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यूपी: 20 साल पहले स्वास्थ्य विभाग में फर्जीवाड़े से नौकरी पाने वाले 64 बर्खास्त, 18 साल से चल रही जाँच खत्म

उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने 64 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है। इन्होंने करीब 20 साल पहले फर्जीवाड़े से नौकरी पाई थी। 18 साल से मामले की जॉंच चल रही थ्ज्ञी। मिर्जापुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ओपी तिवारी ने यह जानकारी दी।

सीएमओ ओपी तिवारी ने शनिवार (13 जून, 2020) को बताया कि 1996 से 1998 के बीच ग्रेड-4 के पदों पर 64 लोगों को धोखाधड़ी से नियुक्त किया गया था। वे तभी से अपना वेतन ले रहे थे और इनमे से कुछ को पदोन्नत भी किया गया था, जो कि कुछ वर्तमान में क्लर्क के रूप में स्वास्थ्य विभाग के अंदर कार्य कर रहे थे।

18 वर्षों से जाँच चल रही थी कि नौकरी पाने के लिए किन फर्जी तरीकों का इस्तेमाल किया गया था। इस मामले में बीते बुधवार (10 जून, 2020) को सरकार ने आर्थिक अपराध शाखा वाराणसी ने इस मामले में रिपोर्ट पेश की थी। इसके बाद ही स्वास्थ्य विभाग ने सभी 64 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया था।

सीएमओ ने अपने बयान में कहा कि पूछताछ के दौरान पता चला कि आरोपित कर्मचारियों ने नौकरी पाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था। इसके बाद सभी जिलों के सीएमओ को पत्र भेजकर जानकारी दे दी गई, जहाँ कर्मचारी विभाग में तैनात थे।

सीएमओ के मुताबिक यह मामला 2002 में सरकार के संज्ञान में तब आया कि जब एक ऑडिट टीम ने उनकी सर्विस बुक माँगी थी, लेकिन वे सर्विस बुक देने में नाकाम रहे। इसके बाद टीम को शक हुआ और सरकार को जाँच शुरू करने के लिए एक पत्र लिखा और इसी के साथ 18 साल की लंबी जाँच के बाद विभाग ने गलत तरीके से नौकरी पाने वालों का खुलासा कर दिया।

‘खुदकुशी हराम, वह काफिर था’: सुशांत सिंह की मौत पर शोक जता कट्टरपंथियों के निशाने पर आए पाकिस्तानी सितारे

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने रविवार (जून 14, 2020) को मुंबई के अपने घर में आत्महत्या कर ली। उनकी मौत किसी सदमे से कम नहीं है। सुशांत की आत्महत्या से हर कोई हैरान, स्तब्ध है। बॉलीवुड से लेकर क्रिकेट जगत तक इस खबर से स्तब्ध है।

सभी ने सुशांत की मौत पर संवेदनाएँ व्यक्त कीं। इसी कड़ी में पाकिस्तानी शख्सियतों ने भी शोक व्यक्त किया। हालाँकि इसके लिए वे अपने ही देशवासियों के निशाने पर आ गए। एक ‘काफिर’ की मौत पर शोक जताने के लिए उन्हें इस्लामी कट्टरपंथियों ने निशाना बनाया।

पाकिस्तानी क्रिकेटर शान मसूद ने सुशांत की आत्महत्या पर दुख व्यक्त करते हुए ट्विटर पर उनकी आत्मा की शांति के लिए कामना की। इसकी वजह से उन्हें गालियाँ दी गई कि उन्होंने एक ‘काफिर’ की आत्महत्या पर दुख जताया।

उनसे कहा गया कि वे उन दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना न करें, जो दूसरे धर्म के हैं।

एक हिंदू की मौत पर शोक जताने के लिए उन पर ‘liberal’ होने का भी आरोप लगाया गया।

इसी तरह, पाकिस्तानी अभिनेत्री माहिरा खान पर राजपूत की आत्महत्या पर शोक व्यक्त करने के लिए हमला किया गया। बता दें कि माहिरा ने बॉलीवुड फिल्मों में भी अभिनय किया है।

बुशरा सिद्दीकी नाम का एक शख्स, जिसके नाम के आगे पाकिस्तान झंडा लगा था, ने नफरत भरा ट्वीट किया।

एक अन्य ट्विटर यूजर ने बताया कि आत्महत्या ‘हराम’ है और ‘काफिर’ को तो किसी भी हालत में स्वर्ग नहीं मिल सकता। उसने लिखा, “खुदकुशी करने वालों की मौत हराम है और फिर काफिर के लिए तो जन्नत है ही नहीं।”

एक शख्स ने माहिरा को सुझाव दिया कि मानवता दिखाना अच्छा है, लेकिन ‘काफिरों’ के लिए मजहब को मत भूलना। उसने लिखा, “न जाने क्यों हम लोग ‘काफिर’ की शांति के लिए कामना करते हैं, जबकि कुरान कहता है कि जो लोग उसके दीन को स्वीकार किए बिना मर जाते हैं वे नरक में जाएँगे? मानवता दिखाना अच्छा है लेकिन कम से कम अपने मजहब के बारे में मूर्ख मत बनो।”

इसी तरह, पाकिस्तानी अभिनेता हुमायूँ सईद पर भी ‘काफिर’ की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने के लिए हमला किया गया।

गौरतलब है कि इस साल दुनिया को अलविदा कह के जाने वाले सिने हस्तियों की सूची में सुशांत सिंह राजपूत का नाम भी जुड़ गया है। उन्होंने मुंबई स्थित अपने घर में फाँसी लगा कर आत्महत्या कर ली। उनकी लाश उनकी ही फ्लैट में पंखे से लटकी हुई मिली। घर के नौकर ने पुलिस को ये जानकारी दी। 

