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BJP नेता रविंद्र खरात, 2 बेटे और भाई समेत 5 लोगों की निर्मम हत्या: महाराष्ट्र चुनाव से पहले साजिश या रंजिश?

महाराष्ट्र के जलगांव में बीजेपी नेता रविंद्र खरात समेत 5 लोगों की निर्मम हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। घटना महाराष्ट्र के जलगांव में भुसावल की है। पुलिस ने बताया कि बदमाशों ने खरात और अन्य पर गोलियाँ चलाईं और चाकू से हमला किया। हमले में खरात के अलावा उनके भाई सुनील, 2 बेटे – प्रेम सागर एवं रोहित और उनके एक दोस्त की मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने तीनों हमलावरों को गिरफ्तार किया है। फिलहाल पुलिस जाँच कर रही है।

घटना रविवार (अक्टूबर 6, 2019) देर रात तब हुई, जब बीजेपी नेता रवींद्र और उनके परिजन भुसावल शहर स्थित समता नगर परिसर में अपने घर के बाहर बैठे थे। घटना को अंजाम देने के लिए दो अपराधियों ने पहले खरात पर गोली चलाई। जिसमें वो बुरी तरह से घायल हो गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। गोलीबारी की आवाज सुनकर उनके भाई सुनील बाबू राव खरात बाहर आए। हमलावरों ने उन पर भी गोली चलाई। वो जान बचाने के लिए घर में भागे। मगर हमलावरों ने उनका पीछा किया और चाकू से उनका गला काट दिया, उनकी भी वहीं पर मौत हो गई।

इसके बाद हमलावरों ने रवींद्र खरात के दोनों बेटे रोहित और प्रेम सागर के अलावा उनके एक दोस्त पर भी चाकू से हमला किया। इस दौरान हाथापाई हुई और अपराधी वहाँ से भाग गए। इस पूरे वारदात में दो लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। तीन की जलगांव सिविल हॉस्पिटल ले जाते समय मौत हो गई। इस घटना में रविंद्र की पत्नी भी घायल हैं।

इस वारदात के आधे घंटे बाद ही पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। उनसे देर रात तक पूछताछ जारी रही। भुसावल शहर के समता नगर में भारी संख्या में पुलिस की तैनाती की गई है। अधिकारी ने कहा, “इस बात की जानकारी अभी नहीं मिल पाई है कि यह हमला क्यों किया गया। बाजारपेठ पुलिस थाने में हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है और आरोपितों से पूछताछ जारी है।” पुलिस ने बताया कि अपराध में इस्तेमाल किए गए हथियारों को बरामद कर लिया गया है। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव होना है और वोटों की गिनती 24 अक्टूबर को की जाएगी।

पाकिस्तान का ब्लैकलिस्ट होना तय… 10 में 9 रेटिंग में फिसड्डी: FATF रिपोर्ट में खुलासा

पेरिस में होने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के सालाना अधिवेशन से ठीक पहले पाकिस्तान को करारा झटका लगा है। दुनिया भर में टेरर फंडिंग पर नजर रखने वाली संस्था FATF की एशिया पैसिफिक ग्रुप (APG) की रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में मनी लॉन्ड्रिंग तथा टेरर फंडिंग के खिलाफ कार्रवाई के 10 मानदंडों में से पाकिस्तान 9 में फिसड्डी साबित हुआ है जबकि एक में उसे ‘मध्यम’ स्थान प्राप्त हुआ है।

APG की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1267 को लागू करने के लिए सही कदम नहीं उठाए। उसने हाफिज सईद, मसूद अजहर और लश्कर ए तैयबा (LeT), जमात उद दावा (JuD) एवं फलह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (FIF) जैसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादियों और आतंकी संगठनों को लेकर नरमी बरती और कोई ठोस एक्शन नहीं लिया।

पाकिस्तान सरकार की मिलीभगत का खुलासा करते हुए, रिपोर्ट में कहा गया है कि UNSCR 1267 कमिटी की रिपोर्ट में वर्ष 2008 में ही जेयूडी (JUD) और वर्ष 2012 में एफआईएफ (FIF) को प्रतिबंधित सूची में डाले जाने के बावजूद पाकिस्तान में ये दोनों संगठन खुलेआम जनसभाएँ करते हैं और फंड जुटाते हैं। पाकिस्तानी मीडिया द्वारा कई बार मानवीय राहत और सहायता के नाम पर एफआईएफ को चंदा वसूलते देखा गया है। इन संगठनों की ओर से एंबुलेंस सेवाएँ जारी रखने पर भी सवाल उठाए गए कि क्या इनकी फंडिंग के खिलाफ कारगर कार्रवाई की गई है?

