्मांतरण कराने वाले दूसरे प्रदेश से आकर रहने लगे। धीरे-धीरे 400 छोटी स्कूलें खोलीं। वे लोगों के लिए दवा की व्यवस्था करते थे। दवा के बहाने प्रार्थना सभा करते और फिर चर्च खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि लोगों में अब जागरूकता आ रही है और वे खुद ही इसका विरोध कर रहे हैं।

ब्यावर के ‘मुस्लिम गैंग’ पर बुलडोजर एक्शन नहीं, राजस्थान हाई कोर्ट ने घर तोड़ने पर लगाई रोक: ब्लैकमेल कर हिंदू बच्चियों का करते थे रेप, रोजा-कलमा का बना रहे थे दबाव

राजस्थान हाई कोर्ट ने ब्यावर में हिंदू लड़कियों के यौन शोषण के आरोपित मुस्लिमों के घरों पर बुलडोजर चलाने पर रोक लगा दी है। राज्य सरकार ने आरोपितों के घरों के ध्वस्तीकरण के लिए नोटिस जारी किया था। यह नोटिस 20 फरवरी को दिया गया था। इस पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की एकल बेेंच ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।

जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल ने अपने आदेश में कहा है, “याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने प्रस्तुत किया है कि राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 194 और धारा 245 के तहत उनके निर्माण को ध्वस्त करने के लिए दिनांक 20.02.2025 को कारण बताओ नोटिस प्राप्त होने पर उन्होंने समय पर अपना जवाब दाखिल कर दिया है, लेकिन प्रतिवादी जवाब पर निर्णय लिए बिना ही उनके निर्माण को ध्वस्त करने पर आमादा हैं।”

अदालत ने आरोपित मुस्लिम याचिकाकर्ताओं के वकील से कहा कि वे अपनी रिट याचिकाओं की एक कॉपी अतिरिक्त महाधिवक्ता के कार्यालय को दें। प्रतिवादियों के वकील ने अपने निर्देश पूरे करने के लिए समय माँगा। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें समय दे दिया। इस मामले की सुनवाई 11 मार्च को 2 बजे के लिए सूचीबद्ध किया गय है। तब तक दोनों पक्षों से यथास्थिति बनाए रखने के लिए कहा गया है।

याचिका में दावा किया गया है कि पिछले महीने पुलिस ने एक प्रेस नोट जारी किया गया था, जिसमें कहा गया था कि मोबाइल फोन के जरिए प्रेम संबंधों में फँसाकर नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण करने वाले 5 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, 2 किशोर अपराधियों को हिरासत में लिया गया है। इसके बाद संबंधित नगरपालिका के अधिकारियों ने इन आरोपितों के घरों के लिए नोटिस जारी किया।

याचिका में दावा किया गया है कि नगरपालिका के कार्यकारी अधिकारी द्वारा आरोपित व्यक्तियों के घरों को हाथ से लिखित 8 नोटिस जारी किए। इनमें एक मस्जिद और एक कब्रिस्तान तथा बाकी 6 आरोपितों के घर शामिल हैं। इनमें से एक घर याचिकाकर्ता का भी है, जिसमें वह अपने पूरे परिवार के साथ रहता है।

याचिका में आगे कहा गया है कि नोटिस प्राप्त करने वाले व्यक्ति से कहा गया है कि वह नोटिस प्राप्त होने के तुरंत बाद संबंधित नगरपालिका में स्थित अपने घर/भवन के पक्ष में स्वामित्व के दस्तावेज, रिकॉर्ड और स्वीकृत नक्शा प्रस्तुत करे। नोटिस प्राप्त करने वाला व्यक्ति अपने पक्ष में स्वामित्व के दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रहता है तो उसके खिलाफ राजस्थान नगरपालिका अधिनियम की धारा 194(1) और 245 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि पिछले महीने 11 मुस्लिमों ने 5 हिंदू लड़कियों का रेप और ब्लैकमेल किया था। इस मामले में 16 फरवरी को 3 एफआईआर दर्ज की गई। इस घटना के कारण इलाके में सांप्रदायिक तनाव भी पैदा हो गया। इसके बाद बिजयनगर नगरपालिका ने आरोपितों के घरों को ध्वस्त करने का नोटिस भेजा। इसके बाद मुस्लिम आरोपितों के परिजनों ने नगरपालिका के इस निर्णय को राजस्थान हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

सीरिया में 2 दिन में 1000+ का कत्लेआम, हर तरफ बिखरी हैं लाशें: औरतों को नंगा कर सड़क पर घुमाया, जानिए क्यों ID चेक कर ढेर किए जा रहे अलावी

सीरिया (Syria) में पिछले दो दिनों से खून की नदियाँ बह रही हैं। सीरिया के अपदस्थ राष्ट्रपति बशर अल-असद के समर्थकों और नई सरकार के सुरक्षा बलों के बीच हुई भयंकर झड़पों में 1,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। इसमें करीब 750 आम लोग शामिल हैं, जो इस हिंसा की चपेट में आ गए।

ब्रिटेन के मानवाधिकार संगठन ‘सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स’ ने शनिवार (9 मार्च 2025) को ये चौंकाने वाला आँकड़ा जारी किया। संगठन का कहना है कि ये पिछले 14 साल से चल रहे सीरिया के गृहयुद्ध में सबसे खतरनाक घटनाओं में से एक है। इसमें 745 नागरिकों के अलावा 125 सरकारी सैनिक और असद के वफादार 148 लड़ाके भी मारे गए हैं। ये हिंसा गुरुवार (6 मार्च 2025) से शुरू हुई और अब तक थमने का नाम नहीं ले रही।

