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पाकिस्तान है मुस्लिमों का सबसे बड़ा दुश्मन! UN में 54 देशों के साथ मिलकर दिया सबूत

संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन ने 22 अन्य देशों का नेतृत्व करते हुए चीन द्वारा उइगर मुस्लिमों को बंदी बनाए जाने की निंदा की है। 23 देशों के समूह ने एक संयुक्त बयान में बीजिंग की कड़ी आलोचना की। यह बयान ब्रिटेन के संयुक्त राष्ट्र के राजदूत करेन पियर्स ने 193 सदस्यीय संगठन की मानवाधिकार समिति को दिया। अन्य समर्थकों में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी और जापान जैसे देश शामिल थे।

राजदूत पियर्स ने कहा,

“हम चीनी सरकार से शिनजियांग और पूरे चीन में धर्म और विश्वास की स्वतंत्रता सहित मानवाधिकारों के सम्मान के लिए अपने राष्ट्रीय कानूनों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों और प्रतिबद्धताओं को बनाए रखने का आह्वान करते हैं।”

UN का कहना है कि चीन के सुदूर शिनजियांग प्रांत के शिविरों में कम से कम 10 लाख उइगर और अन्य मुस्लिमों को क़ैद कर रखा गया है। वहीं, बीजिंग ने दावा किया कि वो शिविर “व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र” हैं, जिनका निर्माण चरमपंथ पर लगाम लगाने और लोगों को नए कौशल देने के लिए किया गया है।

ख़बर के अनुसार, जो मुस्लिम वहाँ बंदी थे, उनका आरोप है कि कैदियों पर अत्याचार, चिकित्सीय प्रयोग और सामूहिक बलात्कार किए जाते हैं। कुछ अन्य लोगों ने बताया कि मुस्लिम बंदियों को शराब पीने और सूअर का मांस खाने के लिए भी मजबूर किया जाता है। सरकार ने कथित तौर पर देश भर की मस्जिदों में गुंबदों और मीनारों को नष्ट कर दिया है। लेकिन, चीन ने इन सभी आरोपों का खंडन किया है।

चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिमों पर अत्याचार को लेकर मंगलवार (29 अक्टूबर) को संयुक्त राष्ट्र में चर्चा कराई गई थी। इसमें 54 देशों ने बीजिंग के मानवाधिकारों को लेकर सराहना की, जबकि 23 देशों ने चीन की कड़ी निंदा की। ग़ौर करने वाली बात यह है कि सराहना करने वाले 54 देशों में एक देश पाकिस्तान भी है। इससे पता चलता है कि पाकिस्तान को उइगर मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। वो केवल चीन के साथ अपनी सदाबहार दोस्ती को निभाने की दिशा में अग्रसर है। 

पाकिस्तान दुनिया भर में मुस्लिमों की आवाज़ बनने का दंभ भरता है, लेकिन जब बात चीन की आती है, तो ऐसे समय में उसका यह दोहरा रवैया सामने आता है। पाकिस्तान के अलावा, रूस, बोल्विया, कॉन्गो और सर्बिया जैसे देश चीन के बचाव में हैं।

आर्थिक गड़बड़ी 2007-08 (मनमोहन-सोनिया की UPA सरकार) के गलत कर्जों से शुरू हुई: रघुराम राजन

आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि केंद्र सरकार की पहली प्राथमिकता गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की हालत सुधारने के प्रति होनी चाहिए। चैनल सीएनबीसी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि एनबीएफसी कंपनियों को पैसा दिया जाना चाहिए ताकि वे कर्ज लेने-देने का काम चालू कर सकें। उनकी राय में यह अर्थव्यवस्था को वापस ट्रैक पर लाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। साथ ही उन्होंने सरकार को बैंकों और एनबीएफसी सेक्टर की ‘सफाई’ में भी गति लाने की सलाह दी।

