समाजवादी पार्टी के सांसद और भू-माफिया आज़म ख़ान, जिन्हें हाल ही में लोकसभा में एक महिला पीठासीन अधिकारी के प्रति अभद्र टिप्पणी करने के लिए माफ़ी तक माँगनी पड़ गई, उनके बारे में एक ख़बर सामने आई है। दरअसल, उन्हें 1975 में एक महिला के साथ दुर्व्यवहार करने पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया था।
आज़म ख़ान के ख़िलाफ़ जिस समय यह कार्रवाई की गई थी, उस समय वो मास्टर ऑफ़ लॉ (LLM) की पढ़ाई कर रहे थे और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (AMUSU) के सचिव भी थे।
शिया मौलवी कल्बे जव्वाद के अनुसार, आज़म ख़ान ने एक स्थानीय अस्पताल में महिला वार्ड में जबरन घुसने की कोशिश की थी, जिसके बाद उन्हें यूनिवर्सिटी से एक साल के लिए निष्कासित कर दिया गया था।
मौलवी कल्बे जव्वाद ने बताया, “विश्वविद्यालय ने एक जाँच समिति गठित की थी और उन्हें दोषी पाया गया था। आख़िरकार, उन्हें 6 अक्टूबर, 1975 को निष्कासित कर दिया गया।”
रामपुर में ज़मीन कब्जाने और किताबों की चोरी के आरोपों के अलावा आज़म ख़ान ने बीजेपी नेता जया प्रदा के ख़िलाफ़ अपमानजनक टिप्पणी भी की थी।
4 जून 2017 को विधायक कुलदीप सेंगर पर एक नाबालिग ने रेप का आरोप लगाया और 11 जून को पीड़िता अचानक गायब हो गई। इस संबंध में रिपोर्ट लिखवाई जाती है। पुलिस उसे 20 जून को ओरैया से बरामद करती है और अगले दिन उसे उन्नाव लाया जाता है। इस साल 29 जुलाई को रायबरेली के पास उस कार में ट्रक टक्कर मार देती है जिसमे पीड़िता सवार होती है। मामले की सीबीआई जांच कर रही है। जिसकी जाँच की जा रही है। जानें इस मामले में कब क्या हुआ।
कार एक्सीडेंट के बाद का पूरा घटनाक्रम
30 जुलाई को रेप पीड़िता की माँ द्वारा सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखा पत्र सामने आया।
12 जुलाई को लिखे गए इस पत्र में पीड़िता और उसके परिजनों को आरोपितों द्वारा सुलह न करने पर दी जा रही धमकियों का जिक्र था।
31 जुलाई को सीबीआई टीम जाँच के लिए एक्सीडेंट वाली जगह पहुँची।
सीबीआई ने कुलदीप सिंह सेंगर सहित 10 लोगों के खिलाफ नामजद और 15-20 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास, आपराधिक साजिश की धाराओं में केस दर्ज किया।
1 अगस्त को BJP ने कुलदीप सेंगर को पार्टी से निकाला।
1 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में सभी मामले उत्तर प्रदेश से दिल्ली की सीबीआई अदालत को ट्रांसफर करने का आदेश दिया।
2 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता के चाचा को सुरक्षा कारणों से दिल्ली के तिहाड़ जेल शिफ्ट करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने जाँच के लिए सीबीआई को 15 दिन का समय दिया।
वीडियो में पुलिस को घूस देते दिखा कुलदीप सेंगर का सहयोगी।
4 अगस्त को सीबीआई ने सबूत की तलाश में लखनऊ, उन्नाव, बाँदा और फतेहपुर में 17 ठिकानों पर छापेमारी की।
पीड़िता के गॉंव माखी में ग्रामीणों से पूछताछ।
माखी थाने में दस्तावेजों को खंगाला गया, पुलिसकर्मियों से पूछताछ।
सीसीटीवी फुटेज खंगाले और फोरेंसिक सबूत इकट्ठा किए।
पीड़िता के वकील के पड़ोसियों से भी पूछताछ।
