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‘भारत दुनिया की शरणार्थी राजधानी नहीं बन सकता’: केंद्र ने की SC से NRC डेडलाइन बढ़ाने की माँग

असम में आई बाढ़ के बीच केन्द्र और राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से फाइनल NRC के लिए डेडलाइन 31 जुलाई से बढ़ाने की माँग की है। केन्द्र ने शुक्रवार (जुलाई 19, 2019) को कोर्ट से आग्रह किया कि वह NRC की समय-सीमा के लिए कोई नई तारीख दे।

असम एनआरसी (NRC) के मुद्दे पर केन्द्र और असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- “हमें एनआरसी में शामिल लोगों के लिए नमूना सत्यापन की प्रक्रिया पर फिर से विचार करने की जरूरत है।” केन्द्र सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा कि अवैध घुसपैठियों को हर हाल में अपने देश वापस जाना ही होगा। केंद्र ने कहा कि हम भारत को विश्व की रिफ्यूजी कैपिटल (शरणार्थी राजधानी) नहीं बना सकते। पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई तक वेरिफिकेशन के काम को निपटाने के लिए कहा था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, केन्द्र ने कहा कि असम में एनआरसी में गलत तरीके से कुछ लोगों को शामिल किए जाने और कुछ लोगों को उससे बाहर रखे जाने का पता लगाने के लिए 20% नमूना सर्वेक्षण के सत्यापन की अनुमति दी जाए। NRC मामले में केन्द्र सरकार ने कहा कि कोऑर्डिनेटर ने इस मामले में अच्छा काम किया है, लेकिन हम लाखों लोगों के मामले में काम कर रहे हैं। सरकार ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि लिस्ट में कुछ सुधार और कुछ नामों को जोड़े जाने की आवश्यकता है।

दरअसल, पता चला है कि बांग्लादेश के बॉर्डर के पास लाखों लोग गलत तरीके से NRC में आ गए हैं। जिन लोगों का नाम शामिल हुआ है, वे अवैध घुसपैठिए हैं। केन्द्र सरकार ने कहा कि 31 जुलाई को सप्लिमेंटरी लिस्ट जारी कर देंगे, लेकिन फाइनल लिस्ट जारी करने में अभी और समय लगेगा। असम में अभी बाढ़ भी आई हुई है। इसके बाद कोर्ट ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई 23 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी।

कर्नाटक: अब सोमवार को विश्वासमत पर मतदान, ‘लव लेटर’ पर सुप्रीम कोर्ट पहुॅंचे सीएम

कर्नाटक की 14 महीने पुरानी सरकार पर जारी उठा-पठक अब संवैधानिक संकट में तब्दील हो गया है।लगातार दूसरे दिन एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस-जदएस सरकार के विश्वास मत पर मतदान हुए बिना ही सदन कार्यवाही स्थगित कर दी गई। अब सोमवार यानी 22 जुलाई को बहुमत का परीक्षण होगा।

इससे पहले शुक्रवार को भी सदन के भीतर और बाहर सियासी ड्रामा चलता रहा। मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने भी शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर कर कहा है कि राज्यपाल वजूभाई वाला विधानसभा को निर्देशित नहीं कर सकते कि विश्वास मत प्रस्ताव किस तरह लिया जाए।

उन्होंने कहा,”मैं गवर्नर का सम्मान करता हूॅं। लेकिन, उनके दूसरे लव लेटर से मैं आहत हुआ हूॅं।” उनका आशय राज्यपाल के उस पत्र को लेकर था जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री को शुक्रवार शाम छह बजे तक बहुमत साबित करने के लिए कहा था।

राज्यपाल ने गुरुवार को भी विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर विश्वासमत की प्रक्रिया पूरी कराने को कहा था। इसके बावजूद कार्यवाही स्थगित कर दी गई। आज फिर राज्यपाल ने बहुमत साबित करने के लिए शुक्रवार 1.30 बजे तक की समय-सीमा निर्धारित की। सदन में समय-सीमा के भीतर विश्वासमत प्रस्ताव पर मत विभाजन नहीं हो सका, जिसके बाद राज्यपाल ने समय-सीमा को फिर से निर्धारित कर इसे शाम के छह बजे कर दिया।

