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महाराष्ट्र में VVPAT की पर्चियों की EVM के वोटों में नहीं मिला कोई अंतर, चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव में गड़बड़ी के विपक्षी दावों को किया खारिज

भारत के निर्वाचन आयोग (ECI) ने कहा है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के दौरान वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) पर्चियों की अनिवार्य गणना के दौरान कोई खामी नहीं पाई गई है। ECI ने विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि सत्यापन प्रक्रिया सभी 288 निर्वाचन क्षेत्रों में आयोजित की गई। दरअसल, महाविकास अघाड़ी (MVA) ने EVM में छेड़छाड़ का आरोप लगाया था।

आयोग ने कहा कि दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में रैंडम रूप से चयनित पाँच मतदान केंद्रों की वीवीपैट पर्चियों की गणना करना आवश्यक है। आयोग ने दिशा-निर्देशों के तहत काम किया और उसे किसी तरह का मिसमैच नहीं मिला। आयोग ने परिणाम के दिन 23 नवंबर को मतगणना पर्यवेक्षक और उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में पर्चियों की गिनती की।

चुनाव आयोग
चुनाव आयोग (साभार: TOI)

पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आयोग ने पूरी प्रक्रिया के दौरान चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों को साथ रखा था। इस दौरान सुरक्षा एवं अन्य आवश्यक किए गए थे। यह पूरा प्रोसेस सीसीटीवी कैमरों के सामने किया गया, ताकि किसी को कोई आशंका ना रहे और नहीं बाद में किसी तरह का इस पर विवाद हो।

महाराष्ट्र के सभी 36 जिला चुनाव अधिकारियों से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, सभी निर्वाचन क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) में दर्ज वोटों की उम्मीदवार के अनुसार संख्या वीवीपीएटी पर्चियों से पूरी तरह मेल खाती है। इसके लिए कुल 1,440 वीवीपैट पर्चियों की गिनती की गई।

दरअसल, महाराष्ट्र में विपक्षी दलों ने EVM में छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए विधानसभा के विशेष सत्र के पहले दिन आयोजित शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार किया था। इसके कुछ दिनों के बाद चुनाव आयोग का यह बयान आया है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में हारने वाले विपक्षी दलों के 20 से अधिक उम्मीदवारों ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे।

दुर्गाडी किला महाराष्ट्र सरकार की, मस्जिद पर वक्फ बोर्ड के दावे को कोर्ट ने नकारा: बोली एकनाथ शिंदे की शिवसेना- दुर्गा माता की जय, यहीं से छत्रपति शिवाजी ने शुरू किया था नौसैनिक अभियान

महाराष्ट्र के कल्याण जिले में स्थित दुर्गाडी किला पर महाराष्ट्र सरकार का अधिकार है। कल्याण की जिला एवं सत्र न्यायालय ने किले के भीतर स्थित मस्जिद और ईदगाह पर वक्फ बोर्ड के दावे को खारिज कर दिया है। इस किले में दुर्गा माता का एक प्राचीन मंदिर भी स्थित है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कल्याण कोर्ट ने वक्फ बोर्ड के दावे को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि किले के भीतर की मस्जिद वक्फ बोर्ड की संपत्ति नहीं है। बता दें कि इस जगह पर 1968 तक मंदिर और मस्जिद दोनों का इस्तेमाल दोनों समुदाय करते थे, लेकिन इसके बाद विवाद हो गया। साल 1967 में यहाँ पूजा करने पर भी रोक लगा दी गई थी। हालाँकि शिवसैनिक रोक के बावजूद यहाँ पूजा किया करते थे। फिलहाल, ये संपत्ति कल्याण म्यूनिसिपल काउंसिल के कब्जे में है। यहाँ नवरात्रि के मौके पर शिवसेना प्रशासन से अनुमति लेकर बड़े पैमाने पर पूजा और मेले का आयोजन करती है।

कोर्ट के इस फैसले का पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी शिवसेना ने स्वागत किया है। शिवसेना का कहना है कि यह फैसला देवी दुर्गा के आशीर्वाद और हिंदू समुदाय की एकजुटता का परिणाम है। शिवसेना नेता दिनेश देशमुख और गोपाल लांडगे समेत कई कार्यकर्ताओं और सरकारी वकीलों के प्रयासों को भी इस जीत का श्रेय दिया गया है। शिवसेना के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किया गया, “दुर्गा माते की जय, शिवसेना जिंदाबाद। कल्याण का दुर्गाडी किला अब आधिकारिक रूप से देवी दुर्गा का मंदिर है। न्याय की जीत हुई है। जय हिंदुत्व!”

दुर्गाडी किला ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यह वह स्थान है जहाँ छत्रपति शिवाजी महाराज ने हिंदवी स्वराज्य के पहले नौसैनिक अभियान की शुरुआत की थी। यह किला हमेशा से हिंदू समुदाय के लिए आस्था का केंद्र रहा है। पिछले 48 वर्षों से दुर्गाडी किले को देवी दुर्गा का मंदिर घोषित करने के लिए शिवसेना और हिंदू संगठनों ने आंदोलन चलाया।

इस संघर्ष की शुरुआत शिवसेना के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे ने की थी। धर्मवीर आनंद दिघे और वर्तमान उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस आंदोलन को मजबूती दी। शिवसैनिकों ने कई बार दुर्गाडी किले के पास घंटानाद आंदोलन किया और सामूहिक आरती गाई। खासतौर पर नवरात्रि के दौरान इस किले को केंद्र में रखकर भव्य धार्मिक आयोजन किए गए।

दुर्गाडी किले पर आज का फैसला न केवल एक ऐतिहासिक निर्णय है, बल्कि यह हिंदुत्व और मराठा इतिहास के गौरव को भी पुनर्जीवित करता है। शिवसेना और हिंदू संगठनों के प्रयासों ने यह सिद्ध कर दिया कि सत्य को दबाया नहीं जा सकता। अब यह किला न केवल आस्था का केंद्र रहेगा, बल्कि मराठा इतिहास का एक जीवंत स्मारक भी बनेगा।

कभी AAP का था लाडला, अब ओवैसी का बना दुलारा: दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों का मास्टरमाइंड है AIMIM का उम्मीदवार ताहिर हुसैन, हथियार खरीदने पर फूँके गए थे ₹1.30 करोड़

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए असदुद्दीन औवैसी की पार्टी AIMIM ने दिल्ली दंगों के आरोपित ताहिर हुसैन को मुस्तफाबाद से उम्मीदवार बनाया है। ताहिर हुसैन साल 2020 में हुए दिल्ली दंगों के बाद से ही जेल में बंद है। वह पहले आम आदमी पार्टी (AAP) में था। बाद में AAP ने उसे पार्टी ने निकाल दिया था। औवैसी ने इसकी घोषणा की है।

असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया साइट X पर इसके बारे में जानकारी देते हुए कहा, “एमसीडी पार्षद ताहिर हुसैन AIMIM में शामिल हो गए हैं और आगामी दिल्ली विधानसभा चुनावों में मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र से हमारे उम्मीदवार होंगे। उनके परिवार के सदस्य और समर्थक आज मुझसे मिले और पार्टी में शामिल हुए।”

ओवैसी द्वारा अपनी पोस्ट में शेयर किए गए तस्वीर में असदुद्दीन ओवैसी ताहिर हुसैन के परिजनों और समर्थकों के साथ दिख रहे हैं। तस्वीर में शोएब जमई और AIMIM के पूर्व सांसद इम्तियाज जलील भी साथ हैं। इस पर भाजपा ने ओवैसी को घेरा है। भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि ओवैसी ने साफ कर दिया कि ये उन लोगों को सम्मानित करेंगे, जो हिंदुओं को मारते हैं और उनके घर जलाते हैं।

कौन है ताहिर हुसैन?

