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उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने मनमोहन सिंह को ‘हिजड़ा’ कहकर उड़ाया था मजाक: अब प्रियंका चतुर्वेदी पूर्व पीएम को ‘बदनाम’ करने का आरोप मोदी सरकार पर मढ़ रही

मनमोहन सिंह के निधन के कुछ घंटों बाद ही शिवसेना (UBT) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने गुरुवार (26 दिसंबर 2024) को पूर्व प्रधानमंत्री की मृत्यु को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा बना दिया और राजनीतिक रोटियाँ सेंकने की कोशिश की।

प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट कर आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनमोहन सिंह की छवि खराब करने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी नेताओं द्वारा व्यक्त किए गए शोक के शब्द ‘पाखंड’ को दर्शाते हैं।

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली यह कैबिनेट डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर शोक प्रकट करने के लिए शब्द भले ही कहे, लेकिन उनके खिलाफ किए गए कृत्य और आरोप कभी नहीं भुलाए जा सकते – उनकी छवि खराब करने, शर्मनाक आरोप लगाने, चरित्र हनन करने और एक महान व्यक्ति को परेशान करने का प्रयास।”

उन्होंने आगे कहा, “बाकी कल वे जो भी कहेंगे, वह केवल पाखंड होगा। इतिहास उनके इस व्यवहार का सही फैसला करेगा।”

हालाँकि, प्रियंका चतुर्वेदी ने इस मौके को राजनीतिक बहस का मुद्दा बना दिया, लेकिन यह साफ हो गया कि शिवसेना (UBT) नेता ने अपनी ही पार्टी द्वारा मनमोहन सिंह पर की गई टिप्पणियों को नजरअंदाज कर दिया। खासकर तब, जब वो खुद कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता रही थी और बाद में शिवसेना में शामिल हुई थी।

साल 2012 में उद्धव ठाकरे ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का मजाक उड़ाते हुए उन्हें ‘मोम का पुतला’ कहा था।

महँगाई के मुद्दे पर उन्होंने कहा था, “पिछले 7-8 सालों से हम देख रहे हैं कि उनमें (मनमोहन सिंह) और मोम के पुतले में ज्यादा फर्क नहीं है।”

एक साल बाद ही साल 2013 में उद्धव ठाकरे ने मनमोहन सिंह को ‘हिजड़ा’ (Eunuch) कहकर उनकी कड़ी आलोचना की थी।

DNA की 2013 की एक रिपोर्ट के अनुसार, ठाकरे ने पुणे के लोगों के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए कहा था कि उन्होंने पूछा था कि मौजूदा सरकार के बारे में उनकी क्या राय है। जवाब में लोगों ने कथित तौर पर कहा कि प्रधानमंत्री सिंह एक अक्षम नेता और ‘हिजड़ा’ हैं।

वहीं, साल 2017 में शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा था, “मुझे नहीं लगता कि देश ने कभी इतना कमजोर प्रधानमंत्री देखा है।” उन्होंने यह भी बयान दिया था कि मनमोहन सिंह को अपनी पार्टी (कॉन्ग्रेस) से भी सम्मान नहीं मिला।

बता दें कि कभी शिवसेना के दिवंगत नेता और संस्थापक बाल ठाकरे ने मनमोहन सिंह को ‘राजनीतिक रूप से नपुंसक‘ (Politically Impotent) तक कह दिया था।

‘शारीरिक संबंध का अर्थ सिर्फ संभोग नहीं, यौन उत्पीड़न की तो बात ही छोड़िए’: दिल्ली हाई कोर्ट ने नाबालिग लड़की से रेप के आरोपित को किया बरी, मिली थी उम्रकैद

दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत 14 साल की लड़की का रेप और यौन उत्पीड़न के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक व्यक्ति को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि शारीरिक संबंध का अर्थ सिर्फ संभोग नहीं हो सकता, यौन उत्पीड़न की तो बात ही छोड़ दीजिए।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति अमित शर्मा की खंडपीठ ने कहा, “पीड़िता ने ‘शारीरिक संबंध’ शब्द का इस्तेमाल किया था, लेकिन इस बात की कोई स्पष्टता नहीं है कि उसने इस शब्द का इस्तेमाल करके क्या कहा था। यहाँ तक ​​कि ‘संबंध बनाया’ शब्द का इस्तेमाल भी POCSO अधिनियम की धारा 3 या IPC की धारा 376 के तहत अपराध स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।”

खंडपीठ ने कहा, “अगर लड़की POCSO अधिनियम के तहत नाबालिग है तो सहमति मायने नहीं रखती, लेकिन ‘शारीरिक संबंध’ शब्द को यौन उत्पीड़न तो दूर, यौन संभोग में भी नहीं बदला जा सकता है।” न्यायालय ने आगे कहा कि नाबालिग ने स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा कि उसके साथ कोई यौन उत्पीड़न हुआ था, तथा इस बात के समर्थन में कोई साक्ष्य भी नहीं था।

अदालत ने कहा, “यह तथ्य कि वह (पीड़िता) स्वेच्छा से अपीलकर्ता के साथ गई थी, इस पर भी कोई विवाद नहीं है। हालाँकि, शारीरिक संबंध या संबंध बनाने से यौन उत्पीड़न की बता करना, एक ऐसी चीज है जिसे साक्ष्य के माध्यम से रिकॉर्ड पर स्थापित किया जाना चाहिए और इसको लेकर अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। ऐसे मामलों में संदेह का लाभ अभियुक्त के पक्ष में होना चाहिए।”

दरअसल, इस मामले में पीड़ित नाबालिग लड़की की माँ ने एक शिकायत दर्ज कराई थी। उस शिकायत में पीड़िता की माँ ने कहा था कि उसकी बेटी को एक अज्ञात व्यक्ति बहला-फुसलाकर घर से अगवा कर ले गया। नाबालिग ने बाद में पुलिस को बताया कि उनके बीच ‘शारीरिक संबंध’ थे। इस बयान के आधार पर ट्रायल कोर्ट ने उस व्यक्ति को दोषी ठहराया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

