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हाँ, मैंने इकबाल मिर्ची की पत्नी के साथ डील किया, नहीं मिला ED का नोटिस: प्रफुल्ल पटेल

एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल को प्रवर्तन निदेशालय ने समन भेजा है। उन्हें शुक्रवार (अक्टूबर 18, 2019) को जाँच एजेंसी के समक्ष पेश होने को कहा गया है। हालाँकि, उन्होंने दाऊद इब्राहिम के क़रीबी इक़बाल मिर्ची के साथ किसी भी प्रकार के करार की बात को नकार दिया है। लेकिन, इक़बाल मिर्ची की पत्नी हाजरा मेनन के साथ डील की बात स्वीकारी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इक़बाल मिर्ची की पत्नी को अतिरिक्त आवास देने के लिए एक डील किया गया था, जिसके लिए बॉम्बे हाईकोर्ट की अनुमति भी ली गई थी। उन्होंने कहा कि मिर्ची से सम्बंधित मिलेनियम डेवेलपर्स से उनका कोई वित्तीय सम्बन्ध नहीं है।

साथ ही प्रफुल्ल पटेल ने इक़बाल मिर्ची की पत्नी हाजरा के साथ हुए डील का बचाव करते हुए कहा कि पिछले डेढ़ दशक में ऐसा कुछ भी नहीं आया है, जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि हाजरा मेनन के साथ डील नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी जाँच एजेंसी ने हाजरा के ख़िलाफ़ कुछ नहीं कहा है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने प्रफुल्ल पटेल और मिर्ची की डील को देशद्रोह करार दिया था। उन्होंने शरद पवार और राहुल गाँधी को भी इस मामले में ख़ुद को पाक-साफ़ साबित करने को कहा था। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी कहा कि पटेल के दाऊद के साथ क्या सम्बन्ध हैं, वह जाहिर करें।

वहीं, प्रफुल्ल पटेल ने 15 सालों बाद जाँच शुरू किए जाने को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अगर सरकार को लगता है कि यह सब अवैध तरीके से किया गया तो वह विवादित संपत्ति को अपने कब्जे में ले ले। मुंबई स्थित वर्ली में मिलेनियम डेवेलपर्स ने 15 मंजिला इमारत बनाई थी, जिसे सीजे हाउस नाम दिया गया। इस प्लॉट को मिलेनियम डेवेलपर्स को ट्रांसफर किया गया था और ईडी इस मामले की जाँच कर रही है। एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार और महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री छगन भुजबल के बाद तीसरे ऐसे पार्टी नेता हैं, जो ईडी की रडार पर आए हैं। पटेल ने स्वीकार किया कि इक़बाल मिर्ची की पत्नी के साथ डील हुई थी लेकिन यह वित्तीय डील नहीं थी।

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उन्होंने बताया कि हाजरा मेनन इनकम टैक्स का भुगतान करती हैं और किसी भी प्रकार के लेनदेन को लेकर इनकम टैक्स को जानकारी देती हैं। उन्होंने दावा किया कि हाजरा के पास पैन नंबर भी है और जब डील हुई थी, तब किसी भी एजेंसी ने आपत्ति नहीं जताई थी। पटेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ईडी का नोटिस मिलने से इन्कार किया। लेकिन, उन्होंने कहा कि यदि नोटिस मिलता है तो वे स्वयं ईडी कार्यालय पहुॅंच जाएँगे। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि मंगलवार को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार करते वक़्त उन्हें नोटिस मिला। इसमें पटेल से बयान दर्ज कराने के लिए 18 अक्टूबर को मुंबई कार्यालय में पेश होने को कहा गया है।

मुर्शिदाबाद हत्याकांड: बंधु प्रकाश हम शर्मिंदा हैं…

सप्ताह भर पहले, दशहरा के दिन, बंगाल को मुर्शिदाबाद इलाके में बंधु प्रकाश पाल, उनकी सात माह की गर्भवती पत्नी, तथा आठ साल के बेटे की धारदार हथियार से हत्या कर दी जाती है। हिन्दी मीडिया में खबर नहीं आती। सोशल मीडिया पर तस्वीरें घूमने लगती हैं। हिन्दी मीडिया इस खबर को एक मामूली अपराध की तरह उठाती है, तीन सौ शब्दों की रिपोर्टिंग होती है, मुद्दा खत्म कर दिया जाता है। लेकिन सोशल मीडिया इसे खत्म होने नहीं देता।

जो सवाल मीडिया को उठाना चाहिए था, वो सवाल सोशल मीडिया पर उठने लगे। कत्ल के निर्मम तरीके से ले कर इलाके की जनसांख्यिकी के बारे में बातें होने लगीं। बंगाल का वर्तमान और ममता काल में हुई राजनैतिक, मजहबी और कानून व्यवस्था पर थूकती हत्याओं पर बात होने लगीं। मीडिया चुप्पी साधे रहा क्योंकि किसी परिवार के तीन व्यक्ति और एक अजन्मे बच्चे की हत्या, पूरे शरीर पर लम्बे-लम्बे चीरे के साथ, हलाल की हुई गर्दन, एक सामान्य घटना है। वहाँ चुनाव भी नहीं, न ही वो एक खास पार्टी द्वारा शासित है कि आधे घंटे का भी स्पेशल चले कि हत्या की वजह क्या रही होगी।

जी हाँ, स्पेकुलेशन भी नहीं हुआ कि क्या-क्या हो सकता है। आम तौर पर किसी कार्यक्रम में किसी नेता की शिरकत हो तो मीडिया यह भी बताती है कि गाड़ी कहाँ तक आएगी, किधर छोड़ेगी, पहला पाँव दाहिना होगा, कमांडो चारों तरफ देख कर सुनिश्चित करेंगे, कार्पेट का रंग ये होगा, उनके लघुशंका की व्यवस्था कहाँ होगी… नेता जी को जाना हो या न हो, मीडिया आपको कमोड तक दिखा देगा, यूरिनल तक घुमा देगा ताकि आप महसूस कर सकें।

इस हत्याकांड में ऐसा नहीं हुआ। हत्या के बाद सोशल मीडिया उबलता रहा, सवाल पूछता रहा और रिपोर्टिंग की खानापूर्ति के बाद मेनस्ट्रीम मीडिया सोया रहा। आप सोचिए कि ये हत्याकांड टीवी पर नहीं दिखा, पेपरों में मुख्य खबर नहीं बन सका, इस पर पुलिस क्या कर रही है, क्राइम बीट रिपोर्टरों ने कोई कोशिश नहीं की जानने की, सम्पादकीय पन्नों पर यह नहीं पूछा गया कि ममता के बंगाल में क्या हो रहा है। कोई ज़रूरत समझी ही नहीं गई क्योंकि हुआ ही क्या है! एक आदमी मरा, उसकी पत्नी मरी, पेट का बच्चा मरा, छोटा बेटा मरा। हुआ ही क्या है!

