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Free ही Free… अरविंद केजरीवाल, वो नेता जो ‘मुफ्त’ की राजनीति और झूठे वादे का चैंपियन है

अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली की आप सरकार के पाँच साल केंद्र का हवाला देते-देते कब गुजर गए पता ही नहीं चला। चूँकि अब 2020 के विधानसभा चुनाव एक बार फिर से सिर पर हैं तब बड़े-बड़े वादों से जनता को लुभाने वाली आम आदमी पार्टी फिर से सक्रिय है। कभी दिल्ली मेट्रो में महिलाओं को फ्री राइड के ऑफर दिए जा रहे हैं तो कभी सीलिंग रुकवाने के नाम पर व्यापारियों से साँठ-गाँठ की जा रही है।

चुनावों में खुद के अस्त्तिव को बचाए रखने के लालच में आज केजरीवाल ने एक बार फिर दिल्लीवासियों को नया तोहफा दिया है। दरअसल, दिल्ली में सरकार ने प्रति महीना 200 यूनिट तक बिजली बिलकुल फ्री कर दी है। जिसका मतलब यदि दिल्ली वाले 200 यूनिट तक बिजली खपत करते हैं तो उन्हें बिजली बिल नहीं भरना होगा। 

केजरीवाल के इस नज़राने का फायदा दिल्ली वालों को आज से ही मिलना शुरू होगा। इसके अलावा दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने बताया है कि 201 से 400 यूनिट तक आधी सब्सिडी जनता को देनी होगी। यानी 3 रुपए यूनिट चार्ज के मुताबिक बिजली का बिल 0-200 यूनिट तक माफ़ होगा जबकि 4.50 रुपए यूनिट के अनुसार  201-400 यूनिट तक आधा बिल उपभोक्ता अदा करेंगे।

केजरीवाल की मानें तो दिल्ली के लोगों में बिजली बचाने और उसका चतुराई से इस्तेमाल करने हेतु उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। उनका दावा है पूरे देश में दिल्ली सबसे सस्ती बिजली उपलब्ध कराती है। पता नहीं केजरीवाल को ऐसा क्यों लगता है कि अगर दिल्ली में लोगों को मुफ्त बिजली दी जाएगी तो वो उसका समझदारी से उपयोग करेंगे! जबकि वास्तविक हकीकत तो यह है कि जितनी मुफ्तखोरी की आदत दिल्ली वालों को पड़ रही है वो उतने ही लापारवाह और गैर-जिम्मेदार होते जा रहे हैं। एक बार को दिल्ली में अगर बिजली महंगी हो जाए तो जरूर दिल्ली के लोग उसका प्रयोग संभलकर करेंगे, लेकिन फ्री ऑफर सुनकर तो सवाल ही पैदा नहीं होता।

खैर, आम आदमी पार्टी द्वारा किए गए कुछ कामों का उद्देश्य जानना और हवा में चलाए तीरों के पीछे का कारण जानना दोनों एक बराबर हैं। केजरीवाल के इस कदम पर भाजपा नेता हरीश खुराना ने उनसे एक आरटीआई शेयर करते हुए सवाल किया है। इस आरटीआई में बिजली कंपनियों को दी गई उन बढ़ती सब्सिडी का लेखा-जोखा है, जिनका पिछले 5 सालों में भुगतान किया गया है।

आरटीआई के आँकड़े दर्शाते हैं कि 2014-15 के बाद से लगातार बिजली कंपनियों को जाने वाली सब्सिडी में बढ़ोतरी हुई है। साथ ही हरीश खुराना द्वारा शेयर की गई दूसरी तस्वीर में हम देख सकते हैं कि बिजली कंपनियाँ लगातार हर साल हर कैटेगरी में फिक्सड चार्ज को बढ़ा रही हैं।

अब सवाल यह है कि ये पैसे दिल्ली सरकार कहाँ से देती है? जाहिर है प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष ये पैसे हमसे ही लिए जाते हैं और आखिर में ‘फ्री’ शब्द की घोषणा के साथ हमें बरगला दिया जाता है। हम समझ ही नहीं पाते कि केजरीवाल जैसे लोग हमें किस स्कीम के तहत अंदर से खोखला कर रहे हैं। हम सिर्फ़ ‘फ्री’ सुनते हैं और उनके वादों, उनकी स्कीमों पर फ्लैट हो जाते हैं। हम मानकर चलते हैं ‘चलिए इतना नहीं तो कुछ तो देगा ही।’

लेकिन केजरीवाल और पार्टी द्वारा इस मुफ्तखोरी की सर्विस को आप ऐसे समझिए कि आज से 18-20 साल पहले जब कॉल की दरें 8-10-12 रुपए/मिनट हुआ करती थी, उस समय आईस्क्रीम या समोसा 2 रुपए में मिल जाते थे। लेकिन आज स्थिति उलटी है। कॉल की दरें 25 पैसे-50 पैसे से लेकर फ्री तक पहुँच गई है और समोसे-आइसक्रीम के रेट 10-15 रुपए हो गए हैं। पैसा हमारी जेब से दो अलग-अलग जगह उतना ही जा रहा है, लेकिन चूँकि कॉल दरों के रेट हमें फ्री कहकर बेची जा रही हैं और उनकी हमें रोज के हिसाब से जरूरत है, तो वो हमें सस्ती और अपने जेब के अनुकूल लग रही है। इसी प्रकार दिल्ली सरकार द्वारा ‘फ्री’ में दी गई सभी चीजों के पीछे यही सूत्र काम कर रहा है। रोज मिलने वाली चीज ‘फ्री’ और साल में जाने वाली चीज महंगी… कभी सोचा है कि जब हम आज कमा भी ज्यादा रहे हैं और हमें सीएम की कृपा से फ्री भी सब मिलने लगा है, तो आखिर हम फिर भी बचत क्यों नहीं कर पा रहे? 

