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रमन बने अफजल ने नेहा को बहन बनाकर घर से भगाया: घर से ₹25000 कैश, 3 लाख के गहने, एटीएम कार्ड गायब

कानपुर में लव जिहाद का एक नया मामला सामने आया है। गोविंदनगर थाना क्षेत्र में एक मुस्लिम युवक ने एक हिंदू लड़की को बहन बनाया और फिर घर से भगा ले गया। लड़की की माँ ने बताया कि अफजल अंसारी नाम के मुस्लिम युवक ने फेसबुक पर रमन नाम से फर्जी ईडी बना कर उनकी बेटी को बहला फुसलाकर अपने साथ ले गया। इतना ही नहीं अफजल ने फोन पर उनकी बेटी को इस्लाम कबूलवाने की बात भी कही है।

कानपुर में मजहबी फरेब के मामले रुकने का नाम ही नहीं ले रहे। जानकारी के मुताबिक, लव जिहाद का ये मामला कानपुर के गुजैनी इलाके का है। अफजल ने हिंदू लड़की नेहा को अपने प्यार में फँसाया और अब परिजनों को इस्लाम धर्म कबूल करवाकर निकाह करने की धमकी दे रहा है।

नेहा की माँ सन्नो देवी ने बताया कि गुरूवार शाम को नेहा अपनी सहेली के घर पर गई थी। जब वो देर रात घर नहीं आई तो घरवालों ने उसे खोजना शुरू कर दिया। सन्नो ने बताया कि देर रात एक लड़के का कॉल आया। उसने बताया कि उसका नाम रमन नहीं बल्कि अफजल अंसारी है। उसने कहा कि मेरी बेटी उसके साथ है और अब वह नेहा को इस्लाम धर्म कबूल कराकर उसे मुस्लिम बनाएगा फिर निक़ाह करेगा। अफजल की बातों ने घर वालों के होश उड़ा दिए है।

मामले की पूरी जानकारी देते हुए लड़की की माँ ने बताया, उनकी बेटी फेसबुक के जरिए अफजल से मिली थी। लड़के ने रमन नाम से अपनी आईडी बनाई थी। आरोपित ने नेहा का भरोसा जीतने के लिए पहले उसे बहन बनाया। और हर बात पर उसे बहन-बहन कह कर के संबोधित करने लगा। करीब दो साल से उनकी बेटी अफजल बने रमन से बात कर रही थी।

युवती की माँ ने यह भी बताया कि उन्होंने इस सिलसिले में अपनी बेटी से पूछताछ की थी। जिसपर उसने बताया कि वह लड़का उसकी बहुत रेस्पेक्ट करता है। रमन बने अफजल ने उसे बहन का दर्जा दिया हुआ है और राखी भी बंधवाई है। जिसका मैंने यकीन कर इस बात पर कोई एतराज नहीं किया था। नेहा ने एक बार उस लड़के से मुझसे फोन पर बात भी कराई थी।

लड़की की माँ ने आगे कहा, “अफजल ने फ़ोन पर उसे माँ कहते हुए बात की थी। उस समय मुझे क्या पता था कि भाई की आड़ में कोई दरिंदा इसके पीछे छिपा है। जिसकी नजर मेरी बेटी की जिस्म पर थी। बहन बहन कह कर उसने मेरी बेटी नेहा को अपने मोह जाल में फँसाया फिर मौका देखते ही उसे भगा ले गया।”

रिपोर्ट के अनुसार अफजल दुबई में काम करता है। और मूल रूप से वह दरभंगा बिहार का निवासी है। आरोपित का फोन आने के बाद डरे सहमे परिजनों ने जब घर की तिजोरी देखी तो पता चला 25 हजार रुपए, तीन लाख के गहने, बैंक की पासबुक, एटीएम सब गायब था। लड़की के पिता ने बताया नेहा के बैंक एकाउंट में भी करीब 1 लाख 50 हजार रुपए थे। मेरी बेटी को झाँसे में लेकर यह सब अफजल अंसारी ने ही कराया है।

नेहा के परिजनों ने पुलिस थाने में एफआईआर कर दी है। इंस्पेक्टर अनुराग मिश्र ने बताया कि लव जिहाद और धर्म परिवर्तन के बारे में तो सबूतों और जाँच पड़ताल के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। मामले कि छानबीन शुरू कर दी गई है। वहीं परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया है। वे सही सलामत अपनी बेटी की वापसी की माँग कर रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने रिया चक्रवर्ती के समर्थन में निकाली रैली: बंगाल की बेटी कहते हुए लगाए नारे

पश्चिम बंगाल राज्य मे अस्तित्वगत संकट से जूझ रही कॉन्ग्रेस पार्टी ने आरोपित रिया चक्रवर्ती के मामले को अपने राजनीतिक फायदे को देखते हुए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में भुनाना चाहा। कोरोनोवायरस महामारी के बीच सैकड़ों कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने शनिवार (12 सितंबर, 2020) को पश्चिम बंगाल के कोलकाता की सड़कों पर उतरकर अभिनेत्री रिया के लिए न्याय की माँग करते हुए उसे ‘बंगाल की बेटी’ कहा।

