एक तरफ जहाँ जगह-जगह क्वारंटाइन सेंटर में जमाती स्वास्थ्यकर्मियों से बदसलूकी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यूपी की राजधानी लखनऊ के कसाईबाड़ा इलाके में स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ बदसलूकी की है। बता दें कि इसी इलाके से पिछले दिनों करीब 12 जमाती कोरोना पॉजिटिव मिले थे।
देश में कोरोना के नए मामलों में आधे के लिए जिम्मेदार तबलीगी जमात के लोग और उनके समर्थकों द्वारा कई अस्पतालों में महिला स्टाफ के साथ बदतमीजियाँ करने के बाद अब लखनऊ में मेडिकल टीम पर हमला बोल दिया। रविवार (अप्रैल 5, 2020) को जब स्वास्थ्यकर्मियों की टीम लखनऊ के कसाईबाड़ा में सर्वे के लिए पहुँची तो इनके ऊपर हमला कर दिया गया, दस्तावेजों को फाड़ने की कोशिश की गई।
इतना ही नहीं, अपनी जान की परवाह किए बगैर दिन-रात इनके इलाज में जुटी इन मेडिकल टीम के सदस्यों को स्थानीय लोगों ने दौड़ा दिया। गिरते-पड़ते किसी तरह टीम वहाँ से जान बचाकर भागी। भीड़ इतनी उग्र थी कि उनके पास भागने के अवाला कोई और विकल्प नहीं था। पहले तो स्थानीय लोगों ने गाली-गलौज की और फिर इन पर हमला कर दिया। इस घटना के बारे में बताती हुई मेडिकल टीम की महिला सदस्यों ने कहा कि जब वो लोग वहाँ पर सर्वे के लिए पहुँचे तो उन लोगों ने अभद्रता की। टीम की सदस्य ने जब उनसे मकान नंबर और किसी के आने की जानकारी माँगी तो गाली-गलौज करने लगे और कहा कि जाओ यहाँ से, कुछ नहीं बताएँगे।
वो आगे बताती हैं कि कुछ लोगों ने तो पत्थरबाजी करने के लिए पत्थर भी उठा लिए थे हाथ में। वो लगातार यही कह रहे थे कि तुम लोग यहाँ से जाओ, हमें स्वास्थ्य विभाग से कोई मतलब नहीं है। इन लोगों के इस तरह के अभद्र व्यवहार की वजह से स्वास्थ्यकर्मियों के लिए काम करना काफी मुश्किल हो रहा है। जानकारी के मुताबिक सदर के कसाईबाड़ा के पास मजिस्द से कई जमातियों को पकड़ा गया था।
इनकी जाँच में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार इलाके में जा रही है। लोगों को कोरोना से बचाव के बारे में जानकारी दे रही है। लोगों को जागरुक किया जा रहा है। जिन लोगों में कोरोना के लक्षण नजर आ रहे हैं, उनके नमूने एकत्र कर जाँच के लिए भेजा रहा है। साथ ही उन्हें क्वारंटाइन कराया जा रहा है। इसी क्रम में जब रविवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुँची तो स्थानीय लोगों ने टीम के सदस्यों से अभद्रता की। सीएमओ डॉ नरेंद्र अग्रवाल ने कहा है कि इसकी जाँच कराई जाएगी।
वहीं आँकड़ों की बात करें तो जमात से लौटे लोग कोरोना के सबसे बड़े वाहक के रूप में सामने आ रहे हैं। दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज से निकले कोरोना संदिग्ध पूरे देश के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। दिल्ली और यूपी के कई अस्पतालों के डॉक्टरों ने शिकायत की है कि जमात के लोग जाँच और इलाज कराने में मनमानी कर रहे हैं। कानपुर में जमातियों से परेशान डॉक्टरों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पूरे मामले की रिपोर्ट भेजी। इसमें कहा गया कि ये लोग सोशल डिस्टेंसिंग का मजाक उड़ा रहे हैं। इसका एक वीडियो भी सामने आया था।
वीडियो में जमात के लोग सोशल डिस्टेंसिंग को ताक पर रखकर एक साथ जमा होते हैं और फिर समूह में नमाज अदा करते हैं। वहीं एक अन्य वीडियो में वो डॉक्टर के साथ बहस और बदतमीजी करते हुए नजर आते हैं। उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन एक मजबूत कदम के रूप में सामने आया था। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग एकमात्र उपाय है। पिछले दिनों रिपोर्ट भी आईं थीं कि भारत जैसे देश में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ने का औसत गंभीर रूप से प्रभावित और विकसित देशों से काफी कम है।
ऐसे में ये 21 दिनों का लॉकडाउन देश को सुरक्षित रास्ते पर ले जा रहा था। लेकिन तबलीगी जमात के आयोजनों ने एक बड़ी समस्या खड़ी कर दी है। मरकज में विदेशियों सहित दो हजार से ज्यादा लोग इकट्ठा थे। इनमें से सैकड़ों संक्रमित पाए गए हैं।
कोरोना वायरस के बीच सबसे बड़ा नाम बनकर उभरा तबलीगी जमात का मुखिया मोहम्मद साद कंधालवी फरार है। हालाँकि जमात का खुलासा होने के बाद और साद की ऑडियो वायरल होने के बाद सबके सामने इसे लेकर स्थिति साफ है। मगर फिर भी कुछ इस्लामिक कट्टरपंथी ऐसे हैं, जो इस समय में भी मौलाना की छवि निर्माण करने में जुटे हैं। दरअसल, नोटिस जारी होने के बाद से अंडरग्राउंड हुए साद को लेकर व्हॉट्सअप पर खबरें फैलाई जा रही है कि उसने कोरोना से लड़ने के लिए पीएम रिलीफ फंड में 1 करोड़ रुपए का दान दिया।
इस खबर को प्रमाणिक बताने के लिए एक अखबार की कटिंग भी शेयर की जा रही है और धड़ल्ले से इसे सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है। न्यूज़लेटर नाम के अखबार की इस कटिंग पर मोहम्मद साद की फोटो लगी हुई है और इसके मुख्य पृष्ठ पर हेडलाइन है कि 28 मार्च को मौलाना साद ने पीएम रिलीफ फंड में 1 करोड़ रुपए का दान दिया। रिपोर्ट में अंदर ये भी लिखा है कि इस्लाम को हर बार आतंकवाद के रूप में बदनाम किया गया। लेकिन इस बार कोरोना ने हर धर्म को एक कर दिया है और ये सब मौलाना साद के कारण हुआ है, जिन्होंने प्रधानमंत्री के रिलीफ फंड में 1 करोड़ रुपए का दान दिया। मगर इस डोनेशन को गुप्त रखा। इसके अलावा इस रिपोर्ट में आगे ये भी लिखा यह मोदी जी को बदनाम करने का नहीं बल्कि उनका समर्थन करने का समय है, इस समय मोदी जी देश के हित में सोच रहे हैं।
अब इसी अखबार की कटिंग को शेयर करते हुए लोगों के बीच संदेश भेजा जा रहा है, “उस महान शख्सियत ने जिस पर इल्जाम लग रहा है, उसने यानी मौलाना साद साहब ने 29 मार्च को ही प्रधानमंत्री राहत कोष में 1 करोड़ रुपए का दान दिया था।”
अब हालाँकि, कोई भी आमजन जिसे फेक न्यूज़ की समझ हो, वो तनिक देर भी नहीं लगाएगा इस रिपोर्ट के पीछे छिपे अजेंडे को जानने में। एक सरसरी निगाह पड़ने से ही उसे यह स्पष्ट होगा कि यह रिपोर्ट पूरी तरह नकली है। क्योंकि इस रिपोर्ट में भाषा, व्याकरण एक वैध समाचार वाला नहीं है। बल्कि इसे पढ़कर ये आभास होता है कि मौलाना साद की छवि निर्मित करने के लिए इसे गढ़ा गया।
यहाँ बता दें कि जिस अखबार की आड़ में ये खबर प्रकाशित हुई है, वह अस्तित्व में है और उत्तरी आयरलैंड से प्रकाशित होता है। ये अखबार वहाँ का एक पुराना दैनिक समाचार पत्र है, जिसकी शुरुआत 1737 में हुई थी। मगर, जब हमने इस खबर संबंधी शब्दों वाक्यों को इस पर सर्च करना शुरू किया, तो मालूम हुआ कि अखबार में मो. साद को लेकर ऐसी कोई भी खबर प्रकाशित ही नहीं हुई।
सोचने वाली बात है कि आखिर कोई आयरिश अखबार भारत की इस छोटी सी सूचना को अपनी मुख्य हेडलाइन क्यों बनाएगा? इस समय तो भारत में कई लोग ऐसे हैं जो बड़ा-बड़ा दान कर रहे हैं, तो फिर आयरिश अखबार सिर्फ़ मो साद को ही क्यों चुनता?
