Home Blog Page 1002

10000 रुपए की कमाई पर कॉन्ग्रेस सरकार जमा करवा लेती थी 1800 रुपए: 1963 और 1974 में पास किए थे कानून, सालों तक नहीं मिलता था मेहनत का पैसा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के सम्पत्ति के सर्वे वाले बयान को लेकर हमला बोला है। राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस 2024 लोकसभा चुनाव में यह वादा कर रहे हैं कि अगर वह सत्ता में आए तो लोगों की सम्पत्ति का सर्वे करेंगे और इसके बाद उसको दोबारा से देश में बाँटने पर भी विचार किया जाएगा। पीएम मोदी ने इसी को लेकर हमला बोला है कि कॉन्ग्रेस लोगों की गाढ़ी कमाई को जब्त करना चाहती है। पीएम मोदी ने एक जनसभा में कहा कि कॉन्ग्रेस महिलाओं के मंगलसूत्र तक का सर्वे करना चाहती है।

जहाँ पीएम मोदी कॉन्ग्रेस की नीति को लेकर हमले बोल रहे हैं तो वहीं लोग कॉन्ग्रेस सरकारों द्वारा लाए गए पुराने कानूनों को भी याद कर रहे हैं। अब ऐसे कानूनों के विषय में बहस छिड़ गई है जिनके अंतर्गत कॉन्ग्रेस सरकारों ने लोगों से जबरदस्ती उनकी मेहनत की कमाई ली। कॉन्ग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों ने 1960 और 1970 के दशक में कानून पास करके भारतीयों को इस बात के लिए विवश किया था कि वह अपनी कमाई का एक हिस्सा सरकार के पास जमा कर दें। यह 3-5 वर्ष तक सरकारी खजाने में जमा रहता।

जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गाँधी की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस सरकारों ने लोगों की कमाई जब्त करने वाले ऐसे ही कानून 1963 और 1974 में पास किए थे। इनका नाम कम्पलसरी डिपाजिट स्कीम एक्ट था। इसके अंतर्गत सभी करदाताओ, सम्पत्ति धारकों और सरकारी कर्मचारियों को अपनी कमाई का 18% सरकार के पास जमा करना होता था। जमा की धनराशि 3-5 वर्ष तक के लिए सरकारी खजाने में रहती थी। हैरानी की बात यह है कि जब 1974 में यह कानून लाया गया था, तब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मुख्य आर्थिक सलाहकार हुआ करते थे।

यह बात ध्यान देने वाली है कि लोगों की कमाई का एक हिस्सा जब्त करने वाला कानून ऐसे व्यक्ति के समय में लाया गया जिसे देश में आर्थिक सुधारों का श्रेय दिया जाता है। इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि यह कानून देश के आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए लाया गया था। जहाँ आज की सरकार लोगों की कमाई बढ़ा कर देश को सशक्त करना चाहती है, वहीं कॉन्ग्रेस सरकारें लोगों की कमाई जब्त करके देश का विकास करना चाहती थीं।

इन कानूनों के तहत सरकार को यह ताकत भी थी कि वह इस बात पर निर्णय ले कि किसका पैसा कितने दिन रखा जाए, किसको कब पैसा वापस दिया जाए। इसको लेकर सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस की काफी आलोचना भी हो रही है। सोशल मीडिया यूजर्स ने राहुल गाँधी की इस योजना को नकारते हुए उन पर हमला बोला है।

बेटी की हत्या ‘द केरल स्टोरी’ स्टाइल में हुई: कर्नाटक के कॉन्ग्रेस पार्षद का खुलासा, बोले- हिंदू लड़कियों को फँसाने की चल रही साजिश

कर्नाटक के हुबली में हुई कॉन्ग्रेस पार्षद की बेटी नेहा हीरेमठ की हत्या मामले में अब उनके पिता खुलकर मीडिया में बयान दे रहे हैं। उन्होंने टाइम्स नाऊ से बातचीत में कहा है कि उनकी बेटी की हत्या ‘द केरल स्टोरी’ के स्टाइल में हुई। टाइम्स नाऊ को निरंजन हीरेमठ ने कहा– “मेरे पास एक अंदरुनी रिपोर्ट है जो कहती हैं कि मेरी बेटी की हत्या द केरल स्टोरी स्टाइल में हुई हैं। एक बहुत बड़ी साजिश चल रही है हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए।”