बता दें नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा ड्रग कार्टेल में उसकी भागीदारी के सबूत मिलने के बाद रिया को बाइकुला जेल में रखा गया है। कथित रूप से कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के निर्देश पर यह रैली कॉन्ग्रेस कार्यालय से निकाली गई थी। चौधरी पश्चिम बंगाल प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के वर्तमान अध्यक्ष भी हैं। हालाँकि, वह खुद रैली के दौरान मौजूद नहीं थे। यह बताया जा रहा है कि उन्होंने ही रैली निकालने के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं को फोन किया था।

कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने रैली के दौरान रिया चक्रवर्ती के समर्थन में नारे लगाए। उन्होंने बैनर और तख्तियाँ लेकर दावा किया कि रिया की गिरफ्तारी राजनीतिक साजिश का हिस्सा थी।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कोलकाता में पीसीसी अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के बाद रिया चक्रवर्ती को एक बंगाली ब्राह्मण महिला ’के रूप में वर्णित किया था और ड्रग के आरोपों में उनकी गिरफ्तारी को बेतुका करार दिया था।

संभवत: अधीर रंजन चौधरी ने आगामी 2021 पश्चिम बंगाल राज्य चुनावों से पहले राज्य के मतदाताओं को लुभाने की अपनी बेताब कोशिश में, कुशलतापूर्वक अपनी पार्टी को सबसे पुराने और ‘धर्म और जाति-आधारित’ कथनों में शामिल करने की कोशिश की है।

सुशांत के मामले में आरोपों से घिरी उनकी प्रेमिका रिया चक्रवर्ती को लेकर कॉन्ग्रेस एमपी ने बुधवार को ट्वीट करते हुए कहा था, “रिया के पिता सेना के एक अधिकारी रह चुके हैं और उन्होंने देश की सेवा की है। रिया एक बंगाली ब्राह्मण महिला भी हैं; सुशांत को न्याय की व्याख्या, बिहारी के लिए न्याय की व्याख्या नहीं होनी चाहिए। रिया के पिता को भी अपने बेटी के लिए न्याय माँगने का हक मिलना चाहिए। किसी भी मामले का मीडिया ट्रायल हमारी न्यायिक व्यवस्था के लिए शुभ नहीं है। सभी को न्याय मिले यही हमारे संविधान का मूल सिद्धांत है।”

उल्लेखनीय है कि इस बीच सुशांत सिंह राजपूत मामले से जुड़े ड्रग्स के आरोप में गिरफ्तार रिया चक्रवर्ती की जमानत याचिका को आज मुंबई की एक अदालत ने खारिज कर दिया। उसके भाई शौविक चक्रवर्ती और चार अन्य आरोपितों की जमानत याचिका भी खारिज कर दी गई है।

रिया चक्रवर्ती 22 सितंबर तक बाइकुला जेल में न्यायिक हिरासत में रहेंगी। वहीं सोमवार को लिखित आदेश जारी होने के बाद वह जल्द से जल्द उच्च न्यायालय में अपील कर सकती हैं।

महिला CPI-M कैडर ने की आत्महत्या: सुसाइड नोट में लगाया दो माकपा कार्यकर्ताओं पर उत्पीड़न का आरोप

केरल में 41 वर्षीय महिला CPI-M कैडर ने पार्टी कार्यालय के अंदर फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृत माकपा कार्यकर्ता का नाम आशा बताया जा रहा है। पुलिस ने मौके पर से आशा द्वारा लिखा गया सुसाइड नोट बरामद किया है। इसमें आशा ने दो सीपीआई (एम) सदस्यों पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही आशा ने सुसाइड नोट में पार्टी को उसकी शिकायत पर ध्यान नहीं देने के लिए दोषी ठहराया है।

आशा के परिवार वालों का कहना है कि वो आशा कार्यकर्ता के रूप में काम करने के साथ ही माकपा की सदस्य भी थीं। उसने कुछ दिन पहले भी पार्टी की एक समिति की बैठक में हिस्सा लिया था। हालाँकि, पार्टी ने आशा के सदस्य होने की बात से इनकार किया है। फिलहाल पुलिस यह पुष्टि नहीं कर पा रही है कि वह पार्टी की सदस्य थी या फिर सिर्फ समर्थक।

गुरुवार (सितंबर 10, 2020) को वह कभी वापस न आने की बात कहकर पार्टी ऑफिस के लिए निकली थी। इससे चिंतित परिजन जब आशा की खोज में पार्टी ऑफिस पहुँचे तो वहाँ उसे फाँसी के फंदे से लटकते पाया। 

बरामद किए गए सुसाइड नोट में, आशा ने उल्लेख किया कि पार्टी के दो नेता – स्थानीय समिति के सदस्य कोट्टमन राजन और शाखा सचिव अनाथारविलाकम जॉय, उसे लंबे समय से उसे मानसिक रूप से परेशान कर रहा था, जिसके कारण वह डिप्रेशन का शिकार हो गई। सुसाइड नोट में यह भी कहा गया है कि उसने इस मामले को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के सामने कई बार उठाया, मगर हर बार उसे अनसुना कर दिया गया।

