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‘जो सबके नाम बदलते थे, मोदी जी ने उनका ही बदल दिया’: PM मोदी के कारण ट्विटर पर मीम्स की बौछार

मौका कोई भी हो वामपंथियों और मोदी विरोधियों को बस एक मौका चाहिए बीजेपी नेताओं को नीचा दिखाने का। राममंदिर भूमि पूजन से लिबरल मीडिया गैंग इतना निराश हो चुका है कि बीजेपी को निशाना बनाने के लिए अब ये लोग तुच्छ हरकतों पर भी उतर आएँ है। वैसे जो कुछ करके ये मजे ले रहे हैं प्रधानमत्री ने कई बार ऐसे क्रिएटिविटी का भी स्वागत किया है।

आज, 29 साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार (5 अगस्त) को राम मंदिर पूजन के भव्य आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश के अयोध्या पहुँचे और पूरी विधि विधान से ‘श्रीराम जन्मभूमि मंदिर’ का शिलान्यास किया। राम मंदिर शिलान्यास करने के बाद पीएम मोदी ने लोगों को इस शुभ अवसर पर संबोधित किया। भाषण के दौरान गलती से मोदी ने उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ को “आदित्य योगीनाथ” कहकर संबोधित कर दिया।

फिर क्या था, खाली बैठे बीजेपी विरोधियों और लिबरल गैंग ने इस बात को हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। उन्होंने पूरे भाषण में से उस क्लिप को वायरल करना शुरू कर दिया जिसमें पीएम मोदी राम मंदिर को राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बताते हुए कहते है, “मंच पर विराजमान, उत्तर प्रदेश के ऊर्जावान लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्रीमान आदित्य योगीनाथ जी।”

वामपंथियों ने तमाम तरीके के मीम्स और फोटोशॉप तस्वीरों को बना कर योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री मोदी का सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर मज़ाक उड़ाना शुरू कर दिया। लोगों ने यह कहते हुए सोशल मीडिया में बाढ़ ला दिया कि, जो सबके नाम बदलते थे, मोदी जी ने उनका ही बदल दिया।

ऐसे ही कुछ ट्वीट्स हम यहाँ शेयर कर रहे है। जिनसे आप पता लगा सकते है लोग मंदिर निर्माण के गुस्से को ऐसी फालतू चीजें वायरल करके शांत कर रहे है।

अर्जुन नाम के यूजर योगी आदित्यनाथ की पुरानी तस्वीर शेयर करते हुए लिखते है, “जब आप अपने घर वालों को पूरे दिल से चाहते है और वो इसके बदले पूरे देश के सामने आपको गलत (आदित्य योगीनाथ) नाम से बुलाते है।”

वहीं सागरजीत धर नाम के यूजर मोदी और योगी की फ़ोटो साथ में लगा कर तंज कसते हुए ट्वीट करते है।


वहीं इन लोगों का ही मज़ाक उड़ाते हुए पृथ्वी रापर्टी नाम के यूजर अनिल कपूर की फ़ोटो के साथ लिखते है कि बोलने दो बहुत तकलीफ (राम मंदिर निर्माण) हुआ है बेचारों को

ऐसे कई ट्वीट्स और मीम्स सोशल मीडिया पर आपको मिल जाएँगे। जिनसें आप इनकी मानसिकता को समझ सकते है। साथ ही साथ आप भी इस अवसर का आनंद लीजिए कोई खास आहत होने वाली बात नहीं है।

दिशा सालियान के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सिर और प्राइवेट पार्ट में चोट के निशान: बीजेपी नेता ने लगाया ‘बलात्कार’ और ‘हत्या’ का आरोप

सुशांत सिंह सुसाइड केस में पुलिस हर एंगल से जाँच कर रही है। वहीं अब सुशांत सिंह राजपूत की मौत का कनेक्शन उनकी पूर्व सेक्रेटरी दिशा की मौत से भी की जा रही है। इंडिया टुडे की एक्सक्लुसिव रिपोर्ट के अनुसार दिशा सालियान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर और अन्य जगहों पर चोट लगने की बात सामने आई है।

बता दें दिशा मुंबई के एक अपार्टमेंट के 14 वीं मंजिल पर रहती थी। दिशा ने उसी फ्लोर से कूद कर आत्महत्या की थी। इंडिया टुडे ने दिशा सलियान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट को एक्सेस किया है, जिसमें उनके शरीर पर चोटों का विवरण है।

दिशा की मौत और उसके बाद कि गई जाँच कई सवाल पैदा करती है। जैसे कि सुशांत की मौत से पाँच दिन पहले यानी 9 जून की रात 2 बजे दिशा ने आत्महत्या की थी। लेकिन उसका पोस्टमार्टम 2 दिन बाद किया गया था। आखिर क्यों बोरीवली पोर्टमार्टम सेंटर पर ऑटोप्सी को दो दिन लेट किया गया।

14वीं मंजिल से गिरने की वजह से ऑटोप्सी के रिपोर्ट में सिर में चोट लगने और कई तरह की अप्राकृतिक चोंटो की वजह से दिशा की मौत हुई थी।