ऐसा इसलिए क्योंकि इस समय दिल्ली में बाजारवाद और केजरीवाल एक जैसे स्ट्रैटेजी के साथ लोगों की मनोस्थिति से खेल रहे हैं। इन ‘दोनों’ द्वारा दिए विकल्पों को न आज हम नकारने की स्थिति में है और न ही स्वीकारने की…

कौन नहीं चाहता कि बिना कुछ मेहनत किए उसे फ्री बिजली, पानी, वाई-फाई की सुविधा मिले? जवाब है- हर कोई चाहता है। हर किसी को चाहिए कि केजरीवाल चाहे समाज सुधार के नाम पर हमारे साथ कितने ही ऑड-ईवन प्रयोग करें, लेकिन आखिर में हमारी मूलभूत जरूरतों को निशाना बना कर, कुछ न कुछ छुनछुना थमा कर दिल्ली पर काबिज हो जाएँ।

इन पाँच सालों में मेट्रो से लेकर सड़कों पर लगी होर्डिंग्स तक में केजरीवाल सिर्फ़ इस बात का प्रचार करते रहे हैं कि वो अपनी ओर से दिल्ली को सुधारने की बहुत कोशिश कर रहे हैं लेकिन केंद्र ने उनके हाथों को बाँधा हुआ है। वो महिलाओं की सुरक्षा के लिए कदम उठाना चाहते हैं लेकिन दिल्ली पुलिस उनके अधीन नहीं है, वो बड़े-बड़े कॉलेज खुलवाना चाहते हैं लेकिन दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं है।

2015 से अब तक हम देख चुके हैं कि केजरीवाल की कार्यशैली से उनकी अपनी पार्टी के सदस्य और कार्यकर्ता ही उनसे कितने नाराज हैं- अल्का लांबा, कपिल मिश्रा, कुमार विश्वास, योगेंद्र यादव वो नाम हैं जिनके बलबूते केजरीवाल को दिल्ली में ऐतिहासिक मत प्राप्त हुआ था, लेकिन सत्ता के लोभ ने न केवल जनता के बीच केजरीवाल की छवि को धूमिल किया बल्कि उनके अपने लोग ही उनसे अलग-थलग होते गए। अब सोशल मीडिया पर ये ‘बागी’ केजरीवाल के ख़िलाफ़ खुलकर बोलते हैं और उन्हें तानाशाह से लेकर हिटलर जैसी उपाधियाँ देते हैं।

2015 में फ्री वाई-फाई से लेकर गली-गली में सीसीटीवी लगाने का वादा करके दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने वाले केजरीवाल आज फिर से अपने झूठे वादों की राजनीति खेलकर 2020 फतह करना चाहते हैं लेकिन उनके पिछले वादों की जमीनी हकीकत क्या है, उस पर भी जरा ध्यान डाल लें:

  • दिल्ली को पूर्ण राज्य दिलाने के लिए केजरीवाल ने पिछले 4 साल कुछ भी नहीं किया। इस मुद्दे को उन्होंने पिछले साल तक ठंडे बस्ते में डाले रखा और अब वह वादा कर रहे हैं कि अगर वो दोबारा सत्ता में आए तो वो दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाकर रहेंगे, जिसके लिए वो कुछ समय पहले आंदोलन तक करने वाले थे। सोचिए, जिस राज्य का सीएम काम करने से ज्यादा धरने पर बैठने की धमकी देता हो, वहाँ प्रगति की गति क्या होगी?
  • 2015 में केजरीवाल ने वादा किया था कि वो मोहल्ला क्लीनिक के जरिए हर घर तक हेल्थ फैसिलिटी पहुँचाएँगे, लेकिन वास्तविकता ये है कि उन्होंने न दिल्ली में केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना को आने दिया और न पूर्ण रूप से मोहल्ला क्लीनिक को जनता तक पहुँचाया। उन्हें लगता है कि कुछ हँसते हुए चेहरे होर्डिंग पर लगाने से स्वास्थ्य सुविधाएँ बेहतर हो जाती हैं।
  • दिल्ली को प्रदूषण रहित बनाने का वादा करने वाले केजरीवाल ऑड-ईवन जैसी कोशिशों को लेकर चर्चा में जरूर रहे लेकिन उसमें विफल होने के बाद प्रदूषण नियंत्रण कानून बनाने के लिए उन्होंने कोई काम नहीं किया।
  • 2015 में अपने घोषणा पत्र में जिन्होंने 2 लाख सार्वजनिक शौचालय बनाने का वादा किया था, सच्चाई यह है कि वो चार साल में अपने लक्ष्य के 15 प्रतिशत तक ही पहुँच पाए हैं।
  • शिक्षा के स्तर में आए सुधार पर हम केजरीवाल की तारीफ़ करते नहीं थकते लेकिन बीती 1 जुलाई को दिल्ली भाजपा अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करके इसमें भी केजरीवाल पर और सिसोदिया पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा दिया। उन्होंने, एक आरटीआई का हवाला देते हुए खुलासा किया कि स्कूलों में कमरों के निर्माण के लिए अतिरिक्त ₹2000 करोड़ दिए गए थे, जो केवल ₹892 करोड़ में बनाए जा सकते थे। इन स्कूलों के निर्माण के लिए जिन 34 ठेकेदारों को टेंडर दिए गए थे, उनमें उनके रिश्तेदार भी शामिल हैं।
  • इसके अलावा सीसीटीवी मुद्दे को लेकर केजरीवाल सरकार सक्रिय है, लेकिन इस पर भी भाजपा ने उनकी हकीकत का पर्दाफाश कर दिया। भाजपा नेता हरीश खुराना का कहना था कि तो केजरीवाल को अपने कार्यकाल खत्म होने के अंतिम समय में सीसीटीवी कैमरा लगाने की याद आई है, इस पर ही सवाल खड़ा होता है। उनके मुताबिक केजरीवाल सरकार ऐसी कंपनी से सीसीटीवी कैमरे लगवाने जा रही है, जो यूरोप और यूके में पूरी तरह से बैन है। बता दें कि सीसीटीवी कैमरे को बनाने वाली चीन की हिकविजन कंपनी को अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में सीसीटीवी कैमरा लगाने का ठेका दिया है, जो  यूरोप, अमेरिका और यूके में पूरी तरह से बैन है। हरीश खुराना ने इस दौरान अरविंद केजरीवाल पर देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने का भी आरोप लगाया।

