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40 टन RDX, 2000 टैंक शेल, 40000 तोप के गोले… भारत के खिलाफ ‘जिहाद’ की तैयारी कर रहा है बांग्लादेश, पाकिस्तानी विशेषज्ञ का खुलासा: पहले भी इस बॉर्डर का इस्तेमाल कर चुके हैं आतंकी

शेख हसीना को सत्ता से हटाने के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख बने मोहम्मद यूनुस ने कहा है कि भारत के साथ उसके रिश्ते मजबूत और बेहद नजदीकी हैं। यूनुस ने यह बात भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री से ढाका में मुलाकात के बाद कही। हालाँकि, वहाँ पर अल्पसंख्यक हिंदुओं का नरसंहार जारी है। दूसरी तरफ बांग्लादेश की सरकार भारत के दुश्मन पाकिस्तान से नजदीकी बढ़ा रहा है और हथियार खरीद रहा है।

एक तरफ बांग्लादेश अपने पड़ोसी भारत के साथ नजदीकी रिश्ते की बात कर रहा है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के सहयोग से भारत में आतंक फैलाने की योजना बना रखी है। बांग्लादेश में सरकार बदलने के बाद हिंदुओं पर लगातार हो रहे हमले इसके उदाहरण हैं। अमेरिका में रहने वाले पाकिस्तानी मूल के व्यवसायी एवं पाकिस्तान मामलों के विशेषज्ञ साजिद तरार ने भारत को सतर्क रहने की सलाह दी है।

साजिद तरार ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बॉर्डर के पास ‘अल-जिहाद… अल-जिहाद‘ के नारे लग रहे हैं। यह भारत के बेहद गंभीर चिंता की बात है। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार डॉक्टर मोहम्मद यूनुस ने न सिर्फ पाकिस्तान को 25,000 टन चीनी का ऑर्डर दिया है, बल्कि बड़े पैमाने पर हथियारों के लिए भी ऑर्डर दिया है।

उन्होंने कहा कि भारत को पूरी तरह तैयार रहना होगा और आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ कड़े ऐक्शन लेंगे होंगे, क्योंकि भारत की सीमा के दोनों तरफ जिहाद के नारे लग रहे हैं। तरार ने कहा, “बांग्लादेश ने पाकिस्तान से 40 टन आरडीएक्स, 28 हजार उच्च तीव्रता वाले प्रोजेक्टाइल, 2 हजार टैंक शेल और 40 हजार राउंड आर्टिलरी की आपूर्ति माँगी है।”

आशंका जताते हुए तरार ने कहा कि मोहम्मद यूनुस ने पाकिस्तानियोें के लिए बांग्लादेश के लोगों के लिए वीजा के नियमों में भी छूट दी है। इससे पहले किसी भी पाकिस्तानी को वीजा हासिल करने के लिए NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लगाना पड़ता था। अब इस नियम को खत्म कर दिया गया है। इससे इस्लामी आतंकी आसानी से बांग्लादेश में घुस सकेंगे और फिर बॉर्डर पाकर भारत में घुस सकते हैं।

साजिद तरार ने कहा कि भारत में कुछ लोग पिछले अनुभवों को याद करके बेहद परेशान हैं। इन लोगों का मानना ​​है कि बांग्लादेश नेशनल पार्टी (बीएनपी) के पिछले कार्यकाल के दौरान लश्कर-ए-तैयबा, मसूद अजहर और सज्जाद अफगानी जैसे आतंकवादी बांग्लादेशी सीमा के जरिए ही भारत में घुसे थे और मुंबई हमलों को अंजाम दिया था।

साजिद तरार ने कहा कि बीएनपी 1991 से 1996 तक और फिर 2001 से 2005 तक बांग्लादेश की सत्ता में थी। उस समय मसूद अजहर और सज्जाद अफगानी, दोनों ही बांग्लादेश की सीमा से आए थे। उन्होंने कहा कि डेविड हेडली और तहव्वुर राणा, जो अमेरिकी और कनाडाई थे, उनके भी बांग्लादेश से गंभीर संबंध थे। डेविड हेडली और तहव्वुर राणा ने मुंबई हमलों के लिए रेकी की थी।

साजिद तरार ने कहा, “कुछ लोग कहते हैं कि लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी बांग्लादेश में खुलेआम घूम रहे थे। इस समय भारत के अंदर भी कुछ लोग परेशान हैं और वे कहते हैं कि वे अब बांग्लादेश की तरफ से कश्मीर का समर्थन करना शुरू कर देंगे।” उन्होंने कहा कि इन सब चीजों के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ है।

जहाँ बसे हैं 600+ ईसाई-हिंदू परिवार, वो जमीन वक्फ की ही: मुस्लिम लीग ने सहयोगी कॉन्ग्रेस के स्टैंड का किया विरोध, केरल के मुनम्बम में समंदर किनारे की 400 एकड़ जमीन पर बोर्ड कर रहा दावा

केरल में कॉन्ग्रेस की गठबंधन वाली पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने मुनम्बम जमीन का मालिक वक्फ बोर्ड को बताया है। मुस्लिम लीग ने कहा है कि सारे कागज इस बात की पुष्टि करते हैं। वहीं कॉन्ग्रेस लगातार इस जमीन पर वक्फ के कब्जे का विरोध कर रही है। मुस्लिम लीग के जड़ता के रवैये के चलते अब कॉन्ग्रेस पर विश्वसनीयता का संकट पैदा हो गया है।

मुस्लिम लीग के नेता KM शाजी ने कहा, “मुनम्बम एक गंभीर मुद्दा है। नेता प्रतिपक्ष (कॉन्ग्रेस नेता सतीशन) ने कहा कि यह वक्फ की जमीन नहीं है। मुस्लिम लीग इस राय से इत्तेफाक नहीं रखती। हम यह नहीं कह सकते कि मुनम्बम वक्फ की संपत्ति नहीं है। फारूक कॉलेज ने कहा है कि यह वक्फ की जमीन नहीं है। उन्हें यह कहने का कोई अधिकार नहीं है।”

