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‘जानवरों की तरह कैद करके रखा है’: हमेशा ऐशो-आराम भोगने वाली CM-पुत्री ने रोया दुखड़ा

पीडीपी प्रमुख और जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा जावेद ने एक वॉयस नोट जारी करते हुए लिखा कि उनकी माँ महबूबा मुफ्ती की गिरफ्तारी के बाद अब उन्हें भी अपने ही घर में नजरबंद कर दिया गया है। उन्होंने इस बारे में गृहमंत्री अमित शाह को कहा, “आज जब बाकी देश भारत के स्वतंत्रता दिवस का जश्न मना रहा है, कश्मीरियों को जानवरों की तरह कैद करके रखा गया है और उन्हें बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित किया गया है।” उन्होंने अमित शाह को लिखे पत्र में कहा है कि उन्हें घर में नजरबंद करके धमकी दी गई है कि अगर उन्होंने दोबारा मीडिया से बात की, तो इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

इल्तिजा का कहना है कि जब कोई उनसे मिलने के लिए आता है, तो उन्हें इसकी सूचना नहीं दी जाती है और उन्हें अपने घर से बाहर निकलने की भी अनुमति नहीं है। उनका कहना है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में एक नागरिक को बोलने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि उन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और अपराधी की तरह बर्ताव किया जा रहा है। इल्तिजा ने कहा कि जिन कश्मीरियों ने आवाज उठाई है, उनके साथ वो भी जान का खतरा महसूस कर रही हैं।

इससे पहले भी इल्तिजा ने वॉयस नोट जारी करते हुए अपनी माँ की गिरफ्तारी और प्रदेश में संचार सुविधा पर विराम लगाने को लेकर सवाल किया था। गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के पर कतरने के बाद सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख उमर अब्दुल्ला सहित जम्मू-कश्मीर के कई राजनेताओं को हिरासत में रखा गया है।

लेकिन जरा सोचिए! आज जबकि राज्य में महबूबा मुफ्ती की सरकार नहीं है और केंद्र सरकार प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासनिक तौर पर अपना काम कर रही है, तो उनकी बेटी इल्तिजा जावेद को काफी परेशानी हो रही है। मगर जब महबूबा मुफ्ती 3 बार मुख्यमंत्री रहीं, तब तो इनको कोई दिक्कत नहीं हो रही थी, क्योंकि उस समय परेशानियों का सामना इन्हें नहीं, बल्कि जनता को करना पड़ता था। मुख्यमंत्री तक अपनी आवाज पहुँचाने के लिए पत्र, ईमेल, हेल्पलाइअन नंबर का सहारा लेना पड़ता था। तब कश्मीरी जनता सीधे तौर पर तो मुख्यमंत्री से बात नहीं कर सकते थे, क्योंकि तब उनकी सुरक्षा का सवाल था!

आम कश्मीरी जनता का भाँति आज महबूबा मुफ्ती की बेटी भी पत्र और वॉयस मैसेज के जरिए अपनी आवाज सरकार (केंद्र सरकार क्योंकि अब जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश है) तक पहुँचा रही हैं, क्योंकि आज देश की सुरक्षा का सवाल है। इसलिए इल्तिजा जावेद या किसी को भी इससे कोई दिक्कत या परेशानी नहीं होनी चाहिए। और वैसे भी ये हमेशा के लिए तो नहीं किया गया है। जब सरकार को लगेगा कि स्थिति सामान्य हो गई है, और देश की सुरक्षा पर कोई खतरा नहीं है, तो फिर सब कुछ सुचारू रूप से चालू कर दिया जाएगा।

इल्तिजा जावेद को सिर्फ मुख्यमंत्री की बेटी के तौर पर नहीं सोचना चाहिए बल्कि एक आम कश्मीरी नागरिक के तौर पर सोचना चाहिए। हर नागरिक को समान अधिकार मिले हैं, जिस दिन नेता-पुत्रों-पुत्रियों को यह बात समझ में आ जाएगी, हर बात पर अधिकारों का रोना रोने वाली इनकी हेकड़ी खत्म हो जाएगी।