फिर से क्यों सुलग रहा है सीरिया

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये सब तब शुरू हुआ जब गुरुवार (6 मार्च 2025) को तटीय शहर जबलेह के पास सुरक्षा बल एक भगौड़े अपराधी को पकड़ने पहुँचे, लेकिन इस दौरान उन पर कथित तौर पर असद के समर्थकों ने घात लगाकर हमला कर दिया। इसके बाद हालात बेकाबू हो गए। नई सरकार का कहना है कि वो असद के बचे हुए लड़ाकों के हमलों का जवाब दे रही है, लेकिन शुक्रवार से ये झड़पें बदले की कार्रवाई में बदल गईं। सरकार से वफादार सुन्नी मुस्लिम हमलावरों ने असद के अलावी समुदाय के लोगों पर हमले शुरू कर दिए।

अलावी समुदाय लंबे वक्त से असद का समर्थन करता रहा है। इस हिंसा ने नई सरकार के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है, जो तीन महीने पहले ही असद को हटाकर सत्ता में आई थी।

बदले की आग में जल रहा सीरिया

शुक्रवार (7 मार्च 2025) को हालात तब और खराब हो गए, जब सुन्नी लड़ाकों ने अलावी गाँवों और कस्बों में घुसकर लोगों को निशाना बनाना शुरू किया। अलावी समुदाय के ज्यादातर पुरुषों को सड़कों पर या उनके घरों के बाहर ही गोली मार दी गई। कई जगहों पर घरों को लूटा गया और फिर आग के हवाले कर दिया गया। महिलाओं को नंगा करके सड़क पर घुमाया गया।

बनियास जैसे शहरों में हालात इतने खराब हैं कि सड़कों पर शव बिखरे पड़े हैं। वहाँ के लोगों का कहना है कि छतों पर भी लाशें पड़ी हैं, लेकिन उन्हें उठाने की इजाजत तक नहीं दी जा रही। बनियास से अपने परिवार के साथ भागे 57 साल के अली शेहा ने बताया कि उनके इलाके में कम से कम 20 लोग मारे गए। कुछ को उनकी दुकानों में, तो कुछ को घरों में गोली मारी गई।

अली ने कहा, “हालात बहुत डरावने थे। हमलावर हमारे अपार्टमेंट से सिर्फ 100 मीटर दूर थे और अंधाधुंध गोलियाँ चला रहे थे।” उन्होंने ये भी बताया कि हमलावर लोगों से उनकी आईडी माँगते थे, उनका मजहब और संप्रदाय चेक करते थे, फिर उन्हें मार देते थे। कई घरों को जलाया गया, गाड़ियाँ लूटी गईं और संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया। अली का कहना है कि ये हमले असद की सरकार के पुराने अपराधों का बदला लेने के लिए किए जा रहे हैं। कुछ लोगों ने ये भी कहा कि हमलावरों में विदेशी लड़ाके और आसपास के गाँवों से आए आतंकी शामिल थे।

लताकिया में बुनियादी सुविधाएँ ठप

इस हिंसा का असर सिर्फ जानमाल तक सीमित नहीं है। तटीय शहर लताकिया के बड़े इलाकों में बिजली और पानी की सप्लाई बंद हो गई है। कई बेकरी बंद हो चुकी हैं, जिससे लोगों को खाने-पीने की चीजों के लिए भी जूझना पड़ रहा है। लोग डर के मारे पहाड़ों की ओर भाग रहे हैं। बनियास के एक शख्स ने बताया कि उनके 5 पड़ोसियों को शुक्रवार को करीब से गोली मारी गई, लेकिन घंटों तक कोई उनके शवों को हटा नहीं सका। हमलावरों ने ऐसा करने से साफ मना कर दिया। साफ है कि ये हिंसा अब सिर्फ लड़ाई नहीं, बल्कि एक समुदाय के खिलाफ नफरत का रूप ले चुकी है।

हयात तहरीर अल-शाम के लिए मुसीबत

ये हिंसा उस गुट ‘हयात तहरीर अल-शाम’ (HTS) के लिए बड़ा झटका है, जिसने असद को हटाकर सत्ता हासिल की थी। HTS के नेतृत्व में विद्रोही समूहों ने दमिश्क पर कब्जा किया था, लेकिन अब उनके सामने अपने ही देश को संभालने की चुनौती है। अलावी समुदाय के खिलाफ ये हमले सीरिया में गहरी धार्मिक और जातीय दरार को दिखाते हैं। अगर ये हालात काबू में नहीं आए, तो ये हिंसा और खतरनाक रूप ले सकती है।

सीरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी ने रक्षा मंत्रालय के अधिकारी के हवाले से कहा कि सरकारी बलों ने ज्यादातर इलाकों पर फिर से कब्जा कर लिया है। तटीय इलाकों की ओर जाने वाली सड़कों को बंद कर दिया गया है, ताकि और हिंसा न हो और धीरे-धीरे हालात सामान्य किए जा सकें। शनिवार (8 मार्च 2025) को तुवायम गाँव में 31 लोगों की सामूहिक कब्र बनाई गई, जिनमें 9 बच्चे और 4 महिलाएँ शामिल थीं। इन लोगों को शुक्रवार की हिंसा में मारा गया था। वहीं, उत्तर-पश्चिम के अल-जनौदिया गाँव में चार सैनिकों का अंतिम संस्कार हुआ, जो तटीय इलाकों में मारे गए थे।