वहीं दिशा की मौत पर भाजपा सांसद नारायण राणे ने भी बेहद संगीन खुलासे किए थे। उन्होंने कहा था कि दिशा का ‘बलात्कार’ और ‘हत्या’ किया गया था। सालियान की ऑटोप्सी रिपोर्ट में उनके प्राईवेट पार्ट्स में चोट के निशान सामने आए थे।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के में निजी भागों पर चोटों के बारे में कोई विशेष उल्लेख नहीं किया गया है। लेकिन ऊँचाई से गिरने के कारण ‘कई चोटों’ का उल्लेख हुआ है। बता दें अप्राकृतिक मौत के मामलों में फीमेल बॉडी के वजाइनल स्वैब टेस्टिंग के लिए रखे जाते हैं और इस मामले में भी ऐसा किया गया था।

गौरतलब है कि, केंद्र ने सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले की सीबीआई जाँच शुरू करने के बिहार सरकार के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। अब बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच सीबीआई करेगी।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आदेश पर राजीव नगर थाना कांड संख्या 241/ 20 की सीबीआई जाँच की सिफारिश मंगलवार (अगस्त, 04, 2020) को केन्द्र सरकार को भेज दी गई थी। इससे पहले राज्य पुलिस मुख्यालय ने इसका प्रस्ताव तैयार किया। जल्द ही सीबीआई इस मामले में नई एफआईआर दर्ज कर पड़ताल शुरू कर सकती है।

उल्लेखनीय है कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में हर दिन नए खुलासे सामने आए हैं। इसमें उनकी गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती के साथ उनके संबंधों से लेकर उनके मानसिक स्वास्थ्य, बैंक अकाउंट से लेकर उनकी मैनेजर रही दिशा सालियान की मौत से जुड़े कई सवाल सामने आए हैं।

सुशांत सिंह की कथित आत्महत्या को लेकर उनके पिता कृष्ण किशोर सिंह ने पटना के राजीवनगर थाने में FIR दर्ज कराई है। 25 जुलाई को यह प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसमें आईपीसी की धारा 341, 342, 380, 406, 306, 420, 506 और 120 (बी) की धाराओं के अंतर्गत मामले दर्ज किए गए हैं।

केरल नन रेप केस: बिशप फ्रैंको मुलक्कल की जमानत को SC ने भी किया रद्द, पादरी को मुकदमे का सामना करने का दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (5 अगस्त, 2020) को नन से बलात्कार मामले में आरोपित केरल के बिशप फ्रैंको मुलक्कल (Bishop Franco Mulakkal) की आरोप मुक्त करने की याचिका बुधवार को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने उन्हें मुकदमे का सामना करने का निर्देश दिया।

प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने बिशप के वकील से कहा कि न्यायालय इस मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है लेकिन आरोप मुक्त करने के मुद्दे पर ही याचिका खारिज की जा रही है।

मुलक्कल ने इस याचिका में केरल उच्च न्यायालय के सात जुलाई के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें नन द्वारा दायर बलात्कार याचिका के मामले में आरोप मुक्त करने की उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।

उच्च न्यायालय ने जालंधर डायोसिस के अपदस्थ बिशप को बलात्कार के मामले में मुकदमे का सामना करने के लिए कहा था। बिशप के खिलाफ केरल में डायोसिस की नन ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। नन की इसी शिकायत के अधार पर बिशप के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज किया गया था।

इससे पहले केरल उच्च न्यायालय ने बलात्कार के आरोपी बिशप फ्रैंको मुलक्कल को बरी करने की याचिका को खारिज कर दिया था। जिसमें उसने नन द्वारा दायर यौन शोषण के मामले में बरी करने की अपील की थी।

न्यायमूर्ति वी शिरसी ने जालंधर क्षेत्र के बिशप को निर्देश दिया कि बलात्कार मामले में वह ट्रायल का सामना करे। केरल में उसी क्षेत्र की एक नन ने उसके खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कराया था। अदालत ने बिशप की याचिका खारिज करते हुए अभियोजन के इस तर्क को स्वीकार किया कि बलात्कार मामले में मुलक्कल के खिलाफ प्रथम दृष्ट्या साक्ष्य मौजूद हैं।

इस वर्ष मार्च में निचली अदालत द्वारा बरी किए जाने की याचिका खारिज करने के बाद रोमन कैथोलिक गिरजाघर के वरिष्ठ पादरी ने समीक्षा याचिका दायर की। बिशप के खिलाफ कोट्टायम जिले में पुलिस ने बलात्कार का मामला दर्ज किया था।

गौरतलब है कि बिशप के खिलाफ कोट्टायम जिले में पुलिस ने रेप का मामला दर्ज किया था। हाई कोर्ट में दायर याचिका में पादरी ने कहा कि जब उन्होंने पीड़िता नन से वित्तीय लेन-देन को लेकर सवाल किया तो उसने उन्हें फँसा दिया।