साल 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के दौरान आईबी स्टाफ अंकित शर्मा की निर्मम हत्या के मामले में पार्षद ताहिर हुसैन समेत 11 लोगों के खिलाफ 23 मार्च 2023 को कड़कड़डूबा कोर्ट में आरोप तय हुए थे। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचल ने कहा था कि गवाहों के बयानों से स्पष्ट पता चलता है कि सभी आरोपित घटनास्थल पर मौजूद थे।

न्यायाधीश ने अंकित शर्मा हत्या केस में आरोप तय करते हुए माना था, “ताहिर भीड़ पर निगरानी रखने और उन्हें प्रेरित करने के लिए लगातार काम कर रहा था। ये सभी चीजें हिंदुओं को निशाना बनाने के लिए की गई थीं।” अदालत ने कहा था, “भीड़ के इन कृत्यों से यह स्पष्ट होता है कि उनका उद्देश्य हिंदुओं को उनके शरीर और संपत्ति को अधिक से अधिक नुकसान पहुँचाना था।”

कोर्ट ने आगे कहा था, “यह भी स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि यह भीड़ जानबूझकर हिंदुओं को भी मारना चाहती थी। यह नहीं कहा जा सकता है कि इस भीड़ का हिस्सा होने के बावजूद वो ऐसे उद्देश्य से बेखबर थे। जाहिर तौर पर, यह एक गैरकानूनी भीड़ थी, जो उस उद्देश्य के लिए काम कर रही थी।” इससे पहले ताहिर हुसैन पर कड़कड़डूमा कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले और दंगों की फंडिंग में आरोप तय किए थे।

ताहिर हुसैन और अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 148, 153 ए, 302, 365, 120बी, 149, 188 और 153ए के तहत आरोप तय किए गए थे। ताहिर हुसैन के खिलाफ आईपीसी की धारा 505, 109 और 114 के तहत भी केस आरोप तय किए गए थे। इस मामले के अन्य आरोपितों के हसीन, नाजिम, कासिम, समीर खान, अनस फिरोज, जावेद, गुलफाम, शोएब आलम और मुंतजिम हैं।

ताहिर हुसैन ने ‘काफिरों’ को मारने के लिए धर्म के नाम पर भीड़ को उकसाया था। इस बात का जिक्र दिल्ली पुलिस ने गवाह के बयानों का हवाला देते हुए दायर किए गए आरोप पत्र में किया है। इसके बाद उसने अपने साथियों के साथ मिलकर हिन्दुओं के उन सब दुकानों व मकानों का आग लगा दी। भीड़ में शामिल सभी लोग हिंदुओं को गंदी-गंदी गालियाँ दे रहे थे और हिंदुओं को खतम करने की बात बोल रहे थे।

गवाह ने आगे बताया था कि सभी लोग हिंदुओं के घर जलाने की बात व हमको काफिर कह रहे थे। उनकी बातें हमें बहुत बुरी लग रही थी। दंगाई मुस्लिम भीड़ हमारी दुकान के बाहर तोड़-फोड़ कर रहे थे व हमारी तरफ पत्थर मार रहे थे। भीड़ में शामिल सभी लोग हिंदुओं के खिलाफ नारे लगा रहे थे और कह रहे थे कि ‘इन काफिरों को देश से निकाल देंगे, मारेंगे और हिंदुओं की लड़कियों को उठा कर ले जाएँगे’। 

आरोप पत्र चश्मदीदों के बयान के आधार पर तैयार किया गया है। साथ ही इलाके के सीसीटीवी फुटेज और आरोपितों के फोन कॉल रिकार्ड को भी आधार बनाया गया है। पुलिस के अनुसार चश्मदीदों का कहना है कि ताहिर हुसैन घटना वाले दोनों दिनों में 40-50 गुंडों की भीड़ का नेतृत्व कर रहा था। पहला चार्जशीट चाँदबाग के एक पार्किंग लॉट में आगजनी और दंगे से संबंधित है।

इसमें कम से कम सौ वाहनों में आग लगा दी गई थी। दूसरा मामला करावल नगर इलाके में एक गोदाम में लूटपाट और आगजनी से संबंधित है। दोनों ही घटनाओं में ताहिर हुसैन को मास्टरमाइंड बताया गया था। आरोप पत्र चश्मदीदों के बयान के आधार पर तैयार किया गया है। साथ ही इलाके के सीसीटीवी फुटेज और आरोपितों के फोन कॉल रिकार्ड को भी आधार बनाया गया है। 

चाँदबाग और जफराबाद में हुए दंगों को लेकर ये दायर चार्जशीट में ताहिर हुसैन पर दंगों को फंड करने और इसका मास्टरमाइंड होने की बात कही गई थी। दंगों को भड़काने में 1.3 करोड़ रुपए से भी ज्यादा फूँके गए। ताहिर हुसैन के छत से मिले सबूतों के अलावा उसके खिलाफ कई अन्य सबूतों की बात भी कही गई थी। कई प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा था कि वह दंगे भड़का रहा था।

पुलिस को उसके पास से एक पिस्टल भी मिला था, जिसके साथ मिले कुल 200 गोलियों में से 125 गोलियाँ थीं। हालाँकि, 75 बुलेट्स गायब मिले थे। ताहिर इसका कोई जवाब नहीं दे पाया था कि 75 गोलियाँ कहाँ गईं। पुलिस ने उस वीडियो को भी सबूत के तौर पर लिया था, जिसमें ताहिर हुसैन के गुंडे पेट्रोल बम फेंकते दिख रहे थे। 

म्यांमार का मौलाना मुजम्मिल भागकर बांग्लादेश आया, बीबी-बच्चों को छोड़ दूसरा निकाह कर भारत में घुसा: ₹500 में आधार कार्ड बनवा पुणे में बस गया रोहिंग्या मुस्लिम

