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सुप्रीम कोर्ट में चिल्लाए बाबरी मस्जिद के पैरोकार, फाड़ डाले काग़ज़ात और नक़्शे: CJI ने फटकारा

सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्षकार राजीव धवन अचानक से उग्र हो उठे। सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के 72 वर्षीय वकील राजीव धवन ने हिन्दू महासभा के कुछ कागज़ात फाड़ डाले। हिन्दू महासभा ने उन्हें कुछ कागज़ात और नक़्शे दिए थे। अदालत में ही धवन ने उन्हें एक-एक कर फाड़ना शुरू कर दिया। जब मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने उन्हें टोका तो उन्होंने कुछ और पन्ने फाड़ डाले।

बता दें कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने विवादित जमीन पर अपना दावा छोड़ दिया है। सुन्नी वक्फ बोर्ड इस संबंध में शीर्ष अदालत में हलफनामा दायर कर सकती है। मध्यस्थता पैनल ने इसकी पुष्टि की है। इस ख़बर के बाद अयोध्या मामले का घटनाक्रम तेज़ी से बदलता नज़र आ रह है।

बुधवार को राम मंदिर मामले की सुनवाई का 40वाँ और अंतिम दिन है। सीजेआई ने साफ़-साफ़ कह दिया है कि सभी निर्धारित पक्षों को निश्चित समयावधि से अधिक नहीं दी जाएगी और आज शाम 5 बजे तक सुनवाई पूरी कर ली जाएगी। हिन्दू पक्ष की ओर से दलील पेश करते हुए वकील सीएस वैद्यनाथन ने इस तरफ कोर्ट का ध्यान दिलाया कि मुस्लिम पक्ष ने अभी तक ऐसा कोई भी सबूत नहीं दिया है, जिससे पता चले कि विवादित भूमि पर उनका एकाधिकार है। उन्होंने कहा कि 1857 से 1934 के बीच मुस्लिम पक्ष ने वहाँ नमाज़ पढ़ी होगी, लेकिन उसके बाद ऐसा कुछ भी होने का कोई सबूत नहीं है।

वैद्यनाथन ने ये कहते हुए अपनी दलीलें समाप्त की कि नमाज़ पढ़ने के लिए तो काफी सारी जगहें हो सकती हैं, लेकिन राम जन्मभूमि सिर्फ़ एक ही जगह है और उसे बदला नहीं जा सकता। वहीं राम मंदिर पर पहली याचिका दाखिल करने वाले गोपाल सिंह विशारद के वकील ने इस बात पर जोर दिया कि उस स्थल पर पहले से पूजा होती रही है। वकील रंजीत कुमार ने सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की याचिका खरिज करने की अपील के साथ अपनी बात समाप्त की। वहीं निर्मोही अखाड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि बाबा अभिराम दास विवादित स्थल पर स्थित स्ट्रक्चर में मुख्य पुजारी थे।

हिन्दू महासभा ने जो दस्तावेज पेश किए उनमें बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष रहे किशोर कुणाल की पुस्तक ‘अयोध्या रीविजिटेड’ के कुछ अंश का जिक्र था। इसमें कहा गया है कि विवादित स्थल पर शुरू से ही मंदिर का अस्तित्व था। राजीव धवन ने जब आपत्ति जताई तो सीजेआई राजन गोगोई ने कहा कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो सभी जज उठ कर चले जाएँगे। हिन्दू महासभा के वकील विकास ने जब सीजेआई को पुस्तक देने की बात कही तो उन्होंने कहा कि पुस्तक उन्हें दे दी जाए ताकि वो दिवाली तक पढ़ते रहें और नवम्बर तक पढ़ते रहें। सीजेआई ने उन्हें पुस्तक पर हस्ताक्षर कर के देने को कहा। सीजेआई ने धवन को फटकारते हुए कहा कि चिल्लाना व्यर्थ है।

