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87 साल की ख़ालिदा बेगम ने हज के लिए बचाए 5 लाख ‘सेवा भारती’ को दान किए, पेश की मिसाल

जम्मू की 87 साल की खालिदा बेग़म नामक बुजुर्ग महिला ने हज के लिए बचा कर रखे गए 5 लाख रुपयों को सेवा भारती को दान किया। स्वर्गीय एमएस खान की पत्नी ख़ालिदा बेगम कोरोना वायरस के कारण पैदा हुई कठिन परिस्थिति तथा जम्मू-कश्मीर समेत पूरे भारत में चलाए जा रहे सेवा भारती के कार्यक्रमों से पूरी तरह वाकिफ थीं। कोरोना वायरस महामारी के चलते जब उनका हज का प्लान कैंसिल हो गया तब उन्होंने उस पैसे को सामाजिक कार्यों में लगाने के लिए सेवा भारती को सौंप दिया।

सेवा भारती को दिया 5 लाख का चेक

यहाँ यह बताना भी उचित रहेगा कि ख़ालिदा जिया जम्मू-कश्मीर की उन पाँच महिलाओं में शामिल थीं जिन्होंने सबसे पहले राज्य में कॉन्वेन्ट शिक्षा हासिल की थीं। खालिदा प्रसिद्ध कर्नल पीर मुहम्मद खान की बहू हैं जो रॉयल आर्मी में काम करने के बाद पंडित प्रेम नाथ डोगरा की मृत्यु के बाद जम्मू-कश्मीर जनसंघ के अध्यक्ष भी बने थे। खालिदा के पिता कर्नल अब्दुल रहीम खान भी अपने समय की जानी मानी हस्ती थे।

हालाँकि, बढ़ती उम्र के चलते बेशक उनकी गतिविधियाँ कम हो गईं हैं इसके बाद भी वे अपने रूचि के क्षेत्रों तथा सामाजिक सरोकार पर निगाह बनाए रखती हैं। खलिदा के बेटे रिटायर्ड आईपीएस फारुख खान जो फ़िलहाल जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर के सलाहकार के तौर पर काम कर रहे हैं, के नाम जम्मू-कश्मीर पुलिस में काम करते वक्त की कई उपलब्धियाँ दर्ज हैं।

दफनाई नहीं, जलाई जाएगी कोरोना के कारण मृत मरीज की लाश: BMC का आदेश हुआ वापस

कोरोना वायरस से मरने वाले सभी मरीजों के मृत शरीर को जलाया जाएगा, चाहे वो किसी भी धर्म के हों। उन्हें दफनाया नहीं जाएगा। ‘म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ ग्रेटर मुंबई’ ने ऐसा आदेश दिया है। बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने म्युनिसिपल कमिश्नर को ये अधिकार दिया है कि कोरोना वायरस से उपजी आपदा के मद्देनज़र वो ज़रूरी निर्णय ले सकते हैं। वो अपने क़ानूनी दायरे में रह कर वो सभी फ़ैसले ले सकते हैं, जिससे कोरोना वायरस का प्रसार रुके। इसी क्रम में उन्होंने घोषणा की है कि किसी भी मृत कोरोना मरीज को सिर्फ़ जला कर ही उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

कमिश्नर प्रवीण परदेशी ने कोरोना के फैलाव को रोकने के आलोक में ये निर्णय लिया। कहा गया है कि नजदीकी श्मशान में मृत शरीर को ले जाकर वहाँ उनका अंतिम संस्कार किया जाए। सलाह दी गई है कि इस प्रक्रिया के दौरान मृत शरीर को छूने वाली रस्मों से बचा जाए। जितने भी कब्रिस्तान हैं, वो सघन आबादी वाले इलाक़ों में हैं और वहाँ अंतिम संस्कार के दौरान कोरोना के फैलने का ख़तरा है। लाश को प्लास्टिक में पैक करके फिर दफनाना उनको डिकम्पोज होने में देरी पैदा करता है और इसीलिए बीमारियों के फैलने का ख़तरा बना रहता है।

साथ ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में 5 से ज्यादा लोगों के जुटने पर भी पाबंदी लगा दी गई है। श्मशान का कर्मचारी मास्क और ग्लव्स इत्यादि का इस्तेमाल कर के पूरी सावधानी के साथ लाश का अंतिम संस्कार करेगा। अगर कोई दफनाने की ही जिद पर अड़ा है तो उसे मुंबई म्युनिसिपल्टी की सीमा से बाहर जाकर ऐसा करना होगा। इस सम्बन्ध में आदेश जारी कर दिया गया है। ऊपर संलग्न किए गए लेटर में आप कमिश्नर का आदेश पढ़ सकते हैं।