दोषी ठहराए गए व्यक्ति ने हाई कोर्ट में अपील की। हाई कोर्ट ने पाया कि अपनी जिरह में नाबालिग लड़की ने कहा था कि आरोपित ने न तो उस पर कोई शारीरिक हमला किया और न ही उसके साथ कोई गलत काम किया। मेडिकल जाँच में भी कोई बाहरी चोट या यौन हमले के निशान नहीं मिले। हाई कोर्ट ने यह भी पाया कि आरोपित को आजीवन कारावास की सजा देने के लिए कोई उचित तर्क नहीं दिया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा, “इस प्रकार यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रायल कोर्ट किस तरह इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि अपीलकर्ता द्वारा कोई यौन उत्पीड़न किया गया था। केवल इस तथ्य से कि पीड़िता 18 वर्ष से कम है, यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि यौन उत्पीड़न हुआ था।” इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने आरोपित को बरी कर दिया।

बायडेन मरने वाले, 9/11 ‘अंदर की साजिश’ और कोविड एक घोटाला: ये सब मानने वाली लॉरा लूमर ने भारतीयों के खिलाफ चलाया घृणा अभियान, ट्रम्प के भारतीय को चुनने के बाद सामने आई खीझ

अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में घोषणा की कि श्रीराम कृष्णन व्हाइट हाउस ऑफ़िस ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए नीतियाँ बनाने में उनकी सहायता करेंगे। इसके बाद एक्स (पहले ट्विटर) पर भारतीयों के खिलाफ ट्रम्प समर्थक एक धड़े ने भारतीयों के खिलाफ अभियान चला दिया। इस मुहिम को अमेरिकी पत्रकार और रोज नई साजिश का दावा करने वाली लॉरा लूमर ने चालू किया।

इन लोगों ने भारतीयों के रहन-सहन, खानपान और भारत का मजाक उड़ाया कहा कि उनके देश को भारतीयों की कोई जरूरत नहीं है। लूमर ने H1-B वीज़ा पर श्रीराम के रुख़ को गलत तरीके से पेश किया। इसमें दावा किया गया श्रीराम ने कहा है कि अमेरिकियों की तुलना में बाहरी देशों के कामगारों को काम पर लगाएँगे। इसके बाद भारतीयों पर ऑनलाइन हमले चालू हो गए।

भारतीयों पर नस्लभेदी टिप्पणी

लॉरा लूमर ने उनकी नियुक्ति को ‘निराशाजनक’ करार दिया। लॉरा लूमर ने अपने जहरीले ट्वीट में कृष्णन की नियुक्ति को ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति पर सवाल उठाने वाला बता दिया लॉरा लूमर ने भारतीयों को तीसरी दुनिया से आने वाले हमलावर तक बता डाला। जहर उगलने के क्रम में लॉरा लूमर ने कहा कि भारतीय साफ़ सफाई नहीं रखते। लॉरा लूमर ने यहाँ तक कि कहा कि अगर भारतीय इतने सक्षम हैं तो वह अमेरिका क्यों आते हैं। इसके बाद लॉरा लूमर की काफी आलोचना हुई।

जब लॉरा लूमर को एक व्यक्ति ने इस बात का जवाब दिया कि कैसे अमेरिका की प्रगति में बड़ा हाथ बाहर से आने वाले लोगों और विशेषकर भारतीयों का भी है, तो वह नीचता पर उतर आई। लॉरा ने इसके बाद तर्क से जवाब देने के बजाय भारतीयों के लिए अभद्र भाषा लिखी। लॉरा ने दावा किया कि भारतीय उसी पानी में शौच करते हैं, जिसे वह पीते और नहाते हैं। लॉरा ने कहा कि इसके उलट अमेरिका में पानी नल से आता है। लॉरा को इस बीच उन अमेरिकियों से समर्थन मिला जो खुद को पूरी दुनिया से श्रेष्ठ समझते हैं।

कमला हैरिस के खिलाफ भी की थी टिप्पणी

यह पहली बार नहीं है जब लॉरा ने भारत या भारतीय मूल के लोगों पर नस्लवादी टिप्पणी की हो। इससे पहले उसने डेमोक्रेट राष्ट्रपति उम्मीदवार कमला हैरिस को लेकर भी यही टिप्पणी की थी। उसने कहा था कि अगर कमला हैरिस राष्ट्रपति चुनाव जीत गईं तो व्हाइट हाउस भारतीय सब्जियों की तरह महकेगा और उनके भाषण कॉल सेंटर से चलेंगे। गौरतलब है कि ‘करी‘ (सब्जी) और ‘कॉल सेंटर’ को अमेरिका में भारतीयों पर नस्लभेदी टिप्पणी करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

बाद में लॉरा लूमर ने इस मामले में माफ़ी माँगी और कहा कि यह राजनीतिक व्यंग्य था। हालाँकि, दिन रात भारतीयों के खिलाफ प्रलाप करने वाली लॉरा लूमर मात्र ऐसे हवा हवाई दावे ही कर सकती है, इसके इतर चुनावी राजनीति में वह फेल है। उसने दो बार अमेरिकी कॉन्ग्रेस में जाने के लिए चुनाव लड़ा लेकिन हार चुकी है। उसने यह चुनाव फ्लोरिडा से लड़े थे।

हैती के लोगों को बताया जानवर खाने वाला

सितंबर में राष्ट्रपति पद की बहस के दौरान, डोनाल्ड ट्रम्प ने आरोप लगाया कि हैती से आए अवैध अप्रवासी ओहायो शहर में पालतू जानवरों को खा रहे हैं, जिससे अमेरिकी सोशल मीडिया पर मीम की बाढ़ आ गई। इसी बहस से एक दिन पहले लॉरा लूमर ने एक्स पर कहा कि “नरभक्षी हैती के लोग अब लोगों के पालतू जानवरों को मार रहे हैं और ओहायो की सड़कों पर पालतू जानवरों का शिकार कर रहे हैं।” लॉरा ने इसको लेकर एक ट्वीट किया था और कहा था कि डेमोक्रेट सरकार ने 20,000 हैती के नरभक्षी अमेरिका में बढ़ा दिए हैं।