आर माधवन को माओवंशी लिबरपंथी क्यों दे रहे हैं गालियाँ…

बॉलीवुड और तमिल फिल्मों में बड़े पैमाने पर काम करने वाले लोकप्रिय अभिनेता रंगनाथन माधवन (आर माधवन) ने सभी को रक्षाबंधन की शुभकामनाएँ दी और सोशल मीडिया पर अपने बेटे के साथ खुद की एक फ़ोटो शेयर की। इस फ़ोटो में दोनों ने जनेऊ पहन रखा है। फ़ोटो में दिख रहा है कि आर माधवन का बेटा उनकी बहन की अनुपस्थिति में अपने पिता के हाथ पर राखी बाँध रहा है।

इस फ़ोटों के लिए आर माधवन को लिबरल गैंग द्वारा ट्रोल किया जा रहा है। उनके अनुसार, जनेऊ, यज्ञोपवीतम या जिसे तमिल में पूनल कहा जाता है, जातिवाद का प्रतीक है और माधवन को अपने पूर्वजों की परंपराओं को बनाए रखने के लिए ख़ुद पर शर्म आनी चाहिए।

लिबरल्स के अनुसार, माधवन को अपनी पहचान को लेकर शर्मिंदा होना चाहिए।

रक्षाबंधन मनाने के लिए भी माधवन पर हमला किया गया।

आज का दिन अवनी अवित्तम का भी शुभ दिन है, जिस दिन ब्राह्मण अपने जनेऊ बदलते हैं। अभिनेता आर माधवन ने इंस्टाग्राम पर ख़ुद की एक फ़ोटो पोस्ट की जिसमें उन्होंने सभी को इस दिन की शुभकामनाएँ दी।

लिबरल्स गलियारे में, विशेष रूप से द्रविड़वादी राजनीति में, पूनल को नरसंहार और उत्पीड़न के प्रतीक से जोड़ा गया। इसे जातिवाद का प्रतीक माना जाता है, न कि हिन्दुओं के एक विशेष वर्ग की परंपराओं का। नाजी जर्मनी में यहूदियों के ख़िलाफ़ घृणा की तर्ज पर नरसंहार का प्रचार मुख्यधारा की द्रविड़वादी राजनीति में काफी प्रचलित है। इस प्रकार, यह वास्तव में आश्चर्य की बात नहीं है कि माधवन को उनकी हाल की फ़ोटो के लिए ट्रोल किया जा रहा है।

इससे पहले, माधवन को कुछ लिबरल्स द्वारा पीएम मोदी के अभियान का समर्थन करने के लिए भी ट्रोल किया गया था। पीएम मोदी और चीन के प्रधानमंत्री शी जिनपिंग के बीच बातचीत का मज़ाक उड़ाने वाली कॉन्ग्रेस पार्टी ने उन्हें ‘सेक्यूलर लिबरल’ का समर्थन करने के लिए आमंत्रित भी किया था।

अरुण जेटली की हालत गंभीर, फिलहाल वेंटिलेटर पर AIIMS में: मिलने पहुँचे राष्ट्रपति कोविंद

लंबे समय से बीमार चल रहे पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिलने आज देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद एम्स गए। खबरों की मानें तो अरुण जेटली की तबीयत इस समय गंभीर है। वह एंडोक्रिनोलॉजिस्ट्स, कार्डियोलॉजिस्ट्स और नेफ्रोलॉजिस्ट्स की देखरेख में पिछले एक हफ्ते से एम्स के आईसीयू में हैं। फिलहाल उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है।

9 अगस्त को साँस की शिकायत होने कारण उन्हें रात में एम्स में भर्ती कराया गया था और तभी अस्पताल ने उनकी मेडिकल रिपोर्ट भी जारी की थी। हालाँकि, उसके बाद से अब तक आधिकारिक तौर पर अस्पताल की ओर से कुछ भी नहीं बताया गया है।

पूर्व वित्त मंत्री की जाँच के बाद अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टरों ने उस दौरान बताया था कि उनकी जाँच चल रही है और उनकी हालत स्थिर है। AIIMS में भर्ती होने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और भाजपा के अन्य शीर्ष नेताओं ने अस्पताल जाकर जेटली का हाल-चाल लिया था। अब उनके स्वास्थ्य की नाजुक स्थिति का पता चलने पर आज 16 अगस्त को राष्ट्रपति कोविंद भी उनका हाल जानने AIIMS पहुँचे।

बता दें कि पेशे से वकील रहे अरुण जेटली मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में उनकी कैबिनेट के सबसे महत्तवपूर्ण नेता रहे। गत वर्ष 14 मई को जेटली का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था। जिसके बाद अप्रैल 2018 से उन्होंने कार्यकाल आना बंद कर दिया था, लेकिन 23 अगस्त 2018 को वह अपने मंत्रालय लौटे। बाद में अपने बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए उन्होंने खुद को लोकसभा चुनाव से दूर रखा था।