अपडेट: 21:30, 30/03/2020

कथित आदेश को, नई जानकारी के अनुसार, वापस ले लिया गया है।

₹25 करोड़ का डोनेशन, खोल दिए 4 योगग्राम: कोरोना आपदा के बीच मदद के लिए आगे आए बाबा रामदेव

बाबा रामदेव ने ‘पतंजलि आयुर्वेद’ की तरफ़ से पीएम केयर्स फण्ड में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए 25 करोड़ रुपए का योगदान दिया है। बाबा रामदेव ने कहा कि जब भी कोई राष्ट्रीय आपदा आती है तो पतंजलि व उसके लाखों कार्यकर्ता मानवसेवा के लिए तत्पर रहते हैं। उन्होंने पतंजलि को 100% चैरिटी वाला संस्थान बताते हुए गुवाहाटी, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश और हरिद्वार में स्थित योगग्राम को इस आपदा में राहत कार्य हेतु समर्पित करने की घोषणा की। बाबा रामदेव ने ट्विटर पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा:

“विश्व के सर्वश्रेष्ठ योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में पतंजलि ने विश्वस्तरीय संस्थान राष्ट्रसेवा व मानवसेवा के लिए समर्पित किए हैं। इनमें पतंजलि योगपीठ, पतंजलि आयुर्वेद, पतंजलि योगग्राम, पतंजलि विश्वविद्यालय व पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट शामिल हैं। पतंजलि ने 25 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता पतंजलि योगपीठ की ओर से प्रधानमंत्री राहतकोष में सहयोग के रूप में कंट्रीब्यूट करने के लिए हाथ आगे बढ़ाया है, क्योंकि पतंजलि का तो संकल्प ही है प्रोस्परिटी फॉर चैरिटी है।”

बाबा रामदेव ने बताया कि उनके संस्थान में कोरोना वायरस को लेकर लगातार रिसर्च चल रहा है और इस सम्बन्ध में पेपर भी प्रकाशित किए गए हैं। उन्होंने लोगों को कम खाने की सलाह दी ताकि इस आपदा के समय में कोई भी ग़रीब भूखा न रहे। उन्होंने दावा किया कि चिकित्सा, शिक्षा और अनुसन्धान में पतंजलि ने अब तक हज़ारों करोड़ की सहायता की है। इससे पहले बाबा रामदेव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पीएम मोदी के साथ भी बैठक की। प्रधानमंत्री ने उनके अलावा अन्य कई बड़े संगठनों के लोगों से बातचीत कर उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली।

हाल के दिनों में जब राशन वगैरह ख़रीदने में लोगों को कहीं-कहीं परेशानी का सामना करने की ख़बर आई है, बाबा रामदेव ने कहा कि पतंजलि के सभी उत्पाद यथावत मिलते रहेंगे और सारी स्वास्थ्य सुविधाएँ भी चालू रहेंगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पतंजलि के स्टोर्स खुले रहेंगे। उन्होंने बताया कि उनके संस्थान के कई लोग लगातार जनसेवा में लगे हुए हैं और लोगों का सहयोग कर रहे हैं।

दुनिया को तबाह करना चाहता था चीन: डॉक्टर ने खोली पोल तो मिली जान से मारने की धमकी, अब हैं लापता

चीन के वुहान सेंट्रल हॉस्पिटल में इमरजेंसी डिपार्टमेंट की निदेशक आई फेन कोरोना वायरस महामारी से निपटने में चीनी अधिकारियों की आलोचना के बाद गायब हो गई हैं। वह पहली इंसान थीं, जिन्होंने इस महामारी की तरफ आगाह किया था। फिलहाल आई फेन कहाँ है, किसी को भी इसके बारे में पता नहीं है। उन्होंने दिसंबर में ही अपने सहयोगियों और वरिष्ठ डॉक्टरों को इस वायरस को लेकर सचेत किया था, लेकिन उन्हें फटकार लगा दी गई और इस बारे मेंं कुछ भी बोलने से मना कर दिया।

मगर अब जब इतने लोगों की मौत हो चुकी है तो आई फेन चुप न रह सकीं और एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने चीन के सरकारी तंत्र का खुलासा करते हुए अधिकारियों की कड़ी आलोचना की है। दो हफ्ते पहले ही आई फेन ने चीन की मौगजीन रेनवू से बातचीत में चीनी सरकार की पोल-पट्टी खोली थी। अब चीनी सरकार इंटरनेट पर से उस वीडियो को हटाने के लिए काफी जद्दोजहद कर रही है।