आरोपित कुलदीप सिंह सेंगर के घर और दफ्तर पर छापेमारी कर अहम सबूत इकट्ठा किए।
फतेहपुर में कार को टक्कर मारने वाले ट्रक मालिक देवेंद्र किशोर पाल के घर और दफ्तर पर छापा, कई अहम दस्तावेज कब्जे में लिए।
बांदा में ट्रक ड्राइवर के माता-पिता से पूछताछ ।
मामले की सह आरोपी शशि सिंह का बेटा नवीन सिंह गिरफ्तार।
नवीन पर पीड़िता के परिजनों ने धमकी देने का आरोप था।
8 अगस्त को सीबीआई ने अदालत में बताया कि विधायक सेंगर के खिलाफ नाबालिग से रेप के पुख्ता सबूत हैं।
9 अगस्त को दिल्ली की तीस हजारी अदालत ने आरोपित कुलदीप सेंगर के खिलाफ आरोप तय किए।
सेंगर पर आईपीसी की धारा 120b, 363, 366, 109, 376(i) और पॉक्सो एक्ट के तहत आरोप तय।
सीपीआइ (एम) के महासचिव सीताराम येचुरी को श्रीनगर एयरपोर्ट से वापस उल्टे पाँव दिल्ली भेज दिया गया है। दरअसल, (कथित तौर पर) वो अपनी पार्टी के सदस्यों से मिलने के लिए जम्मू कश्मीर जा रहे थे, मगर श्रीनगर एयरपोर्ट पर उन्हें रोक दिया गया था। इससे पहले गुरुवार (अगस्त 8, 2019) को कॉन्ग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद को जम्मू-कश्मीर एयरपोर्ट पर रोक लिया गया था और फिर वापस दिल्ली भेज दिया गया था।
CPI(M) General Secretary, Sitaram Yechury is being sent back to Delhi. https://t.co/nCEpO9SVF8
बता दें कि, येचुरी के साथ माकपा महासचिव डी. राजा भी गए थे। सीताराम येचुरी और डी. राजा का कहना है कि उन्होंने जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक को गुरुवार को पत्र लिखकर अपनी यात्रा की सूचना दी थी और उनसे अनुरोध किया था कि उन्हें प्रवेश की अनुमति दी जाए। उन्होंने राज्यपाल से अनुरोध किया था कि उनकी यात्रा में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए। इसके बावजूद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
येचुरी ने बताया कि हिरासत में लेने की वजह पूछने पर पुलिस ने उन्हें एक कानूनी आदेश दिखाया, जिसमें श्रीनगर में किसी को प्रवेश की अनुमति नहीं देने की बात कही गई थी। इसमें कहा गया था कि सुरक्षा कारणों से पुलिस संरक्षण में भी शहर में जाने की अनुमति नहीं है। येचुरी ने कहा था कि वो लगातार बातचीत की कोशिश कर रहे हैं। मगर, उन्हें अब वापस दिल्ली भेज दिया गया है।
बता दें कि, जम्मू-कश्मीर से आर्किटल 370 के ज़रूरी हिस्सों के निष्क्रिय होने के बाद किसी भी तरह की हिंसा की घटनाओं पर काबू पाने के लिए सुरक्षा के कड़े इतंजाम किए गए हैं, केंद्रशासित प्रदेश में धारा 144 लागू है, जबकि कुछ इलाकों में कर्फ्यू जैसे हालात हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ( NSA) अजित डोभाल खुद वहाँ पर मौजूद हैं और सुरक्षा-व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 का पॉवर खत्म करके प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने जो ऐतिहासिक फैसला लिया है उसकी खुशी पूरे देश में मनाई जा रही है। लेकिन पाकिस्तान इससे खुश नहीं है। होना भी नहीं चाहिए!! दशकों से चले आ रहा कश्मीर के इस विवाद को भारत सरकार बिना हिंसा के सुलझा दे, ये पाकिस्तान कैसे पचा सकता है। अब चूँकि पाकिस्तान भारत के इस फैसले पर मूक होने के सिवा कुछ नहीं कर सका तो वो संयुक्त राष्ट्र के नाम पर भारत को गीदड़-भभकी देने लगा।
पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 के निष्प्रभावी होने पर अलग-अलग देशों से अलग-अलग तरीकों से मदद माँगी। लेकिन जवाब में फजीहत के सिवाय उनके हाथ कुछ नहीं लगा। 5 अगस्त को भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 समाप्त करके एक राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बाँट दिया- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख। पाकिस्तान ने इसका विरोध किया और यूएन के आदेश का उल्लंघन बताया। पाकिस्तान ने भारत के फैसले को गैरजिम्मेदार बताया और कहा- “इस्लामाबाद भारत के इस अवैध फैसले का मुकाबला करने के लिए सभी संभावित विकल्पों का इस्तेमाल करेगा।”
इसके बाद पाकिस्तान के एक्शन पर पॉवरफुल देशों ने क्या रिएक्शन दिया, आइए संक्षेप में जानें…
पाकिस्तान ने UNSC की अध्यक्षा को भारत द्वारा अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के संबंध में पत्र लिखा।
अफसोस! UNSC की अध्यक्षा ने इस पर कोई भी टिप्पणी देने से मना कर दिया। उन्होंने इस पर सिर्फ़ ‘नो कमेंट्स’ कहा।
वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने भी गुरुवार (अगस्त 8, 2019) को जम्मू और कश्मीर में मौजूदा स्थिति पर अधिकतम संयम बरतने की अपील की और कश्मीर के समाधान के लिए पाकिस्तान को द्विपक्षीय शिमला समझौते का निर्देश दिया।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भी अपने जारी बयान में स्पष्ट किया कि कश्मीर मसले पर अमेरिका की नीतियों में कोई बदलाव नहीं होगा।
अमेरिका ने इस मसले को भारत का आंतरिक मामला बताया है और पाकिस्तान से कहा है कि वह इसमें किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करेंगे।
भारत के विरोध में पाकिस्तान द्वारा भारतीय उच्चायुक्त को भेजने पर अमेरिकी सांसद रॉबर्ट मेनेनडेज और इलियट इनजेल ने बयान जारी कर पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की थी।
इस दौरान दोनों नेताओं ने पाकिस्तान को भारत पर कार्रवाई करने से ज्यादा उनके मुल्क की सरजमीं पर पल रहे आतंकी गुटों से निबटने की हिदायत दी थी।
इधर, अमेरिका-आधारित समूह ‘वॉयस ऑफ कराची’ ने भी कहा था, “पाकिस्तान को कश्मीरियों के बारे में बोलने का कोई हक नहीं, क्योंकि उसने खुद अपने नागरिकों को मूलभूत अधिकारों से वंचित रखा।”
इस मसले पर चीन ने भी पाकिस्तान का साथ देने से मना कर दिया। जिसकी जानकारी खुद पाकिस्तानी नेता शाहबाज शरीफ़ ने दी। उन्होंने बताया- ‘चीन आज तक हर मसले पर हमारे साथ खड़ा होता था उसने इस मसले पर एक शब्द भी प्रतिक्रिया देना मुनासिब नहीं समझा।’
सऊदी अरब ने भी अपनी तरफ से पाकिस्तान के समर्थन में कोई प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया है।
शाहबाज शरीफ़ ने अपने ही प्रधानमंत्री के बारे में कहा है,” इमरान खान तो ट्रंप से मध्यस्थता करने की बात ही करते रह गए, हिंदुस्तान के पीएम नरेंद्र मोदी ने जो करना था वो कर दिया।”