उल्लेखनीय है कि इस मामले की प्रमुख गवाहों में से एक सिस्टर लिसी ने पिछले दिनों आरोप लगाया था कि उनके वरिष्ठ लोग लगातार उन पर फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ दिए गए बयान को बदलने के लिए दबाव डाल रहे हैं। वहीं आरोपित बिशप को नोटिस जारी करने के बाद केरल पुलिस के एक अधिकारी का तत्काल तबादला कर दिया गया था।

‘ये मेरा भारत नहीं रहा’ कहने वालों के लिए विमान लेकर इन्तजार कर रहे सोनू सूद, कोपभवन से नहीं निकल रहे लिबरल्स

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण की शुरुआत हो चुकी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जैसे ही भूमिपूजन के दौरान इसकी आधारशिला रखी, लिबरल प्रजाति के अगुआ लोगों को ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई भारी-भड़कम हाथी उनकी छाती पर पाँव रख कर गुजरा हो। वैसे भी इस ब्रीड का दाना-पानी राम मंदिर विवाद को लेकर ही चल रहा था और मोदी सरकार ने ये मौका भी उनसे छीन लिया।

जिन्होंने रामायण पढ़ी है वो जानते हैं कि जब भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक होना था, तब उनके पिता राजा दशरथ की तीसरी पत्नी कैकेयी कोपभवन में चली गई थी। राजा पर दो वरदान उधार था। कैकेयी ने भारत का राज्याभिषेक और राम का वनवास माँगा, जिसके लिए उन्हें स्वीकृति देनी ही पड़ी थी। लेकिन, लिबरलों के लिए दुःख की बात ये है कि अबकी वाला राजा कुछ ज्यादा ही कठोर प्रशासक है।

एक तो वो ऐरे-गैरों को वरदान नहीं देता, ऊपर से लिबरल ब्रीड के पत्रकार कैसे उसके पाँव तले बैठ कर गुजरात चुनावों में उसका इंटरव्यू लेते थे, ये उन्हें अब तक याद है। इसीलिए उन्हें पता है कि ये किसी कीमत पर नहीं पसीजने वाला। और राजा के मंत्री की तो बात ही क्या! राजा इनकी बात सुन कर थोड़ा-मोड़ा पसीज भी जाएँ तो मंत्री अपनी उँगली से सीधा उस ओर इशारा करते हैं, जिससे इस ब्रीड के पसीने छूट जाते हैं।

इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है। एक तो ये जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने की पहली बरसी है, ऊपर से लिबरल-सेक्युलर जमात को राम मंदिर भूमिपूजन का भव्य कार्यक्रम देखना पड़ा, जो उन्हें लगता था कि कोरोना के कारण फीका-फीका सा रहेगा। लेकिन, देश की जनता ने भी उनके मजे लेने शुरू कर दिए। घर-घर दीपक जलने लगे और लोग पूजा पर बैठ गए। कार्यक्रम के समय सब टीवी से चिपके रहे।

अब कट्टर इस्लामी पत्रकार राणा अयूब को ही देख लीजिए। मैडम सीधा पहुँच गईं ‘वाशिंगटन पोस्ट’ में लेख लिखने और बताया कि किस तरह ये दिन भारत के समुदाय विशेष के लिए बहुत बुरा है। अब इस ब्रीड को कौन समझाए कि ये नेपाल की कम्युनिस्ट सरकार तो है नहीं कि यहाँ की नीतियाँ अब चीन और अमेरिका जैसे देश डिसाइड करेंगे। शायद अथाह गमों के सागर में डूब कर लेख लिखने वाली अयूब को होश में आने के बाद पता होगा कि अरे, भारत तो अमेरिका की कॉलोनी है ही नहीं।

बेचारे शेखर गुप्ता तो अपने पुराने दिन ही याद कर-कर के काम चला रहे हैं। कभी वो गोधरा दंगों के बाद के ‘इंडिया टुडे’ का कवर याद करते हैं और कभी ‘द प्रिंट’ का वो लेख शेयर करते हैं जिसमें बताया जाता है कि कैसे बाबरी ध्वंस की सुनवाई सही से नहीं हो रही है। सब बूत उठवाने का नारा लगाने वाले राम मंदिर के गम में खुद के बूट के फीते भी नहीं बाँध पा रहे। सब ताज उछालने का नारा देने वाले आगरा वाले ताज की ओर देखने की भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे।

सब तख़्त उछालने का नारा देने वाले के तशरीफ़ खुद के घर में रखे तख़्त पर भी नहीं टिक पा रहे। ‘फक हिंदुत्व’ का नारा देने वालों को भी ‘Premature Ejaculation’ नामक रोग से गुजर रहे हैं। देश के ‘टुकड़े-टुकड़े’ का नारा देने वालों के आकाओं के पास अपने शार्गिदों को देने के लिए बिस्किट के टुकड़े भी नहीं हैं। अब स्वास्थ्य और तकनीक पर लेख लिख कर भारत को बदनाम करने वाली विद्या कृष्णन को ही देख लीजिए।

