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राम मंदिर पर रोजाना सुनवाई नहीं रुकेगी, आप Mid-Week ब्रेक ले लेना: SC की मुस्लिम पक्षकार को 2 टूक

सुप्रीम कोर्ट ने रोजाना सुनवाई पर बाबरी मस्जिद पक्ष की माँग ठुकरा दी है। अदालत ने कहा है कि राम मंदिर मुद्दे की रोजाना सुनवाई (सप्ताह में 5 दिन) जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद पक्ष के वकील राजीव धवन से कहा कि अगर वो आराम करना चाहते हैं तो उन्हें मिड-वीक ब्रेक दिया जाएगा लेकिन बेंच सुनवाई जारी रखेगी। मुस्लिम पक्षकार ने प्रतिदिन सुनवाई को ‘टॉर्चर’ बताया था।

बता दें कि मुस्लिम पक्षकारों के वकील राजीव धवन ने मामले की सप्ताह में पॉंच दिन सुनवाई करने के फैसले पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कोर्ट से पाँच दिन सुनवाई पर स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि अगर इतनी तेज सुनवाई हुई तो उनके लिए न्यायालय में पैरवी कर पाना संभव नहीं होगा।

धवन ने कहा था, “यदि इस मामले पर कोर्ट में हफ्ते में पाँच दिन सुनवाई होती है तो यह अमानवीय होगा।” उनके मुताबिक हमें दिन रात अनुवाद के कागज पढ़ने और अन्य तैयारियाँ करनी पड़ती हैं। ऐसे में रोजाना सुनवाई में दलीलें रखने में मैं असमर्थ हूँ। इस स्थिति में वह अदालत की तेजी के साथ तालमेल नहीं बिठा पाएँगे और वे केस छोड़ने को मजबूर होंगे।

बीते दिन पीठ ने अयोध्या मामले में रोजाना सुनवाई का फैसला लिया था। इससे पहले परंपरा के अनुसार मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को ही मामले की सुनवाई तय की गई थी। लेकिन गुरुवार को कोर्ट ने तय किया कि इस केस की सुनवाई हफ्ते के पाँचों दिन होगी। 


पाकिस्तान में भगवा संगठन दाखिल, भारतीय सेना भी जल्द पहुँचेगी: शिवसेना

कश्मीर को पाकिस्तान के लिए बंद अध्याय बताते हुए शिवसेना ने कहा है कि अब उसके पास पीओके है जिसका समाधान भी जल्द हो जाएगा। पार्टी ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निष्क्रिय करने के बाद इस्लामाबाद ने कूटनीतिक संबंधों का स्तर घटाने का जो फैसला किया है, वह पाकिस्तान को ही नुकसान पहुँचाएगा।

पाकिस्तान ने बुधवार (अगस्त 7, 2019) को भारत के फैसले को एकतरफा और अवैध बताते हुए भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया को निष्कासित कर दिया था। शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में इस्लामाबाद की प्रतिक्रिया को महत्वहीन करार देते हुए कहा गया है कि पाकिस्तान और कर भी क्या सकता है।

शिवसेना ने भारत के साथ राजनयिक संबंधों को कम करने के लिए पाकिस्तान को ‘‘धन्यवाद’’ देते हुए कहा कि इस्लामाबाद को स्वीकार कर लेना चाहिए कि कश्मीर मुद्दा उसके लिए बंद अध्याय है और उनके पास अब केवल पीओके है जिसका जल्द समाधान हो जाएगा।

इस्लामाबाद के कई हिस्से में भारत समर्थक बैनरों और उस पर लिखे गए शिवसेना के नेता संजय राउत के बयानों के बारे में संपादकीय में कहा गया है कि भगवा संगठन पाकिस्तान के क्षेत्र में प्रवेश कर गया है और भारतीय सेना भी जल्द ही वहाँ पहुँचेगी। बता दें कि, बीते दिनों इस्लामाबाद में शिवसेना का बैनर लगा था, जिसमें संजय राउत का वो बयान लिखा था जिसमें उन्होंने कहा था, ”आज जम्मू और कश्मीर लिया है, कल बलूचिस्तान, पीओके लेंगे। मुझे विश्वास है कि प्रधानमंत्री अखंड भारत का सपना पूरा करेंगे।”

