आर्थिक अपराधी घोषित भगोड़े विजय माल्या ने ब्रिटेन की हाईकोर्ट में आवेदन कर ब्रिटेन के गृह मंत्री द्वारा दिए गए प्रत्यर्पण आदेश के ख़िलाफ़ अपील करने की अनुमति माँगी है। ब्रिटेन के गृह मंत्री साज़िद जाविद ने माल्या के ख़िलाफ़ प्रत्यर्पण आदेश दिया था साथ ही अपील के लिए 14 दिन का समय दिया था। ख़बरों के अनुसार माल्या ने प्रत्यर्पण आदेश पर हस्ताक्षर होने के 10 दिन बाद गुरुवार (14 फ़रवरी 2019) को हाईकोर्ट के प्रशासनिक कोर्ट विभाग में आवेदन किया।
ब्रिटेन कोर्ट के प्रतिनिधि ने बताया कि माल्या की याचिका जज के पास भेजी गई है। इस पर जवाब आने में क़रीब 2 से 4 सप्ताह का समय लग सकता है। अगर माल्या की अर्ज़ी स्वीकार कर ली गई तो अगले कुछ महीनों में मामले की सुनवाई को आगे बढ़ा दिया जाएगा।
दूसरे केस में अगर माल्या की अर्ज़ी ख़ारिज हो जाती है तो उसके पास रिन्यूवल फॉर्म दाखिल करने का विकल्प उपलब्ध रहेगा। बता दें कि माल्या पर क़रीब 9000 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप है। माल्या 2016 से ब्रिटेन में है और 2017 से स्कॉटलैंड यार्ड द्वारा जारी प्रत्यर्पण वारंट पर ज़मानत पर है।
सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले माल्या ने अपनी अपील पर कोई नए सिरे से टिप्पणी नहीं की। हालाँकि, इससे पहले गृह सचिव ने 4 फरवरी को माल्या के प्रत्यर्पण के पक्ष में वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत के आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा दिसंबर 10, 2018 को निर्णय दिए जाने के बाद, माल्या ने अपील करने का इरादा ज़ाहिर किया था।
After the decision was handed down on December 10,2018 by the Westminster Magistrates Court, I stated my intention to appeal. I could not initiate the appeal process before a decision by the Home Secretary. Now I will initiate the appeal process.
आपको बता दें कि इस प्रक्रिया के दौरान 30 मिनट की मौखिक सुनवाई होगी जिसमें माल्या के वकील और भारत सरकार की ओर से वाद लड़ रही क्राउन प्रोसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) अपील के ख़िलाफ़ और पक्ष में अपने दावों को नए सिरे से रखेगी ताकि जज यह फ़ैसला ले सकें कि इस मामले में पूरी सुनवाई की जा सकती है या नहीं।
बता दें कि यह प्रक्रिया लंदन में रॉयल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में होगी। इस प्रक्रिया में कई महीने भी लग सकते हैं क्योंकि मामले का अदालत की कार्रवाई के लिए सूचीबद्ध होना जजों की उपलब्धता और अन्य कारकों पर निर्भर करता है। हाईकोर्ट के स्तर पर फ़ैसला आने के बाद दोनों पक्षों के पास सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने का हक़ होगा। ब्रिटेन में सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने की प्रक्रिया थोड़ी और कठिन है।
पुलवामा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान अपनी ग़लती को स्वीकारने की जगह इसका सीधा आरोप भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी ‘RAW (Rsearch and Analysis Wing)’ पर लगा रहा है। पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री एवं पाकिस्तान पिपुल्स पार्टी के नेता रहमान मलिक ने यह आरोप एक प्रेस वार्ता के दौरान लगाया।
मलिक का आरोप है कि अंतराष्ट्रीय न्यायालय में लंबित कुलभूषण जाधव के मसले से ध्यान हटाने के लिए भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ ने ख़ुद ही हमले कराए हैं।
पाकिस्तानी अख़बार ‘द डॉन’ के अनुसार शुक्रवार (फरवरी 15, 2019) को एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए रहमान ने इस बयान को दिया है। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से ही तमाम झूठे मामलों का आरोप पाकिस्तान पर लगाता आया है। पाकिस्तान को अकेला करने के लिए भारत हमेशा से कोई न कोई साज़िश रचता रहता है।
ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान की सरज़मीं पर पाल-पोसकर बढ़ाए जा रहे जैश-ए-मोहम्मद ने पुलवामा में हुए आतंकी हमले की पूरी ज़िम्मेदारी ली है। इस पूरी साज़िश को अंजाम देने वाले फिदायीन हमलावार का वीडियो भी सोशल मीडिया पर डाला गया। जिसमें वो हमले के बारे में बात करते हुए नज़र आया। इतने सबूत होने के बावजूद भी पाकिस्तान अपनी ओछी बयानबाज़ी से बाज नहीं आ रहा है।
भारत की सबसे तेज़ रफ़्तार ट्रेन ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ की सफलता को ख़ारिज करने के लिए फर्जी ख़बरों का सहारा लेते हुए इसके बारे में झूठ फैलाने की कोशिश की गई। अभिनेता से नेता बनी दिव्या स्पंदना ने इसे लेकर न केवल नकली ख़बरों को गढ़ा, बल्कि जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले पर भी असंवेदनशील बयानों को फै़लाने की कोशिश की।
कॉन्ग्रेस आईटी सेल की प्रमुख और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी की करीबी सहयोगी दिव्या स्पंदना ने अपने ट्वीट में कहा कि भारत की सबसे तेज़ गति से चलने वाली ट्रेन ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ एक मवेशी के आगे आने से बीच में रुक गई। उन्होंने ट्रेन के बारे में फर्ज़ी ख़बरों को फैलाने की कोशिश की।
यही नहीं दिव्या ने अपने पोस्ट के माध्यम से न केवल फ़र्ज़ी ख़बरों के प्रचार का सहारा लिया, बल्कि रेल मंत्री पीयूष गोयल को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने और उन्हें ट्रोल करने के लिए भी कोशिश की।
बता दें कि ट्रेन-18, जिसे आधिकारिक तौर पर ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ नाम दिया गया है, उसको कुछ यात्रियों के साथ ट्रायल के तौर पर वाराणसी से दिल्ली के बीच चलाया गया था। ट्रेन जब दिल्ली लौट रही थी, तो दिल्ली से लगभग 200 किलोमीटर दूर टुंडला के पास एक मवेशी के चपेट में आ जाने के कारण ट्रेन को रोका गया था।
चूंकि मवेशी ट्रेन के पहिए के नीचे आ गया था, इसलिए आख़िरी कोच की संचार प्रणाली ट्रेन के नियंत्रण प्रबंधन प्रणाली को प्रभावित कर रही थी, जिसके चलते उसे अलग करते हुए ट्रेन को सुबह 8.15 बजे रवना किया गया था। बता दें कि ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ का इस्तेमाल किसी व्यवसायिक परिचालन की दृष्टि से नहीं किया गया था।
NDTV की झूठी ख़बर फैलाने की कोशिश
कॉन्ग्रेस और वामपंथियों को समर्थन देने वाला न्यूज चैनल NDTV जो झूठी ख़बरों को प्रसारित करने के लिए बदनाम हो चुके है, उसने भी इसके बारे में गलत ख़बर फ़ैलाने की कोशिश की। NDTV ने जानबूझकर मवेशी के टकराने की बात को नज़रअंदाज करते ट्रेन में तकनीकी ख़राबी की ख़बर प्रसारित करते हुए मोदी सरकार को निशाना बनाया।
जहाँ एक तरफ देश पुलवामा में शहीद हुए 44 सीआरपीएफ के जवानों को लेकर शोक मना रहा था, वहीं दूसरी ओर दिव्या स्पंदना ने भी एनडीए सरकार पर निशाना साधने की हड़बड़ी में NDTV की आधी-अधूरी रिपोर्ट का इस्तेमाल करते हुए ट्रेन-18 के बारे में झूठी ख़बर फैलाते हुए ट्रेन को विफल बताया।
गढ़ दिया गया पीयूष गोयल का फ़र्जी बयान
दिव्या स्पंदना भारतीय रेल को बदनाम करने के लिए पुलवामा हमले को लेकर रेल मंत्री पीयूष गोयल को भी घसीटने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि पीयूष गोयल ने कथित तौर ट्रेन-18 को पुलवामा आतंकी हमले का जवाब कहा था, जबकि पीयूष गोयल ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया था।
कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया सेल प्रमुख ने बातों को खींचते हुए पुलवामा आतंकी हमले के मास्टरमाइंड आदिल डार को आतंकवाद में शामिल होने की बात को शर्मनाक तरीके से सही ठहराया। दिव्या स्पंदना ने इसके अलावा अल्ट्रा-लेफ्ट विंग वकील प्रशांत भूषण के एक ट्विटर को री-ट्वीट भी किया, जिसमें उन्होंने देश के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने के लिए आतंकवाद में शामिल होने वाले कश्मीरी युवाओं को सही ठहराया था।
पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले में जवानों की शहादत देशभर में ग़म और आक्रोश का माहौल है। पाकिस्तान की इस हरक़त का जवाब देश का लगभग हर नागरिक अपने-अपने तरीके से देना चाहता है। कहीं ये ग़ुस्से के रूप में निकलकर सामने आता है तो कहीं जवानों के बलिदान को नमन करते हुए उन्हें श्रद्धांजलियाँ देने के रूप में उजागर होता है।
