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शिवसेना को नहीं भाया जैन मंदिर खोलने का आदेश, कहा- यस माय लॉर्ड कह हर फैसला कबूल करना पड़ता है

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को (21 अगस्त 2020) मुंबई के तीन जैन मंदिरों को खोलने और पर्युषण पूजा की सशर्त अनुमति दी थी। शिवसेना को यह फैसला रास नहीं आया है। पार्टी मुखपत्र सामना में इसकी आलोचना करते हुए कहा गया है कि अदालत का हर फैसला ‘यस माय लॉर्ड’ कह कर कबूल करना पड़ता है।

फैसले की निंदा करते हुए महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ शिवसेना ने कहा कि कोरोना के भय के कारण सर्वोच्च न्यायालय का कामकाज भी हमेशा की तरह खुले ढंग से नहीं चल रहा। लेकिन उसी न्यायालय को ऐसा लगता है कि सरकार को अन्य सभी पाबंदियों को शिथिल कर देना चाहिए। 

शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में कहा गया है, “कोरोना का डर न होता तो न्यायालय भी ‘वर्चुअल’ पद्धति से नहीं चल रहे होते। मगर हमें न्यायालय का हर निर्णय, ‘यस माय लॉर्ड…, ‘जी महाराज’ कहते हुए गर्दन झुकाकर ही स्वीकार करना पड़ता है। उस पर इस निर्णय का स्वरूप धार्मिक होने के कारण इसका सम्मान करना ही होगा।”

देश की सर्वोच्च ने पर्युषण पूजा के लिए 3 जैन मंदिरों को खोलने की अनुमति देते हुए महाराष्ट्र सरकार को फटकार भी लगाई थी। अदालत ने कहा था कि जब बाकी आर्थिक गतिविधियाँ चल रही हैं तो कोरोना का डर नहीं है, लेकिन धार्मिक स्थलों को खोलते वक्त कोरोना क्यों याद आता है। इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रबंधन को कहा कि वो अंडरटेकिंग दें कि कोरोना को लेकर SoP और सरकार की गाइडलाइन का पालन किया जाएगा।

मुंबई में पर्युषण पर्व के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दादर, बाइकूला और चेंबूर स्थित 3 जैन मंदिरों को 22 और 23 अगस्त को खोलने की सशर्त इजाजत दी थी। इसी को लेकर शिवसेना ने सामना में लिखा है। इसमें कहा गया कि कोरोना कोई राज्य अथवा किसी सरकार द्वारा नहीं लाया गया है। इसमें राजनीति का ऐसा कोई संबंध होता तो देश के गृहमंत्री अमित भाई शाह व केंद्रीय कैबिनेट के पाँच-छह मंत्रियों को ‘कोरोना’ के संक्रमण के कारण अस्पताल नहीं जाना पड़ा होता।

संपादकीय में आगे कहा गया, “हम खुद मंदिर, व्यायामशाला खोल दिए जाएँ, ऐसा मत रखते हैं। मंदिर की भी एक अर्थनीति होती ही है और उस पर भी कई लोगों की आजीविका निर्भर है। भजन-प्रवचन करने वाले महाराज तो हैं ही, लेकिन उनके साथ-साथ पेटी, तबला बजाने वाले, कीर्तन गानेवाले भी हैं। कोई भी राज्य लोगों की बदहाली नहीं देख सकता है। यह सब खोल दिए जाएँ और लोग काम-धंधे पर जा सकें, यह सभी की चाहत है। मंदिर जनता का श्रद्धास्थल है और मंदिर में बैठे भगवान दुर्बलों को सहारा देते हैं। यह हर किसी के विश्वास पर निर्भर है। करोड़ों लोगों की आजीविका का प्रश्न मंदिर व अन्य प्रार्थनास्थल हल करते हैं। इसलिए मंदिरों का मुद्दा भी वित्तीय कारोबार का ही है माय लॉर्ड। भूल चूक माफ!”

‘रिया चकवर्ती के 2 डैडी ने मिलकर रची सुशांत की हत्या की साजिश, वो डिप्रेशन में कभी नहीं था’

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए सीबीआई लगातार पूछताछ कर साक्ष्य जुटा रही है। दूसरी ओर, सुशांत और रिया चकवर्ती को जानने वाले लोग भी लगातार चौंकाने वाले खुलासे कर रहे हैं। इनसे रिया की भूमिका और संदिग्ध होती जा रही है।

इसी कड़ी में सुशांत के जिम पाटर्नर सुनील शुक्ला ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके मुताबिक रिया चकवर्ती के ‘दो डैडी’ ने मिलकर सुशांत की हत्या की साजिश रची। उनके अनुसार सुशांत डिप्रेशन में नहीं थे और रिया उन्हें अपने पिता द्वारा दी गई दवाइयॉं दे रही थीं।