वहीं, विवादित ज़मीन पर अपना दावा छोड़ने के एवज में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने विचित्र शर्तें रखते हुए माँग किया कि अयोध्या में 22 मस्जिदों के रख-रखाव की जिम्मेदारी सरकार उठाए। सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने अंतिम शर्त रखी है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के नियंत्रण में जितने भी धार्मिक स्थल हैं, उनकी स्थिति की जाँच करने के लिए सुप्रीम कोर्ट एक समिति बनाए। मुख्य न्यायाधीश आज सुनवाई के दौरान समय को लेकर एकदम सजग दिखे और निर्मोही अखरा के वकील ने जब डेढ़ घण्टे माँगे तो उन्हें समय की कमी का हवाला देकर 1 बजे तक का समय दिया गया।

मुमताज हॉस्टल में फंदे से लटका मिला अनस: AMU के छात्रों ने काटा बवाल, SP की गाड़ी में तोड़फोड़

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मंगलवार (अक्टूबर 15, 2019) रात एक छात्र ने फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। छात्र का शव मुमताज हॉस्टल के रूम में मिला। प्रशासन और पुलिस की देरी से पहुँचने पर छात्रों ने जमकर हंगामा किया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि आक्रोशित छात्रों ने पुलिस को ही दौड़ा लिया। बताया जा रहा है इस दौरान छात्रों ने एसपी की गाड़ी पर पत्थरबाजी भी की। बाद में कैंपस के बाहर पुलिस फोर्स तैनात की गई, लेकिन हंगामा देर रात तक जारी रहा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक छात्र का नाम मो. अनस शम्सी है। अनस, प्रदेश के पीलीभीत इलाके का रहने वाला था। वो एएमयू में एमएसडब्लू की पढ़ाई पूरी कर चुका था और अब पीएचडी की तैयारी में जुटा था। अनस मुमताज हॉस्टल में अपने तीन साथियों के साथ कमरा नंबर 22 में रहता था। लेकिन मंगलवार की रात जब उसका एक रूम पार्टनर अपने कमरे में पहुँचा तो वह फंदे पर लटका मिला। ये देखते ही अनस के रूम पार्टनर ने शोर मचा दिया और सारे छात्र जुट गए। फंदे से शव को उतारा गया और प्रॉक्टर टीम को सूचना दी गई।

मो. अनस शम्सी

हंगामा कर रहे छात्रों का आरोप है कि काफी देर बीत जाने के बाद भी प्रशासन का कोई अधिकारी समय से नहीं पहुँचा। जिस कारण सभी छात्र गुस्से में आए। इसके बाद छात्र खुदकुशी की जानकारी मिलते ही एएमयू कैंपस में पहुँचे एसपी सिटी अभिषेक पर भी छात्रों ने अपना गुस्सा उतारा।

आक्रोशित छात्रों ने पहले एसपी सिटी की गाड़ी देखकर नारेबाजी शुरू कर दी और फिर उनपर हमला बोला। बवाल अधिक होने के कारण उन्हें वापस होना पड़ा। लेकिन छात्रों की भीड़ उनकी गाड़ी के पीछे दौड़ी और पत्थर फेंककर उनकी गाड़ी का शीशा तोड़ डाला। बड़ी मशक्कत के बाद पुलिसकर्मियों ने एसपी की गाड़ी को कैंपस से बाहर निकलवाया।

एएमयू प्रशासन के पहुँचने के बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया और देर रात तक थाना सिविल लाइल पुलिस द्वारा पोर्टमार्टम कराए जाने की प्रक्रिया पूरी की जाती रही। आत्महत्या का कारण अभी पता नहीं चल पाया है। जाँच जारी है।

चमका ParleG का धंधा: प्रॉफिट 15.2% बढ़ा, राजस्व बढ़कर ₹9030 करोड़,

‘पार्ले जी’ बिस्किट बनाने वाली कम्पनी पार्ले के वार्षिक लाभांश में 15.2% की वृद्धि दर्ज की गई है। यह आँकड़ा वित्तीय वर्ष 2018-19 का है। अर्थात, फाइनेंसियल ईयर 2018-19 में ‘पार्ले बिस्किट्स’ कम्पनी ने पिछले वित्तीय वर्ष के मुक़ाबले 15.2% ज्यादा लाभ कमाया है। पार्ले सहित कई बिस्किट कंपनियों ने सरकार से जीएसटी दर घटाने की भी माँग की थी। पार्ले बिस्किट ने इस वर्ष 410 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ प्राप्त किया है, जबकि पिछले वर्ष यह आँकड़ा 355 करोड़ रुपए था। इसके आल्वा पार्ले के कुल राजस्व में भी वृद्धि दर्ज की गई है। यह सब मंदी की चर्चाओं के बावजूद हुआ।

