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कुवैत में नर्स का काम करने गए, गल्फ बैंक से किया ₹700 करोड़ फ्रॉड: केरल के 1425 लोग जाँच के दायरे में, भारी-भरकम लोन लेकर दूसरे देशों में हो गए शिफ्ट

केरल के कुछ लोगों द्वारा कुवैत के गल्फ बैंक के साथ 700 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने का मामला प्रकाश में आया है। इस धोखाधड़ी केस में करीबन 1425 मलयालियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। आरोप है कि ये सारे लोग गल्फ बैंक से बड़े अमाउंट का लोन ले-लेकर अलग-अलग देशों में शिफ्ट हो गए।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इन आरोपितों ने फर्जी दस्तावेजों और पहचान पत्रों का इस्तेमाल करते हुए बैंक से ऋण प्राप्त करने का प्रयास किया। अब पुलिस ने कानूनी कार्रवाई करते हुए इनके खिलाफआई आईपीसी (भारतीय दंड संहिता) की धारा 420 (धोखाधड़ी) और धारा 406 (विश्वासघात) के तहत मामला दर्ज किया है।

मामले में कुल 1425 आरोपित हैं, सबके खिलाफ जाँच जारी है और अन्य संभावित आरोपितों की पहचान की जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन आरोपितों ने धोखाधड़ी करने के क्रम में बैंक से पहले 50 लाख रुपए से 2 करोड़ रुपए तक का लोन लिया। इसके बाद इस वाले लोन को इन लोगों ने समय से लौटा दिया लेकिन बाद में बड़े लोन ले लेकर फरार हो गए।

कहा जा रहा है कि ये आरोपित गल्फ बैंक को चूना लगाने के बाद ब्रिटेन, कनाडा और अमेरिका में जाकर बसे हुए हैं। वहीं बैंक ने इस मामले में अपनी छानबीन को तीन महीने पहले ही करना शुरू किया। तब शुरू किया है जब कर्ज चुकाने की तारीख लेट होती गई। बैंक के अधिकारी केरल आए। यहाँ उन्होंने सीनियर पुलिस अधिकारी से मुलाकात की और सारा मामला बताया। इसके बाद शिकायत के आधार पर एर्नाकुलम और कोट्टायम जिलों में 10 मामले दर्ज किए गए हैं।

अभी तक की जाँच में सामने आया है कि इस घटना में 800 ऐसे लोग हैं तो कुवैत के स्वास्थ्य मंत्रालय में बतौर नर्स काम करते थे। बैंक का मानना है कि शायद शुरुआत में कुछ लोगों ने इस गड़बड़ी को अंजाम दिया हो और बाद में उनसे सीखकर दूसरे मलयाली भी इस अपराध को किए हों।

जहाँ से PM मोदी ने फूँका था ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का बिगुल, अब वहीं से लॉन्च किया ‘बीमा सखी’: 10वीं पास महिला भी करेंगी कमाई, LIC की योजना के बारे में जानिए सब कुछ

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हरियाणा के पानीपत में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की बीमा सखी योजना का शुभारंभ किया है। केंद्र सरकार की योजना का उद्देश्य महिलाओं को रोजगार का साधन देना और उन्हें वित्तीय तौर पर साक्षर बनाना है। इस योजना के तहत महिलाओं को ट्रेनिंग भी मिलेगी और साथ ही में उन्हें हर महीने स्टाइपेंड भी मिलेगा। इस योजना के जरिए देश की हजारों महिलाएँ लाभान्वित होंगी। पीएम मोदी ने इस योजना को उसी पानीपत से चालू किया है, जहाँ से उन्होंने 2015 में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की शुरुआत की थी।

क्या है बीमा सखी योजना?

बीमा सखी योजना 18-70 वर्ष की आयु की उन महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए बनाई गई है जो 10वीं कक्षा तक पढ़ी हुई हैं। इस महिलाओं को LIC तीन वर्षों तक ट्रेनिंग देगी। इन महिलाओं को लोगों को वित्तीय साक्षरता के साथ ही बीमा के बारे में जानकारी देने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी। यह महिलाएँ 3 वर्ष तक ट्रेनिंग लेने के बाद LIC एजेंट के तौर पर काम कर सकेंगी। इन्हें सिर्फ एजेंट के तौर पर ही नहीं बल्कि LIC अधिकारी के काम का भी मौका मिला सकेगा। इन्हें बीमा अधिकारी बनने के लिए स्नातक की योग्यता होनी चाहिए होगी।

इस योजना के तहत भर्ती की गई बीमा सखी निगम की स्थायी कर्मचारी नहीं होंगी। हालाँकि, वह निगम की एजेंट के तौर पर काम कर सकेंगी और इससे होनी वाली आय से वह स्वयं और अपने परिवार को सशक्त कर सकेगी। उन्हें LIC के लिए काम करने के दौरान स्टाइपेंड मिलता रहेगा और साथ ही उन बीमा पॉलिसी का कमीशन भी मिलेगा, जो उन्होंने बेचीं होंगी।

क्या-क्या फायदे मिलेंगे?

LIC के जरिए बीमा सखी बनने वाली महिलाओं को ट्रेनिंग के 3 वर्ष तक लगातार फायदे मिलते रहेंगे। उन्हें पहले वर्ष प्रतिमाह ₹7000 दिए जाएँगे। जबकि दूसरे वर्ष प्रतिमाह ₹6000 और तीसरे वर्ष ₹5000 मिलेंगे। इनके तीनों वर्ष के लिए ट्रेनिंग के दौरान कुछ मानक भी पूरे करने हैं। इसके अलावा वह पॉलिसी बेच कर कितना भी पैसा कमा सकती हैं। इसमें काम करने के घंटे भी तय नहीं हैं। यानी महिलाएँ अपनी सुविधा के अनुसार, काम कर सकेंगी।

कौन महिला बन सकेगी बीमा सखी?