हिंदुओं के ख़िलाफ़ बयानबाजी करने पर मलेशिया सरकार ने जाकिर नाइक को भेजा नोटिस, होगी पूछताछ

अपने भाषणों से युवाओं को आतंकी गतिविधियों के लिए उकसाने और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों के आरोपित जाकिर नाइक पर मलेशिया सरकार ने अपना शिकंजा कसा दिया है। दरअसल, मलेशिया के हिंदु नागरिकों के बारे में विवादस्पद टिप्पणी करने पर वहाँ की सरकार ने समन जारी कर जाकिर नाइक को पूछताछ के लिए बुलाया है। जाकिर पर हुई ये कार्रवाई वहाँ के कई नेताओं द्वारा उसके भड़काऊ बयान पर आपत्ति जताने के बाद आई है।

खबरों की मानें तो वहाँ के गृहमंत्री मुहिद्दिन यासीन ने बताया है कि पुलिस जाकिर नाइक और अन्य कुछ लोगों से उस संबंध में पूछताछ करेगी, जिसमें नाइक ने मलेशिया के हिंदुओं को लेकर बयान दिया। बता दें कि भारत से भागे नाइक पर इस समय नस्लीय टिप्पणी करने और लोगों की भावनाओं को भड़काने का आरोप है।

आजतक की खबर के मुताबिक मलेशिया के गृह मंत्री मुहिद्दिन यासीन ने इस मामले पर बात करते हुए बताया कि पुलिस ने इस मामले के संबंध में कई अन्य व्यक्तियों को पूछताछ के लिए बुलाया था, जिनमें से कुछ पर नजर रखी जा रही है। पर्याप्त सबूत होने पर दंड संहिता की धारा 504 के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि मलेशियाई दंड संहिता की धारा 504 में किसी समुदाय को नीचा दिखाने पर कार्रवाई करने का प्रावधान है।

इसके अलावा मलेशिया के गृहमंत्री मुहिद्दिन ने अपने बयान में कहा, “मैं सभी राजनैतिक पार्टियों और गैर-नागरिक लोगों को याद दिलाना चाहता हूँ कि जो भी जनता की शांति और सद्भाव को खतरे में डालने की कोशिश करेगा, मेरे मंत्रालय में आने वाली प्रवर्तन एजेंसियाँ उन पर कानूनी कार्रवाई करने से पहले दो बार नहीं सोचेगी।” उन्होंने बताया कि मलेशिया में नस्ल और धर्म बहुत संवेदनशील मुद्दे हैं। वहाँ 32 मिलियन की आबादी के साथ 60 प्रतिशत मुस्लिम हैं जबकि बाकी सब या तो चीन के हैं या फिर भारत के। इनमें अधिकतर भारतीय हैं।

गौरतलब है कि पिछले 3 साल से मलेशिया की शरण में रहकर जाकिर नाइक ने वहाँ के हिंदुओं के बारे में कहा था कि वह मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद से ज्यादा नरेंद्र मोदी के प्रति वफादार हैं। जिसके बाद वहाँ के एचआरडी मंत्री के कुलसेरगन ने नाईक के ख़िलाफ़ आवाज उठाई थी और उस पर तुरंत एक्शन लेने की माँग की थी।

इस दौरान वहाँ के एचआरडी मंत्री ने कहा था, “जाकिर नाइक एक बाहरी व्यक्ति है, जो एक भगोड़ा है और उसे मलेशियाई इतिहास की बहुत कम जानकारी है, इसलिए, उसे मलेशियाई लोगों को नीचा दिखाने जैसा विशेषाधिकार नहीं दिया जाना चाहिए। इससे ज्यादा उसकी देश के प्रति वफादारी भी संदिग्ध है।”

‘आधे घंटे से पढ़ने की कोशिश कर रहा हूँ, आप कहना क्या चाहते हैं?’ – आर्टिकल 370 पर CJI ने वकील को फटकारा

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार (अगस्त 16, 2019) को अनुच्छेद 370 को रद्द करने की चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाई। सीजेआई ने इस दौरान याचिका में गलती होने पर याचिकाकर्ता एमएल शर्मा को दोबारा याचिका दायर करने को कहा और साथ ही बताया कि अब इस पर अगले हफ्ते सुनवाई होगी।