अगर पार्ले बिस्किट्स के कुल राजस्व की बात करें तो इस वर्ष यह 6.4%की वृद्धि के साथ 9030 करोड़ रुपए रहा, इसमें केवल ऑपरेशन से आने वाले राजस्व की हिस्सेदारी 8780 करोड़ रुपए रही। अगर कम्पनी की अन्य आमदनी की बात करें तो यह भी 26% की बड़ी उछाल के साथ इस वर्ष 250 करोड़ रुपए रहा। इससे पहले काफ़ी ख़बरों में कहा गया था कि पार्ले जीएसटी रेट को 18% किए जाने से निराश है और इसके कारण हजारों कर्मचारियों को नौकरी से निकाल सकती है।

दरअसल, केंद्र सरकार ने बिस्किट्स पर जीएसटी की दरें बढ़ा दी थीं। इसके बाद कई कथित बुद्धिजीवियों और मीडिया रिपोर्ट्स ने मोदी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि गलत आर्थिक नीतियों से आई मंदी के कारण पार्ले ‘काफी बुरी स्थिति’ में है। इससे नौकरियाँ जा सकती है और मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है। पार्ले की ख़बर को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर भी निशाना साधा गया था। अब पार्ले के राजस्व और शुद्ध लाभ में उछाल के साथ इन चर्चाओं पर विराम लग गया है।

पार्ले के सीनियर केटेगरी हेड मयंक शाह ने इन रिपोर्ट्स को आधारहीन बताते हुए जानकारी दी कि पार्ले में कर्मचारियों की किसी भी प्रकार की छँटनी नहीं की गई है। उन्होंने बताया था कि चीजों को ग़लत तरीके से पेश कर नकारात्मकता फैलाई गई। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा था कि यह इंडस्ट्री के विकास दर और बिस्किट्स की बिक्री में बढ़ोतरी पर तय होता है कि कर्मचारियों की छँटनी की जाएगी या नहीं।

3 महीने में ही भाजपा विधायक का कॉन्ग्रेस से हो गया मोहभंग, कर ली घर वापसी

मध्यप्रदेश विधानसभा में तीन महीने पहले कॉन्ग्रेस सरकार के विधेयक के पक्ष में मतदान करके खलबली मचाने वाले भाजपा के बागी विधायक नारायण त्रिपाठी दोबारा से पार्टी में लौट आए हैं। मंगलवार (अक्टूबर 15, 2019) को वे पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के साथ भाजपा कार्यालय पहुँचे। यहाँ उन्होंने ऐलान किया कि वह कॉन्ग्रेस में कभी गए ही नहीं। उनके कॉन्ग्रेस में जाने की खबरें झूठी थीं। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह भी मौजूद थे।

कॉन्ग्रेस विधेयक को दिए अपने समर्थन पर उन्होंने अपना पक्ष साफ किया और कहा, “विधानसभा में एक विधेयक को लेकर हमने वोटिंग की थी। हमें लगा था कि सब (भाजपा-कॉन्ग्रेस) वोटिंग में एक साथ हैं। मैं जान नहीं पाया कि भाजपा ने वोटिंग नहीं की। इस दौरान मैं और शरद कौल एक साथ ही थे पर कॉन्ग्रेस ने इसके बाद इस मामले पर भ्रम फैलाया।”