कुल मिलाकर विपक्ष हो या फिर आम जनता, आज सब जान और समझ चुके हैं कि केजरीवाल सरकार की राजनीति सिर्फ़ झूठ की बिसात पर टिकी है। उनके लिए उनके किए वादों की कोई अहमियत नहीं है। वो चुनाव से पहले बच्चों की कसम खाकर कभी कॉन्ग्रेस से हाथ मिलाने का फैसला नहीं करते हैं, और चुनाव के बाद खुद ही उनसे जुड़ने के लिए लालायित दिखाई पड़ते हैं। राजनीतिक फैसले तो बड़ी बात, केजरीवाल वो शख्स हैं जो छोटी-छोटी चीजों पर भी अपना मत बदलते रहते हैं। तबरेज़ और अंकित की मौत पर उनका सियासी नाटक और मुआवजे पर किया गया ड्रामा इसका जीता-जागता उदाहरण है।

क्रिकेट खिलाड़ियों का 43 करोड़ रुपए खा गए फ़ारूक अब्दुल्ला? ED ने की पूछताछ

क्रिकेट एसोसिएशन घोटाले के मामले में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री से प्रवर्तन निदेशालय की (ED) पूछताछ चल की है। यह मामला क्रिकेट एसोसिएशन को मिलने वाले फंड की अनियमितता से जुड़ा हुआ है। CBI के अनुसार, फ़ारूक अब्दुल्ला जब जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष थे, उस दौरान उन्होंने करोड़ो रुपए का गबन किया।

मीडिया रिपोर्ट के आरोप के अनुसार, 2002 से 2012 के बीच जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन को राज्य में खेल को बढ़ावा देने के लिए 113 करोड़ रूपए दिए गए थे, लेकिन इस फंड को खर्च नहीं किया गया। फारूक अब्दुल्ला पर आरोप है कि 113 करोड़ रूपए में से 43.69 करोड़ रूपए से ज़्यादा का गबन किया गया और इन रुपयों को खिलाड़ियों पर ख़र्च नहीं किया गया।

इस घोटले में फारूक अब्दुल्ला के अलावा क्रिकेट एसोसिएशन के तत्कालीन महासचिव मोहम्मद सलीम ख़ान, तत्कालीन कोषाध्यक्ष अहसान अहमद मिर्जा और जम्मू-कश्मीर बैंक का एक कर्मचारी बशीर अहमद मिसगर भी आरोपित हैं। इन सभी पर आपराधिक साज़िश और विश्वासघात का आरोप लगा है। 

साल 2015 में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने इस केस की कमान CBI को सौंप दी थी। ऐसा करने के पीछे तर्क यह दिया गया था कि फारूक अब्दुल्ला का राज्य में काफ़ी दबदबा था और ऐसी संभावना थी कि राज्य पुलिस को इस मामले की जाँच में परेशानी हो सकती थी। इसी वजह से इस केस को CBI को सौंप दिया गया।

बता दें कि कोर्ट ने यह फ़ैसला माजिद याकूब डार और निस्सार अहमद ख़ान नाम के दो खिलाड़ियों द्वारा दायर की गई याचिका पर दिया है। वहीं, कोर्ट में फारूक अब्दुल्ला का कहना था कि उनकी राजनीतिक छवि को धूमिल करने के लिए इस तरह के झूठे आरोप लगाए गए हैंं।

कॉन्ग्रेस नेता रावेश खान और जिला पंचायत सदस्य के बीच ताबड़तोड़ फायरिंग, साम्रदायिक तनाव का माहौल

