उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। यहाँ एक नाबालिग हिन्दू लड़की का मुस्लिम युवक ने अपहरण कर के रेप किया है। आरोपित का नाम अरशद है जो रुड़की का रहने वाला बताया जा रहा है। पीड़िता को हरिद्वार जिले के कलियर इलाके में भी ले जाया गया था। यह इलाका कलियर पिरान की दरगाह के नाम से चर्चित है। सोमवार (22 अप्रैल, 2024) को पुलिस ने पीड़िता को बरामद करते हुए अरशद को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जाँच की जा रही है।
यह मामला देहरादून के थाना क्षेत्र नगर कोतवाली का है। मूल रूप से उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके में रहने वाली पीड़िता स्कूल की छुट्टियों में देहरादून आई थी। यहाँ पीड़िता के चाचा प्राइवेट नौकरी करते थे। शनिवार (20 अप्रैल, 2024) की रात को अरशद ने देहरादून से पीड़िता का अपहरण कर लिया। वह नाबालिग को ले कर अलग-अलग इलाकों में घूमता रहा। इस बीच पीड़िता के घर से अचानक लापता होने के बाद परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। पहले जान-पहचान वालों से बात की गई। जब लड़की नहीं मिली तो पुलिस में सूचना दी गई।
पुलिस ने फौरन इस केस की FIR दर्ज कर के नाबालिग की खोजबीन शुरू कर दी। पीड़िता का फोन बंद होने की वजह खोजबीन में दिक्कत आई। देहरादून पुलिस ने सर्विलांस टीम की मदद से आखिरकार अरशद की लोकेशन खोज निकाली। उसकी मौजूदगी हरिद्वार जिले के कलियर इलाके में पाई गई। कलियर क्षेत्र अलाउद्दीन अली अहमद ‘साबिर’ की दरगाह ने नाम से जाना जाता है। देहरादून पुलिस ने फ़ौरन कलियर पुलिस से सम्पर्क किया। दबिश दे कर अरशद को गिरफ्तार कर लिया गया। नाबालिग पीड़िता भी अरशद के साथ मौजूद मिली।
शुरुआती पूछताछ से मिली जानकारी के मुताबिक, अरशद और पीड़िता की बातचीत स्नैपचैट एप पर शुरू हुई थी। इसी बातचीत में पीड़िता ने उसे पहाड़ी इलाके से देहरादून आने की सूचना दी थी। तब तक घात लगाए अरशद ने देहरादून में लड़की की मौजूदगी पाते ही उसका अपहरण कर लिया। अरशद पर पीड़िता से रेप का भी आरोप है। पुलिस ने इस मामले में अरशद पर IPC की धारा 363, 366, 376 और पॉक्सो एक्ट के सेक्शन 5 (L)/6 तहत कार्रवाई की है।
अपनी जाँच में पुलिस यह भी पता करने का प्रयास कर रही है कि इस वारदात को अंजाम देने में अरशद अकेला था या किसी और उन भी उसका सहयोग किया था। पीड़िता के परिजनों को सूचना भेज दी गई है। नाबालिग पीड़िता का मेडिकल परीक्षण और काउंसिलिंग भी करवाई जा रही है। पुलिस ने बताया कि आरोपित को रूहानी मस्जिद के पास से पास से दबोचा गया है।
गुजरात से भाजपा के लिए एक अहम खबर आई है। मतदान की प्रक्रिया पूरा होने से पहले ही भाजपा के लोकसभा उम्मीदवार मुकेश दलाल ने जीत हासिल कर ली है। मुकेश दलाल सूरत लोकसभा सीट के भाजपा के उम्मीदवार हैं। यहाँ पर उनका कोई विरोधी उम्मीदवार नहीं है। इस तरह यह पार्टी की पहली जीत है। इस जीत के बाद उन्होंने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सीआर पाटिल से मुलाकात की है।
दरअसल, लोकसभा सीट से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार का नामांकन रद्द हो गया था। इसके बाद बचे हुए 8 उम्मीदवारों ने भी अपने नाम वापस ले लिए हैं। इसके बाद बीजेपी यहाँ से निर्विरोध जीत हो गई है। इस जीत के साथ ही लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा की जीत का खाता खुल गया है।
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बता दें कि कॉन्ग्रेस की तरफ से निलेश कुम्भानी यहाँ मैदान में थे। चुनाव अधिकारी के समक्ष अपने तीन में से एक भी प्रस्तावक को वेे मौजूद नहीं रख पाए थे। इसके बाद चुनाव अधिकारी ने निलेश कुम्भानी का नामांकन फॉर्म रद्द कर दिया था। भाजपा ने निलेश कुम्भानी के फॉर्म में उनके तीन प्रस्तावकों के हस्ताक्षर को लेकर सवाल उठाए थे।
उधर कॉन्ग्रेस ने इन सबके लिए भाजपा को ही दोषी ठहरा दिया है। कॉन्ग्रेस ने कहा कि सरकार की धमकी के कारण सब डरे हुए हैं। पार्टी नेता और एडवोकेट बाबू मांगुकीया ने कहा, “हमारे तीनों प्रस्तावकों का अपहरण हुआ है। चुनाव अधिकारी को अभी फॉर्म पर हस्ताक्षर हुए हैं या नहीं, इसकी नहीं बल्कि अपहरण की जाँच करनी चाहिए।”
