उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित मलिहाबाद में एक युवक की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। इसके बाद हुए उपद्रव को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसपी ग्रामीण आदित्य लंगेह को हटा दिया है। उनकी जगह सीबीसीआईडी के एसपी हृदयेश कुमार को ये जिम्मेदारी सौंपी गई है। मलिहाबाद में रामविलास नामक युवक की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद से ही वहाँ तनाव व्याप्त है।
मलिहाबाद कोतवाली के इंस्पेक्टर सियाराम को भी निलंबित कर दिया गया है। साथ ही नामजद आरोपितों पर NSA के तहत कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। मलिहाबाद के सीओ को पूरे मामले की जाँच सौंपी गई है। डीएम अभिषेक प्रकाश ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर आरोपितों पर सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। साथ ही मृतक रामविलास रावत की पत्नी सुमन के बैंक अकाउंट में बतौर मुआवजा 5 लाख रुपए की राहत राशि डाली गई।
प्रशासन ने ग्रामीण आवास योजना के तहत पीड़ित परिवार को घर देने की भी बात कही है। मृतक की पत्नी सुमन को विधवा पेंशन और मृतक के पिता को वृद्धावस्था पेंशन दिया जाएगा। मलिहाबाद में तनाव को देखते हुए पुलिस-बल की भी तैनाती की गई है। इस मामले में तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है और अन्य की तलाश जारी है। इसके लिए तीन पुलिस टीमें गठित की गई हैं, जो छापेमारी कर रही हैं।
ये घटना गुरुवार (सितम्बर 10, 2020) की है, जब दिलावरपुर गाँव निवासी पंचम रावत के बेटे 32 वर्षीय रामविलास रावत की बाइक टक्कर में हुए विवाद के दौरान हत्या कर दी गई थी। परिवार वालों ने हत्या के इस मामले में नामजद आरोपितों के रूप में गाँव के ही रहने वाले गुलाम अली, मुस्तकीम, मुकीद, शानू और गुड्डू का नाम दर्ज कराया था। आरोप है कि इन लोगों पुरानी रंजिश के कारण रामविलास पर बाइक चढ़ाई और फिर मार डाला।
इस घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने 2 दिनों तक पुलिस के रवैये को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि पुलिस इस मामले को सड़क हादसा बता कर कार्रवाई करने से बच रही है। पथराव और आगजनी की घटनाओं के बाद पुलिस को फायरिंग भी करनी पड़ी थी। आईजी लक्ष्मी सिंह ने इस मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज कर ग्रामीणों को शांत कराया। मुफीद, गुलाम और मुस्तकीम गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
मलिहाबाद के दिलावरनगर में प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ताँता लगा हुआ है। बावजूद इसके ग्रामीणों में पुलिस के रवैये को लेकर आक्रोश बना हुआ था। उनका कहना है कि 1 दिन पहले तक पुलिस-प्रशासन की टीम उन्हें ही गलत ठहरा रही थी। उनका पूछना है कि बिना जाँच के ही इसे सड़क हादसा कैसे बताया गया? मृतक के परिवार में पत्नी सुमन के अलावा बेटी मानसी, बेटा आयुष व 1 वर्ष के दो जुड़वा बच्चे आरुषि और रिषभ हैं।
उद्धव ठाकरे पर कार्टून साझा करने वाले पूर्व नौसेना अधिकारी पर हुए हमले के मुद्दे पर बयानबाजी का दौर जारी है। शिवसेना ने शिवसैनिकों द्वारा पूर्व नौसेना अधिकारी मदन शर्मा पर किए गए हमले पर बयान जारी किया है। बयान में उन्होंने हमले को गुस्से और हालातों का परिणाम बताया है। शनिवार (12 सितंबर 2020) को शिवसेना प्रवक्ता ने संगठन की ओर से बयान जारी करते हुए यह बात कही।
संजय राउत ने अपने बयान में कहा, “महाराष्ट्र में क़ानून का राज है। क़ानून को हाथ में लेने वाले हर व्यक्ति पर कार्रवाई होगी। यह उद्धव सरकार की नीति है। नौसेना अधिकारी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पर जो कार्टून साझा किया था, वह विवादास्पद था। शिवसैनिकों द्वारा किया गया हमला गुस्से और परिस्थितियों का नतीजा था। इस घटना के ठीक बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और उचित कार्रवाई भी की गई।”
इसके बाद संजय राउत ने इस मुद्दे पर भाजपा की तरफ से आई प्रतिक्रिया को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा भाजपा इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है। उनके अनुसार ऐसी बातों पर दोनों तरफ से नियंत्रण होना चाहिए। अगर संवैधानिक पदों पर बैठे लोग जैसे प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, राज्यपाल या मुख्यमंत्री की आलोचना होती है और उस आलोचना में अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर अपमानजनक टिप्पणी की जाती है तो ऐसे में आम लोग अपना नियंत्रण खोने ही लगते हैं। सभी को ज़िम्मेदारी के साथ पेश आना चाहिए, विपक्ष को भी ध्यान रखना चाहिए कि राज्य में क़ानून व्यवस्था बनी रहे।
वहीं शनिवार को ही महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया था। उन्होंने इस घटना को ‘राज्य प्रायोजित आतंकवाद’ बताया था। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नौसेना अधिकारी मदन शर्मा का हाल पूछने के लिए उन्हें बुलाया था। नौसेना अधिकारी ने खुद पर हुए हमले के एक दिन बाद प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने माँग की थी कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को शिवसैनिकों द्वारा अंजाम दी गई इस घटना के लिए माफ़ी माँगनी चाहिए।
अंत में उन्होंने कहा था कि महाराष्ट्र सरकार प्रदेश में क़ानून व्यवस्था नियंत्रित नहीं कर पा रही है। उनके परिवार ने भी कहा था कि वह सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। एक वरिष्ठ नागरिक पर हमला किया गया है, पुलिस को पता होना चाहिए कि किन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए। उन पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया जाना चाहिए और उन्हें जमानत नहीं मिलनी चाहिए।
ज्ञात हो कि शुक्रवार की सुबह सबर्बन कांदीवाली आवासीय कॉम्प्लेक्स के पास पूर्व नौसेना अधिकारी पर शिवसैनिकों ने हमला किया था। इसके बाद पुलिस ने आरोपितों पर आईपीसी की धारा 325 के तहत मामला दर्ज किया था। हालाँकि शनिवार को उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था।
पाकिस्तान में हिन्दू लड़कियों का अपहरण कर के उनका धर्मान्तरण करा देना और फिर जबरन निकाह करा देने का एक सिलसिला सा चल पड़ा है, जो रुकता नहीं दिख रहा। ताज़ा घटना सिंध प्रान्त के खैरपुर स्थित मोरी में हुई है, जहाँ नाबालिग लड़की परशा कुमारी का अपहरण कर लिया गया। उसका जबरन धर्मान्तरण कर दिया गया और अपहरणकर्ता अब्दुल सबूर के साथ उसका निकाह कर दिया गया। पुलिस इस मामले में निष्क्रिय बनी हुई है।
9वीं कक्षा में पढ़ने वाली पीड़िता मात्र 14 साल की है। पीड़िता के परिवार वालों ने पुलिस के समक्ष एफआईआर दर्ज करा कर पीड़िता को अपहरणकर्ताओं के चंगुल से मुक्त कराने की गुहार लगाई है। पत्रकार नायला इनायत ने सोशल मीडिया पर इस खबर को शेयर करते हुए लिखा कि आरोपितों की ओर से एक एफिडेविट भी पेश किया गया है, जिसमें पीड़िता की उम्र को बढ़ा कर बताया गया है। उन्होंने इसकी तस्वीर भी शेयर की।