आशा की मौत से खलबली मच गई। आशा के परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया और कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। बाद में, पुलिस ने उन्हें शांत करा दिया और शव को पोस्टमार्टम के लिए तिरुवंतपुरम मेडिकल कॉलेज भेज दिया।

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने कहा कि सीपीआई-एम पार्टी में महिलाएँ सुक्षित नहीं है। उन्होंने डीजीपी से निष्पक्ष जाँच के लिए कहा है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि जब महिला ने राजन और जॉय द्वारा प्रताड़ित किए जाने का मामला उठाया गया था, तो ‘वरिष्ठ कॉमरेड’ कार्रवाई करने में विफल क्यों हैं। बता दें कि राजन और जॉय के खिलाफ अब तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।

पुलिस प्रथम दृष्टया मानती है कि यह आत्महत्या का मामला है। सीनियर इंस्पेक्टर रतीश कुमार ने TNM से कहा कि राजन और जॉय के खिलाफ अब तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, “सुसाइड नोट के आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया जा सकता है। हम जाँच कर रहे हैं कि क्या आत्महत्या में उनकी कोई भूमिका थी। अगर ऐसा पाया जाता है तो उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा।”

‘काफिर काफिर शिया काफिर’: कराची में सिपाह सहाबा से जुड़े कट्टरपंथी सुन्नियों ने निकाला शिया विरोधी रैली, की पत्थरबाजी

शुक्रवार को हज़ारों की तादाद में सुन्नी कट्टरपंथी समूहों ने कराची की सड़कों पर शिया विरोधी आन्दोलन किया। इस्लाम के दो वर्गों के बीच इतने बड़े पैमाने पर तनाव पैदा होने पर हिंसा की घटनाओं का ख़तरा भी बढ़ गया था। हाल ही पाकिस्तानी शिया नेता ने कथित तौर पर मुहर्रम जुलूस के सीधे प्रसारण के दौरान ऐतिहासिक इस्लामिक चेहरों पर अनैतिक टिप्पणी की थी। इस टिप्पणी के चलते उस शिया नेता पर ईशनिंदा का आरोप लगा था जिसके विरोध में सुन्नी समुदाय के हज़ारों लोग सड़कों पर उतरे थे। 

विरोध प्रदर्शन मोहम्मद अली जिन्नाह की मज़ार ‘मज़ार-ए -कायद’ के पास शुरू हुआ था। इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाले कट्टरपंथी सुन्नी तमाम शिया विरोधी समूहों से जुड़े हुए थे। इसमें सिपाह-ए-सहाबा और तहरीक लब्बाइक पाकिस्तान मुख्य थे। यह सभी समूह शिया समुदाय के लोगों को काफ़िर मानते हैं। ख़बरों की मानें तो सिपाह-ए-सहाबा ने पिछले कुछ समय में पाकिस्तान के भीतर सैकड़ों शिया समुदाय वालों की हत्या की है। 

सुन्नियों का नारा काफ़िर काफ़िर शिया काफ़िर 

इन विरोध प्रदर्शनों के तमाम वीडियो भी सामने आए हैं जिसमें हज़ारों की भीड़ देखी जा सकती है। ऐसे ही एक वीडियो में सुन्नी कट्टरपंथी बसों को रोकते हुए, झंडे फहराते हुए और शिया विरोधी नारे लगाते हुए देखे जा सकते हैं। लगाए गए तमाम नारों में एक नारा था ‘काफ़िर काफ़िर शिया काफ़िर।’ सैय्यद हुसैन मुजतबा रिज़वी नाम के ट्विटर यूज़र ने विरोध प्रदर्शन का वीडियो साझा करते हुए लिखा, “तो अब यह सब भी शुरू हो चुका है। सिपाह सहाबा और तहरीक लब्बाइक पाकिस्तान कराची में काफ़िर काफ़िर शिया काफ़िर के नारे लगा रहे हैं। इमाम बरगाह इमामिया पर तमाम गुंडों ने हमला भी किया है और कुछ ने तो पत्थर भी चलाए।” 

सुन्नी कट्टरपंथियों ने चलाए इमामबारगाह पर पत्थर

इसी तरह के एक और वीडियो में सिपाह सबाहा से सम्बंधित सुन्नी कट्टरपंथी इमाम बरगाह (शिया समुदाय के लोगों का एकत्रित होने का स्थान) पर पत्थर फेंकते हुए देखे जा सकते हैं। इस वीडियो में भी भीड़ शिया विरोधी नारे लगाते हुए सुनी जा सकती है और यह सब कुछ प्रदर्शन के दौरान ही हो रहा था। 