कानून के बढ़ते शिकंजे और परिवार के लोगों की गिरफ्तारी से अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम बेहद दहशत में है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अपने भाई इकबाल कासकर के बेटे रिजवान की गिरफ्तारी के अगले ही दिन दाऊद ने फहीम मचमच को बुलाकर उसे खूब फटकारा और गाली दी।
इधर, डी कंपनी में छोटा शकील और अनीस इब्राहिम के बीच वर्चस्व की लड़ाई भी चरम पर पहुँच गई है। सूत्रों की माने तो दाऊद भी बीते कुछ समय से भाई अनीस की बजाए छोटा शकील को ज्यादा भाव दे रहा है। मचमच भी छोटा शकील का ही शागिर्द है।
लेकिन, रिजवान की गिरफ्तारी से भड़के दाऊद ने मचमच को (जो उस समय यूएई में था) बुलाकर अपने परिवार की नई पीढ़ी को अपराध की दुनिया में घसीटने पर लताड़ा। रिजवान को मुंबई पुलिस ने धमकी देने और वसूली के आरोप में जून में गिरफ्तार किया था। कहा जा रहा है कि रिजवान मचमच के इशारे पर ही काम करता था और उसे अंडरवर्ल्ड में भी वही लेकर आया था।
टाइम्स ऑफ इंडिया ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि दाऊद नहीं चाहता है कि परिवार की नई पीढ़ी अपराध से जुड़े। परिवार की नई पीढ़ी के ज्यादातर लोग विदेशों में पढ़ाई कर रहे हैं तो कुछ अन्य खाड़ी देशों में शॉपिंग मॉल और अन्य व्यवसाय चला रहे हैं। सूत्र की माने तो दाऊद अपने दिवंगत भाई नूरा के बेटे सोहेल कासकर की गिरफ्तारी से पहले से ही परेशान था। उसके बाद बीते साल इकबाल पकड़ा गया और अब रिजवान की गिरफ्तारी ने उसे हिला कर रख दिया है। इकबाल भारत में रहने वाला दाऊद का एकमात्र भाई है। उसकी बहन हसीना पारकर की दो साल पहले ही दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी।
बताया जा रहा है कि बेइज्जत होने के बाद से मचमच कराची में है। गैंग के लोग भी अब उससे कन्नी काट रहे हैं और वह उन्हें मनाने में लगा है।
इस बीच, मुंबई पुलिस दाऊद और उसके गुर्गों से जुड़ी हर जानकारी ऑनलाइन करने जा रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसके लिए महाराष्ट्र पुलिस ने ऑटोमेटेड मल्टीमॉडल बायोमेट्रिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम यानी एम्बिस (AMBIS) शुरू किया है। अधिकारियों के मुताबिक इस सिस्टम को बहुत जल्द नेशनल क्राइम ब्यूरो और इंटरपोल से भी कनेक्ट किया जाएगा।
अनुच्छेद 370 के मुख्य प्रावधानों को निरस्त करने के साथ ही जम्मू कश्मीर विशेष राज्य नहीं रहा और इसे 2 केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने का रास्ता भी साफ़ हो गया। केंद्रीय गृह मंत्री ने संसद में संविधान संशोधन विधेयक पेश कर इस मैराथन कार्य को अंजाम दिया। अब जम्मू कश्मीर विधायिका सहित केंद्र शासित प्रदेश होगा, वहीं लद्दाख विधायिका रहित केंद्र शासित प्रदेश होगा। संसद में दिए गए विभिन्न भाषणों में अमित शाह ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों से राज्य को हुए नुकसानों की चर्चा की। अब देश के अन्य हिस्सों के लोग जम्मू कश्मीर में संपत्ति ख़रीद सकते हैं। साथ ही राज्य में अब्दुल्ला व मुफ़्ती परिवार के एकछत्र राज का भी अंत हो गया।