राजन ने बैंकों के फँसे कर्जों के संकट (एनपीए क्राइसिस) के बारे में कहा कि इसके बीज 2007-08 में पड़ गए थे। उन्होंने आरबीआई का चार्ज 2013 में लिया था। गौरतलब है कि 2007-08 में मनमोहन सिंह और सोनिया गाँधी की कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में यूपीए सरकार सत्ता में थी। राजन के मुताबिक इस काल खंड में बहुत सारे खराब कर्ज बाँटे गए और आज इनकी साफ़-सफाई होना विकास के लिए ज़रूरी है। उन्होंने दावा किया कि उनके समय से ही आरबीआई ने फंसे कर्जों में सुधार के लिए बैंकों के मैनेजमेंट पर कड़ाई शुरू कर दी थी, और मोदी सरकार को इसमें और ज़्यादा तेज़ी लाने की ज़रूरत है।

राजन का इसके पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ सार्वजनिक विवाद हो चुका है, और ऐसा माना जा रहा है कि वे सीतारमण के आरोपों का ही प्रत्युत्तर दे रहे थे। इसी महीने के मध्य में मोदी सरकार में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने कार्यकाल में सरकारी बैंकों की कथित बदहाली का बचाव करते हुए कहा था कि मनमोहन सिंह-रघुराम राजन काल में बैंकों की वित्तीय स्थिति का “सबसे बुरा दौर” था। बैंक अभी तक उसी से उबर नहीं पाए हैं। वित्त मंत्री उस समय कोलम्बिया विश्वविद्यालय के दीपक और नीरा राज भारतीय आर्थिक नीति केंद्र द्वारा आयोजित लेक्चर में बोल रहीं थीं।

निर्मला सीतारमण ने कहा कि हालाँकि वे राजन का सम्मान करती हैं, लेकिन यह जानना और जनता के सामने सच रखना आवश्यक है कि यह बीमारी आखिर आई कहाँ से। उन्होंने कहा, “भारतीय पब्लिक सेक्टर बैंकों के लिए (रघुराम) राजन के RBI गवर्नर और (मनमोहन) सिंह के प्रधानमंत्री रहने के समय से बुरा समय अभी तक नहीं हुआ है। उस समय हम में से किसी को इसके बारे में नहीं पता था।”

इसके जवाब में इस इंटरव्यू में राजन ने उन्हें याद दिलाया है कि उनके (राजन के) कार्यकाल का दो-तिहाई हिस्सा मोदी सरकार के मातहत ही गुज़रा था।

देवी लक्ष्मी के विसर्जन का दूसरे मजहब ने किया विरोध: भड़की साम्प्रदायिक हिंसा, कपिलवस्तु में सूरज की मौत

नेपाल के कपिलवस्तु जिले के कृष्णानगर में, दीवाली पर लक्ष्मी पूजन के बाद गुरुवार (31 अक्टूबर) को सुबह जब मूर्ति विसर्जन के लिए देवी लक्ष्मी का जुलूस निकला तो मुस्लिम समुदाय के लोग उसके विरोध में आ गए।

मीडिया रिपोर्ट के हवाले से कपिलवस्तु जिला पुलिस कार्यालय के प्रमुख एसपी दीपेश शमशेर राणा ने बताया कि, लक्ष्मी पूजा के बाद देवी लक्ष्मी की मूर्ति को विसर्जित करने के लिए हिंदू समूह द्वारा जिस रास्ते से जुलुस को ले जाया जा रहा था उस मार्ग पर दूसरे मजहब के लोगों द्वारा आपत्ति जताने के बाद दोनों समुदायों के बीच झड़प की स्थिति बन गई।

मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा के देवी लक्ष्मी के विसर्जन का यूँ विरोध करने के कारण नेपाल के कपिलवस्तु ज़़िले में साम्प्रदायिक हिंसा भड़क गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दो अलग-अलग धार्मिक समूहों में इस कदर बढ़ते तनाव के बाद स्थानीय प्रशासन ने कृष्णानगर इलाक़े में कर्फ़्यू लगा दिया।

रिपोर्ट के अनुसार, कहा जा रहा है कि दोपहर में, दो समुदायों के बीच झड़प के कारण कर्फ़्यू को तोड़ने की कोशिश की गई तो प्रशासन ने फायरिंग कर दी। जिससे एक गोली कपिलवस्तु जिले के कृष्णानगर के निवासी सूरज कुमार पांडेय नामक एक व्यक्ति को लगी और उसकी मौत हो गई।