आरोपितों की ओर से पीड़िता का जो ‘फ्री विल एफिडेविट’ पेश किया गया है, उसमें लिखा है कि उसका नाम बीबी सुमैया है और उसकी जाति सैयद है। इसमें उसने खुद को घरी मोरी तालुका का मुस्लिम निवासी बताते हुए लिखा है कि वो एक युवा वर्जिन लड़की है और उसका पुराना नाम परशा कुमारी था, जो इस्लाम अपनाने के बाद अब बदल गया है। इसमें लिखा है कि वो एक व्यस्क मुस्लिम महिला है, इसीलिए अपने अच्छे-बुरे के बारे में जानती हैं।
साथ ही बताया है कि वो 18 वर्षीय सैयद अब्दुल सबूर शाह के साथ अपने स्वेच्छा से निकाह करना चाहती हैं। इस एफिडेविट में पीड़िता के हवाले से लिखा गया है कि वो अब्दुल सबूर को अच्छी तरह जानती हैं और वो न सिर्फ नैतिक रूप से अच्छा है, बल्कि समाज में भी उसकी अच्छी प्रतिष्ठा है। कथित रूप से पीड़िता द्वारा दिए गए इस एफिडेविट में दावा किया गया है कि सबूर उसे खुश रखेगा और वो उसी के साथ रहना चाहती हैं।
Hindu girl Parsha Kumari, 14, from Mori district of Khairpur, Sindh was abducted, forcibly converted and married to her abductor Abdul Saboor. Kumari’s family filed FIR to recover the minor who is a class 9 student, but to no avail. Her age is misstated in the affidavit. pic.twitter.com/C7l1Ap3EjB
इसी साल जून में पाकिस्तान के सिंध प्रांत में तीन नाबालिग हिंदू लड़कियों को अगवा कर उनका धर्म परिवर्तन कराकर निकाह कराने का मामला सामने आया था। वकील और कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन ने इन तीन घटनाओं के बारे में सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी थी। ये तीनों ही मामले सिंध के ही थे। अमेरिका में स्थित सिंधी फाउंडेशन के अनुसार, पंजाब के सिंध प्रांत में हर साल करीब 1 हजार हिंदू लड़कियों को अगवा करके उन्हें जबरन इस्लाम कबूल कराया जाता है।
क्या ये सच है कि पहली तिमाही (Q1) में भारत की जीडीपी में बाक़ी देशों से तुलना में सबसे ज्यादा गिरावट आई है? COVID-19 वैश्विक महामारी ने दुनिया भर में तबाही की है और स्वाभाविक रूप से एक वैश्विक आर्थिक मंदी का कारण बनी है। विश्व के एक महत्वपूर्ण और जिम्मेदार अंग होने के कारण भारत इस प्रभाव से बच नहीं सकता। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 9.1%, यूके, फ्रांस, स्पेन, इटली, जर्मनी और जापान में क्रमशः 21.7%, 18.9%, 22.1%, 17.7%, 11.3% और 9.9%, की गिरावट हुई है, जिसमें यूरो एरिया में कुल 15% तक की गिरावट आई है।
इन विकसित राष्ट्रों की तुलना में, भारत की GDP में 23.9 प्रतिशत की गिरावट थोड़ी अधिक है। इसके अलावा, यदि GDP के आँकड़ों को वार्षिक क्वॉर्टर आन क्वॉर्टर में देखा जाता है, तो भारत के प्रदर्शन में सुधार होता है। उदाहरण के लिए, क्वॉर्टर आन क्वॉर्टर आधार पर, पहली तिमाही में भारत की गिरावट -29.3% थी। यह संख्या दक्षिण अफ्रीका के लिए -51%, अमेरिका के लिए -31.7% और जापान के लिए -27.8% थी।
यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि भारत ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा नापे गए गवर्न्मेंट रेस्पॉन्स स्ट्रिंगेंसी सूचकांक के अनुसार सबसे कड़े में से एक लॉकडाउन को लागू किया। लॉकडाउन का तंगी और अर्थव्यवस्था के संकुचन के बीच सीधा संबंध है। यानी लॉकडाउन जितना सख्त होगा, संकुचन उतना ही ज्यादा होगा। अगर लगभग सभी गतिविधियों में ठहराव आ जाए तो अर्थव्यवस्था में संकुचन स्वाभाविक है। निम्नलिखित ग्राफ लॉकडाउन सख़्ती और GDP वृद्धि (गिरावट में वृद्धि) के बीच संबंध दिखाता है:
जैसा कि देखा जा सकता है, भारत ने अन्य देशों की तुलना में अब तक का सबसे सख्त लॉकडाउन लागू किया था, जैसा कि ग्राफ के दाईं ओर दर्शाया गया है।
इस चरम स्थिति की परवाह किए बिना, भारत की GDP गिरावट स्पेन और ब्रिटेन जैसे देशों की तुलना में थोड़ी ही अधिक है, जिन्होंने बहुत अधिक नरम लॉकडाउन लगाया था।
यह भी ध्यान दें कि अन्य देशों में बड़ा संकुचन उनके COVID-19 से लड़ने के लिए बड़े फ़िस्कल पैकेज के बावजूद आया है।
इस कैलेंडर वर्ष की पहली छमाही में भारत की सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि कई उन्नत बाजारों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं से कहीं बेहतर थी और यह भारत में लगाए गए कड़े लॉकडाउन के बावजूद था ।
देश
वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर (2020 छमाही वर्ष 1)
ऑस्ट्रेलिया
-2.4
ऑस्ट्रिया
-8
बेल्जियम
-8.4
बल्गारिया
-2.9
ब्राज़ील
-5.3
कनाडा
-7
स्विट्ज़रलैंड
-5.1
चिली
-6.7
कोलंबिया
-7.7
चेक गणराज्य
-6.4
जर्मनी
-6.7
डेनमार्क
-4.2
स्पेन
-13.1
एस्टोनिया
-3.3
फ़िनलैंड
-3.5
फ़्रांस
-12.3
युनाइटेड किंगडम
-11.7
हंगरी
-5.8
इंडोनेशिया
-1.2
भारत
-10.8
आइसलैंड
-4.9
इज़राइल
-3.6
इटली
-11.7
जापान
-6
कोरिया
-0.8
लिथुआनिया
-0.8
लाटविया
-5.5
मेक्सिको
-10.4
नीदरलैंड
-4.8
नॉर्वे
-2.7
पोलैंड
-3.2
पुर्तगाल
-9.4
रूस
-3.3
स्लोवाक गणराज्य
-8
स्लोवेनिया
-8.3
स्वीडन
-3.5
तुर्कस्तान
-2.4
संयुक्त राज्य अमेरिका
-4.4
यदि आर्थिक क्षति इतनी विशाल होने वाली थी तो क्या इस तरह का सख्त लॉकडाउन आवश्यक था?
दुनिया भर की सरकारों को आर्थिक विकास के संरक्षण और मानव जीवन को बचाने के बीच कठिन विकल्प चुनना पड़ा है। भारत सरकार अलग नहीं है। लॉकडाउन हर भारतीय के सर्वोत्तम हित की कामना के साथ किया गया एक कठिन निर्णय था। लॉकडाउन के परिणामस्वरूप बचाए गए जीवन, निर्मित स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचा, और PPE निर्माण लॉकडाउन अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों को खुद को लैस करने के लिए मिले समय का प्रदर्शक है।
यदि कोई लॉकडाउन नहीं होता, तो कोरोना मामलों और मौतों की संख्या आज से कहीं अधिक होती। लॉकडाउन ने भारत की मृत्यु दर को नियंत्रित कर दुनिया में सबसे कम में से एक करने में सक्षम बनाया है। भारत की मृत्यु दर 31 अगस्त को 1.78% थी जबकि अमेरिका में 3.04%, यूके में 12.35%, फ्रांस में 10.09%, जापान में 1.89% और इटली में 13.18% थी।
सक्रिय मामलों की संख्या 8.82 लाख है जबकि कुल स्वस्थ मामलों की संख्या लगभग चार गुना है। रिकवरी दर अब बढ़कर 77.3% हो गई है, जिसमें मृत्यु दर लगातार घटकर 1.7% हो गई है, जो 7 सितंबर, 2020 को दुनिया में सबसे कम है। लॉकडाउन के कारण भारत को अपनी परीक्षण क्षमताओं का काफी विस्तार करने का भी मौका मिला। भारत उन कुछ देशों में से एक है, जहाँ दैनिक परीक्षण की बहुत अधिक संख्या है। रोजाना टेस्टिंग क्षमता 11.70 लाख को पार कर गई है।