दु:ख भरे इस माहौल में एक ऐसा भी शख़्स सामने आया है जिसने प्रधानमंत्री मोदी से गुहार लगाई है कि उसे आतंकी क्षेत्र में विस्फ़ोटक बाँधकर जाने की अनुमति दी जाए। यह मामला है मध्य प्रदेश का जहाँ मऊगंज के सिविल कोर्ट के कर्मचारी राजकरण सिंह ने शुक्रवार (15 फ़रवरी 2019) को कहा कि वो अपने शरीर पर विस्फोटक सामग्री बाँधकर आतंकी क्षेत्र में जाना चाहते हैं और इसके लिए वे प्रधानमंत्री की अनुमति चाहते हैं।
राजकरण सिंह ने जिस भावना से यह पत्र लिखा उससे साफ़ ज़ाहिर है कि जवानों के प्रति उनके मन में कितना सम्मान और लगाव है। सरहद पर तैनात देश के जवानों के प्रति उनका यह सम्मान इस बात का भी संकेत है कि भले ही आज ये जवान प्रत्यक्ष रूप से उनके साथ न हों लेकिन अपने बलिदान से वो देशवासियों के दिल में हमेशा जीवित रहेंगे।
बता दें कि सिंह ने प्रधानमंत्री के नाम सोशल मीडिया पर लिखे इस पत्र में उन्होंने लिखा कि देश के जवान हर समय देश को सुरक्षित रखने में लगे रहते हैं। इसके लिए वे सरहद पर दिन-रात चौकस रहते हैं। देश के प्रति अपनी इसी वफ़ादारी को निभाते हुए वो अपने प्राणों की आहुति देने से भी नहीं चूकते। हर समय अपनी जान हथेली पर रखने वाले इन साहसिक वीरों को पता भी नहीं होता कि कब इनका जीवन समाप्त हो जाएगा। इसी बात का हवाला देते हुए राजकरण सिंह ने अपने पत्र में लिखा कि वे अपना जीवन जी चुके हैं, इसलिए अब वो देश के लिए कुछ करना चाहते हैं।
देश के लिए कुछ कर गुज़रने वाली इस चाहत से ओत-प्रोत अपने पत्र में सिंह ने इस बात को भी लिखा कि अगर देश की सेवा के लिए उन्हें अपने प्राण भी न्यौछावर करने पड़ें तो उसके लिए भी उन्हें कोई अफ़सोस नहीं होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महाराष्ट्र के दौरे पर हैं। यहाँ उन्होंने यवतमल में कई परियोजनाओं का शिलान्यास किया। पीएम ने एक बार फ़िर पुलवामा में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि गुनहगारों को उनके किए की सज़ा दी जाएगी। “मैं जानता हूँ कि हम सभी किस गहरी वेदना से गुज़र रहे हैं। पुलवामा में जो हुआ, उसको लेकर आपके आक्रोश को मैं समझ रहा हूँ।”
पीएम मोदी ने कहा, “जिन परिवारों ने अपने लाल को खोया है, उनकी पीड़ा मैं अनुभव कर सकता हूँ। इन शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। आतंकी हमसे जितना मर्ज़ी छिप लें, लेकिन उन्हें सज़ा मिलनी तय है। उन्होंने कहा कि सैनिकों में और विशेषकर CRPF में जो ग़ुस्सा है, वो भी देश समझ रहा है। इसलिए सुरक्षाबलों को खूली छूट दी गई है।”
पीएम ने कई परियोजनाओं का किया शिलान्यास
इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कई परियोजनाओं का शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएँ ग़रीबों से जुड़ी, सड़कों से जुड़ी, रेलवे से जुड़ी, रोज़गार से जुड़ी हई हैं। पीएम मोदी ने कहा कि यवतमाल के साढ़े 14 हज़ार से अधिक ग़रीब परिवारों ने आज अपने नए घर में प्रवेश किया है। केंद्र सरकार ने 2022 तक हर बेघर को पक्का घर देने का लक्ष्य रखा है और सरकार तेज़ी से अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ रही है। उन्होंने बातया कि अब तक देश के गाँव और शहरों में 1.5 करोड़ ग़रीबों के घर बनाए जा चुके हैं।
पीएम ने यहाँ सड़क से जुड़े करीब ₹500 करोड़ के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास किया गया। इसके अलावा पुणे- अजनी-पुणे हमसफर एक्सप्रेस को भी हरी झंडी दिखाई। ये ट्रेन दौंड, मनमाड, भुसावल और बडनेरा होते हुए जाएगी। इससे इन सभी जगहों के लोगों को बहुत सुविधा होने वाली है।
भीख का कटोरा लेकर घूमने वालापाकिस्तान एक विफल राष्ट्र है
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ क़ाफ़िले पर (14 फ़रवरी 2019) हुए आतंकी हमले में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर जमकर हमला बोला था। पीएम ने कहा था कि आतंकवाद को जारी रखने वाला पाकिस्तान एक विफल राष्ट्र है।