इंटरव्यू में डॉ फेन ने कहा, “अगर मुझे यह पता होता कि यह विषाणु इतने लोगों की जान ले लेगा तो मैं चुप नहीं बैठती। मैं पूरी दुनिया में ये बात सभी को बताती। जिस भी माध्यम से कह पाती मैं ये जानकारी सभी को देती। फिर चाहे मुझे कोई जेल में ही क्यों न डाल देता। मैं किसी चीज की परवाह नहीं करती।”

डॉ फेन के मुताबिक, 30 दिसंबर को प्रयोगशाला में पता चला कि यह विषाणु ‘SARS Coronavirus’ जैसा है। डॉ फेन ने रिपोर्ट की तस्वीर लेकर अपने वरिष्ठों और सरकारी अधिकारियों को भेजी। शाम तक यह तस्वीर वुहान के सभी डॉक्टरों के पास पहुँच गई। डॉक्टर ली वेनलियांग ने इसे सोशल मीडिया पर डालकर दुनिया भर को बताया कि नया कोरोना विषाणु फैल रहा है। उसी रात में अस्पताल प्रबंधन का मैसेज आया कि डॉक्टर फेन आप इस बीमारी के बारे में किसी को नहीं बताएँगी। फिर दो दिन बाद उन्हें अस्पताल के अनुशासनात्मक निरीक्षण समिति के प्रमुख ने बुलाकर ‘अफवाह फैलाने’ के लिए फटकार लगाई और साथ ही धमकी दी कि अगर उन्होंने इसके बारे में किसी को बताया तो अंजाम बहुत बुरा होगा। इसके बाद स्टाफ को वायरस से संबंधित किसी भी फोटो या मैसेज को शेयर करने से मना किया गया था।

डॉ फेन ने सभी सरकारी अधिकारियों को बताने की कोशिश की, लेकिन उनकी बात किसी ने नहीं सुनी। उन्होंने कहा, मुझे पता था कि इसका प्रसार एक संक्रमित इंसान के संपर्क में आने से दूसरे को होगा। चीनी अधिकारियों के इसके पुष्टि करने के एक दिन बाद ही 21 जनवरी को इमरजेंसी विभाग में आने वाले मरीजों की संख्या पहले ही दिन में 1,523 तक पहुँच गई थी, जो कि सामान्य दिनों की तुलना में तीन गुना ज्यादा थी।

आगे चीनी डॉक्टर ने कहा कि वो दिन कभी नहीं भूल सकती जब एक पिता को उनके 32 वर्षीय बीमार बेटे की मौत के बाद डॉक्टर उनको डेथ सर्टिफिकेट दे रहे थे, और वह टकटकी लगाए डॉक्टरों को देख रहे थे। इसी तरह एक बुजुर्ग पिता तो इतने बीमार थे कि वो कार से ही नहीं निकल पाए, जब तक वो वहाँ पर गई बुजुर्ग की मौत हो चुकी थी।

बता दें कि डॉ आई फेन से पहले वुहान सेंट्रल हॉस्पिटल के डॉक्टर ली वेनलियांग ने भी कोरोना वायरस के बारे में चीनी सरकार पर आरोप लगाए थे। उन्हें भी चीनी अधिकारियों ने धमकी दी थी कि वे इस बात का जिक्र किसी से भी न करें। हालाँकि, बाद में डॉक्टर ली की कोरोना वायरस से मौत हो गई। मगर उनकी मृत्यु पर उनके कुछ करीबी लोगों ने शंका जताई है। उनके अनुसार ये प्राकृतिक मौत नहीं बल्कि हत्या है। डॉक्टर ली वेनलियांग की मौत के बाद चीनी अधिकारियों ने उनके परिवार के लिए माफीनामा जारी किया, जिसमें उनके जीवित रहने के दौरान उनके साथ किए गए व्यवहार के लिए माफी माँगी गई थी।

कोरोना वायरस ने 3200 नहीं, 42 हजार की ली है जान, 24 घंटे जलाई जा रही है शव: रिपोर्ट्स में स्थानीय लोगों का दावा

चीन के वुहान में कोरोना वायरस के कारण मरने वालों की संख्या पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इस बीच विदेशी मीडिया पोर्टल पर एक चौंकाने वाली खबर आई है। जिसके अनुसार वहाँ के स्थानीय लोगों ने चीनी अधिकारियों के दिए बयान के उलट दावा किया है। दरअसल, इनका कहना है कि वहाँ वास्तविकता में 42 हजार लोग कोरोना के कारण मरे हैं। जबकि चीनी अधिकारियों का कहना है कि 30 मार्च तक सिर्फ़ 3200 लोगों की मौत इस वायरस से हुई है और 81000 के करीब इससे संक्रमित हुए है।