भारत के कुल परीक्षण 7 सितंबर तक करीब 5 करोड़ (4,95,51,507) हैं। 7,20,362 टेस्ट पिछले 24 घंटे में किए गए थे। देश भर में बड़े हुए परीक्षण के परिणामस्वरूप, पिछले दो हफ्तों में अकेले 1,33,33,904 परीक्षण (13,300,000 परीक्षण) किए गए। केंद्र की नीतियाँ लगातार व्यापक वैश्विक संदर्भ में विकसित हो रही हैं। व्यापक परीक्षण को सुगम बनाने के लिए कई उपायों के बाद, हाल ही में केंद्र सरकार ने संशोधित और अद्यतन एक एडवाइसरी जारी की है, जिसमें पहली बार ‘माँग पर परीक्षण’ का प्रावधान है।
प्रतिदिन किए जा रहे परीक्षण अगस्त के तीसरे सप्ताह में लगभग 7 लाख परीक्षणों से बढ़कर सितंबर के पहले सप्ताह में प्रति दिन 10 लाख परीक्षण से दैनिक परीक्षण हो गए। अधिक परीक्षण से कन्फ़र्म्ड मामलों की शीघ्र पहचान हो जाती है, होम आयसलेशन सुविधा या अस्पतालों में प्रभावी उपचार की समय पर शुरुआत होती है। ये उपाय रिकवरी को और अधिक संख्या में बढ़ाने जीवन बचाने में सहायता करता है।
यहाँ तक कि इस अधिक दैनिक परीक्षण के साथ, दैनिक सकारात्मकता दर अभी भी 7.5% से नीचे है, जबकि कुल सकारात्मकता दर 8.5% से कम है। परीक्षण के स्तर में भारत की पर्याप्त वृद्धि देश भर में रोज़ विस्तृत हो रहे डाइयग्नास्टिक प्रयोगशाला नेटवर्क पर आधारित है। 4 सितंबर तक सरकारी क्षेत्र में 1025 लैब और 606 निजी लैब के साथ 1631 कुल लैब सुविधाओं के साथ देश व्यापी नेटवर्क मजबूत है।
एक और लाभ जो लॉकडाउन से आया, वो यह है कि इसने देश को अपने COVID से संबंधित स्वास्थ्य देखभाल क्षमता को विकसित करना। 28 अगस्त तक देश में 1,723 समर्पित COVID अस्पताल (डीसीएच), 3,883 समर्पित COVID स्वास्थ्य केंद्र (डीसीसी) और 11,689 कोविड केयर सेंटर (सीसीसी) हैं, जिनमें कुल 15,89,105 आइसोलेशन बेड, 2,17,128 ऑक्सीजन समर्थित बेड और 57,380 ICU बेड हैं।
महामारी की शुरुआत में, N95 मास्क, पीपीई किट, वेंटिलेटर आदि सहित सभी प्रकार के चिकित्सा उपकरणों की वैश्विक कमी थी। शुरुआत में अधिकांश उत्पादों का निर्माण भारत में नहीं किया जा रहा था क्योंकि कई आवश्यक कम्पोनेंट को अन्य देशों से खरीदा जाना था। महामारी के कारण बढ़ती वैश्विक माँग के परिणामस्वरूप विदेशी बाजारों में उनकी दुर्लभता हुई । महामारी को अवसर में बदलते हुए, चिकित्सा उपकरणों के उत्पादन के लिए अपने घरेलू बाजार को विकसित कर भारत ने अपनी विनिर्माण क्षमता को बेहद बढ़ा दिया है ।
भारत ने PPE उत्पादन क्षमता को बढ़ावा देने के लिए लॉकडाउन समय का प्रभावी ढंग से उपयोग किया। न केवल भारत PPE की अपनी घरेलू माँग को आराम से पूरा करने में सक्षम है, बल्कि अब यह उन देशों को भी निर्यात करने में सक्षम है, जिन्हें इसकी जरूरत है। जुलाई में भारत ने 5 देशों- अमेरिका, ब्रिटेन, यूएई, सेनेगल और स्लोवेनिया को 23 लाख PPE का निर्यात किया था ।
इससे भारत को पीपीई के वैश्विक निर्यात बाजार में खुद को स्थान देने में काफी सहायता मिली है। केंद्र सरकार जहाँ राज्य/यूटी सरकारों को PPE, एन 95 मास्क, वेंटिलेटर आदि की आपूर्ति कर रही है, वहीं राज्य भी सीधे इनको खरीद रहे हैं। मार्च से अगस्त 2020 के बीच उन्होंने अपने बजटीय संसाधनों से 1.40 करोड़ की स्वदेशी PPE की खरीद की है। इसी अवधि के दौरान, केंद्र ने राज्यों/केंद्र और केंद्रीय संस्थानों को 1.28 करोड़ PPE का वितरण निःशुल्क किया है।
COVID-19 मृत्यु दर
प्रति मिलियन कुल COVID-19 मामले
कुल प्रति मिलियन मौतें
जी-20 उन्नत अर्थव्यवस्थाएँ
कनाडा
7.0
3389.8
241.6
फ़्रांस
10.1
4258.1
468.9
जर्मनी
3.8
2892.9
111.0
इटली
13.2
4436.2
586.8
जापान
1.9
536.6
10.1
स्पेन
6.3
9899.7
622.3
ब्रिटेन
12.4
4926.9
611.3
हमें
3.0
18118.2
553.1
जी-20 इमर्जिंग मार्केट्स
ब्राज़ील
3.1
18170.5
568.4
चीन
5.3
62.5
3.3
भारत
1.8
2624.1
46.7
इंडोनेशिया
4.2
629.0
26.8
मेक्सिको
10.7
4621.3
497.6
रूस
1.7
6786.1
117.1
एस. अफ्रीका
2.3
10539.0
236.5
तुर्कस्तान
2.4
3184.1
75.0
नोट: 31 अगस्त, 2020 तक के आंकड़े
ऊपर दी गई तालिका से पता चलता है कि भारत सभी तीन प्रमुख COVID संकेतकों-मृत्यु दर, प्रति मिलियन मामलों और प्रति मिलियन मौतों पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहा है ।
यह केवल लॉकडाउन के कारण प्राप्त किया गया।
लॉकडाउन के दौरान सरकार की क्या प्रतिक्रिया थी?
राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की घोषणा के 20 घंटे के भीतर, सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना नामक एक व्यापक पहल की घोषणा की, जिसके माध्यम से नकदी, भोजन और तरलता के रूप में सहायता उन लोगों के लिए दी गई, जिन्हें इसकी जरूरत थी। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत अब तक 42 करोड़ से अधिक गरीबों को 68,820 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता मिल चुकी है। 8.94 करोड़ लाभार्थियों को पीएम-किसान की पहली किस्त के भुगतान के लिए 17,891 करोड़ रुपया दिया गया है।
पहली किस्त के रूप में 20.65 करोड़ महिला जनधन खाताधारकों को 10,325 करोड़ रुपए जमा किए गए हैं। दूसरी किस्त में 20.63 करोड़ महिला जनधन खाताधारकों को 10,315 करोड़ रुपए जमा किए गए और तीसरी बार में 20.62 करोड़ महिला जनधन खाताधारकों को 10,312 करोड़ रुपए जमा किए गए। दो किश्त में करीब 2.81 करोड़ बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों को 2,814.5 करोड़ रुपए का कुल वितरण किया गया है।
इसके अलावा, 1.82 करोड़ भवन और निर्माण श्रमिकों को 4,987.18 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता मिली। सरकार को इस बात की जानकारी थी कि नकद ट्रान्स्फ़र के साथ-साथ खाद्य ट्रान्स्फ़र को भी बढ़ाने की आवश्यकता होगा। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत अप्रैल में 75.04 करोड़ लाभार्थियों को 37.52 लाख मीट्रिक टन अनाज वितरित किया गया, मई में 74.92 करोड़ लाभार्थियों को 37.46 लाख मीट्रिक टन अनाज वितरित किया गया और जून में 73.24 करोड़ लाभार्थियों को 36.62 लाख मीट्रिक टन का वितरण किया गया।
इस योजना को 5 महीने- नवंबर तक के लिए आगे बढ़ा दिया गया। तब से अब तक राज्यों और केंद्र सरकार द्वारा 9831 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न दिया जा चुका है। जुलाई में 72.18 करोड़ लाभार्थियों को 36.09 एलएमटी खाद्यान्न वितरित किया गया था, अगस्त में 30.22 एलएमटी 60.44 करोड़ लाभार्थियों को वितरित किया गया था, और सितंबर में 7 सितंबर, 2020 तक 3.84 करोड़ लाभार्थियों को 1.92 एलएमटी खाद्यान्न वितरण किया गया है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत अप्रैल-जून के बीच 18.8 करोड़ लाभार्थियों को कुल 5.43 लाख मीट्रिक टन दालें भी वितरित की गई हैं। चना वितरण के लिए भी इस योजना को नवंबर, 2020 तक 5 महीने के लिए बढ़ा दिया गया। अब तक 46 लाख मीट्रिक टन चना भेजा जा चुका है। जुलाई में 10.3 करोड़ लाभार्थी परिवारों को 1.03 लाख मीट्रिक टन चना वितरित किया गया और अगस्त में 23,258 मीट्रिक टन 23 करोड़ लाभार्थी परिवारों को वितरित किया।
भारत की अर्थव्यवस्था: Q2 जीडीपी Q1 से भी बदतर हो जाएगी?