जब हमने अपनी पड़ताल की कड़ी में अखबार की तस्वीर जाँची। तो वास्तविकता में वो पेपर 6 जून 2019 का निकला। जिसका इस्तेमाल मोहमम्मद साद के अनुयायियों ने किया था और डोनॉल्ड ट्रंप के आयरलैंड दौरे की तस्वीर हटाकर वहाँ मोहम्मद साद को पेस्ट कर दिया था। बाद में उन्होंने अपने अनुसार खबर को लिख दिया।
अब उम्मीद है, उन लोगों को यह स्पष्ट होगा कि तब्लीगी जमातियों को भड़काकर मरकज़ में इकट्ठा करने वाला मौलाना द्वारा 1 करोड़ के दान की खबर न केवल झूठी थी बल्कि उसको बचाने के लिए चली गई एक चाल थी। हम देख सकते हैं कि किस चतुराई से तब्लीगी जमात के मुखिया को महान बनाने के लिए असलियत के साथ छेड़छाड़ की गई और उसके गुहानों पर पर्दा डालने का प्रयास हुआ।
बता दें कि इससे पहले, दि प्रिंट के शेखर गुप्ता ने भी तब्लीगी जमात के कुकर्मों को व्हॉइटवाश करते हुए ये बताने की कोशिश की थी कि भाजपा आईटी सेल के लोग तब्लीगी जमात की बेवकूफी के लिए पूरे समुदाय को दोष दे रही है।
कोरोना के अंधकार को मिटाकर एक नई सुबह की आस में कल (अप्रैल 5, 2020) पूरे देश ने ‘9 बजे 9 मिनट’ की तर्ज पर भारत को रौशन किया। कई नामी कलाकारों, राजनेताओं, ख़िलाड़ियों, उद्योगपतियों ने आम जनता की तरह प्रधानमंत्री की अपील का अनुसरण किया। भारत के पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ भी इस सूची में शामिल रहे। अब हालाँकि, कैफ ने अपनी पत्नी के साथ 9 मिनट के लिए मोमबत्ती जलाते हुए साफ किया कि वे ये सब उन योद्धाओं के लिए कर रहे हैं, जो हमारी जान बचाने के लिए अपनी जान को खतरे में डाले हुए हैं। यानी स्वास्थ्यकर्मी, सुरक्षाकर्मी, सफाई कर्मी आदि। मगर, इस्लामिक कट्टरपंथियों को इससे क्या? वे तो यहाँ भी हमेशा की तरह कैफ को मजहब का पाठ पढ़ाने लगे और ऐसा करने के लिए उन्हें दुत्कारने लगे। उनके लिए अपशब्द बोलने लगे।
दरअसल, मोहम्मद कैफ ने अपने ट्विटर पर रात की विडियो को शेयर किया। उन्होंने इस विडियो के साथ ट्वीट पर लिखा, “ये, हर डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ, सफाईकर्मी, सरकारी कर्मचारी, पुलिस, सेनाबल, मीडियाकर्मी, बैंकर्स, दुकानदार एवं हर योद्धा के लिए है, जो इस समय लड़ रहे हैं। हम आपके कर्जदार हैं और हमेशा आभारी भी रहेंगे। जय हिंद।”
Miya Namaz padkar Allah se dua karo Covid-19 Inshallah jab harega!! Yeh kya chichora pana karre
इस ट्वीट को देखने के बाद देश की अधिकांश जनता उन्हें सराहती नजर आई। उनकी तारीफ करती नजर आई। उन्हें मिसाल बताती नजर आई। मगर, प्रधानमंत्री की बात को मानता देख मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग बिदक गिए। जैसे मोहम्मद फासिउद्दीन की टिप्पणी देखिए। वे कैफ के ट्वीट पर लिखते हैं, “मियाँ नमाज पढ़कर अल्लाह से दुआ करो, कोरोना तभी हारेगा… ये क्या छिछोरपना कर रहे हो।”
Unke paas mask, ppe kits aur hospitals mai ventilation systems nahi hai aur apko lagta hai ki ye sab karke unka housla badhega ???
इसके बाद हबीबी फरीद भी मोहम्मद कैफ के पोस्ट पर ज्ञान देते दिखे और लिखते हैं, “उनके पास मास्क, पीपीपई किट्स और हॉस्पिटल में वेंटिलेशन सिस्टम नहीं है और आपको लगता है कि ये सब करके उनका हौसला बढ़ेगा।”
6 अप्रैल 1980 बीजेपी पार्टी की शुरुआत 5 अप्रैल 2020 40 वर्ष पूर्व हुआ मोहम्मद कैफ भाई इस खुशी में अप्रैल फूल बना दिया कुछ तो शर्म करो भाई भाभी और आप दोनों 9 मिनट नमाज और कुरान पढ़ते अल्लाह से दुआ मांगे सुन लेते छी छी छी आप लोगों की वजह से हम सब मुसलमानों को बदनाम होना पड़ रहा है
एसके मोजफ्फर नाम का यूजर तो ऐसा करने पर मोहम्मद कैफ को बेवकूफ घोषित कर देता है। वो लिखता है, “6 अप्रैल 1980 बीजेपी पार्टी की शुरुआत 40 वर्ष पूर्व हुई, मोहम्मद कैफ भाई इस खुशी में अप्रैल फूल बना दिया। कुछ तो शर्म करो। भाई, भाभी और आप दोनों 9 मिनट नमाज और कुरान पढ़ते, अल्लाह से दुआ माँगते, वो सुन लेते। छी छी छी आप लोगों की वजह से हम सब मुसलमानों को बदनाम होना पड़ रहा है।”
यहाँ बता दें कि कट्टरपंथियों द्वारा कैफ और उनकी पत्नी के लिए ऐसे अपशब्द और सलाहों का भंडार पहली बार उनके ट्वीट पर नहीं लगा है। इससे पहले भी कई बार मजहब के ठेकेदार उन्हें अपना निशाना बना चुके हैं। पिछले दिनों की बात करें तो कट्टरपंथियों ने उन्हें जनता कर्फ्यू पर नरेंद्र मोदी के आदेश का पालन करता देख उलटा-सीधा बोला था। किसी ने उन्हें ताली-थाली बजाने पर कोसा था। तो किसी ने उन्हें अल्लाह से दुआ करने की सलाह दी थी। एक ने तो उन्हें यहाँ तक कहा था, “कैफ भाई, भाभी और आप थाली और बर्तन लेकर रेलवे पर जाओ और नौकरी करो। हिजड़ा की तरह पैसा मिलेंगे बहुत आपको। थाली और ताली बजाते रहो।”
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा राष्ट्रवासियों के ‘सामूहिक संकल्प एवं एकजुटता’ को दिखाने के आह्वान पर पूरा देश रविवार शाम नौ बजे एकजुट दिखा। करोड़ों देशवासियों ने अपने घरों की बत्तियाँ बुझा कर, मोदी जी के आह्वान के तहत मोमबत्ती, दीपक, लालटेन, टॉर्च, मोबाइल फ़्लैश आदि के द्वारा प्रकाश कर इस संकट की घड़ी में एकता का प्रदर्शन किया कि चाहे जो हो जाए हमारी एकजुटता हर संकट को पार कर लेगी।
वहीं वामपंथी और लिबरल गिरोह शुरू से ही इस आह्वान के खिलाफ नज़र आया। तमाम वाहियात थ्योरी गढ़ी गईं कि अचानक लाइट जाने से पावर ग्रिड फेल कर जाएगा, इससे क्या कोरोना भाग जाएगा, हमें मजदूरों की बात करनी चाहिए, सब कुछ भगवान भरोसे छोड़ रहे हैं मोदी आदि।
इसी सन्दर्भ में सोशल मीडिया पर गैर-वामपंथियों ने लिब्रान्डू समूह के मजे लेने शुरू कर दिए। द स्किन डॉक्टर नामक ट्विटर हैंडल ने एक ट्वीट लिखा जिसमें एक वामपंथन पत्रकार एक व्यक्ति को समझा रही है की उसे कैमरा पर क्या बोलना है।
"Samajh gaye na kya bolna hai?"