डेलीमेल की रिपोर्ट के मुताबिक, हुबेई प्रांत के अधिकारियों के उलट स्थानीयों ने बताया कि दर्शाए गए आँकड़ों से अधिक निवासी अपने घरों में बिन जाँच के ही मर गए। स्थानीयों के अनुसार चीनी अधिकारियों ने जो दावा किया है। वो गलत है। 42 हजार लोगों की मौत का आँकड़ा चीन सरकार द्वारा जारी किए गए 3304 लोगों की मौत के आँकड़े से करीब दस गुना ज्यादा है। 

वुहान निवासियों का कहना है कि चीन के 7 शहरों में अलग-अलग फ्यूनरल होम से हर दिन 500 परिवारों को कोरोनावायरस से मरने वाले लोगों के अस्थि कलश सौंपे जा रहे हैं। यानी हर दिन 3500 लोगों को अस्थि कलश दिए जा रहे हैं। वहीं, हांकू, वुचांग और हनयांग में लोगों को कहा गया है कि उन्‍हें 5 अप्रैल तक अस्थि कलश दिए जाएँगे। इसी दिन किंग मिंग महोत्‍सव शुरू होने जा रहा है जिसमें लोग अपने पूर्वजों की कब्र पर जाते हैं।

तो, अगर इस तरह से अनुमान लगाएँ तो मालूम पड़ेगा 12 दिनों में 42 हजार अस्थि कलश वितरित किए जाएँगे। जबकि इससे पहले की रिपोर्ट में कहा गया था कि हांकू में ही केवल दो बार में 5000 हजार अस्थि कलश मृतकों के परिवार को दिए गए थे। 

गौरतलब है ये खबरें ऐसे समय पर आई हैं जब करीब दो महीने के लॉकडाउन के बाद जनता को छूट दी गई और जिन लोगों के पास ग्रीन हेल्‍थ सर्टिफिकेट है, उन्‍हें जाने की अनुमति दी गई है।

स्थानीय पूछ रहे हैं सवाल

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वुहान के रहने वाले झांग कहते हैं कि चीन सरकार की ओर से दिया गया मौतों का आधिकारिक आँकड़ा सही नहीं है क्‍योंकि लाशों को जलाने वाले 24 घंटे काम कर रहे हैं। उन्‍होंने सवाल किया कि अगर इतनी कम मौतें हुई हैं तो अंतिम संस्‍कार करने वालों को 24 घंटे काम क्‍यों करना पड़ रहा है।

वहीं, वुहान के रहने वाले माओ ने कहा कि संभवत: अधिकारी धीरे-धीरे मौतों का सही आँकड़ा जारी कर रहे हैं। यह जानबूझकर है या बिना जानबूझकर, मालूम नहीं। लेकिन शायद ऐसा इसलिए है ताकि लोग धीरे-धीरे वास्‍तविकता को स्‍वीकार कर लें।

सूत्रों का दावा- कोरोना से मरने वाली संख्या इटली-अमेरिका को भी कर गई पार

इधर, हुबेई प्रांत के एक सूत्र ने कहा कि कई लोग तो बिना आधिकारिक रूप से इलाज के ही अपने घरों में मर गए। उन्‍होंने कहा कि एक महीने में ही 28 हजार लोगों का अंतिम संस्‍कार किया गया। इस बीच अगर चीन के आधिकारिक आँकड़ों को मानें तो इटली और अमेरिका अब चीन से भी आगे न‍िकल चुके हैं। इटली में 10 हजार लोगों की मौत हो गई है जबकि 97 हजार लोग संक्रमित हैं।


सैनिटाइजेशन प्रक्रिया को टाइम्स पत्रकार समझता है इंसानों के लिए जहर, लोगों ने विडियो भेजकर लगाई क्लास

कोरोना के फैलते प्रकोप ने सबके भीतर एक डर भर दिया है। बस सरकार इसी डर को उनके अंदर से खत्म करके उन्हें इससे लड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। सरकार अपनी तरफ से सुरक्षा बनाए रखने की हर कोशिश कर रही है। मगर मीडिया जगत के कुछ अफवाहकार (पत्रकारों की एक ब्रीड) नई-नई अफवाहों को रचकर उन्हें कमजोर बना रहे। अभी थोड़े समय पहले ये काम दि प्रिंट ने किया और प्रसार भारती के हस्तक्षेप से उनकी फजीहत हुई। अब ये काम टाइम्स ऑफ इंडिया के कंवरदीप नामक पत्रकार सॉरी अफवाहकार ने किया। मगर सोशल मीडिया पर ही यूजर्स ने ही उन्हें सच्चाई का आइना दिखा दिया।