सुनील शुक्ला ने कहा, “सुशांत सिंह राजपूत की हत्या की साजिश ‘दो डैडी’ द्वारा की गई थी। इसमें एक रिया चक्रवर्ती के जैविक पिता इंद्रजीत चकवर्ती और दूसरे उनके ‘शुगर डैडी’ महेश भट्ट हैं।”

शुक्ला ने दावा किया रिया ने अपने पिता के द्वारा दी गई दवाएँ सुशांत को दी और रिया के घर छोड़कर जाने के बाद घर के किस व्यक्ति ने उसे दवा दी? घर में सुशांत के अलावा उनके फ्लैटमेट सिद्धार्थ पिठानी, कुक नीरज और मैनेजर दीपेश सावंत था।

सुशांत सिंह राजपूत के बारे में बात करते हुए सुनील शुक्ला ने दावा किया है कि उनकी मानसिक क्षमता में कोई कमी नहीं थी। सुनील के अनुसार, वह उनसे जिम में मिलते थे और वर्कआउट करते थे। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि वह मल्टीविटामिन सप्लीमेंट ले रहे थे।

इसके अलावा दूसरा एंगल जो सुशांत केस में पता चला है वो यह कि रिया ने स्पर्श उपचार के नाम पर एक्टर की मुलाकात मोहन जोशी से करवाई थी। वही, मोहन जोशी जिन्होंने हाल में एक वीडियो के जरिए सुशांत को डिप्रेशन से ठीक करने की बात भी कही थी। मोहन के मुताबिक, रिया ने उन्हें संपर्क किया था।

मनोज जोशी की मानें तो साल 2019 में रिया ने उन्हें ये बताया कि सुशांत डिप्रेशन में हैं। इसके बाद उन्हें ललित होटल के पीछे वाटर स्टोन रिसॉर्ट में बुलाया गया। जहाँ उन्होंने एक्टर का 25 मिनट इलाज किया और अगले ही दिन उन्हें यह कह दिया गया कि वह 90% ठीक हो गए हैं। साथ ही बहुत दिन बाद हँसे भी हैं।

अब मनोज जोशी के इन्हीं दावों के बाद सीबीआई टीम रिसॉर्ट पहुँची। बताया जा रहा है कि सीबीआई ने पूछताछ के लिए मनोज जोशी को भी समन भेजा है।

गौरतलब है कि एक्टर की मौत के मामले में जाँच के दौरान सीबीआई ने रिपोर्ट का विश्लेषण करने और स्वास्थ्य-कानूनी राय देने के लिए एम्स फॉरेंसिक टीम की मदद भी माँगी है। अधिकारियों ने सुशांत के मैनेजर सैमुअल मिरांडा और बावर्ची नीरज के साथ बांद्रा में दिवंगत अभिनेता के घर का दोबारा से दौरा भी किया ताकि सीन री-क्रिएट हो सके। इसके अलावा सिद्धार्थ पिठानी और नीरज के बयान लिए गए हैं, जो पहले मैच नहीं हुए थे। इसलिए हो सकता है आगे इन्हें समन फिर भेजा जाए।

NDTV ही है असली ‘गोदी मीडिया’… कॉन्ग्रेस ने आज डिक्लियर कर दिया: सोशल मीडिया पर लोग माँग रहे सफाई

कॉन्ग्रेस पार्टी की मीटिंग हुई। आंतरिक लोकतंत्र के लिए। मीटिंग में युवा राहुल गाँधी ने कह दिया कि जो लोग लेटरबाजी कर रहे थे वो सब BJP से मिले हुए हैं। युवा पूर्व अध्यक्ष की बात पर वरिष्ठ नेता लोग भड़क गए। कपिल सिब्बल ने बात सार्वजनिक कर दी। गुलाम नबी आजाद ने तो इस्तीफे की ही पेशकश कर दी।

देश की सबसे पुरानी पार्टी में इतनी उठा-पटक हो और समाचार चैनल वाले बैठे रहें, यह संभव नहीं। NDTV भी बैठा नहीं रह पाया। हालाँकि कॉन्ग्रेस के मामले में पहले वो फूँक-फूक कर कदम रखता था, आज स्लिप कर गया। स्लिप कर गया तो खामियाजा भी उठाना पड़ा।

NDTV ने एक ट्वीट किया, सूत्रों के हवाले से। पहले ये ट्वीट देखिए।

यह ट्वीट पत्रकारिता के एकमात्र स्तंभ NDTV के गले की फाँस बन गया। कॉन्ग्रेसी नेता से लेकर कॉन्ग्रेसी खेमे के तथाकथित पत्रकार लोग भी NDTV पर टूट पड़े। जो अब तक BJP को घेरने के लिए गोदी मीडिया जैसे विशेषणों का प्रयोग करते थे, खुद उनके माथे पर उनके ही समर्थक ‘गोदी मीडिया’ गोद गए।