जम्मू, कश्मीर और लद्दाख की राजनीतिक भागीदारी में जो विषमता थी, वो भी अब दूर हो जाएगी। यहाँ इतिहास भी याद करने की ज़रूरत है। क्या आपको पता है कि सितम्बर 1964 में जब लाल बहादुर शास्त्री देश के प्रधानमंत्री थे, तब संसद में इसी तरह का एक बिल पेश किया था। उस समय संसद में इस पर ज़ोरदार बहस हुई थी और कई सांसदों ने अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने का समर्थन किया था। उस समय आर्य समाज के नेता प्रकाश वीर शास्त्री ने जम्मू कश्मीर को मिले विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने सम्बन्धी प्राइवेट मेंबर बिल संसद में पेश किया था।
अनुच्छेद 370 पर प्रकाश वीर शास्त्री के बिल का कई कॉन्ग्रेस सांसदों ने किया था समर्थन
तब कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता के हनुमंथैया ने लोकतंत्र की भावना का हवाला देते हुए गृह मंत्री ने निवेदन किया था कि इस बिल को स्वीकार किया जाए। मैसूर के मुख्यमंत्री रह चुके के हनुमंथैया बंगलोर से चुन कर आते थे और कॉन्ग्रेस के अनुभवी नेताओं में से एक थे। रेलवे और उद्योग जैसे कई मंत्रालय संभाल चुके हनुमंथैया का प्रकाश वीर शास्त्री के बिल को समर्थन यह दिखाता है कि उस समय बड़े कॉन्ग्रेस नेता भी जम्मू कश्मीर को मिले विशेष राज्य का दर्जा हटाने और अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने के पक्ष में थे। प्रकाश वीर शास्त्री 1977 में एक ट्रेन दुर्घटना का शिकार हो गए थे, जिसके बाद उनकी मौत हो गई थी।
सत्ता पक्ष और विपक्ष भी इस मसले पर एक दिखा था। अनुच्छेद 370 पर चर्चा करते हुए दिसंबर 1964 में तत्कालीन गृहमंत्री गुलजारी लाल नंदा ने कहा था- “अनुच्छेद 370 को चाहे आप रखें या न रखें, इसकी सामग्री को पूरी तरह से खाली कर दिया गया है। इसमें कुछ भी नहीं छोड़ा गया है। हम इसे एक दिन, 10 दिनों या 10 महीने में विनियमित कर सकते है और इस पर विचार हम सभी ही करेंगे।” इससे पता चलता है कि लाल बहादुर शास्त्री की सरकार के मन में भी कहीं न कहीं ये बात थी कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के लिए क्या किया जाए?
आज कॉन्ग्रेस के कई बड़े नेता भरता सरकार के निर्णय का विरोध कर रहे हैं। ग़ुलाम नबी आज़ाद ने तो इस दिन को काला दिन तक बता दिया। कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं ने अगर अपनी ही पार्टी का संसदीय इतिहास देखा होता तो शायद वे ऐसा नहीं करते। ख़ुद भीमराव अम्बेडकर अनुच्छेद 370 के विरोधी थे। कॉन्ग्रेस आज अपनी ही पार्टी के पुराने शीर्ष नेताओं की भावना के प्रतिकूल कार्य कर रही है। जब दिसंबर 1964 में इस पर बहस चली थी तब कुछ सांसदों ने कहा था कि अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर और शेष भारत के बीच के बड़ी दीवार है।
कुछ सांसदों ने इस अनुच्छेद को जम्मू कश्मीर और शेष भारत के बीच एक बड़े पहाड़ की संज्ञा भी दी थी। तब गृहमंत्री नंदा ने कहा था कि ये न तो पहाड़ है और न ही दीवार बल्कि एक टनल है। पंजिम के सांसद पीटर अगस्टस ने पूछा कि आख़िर हमें किसी टनल की ज़रूरत ही क्या है? नंदा ने जवाब देते हुए कहा कि इसे आप एक पार्टीशन समझ लीजिए, जिसे हम जब चाहें तब हटा सकते हैं। उन्होंने कहा था कि इसे हटाने के रास्ते में कुछ नहीं आ सकता। आज जब इस पार्टीशन को केंद्र सरकार की मजबूत इच्छशक्ति के कारण हटा दिया गया है, यही कॉन्ग्रेस तिलमिलाई क्यों हुई है?