लूमर की साजिश वाली थ्योरी

जुलाई में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन के राष्ट्रपति पद की दौड़ से बाहर होने के ठीक दो दिन बाद, लूमर ने एक्स पर पोस्ट किया कि वह मरने वाले हैं हैं और उन्होंने अपने कुछ काम को दूसरों को सौंपना शुरू कर दिया है। लूमर ने दावा किया कि ‘उनका समय सीमित है’ और उनका परिवार और कर्मचारी ‘अभी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।’ लूमर ने यह दावा व्हाइट हाउस द्वारा की गई एक प्रेस रिलीज पर किया।

लेकिन लूमर के एक्स पोस्ट पर कम्युनिटी नोट लगा दिए गए। इनमें बताया गया कि लूमर जैसी साजिश का इशारा कर रही हैं वैसा कुछ नहीं है और ऐसी ही घटनाएँ ट्रम्प के पहले कार्यकाल के दौर भी हुई हैं। लूमर ने एक और मौके पर बायडेन के विमान की लैंडिंग के बारे में झूठ फैलाया और कहा कि उन्हें मेडिकल इमरजेंसी थी। जो बाद में गलत साबित हुआ।

लूमर इससे पहले 9/11 के हमले पर भी शक जता चुकी है। लूमर का दावा है कि 9/11 के हमले अल-कायदा के इस्लामी आतंकी की बजाय अंदर के किसी आदमी ने किए। लूमर ने कोविड महामारी को भी साजिश और घोटाला बताया था। हालाँकि, बाद में उसे खुद ही कोविड झेलना पड़ा और इसके चलते उसकी हालत बिगड़ गई।

गिरफ्तार भी हो चुकी है लॉरा लूमर

लॉरा लूमर जून 2017 में भी सुर्खियों में आई थी, उसने न्यूयॉर्क शहर के पब्लिक थिएटर के शेक्सपियर इन द पार्क में शेक्सपियर के “जूलियस सीज़र” नाटक के शूट में बाधा डाली थी। इस शो पर विवाद था क्योंकि इसमें जूलियस सीज़र को डोनाल्ड ट्रम्प जैसे व्यक्ति के रूप में दिखाया गया था, जिसे बाद में कहानी के अनुसार मार दिया जाता है। लूमर को सुरक्षाकर्मियों ने मंच से उतार कर गिरफ्तार कर लिया था। बाद में उसे अदालत में पेश किया गया था।

लॉरा लूमर को जहाँ एक ओर दिन भर साजिश की बातें रटने वालों का समर्थन है तो वहीं बड़ी संख्या में उसके एजेंडे की आलोचना भी हुई है। लूमर की नस्लवादी और विभाजनकारी बयानबाजी ने अक्सर रिपब्लिकन नेताओं को न्नुक्सान ही पहुँचाया है। लूमर अब ट्रम्प की सहायता करने के बजाय मणिशंकर अय्यर जैसे बन गई है।

यह लेख अंग्रेजी में श्रद्धा पांडेय ने लिखा है। इसे आप यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

प्रार्थना सभा के नाम पर लोगों का धर्मांतरण कराने की कोशिश, पादरी समेत 10 गिरफ्तार: ओडिशा से लेकर उत्तर प्रदेश तक फैला मिशनरियों का जाल

देशभर में धर्मांतरण के खिलाफ की जा रही गतिविधियों ने चार प्रमुख घटनाओं को उजागर किया है। इन घटनाओं में अब तक कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है, तो पादरी समेत कम से कम 9 को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, कई अन्य लोगों से पूछताछ जारी है। कार्रवाई में पादरियों सहित अन्य आरोपित शामिल हैं।

उन्नाव में क्रिसमस प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण, 6 गिरफ्तार

उन्नाव जिले के बिहार थानाक्षेत्र के खेसुआ गाँव में बुधवार (25 दिसंबर 2024) को क्रिसमस प्रार्थना सभा के दौरान धर्मांतरण कराने की शिकायत पर पुलिस ने छह लोगों पर केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि प्रार्थना सभा का आयोजन शारदा नाम की महिला ने किया था, जो स्थानीय जमीन पर कब्जा कर वहाँ धर्मांतरण गतिविधियाँ चला रही थी। ग्रामीणों ने इसका विरोध किया तो मारपीट की गई।

बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुँचकर सभा बंद कराई और पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने शारदा, उसके बेटों राहुल, अजय, विजय, आशीष और मनीष के साथ दो अन्य सहयोगियों रमेश और राजेश को गिरफ्तार किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुँचे।

सीतापुर में पादरी एल्गिन सिंह गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के कटसरैया गाँव में धर्मांतरण कराने के आरोप में पादरी एल्गिन सिंह को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उन्हें गुरुवार (26 दिसंबर 2024) सुबह मनवा तिराहा से पकड़ा। पादरी पर उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन अधिनियम 2021 के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने बताया कि एल्गिन सिंह कई स्थानीय लोगों को धर्मांतरण के लिए प्रेरित कर रहा था। इस मामले में अन्य संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। पादरी को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।

ओडिशा में धर्मांतरण के प्रयास में तीन लोगों को पेड़ों से बाँधा

बालासोर जिले के गोबरधनपुर गाँव में स्थानीय ग्रामीणों ने तीन लोगों को धर्मांतरण के प्रयास के आरोप में पकड़कर पेड़ों से बांध दिया। आरोपों के मुताबिक, छनाखानपुर गाँव के गोबिंद सिंह, मित्रपुर मखापड़ा गाँव के सुबासिनी सिंह और मुखुरा पंचायत और रेमुना पुलिस सीमा के रेमुना मुखुरा के सुकांति सिंह ने कथित तौर पर आदिवासी परिवारों को धर्मांतरण के लिए तैयार किया था।