वहीं, निलेश कुम्भानी के प्रस्तावकों में उनके बहनोई जगदीश सावलिया, भाँजे ध्रुविन धामेलिया और भागीदार रमेश पोलरा के हस्ताक्षर होने का दावा किया गया था, लेकिन तीनों प्रस्तावकों ने चुनाव अधिकारी के सामने एफिडेविट देकर कहा था कि निलेश कुम्भानी के फॉर्म में उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। इसके बाद से तीनों प्रस्तावक गायब हो गए।
चुनाव अधिकारी ने निलेश कुम्भानी के प्रस्तावकों का वीडियो रिकॉर्डिंग भी किया था। प्रस्तावकों के दावे के बाद चुनाव अधिकारी ने जवाब देने के लिए कॉन्ग्रेस उम्मीदवार निलेश कुम्भानी को एक दिन का समय दिया था। कुम्भानी अपने एडवोकेट के साथ जवाब देने पहुँचे थे, लेकिन तीनों प्रस्तावक वहाँ नहीं आए।
ऐसे में चुनाव अधिकारियों ने कॉन्ग्रेस उम्मीदवार निलेश कुम्भालिया का नामांकन खारिज कर दिया। कुम्भालिया का नामांकन खारिज होते ही अन्य 8 उम्मीदवारों ने भी अपना नाम वापस ले लिया। इसके बाद भाजपा प्रत्याशी का कोई विरोधी नहीं रहा और वे निर्विरोध चुनाव जीत गए। बता दें कि साल 1989 से सूरत लोकसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा है।
सूरत लोकसभा सीट पर निर्विरोध जीतने वाले मुकेश दलाल सूरत भाजपा के महासचिव हैं। मोढ वणिक समुदाय से आने वाले मुकेश दलाल भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल के विश्वस्त माने जाते हैं। वह वर्तमान में एसडीसीए समिति के सदस्य हैं। वह सूरत नगर निगम (एसएमसी) के स्थायी समिति के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
इससे पहले मुकेश दलाल भाजपा युवा मोर्चा में प्रदेश स्तर पर काम कर चुके हैं। दलाल एसएमसी में 3 बार पार्षद और 5 बार स्थायी समिति के अध्यक्ष रहे हैं। दलाल सूरत पीपुल्स कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के पूर्व अध्यक्ष हैं। उन्होंने कॉमर्स में स्नातक और एमबीए फाइनेंस की पढ़ाई की है। उन्होंने LLB की पढ़ाई भी की है। दलाल 1981 से बीजेपी से जुड़े थे।
केरल में प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का ‘अल्पासी अरट्टू जुलूस’ तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से होकर बिन किसी बाधा के गुजरा। इस दौरान तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा ने पूरे 5 घंटों के लिए अपनी फ्लाइटें सस्पेंड किए रखीं। शाम 4 बजे से रात के रात 9 बजे तक इस एयरपोर्ट के रनवे को हवाई जहाजों के लिए बंद रखा गया ताकि सालों से चली आ रही परंपरा बरकरार रहे।
बता दें कि केरल में अरट्टू महोत्सव कोई सामान्य त्योहार जैसा नहीं है। ये दस दिनों तक चलने वाला अनुष्ठान है। इसे हर वर्ष दो बार मनाया जाता है। अप्रैल या मार्च में जो मनाया जाता है वो वसंत उत्सव होता है। इसी तरह शारदीय उत्सव अक्टूबर या नवंबर में मनाया जाता है। इस दौरान भगवान पद्मनाभ की मूर्ति को पवित्र स्नान कराया जाता है।
Dear passengers, on April 21, 2024, flight services will be suspended from 1600 hrs to 2100 hrs to enable the smooth continuation of the holy Painkuni Arattu procession of Sree Padmanabhaswamy Temple through our airport. (1/2)
— Thiruvananthapuram International Airport (@TRV_Airport_Off) April 16, 2024
ये 10 दिन का महोत्सव केरल के तिरुवनंतपुरम में मनाया जाता है। यहाँ के अधिकांश मंदिर इस उत्सव को मनाने आगे आते हैं। इस दौरान भव्य जुलूस निकलता है जिसकी सुंदरता देखते बनती है।
जानकारी के मुताबिक इस जुलूस की प्रथा सदियों पहले शुरू की गई थी, जिसमें भगवान की मूर्तियों को लेकर पवित्र स्नान के लिए शांगमुघम समुद्र तट पहुँचाया जाता था। बाद में 1932 में यहाँ हवाई अड्डे की स्थापना हुई, लेकिन आस्था के लिए कोई छेड़छाड़ नहीं हुआ, जुलूस हमेशा चलता रहा।
इस जुलूस में मंदिर से देवताओं को अनुष्ठानिक स्नान के लिए सजाई गई पालकी से समुद्र या नदी में ले जाया जाता है। जुलूस में शामिल सभी श्रद्धालु पारंपरिक कपड़ों में दिखते हैं। जुलूस में पारंपरिक संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रदर्शन होते रहते हैं।
The updated timings of the flights are available with the respective airlines.