उनका कहना है कि जिन जेलों में ‘हमारे’ कवि, प्रोफेसर, एक्टिविस्ट और पत्रकार रखे जाते हैं, वो उनके लिए मंदिर से भी ज्यादा पवित्र है। एक हिन्दू के रूप में वो खुद को शर्मिन्दा पा रही हैं। वो कहती हैं कि एक आपदा के बीच टीवी के लिए ये सब ड्रामा रचा गया है। विद्या से पूछा जा सकता है कि कोरोना के बीच वो ट्विटर पर टट्टीनुमा ट्वीट क्यों कर रही हैं? कुछ लिबरलों से तो ये भी पूछा जा सकता है कि वो इस आपदा में साँस ही क्यों ले रहे हैं?

ऑपइंडिया के सटायर विभाग के सूत्रों से पता चला है कि इन सबके बीच सेक्युलर-लिबरल ब्रीड ने सोनू सूद से संपर्क किया है। दरअसल, उन्हें लगता है कि ये वो भारत नहीं है जिसमें वो बड़े हुए हैं, जिसका उन्होंने स्वप्न देखा था और जिसके बारे में किताबों में पढ़ा था। अब उनके लिए तो इस देश में कुछ काम रहा ही नहीं। अरे, ये देश उनके लिए अब अच्छा नहीं रहा न? तो अब वो जाएँगे किसी न किसी देश में।

उन्होंने सोनू सूद से संपर्क किया और समाजिक कामों के लिए जाने जाने वाले अभिनेता ने उनकी बात मान ली। लिबरलों ने गूगल सर्च कर के पाया कि दुनिया में मजहब विशेष के सबसे ज्यादा लोग इंडोनेशिया में हैं। लेकिन, उन्हें जैसे ही पता चला कि वहाँ की एक करेंसी पर भगवान गणेश का चित्र होता है, उन्होंने प्लान कैंसल कर दिया। हालाँकि, पाकिस्तान बगल में है। वहाँ वो क्यों नहीं जा रहे, इस बारे में अभी हमें कुछ पता नहीं चल पाया है।

फिलहाल, उनके पास तुर्की और मलेशिया जैसे विकल्प भी हैं जहाँ ज़ाकिर नाइक भी रह रहा है। लेकिन, गिरोह विशेष दयावान सोनू सूद द्वारा मुफ्त में दी जाने वाली इस सेवा का फायदा उठाने को लेकर विचार-विमर्श करने में ही जुटा हुआ है। जब हिन्दू मेजोरिटी वाले भारत में रह कर भारत और हिन्दुओं को गाली दी जा सकती है और उन्हें बदनाम किया जा सकता है तो फिर कहीं और जाने से क्या फायदा?

उधर सोनू सूद तो फ्लाइट की व्यवस्था किए ही बैठे हैं। वो इसी इन्तजार में हैं कि कोपभवन में से विचार कर के लिबरल गैंग आएगा तो उन्हें कहीं ले जाने के लिए विमान सेवा उपलब्ध कराएँगे। लिबरलों की चिंता ये है कि तुर्की और मलेशिया जैसे देशों में रह कर उन्हें गाली नहीं दी जा सकती। ‘ये हमारा भारत नहीं रहा’ कहने वाले भारत छोड़ने के लिए क्यों तैयार नहीं है, ये तो सबके लिए सोचने वाली बात है।

अयोध्या में भूमि पूजन के बाद राममय हुआ न्यूयॉर्क का Times Square: दिखी भगवान राम की झलक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (अगस्त 5, 2020) को अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखी। राम मंदिर निर्माण की गूँज देश ही नहीं विदेश में भी गूँजी। अमेरिका के प्रसिद्ध स्थल न्यूयॉर्क टाइम्स स्क्वायर पर रामभक्तों ने डिजिटल बिलबोर्ड के जरिए राम में अपनी आस्था प्रकट की।

अयोध्या में प्रभु राम के भव्य मंदिर के भूमि पूजन के मौके पर अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के टाइम्स स्क्वायर में ब्रॉडवे पर भगवान राम का सबसे बड़ा हाई-डेफिनिशन डिजिटल डिस्प्ले दिखाया गया। साथ ही इस मौके पर लोगों ने ‘जय श्रीराम’ के नारे भी लगाए।

टाइम्स स्क्वायर के बिलबोर्ड पर भगवान राम और मंदिर के मॉडल के अलावा भारत का झंडा भी डिस्प्ले हो रहा था। भगवान राम का डिजिटल प्रदर्शन टाइम्स स्क्वायर में हिंदू देवता के सबसे महँगे डिजिटल होर्डिंग में से एक है।

जानकारी के मुताबिक अमेरिकन इंडियन पब्लिक अफेयर कमेटी के अध्यक्ष जगदीश सेवहानी ने बताया था कि ये जीवन में एक बार या सदी में एक बार होने वाली घटना नही हैं। बल्कि, पूरी मानवजाति के जीवन में इस तरह के मौके एक ही बार आते हैं। इस मौके को खास बनाने के लिए उन्होंने टाइम्स स्क्वायर को चुना।