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और एक दिन अचानक सारी गुत्थी सुलझ गई

कल खबर आई कि बंगाल सीआईडी ने केस को क्रैक कर लिया है, कातिल पकड़ा जा चुका है। मीडिया ने फिर से अपना धर्म निभाया। तीन सौ शब्दों की रिपोर्ट बनी और खानापूर्ति हो गई कि भाई, मुख्य आरोपित न सिर्फ पकड़ा गया बल्कि उसने आरोप कबूल भी कर लिया। आप कहेंगे कि समस्या क्या है, जब कातिल पकड़ लिया गया तो आगे क्या?

समस्या है। समस्या आधिकारिक रूप से जारी की गई कहानी में है जो कई सवाल खड़े करता है। बताया गया, और मीडिया द्वारा गर्दन झुका कर लिखा गया, कि एक मिस्री है उत्पल बेहरा, जिसने बंधु प्रकाश से बीमा कराया था। एक बीमा की रसीद बंधु प्रकाश ने दे दी, दूसरी नहीं दी जो कि ₹24,000 का था। वो माँगने गया, बंधु प्रकाश ने उसकी बेइज्जती कर दी, धमकी दी। बेहरा अपने घर आया और उसने तय किया कि उसकी जान ले लेगा।

उसने एक बड़ा चाकू लिया और दीवार फाँद कर मृतक के घर में दाखिल हुआ। वहाँ उसने उन तीनों को मार डाला। उसके बाद वहाँ से वो भाग निकला, उसे भागते हुए एक ग्वाले ने देखा था, जिसकी मदद से पुलिस ने स्केच बनवाया। साथ ही सीआईडी ने बताया कि लाश के पास कातिल ने अपना पासबुक छोड़ दिया था, जो कि हत्याकांड को सुलझाने में अहम साबित हुआ।

अब आप थोड़ा सोचिए कि जब पुलिस के पास पासबुक पहले दिन से ही था, तो क्या उस पासबुक में कातिल का नाम, फोटो, अकाउंट नंबर आदि नहीं रहे होंगे जो उसे स्केच बनवाना पड़ा? इतने दिनों तक पुलिस इस केस पर कुछ भी बोलने से क्यों बचती रही क्योंकि हमने तो अपनी तरफ से काफी कोशिश की थी इस पर विस्तार से जानने की। हो सकता है वो स्केच बनवाने में व्यस्त रहे हों, या पासबुक पर ब्राह्मी लिपि में नाम लिखा हुआ हो तो उसे डिसाइफर कराने में समय लग रहा हो।

यह भी सोचिए कि जो व्यक्ति मारने की नीयत से चाकू ले कर, दीवार फाँद कर घुस रहा है, योजना बना कर आया हो, वो जेब में पासबुक ले कर तो जाएगा ही, क्योंकि कातिल ने सोचा होगा कि हर कातिल से गलती होती है, सुराग नहीं छोड़ने पर उसे कोई गम्भीरता से नहीं लेगा। और फिर पासबुक लाश के पास मिल जाती है, उसके बाद सात दिन लगते हैं पुलिस को उस नाम के व्यक्ति को पकड़ने में। केस सॉल्व!

इस बात को भी रहने दीजिए। अब आप कातिल के बारे में सोचिए कि क्या एक व्यक्ति लगातार एक बड़े चाकू से वार करेगा, तीन लोगों की हत्या होती है, एक आदमी करता है, कोई चीखने की आवाज तो आई होगी? या ऐसा तो नहीं कि कातिल ने बेहोशी की दवा सुँघा दी हो और फिर आराम से गला रेता, हाथ पर चाकू चलाया, चेहरे पर चाकू चलाया, शरीर पर चलाया और चलता बना?

साथ ही, ध्यान रहे कि हत्यारा कोई अपराधी नहीं था। पहली बार में इतनी सफाई से काम किया। एक मिस्त्री है उत्पल बेहरा, रसीद नहीं मिलती है बीमा की (कुछ जगह चिटफंड कह रहे हैं) और वो इतना गुस्सा हो जाता है कि पति, गर्भवती पत्नी और बच्चे की हत्या कर देता है! सवाल यह भी उठता है कि क्या कोई पहली बार अपराध कर रहा हो, इस क्रूर तरीके से कर रहा हो, और उसकी जड़ में एक रसीद का न देना हो, क्या ये विश्वसनीय दलील है?

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कड़े सवाल पूछने वाले आलू दम के दही में मिल जाने पर लिख रहे हैं

गम्भीर हो कर कहते हैं कि संजय ने घोटाला किया नहीं, संजय की मौत हो गई। ऐसा नहीं है कि मैं संवेदनहीन व्यक्ति हूँ लेकिन जिस जस्टिस लोया की मौत का कोरस आज भी रवीश कुमार गा लेते हैं, और बात-बात पर उनके समर्थक ‘मेले बाबू ने नौतली थिलीद की’ (मेरे बाबू ने नौकरी सीरीज की) कह कर अघाते नहीं, उनके लिए ये हत्याकांड खबर क्यों नहीं है? अखलाख, गौरी लंकेश, से ले कर तबरेज तक उन्होंने कई प्राइम टाइम किए हैं, कई बार वकील, इन्सपेक्टर और पता नहीं जज तक बन गए हैं, वो बंगाल के मामले पर उसे बांग्लादेश क्यों मान लेते हैं?