लेबनान के सांसद हैदर नासर ने बताया कि लोग डर के मारे सीरिया से लेबनान की ओर भाग रहे हैं। कुछ लोग रूस के ह्मेमिम एयरबेस पर शरण ले रहे हैं। नासर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अलावियों की सुरक्षा की माँग की। उनका कहना है कि असद के जाने के बाद कई अलावियों को नौकरी से निकाल दिया गया। यही नहीं, जिन सैनिकों ने नई सरकार से सुलह कर ली थी, उन्हें भी मार दिया गया। फ्रांस ने भी इस हिंसा पर गहरी चिंता जताई है। फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वो धार्मिक आधार पर नागरिकों और कैदियों के खिलाफ अत्याचारों की कड़ी निंदा करता है। फ्रांस ने सीरिया की अंतरिम सरकार से माँग की है कि इन अपराधों की निष्पक्ष जाँच हो।

ये हिंसा नई सरकार के लिए एक बड़ा इम्तिहान है। असद के शासन के दौरान अलावी समुदाय सेना और सुरक्षा एजेंसियों में बड़े पदों पर रहा था। अब नई सरकार का कहना है कि असद के समर्थक पिछले कुछ हफ्तों से उनके सैनिकों पर हमले कर रहे हैं। लेकिन जिस तरह ये हिंसा बदले की भावना में बदल गई है, उससे साफ है कि सीरिया में शांति अभी दूर की बात है।

अमेरिका के कैलिफोर्निया में हिंदू मंदिर पर हमला, दीवारों पर लिखे मोदी विरोधी नारे: भारत के विदेश मंत्रालय ने उठाई सख्त कार्रवाई की माँग

अमेरिका में एक बार फिर हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया है। इस बार घटना कैलिफोर्निया के चीनो हिल्स में बने BAPS मंदिर की है। हमले से संबंधित जानकारी खुद BAPS के आधिकारिक पेज पर दी गई है।

BAPS पब्लिस अफेयर्स ने अपने एक्स अकॉउंट पर पोस्ट किया- “मंदिर के अपमान की एक और घटना, इस बार ये कैलिफोर्निया के चिनो हिल्स में हुआ है। हिंदू समुदाय नफरत के खिलाफ डटकर खड़ा है। हम कभी नफरत को जड़ मजबूत करने नहीं देंगे। हमारी साझा मानवता और आस्था यह सुनिश्चित करेगी कि शांति और करुणा बनी रहे।”

इस हमले की निंदा अमेरिका में अन्य हिंदू संगठनों और नेताओं ने भी की। ‘कोलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका’ ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि ये सब एक बार फिर दिखाता है कि हिंदू मंदिरों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।

वहीं भारत के विदेश मंत्रालय ने इस खबर को सुनने के बाद आरोपितों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जैस्वाल ने कहा, “हमने कैलिफोर्निया के चिनो हिल्स में एक हिंदू मंदिर पर हमले की रिपोर्ट देखी है। हम ऐसी अस्वीकृत करने योग्य घटनाओं की सबसे मजबूत शब्दों में निंदा करते हैं। हम स्थानीय कानून प्रवर्तन अधिकारियों से आग्रह करते हैं कि वे इन कार्यों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें और पूजा स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।”

बता दें कि इस घटना से जुड़ी सामने आई तस्वीरों में मंदिर के बाहर काले रंग से ‘ F%$& मोदी’ लिखा देखा जा सकता है। इसके अलावा ‘मोदी-हिंदू मुर्दाबाद’ भी दीवारों पर लिखा गया। भारत और प्रधानमंत्री का अपमान करने के लिए जमीन से लेकर बोर्ड और दीवार सब गंदे किए गए।

यह पहली बार नहीं है जब कैलिफोर्निया में हिंदू मंदिरों पर हमला हुआ है। खालिस्तानी तत्व अकसर हिंदू मंदिरों को निशाना बनाते हैं। इससे पहले सितंबर 2024 में, BAPS श्री स्वामीनारायण मंदिर सैक्रामेंटो को भी इसी तरह के हिंदू विरोधी संदेशों के साथ विकृत किया गया था। उस समय भी स्थानीय हिंदू समुदाय ने सुरक्षा बढ़ाने की माँग की थी और अधिकारियों से त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह किया था।

दिल्ली की रेस, महाकुंभ की भगदड़, औरंगजेब… CM योगी ने एक मंच से सारे सवालों के जवाब किए क्लियर, कहा- लखनऊ से गोरखपुर जाने को उत्सुक हूँ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराधिकारी बनने की अटकलों को खारिज कर दिया है। सीएम योगी ने कहा कि लखनऊ से वे गोरखपुर जाना पसंद करेंगे, ना कि दिल्ली। उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ के दौरान भगदड़ की पुष्टि एवं मृतकों के बारे में जानकारी देने में हुई देरी की भी वजह बताई। इसके साथ ही होली के दिन मुस्लिमों को अपने घरों में रहने की सलाह देने वाले संभल के CO अनुज चौधरी का भी बचाव किया।