टीवी चैनल पर कॉन्ग्रेस पार्षद से एंकर पद्मा जोशी पूछती हैं कि वो आखिर वो किस तरह की साजिश के बारे में बात कर रहे हैं। इस पर निरंजन कहते हैं ये काम एक तरह के माफियों का हैं, जो सॉफ्ट कॉर्नर के बच्चे होते हैं उन्हें फँसाते हैं। ये एक दिन की बात नहीं है। ये सालों साल से हो रहा है। उन्होंने केरल में बढ़ रहे लव जिहाद के मामलों की ओर इशारा करते हुए कहा कि पहले जो घटनाएँ दूसरे राज्यों में होती थी वो अब कर्नाटक में हो रही है। लोग वहाँ से यहाँ एक्टिव हुए हैं। यहाँ पर लोगों को उकसा कर ये सब करवाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “इस हत्या में कोई एक इंसान शामिल नहीं था। वो (फयाज) एक्स स्टूडेंट था। मेरी बेटी की जानकारी उसे अंदर से दी जा रही थी। बताया जा रहा था मेरी बेटी कहाँ है, कौन सी क्लास ले रही है, कब उसे कार लेने जा रही है।” उन्होंने बताया कि वो कॉलेज परिसर की 10 दिन की फुटेज देखकर सारी जानकारी जुटा रहे हैं और सीबीआई से भी कहते हैं कि वो भी इस फुटेज को देखें। उसमें सब डिटेल आ जाएगी।

उन्होंने कहा- “मेरी बेटी की हत्या हुई, इसका मुझे दुख है, मेरे परिवार को दुख है, साधु-संत लोगों को दुख है, पूरे समाज को दुख है… लेकिन ये जो केरल स्टोरी फिल्म आई थी… बिलकुल समान ढंग मेरी बेटी की हत्या हुई है। ये मेरे पास एक इंटरनल रिपोर्ट आई है जिसके बारे में मुझे बेटी की हत्या के बाद पता चला।

उन्होंने बताया कि उनकी बेटी को पता चल गया था कि वो लोग उसको फँसा रहे हैं, इसलिए उसने प्रपोजल को मना किया था, लेकिन फिर भी उसपर दबाव डाला जाता रहा। इसमें फयाज के अम्मी-अब्बा से लेकर उसके समाज के लोग भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी में फयाज का डर भी था लेकिन उसने कभी घर में नहीं बताया। सिर्फ अपनी माँ को बताया था कि एक कॉलेज का लड़का है जो उसे फँसा रहा है, उसे फोन कर रहा है। उसने अपनी मम्मी से कहा था कि वो उसे कॉलेज लेने आएँ।

कॉन्ग्रेस पार्षद कहते हैं कि बेटी की हत्या होने के बाद उनकी पत्नी ने उन्हें इन सबके बारे में जानकारी दी है तब उन्हें पता चला कि उनकी बेटी को कन्वर्ट करने के लिए लोग उसके पीछे पड़े थे और अब जब उसकी हत्या कर दी गई है तो उसे बदनाम करने के लिए उसकी कॉलेजों की फोटो शेयर हो रही है।निरंजन हीरेमठ ने कहा कि वो एक-एक दावे इंटरनल रिपोर्ट के आधार पर कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि उनका मकसद कभी किसी जाति-मजहब को निशाना बनाने का नहीं था, मगर ये सच है कि माइंडसेट तैयार है हिंदू लड़कियों को फँसाने का।

‘महिला ने दिया BJP को वोट, इसीलिए DMK वालों ने मार दिया’: अन्नामलाई ने डाला मृतका के पति और परिवार का वीडियो, स्टालिन सरकार ने दर्ज कर दी FIR

भाजपा तमिलनाडु अध्यक्ष के अन्नामलाई ने आरोप लगाया है कि एक महिला की हत्या भाजपा को वोट देने के कारण हुई। अन्नामलाई ने इसको लेकर महिला के परिवार की बातचीत का एक वीडियो अपने एक्स (पहले ट्विटर) पर साझा किया है। इसमें महिला के परिजन हत्या के कारण को लेकर बातचीत करते दिखते हैं।