रवीश कुमार बंगाल पर हमेशा चुप रहे हैं। हमेशा का मतलब है, हमेशा। जब सोशल मीडिया पर लोगों ने खूब कोसा, तब जा कर चार लाइन निकला था कि ये गलत हो रहा है। लेकिन ममता का नाम, ममता की पुलिस का नाम नहीं ले पाए थे रवीश कुमार। क्या 81 भाजपा कार्यकर्ताओं की मौत रवीश कुमार के लिए खबर नहीं है? तृणमूल के भी कार्यकर्ता मारे गए हैं, तो बंगाल की कानून व्यवस्था खबर क्यों नहीं है?

ज्ञान देते हुए हर चैनल को एक ही चलनी में छान देने वाले रवीश बिहार और बंगाल की बेकार कानून व्यवस्था पर चुप क्यों हो जाते हैं? क्या बिहार में कोई परिचित फँसा हुआ है किसी केस में कि इधर नीतीश को घेरेंगे, उधर वो जेल पहुँचेगा? बंगाल में ऐसा क्या रह गया है रवीश कुमार का कि पीएमसी बैंक, अभिजीत बनर्जी के लिए चालीस मिनट हैं, लेकिन बंधु प्रकाश पाल के परिवार की नृशंस हत्या पर कुछ भी नहीं? आकाश गुलाबी है कि नीला, आलू दम का रस पसर कर दही में मिलने की बात, महान अर्थशास्त्री अनिंद्यो की गूढ़ बातें करने, कहाँ टीचर की स्ट्राइक हो रही है, रविशंकर प्रसाद ने क्या कहा, सब मिलेगा रवीश कुमार की वाल पर, बंधु प्रकाश पाल नहीं मिलेगा।

राजनैतिक और मजहबी एंगल भी निकाल दिया जाए, निजी दुश्मनी ही मकसद था और उत्पल बेहरा ने ही हत्या किया, तब भी इस हत्याकांड पर चर्चा क्यों नहीं हो रही? फिर जब सोशल मीडिया पर इन नैरेटिव बनाने वाले, बिके हुए पत्रकारों को कमेंट में गालियाँ पड़ती हैं, लोग सीधे सवाल पूछते हैं तो पत्रकार शिरोमणि चिटक जाते हैं, कहते हैं कि अरे-अरे, तुम लोग सब आईटी सेल वाले हो न, सब ट्रोल हो!

जब नीरव मोदी को नरेन्द्र मोदी के साथ तस्वीर में देख कर संबंध तय किए जा सकते हैं, तो फिर इस हत्याकांड को केन्द्र में रख कर, बंगाल में हुए दंगे जो बर्धमान, धूलागढ़, कालियाचक (मालदा), इल्लमबाजार, हाजीनगर, जलांगी, मिदनापुर, पुरुलिया, रानीगंज, मुर्शीदाबाद, आसनसोल से ले कर बंगाल के लगभग हर जिले तक पहुँच गए, इस पर कोई प्राइम टाइम क्यों नहीं हो रहा? आपको सीरीज चलाना है, चलाइए लेकिन बंगाल के मामले में इतनी ममता क्यों दिखाते हैं आप?

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बंधु प्रकाश अगर बिलाल होता, बंगाल अगर गुजरात होता

बंधु प्रकाश गलत राज्य में पैदा हुआ, गलत जाति-धर्म का था, गलत राज्य में मारा गया। जैसे भारत यादव गलत राज्य में, गलत जाति-धर्म में पैदा हुआ, गलत लोगों के द्वारा मारा गया। मरने के बाद की चर्चा में बने रहने के लिए आपको निर्दोष होना मात्र ‘सही’ नहीं होता। आपको किसी खास जाति में होना होता है, किसी खास मजहब में होना होता है, किसी खास तरह के हत्यारे का शिकार बनना पड़ता है, और सबसे ज़रूरी वहाँ सत्तारूढ़ पार्टी कौन सी है, इसका भी असर पड़ता है।

बंधु प्रकाश हिन्दू था, ममता बनर्जी की सत्ता है, बंगाल राज्य में मारा गया, मारने वाले ने भी उसे इस बात पर नहीं मारा कि वो गाय का मांस खाया करता था। बंधु प्रकाश अगर गोमांस भी खाता होता, तो ममता स्वयं उसकी मौत पर ट्वीट करती, और बताती कि बंधु प्रकाश को मारने वाले भले ही उसके राज्य के लोग हैं, जहाँ उसी की पुलिस है, लेकिन जिम्मेदार मोदी है। तब बंधु प्रकाश हीरो बन जाता, उसके नाम पर केरल में बीफ ईटिंग फेस्टिवल का आयोजन होता, वो लिबरल गिरोह का पोस्टर ब्वॉय बन जाता, जेएनयू में उसकी माताजी को स्टूडेंट यूनियन में आख्यान देने बुलाया जाता…

लेकिन बंधु प्रकाश की मौत सारे ही गलत कारणों से, गलत जगह पर हुई। इसीलिए मीडिया को एक रसीद की खातिर, एक पहली बार अपराध कर रहे कातिल द्वारा प्रोफेशनल तरीके से की गई हत्या, लाश के पास पासबुक छोड़ देने की बात, छः दिनों की चुप्पी के बाद, साँतवे दिन सीधा कातिल को दबोच लेने की बात एकदम सामान्य लग रही है।

इसलिए, आइए और गर्दन शर्म से झुका लीजिए कि एक के बाद एक, ऐसे ही भारत यादव, अंकित सक्सेना, प्रशांत पुजारी, डॉक्टर नारंग आदि की हत्या होती रहेगी, हमारा मीडिया श्रीदेवी के बाथटब की तलाशी लेता रहेगा, राहुल गाँधी की मूर्खतापूर्ण बातों पर गम्भीरता से चर्चा करता रहेगा, मोदी जी की रैलियों की लाइव कवरेज के बाद उस पर स्पेशल प्रोग्राम बनाता रहेगा… ये सब भी ज़रूरी हैं, लेकिन इस हत्याकांड का गायब हो जाना, एक व्यवस्थित तरीके से इसका मीडिया ब्लैकआउट बताता है कि इस चमकीले प्रतिबिंब बनाने वाले शांत जल की तलछट में सड़ांध मारता कीचड़ है, जिसमें किसी को हाथ मारने की ज़रूरत है, पानी कितना साफ है यह पता चल जाएगा।

अरशद ने दोस्त से लिए ₹50000, चुका न पाने पर उसे ईंट और ब्लेड से मार डाला; गिरफ्तार