सुशांत सिंह राजपूत ने सबसे पहले ‘किस देश में है मेरा दिल’ नाम के धारावाहिक में काम किया था पर वो एकता कपूर के धारावाहिक ‘पवित्र रिश्ता’ से लोकप्रिय बने। इसके बाद उन्होंने फिल्मों का सफर शुरू किया था। सुशांत फिल्म ‘काय पो छे’ में मुख्य अभिनेता के रूप में दिखे थे। उस फिल्म में उनके अभिनय की तारीफ भी हुई थी। उन्होंने क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी की बॉयोपिक, ‘सोनचिड़ैया’ और ‘छिछोरे’ जैसी फिल्मों में काम किया था।

वीर सिंह निकला हनीफ खान: बंधक बनाकर दो महीने तक किया रेप, जबरन इस्लाम कबूल करवाया

राजस्थान से एक चौंकाने वाला मामला हाल ही में सामने आया है। हनीफ खान नाम के एक युवक ने हिंदू बनकर विवाहिता से फेसबुक पर दोस्ती की। फिर उसे झॉंसे में लेकर बाड़मेर ले गया। वहॉं उसका जबरन धर्मांतरण कराया गया। साथ ही दो महीने तक बंधक बनाकर दुष्कर्म किया।

पीड़िता राजस्थान के ही उदयपुर जिले की रहने वाली है। एनबीटी की खबर के मुताबिक पीड़ित महिला उदयपुर जिले के सलूम्बर उपखंड में गींगला क्षेत्र की रहने वाली है। उसने बताया कि सोशल मीडिया के जरिए आरोपित हनीफ खान से उसकी जान-पहचान हुई। इस दौरान उसने अपना नाम वीर सिंह बताया था।

फेसबुक पर दोस्ती के कुछ दिनों बाद दोनों की फोन पर बात होने लगी। आरोपित युवक शादी का झॉंसा देकर उसे बाड़मेर स्थित अपने गाँव भटाला लेकर चला गया। वहॉं उसे प्रताड़ित करने लगा। पीड़िता को आरोपित युवक के परिजनों के पहनावे और बोल-चाल से उनके धर्म पर शक हुआ।

शक होने पर युवती ने आरोपित युवक से पूछा तो उसने स्वीकार किया कि वह वीर सिंह नहीं, बल्कि हनीफ खान है। इसके बाद आरोपित और उसके परिजनों ने महिला को डराया-धमकाया और उसकी बेटी को जान से मारने की धमकी देकर उसका जबरन धर्म परिवर्तन करा दिया।

आरोपित ने महिला को 2 महीने तक घर में ही बंधक बनाकर रखा और उसके साथ दुष्कर्म करता रहा। इतना ही नहीं युवक के परिजनों ने भी महिला के साथ संबंध बनाने की कोशिश की। लॉकडाउन में ढील मिलते ही पीड़ित महिला आरोपितों के चुंगल से अपनी बेटी के साथ भाग निकली और उदयपुर पहुँची गई। घर पहुँची पीड़िता ने परिजनों को आपबीती सुनाई।

इसके बाद परिजनों ने आरोपित युवक और उसके परिजनों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इस मामले में पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई के बाद सोमवार (8 जून, 2020) को उदयपुर की अदालत में पीड़िता के धारा 164 के तहत बयान दर्ज किए गए हैं।

आपको बता दें कि पीड़ित महिला पहले से शादीशुदा थी और अपने पति से अलग अपने मायके में रहती थी। उसकी तीन साल की एक बेटी भी है। पति अहमदाबाद में हलवाई का कार्य करता है।

दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक पुलिस अधीक्षक कैलाश बिश्नोई ने बताया कि गींगला थाने में युवक और उसके परिजनों के खिलाफ धारा 366, 376, 376 ए / 511 और 506 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और जाँच थाना अधिकारी रमेशचंद्र को सौंपी गई है। युवती के मोबाइल नंबर के आधार पर युवक को ट्रेस किया जा रहा है। जल्द ही एक टीम बाड़मेर भेजी जाएगी।

ऐसा ही एक मामला राजस्थान के राजसमंद जिले से भी सामने आया है। पुलिस ने बलात्कार, अश्लील वीडियो बनाने, ब्लैकमेल करने के आरोप में रियाज और उसके दो साथियों सुलेमान मोहम्मद और उसके अनवर को गिरफ्तार किया है। घटना देवगढ़ पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले लसानी गाँव की है। रियाज ने पिंटू बनकर पीड़िता के साथ मेलजोल बढ़ाया था।

सार्वजनिक माफी ही ममता बनर्जी का प्रायश्चित: शवों को घसीटे जाने पर बोले बंगाल के गवर्नर, Video फर्जी बताने पर भी फटकारा

हाल ही में पश्चिम बंगाल से एक वीडियो सामने आया था जिसमें कोलकाता नगर निगम के वाहन में रखने के दौरान शव घसीटे जा रहे थे। इसको लेकर राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने रविवार (जून 14, 2020) को एक बार फिर से ममता सरकार से सार्वजनिक तौर पर माफी माँगने के लिए कहा है।

राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कोरोना वायरस से मरने वाले लोगों के शवों को लोहे के हूक से खींचने को लेकर गहरा दुख जताते हुए कहा कि यह बर्बरता मानवता को लंबे समय तक शर्मसार करती रहेगी। धनखड़ ने रविवार को ट्वीट कर कहा, ‘‘मानव शरीर को हूक से खींचने वाला यह भयावह अकल्पनीय डर हमें लंबे समय तक परेशान करेगा। ममता बनर्जी द्वारा प्रायश्चित के रूप में सार्वजनिक माफी अपेक्षित है। यह बर्बरता मानवता पर अमिट दाग है। शवों का अंतिम संस्कार तय पंरपरा के अनुसार होना चाहिए। यह एक गंभीर और आध्यात्मिक कार्य है।’’