बता दें कि FATF ने वर्ष 2018 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल दिया था। तब उसे 15 महीनों में बताए गए 27 बिंदुओं पर काम करना था। 15 महीने की यह अवधि इस साल सितंबर में पूरी हो चुकी है और अब इस पर एफएटीएफ का आखिरी फैसला आना है। ऐसे में एपीजी की यह ताज़ा रिपोर्ट पाकिस्तान के लिए नई मुसीबत पैदा कर सकती है।

उल्लेखनीय है कि 13 से 18 अक्टूबर को एफएटीएफ की मीटिंग होनी है, जिसमें टेरर फंडिंग को लेकर पाकिस्तान पर फैसला लिया जाएगा। एपीजी की इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद ऐसा माना जा रहा है कि FATF की बैठक में पाकिस्तान का ब्लैकलिस्ट होना तय है।

‘हम कहते हैं भारत माता की जय, कॉन्ग्रेस कहती है सोनिया माता की जय’

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने नारायणगढ़ विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के उम्मीदवार के समर्थन में एक जनसभा को संबोधित करते हुए रविवार (अक्टूबर 6, 2019) को कहा, “लोगों को भारत माता की जय बोलने वालों और सोनिया माता की जय बोलने वालों के बीच अंतर करना होगा।” उन्होंने कहा, “जब हमारे सामने माता का चित्र आता है तो हम जोर से बोलते हैं भारत माता की जय, लेकिन जब हमारे कॉन्ग्रेस मित्रों के सामने माता का विचार आता है, तो इनको सोनिया माता दिखती हैं, फिर ये सोनिया माता की जय बोलने लग जाते हैं।”

दरअसल, मनोहर लाल खट्टर ने ये बयान इसलिए दिया क्योंकि इंटरनेट पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें गुड़गाँव विधानसभा क्षेत्र से कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार सुखबीर कटारिया को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि गुड़गाँव के लोग लोग भारत माता की जय नहीं बोलेंगे। ‘भारत माता की जय’ की जगह अब लोग ‘सोनिया माता की जय कहेंगे।’

आगे मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि कॉन्ग्रेस अब नहीं कह सकती है कि वीडियो फर्जी है क्योंकि ”इससे सोनिया गाँधी नाराज हो जाएँगी, और अगर वह कहती है कि यह सही है तो लोग नाराज हो जाएँगे।” उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस नेहरू-गाँधी परिवार के आगे कुछ सोच ही नहीं सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस के नेता आपस में गुटबाजी कर रहे हैं। एक-दूसरे पर करोड़ों रुपए में टिकट बेचने का आरोप लगा रहे हैं। अब जनता समझदार है। वो इनकी राजनीति का गंदा खेल देख रही है।

इसके साथ ही खट्टर ने राहुल गाँधी पर भी निशाना साधते हुए कहा, “(तत्कालीन) कॉन्ग्रेस अध्यक्ष (राहुल गाँधी) ने (लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद) कहा कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है और नया अध्यक्ष गाँधी परिवार के बाहर का व्यक्ति होगा। कॉन्ग्रेस ने 2 महीने का समय लिया लेकिन उन्हें इस परिवार से बाहर का कोई योग्य व्यक्ति नहीं मिला और सोनिया गाँधी को फिर से अध्यक्ष बना दिया गया।”

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया भर में देश का कद बढ़ाया है और अमेरिका के ह्यूस्टन में ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम के दौरान इसकी झलक देखने को मिली थी। मुख्यमंत्री ने कहा, “बड़े देश भी पीएम मोदी से संपर्क करते हैं। नीतियाँ और योजनाएँ बनाने के लिए उनकी सलाह लेते हैं।” ह्यूस्टन समारोह में अमेरिकी राष्ट्रपति के शामिल होने का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, ”पीएम मोदी अब विश्व के शीर्ष नेताओं में शुमार हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने इतना आदर किसी अन्य को नहीं दिया जितना उन्होंने उनको दिया।”

पाकिस्तानी ट्रेन चली Los Angeles, मंत्री ने कहा- ‘अल्लाह ने चाहा तो ज़रूर जाएँगे’ – देखें Viral Video

पाकिस्तान के सिंध प्रान्त में स्थित सुक्कुर के रोहरी रेलवे स्टेशन पर एक अजीबोगरीब नज़ारा देखने को मिला। यहाँ ‘आवाम एक्सप्रेस’ नामक एक ट्रेन के स्क्रीन पर गंतव्य स्थल लॉस एंजेल्स दिखा रहा था। बता दें कि लॉस एंजेल्स अमेरिका के कैलिफोर्निया का सबसे बड़ा शहर है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में लोगों ने दावा किया कि पाक रेलवे ने इतनी तरक्की कर ली है कि अब सीधे लॉस एंजेल्स के लिए ट्रेन चलाई जा रही है। पत्रकार नायला इनायत ने इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर करते हुए मज़ाकिया अंदाज़ में लिखा कि पाक रेलवे ने लम्बी छलांग लगाई है।

पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख रशीद ने इससे जुड़े सवालों के जवाब में कहा कि अगर अल्लाह ने चाहा तो ज़रूर लॉस एंजेल्स भी जाएँगे। उन्होंने इसे सोशल मीडिया का कमाल करार दिया और कहा कि पाकिस्तानी लोग रेलवे से बहुत मोहब्बत करते हैं। शेख रशीद ने कहा कि ‘आवाम एक्सप्रेस’ की कम्प्यूटराइज्ड स्क्रीन से छेड़छाड़ कर ऐसा वीडियो बना लिया गया। उन्होंने कहा कि स्क्रीन से छेड़छाड़ के लिए बस अंदर जाकर ‘टिक-टिक’ करना होता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लोगों को रेलवे से इतनी मोहब्बत है कि वे पाकिस्तानी ट्रेनों को बर्फ में चलते हुए भी वीडियो बनाते हैं।

बता दें कि ये वही शेख रशीद हैं, जिन्हें जम्मू कश्मीर को लेकर आयोजित पाकिस्तानी कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेते ही माइक से करंट लगा था। वह पाकिस्तान के पास पाव भर का परमाणु बम होने का दावा भी कर चुके हैं। लाहौर में मीडिया से बात करते हुए शेख रशीद अहमद ने पाकिस्तानी ट्रेन का गंतव्य स्टेशन लॉस एंजेल्स दिखाए जाने को यात्रियों की शरारत करार दिया।

बता दें कि सिंध की राजधानी कराची से कमर्शियल फ्लाइट्स से लॉस एंजेल्स जाने में 20 घंटे से भी अधिक लगते हैं। लोगों ने सोशल मीडिया पर पाक रेलवे का जम कर मज़ाक बनाया। पाक मंत्री के बयान को लेकर कुछ पाकिस्तानियों ने ही उन्हें लताड़ भी लगाई।

इमरान के फ्लाइट में नहीं आई थी तकनीकी ख़राबी, नाराज़ सऊदी प्रिंस ने निकाल बाहर किया था: पाक मीडिया

आपको याद होगा कि ‘यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली’ में भाग लेने न्यूयॉर्क गए पाकिस्तानी पीएम इमरान ख़ान के फ्लाइट में लौटते वक़्त तकनीकी ख़राबी की ख़बर आई थी, जिसके बाद उन्हें वापस अमेरिका में लैंड कराया गया था। 28 सितम्बर को पाकिस्तान लौट रहे इमरान ख़ान की फ्लाइट की न्यूयॉर्क में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी थी। 1 सप्ताह के दौरे के लिए वहाँ गए इमरान ख़ान को इसके बाद पूरी रात अमेरिका में ही रुकना पड़ा था। कहा गया था कि फ्लाइट में आई ख़राबी को दूर किए जाने के बाद वह फिर से वापस पाकिस्तान के लिए रवाना होंगे।

अब पाकिस्तान के ही एक प्रमुख मीडिया संस्थान ने इस ख़बर को लेकर बड़ा खुलासा किया है। ‘फ्राइडे टाइम्स’ के अनुसार, इमरान ख़ान की फ्लाइट को किसी तकनीकी ख़राबी की वजह से नहीं बल्कि सऊदी क्राउन प्रिंस की नाराज़गी के कारण वापस न्यूयॉर्क में लैंड करना पड़ा था। इमरान ख़ान के भाषण में कही गई कुछ बातों से सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इतने ख़फ़ा थे कि उन्होंने तुरंत इमरान सहित पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को अपने प्राइवेट जेट से निकाल बाहर करने का आदेश दे दिया था।

हालाँकि, इमरान ख़ान अमेरिका गए तो थे सऊदी क्राउन प्रिंस के स्पेशल जेट से लेकिन वह वापस एक कमर्शियल फ्लाइट से लौटे। इमरान जिस प्लेन से वापस आए, वो भी सऊदी एयरलाइन्स की ही नियमित कमर्शियल फ्लाइट थी। इमरान के साथ पाकिस्तान के विदेश मंत्री भी उनके साथ इसी फ्लाइट से वापस आए। पाकिस्तान ने तब बहाना बनाया था कि इमरान भूकंप से पीड़ित इलाक़ों का जल्द से जल्द दौरा करना चाहते हैं, इसीलिए वह जल्दबाजी में कमर्शियल फ्लाइट से वापस आ रहे हैं।