गौरतलब है कि करीब दो हफ्ते पहले सत्तारूढ़ गठबंधन के 15 बागी विधायकों के इस्तीफे से राज्य में राजनीतिक संकट पैदा हुआ था। बागी विधायकों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 17 जुलाई को निर्देश दिया था कि इन विधायकों को विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिये बाध्य नहीं किया जा सकता।

इस फैसले पर स्पष्टीकरण की मांग करते हुए मुख्यमंत्री कुमारस्वामी और कांग्रेस की कर्नाटक इकाई ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इसमें उन्होंने दावा किया है कि न्यायालय का आदेश विधानसभा के चालू सत्र में अपने विधायकों को व्हिप जारी करने में बाधक बन रहा है।

कुमारस्वामी ने विश्वास मत की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए राज्यपाल द्वारा एक के बाद एक निर्धारित की गई समय-सीमा पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के निर्देश शीर्ष अदालत के पूर्व के फैसले के पूरी तरह विपरीत हैं।

अपनी याचिका में उन्होंने कहा कि जब विश्वास प्रस्ताव पर कार्यवाही पहले से ही चल रही है तो राज्यपाल वजुभाई वाला इस पर कोई निर्देश नहीं दे सकते। उन्होंने कहा कि विश्वास प्रस्ताव पर बहस किस तरह से हो इसे लेकर राज्यपाल सदन को निर्देशित नहीं कर सकते।

विधानसभा के आज दोपहर डेढ़ बजे तक विश्वास मत प्रक्रिया पूरी करने में विफल रहने के बाद राज्यपाल ने कुमारस्वामी को दूसरा पत्र लिखा। उन्होंने विधानसभा में जारी विचार-विमर्श से विश्वास मत पारित होने में देरी की ओर इशारा किया। वाला ने विधायकों की खरीद-फरोख के व्यापक आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि यह संवैधानिक रूप से अनिवार्य है कि विश्वास मत प्रक्रिया बिना किसी विलंब के शुक्रवार को ही पूरी हो।

वाला ने कुमारस्वामी को दूसरे पत्र में कहा, “जब विधायकों की खरीद-फरोख्त के व्यापक स्तर पर आरोप लग रहे हैं और मुझे इसकी कई शिकायतें मिल रही हैं, यह संवैधानिक रूप से अनिवार्य है कि विश्वास मत बिना किसी विलंब के आज ही पूरा हो।”

कुमारस्वामी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें ‘दूसरा प्रेम पत्र’ मिला है और इससे वह आहत हैं। इससे पहले समय सीमा के करीब आने पर सत्तारूढ़ गठबंधन ने ऐसा निर्देश जारी करने को लेकर राज्यपाल की शक्ति पर सवाल उठाया।

शशि थरूर के ‘तिरंगे’ की स्पेलिंग में मिस्टेक है, उम्रक़ैदी संजीव भट्ट के परिवार से मिलते हुए कर दी बड़ी भूल

कॉन्ग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर अक्सर चर्चा में रहते हैं। कभी अपनी अंग्रेजी के शब्दकोष के लिए, तो कभी क्रिकेट मैच की दर्शक-दीर्घा के बीच अपने प्रशंसकों के साथ तस्वीरों को लेकर। युवाओं के बीच भी वे काफी लोकप्रिय हैं। लेकिन शशि थरूर का ज्ञान राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को लेकर फिसड्डी ही नजर आता है।

शशि थरूर ने आज जो तस्वीर ट्वीट की है, उसमें उनकी टेबल पर जो तिरंगा है, उसमें सबसे ऊपर हरा रंग आता है, उसके बाद सफ़ेद और सबसे बाद में केसरिया। हालाँकि, यह कॉन्ग्रेस की विचारधारा का प्रतीक चिन्ह जरूर हो सकता है लेकिन भारत देश के तिरंगे का रंग तो कम से कम यह नहीं है।

शशि थरूर ने ट्विटर पर एक फोटो शेयर की है। इस ट्वीट में थरूर बता रहे हैं कि उन्होंने गुजरात के विवादित बर्खास्त आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट, जिसे हाल ही में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है, की पत्नी और बच्चे से मुलाक़ात की।

कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर द्वारा शेयर की गई तस्वीर में उनकी टेबल पर जो झंडा रखा गया है वो ‘तिरंगे’ जैसा नजर आ रहा है। वास्तव में यह झंडा तिरंगा ही है, लेकिन यह उल्टा रखा हुआ है। हो सकता है कि शशि थरूर का ध्यान इस ‘मामूली’ बात पर ना गया हो, लेकिन ट्वीटर यूज़र्स इस बात को लेकर शशि थरूर से नाराज हैं। तिरंगे के अपमान से नाराज लोग शशि थरूर को रिप्लाई में अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

तिरंगे को उल्टा रखने के साथ ही ट्विटर यूज़र्स ने सजा भोग रहे संजीव भट्ट की पत्नी और बच्चे से मुलाकात पर भी आपत्ति जताई है। लोगों का कहना है कि संजीव भट्ट के लिए ‘Detention’ शब्द इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है, क्योंकि वे एक अपराधी हैं और उन्हें इसके लिए सजा मिली है।

अयोध्या में परवेज और उसके साथियों ने महिलाओं को पीटा, फिर कार से कुचला

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में दो महिलाओं को बुरी तरह पीटने के बाद कार से कुचलने का मामला सामने आया है। मामला अयोध्या के महाराजगंज थाना क्षेत्र के जलालुद्दीन गाँव का है। मुख्य आरोपी परवेज को गिरफ़्तार कर पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई कार बरामद कर ली है।

नवभारत टाइम्स की ख़बर के अनुसार, बब्बू और परवेज़ नाम के दो लोगों के बीच गाड़ी को पास नहीं देने के कारण विवाद हो गया था। विवाद इतना गंभीर हो गया कि परवेज़ और उसके साथियों ने मिलकर कथित तौर पर बब्बू की पत्नी और एक अन्य महिला को लाठी-डंडों से पीटकर लहूलुहान कर दिया। इसके बाद महिलाओं को अपनी स्कॉर्पियो से रौंद दिया जिससे उनकी मौत हो गई।

मृतका ताहिरा (45 वर्षीय) के शौहर मोहम्मद हसन ने मामला दर्ज करवाया है। अपनी शिक़ायत में उन्होंने आरोप लगाया कि परवेज़ और उसके साथियों ने मिलकर एक पुरानी दुश्मनी के चलते गुरुवार (18 जुलाई) की रात को बब्बू के घर पर धावा बोल दिया।

हसन के अनुसार, परवेज़ के साथियों ने जब बब्बू पर हमला बोला तो उसकी पत्नी गुड़िया बीच में आ गई और अपने पति को घर के अंदर ले गई। इसके बाद उसने दरवाज़ा बंद कर दिया। इस बात से गुस्साए हमलावरों ने हॉकी-डंडों से गुड़िया पर हमला बोल दिया। उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। ख़बर तो यह भी है कि हमलावरों के हाथ में हथियार थे जिन्हें वो हवा में लहरा रहे थे।

घायल अवस्था में गुड़िया जब ज़मीन पर गिर गई, तभी हमलावरों ने उस पर कार चढ़ा दी। आनन-फ़ानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। हसन ने बताया कि गुड़िया को बचाने के लिए उनकी बीवी ताहिरा खातून दौड़ी थीं, हमलावरों ने उसके ऊपर भी गाड़ी चढ़ा दी और उसकी भी मौक़े पर ही मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर घटनास्थल से फ़रार हो गए।

मोहम्मद हसन की शिक़ायत में परवेज़ पुत्र शेर मोहम्मद, चालक मुख्तार आलम पुत्र शकील अहमद, चांद बाबू पुत्र अब्दुल जब्बार को नामजद किया गया है।

चौकी प्रभारी राम नरेश वर्मा के अनुसार, रात में चांद बाबू मुख्तार आलम और परवेज के ख़िलाफ़ धारा-279, 338, 307 के तहत मामला दर्ज किया गया है। मौत के मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने पर अपराध की धाराओं में परिवर्तन किया जाएगा।