मीडिया खबरों की मानें तो उन्होंने एमएल शर्मा से सुनवाई के दौरान पूछा कि ये किस तरह की याचिका है? और इसमें क्या फाइल किया गया है? याचिका लें और दूसरी याचिका दाखिल करें।

उन्होंने एमएल शर्मा से कहा, “मैं आपकी याचिका आधे घंटे से पढ़ने की कोशिश कर रहा हूँ, लेकिन कुछ समझ नहीं पा रहा। आप क्या चाहते हैं? आपने क्या फाइल किया है, कुछ नहीं पता। हम आपकी याचिका तकनीकी आधार पर ही खारिज कर सकते हैं, लेकिन ऐसे मामलों में हम ये नहीं करना चाहते। क्योंकि इस तरह की 6 और भी याचिकाएँ हैं, उन पर भी इसका असर पड़ सकता है।”

इस सुनवाई के दौरान एक वकील ने एमएल शर्मा पर जुर्माने की भी बात कही लेकिन सीजेआई ने कह दिया कि इन्हें पहले से ही चोट लगी है, इन पर क्या जुर्माना लगाएँ।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीर मामले पर आज दो याचिकाओं पर सुनवाई की। पहली याचिका में अनुच्छेद 370 हटाए जाने का विरोध किया गया। वहीं दूसरी याचिका में कश्मीर में पत्रकारों पर से सरकार का नियंत्रण हटाने की माँग की गई।

WB के कुछ गाँव 18 अगस्त को मनाते हैं स्वतंत्रता दिवस, वो भी श्यामा प्रसाद मुखर्जी के कारण वरना…

भारत में प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। लेकिन, पश्चिम बंगाल के कुछ ऐसे गाँव हैं जो 18 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं क्योंकि वो आधिकारिक तौर पर इसी दिन भारत का हिस्सा बने थे।

12 अगस्त 1947 को वायसराय लुइस माउंटबेटन ने घोषणा की कि देश को 15 अगस्त, 1947 को स्वतंत्रता दे दी जाएगी। हालाँकि तब तक बंगाल की स्थिति विवादास्पद विषय बनी रही थी। दरअसल, पश्चिम बंगाल के नादिया और मालदा जैसे ज़िलों को लेकर प्रशासनिक ग़लती हो गई थी। यह ग़लती भारत-पाकिस्तान के बंटवारे की लकीर खींचने वाले रेडक्लिफ़ ने की थी। उन्होंने ग़लत नक्शा बना दिया था, जिसके मुताबिक़ मालदा और नादिया जैसे बहुसंख्यक हिंदू आबादी वाले कई ज़िले पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में दर्शा दिए गए थे।

भारत-बांग्लादेश सीमा के पास के गाँव के कुछ निवासियों से हुई बातचीत के अनुसार, माउंटबेटन की घोषणा के बाद क्षेत्र में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए और इस कारण से 15 अगस्त उनके लिए स्वतंत्रता का जश्न मनाने का कारण नहीं बन सका था। ग्रामीणों का कहना था कि उनके बड़े-बुज़ुर्गों ने उन्हें बताया था कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे नेताओं और नादिया शाही परिवार के सदस्यों ने कोलकाता में ब्रिटिश प्रशासन के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया था और इस मामले को माउंटबेटन के संज्ञान में लाया गया।

इसके बाद, माउंटबेटन ने तुरंत बंगाल के विभाजन के नक्शे को फिर से बनाने का आदेश दिया, ताकि विरोध करने वाले हिंदू-बहुल ज़िलों को भारतीय क्षेत्र में शामिल किया जा सके और मुस्लिम बहुल ज़िलों को पूर्वी पाकिस्तान में दिया जा सके। रेडक्लिफ द्वारा नक्शे में जो बदलाव किए गए उसके अनुसार, नादिया ज़िले के राणाघाट, कृष्णानगर और करीमपुर के शिकारपुर को भारत में शामिल किया गया। यह प्रक्रिया 17 अगस्त की रात संपन्न हुई।