इस घटना के बाद अपने बयान में डीआईजी सुरेश बिक्रम शाह ने ऑनलाइनखबर को बताया कि मृतक सूरज कुमार पांडे नेपाल-भारत सीमा के पास बदानी के एक भारतीय नागरिक थे। जो कपिलवस्तु में एक चाय की दुकान चलाते थे।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दो धार्मिक समुदायों के बीच तनाव बढ़ने के बाद हुए झड़प में उग्र भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश में कई पुलिस कर्मी भी घायल हो गए।

‘PM मोदी को RSS पर फिर से प्रतिबंध लगा देना चाहिए, अगर वो मानते हैं कि…’

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गुरुवार (अक्टूबर 31, 2019) को सरदार वल्लभ पटेल की जयन्ती और इंदिरा गाँधी की पुण्यतिथि पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत आरएसएस और वीर सावरकर पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अगर सरदार पटेल को मानते हें तो उन्हें RSS पर फिर से प्रतिबंध लगा देना चाहिए। बिलकुल उसी तरह जैसे सरदार पटेल ने लगाया था। बघेल ने कॉन्ग्रेस भवन में बोलते हुए भाजपा, संघ और पीएम मोदी की खूब आलोचना की। उन्होंने पूछा कि वीर सावरकार को ‘वीर’ की उपाधि किसने दी।

इस दौरान सीएम बघेल ने सरदार पटेल के आजादी में दिए योगदान को याद किया और कहा कि उनके योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता। सरदार पटेल ने किसानों के लिए कई आंदोलन किए। बघेल के अनुसार जब अंग्रेजों को किसानों ने टैक्स देने से मना किया तो उनकी जमीनें छीन ली गई थीं, जिसे आजादी के बाद कॉन्ग्रेस सरकार ने वापस दिलवाया।

पटेल की जयन्ती पर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बघेल ने सवाल पूछा कि धारा 370 पीएम मोदी ने हटाया या शाह ने, इसका श्रेय किसे देना चाहिए? काम कोई भी करे श्रेय मुखिया को जाता है, लेकिन नेहरू ने पूरा श्रेय सरदार पटेल को दिया।

मुख्यमंत्री बघेल ने इस दौरान वीर सावरकर पर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि एक वर्ग है जो महापुरुषों का कद नापते हैं और एक दूसरे को लड़ाते हैं। इनका आजादी से कोई लेना-देना नहीं है। सरदार पटेल को सरदार की उपाधि महात्मा गाँधी या नेहरू ने दी। महात्मा गाँधी को महात्मा की उपाधि रविंद्र नाथ टैगोर ने दी, लेकिन सावरकर को वीर बोला जाता है, इसकी उपाधि किसने दी।

बघेल ने सावरकर पर सवाल करते हुए पूछा कि ये कैसे वीर हो गए? काले पानी की सजा सैकड़ों लोगों को हुई थी। सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, सावरकर को अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में सजा हुई थी। सावरकर ने माफी माँगी तो वो वीर कैसे हो गए?

इसके बाद उन्होंने इंदिरा गाँधी की पुण्यतिथि और सरकार वल्लभ भाई पटेल की जयन्ती पर दोनों नेताओं को याद करते हुए कहा कि जैसे सरदार पटेल और इंदिरा गाँधी ने काम किया, वैसी ही स्थिति वो छत्तीसगढ़ के सामने देना चाहते हैं। उनके अनुसार छत्तीसगढ़ पहला प्रदेश है, जहाँ मंदी की मार नहीं है। ये स्थिति बनाए रखने की उनकी आगे भी कोशिश रहेगी।

CM योगी की नाराजगी के बाद रामलला का प्रसाद पॉलीथीन में ले जाने पर लगी रोक: जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था की माँग

