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फिनलैंड से रवीश कुमार को खुला पत्र: कभी थूकने वाले लोगों पर भी प्राइम टाइम कीजिए

आदरणीय रवीश जी

आदरणीय इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि आपको गालियाँ देते हुए इतने पत्र आते होंगे कि आपने आगे का पत्र पढ़ना बंद ही कर दिया होगा। पर मेरे इस पत्र पर आपका ध्यान खींचना आवश्यक था, इसीलिए ऐसे प्रारम्भ किया। वैसे आज से कुछ समय पहले तक हमेशा आपका आदर ही किया। अन्य न्यूज़ चैनलों को छोड़ कर, हमेशा आपका चैनल ही देखा। प्राइम टाइम के समय का अलार्म भी लगा कर रखा, और जिस दिन स्क्रीन पर आपकी जगह किसी और को पाया, तो उदास भी हुआ।

आपकी राजनीतिक विचारधारा से सहमत नहीं हूँ, फिर भी सदा प्रयासरत रहता हूँ कि आपका दृष्टिकोण समझूँ, आपके चश्मे से हालातों को जानूँ। मदमस्त होकर अंधे समर्थन की जगह, कहाँ कमियाँ रह गईं, कहाँ ध्यान नहीं गया, इत्यादि से परिचित रहूँ। यही कारण था कि अभी तक आपको सुनता-पढ़ता रहा।

आपकी शिकायतों को ऐसे नोट किया, जैसे मैं ही प्रधानमंत्री हूँ, और मुझे ही समाधान करना है। इसी क्रम के चलते आपके कोरोना वायरस पर कवरेज देखे। समस्त राजनीतिक विषयों पर आपके एक तरफ़ा झुकाव के पश्चात भी इस महामारी और राष्ट्रीय संकट के समय पर आपको सुनने का साहस किया, इस भरोसे से कि आप इस कठिन समय में देश के साथ खड़े होंगे, और सरकारों के प्रयत्नों को जन-जन तक पहुँचाएँगे।

निष्पक्ष बनकर त्रुटियों को ढूँढेंगे भी एवं जो प्रयास सराहनीय हैं, उनकी प्रशंसा भी करेंगे। अन्य कुछ करें ना करें, जो कोई इस समय राष्ट्रहित में व्यवहार नहीं कर रहा है, उसकी निंदा तो करेंगे। परंतु आपने वही किया जिसके लिए आप जग प्रचलित हैं। केंद्र और राज्य सरकारों के तत्पर एवं कठोर कदमों की रत्ती भर प्रशंसा किए बिना आप चल पड़े त्रुटियाँ गिनाने, विदेशों से तुलना करने।

मैं अपना परिचय देना भूल गया। मैं यूरोप के फिनलैंड देश में रहता हूँ, कई वर्षों तक स्पेन में भी रहा। मेरे कई मित्र हैं, जो अन्य महामारी प्रभावित देशों में रहते हैं। यहाँ के आँखों देखी अनुभवों के आधार पर आपको आश्वस्त करना चाहता हूँ कि हमारे भारत की रोकथाम को लेकर तैयारियाँ, इतने कम समय में जुटाई गई व्यवस्थाएँ, एवं चिकित्सा कौशल, अन्य विकसित एवं प्रभावित राष्ट्रों से किसी प्रकार से कम नहीं है। अपितु कई मायनों में भारत द्वारा उठाए गए कदम, अद्वितीय हैं, और कई अन्य देशों की कल्पना के बाहर के हैं।

आप अपने कार्यक्रम के द्वारा जानकारी दे रहे हैं कि कैसे अन्य देशों की तुलना में, भारत में इतने कम टेस्ट किए जा रहे हैं। और इस आधार से भारत में यह संख्या सरकारी आँकड़ों से कहीं अधिक होगी। बिलकुल होगी, लेकिन यह एक मात्र हमारे देश में नहीं है। आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि जहाँ मैं रहता हूँ, वहाँ सिर्फ़ और सिर्फ़ बिलकुल साँस ना आने जैसी गम्भीर स्थिति में ही अस्पताल को सम्पर्क करने के निर्देश हैं। इसके अलावा यदि आपको कोरोना वायरस संक्रमण सम्बंधित अन्य लक्षण जैसे तेज बुख़ार, जुकाम इत्यादि होता है, तो चुपचाप घर में बैठे रहने के निर्देश हैं, एवं ऐसी स्थिति में भी संक्रमण की पुष्टि करने वाले टेस्ट करने से डॉक्टर मना कर रहे हैं।

भारत में तो जिस मकान या सामुदायिक मिलन समारोह में किसी एक-दो संक्रमित लोगों की जानकारी मिल रही है, तो पूरे प्रतिभागियों की जाँच या उन पर नज़र रखी जा रही है। एक मित्र से मुझे जानकारी मिली कि उसके सहकर्मी को आवश्यक जाँच के लिए बुलाया गया क्योंकि उसका फ़ोन नेटवर्क पिछले कुछ दिनों में निज़ामुद्दीन के इलाक़े में था, जिससे उसके वहाँ होने एवं उसके और उसके निकटतम लोगों के स्वास्थ्य के सम्भावित खतरे की पुष्टि होती है। ऐसा युद्धस्तरीय प्रबंध अन्य किसी देश की कल्पना के बाहर की बात है, जबकि उन देशों में तो जनसंख्या घनत्व अत्यंत कम है, और व्यवस्था बनाना कई गुना आसान।

आप दिखा रहे हैं कि कैसे जर्मनी इत्यादि में पब्लिक ट्रांसपोर्ट यथावत चल रहा है और वहाँ की सरकार मात्र इस निर्देश से कि कोई दो लोग एक दूसरे के पास ना आएँ, से संकट का सामना कर रही है। क्या आपको लगता है कि भारत देश में भी यही व्यवस्था हो जानी चाहिए? जहाँ लोग चिकित्सा सेवक पर थूक रहे हैं, क्वॉरंटीन वार्ड में आपत्तिजनक एवं अश्लील व्यवहार कर रहे हैं, वहाँ सुगम रूप से सुविधाएँ चला देनी चाहिए?