कॉन्ग्रेस के नेता तक NDTV को फेक न्यूज फैलाने वाला सोर्स बताने लगे।

फिर कूदे तथाकथित पत्रकार, जो अब तक NDTV के साथ मिलकर गोदी मीडिया-गोदी मीडिया खेल रहे थे। एक दिन भी बर्दाश्त नहीं कर सके गाँधी-भक्ति के खिलाफ, जो सुबह-शाम भक्त की माला जप कर दूसरों को संबोधित करते हैं।

चोट दिल पर लगी है, बड़ी जोर लगी है। इसलिए एक कॉन्ग्रेसी ने तो NDTV को गोदी मीडिया कहने से ही इनकार कर दिया। उसने नया नाम दिया है – झाड़ू मीडिया।

गाँधी जैसे मिलते-जुलते नाम वाले पाँधी ने तो कमाल ही कर दिया। परोक्ष रूप से उन्होंने NDTV पर बिकाऊ होने का आरोप तक लगा डाला।

45 साल की गुलामी सिर्फ इसलिए… जनेऊधारियों के साथ जाने से यही होता है: गुलाम नबी पर ओवैसी का तंज

राहुल गाँधी द्वारा कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर भाजपा से मिलीभगत होने के आरोप के बाद कॉन्ग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने अपना इस्तीफा देने तक की बात कही। इसके बाद AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने गुलाम नबी आजाद पर कटाक्ष करते हुए ट्वीट किया है।

ओवैसी ने अपने ट्वीट में लिखा, “आदर्श न्याय, गुलाम नबी साहब मुझ पर यही आरोप लगाते थे। अब आप पर भी यही आरोप लगा है। 45 साल की गुलामी सिर्फ इसलिए? अब ये साबित हो गया है कि जनेऊधारी लीडरशिप का विरोध करने वाला बी-टीम ही कहलाया जाएगा। मुझे उम्मीद है कि मुस्लिम समुदाय के लोग समझेंगे कि कॉन्ग्रेस के साथ रहने से क्या होता है।”

दरअसल आज, सोमवार सुबह ही राहुल गाँधी ने कॉन्ग्रेस CWC की बैठक में कथित तौर पर आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में बदलाव की माँग करने के लिए लिखे गए इस इस पत्र के पीछे कॉन्ग्रेस के नेताओं का भाजपा से साँठ-गाँठ है। राहुल गाँधी के इस बयान से कपिल सिब्बल और गुलाम नबी आजाद ने खुलकर अपनी नाराजगी प्रकट की है। गुलाम नबी आजाद ने इस्तीफे तक की बात कह डाली।

इस पर कपिल सिब्बल ने ट्विटर के जरिए कॉन्ग्रेस के प्रति अपने सेवा और भक्ति के बारे में ट्विटर पर लिखा है, “राहुल गाँधी कहते हैं कि हमारी बीजेपी के साथ साँठ-गाँठ है, राजस्थान हाईकोर्ट में पार्टी को सफलता दिलाई। मणिपुर में बीजेपी के खिलाफ पूरी ताकत से पार्टी का बचाव किया। पिछले 30 सालों में बीजेपी के पक्ष में एक भी बयान नहीं दिया। फिर भी हम पर बीजेपी से साँठ-गाँठ का आरोप लग रहा है।”

वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने CWC की बैठक के दौरान ही यह ट्वीट किया है। लेकिन, इसके कुछ ही देर बाद एक और ट्वीट में कपिल सिब्बल ने लिखा कि उन्होंने राहुल गाँधी से इस बारे में ग़लतफ़हमी को दूर कर लिया है और वह ट्वीट वापस लेते हैं।

कॉन्ग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कार्यकारिणी की बैठक में कहा है कि अगर राहुल गाँधी इन आरोपों को प्रमाणित कर सकते हैं तो वे इस्तीफा दे देंगे। गौरतलब है कि कपिल सिब्बल और गुलाम नबी आजाद उन 23 नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी से पहले पत्र लिखा था।

इस पत्र में कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर सवाल खड़े किए गए और कहा गया कि इस वक्त एक ऐसे अध्यक्ष की जरूरत है जो स्थायी नेतृत्व दे सके। CWC बैठक की शुरुआत में पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की इच्छा जाहिर की। उन्होंने कहा कि मुझे रिप्लेस करने की प्रक्रिया शुरू करें।

सोमवार (अगस्त 24, 2020) को हुई इस बैठक में इस पत्र को लेकर काफी विवाद हुआ है। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की पेशकश की। हालाँकि, कई वरिष्ठ नेताओं ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। साथ ही, यह पत्र लिखने वालों पर राहुल गाँधी ने अपना गुस्सा व्यक्त किया और इसकी टाइमिंग पर सवाल खड़े किए।

क्या अहमदनगर के बाबाभाई पठान ने 2 ‘अनाथ’ लड़कियों को ‘गोद’ ले उनकी हिंदू रीति से शादी करवाई?