बीमा सखी बनने के लिए 18-70 की वह सभी महिलाएँ पात्र होंगी जो 10वीं पास हैं। महिलाओं को इसके लिए ऑनलाइन आवेदन देना होगा। महिलाओं को इसके बाद LIC खुद ही आगे बढ़ने में सहायता करेगी। हालाँकि, उन महिलाओं को इसमें योग्य नहीं माना जाएगा, जिनके परिवार में पहले से कोई LIC का एजेंट है। LIC में काम कर चुकी महिलाएँ भी इस योजना की पात्र नहीं होगी। यह योजना पूरी तरह से इस आयाम रही महिलाओं के लिए लाई गई हैं।

जो कभी कहते थे शपथ राम की खाते हैं, वे अब पीर बाबर शेख की ले रहे कसम: उद्धव ठाकरे के प्रति वफादारी जताने दरगाह पहुँचे शिवसेना (UBT) के कार्यकर्ता

उद्धव ठाकरे के गुट वाली शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ताओं ने 8 दिसंबर 2024 (रविवार) को एक दरगाह पर जाकर पार्टी के प्रति वफादारी की शपथ ली। यह दरगाह रत्नागिरी जिले के हाटिस में स्थित है और इसका नाम पीर बाबर शेख दरगाह है। इस तरह की शपथ लेने के लिए एक महजबी जगह चुनने पर सोशल मीडिया यूजर की भौहें टेढ़ी हो गई हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह आयोजन महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद पार्टी के भीतर उपजे कलह को शांत करने का प्रयास था। दरगाह को सांप्रदायिक सद्भाव की प्रतीक का दावा किया जाता है। ABP न्यूज ने अनाम सूत्रों के हवाले लिखा है कि प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करने के लिए शपथ एक महजबी स्थल को चुना गया और यहाँ पर शपथ ली गई।

शिवसेना के कार्यकर्ता दरगाह क्यों गए?

शिवसेना (यूबीटी) को हाल के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में गंभीर झटका लगा है। पार्टी राज्य भर में सिर्फ 20 सीटें जीतने में कामयाब रही। वहीं, महाविकास अघाड़ी गठबंधन में शिवसेना (UBT), कॉन्ग्रेस और एनसीपी (शरद पवार) शामिल हैं। इस गठबंधन को कुल 60 सीटें ही मिलीं। शिवसेना को विशेष रूप से कोंकण में हुआ नुकसान चुभ रहा है। यह ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट का गढ़ माना जाता था।

विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष पैदा हो गया। कई कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर आरोप लगाया कि वरिष्ठ नेताओं की लापरवाही और अक्षमता के कारण विधानसभा चुनावों में इस तरह की हार हुई। इस असंतोष के परिणामस्वरूप बैठकों और प्रमुख पदों से इस्तीफे के दौरान गर्मागर्म चर्चा हुई। इसके कारण पार्टी कैडर के भीतर गुस्सा बढ़ गया।

पार्टी के भीतर उथल-पुथल का समाधान वरिष्ठ नेता एवं उद्धव ठाकरे के करीबी विश्वासपात्र विनायक राउत ने निकालने की सोची। पार्टी के नेताओं द्वारा पीर बाबर शेख दरगाह में वफादारी की शपथ लेने का एक निर्णय लिया गया। इसका उद्देश्य जनता को यह दिखाना था कि पार्टी में विश्वास और एकता है। कार्यकर्ताओं से इसमें भाग लेने के लिए कहा गया था। सोर्स ने बताया कि जो व्यक्ति अनुपस्थिति रहे उन्हें असंतुष्ट या पार्टी विरोधी माना जाएगा।

दरगाह का एक संक्षिप्त इतिहास

डीप्रा दांडेकर द्वारा लिखित ‘ग्रे लिटरेचर ऐट दि दरगाह ऑफ पीर बाबर शेख ऐट हैटिस’ के अनुसार, पीर बाबर शेख दरगाह कोंकण क्षेत्र के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परिदृश्य में एक अनूठा स्थान रखता है। यह हैटिस गाँव में स्थित यह दरगाह सूफी संत पीर बाबर शेख को समर्पित है। कहा जाता है कि वह सदियों पहले इस गाँव में आए थे। वे आध्यात्मिक ज्ञान और सामाजिक कार्यों के लिए जाने जाते थे।

जब पीर बाबर शेख का निधन हो हुआ तो ग्रामीणों के उन्हें दफनाने को लेकर दुविधा उत्पन्न हो गई, क्योंकि स्थानीय लोग मुख्य रूप से हिंदू थे। आखिरकार, पास के इब्राहिम्पट्टन के मुस्लिमों ने उनके अंतिम संस्कार करने में सहायता की। उन्हें दफन करने के बाद कब्र को एक दरगाह का रूप दे दिया गया और उस स्थान को ‘सांप्रदायिक सद्भाव के प्रतीक’ के रूप में स्थापित किया गया।

कहा जाता है कि यहाँ पर हिंदू और मुस्लिम दोनों सक्रिय रूप से इसके रखरखाव और यहाँ के अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। यहाँ सालाना होने वाले उर्स मेले में पूरे क्षेत्र के हजारों भक्त आते हैं, जिनमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग शामिल हैं। हालाँकि, दरगाह कोंकणी मुस्लिमों के लिए महत्व रखता है, लेकिन इस स्थान का प्रशासन और गतिविधियाँ स्थानीय हिंदू नागवेकर कबीले से बहुत प्रभावित हैं।

‘सांप्रदायिक एकता’ की अपनी कथा के बावजूद इस दरगाह का इतिहास भी तनाव को प्रकट करता है। चूँकि हैटिस में मुस्लिम समुदाय की उपस्थिति कम है तो यहाँ धार्मिक सह-अस्तित्व के इतिहास पर सवाल उठता है। हैटिस में एक स्थायी मुस्लिम समुदाय की अनुपस्थिति, अनुष्ठान गतिविधियों के लिए पड़ोसी गाँवों के मुस्लिमों पर निर्भरता दरगाह की विरासत को परिभाषित करती है।