इसके साथ ही मराठी दैनिक में लिखा गया है कि संबंधों को कमतर करने से भारत की तुलना में पाकिस्तान को ज्यादा नुकसान होगा। इसमें कहा गया है कि शिवसेना कई वर्षों से माँग करती रही है कि नई दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग को बंद किया जाए, क्योंकि कश्मीरी अलगाववादियों का वहाँ से वित्त पोषण होता है।

बीजेपी की सहयोगी पार्टी ने कहा कि यह सबको पता है कि कश्मीरी आतंकवादी ‘भारत विरोधी षड्यंत्रों’ के लिए पाकिस्तान उच्चायोग आते हैं। साथ ही अखबार में लिखा गया है, ‘‘अगर पाकिस्तान ने नई दिल्ली में अपना उच्चायोग बंद नहीं किया होता, तो उसके उच्चायुक्त को यहाँ से भागना पड़ता क्योंकि यहाँ काफी गुस्सा है और अब दोनों देशों के बीच कोई भावनात्मक जुड़ाव नहीं है।”

जम्मू-कश्मीर व लद्दाख के 8 लाख परिवारों के बैंक खाते में पहुँचे ₹4-4 हज़ार

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि स्कीम के तहत क़रीब 8 लाख परिवारों के बैंक खाते में 4-4 हज़ार रुपए भेजे गए हैं। ख़बर के अनुसार, यह पैसा अनुच्छेद-370 में संशोधन से पहले ही भेज दिया गया था। कहा जा रहा है कि सरकार जल्द ही दो-दो हज़ार रुपए और भेजेगी। 

सरकार ने यह पैसा इसलिए भेजा है, जिससे वहाँ के किसान बिना क़र्ज़ के खेती-किसानी का काम कर सकें। जानकारों का मानना है कि अनुच्छेद-370 में संशोधन के बाद सरकार द्वारा पैसा भेजने में तेज़ी आएगी क्योंकि वहाँ की शासन व्यवस्था अब सीधे केंद्र के हाथों में है।

जानकारी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर की 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर करती है। वहाँ पर केसर की खेती मशहूर है, सेब के बागान हैं और बड़े पैमाने पर फूलों की भी खेती होती है। इसके अलावा धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, दलहन, कपास, तंबाकू, गेहूँ और जौ की भी पैदावार होती है। लद्दाख में चने की खेती होती है।

ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अनुच्छेद-370 में संशोधन के बाद राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में इस बात को स्पष्ट कर दिया था कि देश की सभी योजनाओं का लाभ अब जम्मू-कश्मीर के लोगों को भी मिलेगा। बता दें कि पीएम मोदी के इस संबोधन से पहले ही सरकार वहाँ के किसानों को पैसा जारी कर चुकी है। इनमें सबसे ज़्यादा फ़ायदा बारामूला, कुपवाड़ा, बड़गाम, पुंछ और पुलवामा में हुआ है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार, 8 अगस्त तक केंद्र सरकार ने सबसे ज़्यादा 77038 लोगों को कुपवाड़ा में लाभ पहुँचाया है। बारामूला 75391 लाभार्थी किसानों के साथ दूसरे स्थान पर है। बड़गाँव में 63392, जम्मू में 57095 और पुलवामा में 38592 लोगों के बैंक खाते में 4-4 हज़ार रुपए भेजे गए हैं। 

वहीं, लेह-लद्दाख में क़रीब 4878 और कारगिल में 7782 लोगों को लाभ पहुँचाए जाने की ख़बर है।

समुद्री रास्ते से घुसने की फिराक में आतंकी, POK में दिखा अजगर

पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा हमले की आशंका के कारण पंजाब और मुंबई पहले से ही अलर्ट पर हैं। अब नई सूचना आ रही है कि आतंकी समुद्री रास्ते से भारत में प्रवेश कर शांति में खलल डाल सकते हैं। भारत की 7500 किलोमीटर से भी अधिक लम्बी समुद्री सीमा पर नौसेना कड़ी नज़र रख रही है।