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में बोलते हुए सीएम योगी ने कहा, “मैं कोई (प्रधानमंत्री पद का) वारिस-ऊरिस नहीं हूँ। मैं एक योगी हूँ और योगी के रूप में काम करना चाहता हूँ। भारत माता के सेवक के रूप में उत्तर प्रदेश के जनता की जिम्मेदारी मुझे दी गई है। उसी के रूप में अपना काम कर रहा हूँ। मुझे अच्छा लगेगा कि ये कार्य करते-करते मुझे गोरखपुर की तरफ जाने का अवसर मिले तो कम-से-कम अपने योगी धर्म को और आगे बढ़ा सकूँ। मैं (दिल्ली के बजाय) गोरखपुर की ओर जाने को उत्सुक ज्यादा हूँ।”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित कुछ अन्य नेताओं के साथ मनमुटाव पर भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुलकर बात रखी। दिल्ली के केंद्रीय नेतृत्व के साथ समीकरण के सवाल पर सीएम योगी ने कहा, “मैं तो एक योगी हूँ। मेरा इक्वेशन किसी से खराब क्यों होगा? प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) जी हमारे नेता हैं। अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष या राष्ट्रीय नेतृत्व का सम्मान करना मेरा धर्म है और वह हम पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभा रहे हैं।”

केंद्रीय नेतृत्व के साथ खट्टे-मीट्ठे रिश्तों के अफवाह को लेकर सीएम योगी ने आगे कहा, “जब मैंने संन्यास लिया था, तब भी लोगों ने ऐसी बातें की थीं। तब भी लोग कहते थे, टिप्पणी करते थे। हम उनकी बात सुनेंगे तो कुछ नहीं कर पाएँगे। महाकुंभ के दौरान भी इसी प्रकार का अफवाह उड़ाया जा रहा था। केंद्र के साथ हमारा तारतम्य बेहतर है। पीएम मोदी के मार्गदर्शन में काम करता हूँ।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संभल के CO अनुज चौधरी के बयान का बचाव किया। अनुज चौधरी ने कहा था कि होली साल में एक बार आती है और जुम्मा हर सप्ताह। होली के दिन जिन मुस्लिमों को रंग से दिक्कत है, वे घर से बाहर ना निकले। इस बयान को लेकर कई राजनीतिक दल और पूर्व अधिकारी अनुज चौधरी की आलोचना कर रहे थे।

इसको लेकर सीएम योगी ने कहा, “स्वाभाविक रूप से जुम्मे की नमाज हर शुक्रवार के दिन होती हैं। होली वर्ष में एक बार होती है। यही बात कही गई और प्यार से समझाई गई। …14 मार्च को होली है। 2 बजे तक होली खेलने दो और दो बजे के बाद जुम्मे की नमाज पढ़ो। जुम्मे की नमाज स्थगित भी हो सकती है। बाध्यकारी तो है नहीं कि होना ही होना है। अगर कोई व्यक्ति पढ़ना ही चाहता है तो अपने घर में पढ़ सकता है। मस्जिद जाना है तो रंग से परहेज ना करें।”

अनुज चौधरी की बात करते हुए उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी ने यही बात समझाई। हमारा वो पुलिस अधिकारी पहलवान रहा है। अर्जुन अवॉर्डी है। ओलंपियन रहा है। पहलवान की बात है तो पहलवानी की तरह बोलेगा। इससे कुछ लोगों को बुरा लगता है, लेकिन वो सच है। सच्चाई को स्वीकार करना चाहिए।”

औरंगजेब को अपना आदर्श मानने वाले लोगों को भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आड़े हाथों लिया। सीएम योगी ने कहा, “अगर कोई औरंगजेब को अपना नायक और आदर्श मानता है तो मैं मानता हूं कि वह मानसिक विकृति का शिकार है। कोई सभ्य मुसलमान भी अपने पुत्र का नाम औरंगजेब नहीं रखना चाहता, क्योंकि औरंगजेब ने पिता शाहजहाँ को ही कैद कर दिया था। शाहजहाँ को एक-एक बूँद जल के तरसाया था।”

समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी को यूपी भेजने के अपने बयान को लेकर सीएम योगी ने कहा, “काशी विश्वनाथ, मथुरा सहित हजारों मंदिरों को तुड़वाया था। हिंदुओं पर जजिया कर लगाया था और हजारों लोगों का नरसंहार करवाया था। तो औरंगजेब को आदर्श मानना मानसिक विकृति है। तो उत्तर प्रदेश मानसिक विकृति के उपचार का सेंटर है। उत्तर प्रदेश आइए ना, हम उपचार करवाएँगे।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार (8 मार्च) को मौनी अमावस्या स्नान के दिन भगदड़ और मृतकों की पुष्टि करने में देरी की वजह बताई। उन्होंने कहा कि भगदड़ रात में हुई थी और सुबह 4 बजे से ही स्नान था। इसलिए सरकार का सारा ध्यान स्नान के लिए आए 8 करोड़ श्रद्धालुओं पर था। सीएम योगी का कहने का अर्थ था कि अगर यह बात सुबह ही बता दी जाती तो श्रद्धालुओं ने बेचैनी बढ़ जाती और इसके नतीजे और भी खराब हो सकते थे।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रयागराज महाकुंभ में इस घटना के बावजूद अधिकारी वहाँ भीड़ को संभालने में व्यस्त थी। इसके साथ ही इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में घायल हुए लोगों को अस्पताल पहुँचाना भी सबसे महत्वपूर्ण था। सीएम योगी ने कहा, “घायलों को 15 मिनट के भीतर अस्पताल ले जाया गया। गंभीर रूप से घायल 65 लोगों को अस्पताल ले जाया गया था। दुर्भाग्यवश से उनमें से 30 लोगों की मृत्यु हो गई।”