राजनीतिक निहितार्थ और भविष्य के दृष्टिकोण

पार्टी की आंतरिक चुनौतियों का समाधान करने और कार्यकर्ताओं के बीच एकता को बनाए रखने के लिए एक दरगाह का चुनाव करना शिवसेना के हिंदुत्व विचारधारा के साथ मेल नहीं खाता। इसको लेकर सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाए हैं। इसको लेकर सवाल किया जा रहा है कि क्या पार्टी ने अपनी पारंपरिक विचारधारा को अब पूरी तरह से छोड़ने का फैसला कर लिया है।

इधर बांग्लादेश के दौरे पर भारत के विदेश सचिव, उधर इस्कॉन के संत चिन्मय दास सहित सैकड़ों हिंदुओं पर FIR : दावा- कोर्ट में ‘टोपी’ को बनाया निशाना

बांग्लादेश लगातार अपनी नीतियों और कार्रवाई से विवादों में घिरता जा रहा है। पहले हिंदुओं और उनके धार्मिक स्थलों पर हमले की घटनाएँ सामने आई थीं, और अब बांग्लादेशी सरकार हिंदुओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके उन्हें परेशान करने की नई रणनीति अपनाई है। गिरफ्तार हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास समेत सैकड़ों हिंदुओं पर FIR दर्ज की गई है। यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी बांग्लादेश दौरे पर पहुँचे हैं। उनका यह दौरा बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों, कट्टरपंथी ताकतों की बढ़ती हिंसा और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के मुद्दे पर भारत की चिंताओं को लेकर महत्वपूर्ण है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विक्रम मिसरी के दौरे से ठीक पहले इस्कॉन के संत चिन्यम कृष्ण दास और उनके सैकड़ों अनुयायियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। चिन्मय कृष्ण दास और उनके अनुयायियों पर एफआईआर दर्ज के अनुसार, 164 पहचाने गए लोग और 400 से 500 अज्ञात लोग इसमें आरोपित बनाए गए हैं। ये मामले चटगाँव कोर्ट परिसर में पुलिस और चिन्मय कृष्ण दास के अनुयायियों के बीच हुई झड़प के बाद दर्ज किए गए हैं।

इस शिकायत को व्यवसाई और हिफाजत-ए-इस्लाम बांग्लादेश के कार्यकर्ता इनामुल हक ने चटगाँव मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट मोहम्मद अबू बकर सिद्दीकी की अदालत में दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि 26 नवंबर को जब वह कोर्ट में अपना काम पूरा करके घर लौट रहे थे, उनके ऊपर चिन्मय कृष्ण दास के अनुयायियों ने हमला किया। इनामुल हक ने अपनी शिकायत में कहा कि उन्हें उनके कपड़े और पहचान के आधार पर निशाना बनाया गया।

इनामुल हक का कहना है कि उन्हें उनके कपड़े, यानी ‘पंजाबी और टोपी’ पहनने की वजह से हमला किया गया, जिसके चलते उनके दाहिने हाथ और सिर में गंभीर चोटें आईं। बांग्लादेशी अस्पताल में उनका इलाज किया गया, लेकिन उनकी हालत पर भी चिंता जताई जा रही है।

विक्रम मिसरी का दौरा और बांग्लादेश पर भारत का दबाव

भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी का यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। वह ढाका पहुँच चुके हैं और हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के मुद्दे पर भारत की चिंताओं को उठा सकते हैं। उनके दौरे के दौरान बांग्लादेश के कार्यवाहक विदेश मंत्री मोहम्मद तौहीद हुसैन और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत करने की संभावना है। इसके अलावा, उनके दौरे के दौरान बांग्लादेश के अंतरिम प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस से भी मुलाकात हो सकती है।

बांग्लादेश में हिंसा और कट्टरपंथ के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भारत का यह दौरा एक संकेत है कि भारत किसी भी प्रकार की हिंसा और धर्म के आधार पर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने की घटनाओं पर गंभीर है। वहीं, विक्रम मिसरी का यह दौरा बांग्लादेश सरकार को एक मौका देगा कि वह इन गंभीर मुद्दों पर कार्रवाई करें और हिंदुओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करें।

कोर्ट में जमा नहीं हुई जामा मस्जिद की सर्वे रिपोर्ट, संभल हिंसा में सूफियान और शारिक सहित 4 दंगाई गिरफ्तार: 400 पत्थरबाजों के पोस्टर जारी

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में पुलिस ने रविवार (23 नवंबर 2024) को हुई हिंसा में शामिल 4 अन्य उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है। फरार चल रहे लगभग 400 अन्य पत्थरबाजों के पोस्टर प्रशासन ने जारी कर दिए हैं। सैकड़ों हमलावर घर छोड़ कर अन्य प्रदेशों में छिपे हुए हैं, जिनकी तलाश में दबिश दी जा रही है। वहीं कोर्ट कमिश्नर का स्वास्थ्य खराब होने की वजह से सर्वे रिपोर्ट आज सोमवार (9 दिसंबर 2024) को अदालत में नहीं दाखिल हो पाई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 23 नवंबर की हिंसा में गिरफ्तार हुए 4 अन्य आरोपितों में से 2 को कोतवाली नगर और 2 को नखासा थाना पुलिस ने दबोचा है। कोतवाली पुलिस ने तनवीर और शारिक को पकड़ा है। ये दोनों संभल के कोट गर्बी क्षेत्र के रहने वाले हैं। हिंसा के दौरान पुलिस द्वारा जुटाई गई CCTV से दोनों आरोपित चिन्हित किए गए थे। हालाँकि तनवीर और शारिक को वहम था कि पुलिस उन्हें नहीं पहचान पाएगी। दोनों की गिरफ्तारी रविवार (8 दिसंबर 2024) को हुई है।