बता दें कि पश्चिम बंगाल में एक श्मशान घाट पर कुछ शवों को जलाने के दौरान इलाके में बदबू फैल गई थी। इस पर स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई और विरोध के साथ हंगामा करने लगी। इसके बाद नगर निगम के कर्मचारियों ने अधजली लाशें घसीटते हुए गाड़ी में भरी। इस अमानीय घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया।

हालाँकि प्रशासन ने इससे इनकार किया है। सोशल मीडिया पर आए वाडियो में देखा जा सकता है कि कर्मचारी कोलकाता में गारिया शवदाह गृह में रखे शवों को हुक से घसीटते हुए बाहर खड़ी गाड़ी में फेंक रहे हैं। अधिकारियों ने इस वीडियो को फर्जी बताया है।

धनखड़ ने वीडियो को फर्जी बताने को ‘अक्षम्य अपराध’ करार दिया। उन्होंने कहा कि वीडियो को फर्जी बताना अपमान है। ममता बनर्जी को इस बात का अंदाजा नहीं है कि इस अपराध को लेकर लोगों के अंदर कितना आक्रोश है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिक्रिया देने से पहले ये सोच लें कि अगर उन 14 में से एक आपके परिवार का हिस्सा होता तो।

धनखड़ ने उम्मीद जताई है कि उन्होंने गृह सचिव, पश्चिम बंगाल सरकार और कोलकाता नगर निगम के प्रशासकों से जो विवरण माँगा है, उसे जल्द से जल्द और प्रामाणिक रूप से उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने इस मुद्दे को बेहद भावुक और संवेदनशील बताते हुए कहा कि चेयरपर्सन फिरहाद हकीम जल्द ही उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी देंगे।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने इससे पहले शनिवार (जून 13, 2020) को अपने एक ट्वीट में लिखा था, “ममता बनर्जी और उनके प्रशासन की ओर से गवर्नर से निपटने के लिये चाकुओं को धार दी जा रही है। सांसदों और वरिष्ठ नेताओं ने हमारे राज्य को मानव शरीरों को निर्दयी तरीके से घसीटे जाने के बर्बर घटनाक्रम पर माफी माँगने की बजाए एक जैसे ट्वीट करना शुरू कर दिया है।”

एक अन्य ट्वीट में गवर्नर धनखड़ ने सीएम ममता बनर्जी को संबोधित करते हुए लिखा था, “राज्य के लोगों की सेवा करने का मेरा संकल्प है, मुझे इस तरह की स्ट्रीट स्मार्ट हरकतों से डिगाया नहीं जा सकता है। मैं पश्चिम बंगाल की खोई हुई महिमा को हासिल करने की दिशा में काम करूँगा और राष्ट्र के शिखर पर इसकी जगह बनाने के लिए काम करूँगा। पूरी ऊर्जा के साथ मैं कानून के शासन के लिए धर्मयुद्ध करूँगा।”

‘मैं जिंदा क्यों बचा, मर ही जाता’: कोरोना से बचे बुजुर्ग को हॉस्पिटल ने थमाया ₹8.35 करोड़ का बिल

70 साल के एक बुजुर्ग को कोरोना संक्रमण की वजह से अस्पताल में 62 दिन दाखिल रहना पड़ा। इसके बाद हॉस्पिटल ने उन्हें 1.1 मिलियन डॉलर (करीब8.35 करोड़ रुपए) का बिल थमा दिया।

कोरोना को मात देने वाले इस बुजुर्ग के होश 181 पन्नों का बिल देखते ही उड़ गए। बिल देख उन्होंने कहा- मैं क्यों जिंदा बच गया, इससे अच्छा तो मर जाता।

द सिएटल टाइम्स के मुताबिक मामला अमेरिका के सिएटल शहर का है। माइकल फ्लोर नाम के 70 वर्षीय मरीज को सिएटल शहर के स्वीडिश मेडिकल सेंटर में 4 मार्च को कोरोना संक्रमित होने के कारण भर्ती कराया गया था। इसके बाद अस्पताल ने जब 62 दिनों बाद उन्हें छुट्टी दी तो उन्हें 181 पन्नों का बिल थमा दिया गया, जिसमें बताया गया कि हर दिन आईसीयू के लिए 7.39 लाख चार्ज किए गए।

इसके अलावा मरीज को 42 दिन स्टेराइल रूम में रखने के लिए 3.10 कोराड़ रुपए, 29 दिन तक वेटिंलेटर पर रखने के लिए 62.28 लाख रूपए और दो दिन जान खतरे में आने के बाद हुए ट्रीटमेंट के लिए करीब 76 लाख रुपए चार्ज किए गए।

4 मार्च को अस्पताल में भर्ती करने के बाद बुजुर्ग की तबीयत इतनी बिगड़ गई थी कि एक बार तो अस्पताल की नर्स ने उनके परिवार को मिलने के लिए बुलाने की सोची। लेकिन इसके बाद बालत में सुधार हुआ और 62 दिन बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इसे स्वास्थ्यकर्मियों ने चमत्कार ही माना है, क्योंकि अमेरिका में कोरोना से मरने वालों में बुजुर्गों की संख्या सबसे अधिक है।

सिएटल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक हालाँकि फ्लोर बुजुर्गों के लिए बनाए गए सरकार के कार्यक्रम के तहत इंश्योरेंस कवर में आते हैं। इसलिए उन्हें इलाज का खर्चा अपनी जेब से नहीं देना पड़ेगा, लेकिन बिल को देख फ्लोर कहते हैं कि वे टेक्सपेयर्स का इतना पैसा खर्च होने की बात सुनकर बेहद दुखी हैं और खुद को अपराधबोध से ग्रस्त महसूस कर रहे हैं।