भारतीय नौसेना के अधिकारियों ने बताया कि ईस्टर्न और वेस्टर्न सीबोर्ड्स पर नेवी को पूरी तरह अलर्ट पर रखा गया है। सभी संवेदनशील स्थलों पर रडार की तैनाती की है और कड़ी नजर रखी जा रही है। पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में मसूद अज़हर के भाई रउफ अज़गर की सक्रियता में तेज़ी आ गई है और उसे क्षेत्र में देखा गया है। इसके बाद भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियाँ भी पूरे घटनाक्रम पर निगाह बनाए हुए हैं।

पंजाब में बड़ी संख्या में जैश के कैम्प सीमा के नजदीक शिफ्ट किए जा रहे हैं। पाक सेनाध्यक्ष बाजवा के बयान को भी सेना ने गंभीरता से लिया है। बाजवा ने गीदड़-भभकी दी थी कि ‘कश्मीरियों के हितों की रक्षा के लिए’ पाकिस्तानी फौज किसी भी हद तक जाएगी। भारत के पास पहले से ही गुरुग्राम में Information Management and Analysis Center (IMAC) है जो कोस्टल रडार के चेन और ज्वाइंट ऑपरेशन सेंटर से जुड़ा हुआ है।

2008 में मुंबई में हुए हमले को भी समुद्री रास्ते से दाखिल हुए आतंकियों ने ही अंजाम दिया था। यही कारण है कि इस बार भारतीय सुरक्षा बल, नेवी और ख़ुफ़िया एजेंसियाँ किसी भी प्रकार का रिस्क लेने के लिए तैयार नहीं हैं और पहले से ही पूरी तरह अलर्ट पर हैं।

इन ट्वीट्स को पढ़ कर लगता है पाकिस्तानी नेताओं की बुरी तरह से सुलग गई है…

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी होने के बाद 5 अगस्त से ही पाकिस्तानी आवाम  बौखलाई बैठी है। पिछले दिनों हमने सोशल मीडिया पर वहाँ की जनता से लेकर कलाकारों तक की टिप्पणियाँ सोशल मीडिया पर गौर की। लेकिन अब वहाँ के शीर्ष अधिकारियों की भाषा पर भी नजर डालिए, जो कश्मीर हाथ से जाने के कारण संयमित नहीं रह पा रही हैं।

वहाँ किसी नेता को भारत का ये कदम कश्मीरियों का दमन लग रहा है तो कोई नेता भारत के इस फैसले को उसका नाजीवादी चेहरा बता रहा है। किसी को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीफ़ खाने वाले लोगों के साथ बीफ का निर्यात करने वाले लोगों के हत्यारे दिख रहे हैं। ऐसे अनेकों उलाहनाएँ देकर पाकिस्तानी नेता और अधिकारी इन दिनों खुद को संतुष्ट करने में लगे हुए हैं। उनमें से कुछ के बयानों पर एक नजर:-

सरकार के फैसले के बाद पाकिस्तानी सेना के आधिकारिक ट्विटर से इस संबंध में कुछ ऐसे ट्वीट आए- “फोरम पूरे तरीके से सरकार (पाकिस्तान) के साथ है और कश्मीर पर लिए गए भारत के ऐक्शन को हम नकारते हैं। पाकिस्तान ने कभी भी सालों पहले दिखावटी ढंग से आर्टिकल 370 और 35-ए के जरिए जम्मू कश्मीर को कब्जाने को मान्यता नहीं दी है। पाकिस्तान की सेना, कश्मीरियों के साथ हो रहे अत्याचार के खिलाफ उनके साथ है।”

पाकिस्तान सेना के पब्लिसिटी स्टंटबाज मेजर जनरल गफूर खान भारत का फैसला आने के बाद धमकी भरे अंदाज में लिखते हैं। “यह खत्म नहीं हुआ। यह तब तक नहीं होगा जब तक कि हमारे कश्मीरियों का संघर्ष सफल नहीं हो जाता।” वह लिखते हैं कि वह कश्मीरियों के आत्मनिर्णय अधिकार के लिए किसी भी हद तक जाएँगे। एक अवैध पेपर उन्हें परेशान नहीं कर सकता।