इससे पहले अयोध्या में ऐतिहासिक राम मंदिर की नींव रखी जाने का अमेरिका में भारतीय- अमेरिकियों ने दीप जलाकर जश्न मनाया। कैपिटल हिल में राम मंदिर की तस्वीरों की एक झाँकी भी निकाली गई।

गौरतलब है कि इससे पहले खबर थी कि अयोध्या में राम मंदिर के भूमिपूजन की तस्वीरें अब न्यूयॉर्क की टाइम्स स्क्वायर इमारत पर नजर नहीं आएँगी। बताया गया कि जिस विज्ञापन कंपनी ‘ब्रांडेड सिटीज’ के पास बिल्डिंग पर मुख्य बिल बोर्ड मैनेज करने का अधिकार था, उन्होंने यूएस के मुस्लिम गुटों की आपत्ति के बाद इमारत पर श्रीराम की तस्वीर डिस्प्ले पर दिखाने से मना कर दिया।

संयुक्त राज्य अमेरिका में मुस्लिम समूहों के गठबंधन में से एक समूह ने कहा था कि विज्ञापन कंपनी ‘ब्रांडेड सिटीज’, जो टाइम्स स्क्वायर में नैस्डैक के लिए डिजिटल विज्ञापन बोर्ड का प्रबंधन करती है और प्रमुख डिजिटल बोर्ड चलाती है, उसने अपने बिलबोर्ड पर भगवान राम की तस्वीरें दिखाने की योजना बनाने वाले हिंदू समूहों के लिए विज्ञापन चलाने से इनकार कर दिया।

भूमि पूजने से पहले अयोध्या को पूरी तरह से सजा दिया गया। जगमग रोशनी से शहर की तस्वीर देखते ही बन रही थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जब भूमि पूजन के लिए दिल्ली से अयोध्या के लिए निकले तो वह पारंपरिक धोती-कुर्ता धारण किए हुए थे। पूजा के दौरान उनके साथ संघ प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई धर्मगुरु भी मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में भूमि पूजन कर श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की आधारशिला रख रहे थे तो दूसरी तरफ उनकी मां हीराबेन अपने घर पर बैठ टीवी पर ऐतिहासिक पलों को देख रही थीं। पीएम मोदी की माँ की कुछ तस्वीरें सामने आईं हैं, जिसमें देखा जा सकता है कि प्रधानमंत्री अयोध्या में हनुमानगढ़ी में आरती कर रहे थे तो उनकी माँ अपने घर बैठकर टीवी के सामने बैठकर पूरे कार्यक्रम को देख रही थीं।

किसके पूर्वजों ने रामलला की मूर्तियाँ हटाने की कोशिश की थी: नई-नई ‘रामभक्त’ प्रियंका से CM योगी का सवाल

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नई-नई ‘रामभक्त’ बनी कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी से पूछा है कि किसके पूर्वजों ने भगवान राम की मूर्ति हटाने की कोशिश की थी? प्रियंका गाँधी ने ‘राम सबके हैं’ कहते हुए राम और रामायण का जम कर गुणगान किया था और राम मंदिर के निर्माण का स्वागत किया था। सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस बयान पर प्रतिक्तिया देते हुए पूछा कि वो कौन लोग थे जिन्होंने मूर्तियाँ हटाने की कोशिश की थी?

सीएम योगी आदित्यनाथ ने पूछा कि वो कौन लोग थे जो अयोध्या में राम मंदिर नहीं चाहते थे? उन्होंने कहा कि भाजपा काफी पहले से कहती आई है कि राम सबके हैं, कॉन्ग्रेस आज यही बात कर रही। उन्होंने ये भी पूछा कि वो कौन लोग थे जो कह रहे थे कि गर्भगृह से 200 मीटर की दूरी पर राम मंदिर का शिलान्यास होगा? उन्होंने कोरोना वायरस को लेकर हुई तैयारियों के बारे में भी जानकारी दी।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने बताया कि किस तरह भाजपा का कोई भी पदाधिकारी इस कार्यक्रम में नहीं आया। न तो पार्टी के राष्ट्रीय और न ही प्रदेश अध्यक्ष यहाँ पहुँचे थे। उन्होंने कहा कि सीमित संख्या में अतिथियों को बुलाए जाने के कारण ऐसा हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि राम के नाम पर किसी को बाँटने की कोशिश नहीं करनी चाहिए और राम काज में सहयोग भी करना चाहिए क्योंकि वो सभी के हैं।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमने सबको जोड़ने का ही काम किया है। उन्होंने कहा कि राम के नाम पर भाजपा ने राजनीति नहीं की है बल्कि अयोध्या जन्मभूमि में मंदिर के लिए जिस निष्ठा से हम 1984 में जुड़े थे उसी निष्ठा से 2020 में भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि 1949 में उनकी भावनाएँ क्या थीं, 1984 में क्या थीं और 1992 में क्या थीं? सीएम ने कहा कि कॉन्ग्रेस कहती कुछ है और करती कुछ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने वही किया, जो कहा। उन्होंने बताया कि ये कार्यक्रम बहुप्रतीक्षित था और इसे आगे बढ़ाना था, इसीलिए इस रूप में इसका आयोजन हुआ और टीवी पर लाइव प्रसारण भी किया गया। उन्होंने कहा कि ये कार्यक्रम शुभ था और इसके आयोजन के लिए पूरी व्यवस्था की गई थी। इस आयोजन में 200 के क़रीब मेहमान आए थे। कई साधु-संत इसमें आना चाहते थे।

