Home Blog Page 1003

‘संसद में मुस्लिम महिलाओं को मिले आरक्षण’: हैदराबाद से AIMIM सांसद ओवैसी ने रखी माँग, पार्लियामेंट में महिला आरक्षण का किया था विरोध

ऑल इंडिया मज्लिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार (21 अप्रैल 2024) को संसद में मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण देने की वकालत की। उन्होंने कहा कि संसद में अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं का प्रतिनिधित्व बेहद कम है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से सांसद बनने वाली मुस्लिम महिलाओं की संख्या 20 रही है।

बिहार के मुस्लिम बहुल लोकसभा सीट किशनगंज में एक जनसभा को संबोधित करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “हमारा कहना है कि आजादी के बाद से देश में 17 लोकसभा चुनाव हुए हैं, लेकिन सांसद बनने वाली मुस्लिम महिलाओं की संख्या सिर्फ 20 रही है। तो फिर मुस्लिम महिलाओं के लिए आरक्षण क्यों नहीं दी जाए?”

बिहार AIMIM के प्रमुख और विधायक अख्तरुल इमान इस बार लोकसभा के लिए मैदान हैं। उनके पक्ष में प्रचार करते हुए ओवैसी ने कहा, “भाजपा-आरएसएस ने AIMIM पर राजनीति में महिलाओं की भागीदारी के खिलाफ होने का झूठा इल्जाम लगाया है। साल 2004 की शुरुआत में हमने सिकंदराबाद में एक महिला उम्मीदवार को उतारा था।”

ओवैसी ने कहा, “मेरा तर्क है कि मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग मिलकर कुल आबादी का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा हैं। हम इस विशाल सामाजिक वर्ग की महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित नहीं कर सकते।” उन्होंने दावा किया कि उनकी बातें जब कई ओबीसी संगठनों तक पहुँची तो उनके नेता उन्हें धन्यवाद देने आए।

ओबीसी संगठनों को लेकर उन्होंने कहा, “ओवैसी साहब, केवल आपने और आपकी पार्टी के सांसद इम्तियाज जलील ने पिछड़े वर्गों की महिलाओं के लिए आरक्षण का मुद्दा उठाया है। इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।” वहीं, AIMIM ने बिहार की 40 में से एक दर्जन से अधिक लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।

गौरतलब है कि सितंबर 2023 में संसद में बहस के दौरान के ओवैसी महिला आरक्षण के विरोध में खड़े नजर आए थे। उन्होंने सरकार द्वारा लाए गए महिला आरक्षण बिल को लेकर कहा था कि यह समावेशी नहीं है और कुछ खास लोगों के लिए लाया गया है। उन्होंने ओबीसी और मुस्लिम समाज की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की माँग की थी।

‘मुस्लिमों का संसाधनों पर पहला हक’ – जो कॉन्ग्रेस अब झुठला रही मनमोहन सिंह की बात, तब देने वाली थी मुस्लिमों को 15% आरक्षण, धर्मांतरण के बाद भी मिलता रिजर्वेशन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार (21 अप्रैल, 2024) को कॉन्ग्रेस पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने राजस्थान में एक जनसभा में कहा कि कॉन्ग्रेस देश के लोगों की सम्पत्ति छीन कर बाँटना चाहती है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस यह पहले ही स्पष्ट कर चुकी है देश के संसाधनों पर पहला हक़ मुस्लिमों का है।

पीएम मोदी ने जनसभा में कहा कि कॉन्ग्रेस का 2024 लोकसभा चुनाव के लिए लाया गया मेनिफेस्टो माओवादी सोच वाला है। यह सम्पत्ति के बँटवारे की बात करता है। इससे महिलाओं के सोने तक को सर्वे करके जब्त किया जाएगा और फिर बाँट दिया जाएगा। पीएम ने स्पष्ट किया कि यह सम्पत्ति उन लोगों को बाँटी जाएगी, जिनका कॉन्ग्रेस देश के संसाधनों पर पहला हक़ बताती है। पीएम ने कहा कि लोगों से जब्त करके सम्पत्ति घुसपैठियों और ज्यादा बच्चे वाले लोगों को बाँटी जाएगी।

दरअसल, पीएम मोदी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के 2006 के उस बयान का जिक्र कर रहे थे जिसमें उन्होंने कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला हक़ मुस्लिमों का है। मनमोहन सिंह ने यह बात 9 दिसम्बर, 2006 को एक सरकारी कार्यक्रम में कही थी। जब पीएम मोदी ने सम्पत्ति बाँटने के कॉन्ग्रेस के वादे के साथ इसका जिक्र किया तो कॉन्ग्रेस ने इसे झुठलाने की कोशिश की।