हालाँकि, जवाहरलाल नेहरू ने ये ज़रूर कहा था कि अनुच्छेद 370 घिसते-घिसते अपनेआप ख़त्म हो जाएगा लेकिन नवंबर 1963 में संसद में उन्होंने इसके समर्थन में अजीबोगरीब तर्क भी दिए थे। पंडित नेहरू ने कहा था कि अगर अनुच्छेद 370 नहीं रहा तो देश के अलग-अलग हिस्सों से सक्षम लोग जम्मू कश्मीर में संपत्ति ख़रीदने की होड़ में शामिल हो जाएँगे। तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने कहा था कि लोगों द्वारा राज्य में ज़मीन ख़रीदने से वहाँ की ज़मीन के भाव भी आसमान छूने लगेंगे, जिससे स्थानीय लोगों को घाटा होगा।
अगर किसी क्षेत्र में ज़मीन के भाव बढ़ते हैं तो इससे वहाँ के स्थानीय लोग को घाटा हो, ऐसा शायद ही देखा गया है। जहाँ भी विकास कार्य तेज़ी से होते हैं, विश्वविद्यालय खुलते हैं या बड़े उद्योग स्थापित होते हैं, उस क्षेत्र व आसपास के इलाकों में ज़मीन का भाव बढ़ना लाजिमी है और इससे स्थानीय जनता को फायदा ही होता है। हालाँकि, नेहरू ने अपने इस बयान के पीछे कोई तर्क नहीं दिया था कि ज़मीन के भाव बढ़ने से स्थानीय लोगों को घाटा क्यों होगा?
उत्तर प्रदेश के मथुरा में कृष्ण जन्मस्थान मंदिर और वृंदावन के प्रेम मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। इस धमकी के बाद दोनों मंदिरों की सुरक्षा और बढ़ा दी गई है। सूचना मिलते ही भारी पुलिस फोर्स दोनों मंदिरों में तैनात किया गया। लोगों की चेकिंग और सख्त कर दी गई। मंदिर में डॉग स्कॉयड ले जाया गया। चप्पे-चप्पे की जाँच की गई। इधर खुफिया एजेंसियों को भी इसकी जानकारी दी गई। पुलिस ने उस मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगाया, जिससे मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी।
सर्विलांस से पता चला कि जिस नंबर से धमकी दी गई थी वह मुन्ना नाम के व्यक्ति का था। पुलिस ने उसको हिरासत में ले लिया है। पूछताछ में मुन्ना ने बताया कि वह एक ऑटो रिक्शा ड्राइवर है। गुरुवार (अगस्त 8, 2019) को उसके ऑटो में एक पर्यटक बैठा था। पर्यटक ने मुन्ना से कहा कि उसका मोबाइल खराब हो गया है और उसे इमरजेंसी में एक फोन करना है। उसने ड्राइवर का मोबाइल लिया और ऑटो से उतर गया। बात करते-करते वह व्यक्ति ऑटो से उतर गया और गायब हो गया।
Gyanendra Singh, Addl SP(Crime), Mathura: We got hold of Munna through surveillance. He says he was taking a tourist, who asked for his cell phone, to make a call. He later fled with his phone&then made these threat calls. 7 teams have been formed, tourist will be arrested soon. pic.twitter.com/bvlpLndZVe