कंवरदीप ने बरेली में हो रहे सैनेटाइजेशन के कार्य की एक विडियो शेयर की। और उस पर यूपी पुलिस, बरेली ट्रैफिक को टैग करके लिखा कि आप किसे मारने की कोशिश कर रहे हैं। कोरोना को या फिर इंसानों को? कंवरदीप दावा करते हैं कि प्रवासियों को जबरन बरेली में प्रवेश देने से पहले रसायनिक पदार्थ में नहलाया जा रहा है।

अब आप ये विडियो देखेंगे और कैप्शन पढ़ेंगे तो आपका भी दिल पसीजेगा और यूपी पुलिस के प्रति गुस्सा उमड़ेगा। मगर, इससे पहले कि कंवरदीप की आधी-अधूरी जानकारी का आप शिकार हों, आपको बता दें कि जैसा वो दर्शाने की कोशिश कर रहे हैं, हकीकत उससे थोड़ी उलट है। वास्तविकता में जो विडियो में दिख रहा है, उसका उद्देश्य लोगों को सैनेटाइज करना था। मगर, जब मामले ने तूल पकड़ा तो बरेली डीएम ने इस पर जाँच के आदेश दिए।

और रही बात कवंरदीप के एंगल की, तो बता दें कि यह जाँच का आदेश जान पर खतरा मामले से संबंधित नहीं है क्योंकि इस तरह के केमिकल का कई जगहों पर प्रयोग किया जाता है। इनसे कोई हानि नहीं होती है। कई औद्योगिक विभाग भी इसे प्रयोग में लाते हैं। इसलिए जाँच का आदेश भीड़ को खुले में बैठाने को लेकर या फिर अति सक्रियता के चलते उनके साथ इस तरह के व्यवहार करने से संबंधित है न कि लोगों को डिसइंफेक्ट करने को लेकर और उनकी जान के खतरे में डालने को लेकर।

गौरतलब है कि आज कोरोना से लड़ने के लिए बड़ी तादाद में लोगों को डिसइंफेक्ट करने की प्रक्रिया का अनुसरण करना एक आवश्यकता है ताकि आगे इसे फैलने से रोका जा सके। इसके अलावा एक खास जानकारी- जिस रसायन के प्रयोग को कंवरदीप जहर समान बता रहे हैं, उसका प्रयोग पानी को डिसइंफेक्ट करने के लिए किया जाता है। मगर, जिन्हें प्रोपगेंडे को ही रफ्तार देनी है, उन्हें इन बातों से क्या सरोकार?

अमित मालवीय ने केरल का वीडियो शेयर किया और पूछा की इसे लेकर हाय-तौबा क्यों नहीं? सिर्फ इसलिए कि वहाँ अपने मतलब की सरकार है?

अब, मिर्चा गालिब नाम के ट्विटर यूजर इन्हीं तथ्यों पर कंवरदीप के अजेंडे को ध्वस्त करते हैं और विडियो से दर्शाते हैं कि कैसे डाइल्यूटेड कैल्शियम हाइपोक्लोराइट सॉल्यूशन की मदद से केबिन को और लोगों सैनेटाइज करने की प्रक्रिया की जा रही है।

यूजर, कंवरदीप की आधी जानकारी को गंभीर मामला मानते हैं और कहते हैं कि अब वाकई देश को पढ़े-लिखे पत्रकारों की आवश्यकता है। आजकल कम बुद्धि के लोग भी पत्रकार बन जाते हैं और फिर ऐसी तबाही मचाने का इंतजार करते हैं। यह एक ऐसा जिम्मेदार पेशा है, जिसे मूर्ख चला रहे हैं।

वहीं, स्पैमिंदर भारती (ट्विटर यूजर) भी कंवलदीप जैसे पत्रकारों के मंदबुद्धि होने की बात को उजागर करते हैं और कहते हैं कि सिर्फ़ थोड़ी सी सुर्खियों के लिए ये लोग पैनिक क्रिएट करते हैं। मगर ये जानने की जरूरत है कि कैमिकल सॉल्यूशन एक कीटाणुनाशक है। जिसे पूरे विश्व भर को संक्रमण रहित बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। वे अपनी बात को प्रमाणित करते हुए कई उदहारण भी देते हैं और इंडोनेशिया, चीन, तथा फिलीपिन जैसे देशों की खबरों को शेयर करते हैं।।