— Thiruvananthapuram International Airport (@TRV_Airport_Off) April 16, 2024
लोग बताते हैं इस उत्सव की तिरुवनंतपुरम में इतनी मान्यता है कि चाहे प्लेन हों, चाहे सड़क पर चलती गाड़ियाँ हों… हर कोई अरट्टू जुलूस के लिए रास्ता छोड़ता है और जुलूस बिन किसी बाधा के अपने तय रास्ते से होते हुए गुजरता है। इस बार भी ऐसा ही हुआ। तिरुवननंतपुरम इंटरनेशनल हवाई अड्डे ने पहले ही इस जुलूस के लिए रनवे जहाजों के लिए बंद रखने का ऐलान कर दिया।
इतिहासकारों के अनुसार, जब हवाई अड्डे का निर्माण विशेष स्थान पर किया गया था, तब त्रावणकोर के राजा श्री चिथिरा थिरुनाल ने कहा था कि आम जनता के लिए यह सुविधा साल में 363 दिन और शाही परिवार के देवता भगवान पद्मनाभ के लिए दो दिनों के लिए खुली रहेगी। इसके बाद ये परंपरा जारी रही। कुछ समय पहले अडानी समूह द्वारा हवाई अड्डे का प्रबंधन अपने हाथ में लिया गया तो भी पारंपरिक रस्म जार रही। हवाई अड्डा अक्टूबर-नवंबर में पड़ने वाले द्वि-वार्षिक अल्पासी उत्सव और मार्च-अप्रैल में पंगुनी उत्सव के दौरान रनवे बंद होने से पहले हर साल दो बार एक NOTAM (नोटिस टू एयरमेन) जारी करता है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की जमानत के लिए लगाई गई एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने केजरीवाल की विशेष तौर पर अंतरिम जमानत दिए जाने को लेकर जनहित याचिका लगाने वाले पर भी ₹75,000 का जुर्माना लगाया। खुद केजरीवाल के वकील ने भी कोर्ट में इस जमानत का विरोध किया।
दिल्ली हाई कोर्ट मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की जमानत को लेकर यह याचिका लगाने वाले ने दावा किया था कि वह देश भर के लोगों का प्रतिनधि है। उसने दावा किया था कि वह दिल्ली के लोगों के भले के प्रति चिंतित है क्योंकि उनका मुख्यमंत्री जेल में है। याचिकाकर्ता ने अपने नाम के बजाय हम लोग के नाम से यह याचिका दाखिल की थी। उसका कहना था कि वह यह याचिका दाखिल करके अपना प्रचार नहीं करवाना चाहता इसलिए उसने अपना नाम नहीं दिया।
उसने कोर्ट से माँग की थी कि केजरीवाल को सभी मामले में जमानत दी जाए या फिर तब तक उन्हें जेल से बाहर रखा जाए जब तक सभी मामलों में सुनवाई पूरी नहीं हो जाती। याचिकाकर्ता ने केजरीवाल की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि पुलिस की हिरासत में ही अतीक अहमद को मार दिया गया था। उसने यह भी दावा किया था कि केजरीवाल के बंद होने की वजह से दिल्ली की इज्जत विश्व के लोगों के सामने कम हो रही है।
दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यकारी चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। उन्होंने इस मामले पर कहा, “कोर्ट का यह मत है कि याचिकाकर्ता का लोगो का संरक्षक होने का दावा पूरी तरह से निराधार है। उसके पास मुख्यमंत्री केजरीवाल की तरफ से यह अनुमति नहीं है कि वह उनके लिए याचिका दायर करें। केजरीवाल स्वयं इस मामले में जमानत याचिका दाखिल करने में सक्षम हैं और उन्होंने की भी हैं।”
कोर्ट ने इस मामले में कहा कि मुख्यमंत्री केजरीवाल एक कोर्ट आदेश के कारण जेल में हैं और उन्हें छोड़ने की जनहित याचिका की सुनवाई नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि वह किसी भी ऐसे आदमी को विशेष जमानत नहीं दे सकता जो आपराधिक मामले में बंद है। कोर्ट ने कहा कि केजरीवाल के मुख्यमंत्री होने सम्बन्धी याचिकाएँ पहले भी लगाई गईं थी जिन्हें रद्द कर दिया गया था और याचिकाकर्ताओं पर ₹50,000 का जुर्माना भी लगाया गया था।