हाल ही में जमात उलेमा-ए-इस्लाम नाम के राजनैतिक संगठन के नेता करी उस्मान ने एक भाषण दिया था। अपने भाषण में उसने कहा था, “हम किसी भी तरह का अपमान और मानहानि नहीं सहेंगे। शिया जो पाकिस्तान की आबादी का सिर्फ 20 फ़ीसदी हैं, उन्हें मुहर्रम के जुलूस के दौरान निशाना बनाया गया। साल 2013 के बाद से शिया विरोधी हिंसा में सामान्य गिरावट भले आई है लेकिन वर्ग के आधार पर होने वाले हमले देश के तमाम इलाकों में अभी तक जारी हैं।” 

पाकिस्तान में ईशनिंदा 

पाकिस्तान में ईशनिंदा एक अपराध है और कुछ मामलों में इसके लिए मृत्यु दंड का भी प्रावधान है। इससे सम्बंधित क़ानून का इस्तेमाल अक्सर अल्पसंख्यकों और अन्य वंचित वर्ग के लोगों पर अत्याचार करने के लिए किया जाता है। अगर किसी व्यक्ति पर ईशनिंदा के आरोप साबित नहीं होते तो इस्लामी भीड़ उसकी लिंचिंग (पीट-पीट कर हत्या) कर देती है। ईशनिंदा का क़ानून यह कहता है कोई भी इंसान अगर अपने शब्दों से (लिखित या मौखिक), चित्रण के सहारे, आरोप या कटाक्ष के ज़रिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पैगंबर मोहम्मद का अपमान करता है। उस इंसान को जुर्माना, आजीवन कारावास या कुछ मामलों में मृत्यु दंड तक सुनाया जा सकता है। 

जब सुन्नी समुदाय ने कोरोना वायरस को कहा शिया वायरस   

हाल ही में तमाम पाकिस्तानी लोगों ने शिया समुदाय के लोगों की आलोचना की थी। दरअसल शिया समुदाय के लोग ईरान स्थित अपने धार्मिक स्थल से वापस लौटे थे जिसकी वजह से पाकिस्तान के लोगों का कहना था कि सारे शिया अपने साथ कोरोना वायरस लेकर आए हैं। कुछ कट्टरपंथियों ने तो यहाँ तक कहा कि इस वायरस के लिए चीन से ज़्यादा शिया लोग ज़िम्मेदार हैं इसलिए इस वायरस का नाम ‘शिया वायरस’ होना चाहिए। कुछ लोगों ने कहा कि शिया समुदाय के लोग जानबूझ कर पाकिस्तान में कोरोना वायरस लेकर आए। और कुछ ने तो यहाँ तक कहा कि शिया समुदाय के लोग इस्लाम के असली दुश्मन हैं।                

नीरव मोदी को ‘बलि का बकरा’ बनाया गया, भारत में नहीं मिलेगा निष्पक्ष सुनवाई का मौका: मार्कंडेय काटजू ने किया बचाव

लंदन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में बचाव पक्ष के गवाह के तौर पर शुक्रवार को पेश हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने कहा कि नीरव मोदी को भारत में निष्पक्ष ट्रायल नहीं मिल पाएगा। बैंक से करोड़ों की धोखाधड़ी कर लंदन भागे नीरव मोदी मामले में मजिस्ट्रेट कोर्ट से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई के दौरान पूर्व जस्टिस काटजू ने कहा कि अगर हीरा कारोबारी नीरव मोदी का भारत में प्रत्यर्पण किया जाता है तो भारत में निष्पक्ष ट्रायल नहीं मिल पाएगा।

नई दिल्ली से 130 मिनट के अपने बयान में काटजू ने आरोप लगाया कि भारत में न्यायिक व्यवस्था चौपट हो गई है। उन्होंने दावा किया कि जाँच एजेंसियाँ जैसे- सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय राजनीतिक गुरुओं के इशारों पर काम कर रही हैं।

भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी पर पंजाब नैशनल बैंक को दो अरब अमेरिकी डॉलर का चूना लगाने और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। काटजू ने नीरव मोदी के बचाव में लिखित और मौखिक दावों में कहा कि भारत में न्यायपालिका का अधिकांश हिस्सा भ्रष्ट है और जाँच एजेंसियाँ सरकार की ओर झुकाव रखती हैं। लिहाजा नीरव मोदी को भारत में निष्पक्ष सुनवाई का मौका नहीं मिलेगा।

कोर्ट में पाँच-दिवसीय सुनवाई नीरव मोदी के प्रत्यर्पण ट्रायल का हिस्सा है, जिसमें जजों को यह तय करने की आवश्यकता है कि क्या भारत सरकार द्वारा पेश साक्ष्य के आधार पर भारत में उसके खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला है- सजा या अपराध के निर्णय तक नहीं पहुँचने के लिए।

काटजू ने अपने आरोपों के समर्थन में कई केस और मुद्दों को रखा, जिनमें 2019 में पूर्व जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच की तरफ से अयोध्या पर दिया गया फैसला शामिल हैं, जिन्हें बाद में राज्यसभा का सदस्य नियुक्त किया गया। इसके साथ ही, उन्होंने रिटायरमेंट के बाद जजों की नियुक्ति, मीडिया ट्रायल और न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का मुद्दा भी रखा।