इस वित्तीय वर्ष की Q1 और Q2 के बीच एक गुणात्मक अंतर है। जबकि Q1 पूरी तरह से लॉकडाउन अवधि द्वारा कवर किया गया था, Q2 मुख्य रूप से अनलॉक अवधि के दौरान था। सभी संकेतक इंगित करते हैं कि अनलॉक से फ़ायदा हो रहा है और Q2 वास्तव में Q1 की तुलना में बहुत मजबूत होगा। उच्च आवृत्ति संकेतकों से पता चला है कि अर्थव्यवस्था जून में ठीक होने लगी। यह रिकवरी जुलाई में थोड़ी ही घटी क्योंकि विभिन्न राज्य सरकारों ने एकतरफा लॉकडाउन लगाने शुरू कर दिए ।
हालाँकि, अगस्त के अब तक के आँकड़ों के अनुसार रिकवरी पटरी पर है। अगस्त महीने में GST राजस्व 86,449 करोड़ रुपए था, पिछले साल इसी महीने में GST राजस्व का 86% था। ई-वे बिलों में निरंतर प्रोत्साहन अगस्त में उनके मूल्य में 13.8 लाख करोड़ रुपए पर परिलक्षित होता है, जो पिछले वर्ष के इसी महीने के 97.2 प्रतिशत तक पहुँच गया है। आईएचएस मार्किट इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) अगस्त में छह महीने के उच्च स्तर 52 से बढ़कर जुलाई में 46 हो गया ।
भारत के सेवा क्षेत्र में अगस्त में कुछ सुधार हुआ क्योंकि Services Business Activity Index जुलाई में 34.2 के मुकाबले बढ़कर 41.8 हो गया । यह मार्च के बाद से सबसे ज्यादा रीडिंग है। बिजली की खपत जल्दी से पिछले साल के आधार रेखा पर वापस आ रहा है- पिछले साल के स्तर के 97% तक और अगस्त 2020 में पूर्व COVID (फरवरी) के स्तर को पार कर। पैसेंजर वाहन बिक्री जुलाई में 1.83 लाख पर अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच गई, जबकि मार्च में यह 1.43 लाख थी।
वाणिज्यिक और कृषि ट्रैक्टरों के लिए पंजीकरण में वृद्धि मार्च में 52,362 से अगस्त में 66,061 तक ग्रामीण माँग के और मजबूत होने का संकेत है। COVID-19 के कारण आपूर्ति श्रृंखला में अवरोध जारी है, दोनों खाद्य और गैर खाद्य कीमतों पर प्रभाव के साथ। हालाँकि, आलू और टमाटर को छोड़कर जुलाई में अधिकांश आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में अस्थिरता जून की अपेक्षा स्थिर हो गई। जुलाई में रेलवे माल ढुलाई 95.2 मिलियन टन थी, जो पिछले वर्ष के स्तर 99.7 मिलियन टन पर आई थी।
अगस्त के पहले बीस दिनों में 60.38 मिलियन टन पर रेलवे माल ढुलाई की मात्रा अब अपने पिछले वर्ष के स्तर 56.60 मिलियन टन को पार कर गई है। इसके अलावा रेल यात्री बुकिंग अप्रैल में -7.92 मिलियन (बुकिंग रद्द) से जुलाई में बढ़कर 14.62 मिलियन और घरेलू विमान यात्रियों की संख मई में 2.8 लाख से जुलाई में 21.1 लाख तक पहुँच गई है। स्टील उत्पादन जुलाई में 74.02 लाख टन और सीमेंट उत्पादन 242.47 लाख टन था, जबकि पिछले वर्ष के इसी महीने में क्रमश 86.13 लाख टन और 280.2 लाख टन उत्पादन हुआ था।
NPCI प्लेटफार्मों के माध्यम से रीटेल भुगतान लेनदेन जून और जुलाई में तेजी से लौटने लगा, अप्रैल और मई के लॉकडाउन महीनों के दौरान कमी के बाद, महामारी के बीच ऑनलाइन भुगतान की दिशा में एक बड़े बदलाव का संकेत। UPI भुगतान लेनदेन मूल्य के लिहाज से 29 लाख करोड़ और जुलाई में वॉल्यूम के लिहाज से 149 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर आ गया। इन सभी संकेतकों से पता चलता है कि जुलाई और अगस्त में आर्थिक गतिविधियाँ पुनर्जीवित हुई हैं।
इस वृद्धि के जारी रहने की उम्मीद है, Economist Intelligence Unit ने भविष्यवाणी की है कि Q3 में भारत का उत्पादन एक साल पहले के समान होगा और देश 2021 में 2019 GDP के स्तर पर हो जाएगा ।
क्या सरकार लॉकडाउन के बाद की अवधि में विकास को पुनर्जीवित करने के लिए कुछ कर रही है?
लॉकडाउन के दौरान सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करना था कि हर बड़े और छोटे व्यक्ति और कम्पनियाँ लॉकडाउन के प्रभावों से बच सकें। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना और आत्मनिर्भर भारत पैकेज के हिस्से के रूप में घोषित ऋण स्थगन, नकद और खाद्य अंतरण और अन्य उपायों का यह उद्देश्य था। MSMEs को सुलभ ऋण प्रदान करने के लिए ताकि वे अपनी निश्चित लागत का भुगतान जारी रख सकें, सरकार ने आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना शुरू की जिसके तहत उसने MSMEs को ऋण के लिए 3 लाख करोड़ रुपये की आपातकालीन ऋण गारंटी प्रदान करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
03 सितंबर 2020 तक, पीएसबी और निजी बैंकों द्वारा 100% आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना के तहत स्वीकृत कुल राशि 1,61,017.68 करोड़ रुपए है, जिसमें से 1,13,713.15 करोड़ रुपए पहले ही वितरित किए जा चुके हैं। 100% ECLGS के तहत, पब्लिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा स्वीकृत ऋण राशि बढ़कर 78,067.21 करोड़ रुपए हो गई, जिसमें से 03 सितंबर 2020 तक 62,025.79 करोड़ रुपए वितरित किए गए हैं।
सरकार ने मध्यम आय वर्ग को आवास के लिए सस्ते ऋण देने हेतु रियल इस्टेट क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए Special Window for Affordable & Mid Income Housing (SWAMIH) फंड के लिए विशेष विंडो का भी विस्तार किया। इस फंड के लिए विशेष विंडो के तहत, 28 अगस्त 2020 के 10,611 करोड़ रुपए के 107 सौदों को मंजूरी दी गई है। 23 को अंतिम मंजूरी है अंतिम 84 की मंज़ूरी प्रारंभिक चरण में हैं। सभी मंज़ूर सौदों की कुल परियोजना लागत 10,491 करोड़ रुपए है। सभी अंत और प्रारंभिक रूप से मंज़ूर सौदे कुल 73,370 घरों को प्रभावित करेगा।
सरकार ने पहले से ही तनावग्रस्त MSMEs के लिए एक योजना की भी घोषणा की ताकि लॉकडाउन के दौरान उनकी स्थिति खराब न हो। एनबीएफसी और एचएफसी के लिए, Special Liquidity Scheme (SLS) के तहत 21.08.2020 को 24 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिसमें कुल 8,594 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई थी। 3,684.5 करोड़ रुपए तक के ऋण की मांग करने वाले 17 और आवेदनों पर कार्रवाई चल रही है।
यह राशि 21.08.2020 तक 3,279 करोड़ रुपए थी। 07.08.2020 के बाद से, स्वीकृत राशि में 2,195 करोड़ रुपए की वृद्धि और वितरित राशि में 2,279 करोड़ रुपए की वृद्धि हुई। CBDT ने 1 अप्रैल, 2020 से 8 सितंबर, 2020 के बीच 27.55 लाख से अधिक करदाताओं को 1,01,308 करोड़ रुपए से अधिक का रिफंड जारी किया। 25,83,507 मामलों में 30,768 करोड़ रुपए का आयकर रिफंड जारी किया गया है और 1,71,155 मामलों में 70,540 करोड़ रुपए का कॉर्पोरेट टैक्स रिफंड जारी किया गया है।
आत्मनिर्भर भारत के तहत सरकार ने प्रवासियों को 2 महीने के लिए मुफ्त खाद्यान्न और चना की आपूर्ति की घोषणा की। राज्यों द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रवासियों की अनुमानित संख्या लगभग 2.8 करोड़ थी। अगस्त तक की वितरण अवधि के दौरान 5.32 करोड़ प्रवासियों को कुल 2.67 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न वितरित किया गया। यह प्रति माह औसतन 2.66 करोड़ लाभार्थियों के बराबर है, जो प्रवासियों की अनुमानित संख्या का लगभग 95% है।
इसी तरह वितरित चने की कुल मात्रा 16,417 मीट्रिक टन 1.64 करोड़ प्रवासी परिवारों को है, जो प्रति माह औसतन 82 लाख परिवार हैं। इस योजना के तहत अब तक कुल 8.52 करोड़ प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के सिलिंडर बुक और अप्रैल और मई 2020 में वितरित किए। जून 2020 में 3.27 करोड़ PMUY मुफ्त सिलेंडर, जुलाई 2020 में 1.05 करोड़, अगस्त 2020 में 0.89 करोड़ और सितंबर 2020 में 0.15 करोड़ लाभार्थियों को मुफ्त सिलिंडर दिए गए।
EPFO के 36.05 लाख सदस्यों ने EPFO के खाते से से बिना रिफंडेबल एडवांस में 9,543 करोड़ रुपए ऑनलाइन निकाले। 24 फीसद EPF भागीदारी के तहत 0.43 करोड़ कर्मचारियों को 2476 करोड़ रुपए की राशि ट्रांसफर की गई है। मनरेगा के तहत बढ़ी हुई मजदूरी दर 01-04-2020 से अधिसूचित की गई है। चालू वित्त वर्ष में 195.21 करोड़ व्यक्ति के मानव दिवसों का सृजन हुआ। इसके अलावा, वेतन और सामग्री दोनों के लंबित बकाया को समाप्त करने के लिए राज्यों को जारी किए गए 59,618 करोड़ रुपए।
जिला खनिज कोष (DMF) के तहत राज्यों को 30 प्रतिशत धनराशि खर्च करने को कहा गया है, जिसकी राशि 3,787 करोड़ रुपए है। अब तक 343.66 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं।
अर्थव्यवस्था: क्या आत्मनिर्भर भारत पैकेज शुद्ध रूप से वर्तमान संकट को दूर करने के उपाय थे?
