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फैक्ट चेक: जवान अमानुल्लाह को लुटेरों ने मारा, लिबरल गैंग ने दिया सांप्रदायिक एंगल, बताया मॉब लिंचिंग

न्यूज एजेंसी पीटीआई ने रविवार (जुलाई 28, 2019) को बताया कि अमेठी में एक सेवानिवृत्त आर्मी ऑफिसर की मौत हो गई। जिसके बाद जल्द ही ये खबर फैला दिया गया कि आर्मी ऑफिसर की भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। लोगों ने इसे मॉब लिंचिंग से जोड़कर पेश किया।

इस मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए गालीबाज कॉन्ग्रेस समर्थक और रॉबर्ट वाड्रा के रिश्तेदार तहसीन पूनावाला ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में सेवानिवृत्त सेना अधिकारी अमानुल्ला भी मॉब लिंचिग का शिकार हुए हैं। उन्होंने कहा कि मॉब लिंचिग को रोकने का एकमात्र उपाय “रासुका या मानव सुरक्षा कानून” को लाना है।

भारतीय बेरोजगार कामरेडों के नायक सीताराम येचुरी ने भी भारतीय राजनीति में प्रासंगिकता खोने के बाद अपने खाली समय का आनंद लेते हुए उसी फर्जी खबर को हवा दी। उन्होंने ‘नफरत फैलाने’ और उन्हें (मॉब लिंचिंग करने वाले को) बचाने के नाम पर भाजपा पर निशाना साधा।

इसके अलावा सस्पेंडेड ब्यूरोक्रेट आशीष जोशी ने भी बिना खबर की पूर्ण सत्यता को जाने इसे मॉब लिंचिंग का नाम देकर फर्जी खबर फैलाने की कोशिश की। बता दें कि, इन्होंने AAP से बगावत करने वाले नेता कपिल मिश्रा को अपने निजी लेटरहेड के जरिए अपनी धौंस दिखाते हुए धमकी दी थी।

हालाँकि, कॉन्ग्रेस के ट्रोल और समर्थक, जो कि स्मृति ईरानी को नीचा दिखाने का एक मौका नहीं छोड़ते हैं, उन्होंने काफी देर कर दी। लोकसभा चुनाव 2019 में अमेठी में राहुल को हार का मुँह देखना पड़ा था, जिसके बाद से अमेठी से शानदार जीत हासिल करने वाली स्मृति ईरानी पर लगातार निशाना साधते रहते हैं। अमेठी में घटित इस घटना पर वे स्मृति ईरानी के खिलाफ अपना विरोध दिखाने में थोड़ा पीछे रह गए।

वहीं, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले और दलितों की तुलना जानवरों से करने वाले पत्रकार प्रशान्त कनौजिया ने भी इस घटना को साम्प्रदायिक रंग देने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर प्रोपेगेंडा फैलाया। कनौजिया ने लिखा, “उत्तर प्रदेश के अमेठी में सेना से रिटायर्ड कैप्टेन अमानुल्लाह का मॉब लिंचिंग हो गया। अब सेना से प्यार नहीं है, बस मुसलमानों से नफ़रत है। शुरुआत एहसान जाफरी से हुई, अंत अब तुम्हारे घर होगा अगर अब आवाज़ न उठाई।”

इस फर्जी घटना को न सिर्फ ए-ग्रेड ट्रोल्स और पत्रकारों ने फैलाया, बल्कि इस्लामिक कट्टरपंथियों ने भी इस झूठी खबर को खूब भुनाया।

हालाँकि, सच्चाई इससे बिल्कुल परे है और वो ये है कि आर्मी कैप्टन अमानुल्लाह खान रविवार को अमेठी में मृत पाए गए थे। उनके घर पर कुछ अज्ञात हमलावरों ने हमला किया था। इसी दौरान उनकी मौत हुई, न कि मुस्लिम होने की वजह से उनकी मॉब लिंचिंग की गई। 