कोर्ट में केजरीवाल की तरफ से पेश हुए वकील ने भी इस मामले में जमानत का विरोध किया। केजरीवाल की तरफ से वरिष्ठ वकील राहुल मेहरा पेश हुए थे जिन्होंने केजरीवाल को विशेष अंतरिम जमानत की माँग करने वाली इस याचिका का विरोध किया।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा, “केजरीवाल के वकील का कहना है कि वह इस मामले में कदम उठा रहे हैं। उन्हें आपकी किसी मदद की जरूरत नहीं है, वह संतुष्ट है, आप कौन होते हैं उनकी मदद करने वाले? क्या आप कोई संयुक्त राष्ट्र के सदस्य हैं कि आपको वीटो शक्ति प्राप्त है।” हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकारते हुए यह याचिका खारिज कर दी और साथ ही ₹75,000 का जुर्माना भी लगाया।
गौरलतब है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को 21 मार्च, 2024 को प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में गिरफ्तार किया था। वह तब से न्यायिक हिरासत में हैं। उनकी न्यायिक हिरासत 23 अप्रैल, 2024 तक है। उन्होंने जमानत के लिए भी याचिका दाखिल की थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (22 अप्रैल, 2024) को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने याद दिलाया कि जब पिछली बार वो अलीगढ़ आए थे, तब उन्होंने यहाँ की जनता से अनुरोध किया था कि सपा और कॉन्ग्रेस के परिवारवाद, भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण की फैक्टरी में ताला लगा दीजिए। पीएम मोदी ने कहा कि अलीगढ़ की जनता ने ऐसा मजबूत ताला लगाया कि दोनों शहजादों को आज तक इसकी चाबी नहीं मिली है।
पीएम मोदी ने कहा कि अच्छे भविष्य, विकसित भारत की चाबी भी जनता के ही पास है। उन्होंने कहा कि अब देश को गरीबी से पूरी तरह मुक्त करने, देश को भ्रष्टाचार से पूरी तरह मुक्त कराने का, देश को परिवारवादी राजनीति से मुक्त कराने का समय आ गया है और इसके लिए जरूरी है – फिर एक बार मोदी सरकार। पीएम नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि देश से बड़ा कुछ नहीं होता, देश का इतना महत्वपूर्ण चुनाव चल रहा है, हमें सारे काम छोड़कर वोट करना चाहिए।
उन्होंने अपील की कि सुबह-सुबह धूप निकलने से पहले, जलपान से पहले आपको मतदान करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि कैसे पहले आर्टिकल 370 के नाम पर जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी शान से जीते थे और हमारे फौजियों पर पत्थर चलाते थे, लेकिन अब इन सब पर फुल स्टॉप लग गया है। उन्होंने कहा कि दंगे, हत्या, गैंगवार, फिरौती आदि तो सपा सरकार का ट्रेडमार्क ही था, यही उनकी पहचान थी और उनकी राजनीति भी इसी से चलती थी, लेकिन अब योगी जी की सरकार में अपराधियों की हिम्मत नहीं है कि वो नागरिकों का अमन-चैन बिगाड़ें।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पहले हज कोटा कम होने की वजह से मारामारी होती थी, उसमें रिश्वतखोरी चलती थी और अधिकतर रसूखदार लोग ही वहाँ पहुँचते थे, लेकिन उन्होंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस से आग्रह किया कि भारत के हज का कोटा बढ़ाया जाए। इसके बाद वीजा नियम भी आसान किए गए। पीएम मोदी ने कहा कि पहले मुस्लिम माताएँ-बहनें अकेली हज नहीं जा सकती थीं, लेकिन अब उन्हें बिना मरहम हज जाने की अनुमति मिली और ऐसी जिन महिलाओं का सपना पूरा हुआ वो आज उन्हें आशीर्वाद दे रही हैं।