सरकार का दृष्टिकोण ऐसा था कि उसने उन सुधारों को लागू करने का अवसर लिया जो देश और अर्थव्यवस्था को दीर्घावधि में भी अच्छी जगह पर खड़ा करेंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पिछले कुछ महीनों में किए गए सुधारों ने पूर्ण आर्थिक गतिविधि शुरू होने के साथ परिणाम दिखाना शुरू कर दिया है। भारत बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में एकमात्र ऐसा देश है, जहाँ महामारी प्रतिक्रिया पैकेज में औपचारिक हिस्से के रूप में सुधार किए गए हैं।
इन सुधारों का उद्देश्य भारत की उत्पादकता को बेड़ियों से मुक्त करने और भारत के महत्वाकांक्षी युवाओं के लिए औपचारिक रोजगार पैदा करने के इरादे से वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं को आकर्षित करना है। MSMEs की नई परिभाषा, जो पहले ही लागू हो चुकी है, का मतलब यह होगा कि स्टार्ट-अप और छोटी कंपनियाँ MSME के रूप में वर्गीकृत होने के लाभों को खोने के बारे में चिंता किए बिना निवेश आकर्षित कर सकती हैं ।
एमएसएमई को और बढ़ावा देने के लिए 200 करोड़ रुपए तक के सरकारी खरीद टेंडरों में ग्लोबल टेंडर को अनुमति नहीं दी गई है। इस बात को ध्यान में रखते हुए कि कई मुद्रा-शिशु उधारकर्ता उस समय के बाद ब्याज का भुगतान करने की स्थिति में नहीं हो सकते हैं, भारत सरकार ने 12 महीने की अवधि के लिए त्वरित पुनर्भुगतान के लिए 2% की ब्याज छूट प्रदान करने का फैसला किया है। कैबिनेट ने इस योजना को मंजूरी दे दी है।
सरकार ने स्ट्रीट वेंडर्स को 10,000 रुपए तक की शुरुआती वर्किंग कैपिटल की आसान क्रेडिट राशि पाने में मदद करने के लिए एक विशेष योजना की घोषणा की। अच्छे पुनर्भुगतान व्यवहार वाले लोगों के लिए और अधिक प्रदान किया जाएगा। 1 सितंबर, 2020 तक, 8.06 लाख से अधिक ऋण आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 2.05 लाख से अधिक स्वीकृत किए गए और 45,000 से अधिक वितरित किए गए।
सरकार ने मध्यम आय वर्ग (MIG) के लिए क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना का विस्तार करने का फैसला किया ताकि वे आवास में निवेश कर सकें। इससे रियल एस्टेट सेक्टर को काफी फायदा होने की उम्मीद है। 1 सितंबर, 2020 तक इस योजना के तहत 38,440 नए MIG लाभार्थियों को सब्सिडी जारी की गई है, जिससे कुल संख्या 3.63 लाख हो गई है।
2 लाख फूड माइक्रो एंटरप्राइजेज को अपने सिस्टम को अपग्रेड करने में मदद करने के लिए 10,000 करोड़ रुपए की योजना शुरू की जाएगी ताकि उनके लिए FSSAI खाद्य मानक प्रमाणन प्राप्त करना, अपने ब्रांडों का निर्माण करना और उनकी विपणन गतिविधियों में भी सुधार करना आसान हो सके। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पहले ही इस योजना को मंजूरी दे दी है और वित्त मंत्रालय ने 150 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं और 27 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 74.04 करोड़ जारी किया गया है।
सरकार ने समुद्री और अंतर्देशीय मत्स्य पालन के एकीकृत, टिकाऊ, समावेशी विकास के लिए 20,000 करोड़ रुपए की लागत से प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना की घोषणा की है। इसका 11,000 करोड़ रुपए समुद्री, अंतर्देशीय मत्स्य पालन और जलकृषि के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि शेष 9,000 करोड़ रुपए का इस्तेमाल बुनियादी ढांचे के निर्माण जैसे मछली पकड़ने के बंदरगाहों, कोल्ड चेन, बाजार आदि के लिए किया जाएगा। इस योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री ने की है।
कुल 794.14 करोड़ रुपए की लागत से 5 राज्यों (आंध्र प्रदेश, ओडिशा, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और बिहार) के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है और 125.82 करोड़ रुपए के केंद्रीय हिस्से की पहली किस्त जारी की गई है। तीन राज्यों (असम, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़) के प्रस्तावों पर 53.46 करोड़ रुपये की केंद्रीय हिस्सेदारी की पहली किस्त जारी करने पर सहमति बनी है। तमिलनाडु के प्रस्ताव को PMMSY की परियोजना मूल्यांकन समिति ने कुल 69.89 करोड़ रुपए की लागत से मंजूरी दी है और 18 अन्य राज्यों/ केंद्र शासित राज्यों के 2121 करोड़ रुपये की कुल लागत के प्रस्तावों की जाँच की जा रही है।
कोयला क्षेत्र में वाणिज्यिक खनन को आकर्षित करने के लिए सरकार ने निश्चित रुपए/टन की पुरानी व्यवस्था के बजाय राजस्व साझा करने का मेकनिज़म शुरू किया है। किसी भी इच्छुक पार्टी को पहले की प्रणाली की तुलना में कोल ब्लॉक के लिए बोली लगाने और खुले बाजार में कोयला बेचने की अनुमति दी गई, जहाँ केवल बिजली/इस्पात संयंत्र जैसे अंतिम उपयोग स्वामित्व वाले कैप्टिव उपभोक्ता ही ब्लॉकों के लिए बोली लगा सकते हैं ।
निजी क्षेत्र को खोज में अनुमति दी जाएगी। शीघ्र कोयला उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए, उन सफल बोली लगाने वालों को जो उत्पादन के निर्धारित वर्ष से पहले उत्पादन करते हैं, कोयला उत्पादन पर देय राजस्व हिस्सेदारी में छूट मिलेगी। इम्पोर्टेड कोयले के प्रतिस्थापन के लिए कदम उठाने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समिति (बिजली, इस्पात, डीपीआईआईटी, वाणिज्य, खान, रेलवे, शिपिंग, एमएसएमई, बंदरगाहों और कोयला कंपनियों सहित) का गठन किया गया था।
वित्त वर्ष 21 की पहली तिमाही में थर्मल कोयले के आयात में 37% की कमी आई है। 5 कोयला धारक राज्यों (झारखंड, एमपी, महाराष्ट्र, ओडिशा और छत्तीसगढ़) में राजस्व साझा करने के मेकनिज़म पर 38 कोयला ब्लॉकों की नीलामी 18.06.2020 को शुरू की गई थी, जो लगभग 194.65 मीट्रिक टन की वार्षिक उत्पादन क्षमता थी। सरकार वर्षवार समयसीमा के साथ आयात पर प्रतिबंध के लिए हथियार/प्लेटफॉर्मों की सूची और इम्पोर्टेड कलपुर्जों के स्वदेशीकरण के लिए भी सूचित करेगी ।
रक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधार के उपाय से स्वचालित मार्ग के तहत रक्षा विनिर्माण में एफडीआई की सीमा 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत कर दी जाएगी। 9 अगस्त 2020 को 101 वस्तुओं को शामिल करते हुए आयात की एक प्रारंभिक नकारात्मक सूची जारी की गई थी। इम्पोर्टेड कलपुर्जों के स्वदेशीकरण के संबंध में 2020-21 के लिए 1244 वस्तुओं का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिनमें से अब तक 417 वस्तुओं को प्राप्त किया जा चुका है।
2024-25 तक हर साल के लिए लक्ष्य भी सौंपे गए हैं। विदेशी और घरेलू मार्गों के बीच कैपिटल प्रक्युर्मेंट बजट का पुनर्आवंटन 21 जुलाई 2020 को किया गया था। वित्त वर्ष 2020-21 में 90,048 करोड़ रुपये के पूंजीगत खरीद बजट में से 51,932 करोड़ रुपए (57.67%) घरेलू पूंजी खरीद के लिए आवंटित किया गया है। सरकार डेयरी प्रॉसेसिंग, मूल्य वर्धन और पशु चारे के बुनियादी ढाँचे में निजी निवेश के समर्थन का उद्देश्य रखती है।