आपको बता दें कि अमेरिका ने कोरोना संकट के समय में अमेरिकी अस्पतालों को 10 करोड़ डॉलर की मदद मुहैया कराने का ऐलान किया है। वहीं अमेरिका में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अभी तक अमेरिका में कोरोना से मरने वालों की संख्या 117,533, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 2,142,453 हो गई है। साथ ही पूरे विश्व में कोरोना से मरने वालों की संख्या 432,898, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 7,897,281 हो गई है।

फ्लैट में मौजूद थे दोस्त, नहीं मिली कोई सुसाइड नोट: सुशांत सिंह राजपूत के मामा ने कहा – न्यायिक जाँच हो

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या का सस्पेंस गहराता जा रहा है। उनके मामा ने आरोप लगाया है कि ये आत्महत्या नहीं है क्योंकि सुशांत ऐसा कर ही नहीं सकते थे। मामा ने इस पूरे मामले की न्यायिक जाँच की माँग उठाई है। उनके कमरे से किसी सुसाइड नोट का न मिलना भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। मामा का कहना है कि सुशांत ऐसा क़दम नहीं उठा सकता, इसीलिए मामले की न्यायिक जाँच हो।

वहीं मुंबई पुलिस अभिनेता के पिछले 6 माह से डिप्रेशन में होने की बातें कह रही है। वो बांद्रा में स्थित अपने फ्लैट में अकेले रहा करते थे। परिवार का पटना में उनकी मौत की ख़बर सुन बुरा हाल है। पिता सदमे में बेहोश हो गए और कुछ बोलने या बताने की हालत में नहीं हैं। पटना में किसी भी परिजन या रिश्तेदार को इस बात या यकीन नहीं हो रहा कि सुशांत ने आत्महत्या कर ली। सबका रो-रो कर बुरा हाल है।

एक और खुलासा ये हुआ है कि सुशांत सिंह राजपूत के घर में शनिवार (जून 13, 2020) की रात उनके दोस्त लोग मौजूद थे। पुलिस फिलहाल पड़ोसियों से पूछताछ कर रही है, जिसके बाद उन दोस्तों का पता लगा कर भी पूछताछ की जाएगी। ‘आजतक’ ने अपनी ख़बर में बताया है कि सुशांत के फ्लैट में उनके दोस्त लोग भी मौजूद थे। सुशांत सिंह के पास फिल्मों की कमी नहीं थी, ऐसे में उनका करियर भी ठीक ढर्रे पर चल रहा था।

उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक जताते हुए लिखा, “सुशांत सिंह राजपूत एक उज्ज्वल युवा अभिनेता थे, जो जल्दी ही चले गए। उन्होंने टीवी और फिल्मों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। मनोरंजन की दुनिया में उनकी सफलता ने कितनों को ही प्रेरित किया। उनकी कई यादगार फ़िल्में हैं, जो हमें उनकी याद दिलाएँगी। मैं उनके निधन से स्तब्ध हूँ। दुःख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएँ उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ है। ॐ शांति।”

हाल ही में 8 जून को सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व-मैनेजर दिशा सालियान ने आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने मुंबई के मलाड स्थित इमारत में 14 मंजिल से कूद कर आत्महत्या की थी। बोरीवली के एक हॉस्पिटल में उन्हें मृत घोषित किया गया था। उनकी सगाई हो चुकी थी। दिशा की आत्महत्या के लगभग एक सप्ताह बाद सुशांत सिंह राजपूत ने भी आत्महत्या कर ली। दिशा की आत्महत्या का भी कारण नहीं पता चला है।

सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हुए बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता शक्ति कपूर ने ‘एबीपी न्यूज़’ से कहा कि उनका दिल रो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सुशांत के आत्महत्या करने की वजह धन या स्टारडम नहीं बल्कि कुछ और ही है। बॉलीवुड के अन्य अभिनेता और उन्हें जानने वाले लोग आत्महत्या वालों बात पर विश्वास करने को तैयार नहीं हैं। लोगों ने 2020 में दुनिया को अलविदा कह चुके सितारों को याद किया।

सुशांत सिंह राजपूत के घर से हाइपरटेंशन और डिप्रेशन की दवाओं के पेपर मिले हैं। हालाँकि, अभी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट नहीं आई है और उनके मृत शरीर को भाभा हॉस्पिटल में ले जाया गया है। रिपोर्ट आने के बाद मौत की वजह पता चल सकेगी। परिणीति चोपड़ा सहित उनकी कई सह-अभिनेत्रियों ने भी उनकी मौत पर दुःख जताया। एमएस धोनी की बयोपिक में सुशांत सिंह के साथ काम कर चुके सानंद शर्मा ने कहा कि सुशांत तब एक तरह से बेचैन रहा करते थे।

काशी-मथुरा पर हिंदुओं की याचिका न करें कबूल, इससे मुस्लिमों के मन में भय पैदा होगा: SC से जमीयत-उलेमा-ए-हिंद

अयोध्या विवाद के निपटारे के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में काशी-मथुरा को लेकर भी याचिकाओं का सिलसिला शुरू हो गया है। हिंदू पक्ष की याचिका के बाद अब मुस्लिम पक्ष भी सुप्रीम कोर्ट पहुँचा है। जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने वकील एजाज मकबूल के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल करके हिंदू पुजारियों की याचिका का विरोध किया है।

जमीयत-उलेमा-ए-हिंद की ओर से दाखिल की गई याचिका में कहा गया है कि हिंदू पुजारियों की याचिका पर नोटिस न जारी किया जाए। उनका कहना है कि मामले में नोटिस जारी करने से मुस्लिम समुदाय के लोगों के मन में अपने इबादत स्थलों के संबंध में भय पैदा होगा।