छत्तीसगढ़: गौ हत्या से उबले ग्रामीण, भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में गाय की हत्या कर उसका माँस बेचे जाने की ख़बर सामने आई है। मामला रामचन्द्रपुर थाना के अंतर्गत ग्राम पंचायत रेवतीपुर का है। घटना से ग्रामीणों में आक्रोश फैला हुआ है। दोषियों को कड़ी सज़ा देने की माँग की जा रही है।

स्थानीय ग्रामीण महेन्द्र सिंह के अनुसार, सूचना मिलने के बाद हम लोग जब घटनास्थल पर पहुँचे तो देखा कि गाय की हत्या कर उसके अवशेष फेकें हुए हैं। उन्होंने बताया कि आसपास मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं। ऐसा लगता है कि उन्होंने ही इस काम को अंजाम दिया होगा। गाँव के सरपंच श्रवण यादव ने भी घटनास्थल पर गाय के सींग, मुंडी और चमड़ी आदि मिलने की पुष्टि की है। सरपंच ने मुस्लिम समुदाय के लोगों को भी बुलाकर अवशेष दिखाए।

गाँव के लोगों ने सीमा में झाड़ियों के पास गाय के अवशेष देखे। इसके बाद पूरे गाँव में गाय की हत्या कर माँस बेचने की खबर फैल गई।

नई दुनिया की ख़बर के अनुसार, घटना की सूचना मिलने पर पुलिस गाँव में पहुँची और माँस के अवशेषों को इकट्ठा करके रामानुजगंज के पशु चिकित्सक विकास जायसवाल से पीएम कराया। जायसवाल ने बताया कि अवशेष प्रथम दृष्टया गाय के ही लगते हैं।

रामचंद्रपुर थाना प्रभारी एसके पैकरा ने बताया कि अवशेषों को फोरेंसिक जाँच के लिए भेजा जाएगा। अज्ञात आरोपितों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है। भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती भी की गई है ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे।

जम्मू-कश्मीर: महबूबा मुफ्ती के चचेरे भाई के PSO की गोली मारकर हत्या

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग ज़िले में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के नेता सज्जाद मुफ्ती के निजी सुरक्षा अधिकारी (PSO) की आज गोली मारकर हत्या कर दी गई।

सज्जाद मुफ्ती पीडीपी चीफ़ और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के चचेरे भाई हैं। ख़बरों के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब सज्जाद बिजबेहारा के बाबा मोहल्ला की एक मस्जिद में नमाज अता कर रहे थे। फ़ारूक अहमद नाम का PSO मस्जिद के बाहर खड़ा था, तभी अचानक अज्ञात बंदूकधारी ने उसे गोली मार दी। उसे तुरंत उप-ज़िला अस्पताल बिजबेहारा ले जाया गया, जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया। अहमद, दिरपोरा खिरम का निवासी था।

उप-ज़िला अस्पताल, बिजबेहारा के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शौकत ने बताया कि अहमद के सीने में गोली के घाव थे और उसे मृत अवस्था में यहाँ लाया गया था। अज्ञात हमलावर ने अहमद की एके-47 भी छीन ली।

‘चोर’ और ‘पेड न्यूज़’ कहने पर ZEE मीडिया ने महुआ मोइत्रा पर किया आपराधिक मानहानि का मुक़दमा

ZEE मीडिया कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता और सांसद महुआ मोइत्रा के ख़िलाफ़ आपराधिक मानहानि का मुक़दमा दायर किया है। मीडिया हाउस ने खुद को कथित तौर पर ‘चोर’ और ‘पेड न्यूज़’ कहने पर यह कदम उठाया है।

मामले की सुनवाई आज नई दिल्ली में पटियाला हाउस कोर्ट के एडिशनल चीफ़ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल ने की। शिकायतकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता विजय अग्रवाल ने अदालत के समक्ष मोइत्रा का एक वीडियो चलाया, जिसमें वे ज़ी न्यूज़ को ‘चोर’ और ‘पेड न्यूज़’ कह रही हैं। अग्रवाल ने अदालत को बताया कि मोइत्रा ने ज़ी न्यूज़ के मालिक को चोर और चैनल से जुड़े लोगों को ‘अशिक्षित’ और ‘बुड़बक’ (बेवकूफ़) कहा था। मामले की अगली सुनवाई 1 अगस्त को होगी।