इससे पहले सीएम ने उपस्थित अतिथियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि 5 सदी के बाद आज 135 करोड़ भारतवासियों का संकल्प पूरा हो रहा है। देश में लोकतांत्रिक तरीकों के साथ ही मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। इस घड़ी की प्रतीक्षा में कई पीढ़ियाँ गुजर चुकी हैं। सीएम योगी ने कहा – “हमने तीन साल पहले अयोध्या में दीपोत्सव का कार्यक्रम शुरू किया था, आज उसकी सिद्धी हो रही है।”

हाल ही में प्रियंका गाँधी ने राम मंदिर पर बयान देते हुए कहा था कि सरलता, साहस, संयम, त्याग, वचनवद्धता, दीनबंधु राम नाम का सार है। राम सबमें हैं, राम सबके साथ हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि भगवान राम और माता सीता के संदेश और उनकी कृपा के साथ रामलला के मंदिर के भूमिपूजन का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और सांस्कृतिक समागम का अवसर बनें। भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति में रामायण की गहरी और अमिट छाप है।

रिया चक्रवर्ती को ED ने भेजा समन: 7 अगस्त को पेश होने का दिया आदेश, तीन चरणों में होगी पूछताछ

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती को समन जारी किया है। रिया चक्रवर्ती को शुक्रवार (अगस्त 7, 2020) को पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

ईडी ने रिया चक्रवर्ती को उसके मुम्बई में स्थिति पुराने पते और ईमेल के जरिए समन भेजा है। प्रवर्तन निदेशालय रिया चक्रवर्ती से तीन चरणों में लंबी पूछताछ होगी। इसके लिए ED ने सवालों की एक लंबी फेहरिस्त तैयार की है। इस पूछताछ में रिया के सुशांत सिंह राजपूत से व्यक्तिगत और व्यवसायिक संबंधों को लेकर गहरी पड़ताल की जाएगी।

प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों के मुताबिक रिया से तीन चरणों में पूछताछ होगी। पहले चरण में व्यक्तिगत जानकारियाँ माँगी जाएँगी। पिता का नाम, स्थाई और स्थानीय पता परिवार के सदस्यों के बारे में तमाम जानकारी। दूसरे चरण में व्यवसायिक जानकारियाँ माँगी जाएँगी, जैसे पैन कार्ड के डिटेल, कंपनी का DIN नंबर, सोर्स ऑफ इनकम क्या है, आयकर रिटर्न फाइल करने की जानकारी वगैरह।

इसके अलावा रिया से यह भी पूछा जाएगा कि वे कितनी कंपनियों में डायरेक्टर हैं। कंपनी में उनको क्या काम करना होता है और उसका कितना टर्नओवर है। रिया के कितने बैंकों में खाते हैं। किस-किस बैंक में हैं और उनमें कितनी रकम है। उसके नाम पर कुल कितनी जायदाद है और 3 साल पहले कितनी जायदाद थी?  

क्या कोई जायदाद या खाता विदेश में भी है? उसके भाई का क्या व्यापार है? उसकी कंपनी के बारे में वे क्या जानती हैं? उसके परिजनों की प्रॉपर्टी के बारे में जानकारी। निदेशालय रिया से उनके पासपोर्ट के डिटेल, विदेश यात्राओं के बारे में जानकारी लेगी। इसके साथ ही विदेश यात्राओं का खर्चा किसने वहन किया, यह भी पूछा जाएगा।

गौरतलब है कि केंद्र ने सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले की सीबीआई जाँच शुरू करने के बिहार सरकार के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। अब बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच सीबीआई करेगी।

‘राम मंदिर निर्माण नेहरूवादियों, मार्क्सवादियों, मीडिया, शिक्षाविदों की हार है, जिसने इतिहास, पुरातत्व, भक्ति को नकारने की कोशिश की’

पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित अमेरिकी वैदिक शिक्षक डेविड फ्रॉली ने बुधवार (अगस्त 5, 2020) को कहा कि राम मंदिर के निर्माण की शुरुआत एक अरब सपनों का साकार होना है। बता दें कि डेविड फ्रॉली वेद, हिंदुत्व, योग, आयुर्वेद और वैदिक एस्ट्रॉलजी पर कई किताबें लिख चुके हैं।