नया फ़ैसला आने के बाद 18 अगस्त को कृष्णानगर लाइब्रेरी से पाकिस्तान का झंडा उतारा गया और भारतीय तिरंगा फहराया गया। 18 अगस्त को आज़ादी प्राप्त करने के नादिया ज़िले के संघर्ष को यादगार बनाने के लिए स्वतंत्रता सेनानी प्रमथनाथ शुकुल के पोते अंजन शुकुल ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने को चुनौती दी और लंबे समय के बाद 1991 में केंद्र सरकार ने उन्हें 18 अगस्त को नादिया में झंडा फहराने की अनुमति दे दी। तभी से नादिया ज़िले और उसके अंतगर्त आने वाले गाँवों-कस्बों में 18 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाने लगा।

पत्थरबाजी कर तिरंगे को नुकसान: लंदन में आजादी का जश्न मना रहे भारतीयों पर 1000+ पाकिस्तानियों का हमला

15 अगस्त, 2019 को भारत के साथ-साथ लंदन में रहने वाले भारतीयों ने भी स्वतंत्रता दिवस मनाया। मगर, इस दौरान कुछ पाकिस्तानी और पाकस्तानी मूल के ब्रिटिश ने उनके ऊपर हमला कर दिया। दरअसल, लंदन में भारतीय उच्चायोग के सामने भारतीय मूल के लोग शांति से स्वतंत्रता दिवस मना रहे थे, तभी लगभग 1000 की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने उन पर हमला कर दिया।

इस दौरान उन पाकिस्तानी और पाकिस्तानी मूल के अंग्रेज हमलावरों ने बच्चों और महिलाओं को भी नहीं बख्शा। उन्होंने जश्न मना रहे भारतीयों पर पानी, जूस, आलू, टमाटर, अंडे और भी कई अन्य चीजें फेंक कर कर उन्हें नुकसान पहुँचाने की कोशिश की। इन प्रदर्शनकारियों की संख्या 1000 के आस-पास थी, जिन्होंने भारतीय मूल के लोगों के ऊपर हमला किया।

पुलिस ने काफी मुश्किल से मौजूदा परिस्थितियों पर नियंत्रण किया और इस दौरान चार लोगों की गिरफ्तारी की गई। पुलिस ने बताया कि इनकी गिरफ्तारी पुलिस के काम में बाधा पहुँचाने और आपत्तिजनक हथियार रखने के आरोप में की गई।

भाजपा के विदेश मामलों के विभाग प्रमुख डॉ विजय चौथवाले ने इस घटना को निंदनीय बताते हुए ट्वीट किया कि लंदन में भारतीय उच्चायोग के सामने जो हुआ, वह काफी निराशाजनक है। स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए आई महिलाओं और बच्चों के साथ दुर्व्यवहार किया गया, पाकिस्तानी हमलावरों ने उनके ऊपर अंडे और पानी की बोतलें फेंकी। मगर BBCWorld इसकी रिपोर्टिंग कभी नहीं करेगा।

चौथवाले ने इस पूरे घटना के बारे में बताते हुए लिखा कि भारतीय मूल के लोग बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों से घिरे हुए थे, उन्हें प्रदर्शनकारियों द्वारा शारीरिक हमलों की धमकी दी जा रही थी। उच्चायोग की इमारत पर पत्थर फेंके गए और भारतीय ध्वज को नुकसान पहुँचाया गया। उन्होंने लंदन के मेयर सादिक खान और स्थानीय पुलिस को भी इस तरह की हिंसा को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई करने के लिए कहा है।

साथ ही उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी विदेश मंत्री एस जयशंकर को दे दी गई है, जो स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। चौथवाले ने कहा कि सभी भारतीयों को इमारत के अंदर लाया गया, उन्हें भोजन और पानी की पेशकश की गई और फिर उन्हें सुरक्षित रूप से उनके घर पहुँचाया गया। वहीं, सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए वहाँ पहुँचे भारतीयों और पीआईओ ने कहा कि पुलिस देर से पहुँची, जिसकी वजह से स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।

घर पहुँचने के बाद एक पीड़ित ने बताया कि वहाँं पर पहले तो कुछ पाकिस्तानियों ने प्रदर्शन करना शुरू किया, लेकिन फिर बाद में बहुत सारे आ गए और उन लोगों ने आजादी का जश्न मना रहे भारतीयों को दोनों तरफ से घेर लिया। वहाँ पर चल रहे सांस्कृतिक कार्यक्रम को रोक दिया गया। वो लोग जोर-जोर से नारे लगाने लगे। फिर कुछ देर के बाद उन लोगों ने अंडे, पानी से भरी बोतलें, जूस की बोतलें, आलू, केला और पता नहीं क्या-क्या फेंकना शुरू कर दिया। पीड़ित ने बताया कि एक अंडा उनके कंधे पर आकर लगा और उनके दोस्त के कान पर पानी से भरी बोतल लगी। उन्होंने बताया कि वहाँ की स्थिति काफी भयावह थी। हमलावरों ने उच्चायोग के सारे एंट्री गेट बंद कर दिए थे। तकरीबन 3 घंटे बाद पुलिस उन्हें सुरक्षित उच्चायोग के अंदर ले जाने में सक्षम हुई और वहाँ पर खाने-पीने के लिए दिया गया। पीड़ित का कहना है कि करीब 45 मिनट तक वहाँ रहने के बाद वो वहाँ से सुरक्षित अपने घर पहुँचे।