संभल में 23 नवंबर को ही पुलिस पर हुए हमले में शामिल 2 अन्य आरोपितों को नखासा थानाक्षेत्र की टीम ने पकड़ा है। इनके नाम अनस और सूफियान हैं। दोनों ही संभल जिले के निवासी हैं। ये दोनों हिन्दूपुरा क्षेत्र में जमा उसी भीड़ का हिस्सा था, जिसने पुलिस अधीक्षक के जनसम्पर्क अधिकारी (PRO) की हत्या करने के लिए गोली चलाई गई थी। पुलिस ने इन दोनों को चिन्हित कर रखा था और गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही थी। पूछताछ में अनस और सूफियान ने खुद को हिंसा में शामिल बताया है।

इस पूरी हिंसा में शामिल रहे लोगों की पहचान पुलिस कर रही है। इसमें अभी तक 400 बलवाइयों की पहचान भी हो चुकी है। इनको CCTV फुटेज, पुलिसकर्मियों की अपनी वीडियोग्राफ़ी व अन्य सबूतों के आधार पर पहचाना गया है। इन सभी के पोस्टर जारी कर गिरफ्तारी में आम लोगों से सहयोग की अपील की गई है। साथ ही दंगाइयों के संभावित ठिकानों पर पुलिस की टीमें दबिश दे रहीं हैं। प्रशासन के अनुसार कई हमलावर घर छोड़ कर फरार हैं, जो दिल्ली समेत कई अन्य प्रदेशों में छिपे हुए हैं।

कोर्ट में नहीं पेश हो पाई सर्वे रिपोर्ट

वहीं जामा मस्जिद की सर्वे रिपोर्ट सोमवार (9 दिसंबर 2024) को कोर्ट में पेश नहीं हो पाई। कोर्ट कमिश्नर रमेश सिंह राघव ने अपने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अदालत से थोड़ा समय माँगा है। रमेश सिंह के मुताबिक सर्वे रिपोर्ट लगभग तैयार हो चुकी है। बताते चलें कि 29 नवंबर को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने 10 दिनों के अंदर सर्वे पूरा कर के रिपोर्ट दाखिल करने की समय सीमा तय की थी। 9 दिसंबर को यह समय सीमा पूरी हो रही है।

‘ईसा मसीह ही असली भगवान, बाकी सब नकली’: मेरठ के विनीत ने घर में ही बना रखा है ‘चर्च’, बीमारी भगाने और नौकरी लगाने का लालच दे बनाता था ईसाई

उत्तर प्रदेश के मेरठ में मसीही सभा का आयोजन करके गरीब लोगों का ईसाई में धर्मांतरण करने की साजिश का पता चला है। इस दौरान हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान किया जा रहा था और ईसा मसीह को ही असली बताया जा रहा था। इसकी जानकारी मिलते ही रविवार (8 दिसंबर 2024) को हिंदू संगठन घटनास्थल पर पहुँचे। शिकायत के बाद पुलिस ने 5 आरोपितों को हिरासत में ले लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना मेरठ के थाना क्षेत्र परतापुर की है। यहाँ शंकरपुरी इलाके में विनीत नाम के व्यक्ति का घर है। विनीत ने लगभग 10 साल पहले ईसाई मत अपना लिया था और अब वो आसपास के लोगों को भी ऐसा ही करने के लिए उकसा रहा है। बताया जा रहा है कि बिना रजिस्ट्रेशन के ही वह पिछले 5 साल से अपने घर के एक हिस्से को चर्च के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है।

हिन्दू संगठन के सदस्यों और किसान मोर्चे से जुड़े कार्यकर्ताओं को रविवार को विनीत के घर पर लोगों के जमावड़े की सूचना मिली। पता चला कि आसपास के लगभग 500 लोगों को वहाँ बाइबिल पढ़ाई जा रही है। इनमें महिलाएँ भी शामिल हैं। इस जमावड़े में कुछ बाहर से भी लोग आए थे। हिंदू संगठनों ने देखा कि विनीत के घर के एक हॉल में मसीही प्रार्थना सभा हो रही थी। इसके बाद विरोध शुरू कर दिया।

किसान संगठन से जुड़े गौरव पराशर ने मीडिया को बताया कि विनीत के घर में भोले-भाले हिन्दुओं को बीमारी ठीक करने से लेकर नौकरी दिलाने तक के प्रलोभन दिए जा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सभा के नाम पर हिन्दू धर्म को अपमानित किया जा रहा था और ईसा मसीह को ही असली देवता बताया जा रहा था। यहाँ धर्मान्तरण के लिए अधिकतर महिलाओं और नाबालिग बच्चों को उकसाया जा रहा था।

हिंदू संगठनों की सूचना पर पुलिस तत्काल मौके पर पहुँची। पुलिस ने मौके की वीडियोग्राफ़ी करवाई और लोगों के बयान भी लिए। सभी पक्षों को समझा-बुझाकर शांत करवाया गया और मामले की जाँच शुरू कर दी गई। घटनास्थल से पुलिस ने कुछ ईसाई साहित्य व एक रजिस्टर बरामद किया है, जिसमें लोगों के नाम-पते लिखे हुए हैं।

पुलिस ने केस दर्ज करके अब तक 5 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। एसपी का कहना है कि पुलिस इस मामले की जाँच करके पता लगाएगी कि विनीत कुमार ने अभी तक कितने लोगों का धर्मांतरण किया है। इसके साथ ही यह पता किया जाएगा कि वह किस संगठन से जुड़ा है और लोगों के धर्मांतरण के लिए उसके पास पैसे कहाँ से आते हैं।