डेविड फ्रॉली ने टाइम्स नाउ के प्रधान संपादक राहुल शिवशंकर के साथ एक्सक्लुसिव इंटरव्यू में राम मंदिर पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भगवान राम की महिमा को पुन: स्थापित किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि अयोध्या विवाद संभवतः दुनिया के इतिहास में सबसे अधिक समय तक चलने वाला मुकदमा था।

डेविड फ्रॉली ने राम मंदिर के निर्माण को देश की आजादी के बाद आधुनिक भारत की सबसे महत्वपूर्ण घटना बताते हुए कहा कि रामायण एशिया की सबसे लोकप्रिय कहानियों में से एक है और अब राम मंदिर भारत को उसके वास्तविक भाग्य के प्रति जागृत करेगा। उन्होंने आगे कहा, “हमें ‘अयोध्या के विजय’ को श्री राम की विजय के रूप में स्वीकार करना चाहिए।”

फ्रॉली ने कहा कि अयोध्या भारत के सात पवित्र शहरों में सबसे महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही उन्होंने कहा, “हिंदू धर्म एक परंपरा है जो कई प्रकार के आध्यात्मिक मार्ग स्वीकार करता है। यह संकीर्ण विचारधारा वाली परंपरा नहीं है।”

फ्रॉली ने आगे कहा, “हिंदुओं ने अपने मंदिरों के पुन: प्राप्ति के लिए राजनीतिक रूप से कोई स्टैंड नहीं लिया। जब तक हिंदू राजनीतिक रूप से स्टैंड नहीं लेगें, उन्हें अल्पसंख्यक ही माना जाएगा, उन जगहों पर भी, जहाँ पर वो बहुसंख्यक हैं।”

फ्रॉली ने ट्वीट करते हुए लिखा था, “राम मंदिर का निर्माण नेहरूवादियों, मार्क्सवादियों, माओवादियों, चीन समर्थकों, मीडिया और शिक्षाविदों के लिए हार है, जिसने इतिहास, पुरातत्व और भक्ति को नकारने की कोशिश की थी।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में बुधवार को राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया और मंदिर की आधारशिला रखी। इसके बाद उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “यह मेरा सौभाग्य था कि श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुझे मंदिर निर्माण के भूमि पूजन में आमंत्रित किया। आज पूरा देश राममय और हर मन दीपमय है। सदियों का इंतजार समाप्त हुआ।”

पीएम मोदी ने कहा, ”राम हमारे मन में गढ़े हुए हैं, हमारे भीतर घुल-मिल गए हैं। कोई काम करना हो, तो प्रेरणा के लिए हम भगवान राम की ओर ही देखते हैं। भगवान राम की अद्भुत शक्ति देखिए। इमारतें नष्ट कर दी गईं, अस्तित्व मिटाने का प्रयास भी बहुत हुआ, लेकिन राम आज भी हमारे मन में बसे हैं, हमारी संस्कृति का आधार हैं। श्रीराम भारत की मर्यादा हैं, श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं।”

मुझे कोई बुलाएगा नहीं और मैं जाऊँगा भी नहीं: अयोध्या में मस्जिद के शिलान्यास पर CM योगी की दो टूक

मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्म स्थली पर भव्य मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश दुनिया के करोड़ों रामभक्तों के सपने को साकार कर दिया। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विधि विधान के साथ मंदिर की नींव रखी।

इस दौरान पीएम मोदी के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहे। भूमि पूजन के कार्यक्रम के बाद सभी अथितियों को संबोधित करते सीएम योगी ने कहा कि पाँच सदी के बाद आज 135 करोड़ भारतवासियों का संकल्प पूरा हो रहा है।

राम मंदिर भूमि पूजन से इतर योगी आदित्यनाथ ने न्यूज चैनल आज तक के साथ खास बातचीत में मस्जिद के शिलान्यास पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कर दिया कि वो मस्जिद के शिलान्यास कार्यक्रम का हिस्सा नहीं होंगे।

बता दें कि मीडिया चैनल ने सीएम योगी से सवाल किया था, “विरोधी कह रहे हैं कि आपने सभी धर्मों के लोगों को राम मंदिर के भूमि पूजन में बुलाया और सब आए। लेकिन आने वालों दिनों में जब अयोध्या में मस्जिद का निर्माण शुरू होगा, तो कहा जा रहा है कि कि सीएम योगी वहाँ नहीं जाएँगे।”

सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसका जवाब देते हुए कहा, “मेरा जो काम है वो काम मैं करूँगा। मैं अपने कार्य को हमेशा कर्तव्य और धर्म मानकर चलता हूँ। मैं जानता हूँ कि मुझे कोई बुलाएगा नहीं इसलिए मैं जाऊँगा भी नहीं।”

उन्होंने भूमि पूजन कार्यक्रम में कई बड़े नेताओं के शामिल नहीं होने पर भी कहा कि हर समुदाय के लोग इस कार्यक्रम में आना चाहते थे, लेकिन कोरोना के कारण कार्यक्रम को सीमित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि सिर्फ कॉन्ग्रेस की बात नहीं है, भाजपा के भी कई बड़े नेता कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए।