अयोध्या रामजन्मभूमि के परिसर में पॉलिथीन में प्रसाद ले जाने पर प्रशासन ने रोक लगा दी है। कहा जा रहा है दिवाली के दिन रामलला का दर्शन करने पहुँचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाराजगी के बाद ये फैसला लिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दीपोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ 27 अक्टूबर को रामलला के दर्शन के लिए रामजन्मभूमि परिसर में गए थे, तभी उन्हें वहाँ जमीन पर पड़ी तमाम पॉलिथीन नजर आई। जिसके बाद उन्होंने नाराजगी व्यक्त की और कहा कि जब पूरे देश में पॉलिथीन प्रतिबंधित हो रही है तो यहाँ प्रतिबंध क्यों नहीं लग रहा।

खबर के अनुसार इस घटना के बाद ही प्रशासन ने परिसर में पॉलिथीन ले जाने पर रोक लगाने का निर्णय लिया। हालाँकि पॉलिथीन पर रोक लग जाने के कारण व कोई दूसरा विकल्प न होने के कारण अभी श्रद्धालुओं को रामलला को प्रसाद चढ़ाने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार श्री राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद दास कहते हैं कि सुरक्षा कारणों से करीब 19 वर्ष पहले ही पारदर्शी पन्नी में इलायचीदाना, मिश्री व मूंगफली प्रसाद के रूप में ले जाने की अनुमति दी गई थी। इससे पूर्व तक पहले बर्तन, लड्डू, पेड़ा आदि कई सामान श्रद्धालु लेकर आते थे। लेकिन दो दिन से प्रसाद लेकर श्रद्धालु नहीं आ पा रहे हैं।

गौरतलब है कि रामलला को इलायचीदाना, मिश्री व कच्ची मूंगफली का प्रसाद चढ़ता है। जिसके लिए कपड़े-कागज की थैलियाँ न होने से दो दिन से प्रसाद बेचने वाले प्रभावित हैं। वहीं परिसर के रिसीवर व कमिश्नर मनोज मिश्रा का कहना है कि प्रशासन ने पॉलीथीन में प्रसाद ले जाने व बेचने पर रोक लगाई गई है। प्रसाद चढ़ाने, प्रसाद ले जाने पर कोई रोक नहीं है। पॉलीथीन छोड़कर श्रद्धालु अन्य पारदर्शी वस्तु में प्रसाद ले जा सकते हैं।

इसके अलावा विश्व हिंदू परिषद ने अविलंब प्रसाद चढ़ाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की माँग की है। परिषद के प्रांतीय प्रवक्ता शरद पवार ने कहा है कि श्रीरामजन्मभूमि पर स्थानीय प्रशासन को पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाने से पहले विकल्प तलाशना चाहिए और जब तक इसका विकल्प नहीं मिलता तब तक इस प्रतिबंध को हटाना चाहिए। शरद मिश्रा का कहना है कि इस समस्या से तात्कालिक समाधान के लिए विहिप रामजन्मभूमि परिसर के रिसीवर से मुलाकात करके चर्चा करेंगे।

‘प्रोफेट’ बजिंदर पर है बलात्कार का आरोप, फिर भी DD पंजाबी क्यों बढ़ावा दे रहा उसके धर्मांतरण कार्यक्रम को?

ओडिशा में एक ईसाई संस्था द्वारा आयोजित ‘बिग हीलिंग क्रुसेड’ कार्यक्रम के आयोजकों को फंक्शन होने से पहले ही धक्का लगा है। इस कार्यक्रम का इश्तेहार जारी होने के बाद एक ट्विटर हैंडल @noconversion ने कार्यक्रम के आयोजकों की पोल खोल कर रख दी। अपने ट्वीट में चौंकाने वाला खुलासा करने वाले यूजर ने इसे टारगेट करके दूरदर्शन पंजाबी से प्रचारित किए जाने का भी विरोध किया। यह कार्यक्रम एक संदिग्ध व्यक्ति पास्टर बजिंदर सिंह की अगुवाई में होना था। बता दें कि यह ईसाई संस्था दरअसल कार्यक्रम की आड़ में धर्म-परिवर्तन और अंध-विश्वास जैसी चीज़ों को बढ़ावा देती है।