कॉन्ग्रेस ने एक वीडियो शेयर करके इसे गलत साबित करना चाहा। हालाँकि, कॉन्ग्रेस इसमें सफल नहीं हो सकी। भाजपा के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान का वह हिस्सा भी साझा किया। इस बयान में मनमोहन सिंह स्पष्ट रूप से यही बात कहते हैं। उनके इस बयान की लिखित प्रति प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट पर भी मौजूद है।

इस प्रति में लिखा हुआ है, “हमें अल्पसंख्यकों और विशेष कर मुस्लिमों, के लिए ऐसी योजनाएँ बनानी होंगी जिससे वह हमारे विकास के लाभ का समान रूप से लाभ ले सकने के लिए सशक्त हों। उनका संसाधनों पर पहला दावा हो।”

मोदी कॉन्ग्रेस सम्पत्ति

ऐसे में स्पष्ट होता है कि पीएम मनमोहन सिंह मुस्लिमों को संसाधनों पर पहला हक़ दिए जाने की बात कर रहे थे। कॉन्ग्रेस का दावा इस हिसाब से फेल हो जाता है। इस बयान में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश के अन्य वर्गों के विषय में भी बात की थी।

इस बयान के बाद देश में काफी हल्ला हुआ था। इसको लेकर पीएमओ को 10 दिसम्बर, 2006 को एक स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा था। इसमें यह दावा किया गया था कि मनमोहन सिंह मात्र मुस्लिमों ही नहीं बल्कि अन्य वर्गों के सशक्तिकरण की बात कर रहे थे।

मनमोहन सिंह के बयान अलावा और बहुत कुछ कर रही थी कॉन्ग्रेस

देश के संसाधनों पर हक़ वाले बयान को लेकर दोबारा से बहस छिड़ने के बाद कॉन्ग्रेस और घिरती हुई नजर आ रही है। सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि मनमोहन सिंह के बयान के पहले से ही मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने का प्रयास कॉन्ग्रेस कर रही थी। यह आरोप पत्रकार दिलीप मंडल ने लगाया है। उन्होंने कहा है कि कॉन्ग्रेस सरकार रंगनाथ मिश्रा आयोग की रिपोर्ट के हवाले से दलितों का हक़ छीन कर मुस्लिमों को देना चाहती थी और धर्मांतरण को भी बढ़ावा देना चाहती थी।

दरअसल, 2007 में पूर्व चीफ जस्टिस रंगनाथ मिश्र की अध्यक्षता में बनाए गए आयोग ने अपनी रिपोर्ट में इस बात की वकालत की थी कि मुस्लिमों और ईसाइयों में भी जाति मौजूद है। आयोग ने यह कहा था कि वर्तमान में भारतीय संविधान के अनुसार, जो भी दलित ईसाइयत या फिर इस्लाम में धर्मान्तरित होते हैं, उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलता। आयोग ने कहा था कि इस संवैधानिक रोक को हटा दिया जाए। ऐसे दलित जो कि इस्लाम या ईसाइयत को मानते हैं, उन्हें भी हिन्दू या सिख दलितों जैसा ही आरक्षण दिया जाए।

आयोग ने स्पष्ट रूप से यह भी कहा था कि एक बार यदि किसी व्यक्ति को दलित मान लिया गया है तो फिर चाहे वह किसी भी मजहब को माने, उसका दलित के तौर पर आरक्षण ना लिया जाए। आयोग ने धर्मान्तरित लोगों को आरक्षण का लाभ ना देने को संविधान विरुद्ध बताया था।

गौरतलब है कि यह बहस लम्बे समय से चलती आई है कि जाति व्यवस्था मात्र हिन्दुओं में ही है और ऐसे आरक्षण का लाभ भी हिन्दू दलितों को ही दिया जाए। इस्लाम या ईसाइयत में जाति व्यवस्था नहीं है इसलिए जब कोई व्यक्ति इन धर्म में जाता है तो वह जाति के बंधन से बाहर है।

इसके अलावा आयोग ने मुस्लिमों को अलग से आरक्षण देने की वकालत भी की थी। रंगनाथ मिश्रा आयोग ने कहा था कि सरकारी नौकरियों में मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व काफी कम या नगण्य है, ऐसे में उन्हें विशेष आरक्षण दिया जाए।