पुलिस ने बताया कि गोर्डियन के पुरवा गाँव में रात के 2 बजे कैप्टन अमानुल्लाह और उनकी पत्नी अमीना सो रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि घर के बाहर कुछ लोग कुछ सामान उठा रहे हैं। जब उन्होंने इसके लिए उन्हें टोका और अन्य ग्रामीणों को भी जगाने की कोशिश करने लगे, तो हमलावरों ने उन्हें बाँध दिया और अमानुल्लाह को लाठी से मारना शुरू कर दिया। पुलिस अधिकारी प्रहलाद सिंह ने बताया कि कैप्टन के सिर पर काफी गंभीर चोट आई थी।  

अमेठी के पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार ने कहा कि मृतक और उसकी पत्नी अपने नव-निर्मित घर के बरामदे में सो रहे थे। तभी कुछ चोरों ने घर के बाहर एक खाली पड़े इलाके में ठेकेदार की सड़क निर्माण सामग्री चोरी करने की कोशिश की और जैसे ही अमानुल्लाह ने शोर माचाया, चोरों ने उन्हें मार डाला। हालाँकि, ये तथ्य प्रोपेगेंडा फैलाने वाले नहीं मानेंगे, क्योंकि उनका एजेंडा तो पहले से ही तय होता है।

Pak गेंदबाज़ मोहम्मद आमिर ने अपने देश को माना आतंकी देश! ट्विटर पर हुई छीछालेदर

टेस्ट क्रिकेट से महज़ 27 साल की उम्र में संन्यास लेने वाले पाकिस्तान के तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद आमिर की अब ब्रिटेन जाने की ख़बर सामने आ रही है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक़, आमिर की पत्नी नरगिस मलिका जो ब्रिटेन की नागरिक हैं, उन्होंने पहले से ही पति के वीज़ा के लिए आवेदन कर दिया है।

इस पर पाकिस्तान के खेल पत्रकार साज सादिक ने एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने लिखा, “समझ में नहीं आता है कि क्यों कुछ लोग मोहम्मद आमिर के ब्रिटिश पासपोर्ट के लिए आवेदन को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर बता रहे हैं। वह इसके लिए आवेदन करने का हक़दार है और इसका मतलब यह नहीं है कि वह पाकिस्तान के लिए खेलना बंद कर देगा।”

इस ट्वीट के बाद उनके एक फैन ने लिखा, “मुझे लगता है कि उन्हें (मोहम्मद आमिर) आतंकी देश को छोड़ देना चाहिए।” आमिर ने अपने फैन के ट्वीट को लाइक करके एक नए विवाद को न्योता दे दिया। 

इससे पहले की बात आगे बढ़ती आमिर ने उस ट्वीट को अनलाइक कर दिया। लेकिन ऐसा करना उनके लिए कारगर साबित नहीं हो सका क्योंकि तब तक कई यूज़र्स ने मोहम्मद आमिर का यह स्क्रीनशॉट ले लिया था। अब यह स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसे देखकर लोग आमिर को ख़ूब खरी-खोटी सुना रहे हैं। बता दें कि आमिर को स्पॉट फ़िक्सिंग के मामले में पाँच साल के लिए बैन कर दिया गया था। बैन के बाद आमिर ने पाकिस्तानी क्रिकेट टीम में वापसी की थी।

वहीं, अगर मोहम्मद आमिर के संन्यास लेने की बात की जाए तो उनके इस फ़ैसले को कई लोग हज़म नहीं कर पाए। सोशल मीडिया पर उनके संन्यास की ख़बर पर तमाम यूज़र्स ने प्रतिक्रियाएँ दीं। इनमें पाकिस्तान के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ वसीम अकरम भी शामिल हैं, जिन्होंने लिखा, “मेरे लिए मोहम्मद आमिर का टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेना थोड़ा अचंभे में डालने वाला है, क्योंकि 27-28 की उम्र में आप अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं और टेस्ट क्रिकेट में किए गए प्रदर्शन के आधार पर ही आपका आकलन किया जाता है। यह सबसे बड़ा फॉर्मेट है।”