पुलिस ने बताया कि सर्विलांस के दौरान पहले मोबाइल की लोकेशन बदलती रही और अब मोबाइल बंद है। जानकारी के मुताबिक, प्रेम मंदिर के एक कर्मचारी के मोबाइल पर गुरुवार दोपहर करीब 3:30 बजे एक फोन आया। फोन करने वाले ने प्रेम मंदिर और श्री कृष्ण जन्मस्थान को बम से उड़ाने की धमकी दी। इसके बाद फोन काट दिया गया। इस कॉल के बाद पुलिस ने मंदिरों में अलर्ट जारी कर दिया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ज्ञानेन्द्र सिंह ने बताया कि इस मामले की जाँच के लिए 7 टीमों का गठन किया गया है। जल्द ही आरोपित टूरिस्ट को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है। लेकिन पाकिस्तान हमेशा से ही धरती के इस स्वर्ग को नरक बनाने पर तुला रहा है। इस बात की पुष्टि कश्मीर की अलगाववादी नेता और वीमेन एक्टिविस्ट तनवीर फ़ातिमा ने की है। दरअसल, सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है। 57 सेकेंड के इस वीडियो में तनवीर ने पाकिस्तान के आला अधिकारियों और हुर्रियत के कई बड़े नेताओं को बेनकाब कर दिया है। उन्होंने कहा है कि भारत में अस्थिरता फैलाने के लिए पाकिस्तान कश्मीर में पत्थरबाजी करवाता है।
Watch Kashmiri woman activist Tanveer Fatima speak about the loot, killings and stone pelting industry by Kashmiri Separatists. Tanveer Fatima herself has been associated with Kashmiri Separatists and this is what she has to say now. Let us all Kashmiris pause and think today. pic.twitter.com/qDm9qS49kO
इस वीडियो में तनवीर फ़ातिमा ने हुर्रियत नेता सैय्यद अली शाह गिलानी, अलगाववादी नेता यासिन मलिक और मीर वाइज़ का भी नाम लेते हुए कहा है कि ये लोग बच्चों को गुमराह करते हैं। उन्हें आज़ादी के सपने दिखा पत्थरबाज़ी की राह पर ले जाते हैं। ये नेता सिर्फ़ अपने स्वार्थ के लिए बच्चों का इस्तेमाल करते हैं।
इस वीडियो में तनवीर फ़ातिमा भावुक होते हुए कह रही हैं कि हालात बेहद ख़राब हैं। उन्होंने कहा कि वो अपने बुज़ुर्ग माता-पिता से मिल नहीं पा रही हैं। आज पिछले 30 वर्षों से आज़ादी के नाम पर हमारे क़रीब 2-2.5 लाख जवान शहीद हो गए हैं।
उन्होंने कहा है कि हुर्रियत और अलगाववादियों ने आज़ादी के नाम पर हमारे बच्चों से पत्थरबाज़ी करवाई, बंदूकें चलवाई जो कि अच्छी बात नहीं थी। इस वजह से हम दुनिया की नज़र में एक अलग क़ौम बन गए जबकि हम पढ़ी-लिखी क़ौम है। हममें तहज़ीब है, हमारा इस्तेमाल पत्थरबाजी और बंदूकें चलाने के लिए किया गया।
मुख्यमंत्री कमलनाथ की पहल पर बिड़ला ग्रुप के कुमार मंगलम बिड़ला ने मध्य प्रदेश में 100 हाईटेक गो-शालाओं का निर्माण करने पर अपनी सहमति दे दी है। ये गो-शालाएँ अगले 18 महीनों में बिड़ला ग्रुप की सामाजिक ज़िम्मेदारी निधि से बनाई जाएँगी। मध्य प्रदेश में निवेश के लिए उद्योगपतियों का भरोसा फिर से हासिल करने की मुहिम में जुटे कमलनाथ ने गुरुवार (8 अगस्त) को दूसरे दिन बिड़ला ग्रुप, महिंद्रा एड महिंद्रा, शापूरजी पालोनजी समेत अन्य औद्योगिक समूहों के प्रमुखों के साथ राउंड टेबल चर्चा की।
चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि बिड़ला ग्रुप ने मध्य प्रदेश में गोवंश के लिए बड़े पैमाने पर गोशाला खोलने का काम अपने हाथ में लिया है। बिड़ला ग्रुप ने प्रदेश परियोजना को सराहते हुए 100 हाईटेक गोशाला (व्यवस्थित शेड, घूमने के लिए अलग स्थान, चारा देने से लेकर गोबर व मूत्र संग्रह के लिए फिल्टरेशन प्लांट) का निर्माण करने की ज़िम्मेदारी अपने हाथों ली है।