भारत में जाँच किए जाने वाली संख्या से भारत की कुल जनसंख्या का भाग करके कम प्रतिशत निकाल अन्य देशों से तुलना करना न्यायोचित नहीं है। इन देशों का क्षेत्रफल एवं जनसंख्या हमारे एक राज्य से भी कम है। रही भगदड़ की बात, वह हर जगह होती है। जब अमेरिका ने घोषित किया कि उनके निवासियों को छोड़ किसी अन्य व्यक्ति को यूरोप से आने की अनुमति नहीं है, तब भी भगदड़ मची, यूरोप आए अमेरिकी पर्यटक दस-दस हज़ार डॉलर के विमान टिकट लिए वापिस दौड़े। जबकि यह नियम यूरोप के लोगों के लिए था

उनमें और हम में अंतर मात्र गरीबी का है, भारत की चिंतापूर्ण जनसंख्या का है। जिसके लिए वर्तमान सरकार नहीं, आज तक की सभी सरकारें एवं नागरिक ज़िम्मेदार हैं। अशिक्षा भी सम्बंधित है, पर इसका वर्तमान आपातकाल से सम्बंध नहीं है। इसके प्रति कई वर्षों से प्रयास होना चाहिए था।

रही बात चिकित्सा सामर्थ्य की, तो आपको बता दूँ कि मैं लगभग आधे वर्ष तक स्पेन के कई अस्पतालों में लगातार दाखिल रहा और ग़लत निदान के चलते व्यर्थ की कई शल्य चिकित्साओं से गुजरा। अंततः हार मान, और अपने परिवार से अंतिम बार मिल पाने की इच्छा के चलते भारत आया, और वहाँ के चिकित्सक के कौशल के सहारे स्वस्थ होकर नया जीवन पा सका।

आपका नकारात्मक व्यवहार भारतीयों के मनोबल को तोड़ रहा है। ऐसे समय पर अपेक्षित है कि आप अपने माध्यम से हर सिक्के के दोनों पहलू दिखाएँ। अंततः सनम्र निवेदन है कि कृपया जहाँ यथोचित हो, सराहना भी कीजिए, और राष्ट्र के प्रयासों में बाधा डालते मूर्खों को शिक्षित भी।

बाकी, प्राइम टाइम देखना फिर भी जारी रखूँगा, क्योंकि मुझे गर्व है आप पर कि आप लोगों की भलाई सोचते हैं। बीच में किसी दिन थूकने वालों और वार्ड में अभद्र व्यवहार करने वालों पर भी प्राइम टाइम कीजिएगा। और हाँ! इस काम के लिए निधि कुलपति जी या नग़मा जी को मत भेज दीजिएगा। आप आएँगे तो आपका देशप्रेम सामने आएगा, और उसे दिखाने में झिझक क्यूँ? अंत में, इन कठिन क्षणों में जोखिम उठाकर अपना कार्य करते रहने के लिए आभार।

क्षीरज तैलंग

पाकिस्तान: हिन्दुओं के कई घर आग के हवाले, 3 बच्चों की जिंदा जलकर मौत, एक महिला झुलसी, झोपड़ियाँ खाक

रविवार को पाकिस्तान के सिंध प्रांत में घोटकी के बाहरी इलाके में राजा फार्म क्षेत्र में स्थित झोपड़ियों में आग लगने से कम से कम तीन बच्चे जिंदा जल गए। जबकि एक महिला के बुरी तरह से झुलसने की खबर है। 

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Dunya news ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ये आग अचानक ही लगी और फिर देखते ही देखते फैलती चली गई। इस आग ने पास की कई झोपड़ियों को अपने चपेट में ले लिया। स्थानीय निवासियों ने किसी भी तरह से इस आग पर काबू पाया। मगर तब तक यह आग तीन मासूमों की जान ले चुका था। झोपड़ी के सभी कीमती सामान भी जलकर राख हो गई।  

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जानकारी के मुताबिक जिन झोपड़ियों में आग लगी, और जिनका इससे नुकसान हुआ, वो हिंदू समुदाय के थे। अपनी आजीविका के लिए लोग खेती किया करते थे। आग ने इतनी गृहस्थी को पूरी तरह से तबाह कर दिया। इसमें होने वाले नुकसान का आकलन नहीं किया जा सका है और आग लगने के कारण का भी पता नहीं चल पाया है। हालाँकि कहीं-कहीं पर इसे किचेन से लगी आग भी बताया जा रहा है।

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जिन तीन बच्चों की आग में झुलसने से जिंदा मौत हो गई है, उनमें दो लड़का और एक लड़की बताया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि मृत बच्चों का शव पूरी तरह से जल गया था। जिसकी वजह से उनकी शिनाख्त कर पाना मुश्किल है।

इसके अलावा सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के सिंध में हिन्दुओं के घरों में आग लगाकर जलाए जाने की घटना के बारे में दावा किया जा रहा है। हालाँकि, ऑपइंडिया इसकी पुष्टि नहीं करता है। सोशल मीडिया पर किए गए दावों में कहा गया है कि सिंध के उम्मदे अली रिंद गाँव में केसू गाँधी और अन्य 7 लोगों के घरों को आग के हवाले कर दिया गया। सातों घर जलकर राख हो गए। कहा जा रहा है कि पाकिस्तान में पिछले 24 घंटों में हिंदुओं के घरों को जलाने की ये दूसरी घटना है। वैसे पाकिस्तान में हिंदुओं के ऊपर अत्याचार की खबरें लगातार आती रहती है। ये घटनाएँ भी उसी का एक उदाहरण है।