प्रधानमंत्री ने कहा था कि पाकिस्तान आर्थिक संकट से गुजर रहा है। उसके लिए रोज़मर्रा का ख़र्चा तक चलाना मुश्किल हो गया है, वह दुनिया में भीख का कटोरा लेकर घूम रहा है। दुनिया जान रही है कि पाकिस्तान आतंकवाद का पोषण करता है, यही कारण है कि तमाम देश उसे अलग-थलग कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले पर सरकार की तरफ से आज (शनिवार) को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई। यह बैठक संसद की लाइब्रेरी में आयोजित की गई। इस बैठक में कॉन्ग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, एनसीपी नेता शरद पवार सहित कई विपक्षी नेता शामिल हुए।
इस बैठक में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का प्रस्ताव पास किया गया। इस दौरान गृहमंत्री ने हमले के बाद सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों की विपक्ष को जानकारी देते हुए कहा कि सुरक्षा बलों को फ्री हैंड दे दिया गया है।
The resolution passed at the all-party meeting: We strongly condemn the dastardly terror act of 14th February at Pulwama in J&K in which lives of 40 brave jawans of CRPF were lost. pic.twitter.com/0OjGkgS6He
देश की सुरक्षा में लगे जवान मुँहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं। इस दौरान पारित किए गए प्रस्ताव में कहा गया कि जो लोग सीमा पार के इशारे पर चलते हैं, हम ऐसे आतंकवाद को ख़त्म करने के लिए एकजुट हैं।
सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने की। सभी बड़ी राजनीतिक पार्टियों को इसके लिए आमंत्रण भेजा गया था। सर्वदलीय बैठक से पहले गृहमंत्री राजनाथ सिंह के घर पर बड़ी बैठक हुई। इस बैठक में गृह सचिव राजीव गौबा सहित इंटेलीजेंस ब्यूरो(आईबी) के बड़े अधिकारी भी बैठक में शामिल रहे। इस बैठक में 14 फरवरी को हुए पुलवामा हमले की अब तक की जाँच पर चर्चा की गई ।
इस सर्वदलीय बैठक में गृहमंत्री के अलावा सचिव राजीव गौबा, कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, बसपा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा, नरेंद्र सिंह तोमर, जेपी यादव, के रंगराजन (सीपीएम), नेशनल कांफ्रेंस के फारुक अब्दुल्ला, चन्दू माजरा, के वेणुगोपाल, जितेंद्र रेड्डी, राम मोहन राय, नरेश गुजराल, डेरेक ओ ब्रायन, सुदीप बंदोपाध्याय, शरद पवार, आनंद शर्मा, आप सांसद संजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, उपेंद्र कुशवाहा मौजूद रहे।
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद दुनिया के तमाम देश भारत के साथ खड़े हैं। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जॉन बॉल्टन ने कहा है, “भारत को आत्मरक्षा करने का पूरा अधिकार है। हम इस मुश्किल में भारत के साथ खड़े हैं।” आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार पाकिस्तान और जैश-ए-मोहम्मद को जवाब देने के लिए अब तैयारी की जा रही है।
आतंकवाद के ख़िलाफ़ पूरी दुनिया एक साथ खड़ी है। एनएसए जॉन बॉल्टन ने बीते शुक्रवार सुबह जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले के बाद भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से फोन पर बात करते हुए शोक जताया था।
बता दें कि, हमले के बाद से अमेरिका ही नहीं दुनिया के कई अन्य बड़े देश भी आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के साथ खड़े हैं। कल (15 फरवरी 2019) को इसी मामले में दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय में जी-20 देशों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई थी। इसमें जर्मनी, हंगरी, इटली, यूरोपियन यूनियन, ब्रिटेन, रूस, इज़राइल, ऑस्ट्रेलिया, जापान सहित कई अन्य देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
अमेरिका ने की हमले की कड़ी निंदा
पुलवामा में शहीद हुए जवानों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्रालय के उप प्रवक्ता रॉबर्ट पैलाडिनो ने कहा कि अमेरिका इस घटना की कड़ी निंदा करता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान स्थित आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है, और साथ ही यह भी कहा कि मैं सभी देशों से अपील करता हूँ कि वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का पालन करें।