फर्रुखाबाद के कम्पिल में नगर पंचायत अध्यक्ष के चुनाव को लेकर चल रही रंजिश में बुधवार (जुलाई 31, 2019) दोपहर चेयरमैन के जिला पंचायत सदस्य भाई और कॉन्ग्रेस नेता के बीच ताबड़तोड़ फायरिंग हुई। बताया जा रहा है कि पुरानी रंजिश को लेकर दो सम्प्रदाय के लोगों के बीच यह मारपीट और फायरिंग हुई है। इस घटना में एक पक्ष से एक, जबकि दूसरे पक्ष से दो लोग घायल हो गए हैं।

इस फायरिंग के बाद सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका के चलते घटना की सूचना मिलने पर भारी पुलिस बल और पीएसी को कस्बे में तैनात कर दिया गया। पुलिस ने इस मामले में आठ-दस लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। दोनों पक्षों ने एक दूसरे के खिलाफ जवाबी तहरीर थाने में दी।

दरअसल, नगर के मोहल्ला माँझगाँव निवासी कॉन्ग्रेस नेता रावेश खान उर्फ बंटी ने नगर पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में रावेश हार गए थे और मोहल्ला गढ़ी निवासी एक अन्य स्थानीय नेता उदयपाल यादव जीते थे। इसके बाद से ही दोनों पक्षों में रंजिश चल रही थी। रावेश ने नगर पंचायत के विकास कार्यों में धाँधली के आरोप लगाकर कई शिकायतें भी शासन स्तर पर की हैं।

पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार दोपहर उदयपाल का जिला पंचायत सदस्य भाई नीलेश यादव कार से जा रहा था। इस दौरान रावेश काजी मोहल्ला बाइपास आरा मशीन के पास खड़े थे। आरोप है कि यहाँ पर रावेश ने नीलेश की कार रोक ली। इसके बाद विवाद शुरू हो गया और दोनों पक्षों से ताबड़तोड़ फायरिंग होने लगी। इस फायरिंग से वहाँ मौके पर भगदड़ मच गई।

तस्वीर साभार: अमर उजाला

आसपास के लोगों ने इधर-उधर छिप कर अपनी जान बचाई। दोनों पक्षों के लोग तमंचों व बंदूकों की बटों से मारपीट करने लगे। इसमें रावेश खान, उसका चचेरा भाई हिकमत उल्ला उर्फ शानू व दूसरे पक्ष से नीलेश का चालक सनी व अंकज शर्मा घायल हो गए। सूचना पर पुलिस दोनों पक्षों को पकड़कर थाने ले गई। थाने में पहुँचते ही दोनों में फिर मारपीट होने लगी।

थाने में पुलिस ने किसी तरह स्थिति को संभाला और सनी व अंकज को मेडिकल के लिए भेज दिया। अंकज ने गोली मारने का आरोप लगाया है। इस बीच अन्य थानों से भी पुलिस दल वहाँ पहुँच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस अधीक्षक त्रिभुवन सिंह ने भी मौके पर पहुँचकर मामले की जानकारी ली। बताया गया कि करीब 10-15 राउंड फायरिंग हुई है। थाना प्रभारी निरीक्षक जेएल सोनकर ने बताया कि घायलों को मेडिकल के लिए भेजा गया है। तहरीर मिलने पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

निर्भया, कठुआ, उन्नाव… बाकी 2 लाख रेप विक्टिम को कब मिलेगा ’45 दिन’ वाला न्याय

28 जुलाई को रायबरेली के पास उस कार को टक्कर मारी जाती है, जिसमें उन्नाव रेप पीड़िता अपनी चाची, मौसी और वकील के साथ सवार होती है। मामला मीडिया में छाने के बाद न केवल प्रशासनिक अमला हरकत में आता है, बल्कि पीड़िता को न्याय त्वरित गति से सुनिश्चित करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट भी सक्रिय हो जाता है।

हादसे के पॉंचवें दिन यानी 1 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट उन्नाव रेप मामले से जुड़े सभी 5 मामलों को दिल्ली ट्रांसफर करने का आदेश देता है। केस की रोजाना सुनवाई करते हुए 45 दिन की डेडलाइन तय करता है। हादसे की पड़ताल एक हफ्ते के भीतर पूरी करने का निर्देश देता है। उत्तर प्रदेश सरकार को पीड़िता के परिजनों को 25 लाख रुपए का मुआवजा देने को भी कहता है।

जिस देश की अदालतों में करीब तीन करोड़ मामले लंबित हो, वहॉं इस तरह की तेजी न्यायिक व्यवस्था में यकीन और गहरा करती है। लेकिन, त्वरित गति से इंसाफ केवल उन्हीं मामलों में मिलता क्यों दिखता है जो मीडिया की सुर्खी बनते हैं? चाहे वह निर्भया का मामला हो या कठुआ का और अब उन्नाव।