रविशंकर प्रसाद की तरफ से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नीरव मोदी को “अपराधी” कहने पर सवाल उठाते हुए काटजू ने कहा, “भारत सरकार ने अपने दिमाग में बिठा लिया है कि नीरव मोदी एक अपराधी है। क्या रविशंकर प्रसाद जज हैं? किस तरह के वह कानून मंत्री हैं? कैसे हम निष्पक्ष ट्रायल की उम्मीद करेंगे? ”

काटजू के इन दावों पर भारत सरकार की ओर से मुकदमा लड़ रही ब्रिटेन की क्राउन प्रोसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) ने पलटवार किया।

बैरिस्टर हेलेन मैल्कम ने सवाल किया, ”क्या ऐसा संभव है। आप स्वघोषित गवाह हैं, जो कुछ भी बयान दे सकते हैं।” इस पर काटजू ने जवाब दिया, ”आप अपने विचार रखने के हकदार हैं।”  

मैल्कम ने इस विचाराधीन मामले में ब्रिटेन की अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों के संबंध में इस सप्ताह की शुरुआत में भारत में मीडिया को साक्षात्कार देने के काटजू के फैसले के बारे में भी सवाल किया, जिस पर काटजू ने कहा कि वह केवल पत्रकारों के सवालों के जवाब दे रहे थे और ”राष्ट्रीय महत्व” के मामलों पर बोलना उनका कर्तव्य है।

बता दें कि 5 दिन की सुनवाई के अंतिम दिन जस्टिस सैमुअल गूजी ने काटजू की विस्तृत गवाही सुनने के बाद मामले की सुनवाई 3 नवंबर तक स्थगित कर दी। तीन नवंबर को वह भारतीय अधिकारियों की तरफ से पेश किए गए सबूतों की स्वीकार्यता से जुड़े तथ्यों पर सुनवाई करेंगे।

मुनव्वर फारूखी के खिलाफ दर्ज शिकायत को FIR में बदलने में 3-4 महीने लगेंगे या 1 साल: शिकायतकर्ता ने किया प्रशासन से सवाल

स्टैंड-अप कॉमेडी के नाम पर हिंदू देवी देवताओं के ख़िलाफ़ अभद्र टिप्पणी करने वाले मुनव्वर फारूकी पर पिछले महीने दिल्ली में एक शिकायत दर्ज हुई थी। यह शिकायत पेन ऑफ धर्म के एडमिन शिवम रावत ने की थी। उन्होंने शिकायत में फारूकी की कई ‘आपत्तिजनक’ वायरल वीडियोज का हवाला देकर उसके खिलाफ कार्रवाई की अपील की थी। हालाँकि, ताजा सूचना के अनुसार, इस शिकायत को लगभग एक महीने बीत जाने के बाद भी इस पर कोई सुनवाई नहीं है। यहाँ तक कि अभी इस मामले में एफआईआर भी दर्ज नहीं हुई है।

शिवम रावत बताते हैं कि वह शिकायत कराने के बाद से इस मामले पर एसएचओ से फॉलोअप ले रहे थे। पर कुछ दिन पहले उन्हें बोला गया कि ये मामला बेहद संवेदनशील है। इसलिए इसे डीसीपी देखेंगे।

शिवम के अनुसार, डीसीपी के पास इस केस को पहुँचे करीब 10 दिन हो चुके हैं। आज उनसे कहा गया है कि ऐसे मामलों में समय लगता है। ऑपइंडिया से बात करते हुए वे कहते हैं, “मैं समझ सकता हूँ इन चीजों में टाइम लगता है। पर, अब करीब 4 हफ्ते बीत चुके हैं। मेरी शिकायत वायरल वीडियोज के आधार पर हैं। जो 3-4 महीने पहले ट्विटर पर ट्रेंड भी हो चुकी हैं। इसलिए ये केस एकतरफा नहीं है या मैं कोई प्रोपगेंडा नहीं फैला रहा। मगर, बावजूद इसके एफ़आईआर होने में समय लग रहा है।”

शिवम बताते हैं कि वह जब भी इस केस के बारे में जानना चाहते हैं तो उनसे यही कहा जाता है कि पड़ताल चल रही हैं। उन्हें ये नहीं बताया जा रहा कि प्राथमिकी दर्ज होने में कितना समय लगेगा। उनका सवाल है कि आखिर इसके लिए उन्हें 3-4 महीने तक रुकना है या फिर एक साल तक?