हरिद्वार के ‘आयुर्वेदिक कॉलेज’ में बिन परमिशन मुस्लिम छात्रों ने की इफ्तार पार्टी, कई बाहरियों को परिसर में घुसाया: पता चलने पर हंगामा, बजरंग दल ने बताया- इस्लामी जिहाद

हरिद्वार के ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज में कुछ मुस्लिम छात्रों ने शुक्रवार (7 मार्च 2025) को इफ्तार पार्टी रखी, जिसके बाद शनिवार (8 मार्च 2025) को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कॉलेज में हंगामा मचा दिया। उनका कहना था कि ये पार्टी ‘हिंदू धार्मिक शहर’ में बाहरी लोगों को लाने की साजिश थी और इसे ‘इस्लामिक जिहाद’ का हिस्सा बताया।

बजरंग दल के नेता अमित कुमार ने कहा कि हरिद्वार में गैर-हिंदुओं द्वारा ऐसी कोई भी गतिविधि म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के नियमों के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तीन दिन में दोषी छात्रों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो बड़ा प्रदर्शन होगा। पुलिस ने हंगामे को शांत कराया, लेकिन माहौल तनावपूर्ण रहा।

कॉलेज के डायरेक्टर डीसी सिंह ने बताया कि उन्हें शिकायत मिली थी कि कुछ छात्रों ने बिना इजाजत पार्टी की। चौकीदार ने सूचना दी, जिसके बाद शिक्षकों ने छात्रों को भगा दिया। सिंह ने कहा कि ये किस तरह की पार्टी थी, ये साफ नहीं था, लेकिन जाँच के लिए एक कमेटी बना दी गई है, जो तीन दिन में रिपोर्ट देगी।

दूसरी तरफ, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कार्यकर्ताओं ने कॉलेज गेट पर प्रदर्शन किया और अंदर घुसने की कोशिश की, पर पुलिस ने रोक लिया। बजरंग दल के प्रदेश संयोजक अनुज वालिया ने कहा कि ऐसी हरकतें हिंदू भावनाओं से खिलवाड़ हैं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने सिटी मजिस्ट्रेट को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा। सिटी मजिस्ट्रेट कुश्म चौहान ने बताया कि पुलिस को मौखिक रूप से जाँच के निर्देश दिए गए हैं। ऋषिकुल कॉलेज का ऐतिहासिक महत्व है, जो पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित विद्यापीठ का हिस्सा है। इस घटना से हिंदू संगठनों में गुस्सा है।

रमजान में गोमांस की बढ़ी माँग… घोड़े का मीट मिलाकर बेचने लगे व्यापारी, असम पुलिस ने 3 को दबोचा: होटल-रेस्टोरेंट में 6 महीने से हो रही थी सप्लाई, अवशेष मिलने के बाद खुलासा

असम के बारपेटा जिले के बाघमारा इलाके में शुक्रवार (7 मार्च 2025) को मांस बिक्री को लेकर तनाव फैल गया। कुछ लोगों पर बीफ (गोमांस) के नाम पर घोड़े का मांस बेचने का आरोप लगा है। इसके बाद बाजार में बड़ी संख्या में मुस्लिमों ने जुटकर 3 लोगों को पकड़ लिया और उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने मारने के लिए लाए गए 6 घोड़ों को भी छुड़ा लिया है।

बता दें कि असम सरकार ने गोमांस की बिक्री और खपत पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसलिए राज्य में गोमांस की कमी हो गई है। इसके अलावा, हाल ही में सरकार ने होटल और रेस्तरां सहित सार्वजनिक स्थानों पर गोमांस के सेवन पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। इस प्रतिबंध के बावजूद मुस्लिम बहुल क्षेत्रों के होटल और रेस्तरां, खासकर ब्रह्मपुत्र नदी के द्वीपों और रेतीले इलाकों में, अभी भी गोमांस परोसा जा रहा है।

हालाँकि, बाघमारा में कुछ लोगों को संदेह था कि वे जो मांस खा रहे हैं वह गोमांस नहीं है। इसके बाद उन्होंने शुक्रवार (7 मार्च) को इलाके में लाए गए 6 घोड़ों को देखा। चूँकि इस इलाके में घोड़ों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, इसलिए उन्हें संदेह हुआ। उन्हें लगा कि इन घोड़ों को काटने के लिए लाया गया है। उन्होंने इन्हें ले जा रहे वाहनों को रोका और तीन लोगों को पकड़ लिया।

गुस्साए लोगों द्वारा पकड़े गए इन लोगों ने अपने कब्जे में ले लिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि गोमांस की बिक्री पर प्रतिबंध के बाद उसकी कीमतों में वृद्धि हो गई है। इसलिए कुछ बदमाश गोमांस में घोड़े का मांस मिलाकर बेच रहे थे। लोगों का कहना है कि इलाके के खाने-पीने के सामान वाले पिछले 6 महीनों से ग्राहकों को यही मिलावट वाला मांस बेच रहे थे।

लोगों का आरोप है कि घोड़ों को जंगल में गुप्त रूप से काटा जाता है और उनके मांस को होटलों और रेस्तरांओं में सप्लाई किया जाता है। चूँकि रमज़ान के दौरान इफ्तार पार्टियों के लिए गोमांस की माँग बढ़ जाती है, इसलिए इस बढ़ी हुई माँग को पूरा करने के लिए घोड़े के मांस मिलाकर बेचे जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने हाल के दिनों में जंगल के इलाकों में घोड़ों के अंगों के अवशेष देखे हैं।