₹50,000 के लेनदेन को लेकर हुई हत्या में 22 वर्षीय अरशद को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है। मृतक साहिल की लाश दिल्ली के शाहदरा में हिरण पार्क के भीतर पड़ी मिली थी। साहिल के हाथ-पाँव बंधे हुए थे।

गले और सिर पर घाव

साहिल की लाश रविवार (13 अक्टूबर) की सुबह एक राहगीर को दिखी, जिसने पुलिस को इत्तला दी और पुलिस मौके पर पहुँची। शिनाख्त हुई कलंदर-कॉलोनी निवासी साहिल के रूप में। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस को लाश के सिर और गले पर गहरे घाव दिखे।

साहिल के घर वालों ने पुलिस को बताया कि साहिल पिछली रात 11.45 के आसपास घर से निकला था और अब तक वापिस नहीं आया था। पुलिस को उसका स्कूटर भी पास ही में मिला। साहिल के पिता का कुछ वर्ष पहले ही देहांत हो चुका था। उसकी माँ ने पुलिस को बताया कि चूँकि साहिल की अकसर रात में स्कूटर पर घूमने निकलने की आदत थी, इसीलिए उन्हें उसके रात भर न लौटने पर अधिक चिंता नहीं हुई।

आरोपित नहीं लौटा पाया था पैसे, मृतक की माँ के साथ निकला था ‘खोज’ में

हालाँकि, मीडिया रिपोर्टों में इसका ज़िक्र नहीं है कि उस पर पुलिस को शक कैसे हुआ, लेकिन जब पुलिस ने अरशद को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की तो उसने सब कुछ उगल दिया। उसने बताया कि कैसे उसने 18-वर्षीय साहिल से ₹50,000 उधार लिए थे, जो वह चुका पाने में असमर्थ था क्योंकि उसकी परचून की दुकान में घाटा हो गया था। वह साहिल को रात में हिरण पार्क लेकर गया जहाँ उसने एक ईंट और धारदार ब्लेड से साहिल की हत्या कर दी। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त ब्लेड और साहिल का खून लगे आरोपित के कपड़े बरामद कर लिए हैं।

शाहदरा के डिप्टी कमिश्नर अमित शर्मा के अनुसार अरशद हत्या करने के बाद साहिल की माँ के साथ साहिल की ‘तलाश’ में भी निकला था। उस पर हत्या का मुकदमा पुलिस ने दर्ज कर लिया है।

मुस्लिम घरों के बाहर लगा मजेदार पोस्टर: लिखा है- डोरबेल खराब है, मोदी-मोदी चिल्लाएँ

एक ओर जहाँ पत्रकारिता का समुदाय विशेष और लिबरल गैंग पीएम मोदी को मुस्लिमों का दुश्मन साबित करने में लगा है, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी रूप से मोदी के लिए मुस्लिमों का समर्थन बढ़ता ही जा रहा है। हरियाणा के मुस्लिम समाज को लेकर न्यूज़ 18 की हालिया प्रकाशित एक रिपोर्ट इसी की तस्दीक करती है।

यह दरवाजा सिर्फ मोदी-मोदी बोलने वालों के लिए खुलेगा

न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के अनुसार जब उन्होंने एक मुस्लिम बस्ती के स्थानीय लोगों से बात की तो मालूम चला कि आगामी विधानसभा चुनावों के चलते वोट माँगने कई सारे प्रत्याशी आते रहते हैं। वे प्रत्याशी बार-बार डोरबेल बजाते हैं। अतः यह पोस्टर लगा कर यह सूचना प्रत्याशियों को दे दी गई है कि यहाँ मोदी-समर्थकों के लिए दरवाज़ा खुलेगा।

पहले फ़ोन पर ही मिट्टी में मिला देते थे, अब पुलिस का डर है

मुस्लिम महिलाओं से जब न्यूज़ 18 के रिपोर्टर ने बात की तो उन्होंने बताया कि इस समर्थन के पीछे तीन तलाक बिल पर रोक सबसे बड़ा कारण है। मोदी के इस बिल को पास करने के तरीके, उनके संकल्प ने मुस्लिम महिलाओं को उनका मुरीद बना दिया है। पहले लोग मुस्लिम महिलाओं को फ़ोन पर ही झटके में तलाक देकर ज़िंदगी बर्बाद कर देते थे, लेकिन अब ऐसे लोगों में पुलिस और कानून का ख़ौफ़ होगा।

बस्ती के अन्य लोगों ने मोदी के समर्थन के पीछे अन्य कारण भी गिनाए। उनमें प्रमुख मोदी की जनकल्याणकारी योजनाएँ रहीं, जैसे आयुष्मान, उज्ज्वला इत्यादि। लोगों ने साफ किया कि उनके नेता मोदी ही हैं, और वे अन्य किसी के समर्थकों को अपने घर वोट माँगने नहीं आने देना चाहते।

क्या है प्रफुल्ल और मुंबई माफियाओं के बीच रिश्ता: BJP ने घेरा, कहा- खुलकर बताओ दाऊद कनेक्शन

एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने खुद पर लग रहे आरोपों के बीच अपने परिवार और मिर्ची नाम से कुख्यात रहे इक़बाल मेमन के बीच फाइनेंशियल डील पर मीडिया के सामने आकर सफाई दी। पटेल ने अपने बचाव में कहा कि उनकी लैंड डील पूरी तरह से वैध थी और उसकी पूरी कार्रवाई कायदे कानून के साथ की गई थी।

प्रफुल्ल ने विवादित ज़मीन को लेकर बताया कैसे उस जमीन को 1990 में बॉम्बे हाईकोर्ट की निगरानी में एमके मोहम्मद ने हजरा इकबाल मेमन को बेचीं थी। उन्होंने बताया कि 2004 में परिवार की आंतरिक कलह के बाद इस ज़मीन के लिए उनकी डील इक़बाल मेमन से हुई थी, उन्होंने बताया कि यह डील रजिस्ट्रार के सामने हुई थी और उसके बाद सारे दस्तावेज़ डीएम के सामने पेश किए गए थे। प्रफुल्ल ने कहा कि अगर इकबाल मेमन दागी होता तो प्रशासन इस वक़्त ही डील पर रोक लगा सकता था।

