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आशीष नौटियाल

पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

एंटोनिया माइनो की राष्ट्रीयता नहीं बल्कि मंशा पर प्रश्न रहा है, ‘The Print’ अक्षय कुमार की नागरिकता से करना चाहता है मूल्यांकन

प्रश्न हमेशा एंटोनिया माइनो की मंशा पर ही हुए हैं ना कि राष्ट्रीयता पर, अर्नब गोस्वामी ने भी सोनिया गाँधी की मंशा पर ही सवाल उठाए हैं......

‘हिटलर दीदी’ के वो सब कारनामे जो बताते हैं कि लोकतंत्र की हत्या बंगाल में कब और कहाँ-कहाँ हुई

ममता बनर्जी ने बंगाल में 'जय श्री राम' का नारा लगाने वालों को अपना सबसे बड़ा दुश्मन देखा है। उनकी यह बौखलाहट......

लेनिन: लाखों किसानों-निर्दोषों की लाश के ढेर पर कम्युनिस्ट सत्ता स्थापित करने वाला

रूस में गृहयुद्ध के दौरान लेनिन के सामने शासन और सर्वहारा में से किसी एक को चुनने का समय आया, तब उसने सर्वहारा में ही जार को देखा।

अरुंधति रॉय जैसे ‘विचारकों’ का इतिहास Google सर्च में कैद है, आपने सर्च किया ये की-वर्ड?

गूगल में अरुंधति रॉय सर्च करते ही एक 'अर्बन नक्सल विचारक' के गैरकानूनी कामों की टाइमलाइन तैयार हो जाती है।

TheTelegraph का झूठ: दलित का खाना सिराज अहमद ने नहीं खाया था लेकिन खबर RSS को बदनाम करने के लिए लिखी

TheTelegraph का झूठ या प्रोपेगेंडा ऐसे समझिए। दलित से खाना ना लेने वाले का नाम सिराज अहमद है, लेकिन इस खबर में फोटो RSS कार्यकर्ताओं की लगाई गई है।

वहाँ इमरान तबलीगियों को सरहद पार कराता है तो यहाँ BBC उन्हें क्लीन चिट देता है

क्या BBC इतना मासूम है कि वह कोरोना के संक्रमण के इस बड़े माध्यम (तबलीगी जमात) से अभी तक अनजान है? कि इस मरकज से निकले हुए लोग आखिर किन-किन जगहों पर नहीं गए होंगे?

‘यहाँ मोदी का नहीं हमारा कानून चलता है’: दीया जलाने पर रेवंत सिंह की हत्या, हमलावर मुस्लिम पड़ोसी

जनता कर्फ्यू के दिन थाली बजाने पर पड़ोस में रहने वाले मुस्लिम युवकों ने रेवंत सिंह को धमकाया। कहा कि यहाँ मोदी का नहीं हमारा कानून चलता है। फिर 4 अप्रैल को उन पर घात लगाकर हमला किया। 5 दिन कोमा में रहने के बाद उनकी मौत हो गई।

213 देश, 15 करोड़ सदस्य: अल्लाह का संदेश पहुँचाने के नाम पर तबलीगी जमात का आतंकी कनेक्शन

6 प्रमुख उद्देश्यों के साथ तबलीगी जमात की एक सबसे बड़ी शर्त और विशेषता इसकी गोपनीयता है। इसी गोपनीयता ने इसकी हरकतों पर हमेशा आवरण का काम किया है। तबलीगी समय के साथ कट्टर जिहादी समूहों में बढ़ते गए और यह विश्वास करने लगे कि 'अच्छे मुस्लिमों' को इसी जीवन में यातनाएँ भोगनी चाहिए।