मुस्लिम लीग के ही नेता MK मुनीर ने कहा कि उनकी पार्टी ने मुनम्बम के वक्फ जमीन ना होने का दावा कभी नहीं किया है। वहीं मलप्पुरम से मुस्लिम लीग के सांसद ET मुहम्मद बशीर ने भी इस मुद्दे पर वक्फ बोर्ड का ही समर्थन किया है। उन्होंने मुस्लिम लीग का स्टैंड दिल्ली में आकर स्पष्ट किया है।

ET मुहम्मद बशीर ने कहा, “कुछ लोग कह रहे हैं कि यह वक्फ की जमीन नहीं है। मैं पहली बार इस पर जवाब दे रहा हूँ, यह वक्फ की ही जमीन है। इसके वक्फ की जमीन ना होने के तर्क गलत हैं। इसको सिद्ध करने के लिए कागजी सबूत मौजूद हैं।”

मुस्लिम लीग का मुनम्बम जमीन मुद्दे पर यह रवैया अब कॉन्ग्रेस के लिए मुश्किल बन रहा है। केरल में कॉन्ग्रेस के बड़े नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वीडी सतीशन ने हाल ही में मुनम्बम में वक्फ के कब्जे के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों से मुलाक़ात की थी। सतीशन ने तब स्पष्ट किया था कि मुनम्बम में जमीन पर वक्फ का मालिकाना हक़ नहीं हो सकता।

2 दिसम्बर, 2024 को मुनम्बम में प्रदर्शनकारियों से मिलने के बाद सतीशन ने कहा, “उन्होंने कहा, “राज्य सरकार का वक्फ बोर्ड ही सिर्फ दावा कर रहा है कि जमीन वक्फ की है। जिस जमीन पर लोग रह रहे हैं, इस पर कई शर्तें लागू होती हैं। इस जमीन को बेचे जाने के बाद वक्फ सम्पत्ति नहीं बताया जा सकता। ऐसे में, मुनाम्बम की जमीन वक्फ के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती है।”

सतीशन ने कहा था कि इस जमीन पर यहाँ के रहने वालों का पूरा हक़ है। उनके इस स्टैंड का ही बाद में मुस्लिम लीग ने विरोध कर दिया। मुस्लिम लीग ने साफ़ कर दिया कि वह इस जमीन पर वक्फ का ही मालिकाना हक़ मानते हैं और कॉन्ग्रेस के रवैये से ताल्लुक नहीं रखते। बीते कुछ माह से मुनम्बम में 600 परिवारों की जमीन पर वक्फ के दावे को लेकर विवाद चल रहा है।

साल 1902 तक जाती है विवाद की जड़

1341 ईस्वी में केरल में भयानक बाढ़ आई थी। इस दौरान वाइपिन आईलैंड के ऊतरी हिस्से पर मुनम्बम बना। साल 1503 में पुर्तगालियों ने यहाँ हमला किया और 1663 में डचों ने इस पर कब्जा कर लिया। यह डचों के अधिकार में लंबे समय तक रहा। इसके बाद 1789 ईस्वी में डचों ने मुनम्बम को त्रावणकोर के महाराजा को बेच दिया। इसके बाद विवाद की शुरुआत होती है।

साल 1902 में त्रावणकोर के महाराजा ने गुजरात से आए एक किसान अब्दुल सत्तार मूसा हाजी सैत को यहाँ की 404 एकड़ जमीन और 60 एकड़ जल क्षेत्र पट्टे पर दिया था। उस समय, यह जमीन मछुआरों के लिए अलग रखी गई थी, जो वहाँ कई वर्षों से रह रहे थे। 1948 में सेठ के उत्तराधिकारी एवं दामाद सिद्दीक सैत ने यह जमीन अपने नाम पर पंजीकृत करवा ली।

इस जमीन का एक बड़ा हिस्सा समुद्री कटाव के कारण खो गया और साल 1934 की भारी बारिश ने पांडरा समुद्र किनारे की जमीन को पूरी तरह नष्ट कर दिया था। हालाँकि, सिद्दीक सैत द्वारा पंजीकृत जमीन में मछुआरों के रहने वाले इलाके भी शामिल हो गए। साल 1950 में सिद्दीक सैत ने यह जमीन फारूक कॉलेज को उपहार में दे दी, जो मुस्लिमों को शिक्षित करने के लिए 1948 में बनाया गया था।

इसके साथ ही सिद्दीकी सैत ने शर्त रखी थी। शर्त यह थी कि कॉलेज केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए ही इसका उपयोग करेगा। अगर कभी कॉलेज बंद हो जाता है तो जमीन वापस सिद्दीकी सैत के वंशजों को लौटा दी जाएगी। हालाँकि, दस्तावेजों में गलती से या जानबूझकर ‘वक्फ’ शब्द लिख दिया गया, जिससे अब यह विवाद खड़ा हो गया है। कहा जाता है कि 1 नवंबर 1950 को कोच्चि के एडापल्ली में उप-पंजीयक कार्यालय में एक वक्फ पंजीकृत किया गया था। इसमें सैत ने फारूक कॉलेज के अध्यक्ष के पक्ष में पंजीकृत कराया था।

विवाद की शुरुआत और आयोग का गठन

फारूख कॉलेज के प्रबंधन को करीब एक दशक बाद जमीन का मालिकाना हक मिल गया। साल 1960 के दशक के आखिर में जमीन पर कब्जा करने वालों के बीच कानूनी लड़ाई शुरू हो गई। कॉलेज प्रबंधन यहाँ रहने वाले लोगों को बेदखल करना चाहता था। कैथोलिक ईसाई और दलित हिंदू समुदाय के ये लोग पीढ़ियों से वहाँ रह रहे थे, लेकिन उनके पास स्वामित्व साबित करने के लिए कानूनी दस्तावेज नहीं थे।