देशभर में 30 जून तक बाल दुष्कर्म के डेढ़ लाख से ज्यादा मामले लंबित थे। देश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में से करीब 12 फीसदी रेप के होते हैं। बीते महीने केन्द्र सरकार ने लोकसभा में बताया गया था कि 2014-16 के बीच हिरासत में दुष्कर्म के 300 से ज्यादा मामले सामने आए थे। बीते साल लोकसभा में सरकार ने एनसीआरबी के आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया था कि 2015 में 34,651 और 2016 में 38,947 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए थे। लेकिन, सजा इनमें से एक चौथाई मामलों में ही हो पाती है।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट को बाल दुष्कर्म के मामलों की जानकारी देते हुए बताया गया था कि इस प्रकार के मामलों के निपटाने की दर महज नौ फीसदी ही है। और यह हालात पोक्सो कानून लागू होने के सात साल बाद की है। रिपोर्ट के अनुसार देश भर में इस साल एक जनवरी से लेकर 30 जून तक ऐसे 24,212 मामले दर्ज किए गए थे।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो की 2014 की रिपोर्ट के मुताबिक देश में हर एक घंटे में 4 रेप होता है। ब्यूरो की 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में बलात्कार के मामले 2015 की तुलना में 2016 में 12.4 फीसदी बढ़े। 2016 में 38,947 बलात्कार के मामले देश में दर्ज हुए। इसी ब्यूरो के आँकड़े बताते हैं कि साल 2016 में देश की विभिन्न अदालतों में चल रहे बलात्कार के 1,52,165 नए-पुराने मामलों में केवल 25 का निपटारा किया जा सका, जबकि उस साल रेप के 38,947 नए मामले दर्ज किए गए थे।

देश की राजधानी दिल्ली में ही साल 2011 से 2016 के बीच महिलाओं के साथ दुष्कर्म के मामलों में 277 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। दिल्ली में साल 2011 में जहां इस तरह के 572 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं साल 2016 में यह आंकड़ा 2155 रहा। यहाँ तक कि निर्भया कांड के बाद दिल्ली में दुष्कर्म के मामलों में 132 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

महिला सुरक्षा हर कानून और दावे का मजाक उड़ाते ये आँकड़े केवल रेप के मामलों के हैं, जो दुनिया भर में सबसे कम रिपोर्ट होने वाला अपराध है। ज्यादातर मामलों में पीड़िता पुलिस तक पहुँचने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाती। यौन उत्पीड़न के खिलाफ काम करने वाली अमेरिकी संस्था रेप, असॉल्ट एंड इन्सेस्ट नेशनल नेटवर्क के अनुसार अमेरिका में होने वाले हर एक हजार यौन अपराधों में केवल 310 मामले पुलिस को सामने आते हैं। इसमें से भी केवल 6 मामलों में अपराधी को सजा हो पाती है। अब इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि भारत जैसे देश में इस तरह के कितने मामले रिपोर्ट होते होंगे।

इन आँकड़ों से यह भी पता चलता है कि कानून भले कितने भी कड़े कर दिए जाए जब तक त्वरित गति से इंसाफ मिलता नहीं मिलेगा हालात नहीं बदलेंगे। और हर मामला आपका भी इतना खून नहीं खौलाता है कि आप पोस्टर-बैनर और कैंडल लेकर सड़क पर उतर जाएँ!

केरल का मुहम्मद मुहसिन गया था IS के लिए लड़ने, ड्रोन अटैक में मारा गया

अमेरिकी ड्रोन हमलों में केरल के एक शख़्स की मौत की ख़बर सामने आई है। दरअसल, मुहम्मद मुहसिन नाम का यह शख़्स इंजीनियरिंग का छात्र था जोकि 2017 में लापता हो गया था। ख़बर के अनुसार, मुहम्मद मुहसिन केरल के मल्लपुरम ज़िले के इडप्पल का रहने वाला था। वो अफ़गानिस्तान चला गया था और उसने आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (IS) ज्वॉइन कर लिया था। ख़बर यह भी है कि इस हमले में मुहम्मद मोहसिन के अलावा इस्लामिक स्टेट का एक अन्य कमांडर हुज़ैफा-अल-बकिस्तान भी मारा गया है। बकिस्तान के बारे में पता चला है कि वो भारतीय युवाओं को आतंक के रास्ते पर चलने के लिए भड़काता था।

मुहम्मद मुहसिन की मौत की ख़बर उसके परिजनों को व्हाटसएप के एक संदेश के ज़रिए मिली। वो संदेश मलयालम भाषा में लिखा था, “आपका भाई शहीद होना चाहता था। अल्लाह ने उसकी आकांक्षा के मुताबिक़ उसकी ख़्वाहिश पूरी कर दी। 10 दिन पहले हुए अमेरिकी सेना के ड्रोन हमले में वो शहीद हो गया।”

इसी संदेश में आगे लिखा था कि कृपया यह बात पुलिस को ना बताएँ, वर्ना वो आपके घर आकर आपको परेशान करना शुरू कर देंगे। आपका भाई ऐसा कुछ भी नहीं चाहता था। पुलिस के मुताबिक़, इस मैसेज में एक तस्वीर भी है, जिसमें मुहम्मद मुहसिन की डेडबॉडी दिखाई गई है। इस तस्वीर को देखकर मुहसिन के परिजनों ने उसकी पहचान कर ली है। इस बात का पता नहीं चल सका है कि यह फ़ोटो कहाँ से आई है।

ख़बर में एक सरकारी आँकड़े के अनुसार बताया गया है कि आतंकी संगठन को ज्वॉइन करने वाले अधिकतर लोग केरल के कन्नूर ज़िले से हैं। वहाँ क़रीब 40 लोग इस आतंकी संगठन में जा चुके हैं। इन 40 लोगों में 8 महिलाएँ भी शामिल हैं।