पेन ऑफ धर्म के एडमिन कहते हैं, “मैं मानता हूँ कि FIR होना इतना आसान बात नहीं हैं। लेकिन मुझे इतना भी पता है कि आमतौर पर FIR होने में इतना समय नहीं लगता। क्योंकि इसके बाद ही किसी की शिकायत पर असली जाँच शुरू होती है। उससे पहले शिकायत सिर्फ़ एक जरिया होती है कि केस अब आगे बढ़ेगा।”

यहाँ बता दें कि ऑपइंडिया ने शिवम की शिकायत और सवालों के मद्देनजर किशनगढ़ थाने में संपर्क किया था। लेकिन उन्होंने इस केस में कोई भी जानकारी साझा करने से मना कर दिया। इसके बाद ऑपइंडिया ने क्षेत्र के डीसीपी से बात करने की भी कोशिश की। लेकिन उनसे हमारा संपर्क नहीं हो पाया। शिवम लगातार इस मामले पर एफआईआर की माँग कर रहे हैं, ताकि फारूकी को उसके किए की सजा मिल सके।

उन्होंने 21 अगस्त को अपने ट्विटर पर भी इस संबंध में ट्वीट किया था। जिसमें उन्होंने कई पत्रकारों समेत दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, गृहमंत्री अमित शाह एवं डीसीपी को टैग करके एफआईआर की गुहार लगाई थी।

16 अगस्त को हुई थी फारूकी के खिलाफ़ शिकायत दर्ज

गौरतलब है कि 16 अगस्त को दिल्ली के किशनगढ़ थाने में पेन ऑफ धर्म के एडमिन शिवम रावत ने फारूकी के खिलाफ़ शिकायत दर्ज करवाते हुए फारूकी समेत मुंबई स्थित ‘द हैबीटेट- कॉमेडी एंड म्यूजिक कैफे’ पर भी एफआईआर दर्ज करने की अपील की थी।

उनका कहना था कि कुछ समय पहले जब फारूकी की वीडियोज वायरल होना शुरू हुईं थी, तब कई एक्टिविस्टों ने इस मामले को उठाया था। चारों ओर से आलोचना और निंदा को देखते हुए उस वीडियो से विवादित पार्ट को हटा दिया गया और यूट्यूब पर वीडियो मौजूद रही।

कई शिकायतों के बाद भी जब फारूकी पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो उसकी हिम्मत और बढ़ गई। नतीजतन ये दोबारा यूट्यूब पर आया और इस बार एक नए अंदाज में उन लोगों का मजाक बनाया जो उसके ख़िलाफ़ थे। उसने इस वीडियो में उन लोगों (मुख्यत: हिंदुओं) को ‘भेड़ों की नस्ल’ बताया। साथ ही कहा कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। आगे वो आगे नेटफ्लिक्स पर भी आएगा। लोगों ने उसके ख़िलाफ़ शिकायत करके बस उसे फेमस किया है।

चीन ने अरुणाचल से लापता पाँच लोगों को भारतीय सेना को सौंपा, पहले भी अनजाने में कई युवाओं ने पार किया है LAC

सीमा पर भारत और चीन के बढ़ते तनाव के बीच चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने अरुणाचल प्रदेश से लापता पाँच युवाओं को शनिवार को रिहा कर दिया है। भारतीय सेना ने एक प्रेस रिलीज जारी कर यह जानकारी दी है।

भारतीय सेना के बयान के अनुसार, सभी औपचारिकाताएँ पूरी करने के बाद सभी पाँचों लोगों को किबितू सीमा के पास वाचा में रिसीव किया गया है। वापस आए सभी लोगों को कोरोना वायरस प्रोटोकॉल के अनुसार 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन किया जाएगा और उसके बाद ही उनके परिवार को सौंपा जाएगा।

गौरतलब है शुरू में यह रिपोर्ट किया गया था कि चीनी सैनिकों ने भारतीय जवानों को पकड़ लिया है। वहीं इस अफवाह के बाद भारतीय सेना ने एक बयान जारी कर बताया था कि पकड़े गए लोग अरुणाचल प्रदेश के रहने वाले शिकारी थे। जो शिकार के दौरान अनजाने में एलएसी की दूसरी तरफ भटक गए थे।

बयान में आगे कहा गया कि, LAC को गलती से पार करने की ऐसी घटनाएँ अतीत में बहुत बार हुई हैं और भारतीय सेना लगातार खोए हुए स्थानीय लोगों का पता लगाने और उनको वापस घर लौटाने का काम किया है। इस तरह की लगभग तीन घटनाएँ इस साल हुई है। जिनमें ऊपरी सबनसिरी जिला और पश्चिम सियांग जिला शामिल है। सभी भटके हुए व्यक्तियों को भारतीय सेना द्वारा लगातार प्रयासों और समन्वय के माध्यम से घर वापस लाया गया।

सेना ने बताया, “हालिया ऊपरी सुबनसिरी जिले के पाँच व्यक्तियों ने भी अनजाने में हाल ही में एलएसी पार कर लिया था। भारतीय सेना ने उन्हें ट्रेस किया और वापस करने के लिए हॉटलाइन पर PLA से संपर्क किया। 8 सितंबर को, हॉटलाइन पर प्रतिक्रिया की पुष्टि हुई कि लापता व्यक्तियों का पता लगाया गया था।”

कश्मीर के रघुनाथ मंदिर में जल्द होगा श्री राम का जयघोष: 31 साल पहले आतंकियों ने मूर्तियों को झेलम में फेंक जला दिया था टेम्पल