बता दें कि, अमेरिकी व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने हमले के बाद कहा था कि पाकिस्तान से अपील है कि वह अपनी ज़मीन से आतंकी गतिविधियाँ चलाने वाले सभी आतंकी समूहों को समर्थन देना और उन्हें सुरक्षित पनाह देने बंद करे।
‘पाकिस्तान को चुकानी पड़ेगी बड़ी क़ीमत’
पुलवामा हमले की निंदा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कड़े स्वर में कहा कि पाकिस्तान सिर्फ़ आतंकियों को पनाह देकर उन्हें पोषित करता है। पुलवामा में आतंकियों ने जो कायरता दिखाई है उसका अंजाम उन्हें भुगतना पड़ेगा, इनसे पूरा हिसाब लिया जाएगा।
पीएम ने कहा कि सुरक्षा बलों को आगे की कार्रवाई, समय, स्थान और योजना तय करने की पूरी इजाज़त दी गई है। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिकों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा, “हर नुक़सान का हिसाब पाकिस्तान को देना पड़ेगा, उसे इसके लिए बड़ी क़ीमत चुकानी होगी।”
ओसामा एक अच्छा पिता था, बुरहान वनी का बाप हेडमास्टर था, अफ़ज़ल गुरू का बेटा बारहवीं में इतने नंबर लाया, अहमद डार को आर्मी वाले ने पीटा था, आर्मी के लोगों के कारण आतंकी बनते हैं… ऐसे हेडलाइन आपको पत्रकारिता के समुदाय विशेष से लगातार मिलते रहेंगे। हमेशा इनकी लाइन यही रहती है कि जिसने इतनी जानें ले लीं, वो कितना अच्छा आदमी था, और उसकी बुराई की ज़िम्मेदारी भी पीड़ितों पर ही है।
ये यहीं तक नहीं रुकता, क्योंकि ये वो लोग हैं जो पाकिस्तान का अजेंडा भारत में चलाते हैं जिसे पाकिस्तान अपने बचाव में इस्तेमाल करता है। देखा जाए तो इस तरह की बातें, ऐसे मौक़ों पर करना यह बताता है कि ये लोग उन आतंकियों की विचारधारा के लिए मस्जिद के ऊपर लगे लाउडस्पीकर हैं जो इसे एम्प्लिफाय करते हैं। इनके लेखों से यही निकल कर आता है जैसे कि जवानों की नृशंस हत्या के पीछे उन्हीं का हाथ था, और आतंकियों का नहीं।
ऐसी घटनाओं के बाद भी ‘दूसरा एंगल’ तलाश लेना, या हमेशा ही ऐसे ही एंगल तलाशने की कोशिश करना बताता है कि इनकी संवेदना कहाँ है। अपने हेडलाइन में बलिदान के लिए ‘मरे’, आतंकियों के लिए ‘लोकल यूथ’, पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराने के लिए ‘ब्लेम’ और ‘अक्यूज’ जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं तो पता चलता है कि आपको पाकिस्तानी तथा आतंकी विचारधारा भी बेचनी है, और अपने आप को भारतीयता का मुखौटा भी पहनना है।
इनमें से कुछ तो आदत से लाचार और लगातार एक ही तरह की बेहूदगी करने वाले लोग हैं। चाहे वो बरखा दत्त का ‘हेडमास्टर बाप’ हो, क्विंट का ‘अच्छा पिता ओसामा’ हो, या स्क्रॉल का ‘मौलवी बनने की चाह रखने वाला’ पुलवामा आतंकी अहमद डार हो, ये लोग हमेशा बताने में रहते हैं कि ऐसे घातक आतंकवादी कितने अच्छे और सुशील लोग थे।
Indian paper ‘The Quint’ had in one of its stories accepted the truth that Kulbhushan Jadhav was a spy and that some RAW officials had reservations about his appointment. ~Foreign Office Spokesperson Dr. Muhammad Faisal pic.twitter.com/EBPqLwGwvP
ऐसी ही मानसिक विक्षिप्तता का परिचय कोर्ट से कई बार डाँट सुन चुके वकील प्रशांत भूषण ने लिखा कि आर्मी ने कभी अहमद डार को किसी कारण से पीटा था, इसलिए वो आतंकी बन गया। साथ ही, भूषण ने यह भी लिखा कि इसी तरह की हरकतों के कारण लोग आतंकी बन जाते हैं। ये अपने आप में एक अलग लेवल की नग्नता है। अगर आर्मी वाले ने उसे पीटा भी हो, तो क्या राह चलते उसे बिना कारण के पीट दिया? क्या प्रशांत भूषण ने ये पता करने की कोशिश की कि क्या अहमद डार आर्मी पर पत्थर चला रहा था, या उनके काम में बाधा पहुँचा रहा था, या राष्ट्रविरोधी आंदोलन में साथ दे रहा था? इस पर चुप्पी है क्योंकि ट्वीट में 280 कैरेक्टर ही होते हैं, और प्रशांत भूषण जैसे वकील तो तो साँस लेने के भी पैसे माँग लेते हैं!