"Ji madam. Aaj raat 9 baje achanak mere bete ki tabiyat kharab hogi lekin hospital le jane me deri hogi kyuki Modi ne lights band karwa di hogi. Hadbadi me andhere ki vajah se meri beghum ke bhi chot lag jayegi."
इसी तर्ज पर ऑपइंडिया के भी कुछ सुझाव हैं कि आने वाले समय में ‘नौ बजे नौ मिनट’ के नाम पर कैसी दर्द भरी कहानियाँ आ सकती हैं। हमने ये सुझाव वामपंथियों की कम होती क्रिएटिविटी के कारण उन पर तरस खाकर दिए हैं।
१. अब्दुल अपने घर की सीढ़ियाँ चढ़ रहा था, बिल्डिंग वालों ने लाइट बंद कर दी, अंधेरे की वजह से दोनों घुटने टूट गए। आयुष्मान योजना में भी नहीं है नाम, अधिकारी ने कहा कागज ले कर आओ। अब बेचारा अब्दुल कागज कहाँ से लाएगा? कौन जिम्मेदार है इसका?
२. क्या गलती थी इस बच्चे की जो इस लॉकडाउन में घर में दौड़ रहा था, अचानक से मोदी के #9Baje9Minute के कारण दौड़ता हुआ टेबल के कोने से टकरा गया। सामने के दाँत टूट गए। दलित पिता रिक्शा चलाते थे, पैसे वैसे ही नहीं थे, ऊपर से अब दवाई का खर्चा अलग!
३. सलमा अपनी गली में सब्जी लेने गई थी। अचानक से बत्ती गुल हो जाने से घबरा गई। साथ ही, ऐसे अंधेरे में एक काले कुत्ते को भी समझ में नहीं आया कि अच्छा भला उजाला था, ये क्या हुआ। उसने सलमा को दौड़ा दिया, सब्जी छोड़ भागी सलमा। आज उसके घर में नहीं बनेगा भोजन।
४. रामू अपने बिस्तर पर लेटा था। उनकी पत्नी उनके शर्ट में बटन लगा रही थी। तभी बिजली बुझाने के समय किसी ने बत्ती काट दी। सुई रामू की छाती में घुस गई। रामू बिलबिला गए और रिफ्लेक्स एक्शन में पत्नी को जोर से धक्का दिया। उनका सर फूट गया। जिम्मेदार कौन है?
इसी तरह एक ट्विटर यूजर सुमोना चक्रवर्ती ने वामपंथी मीडिया का उपहास करते हुए लगातार कई ट्वीट किए और लिखा कि ये कुछ खबरें हैं जो अब मोदी जी के इस आह्वान के बाद छप कर बाहर आने को तैयार हैं। सुमोना ने आने वाली ऐसी खबरों की हेडलाइन्स शेयर की:
१. मोमबत्तियों के कारण कई जगह लगी आग २. हकूना मताता में फेल हुआ पावर ग्रिड ३. गरीब मुस्लिम/दलित को बत्तियाँ नहीं बुझाने पर पीटा गया ४. ABVP के छात्रों ने हॉस्टलों में जबरन बत्ती बुझा दी, एक लड़की हुई घायल ५. मरीज की मौत, डॉक्टर मोमबत्ती जलाने में था व्यस्त
Stories ready to be published.
1.Huge fires caused by burning candles 2. Power Grid fails in Hakuna Matata 3. Poor Dalit/Muslim beaten for not switching off lights 4. ABVP forcible swithes of light in Hostel. A woman is injured. 5. Patient dies because Doctor was burning candles
— Sumona Chakraborty (@SumonaChakrabo8) April 5, 2020
अगले ट्वीट में सुमोना ने लिखा: ६. बत्ती बुझाने से हुए अँधेरे में व्यक्ति पर हमला ७. सरकार ने जबरन बुझवाई बत्तियाँ ८. मोमबत्ती का जलना बनी आत्महत्या का कारण
6. A person attacked in darkness caused by switched light 7. Government forces light cut 8. Candle burn causes suicide
— Sumona Chakraborty (@SumonaChakrabo8) April 5, 2020
सुमोना के अगले सुझाव कुछ ऐसे थे: ९. नौ बजे हिंदुत्ववादी गुंडों ने अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने के लिए चिल्लाया ‘जय श्री राम’ १०. गरीब बच्चे ने मोमबत्ती नहीं जलाई, किसी ने पीटा ११. मोमबत्ती से गरीब की झुग्गी में लगी आग १२. बीजेपी समर्थक के घर पर अँधेरे में पड़ा डाका १३. मोमबत्ती जलाने के समय महिला से हुई छेड़छाड़
9. Hindutva goons sing Jai Shree Ram to torture Minorities during candle burning. 10. A Poor Kid beaten for not burning candle 11. Candle Burns a poor labour’s Jhuggi 12. Robbers rob a house of BJP supporter during Darkness 13. Woman molested in Dark during Candle light
— Sumona Chakraborty (@SumonaChakrabo8) April 5, 2020
इसी तरह आगे के पूरे थ्रेड में सुमोना ने वामपंथी मीडिया पर तंज कसते हुए कई मजेदार खबरें बनाई जो आप नीचे पढ़ सकते हैं:
14. Birds leave city due to flames from candle 15. Candle burning can cause cancer : Experts 16. Exposing young Children to candles is dangerous : Experts 17. Candles cannot kill corona 18. Person looses eyesight due to candle 19. Robbers wait for lights to turn off to rob
— Sumona Chakraborty (@SumonaChakrabo8) April 5, 2020
20. Lights forcible cut in Minority areas in UP under Yogi 21. Murder during light cut 22. Person dies due to high voltage caused by Light switching off 23. High frequency burns grid in multiple places 24. Grid failure (regular load shedding) across nation.