अन्नामलाई द्वारा डाले गए वीडियो के अनुसार, इसमें मृतका के पति और कुछ रिश्तेदार बात कर रहे हैं। इसमें एक व्यक्ति कहता है कि पुलिस ने महिला ने हत्या का कारण 2021 में हुई एक लड़ाई बताया है। वह कहता है कि पुलिस ने कहा है कि लड़ाई मतदान वाले दिन हुई लेकिन इसका कारण पुराना झगड़ा था ना कि कमल के निशान पर वोट देना।

इस पर दूसरा व्यक्ति कहता है कि यह बिलकुल झूठ है पुलिस के यह बयान उनके अलग उद्देश्य के कारण दिए गए हैं। इसके बाद एक व्यक्ति स्पष्ट प्रश्न पूछता है कि लड़ाई इसीलिए चालू हुई कि महिला ने कमल पर मतदान किया। इस पर पीछे से बोल रहा एक व्यक्ति हामी भरता है। एक अन्य व्यक्ति बताता है कि विपक्ष जानता था महिला का वोट कमल को जाएगा।

वह बताता है कि कमल को वोट देने के आधार पर ही उन लोगों ने मजाक उड़ाया और परेशान किया और बाद में पुलिस ने कहानी बदल दी। वीडियो में एक शख्स बताता है कि अगर पहले से दुश्मनी होती तो मतदान के दिन ही लड़ाई क्यों होती, या तो 4 दिन पहले होती या 4 दिन बाद होती। शख्स ने स्पष्ट रूप से बताया कि महिला की हत्या कमल को वोट देने के कारण हुई।

अन्नामलाई ने तमिलनाडु की DMK सरकार पर आरोप लगाया कि सच सामने लाने के लिए उनके खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई है। उन्होंने कहा कि फासीवादी DMK, FIR और झूठे मुकदमे लादकर उनकी आवाज को दबा नहीं सकती। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्टालिन की सत्ता के कुछ ही दिन बचे हैं और तब तक वह जितने चाहें उतने केस लाद सकते हैं।

क्या है पूरा मामला?

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट में बताया गया था कि DMK कार्यकर्ताओं ने भाजपा को वोट देने वाली गोमती नाम की महिला पर हमला कर दिया और पीट-पीट कर उसकी हत्या कर दी। महिला की मौके पर ही मौत हो गई। तमिलनाडु पुलिस ने हालाँकि इस मामले को लेकर कहा था कि महिला की हत्या आपसी विवाद के कारण हुई ना कि वोटिंग के कारण।

ये वारदात तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले के पक्किरिमानियाम गाँव की है। दिनामलार की रिपोर्ट में बताया गया था कि DMK के गुंडे यह जानने के बाद कि उन्होंने भाजपा को वोट दिया है, गोमती के आवास पर आए। उनकी पीड़िता के साथ तीखी बहस हुई, जिसके बाद उन्होंने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की। उन्हें यह कहते हुए सुना गया , ”तूने हमारी पार्टी (DMK) को वोट क्यों नहीं दिया।”

वहीं तमिलनाडु पुलिस ने इस घटना से इनकार किया। तमिलनाडु पुलिस ने इसे फर्जी खबर करार दिया। पुलिस ने बताया कि कि 2 पक्षों के बीच लंबे समय से चली आ रही एक याचिका को वापस लेने के संबंध में विवाद हुआ था। कुड्डालोर जिला पुलिस ने बताया कि झड़प के दौरान गोमती ने हस्तक्षेप किया और जमीन पर गिरने से घायल हो गई। तमिलनाडु पुलिस का कहना है कि इस घटना का किसी पार्टी को मतदान से कोई लेना-देना नहीं है और ये आपसी विवाद का मामला है।

भगवान राम के चित्रों वाली होर्डिंग को अपमानजनक ढंग से नोचा, फिर पटक दिया सड़क पर: VHP ने की सरकारी कर्मचारियों को निलंबित करने की माँग, राजस्थान की घटना

राजस्थान के जालोर जिले में भगवान राम के चित्रों के अपमान का मामला सामने आया है। इस अपमान का आरोप 2 राजकीय कर्मचारियों पर लगा है। वायरल वीडियो में कर्मचारी बताए जा रहे 2 लोग भगवान में के चित्रों वाली होर्डिंग्स को नोचते नजर आ रहे हैं। इसी दौरान दोनों की हिन्दू संगठनों से बहस भी हो रही है। घटना शनिवार (20 अप्रैल, 2024) की है। ‘विश्व हिन्दू परिषद’ (VHP) ने इसे आस्था का अपमान बताते हुए आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