‘आधे कॉन्ग्रेस नेता BJP से मिले… इन सबको निकालेंगे’: गुजरात में राहुल गाँधी ने अपनी पार्टी वालों पर ही साधा निशाना, बोले- ये हमें काम करने से रोकते हैं

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी ने गुजरात में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं से बड़ी बात कह दी। राहुल गाँधी ने कहा कि पिछले 30 साल से कॉन्ग्रेस गुजरात के लोगों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई, क्योंकि पार्टी के कुछ नेता अंदर से बीजेपी के साथ मिले हुए हैं। राहुल ने दो दिन के दौरे पर अहमदाबाद में ये बात कही और साफ किया कि ऐसे लोगों को बाहर का रास्ता दिखाना जरूरी है, तभी गुजरात के लोग कॉन्ग्रेस पर भरोसा करेंगे।

राहुल गाँधी ने कहा कि गुजरात में कॉन्ग्रेस दो तरह के नेताओं से भरी पड़ी है। एक वो, जो जनता के साथ खड़े हैं और लड़ते हैं, जिनके दिल में कॉन्ग्रेस है। दूसरे वो जो ऊपर से कॉन्ग्रेस में हैं, लेकिन बीजेपी के लिए काम करते हैं। राहुल ने कहा, “ऐसे 20-30 लोगों को भी निकालना पड़े, तो निकालेंगे। अगर आप कॉन्ग्रेस में रहकर बीजेपी के लिए काम कर रहे हो, तो बाहर जाओ और खुलकर उनके लिए काम करो। वहाँ तुम्हें कोई भाव नहीं मिलेगा।” उनका मानना है कि ऐसा करने से गुजरात के लोग कॉन्ग्रेस में भरोसा करेंगे और पार्टी के दरवाजे उनके लिए खोलने पड़ेंगे।

राहुल ने ये भी कहा कि गुजरात में कॉन्ग्रेस के पास 40% वोट हैं, जो कोई छोटी ताकत नहीं है। तेलंगाना में पार्टी ने 22% वोट बढ़ाए थे, यहाँ सिर्फ 5% की जरूरत है। लेकिन इसके लिए पार्टी को साफ-सफाई करनी होगी। राहुल गाँधी ने कहा, “चुनाव जीतना या हारना अलग बात है, लेकिन कॉन्ग्रेस का खून नेताओं की रगों में होना चाहिए। मैं गुजरात के लोगों से सीधा रिश्ता बनाना चाहता हूँ। भारत जोड़ो यात्रा से हमने दिखाया कि कॉन्ग्रेस कश्मीर से कन्याकुमारी तक लोगों से जुड़ सकती है। हमें लोगों के घरों में जाना होगा, उनकी बात सुननी होगी।”

राहुल ने गुजरात की तारीफ करते हुए कहा कि महात्मा गाँधी और सरदार पटेल जैसे नेता यहाँ से निकले, जिन्होंने कॉन्ग्रेस को रास्ता दिखाया। राहुल ने कहा कि गुजरात के व्यापारी, किसान और छोटे उद्योग मुश्किल में हैं। डायमंड, टेक्सटाइल और सेरामिक इंडस्ट्री खत्म हो रही है। लोग नई सोच चाहते हैं, जो बीजेपी पिछले 25 साल से नहीं दे पाई। राहुल ने वादा किया कि वो गुजरात में कॉन्ग्रेस का छिपा हुआ जोश बाहर लाएँगे।

1983 का क्रिकेट वर्ल्ड कप फाइनल… जब ‘गरीब’ BCCI को इंग्लैंड ने माँगने पर भी नहीं दिया था 2 टिकट: अब पैसे के लिए वहीं के खिलाड़ी खेलते हैं IPL, भारत ने ऐसे बदल दी क्रिकेट की दुनिया

चैंपियंस ट्रॉफी-2025 का फाइनल मुकाबला भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेला जाएगा। ये मुकाबला दुबई में खेला जाएगा, जिसके पीछे की वजह भारत है। चूँकि इस बार चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी पाकिस्तान कर रहा था, लेकिन मेजबान होते भी पाकिस्तान मेजबानी नहीं कर पा रहा है, बल्कि भारत की वजह से फाइनल और सेमीफाइनल मुकाबला दुबई में करवाना पड़ा रहा है। और इस बात ने पाकिस्तान की अच्छी-खासी किरकिरी करवा दी।

पाकिस्तान की ऐसी हालत देख कर इंग्लैंड क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने मजे ले लिए। माइकल वॉन ने एक्स पर लिखा, “दुबई ने #ChampionsTrophy की शानदार मेजबानी की है।”

माइकल वॉन का ये तंज साफ दिखाता है कि पाकिस्तान भले ही मेजबान हो, लेकिन असली कमान भारत के हाथ में है। वैसे, ये कोई नई बात नहीं है। भारत का क्रिकेट में दबदबा आज पूरी दुनिया देख रही है। लेकिन एक वक्त ऐसा भी था, जब भारत को भी ऐसी ही जिल्लत झेलनी पड़ी थी। आज की ये रिपोर्ट उसी कहानी को आगे बढ़ाती है, जिसमें भारत ने अपनी ताकत से क्रिकेट की दुनिया को हिला दिया।