पिछले दिनों में आपको अधिकांश मीडिया हाउस जवानों के परिवारों से मिल कर, उनकी कहानियाँ दिखा रहा है कि अकारण हुए इस बलिदान से कितने लोग आहत हैं। लोगों तक ऐसे हृदयविदारक कहानियाँ लाई जा रहीं हैं जिसे सुनकर हमारे शरीर में सिहरन होने लगती है। टीवी पर एंकर तक अपने आप को इस भावुक क्षण में रोक नहीं पातीं, उनके आँसू छलक जाते हैं। जवानों के परिवारों के लोग बता रहे हैं कि किसी की शादी होने वाली थी, कोई फोन पर बात कर रहा था जब धमाका हुआ, किसी ने कहा था कि छुट्टी पर आते ही वो घर बनवाएगा…
ये वो लोग हैं जिनके परिवार आर्थिक रूप से उतने सक्षम नहीं हैं, उनके लिए घर का चिराग़ एक ही था। ग़ौरतलब यह भी है कि यही क्विंट, स्क्रॉल, एनडीटीवी और भूषण अपनी ज़रूरत के हिसाब से दलितों, वंचितों और पिछड़ों की बात करते हुए रुआँसे हो जाते हैं, और ये वही लोग हैं जिन्हें उसी सामाजिक स्तर के लोगों के बलिदान पर यह याद आता है कि जिस आतंकी ने 44 लोगों की जान ले ली, उसके पास एक ज़ायज कारण था!
आप कहने को स्वतंत्र हैं कि पत्रकार ने वही लिखा जो उसके माँ-बाप ने कहा। लेकिन, ऐसी बातें छापना यह नहीं बताता कि आप उस आतंकी की विचारधारा को हवा दे रहे हैं? आप कहीं न कहीं जस्टिफाय करने की कोशिश कर रहे हैं कि अगर किसी स्कूली बच्चे को कोई पीटे, डाँटे, मुर्गा बना दे, तो वो तीन सौ किलो विस्फोटक लेकर सेना की गाड़ियों से टकरा दे?
या, आपको लगता है कि ख़बर पढ़ने वाले इतने मूर्ख हैं कि उन्हें लगेगा कि ये महज़ रिपोर्टिंग है? ये रिपोर्टिंग छोड़कर सब कुछ है। ये बताता है कि पत्रकारिता में संवेदनहीनता का चरम स्तर क्या है। जैसे कि संसद पर हुए हमले की बात सुनकर राजदीप जैसों की बाँछें खिल जाती हैं। जैसे कि बुरहान वनी जैसे आतंकियों के परिवार की कहानी बताकर बरखा दत्त दुनिया को यह बताना चाहती हैं कि उसका बाप हेडमास्टर था, और उसके आतंकी बनने के पीछे भारत सरकार की ट्रेनिंग शामिल थी!
चौबीसों घंटे टीवी और मीडिया साइट्स के दौर में हिट्स और क्लिक्स के लिए पत्रकार हमेशा नया एंगल ढूँढते रहते हैं, इसमें कोई बुराई नहीं। लेकिन नया एंगल पाने की चाहत में विशुद्ध नीचता पर उतर आना और देश के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने वाली शक्तियों को ‘मानवता का पक्षधर’ बताने की कोशिश आखिर क्या कहती है?
राष्ट्रवाद को ज़हर बताने तक की कोशिश करने वाले आखिर अपनी लाइन कब खींचेंगे? क्या कुछ न्यूनतम स्तर है राष्ट्रवादी होने का? या देश की चिंता करना, उसके जवानों के बलिदान पर आहत महसूस करना, देश के समर्थन में नारे लगाना अपराध है, और कथित तौर पर आर्मी द्वारा बच्चे को डाँटने पर, मामूली सजा देने पर आरडीएक्स से भरी गाड़ी लेकर 40 जवानों की हत्या करना उचित कार्य?
ये बेहूदगी है कि उनके परिवार का भी बच्चा मर गया। शर्म आनी चाहिए ऐसे माँ और बाप को जो इस कुकृत्य को किसी भी तरीके से सही ठहराने की कोशिश कर रहा है। कम से कम इतनी हया तो रहनी चाहिए कि सीधा कह दो कि तुम और तुम्हारा परिवार भारत के ख़िलाफ़ है, न कि यह कि उसे आर्मी वाले ने एक दिन पीटा था तो उसने ऐसा कर दिया! ये किस तरह की परवरिश है?