हाल ही में, सोशल मीडिया पर संप्रदाय विशेष के एक व्यक्ति के दो लड़कियों को ‘गोद लेने’ और बाद में हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार उनकी शादी कराने की एक दिल को छू लेने वाली कहानी काफी शेयर की गई।

मीडिया में कई रिपोर्टों के मुताबिक, महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के रहने वाले बाबाभाई पठान ने दो अनाथ बहनों को ‘गोद लिया’ और फिर हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार अपने खर्च से उनकी शादी की।

इसी कहानी को आईपीएस अधिकारी दीपांशु काबरा ने भी शेयर किया। उन्होंने बाबाभाई पठान की प्रशंसा करते हुए ट्वीट किया, “मिलिए बाबाभाई पठान से। अहमदनगर, महाराष्ट्र के रहने वाले बाबाभाई ने 2 अनाथ बच्चियों को गोद लिया और हिन्दू रीति-रिवाजों के अनुसार खुद उनकी शादी करवाई तथा एकता और मानवता की अद्वितीय मिसाल कायम की। उनके जैसे लोगों के कारण ही इंसानियत पर करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास अटल है।”

मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि संप्रदाय विशेष के व्यक्ति ने अनाथ लड़कियों को परोपकारी भाव से अपनाया और हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार उनसे शादी की। हालाँकि सच्चाई मीडिया रिपोर्ट के विपरीत है। सच्चाई यह है कि दुल्हनों को न तो गोद लिया गया, न ही अनाथ और उनकी माँ अभी भी जीवित हैं।

लोकप्रिय मराठी ब्लॉगर और स्तंभकार समीर गायकवाड़ के अनुसार, बाबाभाई पठान दुल्हन की माँ के राखी के भाई हैं और उन्होंने अहमदनगर के बोधेगाँव में भुसारे परिवार की दो बेटियों की शादी में मामा की रस्में निभाईं। दुल्हनों की माँ हर साल बाबाभाई पठान को राखी बाँधती है, क्योंकि उनका अपना कोई सगा भाई नहीं है।

इस सच्चाई के सामने आने के बाद कि लड़कियों को बाबभाई पठान द्वारा ‘अनाथ’ के रूप में नहीं अपनाया गया था, जैसा कि मीडिया में बताया जा रहा है और लड़कियों की माँ द्वारा शादियों का आयोजन किया गया था, आईपीएस काबरा ने इस घटना पर स्पष्टीकरण ट्वीट जारी करके खुद को सही किया।

अपने पिछले ट्वीट को लेकर स्पष्टीकरण देते हुए, IPS काबरा ने कहा कि उन्हें मीडिया सोर्स से अपडेट मिला है कि दोनों बहनें अनाथ नहीं थीं और उनकी माँ हर साल बाबभाई पठान को राखी बाँधती थीं, क्योंकि उनका कोई सगा भाई नहीं था।

बात से नहीं माना चीन तो सैन्य विकल्प पर विचार: सीमा पर तनातनी के बीच CDS जनरल बिपिन रावत

सीमा पर भारत और चीन के बीच जारी तनातनी के बीच चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत ने बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा है कि यदि बातचीत की मेज पर चीन के साथ समाधान नहीं निकला तो सैन्य विकल्प भी मौजूद हैं।

उन्होंने कहा ऐसा केवल उस स्थिति में होगा अगर कूटनीतिक स्तर पर जारी वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकलता है। उन्होंने कहा कि अगर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को लेकर चीन के साथ बातचीत असफल रहती है तो सैन्य विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

पिछले 2 महीने के दौरान भारत और चीन के बीच कई बार कूटनीतिक स्तर पर बात हुई लेकिन अभी तक कोई ठोस परिणाम हासिल नहीं हुए हैं। अप्रैल और मई महीने से ही फिंगर एरिया, गलवान घाटी, हॉट स्प्रिंग और कुंगरंग समेत कई इलाक़ों में गतिरोध जारी है। जनरल रावत ने कहा, 

“लद्दाख और आसपास के क्षेत्र में चीनी सेना द्वारा किए जा रहे अतिक्रमण का सामना करने के लिए हमारे पास सैन्य विकल्प मौजूद हैं। लेकिन इस विकल्प पर विचार सिर्फ तब किया जाएगा जब कूटनीतिक और राजनीतिक स्तर पर जारी वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकलेगा।” हालॉंकि जनरल रावत ने सैन्य विकल्पों पर विस्तार से चर्चा करने से इनकार कर दिया।

अप्रैल और मई से लेकर अब तक भारत और चीन के बीच कूटनीतिक स्तर पर कई बार वार्ता हो चुकी है। पिछले हफ्ते ही दोनों देशों के बीच विवाद को सुलझाने के लिए वार्ता हुई थी। इसमें पाँच लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की वार्ता भी शामिल है। चीनी सेना जुलाई के दौरान एलएसी के आसपास कई क्षेत्रो में दाख़िल हो गई थी। जिसके बाद दोनों देशों की सेना के बीच काफी विवाद हुआ।