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ज़मीन की डील को लेकर प्रवर्तन निदेशालय ने प्रफुल्ल पटेल को समन भेजा है जिसके बाद उन्हें 18 अक्टूबर को पेश होने का आदेश दिया गया है। प्रफुल्ल ने कहा कि मीडिया में क्या सुगबुगाहट चल रही है मैं इस पर कुछ कहना नहीं चाहता, बस मीडिया में एक रिपोर्ट के जो कुछ भी अंश आए हैं। सबको अपने हिसाब से उसका अर्थ निकालने का अधिकार है, मैं चुनाव प्रचार में था, मगर जो कुछ मीडिया में आ रहा था मुझे उस पर सफाई देने के लिए मुझे प्रचार छोड़ कर आना पड़ा।

प्रफुल्ल ने जमीन का पूरा इतिहास बताते हुए कहा कि यह जमीन माधवराव जीवाजी राव सिंधिया की हुआ करती थी जिन्होंने 1963 में इसे बेच दिया था, खरीदने वालों में प्रफुल्ल के परिवार के 21 लोग भी शमिल थे। वहीं ज़मीन के प्लाट-F में सीएफ बिल्डिंग बनी है जोकि 1970 में बनी थी, बाद में पिता की मृत्यु के बाद पारिवारिक झगड़े के चलते ज़मीनी विवाद कोर्ट पहुँच गया और 1978 के बाद वह ज़मीन बॉम्बे हाईकोर्ट की निगरानी में थी। प्रफुल्ल ने बताया कि बिल्डिंग के आसपास कुछ लोगों ने अवैध इमारतें बना ली थीं दरअसल दो रेस्तरां थे जिनपर एम के मोहम्मद नाम के व्यक्ति का कब्ज़ा था, हाई कोर्ट के रिसीवर ने 21 मार्च 1988 को 7 लाख रुपए सेटलमेंट देने को कहा और कोर्ट ऑर्डर के बाद से वह जमीन उसके पास चली गई। 4 अप्रैल 1990 को उसने कोर्ट की निगरानी में यह जमीन हजरा इकबाल मेमन को बेच दी। यह 1990 तक उस जमीन का इतिहास रहा।’

प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि अगर डील में कुछ भी संदिग्ध रहा होता तो उसी समय पकड़ में आ जाता, दरअसल 2004 में जो जमीन की डील हुई, वह भी हाई कोर्ट के आदेश के अनुरूप हुई। हजरा इकबाल मेमन और हमारे बीच जो डीड हुई, वह सारे वैध दस्तावेजों के साथ हुई। इकबाल मेमन को लेकर कुछ भी संदिग्ध होता, तो उसी समय पकड़ में आ जाता। इकबाल मेमन की फैमिली आयकर दिया करती थी, 1999 से उसके पास पासपोर्ट था और बिना रोक-टोक के यूएई आया जाया करता था। प्रफुल्ल के मुताबिक वे उस जमीन के टुकड़े के सह-मालिक थे, इसलिए चाहकर भी लैंड डील से इनकार करना मुश्किल था। मैंने डील के समय अपने वकीलों से भी इकबाल मेमन के सभी दस्तावेजों की जाँच करने को कहा था और उस वक्त ऐसा कुछ भी संदिग्ध सामने नहीं आया।

बता दें कि प्रफुल्ल पटेल के परिवार पर आरोप है कि उनके परिवार की कंपनी मिलेनियम डेवलपर्स और मिर्ची के नाम से कुख्यात दिवंगत इकबाल मेमन के बीच डील हुई थी। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से इसी डील के लीगल कागजों की जाँच की जा रही है। वहीं बीजेपी की ओर से संबित पात्रा ने प्रेस कांफ्रेंस कर इस पूरे मामले पर एनसीपी और कॉन्ग्रेस को घेरते हुए सवाल किया है कि पटेल परिवार और दाऊद के बीच क्या कनेक्शन है? पात्रा ने पूछा कि आखिर पटेल परिवार का आतंकी सरगना दाउद इब्राहीम से क्या सम्बन्ध है।

सभी नागरिकों के लिए एक ही कानून होना चाहिए, देश के खिलाफ बोलने वालों को जेल जाना ही होगा: अमित शाह

केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक टीवी चैनल को दिए अपने साक्षात्कार में कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड हमारे घोषणापत्र का हिस्सा है, सभी नागरिकों के लिए एक ही कानून होना चाहिए। साथ ही गृह मंत्री शाह ने देश विरोधी गतिविधियों को लेकर भी अपना रुख एक बार फिर स्पष्ट करते हुए कहा है कि देश विरोधी नारे लगाने को उनकी पार्टी कतई स्वीकार नहीं करती, उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने देश के खिलाफ आवाज़ उठाई उन्हें हमारी ही सरकार ने जेल में डाल दिया मगर जब इसकी अदालती कार्रवाई में दिल्ली सरकार से मंजूरी माँगी गई तो उन्होंने इसमें मंजूरी देने से मना कर दिया।

बता दें कि दिल्ली सरकार की ओर से अरविन्द केजरीवाल ने इस घटना को लेकर केंद्र पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंटने जैसा आरोप लगाते हुए पर सवाल किए थे वहीं तत्कालीन कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने इस पूरी घटना को लेकर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की थी, इसी के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी जेएनयू में देशविरोधी नारे लगाने वाले छात्रों के समर्थन में उतर गई थी।

अभिव्यक्ति के सन्दर्भ में अमित शाह ने विस्तार से बात करते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की आज़ादी ज़रूर होनी चाहिए, आप सरकार की आलोचना कर सकते हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना कर सकते हैं, मेरी पार्टी की जितनी भर्त्सना कर सकते हैं कर लीजिए इससे हमें कोई आपत्ति नहीं है लेकिन अगर कोई देश के टुकड़े करने की बात करेगा या देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होकर नारेबाजी करने उतरेगा तो निश्चित रूपसे उसके खिलाफ कार्रवाई होगी और उसे जेल में जाना ही होगा। गृहमंत्री अमित शाह ने यहाँ तक कह दिया कि आप मुझे गाली दे दीजिए लेकिन इस देश को तोड़ने की स्वतंत्रता किसी को नहीं है।

वहीं कॉन्ग्रेस पर वार करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि कई एतिहसिक भूलें ऐसी हैं जिनसे कॉन्ग्रेस पार्टी कभी पीछा नहीं छुड़ा सकती कॉन्ग्रेस। उन्होंने पंडित नेहरु के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए भारत और पाकिस्तान के युद्ध का उदहारण देते हुए कहा कि जिस वक़्त देश युद्ध जीतने की ओर बढ़ रहा था और जवानों ने देश के लिए प्राण न्योछावर कर दिए थे उस वक़्त युद्ध को थामकर यूएन में जाने की क्या आवश्यकता थी?