— Sumona Chakraborty (@SumonaChakrabo8) April 5, 2020
25. Big security threat caused by Light switching off 26. Riots due to Light cut 27. Hospitals see voltage shock during light cuts 28. Emergency services fail for 9 minutes
— Sumona Chakraborty (@SumonaChakrabo8) April 5, 2020
कोरोना महामारी के खिलाफ भारत की लड़ाई को दिल्ली में हुए तबलीगी जमात के कार्यक्रम ने किस हद तक नुकसान पहुँचाया है, इसको समझने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा की गई प्रेस कॉन्फ्रेन्स के आँकड़ों को देखिए। स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव लव अग्रवाल ने रविवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेन्स में बताया कि इस समय प्रत्येक 4.1 दिन में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या दोगुनी हुई। लेकिन यदि तबलीगी जमात का कार्यक्रम न होता तो कोरोना संक्रमित मामलों की संख्या 7.4 दिन में दोगुनी होती।
Our doubling rate (in how many days the number of #COVID19 cases gets double) at present is 4.1 days. But if additional cases reported due to the Tablighi Jamaat event, had not taken place, then the doubling rate would have been 7.4 days: Lav Aggarwal, Joint Secy, Health Ministry https://t.co/XZT1DJtf6A
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लव अग्रवाल ने बताया कि कल से आज तक 472 नए मामले सामने आए हैं, जिससे देश में कोरोना संक्रमित कुल मामलों की संख्या अब 3374 तक पहुँच चुकी है। अग्रवाल ने यह भी बताया कि अब तक देश के 274 जिलों से कोरोना संक्रमण के केसेस आ चुके हैं। जबकि भारत में अब तक कोरोना के कारण मरने वालों की संख्या 79 हो चुकी है, जिसमें से 11 शनिवार और रविवार को मिलाकर हुई हैं। साथ ही यह भी जानकारी दी कि देश में कोरोना से ठीक होने वाले व्यक्तियों की संख्या 267 है।
स्वास्थ्य सचिव ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी जानकारी दी कि कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ तैयारियों पर आज रविवार को कैबिनेट सचिव राजीव गाबा ने कई जिलों के डीएम, सीएमओ, एसपी के साथ-साथ, राज्यों के प्रमुख सचिवों और स्वास्थ्य सचिवों आदि के साथ मीटिंग की। स्वास्थ्य मंत्रालय के डेटा के अनुसार कोरोना के कारण अब तक सबसे ज्यादा 24 मौतें महाराष्ट्र में हुई हैं।
यहाँ बताना उचित रहेगा कि देश में कोरोना हॉटस्पॉट बन कर उभरे निजामुद्दीन मरकज पर अब केंद्र सरकार ने आँखें टेढ़ी कर दी हैं। जाँच एजेंसियों ने देश को कोरोना संकट में डालने वाले रुढ़िवादी इस्लामी संगठन तबलीगी जमात के फंडिंग के स्रोत की जाँच शुरू कर दी है। जमात से फंडिंग के स्रोत और विदेशियों की डिटेल माँगी है। जमात ने पिछले तीन सालों में कितना टैक्स भरा है, उसके बैंक खातों में कहाँ-कहाँ से कितने पैसे आए हैं, इन सब डिटेल्स के साथ पैन नंबर का विवरण भी माँगा गया है। इसके अलावा मरकज प्रमुख मौलाना साद और 6 अन्य सदस्यों से उन विदेशियों और भारतीय जमातियों की लिस्ट भी माँगी गई है, जिन्होंने 12 मार्च के बाद मरकज में शिरकत की थी।
फैक्ट चेक के नाम पर ऑल्ट न्यूज़ जैसी दुकान खोल देने के बाद सबसे बड़ा संघर्ष तब खड़ा हो जाता है जब आपको येन-केन-प्रकारेण किसी खबर को अपने नैरेटिव में ढालकर अपनी ऑडियंस को संतुष्ट करना हो। कोरोना जैसी वैश्विक आपदा के समय भी एक पूरा तंत्र निरंतर अपने इस एकसूत्री कार्यक्रम पर जमा हुआ है और ऐसा करने में इनका साथ देने के लिए वो सब लोग मौजूद हैं, जो हर दिन खुद किसी न किसी प्रकार की फर्जी खबर को फैलाने के षड्यंत्र से जुड़े हुए हैं।
इंटरनेट पर बैठकर कभी डॉक्टर, कभी जज, कभी अर्थशास्त्री तो कभी पुरातत्व वैज्ञानिक की भूमिका निभाने वाले ध्रुव राठी इन्हीं में से एक नाम है। ध्रुव राठी ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए कुछ प्रोपेगेंडा पोर्टल्स को (जिनका नाम देखते ही आप तुरन्त समझ जाएँगे कि किसी भी प्रकार के तथ्य के लिए आपको कम से कम उन पर तो नहीं ही जाना है) शेयर करते हुए लिखा है कि पिछले एक सप्ताह में इनके द्वारा कुछ फर्जी खबरें शेयर की गई हैं।
एक-एक कर इनका सच जानते हैं –
साइबर योद्धा ध्रुव राठी का ‘बड़ा खुलासा’ संख्या- 1
1 – ध्रुव राठी ने पहली लिंक शेयर की है इंजीनियर को डॉक्टर बताकर कोरोना पर फर्जी इंटरव्यू छापने वाले प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘दी क्विंट’ की! क्विंट द्वारा किए गए इस फैक्ट चेक में साबित करने का “प्रयास” किया गया है कि शेरू मियाँ नाम का यह शख्स फलों पर थूक नहीं लगा रहा था। ध्रुव राठी ने भी इसी कोशिश के अंतर्गत इस लिंक को लोगों के बीच रखा है। कारण यह भी है कि ऐसे समय में, जब सोशल मीडिया पर हर दूसरा वीडियो किसी मुस्लिम को कोरोना वायरस को फैलाने से जुड़ा है, इसकी भरपाई की जिम्मेदारी मजहबी विचारधारा के ‘सूचना प्रमुखों’ के कंधों पर ही आ जाती है।
नीचे क्विंट की इस रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट है, जिसे ध्रुव राठी ने फैक्ट चेक बताकर शेयर किया है। इसमें कहा गया है कि इनकी रिसर्च अभी जारी है।
सवाल यह है कि जब क्विंट अभी तक कोई फैसला नहीं कर पाया है तो फिर इसके आधार पर ध्रुव राठी ने कौन सा फैक्ट चेक किया है? जबकि सोशल मीडिया पर महज 100 फोलोअर्स वाले लोग भी इस विडियो की सच्चाई तक पहुँच चुके हैं।
हाल ही में ऐसी कुछ चीजें सामनी आईं, जिसने सेक्युलर विचारधारा की पोल खोलकर रख दी। जैसे – ताबीज पहनकर कोरोना को रोकना, 50 करोड़ हिंदुओं के मरने की दुआ करता मौलवी, सुन्नत को कोरोना का इलाज बताता युवक, कोरोना को अल्लाह का अजाब बताते हुए मुँह पर नोट रगड़कर कोरोना को फैलाने की नसीहत देता युवक, आदि।
ऐसे में जब फलों पर थूक लगाते हुए इंदौर के शेरू मियाँ का वीडियो सामने आया तो लोगों में दहशत होनी स्वाभाविक थी। फैक्ट चेकर इस बात से खुश नहीं थे कि लोगों ने इस वीडियो के बारे में पुलिस को सूचित कर इसकी जाँच करवाई। इसके उलट, फैक्ट चेकर्स ने इस वीडियो की तारीख की ओर ध्यान देते हुए कहा कि शेरू मियाँ अप्रैल में नहीं बल्कि फ़रवरी में फलों पर थूक लगाकर उन्हें बेच रहे थे।