मजदूरों के पलायन पर केजरीवाल को केंद्र का पत्र, लिखा- लॉकडाउन लागू कराने के लिए है पूरी ताकत, फिर भी नहीं किया

कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली से प्रवासियों के भारी पलायन को लेकर उपराज्यपाल अनिल बैजल ने दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल को एक चिट्ठी लिखी है। खबरों के मुताबिक इस चिट्ठी में उन्होंने इस पलायन पर नाराजगी जताई है। वहीं इसके पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी लॉकडाउन के बीच हुए पलायन पर केजरीवाल से गहरी चिंता व्यक्त कर चुके हैं। मगर, उप राज्यपाल अनिल बैजल ने इस बार कड़े शब्दों में पत्र लिखते हुए केजरीवाल से कहा है कि लॉकडाउन को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए दिल्ली सरकार के पास सभी शक्तियाँ थीं, फिर भी ऐसा नहीं हो सका।

गौरतलब है कि इससे पहले गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया था कि गृह मंत्री अमित शाह के उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करने के बाद रविवार शाम पत्र भेजा गया। इस बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल को स्पष्ट निर्देश देने के लिए कहा गया कि किसी भी प्रवासी मजदूर के पलायन को अनुमति नहीं दी जाए। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने खुद दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल से इसको लेकर बात की।

खबरों के अनुसार, केंद्र इस बात से नाराज है कि दिल्ली सरकार ने प्रवासियों को बसों के जरिए सीमा पर छोड़ दिया। जिसके मद्देनजर गृह सचिव अजय भल्ला ने दिल्ली के मुख्य सचिव को इस मामले में लापरवाही के लिए दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को सस्पेंड करने का आदेश दिया है।

प्रवासियों की भारी भीड़ के बाद केंद्र ने राज्यों से कहा है कि वे अस्थायी शरण केंद्र बनाकर पहले 14 दिन तक इन लोगों को ‘क्वारंटाइन’ करें और इसके बाद ही उन्हें आगे रवाना करें। गृह मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि इसे पूरी तरह से टालना चाहिए था। उन्होंने कहा कि सरकार को चिंता है कि पलायन से देश को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

अधिकारी ने बताया कि दिल्ली सरकार के पास लॉकडाउन लागू कराने की पूरी छूट थी और उनके पास इससे जुड़ी सभी शक्तियाँ भी थीं। अधिकारी ने कहा कि भविष्य के लिए उप-राज्यपाल अनिल बैजल ने दिल्ली सरकार से कहा है कि वह सभी मजदूरों को सही तरीके से रखें। जरूरत पड़ने पर उन्हें शेल्टर होम में शिफ्ट किया जाए, जहाँ पर सभी मूलभूत सुविधाएँ हों। इसके अलावा बैजल ने यह भी बताया है कि केंद्र के आदेश के अनुसार लॉकडाउन के दौरान किसी के भी रुपए न काटे जाएँ और उन्हें पूरा भुगतान किया जाए।

अल्लाह के घर का दरवाजा बंद नहीं होगा, जुल्मों का नतीजा है कोरोना: मौलवी ने समझाने आई पुलिस को लौटाया

कोरोना वायरस के ख़तरे को देखते हुए कई मंदिरों ने अपने दरवाजे बंद कर लिए हैं ताकि लोगों की भीड़ न जुटे और इस महामारी का फैलाव बंद हो। कई मंदिरों ने सरकार को वित्तीय सहायता दी है तो कई समाजसेवा के माध्यम से राहत कार्य करने में लगे हुए हैं। ऐसे में एक जगह का वीडियो आया है, जहाँ पुलिस ने एक मस्जिद में जाकर मौलवी से आग्रह किया कि वो मस्जिद के माइक से कोरोना के ख़तरों के प्रति लोगों को आगाह करें। पुलिस का कहना था कि मस्जिद के अनाउंसमेंट को काफ़ी लोग सुनते हैं, ऐसे में इससे लोग जागरूक होंगे।

जब मौलवी से पुलिस ने कोरोना के ख़तरों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मस्जिद से अनाउंस करने को कहा तो मौलवी ने पहले तो दावा किया कि वो अपने स्तर से जो सही समझ रहा है, वो कर रहा है। फिर उसने उलटा पुलिस से ही सवाल दागा कि आपलोग 15-20 आदमी एक साथ आए हैं, अगर यहाँ हम भी भीड़ जुटा लें तो क्या परेशानी है? उसने दावा किया कि अगर आपलोगों को कोरोना नहीं होगा तो हमलोगों को भी नहीं होगा। वो उलटा पुलिस-प्रशासन के लोगों को ही सिखाता रहा।