देबसेना की नीलगिरि शाखा के अध्यक्ष बादल कुमार पांडा ने कहा कि गोबिंद सिंह के घर पर भोजन की व्यवस्था थी, जिसमें माँस और चावल शामिल थे। ‘मेरी क्रिसमस’ वाक्यांश से सजा एक केक भी मिला, जिससे संदेह पैदा हुआ कि धर्मांतरण समारोह चल रहा था। ग्रामीणों को संदेह था कि आरोपित परिवारों का धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए उन्होंने उन्हें पेड़ों से बाँध दिया। सूचना मिलने पर पुलिस ने तीनों आरोपितों को हिरासत में ले लिया। घटना के बाद इलाके में तनाव बना हुआ है।

सहारनपुर में धर्मांतरण के आरोपों पर हंगामा

सहारनपुर के नानौता क्षेत्र के ओलरी गाँव में एक घर के अंदर धर्मांतरण गतिविधियों की सूचना पर बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद ने हंगामा किया। आरोप है कि मकान मालिक अपने बेटे के साथ मिलकर प्रलोभन देकर धर्मांतरण करवा रहा था। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया।

विश्व हिंदू परिषद जिलाध्यक्ष दिग्विजय त्यागी ने आरोप लगाया कि एक घर में काफी संख्या में लोगों को एकत्रित कर प्रलोभन देते हुए धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा था। वहीं, थाना पुलिस ने बताया कि धर्मांतरण का मामला नहीं है। निजी कार्यक्रम था। आयोजकों को भविष्य में अनुमति लेकर कार्यक्रम करने की हिदायत दी गई है।

गौरतलब है कि देशभर में धर्मांतरण को लेकर बढ़ती घटनाएँ प्रशासन और जनता के बीच गंभीर चर्चा का विषय बन गई हैं। स्थानीय संगठनों और पुलिस की सक्रियता से ऐसे मामलों में कार्रवाई हो रही है, लेकिन आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी जारी है। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि धर्मांतरण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सतर्कता और पारदर्शिता जरूरी है, ताकि कानून का पालन सुनिश्चित हो और सामुदायिक तनाव न बढ़े। ऐसे में स्थानीय प्रशासन को भी चाहिए कि वो धर्मांतरण की गतिविधियों में शामिल लोगों की पहचान कर उनपर सख्त कार्रवाई करे।

100+ भारतीयों को मारने वाला आतंकी अब्दुल रहमान मक्की अज्ञात मौत मरा: लश्कर का था डिप्टी चीफ, हाफिज सईद का भाई भी था और सगा बहनोई भी

पाकिस्तान में भारत के दुश्मनों की फेहरिस्त से एक और नाम हमेशा के लिए मिट गया। कुख्यात आतंकी और लश्कर-ए-तैयबा का नायब अमीर (डिप्टी चीफ) अब्दुल रहमान मक्की ने लाहौर के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया। उसकी मौत को रहस्यमयी माना जा रहा है। हालाँकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने दावा किया है कि उसकी मौत हार्ट अटैक से हुई।

रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत. छिपाकर रखता था पाकिस्तान

मक्की की मौत को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। पिछले साल संयुक्त राष्ट्र द्वारा उसे अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद पाकिस्तान ने उसे सार्वजनिक नजरों से छुपा दिया था। वह रहस्यमयी तरीके से गायब कर दिया गया था, जबकि अफवाहें थीं कि कुछ अज्ञात बंदूकधारियों ने उसे उठा लिया। पाकिस्तान सरकार उसे लगातार एक जगह से दूसरी जगह छुपाकर रख रही थी। अब उसकी मौत का समय और परिस्थितियाँ सवाल खड़े कर रही हैं। क्योंकि अभी तक यही जानकारी आ रही है कि उसकी मौत अस्पताल में हुई है।

भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों का मास्टरमाइंड

मक्की ने भारत के खिलाफ कई आतंकी हमलों की योजना बनाई थी। 26/11 मुंबई हमले के अलावा 2000 में लाल किले पर हमला, 2008 में रामपुर सीआरपीएफ कैंप पर हमला और 2018 में गुरेज़ हमले में उसकी संलिप्तता पाई गई थी। इन हमलों में सैकड़ों निर्दोष लोगों ने अपनी जान गँवाई। मक्की लश्कर-ए-तैयबा और उसकी राजनीतिक शाखा जमात-उद-दावा का प्रमुख सदस्य था। वह भारत में आतंक फैलाने के लिए युवाओं को बरगलाकर आतंकी गतिविधियों में शामिल करता था। जम्मू-कश्मीर में आतंकी फंडिंग, हमलों की योजना और युवाओं की भर्ती में उसकी अहम भूमिका थी।

हाफिज सईद का चचेरा भाई और सगा बहनोई था मक्की

अब्दुल रहमान मक्की आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद का चचेरा भाई और सगा बहनोई था। यह रिश्ता उसे संगठन में ऊपरी जगह दिलाने में सहायक रहा। अमेरिका और भारत ने उसे मोस्ट वांटेड आतंकवादी घोषित किया था। 2023 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मक्की को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किया था। इसके तहत उसकी संपत्तियाँ जब्त कर ली गईं, यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया गया, और हथियारों की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी गई। इससे पहले चीन ने इस प्रस्ताव पर तकनीकी रोक लगाई थी, लेकिन वैश्विक दबाव के कारण उसे यह रोक हटानी पड़ी।