आयोग ने कहा था कि अप्संख्य्कों को पिछड़ा मानते हुए 15% का आरक्षण सरकारी नौकरियों में दिया जाए। इस 15% में से 10% केवल मुस्लिमों के लिए हो क्योंकि वो कुल अल्पसंख्यकों का 73% हैं। रंगनाथ मिश्रा के आयोग ने कहा था कि यदि ऐसा ना हो तो OBC आरक्षण में ही 8.2% हिस्सा अल्पसंख्यकों को दे दिया जाए, इसमें 6% सिर्फ मुस्लिमों के लिए हो।

रंगनाथ मिश्रा आयोग द्वारा की गई इन सिफारिशों को आप यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं। रिपोर्ट में यह हिस्सा पृष्ठ संख्या 145-160 के बीच पढ़ सकते हैं। हालाँकि, रंगनाथ मिश्रा की सिफारिशों पर कॉन्ग्रेस सरकार अमल नहीं कर पाई।

सारे मुस्लिमों को PM मोदी ने ‘घुसपैठिए’ कहा? … जानें एक क्लिप पर कैसे कॉन्ग्रेसी, कट्टर इस्लामी और पाकिस्तानी फैला रहे फर्जीवाड़ा, हकीकत क्या है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया स्पीच से राहुल गाँधी द्वारा किए गए ‘संपत्ति के बँटवारे’ के वादे की हकीकत जनता के आगे खुलने से अब कॉन्ग्रेसी बिलबिलाए हुए हैं। पीएम मोदी की स्पीच का हिस्सा काटकर उन्हें इस्लामोफोबिक, मुस्लिमों से घृणा करने वाला साबित करने की कोशिश हो रही है। भारत के लिबरलों से लेकर पाकिस्तान के बुद्धिजीवी तक इस प्रोपगेंडा को फैलाने में मदद कर रहे हैं… लेकिन हकीकत क्या है? क्या पीएम ने सच में ऐसा कुछ विवादित कह दिया है या फिर पीएम मोदी की बातों को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है।

दरअसल, राजस्थान के बांसवाड़ा में पीएम मोदी ने जनता को संबोधित करते हुए समझाया कि एक ओर राहुल गाँधी संपत्ति के सर्वेक्षण और आबादी के आधार पर संपत्ति के बँटवारे के वादे अपने घोषणा पत्र में कर रहे हैं और दूसरी ओर प्रधानमंत्री रहते हुए मनमोहन सिंह ने कहा था कि देश की संपत्ति पर पहला हक मुसलमानों का है। पीएम मोदी ने बस इस बात पर गौर करवाया है कि अगर संपत्ति का बँटवारा किया जाता है तो इसका अधिकांश हिस्सा किसपर जाएगा।

अब उनकी इसी स्पीच पर कॉन्ग्रेसी, इस्लामी, और वामपंथी सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहे हैं। कहा जा रहा है पीएम मोदी ने अपनी स्पीच में मुसलमानों को घुसपैठिया कहा है। उन्हें इस्लामोफोबिक कहकर न केवल कॉन्ग्रेसी, बल्कि ऑल्ट न्यूज वाला जुबैर और पाकिस्तान का हामिद मीर तक पीएम मोदी पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। उन्हें अल्पसंख्यकों के प्रति असंवेदनशीलता दिखाने वाला पीएम बताया जा रहा है।

इस पूरे विवाद में हकीकत जबकि ये है कि पीएम मोदी ने मुस्लिमों को घुसपैठिया नहीं कहा है। पूरी वीडियो देखने पर पता चलता है कि मुस्लिमों और घुसपैठियों की बात अलग-अलग की गई है। इसके अलावा पीएम ने जो भी बोला है वो कॉन्ग्रेस नेताओं के बयान पर निशाना साधते हुए ही कहा है।

पहले जानते हैं पीएम मोदी ने कहा क्या

पीएम मोदी ने अपनी स्पीच में कहा, “कॉन्ग्रेस ने जो अपने घोषणा पत्र में कहा है वो चिंताजनक है। माओवाद की सोच को धरती पर उतारने की कोशिश है। उन्होंने कहा है कि अगर कॉन्ग्रेस की सरकार बनेगी तो हर एक की प्रॉपर्टी का सर्वे किया जाएगा। हमारी बहनों के पास सोना कितना है उसकी जाँच की जाएगी। हमारे आदिवासी परिवारों में चाँदी होती है, उसका हिसाब लगाया जाएगा। सरकार मुलाजिमों के पास कितना पैसा है, कितनी जगह है सबकी जाँच होगी। इतना ही नहीं ये भी कहा है कि बहनों के पास जो सोना है या अन्य संपत्ति है उसे सबको समान रूप से बाँटा जाएगा।”