कन्नूर के अलावा कासरगोड, कोझिकोड, मलप्पुरम, पलक्कड़, एर्नाकुलम और थ्रिसुर के लोग भी इस आतंकी संगठन में शामिल हो चुके हैं। इनमें से अधिकतर लोग सोशल मीडिया के माध्यम से आतंकी संगठन IS से प्रभावित हुए थे। ऐसा कहा जाता है कि IS से सहानुभूति रखने वाले मलयाली समूहों के अधिकतर सोशल मीडिया अकाउंट्स गल्फ़ देशों से चल रहे हैं। ये सभी समूह विशेष तौर पर केरल में रहने वाले मुस्लिमों पर अपना जाल फेंककर उन्हें फँसाते हैं।

मॉब लिंचिंग: कमलनाथ के MP में युवक को रस्सी से बाँध रोड पर घसीटा, फिर पेड़ से बाँधकर पीटा

मध्य प्रदेश के इटावा में बुधवार (जुलाई 31, 2019) को पुलिस चौकी से सिर्फ 20 कदम की दूरी पर उधारी के लेन-देन के चलते त्रिलोक नगर निवासी राजेंद्र पदरबार (38 वर्ष) को सार्वजनिक रास्ते पर बाँधकर पीटा गया। जिन्हें रुपए लेने थे, वे युवक के पैर बाँधकर घसीटते हुए ले गए। घटनास्थल पर जब एसआई पवन यादव पहुँचे तो आरोपितों ने उनसे भी कहासुनी की।

रुपए के लेन-देन को लेकर बुधवार शाम उज्जैन रोड स्थित इटावा में एक युवक के साथ कुछ लोगों ने जमकर मारपीट की। गुंडागर्दी करते हुए आरोपितों ने युवक को पहले रस्सी से बाँधकर रोड पर घसीटा और बाद में पेड़ से बाँधकर जमकर पीटा।

इसके बाद पुलिस जैसे-तैसे युवक को छुड़ाकर जिला अस्पताल ले गई। घटना के बाद रात में भारी पुलिस ने आरोपितों के घर दबिश दी। मौके से कुछ आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने 15 आरोपितों के खिलाफ प्राणघातक हमले सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है।

अस्पताल में पीड़ित राजेंद्र (तस्वीर साभार: नई दुनिया)

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, त्रिलोक नगर निवासी राजेंद्र, पिता विक्रम सिंह पंवार का पुष्पकुंज कॉलोनी में रहने वाले रतन व रामसिंह झारेवाले से रुपए का लेन-देन है। उसी को लेकर शाम करीब पाँच बजे आरोपित रतन, रामसिंह झारेवाले व उनके बेटों सहित अन्य लोगों ने राजेंद्र पर हमला कर दिया। इसके बाद आरोपितों ने राजेंद्र के पैर में रस्सी बाँध दी और उसे घसीटते हुए आरके होटल के यहाँ लेकर गए। इस दौरान आरोपितों ने राजेंद्र के साथ जमकर मारपीट की। आरोपितों ने आरके होटल के समीप राजेंद्र को पेड़ से बाँध दिया और मारपीट करते रहे।

वहीं, घायल राजेंद्र पंवार का कहना है कि वो जब सामान लेने लिए बाजार जा रहा था उसी दौरान रामसिंह के घर पर पहले से ही योजना बनाकर आरोपितों ने पीड़ित राजेंद्र को घेर लिया और उसके साथ मारपीट की। राजेंद्र का कहना है कि जबरन उसकी जेब में चाकू रखा गया और उसकी जेब में रखे करीब एक लाख रुपए भी छीन लिए। पीड़ित राजेंद्र ने बताया कि इससे पहले भी आरोपितों ने उनके साथ मारपीट की थी लेकिन उन्होंने इस बारे में कभी शिकायत नहीं की।

आरोपित पक्ष के लोग बड़ी संख्या में मौजूद थे जिस कारण किसी ने भी बीच-बचाव नहीं किया और मूकदर्शक बनकर देखते रहे। कुछ लोगों द्वारा पुलिस को सूचना देने पर सिविल लाइंस थाने के एसआई पवन यादव व आरक्षक मौके पर पहुँचे। उन्होंने भीड़ के बीच से राजेंद्र को निकालने का प्रयास किया तो आरोपितों ने उनके साथ भी धक्कामुक्की की। इसके बाद जैसे-तैसे राजेंद्र को डायल-100 में बैठाकर जिला अस्पताल भेजा गया। उधर बाद में भारी पुलिस बल मौके पर पहुँचा।

भारत की कूटनीतिक जीत: कुलभूषण जाधव को राजनयिक मदद मुहैया करवाएगा पाकिस्तान

कुलभूषण जाधव के मामले इंटरनैशनल कोर्ट में जीत के बाद भारत को एक और कामयाबी मिली है। पाकिस्तान सरकार ने कुलभूषण जाधव से मिलने के लिए भारत को कॉन्सुलर एक्सेस देने का निर्णय लिया है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को शुक्रवार को पाकिस्तान राजनयिक मदद मुहैया करवाने को अंततः तैयार हो गया है।