भारत के सबसे बड़े दुश्मनों में से एक

बता दें कि मक्की की सबसे बड़ी करतूतों में शामिल था 2000 का लाल किला हमला, जिसमें तीन लोग मारे गए थे। इसके अलावा, 26/11 मुंबई हमले में उसकी भूमिका ने उसे भारत के इतिहास में सबसे बड़े दुश्मनों में शुमार कर दिया। इस हमले में 175 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। मक्की की मौत भले ही राहत की बात हो, लेकिन यह भी याद रखना जरूरी है कि पाकिस्तान में आतंकी संगठनों का नेटवर्क आज भी सक्रिय है। मक्की जैसे आतंकियों की जगह लेने वाले और भी लोग हो सकते हैं। भारत को सतर्क रहने की जरूरत है।

पाकिस्तानी फौज से बचने के लिए 10 दिन पैदल चले, 20 दिन कैम्प में गुजारी: 53 साल बाद मोदी सरकार ने 10 बांग्लादेशी हिन्दू पर से मिटाया ‘घुसपैठिया’ का दाग, CAA के तहत मिली नागरिकता

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में एक हिन्दू शख्स को पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से आने के 53 साल बाद भारतीय पहचान हासिल हुई है। वह 1971 में पाक फ़ौज के अत्याचार के चलते अपनी माँ के साथ किसी तरह बच कर भारत भाग आए थे। उन्हें 1971 से लेकर 2024 तक का जीवन शरणार्थी के तौर पर गुजारना पड़ा। इस बीच उन्होंने कई बार नागरिकता के लिए प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हुए। अब मोदी सरकार द्वारा लाए गए CAA कानून के चलते उन्हें भारत का नागरिक मान लिया गया है।

53 साल कहलाए ‘घुसपैठिया’

अमृत विचार की एक रिपोर्ट के अनुसार, पीलीभीत जिले के न्यूरिया हुसैनपुर गाँव में रहने वाले निरंजन मंडल को अब भारतीय नागरिकता मिल पाई है। वह 74 वर्ष के हैं। निरंजन मंडल 1971 तक बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) के फरीदपुर मंडल में रहते थे। लेकिन 1971 के दौरान जब पाकिस्तान की फ़ौज ने हिन्दू और बंगालियों पर अत्याचार चालू किया तो उन्हें सब कुछ छोड़ कर भागना पड़ा। वह अपनी माँ के साथ 21 वर्ष की उम्र में यहाँ से भागे। वह अपने बाकी भाइयों को तक नहीं बता पाए कि उन्हें भारत भागना पड़ा है।

निरंजन मंडल ने बताया कि पाक फ़ौज के अत्याचार के चलते वह अपनी माँ के साथ 10 दिनों तक किसी तरह छिपते-छिपते भारतीय सीमा तक पहुँचे। यहाँ से वह कोलकाता में बनाए गए शरणार्थी कैम्प में 20 दिन तक कठिन हालात में रहे। यहाँ से वह नेपाल के रास्ते कैसे भी करके पीलीभीत पहुँचे। इसके बाद वह न्यूरिया हुसैनपुर में बस गए। पीलीभीत में बड़ी संख्या में बंगाली समुदाय रहता है। हालाँकि, भारत आने के बाद उनका जीवन कम कठिन नहीं रहा। भाषाई दिक्कत और रोजगार की समस्या उन्हें झेलनी पड़ी।

वह भारत में आकर यहाँ शरणार्थी की तरह रहने लगे। उन्हें भारतीय नागरिकता नहीं हासिल हो सकी। कानूनी अडचनों के चलते वह 53 वर्षों तक ‘घुसपैठिया’ कहलाए जाते रहे। हालाँकि, जब 2024 में CAA कानून लागू हो गया तब उन्होंने फिर से नागरिकता के लिए आवेदन किया। इसके बाद उन्हें दिसम्बर, 2024 में जाकर नागरिकता मिल पाई। इस बीच उन्होंने अपना जीवनयापन करने के लिए बच्चों को ट्यूशन पढ़ाई। अब उनका पूरा परिवार भारत में ही है।

परिवार का पता तक नहीं लगा

निरंजन मंडल को कई सालों तक यह नहीं पता रहा कि बांग्लादेश में पीछे छूट गए परिवार के बाकी लोग कैसे हैं। उन्हें तीन दशक बाद बाद यह खबर मिली कि उनके भाई सुरक्षित बच गए हैं और बांग्लादेश में ही रह रहे हैं। हालाँकि, वह इन 53 वर्षों में दोबारा अपने भाइयों से दोबारा मिल नहीं सके। निरंजन मंडल की तीन बेटियों की शादी हो चुकी है। उनका एक बेटा भी है। यहाँ उनका परिवार अब प्रसन्नता से रह रहा है। उनका कहना है कि 53 वर्ष तक घुसपैठिया होने का जो दंश झेला, अब वह झेलना पड़ेगा। उन्हें CAA पोर्टल से नागरिकता की जानकारी मिली है।

न्यूरिया हुसैनपुर में ही एक और व्यक्ति गोपाल को भी भारतीय नागरिकता मिली है। गोपाल के पिता बांग्लादेश से भारत आए थे। गोपाल का जन्म भारत में हुआ था। भारत में नागरिकता जन्म के आधार पर नहीं मिलती, इसके चलते वह अभी तक बिना पहचाना के थे। हालाँकि, CAA के चलते उन्हें भी नागरिकता मिल पाई है। वह 24 वर्ष के हैं। इस इलाके की बड़ी जनसंख्या बंगाली है। इनमें से तमाम बांग्लादेश से भाग कर आए हैं। कई लोग आज भी बिना किसी वैध नागरिकता के जूझ रहे हैं।

पीलीभीत से 7500+ आवेदन

पीलीभीत जिले से CAA लागू होने के बाद 7990 आवेदन नागरिकता के लिए किए गए हैं। इनमें से 9 को नागरिकता मिल भी गई है। हजारों आवेदन कागज पूरे ना होने या फिर सत्यापन में समस्या आने के चलते रद्द भी कर दिए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि पीलीभीत से आवेदन कि बड़ी संख्या के पीछे की वजह इसकी खुली सीमा का नेपाल के साथ लगा होना है। यहाँ से बड़ी संख्या में शरणार्थी अलग-अलग समय पर आई हैं।