अयोध्या में भगवान राम मंदिर के निर्माण कार्य से प्रोत्साहित होकर श्रीनगर शहर के बीचोंबीच रघुनाथ मंदिर का मरम्मत कार्य भी शुरू हो गया है। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद  370 के निरस्त होने के बाद रघुनाथ मंदिर ऐसा पहला मंदिर है, जहाँ मरम्मत कार्य शुरू हुआ है।

करीब 30 साल से बंद पड़े रघुनाथ मंदिर की हालत जर्जर हो गई थी। कश्मीरी पंड़ितों के वर्ष 1989 में पलायन के बाद से मंदिर में कोई नहीं गया। मंदिर 1989 से पहले ही क्षतिग्रस्त हो गया था। उसकी मरम्मत नहीं हो पाई थी। मंदिर का गुबंद भी टूट गया था। 

बता दें कि कश्मीर में जब आतंकवाद चरम पर था, तब अनेक नए-पुराने मंदिरों को तहस-नहस कर दिया गया। कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाने के साथ बड़ी संख्या में मंदिरों और मठों को नुकसान पहुँचाया गया। उन पर कब्जे भी कर लिए गए। मंदिर जीर्णोद्धार की खबर आते ही हिंदू समुदाय में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। वर्ष 1989 में आतंकियों की धमकियों के बावजूद कश्मीर से पलायन न करने वाले कुछ पंडितों ने कहा कि अब फिर उम्मीद बँधी है कि यहाँ मंदिरों के बंद किवाड़ खुलेंगे, मंदिर भी उसी तरह आजाद होंगे जिस तरह से हम लोग अनुच्छेद 370 से आजाद हुए हैं।

जानकारी के मुताबिक 1989 में पहली बार उग्र इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ ने मंदिर पर हमला बोला था। इसके बाद 24 फरवरी 1990, 13 अप्रैल 1991 और फिर 8 मई 1992 को इस मंदिर पर हमले हुए। इस्लामिक कट्टरपंथियों ने मंदिर में से भगवान श्री राम और माता सीता की प्रतिमाओं को खंडित कर झेलम में फेंक दिया गया। यज्ञशाला बर्बाद कर दी गई और लाइब्रेरी भी जला दी गई। मंदिर के पास हिंदुओं के सात मकानों को भी आतंकियों ने ध्वस्त कर दिया। इसके बाद मंदिर वीरान हो गया और परिसंपत्तियों पर भूमाफिया की नजर पड़ गई।

कश्मीर से पलायन न करने वालों में शामिल चुन्नी लाल हिंदू वेलफेयर सोसायटी के सचिव हैं। उन्होंने कहा, “आज जब मैंने टीवी पर खबर सुनी कि कश्मीर में टूटे मंदिरों का सर्वे होगा तो मैं खुद को रोक नहीं पाया और यहाँ चला आया। यहाँ मूर्तियाँ थीं, जिन्हें आतंकियों ने झेलम दरिया में फेंक दिया। सैकड़ों धार्मिक पांडुलिपियाँ थीं, जो जला दीं। आज तो मंदिर में आने का रास्ता तक आसानी से नजर नहीं आता।”

स्थानीय कश्मीरी पंडित चुन्नी लाल कौल ने कहा कि श्रीनगर में करफियाली मुहल्ले में रघुनाथ मंदिर में 30 साल पहले दिन में नहीं, बल्कि रात को चहल-पहल होती थी। यह मंदिर जम्मू के रघुनाथ मंदिर से ज्यादा भव्य था। खैर, आज फिर उम्मीद बँधी है कि यहाँ जल्द जय श्रीराम का जयघोष होगा।

गौरतलब है कि कश्मीर में धर्म के अंधे जिहादी तत्व जब भी मौका मिलता रहा है, मंदिरों को निशाना बनाते रहे हैं। पाकिस्तान में भुट्टो को फाँसी हुई हो या फिर जिया उल हक की मौत, पाक समर्थक तत्वों ने मंदिरों को तोड़ा। वर्ष 1986 में कश्मीर में कई मंदिरों को जलाया गया। वर्ष 1989 में जब आतंकवाद ने कश्मीर में पाँव जमाए तो जिहादी तत्व और कट्टरपंथियों की भीड़ हमेशा मंदिर में घुसकर लूटपाट करती। अधिकांश मंदिरों की जमीन पर कब्जा हो गया।

मैं उसे अच्छे से जानती हूँ… वह किसी के साथ न्याय नहीं कर सकता: मुंबई के CP परम बीर सिंह पर साध्वी प्रज्ञा

सुशांत सिंह राजपूत के मौत के मामले में विवादों में घिरे मुंबई के पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह पर भोपाल से बीजेपी की सांसद साध्वी सिंह ने भी हिरासत के दौरान प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। साथ ही कंगना रनौत का समर्थन करते हुए कहा है कि महाराष्ट्र सरकार उन्हें जान-बूझकर परेशान कर रही। साध्वी ने इसे कॉन्ग्रेस की साजिश करार दिया।