बता दें कि आज़ादी के बाद हुए भारत-पाक के पहले युद्ध में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरु ने युद्ध-विराम की घोषणा कर मामले मामले को संयुक्त राष्ट्र ले जाने की घोषणा कर दी थी। इसी दौरान पाकिस्तान ने हिंदुस्तान के कश्मीर के एक हिस्से में कब्ज़ा कर लिया था जो आज पाक अधिकृत कश्मीर यानि पीओके कहलाता है। 1948 के युद्ध में पाकिस्तान के आक्रमण से शुरू हुए भारत को कश्मीर का एक हिस्सा गँवाना पड़ा था, जिसके बाद से कश्मीर की समस्या भारत के लिए एक नासूर बन गई थी, बहुत से इतिहासकार भी कश्मीर की कश्मीर समस्या के लिए प्रथम प्रधानमंत्री नेहरु और उनकी नीतियों को ज़िम्मेदार मानते हैं।

जिहाद से लड़ने के लिए एक केंद्रीय एजेंसी की ज़रूरत, हमें अपने दुश्मनों से एक कदम आगे रहना होगा: डोभाल

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने पिछले तीन दिनों में कई महत्वपूर्ण बातें कही हैं, जिन पर सत्ता पक्ष और विपक्ष समेत नेताओं को ही नहीं, मीडिया और आम जनता को भी ध्यान देने की ज़रूरत है। पिछले दो दिन चली राज्यों के आतंकरोधी इकाईयों के प्रमुखों की मीटिंग में जहाँ उन्होंने पाकिस्तान को हर स्तर पर घेरने, उसके खिलाफ मौजूद जानकारी को क़ानूनी सबूत में तब्दील करने और देश भर में आतंक से निपटने के लिए एक केंद्रीय इकाई बनाने जैसे कदमों पर ज़ोर दिया, तो आज (15 अक्टूबर) DRDO द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने सेनाओं के हाथों ही दुनिया की किस्मत लिखे जाने और भारत के सुरक्षा ढाँचे की कमज़ोरियों की बात की।

‘दूसरे नंबर पर आने की ट्रॉफी नहीं होती’

“आप या तो अपने दुश्मन से बेहतर होते हैं, या फिर आप कहीं नहीं होते… आधुनिक जगत में पैसा और तकनीक भूराजनीति को प्रभावित करते हैं। कौन जीतता है और कौन हारता है, यह तय होता है इस बात से कि किसने दुश्मन से पहले इन दोनों पर काम करना शुरू कर दिया।” डोवाल ने साथ में यह भी जोड़ा कि इन दोनों में भी तकनीक अधिक महत्वपूर्ण है।

“भारत का खुद का ऐतिहासिक अनुभव (सैन्य तकनीक के विकास में) दुःखद है, हम दूसरे नंबर पर हैं। दूसरे नंबर पर आने वाले के लिए कोई ट्रॉफी नहीं होती।” उन्होंने आगे कहा, “भारत की सुरक्षा आज पहले से कहीं अधिक भेद्य/संवेदनशील है, और यह आने वाले समय में पहले से भी कहीं अधिक होगा।” उन्होंने थल, वायु, नौसेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार तकनीक के विकास पर ज़ोर दिया।

“विशिष्ट तकनीक ऐसी चीज़ है जो भारत को और अधिक महफूज़ करेगी। इसे जरूरत के आधार पर होना होगा। हमें रक्षा और इंटेलिजेंस के साथ मिलकर देखना होगा कि हमें अपने दुश्मनों से एक कदम आगे रहने के लिए किन चीज़ों की ज़रूरत है।” इसमें उन्होंने DRDO की विशेष भूमिका पर भी ज़ोर दिया। “बहुत सारी नई तकनीक आ रही है। इन सभी के सिस्टमों को एकीकृत कैसे किया जाए? DRDO के अतिरिक्त कोई अन्य संस्था यह काम नहीं कर सकती।”

पाकिस्तान पर सबसे बड़ा दबाव FATF, लेकिन सबूत चाहिए

एक दिन पहले NIA द्वारा आयोजित कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान पर बात करते हुए डोभाल ने कहा कि वर्तमान समय में पाकिस्तान पर सबसे बड़ा दबाव FATF (की ब्लैक लिस्ट से बचने) का है, जो शायद और किसी कदम से पैदा न हो पाता। “हर कोई जानता है कि पाक जिहाद का समर्थन और उसे आर्थिक मदद करता है। लेकिन उसके खिलाफ सबूत केवल आप (ATS/STF/NIA, जिनके लिए कॉन्फ्रेंस की जा रही थी) ला सकते हैं। तथ्य लाइए, उनका (सबूत के तौर पर) इस्तेमाल करिए।” NIA के कश्मीर में पाकिस्तानी नेटवर्क का खुलासा करने में प्रयासों की डोवाल ने प्रशंसा की।

युद्ध की कीमत कोई नहीं चुका सकता, लिहाजा आतंक ‘सस्ता’ रास्ता

डोभाल ने सीधे शब्दों में कहा कि आने वाले समय में जिहाद और आतंक का प्रभाव और घटनाएँ बढ़ेंगे ही, घटेंगे नहीं। ऐसा इसलिए क्योंकि आधुनिक समय में सीधा सैन्य टकराव किसी भी देश के लिए जान-माल के हिसाब से इतना महंगा होगा कि कोई देश यह कीमत चुकाने के लिए तैयार नहीं होगा। इसलिए पाकिस्तान जैसे देशों को आतंकवाद एक ‘सस्ता’ तरीका लगता है, जो प्रभावी भी होता है, क्योंकि यह सच में दुश्मन को काफी हद तक नुकसान पहुँचा सकता है।