पीएम मोदी ने जनता से पूछा, “क्या आपको ये मंजूर है? क्या आपकी संपत्ति सरकार को ऐंठने का अधिकार है क्या? माताओं-बहनों के जीवन में सोना सिर्फ दिखावे के लिए नहीं होता है, ये उसके स्वाभिमान से जुड़ा होता है। उसका मंगलसूत्र कोई सोने का मु्द्दा नहीं है… तुम उसे छीनने की बात कर रहे हो अपने मेनिफेस्टो में।

इसके बाद पीएम मोदी यहाँ पर बताते हैं कि पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कहा था कि देश की संपत्ति पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। इसका मतलब ये (कॉन्ग्रेस) संपत्ति इकट्ठा करके किसको बाँटेंगे जिनके ज्यादा बच्चे हैं उनको बाँटेंगे… घुसपैठियों को बाँटेंगे… क्या आपको मंजूर है कि आपकी मेहनत की कमाई का पैसा घुसपैठियों को दिया जाएगा?

अब जानिए कैसे पीएम की कही एक एक बात कॉन्ग्रेसियों के बयान से निकली है…

पीएम मोदी ने अपने भाषण में जहाँ पर कहा है कि जिनके ज्यादा बच्चे होंगे उन्हें संपत्ति दी जाएगी… तो ये बात पीएम मोदी ने हवा में नहीं कही। राहुल गाँधी ने ही ये कहा था कि संपत्ति का बँटवारा आबादी देख होगा। उन्होंने ही ‘जितनी आबादी उतना हक’ वाली बात कही है। अब इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि मुस्लिमों के हिंदुओं के मुकाबले ज्यादा बच्चे होते हैं।

इसी प्रकार से जहाँ उन्होंने कहा है कि संपत्ति मुस्लिमों को दी जाएगी… वो भी उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता मनमोहन सिंह के बयान को आधार बनाकर कहा है क्योंकि प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने ही कहा था कि संपत्ति पर पहला अधिकार मुसलमामों का है… जिस पार्टी के नेता ऐसी बात कहते हैं और फिर सर्वेक्षण कराकर उनकी पार्टी संपत्ति के बँटवारे को कहती है, तो ये समझना मुश्किल नहीं है कि संपत्ति किसे दिए जाने का विचार है।

वीडियो अगर आगे देखें तो पता चलेगा कि पीएम मोदी रुककर घुसपैठियों पर बयान देते हैं, वो देश के मुस्लिमों को घुसपैठिया नहीं कहते, उनका सीधा निशाना अवैध रूप से देश में घुसे रोहिंग्याओं को बांग्लादेशियों पर हैं, जो भारत में घुस तो आए हैं और कॉन्ग्रेस लगातार अपने तुष्टिकरण की राजनीति में उन्हें खुश करने में लगी रहती है।

अब ऐसे में जहाँ पीएम मोदी द्वारा कहे तीनों शब्दों का अर्थ और संदर्भ अलग है और सबका कनेक्शन कॉन्ग्रेस नेता, उनके बयानों और उनकी राजनीति से ही है इसलिए कॉन्ग्रेसी बिलबिलाए हुए हैं कि घोषणा पत्र में किए गए वादे की मंशा की पोल खोल दी गई। यही वजह है कि उनका प्रचार तंत्र पीएम मोदी की क्लिप बिना संदर्भ के शेयर करके उन्हें इस्लामोफोबिक साबित कर रहे हैं।

मुस्लिमों ने किया कॉन्ग्रेस का बायकॉट, देंगे भाजपा को वोट, चतरा में कहा – ‘जनजातीय समाज के बाद हमारी सबसे अधिक जनसंख्या, हमारे समुदाय से प्रत्याशी दो’

लोकसभा चुनाव 2024 कॉन्ग्रेस के लिए अस्तित्व की लड़ाई साबित हो रही है। कई जगहों पर बार-बार कैंडिडेट बदलने के बावजूद उसकी मुश्किलें कम नही हो रही हैं। झारखंड के चतरा में अब मुस्लिमों ने कॉन्ग्रेस के बहिष्कार की घोषणा कर दी है। INDI गठबंधन में यहाँ से कॉन्ग्रेस के केएन त्रिपाठी भाग्य आजमा रहे हैं। उन्होंने भाजपा के स्थानीय प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने की घोषणा की।