क्या एक बलात्कारी का पिता और ये मीडिया वाले उसके पक्ष में यह कह कर खड़े हो जाएँगे कि उसे उस लड़की ने ठुकरा दिया था? क्या लड़की पर एसिड फेंकने वाले के माँ-बाप यह कह देंगे कि उनके बेटे के गुलाब को लड़की ने फेंक दिया था? बलात्कारी एक फ़्रस्ट्रेटेड व्यक्ति था, और उसके हेडमास्टर बाप ने कहा है कि उसे भी उसके बेटे से अलग रहने का गम है क्योंकि वो जेल में है? क्या ये भी ख़बर का नया एंगल है?
ऐसी हर बेहयाई के केन्द्र में ये यूजूअल सस्पैक्ट्स आते हैं, भारतीय पत्रकारिता के समुदाय विशेष, गिद्धों का गिरोह जिसे जवानों के बलिदान की चिंता नहीं, उन्हें नया और अलग एंगल चाहिए कि बाकी लोग जवानों के परिवार से मिल रहे हैं, हम आतंकियों के घरवालों से मिल लेते हैं! उसके बाद क्या? उसके बाद यह कहना कि दोनों के माँ-बाप एक ही तरह के दुःख से गुजर रहे हैं?
ऐसे संवेदनहीन रिपोर्ट और इस तरह की सोच बताती है कि ये लोग सिर्फ पत्रकारिता नहीं कर रहे, ये आतंकियों की विचारधारा के लिए मल्टीप्लायर हैं, ये उनकी बातों को, उनके जिहादी विचारों को सूक्ष्म स्तर पर, सहज तरीके से वैसे लोगों तक पहुँचाते हैं जो इन्हें पढ़ने के बाद धीरे-धीरे अपने देश की उसी सेना पर सवाल करने लगते हैं जिनकी वजह से जिहाद का ज़हर उनकी सोसायटी और शहर तक नहीं पहुँचा है।
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले पर सारा देश दु:ख के दौर से गुज़र रहा है। देश और दुनिया में इस आतंकी हमले की घोर निंदा हो रही है। खेल और फ़िल्म जगत भी पाकिस्तान की इस कायराना हरक़त के ख़िलाफ़ है और इस हमले की कड़ी निंदा कर रहे हैं। बॉलीवुड सिंगर सोनू निगम ने हमले की निंदा करते हुए सेक्युलर लोगों पर तंज कसा है।
सोनू निगम ने इस तरह की हरक़तों के बाद होने वाली बयानबाज़ी और अतीत की कुछ बातों को याद करते हुए तीखे स्वर में बिना नाम लिए पर निशाना साधा। विपक्ष के नेताओं के ख़िलाफ़ कड़ा रुख़ अख़्तियार करते हुए उन्होंने एक वीडियो जारी किया है जो बहुत तेज़ी से वायरल भी हो रहा है।
1 मिनट 31 मिनट के अपने वीडियो में उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि सुना है कि आप लोग काफी बवाल मचा रहे हैं और बड़ा दुख व्यक्त कर रहे हैं क्योंकि कुछ सीआरपीएफ के जवान शहीद हो गए हैं। 44 हों या 440 लोग मारे गए, सीरआरपीएफ के जवानों की शहादत पर आप क्यों अफसोस मना रहे हैं। आप तो भारत तेरे टुकड़े होंगे जैसी सोच रखने वाले सेक्युलर लोग हैं। इसमें दु:ख मनाने वाली क्या बात हैं।
इसके आगे सोनू ने कहा कि सीआरपीएफ के जवानों की शहादत पर दु:ख मनाने का काम आरएसएस, बीजेपी, राष्ट्रवादी और हिंदुत्ववादी संस्थाओं पर छोड़ दीजिए। आप (विपक्ष) तो वो कीजिए जो यहाँ पर सेक्युलर लोग करते हैं। ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे.. अफजल हम शर्मिंदा हैं’ बोलिए।
अपने वीडियो के अंत में उन्होंने कहा कि हमें वंदे मातरम के संबोधन के लिए भी विपक्ष को मना किया और कहा कि आप लोग लाल सलाम कहा करें।
बता दें कि सोनू निगम पहले भी अपनी बेबाकी के लिए सामने आ चुके हैं। इससे पहले वो तब विवादों में आए थे जब उन्होंने मस्ज़िद में लाउडस्पीकर पर तेज़ आवाज़ में अज़ान का विरोध किया था। इसके बाद उन पर सिर मुंडवाने की बात कही गई तो सोनू निगम ने अपना सिर मुंडवा लिया था।
फ़िल्म अभिनेत्री कंगना रनौत ने भी इस आत्मघाती हमले पर पाकिस्तान की इस हरक़त पर ग़ुस्सा जताते हुए कहा, “पाकिस्तान ने न सिर्फ़ राष्ट्रीय सुरक्षा पर हमला किया है, उसने हमारी खुलेआम धमकियों और हमलों से हमारी गरिमा को भी तार-तार किया है। हमारी ख़ामोशी को ग़लत समझा गया, हमें इसके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करनी होगी। आज भारत का ख़ून बह रहा है। हमारे जवानों को मार दिया गया।” इसके साथ ही कंगना ने यह भी कहा, “अब जो भी शांति और अहिंसा की बात करेगा उस पर कालिख पोत कर, गधे पर बैठा कर चौराहे पर खड़ा कर देना चाहिए ताकि जो भी आए थप्पड़ मार कर जाए।”