पाकिस्तान सरकार के राज्य मंत्री शहरयार अफरीदी कहते हैं कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 निरस्त करके भारत ने कश्मीरियों के प्रति अपने दानवीय इरादों का उदाहरण पेश किया है। इसलिए अब पाक और अन्य जिम्मेदार राज्य संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के आदेश के तहत कश्मीर के आत्मनिर्णय के अधिकार को सुनिश्चित करेंगे। भारत अपने अमानवीय अजेंडे कश्मीरियों पर नहीं थोप सकता।

अकसर चर्चा में रहने वाले पाकिस्तान मंत्री फवाद चौधरी हुसैन भी इसपर 6 तारीख को ट्वीट करके अपनी भड़ास निकालते हैं। अपने ट्वीट पर लिखते हैं, “मोदी सरकार कश्मीर को दूसरा फिलिस्तीन बनाना चाहती है। वह वहाँ की जनसंख्या जनसांख्यिकी में बदलाव करने के लिए बाकी लोगों को कश्मीर में बसाना चाहती है। सांसदों को तुच्छ मुद्दों पर लड़ना बंद करके भारत को खून, आँसू और पसीने से जवाब देना चाहिए। अगर जंग थोपी जाए तो हमें जंग के लिए तैयार रहना चाहिए।”

नेशनल असेंबली के सदस्य मुराद सईद की मानें तो वो पूरी दुनिया से सवाल कर रहे हैं, “कब तक मोदी का नव-नाजी शासन सोचता है कि वो कश्मीर के हालात छिपा कर रख सकता है? कश्मीर दहाड़ के साथ गर्जना करेगा जो भारत की नींव हिला देगा।”

पाकिस्तान की राजनैतिक पार्टी पीटीआई के सदस्य असद उमर अपने ट्वीट में कश्मीर में तैनात हुए 10,000 सुरक्षबलों का हवाला दे रहे हैं, पाकिस्तान में बैठकर कश्मीर में लगे कर्फ्यू पर चिंता जाहिर कर रहे हैं। फोन पर बातचीत न हो पाने का रोना रो रहे हैं। इतना ही नहीं वह गुजरात में हुए दंगों का हवाला देकर दुनिया को बता रहे हैं कि मोदी की एंट्री पहले न केवल पाकिस्तान में बल्कि यूएस और यूएन में भी बैन थी। उनका इतिहास रहा है नरसंहार को समर्थन देने का।

ये सब देख कर तो यही याद आता है:

पाक बिल्ली-भारत शेर, लेकर रहेंगे POK : इमरान को मोदी के मंत्री का दो टूक

पाकिस्तान की युद्ध संबंधी गीदड़ भभकियों का केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास अठावले ने करारा जवाब दिया है। उन्होंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि वो आर-पार की लड़ाई चाहते हैं तो भारत भी इससे पीछे नहीं हटेगा और अब पीओके (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) भी वापस लेकर रहेगा।

दरअसल, जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने के बाद से ही पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। उसने भारत के साथ व्यापारिक और राजनयिक रिश्ते खत्म करने जैसे कई कदम उठाए हैं। साथ ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री समेत कई मंत्रियों ने भारत को युद्ध की धमकी भी दी है।

इसके जवाब में अठावले ने कहा, “पाकिस्तान एक बिल्ली के समान है, जबकि भारत शेर है। इमरान खान को भारत के साथ दुश्मनी भारी पड़ेगी। फिर भी वे ऐसा चाहते हैं तो हमें भी एक बार आर-पार की लड़ाई लड़नी होगी और पीओके लेना ही पड़ेगा। हम भी हर स्थिति के लिए तैयार हैं। ईंट का जवाब पत्‍थर से दिया जाएगा।”

रामदास अठावले का कहना है कि पाकिस्तान केवल गीदड़ भभकियाँ ही दे सकता है, लेकिन इस बार किसी भी बात को हल्के में नहीं लिया जाएगा और हर स्तर पर उसे जवाब दिया जाएगा। अंगदान कार्यक्रम की शुरुआत करने मथुरा पहुँचे केंद्रीय राज्य मंत्री ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि वो अपने आपको सुधार लें, जिससे कि शांति बनी रहे, वरना भारत ने पाकिस्तान को पहले भी कारगिल के युद्ध में धूल चटाई थी और अगर इस बार भी नहीं माना, तो ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाएगा।

…अब ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन ने की PM मोदी से Pak कलाकारों पर ब्लैंकेट बैन की माँग