दिल्ली पुलिस ने औचक किया क्वारंटाइन किए गए लोगों के घरों का दौरा: नियमों का उल्लंघन करने वाले 198 पर FIR दर्ज

दिल्ली में कोरोना होने के शक में क्वारंटाइन किए गए लोगों में से 198 लोगों के ख़िलाफ़ आज पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। खबर है कि ये लोग क्वारंटाइन में रखे गए लोगों के लिए तय नियमों का पालन नहीं कर रहे थे जिसके कारण पुलिस ने ये कदम उठाया।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि ये एफआईआर न केवल पड़ोसियों या परिवार के सदस्यों द्वारा शिकायतों के आधार पर दर्ज की गईं, बल्कि फोन ट्रैकिंग के आधार पर भी दर्ज की गई हैं। इनमें से अधिकतर एफआईआर यानी 198 में से करीब 176 एफआईआर उन मामलों में की गई जिनमें पुलिस ने खुद दौरा किया।

गौरतलब है कि कोरोना के मद्देनजर क्वारंटाइन किए गए लोगों के फोन नंबर दिल्ली के एसएचओ को मुहैया कराए गए थे। जिनका इस्तेमाल क्वारंटाइन किए गए लोगों की मूवमेंट जानने के लिए किया जाना था।

बता दें, दिल्ली पुलिस के पास इस समय में 25 हजार लोगों के नंबर हैं, जिन्हें क्वारंटाइन किया गया। दिल्ली के मुखर्जी नगर की बात करें तो यहाँ कोरोंटाइन किया गया शख्स शाम की सैर करता पाया गया। पुलिस ने फौरन इसके ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज की। इसी तरह एक आदमी को सुबह की सैर करते हिरासत में लिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जिन 198 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई। उनमें से एक एयरहोस्टेस सहित 2 महिलाएँ भी शामिल हैं। एयरहोस्टेस की ट्रैवल हिस्ट्री के कारण उसे क्वारंटाइन किया गया था। मगर, इस बीच वे क्वारंटाइन के नियमों का उल्लंघन करती पाई गई।

जानकारी के अनुसार, इस समय दिल्ली में सिंगापुर और साउथ कोरिया की तर्ज पर फोन ट्रैकिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि देश में महामारी को फैलने से रोका जा सके।

40 डॉक्टरों के लिए खतरा बना एक तबलीगी जमाती: सर्जरी के दौरान छिपाई मरकज़ जाने की बात, अब निकला कोरोना पॉजिटिव

दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज़ से लौटे एक जमाती के कारण पुणे के 40 डॉक्टरों पर कोरोना का खतरा व्याप्त हो गया है। खबर है कि इस जमाती के परिजनों ने सर्जरी के दौरान इसके मरकज़ जाने की बात डॉक्टरों से छिपाई और इलाज के बाद मालूम हुआ कि उसने दिल्ली में हुए कार्यक्रम में शिरकत की थी।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, 31 मार्च को अस्पताल में एक एक्सीडेंट का केस आया जिसे इंटरनल ब्लीडिंग हो रही थी। डॉक्टरों ने इमरजेंसी में उसका इलाज किया। मगर, 2 दिन बाद उसे तेज बुखार आना शुरू हो गया। उसके शरीर का तापमान अचानक बढ़ने लगा। जब डॉक्टरों ने उसकी हालत देखकर माँ से पूछताछ की तो उन्होंने स्वीकारा कि उनका बेटा तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल होने गया था।

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीज के परिजनों ने पहले उसकी ट्रैवल हिस्ट्री से इंकार किया था। इसलिए डॉक्टरों की एक टीम जिसमें नर्स भी थी। उन्होंने इमरजेंसी में उसकी सर्जरी की। लेकिन मरीज को दो दिन बाद बुखार आ गया। अस्पताल के स्टॉफ ने इसके संबंध में उसकी माँ से जानकारी ली। माँ ने ज्यादा जोर देने पर बताया कि उनका बेटा मरकज़ से लौटा था। इसके बाद शुक्रवार को मरीज का सैंपल टेस्ट के लिए भेजा गया और रिपोर्ट आने पर मालूम हुआ कि मरीज कोरोना पॉजिटिव है।

अब जैसै ही ये सूचना आई मरीज को फौरन पिंपरी स्थित वाईसीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं 40 सर्जन और डॉक्टरों को उसके कॉन्टेक्ट में आने के कारण अस्पताल के अलग-अलग कमरों में क्वारंटाइन किया गया। साथ ही उनका सैंपल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में भेजा गया। अब रिपोर्ट आने के बाद स्थिति साफ होगी।

बता दें 40 डॉक्टरों के अलावा अस्पताल के 30 अन्य कर्मचारी भी क्वारंटाइन किए गए हैं। इनमें नर्स, अभिभावक और सफाई कर्मचारी शामिल हैं। इनके सैंपल भी टेस्ट के लिए भेजे गए हैं।

गौरतलब है कि तबलीगी जमातियों के कारण पूरे देश में कोरोना संक्रमितों की तादाद में अकस्मात वृद्धि देखने को मिली है। इन जमातियों ने देश के हर राज्य में पहुँचकर न सिर्फ इसे फैलाया है बल्कि सारे मामले का खुलासा होने के बाद खुद को छिपाए रखने का गुनाह भी किया है। इस समय इन लोगों के कारण करीब 1000 मामलों की पुष्टि हुई है जो कोरोना संक्रमित हैं और जिन्होंने या तो जमात द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की या उनके संपर्क में आए।

आज WHO से लेकर जी-20 तक हमारा कायल: BJP के 40 वर्ष पूरे होने पर PM मोदी के कार्यकर्ताओं से 5 आग्रह