पीएम नरेंद्र मोदी ने अलीगढ़ में कहा, “कॉन्ग्रेस और सपा जैसी पार्टियों ने हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति की और मुस्लिमों के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक उत्थान के लिए कभी कुछ नहीं किया। जब मैं पसमांदा मुस्लिमों की मुसीबत की चर्चा करता हूँ, तो इनके बाल खड़े हो जाते हैं। क्योंकि, ऊपर के लोगों ने मलाई खाई और पसमांदा मुस्लिमों को उनके हालात पर जीने के लिए मजबूर कर दिया गया। जनता के धन को लूटना और देश की संपत्ति को लूटना कॉन्ग्रेस अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझती है।”
इस दौरान उन्होंने फिर से राहुल गाँधी द्वारा संपत्ति के बँटवारे वाले बयान का जिक्र करते हुए कहा कि स्त्रियों के मंगलसूत्र पर उनकी नज़र है, माताओं-बहनों का सोना चुराने का उनका इरादा है। उन्होंने इस दौरान गहनों को स्त्रीधन करार दिया। पीएम मोदी ने कहा कि किसकी कितनी सैलरी है, फिक्स्ड डिपॉजिट है, जमीन है, गाड़ियाँ हैं – इन सबकी जाँच होगी कॉन्ग्रेस के सर्वे के माध्यम से और इन सब पर वो कब्ज़ा कर के जनता की संपत्ति को छीन कर के बाँटने की बात की जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अगर किसी के पास 2 घर है तो कॉन्ग्रेस वाले एक घर छीन लेंगे। उन्होंने याद दिलाया कि कई लोगों के पास गाँव में पैतृक घर होता है, पढ़ाई-नौकरी की वजह से वो शहर में छोटा सा फ़्लैट लेते हैं। इसे माओवादी सोच बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस नीति से कई देश बर्बाद हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि परिवारवादी कॉन्ग्रेस ने कहा है कि माताओं-बहनों के गहने सुरक्षित नहीं रहेंगे, जबकि इनलोगों ने देश को लूट कर अथाह संपत्ति बना ली लेकिन देश को कुछ नहीं दिया।
पीएम मोदी ने कहा, “आजकल मैं कहता हूँ कि 10 साल में जो किया वो तो ट्रेलर है, हमें तो अभी बहुत सारा काम करना है। जब मैं इतनी सारी बातें करता हूँ, तो सपा और कॉन्ग्रेस वालों के कुछ समझ में ही नहीं आता। यूपी अब ‘आत्मनिर्भर सेना’ का बहुत बड़ा हब बनने जा रहा है। जो लोग योगी आदित्यनाथ की पहचान सिर्फ बुलडोजर से करते रहते हैं, मैं उनकी आँखें खोलना चाहता हूँ। यूपी में आज़ादी के बाद अब तक जितना औद्योगिक विकास नहीं हुआ, उतना सिर्फ उनके कार्यकाल में हुआ। ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ लाया गया। मैं यूपी से सांसद हूँ, ये मेरे भी माननीय मुख्यमंत्री हैं। मुझे गर्व है कि मेरे पास ऐसे साथी हैं।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान अलीगढ़ में डिफेन्स कॉरिडोर के निर्माण का जिक्र करते हुए कहा कि यहाँ ब्रह्मोस मिसाइल बने इस पर किसे गर्व नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ के ताले हों, हाथरस के हींग हो, मेटल-कार्पेट उद्योग हो, भाजपा सरकार हर उद्योग की ताकत बढ़ा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये I.N.D.I. गठबंधन वाले इतनी निराशा में डूबे हुए हैं कि भविष्य की ओर देखने के लिए इनमें हौंसला ही नहीं रहा, ये कहते हैं कि मोदी विकसित भारत की बात क्यों करता है, ये कहते हैं कि मोदी भारत को तीसरी बड़ी आर्थिक ताकत बनाने की बात क्यों करता है?