सांसद साध्वी प्रज्ञा ने कहा, “जब मेरे ऊपर पुलिस ने अत्याचार किए थे तो परम बीर सिंह वरिष्ठ अधिकारी थे। उसने मुझ पर न जाने कितने अत्याचार किए और मुझे प्रताड़ित किया था। मैं दावे के साथ कह सकती हूँ कि उस पर लगाए गए आरोप गलत नहीं हो सकते हैं। मैं परम बीर सिंह को बहुत अच्छे से जानती हूँ। उसने जिस तरह मुझे पर अत्याचार किया था, वह किसी के साथ न्याय नहीं कर सकता।”

उन्होंने कंगना रनौत के दफ्तर में तोड़फोड़ को बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा कि इस पूरी साज़िश के पीछे कॉन्ग्रेस का हाथ है। कॉन्ग्रेस की भूमिका महाराष्ट्र सरकार में भी अहम है इसलिए वह एक महिला का अपमान कर रहे हैं। किसी पर भी बिना अपराध किए कार्रवाई करना नाइंसाफी है, ऐसा नहीं होना चाहिए। 

भाजपा सांसद ने शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की सराहना भी की और कहा कि साल 2008 के आस-पास मेरे संघर्ष के दिनों में बाल ठाकरे ने मेरी बहुत मदद की थी। मेरा मानना है कि भारत में किसी नारी का अपमान नहीं होना चाहिए, एक नारी का सम्मान भारत की संस्कृति है। शिवसेना भी इस संस्कृति में भरोसा रखती थी, लेकिन कॉन्ग्रेस के प्रभाव में उसका नज़रिया बदला है। 

जी न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया था कि कथित ‘भगवा आतंक मामले’ में भूमिका जबरदस्ती कबूल करने के लिए मुंबई एटीएस द्वारा उन पर काफी अत्याचार किया गया था। मुंबई एटीएस के सदस्यों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए साध्वी प्रज्ञा ने खुलासा किया था कि परम बीर सिंह सहित एटीएस अधिकारियों ने उन्हें अवैध हिरासत में रखा था और 13 दिनों तक उन्हें प्रताड़ित किया था।

साध्वी प्रज्ञा ने आरोप लगाया था कि खानविलकर, परम बीर सिंह और (दिवंगत) हेमंत करकरे, सभी ने उन्हें प्रताड़ित किया। साध्वी ने 2008 में एक न्यायाधीश के समक्ष बताया था, “धमाके में शामिल होने की बात कबूल नहीं करने पर एटीएस के अधिकारियों ने मुझे कपड़ा उतारने और उल्टा लटकाने की धमकी दी।”

हाल ही में मुंबई पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह पिछले कुछ हफ्तों में सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर आलोचना का केंद्र बिंदु बन गए थे। इसकी एक बड़ी वजह सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में की गई जाँच को लेकर मुंबई पुलिस का ढुलमुल रवैया रहा है। यह विवाद मुंबई पुलिस प्रमुख परम बीर सिंह द्वारा किए गए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद शुरू हुआ। 

परम बीर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा था कि मुंबई पुलिस के संज्ञान में आया है कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित थे और इसका इलाज चल रहा था। मुंबई पुलिस कमिश्नर ने दावा किया था कि सुशांत सिंह राजपूत ने अपनी मौत से पहले ‘दर्द रहित मौत’, ‘सिज़ोफ्रेनिया’ (schizophrenia) और ‘बाइपोलर डिसऑर्डर’ जैसे शब्द सर्च किए थे। हालाँकि परम बीर सिंह के दावों को जल्द ही पलट दिया गया। टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट में बताया गया कि अभिनेता ने अपनी मौत से पहले हिमाचल प्रदेश, केरल और कूर्ग में संपत्ति, फॉर्म आदि सर्च किया था, जो कि परम बीर सिंह के दावों के विपरीत था।

कंगना-रिया और टीवी मीडिया सर्कस बनाम सत्ता का नंगा नाच: अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on Riya-Kangana case, TV media vs crazy State

सुशांत, रिया और कंगना के मुद्दे को लेकर जिस तरह की रिपोर्टिंग हुई है, उस पर काफी लोगों ने हैरानी जताई। कुछ लोगों ने कटाक्ष लिखे और कुछ लोगों ने ट्रोल किया। जिनका चैनल खुद यही काम कर रहा है, उन लोगों ने भी मजाक उड़ाने की कोशिश की कि यह सड़क छाप एटीट्यूड है। यह कुछ भी हो सकता है, लेकिन पत्रकारिता नहीं। यहाँ पर राहुल कंवल की बात हो रही है।

कुछ लोगों का कहना है कि मीडिया ट्रायल हो रहा है। कुछ हद तक कहा भी जा सकता है, लेकिन यदि मीडिया में इस तरह से आवाज नहीं उठाई जाती तो सुशांत का केस आत्महत्या का केस बनकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता, क्योंकि 60 दिनों तक FIR भी नहीं लिखी गई थी। जनमानस के दवाब के बाद ही केस सीबीआई को दिया गया और नए-नए एंगल सामने आ रहे हैं।

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