भारतीय जनता पार्टी के 40 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी कार्यकर्ताओं को सम्बोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान उनसे 5 आग्रह किए। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी पार्टी का स्थापना दिवस एक ऐसे कालखंड में आया है, जब देश ही नहीं, पूरी दुनिया, एक मुश्किल वक्त से गुजर रही है। चुनौतियों से भरा ये वातावरण देश की सेवा के लिए, हमारे संस्कार, हमारे समर्पण, हमारी प्रतिबद्धता को और प्रशस्त करता है। उन्होंने दिवंगत नेताओं जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी, एकात्म मानवतावाद के चिंतक पंडित दीन दयाल उपाध्याय और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी याद किया।

पीएम ने कहा कि कोरोना वैश्विक महामारी से निपटने के लिए भारत के अबतक के प्रयासों ने दुनिया के सामने एक अलग ही उदाहरण प्रस्तुत किया है। भारत दुनिया के उन देशों में है जिसने कोरोना वायरस की गंभीरता को समझा और और समय रहते इसके खिलाफ एक व्यापक जंग की शुरुआत की। मोदी ने गिनाया कि भारत ने एक के बाद एक अनेक निर्णय किए, उन फैसलों को जमीन पर उतारने का भरसक प्रयास किया। सभी सरकारों को साथ लेकर आगे बढ़ने में काई कमी न रहे इसकी चिंता की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा:

हर स्तर पर एक बाद एक सक्रियता अपनाते हुए भारत ने कई फैसले लिए। राज्य सरकारों के सहयोग से इन फैसलों को गति भी मिली। भारत ने जिस तेजी और समग्रता से काम किया है, उसकी प्रसंशा सिर्फ भारत ने ही नहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी की है। तमाम देश एकजुट होकर कोरोना का मुकाबला करें, इसके लिए सार्क देशों की विशेष बैठक हो या G-20 देशों का विशेष सम्मेलन, भारत ने इन सारे आयोजनों में अहम भूमिका निभाई है। भारत जैसा इतना बड़ा देश, 130 करोड़ लोगों का ये देश, लॉकडाउन के समय भारत की जनता ने जिस तरह की समझदारी दिखाई है, गांभीर्य दिखाया है, वो अभूतपूर्व है। कोई कल्पना नहीं कर सकता था कि इतने विशाल देश में, लोग इस तरह अनुशासन और सेवा भाव का पालन करेंगे।

पीएम मोदी ने इस दौरान एक श्लोक की चर्चा की। उन्होंने कहा- “समानो मंत्र: समिति: समानी। समानम् मनः सह चित्तम् एषाम्।” इसका अर्थ है कि हमारे विचार, हमारे संकल्प और हमारे हृदय एकजुट होने चाहिए। उन्होंने ‘9 बजे 9 मिनट’ के तहत रविवार (अप्रैल 5, 2020) की रात लोगों द्वारा दिए और कैंडल जलाने की बात करते हुए इसे सफल बताया। उन्होंने कहा कि हर वर्ग, हर आयु के लोग, अमीर गरीब, पढ़ा-लिखा हो, अनपढ़ हो, सभी ने मिलकर, एकजुटता की इस ताकत को नमन किया, कोरोना के खिलाफ लड़ाई का अपना संकल्प और मजबूत किया।

उन्होंने याद दिलाया कि ये लंबी लड़ाई है, जिसमें न थकना है, न हारना है। लंबी लड़ाई के बाद भी जीतना है। विजयी होकर निकलना है। उन्होंने कहा कि आज देश का लक्ष्य एक है, मिशन एक है, और संकल्प एक है- कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में जीत। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से निम्नलिखित 5 आग्रह किए:

  1. गरीबों को राशन के लिए अविरत सेवा अभियान।
  2. अपने साथ ही आप 5-7 अन्य लोगों के लिए फेस-कवर बनवाएँ और उनका वितरण करें।
  3. धन्यवाद अभियान के लिए पार्टी ने पाँच अलग-अलग वर्ग बनाए हैं। पहला वर्ग- नर्सेस और डॉक्टर्स, दूसरा वर्ग- सफाई कर्मचारी, तीसरा वर्ग– पुलिसकर्मी चौथा वर्ग- बैंक और पोस्ट ऑफिस के कर्मचारी, पाँचवाँ वर्ग- आवश्यक सेवाओं में जुटे हुए सभी कर्मचारी।
  4. ज्यादा से ज्यादा लोगों को ‘आरोग्य सेतु ऐप’ के विषय में जानकारी दें और कम से कम 40 लोगों के मोबाइल में ये ऐप इंस्टॉल भी करवाएँ।
  5. प्रत्येक भाजपा कार्यकर्ता को खुद भी सहयोग करना है और 40 अन्य लोगों से भी पीएम केयर्स फंड में सहयोग करने के लिए प्रेरित करना है।

प्रधानमंत्री इस दौरान ये भी याद दिलाना नहीं भूले कि आज पूरी दुनिया के लिए एक ही मंत्र है- सोशल डिस्टेंसिंग और अनुशासन का पूरा पालन करना। उन्होंने उम्मीद जताई कि भाजपा का हर कार्यकर्ता खुद की रक्षा करते हुए, अपने परिवार को भी सुरक्षित करेगा और इस देश को भी सुरक्षित करेगा। वहीं भाजपा के स्थापना दिवस पर पूर्व अध्यक्ष अमित शाह, वर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित अन्य नेताओं ने भी कार्यकर्ताओं को धन्यवाद दिया।

पिछले 2 हफ्तों में 15 ऐसे मामले जब तबलीगी जमातियों, मुस्लिमों ने स्वास्थ्यकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों की नाक में किया दम

ऐसे समय में जब स्वास्थ्यकर्मी और सुरक्षाकर्मी अपनी जान को जोखिम में डालकर कोरोना से लड़ने के लिए तत्पर हैं। उस समय तबलीगी जमात से निकली मुस्लिम भीड़ लगातार इन योद्धाओं पर हमलावर रही है। ये मुस्लिम भीड़ कभी स्वास्थ्यकर्मियों पर थूककर तो कभी उनके साथ मारपीट करके अपने जाहिलपने का लगातार उदहारण पेश कर रही हैं।