म्यांमार का एक रोहिंग्या मौलाना बांग्लादेश के रास्ते भारत आया। उसने ₹500 में फर्जी आधार कार्ड बनवाया। उसने इसी के सहारे सिम, पासपोर्ट, पैन कार्ड और यहाँ तक कि घर भी ले लिया। इस मौलाना ने पुणे में अपना धंधा भी जमा लिया था। महाराष्ट्र में सुरक्षा एजेंसियों ने उसे एक और रोहिंग्या की सूचना पर उसे उसके परिवार के साथ गिरफ्तार किया था। उसे जमानत भी मिल गई है। अब वह पुणे में खरीदे गए घर से गायब है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने जुलाई, 2024 में पुणे में मुहम्मद मुजम्मिल खान नाम के एक रोहिंग्या घुसपैठिए को पकड़ा था। उसके साथ उसकी बीवी और दो बच्चों को भी पकड़ा गया था। पुलिस ने जब उसकी जाँच की थी तो कई खुलासे हुए।

पुलिस को पता चला कि मुजम्मिल असल में म्यांमार का रहने वाला है और वहाँ उसने मौलाना का कोर्स किया था। इसके बाद वह 2012 में भाग कर बांग्लादेश चला गया। यहाँ वह अपनी बीवी के साथ पहुँचा था। उसके दो बेटियाँ भी थी।

बांग्लादेश में उसने रोहिंग्या शरणार्थी कैम्प में उसने अपनी बीवी और दोनों बेटियों को छोड़ दिया और एक और महिला से निकाह कर भारत में घुसपैठ की। यहाँ उसने कोलकाता में कुछ दिन गुजारे, लेकिन काम ना मिलने पर वह पुणे चला गया। पुणे में उसने एक फैक्ट्री में काम किया।

यहाँ काम करने के दौरान उसने ₹500 देकर एक फर्जी आधार कार्ड बनवा लिया। उसने साथ ही पैन कार्ड और सिम और साथ ही में पासपोर्ट भी बनवा लिए। उसने पुणे में कपड़े बेचने और सुपारी बेचने का भी धंधा किया। इसमें उसे स्थानीय मस्जिद में आने वालों से मदद मिली।

मुजम्मिल ने यहाँ जमीन भी खरीद ली। इसकी भी कोई लिखापढ़ी नहीं की गई। इसके बाद इस पर मुजम्मिल ने घर भी बना लिया। यहाँ वह मजे से रहता रहा और उसकी नई बीवी ने एक बच्चे को भी जन्म दिया। हालाँकि, उसका भांडा जुलाई, 2024 में फूटा।

जुलाई में उसके घर महाराष्ट्र की ATS पहुँच गई। दरअसल, ATS ने इससे पहले एक रोहिंग्या को पकड़ा था। उसने एजेसियों को बताया कि पुणे में ही उसके मुजम्मिल मामू रहते हैं। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उसे गिरफ्तार करे कागज भी पकड़े। उसके साथ परिजनों को गिरफ्तार किया गया था।

उसे कोर्ट से बाद में जमानत भी मिल गई। अब वह परिवार यहाँ से फरार है। उसके घर पर ताला पड़ा हुआ है। पुणे में इससे पहले दिसम्बर, 2023 में कई ऐसे बांग्लादेशी पकड़े गए थे जिन्होंने एक हिन्दू महिला की मौत के बाद भी उसके कागजों के आधार पर झुग्गी का रेंट अग्रीमेंट बनवा लिया था। उन्होंने इसके बाद पासपोर्ट बनवाने की कोशिश की थी।

‘…अभी तक सुसाइड नहीं किए हो’: सास-बीवी ने कोर्ट में कहा, महिला जज हँसती रही – बेंगलुरु के IT इंजीनियर ने की आत्महत्या, 3 साल से नहीं देखने दी थी बेटे का मुँह

कर्नाटक के बेंगलुरु में नौकरी करने वाले AI इंजीनियर ने 24 पन्नों की सुसाइड नोट लिखकर आत्महत्या कर ली है। मरने से पहले उस शख्स ने एक वीडियो भी जारी किया और अपनी पत्नी एवं ससुराल वालों पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। इतना ही नहीं उसने ने जौनपुर में पारिवारिक मामले को देखने वाली महिला जज पर पक्षपात का आरोप लगाया है। इसके साथ ही लिखा है कि उसके अस्थि को तब तक ना विसर्जित किया जाए, तब उसके ससुराल वालों को सजा नहीं मिल जाती।

पुलिस के अनुसार, अतुल सुभाष नाम का 34 वर्षीय शख्स बेंगलुरु के एक निजी फर्म में काम करता था। उसका शव शहर के मंजूनाथ लेआउट इलाके में स्थित उनके आवास पर लटका हुआ पाया गया है। आत्महत्या करने से पहले सुभाष ने 24 पन्नों के नोट लिखा, जिसमें से चार पन्ने हाथ से लिखे हुए हैं। वहीं, 20 पन्ने टाइप किए हुए। सुसाइड में लिखा है ‘मुझे न्याय मिलना चाहिए’।

मृतक सुभाष ने अपनी सुसाइड नोट में अपनी पत्नी और उसकी माँ, भाई और चाचा को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। उसने पत्नी के साथ अनबन के साथ कोर्ट में उसके साथ किए जा रहे कथित भेदभाव को लिखा है। सुभाष की सुसाइड नोट के अनुसार, उसकी पत्नी ने उस पर दहेज प्रताड़ना से लेकर अप्राकृतिक सेक्स करने तक का आरोप लगाया है।

बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले मृतक अतुल सुभाष से अलग रह रही पत्नी ने उससे 80 हजार रुपए मासिक और बच्चे को पालने के लिए 2 लाख रुपए महीने की माँग की थी। उसकी बीवी निकिता सिंघानिया B.Tech, MBA है और दिल्ली की एक बड़ी आईटी फर्म में AI इंजीनियर है। वह अपने पति को इस तरह प्रताड़ित करती थी कि 4 साल के अपने बेटे को मृतक से बात भी नहीं करने देती थी।

मृतक ने ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा अपने पिता और भाई को भी झूठे केस में फँसाने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि उसकी पत्नी ने उसे परेशान करने के लिए उत्तर प्रदेश के जौनपुर में केस किया था। इस केस के लिए वह बेंगलुरु से जौनपुर 120 बार जा चुका है। इसके कारण वह वित्तीय ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी परेशान हो गया है और न्याय नहीं मिलता देखकर यह स्ट्रीम कदम उठा रहा है।

सोशल मीडिया पर मृतक का 1:21 घंटा का एक वीडियो और सुसाइड नोट भी सामने आया है। इस वीडियो और नोट में उसने छोटी-से-छोटी बात को लिखा है कि किस तरह उसके ससुराल वाले उसे परेशान कर रहे थे। इसके साथ ही मृतक ने यह भी बताया कि जौनपुर की महिला जज उससे पक्षपात करती हैं और कोर्ट रूम में उस पर हँसती थी।