आखिरकार, अदालत के बाहर समझौते में कॉलेज प्रबंधन ने बाजार दर पर जमीन को अपने कब्जेदारों को बेचने का फैसला किया। दस्तावेजों से पता चलता है कि बिक्री के कामों में कॉलेज प्रबंधन ने यह उल्लेख नहीं किया कि विचाराधीन भूमि वक्फ संपत्ति थी, जिसे शिक्षा के उद्देश्य से कॉलेज प्रबंधन समिति के अध्यक्ष को दिया गया था। इसके बजाय उन्होंने कहा कि यह संपत्ति 1950 में गिफ्ट डीड में मिली थी।

निसार आयोग और नया विवाद: केरल राज्य वक्फ बोर्ड के खिलाफ कई शिकायतों मिलने के बाद वीएस अच्युतानंदन के नेतृत्व वाली सीपीआई (एम) सरकार ने 2008 में एक आयोग गठित किया। यह आयोग सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश एमए निसार के नेतृत्व में नियुक्त किया गया। आयोग का काम बोर्ड द्वारा परिसंपत्तियों के नुकसान के लिए जिम्मेदारी तय करना था।

इसके अलावा, अयोग को इन परिसंपत्तियों की वसूली के लिए कार्रवाई की सिफारिश करना भी शामिल था। आयोग ने साल 2009 में अपनी रिपोर्ट दी। इस रिपोर्ट में आयोग ने मुनम्बम में जमीन को वक्फ संपत्ति माना और कहा कि कॉलेज प्रबंधन ने बोर्ड की सहमति के बिना इसकी बिक्री को मंजूरी दे दी थी। इसने इसकी वसूली के लिए कार्रवाई की सिफारिश की थी।

वक्फ बोर्ड ने घोषित कर दी वक्फ संपत्ति: इसके बाद साल 2019 में वक्फ बोर्ड ने खुद ही मुनम्बम भूमि को वक्फ अधिनियम 1995 की धारा 40 और 41 के अनुसार वक्फ संपत्ति घोषित कर दी। बोर्ड ने राजस्व विभाग को निर्देश दिया कि वह भूमि के वर्तमान कब्जेदारों (जो कई वर्षों से कर का भुगतान कर रहे थे) से भूमि कर स्वीकार ना करे।

राजस्व विभाग को दिए गए इस निर्देश को राज्य सरकार ने साल 2022 में खारिज कर दिया। इसके बाद बोर्ड ने राज्य सरकार के फैसले को केरल हाई कोर्ट में उसी साल चुनौती दी। न्यायालय ने फिलहाल राज्य सरकार के फैसलों पर रोक लगा दी है। वर्तमान में, इस विवाद को लेकर भूमि के कब्जेदारों के साथ-साथ वक्फ संरक्षण समिति की ओर से एक दर्जन से अधिक अपीलें न्यायालय में लंबित हैं।

हालात को लेकर असमंजस में लोग

मुनम्बम में 610 परिवारों रहते हैं, जिनमें 510 कैथोलिक ईसाई और 100 हिंदू परिवार हैं। इन लोगों कहना है कि इन लोगों ने फारूक कॉलेज के मैनेजमेंट से यह जमीन खरीदी थी। इसको लेकर वे पिछले 60 साल से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। वहीं, साल 2019 में वक्फ ने इसे अपनी संपत्ति घोषित कर दी।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, मुनम्बम में रहने वाले समर समिति (एक्शन काउंसिल) के संयोजक जोसेफ बेनी ने बताया कि यहाँ पर अधिकतर मछुआरा समुदाय के लोग रहते हैं। वे पीढ़ियों से यहाँ रह रहे हैं और सालों से टैक्स भर रहे हैं। बेनी का कहना है कि साल 2022 में उन्हें बताया गया था कि वे टैक्स नहीं भर पाएँगे और ना ही जमीन बेच या गिरवी रख सकते हैं।

लगभग 68 साल की ओमाना यायी का कहना है कि वह पिछले 50 साल से मुनम्बम में रह रही हैं। उनकी शादी यहीं से हुई थी। उन्होंने कहा कि जब कॉलेज वालों से जमीन खरीदी गई थी, तब यहाँ पानी भरा हुआ था। उन्होंने कहा, “हम आधी रात को मछली पकड़ने जाते थे और लौटते समय सिर पर रेत लेकर आते थे। रेत भर-भरकर जमीन ऊँचा किया, तब यह जमीन रहने लायक हुई। इसमें वक्फ कहाँ से आ गया?”

‘वे सिर्फ आँख सेंकने जा रहे हैं’: नीतीश कुमार की ‘महिला संवाद यात्रा’ पर लालू यादव के बिगड़े बोल, ममता को INDI गठबंधन का नेता बनवाकर क्या करना चाहते हैं RJD सुप्रीमो?