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान रमीज राजा के अनुसार, “आमिर का 27 की उम्र में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेना निराशाजनक है। उनका यह निर्णय पाकिस्तान क्रिकेट के लिए अच्छा नहीं है जो टेस्ट क्रिकेट को बेहतर करने के बारे में सोच रहा है। यह समय खेलने का था पीछे हटने का नहीं।”

शामली के दो मदरसों पर छापा: मौलाना हफीउल्ला, वासिफ और असरफ के साथ 4 विदेशी गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश में इन दिनों मदरसों में होने वाली अवैध गतिविधियाँ पुलिस के निशाने पर है। पिछले दिनों बिजनौर में पुलिस ने मदरसे पर छापेमारी कर हथियारों की खेप बरामद की थी, तो अब शामली पुलिस ने सोमवार (जुलाई 29, 2019) को दो मदरसों पर छापा मार कर चार विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए चारों विदेशी नागरिक मदरसे में मौलवी और छात्र बनकर रहते थे और मूल रुप से ये म्यांमार के रहने वाले बताए जा रहे हैं। इनके पास से संदिग्ध वीजा और पासपोर्ट मिले हैं।

पुलिस ने आरोपितों को संरक्षण देने के आरोप में तीन मदरसा संचालकों- मौलाना हफीउल्ला, कारी वासिफ व मौलवी असरफ हुसैन को भी गिरफ्तार कर लिया है। सभी आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने मेडिकल परीक्षण के लिए भेज दिया है। पुलिस के मुताबिक, ये सभी विदेशी नागरिक कई सालों से शामली के मदरसों में पढ़ा रहे थे। फिलहाल मामले की जाँच की जा रही है और गिरफ्तार किए गए आरोपितों से स्थानीय पुलिस, खुफिया विभाग और एटीएस की टीम पूछताछ कर रही है।

जानकारी के मुताबिक, ये संदिग्ध विदेशी जलालाबाद के मदरसों में छिपकर रह रहे थे। इनमें से एक अब्दुल मजीद जलालाबाद के मदरसा अशरफिया में बतौर मौलवी बच्चों को पढ़ाता था, जिसने नौमान अली नाम के एक शख्स को बतौर छात्र अपने पास रखा हुआ था। इसके अलावा अब्दुल मजीद ने जलालाबाद के मदरसा मिफ्ताउल उलूम में भी छात्रों के रूप में रिजवान और फुरकान को रखा हुआ था। ये भी यहाँ पर अवैध रुप से रह रहे थे। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया है।

अब्दुल मजीद और उसके साथ रहने वाले नौमान के बारे में मदरसा अशरफिया के कारी वासिफ सब कुछ जानते थे। इसके अलावा मदरसा मिफ्ताउल उलूम के मौलाना हफीउल्ला को भी अपने यहाँ पढ़ रहे दोनों छात्रों के विदेशी होने और यहाँ अवैध रूप से ठहरने की जानकारी थी। पुलिस ने सभी आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 समेत विदेशी अधिनियम की धारा 14 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। आरोपितों के कब्जे से भारतीय नागरिकता के दस्तावेज, भारतीय रुपए, म्यांमार करेंसी, एटीएम, फोन भी बरामद किए गए हैं। 

दूरदर्शन में गुणवत्ता पर जोर – क्रिएटिव हेड से लेकर बड़े पैमाने पर विशेषज्ञों की होगी नियुक्ति: जावड़ेकर

हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि दूरदर्शन के कार्यक्रमों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए जल्द ही एक क्रिएटिव हेड की नियुक्ति की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकारी महकमा तो रहेगा लेकिन क्रिएटिव कामों के लिए बड़े पैमाने पर विशेषज्ञ नियुक्त किए जाएँगे। ये सब सरकारी प्रसारणकर्ता दूरदर्शन के आधुनिकीकरण के तहत किया जा रहा है।

जावड़ेकर गुरुवार 25 जुलाई, 2019 को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में दूरदर्शन के सभी आठ स्टूडियो और यहाँ डीडी केंद्र के अर्थ स्टेशन में वीडियो वॉल्स का उद्घाटन करने के उपलक्ष्य पर बोल रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय प्रसारणकर्ता दूरदर्शन विश्वसनीयता का पर्याय है।