मरने से पहले क्या-क्या किया, डिटेल में लिखा

अतुल ने अपनी सुसाइड नोट बेहद शांत भाव से और सोच-समझकर लिखा है। पुलिस को उसकी अलमारी में एक टाइम टेबल पिन किया हुआ मिला। यह टाइम टेबल हिंदी और अंग्रेजी, दो भाषाओं में लिखी गई हैं। इस टाइमटेबल में सुभाष ने आत्महत्या वाले दिन किस समय पर क्या-क्या किया, सारा विवरण लिखा है। जैसे कि उसने सुबह उठकर प्रार्थना की, उसके बाद अपना सामान छाँटा, कोर्ट और अपनी कंपनी को इसके बारे में ईमेल भेजा।

हर तरफ से हताश होने के बाद मृतक ने ‘मरने से पहले क्या किया’ शीर्षक के अंतर्गत लिखा: “स्नान किया। खिड़कियाँ और गेट का ताला खोला। भगवान शिव का 100 बार नाम जपा। कार और बाइक की चाबियाँ फ्रिज पर रखी। सुसाइड नोट को टेबल पर रखा।” मृतक की पत्नी ने पिछले 2 सालों में उसके और परिवार के खिलाफ 8 मुकदमे कर रखे थे। इससे मृतक बेहद परेशान हो उठा था।

जज पर आरोप लगाया

अतुल सुभाष ने अपने वीडियो और सुसाइड नोट में दावा किया है कि जौनपुर में अदालत में सुनवाई के दौरान उसकी पत्नी ने जज के सामने ही उसे आत्महत्या के लिए उकसाया। इस दौरान महिला जज भी हँस पड़ी। मृतक ने अपनी सुसाइड नोट में महिला जज पर रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने लिखा है कि जौनपुर में सबको पता है कि रिश्वत देकर उस महिला से मनमुताबिक फैसला लिया जा सकता है।

मृतक अतुल सुभाष ने अपनी नोट में आरोप लगाया कि महिला जज ने केस को सेटल करने के लिए उससे भी 5 लाख रुपए की रिश्वत माँगी थी। वहीं, हर पेशी में जज का पेशकार उससे पैसे लेता था। इतना ही नहीं, वह पेशकार जज के सामने ही वह कोर्ट में आने वाले हर व्यक्ति से वह 50-100 रुपए वसूल करता था।

मृतक ने आरोप लगाया, “सभी सबूतों के साथ ईमानदारी से केस लड़ते रहो, लेकिन एक भ्रष्ट जज मुझे और मेरे परिवार को परेशान करके, चीजों में हेरफेर करके और हमारे खिलाफ मामले के हर तथ्य को तोड़-मरोड़ कर फैसला देकर पत्नी का पक्ष ले रही है।” उसने कहा कि अब वह अपने माता-पिता के खिलाफ शुरू किए गए मुकदमों के लिए भरण-पोषण राशि के रूप में फंडिंग नहीं कर सकता।

मृतक ने नोट में कहा, “मेरी पत्नी मेरे बच्चे को अलग-थलग रखेगी और मुझे, मेरे बुजुर्ग माता-पिता और मेरे भाई को परेशान करने के लिए और भी केस दर्ज करवाएगी। वह भी उसी पैसे का इस्तेमाल करके, जो मैं उसे भरण-पोषण के तौर पर देता हूँ। मेरे द्वारा दिए गए पैसे का इस्तेमाल मेरे बच्चे के भरण-पोषण के लिए करने के बजाय, उसे मेरे खिलाफ हथियार बनाया जा रहा है।”

अतुल ने अपनी सुसाइड नोट में लिखा है कि एक दिन कोर्ट में उसे देखकर उसकी पत्नी ने कहा, “अरे तुम अभी सुसाइड नहीं किए?” इस पर मृतक ने कहा, “मैं मर गया तो तुम लोगों की पार्टी कैसे चलेगी?” इस पर अतुल की पत्नी बोली, तब भी चलेगी। तुम्हारा बाप देगा पैसा। पति के मरने पर सब वाइफ का होता है। तेरे मरने के बाद तेरे माँ-बाप भी जल्दी मरेंगे फिर। उसमें भी बहु का हिस्सा होता है।”

अतुल ने अपनी नोट में आगे लिखा है कि उसकी पत्नी ने उसे और उसके पूरे परिवार को धमकी देते हुए आगे कहा, “पूरी जिंदगी तेरा पूरा खानदान कोर्ट के चक्कर काटेगा।” मृतक ने कहा कि उसके उकसाने के बाद वह सुसाइड करने का निर्णय लिया है और इससे उसके दुश्मनों और भ्रष्ट न्याय व्यवस्था को मिलने वाला पैसा बंद हो जाएगा। अतुल ने लिखा कि बेटे को पिता से रुपए वसूलने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जना चाहिए।

मेरी अस्थि को कोर्ट के बाहर गटर में डाल देना: मृतक की अंतिम इच्छा

मृतक अतुल सुभाष ने मौत के बाद अपनी कुछ इच्छाएँ भी अपनी सुसाइड नोट में डाली है। 12 प्वॉइन्ट में लिखे इस नोट में अतुल ने लिखा है कि जिस तरह से उन्हें प्रताड़ित किया गया और उनकी पत्नी के पक्ष में पक्षपात किया गया, उसको देखते हुए इस केस की सुनवाई लाइव होनी चाहिए, ताकि पूरा देश सच्चाई जान सके। उन्होंने अपनी सुसाइड नोट और वीडियो को सबूत मानने की अपील की है।

उन्होंने इस मामले की सुनवाई कर रही जौनपुर की महिला जज के इरादे पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आशंका जाहिर की है कि जज इस केस से जुड़े सबूतों एवं दस्तावेजों में हेरफेर कर सकती हैं। उन्होंने यूपी के कोर्ट की अपेक्षा बेंगलुरु की कोर्ट को अधिक न्यायप्रिय बताते हुए इससे जुड़े सभी केस को बेंगलुरु ट्रांसफर करने की माँग की है।

मृतक ने अपने बेटे की कस्टडी अपने बुजुर्ग माँ-बाप को देने की अपील की है। इसके साथ ही उनके शव के आसपास उनकी पत्नी या ससुराल के किसी भी व्यक्ति को आने से रोकने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जब उन्हें और उनके परिवार को प्रताड़ित करने वाले उनकी पत्नी एवं ससुराल के लोगों के साथ-साथ महिला जज को दंडित नहीं किया जाता, तब तक उनकी ‘अस्थि विसर्जन’ ना की जाए। अगर ये लोग दंडित नहीं होते हैं तो उनकी अस्थि को किसी कोर्ट के बाहर स्थित गटर में डाल दिया जाए।