इसके लिए 15,000 करोड़ रुपये का Animal Husbandry Infrastructure Development Fund स्थापित किया जाएगा। एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केंद्रों, संग्रह, विपणन और भंडारण केंद्रों, फसल के बाद और मूल्य वर्धन सुविधाओं आदि से संबंधित बुनियादी ढाँचे का विकास इससे 2 लाख मधुमक्खी पालकों की आय में वृद्धि होगी और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण शहद मिलेगा। सरकार की योजना है कि सभी अंतरिक्ष गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी में वृद्धि की जाए और उपग्रहों, प्रक्षेपणों और अंतरिक्ष आधारित सेवाओं में निजी कंपनियों के लिए समान अवसर प्रदान किया जाए ।
सुधार क्षेत्रों में से एक परमाणु ऊर्जा अनुसंधान शामिल है, जिसमें मेडिकल इन्पुट्स के उत्पादन के लिए पीपीपी मोड में एक अनुसंधान रिएक्टर स्थापित किया जाएगा। भारत हाल के वर्षों में विदेशी निवेश के लिए एक पसंदीदा गंतव्य रहा है, भारत में एफडीआई 13% बढ़कर 2019-20 में 49.97 अरब डॉलर के रिकॉर्ड में है। हालाँकि, मोदी सरकार लक्ष्य प्राप्त कर विश्राम करने वालों में से नहीं है और इससे भी अधिक एफडीआई आकर्षित करने के लिए कई कदम उठा चुकी है ।
सरकार ने मार्च में उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहनों की घोषणा की थी, जिन्होंने कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों के ध्यान को आकर्षित किया है, जिन्होंने भारत में बड़ी रकम निवेश करने का वादा किया है। करीब दो दर्जन कंपनियों ने देश में मोबाइल फोन फैक्ट्रियाँ स्थापित करने के लिए $1,500,000,000 निवेश का वादा किया ।
उत्तर प्रदेश में मजहबी फरेब थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन अलग-अलग जिले से लव जिहाद के अनेकों मामले सामने आ रहे है। ताजा दो मामले आगरा के सिकंदरा और मलपुरा क्षेत्र के है। जहाँ इकरार और बादल खान नाम के युवकों ने अपना हिंदू नाम रखकर नाबालिग हिंदू लड़कियों को फँसाया और इस्लाम धर्म कबूल करवाकर उनसे निकाह कर लिया।
रिपोर्ट के अनुसार, मामला आगरा के सिकंदरा क्षेत्र का है। जहाँ 17 साल की युवती से सहारनपुर के इकरार ने रवि बनकर दोस्ती की फिर बहला-फुसलाकर अपहरण कर ले गया। वहीं इकरार ने इस्लाम कबूल कराकर किशोरी से निकाह कर लिया। नाबालिक लड़की के घरवालों ने बेटी के लापता होने पर थाने में तहरीर दी। जिसपर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने किशोरी को बरामद कर लिया है और आरोपित को जेल भेज दिया गया है।
पुलिस ने जाँच पड़ताल करते हुए लड़की से मामले के बारे में पूछा तो उसने बताया कि उसकी मुलाकात सहारनपुर के दानियालपुर एक निवासी इकरार पुत्र निसार से हुई थी। आरोप है कि इकरार ने अपना नाम रवि बताया था। वह उससे फ़ोन के जरिए बातचीत करती थी। और दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगे थे। कुछ दिनों बाद उसके घरवालों को इसकी जानकारी हो गई। जिसपर परिजनों ने युवती पर गुस्सा किया तो वह नाराज हो कर घर से चली गई। वह अपने साथ हाईस्कूल, इंटरमीडियट की रिपोर्टकार्ड और 15 हजार रुपए साथ ले कर घर को छोड़ा था।
उसने इस बात की जानकारी इकरार से रवि बने युवक को दी तो उसने उसे बस स्टैंड पर आने के लिए कहा। जहाँ से वह उसे गुरुग्राम ले गया। दो दिन होटल में रोका। इसके बाद हरियाणा के यमुना नगर ले जाकर एक मकान में कुछ दिन रखा। और फिर जब मामला ठंडा पड़ा तो उसे अगस्त में अपने गाँव ले गया। फिर इमाम से मिलकर हिंदू लड़की को इस्लाम कबूल करवा धर्म परिवर्तन करा दिया। और उसका नाम बदल कर इकरारा कर दिया। साथ ही वह नाबालिक से निकाह करके उसे अपने साथ रखने लगा। उधर, पुलिस को इसकी सूचना लग गई। पुलिस ने किशोरी को बरामद किया और आरोपित इकरार को पकड़कर हिरासत में ले लिया।
थाना सिकंदरा के प्रभारी निरीक्षक अरविंद कुमार ने बताया कि आरोपित को जेल भेज दिया है। किशोरी को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया था। समिति के आदेश के बाद परिजन ले गए। समिति ने परिजनों को लड़की के साथ किसी भी प्रकार से जोर जबरदस्ती, मारपीट और अभद्रता नहीं करने का निर्देश दिया है।
वहीं दूसरा मामला आगरा के मलपुरा थाना क्षेत्र का है। जहाँ किराए पर रह रहे बादल खान ने 17 साल की नाबालिक युवती को हिन्दू धर्म का बादल नाम बताते हुए दोस्ती की। उसने एक साल तक किशोरी को बहलाया फुसलाया। फिर अपने झाँसे में लेकर उससे मिलने जुलने लगा। और शादी का झाँसा देकर शारिरिक संबंध बनाया। वहीं 7 सितंबर को बादल खान ने लड़की को शादी के बहाने अपने साथ भगा ले गया।
परिजनों ने लड़की को खोजने की बहुत कोशिश की लेकिन जब वह नहीं मिली तो उन्होंने मलपुरा थाने में एफआईआर दर्ज करवाया। खोजबीन के दौरान पुलिस को लड़की का पता चल गया। लेकिन नाबालिक हिंदू लड़की गर्भवती अवस्था में मिली। पुलिस ने इस मामले को भी बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया। जिसके बाद लिखित कार्रवाई करते हुए लड़की को उसके परिजनों को सौंप दिया गया। वहीं पुलिस ने बादल खान को जेल भेज दिया है। और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
दिल्ली पुलिस ने दिल्ली दंगा मामले में एक पूरक आरोप पत्र दायर किया है। इस आरोप पत्र में दिल्ली पुलिस ने सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी, स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव, अर्थशास्त्री जयति घोष, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और कार्यकर्ता अपूर्वानंद और डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर राहुल रॉय को इस साल फरवरी में हुए दिल्ली दंगों के मामले में सह-साजिशकर्ता के रूप में नामित करने का दावा किया जा रहा है।
Delhi Police names CPI (M) general secretary Sitaram Yechury, Swaraj Abhiyan leader Yogendra Yadav, economist Jayati Ghosh, DU professor and activist Apoorvanand, and documentary filmmaker Rahul Roy in supplementary charge sheet as co-conspirators in Delhi riots case
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के पत्रकार, राजशेखर झा ने अपने एक ट्वीट में दिल्ली पुलिस के हवाले से दावा किया है कि चार्जशीट में सीताराम येचुरी, योगेंद्र यादव आदि के नाम से पुलिस ने इनकार किया है। साथ ही अपने एक दूसरे ट्वीट में कहा है कि इनका नाम किसी आरोपित के डिस्क्लोजर स्टेटमेंट के आधार पर कोट किया गया है जो कि कोर्ट में साक्ष्य के रूप में मान्य नहीं है।
The names have been quoted from some disclosure statements of accused. Disclosure statements are not even admissible as evidence in court.