साइबर योद्धा ध्रुव राठी का ‘बड़ा खुलासा’ संख्या- 2
2- कुछ मुस्लिमों को बर्तन चाटते हुए दिखाया गया है। जिसका फैक्ट चेक इस्लामिक विचारधारा वाले स्वघोषित फैक्ट चेकर वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ ने ये करते हुए किया है कि यह वीडियो ‘अनरिलेटेड वीडियो’ है। जाहिर सी बात है कि कोरोना जैसी महामारी के समय सरकार और प्रशासन लोगों से व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे वीडियो, ग्राफिक्स के प्रति सतर्क रहने को प्रेरित कर रही है।
ऐसे में, जब 50 करोड़ हिन्दुओं को कोरोना से खत्म करने की दुआ करता मौलवी गिरफ्तार होता है, या फिर टिकटोक पर युवक इसे अल्लाह का कहर बताते नजर आते हैं, तो लोगों की जिज्ञासा एक बार के लिए मुस्लिम समुदाय पर सवाल खड़े जरूर कर देती है। ऑल्ट न्यूज़ जैसे फैक्ट चेकर्स के कंधे पर बंदूक रखकर दक्षिणपंथियों के दावों को खारिज करने का दावा करने वाला ध्रुव राठी यहाँ पर एक बार फिर सस्ती लोकप्रियता जुगाड़ते व्यक्ति से ज्यादा कुछ भी नजर नहीं आते।
साइबर योद्धा ध्रुव राठी का ‘बड़ा खुलासा’ संख्या- 3
3 – तीसरा ‘इलॉजिकल फैक्ट चेक’ ध्रुव राठी ने एक ऐसे फेसबुक पेज ‘द लॉजिकल इंडियन’ के हवाले से किया है, जो दक्षिणपंथी विचारधारा के विरोध के नाम महिलाओं के खड़े होकर पेशाब करने जैसे इंटरनेट आयोजनों को समर्थन करते हुए देखा जाता है। इसमें फैक्ट चेक करते हुए बताया गया है कि मुस्लिमों पर लगाया गया यह आरोप झूठा है कि वो छींककर कोरोना फैला रहे हैं।
इसी के उलट वास्तविकता की कुछ खबरों पर यदि नजर दौड़ाई जाए, तो कल ही इंडिया टीवी से बात करते हुए उत्तर प्रदेश के कानपुर में तबलीगी जमात के कोरोना मरीजों का इलाज कर रहीं गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. आरती लालचंदानी ने कहा है कि उनके अस्पताल में इलाज ले रहे तबलीगी जमात के कोरोना मरीज इलाज में जरा भी सहयोग नहीं कर रहे हैं और अपने हाथों में थूक लेकर वार्ड की रेलिंग, दीवारों और सीढ़ियों पर चिपका रहे हैं। हालाँकि, गूगल पर ‘रिवर्स इमेज सर्च’ कर के तथ्यों को झूठ साबित करने की अद्भुत क्षमता रखने वाले ध्रुव राठी और ऑल्ट न्यूज़ की टीम अभी तक इस बात का खंडन करने के लिए डॉ. आरती के पास नहीं गई है।
साइबर योद्धा ध्रुव राठी का ‘बड़ा खुलासा’ संख्या- 4
4- चौथी खबर में फैक्ट चेकर्स ने देश की सीमाओं के बाहर जाकर हमेशा, हर बात को नकारने की फितरत वाले पड़ोसी देश पाकिस्तान के कराची से कुछ फैक्ट्स लाकर ‘साबित” किया है कि उन्होंने कराची के कमिश्नर समीउल्लाह से बात कर के पता कर लिया है कि कराची में जिस गाँव की बात हो रही थी है, वहाँ कोई हिन्दू है ही नहीं इसलिए हिंदुओं को राशन न मिलने की खबर फेसबुक सत्यशोधक सेटेलाइट ध्रुव राठी के अनुसार फर्जी है।
पहली बात तो यही हास्यास्पद है कि किसी हिंदुओं से जुड़े तथ्य के लिए उस पाकिस्तान से बात की जाती है, जहाँ अल्पसंख्यक हिंदुओं के साथ हर दूसरे दिन अपहरण, बलात्कार, धर्मांतरण और हर तरह के अत्याचार की खबरों से इंटरनेट भरा पड़ा है। दूसरी यह कि किसी हिन्दू के न पाए जाने का दावा ठीक उसी तरह है, जिस तरह कॉन्ग्रेस ने भारत में गरीबी मिटाने के बजाए शहर में 28 रुपए 65 पैसे प्रतिदिन और गाँव में 22 रुपए 42 पैसे खर्च करने वाले से खुद को गरीब कहने का अधिकार ही छीन लिया था। यह गरीबी मिटाने की कॉन्ग्रेस की निंजा तकनीक अब कॉन्ग्रेस-पोषित फैक्ट चेकर्स अपनी खबरों में इस्तेमाल करने लगे हैं। तीसरा यह कि खोजी फैक्ट चेकर यह अवश्य सुनिश्चित करें कि पाकिस्तान में बैठे जिन ‘सूत्रों’ से वो अपनी फैक्ट चेक वाली रिपोर्ट तैयार करते हैं, वो कल पाकिस्तान की सत्ता पलटते ही किसी आतंकवादी संगठन का हिस्सा न निकल आएँ।
साइबर योद्धा ध्रुव राठी का ‘बड़ा खुलासा’ संख्या- 5
5- इस दावे में कोरोना वायरस के दौरान लोगों की सेक्स लाइफ पर निबंध लिखने वाले BBC ने एक ऐसे वीडियो का फैक्ट चेक किया है, जिसमें मोहम्मद सुहैल शौकत अली नाम का एक 26 साल का युवक मुंबई कोर्ट में सुनवाई के लिए जाते वक़्त वैन में पुलिसकर्मियों पर थूक देता है और इसके बाद पुलिस वाले उसकी कुटाई कर देते हैं।
आश्चर्यजनक रूप से यह फैक्ट चेक एकदम सही माना जा सकता है, लेकिन ध्यान देने योग्य बात यह है कि थूकने वाला युवक यहाँ भी मुस्लिम समुदाय का ही है और आजकल इंदौर सहित देश के अन्य हिस्सों में भी पुलिस और डॉक्टरों की टीम पर थूकने वाली घटनाएँ भी मुस्लिम बस्तियों में देखने को मिली हैं। यही नहीं, कुछ मुस्लिमों ने डॉक्टर्स पर पथराव और कुल्हाड़ी से भी हमला कर दिया।
इसलिए यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि थूक का कोई मजहब नहीं होता है, वह एकदम सेक्युलर प्रकृति का होता है और इंसानों पर थूकना किसी भी मजहब या धर्म में इंसानियत तो नहीं बताई गई होगी।
साइबर योद्धा ध्रुव राठी का ‘बड़ा खुलासा’ संख्या- 6
6 – लिबरल्स के राजा बाबू* ने छठवाँ दावा हिटलर की मौत के इतने वर्षों बाद उसके लिंग की नाप बताने वाले दी लल्लनटॉप की खबर के आधार पर किया है, इसलिए उनके दावे पर शक नहीं किया जा सकता है। हालाँकि इस्लामोफोबिक दी लल्लनटॉप ने इस फैक्ट चेक में सेक्युलर फेब्रिक दुरुस्त रखने के लिए एक लाइन यह भी जोड़ दिया कि पुलिस ने लॉकडाउन के दौरान मंदिर में बैठे पुजारी पर ही नहीं बल्कि मुस्लिमों पर भी कार्रवाई की। मजहबी घृणा से भरे दी लल्लनटॉप ने कोरोना जैसी महामारी के समय भी इस फैक्ट चेक में मुस्लिमों को बदनाम करने का काम किया है।
साइबर योद्धा ध्रुव राठी का ‘बड़ा खुलासा’ संख्या- 7
7- सातवाँ दावा ऑल्ट न्यूज़ जैसे फैक्ट चेकर्स के शातिरपने का सबसे बड़ा उदाहरण है। इसमें दावा किया गया है कि उन्होंने रेस्टॉरेंट में खाने की थैली में थूकने वाले युवक का फैक्ट चेक किया है, जबकी इस खबर के भीतर जाने पर पता चलता है कि यह फैक्ट चेक सिर्फ इस बात का है कि खाने की पैकेजिंग का यह वीडियो भारत का है, गल्फ कंट्रीज का है, या फिर किसी एशियन कंट्री का है।
सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसे वीडियो शेयर किए जाते हैं, जिनमें मुस्लिम समुदाय के लोग सामुहिक भोज से पहले खाने में थूक मिलाते हुए देखे जाते हैं या फिर लोग ऐसा दावा करते नजर आते हैं।
वहीं, समाज के एक बड़े वर्ग में यह भी सन्देह व्याप्त है कि मुस्लिम समुदाय में खाने में थूकने की प्रथा है। ऑल्ट न्यूज़ अगर कर सके तो उसे सर्वप्रथम मजहब और धर्म से जुड़ी इस प्रकार की नकारात्मक अफवाहों का फैक्ट चेक कर लोगों को जागरूक करना चाहिए ना कि यह साबित करना चाहिए कि टोपी पहने किसी युवक ने खाने में सिंगापुर में थूका था या फिर दुबई में। और कम से कम समाज पर वह यह एहसान कर सकता है कि वो इसे कोरोना वायरस वाले फैक्ट चेक का नाम ना दे।
साइबर योद्धा ध्रुव राठी का ‘बड़ा खुलासा’ संख्या- 8
8- आठवाँ और आखिरी, और सबसे वाहियात फैक्ट चेक ध्रुव राठी ने जो शामिल किया है, वह है विदेशियों के पटना में छुपे होने की खबर का।
ऑल्ट न्यूज़ के स्वयं शिरोमणि मुहम्मद जुबैर ने इस खबर का फैक्ट चेक करते हुए बताया है कि पटना की मस्जिद में छुपे हुए ये लोग इटली नहीं बल्कि किर्गिस्तान से आए थे। यहाँ दिलचस्प बात यह है कि ऑल्ट न्यूज़ किर्गिस्तान को विदेश नहीं मानता है। और यदि मानता है तो इसमें उन्होंने फैक्ट चेक सिर्फ यह साबित करने के लिए किया है कि उन्होंने यह फैक्ट चेक किसी फेसबुक पेज के एडमिन से बात के आधार पर किया है।
ऑपइंडिया ने समाचार स्रोतों के आधार पर ही (जो कि फेसबुक पेज के एडमिन न होकर मीडिया थे) रिपोर्ट में इनके तुर्कमेनिस्तान से होने की सम्भावना का जिक्र किया था, जो कि बेहद स्वाभाविक है।
सूचना के अभाव में, कई बार अलग-अलग स्रोतों से आती खबरों के कारण ‘गलत नाम/जगह’ छापे जा सकते हैं, जबकि वहाँ मकसद सिर्फ पाठकों तक एक खबर पहुँचाना होता है। यही ऑल्ट न्यूज जब पत्थर को वॉलेट बताता है, तो वहाँ इनका मकसद फेक न्यूज की जाँच नहीं, एक तय एजेंडा घुसाना होता है।
यहाँ भी ऑल्ट न्यूज़ ने वही काम किया है। अपनी ही खबर में उसने लिखा है कि इन्हें मस्जिद में देख स्थानीय लोगों को इन पर सन्देह हुआ और उन्होंने पुलिस को सूचित किया। लिबास को देखकर लोगों को यदि संदेह हो जाता है तो इसके लिए अमर उजाला से लेकर ऑपइंडिया को जिम्मेदार ठहराने के बजाए इतने दिनों तक मस्जिद में छुपकर बैठे हुए लोगों की मंशा पर सवाल करना ज्यादा जरूरी हो जाता है। वो भी तब, जब कि यही लोग टूरिस्ट वीजा के नाम पर मजहबी गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं।
ध्रुव राठी का यह फेसबुक पोस्ट और जितने भी इस लीग के सदस्यों का उसने इसमें जिक्र किया है, उनके फैक्ट चेक के पीछे की विचारधारा और तर्क आज भी पत्थर को वॉलेट साबित करने से आगे नहीं बढ़ पाई है।
ध्रुव राठी के साथ ही सारा मुस्लिम समुदाय अब तबलीगी जमात के फैलाए रायते की लीपापोती में लग गया है। इसका अंदाज ध्रुव राठी के इस फैक्ट चेक के साथ ही इस बात से भी लगाया जा सकता है कि सोशल मीडिया पर अब तबलीगी जमात के भगौड़े मौलाना साद की तरफ से कोरोना के लिए मदद के नाम पर PM राहत फंड में 1 करोड़ रुपए की राशि दान की फर्जी खबरें फैलाई जाने लगी हैं। जबकि समाज के खिलाफ सबसे बड़ी साजिश जो यह तबलीगी जमात कर चुकी है, उसकी भरपाई ध्रुव राठी और उसके आठ फैक्ट चेकर मजहबी सिपहसालार अपने तर्कों से नहीं कर सकते हैं।
मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस की सरकार का तख्तापलट होने के कुछ दिन भीतर ही उसमें फिर से फूट पड़ने की आशंका आज बलवती हो गई। यह सुगबुगाहट तब शुरू हुई, जब मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ग्वालियर जिले से कॉन्ग्रेस विधायक प्रवीण पाठक ने प्रधानमंत्री मोदी के रात नौ बजे नौ मिनट पर ‘दिया जलाने’ की मुहिम का समर्थन करने का एलान कर दिया। ट्विटर पर पूर्व प्रधानंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता “आओ फिर से दिया जलाएँ” के जरिए उन्होंने कहा कि यही एकता प्रदर्शित करने का समय है और उनके इस कदम को राजनीति के चश्मे से न देखा जाए।
याद रहे कि 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में प्रवीण पाठक भाजपा के तीन बार के विधायक और मंत्री रहे नारायण सिंह कुशवाह को हराकर पहली बार विधायक बने थे। उन्होंने ट्विटर पर विडियो संदेश अपलोड किया, जिसमें कहा गया कि लोकतांत्रिक देश के नागरिक होने के नाते देश के मुखिया की अपील के सम्मान में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर रविवार की रात 9 बजे 9 मिनट के लिए एक दीप जरूर जलाएँ क्योंकि राष्ट्र प्रथम होना चाहिए बाकी सब उसके बाद।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस बारे में विधायक प्रवीण पाठक ने सवालों का जवाब देते हुए कहा कि यह देश की एकता की बात है और मैंने देश के मुखिया यानी प्रधानमंत्री का समर्थन किया है, किसी व्यक्ति विशेष का नहीं और इसका गलत अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए।
ध्यातव्य है कि कॉन्ग्रेस के राहुल गाँधी ने पीएम मोदी की इस अपील का मजाक उड़ाते हुए कहा था कि ताली बजाने या दिया-बत्ती-टॉर्च जलाने से कोरोना के खिलाफ लड़ाई नहीं जीती जा सकती, जिसका समर्थन शशि थरूर आदि कॉन्ग्रेसी नेताओं ने किया था।
India is simply not testing enough to fight the #Covid19 virus.
Making people clap & shining torches in the sky isn’t going to solve the problem. pic.twitter.com/yMlYbiixxW
वहीं कोरोना के खिलाफ एकता दर्शाने की पीएम मोदी की इस मुहिम को शशि थरूर ने देश को “राम भरोसे” छोड़ना करार दिया था।
This is no accident: the PM spoke on Ram Navami at 9 am for 9 mins, asked us to light diyas & candles on 5/4 at 9 pm for 9 mins. He is invoking all the auspicious elements Hinduism associates with number 9. Back to Ram Bharose?! #COVID19 must be more serious than we thought!