कश्मीर से अनुच्छेद 370 पर पाकिस्तान लगातार अपनी प्रतिक्रियाएँ दे रहा है। पाकिस्तान ने कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से अलगवावादियों का समर्थन करते हुए भारत से सभी तरह के संबंध खत्म करने का फैसला लिया है। इसी कड़ी में एक दिन पहले पाकिस्तान ने भारतीय फिल्मों के पाकिस्तान में प्रदर्शन पर बैन लगा दिया है।

इसी कदम के जवाब में ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन (एआईसीडब्ल्यूए) All Indian Cine Workers Association (AICWA) ने पीएम नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर बॉलीवुड में पाक कलाकारों पर ब्लैंकेट बैन की माँग की है।

एआईसीडब्ल्यूए के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने पाकिस्तान में जिस तरह भारतीय सिनेमा पर रोक लगाने की बात कही है, उसी प्रकार हम भी फिल्म इंडस्ट्री से अनुरोध करते हैं कि वे भी पाकिस्तानी आर्टिस्ट, म्यूजीशियन और डिप्लोमेट पर रोक लगाएँ। उन्होंने एक स्टेटमेंट जारी कर पाकिस्तानियों पर रोक लगाने की माँग की है। 

जब पाकिस्तानी ‘मोमिन’ गायक गुलाम अली ने बताया था भारतीय ‘काफिरों’ के रुपयों को जायज

दरअसल, पाकिस्तान में भारतीय सिनेमा पर रोक लगाने पर एक बयान सामने आया था। इसमें पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के आई एंड बी के स्पेशल असिस्टेंट ने कहा था कि पाकिस्तान के सिनेमाघरों में भारतीय फिल्मों की स्क्रीनिंग नहीं की जाएगी।

क्या है ब्लैंकेट बैन?

ब्लैंकेट बैन का मतलब किसी भी चीज पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाना है। इसके पहले AICWA ने फरवरी 2019 में पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के विरोध में भी पाकिस्तानी कलाकारों के बॉलीवुड में काम करने को लेकर पूर्ण प्रतिबंध की माँग की थी।

देखा जाए तो यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तानी कलाकार भारत से नफरत करने के बावजूद यहाँ रोजगार और रुपयों के लिए आते रहते हैं। ऐसा ही एक किस्सा आप यहाँ पढ़ सकते हैं, जब मशहूर ग़ज़ल गायक गुलाम अली को ‘काफिरों’ के पैसों को जायज बताने के चक्कर में करारा जवाब मिला था। उन्होंने कहा था कि एक ‘मोमिन’ होने के नाते वो भारत देश के काफ़िरों की सिर्फ शराब, शबाब और और पैसा पसंद करते हैं और इसमें उन्हें कोई परेशानी नहीं होती। लेकिन…

तालिबान ने डाँटा, चीन ने निराश किया: J&K पर दोस्त भी Pak के नहीं साथ

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी चीन के दौरे पर पहुँचे हैं। पाकिस्तान सदाबहार ‘दोस्त’ चीन से पक्ष में बयान दिलवाने के लिए आतुर है और इस सम्बन्ध में पाक विदेश मंत्री ने चीन से गुजारिश भी की। पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर को द्विपक्षीय मुद्दा बताते हुए कहा है कि भारत द्वारा अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म करना ‘अवैध’ है। पाकिस्तान इस मसले को संयुक्त राष्ट्र तक ले जाने की बार-बार धमकी दे रहा है।

लेकिन, उसके इस रुख का चीन समर्थन करता नहीं दिख रहा। चीन ने दोनों ही देशों को बातचीत के जरिए मसला सुलझाने की सलाह दी। चीन ने अपने बयान में अनुच्छेद 370 का कोई जिक्र किए बिना क्षेत्र की शांति और स्थिरता बनाए रखने की अपील की है। उसने कहा कहा है कि दोनों देशों को ऐसे क़दम उठाने से बचना चाहिए, जिससे यथास्थिति पर कोई बुरा प्रभाव पड़े।