याचिका में अयोध्या विवाद का संदर्भ देते हुए कहा गया है कि इसके परिणाम के बाद इस तरह की याचिका से मुस्लिमों के मन में भय पैदा होगा, जिससे देश का धर्मनिरपेक्ष ताना-बाना नष्ट होगा। साथ ही जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने कहा है कि उसे संबंधित मामले में पक्षकार बनाया जाए।

हिंदू पुजारियों के संगठन ‘विश्व भद्र पुजारी पुरोहित महासंघ’ ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय में धार्मिक स्थल (विशेष प्रोविजन) एक्ट, 1991 की धारा 4 को चुनौती दी है। इस एक्ट के अनुसार अयोध्या राम जन्मभूमि को छोड़कर अन्य पवित्र स्थलों का धार्मिक चरित्र वैसा ही बनाए रखने का प्रावधान है। इस एक्ट को रद्द कर काशी, मथुरा जैसे हिन्दू स्थल को पुनः प्राप्त करने के लिए हिंदू संगठन कानूनी लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं।

अधिनियम की धारा 4 (1) में कहा गया हैं कि, “यह घोषित किया जाता है कि 15 अगस्त, 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस संप्रदाय का था वो आज, और भविष्य में, भी उसी का रहेगा।” जैसे किसी भी मस्जिद को मंदिर में नहीं बदला जा सकता है और वहीं मंदिर को भी मस्जिद या किसी और धर्म में नहीं बदला जा सकता है। हालाँकि अयोध्या विवाद को इससे अलग रखा गया था, क्योंकि उस पर कानूनी विवाद पहले से चल रहा था।

विश्व भद्र पुजारी पुरोहित महासंघ की तरफ से दाखिल याचिका में कहा गया है कि यह कानून हिंदुओं के अधिकार का हनन करने वाला है। इसे रद्द कर देना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि संविधान का अनुच्छेद 25 लोगों को अपनी धार्मिक आस्था के पालन का अधिकार देता है। संसद इसमें बाधक बनने वाला कोई कानून पास नहीं कर सकती।

महासंघ के अनुसार संसद ने 1991 में एक कानून बनाकर सीधे-सीधे हिंदुओं को उनके अधिकार से वंचित कर दिया। काशी और मथुरा जैसे पवित्र धार्मिक स्थलों पर मस्जिद बनी हुई है। लेकिन संसद ने कानून बनाकर हिंदुओं को विदेशी आक्रमणकारियों की इन निशानियों को चुनौती देने से रोक दिया है। कोर्ट से आग्रह किया गया है कि वह धार्मिक स्थल (विशेष प्रोविजन) एक्ट, 1991 की धारा 4 को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दे।

याचिका में काशी विश्वनाथ एवं मथुरा मंदिर विवाद को लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरू करने की माँग की गई है। याचिका में कहा गया है कि इस अधिनियम को कभी चुनौती नहीं दी गई और न ही किसी अदालत ने न्यायिक तरीके से इस पर विचार किया। अयोध्या विवाद में भी उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने इस पर टिप्पणी की थी।

अश्वगंधा का अश्वमेध: कोरोना की आयुर्वेदिक दवा बनाने के पतंजलि के दावे में कितना दम?

‘बगल में छोरा शहर में ढिंढोरा’ कहावत तो आपने सुनी ही होगी। लेकिन हम कहावतों पर कब ध्यान देते हैं? उन्हें एक कान से सुनते हैं और दूसरे में exhaust fan लगाकर आराम से सो जाते हैं। इसीलिए बगल के छोरे हो हाशिए पर रखकर विलायती छोरे ढूँढने में विशेष रूचि रखते हैं।

लगता है इस बार यही कहावत सच होने जा रही है कोरोना के इलाज के बारे में। हम यहाँ कोरोना की बूटी के इंतज़ार में ऐल्प्स और रॉकी पर्वत शृंखलाओं की ओर टकटकी बाँधे बैठे हैं और पता चला कि हनुमान जी कब के हिमालय से जड़ी-बूटी ले आए।

देखो जी, छोरा बगल में चुपचाप बैठा हो इसलिए किसी को दिख न रहा हो तो फिर भी बात समझ में आती है। लेकिन अगर छोरा ही ढिंढोरा पीट के ये बता रहा हो कि मैं यहाँ बैठा हूँ तो आप उसकी उपेक्षा नहीं कर सकते। पहले तो शहर के ढिंढोरे में उसकी आवाज विलीन हो गई थी, फिर जब पता चला कि शहर भर में कहीं कुछ नहीं मिलने वाला, तब जाकर शहर का ढिंढोरा थमा और और बगल से एक दूसरे शंखनाद की आवाज आई।

दरअसल Covid-19 की वैक्सीन बनाने की विश्वव्यापी जद्दोजहद के बीच भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के क्षेत्र से बड़ी खबर आ रही है। वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हरिद्वार में ‘पतंजलि अनुसंधान संस्थान’ का उद्घाटन किया। विश्व भर में योग और आयुर्वेद का लोहा मनवा चुके स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण द्वारा स्थापित व संचालित पतंजलि का यह अनुसंधान संस्थान अत्याधुनिक विश्वस्तरीय प्रयोगशालाओं से युक्त है। यहाँ साक्ष्य आधारित चिकित्सा (Evidence Based Medicine) पर बल देते हुए वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ उच्च गुणवत्ता वाले नैदानिक अनुसंधान किए जाते हैं।

इसी अनुसंधान संस्थान में Covid-19 के संक्रमण को निष्प्रभावी करने के लिए शोध किए गए और उन प्रयोगों के आधार पर कोरोना के इलाज के लिए आयुर्वेदिक दवा का निर्माण किया गया। इसके माध्यम से अनेक मरीजों की सफल चिकित्सा करने के बाद पतंजलि ने इस दवा का क्लीनिकल ट्रायल शुरू किया, जो इस समय अपने अंतिम चरण में है।