‘फ्राइडे टाइम्स’ ने लिखा कि संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली में इमरान ख़ान के सम्बोधन के समय कई कुर्सियाँ खाली थीं, लेकिन फिर भी वापस लौटने पर उनका भव्य स्वागत किया गया। मीडिया पोर्टल ने पूछा कि जब पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में जोरदार प्रदर्शन किया, फिर पाकिस्तानी स्थायी प्रतिनिधि मलीहा लोदी को इसके तुरंत बाद वापस बुलाने की नौबत क्यों आन पड़ी? इस बात पर भी सवाल खड़े किए गए कि इमरान ख़ान ने जम्मू कश्मीर मसले को ‘इस्लामिक पाकिस्तान बनाम हिन्दू भारत’ के मुद्दे में बदल दिया है।

यूएनजीए में पाकिस्तानी पीएम ने बड़ी-बड़ी बातें की थीं। जहाँ एक तरफ उन्होंने दुनिया को परमाणु युद्ध का डर दिखाया था, वहीं दूसरी तरफ भारत के ख़िलाफ़ इस्लामिक राष्ट्रों का समर्थन लेने के लिए पैगम्बर मुहम्मद और इस्लाम पर लम्बा-चौड़ा भाषण दिया था। उन्होंने जम्मू कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मसला बनाने के लिए पूरा जोर लगाया। हालाँकि, पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने सम्बोधन में एक बार भी इमरान या पाकिस्तान का नाम नहीं लिया था और विकास के अन्य मुद्दों को केंद्र में रखा था।

फ्राइडे टाइम्स की रिपोर्ट का पाकिस्तान की सरकार ने खंडन किया है।

Bigg Boss में ‘बेड फ्रेंड फॉरएवर’ है हद दर्जे की अश्लीलता: बैन करने के लिए प्रकाश जावड़ेकर को पत्र

Confederation Of All India Traders (CAIT) नाम का एक संगठन है। इसने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिख कर कलर्स टीवी के शो ‘बोग बॉस’ पर बैन लगाने की माँग की है। कॉन्फ़ेडरेशन ने केंद्रीय मंत्री को लिखे पत्र में इस ‘बेहूदा’ शो के माध्यम से फैलाई जा रही ‘अश्लीलता’ की तरफ़ ध्यान आकृष्ट कराया है। पत्र में कहा गया है कि इस शो के कारण कलर्स चैनल को पारिवारिक माहौल में घर में देखना मुश्किल हो गया है। आरोप लगाया गया है कि सलमान ख़ान द्वारा होस्ट किया जाने वाला ‘बिग बॉस’ का 13वाँ सीजन देश की पारम्परिक और सांस्कृतिक मूल्यों को कलंकित कर रहा है।

कॉन्फ़ेडरेशन ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न सिर्फ़ भारत बल्कि पूरी दुनिया में देश के सांस्कृतिक मूल्यों की बात करते हैं, इसीलिए इस शो को तुरंत बैन किया जाना चाहिए क्योंकि इससे भारत की ग़लत छवि पेश हो रही है। इस पत्र में लिखा गया है कि ‘बिग बॉस’ बिना शक हमेशा से विवादित कार्यक्रम रहा है और हमारे देश के नैतिक मूल्यों को नुकसान पहुँचाता रहा है। कॉन्फ़ेडरेशन को मुख्य आपत्ति शो के नए कॉन्सेप्ट ‘बेड फ्रेंड फॉरएवर’ से है। इसके तहत दो लोगों को एक बेड पर सोने का टास्क दिया जाता है।

ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने इसे टीवी की दुनिया के लिए निंदनीय बताया है। उसने इस बात पर आपत्ति जताई है कि इसे ‘प्राइम टाइम’ में प्रसारित किया जाता है और यह रात का वो समय होता है जब परिवार के सभी लोग, यहाँ तक कि बच्चे भी टीवी देख रहे होते हैं। ‘कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स’ ने केंद्रीय मंत्री को भेजे गए पत्र में लिखा है:

“कलर्स पर आने वाले ‘बिग बॉस’ के 13वें सीजन ने नैतिकता के सभी मूल्यों को ताक पर रखते हुए हद पार कर दी है। न सिर्फ़ शो बल्कि शो में दिए जा रहे अलग-अलग टास्क भी मानवीय और सांस्कृतिक मूल्यों के ख़िलाफ़ हैं। इस शो के कंटेंट्स काफ़ी ओछे हैं और इसे एक ऐसे नेशनल टीवी चैनल पर प्रसारित नहीं किया जाना चाहिए, जिसे घर-घर में देखा जाता हो। जब फ़िल्मों को सेंसर बोर्ड से पास कराना अनिवार्य होता है तो फिर टीवी कार्यक्रमों को प्रसारण से पहले सेंसर बोर्ड की अनुमति क्यों नहीं लेनी होती? अगर सेंसर बोर्ड से अनुमति ली जाती है तो फिर ऐसे अश्लील और ओछे कंटेंट को पास कैसे किया गया?”