पश्चिम बंगाल में डेमोग्राफी बदलाव चिंताजनक, बांग्लादेशियों की धमकी को हल्के में ना लें: भाजपा नेता अर्जुन सिंह बोले- ‘जिहादियों’ के हमले पर चुप रहती है बंगाल पुलिस

पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता अर्जुन सिंह ने राज्य में तेजी से हुए डेमोग्राफी बदलाव को लेकर चिंता जताई है। अर्जुन सिंह ने इसी के साथ पश्चिम बंगाल की ममता सरकार पर राज्य की पुलिस को कमजोर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने साथ ही में बांग्लादेश के इस्लामी कट्टरपंथियों की कोलकाता कब्जा करने की धमकियों को हल्के में नहीं लेने की बात कही है।

पश्चिम बंगाल की बैरकपुर लोकसभा सीट से सांसद रहे अर्जुन सिंह ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, “बांग्लादेश में पूर्व फौजियों और कुछ जमीयत के नेता दावा कर रहे हैं कि वे 4 दिन में कोलकाता पर कब्जा कर सकते हैं। हमें इस खतरे को हल्के में नहीं लेना चाहिए क्योंकि पिछले एक दशक में सीमावर्ती जिलों में जिस तरह से डेमोग्राफी में बदलाव आए हैं, वह काफी चिंता की बात है। अर्जुन सिंह ने यह भी आरोप लगाया की राज्य की पुलिस पर भी प्रश्न खड़े किए और उनके ऊपर आरोप लगाया कि वह इस्लामी कट्टरपंथियों पर नरमी बरत रहे हैं।

अर्जुन सिंह ने कहा कि सीमा की सुरक्षा के लिए सीमा क्षेत्र से 50 किलोमीटर क्षेत्र को BSF के अधीन रखने का प्रस्ताव था, लेकिन ममता सरकार ने पहले दिन से ही BSF को निशाने पर ले लिया और केवल अपने ‘गाय’ वोट बैंक की रक्षा करने और तस्करों को खुश रखने के लिए BSF की छवि को खराब करने की कोशिश की। हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल में कट्टरपंथियों ने मंदिरों और पूजा पंडालों पर हमला किया, तोड़फोड़ की गई और पुलिस चुप रही। यहाँ तक ​​कि जब हावड़ा में जिहादियों ने पुलिस पर हमला किया, तब भी पुलिस ने कुछ नहीं किया।”

अर्जुन सिंह ने माँग की है कि केंद्र सरकार कश्मीर से अधिक अभी पश्चिम बंगाल पर ध्यान दे। उन्होंने कहा, “इस समय देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए कश्मीर से ज्यादा पश्चिम बंगाल पर ध्यान देने की जरूरत है। मैं प्रधानमंत्री मोदी जी और गृह मंत्री अमित शाह जी से अनुरोध करता हूँ कि सीमाओं की सुरक्षा के लिए पश्चिम बंगाल पर ध्यान दें।” उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया जिसमें एक भीड़ पुलिसकर्मियों पर हमला करते दिखती है।

गौरतलब है कि हाल ही में सोशल मीडिया में बांग्लादेश का एक वीडियो वायरल हुआ था। यह वीडियो बांग्लादेश में आयोजित की गई एक भारत विरोधी रैली का था। इसमें खुद को बांग्लादेशी फ़ौज का रिटायर्ड फौजी बताने वाले दो लोगों ने दावा किया था कि वह हमला करके 4 दिनों के भीतर कोलकाता पर कब्जा कर सकते हैं। बांग्लादेश में बीते दिनों में भारत के प्रति घृणा कैम्पेन चलाए जा रहे हैं। बंगलादेशी अकाउंट्स लगातार कहीं पूर्वोत्तर भारत तो कहीं पश्चिम बंगाल पर कब्जा करने की बात कर रहे हैं।

‘ये देश बहुसंख्यकों के अनुसार चलेगा… 4 बीवी-हलाला अस्वीकार्य’, इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज ने मुस्लिमों की दकियानूसी पर उठाए प्रश्न: ओवैसी-महुआ गुस्साए

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर यादव ने कहा है कि मुस्लिमों की हलाला, तीन तलाक और 4 बीवियाँ रखने की प्रथाएँ अस्वीकार्य हैं। उन्होंने कहा है कि यह नहीं चलाने दिया जा सकता। जस्टिस शेखर यादव ने स्पष्ट किया है कि समान नागरिक संहिता (UCC) जल्द ही एक सच्चाई होगी। उन्होंने मुस्लिम समाज में चल रही रूढ़िवादिता और इस पर लोगों के ना बोलने पर प्रश्न खड़े किए हैं। जस्टिस शेखर यादव के इस संबोधन को लेकर लिबरल जमात हंगामा मचा रही है।

जस्टिस शेखर यादव ने यह वक्तव्य प्रयागराज में विश्व हिन्दू परिषद के एक कार्यक्रम में दिया है। यह कार्यक्रम VHP की लीगल सेल ने रविवार (8 दिसम्बर, 2024) को आयोजित करवाया था। जस्टिस शेखर यादव ने कहा, “मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि यह हिंदुस्तान है, यह देश हिंदुस्तान में रहने वाले बहुसंख्यकों के अनुसार चलेगा। यही कानून है। आप यह नहीं कह सकते कि मैं हाईकोर्ट के जज होने के नाते ऐसा कह रहा हूँ। दरअसल, कानून ही बहुमत के हिसाब से काम करता है।”