चीन द्वारा अनुच्छेद 370 और भारत पर प्रत्यक्ष टिप्पणी न करने से पाकिस्तान निराश है। उधर, तालिबान ने भी पाक को खरी-खरी सुनाई है। तालिबान ने कश्मीर को अफ़ग़ानिस्तान से न जोड़ने की हिदायत दी है। तालिबान के प्रवक्ता ने कहा है कि कुछ पक्षों द्वारा कश्मीर को अफ़ग़ानिस्तान से जोड़ कर देखना समस्या को खत्म नहीं करेगा, क्योंकि कश्मीर और अफ़ग़ानिस्तान अलग-अलग मसले हैं। तालिबान ने शांति बनाए रखने की अपील करते हुए सलाह दी है कि अफ़ग़ानिस्तान को थिएटर न बनाएँ।

कश्मीर मुद्दे पर तालिबान का बयान

तालिबान का इशारा पाकिस्तान के विपक्षी नेता शाहबाज़ शरीफ के बयान की तरफ था। शरीफ ने कहा था कि जहाँ एक तरफ अफ़ग़ान काबुल में शांति की बात करते हैं वहीं कश्मीर में ख़ून बहाया जाता है। शरीफ ने इसे अस्वीकार्य बताया था। यही बात तालिबान को नागवार गुजरी है। इसके बाद अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तान के एम्बेसडर को सफाई देनी पड़ी। पाकिस्तानी राजनयिक ने कहा कि कश्मीर मसले का अफ़ग़ानिस्तान की शांति प्रक्रिया पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा।

तालिबान द्वारा डाँटे जाने और चीन से अपेक्षित समर्थन न मिलने के बाद पाकिस्तान की स्थिति और बदतर हो चली है। संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका से उसे निराशा ही मिली ही है। बता दें कि भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर भी रविवार (अगस्त 11, 2019) को चीन दौरे पर जाने वाले हैं।

बिहारियों पर केंद्र कब ध्यान देगा? क्या बिहारी भी उठा ले पत्थर?

शास्त्रीय संगीत के वाद्ययंत्र सितार का जिक्र जैसे ही होगा, वैसे ही पण्डित रविशंकर की याद आ जाती है। उनके खुद के सितार बजाने की कला सम्मानित है, लेकिन उनकी कला उन तक ही सीमित भी नहीं है। वो अपनी कला अपनी अगली पीढ़ी तक पहुँचाने में भी कामयाब रहे हैं। उनकी बेटियाँ, अनुष्का शंकर हों या नोरा जोन्स, दोनों ही संगीत के क्षेत्र में जानी-मानी हस्तियाँ हैं। ऐसा आम तौर पर लेखन में होता नहीं देखा गया।

संगीत, नृत्य आदि विधाओं में जहाँ माता-पिता अपने पुत्रों या पुत्रियों को अपने ही जैसा सिखा कर तैयार कर पाते हैं, वैसा किसी एक भी लेखक ने किया हो याद नहीं आता। हाँ, पत्रकारिता की नौकरी में जरूर लोग अपने बच्चों को एक नौकरी दिलवा देते हैं, मगर उसे लेखन की क्षमता तो नहीं कह सकते। ज्यादा से ज्यादा वो नौकरी ही रहेगी।

खैर, वापस संगीत और पण्डित रविशंकर पर चलें तो उन्होंने संगीत की शिक्षा उस्ताद अल्लाउदीन खां से ली थी। बाद में उस्ताद अल्लाउदीन खां की ही बेटी अन्नपूर्णा से उन्होंने शादी भी की थी। वो जब 1938 से 1944 के बीच संगीत सीखा करते थे, तो आज जैसा दौर नहीं था। छात्र-छात्राओं की पिटाई पर शिक्षक को जेल में डालने का कानून नहीं था। पण्डित रविशंकर के उस्ताद अल्लाउदीन खां इस मामले में कुछ ज्यादा सख्त भी थे।

सुर, लय, ताल कुछ भी जरा सा छूटे तो वो पण्डित रविशंकर को बाहर पेड़ में बांधकर डंडों से पिटाई करते! एक दिन इन सबसे दुखी पण्डित रविशंकर उस्ताद के पास से भाग निकले! थोड़ी देर बाद उस्ताद के बेटे ने उन्हें रेलवे स्टेशन पर ढूँढ निकाला।

वो आए और पण्डित रविशंकर के पास बैठे। उन्होंने पूछा, क्या हुआ, क्यों भाग आये हो? पण्डित रविशंकर ने बताया कि ये सख्ती कुछ ज्यादा है, मुझसे अब झेली नहीं जाती। उस्ताद के बेटे ने कहा तुम किस्मत वाले हो जो तुम्हें पिताजी इतने ध्यान से सिखाते हैं, मुझे वो कभी ऐसे नहीं सिखाते!