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। लालू ने कहा कि नीतीश कुमार ‘महिला संवाद यात्रा’ के नाम पर नयन सुख लेने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार पहले अपनी आँख सेंके, फिर बिहार विधानसभा चुनावों में 225 सीट लेने की बात करेंगे। लालू ने INDI गठबंधन को लेकर कॉन्ग्रेस को भी झटका दिया है।

दरअसल, बिहार की महिलाओं से संवाद स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जल्द ही ‘महिला संवाद यात्रा’ निकलने जा रहे हैं। वे अलग जिलों में जाकर महिलाओं से बातचीत करेंगे और उनकी समस्याओं एवं सरकारी योजनाओं को लेकर उनके विचार सुनेंगे। इसको लेकर विपक्षी दल राजद के तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश कुमार यात्रा के नाम पर पैसे की बर्बादी कर रहे हैं।

महिला यात्रा को लेकर जब संवाददाताओं ने लालू यादव से सवाल किए तो उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार नयन सेंकने जा रहे हैं।” नीतीश कुमार द्वारा बिहार में NDA को 225 सीटें मिलने के सवाल पर लालू यादव ने कहा, “अरे, पहले वो आँख सेंके ना अपना। जा रहे हैं आँख सेंकने।” लालू यादव के बयान पर जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि लालू की बुद्धि आज भी चरवाहा विद्यालय वाली ही है।

INDI गठबंधन की कमान ममता को दी जाए: लालू

लालू यादव ने बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस दावे का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने INDI गठबंधन की कमान सँभालने की बात कही थी। लालू ने कहा कि INDI गठबंधन की कमान ममता बनर्जी की दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के विरोध का कोई मतलब नहीं है। ममता को ही नेता बनाया जाना चाहिए।

इससे पहले लालू यादव के बेटे एवं राजद के नेता तेजस्वी यादव ने कहा था कि ममता बनर्जी समेत इंडिया ब्लॉक के किसी भी वरिष्ठ नेता द्वारा गठबंधन का नेतृत्व करने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा था कि इस निर्णय पर आम सहमति से पहुँचा जाना चाहिए। बता दें कि राजद ने दावा किया था कि INDI गठबंधन के असली आर्किटेक्ट लालू हैं।

दरअसल, महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों में INDI गठबंधन की करारी हार के बाद तृणमूल कॉन्ग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने गठबंधन को संभालने की इच्छा दोहराई थी। उन्होंने कहा था कि वह INDI गठबंधन का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। हालाँकि, ममता बनर्जी के बयान का कॉन्ग्रेस ने विरोध किया था। वहीं, जबकि समाजवादी पार्टी और उद्धव ठाकरे गुट ने समर्थन किया था।

एक इंटरव्यू में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कहा था कि उन्होंने ने ही INDI गठबंधन को बनाया है। अगर इस गठबंधन का इसका नेतृत्व करने वाले इसे ठीक से नहीं चला सकते तो उन्हें (ममता को) मौका दें। ममता ने कहा था कि वह बंगाल से इस गठबंधन का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। बता दें कि गठबंधन का नेतृत्व फिलहाल कॉन्ग्रेस कर रही है।

सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क के मोहल्ले में संभल पुलिस की रेड, महबर और ताजवर के घर से मिले तमंचे: मुल्ला के घर से स्मैक बरामद, 36 बाइकों का भी चालान

संभल में 24 नवंबर 2024 को मुस्लिमों की भीड़ द्वारा पुलिस पर किए गए हमले के बाद दंगाइयों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई जारी है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम ने सोमवार (9 दिसंबर) को सांसद जियाउर्रहमान के मोहल्ले में दबिश दी। दबिश के दौरान अवैध हथियारों के साथ नशीले पदार्थों की भी खेप बरामद हुई है। इस दौरान 36 बाइकों का चालान किया गया और 4 को सीज कर दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संभल हिंसा में कार्रवाई के तहत पुलिस ने नखासा थाना क्षेत्र के तिमरदास सराय इलाके में सोमवार को करीब 3 बजे छापेमारी की। इस दौरान 13 घरों की सघन तलाशी ली गई। इनमें से मुल्ला आसिफ के घर से स्मैक की 93 पुड़िया बरामद हुईं। वहीं, ताजवर और महबर के घरों से 315 बोर के तमंचे बरामद किए गए। पुलिस ने महबर को हिरासत में लिया, जो 1999 में हत्या के एक मामले में जेल की सजा काट चुका है।

पुलिस का दावा है कि 315 बोर की गोलियाँ हिंसा के दौरान मारे गए उपद्रवियों के शवों से भी बरामद हुई थीं। फ़िलहाल महबर, मुल्ला आसिफ और ताजवर के घरों में मिले लोगों को पुलिस थाने ले कर गई। पूरे मामले की न्यायिक जाँच जारी है, और प्रशासन दंगाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कह रहा है।

सपा सांसद जियाउर्रहमान के घर के आगे भी पुलिस ने दो बार पैदल मार्च किया। जिले भर में वाहनों की सघन चेकिंग की जा रही है। सोमवार को ही कुल 36 बाइकों का चालान किया गया। इसमें से 4 को सीज कर दिया गया है।

संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि तलाशी अभियान जनपद में बाहरी लोगों की मौजूदगी की सूचना पर चलाया जा रहा है। बाहर से कौन लोग किस वजह से आए हैं इसकी तस्दीक करवाई जा रही है। बकौल SP तलाशी अभियान आगे भी जारी रहेगा। बरामद सामान सील कर जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

बताते चलें कि 24 नवंबर को संभल की जामा मस्जिद का सर्वे करने के लिए न्यायालय के आदेश पर एक टीम पहुँची थी। इस टीम को मुस्लिम भीड़ घेरने लगी। पुलिस ने भीड़ को समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन उपद्रवियों ने पत्थरबाजी कर दी। हिंसा में डिप्टी कलेक्टर, DSP और लगभग 2 दर्जन अन्य पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने बल प्रयोग कर के भीड़ को तितर-बितर किया था। पूरे मामले की न्यायिक जाँच जारी है।

शहजाद अजमेरी और जहीर सोलंकी ने कराई अविवाहित हिंदू युवक की नसबंदी, लालच देकर पूरा किया ‘टारगेट’: विहिप ने लगाया हिंदुओं को निशाना बनाने का आरोप