डीडी पंजाबी पर इसके प्रचार-प्रसार को लेकर होने वाले विरोध को समझने के लिए बजिंदर सिंह की गाथा जानना ज़रूरी है। बता दें कि पास्टर बजिंदर सिंह एक हरियाणवी जाट है, जिसने ईसाई धर्मान्तरण का रास्ता चुना। 2016 में खुद ही ‘चर्च ऑफ़ विज़डम एंड ग्लोरी’ नाम से एक गिरजाघर (चर्च) खोलकर बैठ गया। उसने कहा कि यह धार्मिक आयोजनों के लिए है। उसने धीरे-धीरे पूरे पंजाब में खुद को एक चमत्कारिक व्यक्ति के रूप में बताकर प्रचारित करना शुरू कर दिया।

बता दें कि जालंधर की एक गिरजाघर ने बजिंदर सिंह और उसके चर्च से 2018 में अपने सम्बन्ध ख़त्म कर दिए थे। तब संस्था के प्रवक्ता फादर पीटर ने बताया था, “बजिंदर और उनके चर्च का हमारी संस्था से कोई लेना देना नहीं है, उस चर्च को वह स्वतंत्र रूप से चलाते हैं, जिसे मुख्यधारा के किसी गिरिजाघर से मान्यता भी प्राप्त नहीं है, न ही उनके द्वारा किया जाने वाला कोई भी काम ईसाई परंपरा की मुख्यधारा से ताल्लुक रखता है।”

खुदको पादरी कहने वाले बजिंदर पर रेप जैसे संगीन अपराध के आरोप भी लग चुके हैं। साल 2018 में जब यह मामला हुआ तो शिकायत के तुरंत बाद ही बजिंदर सिंह फरार हो गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बजिंदर को दिल्ली एयरपोर्ट से उस वक़्त गिरफ्तार कर लिया, जब वह देश से निकलकर अपने कार्यक्रम के बहाने लन्दन भाग रहा था।

पीड़ित महिला ने बजिंदर पर उसका रेप करने और उस रेप का वीडियो टेप बनाने और ब्लैक मेलिंग जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। पीड़ित महिला ने बताया था, “उसने (बजिंदर ने) शिकायत करने के जवाब में उसके रेप का वीडियो वायरल कर देने के धमकी दी थी।” फिलहाल बेल पर खुलेआम जेल के बाहर घूम रहा बजिंदर यह दावा करता है कि उसके पास हर बीमारी का इलाज है- उसके दावे में कैंसर से लेकर एड्स जैसी घातक बीमारियाँ तक शामिल हैं।

2017 के एक मूर्खतापूर्ण वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे बजिंदर ने एक मृत बच्चे को जिंदा कर दिया। लोगों को मूर्ख बनाने वाले ऐसे बहुत से वीडियो सोशल मीडिया और इन्टरनेट पर ईसाई धर्मान्तरण के उद्देश्य से डाले ही जाते हैं। इन वीडियो के ज़रिये कोशिश यह की जाती है कि दर्शक वर्ग में ऐसी सोच पैदा करो जो ईसाई धर्म की हिमायती हों। ऐसे चमत्कारिक लोगों के झाँसे में अधिकांशतः वह लोग फंस जाते हैं जो भोले-भाले या कम पढ़े लिखे होते हैं। उन्हें नहीं मालूम कि उन्हें बेवक़ूफ़ बनाया जा रहा है। कैंसर जैसे बड़े रोग इस तरीके से नहीं बल्कि सही समय पर सही उपचार के बाद ही हराए जा सकते है।

अब सवाल यह उठता है कि दूरदर्शन पंजाबी ने एक ऐसे कार्यक्रमों को क्यों प्रसारित किया, जो गरीब और कमज़ोर को निशाना बनाकर मूर्ख बना रहे हैं। बता दें कि दूरदर्शन भारत सरकार का अपना पब्लिक ब्रॉडकास्टर है। यही वजह है कि त्योहारों में इसका काम बहुत व्यस्त और ज़िम्मेदारी भरा है। ऐसे में टीवी स्क्रीन से बजिंदर सिंह जैसे लोगों को दिखाना किसी भी तरीके से जायज़ नहीं।