पतंजलि आयुर्वेद के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण के अनुसार उनके द्वारा बनाई गई कोरोना की विशेष दवा का प्रयोग हर आयु वर्ग के और हर एक स्टेज के मरीजों पर किया जा चुका है, जिनमें से लगभग सभी रोगियों में 7-8 दिन में कोरोना नेगेटिव पाया गया और कुछ ही रोगियों को ठीक होने में 12-14 दिन लगे।

इन सब रोगियों का आँकड़ा पतंजलि के पास मौजूद है। किंतु चिकित्सा के क्षेत्र में सबसे बड़ा साक्ष्य होता है क्लीनिकल कंट्रोल ट्रायल। इसलिए इसे पूरी तरह साक्ष्य आधारित दवाई बनाने के लिए इसका क्लीनिकल ट्रायल जरूरी था, जो चल रहा है और इसके नतीजे एक सप्ताह के अंदर-अंदर आने की संभावना है।

नतीजे उत्साहवर्धक हैं, किंतु नैदानिक परीक्षण की प्रक्रिया अपना समय लेती है। उसमें थोड़ा वक्त लगता है। लेकिन अगर NatWest Tri Series के फ़ाइनल मुकाबले में भारत को जीत के लिए तीन ओवर में सिर्फ तीन रन चाहिए होते और पाँच विकेट हाथ में होते तो लॉर्ड्स की बालकनी में शर्ट उतारकर लहराने के लिए सौरव गाँगुली मैच के ख़त्म होने का इंतजार कभी न करते। कुछ खुशियाँ बड़ी होती हैं। उन्हें आप योजनाबद्ध तरीके से व्यक्त नहीं करते, वो अपने आप हो जाती हैं।

शायद इसीलिए नैदानिक परीक्षण (clinical trial) के अंतिम परिणाम की औपचारिक घोषणा से पूर्व ही उत्साहवर्धक परिणामों को देखते हुए बाबा रामदेव ने कोरोना के इलाज में सौ प्रतिशत सफलता मिलने के प्रसन्नतादायक समाचार का ऐलान कर दिया है। आचार्य बालकृष्ण का भी यही दावा है कि जब वो कोरोना औषधि की बात करते हैं तो सिर्फ प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने की बात नहीं करते, बल्कि कोरोना के पूर्ण इलाज की बात कहते हैं।

माना कि मैच ख़त्म होना अभी बाक़ी है लेकिन जीत पक्की है। कड़ी मेहनत और लगन से प्राप्त इस जीत के लिए कप्तान सहित पूरी टीम बधाई की पात्र है।

कोरोना की विश्वव्यापी महामारी में जहाँ लाखों लोग चिकित्सा के आभाव में अपनी जान गँवा चुके हैं और पूरा विश्व एक अभूतपूर्व आपदा से गुजर रहा है। ऐसे में यह अनुसंधान भारत के प्राचीन आयुर्वेद या पतंजलि की उपलब्धि को तो याद रखा ही जाएगा साथ ही मानव सभ्यता की साझा लड़ाई को जीतने में एक महत्तम ऐतिहासिक भूमिका निभाएगा।

आइए इस बड़ी सफलता को थोड़ा करीब से समझें। हाल ही में पतंजलि अनुसंधान संस्थान की ओर से एक शोधपत्र तैयार किया गया- ‘पारंपरिक भारतीय आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति द्वारा नोवल करोना वायरस (Covid-19) के संक्रमण को रोकने हेतु प्रभावी उपचार’। यह शोधपत्र एक अमेरिकी-जर्मन एकडेमिक पब्लिशिंग कंपनी Spring Nature की प्रसिद्ध शोध पत्रिका Virology Journal में प्रकाशनाधीन है, जिसकी मुद्रण पूर्व प्रति को Virology के सर्वर पर देखा जा सकता है।

इस शोधपत्र के अनुसार अश्वगंधा, गिलोय, और तुलसी में उपस्थित प्राकृतिक पादप रसायनों को Covid-19 की संक्रामकता को रोकने में विशेष रूप से प्रभावी पाया गया है। अश्वगंधा में पाया जाने वाला फायटोकेमिकल यानी पादप रसायन ‘विथेनॉन’ Covid-19 वायरस को शरीर की कोशिकाओं में प्रवेश करने से रोकता है और उसकी संक्रामकता को अवरुद्ध करता है।

गिलोय में उपस्थित टीनोकॉर्डीसाइड भी अश्वगंधा जैसे ही आशाजनक परिणाम दिखाता है। जबकि तुलसी में पाया जाने वाला स्कूटैलारिन नामक प्राकृतिक फ्लैवॉन RDRP नाम के उस एंजाइम को अवरुद्ध करता है, जो शरीर में कोरोना विषाणु के बहुलीकरण और उसकी वृद्धि के लिए ज़िम्मेदार है। इस तरह तुलसी शरीर में कोरोना के प्रसार को रोकने में विशेष रूप से कारगर है।

इसके अतिरिक्त पाँच हजार से भी अधिक वर्ष पूर्व महर्षि चरक द्वारा नस्य के रूप में निर्दिष्ट अणु तैल कफ की अधिकता को रोकने और ऊर्ध्वजत्रुगत (ENT) विकारों के उपचार के लिए प्रयुक्त होता है, जिसकी अनुशंसा इस कोविड उपचार में की गई है। इसकी उपयोगिता को देख कर आप भी समझ सकते हैं कि ये कोरोना के इलाज में कितना आवश्यक है।

इन सब के साथ एक और महत्वपूर्ण औषधि है श्वासारि रस, जो श्वसन तंत्र से सम्बंधित रोगों की चिकित्सा में विशेष रूप से प्रभावशाली है। यह फेफड़ों की स्वस्थ ऑक्सीकृत अवस्था को स्थिर रखने मे सहायक है और साथ ही फेफड़ों के शोथ को कम करने में उपयोगी है। इस तरह यह आयुर्वेदिक औषधि श्वास-प्रश्वास पर सीधा असर डालने वाले कोरोना के इलाज में बड़ी भूमिका निभाती है।