इसके अलावा कमलनाथ सरकार को इस काम के लिए अन्य ग्रुप और दानदाताओं से भी उम्मीद है कि वो भी आगे आएँगे और गोवंश के लिए इस काम में अपना सहयोग देंगे। मीटिंग के दौरान मुख्यमंत्री कमलनाथ ने रोज़गार निर्माण के लिए नए उद्योगों में निवेश संभावनाओं को रेखांकित किया। कमलनाथ ने कहा कि निवेश और विश्वास परस्पर एक-दूसरे पर निर्भर हैं। इस संदर्भ में उन्होंने बताया कि हर क्षेत्र के लिए अलग से निवेश नीति बनाई जाएगी। साथ ही ड्राई पोर्ट, सैटेलाइट शहर, उच्चस्तरीय कौशल विकास केंद्र और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में मध्य प्रदेश को तेज़ी से आगे बढ़ाना है।
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के प्रबंध संचालक पवन गोयनका से ई-रिक्शा और ई-ऑटो निर्माण की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के लिए आवास उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वहीं, ख़बर यह भी है कि देश के अन्य राज्यों में इस दिशा में हुए कामों का अध्ययन कर मध्य प्रदेश के लिए एक आदर्श नीति बनाई जाएगी।
दिल्ली की एक विशेष अदालत ने पूर्व केन्द्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम की गिरफ्तारी पर 23 अगस्त तक रोक लगा दी है। मामला एयरसेल-मैक्सिस केस से जुड़ा है। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी सरकारी एजेंसियाँ इस मामले की जाँच कर रही हैं। इससे पहले भी कई बार चिदंबरम पिता-पुत्र को गिरफ़्तारी से अदालत राहत दे चुकी है। अदालत ने इस मामले में जमानत के लिए 23 अगस्त और संज्ञान लेने के लिए 6 सितम्बर की तारीख मुक़र्रर की है।
पी चिदंबरम पर आरोप है कि उन्होंने वित्त मंत्री रहते विदेशी निवेशकों के साथ मिल कर मनी लॉन्डरिंग को अंजाम दिया। चिदंबरम पर प्रवर्तन निदेशालय ने अपने पद और पावर के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। चिदंबरम ने 2006 में केंद्रीय वित्त मंत्री रहते मॉरीशस की एक कम्पनी को निवेश हेतु FIPB (Foreign Investment Promotion Board) क्लियरेंस दिया था।
A Special Delhi court extends till August 23, the interim protection from arrest to P Chidambaram and Karti Chidambaram in Aircel-Maxis cases filed by CBI and ED. Matter has been adjourned to 23rd August for bail applications and 6th September for cognizance. (file pics) pic.twitter.com/MZez8lxtAN
ईडी ने कहा है कि चिदंबरम ने ऐसा करने के लिए एफडीआई के तमाम नियमों को ताक पर रख दिया। इस केस में चिदंबरम के पुत्र कार्ति चिदंबरम पर अनुचित लाभ हासिल करने का आरोप है। कार्ति को आईएनएक्स मीडिया से जुड़े एक अन्य मामले में मार्च 2018 में गिरफ़्तार भी किया गया था। पिछले वर्ष अदालत ने दोनों पिता-पुत्र को 1 नवम्बर तक गिरफ़्तारी से राहत प्रदान की थी। उसके बाद से कई मौकों पर इसे बढ़ाया गया है।