हालत ये हो गई है कि ये लोग जिन्हें प्रशासन स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाने की कोशिशों में जुटा है, वे लोग उनके लिए सिरदर्दी का सबब बन गए हैं। इनके बेहूदे रवैये से इस समय न केवल अस्पताल प्रशासन बल्कि पुलिस प्रशासन भी त्रस्त है। इतना ही नहीं, तबलीगी जमातियों के अलावा कई जगह इसी समुदाय के लोग न केवल कानूनों को उल्लंघन करते बल्कि पुलिस के साथ आसामाजिक व्यवहार करके उन्हें घायल करते भी पाए गए।

आइए, पिछले दिनों हुए उन 15 मामलों पर एक बार नजर डालें जब मुस्लिमों ने लॉकडाउन को तो तोड़ा ही। साथ में स्वास्थ्यकर्मियों और पुलिसकर्मियों पर भी पत्थरबाजी व उनके साथ मारपीट की।

  1. अलीगढ़ में सराई रहमान मस्जिद में गुरुवार (मार्च 2, 2020) को लॉकडाउन का उल्लंघन करते हुए 25-30 मुस्लिम लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई। जब पुलिस इन्हें रोकने पहुँची और इनसे अपील की, तो वहाँ स्थानीय लोगों ने पुलिस पर हमला कर दिया। इस हमले में 2 पुलिसकर्मी घायल हो गए। बाद में पुलिस ने एक्शन लेते हुए 3 मौलवियों को गिरफ्तार किया।
  2. यूपी के कन्नौज में शुक्रवार को मुस्लिमों की भीड़ जामा मस्जिद में नमाज अता करने एकत्रित हुई। जब पुलिस कर्मी इन्हें रोकने पहुँचे तो इन्होंने भी पुलिस पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए और उनपर कुल्हाड़ी से हमला किया। इस हमले में चौकी इंचार्ज समेत 2 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि इन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
  3. यूपी के मुजफ्फरनगर के मोरना गाँव में भी ऐसी ही घटना सामने आई थी। जहाँ लॉकडाउन का पालन कराने पहुँची पुलिस पर ग्रामीणों ने लोहे की रॉड से हमला किया और सब इंस्पेक्टर सहित कॉन्स्टेबल को जख्मी कर दिया।
  4. इसके बाद उत्तरप्रदेश के मैनपुरी में भी सामूहिक नमाज रोकने पहुँची पुलिस की अवहेलना की गई। जानकारी के मुताबिक जब इंस्पेक्टर फहुप सिंह पुलिस सूचना के आधार पर मस्जिद पहुँचे तो वहाँ पर मस्जिद का गेट ही नहीं खोला गया और पुलिस की कोशिशों पर भीड़ में रोष उत्पन्न हो गया।
  5. 24 मार्च को भी सामूहिक नमाज अता करने से रोकने पर यूपी के मेरठ पर हंगामा हुआ था। बाद में कई संख्या में मुस्लिम सड़कों पर आ गए थे। खबरों के मुताबिक, सीसगंज, सेफ्टी टैंक, राजबंध मार्केट, कोतवाली, लिसाड़ी गेट और नौचंदीन के मस्जिदों पर लोग इकट्ठा हुए थे और पुलिस की अपील के बावजूद माहौल को बिगाड़ा था। उनकी अवहेलना की थी।
  6. इंदौर के टाटपट्टी बाखल में कोरोना पॉजिटिव केस पाए जाने के बाद इलाके की जाँच करने पहुँची पुलिस और स्वास्थ्यकर्मियों पर मुस्लिमों ने हमला कर दिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक उनपर छतों से भी हमले हुए थे और यहाँ बैरिकेडों को भी तोड़ दिया गया था। बाद में जब पुलिस ने एक्शन लेना चाहा तो इन लोगों ने औरतों की आड़ ले ली थी।
  7. इससे पहले मोहम्मद फैजल नाम के फेसबुक यूजर ने दरभंगा के डीएम त्यागराजन एसएम को जान से मारने के लिए धमकाया था। साथ ही डीएम को मारने वाले शख्स को 2 लाख देने की घोषणा की थी। डीएम पर फैजल का ये रोष सिर्फ़ इसलिए सामने आया था क्योंकि उन्होंने जिले में घोषणा की थी कि यदि कोई बाहर से आया है तो उसकी स्क्रीनिंग की जाएगी और उन्होंने अपील की थी कि जो भी बाहर से आए हैं कि कृपया खुद आगे आकर टेस्ट कराएँ।
  8. बिहार के मधुबनी में भी तबलीगी जमात से आए लोगों को खोजने के अभियान में पुलिस पर हमला किया गया था। इस संबंध में 3 लोग गिरफ्तार हुए थे। इस वाकए में पुलिस वालों पर न केवल पत्थरबाजी हुई थी बल्कि उनपर गोलीबारी भी हुई थी। घटना गीदड़गंज में अंधरढाणी में घटी थी।
  9. 1 अप्रैल को महाराष्ट्र के अहमदनगर में ऐसी घटना हुई। यहाँ नमाजियों ने कोरोना वायरस की जाँच करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को यह कहकर खारिज कर दिया कि वे सीएए-एनआसी के लिए डाटा एकत्रित करने आई हैं। इसके बाद वहाँ स्वास्थ्यकर्मियों को उनकी जाँच-पड़ताल करने से भी रोका गया जो मरकज़ में गए लोगों के संपर्क में आए थे।
  10. कर्नाटक के हुब्बाली जिले में भी लोगों को सामूहिक नमाज अता करने से रोकने पर पुलिस पर हमला हुआ था। इस वाकए में 4 पुलिस अधिकारियों समेत 1 महिला कॉन्स्टेबल घायल हुई थी। जानकारी के अनुसार लॉकडाउन की बंदिशों के बीच कुछ लोग मंतुर रोड पर नमाज अता करने के लिए इकट्ठा हुए थे। जब प्रशासन को इसकी सूचना मिली तो वे इन्हें रोकने गए। लेकिन पत्थरबाजी कर इन्होंने सुरक्षाकर्मियों को ही चोटिल कर दिया। बाद में जानकारी करने पर मालूम हुआ कि एक स्थानीय महिला ने कुछ युवकों के साथ मिलकर इस काम को अंजाम दिया।
  11. बंगलुरू में भी ऐसी घटना हुई। यहाँ भीड़ ने नर्स और आशा वर्कर को निशाना बनाया। ये स्वास्थ्यकर्मी गुरुवार को संदिग्धों की शिनाख्त करने गए थे। मगर वहाँ नमाज के लिए इकट्ठा भीड़ ने उनपर हमला कर दिया और आशा वर्कर द्वारा तैयार की गई सभी रिपोर्टों को फाड़ दिया।
  12. गाजियाबाद के अस्पताल में तबलीगी जमात से लौटे जमातियों की करतूत तो अब हर जगह वायरल हो गई है। यहाँ जमाती नर्सों के सामने अपनी पैंट उतारके घूमते, अश्लील बातें करते और गाना गाते देखे गए थे। इसकी शिकायत अस्पताल के सीएमओ ने खुद की थी। बाद में यहाँ से स्वास्थ्यकर्मियों पर थूकने का मामला भी आय़ा था।
  13. आगरा में भी तब्लीगी जमातियों के जत्थे द्वारा अस्पताल प्रशासन के साथ असामाजिक बर्ताव करने की खबर आई थी। मालूम हुआ कि यहाँ 89 जमातियों को आइसोलेशन सेंटर में कोरोंटाइन किया गया। मगर, जमातियों ने यहाँ नखरे दिखाने शुरू कर दिए और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए मुश्किल स्थिति उत्पन्न की। इन्होंने गैर मसालेदार खाना खाने से मना किया और बीफ बिरयानी की माँग की।
  14. 4 अप्रैल को कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में रखे गए जमातियों द्वारा स्वास्थ्यकर्मियों से बदसलूकी की गई। इन्होंने न केवल मेडिकल स्टॉफ से अकड़ के बात की। बल्कि अस्पताल के परिसर में थूका भी। इसके बाद बार-बार मना करने के बावजूद इन्हें अस्पताल में इकट्ठा होते भी देखा गया। अस्पताल प्रशासन ने इनपर आरोप लगाया कि तबलीगी जमात ने अस्पताल के सभी नियमों को तोड़ा है और सोशल डिस्टेंसिंग को भी मेंटेन नहीं किया। इन्होंने ट्रीटमेंट के दौरान नखरे दिखाए और स्टॉफ के लिए परेशानी का कारण बने।
  15. तबलीगी जमात में शामिल होने वाले कुछ जमातियों अहमदाबाद के सोना सिविल अस्पताल में भी हल्ला मचाया। इन्होंने यहाँ दवाई और इंजेक्शन लेने से मना कर दिया और इल्जाम लगाया कि अस्पताल प्रशासन उन्हें मारना चाहता है। बता दें यहाँ 26 जमातियों पर आरोप लगा है कि आइसोलेशन में रखे जाने के बावजूद इन्होंने अपनी मनमानी की और नियमों का उल्लंघन कर एक जगह एकत्रित हुए।