‘आतंक से लड़ना’ हवा-हवाई, जिहादी के हथियार छीनो

डोभाल ने एक बार फिर (वे यह बात लोकसभा टीवी को दिए साक्षात्कार में भी कह चुके हैं) दोहराया कि ‘आतंकवाद से लड़ना’ एक हवा-हवाई बात है। जिहादी की विचारधारा और उसका हथियार छीन कर उसे कुचलना होगा।

मीडिया का इस्तेमाल करिए, पकड़े गए जिहादी के बारे में बताइए

डोभाल ने जिहाद के खिलाफ़ इस लड़ाई में मीडिया की भूमिका को भी रेखांकित किया। एक ओर जहाँ उन्होंने मीडिया को आतंक को ज़रूरत से ज़्यादा फुटेज देने पर मार्गरेट थैचर का वह कथन याद दिलाया जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि मीडिया आतंकी के आतंक को लोगों तक न पहुँचाए, उसे इच्छित पब्लिसिटी न दे तो आतंक का ध्येय वहीं हार जाएगा, वहीं दूसरी ओर उन्होंने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को मीडिया के इस्तेमाल से ‘perception management’ में सक्रिय होने के लिए कहा।

डोभाल ने सलाह दी कि आतंकरोधी एजेंसियों को मीडिया ब्रीफिंग के लिए अधिकारियों को अधिकृत और तैयार करना चाहिए। इससे ऐसी मीडिया रिपोर्टों पर अंकुश लगेगा जो “समाज को आतंकवाद से लड़ने के लिए तैयार करने की बजाय और ज़्यादा आतंक फैलातीं हैं।” डोवाल ने मीडिया के बारे में कहा, “जब हम नहीं बताते हैं, तो मीडिया अटकलबाज़ी करने लगता है।”

उन्होंने अधिकारियों को सलाह दी कि वे जिन पाकिस्तानियों को जिहाद के शक में गिरफ्तार करते रहते हैं, उनकी पहचान और उनसे उगलवाए गए प्लान मीडिया को देने में कोई नुकसान नहीं है। “उनके बारे में दुनिया को पता चलने दीजिए।” उन्होंने इस ओर भी ध्यान आकर्षित किया कि दुनिया को इस बारे में पता नहीं चलने से पाकिस्तान को ही नकार की मुद्रा में बने रहने में सहूलियत होती है।

भारत कोई हिंदू राष्ट्र नहीं और इंशाल्लाह, हम इसे बनने भी नहीं देंगे: ओवैसी का ऐलान

हिन्दुओं के खिलाफ हमेशा ज़हर उगलने के लिए कुख्यात हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर हिन्दुओं को लेकर विवादित बयान देकर हंगामा खड़ा कर दिया है। सोमवार को महाराष्ट्र चुनाव से पूर्व अपनी पार्टी के उम्मीदवर अय्याज़ मौलवी के प्रचार के दौरान कल्याण शहर में चुनावी रैली संबोधित करते हुए कहा कि ‘समाज का एक धड़ा पूरे देश को एक रंग में रंगना चाहता है लेकिन हम हिंदुस्तान को कई रंगों में देखते हैं, यही हिंदुस्तान की सुंदरता है। ओवैसी ने कहा, भारत कोई हिंदू राष्ट्र नहीं है और इंशाल्लाह हम इसे बनने भी नहीं देंगे।

ओवैसी ने इस बयान के ज़रिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उससे जुड़ी संस्थाओं पर निशाना साधा है, बता दें कि यह बयान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के पिछले हफ्ते दिए गए बयान पर ओवैसी का यह बयान पलटवार के रूप में आया है जिसमें सरसंघचालक भागवत ने कहा था कि ‘संघ इस बात को लेकर स्पष्ट है कि भारत एक हिन्दू राष्ट्र है’।

ओवैसी यहीं नहीं रुके उन्होंने शिवसेना पर भी जमकर हल्ला बोलते हुए हरे रंग की खिलाफ़त करने का आरोप लगाया, ओवैसी बोले कि आप ‘नज़रिया बदलें’ और आप देखेंगे कि हरा रंग राष्ट्र ध्वज में भी है’, उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता और बहुलवाद की वजह से भारत एक अनूठा देश है, दुनिया में कोई देश भारत जैसा नहीं हो सकता और इसीलिए हमें इसपर गर्व है।

आरएसएस को चेतावनी देते हुए ओवैसी ने कहा कि हम यहाँ उनकी कृपा पर नहीं रह रहे हैं बल्कि आपको दुःख-सुख देखना है तो जाइए जाकर संविधान उठाकर देख लीजिए। अपनी पीठ थपथपाते हुए ओवैसी ने कहा कि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने अपने दम पर औरंगाबाद में अपनी जगह बनाई है, और भी जगह बनाएँगे, आप हमें नहीं रोक सकते।

ओवैसी ने केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि तीन तलाक़ प्रथा को लेकर भले सरकार प्रशंसा बटोरने में लगी हो लेकिन उनके मजहब की समस्याओं के बारे में उन्हें कुछ पता ही नही है। ओवैसी ने यह भी माँग रखी कि तरक्की और विकास के लिए अल्प-संख्यकों को आरक्षण दिया जाना चाहिए।

दीपोत्सव 2019: राम मंदिर पर फ़ैसले से पहले ही जगमग होगा अयोध्या, जलेंगे 5.5 लाख दीप

इस बार अयोध्या में दीपावली कुछ ख़ास होने वाली है। राम मंदिर को लेकर बहुप्रतीक्षित फ़ैसले की सुनवाई पूरी हो गई होगी और लोगों को सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय का इंतजार रहेगा। लेकिन, फ़ैसला आने से पहले ही अयोध्या जगमगा उठेगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने दीपोत्सव के लिए सारी तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। कुम्हारों को पहले ही लाखों दिये बनाने के लिए कहा गया था। अब दीपों की संख्या को लेकर आधिकारिक आँकड़ा भी आ गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव आरके तिवारी ने बताया है कि दीपोत्सव के दौरान साढ़े 5 लाख दीपक जलाए जाएँगे। तिवारी ने कहा कि इसके लिए तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं।