तीन वर्षीय योजना के अंतर्गत स्थापित की गई वीडियो वॉल की स्थापना में 10.75 करोड़ की लागत आई है और यह अंतर्राष्ट्रीय प्रसारणकर्ताओ के स्टूडियो के समकक्ष है। वीडियो वॉल की शुरुआत से सेट को जमीनी रूप से खड़ा करने में लगने वाले समय में काफी बचत होगी। इससे कार्यक्रम की आवश्यतानुसार स्टूडियो सेट में लाइव/रिकार्ड किए गए वीडियो और ग्राफिक्स आदि प्रयोग किए जा सकेंगे।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तीन साल की कार्य योजना के तहत दूरदर्शन के ढाँचे को आधुनिक बनाने के लिए उसे आवश्यक मदद दी गई है।

जावेडकर ने अधिकारियों से डीडी फ्री डिश को मौजूदा 3.25 करोड़ परिवारों से पाँच करोड़ परिवारों तक बढ़ाने की ओर काम करने के लिए भी कहा। साथ ही इस सम्बोधन में उनका विशेष बल दूरदर्शन की प्रोग्रामिंग को बढ़ाने और उच्च गुणवत्ता वाले कार्यक्रम बनाने के लिए जल्द ही क्रिएटिव हेड की नियुक्ति पर अधिक था।

इसी कार्यक्रम के दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव अमित खरे ने कहा, “सरकार दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो का हरसंभव तरीके से समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सरकारी सेवा प्रसारणकर्ता समकालीन उद्योग के मानकों के हिसाब से सेवाएँ उपलब्ध करा सके और भारत के कोने-कोने तक अपनी पहुँच सुनिश्चित कर सके।”

प्रसार भारती के अध्यक्ष ए सूर्य प्रकाश ने दूरदर्शन के प्रयासों की सराहना की और कहा कि हाल फिलहाल में प्रभावशाली और अर्थपूर्ण कार्यक्रम बनाए गए है। ऐसे कार्यक्रम बनाए गए जिन्होंने सरकार की अहम योजनाओं को हर घर तक पहुँचाया।

उन्नाव रेप पीड़िता एक्सीडेंट: MLA कुलदीप और उसके भाई मनोज समेत 25 पर हत्या का मुकदमा दर्ज

उन्नाव रेप केस की पीड़िता के रायबरेली के गुरबख्शगंज में एक ट्रक के पीड़िता की कार को टक्कर मारने के मामले में उनके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और आपराधिक साजिश जैसी कई धाराओं में केस दर्ज किया गया है। रोड एक्सीडेंट के मामले में भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर, उनके भाई मनोज सिंह सेंगर और 8 अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

फिलहाल, सेंगर और उनका भाई मनोज पहले से ही जेल में हैं। रेप पीड़िता के चाचा की तहरीर पर कुलदीप सिंह सेंगर समेत 10 नामजद और 15-20 अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 307, 506, 120B के तहत यह मुकदमा दर्ज किया गया है। FIR में कुलदीप सिंह सेंगर, मनोज सिंह सेंगर, विनोद मिश्र, हरिपाल मिश्र, नवीन सिंह, कोमल सिंह, अरुण सिंह, ज्ञानेन्द्र सिंह, रिंकू सिंह और एडवोकेट अवधेश सिंह समेत 15-20 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया गया है।

इस घटना के बाद, उन्नाव गैंगरेप केस में आरोपित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। बता दें कि रविवार को कार के ट्रक की चपेट में आने के चलते पीड़िता की चाची समेत दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि पीड़िता और वकील गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पताल में उसका गहन इलाज चल रहा है। योगी सरकार ने घायलों के इलाज और हरसंभव मदद की घोषणा की है।

किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज लखनऊ के ट्रॉमा सेण्टर इंचार्ज ने बताया कि पीड़िता और उनके वकील वेंटिलेटर पर हैं। उनकी हालत क्रिटिकल लेकिन स्टेबल है।