ख़बरों के मुताबिक़ चीनी सेना खुद इस वार्ता पर कोई ठोस प्रस्ताव स्वीकार करने के पक्ष में नहीं थीं। इस पर भारतीय सेना ने स्पष्ट कर दिया था कि एलएसी पर उन्हें किसी भी तरह का बदलाव स्वीकार नहीं है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को फिंगर क्षेत्र छोड़ कर पीछे हटना होगा लेकिन वह क्षेत्र छोड़ने को तैयार नहीं थे। नतीजतन सैन्य कमांडर्स ने एलएसी पर मौजूद कमांडिंग अधिकारियों को किसी भी तरह के हालातों से निपटने के लिए तैयार रहने का आदेश दिया है।  

इसके अलावा भारतीय सेना ने सीमा पर मौजूद जवानों को आधुनिक हथियारों के साथ तैयार रहने के लिए कहा है। 15 जून 2020 को दोनों देशों की सीमाओं के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद से सीमा पर हालात संवेदनशील बने हुए हैं। दोनों देशों की सीमाओं के बीच हुई इस मुठभेड़ में भारतीय सेना के 20 जवान बलिदान हो गए थे। वहीं चीनी सेना के 40 से अधिक जवान मारे गए थे। लेकिन चीन की सरकार ने इस बात की पुष्टि कभी नहीं की।     

शेखर गुप्ता ने आनंद रंगनाथन, संजीव सान्याल और संजय दीक्षित पर ब्लूम्सबरी को धमकाने का झूठा आरोप लगाया

इस्लामी कट्टरपंथियों और वामपंथी लॉबी के दबाव में आकर ब्लूम्सबरी पब्लिकेशन ने दिल्ली दंगों पर किताब ‘दिल्ली रायट्स 2020: द अनटोल्ड स्टोरी’ का प्रकाशन वापस ले लिया। इस पर जारी बहस के बीच ‘द प्रिंट’ के संस्थापक शेखर गुप्ता ने लेखकों संजीव सान्याल, डॉ. आनंद रंगनाथन और संजय दीक्षित के खिलाफ झूठे आरोप लगाए हैं।

अपने वीडियो शो ‘Cut The Clutter’ में, गुप्ता ने दिल्ली दंगा 2020 पर आधारित पुस्तक प्रकाशित न करने के लिए ब्लूम्सबरी पर वामपंथियों द्वारा डाले गए दबाव पर लीपापोती तो किया ही, साथ ही लेखकों संजीव सान्याल, डॉ. आनंद रंगनाथन और संजय दीक्षित पर ब्लूम्सबरी को धमकी देने का दोष मढ़ा।

शेखर गुप्ता ने अपने वीडियो शो में उन लोगों, ‘सेक्युलर-लिबरलों’ का नाम नहीं लेते हैं, जिन्होंने वास्तव में ब्लूम्सबरी पर उक्त पुस्तक को डी-प्लेटफॉर्म करने के लिए दबाव डाला था।

बता दें कि शेखर गुप्ता, द एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के प्रोसिडेंट भी हैं। उन्होंने वीडियो में आरोप लगाया कि ब्लूम्सबरी द्वारा दिल्ली दंगा 2020 पर आधारित पुस्तक के प्रकाशन को रद्द करने का निर्णय संजीव सान्याल, डॉ. आनंद रंगनाथन और संजय दीक्षित जैसे लेखकों की धमकी के बाद लिया गया था। इसमें कहा गया कि इन लेखकों ने पब्लिकेशन हाउस से अपनी कई पुस्तकें प्रकाशित करवाई हैं और इन्होंने ऑर्गेनाइजेशन के साथ अपने संबंध तोड़ने की धमकी दी है।

सच्चाई यह है कि प्रकाशक ब्लूम्सबरी इंडिया द्वारा मोनिका अरोड़ा, सोनाली चितलकर और प्रेरणा मल्होत्रा की पुस्तक ‘Delhi Riots 2020: The Untold Story’ के प्रकाशन को वापस लेने के मनमाने फैसले पर संजीव सान्याल, डॉ. आनंद रंगनाथन, संजय दीक्षित, शेफाली वैद्य और कई अन्य लेखकों ने ट्विटर पर इसकी निंदा की।

ब्लूम्सबरी के गैर पेशेवर रवैए की वजह से कई लेखकों ने यह भी घोषणा की कि वे अब एक ऐसे संगठन के साथ नहीं जुड़े रहेंगे, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने में सक्रिय रूप से भाग लेता है।

शेखर गुप्ता के वीडियो शो में लेखकों के जिस ट्वीट को ब्लूम्सबरी के लिए ‘धमकी’ बताया जा रहा है, वह दिल्ली दंगों से जुड़ी किताब को प्रकाशित न करने के फैसले के फलस्वरूप उभरा विरोध था। वह ट्वीट ब्लूम्सबरी द्वारा किताब के प्रकाशन के वापस लेने के फैसले के बाद किया गया था।