अतुल ने यह भी कहा है कि उनकी मौत के बाद उनके ससुराल के लोगों के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि केस की सुनवाई करके दंडित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने इच्छा जाहिर की है कि उनकी पत्नी को उनके एवं उनके परिवार के खिलाफ किए गए केस को वापस लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। न्यायिक व्यवस्था से हताश मृतक ने कहा कि अगर उनके मरने के बाद भी उनके माता-पिता और भाई का उत्पीड़न जारी रहता है तो कोर्ट उन्हें इच्छा-मृत्यु की अनुमति दे।

शादी डॉट कॉम से मुलाकात

अतुल ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि उसकी पत्नी निकिता से उसकी मुलाकात शादी डॉट कॉम नाम की मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर हुई थी। इसके बाद साल 2019 में दोनों ने शादी कर ली। अतुल का आरोप है कि निकिता ने साल 2021 में बेंगलुरु स्थित उसके घर को छोड़ दिया। अपने साथ वह अपने गहने और पैसे भी लेकर चली गई।

रिश्तों में दरार की शुरुआत अतुल द्वारा अपनी सास को 15 लाख रुपए देने से शुरू हुई। उसकी सास निशा ने बिजनेस में लगाने के लिए उससे 15 लाख रुपए माँगे, लेकिन उसने लगभग एक करोड़ रुपए के मकान खरीद लिए। इस पर अतुल ने अपनी नाराजगी जाहिर की और अपने पैसे माँगे। इसके बाद उसकी सास ने 1.5 लाख रुपए दे दिए और बाकी पैसे माँगने पर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।

अपने पिता के लिए ऐसे 100 बेटे कुर्बान कर सकता हूँ, लेकिन अपने बेटे के लिए 1000 बार मैं कुर्बान हो सकता हूँ: अपने बेटे को प्रताड़ना का हथियार बनाए जाने से परेशान मृतक

इसके बाद उत्तर प्रदेश के जौनपुर की रहने वाली मृतक की पत्नी ने उस पर तमाम तरह के आरोप लगाते हुए पिछले 2 सालों में 8 केस दर्ज करा दिए। इनमें मारपीट, दहेज से लेकर अप्राकृतिक सेक्स करने तक के मामले शामिल हैं। इतना ही नहीं, निकिता ने आरोप लगाया कि अतुल और उसके परिवार द्वारा 10 लाख रुपए दहेज माँगने के कारण दिल के मरीज उसके पिता की मौत हो गई।

इन केसों में मृतक के परिजनों का भी नाम दिया गया था। इस तरह वे लगातार परेशान हो रहे थे। वहीं, अतुल ने अपनी सुसाइड नोट में लिखा है कि उसके पिता दिल के मरीज थे और पिछले 10 सालों से दिल्ली के AIIMS में उनका इलाज चल रहा था। शादी से पहले ही डॉक्टरों ने कहा था कि निकिता के पिता कुछ महीने जिंदा रहेंगे। इसके बाद दोनों मे मुलाकात के कुछ ही महीनों के बाद 2019 में शादी कर ली थी।

जस्टिस शेखर यादव ने ‘कठमुल्लों’ को बताया खतरनाक, सुप्रीम कोर्ट ने माँग ली रिपोर्ट: हलाला-चार निकाह को बताया था अस्वीकार्य, नेशनल कॉन्फ्रेंस के MP ने कहा- महाभियोग लाएँगे

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर यादव के विश्व हिन्दू परिषद (VHP) कायर्क्रम में दिए गए वक्तव्य पर सुप्रीम कोर्ट ने जानकारी माँगी है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके पूरे बयान का विवरण इलाहाबाद हाई कोर्ट से माँगा है। उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक शिकायत भी की गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद रूहुनाल्लाह मेहँदी ने शेखर यादव के खिलाफ महाभियोग चलाने की बात कही है। जस्टिस शेखर यादव ने एक कार्यक्रम में कह दिया था कि इस देश में हलाला और चार निकाह जैसी रूढ़ियाँ स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने सामाजिक सुधार पर और भी बातें कही थीं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में एक बयान जारी किया है। इस बयान में कहा गया, “सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव द्वारा दिए गए भाषण की समाचार पत्रों में छपी खबरों पर संज्ञान लिया है। हाई कोर्ट से इसका विवरण और जानकारियाँ मंगवाई गई हैं और यह मामला अभी विचाराधीन है।”

इससे पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद रूहुनाल्लाह मेहँदी ने ऐलान किया कि वह जस्टिस शेखर यादव के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव संसद में लाएँगे। रूहुनाल्लाह मेहँदी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “मैं संविधान के अनुच्छेद 124(4) के अनुसार माननीय इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर यादव को नोटिस में उल्लिखित आरोपों के आधार पर हटाने के लिए संसद में महाभियोग प्रस्ताव ला रहा हूँ। इस प्रस्ताव को लाने के लिए मुझे 100 सदस्यों के हस्ताक्षर चाहिए। 7 से अधिक सदस्यों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं।”

मेहँदी ने बताया कि उनके प्रस्ताव पर सपा सांसद जियाउररहमान बर्क और मोहम्मद मोहिबुल्लाह ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके अलावा सांसद सुदामा प्रसाद और राजकुमार रोत ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। मेहँदी ने कहा है कि उन्होंने सपा, कॉन्ग्रेस, DMK और TMC से इस प्रस्ताव का समर्थन करने की अपील की है।

इसके अलावा CJAR नाम के एक वामपंथी रुखों वाले संगठन ने चीफ जस्टिस संजीव खन्ना को शिकायत दी है। CJAR ने जस्टिस शेखर यादव के खिलाफ एक आंतरिक जाँच करने की माँग की है। CJAR ने कहा,”न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव के इस भाषण ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और तटस्थता के बारे में आम नागरिकों के मन में संदेह पैदा कर दिया है, इसे मिली कवरेज को देखते हुए, एक मजबूत रिएक्शन जरूरी है।”

किस बात पर छिड़ा है विवाद

8 दिसम्बर, 2024 को इलाहाबाद हाई कोर्ट में UCC पर आयोजित किए गए एक कार्यक्रम में जस्टिस शेखर यादव पहुँचे थे। यहाँ उन्होंने मुस्लिम समाज में चल रही रूढ़िवादिता और इस पर लोगों के ना बोलने पर प्रश्न खड़े किए थे। इसके साथ ही उन्होंने UCC जैसे मुद्दों पर अपने विचार रखे थे। उन्होंने ‘कठमुल्ला’ शब्द का उपयोग भी किया था। उन्होंने कहा था कि ‘कठमुल्ले’ देश के लिए खतरनाक हैं।

जस्टिस शेखर यादव ने यहाँ कहा था, “मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि यह हिंदुस्तान है, यह देश हिंदुस्तान में रहने वाले बहुसंख्यकों के अनुसार चलेगा। यही कानून है। आप यह नहीं कह सकते कि मैं हाईकोर्ट के जज होने के नाते ऐसा कह रहा हूँ। दरअसल, कानून ही बहुमत के हिसाब से काम करता है।”