सड़क हादसे के बाद जहाँ एक ओर विपक्षी पार्टियाँ प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा कर रही हैं, वहीं पीड़िता के परिजन भी इसे हादसा मानने को तैयार नहीं थे। उनका आरोप है कि विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के इशारे पर ही इस घटना को अंजाम दिया गया है।

कॉन्ग्रेस, सपा, बसपा और फिर बीजेपी

जानकारी के लिए बता दें कि आरोपित विधायक ने उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले समाजवादी पार्टी का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे और कुलदीप सिंह सेंगर ने बांगरमऊ से चुनाव लड़ा और जीत भी दर्ज की। इससे पहले 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने उन्नाव की ही भगवंतनगर सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी।

वैसे, कुलदीप सिंह सेंगर ने राजनीति की शुरुआत कॉन्ग्रेस पार्टी से की थी। लेकिन, जब वर्ष 2002 में विधानसभा चुनाव आए, तो कुलदीप सिंह कॉन्ग्रेस का हाथ छोड़कर हाथी के साथ चल दिए। कुलदीप ने चुनावी मैदान में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी को बड़े अंतर से हराया था। बाहुबली की छवि होने की वजह से 2007 से पहले बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने कुलदीप सिंह सेंगर को बाहर का रास्ता दिखा दिया। कुलदीप सिंह सेंगर ने सपा के टिकट पर बांगरमऊ से जीत दर्ज की थी। आरोपित का राजनीतिक इतिहास पहले से ही विवादित रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता की बहन का कहना है, “उनके परिवार को लगातार धमकियाँ मिल रही थीं। उनके ऊपर केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा था। विधायक की साजिश थी कि पीड़िता और गवाह की हत्या कर मामले को ही खत्म कर दिया जाए।”

CBI जाँच की माँग

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता की बहन ने सरकार से माँग की है कि दुर्घटना जाँच सीबीआई से हो। इस बीच रायबरेली जेल में बंद पीड़िता के चाचा ने लिखित तहरीर देते हुए इस मामले को भी मुख्य मामले के साथ जोड़कर सीबीआई को जाँच सौंप देने की अपील की है। अभी तक इस मामले में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उनके परिवारवालों की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

कॉन्ग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई के घर IT का छापा, ₹200 करोड़ की विदेशी सम्पत्ति ज़ब्त

आयकर विभाग ने हरियाणा कॉन्ग्रेस के नेता कुलदीप बिश्नोई और उनके परिवार के ख़िलाफ़ छापेमारी की। आयकर विभाग ने इस बात की औपचारिक तौर पर पुष्टि की है कि छापेमारी में कुलदीप बिश्नोई की कंपनी और परिवार की विदेश में क़रीब ₹200 करोड़ की सम्पत्ति के बारे में पता चला है।

इससे पहले, हरियाणा के हिसार ज़िले में शुक्रवार (26 जुलाई) को आयकर विभाग के छापे के बाद शनिवार को दिल्ली में भी रेड की कार्रवाई ख़त्म हो गई। कार्रवाई ख़त्म होने के बाद कुलदीप विश्नोई के बेटे भव्य बिश्नोई ने अधिकारियों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब देते हुए आंकड़े साझा किए। भव्य ने बताया कि इस दौरान 10 इंस्पेक्टर्स ने उनसे लगभग 89 घंटे में 146 सवाल पूछे।

ख़बर के अनुसार, आयकर विभाग के अधिकारियों ने टैक्स चोरी से जुड़े मामले में बिश्नोई के हरियाणा के हिसार, मंडी आदमपुर और गुरूग्राम समेत कुल 13 स्थानों पर 23 जुलाई को छापेमारी की थी। इसमें कई बेनामी सम्पत्तियों समेत करोड़ों रुपए के लेन-देन, चल-अचल सम्पत्तियों से संबंधित डील के बारे में जानकारी और सबूत मिले हैं।