सपा नेता कैश खाँ ने प्राचीन शिव मंदिर पर कब्जा कर बनाया 3 मंजिला मकान, शिवलिंग और मूर्तियों को कुएँ में फेंका: विरोध करने पर हिंदुओं को फर्जी मुकदमें में फँसाने की देता धमकी

कन्नौज के बालापीर मोहल्ले में 200 साल पुराने श्री जागेश्वर नाथ शिव मंदिर पर कब्जे का मामला सामने आया है। आरोप है कि समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता कैश खाँ ने प्राचीन जागेश्वर नाथ शिव मंदिर पर कब्जा कर लिया और तीन मंजिला मकान बना लिया। स्थानीय लोगों और भाजपा नेताओं ने दावा किया है कि सपा सरकार के दौरान शिवलिंग और मूर्तियों को मंदिर से हटाकर कुएँ में फेंक दिया गया और उसके ऊपर निर्माण कार्य किया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्थानीय लोगों ने जब कैश खाँ द्वारा किए गए इस कब्जे का विरोध किया, तो सपा नेता कैश खाँ ने उन्हें धमकाया और झूठे मुकदमों में फँसाने की धमकी दी। इसके बाद सभासद भूरा खान और अन्य स्थानीय निवासियों ने इस मामले में भाजपा नेताओं से शिकायत की।

पूर्व सांसद मौके पर पहुँचे, डीएम को सौंपा ज्ञापन

भाजपा के पूर्व सांसद सुब्रत पाठक ने तिर्वा विधायक कैलाश राजपूत और अन्य कार्यकर्ताओं के साथ गुरुवार (26 दिसंबर 2024) को मौके का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि अगर विवादित कुएँ की खुदाई की जाए तो उसमें शिवलिंग और अन्य मूर्तियाँ मिल सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह हिंदू आस्था पर सीधा प्रहार है। पूर्व सांसद ने जिलाधिकारी (डीएम) शुभ्रांत कुमार शुक्ल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मंदिर की जमीन पर कब्जा करने वाले सपा नेता के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की। डीएम ने इस मामले की जाँच कर उचित कार्रवाई का भरोसा दिया।

पूर्व सांसद सुब्रत पाठक ने कहा कि अगर प्रशासन मंदिर को मुक्त कराने और शिवलिंग को पुनः स्थापित करने की कार्रवाई नहीं करता, तो वे समर्थकों के साथ बालापीर मोहल्ले में धरना देंगे।

विहिप ने की अतिक्रमण मुक्त कराने की माँग

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने भी प्रशासन से माँग की कि मंदिर की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए। विहिप का कहना है कि इस तरह के मामलों से हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं।

वहीं, सपा नेता कैश खाँ ने इन आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने यह जमीन खरीदी है और धार्मिक स्थल अब भी सुरक्षित है। उन्होंने भाजपा पर माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया।

भाजपा नेताओं ने एसडीएम सदर रामकेश पर सपा नेता के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया है। पूर्व सांसद सुब्रत पाठक ने डीएम से कहा कि सपा नेता कैश खाँ ने नगर पालिका की भूमि पर भी कब्जा कर लिया है। शिकायत के बाद भी एसडीएम ने कार्रवाई नहीं की। इसके बाद कैश खाँ ने कोर्ट से स्टे ले लिया। इससे मंदिर की भूमि पर कब्जा कराने में एसडीएम सदर रामकेश की भी मिलीभगत है। वहीं एसडीएम ने बताया कि उनके खिलाफ झूठी शिकायत की गई है।

इस मामले में जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल ने आश्वासन दिया कि जल्द अफसरों की टीम को मौके पर भेजकर जाँच कराई जाएगी। उन्होंने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीएम आशीष कुमार को जाँच सौंप दी है। उन्होंने कहा कि दो दिनों में रिपोर्ट माँगी गई है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

शिव मंदिर पर हमला कर मूर्तियों को तोड़कर फेंका, भगवान की फोटो को लगा दी आग: मनुस्मृति जलाने के बीच एक नया बवाल, BHU में धार्मिक ग्रंथ के अपमान करने पर 13 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मथुरा में एक स्थानीय मंदिर में कुछ युवकों ने हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ खंडित कर दी। उन्हें तोड़ कर मंदिर के बाहर फेंक दिया गया। मंदिर में लगे भगवान के फोटो भी इन युवकों ने जला दिए। इसके बाद मंदिर में डॉ भीमराव अम्बेडकर की फोटो स्थापित करने की कोशिश की गई। मंदिर पर हमला करने का आरोप अनुसूचित जाति से जुड़े युवकों पर लगा है। वहीं वाराणसी में कुछ छात्रों ने मनुस्मृति जलाने का प्रयास किया और मारपीट भी की। दोनों घटनाओं में पुलिस ने कार्रवाई की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मथुरा के नौहझील थाना क्षेत्र के उदियागढ़ी गाँव में बने मंदिर पर बुधवार (26 दिसम्बर, 2024) रात को कुछ युवक आए। उन्होंने यहाँ कलश, त्रिशूल और सर्प को तोड़ दिया। उन्होंने मंदिर में स्थापित मूर्तियाँ भी तोड़ दी और उन्हें फेंक दिया। इसके अलावा मंदिर में जितने भी भगवानों के चित्र लगे हुए थे, उनमें आग लगा दी। इसके बाद उन्होंने डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर का एक फोटो मंदिर में स्थापित करने का प्रयास किया।