इन सब शोधों के आधार पर पतंजलि ने कोरोना के इलाज के लिए एक चिकित्सा व्यवस्था (Treatment Regime) को तैयार किया है। जिसके आशाजनक परिणामों पर शीघ्र ही नैदानिक परीक्षण की मुहर लगने की उम्मीद है। Covid-19 संक्रमणजन्य रोगों के उपचार के लिए आधुनिक चिकित्सा पद्धति के साथ-साथ पारंपरिक चीनी चिकित्सा पद्धति में प्रयुक्त होने वाली औषधियों का प्रयोग भी किया जा रहा है। अब कोरोना की चिकित्सा के लिए ICMR द्वारा निर्धारित एलोपैथिक चिकित्सा के अलावा आयुर्वेदिक औषधियों से चिकित्सा का रास्ता साफ़ हो जाएगा।

पतंजलि अनुसंधान संस्थान द्वारा प्रस्तावित यह दवा रोगी को तो संक्रमण से मुक्त करती ही है, साथ ही स्वस्थ व्यक्ति की कोशिकाओं में भी संक्रमण को प्रवेश करने से रोकती है। यानी अनलॉक के बाद घर से बाहर लोगों के इंतजार में बैठे कोरोना के खिलाफ भी ये औषधि सुरक्षा कवच का काम करेगी। स्वस्थ व्यक्ति में संभावित संक्रमण को प्रवेश करने से रोकना इसका ऐसा पक्ष है जो बड़ी संख्या में लोगों को को आत्मरक्षा हेतु आत्मनिर्भर बनाएगा।

अन्त में नैदानिक परीक्षण (clinical trial) के परिणामों के लिए यही शुभकामना कि अश्वगंधा के कोरोना मुक्ति अश्वमेध का यह अश्व वैश्विक आरोग्य पटल पर आयुर्वेद की दिग्विजय की पताका फहराएगा और ऋषि संस्कृति के निष्काम मानवसेवा भाव के चक्रवर्तित्व को स्थापित करेगा।

महाराष्ट्र सरकार में दरार: पूर्व CM व अभी के मंत्री ने कहा- मुख्यमंत्री ठाकरे से मिलने की कोशिश करेंगे, मुद्दा उठाएँगे

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी सरकार में दरार अब साफ दिख रही है। राहुल गाँधी और बालासाहेब थोराट के बाद अब कॉन्ग्रेस के एक और बड़े नेता ने इस पर मुहर लगाई है। राज्य के कैबिनेट मंत्री और पूर्व सीएम अशोक चव्हाण ने माना है कि गठबंधन सरकार में अनबन है। अशोक चव्हाण ने गठबंधन सरकार में तकरार के लिए ब्यूरोक्रेट्स को जिम्मेदार ठहराया है।

साथ ही चव्हाण ने कहा कि जल्द ही इस मुद्दे को शिवसेना सुप्रीमो और सीएम उद्धव ठाकरे के सामने उठाया जाएगा। चव्हाण ने कहा, “हाँ, महा विकास अघाड़ी के घटक दलों और ब्यूरोक्रेसी के बीच कुछ मुद्दे हैं। हम इस पर सीएम के साथ चर्चा करेंगे। हम सीएम ठाकरे से मिलने की कोशिश कर रहे हैं। हम उनके सामने सभी मुद्दों को विस्तार से उठाएँगे। हम अगले दो दिन में मीटिंग की उम्मीद कर रहे हैं।”

गौरतलब है कि इससे पहले प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री बालासाहेब थोराट ने भी इसी तरह का बयान दिया था। उन्होंने कहा था, “महा विकास अघाड़ी के सहयोगियों में कुछ मुद्दे हैं, जिनका समाधान बातचीत से निकल आएगा। लेकिन हम यह कहना चाहते हैं कि कॉन्ग्रेस को सरकार के निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिकार मिलना चाहिए।”

शनिवार (जून 13, 2020) को RPI के नेता रामदास आठवले ने महाराष्ट्र सरकार को समर्थन देने को लेकर कॉन्ग्रेस को एक बार फिर विचार करने की नसीहत दी थी। आठवले ने कहा था, “कॉन्ग्रेस वह पार्टी है जिसके समर्थन से यह सरकार चल रही है। अगर उसे गठबंधन में अहमियत नहीं मिल रही है तो उसे सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा बने रहने के बारे में सोचना चाहिए।”

इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने कहा था कि उनकी पार्टी महाराष्ट्र में निर्णय लेने की भूमिका में नहीं है। उन्होंने कहा था कि सरकार चलाने और राज्य में सरकार का समर्थन करने के बीच अंतर है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों में निर्णय लेने वाली भूमिका में माना जा सकता है, लेकिन महाराष्ट्र में नहीं।

प्रदेश कॉन्ग्रेस के एक नेता के मुताबिक मुख्यमंत्री NCP के अध्यक्ष, शरद पवार से कोविड-19 वैश्विक महामारी और चक्रवात ‘निसर्ग’ से प्रभावित लोगों को राहत देने समेत अन्य कई मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इससे ऐसी भावना पैदा हो रही है कि प्रदेश कॉन्ग्रेस को अलग-थलग कर दिया गया है।

वहीं कॉन्ग्रेस के एक अन्य मंत्री ने कहा, “कुछ मुद्दों को लेकर पार्टी के अंदर नाराजगी है, जिस पर हम मुख्यमंत्री के साथ चर्चा करना चाहते हैं और उन्हें सुलझाना चाहते हैं।” पार्टी के एक अन्य नेता ने कहा कि जब पिछले साल नवंबर में तीन दलों की सरकार बनी थी और मंत्री परिषद ने शपथ ली थी, उस वक्त यह फैसला हुआ था कि सत्ता एवं जिम्मेदारियों में बराबर साझेदारी होगी।