गुजरात के मेहसाणा जिले में नसबंदी कांड ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में आरोप है कि स्वास्थ्यकर्मियों शहजाद अजमेरी और जहीर सोलंकी ने अपने टारगेट पूरा करने के लिए दो युवकों की बिना सहमति के नसबंदी कर दी। पीड़ितों में से एक युवक की शादी एक महीने बाद शादी होने वाली थी। इस घटना के बाद लड़की वालों ने रिश्ता तोड़ दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वास्थ्यकर्मी शहजाद अजमेरी ने नवी शेधावी गाँव निवासी 31 साल के अविवाहित गोविंद धनतरी को काम का लालच देकर झाँसा दिया। शहजाद ने गोविंद से कहा कि उसे खेतों में मजदूरी के लिए ले जाया जाएगा। लेकिन इसके बजाय उसे एडालज अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुँचने के बाद गोविंद को शराब पिलाई गई और नसबंदी के लिए सहमति पत्र पर उसके अंगूठे का निशान ले लिया गया। कागजों में उसे विवाहित दिखाया गया, ताकि नियमों का उल्लंघन छुपाया जा सके।

इस घटना में मुख्य आरोपित शहजाद अजमेरी और जहीर सोलंकी हैं। शहजाद का एक ऑपरेशन का टारगेट बाकी था, जिसे पूरा करने के लिए उसने जहीर के साथ मिलकर गोविंद की नसबंदी की। दोनों स्वास्थ्यकर्मी अब निलंबित हैं। शहजाद ने दावा किया कि वह निर्दोष है और जहीर ने ही युवक को लाकर ऑपरेशन कराया।

इस घटना ने विभाग में टारगेट आधारित नसबंदी अभियान की पोल खोल दी है। स्वास्थ्य अधिकारी जी.बी. गढ़वी ने स्वीकार किया कि सबरकांठा में 375 ऑपरेशनों को टारगेट बेस पर अंजाम दिया गया। हालाँकि, स्वास्थ्य मंत्री रिषिकेश पटेल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नसबंदी पूरी तरह स्वैच्छिक है।

बहरलहाल, घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए धनाली स्वास्थ्य केंद्र के मल्टीपर्पज स्वास्थ्यकर्मी शहजाद अजमेरी को निलंबित कर दिया। उन्हें मेहसाणा से खेरालु स्वास्थ्य केंद्र स्थानांतरित किया गया। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने 8 अन्य कर्मचारियों को नोटिस जारी किया और मामले की विस्तृत जाँच के आदेश दिए हैं। इस कांड के बाद विभाग ने एडालज अस्पताल में 22 नवंबप 2024 को हुए सभी 28 नसबंदी ऑपरेशनों की जाँच शुरू कर दी है।

विहिप ने लगाया हिंदुओं को टारगेट करने का आरोप

विश्व हिंदू परिषद ने इस मामले को हिंदू युवकों को टारगेट करने की साजिश बताया है। यह कांड न केवल स्वास्थ्य विभाग की खामियों को उजागर करता है, बल्कि लोगों के विश्वास को भी गहरा आघात पहुँचाता है। पीड़ितों को न्याय और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।

माथे पर तिलक और हाथ में त्रिशूल, हिंदू-गोरक्षक बनने का नाटक कर उमर गैंग करता था गोतस्करी-गोहत्या: UP पुलिस ने पैर में गोली मार कर पकड़ा

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में पुलिस ने 7 गोतस्कर को मुठभेड़ के बाद पकड़ा है। यह सभी हिन्दू गोरक्षक बन कर गायों की तस्करी करते थे। गायों को काटने के लिए ले जाने के दौरान यह भगवा गमछा गले में डाल लेते थे और माथे पर तिलक लगा कर चलते थे। इनके खिलाफ पहले से भी कई मामले दर्ज हैं।

पुलिस ने बताया कि 8 दिसम्बर, 2024 को उसे रात में सतरिख थाना क्षेत्र में गोतस्करों के होने की सूचना मिली थी। पुलिस को पता चला था कि यहाँ कुछ लोग एक जंगल में घूम रहे हैं और उनके पास दो तीन गाड़ियाँ भी हैं। इनके पास एक गाय भी बंधी हुई थी।

इसके बाद जब पुलिस टीम मौके पर पहुँची तो इन गोतस्करों ने फायरिंग कर दी। पुलिस ने इसका जवाब दिया। इस फायरिंग में सरवर और गुफरान पैर में गोली लगने के कारण घायल हो गए। पुलिस ने उनके साथ अंकुल, उमर, नवीजान, इरफ़ान और अजीज को पकड़ा है। यह सभी गोतस्कर बाराबंकी और सीतापुर के रहने वाले हैं।

पुलिस ने इनके पास से 2 तमंचे और गाय काटने वाला चापड़ बरामद किया है। इनके पास से एक इको गाड़ी और एक मोटरसाइकिल भी बरामद हुई है। एक गाय भी इनके पास से बरामद हुई है। आशंका थी कि यह आसपास से गाय पकड़ कर लाते हैं और फिर उनको काट कर हिन्दू बन कर तस्करी करते हैं।

पुलिस ने खुलासा किया है कि इनका सरगना उमर गोतस्करी करने के लिए गोरक्षक बन कर गायों को ले जाता था। वह गायों की तस्करी वाली गाड़ी में आगे गमछा डाल कर बैठता था। साथ ही माथे पर तिलक लगाता था और हाथ में त्रिशूल तक रखता था। कोई अगर उसे पूछता था तो खुद को गोरक्षक बताता था।

यह ट्रिक उसने पहले गोतस्करी के मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद अपनाई थी। पुलिस ने बताया है कि इन गोतस्करों पर पहले से 14 मामले दर्ज हैं। इनमें से अधिकांश मामले गौहत्या सम्बन्धी ही हैं। पुलिस ने इन सभी गोतस्करों के खिलाफ नए मुकदमे भी दर्ज किए हैं और जाँच कर रही है कि कि इन्होने कितनी गायों की तस्करी की है। पुलिस इनके खिलाफ पुराने मुकदमे भी खोल रही है और उन सभी थानों से जानकारी मँगवा रही है।