‘विश्व हिन्दू परिषद’ की तरफ से सोमवार (22 अप्रैल 2024) को जालोर के जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी को सम्बोधित करते हुए एक ज्ञापन सौंपा गया है। ज्ञापन में घटना जालोर शहर के अंबेडकर सर्कल की बताई गई है। आरोप है कि शनिवार की रात भीनमाल नगर में लगाई गई भगवान राम की तस्वीर को चुनावी ड्यूटी पर तैनात सरकारी स्टाफ ने बहुत अपमानजनक तरीके से पहले तो तोड़-मरोड़ कर उखाड़ा और बाद में उसे नीचे पटक दिया गया।

यह करतूत विजय माली और सोमेन्द्र गहलोत नाम के 2 स्टाफ की बताई गई है। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर कार्रवाई की माँग के साथ वायरल हो रहा है।

विहिप के ज्ञापन में आगे बताया गया है कि भगवान राम के चित्रों का अपमान होता देख कर वहाँ खड़े कुछ लोगों ने इसका विरोध किया। दोनों कर्मचारियों ने तस्वीर हटाने के पीछे चुनाव आचार संहिता लागू होने की बात कही। VHP का पूछना है कि आधी रात में जिस अपमानजनक तरीके से भगवान राम के चित्रों का अपमान हुआ क्या वो आदर्श आचार संहिता के नियम से सही है? इसी ज्ञापन में आगे आरोप लगाया गया है कि दोनों सरकारी कर्मचारियों ने ऐसा जानबूझकर हिन्दू भावनाओं का अपमान करने की मंशा से किया है।

VHP का ज्ञापन

ज्ञापन में आगे बताया गया है कि वायरल वीडियो में दोनों सरकारी कर्मियों की हरकत देख कर हिन्दू समाज में नाराजगी है। विहिप कार्यकर्ताओं ने जिला निर्वाचन अधिकारी जालोर से माँग की है कि वो तत्काल विजय माली और सोमेन्द्र गहलोत को सस्पेंड करें। दोनों पर कार्रवाई न होने की दशा में VHP ने उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है। ऑपइंडिया के पास ज्ञापन की कॉपी मौजूद है।

‘विश्व हिन्दू परिषद’ के पदाधिकारी नरेश ने ऑपइंडिया को बताया कि उन्होंने ज्ञापन के अलावा व्यक्तिगत तौर पर भी जिले के तमाम सीनियर अधिकारियों से दोनों कर्मचारियों पर कार्रवाई करने की माँग की है। उनका कहना है कि कार्रवाई न होने की दशा में आंदोलन होगा।

अखिलेश सरकार में थाने की जमीन पर बना दी मजार, योगी युग में गिरफ्तार हुआ तत्कालीन लेखपाल मोहम्मद सईद: सपा MLA रहे आरिफ अनवर हाशमी ने किया था कब्ज़ा

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में थाने की जमीन पर बनी मजार के मामले में ऑपइंडिया की खबर का बड़ा असर हुआ है। बलरामपुर पुलिस ने 11 साल पहले थाने की जमीन पर मजार बनाने में बड़ी भूमिका निभाने वाले तत्कालीन लेखपाल रहे मोहम्मद सईद को गिरफ्तार कर लिया है। रिटायर हो चुके मोहम्मद सईद पर समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान कागजातों में हेराफेरी करने और फर्जी दस्तावेज बनाने का आरोप है। रिटायर्ड लेखपाल की गिरफ्तारी रविवार (21 अप्रैल, 2024) को हुई है।

बलरामपुर पुलिस ने मोहम्मद सईद की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। पुलिस के मुताबिक साल 2013 में सादुल्लानगर थाने की जमीन पर जबरन कब्ज़ा कर के मजार बनाने के मामले में केस दर्ज कर के जब जाँच की गई। इस जाँच में तत्कालीन लेखपाल मोहम्मद सईद का भी नाम सामने आया। मोहम्मद सईद ने अपने पद का दुरूपयोग करते हुए फर्जी कागजात तैयार करवाए थे। उसने सरकारी कागजों में हेराफेरी भी की। सईद को न्यायालय में पेश कर के जेल भेज दिया गया है।