प्रशासन का कहना था कि मौलवी माइक से अनाउन्स करें कि सभी लोग अपने घरों से ही अल्लाह को याद करें और नमाज अदा करने के लिए मस्जिद में न आएँ, ताकि भीड़ न जुटे। इटली तक का भी उदाहरण दिया गया, जहाँ इस वैश्विक महामारी ने तबाही मचाई है। मौलवी ने दावा किया कि पूरे साल तो नमाज होती है, जब तब कण्ट्रोल हो जाता है तो अब कैसे नहीं होगा? साथ ही उसने मस्जिद आने वाले लोगों को रोकने से भी इनकार कर दिया।

पुलिस ने मौलाना को समझाया कि पहले कुछ दिनों में तो किसी को कोरोना हो भी तो इसके लक्षण पता नहीं चलते, इसीलिए ये पता करना मुश्किल हो जाता है कि कौन संक्रमित है और कौन नहीं। मौलवी ने दावा किया कि अल्लाह का घर बंद नहीं होगा और मस्जिद में आने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं रोका जाएगा। साथ ही मौलाना के साथियों ने भी दावा किया कि मौलाना लगातार लोगों में जागरूकता फैलाते हुए कह रहे हैं कि वो मोहल्ले में इकट्ठे न हों, भीड़ न जुटाएँ। उसने दावा किया कि वो डेटोल वगैरह से सफाई भी करवा रहे हैं।

मौलाना ने प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर ज़रूरत से ज्यादा बंद का इस्तेमाल हुआ तो वो सबके लिए भारी हो जाएगा। मौलाना ने यह भी दावा किया कि कमजोरों पर जो जुल्म हुआ है, वही सब पर भारी पड़ रहा है। उसने पुलिस का सहयोग करने से इनकार कर दिया और उन्हें मस्जिद से बेरंग लौटना पड़ा।

रवीश है खोदी पत्रकार, BHU प्रोफेसर ने भोजपुरी में विडियो बनाके रगड़ दी मिर्ची (लाल वाली)

प्रोपेगेंडा पत्रकार रवीश कुमार ने दूरदर्शन पर रामायण का फिर से प्रसारण किए जाने पर विरोध जताया है। बीएचयू के प्रोफेसर कौशल किशोर मिश्र ने उनके इस प्रोपेगेंडा का उन्हीं की भाषा में मुँहतोड़ जवाब दिया है। चूँकि रवीश कुमार ने भी भोजपुरी में वीडियो बना कर प्रोपेगेंडा फैलाया था, प्रोफेसर किशोर ने भी भोजपुरी में उन्हें जवाब देते हुए पूछा कि रामायण पर काहे बिनबिनाएल बानी? मतलब, आप रामायण के कारण क्यों चिढ़े हुए हैं? प्रोफेसर ने कहा कि रामायण दिखाया जा रहा है तो इस पर रवीश कुमार को मिर्ची क्यों लग रही है? उन्होंने समझाया कि भारत की जनसंख्या 130 करोड़ है, क्या सभी सड़क पर ही हैं?

उन्होंने कहा कि इतना बड़ा लॉकडाउन का निर्णय लिया गया है, ऐसे में सरकार को समय दिया जाना चाहिए ताकि समुचित व्यवस्था हो सके, इसमें बिलबिलाने की क्या ज़रूरत है? प्रोफेसर ने कहा कि वो जनता हैं और उन्होंने रामायण दिखाने की माँग की है। रामायण, महाभारत और चाणक्य जैसे सीरियल टीवी पर बार-बार दिखाए जाने चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि जब लॉकडाउन के कारण लोग अपने घरों में बैठे हुए हैं, ऐसे में उन्हें मनोरंजन के लिए कुछ न कुछ तो चाहिए होगा न?

उन्होंने रवीश को समझाया कि आप प्रकाश जावड़ेकर और अन्य पत्रकारों को गाली क्यों दे रहे हैं? उन्होंने कहा, “देश भर में हजारों पत्रकार हैं, क्या वो सभी आपके हिसाब से बुरे हैं? क्या एक आप ही पत्रकार बचे हैं पूरे भारत में? कुल रवीश कुमार ही पत्रकार हैं?” प्रोफेसर कौशल किशोर ने रवीश कुमार को सलाह देते हुए कहा कि वो थोड़ी सकारात्मक बातें भी करें। जब प्रधानमंत्री देश की जनता की परेशानी के लिए क्षमा माँग रहे हैं, ऐसे में रवीश क्या कहते हैं कि देश की सारी जनता मर जाए? उन्होंने पूछा कि रवीश आखिर बाकी सभी पत्रकारों को गालियाँ क्यों बकते रहते हैं?