जस्टिस शेखर यादव ने इसके बाद मुस्लिमों में फैली रूढ़िवादिता और दकियानूसी को लेकर प्रश्न खड़े किए। उन्होंने कहा, “हमारे हिंदू धर्म में बाल विवाह, सती प्रथा और बालिकाओं की हत्या जैसी कई सामाजिक कुरीतियाँ थीं, राम मोहन राय जैसे सुधारकों ने इन कुरीतियों को खत्म करने के लिए संघर्ष किया। लेकिन जब मुस्लिम समुदाय में हलाला, तीन तलाक और गोद लेने से जुड़े मुद्दों जैसी सामाजिक कुरीतियों की बात आती है, तब उनके पास इनके खिलाफ खड़े होने की हिम्मत नहीं थी।”

VHP के कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि मुस्लिमों की तरफ से भी यह प्रथाएँ खत्म करने को लेकर कोई प्रयास नहीं किए गए। उन्होंने कहा, “आप उस महिला का अपमान नहीं कर सकते जिसे हमारे शास्त्रों और वेदों में देवी का दर्जा दिया गया है। आप 4 बीवियाँ रखने, हलाला करने या तीन तलाक़ का अधिकार नहीं रख सकते। आप कहते हैं, हमें ‘तीन तलाक’ कहने का अधिकार है, और महिलाओं को भरण-पोषण ना देने का अधिकार है।”

जस्टिस शेखर यादव ने कहा, ” इस तरह से कोई अधिकार नहीं चल पाएगा। UCC कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसकी वकालत VHP, RSS या हिंदू धर्म करता हो। देश का सुप्रीम कोर्ट भी ऐसी ही बात करता है…मैं शपथ ले रहा हूँ कि यह देश UCC कानून ज़रूर लाएगा, और बहुत जल्द लाएगा।” जस्टिस शेखर यादव ने इस बात को लेकर भी प्रश्न खड़े किए गए कि मुस्लिम तीन तलाक और हलाला जैसे मुद्दों को अपना पर्सनल लॉ बताते हैं और कानून से बचते हैं।

उन्होंने कहा, “अगर आप कहते हैं कि हमारा पर्सनल लॉ इसकी इजाजत देता है, तो ये अस्वीकार्य है। एक महिला को भरण-पोषण मिलेगा, दो विवाह की इजाजत नहीं होगी, और एक आदमी की सिर्फ़ एक पत्नी होगी, चार पत्नियाँ नहीं… अगर एक बहन को भरण-पोषण मिलता है और दूसरी को नहीं, तो इससे भेदभाव पैदा होता है, जो संविधान के खिलाफ है।” जस्टिस शेखर यादव ने इस दौरान कहा कि सिर्फ गंगा में डुबकी लगाने और माथे पर चंदन लगाने वाला ही हिन्दू नहीं है बल्कि भारतवर्ष को अपनी माँ मानने वाला भी हिन्दू है।

जस्टिस शेखर यादव के इस पूरे वक्तव्य पर अब लिबरल गैंग में खलबली मच गई है। तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद ने इस मामले में प्रश्न खड़े करते हुए CJI संजीव खन्ना से माँग की है कि वह इस मामले का स्वतः संज्ञान ले।

AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी भी उनके इस वक्तव्यों पर परेशान हैं। उन्होंने प्रश्न खड़े किए हैं कि आखिर इलाहाबाद हाई कोर्ट का एक जज VHP के किसी कार्यक्रम में क्यों गया।

द हिन्दू और द कारवाँ जैसे वामपंथी संस्थानों के पत्रकारों ने भी शेखर यादव के खिलाफ एक्शन की माँग की।

संभल हिंसा के दौरान कट्टरपंथियों की भीड़ पुलिस वालों की जान लेने पर थी आमादा, DSP अनुज चौधरी और SP के PRO संजीव को लगी गोलियाँ: पढ़ें – FIR में दर्ज खूँखार भीड़ के कारनामे

रविवार (24 नवंबर 2024) को उत्तर प्रदेश के संभल में मुस्लिम भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया। ये हमला कोर्ट के आदेश पर जामा मस्जिद के सर्वे को रोकने के इरादे से हुआ। इस हिंसा में करीब दो दर्जन पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें डिप्टी एसपी अनुज चौधरी और पुलिस अधीक्षक के पीआरओ सब-इंस्पेक्टर संजीव कुमार भी शामिल हैं। दोनों ने अपनी तहरीरों में बताया कि उन्हें जान से मारने के लिए गोली चलाई गई थी।

संभल हिंसा के दौरान डिप्टी एसपी अनुज चौधरी मुस्लिम भीड़ के टारगेट पर खासतौर से थे। हिंसा से पहले, हमले के दौरान और बवाल के बाद भी हमलावरों या उनके समर्थकों की तरफ से अनुज चौधरी का नाम बार-बार लिया गया। उनके द्वारा कोतवाली नगर संभल में दी गई तहरीर में बताया गया है कि रविवार को वो अपनी टीम व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के साथ जामा मस्जिद का सर्वे कर रही टीम की सुरक्षा कर रहे थे।

इसी दौरान सुबह 9 बजे लगभग 700 से 800 हमलावरों की भीड़ सरकारी काम में बाधा डालने लगी। घातक हथियारों से लैस यह भीड़ मस्जिद की तरफ बढ़ रही थी। इस भीड़ को अदालत के आदेशों का हवाला सहित कई तरीकों से अनुज चौधरी ने समझाने की कोशिश की। हालाँकि भीड़ पर कोई असर नहीं पड़ा और पत्थरबाजी शुरू कर दी गई। इसी दौरान भीड़ से किसी ने गोली चलाई जो DSP चौधरी के दाएँ पैर में लगी। बकौल अनुज चौधरी यह फायर उनकी हत्या के मकसद से किया गया था।

अपनी तहरीर में अनुज चौधरी ने हिंसक भीड़ व खुद को गोली मारने वाले अज्ञात हमलावर के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। इस तहरीर पर संभल कोतवाली में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 190, 191 (2), 191 (3), 221, 132, 121 (1), 121 (2), 125, 109 (1) और 223 (बी) के तहत केस दर्ज किया गया है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। हमलावरों की पहचान व धरपकड़ के प्रयास जारी हैं।