गौरतलब है कि इस समय तबलीगी जमात में शामिल होकर अलग-अलग राज्य में पहुँचे मुस्लिम हर राज्य की सुरक्षा के लिए बड़ी चिंता का विषय बने हुए हैं। प्रशासन जितना इन्हें ढूँढकर परेशानी से निजात पाने की कोशिश कर रही हैं। ये लोग उतना खुद को छिपाए फिर रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक अब तक अधिकांश कोरोना संक्रमितों में जमातियों की तादाद सबसे अधिक है और इनमें से कुछ की स्थिति गंभीर होने के कारण मौत हो गई है। जबकि कुछ का इलाज जारी है। अभी कल दिल्ली की सड़कों पर खुलेआम घूमते पुलिस ने दो जमातियों को पकड़ा। इनमें से एक की हालत बेहद गंभीर थी। जमाती पश्चिम बंगाल का बताया गया था।

राजस्थान में मंदिर में दीपक जलाने पर दो समुदायों में विवाद: सद्दाम, शाहरुख, जावेद, अरशद, एजाज और जाबिर ने की पत्थरबाजी

कोरोना वायरस के विरुद्ध लड़ाई में पूरा देश एक बार फिर एकजुट हो गया। इस महामारी के अंधकार को चुनौती देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर देश के 130 करोड़ लोग रात नौ बजे नौ मिनट के लिए दीये जलाए। दिल्ली एनसीआर से लेकर देश के कोने-कोने से लोगों ने घरों के बाहर दीये और मोमबत्ती जलाकर ये संदेश दिया कि वो कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एकजुट हैं। हालाँकि, इस दौरान राजस्थान में दीया जलाने पर विवाद की घटना सामने आ रही है।

राजस्थान के सीकर के हेतमसर गाँव में कुछ ग्रामीण दीपक जला रहे थे, तो दूसरे समुदाय के कुछ लोगों ने जान बूझकर उनके ऊपर पत्थरबाजी करनी शुरू कर दी। जिसमें दीपक जलाने वाले लोग बुरी तरह घायल हो गए। थानाधिकारी उमाशंकर शर्मा ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि हेतमसर के प्रवेश पर माली समाज के पाँच-छह घरों की ढाणी है, जहाँ स्थित बालाजी मंदिर में प्रधानमंत्री के आह्वान पर रूकमानंद सैनी, मनोज सैनी, जीनकूदेवी, कैलाश, सुशील कुमार तथा भागूराम द्वारा दीपक जलाए जा रहे थे। तभी अचानक सद्दाम, शाहरुख, जावेद, अरशद, एजाज, जाबिर ने आकर उनसे दीपक जलाने से मना किया। इस पर विवाद शुरू हो गया। जिसके बाद उन लोगों ने दीपक जलाने से मना करते हुए उन पर पथराव करना शुरू कर दिया।