आरके तिवारी ने जानकारी दी कि प्रशासन ने उन सभी स्थलों का जायजा लिया है, जहाँ इन दीपकों को जलाया जाना है। उन्होंने इसमें व्यापक जान-भागीदारी की बात कही। इसका अर्थ है कि दीपोत्सव कार्यक्रम में भारी संख्या में लोग शामिल होने वाले हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने ऐलान किया है कि इस बार का दीपोत्सव ऐतिहासिक होगा। अकेले ‘राम की पैड़ी’ पर 4 लाख दीपक जलाए जाएँगे। इसके अलावा भरत कुंड और गुप्तारघाट पर भी कार्यक्रम का आयोजन होगा। इस कार्यक्रम को ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दर्ज कराने की पूरी तैयारी है।

इस कार्यक्रम से कुम्हारों की तो बल्ले-बल्ले है। त्योहारों के वक़्त उन्हें रोजगार का नया अवसर मिला है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुम्हार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद देते नहीं थक रहे। 40 कुम्हार परिवार की आबादी वाले गाँव जयसिंहपुर में सभी परिवारों को क्षमता अनुसार दीपक बनाने का ऑर्डर दिया गया है। कुम्हारों के चाक जगमग हो उठे हैं। इससे चाइनीज झालरों की चकाचौंध कम होगी और दीपक की रौशनी में पूरा अयोध्या नहाएगा। कई कुम्हारों ने यूपी सर्कार को धन्यवाद देते हुए कहा कि दीपोत्सव से काम को नई ज़िंदगी मिली है।

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ख़ुद कार्यक्रम के दौरान उपस्थित रहेंगे। 26 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यक्रम में सरकार सभी मंदिरों, घाटों और घरों में दीपोत्सव का आयोजन कर श्रीराम की जन्मभूमि से विश्व को एक नया सन्देश देना चाहती है। योगी आदित्यनाथ से साफ़ कर दिया है कि अयोध्या सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है और इसे पहचान दिलाना उनका कर्तव्य है। यहाँ पर्यटन को विकसित करने के लिए सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। पिछली बार भी अयोध्या में दीपोत्सव कार्यक्रम के दौरान वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया गया था लेकिन इस बार आयोजन की भव्यता कई गुना ज्यादा होगी।

अयोध्या के 16 घाटों को कुछ इस तरह से दीपकों से सजाने की योजना बनाई जा रही है कि ऊपर से देखने पर उसमें भगवान राम की आकृति दिखे। अवध विश्वविद्यालय के दृश्य कला विभाग को इस समबन्ध में निर्देश दे दिए गए हैं और डिपार्टमेंट जोर-शोर से इसकी तैयारी में लगा हुआ है। योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या को आस्था के मामले में देश का नंबर वन प्रतीक बताया।

’70 साल तक आपका पानी पाकिस्तान जाता रहा, ये मोदी उसे रोकेगा, काम शुरू हो चुका है’

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में चुनावी रैली के दौरान जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के लोगों के सामने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने बता दिया अब उनका अगला इरादा पाकिस्तान की ओर 70 सालों से जाते पानी को रोककर हरियाणा के घर-घर और किसानों के खेतों तक पहुँचाना है।

उन्होंने आज चरखी दादरी में बबीता फोगाट के समर्थन में चुनावी रैली में जनता को संबोधित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हिन्दुस्तान और हरियाणा के किसानों के हक का पानी 70 साल तक पाकिस्तान तक जाता रहा। ये मोदी पानी को रोकेगा और आपके घर तक लाएगा। इस पानी पर हक हिन्दुस्तान का है। हरियाणा के किसान का हैं।”

इस दौरान उन्होंने बबीता फोगाट को जिताने के लिए लोगों से अपील भी की। उन्हें आश्वासन दिया कि अगर हरियाणा की बेटी बबीता फोगात चुनाव जीतकर विधानसभा पहुँची, तो वह उन सभी लोगों की आवाज बनेगी। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने हर किसान के खाते में सीधी मदद पहुँचाने की बात कही।

प्रधानमंत्री ने जनता को जानकारी दी कि 70 वर्षो तक नदियों के माध्यम से पाकिस्तान में पानी जाता रहा। लेकिन अब वह इसपर रोक लगाएँगे। ये पानी हरियाणा के घर-घर और किसानों के खेत तक लाएँगे। जिसके लिए उन्होंने इस दिशा में काम भी शुरु कर दिया है।

अपने भाषण में नरेंद्र मोदी ने हरियाणा में विधानसभाा चुनाव के दौरान बदली फिजा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह लगभग दो दिनों से राज्य के अलग-अलग जगहों पर जा रहे हैं और उन्हें हरियाणा के रुख का मालूम चल रहा है। उनके अनुसार एक समय में 2 से 3 सीटों में सिमट जाने वाली भाजपा अब राज्य में दूसरी बार सरकार बनाने की तैयारी कर रही है।

इसके बाद पीएम मोदी ने हरियाणा की जनता को लोकसभा चुनाव में दसों सीटों पर जीत दिलाने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने करतारपुर प्रोजेक्ट के लगभग पूरे होने पर भी अपनी खुशी व्यक्ति की और कहा कि वे भाग्यशाली हैं जो उन्हें 70 साल पहले के मुद्दे को सुलझाने का मौक़ा मिला।

राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, राजनीति चलती रहेगी। चुनाव आएँगे-जाएँगे, जीत-हार होती रहेगी, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा हमेशा सर्वोपरि रहनी चाहिए?

इसके अलावा उन्होंने दशहरे के अवसर पर भारत को मिले पहले राफेल का भी जिक्र किया। उन्होंने पूछा कि क्या इससे उन्हें खुशी नहीं मिली? उन्होंने कहा, हमें गर्व है और खुशी है कि हमारा देश शक्तिशाली हो रहा है, लेकिन पता नहीं कॉन्ग्रेस क्यों इतनी नकारात्मक हो रही है।

उल्लेखनीय है कि इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनोहर लाल खट्टर की उपलब्धियाँ भी गिनवाईं। उन्होंने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का जिक्र किया और कहा, “हरियाणा के लोगों ने देश को दिखाया हैं कि जन-भागीदारी कैसे सफल होती है। सरकार ने जब बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की शुरुआत की, तब हरियाणा ने भी देश को सामाजिक परिवर्तन दिखाने की ठान ली। हरियाणा की यह माटी हमारे लिए सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं है, इसमें हमारे किसानों का खून-पसीना मिला हुआ है।”