इसके साथ ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर को लेकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सूझबूझ और प्रयासों के कारण आज संकल्प पूरा हो रहा है। हमने तीन साल पहले अयोध्या में दीपोत्सव का कार्यक्रम शुरू किया था, आज उसकी सिद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से पहले रामायण सर्किट का काम शुरू किया गया, साथ ही अयोध्या में विकास कार्य हो रहा है।

सीएम ने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और उसकी न्यायपालिका की शक्ति ने दुनिया को दिखा दिया है कि शांति से लोकतांत्रिक और संवैधानिक रूप से सुलझाए जाने वाले मामले कैसे हो सकते हैं।

गौरतलब है कि 9 नवंबर 2019 को उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या में पूरी 2.77 एकड़ विवादित भूमि राम लला को दी। इसके साथ ही केन्द्र और उत्तर प्रदेश प्रदेश सरकार को मस्जिद के निर्माण के लिए किसी प्रमुख स्थान पर पाँच एकड़ जमीन दूसरे पक्ष को देने का भी निर्देश दिया।

यूपी सरकार ने 5 फरवरी को ही अयोध्या जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम धन्नीपुर तहसील सोहावल में थाना रौनाही से लगभग 200 मीटर पीछे 5 एकड़ जमीन मस्जिद के लिए आवंटित की थी। यहीं पर मस्जिद का निर्माण होना है। 

भूमि पूजन के बाद ओवैसी का फूटकर बह रहा है दर्द, कहा- ‘ये लोकतंत्र और सेकुलरिज्म की हार है’

भूमि पूजन की तारीख आने के बाद से लगातार देश के लोकतंत्र और सेकुलरिज्म पर सवाल उठाने वाले ओवैसी अब खुल कर जहर उगल रहे हैं। सुबह उन्होंने सबसे पहले यह ट्वीट किया, “बाबरी मस्जिद थी, है और रहेगी। इंशाल्लाह।” इसके बाद भूमि पूजन संपन्न होते ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शपथ का उल्लंघन करने वाला ही करार दे दिया।

उन्होंने कहा, “भारत एक सेकुलर देश है। प्रधानमंत्री ने आज मंदिर का शिलान्यास करके अपनी शपथ का उल्लंघन किया है। ये लोकतंत्र की और सेकुलिज्म की हार है और हिंदुत्व की जीत है।”

ओवैसी ने आगे कहा, “पीएम का इस कार्यक्रम में शामिल होना देश की धर्मनिरपेक्ष नीतियों का उल्लंघन है। आज हिंदुत्व और धर्मनिरपेक्षता के लिए एक सफल दिन है क्योंकि मोदी (एक पीएम के रूप में) इस कार्यक्रम में शामिल हुए। पीएम ने कहा कि आज का कार्यक्रम भारत का प्रतीक है, लेकिन, वह एक देश के पीएम हैं और उन्हें समझने की जरूरत है कि देश का प्रतीक मंदिर या मस्जिद नहीं हो सकता।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ओवैसी ने आगे कहा, “मैं कह रहा हूँ कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रमुख उपस्थिति के कारण हिंदुत्व की सफलता का दिन है। वह वहाँ क्यों है? भागवत ने कहा कि यह नया भारत बनाता है। क्या है नया भारत? नया भारत जहाँ मुस्लिमों के साथ भेदभाव किया जाएगा?”

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ”प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं भावुक हूँ। मैं कहना चाहता हूँ कि मैं भी उतना ही भावुक हूँ क्योंकि मैं सह-अस्तित्व और नागरिकता की समानता में विश्वास करता हूँ। प्रधानमंत्री, मैं भावुक हूँ क्योंकि एक मस्जिद 450 साल से वहाँ खड़ी थी।”

बता दें, ओवैसी इस समय सिर्फ़ प्रधानमंत्री पर अपना गुस्सा नहीं दिखा रहे बल्कि कॉन्ग्रेस से लेकर समाजवादी पार्टी उनके निशाने पर है। प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ बोलने से पहले उन्होंने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था, ”कॉन्ग्रेस हमेशा खामोशी से हिंदुत्व की राजनीति करती आई है। कॉन्ग्रेस को खुलकर कह देना चाहिए कि वह हिंदुत्व की विचारधारा को मानती है। कॉन्ग्रेस पहले भी मिली हुई थी। अब उनको यह तय करना है कि वो टीम हिंदुत्व का साथ देंगे या टीम इंडिया का जो धर्मनिरपेक्षता पर विश्वास रखती है।”

इसी प्रकार उन्होंने मुलायम सिंह यादव को भी आड़े हाथों लिया और कहा, “मुलायम सिंह यादव ने भी अपनी सियासी रोटी हमारे खून पर सेकी है। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद जब दोबारा मुलायम सिंह यादव यूपी के मुख्यमंत्री बने तो वो इस मामले में सोते रहे। उन्होंने केस में कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया। जिन लोगों को हमने रक्षक समझा, उन्हीं लोगों ने हमें नुकसान पहुँचाया है।”