भारत-पाकिस्तान का क्रिकेट ड्रामा

चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी को लेकर जो ड्रामा हुआ, वो कोई पहली बार नहीं है। भारत ने साफ कह दिया कि वो पाकिस्तान नहीं जाएगा। वजह सियासी भी थी और सुरक्षा से जुड़ी भी। भारत का ये रुख देखकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के पास कोई चारा नहीं बचा। आखिरकार, ICC को बीच में आना पड़ा और हाइब्रिड मोड का रास्ता निकाला गया। इसके तहत भारत के सारे मैच दुबई में होंगे, चाहे वो लीग स्टेज हो, सेमीफाइनल हो या फिर फाइनल। बाकी टीमें भी अब पाकिस्तान से दुबई की यात्रा करेंगी।

पाकिस्तान के लिए ये बड़ा झटका है। मेजबान होने के बावजूद वो अपने घर में बड़े मैच नहीं खेल पा रहा। ऊपर से माइकल वॉन जैसे दिग्गजों के ताने सुनने पड़ रहे हैं। लेकिन ये सब देखकर हमें वो पुराना वाकया याद आता है, जब भारत भी ऐसी ही हालत में था। बात 1983 की है, जब भारत ने पहला वर्ल्ड कप जीता था। उस वक्त फाइनल में पहुँचने के बाद भी बीसीसीआई को इंग्लैंड में दो टिकट तक नहीं मिले थे। उस अपमान ने भारत को ऐसा सबक सिखाया कि आज वो क्रिकेट की दुनिया का बादशाह बन गया है।

1983 का वो अपमान, जिसने बदली तस्वीर

साल 1983 का वर्ल्ड कप फाइनल। भारत बनाम वेस्टइंडीज। जगह थी लॉर्ड्स, इंग्लैंड। कपिल देव की टीम ने इतिहास रच दिया और भारत को पहला वर्ल्ड कप जिता दिया। लेकिन इस जीत के पीछे एक कड़वी कहानी भी थी। उस वक्त बीसीसीआई के अध्यक्ष एनकेपी साल्वे को फाइनल के लिए दो एक्स्ट्रा टिकट चाहिए थे। उन्होंने इंग्लैंड के क्रिकेट बोर्ड से गुजारिश की, लेकिन जवाब में साफ मना कर दिया गया। बोला गया कि दो टिकट तो दे दिए, अब और नहीं मिल सकते। हैरानी की बात ये थी कि स्टेडियम में एक पूरा हिस्सा खाली था, क्योंकि इंग्लैंड फाइनल में नहीं पहुँचा था और वहाँ के बुलाए गए मेहमान नहीं आए। फिर भी भारत को टिकट नहीं दिए गए।

ये बात साल्वे साहब को चुभ गई। उन्हें लगा कि भारत को कोई औकात ही नहीं समझा जा रहा। उस वक्त क्रिकेट की दुनिया में इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज का दबदबा था। भारत और पाकिस्तान जैसे देशों को हल्के में लिया जाता था। लेकिन इस अपमान ने साल्वे के मन में आग लगा दी। उन्होंने ठान लिया कि अब क्रिकेट का केंद्र इंग्लैंड से हटेगा। इसके बाद जो हुआ, वो इतिहास बन गया।

इस घटना से जुड़ी रिपोर्ट

भारत ने कैसे बदली क्रिकेट की सूरत

1983 की जीत के बाद साल्वे ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष नूर खान से हाथ मिलाया। दोनों ने मिलकर 1987 का वर्ल्ड कप इंग्लैंड से बाहर लाने का प्लान बनाया। ICC की बैठक में भारत और पाकिस्तान ने इंग्लैंड को 16-12 से वोटिंग में हरा दिया। पहली बार वर्ल्ड कप भारत और पाकिस्तान में आया। इसे “रिलायंस वर्ल्ड कप” कहा गया, क्योंकि धीरूभाई अंबानी ने इसमें बड़ा पैसा लगाया था।

हालाँकि, ये आसान नहीं था। इंग्लैंड ने खूब अड़ंगे लगाए। कहा कि भारत-पाकिस्तान में ढंग का इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं है। लेकिन साल्वे और उनकी टीम ने हार नहीं मानी। पैसा जुटाने के लिए सरकार से लेकर बड़े बिजनेसमैन तक, सबको साथ लाया गया। आखिरकार 1987 में क्रिकेट वर्ल्ड कप भारत में हुआ। भले ही भारत सेमीफाइनल में हार गया, लेकिन ये जीत क्रिकेट को इंग्लैंड से बाहर लाने की थी।

बीसीसीआई बना क्रिकेट का सिरमौर

साल 1983 के बाद भारत ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1990 के दशक में जगमोहन डालमिया और आईएस बिंद्रा जैसे लोग बीसीसीआई में आए। इन्होंने क्रिकेट को पैसा कमाने की मशीन बना दिया। पहले दूरदर्शन का एकछत्र राज था, लेकिन डालमिया ने इसे कोर्ट में चुनौती दी और ब्रॉडकास्टिंग के अधिकार बीसीसीआई के नाम करवाए। 1993 में भारत-इंग्लैंड सीरीज के राइट्स 18 लाख में बिके। फिर 1996 वर्ल्ड कप के राइट्स 10 मिलियन डॉलर में। धीरे-धीरे ये आंकड़ा बढ़ता गया। आज बीसीसीआई के पास इतना पैसा है कि वो कई देशों के क्रिकेट बोर्ड को पाल सकता है।