कंपनी ने वर्क स्ट्रेस को लेकर कराया सर्वे, कर्मचारियों को दे दी नई टेंशन: 100 लोगों को नौकरी से निकाला, नेटिजन्स बोले- गरीब की आँख फोड़ दो ताकि वो गरीबी न देख सके

सोशल मीडिया में नोएडा की एक कंपनी यस मैडम (Yes Madam) चर्चा में है। डोरस्टेप ब्यूटी सर्विस देने वाली इस कंपनी को लेकर दावा किया जा रहा है कि इसने करीब 100 कर्मचारियों को एक साथ नौकरी से निकाल दिया है। एक वायरल ई-मेल की माने तो ऐसा कंपनी के भीतर वर्क स्ट्रेस जानने को लेकर किए गए सर्वे के बाद किया गया है।

लिंक्डइन पर अनुष्का दत्ता ने यह मेल शेयर किया है। अनुष्का ने बॉयो में खुद को यस मैडम में ‘यूएक्स कॉपीराइटर’ बताया है। अपने पोस्ट में लिखा है, “यस मैडम में क्या हो रहा है? पहले कंपनी एक रैंडम सर्वे करते हैं और फिर रातोंरात हमें नौकरी से निकाल दिया गया, क्योंकि हम तनाव महसूस कर रहे? ऐसा मेरे ही साथ नहीं हुआ है। 100 अन्य लोगों को भी नौकरी से निकाला गया है।”

अनुष्का ने इस पोस्ट के साथ एक ई मेल का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है। कथित तौर पर नौकरी से निकाले गए लोगों को कंपनी की एचआर की तरफ से यह मेल भेजा गया है। इसमें लिखा है;

हाल में हमने काम पर तनाव के बारे में आपकी भावनाओं को समझने के लिए एक सर्वे किया। आपमें से कई ने अपनी चिंताएँ साझा की। इसे हम काफी महत्व देते हैं और सम्मान करते हैं। हेल्दी और सपोर्टिव वर्क एनवायरनमेंट को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध कंपनी के तौर पर हमने इस फीडबैक पर काफी विचार किया है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी काम पर तनावग्रस्त न रहे, हमने ऐसे कर्मचारियों को कंपनी से अलग करने का कठिन निर्णय लिया है। यह निर्णय तत्काल प्रभावी है। प्रभावित कर्मचारियों को अधिक जानकारी अलग से दी जाएगी। आपके योगदानों के लिए धन्यवाद।

इस पोस्ट पर लोगों की अलग-अलग तरह की प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कुछ इसे पीआर स्टंट बता रहे हैं तो कुछ कंपनी के इस रवैए की आलोचना कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा है, “गरीब की आँख फोड़ दो ताकि वो गरीबी न देख सके।” यस मैडम से की गई कथित छँटनी के दावों की हम पुष्टि नहीं कर पाए हैं। इस संबंध में कोई भी जानकारी मिलते ही हम खबर को अपडेट करेंगे।

वैसे अजीब तरीके से छँटनी को लेकर कोई कंपनी पहली बार चर्चा में नहीं है। 2021 में Better.com ने एक साथ 900 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था। कंपनी के सीईओ विशाल गर्ग ने जूम पर कॉन्फ्रेंस मीटिंग के दौरान ऐलान किया था कि जो कर्मचारी इस मीटिंग में जुड़ा है उसे तत्काल प्रभाव से टर्मिनेट किया जाता है। इसी तरह अमेरिकी कंपनी फ्रंटडेस्क ने दो मिनट के गूगल मीट कॉल में 200 से अधिक कर्मचारियों को एक झटके में बाहर का रास्ता दिखा दिया था।

नासिक पुलिस ने मिजान शेख और आयान सहित 5 के खिलाफ दर्ज की FIR, इंस्टाग्राम पर शौर्य दिवस स्टोरी लगाने पर हिंदू दलित की बेहरमी से की थी पिटाई

महाराष्ट्र में नासिक पुलिस ने शनिवार (7 दिसंबर 2024) को मिज़ान शेख, अयान शेख, आयेश शाह, शारीक शाह और फहीम शेख पर मामला दर्ज किया है। दरअसल, शौर्य दिवस (6 दिसंबर का वो दिन जब राम जन्मभूमि पर खड़ी बाबरी ढाँचे को ध्वस्त कर दिया गया था) के उपलक्ष्य में उस हिंदू व्यक्ति ने इंस्टाग्राम स्टोरी डाली थी। इसके 5 मुस्लिमों ने उस पर हमला कर दिया था।

पाँचों आरोपितों ने दलित युवक के घर पर पथराव भी किया था। इसके साथ ही उसे डंडों से पीटा था। यह घटना नासिक के निफाड़ के पिंपलगाँव इलाके की है। ऑपइंडिया के पास एफआईआर की कॉपी के अनुसार, पीड़ित की पहचान नयन (सुरक्षा कारणों से नाम बदला गया है) के रूप में हुई है। उसने 6 दिसंबर को शौर्य दिवस के अवसर पर जश्न मनाते हुए अपने इंस्टाग्राम एक स्टोरी शेयर की थी।

इससे पीड़ित का कथित दोस्त मिजान शेख नाराज हो गया। मिजान ने शुरू में पीड़ित को परेशान किया और उस पर कथित ‘जातिवाद’ करने का आरोप लगाया। इसके बाद मिजान ने उसे गाली देते हुए कहा कि उसे ‘जातिवाद’ करने में क्या खुशी मिलती है। इस पर पीड़ित ने कहा कि जातिवाद और शौर्य दिवस मनाने वाली पोस्ट में कोई संबंध नहीं है। इसके बाद आरोपित ने गाली देते हुए पीड़ित पर हमला कर दिया।