उन्होंने बताया कि विधानसभा क्षेत्र मैहर को जिला बनाने से लेकर स्मार्ट सिटी सहित कई मामलों पर वे मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ संपर्क में थे। इसका मतलब यह नहीं है कि वे कॉन्ग्रेस में चले गए। उन्होंने साफ किया, “मैं भाजपा का था और भाजपा में ही रहूँगा।” उन्होंने कहा “कांग्रेस दिशाहीन पार्टी है। यहॉं कोई नेतृत्व नहीं है, कोई सोच नहीं है। मैं भाजपा से अलग नहीं हुआ था। मैं मैहर को जिला बनाने के लिए सीएम कमलनाथ से संपर्क में था। सरकार किसी की रहे, क्षेत्र विकास के लिए हर नेता को मुख्यमंत्री से मिलना होता है। इसी संबंध में मैं सीएम कमलनाथ के संपर्क में था।”

इस दौरान नारायण त्रिपाठी ने ये भी जानकारी दी कि वे झाबुआ उपचुनाव में प्रचार करने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आर्टिकल 370 हटने के बाद उन्होंने पीएम की प्रशंसा करते हुए ट्वीट भी किया था। उन्होंने कहा कि अपने विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए वह कमलनाथ से मिलते हैं और हमेशा मिलते रहेगें।

उल्लेखनीय है कि जुलाई के आखिर में विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा के विधायक नारायण त्रिपाठी और शरद कौल ने क्रॉस वोटिंग की थी। जिसके बाद खुद सीएम कमलनाथ ने इन दोनों विधायकों के कॉन्ग्रेस में शामिल होने का दावा किया था और शिवराज सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। इस दौरान भाजपा के दोनों विधायकों ने भी कॉन्ग्रेस सरकार को समर्थन देने की घोषणा की थी। लेकिन अब नारायण त्रिपाठी की घर वापसी से साफ़ हो गया है कि तीन महीने में ही उनका कॉन्ग्रेस से मोह भंग हो चुका है।

ED ने पूछताछ के बाद चिदंबरम को किया गिरफ्तार, कार्ति ने कहा- पॉलिटिकल ड्रामा है सब

आईएनएक्स मीडिया मामले के आरोपित पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को प्रवर्तन निदेशायल (ईडी) ने बुधवार (अक्टूबर 16, 2019) को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी से पहले एजेंसी के अधिकारियों ने उनसे तिहाड़ जेल में पूछताछ की। पूछताछ के दौरान चिदंबरम की पत्नी नलिनी और सांसद बेटे कार्ति भी तिहाड़ जेल पहुॅंचे थे।

दिल्ली की विशेष अदालत ने मंगलवार को ईडी को चिदबंरम से तिहाड़ जेल में पूछताछ की इजाजत दी थी। साथ ही कहा था कि पूछताछ के निष्कर्षों के आधार पर एजेंसी उन्हें गिरफ्तार भी कर सकती है।

पिता से मुलाकात के बाद कार्ति चिदंबरम ने मीडिया को बताया कि उनके पिता के खिलाफ चल रही जॉंच फर्जी है। उन्होंने कहा कि जॉंच के नाम पर जो कुछ चल रहा है वह पॉलिटिकल ड्रामा है।

इससे पहले मंगलवार को विशेष न्यायाधीश अजय कुमार ने कहा था, “मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी को प्रवर्तन निदेशालय अरेस्ट कर सकती है अगर पर्याप्त सबूत हैं तो, इसमें कोर्ट को दखल देने की जरूरत नहीं है।” सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट के समक्ष चिदंबरम की गिरफ्तारी की दलील पेश की थी। उन्होंने पूर्व वित्त मंत्री की गिरफ्तारी की माँग करते हुए कहा था, “आईएनएक्स मामले में मनी लॉन्ड्रिंग, सीबीआई के केस से अलग है और इसमें उन्हें गिरफ्तार कर पूछताछ करने की जरूरत है।” इसके जवाब में चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल का कहना था कि ये एफआईआर पर आधारित है, इसमें अलग से गिरफ्तारी की कोई आवश्यकता नहीं है।

आईएनएक्स मीडिया समूह को 2007 में 305 करोड़ रुपये का विदेशी धन प्राप्त करने के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी देने में अनियमितता बरतने का आरोप चिदंबरम पर है। उस समय वे केंद्र में वित्त मंत्री थे। सीबीआई ने 15 मई 2017 को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद, ईडी ने 2017 में इस संबंध में धन शोधन का मामला दर्ज किया था।