प्लास्टिक पैलेट से बची SP के घायल PRO की जान

संभल में मुस्लिम भीड़ द्वारा की गई हिंसा की चपेट में पुलिस अधीक्षक के जनसम्पर्क अधिकारी (PRO) सब इंस्पेक्टर संजीव कुमार भी आ गए थे। उनको भी जान से मार डालने की नीयत से गोली मारी गई थी। हमले के बाद उनके द्वारा रविवार को थाना नखासा में तहरीर दी गई है। तहरीर में संजीव ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर चल रहे सर्वे के दौरान उन्हें पक्का बाग़ चौराहे पर भीड़ के जमावड़े की सूचना मिली। इस सूचना पर लगभग 11 बजे वो अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँचे।

सूचना सही निकली और एक भीड़ पक्का बाग के पास मौजूद मिली। लगभग 150 उपद्रवियों की यह भीड़ हिन्दुपुरा जाने वाली रोड पर जमा थी जिसे पुलिस ने हटाने का प्रयास किया। पुलिस के कहने पर भीड़ हटने के बजाय हमलावर हो गई। इन हमलावरों ने हॉकी, ईंट, पत्थर और लाठी-डंडों से पुलिस पर अटैक कर दिया। हिंसक भीड़ की करतूत देखते हुए आम लोगों में डर फ़ैल गया जिसके बाद उन्होंने घर के खिड़की-दरवाजे बंद कर लिए।

इसी दौरान भीड़ में से एक गोली सब इंस्पेक्टर संजीव की हत्या के मकसद से चलाई गई। गोली संजीव के पैर में लगी और वो घायल हो गए। हमलावरों ने इस बीच हेड कांस्टेबल विवेक कुमार का सिर फोड़ दिया। कांस्टेबल सुमित के हाथों में भी गंभीर चोट आई। हमलावरों से घायल पुलिसकर्मियों को बचाने के लिए साथी जवानों ने प्लास्टिक पैलेट और ब्लैंक कारतूस दागे। बाद में घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

उपद्रवियों की करतूत को गंभीर अपराध बताते हुए संजीव कुमार ने अपनी तहरीर में कड़ी कार्रवाई की माँग की है। नखासा थाना पुलिस ने इस तहरीर पर 150 अज्ञात हमलावरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191 (2), 191 (3), 190, 109 (1), 121 (1), 132, 223 व आपराधिक कानून संसोधन अधिनियम की धारा 7 के तहत केस दर्ज किया है।

दोनों ही मामलों से जुड़ी FIR की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। पुलिस आरोपितों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी हुई है। संभल की यह हिंसा हमलावर भीड़ के खतरनाक इरादों को उजागर करती है। पुलिस बल के खिलाफ हिंसा, जानलेवा हमले और सरकारी काम में बाधा जैसे कृत्य गंभीर चिंताएं खड़ी करते हैं। फिलहाल संभल पुलिस हमलावरों को चिन्हित कर के धरपकड़ के प्रयास में जुटी हुई है।

मुजफ्फरनगर की पुरानी मस्जिद ‘शत्रु संपत्ति’ घोषित, पाकिस्तान के पहले PM लियाकत अली खान की जमीन पर बनी दुकानें भी अब सरकार की: मुस्लिम बता रहे थे वक्फ प्रॉपर्टी

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान की संपत्ति को शत्रु संपत्ति घोषित कर दी गई है। रेलवे स्टेशन के सामने स्थित आठ बिसवा जमीन पर अवैध कब्जा करके मस्जिद और चार दुकानें बना दी गई थी। इसको जब्त कर लिया गया है। मुस्लिम पक्ष ने दावा किया था यह वक्फ संपत्ति है और लियाकत ने पाकिस्तान जाने से पहले दान कर दी थी। हालाँकि, यह दावा निकला।

बता दें कि पाकिस्तान बनने से पहले लियाकत अली खान का परिवार मुजफ्फरनगर में रहता था। यहाँ पर उनकी काफी अधिक जायदाद थी। इन्हीं संपत्तियों में ये संपत्ति भी शामिल है। 15 अगस्त 1947 को बँटवारा होने के बाद लियाकत अली खान अपने परिवार के साथ पाकिस्तान के साथ चले गए। उनकी इस जमीन पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मस्जिद और चार दुकानें बना दी थीं।

करीब डेढ़ साल पहले मुजफ्फरनगर की ‘हिंदू सनातन संगठन’ के संयोजक संजय अरोड़ा ने प्रशासन को प्रार्थना देकर इस जमीन को शत्रु संपत्ति घोषित करने की माँग की थी। उन्होंने दावा किया था कि यह जमीन पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान की है। इसके बाद इस जमीन की जाँच हुई। वहीं, इस जमीन पर मस्जिद के पास बने एक दुकान के मालिक ने इसे शत्रु संपत्ति होने से नकार दिया।

मस्जिद के पास स्थित दुकान के मालिक मोहम्मद अतहर ने कहा कि यह जमीन और इस पर बनी मस्जिद एवं दुकानें की वक्फ की संपत्ति हैं। दुकान के मालिक अतहर ने दलील कि 1940 के दशक में लियाकत ने इसे वक़्फ़ को दान कर दिया था। उसने इससे जुड़े वक्त के कागजात भी जमा किए। हालाँकि, जाँच में पाया यह गया कि यह वक्फ संपत्ति नहीं, बल्कि लियाकत अली की ही संपत्ति है।

शत्रु संपत्ति न्यायाधिकरण ने जाँच की तो पता चला कि सन 1918 में यह जमीन लियाकत अली खान के पिता रुस्तम अली खान के नाम पर थी। रुस्तम अली खान की बीवी और लियाकत अली खान की अम्मी महमूदा बेगम उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के नवाब काहिर अली खान की बेटी थी। तब यह मुजफ्फरनगर सहारनपुर जिले में ही था। सन 1947 तक यह जमीन लियाकत अली खान के पास ही थी।