इस परिप्रेक्ष्य में ग्वालियर से कॉन्ग्रेस विधायक का पीएम मोदी की अपील के समर्थन में उतरना थोड़ा आश्चर्यजनक प्रतीत होता है क्योंकि राजनीति में कुछ भी बिना कारण न किया जाता है, न बोला जाता है। और जो कहा जाता है, कहानी अक्सर उससे अलग ही रहती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 अप्रैल को कोरोना महामारी के खिलाफ जारी लड़ाई में सभी राजनीतिक दलों के नेताओं का सहयोग पाने और उन्हें इसमें सहभागी बनाने के लिए एक विडियो कॉन्फ्रेंसिंग का न्योता भेजा है। इस मीटिंग में खुद को आमंत्रित न किए जाने पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री पर आरोप लगाते हुए इसे हैदराबाद और औरंगाबाद के लोगों का अपमान करार दिया।
. @PMOIndia this is tauheen of the proud people of Aurangabad &Hyderabad. Are they lesser humans because they chose @aimim_national? Pls explain why they’re not worthy of your kind attention? As MPs it’s our job to represent to you the economic & humanitarian misery of our people pic.twitter.com/AwEFtqOs92
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ओवैसी का तर्क है कि वे इन दो संसदीय क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं, ऐसे में उन्हें मीटिंग में न बुलाया जाना इन क्षेत्रों के लोगों का अपमान है। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय को टैग करके एक ट्वीट में सवाल दागते हुए पूछा कि क्या औरंगाबाद और हैदराबाद के लोग कमतर इंसान हैं क्योंकि उन्होंने एआईएमआईएम को चुना? ओवैसी ने अपने ट्ववीट में कहा, “कृपया इसके बारे में स्पष्ट करें कि वे आपके ध्यान पाने के योग्य क्यों नहीं हैं? सांसद के तौर पर हमारा काम है कि हम आपके सामने हमारे लोगों की आर्थिक और मानवीय समस्याओं को रखें।”
एक और ट्ववीट में ओवैसी ने कहा, “हैदराबाद और औरंगाबाद के लोगों ने मुझे और इम्तियाज जलील को चुना कि हम उनके मुद्दों को उठाएंगे। अब हमें इसी काम से रोका जा रहा है। हैदराबाद में कोरोना के कुल 93 ऐक्टिव केस हैं, मैं इस बारे में अपने विचार रखना चाहता हूँ कि हम इस महामारी से कैसे लड़ सकते हैं और किन क्षेत्रों में हम कमजोर पड़ रहे हैं।”
हालाँकि ओवैसी के ये सारे आरोप महज राजनीति से ही प्रेरित नजर आते हैं क्योंकि प्रधामंत्री कार्यालय की तरफ से इस संदर्भ में जो प्रेस रिलीज जारी की गई है, उसमें यह स्पष्ट तौर पर रेखांकित है कि प्रधामंत्री इस विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होने वाली मीटिंग में सिर्फ उन्हीं राजनीतिक दलों के फ्लोर लीडर्स से बात करेंगे, जिनके सदस्यों की संख्या दोनों सदनों में मिलाकर कम से कम 5 है।
ऐसे में ओवैसी का यह कहना कि उनकी उपेक्षा की गई, अनर्गल प्रलाप के सिवाय कुछ नहीं। याद रहे कि कुछ रोज पहले ही ओवैसी ने कोरोना के कारण मरने वालों को शहीद बताया था। इस पर बीजेपी ने कड़ा एतराज जताते हुए इसे उन लोगों को प्रोत्साहन देना बताया था, जो तबलीगी जमात में शामिल होने के बाद से फरार चल रहे हैं।
Jis insaan ka inteqaal waba ki wajah se hota hai, Islam mein uska darja shaheed ka hota hai. Shuhadah ko ghusl aur kafan ki zaroorat nahi hoti aur unhein jald se jald dafan kiya jaana chahiye https://t.co/lmQJxf30cZ
अहमदाबाद के सोला अस्पताल में तबलीगी जमात के सदस्यों ने हंगामा खड़ा करते हुए दवाएँ और इंजेक्शंस लेने से मना कर दिया। इनका आरोप था कि सरकार इन्हें जान से मारने की कोशिश कर रही है। दिव्य भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार जमातियों ने खुद की इच्छा के विरुद्ध अस्पताल में रखे जाने का आरोप लगाया और एक कोने में इकट्ठा हो गए।
रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को 26 तबलीगी जमात के सदस्यों को दरियापुर से लाकर सोला के सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करवाया गया था। जब मेडिकल टीम ने उनकी जाँच करने की कोशिश की, तो उन्होंने जाँच करवाने से मना करते हुए हंगामा खड़ा कर दिया। जिसके बाद अस्पताल प्रशासन को एक मुस्लिम डॉक्टर को बुलाना पड़ा। 5 घंटे तक चले हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद मुस्लिम डॉक्टर की काउन्सिलिंग के बाद जाकर जमातियों ने हंगामा बंद किया।
नाम न छापने की शर्त पर सोला अस्पताल के एक अधिकारी ने दिव्य भास्कर को बताया कि जिन 26 जमातियों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, उनमें से 2 अहमदाबाद, 1 वलसाड, 9 मुजफ्फरनगर (यूपी) और 10 आजमगढ़ (UP) और शेष हैदराबाद से हैं। इनमें से एक डायबिटिक है और 6 नाबालिग। जब डॉक्टरों ने इनकी जाँच शुरू की, तब इन लोगों ने डॉक्टरों पर जान से मारने का शक जताते हुए जाँच करवाने से इंकार कर दिया।
घंटों के हंगामे के बाद अस्पताल प्रशासन को मुस्लिम डॉक्टर नियुक्त करने की प्रार्थना करनी पड़ी, जो आकर इन्हें समझा सकें। जिसके बाद शाम 5 बजे जिले के डीएम ने ढोलका से एक मुस्लिम डॉक्टर को इन उपद्रवियों को समझाने के लिए भेजा। जिसने लगभग 1 घंटे की कोशिश के बाद इन जाहिल जमातियों को यह समझाने में सफलता पाई कि सरकार उनको मारने के लिए नहीं बल्कि कोरोना संक्रमण रोकने के लिए और उनको स्वस्थ रखने का प्रयास कर रही है।
बाकी देश की ही भाँति गुजरात में भी निजामुद्दीन तबलीगी जमात के कारण COVID-19 पॉजिटिव केसेस में बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। रविवार को कोरोना संक्रमण के 10 नए मामले गुजरात में दर्ज किए गए और सभी जमात से संबंधित हैं।