एकनाथ शिंदे चुने गए शिव सेना विधायक दल के नेता: शाम 6.15 बजे करेंगे राज्‍यपाल से मुलाकात

जहाँ एक ओर महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर एनडीए के भीतर ही भारतीय जनता पार्टी और शिव सेना में दाँव पेंच जारी है, वहीं दूसरी ओर शिव सेना ने भी भाजपा की तर्ज पर अपने विधायक दल के नेता का चुनाव कर लिया है। एक बड़ा उलटफेर करते हुए इस पद पर एकनाथ शिंदे का चुनाव हुआ है, जबकि अधिकांश कयास यह पद आदित्य ठाकरे को मिलने के लग रहे थे। एक अन्य वरिष्ठ विधायक सुनील प्रभु को पार्टी का विधानसभा में चीफ व्हिप बनाया गया है।

आज दोपहर में हुई इस बैठक में शिंदे के नाम का प्रस्ताव ही युवा सेना के अगुआ आदित्य ठाकरे ने रखा जिस पर पार्टी के विधायकों ने मुहर लगा दी। एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के गढ़ सतारा से ठाणे आकर ऑटो रिक्शा चालक के रूप में शुरुआत करने वाले शिंदे 2009 और 2014 में भी विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। उन्होंने अपने बेटे श्रीकांत शिंदे को एमबीबीएस और ऑर्थोपेडिक्स में एमएस कराया है, जिसके बाद श्रीकांत भी सक्रिय नेता हैं। इस बैठक की अध्यक्षता शिव सेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे ने की।

शिंदे के नाम की घोषणा खुद आदित्य ठाकरे ने ट्विटर पर की।

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह भी कहा जा रहा है कि शिवसेना विधायक दल की बैठक खत्म होने के बाद बताया गया कि आदित्य ठाकरे, एकनाथ शिंदे, दिवाकर राउते और सुभाष देसाई समेत पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिलने जाएँगे। शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने बताया कि शाम 6.15 बजे सभी राज्‍यपाल से मुलाकात के लिए प्रस्थान करेंगे।

इस बीच शिव सेना और भाजपा में कल रात खत्म होती दिख रही तनातनी आज फिर से जोर पकड़ने लगी है। कल रात को जहाँ उसकी चुनाव नतीजों से अब तक भाजपा के लिए कड़वी रही ज़बान से अचानक ही फ़ूल झड़ने लगे थे, उसे (अपने राजनीतिक अस्तित्व) और राज्य के हित के लिए भारतीय जनता पार्टी के साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का बने रहना ही श्रेयस्कर लग रहा था, वहीं आज अचानक फिर से उसे 50-50 फॉर्मूला याद आने लगा है।

शिव सेना के प्रमुख प्रवक्ता और पार्टी के मुखपत्र सामना के कार्यकारी सम्पादक संजय राउत ने कल दिए बयानों से गुलाटी मारते हुए आज फिर से दावा किया है कि उनकी पार्टी के रुख में न ही कोई नरमी आई है, न ही उनकी पार्टी कभी अपने वादे से पीछे हटी थी। यह तो भारतीय जनता पार्टी है, बकौल राउत, जो चुनाव के पहले तय किए गए 50-50 फॉर्मूले पर अमल से पीछे हटना चाहती है। उन्होंने कहा कि शिव सेना अपनी माँग पर आगे बढ़ती रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार निर्माण होने की सूरत में मंत्रीमंडल में 50-50 मंत्रियों का गणित ही रहेगा। अगर बीजेपी के पास 145 विधायक हैं, तो बेशक सरकार बना ले। राउत पार्टी के कोटे से राज्य सभा सांसद भी हैं।

हिन्दू नेताओं के हत्या की साज़िश रचने वालों की तलाश में NIA ने तमिलनाडु में की ताबड़तोड़ छापेमारी