अचानक पत्थरबाजी की घटना से रूकमानंद सहित सैनी परिवार बुरी तरह से डर गया तथा चिल्लाने लगा। उनकी आवाज सुनकर ग्रामीण इकट्ठा हो गए। ग्रामीणों को इकट्ठा होता देख आरोपित फरार हो गए। मामले की जानकारी मिलने पर फतेहपुर डीएसपी ओमप्रकाश किलानियां के नेतृत्व में रामगढ़ व फतेहपुर से पुलिस दस्ता पहुँचा और आरोपितों की तलाश शुरू की। 

बताया जा रहा है कि मंदिर पर की गई पत्थरबाजी के दौरान शीशे की कई वस्तुएँ भी टूट गई है। पुलिस ने मामले में एक युवक को हिरासत में ले लिया है बाकी अन्य आरोपितों की तलाश की जा रही है। इस घटना के बाद से गाँव में सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया है।

गौरतलब है कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 मार्च की रात 9 बजे 9 मिनट के लिए देशवासियों से एक खास अपील की थी। कोरोना वायरस के खिलाफ देश की एकजुटना प्रदर्शित करने के लिए पीएम ने सुझाव दिया था कि इस वक्‍त 9 मिनट के लिए घरों की बत्तियाँ बुझा दी जाएँ। उसकी जगह दीयें, मोमबत्‍ती, टॉर्च, मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाएँ।

‘जहीर खान हिन्दू है, जोरु का गुलाम है’ – PM की अपील पर दीये जलाए तो पत्नी के धर्म को लेकर कट्टरपंथियों ने दी गाली

कोरोना वायरस की जंग में पीएम मोदी की अपील पर पाँच अप्रैल को रात नौ बजे नौ मिनट के लिए तमाम देशवासियों ने कैंडल, दीप, टॉर्च, मोबाइल का फ्लैश लाइट जलाकर इस बात का परिचय दिया कि पूरा देश इस महामारी से निपटने में एक साथ खड़ा है। प्रकाश का यह नजारा देखकर ऐसा लग रहा था जैसे रात दिवाली का उत्सव हो। देश के तमाम लोगों की तरह भारतीय क्रिकेटर्स ने भी इस अभियान में हिस्सा लिया और अपने-अपने तरीके से दीप जलाए। भारतीय क्रिकेटर्स ने भी दिखाया कि इस संकट की घड़ी में वो भी तमाम देशवासियों के साथ हैं। 

कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में पीएम मोदी की अपील पर पूर्व भारतीय क्रिकेटर जहीर खान ने भी दिया जलाया, जिसकी तस्वीरें उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट की। हालाँकि, कुछ कट्टरपंथियों को जहीर खान का दीया जलाना रास नहीं आया। वो जहीर खान को दीया जलाते देख आग-बबूला हो गए और सोशल मीडिया पर जमकर उल्टा-सीधा कमेंट कर जहर उगलने लगे। कई यूजर्स ने तो उन्हें इसके लिए गालियाँ भी दी।

जहीर खान के पोस्ट पर कट्टरपंथियों का जहर

वैसे ज्यादातर लोग जहीर खान की तारीफ ही कर रहे हैं। बस कुछ चंद कट्टरपंथी ही विरोध कर रहे हैं। साकिब तंजील नाम के एक युवक ने जहीर खान की फोटो पर कमेंट करते हुए लिखा, “तुम मरकज के साथ क्यों नहीं खड़े होते हो?” साद खान जैसे कई अन्य यूजर ने साकिब तंजील के कमेंट का समर्थन किया। वहीं असद पठान ने कहा, “अंधभक्तों की तरह तुम भी दिया जला रहे हो।” मोहम्मद तस्लीम ने लिखा, “दुख है!!! एक और मु###न मोदी भक्त है। वाह मोदी जी वाह, एक और मुस्लिम पे जादू कर दिए।” इतना ही नहीं, दीप जलाने को लेकर जुनैद अहमद नाम के यूजर ने तो जहीर खान को जोरु का गुलाम तक कह दिया। उसने लिखा, “जहीर खान हिन्दू है, जोरु का गुलाम है।”  

जहीर खान के अलावा भारतीय क्रिकेटर्स में विराट कोहली, केएल राहुल, हार्दिक पांड्या, सुरेश रैना, हरभजन सिंह, शिखर धवन, आर अश्विन और रवि शास्त्री ने दीए जलाए तो वहीं पीवी सिंधू और साइना नेहवाल ने भी इस पावन काम में सबसे साथ खड़ी नजर आईं। इन सब खिलाड़ियों ने सोशल साइट पर वीडियोज भी शेयर किए।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 मार्च की रात 9 बजे 9 मिनट के लिए देशवासियों से एक खास अपील की थी। कोरोना वायरस के खिलाफ देश की एकजुटना प्रदर्शित करने के लिए पीएम ने सुझाव दिया था कि इस वक्‍त 9 मिनट के लिए घरों की बत्तियाँ बुझा दी जाएँ। उसकी जगह दीयें, मोमबत्‍ती, टॉर्च, मोबाइल की फ्लैश जलाएँ।

मलेशिया भागने की फिराक में थे 8 तबलीगी जमात के सदस्य, स्पेशल फ्लाइट में बैठने से पहले IGI एयरपोर्ट पर धराए

तबलीगी जमात से जुड़े लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज में तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए आठ मलेशियाई नागरिकों के इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इमीग्रेशन अधिकारियों ने दबोच लिया। ये सभी एक विशेष उड़ान के जरिए देश से भागने की कोशिश कर रहे थे। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