राम मंदिर पर मुस्लिमों की विचित्र शर्तें: सरकार करे अयोध्या के मस्जिदों का रखरखाव

अयोध्या विवाद के मुस्लिम पक्षकारों में से एक सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने राम मंदिर मामले में विवादित जमीन पर अपने मालिकाना हक़ का दावा छोड़ दिया है। इस सम्बन्ध में आज ही बोर्ड सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करेगा। दावा छोड़ने के लिए बोर्ड की ओर से कुछ शर्तें रखी गई है। बोर्ड ने माँग की है कि ‘THE PLACES OF WORSHIP (SPECIAL PROVISIONS) ACT, 1991 ACT NO. 42 OF 1991’ को पूर्णरूपेण लागू कर इसे अभेद्य बनाया जाए। साथ ही सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने यह भी कहा है कि अयोध्या में 22 मस्जिदों के रख-रखाव की जिम्मेदारी सरकार उठाए।

सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने अंतिम शर्त रखी है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के नियंत्रण में जितने भी धार्मिक स्थल हैं, उनकी स्थिति की जाँच करने के लिए सुप्रीम कोर्ट एक समिति बनाए। उल्लेखनीय है कि अयोध्या विवाद में मुस्लिमों की छह पार्टियॉं है। लेकिन सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के पीछे हटने से उन सब के लिए भी दबाव वाली स्थिति होगी।

इससे पहले सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के नेताओं और साधु-संतों के बीच एक बैठक भी हुई, जिसमें इस फ़ैसले को लेकर चर्चा हुई थी। इस बैठक में एक-दूसरे को मिठाई भी खिलाई गई। अयोध्या मामले में आज बुधवार (अक्टूबर 16, 2019) को सुनवाई का अंतिम दिन है और सुप्रीम कोर्ट इस मामले को और लम्बा खींचने के पक्ष में नहीं है।

उधर, राम मंदिर मामले की अदालती सुनवाई को लेकर सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा है कि आज शाम 5 बजे तक इस मामले की सुनवाई पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने सभी पक्षों को अंतिम दलील रखने के लिए समयावधि प्रदान की है, जिसके बाद सुनवाई समाप्त हो जाएगी।

तिहाड़ में आधे घंटे तक ED ने की चिदंबरम से पूछताछ, पत्नी और बेटा भी जेल पहुँचे

आईएनएक्स मीडिया मामले के आरोपित पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम से प्रवर्तन निदेशायल ईडी के अधिकारियों ने आधे घंटे तक तिहाड़ जेल में पूछताछ की। मंगलवार (अक्टूबर 15, 2019) को विशेष अदालत ने ईडी को पूछताछ की अनुमति दी थी। पूछताछ के लिए अधिकारी आज सुबह ही तिहाड़ पहुॅंच गए। उनके पहुॅंचने के कुछ देर बाद चिंदबरम की पत्नी नलिनी और सांसद बेटे कार्ति भी तिहाड़ जेल पहुॅंचे।

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अदालत ने मंगलवार को ईडी को पूछताछ की अनुमति देने के साथ ये भी कहा था कि अधिकारी पूछताछ में आए निष्कर्षों के आधार पर गिरफ्तार करने का फैसला ले सकते हैं। विशेष न्यायाधीश अजय कुमार ने कहा था, “मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी को प्रवर्तन निदेशालय अरेस्ट कर सकती है अगर पर्याप्त सबूत हैं तो, इसमें कोर्ट को दखल देने की जरूरत नहीं है।”

अदालत ने जाँच एजेंसी को चिदंबरम से पूछताछ के लिए 30 मिनट का समय निर्धारित किया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट के समक्ष चिदंबरम की गिरफ्तारी की दलील पेश की थी। उन्होंने पूर्व वित्त मंत्री की गिरफ्तारी की माँग करते हुए कहा था, “आईएनएक्स मामले में मनी लॉन्ड्रिंग, सीबीआई के केस से अलग है और इसमें उन्हें गिरफ्तार कर पूछताछ करने की जरूरत है।” इसके जवाब में चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल का कहना था कि ये एफआईआर पर आधारित है, इसमें अलग से गिरफ्तारी की कोई आवश्यकता नहीं है।