IPL ने तो कमाल ही कर दिया। 2023-28 के लिए इसके मीडिया राइट्स 48,390 करोड़ में बिके। आईपीएल में इंग्लैंड के भी खिलाड़ी खेलते हैं। यही नहीं, आईपीएल के समय ऑस्ट्रेलिया हो या इंग्लैंड, कोई टीम इंटरनेशनल मैच भी नहीं खेलती और अपने खिलाड़ियों को एनओसी देकर आईपीएल में खेलने की इजाजत देती हैं, क्योंकि इससे खिलाड़ियों की ही नहीं, बोर्ड की भी मोटी कमाई होती है। कभी इंग्लैंड में जिल्लत झेलने वाली बीसीसीआई अब इंग्लैंड के ही नहीं, दुनिया भर के खिलाड़ियों की बोली लगवाती है और पाकिस्तान जैसे देश के खिलाड़ियों को एंट्री तक नहीं देती।

आज बीसीसीआई दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड है। एक वक्त था, जब 1983 की जीत के बाद खिलाड़ियों को सम्मानित करने के लिए लता मंगेशकर को कॉन्सर्ट करना पड़ा था। और आज भारत के पास इतना दम है कि वो चैंपियंस ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट को अपनी शर्तों पर दुबई में करवा रहा है।

साल 1983 में दो टिकटों के अपमान से शुरू हुआ सफर आज 2025 में चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल तक पहुँच चुका है। उस वक्त इंग्लैंड ने भारत को हल्के में लिया था और आज पाकिस्तान भारत के आगे मजबूर है। माइकल वॉन का तंज हो या दुबई में फाइनल का आयोजन, ये सब भारत की ताकत की मिसाल है। क्रिकेट अब सिर्फ खेल नहीं, बल्कि भारत का दबदबा है।

तो दोस्तों, ये थी कहानी कि कैसे भारत ने क्रिकेट की दुनिया को अपने कदमों में ला दिया। 1983 में जो टीस हुई थी, वो आज जीत में बदल गई है। अब देखना ये है कि दुबई में होने वाला फाइनल भारत के नाम होता है या न्यूजीलैंड बाजी मार जाता है।

चर्च बना भैरवनाथ का मंदिर, ईसाई बन रहे हिंदू: राजस्थान के बाँसवाड़ा का वो गाँव जहाँ लोग कर रहे हैं घर वापसी, लगा रहे ‘जय श्रीराम’ के नारे

राजस्थान के बाँसवाड़ा जिले में एक चर्च को हिंदू मंदिर में बदला जा रहा है। जिस गाँव में यह बदलाव हो रहा है, उस गाँव के लोग कुछ साल पहले ईसाई में धर्मांतरित हो गए थे। यह चर्च भी उसी समय का बना हुआ है। अब लगभग पूरा गाँव फिर से हिंदू बन गया है। इसके बाद अब ग्रामीण चर्च को मंदिर में बदल रहे हैं। चर्च से मंदिर बनाने के बाद उसमें भैरव जी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।

यह मामला बाँसवाड़ा जिले के गांगड़तलाई स्थित सोडलादूधा गाँव का है। भारतमाता मन्दिर परियोजना के प्रयास से कुछ दिन पहले इस गाँव के 80 परिवारों ने घर वापसी करके हिन्दू धर्म अपना लिया है। घर वापसी के बाद गाँव के परिवारों ने भैरव जी का मन्दिर स्थापित करने का निर्णय लिया है। रविवार 9 मार्च 2025 को मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम निश्चित किया गया है।

दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, गाँव के गौतम गरासिया नाम के एक बुजुर्ग शख्स ने बताया कि 30 साल पहले वे ईसाई बन गए थे। वे धर्मांतरण करने वाले गाँव के पहले व्यक्ति थे। इसके बाद उनके परिवार के 30 सदस्यों ने भी ईसाई धर्म अपना लिया। उनसे प्रेरित होकर कुछ और लोगों ने भी ईसाई धर्म अपना लिया। हालाँकि, उनके छोटे भाई का परिवार हिंदू बना रहा।

रिपोर्ट के मुताबिक, गौतम का कहना है कि उनके ईसाई बनने के बाद ईसाई समुदाय के लोगों का उनके गाँव में आवाजाही शुरू हो गई। गौतम हर रविवार को अपनी झोपड़ी में प्रार्थना सभा आयोजित करने लगे। इसके बाद उनकी झोपड़ी को चर्च में बदलने के लिए तीन पहले पहले उन्हें पैसे दिए गए। झोपड़ी जब चर्च बन गया तो उसमें बाहर से भी पादरी आने लगे।

वे गाँव के अन्य लोगों को भी ईसाई बनने के लिए प्रेरित करने लगे। प्रार्थना सभा में आने वाले ग्रामीणों को भी वे दान करने के लिए कहते थे। साथ ही उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के लिए कहते थे। इन लोगों ने गौतम को गाँव के इस चर्च का पादरी भी बना दिया। इसके बदले उन्हें हर महीने लगभग 1500 रुपए दिए जाते थे।

गौतम के दो बेटों ने घर वापसी कर ली है, जबकि गौतम की पत्नी अभी ईसाई ही हैं। उन्होंने कहा कि गाँव के 45 लोगों में से 30 लोगों ने हिंदू धर्म को फिर से अपना लिया है। उन्होंने दावा किया कि बचे हुए 15 लोग भी जल्द घर वापसी करने वाले हैं। घर वापसी करने वाले लोगों का कहना है कि जो लोग अभी ईसाई हैं, उन्हें हिंदू बनने के लिए वे समझाते हैं।