बकौल पीएम मोदी, ये लोग अपने परिवार और सत्ता के लोभ के अलावा कुछ नहीं करते और जनता से छलावा करते रहते हैं।
प्रकाश अंबेडकर के नेतृत्व वाली वंचित बहुजन अघाड़ी (वीबीए) के बाद अब असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार श्रीमंत शाहू छत्रपति महाराज को समर्थन दिया है। कोल्हापुर राजघराने के छत्रपति शाहूजी महाराज के वंशज को INDI गठबंधन से कोल्हापुर से मैदान में उतारा है।
श्रीमंत शाहू छत्रपति महाराज मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के 12वें वंशज हैं और कोल्हापुर के राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज के पोते हैं। छत्रपति शाहूजी महाराज महान लोकतंत्रवादी और समाज सुधारक थे। उन्होंने बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर की पढ़ाई के लिए वित्तीय सहायता के साथ-साथ छुआछूत को मिटाने की कोशिश भी की थी।
भीमराव अंबेडकर का कोल्हापुर के इस राजपरिवार से बेहद निकटता थी। इसी जुड़ाव के कारण बाबासाहेब अंबेडकर के पोते और वीबीए प्रमुख प्रकाश अंबेडकर ने श्रीमंत शाहू छत्रपति महाराज को अपना समर्थन देने का फैसला किया है। AIMIM की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख और औरंगाबाद से मौजूदा सांसद इम्तियाज जलील ने भी छत्रपति शाहू महाराज को समर्थन दिया है।
जलील ने कहा, “हमने एक फैसला लिया है और इसकी चर्चा पार्टी प्रमुख से भी की है। हमने कोल्हापुर से महाविकास अघाड़ी (MVA) के उम्मीदवार शाहू महाराज का समर्थन करने का फैसला लिया है। सभी राजनीतिक दलों में केवल बुरे लोग नहीं होते हैं। यह बात हमारे विरोधी दल के लिए भी उतनी ही सच है। इसलिए हमने कुल्हापुर में अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से शाहू महाराज का समर्थन करने के लिए कहा है।”
इम्तियाज जलील ने आगे कहा है, “शाहू महाराज ने मुझे ना ही फोन किया है और ना ही समर्थन माँगा है। हमने खुद ही उनके साथ खड़ा होने का फैसला लिया है। हमारी पार्टी AIMIM कोल्हापुर में कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगी।” शाहू छत्रपति महाराज का मुकाबला एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के संजय मांडलिक से है, जो भाजपा के नेतृत्व वाली माया युति के प्रतिनिधि हैं।
AIMIM सांसद ने कहा कि छत्रपति शाहूजी महाराज के नाम पर आजकल की पार्टियाँ राजनीति कर रही हैं। ऐसी पार्टियों के खिलाफ उम्मीदवार उतारे जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “विरोधियों को पता होना चाहिए कि शाहू महाराज कौन हैं और कोल्हापुर में उनकी क्या स्थिति है। हमने इस बारे में असदुद्दीन ओवैसी को भी बता दिया है।”
राहुल गाँधी ने देश में संपत्ति के बँटवारे को लेकर एक खतरनाक बयान दिया था, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करारा प्रहार किया। उन्होंने हैदराबाद में कहा था कि उनकी पार्टी सत्ता में आने के बाद वित्तीय एवं संस्थागत सर्वे कराएगी, ताकि पता चले कि देश में अधिक संपत्ति किन लोगों के पास है, साथ ही संपत्ति का पुनः बँटवारा भी सुनिश्चित कराएगी। अब पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद ने समझाया है कि आखिर क्यों राहुल गाँधी का ये फॉर्मूला गलत है।
वेंकटेश प्रसाद ने IPL का उदाहरण देकर इसे समझाया है। उन्होंने कहा कि एक राजनीतिक पार्टी ने अपने घोषणा-पत्र में वादा किया है कि वो संपत्ति के फिर से बँटवारा करेगी और अमीरों से लेकर गरीबों को देगी। वेंकटेश प्रसाद ने कहा कि गरीबों के उत्थान की ज़रूरत है, लेकिन राहुल गाँधी की सोच निराश करने वाली है। उन्होंने कहा कि ये उसी तरह हुआ, जैसे कोई कहे कि हम ‘राजस्थान रॉयल्स (RR)’ और ‘कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR)’ से 4 पॉइंट्स लेकर तालिका में सबसे नीचे की तीनों टीमों में बाँट दें।
वेंकटेश प्रसाद ने कहा कि इसके बाद नीचे की तीनों टीमें भी प्लेऑफ में पहुँच जाएगी। बता दें कि प्लेऑफ में IPL की शीर्ष 4 टीमें ही पहुँचती हैं और ये जीत के पॉइंट्स से तय होता है। फ़िलहाल RCB (रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु) अंक तालिका में सबसे निचले पायदान पर है, जबकि विराट कोहली और ग्लेन मैक्सवेल जैसे दिग्गज खिलाड़ी इस टीम का हिस्सा हैं। राहुल गाँधी का फॉर्मूला लगाया जाए तो प्लेऑफ में विजेता के रन हारने वाले को देकर RCB को भी फाइनल में पहुँचाया जा सकता है।
One of the political party’s manifesto is to redistribute the wealth of the rich to the poor. The really poor need to be uplifted but this thought process is so pathetic. It is like saying If we take 4 points from RR and 4 from KKR and SRH and re-distribute it to the bottom 3…
बता दें कि पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान की याद दिलाई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश की संपत्ति पर पहला हक़ मुस्लिमों का है। प्रधानमंत्री ने इसे अर्बन नक्सलियों की सोच बताते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस माताओं-बहनों के मंगलसूत्र तक छीन लेगी। राजस्थान के बाँसवाड़ा में पीएम मोदी ने कहा कि संपत्ति इकट्ठी कर के कॉन्ग्रेस घुसपैठियों में बाँट देगी, उन्हें देगी जिनके ज्यादा बच्चे हैं। उन्होंने जनता से पूछा कि क्या किसी को आपकी मेहनत से कमाई संपत्ति ऐंठने का अधिकार है क्या?