जस्टिस शेखर यादव ने मुस्लिमों में फैली रूढ़िवादिता और दकियानूसी को लेकर प्रश्न खड़े किए थे। उन्होंने कहा, “हमारे हिंदू धर्म में बाल विवाह, सती प्रथा और बालिकाओं की हत्या जैसी कई सामाजिक कुरीतियाँ थीं, राम मोहन राय जैसे सुधारकों ने इन कुरीतियों को खत्म करने के लिए संघर्ष किया। लेकिन जब मुस्लिम समुदाय में हलाला, तीन तलाक और गोद लेने से जुड़े मुद्दों जैसी सामाजिक कुरीतियों की बात आती है, तब उनके पास इनके खिलाफ खड़े होने की हिम्मत नहीं थी।”

VHP के कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि मुस्लिमों की तरफ से भी यह प्रथाएँ खत्म करने को लेकर कोई प्रयास नहीं किए गए। उन्होंने कहा था, “आप उस महिला का अपमान नहीं कर सकते जिसे हमारे शास्त्रों और वेदों में देवी का दर्जा दिया गया है। आप 4 बीवियाँ रखने, हलाला करने या तीन तलाक़ का अधिकार नहीं रख सकते। आप कहते हैं, हमें ‘तीन तलाक’ कहने का अधिकार है, और महिलाओं को भरण-पोषण ना देने का अधिकार है।”

जस्टिस शेखर यादव ने यहाँ कहा था, ” इस तरह से कोई अधिकार नहीं चल पाएगा। UCC कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसकी वकालत VHP, RSS या हिंदू धर्म करता हो। देश का सुप्रीम कोर्ट भी ऐसी ही बात करता है…मैं शपथ ले रहा हूँ कि यह देश UCC कानून ज़रूर लाएगा, और बहुत जल्द लाएगा।” जस्टिस शेखर यादव ने इस बात को लेकर भी प्रश्न खड़े किए गए कि मुस्लिम तीन तलाक और हलाला जैसे मुद्दों को अपना पर्सनल लॉ बताते हैं और कानून से बचते हैं।

उन्होंने कहा था, “अगर आप कहते हैं कि हमारा पर्सनल लॉ इसकी इजाजत देता है, तो ये अस्वीकार्य है। एक महिला को भरण-पोषण मिलेगा, दो विवाह की इजाजत नहीं होगी, और एक आदमी की सिर्फ़ एक पत्नी होगी, चार पत्नियाँ नहीं… अगर एक बहन को भरण-पोषण मिलता है और दूसरी को नहीं, तो इससे भेदभाव पैदा होता है, जो संविधान के खिलाफ है।”

जस्टिस शेखर यादव ने इस दौरान कहा कि सिर्फ गंगा में डुबकी लगाने और माथे पर चंदन लगाने वाला ही हिन्दू नहीं है बल्कि भारतवर्ष को अपनी माँ मानने वाला भी हिन्दू है। उनके इस बयान के बाद लगातार लिबरल जमात में हंगामा मचा हुआ है।

नन बनने की ट्रेनिंग ले रही किशोरी ने सेंट जोसेफ कॉन्वेंट हॉस्टल में बच्चे को दिया जन्म, खिड़की से बाहर फेंक मार डाला: आंध्र प्रदेश पुलिस ने ट्रेनी पादरी को हिरासत में लिया

आंध्र प्रदेश के एलुरु में स्थित सेंट जोसेफ कॉन्वेंट हॉस्टल में चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक किशोरी ने बच्चे को जन्म देने के तुरंत बाद उसे खिड़की से फेंक दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। यह हॉस्टल डायोसिस ऑफ एलुरु द्वारा संचालित है और घटना ने चर्च-प्रशासित संस्थानों की निगरानी और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में एक ट्रेनी पादरी को हिरासत में लिया है, जिसके कथित तौर पर ट्रेनी नन से संबंध थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नन बनने की ट्रेनिंग ले रही किशोरी आंध्र प्रदेश के नंदयाल जिले की रहने वाली है और सेंट जोसेफ कॉन्वेंट में दूसरे वर्ष की इंटरमीडिएट छात्रा है। रविवार (8 दिसंबर 2024) को उसने हॉस्टल में बच्चे को जन्म दिया और तुरंत खिड़की से बाहर फेंक दिया। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस और महिला एवं बाल कल्याण विभाग के अधिकारी मौके पर पहुँचे। 2-टाउन सर्कल इंस्पेक्टर रामना के नेतृत्व में पुलिस ने जाँच शुरू की।

डीएसपी श्रवण कुमार ने बताया कि किशोरी का स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उसे सरवजना अस्पताल में भर्ती कराया गया। मृत बच्चे के शव को भी जाँच के लिए अस्पताल भेजा गया। इस मामले में एक ट्रेनी ईसाई पादरी को मुख्य संदिग्ध के रूप में हिरासत में लिया गया है।

शुरुआती जाँच में सामने आया कि किशोरी और पादरी के बीच संबंध थे। हॉस्टल की अन्य छात्राओं और प्रशासन से भी पूछताछ की जा रही है। इस मामले में महिला एवँ बाल कल्याण विभाग ने भी अपनी रिपोर्ट तैयार करनी शुरू कर दी है। यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और संस्थागत जिम्मेदारी पर भी बहस छेड़ता है।

घटना ने कॉन्वेंट हॉस्टल की कार्यप्रणाली और प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया है। माना जा रहा है कि किशोरी की गर्भावस्था के बावजूद उसके सहपाठियों और हॉस्टल प्रशासन ने न तो उसकी स्वास्थ्य स्थिति को गंभीरता से लिया और न ही अधिकारियों को सूचित किया।

सेंट जोसेफ कॉन्वेंट एलुरु के डायोसिस (एलुरु के बिशप के नियंत्रण) में आता है और इसका उद्देश्य शिक्षा और मजहबी ट्रेनिंग देना है। इस संस्था का मकसद नैतिक और धार्मिक मूल्यों को बढ़ावा देना है, लेकिन इस घटना ने प्रशासनिक विफलता और महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

₹79 में खरीदा ‘फेयर एंड हैंडसम’, 3 हफ्ते तक रगड़ा पर नहीं हुआ गोरा: ‘इमामी’ पर ठोका मुकदमा, उपभोक्ता फोरम ने लगाया ₹15 लाख जुर्माना

उपभोक्ता फोरम ने ‘फेयर एंड हैंडसम’ क्रीम बनाने वाली कंपनी इमामी पर ₹15 लाख का जुर्माना ठोंका है। यह जुर्माना गलत प्रचार पर ठोंका गया है। इस कंपनी के खिलाफ एक ग्राहक ने मामला दायर किया था। ग्राहक इस बात से नाराज था कि कंपनी के दावे के अनुसार वह क्रीम लगाने से तीन सप्ताह के भीतर गोरा क्यों नहीं हुआ।

फोरम ने आदेश दिया है कि इमामी कंपनी शिकायत करने वाले ग्राहक को ₹50 हजार का हर्जाना दे और साथ ही में ₹14.5 लाख की धनराशि दिल्ली के उपभोक्ता कल्याण विभाग में जमा करवाए। फोरम ने इमामी को यह भी आदेश दिया है कि वह शिकायत दर्ज कराने वाले व्यक्ति को ₹10 हजार अलग से दे। यह धनराशि मुकदमे में हुए खर्चे के लिए दी गई है। फोरम ने पाया कि इमामी क्रीम को लेकर जो दावा कर रही थी, वह भ्रामक था और विज्ञापन में किए गए दावे भी सही नहीं थे।

क्या था मामला?