इसके अलावा आयकर विभाग को यूएई और पनामा में कुलदीप बिश्नोई की कंपनी के शेयर के बारे में पता चला है जिसके दस्तावेज़ भी बरामद किए गए हैं। कुलदीप बिश्नोई के बारे में बता दें कि वो पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत भजन लाल के बेटे हैं। छापेमारी के दौरान आयकर विभाग के अधिकारियों ने इस बात की भी जानकारी दी कि वित्तीय लेन-देन के दस्तावेज़ों के अलावा बैंक खाता नंबर और कई अन्य सम्पत्तियों से संबंधित दस्तावेज़ भी बरामद किए गए हैं। साथ ही सर्च ऑपरेशन में अधिकारियों ने बिश्नोई के कम्प्यूटर और लैपटॉप को भी ज़ब्त किया था।

ग़ौरतलब है कि हरियाणा के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे भजन लाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई विधायक हैं, जबकि उनकी पत्नी रेणुका बिश्नोई भी राज्य विधानसभा में हांसी सीट का प्रतिनिधित्व करती हैं। दोनों पति-पत्नी ने 2014 के विधानसभा चुनाव में हरियाणा जनहित कॉन्ग्रेस के उम्मीदवारों के रूप में जीत हासिल की थी। बाद में 2016 में पार्टी का कॉन्ग्रेस में विलय हो गया था। उनके बेटे भव्य बिश्नोई ने हाल ही में कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर हिसार संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था।

मस्जिद में पढ़ने गई 8 साल की मासूम के साथ अश्लील हरकत, इमाम मुनीर अहमद गिरफ्तार

बरेली जिले के नवाबगंज की एक मस्जिद में 8 साल की मासूम छात्रा के साथ अश्लील हरकतें करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि मस्जिद गई आठ साल की छात्रा के साथ वहीं के इमाम ने बुरी नीयत से दबोच लिया और फिर अश्लील हरकतें करने लगा। इसके बाद इमाम ने बच्ची को डरा धमकाकर घर भेज दिया। बच्ची घर में डरी-सहमी गुमसुम रहने लगी और वह रोती रही। परिजनों द्वारा बार-बार पूछने पर बच्ची ने दो दिन इसके बारे में बताया। मासूम के साथ अश्लील हरकत होने से लोग भड़क उठे और मजिस्द पहुँच गए। हालाँक‍ि तब तक आरोपित इमाम मस्जिद से फरार हो चुका था।

इसके बाद बच्ची के पिता ने आरोपित इमाम मुनीर अहमद के खिलाफ थाना नवाबगंज में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की और सोमवार (जुलाई 29, 2019) को उसे रामपुर जनपद से गिरफ्तार कर लिया। दरअसल, ये घटना नवाबंगज के दयालपुर कस्बा में चौपला वाली मस्जिद की है।

मस्जिद में कस्बे के ही एक व्यक्ति की 8 वर्षीय बच्ची अरबी भाषा पढ़ने जाती थी। शुक्रवार (जुलाई 26, 2019) को जब बच्ची मस्जिद में गई तो बच्ची को अकेला देख वहाँ के इमाम मुनीर अहमद ने छेड़छाड़ की। 2 दिन बाद जब मासूम ने इसके बारे में बताया तो सब हैरान और आक्रोशित हो गए। इसी आक्रोशित भीड़ को आता देखकर आरोपित इमाम मुनीर अहमद मस्जिद छोड़कर फरार हो गया। हालाँकि, अब वह पुलिस के द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया है।

‘शिवभक्त’ तेज प्रताप यादव के बाउंसरों ने की काँवड़ियों की पिटाई, महिला रिपोर्टर से बदसलूकी

राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव हमेशा अपनी हरकतों से मीडिया की सुर्खियों में बने रहते हैं। कभी कृष्ण कन्हैया की वेश-भूषा धारण करके बाँसुरी बजाने वाले तेजप्रताप सावन के दिनों में शिव की भक्ति में लीन हैं। लेकिन इस वक्त उनका ये रूप चर्चा का विषय नहीं है बल्कि उनके बाउंसरों द्वारा काँवड़ियों से मारपीट मीडिया हेडलाइन है।

