135 कुल लेख

मृणाल प्रेम स्वरूप श्रीवास्तव

‘मोदी ने विज्ञापन रोका’ वाली फ़र्ज़ी खबर ‘सूत्रों के हवाले से’ फैला रहा है पत्रकारिता का समुदाय विशेष

प्रोपेगेंडा-पर-प्रोपेगेंडा फैलाते रहना, बार-बार पकड़े जाते रहना, शर्मिंदा होना- अगर यही बिज़नेस मॉडल है तो बात दूसरी है, वरना वायर वालों को बाज आ जाना चाहिए।

महुआ मोइत्रा, देश में फ़ासीवाद ‘घुसता’ दिख गया, बंगाल में फासीवाद का नंगा नाच नहीं दिखा?

महुआ मोइत्रा अगर अपनी पार्टी के गिरेबान में झाँक लें तो शायद राजनीतिक स्वतंत्रता पर दूसरों को उपदेश देने के बाद वह संसद आना तो दूर, घर से निकलने में शर्माएँ!

Scroll, AltNews और पत्रकारिता के ‘एलीटिस्ट’ समुदाय विशेष को ब्रिटिश हेराल्ड के अंसिफ अशरफ़ का जवाब

"हाँ, हम छोटे हो सकते हैं, लेकिन झूठे या नकली नहीं। छल हमारी संस्कृति नहीं है। हम रोज़ चुनौतियाँ देते हैं।"- अंसिफ अशरफ़ (प्रबंध सम्पादक, ब्रिटिश हेराल्ड)

डु प्लेसी जी, जिस IPL को आप कोस रहे हैं, उसी से रशीद खान और नबी स्टार बन रहे हैं

दक्षिण अफ्रीका के पास ऑस्ट्रेलिया जैसी बेंच स्ट्रेंथ भी नहीं है, और जब टीम की ख़राब हालत का पूर्वानुमान कर रिटायर हो चुके एबी ने विश्व कप के लिए लौटने का प्रस्ताव दिया तो उसे भी प्रबंधन ने ठुकरा दिया।

मोदी को ‘World’s Most Powerful Person’ बताने वाले ब्रिटिश हेराल्ड के पीछे पड़ा Scroll खुद हो गया नंगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को British Herald द्वारा 'World’s Most Powerful Person' घोषित करने से जिनके (दिलों में आग) सुलगनी थी, वह सुलगी। और वे ज़हर उगले बिना रह नहीं पाए। पत्रकारिता के स्तर को गिराते हुए यह मीडिया गिरोह अब विकिपीडिया को 'भरोसेमंद सूत्र' मानने लगे हैं।

अमेरिका वालो! भारत के अल्पसंख्यकों पर ज्ञान मत दो, पहले अपना ‘फोबिया’ ठीक करो

दूसरे देशों की सम्प्रभुता में हस्तक्षेप की नीति और कुछ नहीं, साम्राज्यवाद ही है। अमेरिका हिंदुस्तान के मुस्लिमों की चिंता छोड़ कर अपनी खुजली का इलाज करे।

हिन्दू धर्म को लील रहे मिशनरी: तमिलनाडु में मतांतरण का ‘धंधा’, स्वराज्य की रिपोर्ट

तमिलनाडु में हिन्दू धर्म के खिलाफ बन रहे इस चक्रव्यूह के बारे में तो कम-से-कम एक सांस्कृतिक वार्तालाप शुरू किए जाने की तत्काल आवश्यकता है।

मामा नेहरू वाली नयनतारा की नई लिबरपंथी: अपना मामा लोकतान्त्रिक, मोदी हुए अवैध

नयनतारा सहगल जैसे लोग केवल व्यक्ति नहीं हैं, प्रतीक हैं- उस मानव-प्रवृत्ति का, उस ध्यानाकर्षण की लिप्सा और लोलुपता का, जिसके चलते इंसान अपने बूढ़े हो जाने, और अपने विचारों का समय निकल जाने के चलते हाशिए पर पहुँच जाने, अप्रासंगिक हो जाने को स्वीकार नहीं कर पाता।