हालाँकि, गुप्ता ने पब्लिकेशन हाउस के अस्वीकार्य व्यवहार के बारे में लेखकों द्वारा की गई शिकायतों को गलत ठहराया और उन्हें गलत तरीके से प्रस्तुत किया। उन्होंने दावा किया कि ब्लूम्सबरी ने इन लेखकों द्वारा पोस्ट किए गए ट्वीट के बाद पुस्तक के प्रकाशन को वापस ले लिया।

शेखर गुप्ता की धूर्तता को लेकर संजीव सान्याल ने उन्हें निशाने पर लिया। संजीव सान्याल ने ‘द प्रिंट’ के फाउंडर को उनको और डॉ. आनंद रंगनाथन के ट्वीट को गलत तरीके से पेश करने के लिए स्पष्टीकरण माँगा। उन्होंने कहा कि उनके शो में जो दिखाया गया, इसके विपरीत वह और डॉ. रंगनाथन फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन की वकालत कर रहे थे और पब्लिकेशन हाउस द्वारा पुस्तक के प्रकाशन को रद्द करने के फैसले का विरोध कर रहे हैं।

डॉ. आनंद रंगनाथन ने भी शेखर गुप्ता को उनके और संजीव सान्याल के बारे में झूठ बोलने को लेकर तीखे आलोचनात्मक ट्वीट किए। रंगनाथन ने कहा कि गुप्ता अपने पेशे के लिए शर्मिंदगी हैं और ब्लूम्सबरी द्वारा बुक रद्द करने पर उनका विश्लेषण अपरिपक्व और झूठ से भरा था। उन्होंने शेखर गुप्ता पर उनके और संजय सान्याल के ट्वीट्स को गलत तरीके से पेश करने के लिए मुकदमा करने की धमकी भी दी। 

गुप्ता और द प्रिंट द्वारा की गई धूर्तता के पकड़े जाने के तुरंत बाद, YouTube पर पोस्ट किए गए वीडियो को ‘प्राइवेट’ कर दिया गया, ताकि यूजर्स इसे न देख सकें।

गौरतलब है कि अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा, सोनाली चितलकर और प्रेरणा मल्होत्रा की पुस्तक ‘Delhi Riots 2020: The Untold Story’ का प्रकाशन ब्लूम्सबरी ने वापस ले लिया है। प्रकाशन संस्थान ने इस्लामी कट्टरपंथियों और वामपंथी लॉबी के दबाव में आकर ऐसा किया।

30 साल तक BJP के समर्थन में एक शब्द नहीं, आज राहुल गाँधी मिले होने का आरोप लगा रहे: कपिल सिब्बल का दर्द

कॉन्ग्रेस कार्यकारिणी की मीटिंग के दौरान राहुल गाँधी पार्टी के स्थाई अध्यक्ष बनाए जाने की माँग वाले पत्र पर बेहद नाराज नजर आ रहे हैं। शायद यही वजह है कि अब कॉन्ग्रेस पार्टी के ही वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी के गुस्से का शिकार हो रहे हैं।

राहुल गाँधी ने आरोप लगाया है कि इस पत्र के पीछे मौजूद कॉन्ग्रेस नेताओं की भाजपा से साँठ-गाँठ है। राहुल गाँधी के इस बयान से कपिल सिब्बल और गुलाम नबी आजाद ने खुलकर अपनी नाराजगी प्रकट की है। गुलाम नबी आजाद ने इस्तीफे तक की बात कह डाली है।

कपिल सिब्बल ने ट्विटर के जरिए कॉन्ग्रेस के प्रति अपने सेवा और भक्ति के बारे में ट्विटर पर लिखा है, “राहुल गाँधी कहते हैं कि हमारी बीजेपी के साथ साँठ-गाँठ है, राजस्थान हाईकोर्ट में पार्टी को सफलता दिलाई। मणिपुर में बीजेपी के खिलाफ पूरी ताकत से पार्टी का बचाव किया। पिछले 30 सालों में बीजेपी के पक्ष में एक भी बयान नहीं दिया। फिर भी हम पर बीजेपी से साँठ-गाँठ का आरोप लग रहा है।”

वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने CWC की बैठक के दौरान ही यह ट्वीट किया है।

वहीं, कॉन्ग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कार्यकारिणी की बैठक में कहा है कि अगर राहुल गाँधी इन आरोपों को प्रमाणित कर सकते हैं तो वे इस्तीफा दे देंगे। गौरतलब है कि कपिल सिब्बल और गुलाम नबी आजाद उन 23 नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी से पहले पत्र लिखा था।