14 साल की रेप सर्वाइवर को सुप्रीम कोर्ट ने 7 महीने (30 हफ्ते) का गर्भ गिराने की इजाजत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने इस मामले पर अपना फैसला दिया। इस दौरान उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को खारिज किया जिसमें गर्भपात कराने पर कोई आदेश देने से मना किया गया था।
सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 142 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करके बच्ची को एबॉर्शन करा लेने की मंजूरी दी। फैसले में कहा गया कि गर्भपात में देरी बच्चे के लिए कठिनाई से भरा है। उन्होंने कहा कि ये बहुत ही असाधारण स्थिति है जहाँ बच्चों को प्रोटेक्ट करने के लिए ऐसे फैसले लिए जाते हैं।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा फैसला देने से पहले 19 अप्रैल 2024 को नाबालिग बच्ची के मेडिकल टेस्ट का आदेश दिया था। कोर्ट ने मुंबई के सायन स्थित लोकमान्य तिलक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (LTMGH) से कहा था कि वो इस बात पर रिपोर्ट दें कि अगर पीड़िता मेडिकल प्रोसिजर से एबॉर्शन कराती है या उसे ऐसा न करने की सलाह दी जाती है तो इसका उसकी शारीरिक और मनोवैज्ञानिक स्थिति पर क्या असर पड़ने की संभावना है।
कोर्ट के आदेश के बाद बच्ची का मेडिकल टेस्ट हुआ और अस्पताल की ओर से स्पष्ट राय दी गई कि गर्भावस्था जारी रहने से नाबालिग की शारीरिक और मानसिक स्थिति पर असर पड़ सकता है। रिपोर्ट देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि मेडिकल बोर्ड ने राय दी है कि बच्चे को जन्म देने के मुकाबले गर्भपात करने में जोखिम कम है। इसलिए सायन अस्पताल के डीन से नाबालिग के चिकित्सीय गर्भपात करने का अनुरोध किया जाता है।
गौरतलब है कि एक यौन उत्पीड़न पीड़िता के गर्भपात के लिए सुप्रीम कोर्ट से इसलिए फैसला आया है क्योंकि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी के अनुसार, गर्भावस्था को समाप्त करने की मैक्सीमम लिमिट 24 सप्ताह है। ये सीमा विवाहित महिलाओं के साथ-साथ विशेष श्रेणियों की महिला के लिए तय की गई है। इनमें रेप पीड़िता, कमजोर महिलाएँ और विकलांग महिलाएँ शामिल आती हैं।।
पाकिस्तान की खराब आर्थिक हालत की लपटें अब इस्लामाबाद में बैठने वाले सांसदों तक पहुँचने लगी हैं। खराब आर्थिक हालत के कारण देश में चोरी की वारदातें बढ़ रही हैं। समस्या यहाँ तक गहरा गई कि पाकिस्तान की संसद से ही नमाज के दौरान जूते चोरी हो गए।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार (19 अप्रैल, 2024) को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में चोरी की यह घटना हुई। इस्लामाबाद स्थित संसद के भीतर बनी मस्जिद में तमाम सांसद जुमे की नमाज अदा करने गए थे। इन सांसदों के साथ कई पत्रकार और संसद के अधिकारी भी नमाज अदा करने गए हुए थे।
जब यह सभी नमाज पढ़ कर वापस आए तो कईयों के जूते नहीं मिले। नमाज के दौरान ही लगभग 20 जोड़ी जूते संसद में बनी मस्जिद के बाहर से गायब हो गए थे। इसके बाद कई सांसद अपने जूते ढूंढते रहे। उन्होंने आसपास ढूँढा भी लेकिन जूते चोरी हो चुकी थे।
इसके बाद कई सांसदों को नंगे पैर ही नमाज पढ़ने के बाद वापस जाना पड़ा। कई पत्रकार भी इस चोरी के बाद नंगे पैर हो गए। संसद के भीतर हुई इस चोरी पर कई सांसद भड़क गए और जाँच की मांग की। मामले में यहाँ तैनात सुरक्षाकर्मी भी उन्हें कोई जवाब नहीं दे सके।