इलेक्ट्रिसिटी अथवा विद्युत्, ये एक ऐसी चीज है, जिस पर पूरी दुनिया चल रही है। विद्युत् ऊर्जा न हो तो आज शायद पूरी दुनिया ठप्प हो जाए। ऐसे में दुनिया भर में मार्च में ‘अर्थ ऑवर’ मनाया जाता है। एक दिन के लिए रात 8 बजे से 9 बजे तक पूरी दुनिया में लोग अपने-अपने घरों की लाइट्स ऑफ कर के इसे मनाते हैं। पर्यावरण और धरती के प्रति कृतज्ञता अर्पित करने के लिए ऐसा किया जाता है। लेकिन, आज तक कभी ऐसे लोग नहीं मिले, जिन्होंने इसका विरोध किया हो, वो भी गैंग बना कर। लेकिन अब ये कॉन्सेप्ट विरोध लायक हो गया है।
जैसा कि आपको पता है, पीएम मोदी ने रविवार (अप्रैल 5, 2020) को रात 9 बजे 9 मिनट के लिए सारी बत्तियाँ बुझा कर दीये, मोमबत्ती और फ़्लैश-लाइट्स जलाने को कहा है। पीएम मोदी की इस इस अपील के बाद कुछ के ट्यूब-लाइट्स भी जलने शुरू हो गए हैं और उनके दिमाग में ऐसे-ऐसे विचार आने लगे हैं कि थॉमस एल्वा एडिसन की आत्मा भी इन्हें एकाध चाँटा मारने धरती पर उतर आए। इनका कहना है कि रात को अचानक से लाइट्स ऑफ होंगी और ऑन होंगी तो पॉवर ग्रिड फेल हो जाएगा। इसके पीछे किस्म-किस्म के लॉजिक दिए जा रहे हैं।
हालाँकि, ऊर्जा मंत्रालय ने ऐसी किसी भी अफवाह पर ध्यान देने से मना किया है लेकिन असली ‘विशेषज्ञ’ तो सोशल मीडिया पर बैठे हैं। बड़े-बड़े पत्रकार तुरंत पॉवर ग्रिड एक्सपर्ट बन बैठे और उन्होंने बिजली से लेकर सौरमंडल तक पर ज्ञान देना शुरू कर दिया। अब इन्हें कौन समझाए कि पीएम ने सिर्फ़ लाइट्स ऑफ करने को कहा है, एसी, टीवी, फ्रिज, फैन, कम्प्यूटर और अन्य उपकरण यथावत चलते रहेंगे। भारत में पॉवर ग्रिड की कितनी क्षमता है और कितने वाट का अतिरिक्त भार वो सहन कर सकता है, उन्हें ये समझाना भैंस के आगे गिटार बजाने जैसा होगा।
असल मुद्दा तो ये है कि ये इसे कोई सांप्रदायिक रंग भी नहीं दे पाया। पहले दिवाली मनाने की बात कही गई लेकिन फिर पता चला कि कैंडल तो चर्चों में भी जलता है। मुंबई में जस्टिन बीबर के प्रोग्राम में फ़्लैश-लाइट्स ऑन कर के नाचने वाले भी कह रहे हैं कि उनके पास टॉर्च नहीं है। कल तो मैं भी इस प्रोपेगेंडा को सच मान कर इतना डर गया था कि मैंने भी अपने कमरे के बल्ब को ऑन रख कर ही सोना उचित समझा, ताकि कहीं पॉवर ग्रिड न ख़राब हो जाए। अब तो गिरोह विशेष मना रहा है कि सारे पॉवर ग्रिड धुआँ-धुआँ हो जाएँ, ताकि ये अपनी रोटियाँ सेकने के लिए निकलें।
यहाँ हम उन बातों पर चर्चा करेंगे, जो आज ‘9 बजे 9 मिनट्स’ कार्यक्रम से हो सकते हैं। हमें आशंका है कि न सिर्फ़ पॉवर ग्रिड्स बल्कि कई ऐसी बहुत बड़ी चुनौतियाँ भी हैं, जिनसे हमें निपटने की ज़रूरत है। ये ब्रह्माण्ड बहुत बड़ा है और लिबरल गैंग सिर्फ़ पॉवर ग्रिड पर ही अटका है, इसीलिए ज़रूरी है कि हम आप तक असली बात पहुँचाएँ। आप जो भी आगे पढ़ेंगे-देखेंगे, वो ‘ऑपइंडिया सटायर विभाग’ के ‘माइकल फैराडे रिसर्च क्लब’ द्वारा प्रमाणित है। तो आइए, ऐसी 5 आशंकाओं और चुनौतियों पर नज़र डालते हैं।
1. धरती सौरमंडल के अपने मार्ग से भटक जाएगी
जैसा कि सर्वविदित है, ये पृथ्वी जो है, वो चपटी नहीं है और वो सूर्य के चारों और चक्कर काटती है। धरती पर जब लाइट्स जलते रहते हैं तो पृथ्वी सौरमंडल में अपनी धुरी पर परिक्रमा करती है। ऐसा वो लोगों के घरों में स्थित घड़ियों को देख कर करती है क्योंकि ऐसे ही निर्धारित होता है कि उसे क्लॉकवाइज घूमना है या काउंटर क्लॉकवाइज। जब धरती पर सारे लाइट्स बुझ जाएँगे, तो क्या पृथ्वी के अपने अक्ष से भटकने का ख़तरा नहीं है? क्योंकि जैसा कि थाली और ताली बजाने वाले मामले में हुआ, सभी देश भारत का अनुसरण कर रहे हैं। अगर धरती उलट-पलट गई तो क्या मोदी जिम्मेदारी लेंगे?
2.अँधेरे में कोरोना और शक्तिशाली हो जाएगा
अब आते हैं असली समस्या पर। कोरोना वायरस रात के अँधेरे में किसी के भी शरीर में घुस जाएगा और वो देख भी नहीं पाएगा। दिक्कत ये है कि कोरोना रात के अँधेरे में लाइट्स के बिना जब निकलेगा तो न तो किसी पुलिसकर्मी की नज़र इस पर पड़ेगी और न ही किसी डॉक्टर की। ऐसे में लोगों को कैसे पता चलेगा कि आसपास कोरोना है और वो उनके घर में घुसने की कोशिश कर रहा है?
3. मोदी को अन्धकार से प्रेम क्यों है?
जहाँ एक तरफ पूरी दुनिया प्रकाश की तरफ जाना चाहती है, पीएम मोदी आख़िर अन्धकार की वकालत क्यों कर रहे हैं? वो प्रकाश बुझाने की बात कर रहे हैं। ऐसे में क्या ये नहीं माना जाए कि वो अन्धकार के समर्थक हैं और देश को अँधेरे में करना चाहते हैं। कहीं ये किसी बड़े इमरजेंसी जैसे ऐलान की प्रैक्टिस तो नहीं? हो सकता है बाद में सदा के लिए सारे लाइट्स ऑफ करवा दिए जाएँ और विपक्षी नेताओं को पकड़-पकड़ कर जेल में डाल दिया जाए। मोदी है, तो मुमकिन है।
4. नेहरू को नीचा दिखाने की साज़िश!
भारत में अब तक जो भी हुआ है, सब नेहरू की देन है। आगे जो होगा, वो भले नेहरू की देन न हो, लेकिन आज के सैकड़ों और हज़ारों साल बाद तक जो भी हुआ होगा, वो सब नेहरू की ही देन होगी। कहीं पीएम मोदी इस बात से खफा तो नहीं हैं कि भारत में बिजली और प्रकाश नेहरू लेकर आए थे और इसी का बदला सधाने के लिए वो इन दोनों के प्रति अपना गुस्सा निकाल रहे हों? किसे नहीं पता कि देश में पहली ट्यूब-लाइट नेहरू ने ही जलाई थी। उसमें से कुछ आज भी जल रहे हैं।
5. भारत पर एलियन अटैक का बड़ा ख़तरा
जब रात में लोग लाखों फ़्लैश-लाइट्स जलाएँगे तो उनका प्रकाश दूर तक जाएगा। जैसा कि हमें पता है, प्रकाश की गति 30 करोड़ मीटर प्रति सेकंड है और इस रफ़्तार से फ़्लैश-लाइट्स का प्रकाश अंतरिक्ष में बैठे एलियनों तक पहुँच सकता है। अगर उनके आँखों तक ये प्रकाश गया और उन्हें परेशानी महसूस हुई तो क्या वो भारत पर हमला नहीं कर देंगे? पीएम मोदी प्रकाश की गति को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं।
ऊपर हमने कुछ ऐसी बातें गिनाई हैं, जिन्हें लिबरल गैंग ने नज़रअंदाज़ कर दिया। हमें आशा है कि वो लोग सिर्फ़ पॉवर ग्रिड पर ही अटके नहीं रहेंगे और उन समस्याओं पर भी बात करेंगे, जिन्हें हमने यहाँ उठाया है। धरती के रास्ता भटकने से लेकर एलियन के हमले तक वाली चिंताओं को उठाया जाना चाहिए।