हाल ही में, अभिनेत्री शबाना आज़मी ने घोषणा की थी कि इस तरह के हमलों के मद्देनज़र भारत और पाकिस्तान के कलाकारों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान नहीं हो सकते। उन्होंने कराची कला परिषद द्वारा एक निमंत्रण को अस्वीकार करने की घोषणा की थी।
शबाना आज़मी के ट्वीट
हालाँकि, कंगना ने शबाना आज़मी की इस घोषणा से हैरान थीं। उन्होंने शबाना और जावेद अख़्तर पर भी तंज कसा और सेलिब्रिटी युगल द्वारा टुकडे-टुकडे गिरोह को दिए गए समर्थन को याद दिलाया और कहा, “शबाना आज़मी जैसे लोग सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर रोक लगाते हैं, ये वे लोग हैं जो भारत तेरे टुकडे होंगे गिरोह को बढ़ावा देते हैं।
जब उरी हमलों के बाद पाकिस्तानी कलाकारों को प्रतिबंधित कर दिया गया था, तो उन्होंने पहले कराची में जाकर एक कार्यक्रम का आयोजन क्यों किया? और अब वो मुँह छिपाने की कोशिश कर रहे हैं? फिल्म उद्योग ऐसे राष्ट्र-विरोधी लोगों से भरा है, जो कई मायनों में दुश्मनों की नैतिकता को बढ़ाते हैं, लेकिन अभी निर्णायक कार्यों पर ध्यान देने का समय है। पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगाना लक्ष्य नहीं है बल्कि पाकिस्तान का विनाश हो।”
बता दें कि कंगना रनौत ने अपनी हालिया फ़िल्म मणिकर्णिका की सफलता पर आयोजित एक कार्यक्रम को रद्द कर दिया जिससे वो शहीदों के परिवारों के साथ खड़ी हो सकें।
महाराष्ट्र में शुक्रवार (फरवरी 15, 2019) को पुणे पुलिस ने एक जूनियर टिकट कलेक्टर को गिरफ़्तार किया है। उपेन्द्र बहादुर सिंह नाम के टी.सी. पर आरोप है कि उसने पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाज़ी की।
उपेन्द्र द्वारा ये हरक़त उस दौरान की गई जब लोग पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए इकठ्ठा हुए थे। जहाँ एक तरफ पुलवामा हमले पर लोगों का ग़ुस्सा अपने चरम पर है वहीं पाकिस्तान के समर्थन में उठ रही ये आवाज़ें भारत में आस्तीन का साँप हैं।
Maharashtra: Pune Rural Police has arrested a Jr Ticket Collector, Kr Upendra Bahadur Singh, for allegedly raising pro-Pakistan slogans during an event to pay tribute to CRPF jawans who lost their lives in #PulwamaAttack. He has been booked u/s 153(B) of IPC&is in police custody.
पुलिस की निगरानी में उपेंद्र पर आईपीसी की धारा 153(बी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस हरक़त के तुरंत बाद ही आरोपित को उसकी नौकरी से भी निलंबित कर दिया गया।
बता दें पुलवामा हमले के बाद एक तरफ जहाँ पूरे देश में शोक का माहौल है, वहीं कुछ अराजक तत्व ऐसे भी हैं जो लगातार देश का माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। कल एएमयू में पढ़ रहे कश्मीरी छात्र को भी ऐसी ही हरक़त के लिए निलंबित किया गया। साथ ही एनडीटीवी की डेप्यूटी एडिटर निधि सेठी को भी उनके संस्थान से फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी के कारण निलंबित किया गया।
इसके अलावा उत्तराखंड के अल्मोड़ा में भी पुलवामा हमले के संबंध में एक युवक द्वारा सोशल मीडिया में की गई आपत्तिजनक टिप्पणी करने का मामला सामने आया। जिसके बाद अल्मोड़ा पुलिस ने युवक के मोबाईल को जब्त कर जाँच में जुट गई है। साथ ही पुलिस ने लोगों से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील भी की।