सपा के पूर्व MLA का भाई पहले से है गिरफ्तार

बलरामपुर पुलिस ने सईद से पहले मारूफ अनवर हाशमी को गिरफ्तार किया था। मारूफ की गिरफ्तारी 1 अप्रैल, 2024 को FIR दर्ज होते ही कर ली गई थी। मारूफ थाने की जमीन कब्ज़ा कर बनी मजार का मुतव्वली था। वह समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक और अखिलेश यादव के करीबी आरिफ अनवर हाशमी का भाई है।

बाहर से बुलाए जाते थे मौलवी, होते थे उर्स

ऑपइंडिया ने 2 अप्रैल 2024 को इस मामले में अपनी खबर प्रकाशित की थी। खबर का शीर्षक ‘जहाँ बननी थी सिपाहियों की बैरकें वहाँ हो रहे थे उर्स’ सपा सरकार में पुलिस को धमका कर थाने की जमीन पर बना दी मजार, हिट्रीशीटर है पूर्व MLA आरिफ अनवर हाशमी’ था। इस खबर में हमने बताया था कि किस प्रकार से साल 2013 में पुलिस वालों को ही धौंस दिखा कर समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक आरिफ अनवर हाशमी ने थाने की ही जमीन कब्ज़ा ली थी। यहाँ पक्की मजार बना कर उसे ‘मजार शरीफ शहीद ए मिल्ल्त अब्दुल कुद्दूस शाह रहमतुल्लाह अलैह’ नाम दे दिया दिया गया था।

पुलिस स्टेशन की इस जमीन पर सिपाहियों के रहने के लिए बैरकें बनना प्रस्तावित था। लम्बे समय तक यह मामला कोर्ट और अन्य कारणों से लंबित रहा। बलरामपुर पुलिस के वर्तमान अधीक्षक IPS केशव कुमार ने इस मामले को गंभीरता से लिया और अधीनस्थों को आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। आखिरकार इन सभी आरोपितों पर IPC की धारा 420, 468, 120 बी, 186, 434, 467 और 471 के साथ सार्वजनिक सम्पत्ति क्षति अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।

हैदराबाद में BJP प्रत्याशी माधवी लता को गले लगाने वाली ASI उमा देवी निलंबित, प्रचार के दौरान का वीडियो ओवैसी समर्थकों ने सोशल मीडिया पर किया था वायरल

हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर के. श्रीनिवास रेड्डी ने भाजपा की लोकसभा प्रत्याशी के. माधवी लता को गले लगाने वाली ASI को निलंबित कर दिया है। निलंबित की गई ASI सैदाबाद में तैनात थी और उनका नाम उमा देवी है। माधवी लता हैदराबाद लोकसबा सीट से भाजपा की उम्मीदवार हैं। उमा देवी का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह माधवी लता से हाथ मिलाते और गले लगते हुए दिख रही हैं।

वीडियो वायरल होने के बाद हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर ने इसका संज्ञान लिया है। पुलिस कमिश्नर ने इस आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए उन पर कार्रवाई की और उन्हें निलंबित कर दिया। दरअसल, माधवी लता सैदाबाद थाने की सीमा में चुनाव प्रचार कर रही थीं, तब उमा देवी वर्दी में ड्यूटी पर थीं। इसी दौरान उन्होंने भाजपा उम्मीदवार से मुलाकात की थी।

दरअसल, हैदराबाद के वर्तमान सांसद असदुद्दीन ओवैसी के समर्थकों और अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर करना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने हैदराबाद के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी इसमें टैग करना शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस कमिश्नर के जाँच के जाँच के आदेश दिए और आखिर में उन्हें निलंबित कर दिया।

बता दें कि माधवी लता ने पिछले सप्ताह रामनवमी पर निकाले गए जुलूस में शामिल हुई थीं। इस दौरान उन्होंने सांकेतिक रूप से धनुष पर बाण रखकर छोड़ा था। जिस तरफ वह ऐसा कर रही थीं, उसी तरफ एक मस्जिद था। इसको लेकर विपक्षियों ने हंगामा कर दिया कि उन्होंने मस्जिद पर बाण चलाई है। शेख इमरान नाम के एक व्यक्ति ने उनके खिलाफ शिकायत भी दी।

पुलिस ने माधवी लता के खिलाफ अपने भड़काऊ हाव-भाव से एक समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का मामला दर्ज किया है। यह मामला बेगम बाजार थाने में दर्ज किया गया है। उन पर धारा 295A (जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण कार्यों से किसी धर्म के विश्वासों का अपमान कर भावनाओं को ठेस पहुँचाना) और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