इस पत्र में कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर सवाल खड़े किए गए और कहा गया कि इस वक्त एक ऐसे अध्यक्ष की माँग है, जो पूर्ण रूप से कॉन्ग्रेस पार्टी को वक्त दे सके।

सोमवार (अगस्त 24, 2020) को हुई इस बैठक में इस पत्र को लेकर काफी विवाद हुआ है। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की पेशकश की। हालाँकि, कई वरिष्ठ नेताओं ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। साथ ही, यह पत्र लिखने वालों पर राहुल गाँधी ने अपना गुस्सा व्यक्त किया और इसकी टाइमिंग पर सवाल खड़े किए।

‘गाँधी ही हो कॉन्ग्रेस अध्यक्ष’: परिवार के लिए रॉबर्ट वाड्रा के चेले से लेकर दिग्विजय-कमलनाथ तक ने की बैटिंग

कॉन्ग्रेस कार्यसमिति की सोमवार (24 अगस्त 2020) को चल रही बैठक में सोनिया गॉंधी अंतरिम अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश कर चुकी हैं। राहुल गॉंधी दोबारा से अध्यक्ष की जिम्मेदारी सॅंभालने से इनकार कर रहे हैं। लेकिन पार्टी के नेता ‘परिवारवाद’ से मुक्ति नहीं चाहते हैं। या ये कहें कि उनके लिए कॉन्ग्रेस पार्टी का मतलब ही ‘परिवार’ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कार्यसमिति की बैठक सुबह करीब 11:20 पर शुरू हुई। इससे पहले पार्टी हेडक्वार्टर के बाहर अलग नजारे देखने को मिले। दिल्ली कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता व रॉबर्ट वाड्रा का स्वघोषित ‘चेला’ जगदीश शर्मा हेडक्वार्टर के बाहर कई लोगों के साथ गाँधी परिवार के ही किसी सदस्य को पार्टी अध्यक्ष बनाने के लिए नारेबाजी करता दिखा।

जगदीश शर्मा ने कहा, “हमें केवल गाँधी परिवार का ही अध्यक्ष चाहिए। अगर कोई बाहरी अध्यक्ष बन गया तो पार्टी नष्ट हो जाएगी या टूट जाएगी।”

उधर, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह ने भी सिर्फ़ गाँधी परिवार को ही अध्यक्ष पद पर देखने की इच्छा जताई। कमलनाथ ने ट्वीट करते हुए जहाँ ये बताया कि उन्हें इंदिरा गाँधी, संजय गाँधी, राजीव गाँधी और राहुल गाँधी के साथ काम करने का सौभाग्य मिला। इसलिए अब वह आगे भी केवल गाँधी परिवार को ही अध्यक्ष पद पर आसीन देखना चाहते हैं।

वहीं, दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया, “सोनिया गाँधी का नेतृत्व सर्वमान्य है। यदि सोनिया गाँधी कॉन्ग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ना ही चाहती हैं तो राहुल गाँधी को अपनी जिद छोड़कर अध्यक्ष का पद स्वीकार कर लेना चाहिए। देश का आम कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता और किसी को स्वीकार नहीं करेगा।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आज कार्यसमिति बैठक आरंभ होने के बाद सोनिया गाँधी ने पार्टी नेताओं के समक्ष कहा कि वह अब अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर काम नहीं करना चाहतीं। इसके बाद मनमोहन सिंह और कुछ नेताओं ने उन्हें आग्रह किया कि वह पद पर बनी रहें।

इसके बाद राहुल गाँधी ने बैठक को संबोधित करते हुए पार्टी के दो खेमों में बँटने की बात पर अपनी नाराजगी जाहिर की। कहा जा रहा है कि उन्होंने हाल में सोनिया गाँधी को लिखे गए पत्र पर अपना गुस्सा व्यक्त किया और नेताओं पर भाजपा से साँठ-गाँठ का आरोप लगाया। इसके बाद गुलाम नबी आजाद ने कहा कि अगर भाजपा के साथ ऐसा कुछ साबित हो जाए तो वह पार्टी से इस्तीफा दे देंगे।

कैलाश पर्वत के इलाके में चीन कर रहा मिसाइलों की तैनाती, निर्माण कार्य भी हुआ पूरा: इंडिया टुडे की रिपोर्ट

चीन ने मानसरोवर कैलाश पर्वत के पास अपनी मिसाइलों को तैनात करने के लिए निर्माण कार्य पूरा कर लिया है। यह दावा इंडिया टुडे ने हालिया सैटेलाइट द्वारा ली गई तस्वीरों का हवाला देते हुए किया है।

रिपोर्ट का दावा है कि यह निर्माण कार्य इसी वर्ष अप्रैल में शुरू हुआ था, जिसे चीन ने भारत के क्षेत्रों को घेरने के लिहाज से प्रारंभ किया था। अब चीन हमारे उस क्षेत्र का भारी सैन्यकरण कर रहा है, जो बौद्धों और हिंदुओं दोनों के लिए आस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