पाकिस्तान का यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के दबाव में लिया गया है। इसे भारतीय कूटनीति के विजय के रूप में भी देखा जा रहा है। क्योंकि इससे पहले पाकिस्तान लगातार कुलभूषण जाधव को राजनयिक मदद देने से इनकार करता रहा है।

बता दें कि पाकिस्तान के व्यवहार में यह बदलाव इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के फैसले के बाद आया है। दरअसल, पाकिस्तान भारतीय नागरिक को जासूस बताकर फाँसी देना चाहता था। लेकिन फिर भारत ने इस मामले को इंटरनैशनल कोर्ट में उठाया। कोर्ट ने पाकिस्तान को जाधव को सुनाई गई फाँसी की सजा पर प्रभावी तरीके से फिर से विचार करने और राजनयिक पहुँच प्रदान करने का बुधवार (जुलाई 31, 2019) को आदेश दिया था।

इससे पहले, 17 जुलाई 2019 को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने कुलभूषण जाधव मामले में भारत के पक्ष में निर्णय दिया था। अदालत ने पाकिस्तान को कुलभूषण जाधव को दी गई सजा की समीक्षा करने और पुनर्विचार करने को कहा था। इसके साथ ही कुलभूषण जाधव को मिली मौत की सज़ा पर भी रोक लगा दी गई थी। अदालत ने पाकिस्तान को वियना संधि के उल्लंघन का दोषी पाया था। अदालत ने कहा कि कुलभूषण जाधव को उनके अधिकारों के बारे में विवरण नहीं दिया गया। इसके अलावा अदालत ने इस बात का भी जिक्र किया कि जाधव की गिरफ़्तारी की जानकारी भारत को तुरंत नहीं दी गई।

बता दें कि 2016 में ईरान से अगवा कर पाकिस्तान ने उन्हें भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) के लिए जासूसी के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई थी, जिसे रोकने के लिए भारत सरकार ने हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में अपील की थी। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने पाकिस्तान को निर्देश दिया था कि उसके अंतिम निर्णय पर पहुँचने तक कुलभूषण जाधव की सज़ा पर अमल न किया जाए।

कुलभूषण जाधव (49 साल) भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने अप्रैल 2017 में बंद कमरे में सुनवाई के बाद जासूसी और आतंकवाद के आरोपों में उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। 

गर्भवती पत्नी से मारपीट, जान से मारने की कोशिश, कागज पर लिखा तलाक़-तलाक़-तलाक़

देश में मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक विधेयक पास होने के बाद थोड़ी राहत मिली है, जिन मामलों को लेकर औरतें अभी तक शांत थीं, उन मामलों पर उनकी आवाजें उठने लगीं हैं। हालिया मामला हैदराबाद की रहने वाली एक 20 वर्षीय महिला का है जिसने अपने पति पर तीन तलाक का आरोप लगाया है।

महिला के मुताबिक, उसके पति ने उसे उस समय एक पेपर पर लिखकर तीन तलाक दिया जब वो प्रेगनेंट थी। महिला बताती है, “वो मुझे अपने पिता से कार, घर माँगने के लिए मजबूर करते थे और जब मैं ऐसा करने से मना करती थी तो वो मेरे साथ मारपीट करते थे। वो मुझे एक बार जान से मारने की कोशिश भी कर चुके हैं। तीन महीने पहले उन्होंने मुझे एक पेपर पर तीन तलाक दिया था।”

गौरतलब है तीन तलाक बिल लोकसभा और राज्यसभा से पास होने के बाद मुस्लिम महिलाओं से एक साथ तीन तलाक को अपराध करार देने वाले ऐतिहासिक विधेयक को बुधवार देर रात राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपनी मंजूरी दे दी है। राष्‍ट्रपति के इस विधेयक पर हस्‍ताक्षर करने के साथ ही मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक अब कानून बन गया है। इस कानून को 19 सितंबर 2018 से लागू माना जाएगा।

इस बिल के मुताबिक तीन तलाक से जुड़ा अपराध संज्ञेय तभी होगा, जब महिला इसकी शिकायत खुद करेगी या फिर खून या शादी के रिश्ते वाले सदस्यों के पास भी केस दर्ज कराने का अधिकार रहेगा। पड़ोसी या कोई अनजान शख्स इस मामले में केस दर्ज नहीं करा सकता है।

देश में तीन तलाक के बढ़ते मामलों और मुस्लिम महिला पर होते अत्याचार के मद्देनजर मोदी सरकार ने इस बिल को लोकसभा में 25 जुलाई को और 30 जुलाई को राज्यसभा ने मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक को अपनी स्‍वीकृति दी थी। बिल के क़ानून बनने के बाद ये तय हो गया है कि 19 सितंबर 2018 के बाद जितने भी तीन तलाक़ के मामले सामने आए हैं उन सभी का निपटारा इसी क़ानून के तहत किया जाएगा।

आदिल और शादाब ने माथे पर लगाया टीका, फिर हनुमान मंदिर में की तोड़-फोड़: इलाके में तनाव

उत्तर प्रदेश के बिजनौर ज़िले में पंचमुखी हनुमान मंदिर में मुस्लिम समुदाय के आदिल और शादाब नाम के दो युवकों द्वारा तोड़-फोड़ की ख़बर सामने आई है। इस दौरान उन दोनों को लोगों ने पकड़ लिया। मामले की सूचना मिलने पर एसपी कई थानों की पुलिस के साथ मंदिर पहुँचे, जिसके बाद आदिल और शादाब को हिरासत में ले लिया गया। इलाक़े में तनाव की स्थिति से निपटने के लिए भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात किया गया है। फ़िलहाल, हल्दौर पुलिस में दोनों युवकों से पूछताछ जारी है।