इस तरह से सिखाए जाने का नतीजा क्या हुआ इस बारे में कुछ भी कहने की कोई ख़ास जरूरत नहीं होती। जिसे इतने ध्यान से सिखाया जा रहा हो, उसे पद्म भूषण मिले या तीन बार ग्रैमी, आश्चर्य नहीं होना चाहिए। हमें ये कहानी इसलिए याद आती है क्योंकि हम बिहार में रहते हैं जहाँ की आबादी 13 करोड़ के लगभग है। हमें कश्मीर दिखता है जहाँ की आबादी यहाँ का मुश्किल से दसवाँ हिस्सा होगी। मुझे ये दिखता है कि वहाँ कितना ध्यान दिया जा रहा है और यहाँ कितन कम ध्यान दिया जाता है।

मुझे वहाँ की बाढ़ में बचाव कार्य दिखता है और राहत-बचाव के बाद चलते पत्थर दिखते हैं। मुझे बिहार की बाढ़ दिखती है जहाँ डूबने पर खबर इतनी बड़ी भी नहीं होती कि एक दिन नेशनल मीडिया पर चलाया जा सके। जंगल में सबसे सीधे पेड़ सबसे पहले काटे जाते हैं, ऐसा कहावतें कहती हैं और शैतान-शरारती बच्चों पर ज्यादा ध्यान और बेचारे भले सीधे आदमी को लात खाते देखने का दस साल का अनुभव तो जरूर है।

बाकी मुझे भी लगता है बिहारियों को हंगामा करने वाला होना चाहिए था। तोड़-फोड़ करते, असम से मुंबई तक दिगबोई का तेल नहीं पहुँचने देते, मुंबई-दिल्ली जाने वाली ट्रेन रोकते, हंगामा – या बिलकुल ही कहर बरपाया होता तो शायद हमपर भी ध्यान दिया जाता। हमारा अफ़सोस भी उस्ताद अल्लाउदीन खान के बेटे वाला ही है।

हम पर किसी का ध्यान ही नहीं रहता!

‘हेडलेस’ कॉन्ग्रेस ‘ब्रेनलेस’ हो गई है: Article 370 पर विलाप को लेकर बोले नकवी

जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 को निष्प्रभावी किए जाने पर कॉन्ग्रेस के विलाप को खारिज करते हुए केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि ‘हेडलेस’ कॉन्ग्रेस अब ‘ब्रेनलेस’ हो गई। ‘हेडलेस’ से उनका तात्पर्य काफी समय से खाली पड़े कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर था।

एएनआई को नकवी ने बताया, “पूरे देश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की नीतियों और नी​यत पर भरोसा है। इनमें जम्मू कश्मीर और लद्दाख के ज्यादातर लोग भी शामिल हैं और वे इस फैसले का जश्न मना रहे हैं।”

कॉन्ग्रेस के विरोध को लेकर उन्होंने कहा, “यह नया नहीं हैं। जब सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुआ था तब पाकिस्तान के साथ-साथ यहॉं भी कुछ लोग इसके सबूत मॉंग रहे थे। कॉन्ग्रेस के लोगों की यह हालत देख निराशा होती है। क्या ‘हेडलेस’ कॉन्ग्रेस ‘ब्रेनलेस’ भी हो गई है? वे नहीं समझ पा रहे हैं कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख के लोगों के लिए यह कितना बड़ा तोहफा है।”

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न से सम्मानित किए जाने के मौके पर यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गॉंधी और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी की अनुपस्थिति को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में नकवी ने कहा, “समझ नहीं आ रहा कि कॉन्ग्रेस को क्या हो गया है। हम अब तक यह समझ नहीं पाएँ हैं। प्रणब मुखर्जी किसी पार्टी के नहीं, बल्कि देश के नेता हैं। ऐसे में हमें उनके इस समारोह से दूर रहने का कारण समझ नहीं आता।”