रिपोर्ट में हालिया सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर दावा किया गया है कि इलाके में सेना की मूवमेंट शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि तस्वीरों में तिरपाल के कवर में HQ-9 SAM (Surface To Air Missile – SAM) सिस्टम देखा जा रहा है।

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साभार: इंडिया टुडे

इसके अलावा जिस पैटर्न के साथ इनकी तैनाती की जा रही है, वह चार से आठ SAB ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर और तीन रडार कैंपों के साथ TELs के लिए कुल चार प्लेटफॉर्मों की ओर इशारा करता है।

ये मिसाइलें भारतीय सीमा से मात्र 90 किलोमीटर दूर तैनात की जाएँगी। ये मध्यम रेंज की मिसाइलें होंगी। इस साइट के जरिए चीन का उद्देश्य यह होगा कि यदि उन्हें आने वाले समय में इसकी जरूरत पड़े तो वह इसे जल्द से जल्द इस्तेमाल कर पाए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने यहाँ पहले तीर्थयात्रियों के बहाने एक छोटा सा अस्थाई रहवास जैसा निर्माण करवाया था और फिर तिब्बतियों के घरों को बुनियादी सुविधाओं के नाम पर अपने कब्जे में लेकर वहाँ होटल व अन्य सुविधाओं को खड़ा करके चकित कर दिया था।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट यह भी बताती है कि पहले एक छोटे इलाके को ही वहाँ की पुलिस ने निष्क्रिय किया था। लेकिन अब इसके आस-पास बने कई घरों और होटलों पर पूर्ण रूप से उनका कब्जा दिखाया गया है।

सैटेलाइट से मिली तस्वीरों से इस बात का खुलासा भी होता है कि चीन मानसरोवर झील के किनारे HT-233 रडार सिस्टम लगा रहा है, जिससे मिसाइल का फायर सिस्टम काम करता है। इसके अलावा टाइप 305बी, टाइप 120, टाइप 305ए, वाईएलसी-20 और डीडब्ल्यूएल-002 रडार सिस्टम भी लगाए जा रहे हैं। ये सभी टारगेट्स को ट्रैक कर उन्हें खत्म करने में मदद करते हैं।

कैलाश मानसरोवर की महत्ता और चीन की चालाकी

कैलाश मानसरोवर को लेकर हिंदुओं में काफी आस्था है। लोग यहाँ तीर्थयात्रा के लिहाज से जाते हैं। इसकी पवित्रता का उल्लेख न केवल हिंदू ग्रंथों में है बल्कि बौद्ध ग्रंथों में भी इसका जिक्र है। पर अफसोस, चीन ने अब व्यापक स्तर पर सेना तैनात करके इसे युद्ध क्षेत्र बना दिया है।

बीते समय की बात करें तो इन इलाकों पर भारत का नियंत्रण हुआ करता था। लेकिन जब चीन ने तिब्बत पर कब्जा किया तो माउंट कैलाश वाला इलाका भी अपने हिस्से में ले लिया। अब चीन सड़कों को बंद करके उन क्षेत्रों तक पहुँचकर उन्हें नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है, जो लोगों को यहाँ तक पहुँचा सकते हैं। बता दें यहाँ तक जाने के लिए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के माध्यम से एक रास्ता खुला रहता है लेकिन पूरे वर्ष भर में इसे सबसे चुनौतीपूर्ण मार्ग माना जाता है।

गौरतलब है कि कैलाश-मानसरोवर जैसे धार्मिक स्थान को सैनिकों से घेर देना चीन की एक साजिश का हिस्सा है। वह लद्दाख वाले तनाव के बाद से ऐसा कर रहा है। चीन ने भारत द्वारा लिपुलेख में सड़क बनाए जाने के विरोध में भी इस साइट का निर्माण कराया है। जहाँ भारत ने 17 हजार फीट की ऊँचाई पर स्थित कैलाश मानसरोवर जाने के लिए लिपुलेख के पास 80 किलोमीटर लंबी सड़क बनवाई थी।

बता दें कि लिपुलेख को लेकर इस समय भारत और नेपाल के बीच तनाव चल रहा है। इसी तनाव का चीन फायदा उठाना चाहता है। वह नेपाल के साथ आकर भारत को परेशान करने की कोशिश कर रहा है।

बीते दिनों ऐसी ही नापाक हरकतों के कारण गलवान घाटी में सैनिकों के बीच झड़प हुई थी। भारत ने उस झड़प में अपने 20 सैनिकों को खोया था और चीन ने आधिकारिक तौर पर अपने हताहत सैनिकों का आँकड़ा ही नहीं बताया था। इसके बाद भारत ने चीन के ख़िलाफ़ सख्त कदम उठाते हुए सुरक्षा कारणों से उनकी कुछ ऐप्स को बैन कर दिया था। त्योहारों में भी बाजार में चीनी माल की बिक्री पर इसका असर देखने को मिला ।