दरअसल, माधवी लता का यहाँ मुकाबला AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी से है। ओवैसी साल 2004 से यानी लगातार चार बार से यहाँ से सांसद हैं। पाँचवीं बार के लिए भी उन्होंने नामांकन करा लिया है। इसके पहले उनके अब्बा सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी साल 1984 से 1999 तक यहाँ से सांसद रहे। इसके पहले वे यहाँ से विधायक थे।

बुजुर्गों से पैर पकड़वाए, महिलाओं से छेड़खानी, बच्चियों को पीटा… मस्जिद के सामने से गुजरी बरात तो मुस्लिम भीड़ ने किया हमला, बोले पीड़ित – DJ बजाने पर बनाया शिकार

राजस्थान के अलवर जिले में हिन्दू परिवार में आई एक बरात पर मुस्लिम भीड़ द्वारा हमले की खबर है। हमले की वजह मस्जिद के आगे DJ बजना बताया जा रहा है। हालाँकि कुछ लोग इसे बाइक टकराने से उठा विवाद भी मान रहे हैं। हमले में कई बाराती घायल हो गए हैं जिनका इलाज अस्पताल में करवाया जा रहा है। पुलिस ने केस दर्ज कर के 4 लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। घटना रविवार (21 अप्रैल, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला अलवर के थाना क्षेत्र नौगाँवा का है। यहाँ के गाँव मेडूबास में रविवार की शाम रामदास अपने पोते की बारात ले कर आए थे। पुलिस में दी गई शिकायत में उन्होंने बताया कि घटना के समय दूल्हा बग्घी पर सवार था। बरात में DJ बज रहा था। गाँव के रास्ते से होते हुए ये बारात मस्जिद के सामने से गुजरी। तभी मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग बाहर निकले और DJ को बंद करने के लिए कहा। बारातियों ने इंकार किया तो दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई।

आरोप है कि इसी वाद-विवाद के बीच अचानक बारातियों पर पत्थर चलने लगे। जब तक बाराती बचने के लिए कोई ठिकाना खोजते उस से पहले ही एक भीड़ ने उन पर लाठी-डंडों से हमला कर लिया। इस भीड़ में पुरुषों के साथ महिलाएँ भी शामिल बताई जा रही हैं। इस हमले में पवन, किशनचंद, संदीप, सागर, राकेश, मनोज सहित लगभग 10 बाराती घायल हो गए। घायलों में 14 साल की एक बच्ची और महिलाएँ भी शामिल हैं। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस बल गाँव में पहुँचा। पुलिस को देखते ही हमलावर पहाड़ों में भाग गए।

पुलिस के मुताबिक, दोनों पक्ष एक दूसरे पर हमले का आरोप लगा रहे हैं। जहाँ एक पक्ष मस्जिद के आगे DJ बजाने पर खुद को हमले का शिकार बता रहा है तो वहीं दूसरा पक्ष इसे बाइक टकराने से उठा विवाद कह रहा है। पुलिस दोनों पक्षों के बयानों के साथ हमले के असल कारणों की पड़ताल में जुटी है। अब तक कुल 4 लोगों को हिरासत में लिया गया है जिनसे पूछताछ की जा रही है। तनाव को देखते हुए गाँव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। फरार आरोपितों की तलाश में दबिश दी जा रही है।

पीड़ितों ने ये भी बताया कि बुजुर्गों से पैर भी पकड़वाए गए। महिलाओं से भी छेड़छाड़ की गई। पीड़ितों माँग की है कि सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।

हज करने के लिए पैदल पाकिस्तान सीमा पार कर रहा था सैयद मजीद, जैसलमेर में लोगों ने पकड़ा: बोला – ‘बजरंगी भाईजान’ देख कर आया आईडिया

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद का रहने वाला मजीद बिना वीसा के अवैध रूप से पाकिस्तान में घुसने की कोशिश कर रहा था। सुरक्षा बलों ने उसे हिरासत में ले लिया है। पूछताछ में उसने बताया कि वह हज करना चाहता था, इसलिए वह पाकिस्तान जाना चाह रहा था। राजस्थान के जैसलमेर से बॉर्डर पार करने की कोशिश के दौरान ग्रामीणों ने उसे पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया।

