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अजीत झा

संपादक, ऑपइंडिया (हिंदी)

हम जिस युद्ध काल में जी रहे हैं, उसमें ‘युद्ध विराम’ जैसा कुछ होता नहीं…

भावनाओं का उद्वेग कभी-कभी नेत्रों पर पट्टी बाँध देता है। जब से भारत-पाकिस्तान के बीच तत्काल और पूर्ण ​युद्ध विराम की खबर आई है, ऐसा ही देखने को मिल रहा है।

जिस राज्य के स्टेडियम में कपड़े सूखते हो, मैदान में जलकुंभी उगते हो… उसे इस ‘वैभव’ पर इतराना नहीं, नाला रोड के नाले में...

वैभव सूर्यवंशी, बिहार के हर उस व्यक्ति का प्रतीक है जो अपने पुरुषार्थ से अपना भाग्य बदलते हैं। इसमें व्यवस्था का कोई योगदान नहीं।

खतरे में है हर हिंदू, सरकारी सुरक्षा के भरोसे हम जीवनभर नहीं बैठ सकते… पर कवर्धा का ‘सुरक्षा मॉडल’ आत्मसात तो कर ही सकते...

कवर्धा के ​हिंदू जिस तरह दुर्गेश देवांगन के परिवार की ढाल बने, क्या उसी तरह हर पीड़ित हिंदू परिवार का हम बन सकते हैं सुरक्षा कवच?

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भेड़िया धँसान भीड़ क्योंकि सिस्टम को नहीं है सिविक सेंस

कभी छठ, कभी गर्मी की छुट्टी, कभी महाकुंभ। कब तक भीड़ को ही हम ठहराते रहेंगे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मचने वाली भगदड़ों का दोषी?

चुनावों में जीत-हार लगी रहती है… पर अरविंद केजरीवाल के पतन की प्रतीक्षा में था आम आदमी

AAP या अरविंद केजरीवाल का फातिहा तो नहीं पढ़ा जाना चाहिए। पर आम आदमी का यह 'प्रायश्चित' अब उन्हें चैन से न सोने देगा, न जागने।

पहले अपने ही बच्चों की खाई झूठी कसम, अब बुजुर्ग माँ-बाप की निकाली ‘परेड’… मौका कोई भी हो अरविंद केजरीवाल हर बार ‘नीचता’ का...

बुजुर्गों के लिए घर बैठे मतदान का भी विकल्प है। केजरीवाल चाहते तो उन्हें गाड़ी से भी मतदान केंद्र लेकर जा सकते थे। पर उन्होंने बुजुर्ग-बीमार माँ-बाप को व्हीलचेयर पर बिठा 'बेचने' का विकल्प चुना।

मेरा नाम अजीत झा है, शहजाद पूनावाला ने मुझे नहीं कहा ‘Jha2’; आपको कहा तो AAP के ऋतुराज का पकड़िए गला

झा उपनाम धारी होने के कारण लगता है कि मैथिल ब्राह्मणों को गाली दी गई है तो ऋतुराज का गला पकड़िए जिसने शहजाद पूनावाला के समाज को अपमानित किया।

मस्जिद कमेटी के झगड़े में मुस्लिम ने मौलवी को मारा, ‘हिंदू ने हत्या कर दी’ की अफवाह उड़ा संभल में तोड़े सूरजकुंड और मानस...

संभल में दंगों में 209 हिंदुओं की हत्या हुई है। 1976 में मुस्लिम दंगाइयों ने सूरजकुंड और मानस मंदिर को भी तोड़ दिया था।