दिल्ली रहने वाले निखिल जैन ने ब्यूटी प्रोडक्ट बनाने वाली कम्पनी इमामी के खिलाफ यह मामला फरवरी, 2013 में दायर किया था। निखिल जैन ने आरोप लगाया कि उन्होंने अक्टूबर, 2012 में ₹79 की फेयर एंड हैंडसैम मेंस क्रीम खरीदी थी। इसको लेकर इमामी का दावा था कि यदि यह दिन में दो बार लगातार तीन सप्ताह तक लगाई जाए तो इससे वह गोरे हो जाएँगे।

निखिल जैन ने बताया कि इमामी ने इस क्रीम पर लिखा, “तेजी से चमकते गोरेपन के लिए चेहरे और गर्दन पर दिन में दो बार साफ करने के बाद लगाएँ। अच्छे परिणामों के लिए नियमित उपयोग की सलाह दी जाती है।” निखिल जैन ने आरोप लगाया कि जैसा कम्पनी ने क्रीम के पैक पर जैसा बताया गया था, वैसा ही उन्होंने किया।

निखिल जैन ने आरोप लगाया कि इसके बाद भी उनको ऐसा कोई फायदा नहीं हुआ, जैसा कंपनी का दावा था। निखिल जैन ने बताया कि दावे के अनुसार, उन्हें 3 सप्ताह में कोई भी संतोषजनक परिणाम हासिल नहीं हुआ। निखिल जैन ने आरोप लगाया कि यह झूठे दावे उपभोक्ता संरक्षण कानूनों का उल्लंघन हैं।

उन्होंने कहा कि ना सिर्फ क्रीम पर बल्कि ऐसे ही दावे क्रीम को लेकर वेबसाईट और टीवी पर भी किए। निखिल जैन ने आरोप लगाया कि इस मामले में परिणाम ना पाने के बाद उन्होंने इमामी कम्पनी को तमाम इमेल लिखे लेकिन कोई भी जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद बाद उन्होंने कम्पनी पर केस कर दिया।

निखिल जैन ने इमामी पर झूठा प्रचार करने का आरोप लगाते हुए ₹20 लाख के हर्जाने की माँग की थी। निखिल जैन का यह मामला 2013 से ही से ही चल रहा था। निखिल जैन ने इस मामले में अपनी तरफ से फेयर एंड हैंडसम क्रीम के प्रचार की सीडी समेत बाकी सबूत भी रखे।

इमामी ने क्या कहा?

इमामी ने फोरम में दावा किया कि निखिल जैन का क्रीम खरीदने का दावा झूठा है। इमामी के वकील ने कहा कि निखिल जैन यह नहीं सिद्ध कर सके कि उन्होंने खुद ही यह क्रीम खरीदी क्योंकि बिल पर कोई सीरियल नंबर नहीं है। इमामी ने कहा कि दुनिया में किसी भी क्रीम का परिणाम कई कारकों पर निर्भर करता है।

इमामी ने कहा कि सही परिणाम पाने के लिए क्रीम का उचित उपयोग और पौष्टिक आहार, व्यायाम, स्वस्थ आदतें, स्वच्छ रहने की स्थिति आदि कारक भी जरूरी हैं। इमामी ने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि निखिल जैन ने अपनी त्वचा की स्थिति के लिए नियमित रूप से क्रीम का इस्तेमाल किया या इससे कोई सुधार नहीं हुआ।

इमामी ने कहा कि निखिल जैन का दावा त्वचा विशेषज्ञ से उचित मेडिकल सलाह के बिना किया गया है। इमामी ने कहा कि निखिल जैन ने अपनी जीवनशैली के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। ऐसे में यह शिकायत ठीक नहीं है। इमामी ने यह भी दलील दी कि यह मुकदमा कंपनी की छवि बिगाड़ने के लिए दायर किया गया है।

क्या बोला उपभोक्ता फोरम?

उपभोक्ता फोरम ने इस मामले में सुनवाई के बाद 9 दिसम्बर, 2024 को फैसला दिया। फोरम ने कहा कि इमामी फेयर एंड हैंडसम क्रीम की पैकेजिंग और लेबलिंग पर थोड़े से निर्देशों के साथ यह कह रही है कि इसके तीन सप्ताह तक नियमित उपयोग से किसी पुरुष की त्वचा में गोरापन आ जाएगा, यह जानते हुए भी कि इस पर दिए गए निर्देश अधूरे हैं।

फोरम ने कहा कि अगर क्रीम खरीदने वाला बाकी चीजों का पालन नहीं करता, तो वह गोरा नहीं हो पाएगा, इसके बाद भी कोई निर्देश नहीं दिया गया। फोरम ने कहा कि ऐसे में कोई भी सामान्य बुद्धि वाला व्यक्ति यही मानेगा कि यदि वह तीन सप्ताह तक क्रीम लगाए तो गोरा हो जाएगा। फोरम ने कहा कि यह भ्रामक विज्ञापन और अनुचित व्यवहार है।

फोरम ने कहा कि इमामी ने ऐसा प्रचार अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए अपनाई थी। फोरम ने गलत प्रचार करने के चलते इमामी पर ₹15 लाख का जुर्माना ठोंका। इसमें से ₹14.5 लाख की धनराशि राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष दिल्ली और बाकी ₹50 हजार शिकायतकर्ता निखिल जैन को देने का आदेश दिया गया है। फोरम ने कहा है कि यह पैसा 45 दिन के भीतर देना होगा। निखिल जैन को इसके साथ ही ₹10 हजार भी मिलेंगे। यह धनराशि मुकदमे में खर्च की भरपाई के रूप में दी जाएगी।

झारखंड में INDI गठबंधन की सरकार बनते ही देवघर के बाबा मंदिर में शिवलिंग का बदल दिया रूप, बीजेपी MP ने साझा की तस्वीर: विवाद के बाद DC ने मंदिर समिति के मुख्य प्रबंधक से छीने अधिकार