इसी बीच गाँव के लोगों ने इस करतूत को देख लिया और यहाँ पहुँच गए। इसके बाद यह सभी युवक भाग गए। गाँव वालों ने इस संबंध में पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर घटनास्थल का जायजा लिया। मंदिर में मूर्तियाँ खंडित करने के आरोपित युवक अनुसूचित जाति से जुड़े बताए जा रहे हैं। गाँववालों ने इस संबंध में कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने लोगों को शांत करने के साथ ही मंदिर में मरम्मत भी करवा दी है। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है। मामले में शिकायत भी दर्ज करवाई गई है। घटना के बाद का एक वीडियो भी वायरल है।

मथुरा के अलावा वाराणसी में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों ने हँगामा किया। यह यहाँ के एक व्यस्त चौराहे पर इकट्ठा होकर मनुस्मृति जलाने जा रहे थे और नारेबाजी कर रहे थे। इन छात्र-छात्राओं ने यहाँ मारपीट और धार्मिक उन्माद फैलाने का प्रयास भी किया। पुलिस ने इस मामले में 13 छात्र-छात्रों को गिरफ्तार किया है। इनमें से 3 छात्राएँ हैं। यह सभी BHU में अलग-अलग विषयों की पढ़ाई कर रहे हैं। इनके भगत सिंह मोर्चा नाम के एक संगठन से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। इन्हें जेल भेज दिया गया है।

उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार के सीतामढ़ी में भी एक व्यक्ति के मनुस्मृति जलाने की बात सामने आई है। इस संबंध में पुलिस से लोगों ने कार्रवाई की माँग की है। सीतामढ़ी पुलिस ने इस संबंध में एक्स (पहले ट्विटर) पर जानकारी दी है।

पुलिस ने बताया, “सीतामढ़ी पुलिस के ट्विटर हैंडल पर सूचना प्राप्त हुई कि जय सर्राफ नामक व्यक्ति जो संभवतः सीतामढ़ी जिले के निवासी बताए जा रहे है, और उनके द्वारा हिंदुओ की धार्मिक ग्रंथ मनुस्मति को जलाकर सोशल मीडिया पर वीडियो डाला जा रहा है जिससे समाज में सांप्रदायिक माहौल खराब हो सकता है। उक्त सूचना को संज्ञान में लेते हुए पुलिस अधीक्षक महोदय सीतामढ़ी द्वारा जिले के विभिन्न थानों को उक्त सूचना के सत्यापन हेतु निर्देशित किया गया है।”

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने सरकारी आवास में बने हनुमान मंदिर को तुड़वाया: बार एसोसिएशन ने लगाया आरोप, कार्रवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट को लिखी चिट्ठी

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत पर आधिकारिक आवास के भीतर बने हनुमान मंदिर को ध्वस्त करवाने का आरोप लगा है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिख कर शिकायत की है और जाँच तथा कार्रवाई की माँग की है। बार एसोसिएशन ने कहा कि इससे पहले कई मुस्लिम चीफ जस्टिस तक उस बंगले में रहे हैं लेकिन उन्होंने मंदिर बना रहने दिया और यहाँ तक कि उसका जीर्णोद्धार भी करवाया। जस्टिस कैत बौद्ध धर्म के अनुयायी बताए गए हैं।

बार एसोसिएशन के पत्र के अनुसार, जबलपुर के पचपेड़ी में बने हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के बंगले में एक पुराना हनुमान मंदिर था। एसोसिएशन ने कहा है कि इस मंदिर में जस्टिस बोबडे,जस्टिस खानविलकर समेत बाकी पूर्व चीफ जस्टिस पूजा किया करते थे। एसोसिएशन ने कहा है कि इस मंदिर में उनके स्टाफ भी पूजा करते थे जिससे किसी को कोई परेशानी नहीं थी। पत्र में कहा गया है कि यहाँ जस्टिस रफत आलम और जस्टिस रफीक अहमद भी अपने कार्यकाल के दौरान रहे हैं, उन्होंने भी कभी इस मंदिर पर कोई आपत्ति नहीं जताई।

एसोसिएशन की शिकायत में कहा गया है कि यह मंदिर सरकारी था और इसकी समय-समय पर मरम्मत भी सरकारी पैसे से करवाई जाती रही है। शिकायत के अनुसार, जस्टिस सुरेश कुमार कैत के यहाँ आने के बाद इस मंदिर को तोड़ दिया गया और मूर्तियाँ हटा दी गईं। यह कार्रवाई बिना किसी सरकारी या न्यायिक आदेश के की गई।

जस्टिस कैत हनुमान मंदिर

पत्र में कहा गया है कि इस कृत्य से हिन्दू धर्म में आस्था रखने वालों की भावनाओं का अपमान हुआ है तथा सरकारी सम्पत्ति का भी नुकसान हुआ है। एसोसिएशन ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना से माँग की है कि वह जाँच करवाएँ और दोषियों पर कार्रवाई करें। अभी जस्टिस कैत का पक्ष सामने नहीं आया है।

इस मामले में ऑपइंडिया ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट धन्य कुमार जैन से बात की है। धन्य कुमार जैन ने कहा, “यह मंदिर यहाँ चीफ जस्टिस का बँगला बनने से पहले से था। यह एक नीम के पेड़ के पास बना था। बाद में यह बंगले में शामिल हो गया। इसमें समय के साथ छोटा-मोटा निर्माण भी करवाया गया। मंदिर लगभग 5×6 फीट के साइज का था, इसमें हनुमान जी और शिवलिंग स्थापित थे। यहाँ पूर्व में रहे चीफ जस्टिस पूजा करते थे, उनके स्टाफ भी यहाँ पूजा करते थे।”

सीनियर एडवोकेट जैन ने बताया, “यहाँ तक कि जस्टिस पटनायक यहाँ रोज सुबह धोती पहन कर पूजा करने आते थे चीफ जस्टिस रहे रफत आलम साहब ने इसका जीर्णोद्धार तक करवाया था। वह इसके सामने चप्पल उतार देते थे। किसी को इससे आपत्ति नहीं थी। लेकिन तीन महीने पहले यहाँ जस्टिस कैत आए और इसके बाद इस मंदिर को तोड़ दिया गया। अब कहा जा रहा है कि यहाँ कुछ था ही नहीं। संविधान में सभी धर्मों को आजादी दी गई है, लेकिन जब न्यायपालिका से जुड़े लोग मंदिर हटवा देंगे तो संवैधानिक अधिकारों की रक्षा कौन करेगा।”