गौरतलब है कि दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ्तार गुलफिशा उर्फ गुल ने पूछताछ में खुलासा किया था कि दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के प्रोफेसर अपूर्वानंद भी हिंसा की साजिश में शामिल थे। हिंसा भड़काने के लिए बुर्के वाली महिलाओं की टीम तैयार की गई थी। पुलिस का कहना है कि गुलफिशा ने उन्हें बताया था, “प्रोफेसर अपूर्वानंद ने कहा था कि हिंसा की साजिश के लिए तैयार रहो।” हिंसा के बाद प्रोफेसर अपूर्वानंद ने गुलफिशा की तारीफ की थी।
गुलफिशा ने बताया था, “हिंसा के बाद अपूर्वानंद ने मुझसे कहा था कि तुमने अच्छा काम किया है। लेकिन पकड़े जाने पर मेरा और पिंजड़ा तोड़ की सदस्यों का नाम मत लेना। प्रोफेसर ने हमे दंगों के लिए मैसेज दिया था। पत्थर, खाली बोतलें, एसिड, छुरियाँ इकठ्ठा करने के लिए कहा गया था। सभी महिलाओं को लाल मिर्च पाउडर रखने के लिए बोला था।”
दिल्ली पुलिस ने इससे पहले दिल्ली दंगा मामले और आईबी कांस्टेबल अंकित शर्मा की हत्या को लेकर दायर किए गए चार्जशीट में निलंबित AAP पार्षद ताहिर हुसैन और उनके सहयोगियों को मुख्य साजिशकर्ता के रूप में नामित किया था। आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या और दंगों में ताहिर हुसैन की भूमिका में दायर चार्जशीट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि ताहिर हुसैन ने जनवरी में उमर खालिद और खालिद सैफी से शाहीन बाग में मुलाकात के बाद दंगों की योजना तैयार की थी। खालिद सैफी ने दंगों के लिए धन जुटाने के लिए जाकिर नाइक के साथ मुलाकात की थी।
दिल्ली पुलिस ने पिंजरा तोड़ संगठन की देवांगना कालिता, नताशा नरवाल और गुलफिशा फातिमा के खिलाफ जाफराबाद हिंसा से जुड़े मामले में FIR दर्ज की थी। दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया था कि दोनों महिलाएँ- नताशा और देवांगना जाफराबाद में दंगे भड़काने की साजिश रचने में शामिल थी। नताशा को फरवरी में पूर्वोत्तर दिल्ली में हिंदू-विरोधी सांप्रदायिक दंगों को उकसाने में उनकी भूमिका के लिए कड़े गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
मॉडल बनने के सपने सँजोने वाली पूजा को कहाँ पता था कि जिस मोहम्मद आफताब से उसने प्रेम विवाह किया वही उसकी मौत का कारण बन जाएगा। मामला उत्तर प्रदेश के भेलूपुर थाना क्षेत्र का है। जहाँ 25 वर्षीय पूजा पटेल ने शनिवार (12 सितंबर, 2020) सुबह फाँसी लगा कर अपनी जान दे दी।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुँच कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। दरअसल, बनारस की रहने वाली युवती ने मुस्लिम युवक से 3 साल पहले प्रेम विवाह किया था। आसपास के रहने वाले लोग इस घटना को लव जिहाद का मामला बता रहे है। रिपोर्ट के अनुसार पूजा आज़ाद ख़यालों वाली लड़की थी। शादी के बाद जबरन उसे नमाज पढ़ने के लिए कहा जाता था। जिसका वह विरोध करती थी। इसी को लेकर शराबी पति और उसके परिजन पूजा को मारते पीटते थे। जिससे तंग आकर उसने खुदखुशी कर ली।
हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, पूजा के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के बाद उसकी माँ ने बताया पूजा पटेल के ख्वाब काफी बड़े थे। वह मॉडल बनना चाहती थी। उसे क्या पता था जिस आफताब के लिए उसने अपने घर परिवार से लड़ झगड़ के शादी की है, उसी शादी के बाद उसे जिहाद का घिनौना रूप देखने को मिलेगा। अगर उसे इसकी जानकारी होती तो वह कभी उससे शादी नहीं करती।
पूजा की माँ किरण पटेल, भाई चेतन और आयुष ने बताया की पूजा जब कक्षा 10 में थी तब उसे मोहम्मद आफताब से प्यार हो गया था। आफताब नई सड़क पर एक कपड़े की दुकान पर काम करता था। इस बात की जानकारी लगने के बाद हमनें दोनों को दूर करने की बहुत कोशिश की। यहाँ तक कि हमनें अपना घर भी बदल लिया था और ककरमत्ता में रहने लगे थे। लेकिन फिर दो साल बाद इंटर में आफताब पूजा को अपने झाँसे में लेकर भाग गया। उसने पूजा से वादा किया कि वह उसका धर्म (हिंदू) अपना लेगा।
जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक पूजा की माँ ने बताया, शादी के बाद दोनों बनारस में एक किराए के मकान में रहते थे। आसपास के लोग पूजा को जोया सिद्दीकी के नाम से जानते थे। उन्होंने आरोप लगाया, आफताब के माँ पूजा पर नमाज पढ़ने की जबरदस्ती करती थी। और इस्लाम धर्म के अनुसार रहने के लिए बोलती थी।
पूजा दोनों धर्म का पालन करती थी, वह ईद भी मानती थी और छठ भी। पूजा और आफताब का एक बेटा भी है जिसका पूजा ने हिंदू नाम नक्ष रखा है। लेकिन उसके घर वालों को बेटे के नाम से भी काफी एतराज था।
पूजा मॉडलिंग सीखने मार्च में मुंबई गई थी। कोरोना वायरस की वजह से वह जून में वापस आ गई थी। वह वापस मुंबई जाना चाहती थी। लेकिन आफताब और उसके परिवार वाले इसके विरुद्ध थे। लेकिन पूजा ने इसकी जिद नहीं छोड़ी। बात इतनी बढ़ गई कि पूजा आफताब से तलाक लेना चाहती थी। आफताब के परिजनों को पूजा का खुलापन पसंद नहीं था।
पूजा के परिजनों का आरोप है, उनकी बेटी ने दबाव और मारपीट के चलते यह कदम उठाया है। वहीं मामले की सूचना मिलने पर पहुँचे थाना प्रभारी अजय श्रोत्रीय ने आरोपित पति को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरु कर दिया है।
‘पत्रकार’ बरखा दत्त ने कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल के ख़िलाफ़ दर्ज कराए गए शिकायत को पटियाला हाउस कोर्ट से विशेष पीएमएलए कोर्ट में में ट्रांसफर करने की अपील की थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस बाबत ‘पत्रकार’ बरखा दत्त को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस न्यायमूर्ति अनूप जे भंभानी की एकल खंडपीठ द्वारा जारी किया गया है। अदालत में बरखा दत्त की तरफ से कोई भी पेश नहीं हुआ था। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होनी है।
बरखा दत्त ने पिछले साल कपिल सिब्बल, उनकी पत्नी प्रोमिला सिब्बल और उनकी टीवी नेटवर्क कंपनी एनॉलॉग मीडिया के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 और 120 के तहत शिकायत दर्ज कराई थी। पत्रकार बरखा दत्त ने तिरंगा टीवी के प्रमोटर्स कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल और उनकी पत्नी प्रोमिला सिब्बल पर बिना किसी पूर्व सूचना के तिरंगा टीवी पर काम करने वाले पत्रकारों को निकाल देने का आरोप लगाया था।
बरखा दत्त ने अपने पिछले चैनल के प्रमोटर और कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल और उनकी पत्नी प्रमिला सिब्बल से ₹74 लाख सूद समेत लेने के लिए अदालत में मुकदमा दायर किया था। बरखा के आरोपों में इसके अतिरिक्त खुद को और चैनल के अन्य वरिष्ठ कर्मचारियों को एक साल से अधिक समय से वेतन न दिए जाने का भी आरोप था। इसके अलावा उन्होंने कहा था कि बिना कर्मचारियों को वेतन दिए सिब्बल दम्पति का लंदन में ऐश करना विजय माल्या जैसा कृत्य है। इसके लिए उन्होंने खुद को सिब्बल द्वारा मानहानि के मुकदमे से धमकाए जाने की बात भी ट्विटर पर कही थी।
चैनल पिछले साल जुलाई में बंद हो गया था। दत्त ने प्रोमिला सिब्बल पर चैनल की महिला पत्रकारों के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया था, जिसके लिए उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) में शिकायत दर्ज कराई थी। बरखा दत्त ने आरोप लगाया था कि कपिल सिब्बल की पत्नी महिला कर्मचारियों को “कुतिया” या “बिच” बुलाती थीं। साथ ही इतनी घिनौनी बात को साबित करने के लिए यह भी कहा था कि इस संबंध में उनके पास हस्ताक्षर किए हुए हलफनामे भी हैं।
गौरतलब है कि बरखा दत्त ने पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल को निशाना बनाते हुए लिखा था कि वे और उनकी पत्नी द्वारा चलाए जा रहे तिरंगा टीवी में भयावह स्थिति है। उन्होंने बताया था कि चैनल द्वारा 200 से ज्यादा कर्मचारियों को बिना 6 महीने की सैलरी दिए निकाल दिया गया है। उनका कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल को लेकर कहना था कि एक व्यक्ति जो जनता के बीच में खुद को बिलकुल साफ़ दिखाता है, वो पत्रकारों के साथ घिनौना बर्ताव कर रहा है।
हालाँकि, उनके आरोपों के जवाब में सिब्बल ने दावा किया था कि बरखा दत्त को चैनल बंद होने से पहले ही बर्खास्त किया जा चुका था। इसके पीछे उन्होंने कारण अनुशासनहीनता बताया था। इसके अलावा उन्होंने दत्त को एक भी पैसा देने से साफ़ इनकार कर दिया था।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज सेवानिवृत्त भारतीय नौसेना के अधिकारी मदन शर्मा से बात की और उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। बता दें, नौसेना के पूर्व अधिकारी को महाराष्ट्र में शिवसेना के गुंडों ने सीएम उद्धव ठाकरे पर एक कार्टून साझा करने के लिए बेरहमी से पीटा था।
Spoke to retired naval officer, Shri Madan Sharma who was attacked by hooligans in Mumbai and enquired about his health. Such attacks on Ex-Servicemen is completely unacceptable and deplorable. I wish Madanji a speedy recovery.