ये सभी लोग दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में छुपे हुए थे। अधिकारियों ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान भारत में फँसे अन्य मलेशियाई नागरिकों को स्वदेश पहुँचाने के लिए मलेशियाई उच्चायोग द्वारा विशेष विमान की व्यवस्था की गई थी। इन 8 जमातियों ने इस विशेष उड़ान का अनुचित लाभ उठाने की कोशिश की।

मलेशिया के सभी आठ जमाती रविवार को भारत से मलेशिया जाने वाली मेलिंडो एयरवेज फ्लाइट पकड़ने वाले थे, लेकिन उन्हें फ्लाइट में चढ़ने से रोक दिया गया क्योंकि केंद्र सरकार ने सभी राज्य पुलिस फोर्स को निर्देश दिया है कि वे उन विदेशियों के खिलाफ कार्रवाई करें, जो टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे और तबलीगी जमात के कार्यक्रम में भाग लिया था। सरकार ने पर्यटक वीजा पर भारत आकर तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए विदेशी नागरिकों के देश छोड़ने पर पाबंदी लगा रखी है।

सरकार ने पहले ही वीजा नियमों के उल्लंघन को लेकर तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल होने वाले 960 विदेशियों को काली सूची में डालते हुए उनका वीजा रद्द कर दिया है। पकड़े गए आठ मलेशियाई नागरिकों को इमीग्रेशन अधिकारियों ने दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दिया। अधिकारियों ने बताया कि इन सभी को क्वारंटाइन में रखा जाएगा।

बता दें कि 21 दिनों के लॉकडाउन के बावजूद दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज में रहने वाले 2300 से अधिक जमातियों के पाए जाने के बाद विदेशी तबलीगी जमात के खिलाफ यह कार्रवाई की गई। इन 2300 जमातियों में से तकरीबन 250 विदेशी थे। तबलीगी जमात का यह मजहबी कार्यक्रम कोरोना वायरस के प्रसार का बड़ा कारण बना। पिछले महीने निजामुद्दीन मरकज के मजहबी सभा में कम से कम 9,000 लोगों ने हिस्सा लिया था, जिसके बाद कई लोग मजहब के प्रचार के लिए देश के विभिन्न हिस्सों की यात्रा कर चुके हैं।

इस मजहबी सभा में 41 देशों के नागरिकों ने हिस्सा लिया था। जिसमें 379 इंडोनेशिया के, 110 देश बांग्लादेश के, 77 किर्गिस्तान के, 75 मलेशिया के, 65 थाई के, 63 म्यांमार के और 33 श्रीलंका के नागरिक शामिल थे। देश में अब तक 400 से ज्यादा कोरोना पॉजिटिव केस और लगभग 15 मौतें निजामुद्दीन मरकज से जुड़ी हुई पाई गईं हैं।

गृह मंत्रालय ने इनके खिलाफ विदेशी कानून और आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई करने के लिए दिल्ली पुलिस और अन्य राज्यों के पुलिस प्रमुखों से भी पूछा था कि ये विदेशी फिलहाल कहाँ रह रहे हैं। गृह मंत्रालय ने बताया था कि 1 जनवरी से लेकर अब तक लगभग 2,100 विदेशी भारत आए हैं और देश के विभिन्न हिस्सों में तबलीगी गतिविधियों में शामिल हुए हैं।

100 लोगों को जमा कर पादरी सबको एक ही जार से पिला रहा था शराब, नहीं पहना था किसी ने भी मास्क: गिरफ्तार

आँध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में स्थित रयावरम गाँव से रविवार (मार्च 5, 2020) को एक पादरी हिरासत में लिया गया। पादरी पर आरोप है कि उसने लॉकडाउन के बीच 100 से अधिक लोगों को एक जगह इकट्ठा कर प्रार्थना करवाई। ये कार्यक्रम इसाइयों के पवित्र सप्ताह शुरू होने से पहले आयोजित किया गया।

घटनास्थल पर रेड मारने वाले पुलिस का कहना है कि प्रार्थनास्थल पर इकट्ठा लोगों में से किसी ने भी मास्क नहीं पहना था। और सभी एक ही जार से शराब पी रहे थे। जिसे देखने के बाद पुलिस ने सभी एकत्रित हुए लोगों को उनके घर भेज दिया और बाद में पादरी को कस्टडी में लेकर उस पर कार्रवाई की।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पादरी की पहचान विजय रत्नम के रूप में हुई। इसके ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 188 (लोक सेवक द्वारा विधिवत आदेश देने की अवज्ञा) और 270 ( खतरनाक बीमारी फैलने की संभावना) के तहत एवं महामारी संबंधित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ।

ये मामला उस समय सामने आया है जब फेडरेशन ऑफ तेलुगु चर्च (FTC) तक ने पिछले हफ्ते ये ऐलान किया था कि प्रशासन का साथ देते हुए चर्चों की सभी सभाओं को अगले आदेश तक रोक दिया गया है।

बता दें कि आंध्र प्रदेश में रविवार को 26 नए मामले सामने आए हैं। जिसके बाद राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या 252 हो गई है। इनमें से 11 केस पूर्वी गोदावरी जिले के हैं। राज्य सरकार ने कोरोनो वायरस संक्रमित पाए जाने वाले लोगों के इलाकों को रेड अलर्ट पर रखा है और साथ ही व्यापक स्तर पर उनकी देखरेख की जा रही है कि सभी लोग सही से कोरोंटाइन हैं या नहीं। जानकारी के अनुसार, राज्य में केवल विजयनगरम और श्रीकाकुलम एकमात्र जिले हैं, जहाँ कोविड ​​-19 के मामले अभी तक नहीं हैं।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली के निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद कई लोग 20 मार्च को राज्य में लौटे थे। इसी के बाद यहाँ कोविड-19 के अधिक मामले आए और अचानक संक्रमित केसों में बढ़ोतरी हुई।