वहाँ से दोनों चले गए। कुछ घंटों के बाद नयन अपनी बहन को लेने के लिए स्कूल जा रहा था। इसी दौरान मिजान ने उसे रोक लिया। उसने अयान शेख, आयेश शाह, शरीक शाह और फहीम शेख सहित अपने 15-20 साथियों को भी बुला लिया था। इसके बाद आरोपितों ने नयन पर पथराव किया और शौर्य दिवस मनाने के लिए उसे डंडों से बुरी तरह पीटा।

पीड़ित नयन ने मदद के लिए किसी तरह अपने चचेरे भाई को बुलाया। इसके बाद उसके चचेरे भाई ने उसे अस्पताल पहुँचाया। इस बीच मौका पाकर आरोपित मौके से भाग गए। इस घटना की को लेकर पीड़ित के पिता ने पुलिस में शिकायत दी और शिकायत के आधार पर पुलिस ने सभी 5 आरोपितों के खिलाफ नामजद मुकदाम दर्ज कर लिया।

पुलिस ने आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता 2024 की धारा 109, 118(1), 115(2), 352, 351(3), 126(2), 189(2), 191(2), 191(3) और 190 तथा एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(वीए) के तहत मामला दर्ज किया है। मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

बता दें कि भारत में 6 दिसंबर 1992 को बाबरी ढाँचे को गिराया गया था। इसे शौर्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। बाबरी ढाँचा क्रूर शक्ति का प्रतीक था, जिसने देशी संस्कृति को रौंदते हुए भगवान राम का अपमान किया था। यह अत्याचार और बर्बरता का एक काला प्रतीक था। वहीं, इस्लामवादी इसे ‘काला दिवस’ कहते हैं।

राम मंदिर में दर्शन की गाँधी परिवार को फुर्सत तक नहीं, पर बीवी के MP बनते ही रॉबर्ट वाड्रा को ‘हाजी अली ने बुलाया’: इस सेक्युलरिज्म की बत्ती बना लो कॉन्ग्रेसियों, हम ‘भक्त’ ही ठीक हैं

प्रियंका गाँधी वाड्रा के पहली बार सांसद बनने के कुछ दिनों बाद ही उनके शौहर रॉबर्ट वाड्रा को ‘हाजी अली ने बुलाया’। यह हम नहीं कह रहे खुद सोनिया गाँधी के दामाद और राहुल गाँधी के जीजा ने मुंबई के दरगाह पर मत्था टेकने के बाद मुनादी की है।

इस दौरान वाड्रा ने मस्जिदों के सर्वे पर भी चिंता जताई। सेकुलरिज्म का पाठ भी पढ़ाया। यह भारतीय राजनीति की विडंबना ही कही जा सकती है कि सेकुलरिज्म का पाठ कॉन्ग्रेस के उस शीर्ष परिवार का एक सदस्य आम भारतीयों को पढ़ा रहा, जिसका कोई भी सदस्य अयोध्या राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद दर्शन करने तक नहीं गया है।

अयोध्या का राम मंदिर केवल एक मंदिर नहीं है। यह भारत के उस गौरव की पुर्नस्थापना का प्रतीक है जिसे इस्लामी आक्रांताओं ने कुचल दिया था। लेकिन यह उस परिवार को शायद ही समझ आए जिसकी जड़ें जवाहर लाल नेहरू से जुड़ी हो। ये नेहरू ही थे जो स्वतंत्र भारत में भी अयोध्या में भगवान की मूर्ति को बाहर निकलवाना चाहते थे।

शायद वाड्रा का सेक्युलरिज्म, धर्म से तो निरपेक्ष है, लेकिन मजहब से निरपेक्ष नहीं है। ऐसे में उन्हें दरगाह के लिए बुलावे आ रहे हैं लेकिन राम मंदिर जाने की उन्हें कोई इच्छा नहीं होती। ना ही उनकी पत्नी के परिजन यहाँ जा पाते हैं जबकि उन्हें राम मंदिर की कमिटी ने न्योता भी भेजा था।

सोचने वाली बात यह है कि अब तक रॉबर्ट वाड्रा भी राम मंदिर क्यों नहीं जा पाए हैं। माना जा सकता है कि गाँधी परिवार मुस्लिम वोटों को लेकर डरता होगा, जिस कारण से उसने न्योता ठुकरा दिया। लेकिन रॉबर्ट वाड्रा के साथ क्या समस्या यह अभी तक नहीं पता। रॉबर्ट तो सार्वजनिक जीवन वाले व्यक्ति में भी नहीं हैं।

वह चले जाते तो शायद गाँधी परिवार का कुछ फायदा हो जाता और रॉबर्ट वाड्रा की ‘धार्मिक यात्रा’ में एक स्थान और जुड़ जाता। शायद उन पर गाँधी परिवार का दबाव रहा हो। वह बात अलग है कि राम मंदिर का फैसला टलवाने के प्रयास में गाँधी परिवार के नियंत्रण वाली कॉन्ग्रेस के नेता कपिल सिब्बल सबसे आगे थे।

उन्होंने लगातार सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में बहस की थी। ऐसे में उनका सेक्युलर होने की सलाह देना कुछ ठीक नहीं मालूम पड़ता। गाँधी परिवार से संबंध रखने वाले रॉबर्ट वाड्रा ने यह भी समझाया है कि हमें धर्म की राजनीति नहीं करनी चाहिए और दोनों को अलग रखना चाहिए। इस सलाह की पिछले लगभग 50 वर्षों से जरूरत कॉन्ग्रेस को सबसे अधिक है।