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को CAIT द्वारा भेजा गया पत्र: ‘बिग बॉस’ शो की बैन करने की माँग

कॉन्फ़ेडरेशन ने आरोप लगाया कि आज़ादी की आड़ में उन सिद्धांतों से समझौता किया जा रहा है, जो हमारे देश में निहित है। पत्र में माँग की गई है कि इस शो को या तो तुरंत बंद किया जाए या फिर इसे तभी प्रसारण की अनुमति दी जाए, जब इसमें से अश्लील कंटेंट्स हटा लिए जाएँ।

सुप्रीम कोर्ट ने Aarey मामले पर लिया स्वतः संज्ञान, मुंबई मेट्रो ने कहा- ‘हमने 24000 पेड़ लगाए’

आरे क्षेत्र में पेड़ों की कटाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई के लिए तारीख मुक़र्रर किया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए सोमवार (अक्टूबर 7, 2019) की तारीख तय की है। कुछ छात्रों ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को इस सम्बन्ध में पत्र लिख कर हस्तक्षेप करने की माँग की थी, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। जबकि हाईकोर्ट ने कथित पर्यावरण एक्टिविस्ट्स को झटका देते हुए मेट्रो प्रोजेक्ट को रोकने से इनकार कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट की एक स्पेशल बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी।

बता दें कि मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए मुंबई के आरे क्षेत्र में कुछ पेड़ों को काटा जा रहा है। कई एक्टिविस्ट्स और बॉलीवुड सेलेब्स इसके विरोध में आ गए हैं। भाजपा की सहयोगी शिवसेना भी इस मामले में सरकार का विरोध कर रही है। शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी को विरोध प्रदर्शन करते हुए हिरासत में भी लिया गया था। मुंबई मेट्रो की प्रमुख अश्विनी भिड़े ने कहा है कि यह क़दम अनिवार्य था, इसे टाला नहीं जा सकता था। उन्होंने कहा कि कभी-कभी नए जीवन के फलने-फूलने के लिए और नए निर्माण के लिए तबाही अनिवार्य हो जाती है।

मुंबई मेट्रो ने बताया है कि उसने आरे मिल्क कॉलोनी से लेकर संजय गाँधी नेशनल पार्क तक, 24000 से भी अधिक पेड़ लगाए हैं। एक वीडियो के माध्यम से मुंबई मेट्रो ने समझाया कि वह किस तरह मुंबई के वन्य जीवन और हरियाली के प्रसार में अपना योगदान दे रहा है। आरे पर विरोध प्रदर्शन कर रहे 29 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस क्षेत्र को आधिकारिक रूप से जंगल घोषित करने से मना कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले एक्टिविस्ट्स ने बताया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आँखें खोलने के लिए ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मॉल बनाने और कई अन्य चीजों के लिए भी महाराष्ट्र सरकार जंगलों को काटने की योजना बना रही है। उन लोगों ने शिवसेना से कहा कि अगर आदित्य ठाकरे आरे जंगल को लेकर इतने ही सजग हैं तो भाजपा से गठबंधन तोड़ें।

फ़िल्म सिटी ने हड़प रखी है नेशनल पार्क की 51 एकड़ ज़मीन, Aarey पर विरोध करने वाला बॉलिवुड भी चुप

आरे को हाईकोर्ट ने आधिकारिक रूप से जंगल मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद इसे लेकर महाराष्ट्र सरकार का विरोध कर रहे लोगों को काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस विरोध प्रदर्शन में बॉलीवुड बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहा है। मनोज वाजपेयी और वरुण धवन जैसे अभिनेताओं से लेकर दिया मिर्जा और ऋचा चड्ढा जैसी अभिनेत्रियों तक ने आरे क्षेत्र में मेट्रो के लिए पेड़ों को काटे जाने का विरोध किया। एकाध कथित पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने तो उस पेड़ को गले लगाया, जिन्हें काटा ही नहीं जाना है। हालाँकि, अक्षय कुमार और अमिताभ बच्चन जैसे बड़े अभिनेताओं ने मेट्रो की महत्ता बताते हुए सरकार का समर्थन भी किया है।

इसी क्रम में एक दो वर्ष पुरानी ख़बर है, जो बॉलीवुड को अपने भीतर झाँकने पर मजबूर कर देगी। लक्ज़री गाड़ियों से घूमने वाले जिस बॉलीवुड के लोग मेट्रो प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं, उसी बॉलीवुड के गढ़ को लेकर ऐसी सूचना आई थी, जिसे लेकर आज तक एक भी सेलेब्रिटी ने आवाज़ नहीं उठाई। मुंबई के गोरेगाँव में फिल्म सिटी और संजय गाँधी राष्ट्रीय उद्यान स्थित हैं। जहाँ फ़िल्म सिटी के नाम से जाना जाने वाला ‘दादासाहब फाल्के नगर’ 1977 में बनाया गया था। यहीं ‘बोरीवली नेशनल पार्क’ भी है, जिसका नाम 1996 में ‘संजय गाँधी नेशनल पार्क’ कर दिया गया था।