जी हाँ, घटना रविवार (जुलाई 29, 2019) की है। जब तेज प्रताप यादव झारखंड के देवघर स्थित बाबाधाम में भगवान शिव का जलाभिषेक करने निकले। जानकारी के मुताबिक, इस दौरान उनके समर्थकों ने जमकर बवाल काटा और उनके कई बाउंसरों ने श्रद्धालुओं को भी बुरी तरह पीटा। इतना ही नहीं, इस दौरान महिला मीडियाकर्मी से भी बदसलूकी की गई।

बताया जा रहा है कि जलाभिषेक के लिए निकला तेज प्रताप यादव का काफिला चानन के पास रास्ते के जाम में फँस गया था कि तभी तेज प्रताप समेत उनके सभी समर्थक गलत तरफ से अपना काफ़िला निकालने लगे। जब अन्य श्रद्धालुओं ने इसका विरोध किया तो तेज प्रताप के समर्थकों ने काँवड़ियों से मारपीट शुरू कर दी।

इस कड़ी में मीडिया खबरों के अनुसार एक हिंदी चैनल की पीसीआर वैन और गाड़ी ने भी तेज प्रताप के काफ़िले को ओवरटेक करना चाहा, लेकिन तेजप्रताप के बाउंसरों ने अपनी गाड़ी से उतरकर प्रेस की गाड़ी के ड्राइवर को तमाचा मार दिया। जब वैन में मौजूद महिला रिपोर्टर ने उन्हें समझाने की कोशिश की तो उनके साथ भी बाउंसरों ने बदसलूकी की।

ये हंगामा बांका के समीप करीब आधी रात तक चलता रहा। हंगामें के दौरान तेज प्रताप भी काफिले में मौजूद थे, लेकिन बीच-बचाव करने की बजाए वे बस से उतर स्कॉर्पियों में बैठकर चले गए, जबकि उनके बाउंसरों ने बवाल जारी रखा।

J&K की मस्जिदों पर गृह मंत्रालय की नजर: माँगी सभी मस्जिदों, मौलवियों और फंडिंग की जानकारी

जम्मू-कश्मीर के मस्जिद इस समय गृह मंत्रालय की निगरानी पर हैं। टाइम्स नॉउ की खबर के मुताबिक राज्य के सभी जिलों से वहाँ स्थित मस्जिदों के प्रशासन की जानकारी माँगी गई है।

गृह मंत्रालय ने राज्य के सभी जिले के पुलिस अधिकारियों को सभी मस्जिदों से जुड़ी जरूरी जानकारी भेजने के निर्देश दिए हैं। जिसमें इन मस्जिदों के लोकेशन और प्रशासन की सूचना भी शामिल है।

इसके अलावा गृह मंत्रालय ने मस्जिद के मौलवियों, मस्जिद की फंडिग और मस्जिद के संचालन का भी ब्यौरा माँगा है। गृह मंत्रालय ने कहा, “प्रारूप के अनुसार उच्च अधिकारी कार्यालय के पर्फोमा के मुताबिक अपने संबंधित क्षेत्राधिकार में आने वाले मस्जिद और उनके प्रशासन की जानकारी तुरंत भेजें।”

इस निर्देश के बाद मजहबी धर्मगुरूओं ने इसका विरोध किया है और इसे मजहब में दखलअंदाजी बताया है। हालाँकि गवर्नर के सलाहकार ने टाइम्स नॉउ से बातचीत में ऐसे किसी भी ऑर्डर के जारी होने की बात को खारिज किया है जबकि चैनल के मुताबिक दूसरे एक अन्य पुलिस ऑर्डर में ऐसा निर्देश जारी होने की बात है।

बता दें कि जम्म-कश्मीर राज्य में मस्जिदें बहुत लंबे समय से सवालों के घेरे में हैं क्योंकि उनमें से कुछ ऐसे शक्ति केंद्र हैं, जहाँ से अलगाववादी गतिविधियाँ प्रसारित होती हैं। जबकि इसके अलावा कुछ मस्जिदों को लेकर माना जाता है कि वे आतंकी अभियानों के लिए धन मुहैया कराने के लिए एक मोर्चे के रूप में इस्तेमाल होते हैं और साथ ही यहाँ शुक्रवार की नमाज के बाद मुस्लिम बच्चों को मज़हबी उपदेश के माध्यम से राज्य के ख़िलाफ़ हथियार उठाने को उकसाया जाता है।