शाहबानो मामला हो या फिर प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट और फिर 2013 का वक्फ कानून और अब वक्फ में संशोधन का विरोध, यह सभी ऐसे मामले हैं जब कॉन्ग्रेस मजहबी राजनीति करती है। हालाँकि, रॉबर्ट वाड्रा को इस मुद्दे पर सही भी कहा जा सकता है, क्योंकि कॉन्ग्रेस धर्म नहीं मजहब की राजनीति जरूर करती है।

आस्था निजी विषय है और ऐसा नहीं है कि गाँधी परिवार के नेता कभी मंदिर नहीं जाते हों। लेकिन राहुल गाँधी का दत्तात्रेय ब्राह्मण होना और उनका मंदिरों में जाना तभी नजर आता है, जब चुनाव निकट हों। विशेष कर उन राज्यों के चुनावो में जहाँ हिन्दू आबादी निर्णायक भूमिका में हो। गाँधी परिवार के लोग ऐसे समय मंदिर जाते हैं, त्रिपुंड लगाते हैं और गोत्र तक की चर्चा होती है।

उनकी पार्टी के सदस्य जनेऊ वाली फोटो लहराते हैं। हालाँकि, बाकी समय सेक्युलरिज्म की दुहाई देते हुए कहीं नहीं जाया जाता। आगे यह बात देखने वाली होगी कि रॉबर्ट वाड्रा की धार्मिक यात्रा में गाँधी परिवार शामिल होता है या नहीं और वह स्वयं राम मंदिर तक पहुँच पाते हैं या नहीं।

तो कुल मिलाकर बात ये है कि सेक्युलरिज्म की सलाह देने वाले वाड्रा सबसे पहले खुद इस नियम चलें, उसके बाद गाँधी परिवार को सिखाएँ। उसने यह कहें कि धर्मनिरपेक्ष या सेक्युलर बनना है, तो सही मायनों में बने। ऐसा ना हो कि धर्मनिरपेक्ष तो रहें लेकिन मजहब की बात आते ही सबसे आगे बचाव में खड़े हो जाएँ। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक हम लोग भक्त ही ठीक हैं।

बाराबंकी में मोहम्मद आरिफ और दमोह में शाहबाज़… UP-MP की 2 नाबालिग हिन्दू लड़कियाँ बनीं लव जिहाद की शिकार: 1 दिल्ली से मिली, 1 का अब भी कुछ पता नहीं

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से लव जिहाद के 2 अलग-अलग मामले सामने आए हैं। पहले मामले में मध्य प्रदेश के दमोह में नाबालिग हिन्दू लड़की को शाहबाज दिल्ली भगा ले गया। शाहबाज़ के साथ 2 अन्य लोग इस करतूत में शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं दूसरा मामला UP के बाराबंकी जिले का है। यहाँ 18 साल की हिन्दू लड़की के पिता ने मोहम्मद आरिफ पर अपनी बेटी को भगा ले जाने का आरोप लगाया है। दोनों आरोपित फरार हैं जिनकी तलाश में राज्य पुलिस दबिश दे रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्य प्रदेश के दमोह जिले की घटना थानाक्षेत्र देहात की है। यहाँ रहने वाली एक नाबालिग हिन्दू लड़की को शाहबाज़ नाम के एक युवक ने पहले प्यार के जाल में फँसाया और बाद में उसे निकाह का झाँसा दिया। इसके बाद दोनों के बीच बात और मुलाकात होती रही। लगभग 1 माह पहले शाहबाज़ पीड़िता को बहला-फुसला कर अपने साथ दिल्ली ले गया। तब लड़की के परिजनों ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई।

कुछ दिनों के बाद लड़की के परिजनों को पता चला कि शाहबाज़ भी अपने घर से गायब है। तब पीड़िता के परिजनों ने हिन्दू संगठनों से सम्पर्क किया। हिन्दू संगठनों ने थाने पहुँच कर कार्रवाई की माँग उठाई। पुलिस ने पीड़िता को ट्रेस किया तो लोकेशन दिल्ली निकली।

रविवार (8 दिसंबर 2024) को आखिरकार नाबालिग को दिल्ली से बरामद कर लिया गया। पुलिस की दबिश में शाहबाज़ हाथ नहीं लगा। पीड़िता ने पूछताछ में उसके साथ 2 अन्य लोग भी शामिल बताए। अब तीनों आरोपितों को पकड़ने के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है।

सहेली की मदद से हिन्दू लड़की को ले भागा आरिफ

दूसरा मामला उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले का है। यहाँ के थानाक्षेत्र असंद्रा में रहने वाले एक व्यक्ति ने पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में पीड़ित ने बताया कि उनकी 18 वर्षीया बेटी पास की ही बाजार में कम्प्यूटर सीखने जाया करती थी। यहाँ पीड़िता के पीछे इसी थानाक्षेत्र के गाँव रामपुर का रहने वाला मोहम्मद आरिफ पड़ गया। आरिफ भी पीड़िता के ही कोचिंग सेंटर में पढ़ता है। वह पीड़िता से दोस्ती करना चाहता था। आरोप है कि इसी कोचिंग संस्थान में एक अन्य छात्रा ने पीड़ित की बेटी का ब्रेनवॉश किया।

कुछ दिनों तक बातचीत के बाद शुक्रवार (6 दिसंबर 2024) की शाम को मोहम्मद आरिफ पीड़िता को अपने साथ कहीं बहला-फुसला कर भगा ले गया। काफी खोजबीन के बाद भी पीड़िता अपने परिजनों को नहीं मिली। लड़की के पिता ने पुलिस में तहरीर दे कर आरिफ के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। उस पर पीड़िता को इस्लाम कबूल करवाने की साजिश रचने का भी आरोप है। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। आरिफ फरार है जिसकी तलाश में दबिश दी जा रही है।