मोइत्रा ने 15 जुलाई को ज़ी न्यूज़ के पत्रकार सुधीर चौधरी के ख़िलाफ़ एक आपराधिक मानहानि का मुक़दमा दायर किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि सुधीर चौधरी ने संसद में उनके पहले भाषण को चोरी का बताया था। मोइत्रा के अनुसार, उनके भाषण को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया था। बता दें कि इस भाषण ने मोइत्रा को ‘लिबरल लेफ्ट’ की आँखों का तारा बना दिया था।

मोइत्रा ने चार जुलाई को चौधरी के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव भी पेश किया था। हालाँकि, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।

सोनभद्र नरसंहार: SDM समेत 5 निलंबित, पूर्व अधिकारी भी जाँच के दायरे में

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र ज़िले में ज़मीनी विवाद को लेकर हुए नरसंहार पर एडीजी वाराणसी ज़ोन व मंडलायुक्त मिर्ज़ापुर की जाँच समिति से मिली रिपोर्ट पर प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा की कार्यवाही के दौरान बताया कि सोनभद्र में 10 लोगों की हत्या मामले में गठित जाँच समिति की संस्तुति पर सोनभद्र के घोरावल के SDM, CO घोरावल, इंस्पेक्टर घोरावल समेत पाँच अधिकारियों व कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अपर सचिव राजस्व की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी वहाँ पूर्व में तैनात अधिकारियों की भूमिका की जाँच करेगी। इस कमेटी का काम अधिकारियों द्वारा बरती गई लापरवाही का पता लगाना होगा। उन्होंने बताया कि तीन सदस्यीय कमेटी 1955 से लेकर अब तक इस मामले को लेकर 10 दिन में रिपोर्ट देगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि समिति की जाँच रिपोर्ट में पता चला कि सीआरपीसी की धारा-145 के तहत कार्रवाई करने के लिए SDM घोरावल रिपोर्ट को काफ़ी दिनों से दबाए हुए थे। सीओ घोरावल और इंस्पेक्टर घोरावल दोनों ने ही अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया। वहीं, सब-इंस्पेक्टर और सिपाही ने भी उचित कार्रवाई नहीं की। इस वजह से SDM, CO, इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर और बीट इंचार्ज को निलंबित कर दिया गया है।

ग़ौरतलब है कि इस मामले में लखनऊ स्थित प्रदेश अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति आयोग ने सभी आरोपितों पर रासुका के तहत कार्रवाई करने को कहा है। आयोग के अध्यक्ष डीजीपी बृजलाल के मुताबिक़ इस कांड में पुलिस व प्रशासन की लापरवाही सामने आई है। उन्होंने परिक्षेत्र के डीआईजी को निर्देश दिए हैं कि इस संबंध में जाँच कर दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करें।

प्रदेश अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष के मुताबिक इस घटना में लोकव्यवस्था पूर्ण रूप से भंग हुई है, इसलिए उन्होंने कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए और जमानत होने की स्थिति में उन्हें रासुका में निरुद्ध किया जाए। साथ ही आयोग ने मामले का मुकदमा फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाए जाने के भी निर्देश दिए हैं। इसके अलावा इस मामले में राजस्व परिषद ने भी जिलाधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है। 

पूरा मामला: उत्तर प्रदेश: आदिवासियों की जमीन पर कब्जे के लिए 3 महिलाओं समेत 11 की हत्या

मुस्लिम युवती से शादी करने वाले हिन्दू लड़के पर धर्म परिवर्तन का दबाव, जिंदा जलाने की धमकी

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में मुस्लिम समाज की एक युवती ने सैनी समाज के युवक के साथ प्रेम विवाह कर लिया। अब दोनों ने परिजनों से जान को खतरा बताया है। मामला जनपद के बिहारीगढ़ थाना इलाके का है। अलग-अलग धर्म का होने के कारण इस जोड़े को ग्रामीणों ने गाँव से निकाल दिया है।

युवती ने थानाध्यक्ष और अपने परिजनों पर आरोप लगाया है कि वे युवक पर धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहे है। नव दम्पति ने सिटी एसपी से सुरक्षा की गुहार लगाई है।