शादीशुदा आज़ाद अली के साथ 2 बार घर से भागी 19 साल की कंचन, अब दोनों ने की आत्महत्या

उत्तर प्रदेश के कानपुर में अलग-अलग समुदाय से संबंध रखने वाले एक प्रेमी जोड़े के ज़हर खाकर आत्महत्या करने की ख़बर सामने आई है। आत्महत्या करने वालों की पहचान आज़ाद अली (22 वर्षीय) और कंचन (19 वर्षीया) के रूप में हुई है। प्रेमी जोड़े को यह आभास था कि उनके रिश्ते को परिवार कभी मंज़ूर नहीं करेगा, इसकी एक वजह यह भी हो सकती है कि आज़ाद अली पहले से शादीशुदा था।

ख़बर के अनुसार, कुछ समय पहले घर से भागे आज़ाद अली और कंचन के शव कानपुर के पारस गाँव स्थित एक प्राथमिक विद्यालय परिसर में मिले। इन दोनों के पास से एक सुसाइड नोट के अलावा ज़हरीले पदार्थ की खाली शीशी भी बरामद हुई है। 

मामले की जाँच कर रहे अतिरिक्त निरीक्षक (अपराध) नवाब अहमद के मुताबिक़, “इस जोड़े ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि वे इतना बड़ा कदम इसलिए उठा रहे हैं, क्योंकि उनके परिवार ने उनके रिश्ते को स्वीकार नहीं किया है। अली पहले से शादीशुदा था।”

इसके अलावा उन्होंने बताया कि कंचन और अली ने दो महीने पहले अपना घर छोड़ दिया था। इसके बाद कंचन के परिवार वालों ने अली के ख़िलाफ़ अपहरण का मामला दर्ज करवाया था। शिक़ायत के आधार पर अली को गिरफ़्तार कर लिया गया था, लेकिन जल्द ही अली को ज़मानत पर रिहा कर दिया गया क्योंकि कंचन ने उसके पक्ष में गवाही दे दी थी। पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस घटना के कुछ दिन बीत जाने के बाद दोनों फिर से घर से भाग गए।

3.5 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा की योजना: 2024 तक हर घर में नल के जरिए पानी पहुँचाने का लक्ष्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को 73वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लालकिले के प्राचीर से राष्ट्रध्वज फहराया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने हर घर में पाइप के जरिए पानी पहुँचाने के लिए जल जीवन मिशन को आगे बढ़ाने तथा आने वाले वर्षों में इस पर तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक रकम खर्च करने का संकल्प जताया। उन्होंने कहा कि अभी तकरीबन 50 फीसदी परिवारों को पाइप के जरिए पानी नहीं मिल पा रहा है।

प्रधानमंत्री ने लालकिले के प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा, “सरकार ने एक विशेष काम की तरफ बल देने का निर्णय लिया है और वह है-हमारे हर घर में जल कैसे पहुँचे? हर घर को जल कैसे मिले? पीने का शुद्ध पानी कैसे मिले? और इसलिए आज मैं लाल किले से घोषणा करता हूँ कि हम आने वाले दिनों में ‘जल-जीवन मिशन’ को आगे ले करके बढ़ेंगे।” उन्होंने कहा कि कितनी भी विपरीत परिस्थितियाँ हों देश का गरीब उसको झेलने की क्षमता रखता है। आजादी के 70 साल हो गए। बहुत सी सरकारों ने अपने-अपने तरीके से कोशिश की है, लेकिन यह भी सच्चाई है कि देश के आधे घर ऐसे हैं जिनके पास पीने का पानी नहीं है। माताओं और बहनों को मटकों को सिर पर लेकर कई किलोमीटर तक चलना पड़ता है।