इससे पहले तिहाड़ में बंद पूर्व चिदंबरम ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि सीबीआई ने केवल उन्हें अपमानित करने के लिए जेल में रखा है। उनका कहना है कि उनके ऊपर या उनके परिवार के ऊपर ऐसा कोई भी आरोप नहीं है कि उन्होंने मामले में कभी किसी गवाह से संपर्क करने या उसे प्रभावित करने की कोशिश की हो।

राममंदिर पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने किया समझौता, दायर कर सकती है हलफनामा

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को अयोध्या विवाद की अंतिम दिन की सुनवाई होनी है। उससे पहले तेजी से बदले घटनाक्रम में सुन्नी वक्फ बोर्ड ने विवादित जमीन पर अपना दावा छोड़ दिया है। सुन्नी वक्फ बोर्ड इस संबंध में शीर्ष अदालत में हलफनामा दायर कर सकती है। मध्यस्थता पैनल ने इसकी पुष्टि की है।

चर्चा है कि कई साधु-संतों के साथ सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के नेताओं की बैठक हुई, जिसमें काफ़ी सौहार्दपूर्ण वातावरण में बातचीत हुई। इस दौरान साधु-संतों ने सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के लोगों को मिठाई भी खिलाई। ऑपइंडिया ने इन ख़बरों की पुष्टि के लिए दोनों पक्षों से संपर्क किया जिसमें सूत्रों ने बैठक की बात तो कही लेकिन इस बात पर कोई मुँह खोलने को तैयार नहीं है कि किन शर्तों पर सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड राम मंदिर वाली भूमि पर दावा छोड़ने को तैयार हुआ है। बदले में उसकी क्या माँगे और शर्तें हैं? वैसे अपुष्ट ख़बरें आ रही हैं कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने सशर्त रूप से ऐसा करने का फ़ैसला लिया है।

बताया जा रहा कि दावा छोड़ने के लिए बोर्ड की ओर से कुछ शर्तें रखी गई है। बोर्ड ने माँग की है कि ‘THE PLACES OF WORSHIP (SPECIAL PROVISIONS) ACT, 1991 ACT NO. 42 OF 1991’ को पूर्णरूपेण लागू कर इसे अभेद्य बनाया जाए। साथ ही सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने यह भी कहा है कि अयोध्या में 22 मस्जिदों के रख-रखाव की जिम्मेदारी सरकार उठाए। इसके अलावा बोर्ड ने कहा है कि एएसआई के नियंत्रण में जितने भी धार्मिक स्थल हैं, उनकी स्थिति की जाँच करने के लिए सुप्रीम कोर्ट एक समिति बनाए।

बताया जा रहा है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड अपनी याचिका वापस ले सकता है। उसने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। मध्यस्थता पैनल की पुष्टि से पहले ही बोर्ड के दावे से पीछे हटने को लेकर सोशल मीडिया में चर्चाओं का बाजार गरम हो गया था। सोशल मीडिया पर बड़े पत्रकारों से लेकर कई अन्य लोगों ने भी इस समबन्ध में अपुष्ट सूचनाएँ दी थी, जिनके आधार पर कहा जा रहा था कि राम में आस्था रखने वालों के अच्छे दिन आ गए हैं और आक्रांता बाबर द्वारा की गई ऐतिहासिक भूल को सुधारने का क्षण आ गया है।

पत्रकार अमीर अब्बास ने ट्वीट किया, “अयोध्या पर बहुत बड़ी ख़बर। सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने हम सबकी अपील मान ली है। हिंदू-मुस्लिम एकता और भाईचारे का संदेश देते हुए राम जन्म भूमि पर #RamMandir के लिए अयोध्या की 2.77 एकड़ विवादित ज़मीन पर से अपना दावा छोड़ा। आज सुप्रीम कोर्ट में बोर्ड दायर करेगा हलफ़नामा।”