उन्होंने इस मामले में जाँच करवाने की माँग की है और कहा है कि यदि संभव हो तो सुप्रीम कोर्ट जस्टिस कैत का ट्रांसफर किसी दूसरे हाई कोर्ट में करे। ऑपइंडिया ने एडवोकेट जैन से पूछा कि मंदिर तुड़वाने का कारण क्या रहा होगा। इसके जवाब में उन्होंने कहा, “जस्टिस कैत साहब बौद्ध धर्म को मानते हैं। हमें उससे कोई समस्या नहीं है, यह इसी धरती से जन्मा हुआ धर्म है। लेकिन इसके चलते मंदिर तोड़ा जाना ठीक नहीं है। इसका दोबारा निर्माण करवाया जाना चाहिए।”

गौरतलब है कि इस मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के बार एसोसिएशन को एक वकील रवीन्द्र नाथ त्रिपाठी की तरफ से शिकायत मिली थी। वकील त्रिपाठी ने इसी के साथ उस PIL की सुनवाई से भी जस्टिस कैत को अलग करने की माँग की है, जिसमें मध्य प्रदेश के पुलिस थानों के भीतर मंदिर बनाने का विरोध किया गया है। इस PIL में अनुरोध किया गया है कि थानों में बने मंदिर संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ हैं और इन्हें हटाया जाना चाहिए। वकील त्रिपाठी ने माँग की है कि जस्टिस कैत के खिलाफ आरोप सिद्ध होने पर आपराधिक कार्रवाई भी चालू की जाए।

जस्टिस सुरेश कुमार कैत मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले हैं। वह इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट और तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में जज रह चुके हैं। सितम्बर, 2024 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया था।

‘अयोध्या, काशी और मथुरा हमें सौंप देते मुस्लिम तो बाकी जगहों पर विवाद नहीं होता’: मंदिर-मस्जिद विवाद पर बोली वीएचपी, कहा- 1984 के धर्म संसद की बातें नहीं मानने से नाराज हैं हिंदू

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने गुरुवार (26 दिसंबर 2024) को हिंदू समाज में मुस्लिम स्मारकों पर अधिकार के दावों और अदालतों में दायर याचिकाओं की वजह बताई। विहिप के महासचिव मिलिंद परांडे ने कहा कि मुस्लिम समुदाय द्वारा अयोध्या, काशी और मथुरा के विवादित स्थलों को हिंदुओं को स्वेच्छा से नहीं सौंपने से हिंदू समाज में नाराजगी है।

1984 का धर्म संसद और 2025 की स्थिति

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विहिप के महासचिव मिलिंद परांडे ने 1984 में आयोजित धर्म संसद का जिक्र करते हुए कहा, “तब यह प्रस्ताव रखा गया था कि अयोध्या, काशी और मथुरा हमें दे दी जाएँ, और इसके बाद अन्य मुद्दों पर कोई हलचल नहीं होगी। लेकिन 2025 आने को है और यह प्रस्ताव अब तक लागू नहीं हो सका। इसी कारण समाज में जो नाराजगी दिख रही है, वह स्वाभाविक है।”

मोहन भागवत के बयान पर भी दी प्रतिक्रिया

संघ प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान को लेकर परांडे ने कहा, “भागवत जी ने काशी और मथुरा के संदर्भ में जो बात कही, उसे समझने की जरूरत है। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर को हिंदुओं के विश्वास का प्रतीक बताया था और कहा था कि रोजाना नए मुद्दे उठाना नफरत और द्वेष पैदा कर सकता है।” हालाँकि, कुछ हिंदू संतों द्वारा उनके बयान के विरोध करने के सवाल पर उन्होंने कहा, “हम संतों के विरुद्ध टिप्पणी नहीं करते।”

मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण का विरोध

परांडे ने मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण के मुद्दे पर कहा कि विहिप 5 जनवरी 2025 से देशव्यापी जन जागरूकता अभियान शुरू करेगी। यह अभियान विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश में आयोजित होने वाली ‘हैंदव शंखावरम’ नाम की विशेष सभा से शुरू होगा। विहिप ने मंदिर प्रबंधन को समाज को सौंपने के लिए एक मसौदा कानून भी तैयार किया है, जिसे हाल ही में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को सौंपा गया।

विहिप की प्रमुख माँगें

विहिप ने मंदिरों को समाज को सौंपने से पहले कुछ प्रमुख माँगें रखी हैं:

  • मंदिरों और एंडोमेंट विभागों से सभी गैर-हिंदू कर्मचारियों को हटाना।
  • पूजा और सेवा के कार्यों में केवल धर्म का पालन करने वाले हिंदुओं को नियुक्त करना।
  • मंदिर प्रबंधन और ट्रस्ट बोर्ड में राजनीतिक दलों से जुड़े व्यक्तियों की नियुक्ति पर प्रतिबंध।
  • मंदिर परिसर में दुकानों के संचालन की अनुमति केवल हिंदुओं को देना।
  • मंदिरों की भूमि पर गैर-हिंदुओं द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाना।

विहिप का कहना है कि उनकी यह पहल हिंदू समाज को मंदिरों के संरक्षण और प्रबंधन में सशक्त बनाने के लिए है। उनका मानना है कि मंदिर हिंदू संस्कृति और परंपरा का आधार हैं और इनका सही प्रबंधन जरूरी है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब हिंदू-मुस्लिम विवादित स्थलों पर चर्चा और मंदिर निर्माण की मांग तेज हो रही है। विहिप ने स्पष्ट किया कि उनका अभियान सांप्रदायिकता फैलाने के लिए नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकार सुनिश्चित करने के लिए है।