गौरतलब है कि मोदी सरकार द्वारा लिए गए इस एक्शन का सिर्फ़ यही उद्देश्य है कि इबादत करने वाले धार्मिक स्थलों का आतंकवादियों द्वारा गलत इस्तेमाल न किया जाए। क्योंकि इस्लामी कट्टरपंथियों और वाहबियों ने पिछले कुछ सालों से मस्जिदों को सुरक्षाबल और देश के नागरिकों के ख़िलाफ़ होने वाली आतंकी गतिविधियों के लिए प्रभावित किया है।

‘कुरान प्रगतिशील, हिंदू धर्म हद से ज्यादा दकियानूसी’ – स्क्रीनशॉट से हुआ इरा त्रिवेदी के झूठ का पर्दाफ़ाश

इन दिनों योग प्रशिक्षक इरा त्रिवेदी अपने सबसे बुरे दिनों से गुज़र रही हैं। दरअसल, उन्होंने एक झूठे आँकड़े को आधार बनाकर बताया था कि गाय का माँस प्रोटीन का सबसे बेहतर स्रोत होता है। इरा के गौ माँस के प्रचार के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उनका काफ़ी विरोध किया था, जिसके चलते दूरदर्शन ने अपने योग कार्यक्रम ‘योग विद इरा त्रिवेदी’ से उनकी छुट्टी कर दी। हालाँकि, दूरदर्शन ने अपने इस योग कार्यक्रम में इरा की जगह यामिनी मुथाना को जगह दी है। ऑपइंडिया ने पहले अपनी एक ख़बर के ज़रिए इस मामले पर जानकारी दी थी।

काफ़ी हो-हल्ला के बाद, इरा त्रिवेदी ने माफ़ी माँगते हुए ट्वीट किया कि वो शुद्ध शाकाहारी हैं और हिंदू धर्म का सम्मान करती हैं। इरा के इस ट्वीट के बाद भी जब लोगों का ग़ुस्सा शांत नहीं हुआ, तो उन्होंने झूठ का सहारा लिया।

एक नई मनगढंत कहानी गढ़ते हुए इरा त्रिवेदी ने अपने ख़ुद के उस ट्वीट को अस्वीकार कर दिया, जिसमें उन्होंने लिखा था, “कुरान प्रगतिशील है, जबकि आधुनिक हिंदू धर्म प्रतिगामी (पीछे ढकेलने वाला) है।”

अपने ट्विटर अकाउंट को पाक-साफ़ साबित करने के बाद, इरा त्रिवेदी अब लोगों को यह समझाने की कोशिश कर रही हैं कि जिस ट्वीट में उन्होंने क़ुरान को प्रगतिशील और आधुनिक हिंदू धर्म को प्रतिगामी बताया, वह एक फ़ेक ट्वीट है। हालाँकि, जैसा कि कहा जाता है, इंटरनेट कभी कुछ नहीं भूलता। ऐसा ही कुछ इरा त्रिवेदी के साथ भी हुआ जिससे उनके दावे की पोल खुल गई।

बता दें कि इरा त्रिवेदी ने ख़ुद को पाक-साफ़ घोषित करने के लिए जिस ट्वीट का इस्तेमाल किया, उसकी सच्चाई से यूज़र्स ने ही उन्हें अवगत करा दिया। दरअसल, वो ट्वीट 2017 का था, जिस पर समय और तारीख़ दोनों स्पष्ट हैं।

इसके अलावा, कई लोगों ने इरा त्रिवेदी को बताया कि मूल ट्वीट लिंक भी मौजूद है। इससे यह बात साफ़ हो गई कि इरा त्रिवेदी ने अपनी टाइमलाइन से उस ट्वीट को ख़ुद ही डिलीट किया था।

इरा त्रिवेदी द्वारा हटाए गए ट्वीट के इतर सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें इस बात का का भी सबूत दे डाला, जिसमें वो (इरा त्रिवेदी) हिन्दू धर्म को कोसती नज़र आईं।