इससे पहले मंगलवार को ही मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने साफ़ कर दिया था कि मामले की अंतिम सुनवाई बुधवार (अक्टूबर 16, 2019) को होगी और उसके बाद अदालत फ़ैसला लिखने के लिए कुछ समय लेगी। भाजपा भी क़ानूनी तरीके से राम मंदिर बनवाने की बात अपने हर घोषणा-पत्र में शामिल करती रही है। अपुष्ट सूचनाओं का कहना है कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड अयोध्या में 2.77 एकड़ ज़मीन पर अपने मालिकाना हक़ का दावा छोड़ देगा और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में आज ही हलफनामा दायर किया जाएगा।

इससे पहले भी कई बार राम मंदिर पर मध्यस्थता की प्रक्रिया अपनाई गई लेकिन बात नहीं बनी। अंत में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की नियमित सुनवाई शुरू की और कहा जा रहा है कि नवम्बर में सीजेआई रंजन गोगोई के रिटायरमेंट से पहले इस मामले में फैसला आ सकता है।

Happy Birthday ड्रीम गर्ल: अब कमलनाथ सरकार बनाएगी हेमा मालिनी के गाल जैसी सड़कें!

भाजपा सांसद हेमामालिनी का आज जन्मदिन है। साल 1948 में पैदा हुईं हेमा मालिनी को यूॅं ही ‘ड्रीमगर्ल’ नहीं कहते। उनके कद्रदानों की फे​हरिस्त लंबी है। यहॉं तक कि राजनीतिक विरोधी भी जनता को लुभाने के लिए उनके गालों की तरह सड़कें बनाने का सपना दिखाते हैं। यह दूसरी बात है कि नीयत में खोट की वजह से वे वैसी सड़कें नहीं बना पाते।

अब की हेमा मालिनी के जन्मदिन से ठीक पहले मध्य प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने कुछ ऐसा ही वादा किया है। मध्य प्रदेश के जनसम्पर्क मंत्री पीसी शर्मा ने कहा है कि राज्य की सड़कों को हेमा मालिनी के गाल की तरह बनाया जाएगा। कॉन्ग्रेस नेता शर्मा ने कहा कि अभी सड़कें कैलाश विजयवर्गीय के गाल जैसी हैं। विजयवर्गीय राज्य के पूर्व मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं। उन्होंने कहा कि शिवराज सरकार के दौरान सड़कों की हालत खराब थी और अभी भी उन सड़कों की वही हालत है, जिसे कमलनाथ सरकार ठीक करेगी। मंगलवार (अक्टूबर 15, 2019) को जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा राजधानी भोपाल की खस्ताहाल सड़कों की स्थिति देखने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्लूडी) मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के साथ निकले थे।

उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का नाम लिए बिना उन पर तंज कसा। उनका ये बयान बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के बयान की याद दिलाता है, जो फ़िलहाल चारा घोटाले में राँची के बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं। लालू यादव डेढ़ दशक तक बिहार में सत्ता के सिरमौर रहे और उन्होंने जनता की हर मूलभूत सुविधाओं का न सिर्फ़ मजाक उड़ाया, बल्कि उन्हें पूरा करने से भी चूक गए। लालू भी बिहार की सड़कों को हेमा मालिनी के गाल की तरह बनाने की बात करते थे लकिन डेढ़ दशक में बिहार में सड़कों में गड्ढे थे ये गड्ढों में सड़क, यह पता करना नामुमकिन था।

वैसे, मध्य प्रदेश के मंत्री शर्मा ने दावा किया कि सड़कों की मरम्मत का काम युद्धस्तर पर चल रहा है और 30 नवंबर तक सभी कार्य पूरे कर लिए जाएँगे। उन्होंने कहा कि अक्टूबर में बारिश होने की वजह से सड़कें खराब होने की बात कही। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के आपदा प्रबंधन कोष से 1,155 करोड़ रुपए की माँग की गई है और इसका इस्तेमाल सड़कों की मरम्मत में किया जाएगा। सड़कों के निर्माण में हुई धाँधली की बात करते हुए कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि सभी ख़राब सड़कों की जाँच होगी और दोषी ठेकेदार व अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