संजय गाँधी नेशनल पार्क (जो तब बोरीवली नेशनल पार्क हुआ करता था) की अथॉरिटी का कहना है कि 1966 में ग़लती से उसके हिस्से की 51 एकड़ ज़मीन फिल्म सिटी को ट्रांसफर हो गई थी, जिसे अब तक नहीं लौटाया गया है। ‘वनशक्ति’ एनजीओ ने सूचना के अधिकार के तहत कुछ डॉक्युमेंट्स हासिल किए थे, जिससे पता चला कि 51 एकड़ की यह ज़मीन विवादित है क्योंकि फिल्म सिटी और नेशनल पार्क के बीच कोई बाउंड्री नहीं है। नेशनल पार्क के अधिकारियों का कहना है कि वे 1970 से लगातार फ़िल्म सिटी से मिन्नतें कर रहे हैं कि नेशनल पार्क की ज़मीन लौटा दी जाए।

अगस्त 2017 में भी इस सम्बन्ध में फिल्म सिटी से निवेदन करते हुए एक पत्र लिखा गया था। पार्क के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि फिल्म सिटी के लोगों की सुरक्षा के लिए भी यह ज़रूरी है क्योंकि जंगली जानवर उस क्षेत्र में स्वच्छंद घुमते हैं। बता दें कि फ़िल्म सिटी में आर्टिफिसियल झरने और जेल से लेकर वो सभी चीजें हैं, जिनकी बॉलीवुड फ़िल्मों की शूटिंग में आवश्यकता होती है। लगभग सभी बॉलीवुड फ़िल्मों का अधिकतर हिस्सा यहीं शूट किया जाता है। तब फ़िल्म सिटी ने ये ज़मीन लौटाने से मना कर दिया था और उन्होंने कहा था कि वे अपने निर्णय पर अडिग रहेंगे।

अगस्त 2017 में फ़िल्म सिटी में शूटिंग के दौरान कई लोगों पर जंगली जानवरों ने हमले किए थे। उसके बाद एक सप्ताह से भी अधिक समय तक इसे बंद रखा गया था। बावजूद इसके फ़िल्म सिटी ने नेशनल पार्क को ज़मीन लौटाने से इनकार कर दिया। ‘वनशक्ति’ के डायरेक्टर स्टालिन का कहना है कि संजय गाँधी नेशनल पार्क की ज़मीन के बड़े हिस्से को धोखाधड़ी के माध्यम से फ़िल्म सिटी को बेच डाला गया था। उन्होंने बताया कि इससे वन्य जनजीवन पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। स्टालिन ने इसे लैंड स्कैम करार दिया।

पार्क के अधिकारी मानते हैं कि सर्वे नंबर में गड़बड़ी होने के कारण फ़िल्म सिटी को अतिरिक्त ज़मीन मिल गई। महाराष्ट्र सरकार ने 1969 में मुंबई इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MIDC) को 215 एकड़ ज़मीन दी थी। 1970 में आए एक सरकारी नोटिफिकेशन ने इसकी पुष्टि की। इसके बाद 1977 में MIDC ने 245 एकड़ ज़मीन फ़िल्म सिटी को ट्रांसफर किया। बाद में फ़ैसला लिया गया कि फ़िल्म सिटी को 245 एकड़ की जगह 194 एकड़ ही ट्रांसफर किया जाएगा। इस तरह से बाकी के बचे 51 एकड़ ज़मीन को वन विभाग को वापस लौटाया जाना था।

अब आपको बताते हैं कि ग़लती कहाँ हुई थी। 1970 के सरकारी नोटिफिकेशन में ग़लत सूचना दी गई थी। 1984 में एक दूसरा नोटिफिकेशन आया, जिसमें भूल-सुधार किया गया। दरअसल, 1970 के नोटिफिकेशन में ग़लती यह हुई थी कि 194 एकड़ को 215 एकड़ माप लिया गया था। एक गाँव का क्षेत्रफल ग़लत आँके जाने के कारण ऐसा हुआ। इस तरह से 245 एकड़ में से 194 एकड़ फ़िल्म सिटी को दिया जाना था और बाकी का 51 एकड़ वापस फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को लौटाया जाना था। फ़िल्म सिटी ने ये ज़मीन लौटाने से इनकार कर दिया और इसी कारण पिछले कई दशकों से नेशनल पार्क के साथ उसकी बाउंड्री अंतिम रूप नहीं ले सकी।

