"इंसान को आस्था की ज़रूरत ही नहीं है। इंसान की आस्था की 'इंसान' है, इंसान की जाति 'इंसान' है... पहली बार आस्था को नागरिक होने के पैमाने के तौर पर माना जाएगा।"
यह बिल किसी तरह से मुस्लिम भाइयों को नुकसान नहीं करता है। इससे किसी की नागरिकता खतरे में नहीं पड़ने वाली है। यह शरणार्थियों को नागरिकता देगी, मगर भारत के मुस्लिमों को इससे डरने की जरूरत नहीं है। इनकी नागरिकता को कोई असर नहीं पड़ने वाला है।
इंदौर में जब मीडिया ने सिंधिया से बिल पर राय पूछी तो एक ही बात को बार-बार घुमाकर बोल रहे थे, जिसका कोई मतलब नहीं निकल रहा था। वीडियो में वो थोड़े से बदहवास से भी नज़र आ रहे थे। नागरिकता संशोधन विधेयक को बार-बार ‘अध्यादेश’ बोल रहे थे।
RISAT2-BR1 के पहले तक भारत को बादल घिर आने की स्थिति में ज़मीनी तस्वीरों के लिए कनाडाई उपग्रहों से मिली तस्वीरों पर निर्भर रहना पड़ता था। यह समस्या भारत की इस साल फरवरी में हुई बालाकोट एयर स्ट्राइक के दौरान भी खड़ी हुई थी।
कपिल सिब्बल ने कहा कि सबसे पहले टू नेशन थ्योरी वीर सावरकर ने दी थी। इसके बाद सिब्बल ने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए (प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के लिए असंसदीय शब्दों का प्रयोग भी) कहा कि...
नानावती-मेहता आयोग की फाइनल रिपोर्ट में 59 कारसेवकों को जलाए जाने के बाद राज्य में भड़की हिंसा को सुनियोजित हिंसा नहीं माना गया। आयोग ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली तत्कालीन गुजरात सरकार को अपनी रिपोर्ट में क्लीन चिट दी है।