पीएम मोदी ने कहा, ‘‘मैं लाल किले की प्राचीर से यह घोषणा करना चाहता हूँ कि हर घर में पीने का पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हम जल जीवन मिशन के साथ आगे बढ़ेंगे। केंद्र और राज्य साथ मिलकर इस दिशा में काम करेंगे। 3.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च किये जाएँगे। हमें जल संरक्षण के प्रयासों में अधिक तेजी लानी होगी। पानी के क्षेत्र में पिछले 70 साल में जो काम हुआ, 5 सालों में उससे चार गुना काम करना है। केंद्र और राज्य साथ मिलकर इस दिशा में काम करेंगे।” बता दें कि, सरकार ने 2024 तक हर घर में नल के जरिए पानी पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।

प्रधानमंत्री ने जल जीवन मिशन की तुलना स्वच्छ भारत से करते हुए कहा कि जल संरक्षण आंदोलन जमीनी स्तर पर होना चाहिए। जल संरक्षण पर यह अभियान केवल एक सरकारी पहल नहीं होना चाहिए। यह स्वच्छ भारत अभियान की तरह एक जन आंदोलन बन जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमें इस विश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए कि अगले 5 वर्षों में हमें पिछले 70 वर्षों में जल संरक्षण के लिए और पानी के स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए चार गुना से अधिक काम करना है। हम अब और इंतजार नहीं कर सकते।”

‘आज मैंने गोमांस खाकर पाकिस्तान की खु़शी में भाग लिया’ – रेहाना सुल्ताना के ख़िलाफ़ FIR दर्ज

असम पुलिस ने कथित तौर पर गोमांस के सेवन को लेकर की गई फेसबुक पोस्ट के लिए बुधवार (14 अगस्त) को गुवाहाटी विश्वविद्यालय की एक स्कॉलर के ख़िलाफ़ FIR दर्ज की है। यह पोस्ट दो साल पहले की गई थी। हालाँकि, इस पोस्ट को तुरंत हटा लिया गया था, बावजूद इसके यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी और अभी फिर से चर्चा में है।

ख़बर के अनुसार, रेहाना सुल्ताना (28 वर्ष) के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 153 A और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया है। डीसीपी, गुवाहाटी पश्चिम, केके चौधरी के अनुसार, “हमने इस पर स्वत: संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया है। यह एक पुरानी पोस्ट है लेकिन हमने इस पर संज्ञान लिया क्योंकि यह फिर से सामने आया है।”

सुल्ताना की मूल पोस्ट, जो जून 2017 में असमिया में लिखी गई थी, उसके अनुवाद के अनुसार,

“आज मैंने गोमांस खाकर पाकिस्तान की खु़शी में भाग लिया। मैं जो खाती हूँ वह मेरी स्वाद का विकल्प है। गोमांस शब्द पढ़ने पर, कृपया न कोई षड्यंत्र शुरू करें और न अपने व्यवहार का परिचय दें।”

द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए सुल्ताना ने कहा, “एक विवाद चल रहा है कि मैंने इस बकरीद पर यह पोस्ट लिखी है। लेकिन मैंने इसे दो साल पहले लिखा था, जून 2017 में इसे डिलीट कर दिया था, लेकिन अब मेरी टिप्पणी को ग़लत तरीके से पेश किया जा रहा है और लोगों ने मुझे निशाना बनाना शुरू कर दिया है। 19 जून, 2017 को, मैंने एक स्पष्टीकरण भी लिखा था, जिसमें कहा गया था कि मेरी व्यंग्यात्मक पोस्ट का ग़लत अर्थ निकाला गया।”

यह पूछे जाने पर कि उन्होंने टिप्पणी क्यों पोस्ट की, सुल्ताना ने कहा,

“भारत-पाकिस्तान का मैच था और भारत बुरी तरह से खेला था। मैंने अपनी व्यथा व्यक्त करने के लिए उस व्यंग्यपूर्ण पोस्ट को लिखा था जिसमें भारत हार गया था और विराट कोहली जीरो पर आउट हो गए थे। उसी समय गोमांस खाने के बारे में विवाद और लोगों पर गोमांस खाने के लिए हमला किया जा रहा था, उस समय देश भर में ख़बरें बन रही थीं, और मैंने तब इसी संदर्भ में इसे लिखा था। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि कैसे पोस्ट को संदर्भ से परे देखकर एक विवाद का रूप देकर मामला दर्ज कर लिया गया।”