लगभग 29 साल के मजीद ने बताया कि वह सरहद पर पहुँचकर सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों से आग्रह करता और पाकिस्तानी सीमा में चला जाता। उसने बताया कि उसे यह आइडिया ‘बजरंगी भाईजान’ फिल्म देखकर आया था। बता दें कि बजरंगी भाईजान बॉलीवुड स्टार सलमान खान की फिल्म है, जो सीमा के दोनों तरफ जुड़े लोगों की कहानी है।

कोतवाली थाना के प्रभारी सवाई सिंह ने बताया कि युवक का नाम सैयद मजीद है। इसके अब्बा का नाम सैयद जहाँगीर है। यह हैदराबाद के किंग कोठी का रहने वाला है। यह हैदराबाद से रेल के जरिये जयपुर आया था। जयपुर से जैसलमेर आया था। इसे जैसलमेर शहर से 10 किलोमीटर दूर मूल सागर गाँव में रविवार (21 अप्रैल 2024) की सुबह ग्रामीणों ने पकड़ा।

रिपोर्ट के मुताबिक, मजीद 16 अप्रैल 2024 को हैदराबाद से जयपुर के लिए रवाना हुआ था। ट्रेन से पहले वह जयपुर पहुँचा और फिर जैसलमेर। रविवार (21 अप्रैल 2024) को वह जैसलमेर आकर रेलवे स्टेशन पर ही सोया। फिर, वहाँ से वह पाकिस्तानी सीमा की ओर पैदल ही चल पड़ा। शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर उसे पैदल जाता देखकर लोगों ने रोक कर पूछताछ की।

इस दौरान मजीद ने बताया कि वह सीमा पार करके पाकिस्तान जा रहा है और वहाँ से वह हज करने जाएगा। उसकी गतिविधियाँ संदिग्ध लगने पर लोगों ने उसे पकड़ लिया और पुलिस को सूचित करके उसे पुलिस के हवाले कर दिया। मजीद आगे कोई अपराध ना करे, यह सोचकर पुलिस ने उसे धारा-151 के तहत हिरासत में ले लिया और अगले दिन कोर्ट में पेश किया।

सवाई सिंह का कहना है कि जाँच करने पर सैयद मजीद के पास से पासपोर्ट और आधार कार्ड मिला है। उसके पास वीसा नहीं था। पुलिस का कहना है कि मजीद के पास से कुछ भी संदिग्ध सामान या दस्तावेज बरामद नहीं हुआ है। उसने बताया कि वह पाकिस्तान के रास्ते हज करने जाना चाहता था। इसलिए उसने पैदल ही सीमा पार करने की सोची।

उसने कहा कि उसके पास वीजा नहीं है। उसने यूट्यूब पर ‘बजरंगी भाईजान’ फिल्म देखकर सीमा पर परमिशन लेने का विचार किया था। मजीद आगे कोई अपराध नहीं करे, इसलिए धारा-151 में पुलिस ने उसे पकड़ा। उसे सोमवार (22 अप्रैल 2024) को एसडीएम कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे छोड़ दिया गया। कोर्ट ने उसे घर भेजने के आदेश दिया है।

CM केजरीवाल को नहीं मिली रोज वीडियो कॉल की अनुमति, खाना-व्यायाम तय करेगा AIIMS का बोर्ड, कोर्ट से AAP मुखिया को झटका

दिल्ली शराब घोटाला मामले में जेल में बंद मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की इन्सुलिन और वीडियो कॉल सम्बन्धित याचिका एक कोर्ट ने खारिज कर दी है। उनकी इस याचिका का जाँच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विरोध किया था। केजरीवाल पर एजेंसी ने आरोप लगाया था कि वह जानबूझ कर मीठी चीजें खा रहे हैं जिससे उन्हें मेडिकल आधार पर जमानत मिल सके।

जानकारी के अनुसार, दिल्ली के न्यायालय ने केजरीवाल की रोज 15 मिनट निजी डॉक्टर के साथ वीडियो कॉल की माँग वाली याचिका को खारिज किया। CM केजरीवाल ने कोर्ट से यह माँग कि थी कि उन्हें यह सुविधाएँ उपलब्ध करवाने के लिए तिहाड़ जेल प्रशासन को आदेश दिया जाए। हालाँकि, कोर्ट ने तिहाड़ प्रशासन को आदेश दिया है कि वह केजरीवाल को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध करवाए। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि AIIMS के डॉक्टरों से सलाह लेकर आगे की कार्रवाई की जाए।