बिजनौर के राम चौराहे पर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर की कमिटी ने बुधवार (31 जुलाई 2019) को सुबह मुस्लिम समुदाय के दो युवकों को उस समय रंगे हाथों पकड़ लिया, जब दोनों माथे पर टीका लगा मंदिर में घुस गए और वहाँ की मूर्तियों को तोड़ने लगे। इस दौरान मूर्तियों के टूटने की आवाज़ें बाहर आ रही थीं। तभी लोगों ने मौक़े पर पहुँचकर दोनों युवकों को रंगे हाथों पकड़ लिया। लोगों का कहना है कि मुस्लिम समुदाय के दोनों युवकों ने माथे पर टीका लगा रखा था, जिससे उन पर कोई शक़ न करे कि वो हिन्दू नहीं हैं।

मंदिर कमिटी की शिक़ायत पर घटना स्थल पर पहुँची पुलिस ने दोनों आरोपितों को हिरासत में ले लिया। इस घटना से मंदिर के आसपास लोगों की काफ़ी तादाद में भीड़ इकट्ठी हो गई। लोगों का कहना है कि कुछ दिनों पहले मंदिर में माँस भी फ़ेका गया था, जिसके लिए इन दोनों युवकों को ही दोषी ठहराया गया था। लेकिन, किसी तरह का तनाव उत्पन्न न हो इसलिए मंदिर कमिटी ने इस बात को दबा दिया था। लेकिन, अब यह मामला मंदिर में घुसकर मूर्तियों को खंडित करने का है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

ख़बर में इस बात का भी उल्लेख है कि दोनों युवक ईंट और पत्थर से भवानी माँ की मूर्ति को खंडित कर रहे थे। इस घटना से इलाक़े में भारी तनाव हो गया है, हिन्दू धर्म के लोग काफ़ी आहत हैं।

घटना की सूचना जब सदर एसडीएम सदर को मिली तो उन्होंने भी मौक़े पर पहुँचकर मुआयना किया। सदर एसडीएम और पुलिस क्षेत्राधिकारी ने मुआयने के बाद खंडित मूर्तियों का निरीक्षण कर दोनों युवकों को पुलिस हिरासत में भेज दिया।

ख़बर के अनुसार, एसपी बिजनौर संजीव त्यागी ने बताया कि मंदिर कमिटी ने मूर्ति खंडित करने के अलावा हिन्दू लड़कियों को प्रेमजाल में फँसाने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने पुलिस को बताया कि दोनों युवक स्कूली छात्राओं के साथ रोज मंदिर आते थे और माथे पर टीका लगाकर हिन्दू लड़कियों को अपने प्रेम जाल में फँसाते थे।

पुलिस की जाँच में पता चला है कि दोनों युवकों ने हिन्दू नाम से मंदिर में प्रवेश किया था और इस दौरान दोनों के साथ दो छात्राएँ भी थीं। मंदिर कमिटी पदाधिकारी अखिल कुमार अग्रवाल ने दोनों युवकों के ख़िलाफ़ मूर्ति खंडित करने की जानकारी दी। शहर कोतवाल आरसी शर्मा के अनुसार, आरोपित शहर के मोहल्ला मिर्दगान निवासी आदिल पुत्र राशिद और मोहल्ला कस्साबान निवासी शादाब पुत्र यासीन के ख़िलाफ़ तहरीर मिली है। फ़िलहाल, पुलिस मामले की जाँच में जुटी हुई है।

35-A को लेकर PM मोदी से मिले उमर अब्दुल्ला, कहा- कोई ऐसे कदम न उठाएँ, जिससे स्थिति खराब हो

जम्मू कश्मीर में 35-A की स्थिति को लेकर जारी चर्चा के बीच बृहस्पतिवार (अगस्त 01, 2019) को जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद उमर अब्दुल्ला ने कहा, “हमने पीएम मोदी से कहा कि रियासत में कोई ऐसे कदम न उठाए जाएँ, जिससे वहाँ की स्थिति खराब हो। हमने 35-A और 370 का भी मामला उठाया। साथ ही जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराने की माँग की।”

हाल ही में श्रीनगर में एक राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र से सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रतीक्षा करने के लिए कहा था जहाँ अनुच्छेद-35A और अनुच्छेद-370 को चुनौती देने वाली काफी याचिकाएँ लंबित हैं।

जम्मू कश्मीर की तमाम छोटी-बड़ी राजनीतिक पार्टियों में अनुच्छेद 35 A को लेकर बहस तेज है। नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, जम्मू कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट और राज्य के सभी क्षेत्रीय दलों ने अनुच्छेद-35 A और 370 के साथ छेड़छाड़ का विरोध किया है। संविधान के इन दोनों अनुच्छेदों में किसी राज्य को विशेष दर्जा देने का प्रावधान है। हाल ही में महबूबा मुफ़्ती ने भी केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा था कि आर्टिकल 35- A के साथ छेड़छाड़ करना बारूद को हाथ लगाने के बराबर है।