झारखंड में INDI गठबंधन की सरकार बनते ही देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर के शिवलिंग और अरघा का स्वरूप बदलने की कोशिश की गई। शिवलिंग और अरघे पर सीमेंट जैसा कुछ लेप लगाने के बाद विवाद हो गया है। इसके बाद देवघर के कलेक्टर ने एक्शन लेते लेते हुए मंदिर के मुख्य प्रबंधक रमेश परिहस्त के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार छीन लिए हैं। वहीं, मंदिर के कर्मचारी हरिलाल पांडे को निलंबित कर दिया है।

गोड्डा से भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे ने शिवलिंग की तस्वीर को साझा करते हुए सोशल मीडिया X पर लिखा, “द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा बैद्यनाथ तथा 51 शक्तिपीठों में से एक ह्रदय पीठ देवघर में झारखंड सरकार का यह अनर्थ, शिवलिंग पर सीमेंट धार्मिक आस्था पर कॉन्ग्रेस सरकार का सीधा प्रहार है। भगवान शिव के घर में अनर्थ। बाबा न्याय करेंगे।”

घटना का संज्ञान लेते हुए देवघर के उपायुक्त ने रविवार (8 दिसंबर 2024) को मंदिर प्रभारी देवघर के एसडीओ को जाँच करके 24 घंटे में रिपोर्ट देने के लिए कहा था। एसडीओ ने सोमवार (9 दिसंबर 2024) को मंदिर पहुँचकर जाँच की। इस दौरान उन्होंने गर्भगृह में हुए कार्य का सीसीटीवी फुटेज देखा। इसके आधार पर रिपोर्ट तैयार करके जिलाधिकारी को सौंप दिया।

देवघर के जिलाधिकारी ने कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया X पर किए गए अपने पोस्ट में लिखा, “सोशल मीडिया के माध्यम से बाबा मंदिर के गर्भगृह में किए गए कार्यों से जुड़े मामले को संज्ञान लेते हुए मंदिर प्रभारी को जाँच कर प्रतिवेदन समर्पित करने का निर्देश दिया है। साथ ही अपने कार्य के प्रति लापरवाही बरतने वालो कर्मियों पर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।”

दरअसल, शनिवार (7 दिसंबर 2024) को मंदिर के गर्भगृह में विशेष सफाई की बात कहकर दोपहर तीन बजे मंदिर का पट बंद कर दिया गया था। उसके बाद मंदिर का पट श्रृंगार पूजा के दौरान खोला गया और पूजा की गई। जब दोबारा रविवार को मंदिर का पट खोला गया तो शिवलिंग के ऊपर सीमेंट जैसी चीज लगी थी।

आरोप है कि बैजनाथ धाम मंदिर के गर्भगृह को सफाई के नाम पर बंद करके शिवलिंग पर ‘सीमेंट’ जैसी चीज का लेप लगाया। इसके साथ ही गर्भगृह में टूटे हुए टाइल्स को बदला गया था। मंदिर के पुजारियों का कहना है कि कोर्ट के निर्देश पर मंदिरों के गर्भगृह में किसी तरह का काम करने से पहले मंदिर प्रशासन को पुरोहित समाज तथा सरदार पंडा की स्वीकृति लेना अनिवार्य है। हालाँकि, उनसे स्वीकृति नहीं ली गई।

तेलंगाना में 4 बार MLA रहे BRS नेता चेनमानेनी रमेश की भारतीय नागरिकता हाई कोर्ट ने रद्द की, ₹30 लाख का जुर्माना भी: जर्मन सिटीजन होने की बात छिपाई थी

तेलंगाना हाई कोर्ट ने 9 दिसंबर 2024 को एक ऐतिहासिक फैसले में पूर्व बीआरएस विधायक चेनमानेनी रमेश की भारतीय नागरिकता रद्द कर उन्हें जर्मन नागरिक घोषित किया। इसके साथ ही कोर्ट ने उन पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने पाया कि रमेश ने अपनी जर्मन नागरिकता छुपाकर न्यायपालिका और जनता को गुमराह किया। यह पहली बार है जब किसी पूर्व विधायक की भारतीय नागरिकता रद्द की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जस्टिस बी. विजयसेन रेड्डी ने अपने फैसले में कहा कि चेनमानेनी रमेश 2009 से भारतीय नागरिक होने का दावा करते हुए चुनाव लड़ते रहे, जबकि वे जर्मन नागरिक थे। गृह मंत्रालय पहले ही उनकी भारतीय नागरिकता रद्द कर चुका था। हाई कोर्ट ने मंत्रालय के इस फैसले को सही ठहराया।

चेनमानेनी रमेश ने 1990 के दशक में जर्मनी की नागरिकता ली थी। उन्होंने वहाँ नौकरी की, शादी की और परिवार बसाया। 2008 में उन्होंने भारतीय नागरिकता हासिल करने का दावा किया, लेकिन गृह मंत्रालय की जाँच में पाया गया कि रमेश ने अपनी जर्मन नागरिकता छोड़ी ही नहीं थी। उनका जर्मन पासपोर्ट 2023 तक वैध था।

रमेश ने 2009 में तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) से पहली बार विधायक का चुनाव जीता। बाद में वे बीआरएस (तत्कालीन टीआरएस) में शामिल हो गए और 2010, 2014, और 2019 में विधायक चुने गए।

कॉन्ग्रेस नेता और वर्तमान विधायक आदी श्रीनिवास ने चेनमानेनी के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी। कोर्ट ने रमेश पर लगाए गए 30 लाख रुपये के जुर्माने में से 25 लाख रुपये आदी श्रीनिवास को देने का आदेश दिया, जबकि बाकी 5 लाख रुपये तेलंगाना स्टेट लीगल सर्विसेस अथॉरिटी को दिए जाएँगे।

आदी श्रीनिवास ने 2009 से चेनमानेनी रमेश की नागरिकता को लेकर सवाल उठाए थे। श्रीनिवास का कहना था कि रमेश ने गलत जानकारी देकर भारतीय नागरिकता हासिल की और चुनाव लड़ा। रमेश ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर 2019 में गृह मंत्रालय द्वारा उनकी नागरिकता रद्द करने के आदेश को चुनौती दी थी। लेकिन कोर्ट ने पाया कि रमेश ने जर्मन नागरिकता छोड़ने का कोई सबूत पेश नहीं किया।

इस फैसले से तेलंगाना की राजनीति में हलचल मच गई है। कॉन्ग्रेस के टिकट पर साल 2023 में विधायकी जीते आदी श्रीनिवास ने इसे न्याय की जीत बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “यह फैसला उन लोगों के लिए संदेश है जो झूठे दावे कर चुनाव लड़ते हैं।”

चेनमानेनी रमेश के लिए यह फैसला राजनीतिक और कानूनी तौर पर एक बड़ा झटका है। भारतीय संविधान और जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत, गैर-भारतीय नागरिक चुनाव लड़ने या वोट देने के पात्र नहीं होते।