गौरतलब है कि गठबंधन की तीन सहयोगियों में से एक कॉन्ग्रेस निर्णय लेने की प्रक्रिया और अहम बैठकों में खुद को शामिल कराने का प्रयास कर रही है। प्रदेश कॉन्ग्रेस के नेताओं ने इस हफ्ते की शुरुआत में मुलाकात कर यह चर्चा की थी कि पार्टी नेताओं एवं मंत्रियों को गठबंधन सरकार में निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगी मिलिंद नारवेकर भी कॉन्ग्रेस नेतृत्व के विचारों को जानने के लिए इस बैठक में मुख्यमंत्री के दूत के रूप में उपस्थित थे।

सुशांत सिंह राजपूत ने की आत्महत्या: मृत माँ को लिखा था ‘खत’, आखिरी फिल्म में आत्महत्या न करने का दिया था संदेश

इस साल दुनिया को अलविदा कह के जाने वाले सिने हस्तियों की सूची में सुशांत सिंह राजपूत का नाम भी जुड़ गया है। उन्होंने मुंबई स्थित अपने घर में फाँसी लगा कर आत्महत्या कर ली। उनकी लाश उनकी ही फ्लैट में पंखे से लटकी हुई मिली। घर के नौकर ने पुलिस को ये जानकारी दी। धारावाहिकों में काम करने के बाद सिने जगत में क़दम रखने वाले सुशांत का अकादमिक करियर भी अच्छा रहा था। उन्होंने AIEEE में काफ़ी अच्छा रैंक हासिल किया था।

सुशांत सिंह राजपूत ने सबसे पहले ‘किस देश में है मेरा दिल’ नाम के धारावाहिक में काम किया था पर वो एकता कपूर के धारावाहिक ‘पवित्र रिश्ता’ से लोकप्रिय बने। तत्पश्चात उन्होंने फिल्मों का सफर शुरू किया था। सुशांत फिल्म ‘काय पो छे’ में मुख्य अभिनेता के रूप में दिखे थे। उस फिल्म में उनके अभिनय की तारीफ भी हुई थी। हाल ही में उन्होंने ‘सोनचिड़िया’ और ‘छिछोरे’ जैसी फिल्मों में काम किया था, जिसे समीक्षकों ने सराहा था।

गौर करने वाली बात ये है कि हाल ही में उनकी पूर्व-मैनेजर दिशा सालियान ने आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने मुंबई के मलाड स्थित इमारत में 14 मंजिल से कूद कर आत्महत्या की थी। बोरीवली के एक हॉस्पिटल में उन्हें मृत घोषित किया गया था। उनकी सगाई हो चुकी थी। दिशा की आत्महत्या के लगभग एक सप्ताह बाद सुशांत सिंह राजपूत ने भी आत्महत्या कर ली। दिशा की आत्महत्या का भी कारण नहीं पता चला है।

वहीं सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या का कारण डिप्रेशन बताया जा रहा है। ज्यादा दिन नहीं हुए जब अप्रैल 2020 में अभिनेता इरफान खान और वरिष्ठ अभिनेता ऋषि कपूर जैसे बड़े कलाकारों का निधन हुआ था। वहीं हाल ही में गायक और संगीत निर्देशक वाजिद खान का 42 साल की उम्र में कोरोना संक्रमण से निधन हो गया था। गौरतलब है कि ‘आजतक’ की खबर के अनुसार, सुशांत सिंह राजपूत ने 10 दिन पहले अपनी माँ को पत्र लिखा था।

अपने इंस्टाग्राम अकाउंट के माध्यम से उन्होंने हाल ही में अपनी भावनाएँ व्यक्त की थी, जिसमें भी उनकी निराशा साफ दिख रही है। बता दें कि सुशांत की माँ की साल 2002 में मौत हो चुकी है। तब सुशांत मात्र 16 साल के थे। अपनी माँ को याद करते हुए अपने आखिरी इंस्टाग्राम पोस्ट में माँ को लिखे खत में लिखा था कि आँसुओं से अतीत भाप बन कर उड़ रहा है और सपनों एवं जीवन के बीच बातचीत चल रही है। बांद्रा में सुशांत अपने घर में अकेले रहते थे।

हालाँकि, उनकी एक बहन उनके साथ वहाँ अक्सर होती थी लेकिन अभी ये पता नहीं चल पाया है कि वो कब वहाँ से गई। कहा जा रहा कि पटना में पिता को उनकी बहन ने ही फोन पर सूचना दी। और तब से उनके पिता सदमें में हैं। वो अपने पड़ोसियों से भी बात नहीं कर रहे। सुशांत के परिवार में उनके अलावा उनकी चार बहनें थी जिनमें से एक की पहले ही मौत हो चुकी है। वहीं पुलिस ने मुंबई में सुशांत के पड़ोसियों का भी बयान दर्ज कर रही है। कुछ लोगों का कहना है कि वो पिछले 6 महीनों से डिप्रेशन में थे।

अक्षय कुमार और वीरेंद्र सहवाग जैसे कई हस्तियों ने सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या पर दुःख जताया। अक्षय ने कहा कि हाल ही में उन्होंने सुशांत की फिल्म ‘छिछोरे’ देखी थी और उन्होंने इसके प्रोड्यूसर साजिद खान को बताया था कि वो इस फिल्म का हिस्सा बनना चाहते थे और उन्हें ये खासी पसंद आई। गौर करने वाली बात ये है कि ‘छिछोरे’ में आत्महत्या न करने को लेकर ही महत्वपूर्ण सन्देश दिया गया था।