प्रोफेसर ने कहा कि रवीश कुमार को इस समय देश का साथ देना चाहिए। जबकि रवीश अभी अमेरिका और जर्मनी से तुलना करने में लगे हैं। और सच्चाई यह है कि भारत की जनसंख्या 130 करोड़ है और यहाँ तुलनात्मक रूप से कम क्षति हुई है। उन्होंने रवीश से कहा कि वो खूब प्रश्न पूछें लेकिन सुझाव भी दें क्योंकि सिर्फ़ सवाल पूछना ही एक पत्रकार का कार्य नहीं है बल्कि समस्या का समाधान करना भी एक पत्रकार का काम है। उन्होंने रवीश से अपील करते हुए कहा कि वो अपनी भाषा बदलें और देश का साथ दें, देश को बचाने में योगदान दें।

BHU के प्रोफेसर कौशल किशोर ने रवीश कुमार की ली क्लास

प्रोफेसर कौशल किशोर ने कहा कि बजाए सुझाव देने के, रवीश कुमार ऊटपटांग बातें कर रहे हैं। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस देश को बचाने में लगे हैं, तब रवीश को भी अपनी तरफ से कोशिश करनी चाहिए। ऊपर संलग्न किए गए वीडियो में आप भी देख सकते हैं कैसे प्रोफेसर कौशल किशोर ने रवीश कुमार के प्रोपेगंडा का भोजपुरी भाषा में अच्छी तरह से सभ्य भाषा का प्रयोग करते हुए जवाब दिया है।

भीड़ में छींक कर कोरोना फैलाने के लिए उकसाने वाला मुजीब मोहम्मद निकला कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक का फैन

बेंगलुरु के इन्फोसिस में काम करने वाला मुजीब मोहम्मद, जिसे पुलिस ने पिछले दिनों गिरफ्तार किया था, वो कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक का बड़ा प्रशंसक निकला। बता दें कि पुलिस ने मुजीब को कोरोना वायरस फैलाने के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। डेक्कन हेराल्ड की खबर के मुताबिक मुजीब ने अपनी फेसबुक पोस्ट के माध्यम से लोगों से अपील की थी कि आओ घर से बाहर निकलो, कोरोना को फैलाने में हाथ मिलाएँ और पब्लिक के बीच मुँह खोल कर छींकें जिससे कि यह कोरोना वायरस और फैल सके। इसके बाद उसे कंपनी से भी निकाल दिया गया।

मुजीब के खिलाफ आईपीसी की धारा 153A, 505, 270 और 109 के तहत कार्रवाई की गई। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि मुजीब मोहम्मद ने सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक को फॉलो कर रखा है, वो उसके भाषण को देखता और उसे लाइक और शेयर भी करता है। पुलिस अधिकारी ने दावा किया कि ऐसे पोस्ट करना उसकी आदतों में शुमार है, जो अन्य समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करती है। मुजीब मोहम्मद ने अपनी एक अन्य फेसबुक पोस्ट में लिखा है, “मेरी बंदूक कुत्तों को मारने के लिए तैयार है।”

बता दें कि हाल के दिनों में जाकिर नाइक कई कट्टरपंथियों का प्रेरणास्रोत है। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने पिछले साल अक्टूबर में कहा था कि संदिग्ध आईएसआईएस लिंक के लिए भारत में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा गिरफ्तार किए गए 127 लोगों में से अधिकांश आतंकवादी कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक के भाषणों से प्रेरित थे, जो कि फिलहाल मलेशिया में रह रहा है।

मुजीब मोहम्मद के पोस्ट को लेकर ट्विटर यूजर्स की प्रतिक्रिया बेहद आक्रामक और गुस्से से भरी थी। कुछ लोगों ने इसे जहाँ जिहाद का एक फॉर्म बताया, तो कुछ ने इसके जरिए मीडिया गैंग की पुअर हेडमास्टर संस थ्योरी को याद किया। लोगों ने इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की थी।

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस को लेकर इस तरह की नफरत फैलाने वाली बात कहने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी चरमपंथी इस्लामिस्ट्स राणा अयूब ने भी कोरोना के संबंध में पूरे देश को बद्दुआ देते हुए कहा था कि जो देश इतना नैतिक रूप से पतित हो चुका हो उसका कोरोना भी क्या करेगा? जिस पर मीडिया गैंग की भी तरफ से काफी तीखी प्रतिक्रिया आई थी। लेकिन बरखा दत्त की जिहादिनों ने जिसका समर्थन किया था।