मामला बढ़ता देख संसद के स्पीकर अयाज सादिक को इस मामले में दखल देना पड़ा। उन्होंने इस मामले की सूचना लेते हुए जाँच का आदेश दिया है। उन्होंने इस मामले के बाद संसद की सुरक्षा व्यवस्था का भी जायजा लिया है।
अब संसद के CCTV की जाँच की जा रही है। CCTV के जरिए पता लगाया जा रहा है कि आखिर पाकिस्तान की संसद के भीतर कौन जूते चोरी कर ले गया। यह घटना अब सोशल मीडिया में भी वायरल हो रही है। इसे साझा करके लोग पाकिस्तानी संसद की सुरक्षा व्ववस्था का मजाक भी उड़ा रहे हैं।
गौरतलब है कि पाकिस्तान की आर्थिक हालत वर्तमान में काफी खराब है। पाकिस्तान ने फिर से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मदद मांगी है। इस बीच देश के भीतर महंगाई आसमान छू रही है और लोग सामान्य वस्तुओं को भी तरस रहे हैं। पिछले वर्ष पाकिस्तान में आटे को लेकर ऐसी ही वीडियो सामने आई थीं। कहीं लोग आपस में आटे के लिए मारपीट करते दिखे थे तो कहीं पर आटे की लूट हो रही थी।
पश्चिम बंगाल में हुए SSC भर्ती घोटाले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC सरकार को झटका दिया है। स्कूल भर्ती घोटाले पर फैसला सुनाते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कहा कि 2016 के पूरे पैनल को रद्द किया जाए। 9वीं से लेकर 12वीं ग्रुप C एवं D में हुई सभी नियुक्तियों को अवैध ठहराते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि 23,753 नौकरियों को रद्द किया जाए। इतना ही नहीं, इन सभी को 4 सप्ताह के भीतर पूरा वेतन लौटाना होगा, वो भी 12% ब्याज के साथ।
साथ ही कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अधिकारियों को भी निर्देश दिया है कि 6 हफ्ते के भीतर इन सभी से पैसे की वसूली की जाए। ‘स्कूल सेवा आयोग’ को निर्देश दिया गया है कि वो इन रिक्तियों को लेकर फिर से नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया। हालाँकि, इस दौरान ये स्पष्ट कहा गया कि CBI की इस मामले में चल रही जाँच जारी रहेगी और वो किसी भी आरोपित को ज़रूरत पड़ने पर हिरासत में ले सकती है। साथ ही 23 लाख परीक्षार्थियों की OMR शीट का पुनर्मूल्यांकन भी होगा।
प्रशासन को कहा गया है कि नई नियुक्तियों को लेकर अगले 15 दिनों में कार्यवाही शुरू की जाए। हालाँकि, एक शिक्षक के मामले को अदालत ने अपवाद माना है। कैंसर से पीड़ित सोमा दास की नौकरी बची रहेगी। ये नियुक्तियाँ सरकारी और सरकार द्वारा समर्थित स्कूलों के लिए हुई थीं। जस्टिस दबंग्सु बासक और मोहम्मद शब्बर रशीदी ने CBI से कहा है कि वो 3 महीने में जाँच की प्रगति की रिपोर्ट सबमिट करे। कुछ याचिकाकर्ताओं ने आदेश पर स्टे लगाने की अपील की थी, जिसे नकार दिया गया।
#JustIn: Calcutta High Court has cancelled the jobs provided to 24,000 candidates in the 2016 Recruitment Process. The order pronounced by special bench led by Justice Debangsu Basak affects Teachers (of Class 9 to 12), Group B & Group C employees. The bench while holding that… pic.twitter.com/AF6JD4J46P
हाईकोर्ट के आदेश के बाद परिसर के बाहर इंतज़ार कर रहे कई अभ्यर्थी खुश हुए, वहीं कई उदास नज़र आए। एक ने कहा कि हम इस दिन का कई दिनों से इंतज़ार कर रहे थे, अब हमें अंततः न्याय मिल गया है। इस मामले में ED पहले ही ममता बनर्जी के करीबी मंत्री रहे पार्थो चटर्जी को गिरफ्तार कर चुकी है। उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी के ठिकाने से 50 करोड़ रुपए कैश भी बरामद हुआ। पार्थो के एक रिश्तेदार प्रसन्ना रॉय को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।