जानकारी के अनुसार थाना बिहारीगढ़ के गाँव कुरड़ीखेड़ा निवासी आरजू अपने पति अमित के साथ एसपी से मिलने पहुँची थी। उसने बताया कि उन दोनों ने पिछले दिनों भागकर शादी की थी। इसके बाद उसने अपना नाम खुशनसीब रख लिया। कुछ दिन बाद जब इसकी भनक ग्रामीणों को लगी तो उन्होंने लड़के और उसके परिवार को मारपीट करके गाँव से निकाल दिया। नवविवाहित जोड़ा चाहता है कि उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए, साथ ही उनके परिजनों को गाँव में रहने दिया जाए।

युवती का कहना है कि उमरद्दीन, इरशाद, अरशद, मेहरबान, मेहताब, अश्विनी, अंकित नामक लोग उन्हें परेशान कर रहे हैं। इसकी उन्होंने पुलिस में शिकायत भी की। लेकिन पुलिस उनका ही साथ दे रही है। आरजू के मुताबिक उसके पति को हिरासत में लेकर प्रताड़ित किया जाता है।

सोशल मीडिया पर शेयर वीडियो में युवती कह रही है कि पुलिस वाले उनसे या तो धर्म परिवर्तन करने के लिए कहते हैं और या फिर लड़के से कहते हैं कि वो लड़की को साथ रखने से मना कर दे।

बता दें कि इस मामले में युवती ने अदालत में अपने पति के ही पक्ष में बयान दिए हैं। साथ ही कहा है कि परिजनों के कहने पर एसओ बिहारीगढ़ उन्हें तंग कर रहे हैं। युवती के अनुसार बुधवार (जुलाई 16, 2019) को जब वह अपने पति संग ससुराल पहुँची तो उन दोनों को गाँव के बाहर रोक लिया गया और जिंदा जलाने की धमकी दी गई।

तेलंगाना: TikTok पे पुलिस वैन से IG को ‘धमकी’, विवादों में गृहमंत्री के पोते फुरकान का वीडियो

TikTok एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। कल ही एक भड़काऊ TikTok वीडियो को लेकर बॉलीवुड कलाकार एजाज खान को गिरफ्तार किया गया है। अब तेलंगाना के गृह मंत्री मोहम्मद महमूद अली के पोते फुरकान अहमद का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में उनका पोता पुलिस वैन के ऊपर बैठकर टिक-टॉक वीडियो बना रहा है। वीडियो में, एक और युवक है जो एक IG के लिए फिल्म का डायलॉग बोल रहा है।

इस वीडियो में गृह मंत्री का पोता फुरकान अहमद IG को संभलने की धमकी दे रहा है और परिणाम भुगतने के लिए कह रहा है। फुरकान अहमद के इस टिक-टॉक वीडियो को लोग खूब पसंद कर रहे हैं। हालाँकि, कुछ लोगों ने इस वीडियो में सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया है।

2 दिन पहले बनाया गया था वीडियो

वीडियो में फुरकान अहमद के साथ बैठा अन्य व्यक्ति अचानक नीचे उतरता है और एक फिल्म के डॉयलाग पर होंठ हिलाता है और कथित रूप से आईजी रैंक के एक अधिकारी को ‘धमकाता’ है। इस वीडियो क्लिप को लेकर गृह मंत्री मोहम्मद महमूद अली ने कहा कि वे दो दिन पहले एक समारोह में यकतपुर गए थे, जहाँ एक स्थानीय व्यक्ति ने यह वीडियो बनाया था।

इस वीडियो के विवादों में आने के बाद तेलंगाना के गृह मंत्री ने कहा, “मेरा पोता सिर्फ वाहन के ऊपर बैठा था और किसी स्थानीय व्यक्ति ने यह वीडियो बनाया। हम इसकी जाँच करेंगे। मेरे पोते का इससे कोई लेना-देना नहीं है।” पुलिस सूत्रों ने बताया कि पुलिस के सभी वाहन डीजीपी के नाम के तहत पंजीकृत हैं और यह वाहन गृह मंत्री को आवंटित था।