राजनाथ सिंह ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इसकी जानकारी दी। उन्होंने शर्मा के स्वास्थ्य के बारे में पूछताछ की और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिक पर इस तरह के हमले पूरी तरह से अस्वीकार्य और अपमानजनक है।
वहीं इस बात की जानकारी टाइम्स नाउ को देते हुए मदन शर्मा ने बताया की रक्षा मंत्री ने उन्हें फोन किया और उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछताछ की। राजनाथ सिंह ने यह भी पूछा कि यह घटना कैसे हुई। इस पर उन्होंने शिवसेना के गुंडों द्वारा किए गए हमले के बारे में विस्तार से बताया।
#Exclusive | Defence Minister asked if I was doing fine, wished me a speedy recovery: Madan Sharma, assaulted veteran tells TIMES NOW.
शर्मा ने रक्षा मंत्री को यह भी बताया कि हाल ही में महाराष्ट्र सरकार जिस तरह से काम कर रही है, उससे वह खुश नहीं हैं। उन्होंने पिछले 3-4 महीनों से राज्य के मामलों की स्थिति के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की। साथ ही उन्होंने रक्षा मंत्री से इसके बारे में कुछ करने के लिए भी कहा।
मदन शर्मा ने पूछने पर यह भी बताया कि किसी भी शिवसेना नेता या मंत्री ने उनसे संपर्क नहीं किया है और न ही इस क्रूर हमले के लिए उनसे माफी माँगी है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के नेता अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं की गलती पर खेद भी जताना नहीं चाहते हैं क्योंकि क्योंकि इससे उनके अहंकार को चोट पहुँचेगी। उन्होंने चिंता जताई कि चोटों से उबरने के बाद वह और उनका परिवार फिर से हमले की चपेट में आ सकता है।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का कार्टून शुक्रवार को सोशल मीडिया में फॉरवर्ड करने पर मुंबई में शिवसेना कार्यकर्ताओं ने सेवानिवृत्त नेवी ऑफिसर मदन शर्मा पर हमला बोल दिया था। इस हमले में पूर्व नेवी अधिकारी की आँख बुरी तरह जख्मी हो गई थी।
उन्होंने इस मामले में मुंबई की समता नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। जिस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 6 लोगों को गिरफ्तार किया था। वहीं गिरफ्तारी के 12 घंटे के भीतर ही उन सभी आरोपितों को जमानत दे दी गई थी। गिरफ्तार किए गए शिवसैनिकों में पार्टी का शाखा प्रमुख कमलेश कदम के अलावा 5 और कार्यकर्ता शामिल थे।
रिया चक्रवर्ती ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की पूछताछ में ड्रग्स लेने वाले कई बड़े नामों का खुलासा किया है। इस संबंध में एनसीबी ने बॉलीवुड के लगभग 25 बड़े नामों को समन भेजने की तैयारी कर ली है। रिया चक्रवर्ती ने जिन नामों का खुलासा किया है उनमें दो शुरूआती नाम हैं- सारा अली खान और रकुल प्रीत सिंह।
इस मामले में हैरानी की बात है कि अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह के लिए ड्रग्स का मुद्दा इतना बड़ा नहीं है जिस पर इतना ज़ोर दिया जाए। तेलंगाना पुलिस ने रकुल प्रीत को ‘say no to drugs’ (ड्रग्स को नहीं कहो) अभियान का हिस्सा बनाया था।
पहले बात करते हैं उस साक्षात्कार की, जिसमें रकुल प्रीत सिंह का ड्रग्स को लेकर नज़रिया स्पष्ट होता है। रकुल प्रीत सिंह ने आज से लगभग 3 वर्ष पहले एक साक्षात्कार दिया था। यह साक्षात्कार 8 अगस्त 2017 को TV9 समाचार समूह पर प्रसारित हुआ था।
इस बातचीत में ड्रग्स से जुड़े सवाल पर रकुल प्रीत सिंह ने कहा, “यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे हम और आप (मीडिया) इतनी हवा दे रहे हैं। यह एक सामान्य सा मुद्दा है और इस पर सामान्य सी जाँच जारी है। हमारे पास ध्यान देने के लिए और भी अलग मुद्दे हैं और यह बात ठीक है कि इस पर जाँच हो रही है।”
इसके बाद अपनी बात में सुधार लाते हुए अभिनेत्री ने कहा, “कोई भी व्यक्ति ड्रग्स का समर्थन नहीं करने वाला है। यह अच्छी बात है कि इसे सिस्टम से ख़त्म कर दिया जाए। अभी इस मुद्दे पर जाँच चल रही है, इसलिए हमें इस पर कम बात करनी चाहिए। हमें सिर्फ ख़बर तैयार करने के लिए इस मुद्दे पर बात नहीं करनी चाहिए। बल्कि हमें इस मुद्दे को और बेहतर तरीके से समझने की ज़रूरत है।”
ड्रग्स के मामले में रकुल प्रीत से जुड़ी एक और घटना है, जो हैरान करने वाली है। दरअसल तेलंगाना में ड्रग्स के विरुद्ध ‘say no to drugs’ नामक एक अभियान शुरू किया गया था। तेलंगाना सरकार ने रकुल प्रीत को इस अभियान का ब्रांड एम्बेसडर चुना था।
इस अभियान के तहत ड्रग्स के विरोध में कई बड़े आयोजन कराए गए थे। साल 2017 में तेलंगाना की हैदराबाद पुलिस ने इस अभियान का एक पोस्टर बनवाया था। जिसमें रकुल प्रीत सिंह अभियान की मुखिया के तौर पर नज़र आ रही थीं। लेकिन अफ़सोस अब उन्हीं रकुल प्रीत सिंह का नाम ड्रग्स का इस्तेमाल करने में सामने आया है।
इस मामले पर सबसे ज़्यादा उल्लेखनीय प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है इंटरनेट पर। रकुल प्रीत सिंह और सारा अली खान उन अभिनेत्रियों में से हैं जो अपने स्वास्थ्य को लेकर बहुत जागरूक रहती हैं। इतना ही नहीं वह अक्सर अपने सोशल मीडिया हैंडल पर अच्छा खाने और योग अभ्यास की तस्वीरें और वीडियो साझा करती हैं। एक ट्विटर यूज़र ने ट्वीट करते हुए लिखा, “यही रकुल प्रीत और सारा अली खान अपने इन्स्टाग्राम पर अच्छा खाने और योगा को बढ़ावा देते हैं।”
बीते दिन रिया चक्रवर्ती ने NCB के सामने बॉलीवुड के ऐसे नामों का खुलासा किया था जो कथित तौर पर ड्रग्स लेते हैं और दूसरों को मुहैया कराते हैं। ख़बरों की मानें तो रिया चक्रवर्ती ने पूछताछ में कहा था कि लगभग 80 फीसदी बॉलीवुड कलाकार ऐसे हैं जो ड्रग्स का सेवन करते हैं। रिया ने जिन नामों का खुलासा किया है उनमें से कई बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता, प्रोड्यूसर और निर्देशक भी थी।
अपने बयान में रिया चक्रवर्ती ने सुशांत सिंह राजपूत को ड्रग्स उपलब्ध कराने की बात भी स्वीकार की थी। हैरान कर देने वाले खुलासे में रिया चक्रवर्ती ने बताया था कि सारा अली खान, रकुल प्रीत सिंह और डिज़ाइनर सिमोन खम्मबट्टा मादक पदार्थों का सेवन करती हैं।
पूछताछ के दौरान रिया ने सुशांत सिंह की दोस्त रोहिणी अय्यर और फिल्म निर्माता मुकेश छाबड़ा पर भी ड्रग्स लेने का आरोप लगाया था। 30 जुलाई 2019 को करण जौहर के घर एक ड्रग्स हाउस पार्टी हुई थी। एनसीबी बहुत जल्द इस मामले में भी जाँच शुरू कर सकती है। करण जौहर के घर पर हुई इस पार्टी का वीडियो इंटरनेट पर खूब वायरल हुआ था। अकाली दल के नेता मजिंदर सिंह ने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए आरोप लगाया कि इसमें शामिल लगभग सारे लोग ड्रग्स के नशे में थे।