मुजफ्फरनगर के सिटी मजिस्ट्रेट विकास कश्यप ने यूपीतक को बताया कि मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन के सामने खसरा नंबर 930 खसरा की आठ बिसवा जमीन थी। इसे शत्रु संपत्ति घोषित करने का प्रार्थना पत्र आने के बाद जाँच कराई गई और रिपोर्ट को दिल्ली स्थित शत्रु संपत्ति न्यायाधिकरण को भेज दी गई। इसके बाद न्यायाधीकरण की टीम जाँच जाकर जाँच की और दोनों पक्षों को सुना।

जाँच में यह भी पाया गया कि इस जमीन पर हाल ही में एक होटल बनाया गया था। बाद में उस होटल को मस्जिद और दुकानों में तब्दील कर दिया गया। तमाम सबूतों की जाँच एवं सभी पक्षों की गवाही के आधार पर न्यायाधिकरण पाया कि यह जमीन 1947 से शत्रु संपत्ति है। इसके बाद इसे शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया गया है।

क्या है शत्रु संपत्ति कानून

ऐसे लोग जो देश के विभाजन के समय या फिर 1962, 1965 और 1971 के युद्धों के बाद चीन या पाकिस्तान जाकर बस गए और वहाँ की नागरिकता ले ली। ऐसे लोगों की संपत्ति को भारत सरकार भारत के रक्षा अधिनियम 1962 के तहत उनकी संपत्ति को ज़ब्त कर सकती है। ऐसी संपत्ति के लिए अभिरक्षक या संरक्षक (कस्टोडियन) नियुक्त कर सकती है।

देश छोड़कर जाने वाले ऐसे लोगों की भारत में मौजूद संपत्ति ‘शत्रु संपत्ति’ कहलाती है। 10 जनवरी 1966 के ताशकंद घोषणा में एक खंड को शामिल किया गया, जिसमें कहा गया था कि भारत और पाकिस्तान युद्ध के बाद दोनों ओर से कब्ज़े में ली गई संपत्ति और उसकी वापसी पर चर्चा की जाएगी। पाकिस्तान सरकार द्वारा साल 1971 में ही अपने देश में मौजूद सभी संपत्तियों का निपटारा किया जा चुका है।

ताशकंद घोषणा के बाद भारत सरकार ने शत्रु संपत्ति अधिनियम 1968 बनाया। इस अधिनियम के अनुसार कोई भी व्यक्ति जो भारत में शत्रु संपत्ति के कस्टोडियन के रूप में नियुक्त है, केंद्र सरकार उस कस्टोडियन/संरक्षक के माध्यम से देश के राज्यों में फैली दुश्मन की संपत्तियों को अपने कब्ज़े में ले लेगी। यह ‘शत्रु संपत्ति संरक्षक’ (Custodian of Enemy Property for India: CEPI) के पास रहेगा।

CEPI गृह मंत्रालय के अधीन एक विभाग है, जिसका गठन वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध और 1962 व 1967 में हुए दो भारत-चीन युद्धों के बाद हुआ था। CEPI के माध्यम से केंद्र सरकार देश के राज्यों में फैली शत्रु संपत्तियों पर निगरानी एवं कब्ज़ा रखती है। इनमें अधिकांश संपत्तियाँ पाकिस्तान जाने वाले नवाबों की एवं अन्य लोगों की हैं।

साल 2017 में मोदी सरकार ने शत्रु संपत्ति कानून को और कठोर करने के उद्देश्य से शत्रु संपत्ति (संशोधन और सत्यापन) विधेयक 2016 पारित किया। इसमें शत्रु संपत्ति अधिनियम 1968 और सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत व्यवसायियों का निष्कासन) अधिनियम 1971 में संशोधन किया गया। यह कानून सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के खिलाफ लाया गया था।

साल 2005 में सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में कहा था कि ‘शत्रु संपत्ति का संरक्षक’ ट्रस्टी के रूप में संपत्ति का प्रबंधन कर रहा है और शत्रु उसका कानूनी मालिक बना हुआ है। इसलिए, शत्रु की मृत्यु के बाद शत्रु संपत्ति उसके कानूनी उत्तराधिकारियों को विरासत में मिलनी चाहिए। साल 2017 के संशोधन में शत्रु आश्रित और शत्रु फर्म का विस्तार करते हुए इसमें शत्रु के उत्तराधिकारियों को भी शामिल किया गया है, चाहे वह भारत का हो या ऐसे देश का नागरिक होना चाहिए, जो भारत का शत्रु नहीं है।

नए संशोधन विधेयक में कस्टोडियन (भारत सरकार की CEPI) को शत्रु संपत्ति का मालिक बना दिया गया। इसे 1968 से ही प्रभावी भी माना गया। इसके अलावा, शत्रु संपत्ति की अब तक हुई बिक्री ग़ैर-क़ानूनी घोषित कर दी गई। भारतीय नागरिक विरासत में शत्रु संपत्ति दूसरे को नहीं दे सकते। इसके साथ ही दीवानी अदालतों को कई मामलों में शत्रु संपत्ति से जुड़े मुक़दमे पर सुनवाई से रोक दिया।

CEPI के मुताबिक, देश भर में कुल 13,252 शत्रु संपत्तियाँ हैं। इसमें 12,485 संपत्तियाँ पाकिस्तान के नागरिकों की हैं, जबकि 126 चीनी नागरिकों की हैं। अगर राज्यवार आँकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा 6255 एनिमी प्रॉपर्टी उत्तर प्रदेश में हैं। वहीं, बंगाल में ऐसी 4088 प्रॉपर्टी हैं। इनकी क़ीमत 1,04,339 करोड़ रुपए से अधिक है।