कॉन्ग्रेस नेता पीसी शर्मा का यह बयान शिवराज सिंह चौहान के 2 साल पुराने बयान की प्रतिक्रिया में आया है। तत्कालीन सीएम चौहान ने मध्य प्रदेश और अमेरिका की सड़कों की तुलना की थी, जिसका बाद विपक्ष ने बड़ा हंगामा मचाया था। मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार फ़िलहाल उद्योगपतियों को राज्य में आमंत्रित करने में लगी हुई है और इसके लिए मुख्यमंत्री ने ख़ुद मुकेश अम्बानी और गौतम अडानी से मुलाक़ात की थी।

हालॉंकि सड़कों के मामले में कॉन्ग्रेसी सरकारों का रिकॉर्ड शर्मा के वादे पर संदेह ही पैदा करता है। इस बात की आशंका ज्यादा लगती है कि उनका वादा भी लालू की तरह छलावा ही न साबित हो। दीगर है कि मध्य प्रदेश में जब दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में 10 साल कॉन्ग्रेस सत्ता में रही थी तो सड़क और गड्ढों का फर्क मिट गया था। इन गड्ढों का ही असर था कि 2003 में राज्य की सत्ता में भाजपा ने न केवल जबर्दस्त वापसी की, बल्कि अगले डेढ़ दशक तक पूरे दमखम के साथ बनी भी रही।

6 साल से दहेज में बुलेट मॉंग रहा था विक्की खान, नहीं मिली तो बीवी खुशबू की चाकू से नाक काटी

उत्तर प्रदेश के हाथरस में दहेज में बुलेट बाइक की माँग पूरी न होने के कारण एक मुस्लिम युवक ने अपनी बीवी की नाक काट दी। इस बात की जानकारी जब महिला के परिजनों को हुई तो वह फौरन लड़की के ससुराल पहुँचे और उसे थाने ले जाकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने घायल महिला को अस्पताल भेजा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोतवाली सदर क्षेत्र के किला गेट निवासी इकबाल खान ने 6 साल पहले अपनी बेटी का निकाह किंदौली के विक्की खान से किया था। खुशबू के पिता की शिकायत के मुताबिक ससुराल पक्ष निकाह के वक्त से ही बुलेट बाइक की माँग कर रहा था। लेकिन वह देने में अक्षम थे। इसके कारण उनकी बेटी को ससुराल में परेशान किया जाता था।

निकाह के 6 साल बीतने के बावजूद भी बुलेट न मिलने के कारण शौहर-बीवी के रिश्ते में दरार आ गई। पारिवारिक विवाद इतना बढ़ चुका था कि खुशबू पिछले 18 महीने से मायके में ही रहती थी। 10 दिन पहले चचिया ससुर उसे अपने जिम्मेदारी पर ससुराल लेकर गए। जहाँ पहुँचते ही पति दोबारा उससे मारपीट करने लगा।

अमर उजाला में प्रकाशित खबर

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शनिवार (अक्टूबर 12, 2019) को खूशबु दोबारा अपने मायके किसी कार्यक्रम में आई, लेकिन रविवार को जब ससुराल लौटी तो भी उसका पति अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। कहा जा रहा है सोमवार (अक्टूबर 14, 2019) की सुबह तड़के उसने खुशबू से मारपीट की और चाकू से उसकी नाक काट दी। इसके बाद उसने खुशबू को उसके कंधे पर मारकर घायल किया।

खुशबू के पिता को इस बात की जब जानकारी हुई तो वह फौरन अपने परिवार के साथ किंदौली में खुशबू के ससुराल पहुँचे। लड़की की हालत देखकर उसे तुरंत निजी अस्पताल ले जाया गया और फिर शिकायत के लिए थाने पहुँचे। पीड़ित पक्ष की ओर से आरोपित पति समेत पाँच के ख़िलाफ़ मामला दर्ज हुआ है। लेकिन अभी किसी गिरफ्तारी की कोई सूचना नहीं हैं। पुलिस मामले की जाँच में जुटी है और मामले से संबंधित जरूरी कार्रवाई की जा रही है।