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने गुरुवार (31 अक्टूबर) को तमिलनाडु में छ: जगहों पर छापेमारी की है। यह छापेमारी जिन छ: जगहों पर की गई है उसमे कोवई के दो ठिकाने, और इलायनगुड़ी, त्रिची, कयालपट्टिनम और नागपट्टिनम के एक-एक ठिकाने शामिल हैं। NIA ने यह छापेमारी हिन्दू संगठनों के दो नेताओं की हत्या के मामले में की है। जानकारी के अनुसार दोनों ही नेताओं की हत्या की योजना कथित रूप से इस्लामिक स्टेट- स्टाइल ग्रुप ने रची थी, जिसके बाद NIA ने यह छापेमारी की है। छापेमारी के दौरान NIA को कई अहम दस्तावेज़ मिले हैं। इनमें लैपटॉप और पेन ड्राइव भी शामिल है।

जाँच एजेंसी के एक सूत्र ने बताया कि NIA इस्लामिक स्टेट से प्रेरित समूहों द्वारा हिन्दू मक्कल काची के नेता अर्जुन संपथ और उनके बेटे ओमकार की हत्या की कथित साज़िश की जाँच कर रही थी। हत्या की साज़िश के बारे में स्थानीय पुलिस ने जुलाई में केंद्रीय जाँच एजेंसी को सतर्क किया था।

पिछले साल सितंबर में, कोयंबटूर पुलिस की एक विशेष जाँच इकाई ने तमिलनाडु में एक IS-प्रेरित इस्लामिक समूह के सात सदस्यों द्वारा संपथ, हिन्दू मुन्नानी नेता मुकंबिकई मणि और साक्षी सेनानी अंबु मारी की हत्या की साज़िश रची थी।

इसके बाद से ही NIA दक्षिण भारत में सक्रिय है और युवाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जाने वालों की धरपकड़ करने की कोशिश कर रही है। NIA के अनुसार भारत में तमिलनाडु से अधिकतर आतंकी योजनाएँ सामने आई हैं जहाँ आईएस का मॉड्यूल पिछले पाँच वर्षों से काम कर रहा है। NIA का दावा है कि उसने 2014 से अभी तक कुल 127 लोगों को पकड़ा है जोकि आईएस से प्रेरित हैं। जिनमे से 33 लोग तमिलनाडु के हैं।

UN में ICJ ने कहा- पाकिस्तान ने किया कुलभूषण जाधव मामले में वियना समझौते का उल्लंघन

कुलभूषण जाधव के मामले में हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत में चल रहे मुकदमे में महत्वपूर्ण मोड़ आया है। अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस, आईसीजे) ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूनाइटेड नेशंस जनरल असेम्ब्ली, यूएनजीए) को सूचित किया है कि पाकिस्तान ने भारत को कुलभूषण जाधव का कांसुलर एक्सेस न दे कर इस मामले में ऐसे केसों के लिए बने वियना कन्वेंशन के प्रावधानों का उल्लंघन किया है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत के अध्यक्ष जस्टिस अब्दुलकावी युसूफ ने कहा है कि वैश्विक अदालत ने अपने फैसले में पाया है कि पाकिस्तान वियना कन्वेंशन के आर्टिकल 36 के तहत आने वाली अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में विफल साबित हुआ है। उसकी विफलता यह दावा करना है कि गुप्तचरी (एस्पियोनज) के आरोपित कैदी वियना कन्वेंशन की जद में नहीं आते।

युसूफ ने कहा कि चूँकि पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव की गिरफ़्तारी की अधिसूचना जारी करने में करीब तीन हफ्ते का समय लगाया, अतः यह वियना कन्वेंशन के उस प्रावधान के विरुद्ध है जिसमें उसे भारत के कांसुलर ऑफिस को जाधव की गिरफ़्तारी के बारे में “बिना किसी देरी के” सूचना देनी थी।

अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत ने कहा कि इस गलती की सही भरपाई करने का तरीका यही होगा कि कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने और मौत की सज़ा सुनाए जाने पर सही तरीके से पुनर्विचार (रिव्यू और रीकंसीडरेशन) हो।

अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत ने पाकिस्तान के उस दावे की भी पोल खोल दी जिसमें उसने कहा था कि गुप्तचरी (एस्पियोनज) के आरोपित कैदी वियना कन्वेंशन की जद में नहीं आते। जस्टिस अब्दुलकावी युसूफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को सूचित किया कि वियना कन्वेंशन के आर्टिकल 36 में गुप्तचरी (एस्पियोनज) के आरोपित कैदियों के मामले में किसी तरह की छूट का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महा सभा में दावा किया कि कुलभूषण जाधव के मामले में वियना कन्वेंशन पूरी तरह लागू होता है।