कोर्ट ने यह भी कहा कि मेडिकल बोर्ड इस बात का निर्णय करेगा कि मुख्यमंत्री केजरीवाल को इन्सुलिन दी जाए या नहीं। मेडिकल बोर्ड इस बात का निर्णय भी करेगा कि केजरीवाल को क्या खिलाया-पिलाया जाए और साथ ही उनके लिए व्यायाम का खाका भी तैयार करे।

केजरीवाल की इस याचिका पर फैसला पिछले शुक्रवार को सुरक्षित रख लिया गया था। सोमवार (22 अप्रैल, 2024) को इस मामले में फैसला सुनाया गया। इस मामले में ED ने केजरीवाल को वीडियो कॉल सुविधा दिए जाने का विरोध किया था। ED ने कहा कि केजरीवाल जानबूझ कर आम खा रहे हैं ताकि उनका सुगर स्तर बढ़ जाए और वह इसका उपयोग मेडिकल आधार पर जमानत में कर सकें।

इस मामले में तिहाड़ जेल की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि केजरीवाल के संबंध में AIIMS के डॉक्टरों की राय ली गई थी। तिहाड़ के वकील ने बताया कि AIIMS के डॉक्टरों ने राय दी कि डायबिटीज वाले रोगियों को आम नहीं खाने चाहिए और साथ ही केजरीवाल का डायबिटीज स्तर अभी नियंत्रण में है। उन्होंने यह भी बताया कि केजरीवाल को इन्सुलिन देने की कोई आवश्यकता नहीं है। इससे पहले सोमवार को ही केजरीवाल की जमानत सम्बंधित एक याचिका खारिज की गई थी।

गौरलतब है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को 21 मार्च, 2024 को प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में गिरफ्तार किया था। वह तब से न्यायिक हिरासत में हैं। उनकी न्यायिक हिरासत 23 अप्रैल, 2024 तक है। उन्होंने जमानत के लिए भी याचिका दाखिल की थी।

तेजस्वी यादव ने NDA के लिए माँगा वोट! जहाँ से निर्दलीय खड़े हैं पप्पू यादव, वहाँ की रैली का वीडियो वायरल

लोकसभा चुनावों के बीच राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने पूर्णिया में भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए गठबंधन के लिए वोट माँगने का काम किया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में तेजस्वी यादव जनता को संबोधित करते दिख रहे हैं।

इसमें वो जनता से कह रहे हैं कि या तो लोग इंडी गठनबंधन को वोट दे दें वरना एनडीए गठबंधन को। उन्होंने जनता से अनुरोध किया कि इन दो विकल्पों के अलावा और किसी को वोट न दिया जाए।

इस वीडियो में तेजस्वी यादव कहते हुए सुनाई पड़ते हैं- दुआ कीजिए आपका आशीर्वाद बना रहे। हमें एकजुट रहना है। किसी के धोखे में नहीं आना। ये किसी एक व्यक्ति का चुनाव नहीं है। ये दो धारा का चुनाव है। या तो इंडी गठबंधन या तो एनडीए की लड़ाई है।

आगे वो साफ-साफ पूर्णिया की जनता से कहते हैं- या तो आप इंडी गठबंधन को चुनो। और अगर आप इंडी गठबंधन की बीमा भारती को नहीं चुनते हो तो आप एनडीए को चुन लो। साफ बात। साफ बात…।

उनके रैली में ऐसा कहने के बाद अब उनकी वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर हो रही है। कहा जा रहा है किये पूर्णिया में निर्दलीय चुनाव में खड़े पप्पू यादव की हवा है जो तेजस्वी यादव खुद कह रहे हैं कि या तो एनडीए को चुन लोग या फिर इंडी गठबंधन को। लोगों के मुताबिक राजद पप्पू यादव को मिल रहे जनसमर्थन से डर गई है।

गौरतलब है कि पप्पू यादव इस बार पूर्णिया से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने पिछले दिनों तेजस्वी पर निशाना साधते हुए बोला था कि तेजस्वीर दो बार उप-मुख्यमंत्री रहे हैं, उन्हें बताना चाहिए कि उन्होंने पूर्णिया के लिए क्या किया। पप्पू यादव ने कहा था कि वो यहाँ से चुनाव में नहीं खड़े हैं बल्कि पूरी जनता उनके लिए खड़ी हुई है।