अगस्त 2017 में बाढ़ आने के कारण संजय गाँधी नेशनल पार्क के कई अहम दस्तावेज नष्ट हो गए। इस कारण इस मुद्दे को सुलझाने में और देरी हुई। दूसरी ओर, फ़िल्म सिटी के डिप्टी इंजीनियर चंद्रकांत ने कहा कि नेशनल पार्क की किसी भी ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा नहीं किया गया है और कोई भी ज़मीन वापस नहीं लौटाई जाएगी। बॉलीवुड के लोगों ने भी पिछले 35 सालों से (जब नोटिफिकेशन में भूल-सुधार हुआ) इसे लेकर कोई आवाज़ नहीं उठाई। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्यों न आरे जंगल बचाने के लिए पर्यावरण की चिंता करने वाले बॉलीवुड सेलेब्स अपने घर से ही शुरुआत करें?

(नोट- फ़िल्म सिटी का निर्माण भले ही 1977 में हुआ लेकिन यहाँ दादासाहब फाल्के द्वारा निर्मित स्टूडियो पहले से ही था। यह 1911 से ही वहाँ स्थापित है। इसे 1977 में एक नया रूप-रंग दिया गया था।)

MLA नाहिद हसन फ़रार, कोई भी उसके बारे में सूचना दे सकता है: भगोड़ा घोषित कर की गई मुनादी

उत्तर प्रदेश के शामली ज़िले की कैराना विधानसभा से समाजवादी पार्टी (सपा) विधायक नाहिद हसन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कोर्ट से कुर्की का नोटिस पारित होने के बाद तीन अलग-अलग मामलों में फ़रार चल रहे नाहिद हसन को शामली की विशेष अदालत ने भगोड़ा घोषित कर दिया है। हसन के ख़िलाफ़ 13 मामले दर्ज हैं।

पुलिस ने फास्ट ट्रैक कोर्ट शामली से NBW और धारा-82 के तहत आदेश प्राप्त कर विधायक नाहिद हसन के आवास पर नोटिस चिपका दिया है। साथ ही हसन के चबूतरे के गेट पर भी उन्होंने नोटिस चिपकाया। ख़बर के अनुसार, नोटिस चिपकाने से पहले पुलिस ने चौक बाज़ार से विधायक नाहिद हसन के आवास पर मुनादी (ढोल बजाते हुए) करवाते हुए माइक से अनाउंसमेंट भी करवाई। 

अनाउंसमेंट में कोतवाली प्रभारी यशपाल धामा ने कहा कि अभियुक्त नाहिद मुक़दमे में फ़रार चल रहा है। उसके बारे में कोई भी व्यक्ति कभी भी सूचना दे सकता है और सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाएगा।

पुलिस के अनुसार, जनवरी 2018 को मोहम्मद अली ने कैराना कोतवाली में सपा विधायक चौधरी नहाद हसन, उनकी माँ पूर्व सांसद तबस्सुम बेगम और आठ अन्य पर 87 लाख 80 हज़ार रुपए लेने के बाद ज़मीन का बैमाना किसी दूसरे के नाम करने का मामला दर्ज कराया था।

पिछले दिनोंं इस मामले में हसन के ख़िलाफ़ कोर्ट से वारंट प्राप्त कर पुलिस विधायक की गिरफ़्तारी में प्रयासरत थी, लेकिन हसन अभी भी पुलिस की पहुँच से दूर है। वहीं, हसन की माँ को शुक्रवार (4 अक्टूबर) को अंतरिम ज़मानत मिल गई थी। एसपी अजय कुमार ने बताया कि धोखाधड़ी के मामले में विशेष न्यायाधीश कोर्ट ने शनिवार (5 अक्टूबर) को सुनवाई के दौरान पुलिस को धारा-82 के तहत कार्रवाई करने की इजाज़त दे दी। उन्होंने बताया कि नाहिद की गिरफ़्तारी के लिए 11 टीमों का गठन किया गया है।   

बता दें कि धारा-82 के तहत एक तरह का नोटिस दिया जाता है कि आरोपित या तो सरेंडर कर दे अन्यथा उसके ख़िलाफ़ कुर्की की कार्रवाई की जाएगी। धारा-82 की समय-सीमा समाप्त होने के बाद पुलिस न्यायालय के समक्ष धारा-83 यानी कुर्की की अपील करेगी। धारा-83 के आदेश मिलने के बाद पुलिस कुर्की की कार्रवाई करती है।

एक मामला 9 सितंबर 2019 का भी है, जब विधायक अपनी कार से जा रहे थे। इस दौरान उनकी नोकझोंक एसडीएम कैराना डॉ अमित पाल शर्मा और तत्कालीन पुलिस क्षेत्राधिकारी से हो गई। सोशल मीडिया पर घटना का एक वीडियो भी वायरल हो गया था। वीडियो सामने आने के बाद कैराना कोतवाली में सरकारी काम में बाधा डालने समेत कई गंभीर दाराओं में मामला दर्ज हुआ था।