गौरतलब है कि इसी साल की 17 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत ने पाकिस्तान को कुलभूषण जाधव को दी गई सजा की समीक्षा करने और पुनर्विचार करने को कहा था, जिसे भारत की बड़ी जीत माना गया था। इसके साथ ही कुलभूषण जाधव को मिली मौत की सज़ा पर भी रोक लगा दी गई थी। अदालत ने उसी समय पाकिस्तान को वियना संधि के उल्लंघन का दोषी पाया था। अदालत ने कहा था कि कुलभूषण जाधव को उनके अधिकारों के बारे में विवरण नहीं दिया गया। इसके अलावा अदालत ने उस समय भी इस बात का ज़िक्र किया था कि जाधव की गिरफ़्तारी की जानकारी भारत को तुरंत नहीं दी गई।

हिन्दी अमेरिका में सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भारतीय भाषा: अमेरिकन कम्यूनिटी सर्वे ने जारी किए आँकड़े

अमेरिका में हिन्दी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है और इसके बाद गुजराती और तेलुगु भाषा हैं। अमेरिकन कम्युनिटी सर्वे (ACS) के आँकड़ों के मुताबिक़, 1 जुलाई 2018 तक 8.74 लाख लोगों के साथ अमेरिका में हिन्दी सबसे अधिक बोली जाने वाली भारतीय भाषा रही, जो 2017 के आँकड़ों में 1.3% की मामूली बढ़ोतरी है।

2010 के बाद से 8 साल के दौरान, इस संख्या में 2.65 लाख लोग जुड़े जो 43.5% का इज़ाफ़ा है। हालाँकि, प्रतिशत के मामले में देखें तो तेलुगु भाषी व्यक्तियों की संख्या अमेरिका में अन्य भारतीय भाषाओं के बोलने वालों से बहुत अधिक बढ़ी जो 2010 से 2018 के बीच 79.5% की बढ़ोतरी हुई।

ख़बर के अनुसार, अमेरिका की कुल जनसंख्या में बंगाली भाषा बोलने वाले 3.75 लाख लोग हैं, जो इसी 8 साल की अवधि में लगभग 68 फ़ीसदी बढ़े हैं। इसके बाद तमिल बोलने वाले 3.08 लाख लोग हैं जिनमें 67.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। बंगाली एक ऐसी भाषा है जिसे भारतीय के अलावा भी अन्य देशों में बोला जाता है। इसमें मुख्य रूप से बांग्लादेश के लोग शामिल हैं। तमिल श्रीलंका, सिंगापुर और मलेशिया जैसे देशों में बोली जाती है।

ग़ौर करने वाली बात यह है कि गुजराती और तेलुगू बोलने वालों की संख्या 2017-18 के दौरान थोड़ी कम हुई थी, बावजूद इसके गुजराती बोलने वालों की संख्या 4.19 लाख है जो पिछले साल की तुलना में 3.5% कम है। इसके बावजूद गुजराती भाषा दूसरे नंबर पर बोली जाने वाली भाषा है। वहीं तीसरे नंबर पर तेलुगु भाषा बोलने वालों की संख्या 1 जुलाई 2018 तक 4 लाख थी।

अमेरिकन कम्युनिटी सर्वे (एसीएस) के अनुसार 2018 के आँकड़े बताते हैं कि देश में 6.73 करोड़ लोग जिनकी उम्र 5 साल से अधिक है और जिनमें वो मूल रूप से अमेरिका में ही पैदा हुए हैं, वो अपने घर पर इंग्लिश के अलावा अन्य भाषा भी बोलते हैं। अमेरिका की कुल जनसंख्या में से 21.9 फ़ीसदी लोग विदेशी भाषा बोलते हैं। जानकारी के लिए बता दें कि ACS ने इस सर्वे में अमेरिका के 20 लाख से अधिक परिवारों को शामिल किया गया था।