ख़बर के अनुसार, हसन के ख़िलाफ़ धारा-419, 420, 465, 153, 353, 504, 505, 188 और 7 CLA एक्ट के चहत मामला दर्ज किया गया था। मामला दर्ज होने के बाद नाहिद की माँ तबस्सुम बेगम ने शामली में धरने की चेतावनी दी थी, जिसके बाद यह मामला सुर्खियों में छा गया।

देशद्रोही और गद्दार ओवैसी भाइयों को RSS में शामिल होकर देखनी चाहिए राष्ट्रभक्ति: राजा सिंह

तेलंगाना के गोशामहल सीट से विधायक राजा सिंह ने हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी को एक तरह की राजनीतिक चुनौती दी है। उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी के साथ-साथ उनके छोटे भाई अकबरुद्दीन ओवैसी को भी खरी-खरी सुनाई। हिन्दुओं के ख़िलाफ़ विवादित और भड़काऊ बयान देने के लिए चर्चा में रहने वाले अकबरुद्दीन फ़िलहाल हैदराबाद के चंद्रयनगुट्टा से विधायक हैं। राजा सिंह तेलंगाना में भाजपा के एकलौते विधायक हैं और हिंदूवादी छवि होने के कारण वह अक्सर अपने बयानों के लिए चर्चा में रहते हैं। राजा सिंह ने एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी को ‘गद्दार’ और अकबरुद्दीन को ‘देशद्रोही’ करार दिया।

राजा सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यक्रम के दौरान ये बातें कही। संघ के ‘पथ संचालन’ कार्यक्रम के दौरान विधायक राजा सिंह गणवेश में हाथ में लाठी लेकर पहुँचे। उन्होंने कहा कि युवाओं में धार्मिक भावना पैदा करने और समाज को दिशा देने के लिए संघ पूरे देश में कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। उन्होंने कहा कि आरएसएस हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई में भेदभाव किए बिना देश को एक रखने का काम करती है। राजा सिंह ने कहा:

“एक तरफ देश की एकता की बात करनी वाली आरएसएस है। दूसरी तरफ ओवैसी जैसे देश के गद्दार हैं, जो संघ को प्रतिबंधित करने की बात करते हैं और इसके ख़िलाफ़ ग़लत टिप्पणी करते हैं। मैं असदुद्दीन ओवैसी और उनके छोटे भाई ‘दशद्रोही’ अकबरुद्दीन ओवैसी को कहना चाहूँगा कि तुम लोगों को भी आरएसएस की शाखा में सम्मिलित होने की ज़रूरत है। तुम शाखा में सम्मिलित होकर ही समझ पाओगे कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ किस तरह देश के लिए काम करता है।”

विधायक राजा सिंह ने ओवैसी भाइयों से अपील करते हुए कहा कि वे दोनों तुरंत आरएसएस की शाखा ज्वाइन करें। उन्होंने कहा कि अगर दोनों ओवैसी संघ में सम्मिलित होंगे, तभी उनके मन के भीतर देश के प्रति अच्छी भावना जागेगी। उन्होंने ‘देश के विरुद्ध बात करने’, ‘वन्दे मातरम् नहीं गाने वाले’ और ‘भारत माता की जय नहीं बोलने वाले’ ओवैसी भाइयों पर जम कर निशाना साधा।

गोशामहल विधायक ने कहा कि एआईएमआईएम के ओवैसी भाइयों को ‘भारत माता की जय’ और ‘वन्दे मातरम्’ का महत्त्व भी तभी पता चलेगा, जब वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में जाएँगे। उन्होंने कहा कि संघ ऐसी संस्था है जो प्रणाम भी करती है और देशविरोधी ताक़तों को लाठी लेकर देश से बाहर खदेड़ना भी जानती है। राजा सिंह ने कहा, “मैं देशद्रोहियों को बता दूँ कि आज का भारत ‘भारत माता की जय’ बोलने वाला भारत होना चाहिए।“

हाल ही में भाजपा विधायक राजा सिंह ने एक सेना के गठन की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि देशद्रोहियों को सबक सिखाने और उन्हें नरक पहुँचाने के लिए एक सेना का गठन किया जाएगा। उन्होंने जानकारी दी थी कि वे इस सेना के गठन के लिए तैयारियाँ कर रहे हैं। उन्होंने बताया था कि 6 महीने पहले इसके लिए एक कैम्प का आयोजन किया गया था और ‘हिंदुत्ववादी बहादुरों’ को उस कैम्प में हिस्सा लेने के लिए बुलाया गया था।