दरअसल, चतरा लोकसभा सीट पर मुस्लिमों की आबादी लगभग 20 प्रतिशत है। मुस्लिमों का कहना है कि इतनी आबादी होने के बावजूद यहाँ से मुस्लिम प्रत्याशी नहीं दिया गया। इससे नाराज चतरा के अंतर्गत आने वाले चतरा, सिमरिया, लातेहार, मनिका व पांकी विधानसभा के मुस्लिमों ने बैठक की और त्रिपाठी के बहिष्कार की घोषणा की।

उन्होंने INDI गठबंधन से राज्य की कम-से-कम चार सीटों – चतरा, गोड्डा, कोडरमा और गिरिडीह – पर मुस्लिम समुदाय के उम्मीदवारों की माँग की। ऐसा नहीं करने पर वे करॉन्ग्रेस उम्मीदवार को वोट नहीं करने की चेतावनी दी है। इतना ही नहीं, त्रिपाठी को INDI अलायंस के घटक राजद के कार्यकर्ताओं की ओर से भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

मुस्लिमों ने कहा, “कॉन्ग्रेस पार्टी चतरा के मुसलमान को अपना जागीर समझने की भूल करना छोड़ दे। अब मुसलमान पूरी तरह से जाग चुके हैं। अब किसी भी परिस्थिति में भाजपा का भय दिखाकर कॉन्ग्रेस पार्टी और महागठबंधन के प्रत्याशी मुसलमानों का वोट नहीं ले पाएँगे। हम अब सिर्फ दरी बिछाने वाले मुसलमान नहीं है।”

चतरा के मुस्लिमों का कहना है कि झारखंड में जनजातीय समुदाय के बाद मुस्लिमों की आबादी दूसरे नंबर पर है। उनका कहना है, “हम 20 प्रतिशत आबादी के साथ कई बार गोड्डा और धनबाद समेत अन्य लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इसके बावजूद महागठबंधन ने 14 में से एक भी सीट पर मुस्लिमों को प्रत्याशी नहीं बनाया।”

मुस्लिमों ने बैठक ने कहा, “झारखंड के मुसलमान अपना अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस दौरान थर्ड फ्रंट बनाकर हम अपना प्रत्याशी उतारेंगे या भाजपा के स्थानीय प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करेंगे।” उन्होंने कहा कि भाजपा ने एक स्थानीय व्यक्ति को अपना उम्मीदवार बनाया है। इसलिए वे भाजपा के पक्ष में मतदान करेंगे।

मुस्लिमों का कहना है कि इस बार के लोकसभा चुनाव में स्थानीय प्रत्याशी की माँग की गई थी। इस संबंध में कई मुस्लिम प्रत्याशियों ने भी आबादी के आधार पर अपनी मजबूत दावेदारी पेश की थी, लेकिन कॉन्ग्रेस और उसके घटक दल राजद ने उनकी माँगों पर विचार नहीं किया।

बताते चलें कि भाजपा ने भूमिहार समाज से आने वाले काली चरण सिंह को चतरा से अपना उम्मीदवार बनाया है। इससे पहले सुनील सिंह यहाँ से लगातार दो बार सांसद रह चुके हैं। हालाँकि, तीसरी बार भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया। वहीं, काली चरण सिंह ने इस चुनाव में धुंआधार प्रचार करके कॉन्ग्रेस प्रत्याशी केएन त्रिपाठी पर बढ़त बनाए हुए हैं।

कुमकुम नहीं लगाना, बुर्का पहनो… पति को तलाक देकर इस्लाम कबूलो: कर्नाटक में रफीक ने बीवी के सामने किया दलित महिला का रेप, 7 पर केस दर्ज

कर्नाटक में 28 साल की शादीशुदा दलित महिला को ब्लैकमेल करके उस पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाने का मामला सामने आया है। आरोपित, पीड़ित महिला को उसकी अश्लील वीडियोज दिखाते हुए ब्लैकमेल कर रहे थे। पुलिस ने बताया है कि उन्हें मिली शिकायत में महिला ने कहा है कि रफीक नाम के आरोपित ने अपनी बीवी के सामने उसका रेप किया था। इसके बाद उसे कुमकुम लगाने की बजाय बुर्का पहनने को कहा गया।

शिकायत के मुताबिक रफीक और उसकी बीवी ने महिला को पहले बेलगावी स्थित अपने घर रहने को मजबूर किया। उसके बाद उससे वैसा करने को कहा जैसा वो चाहते थे। महिला के अनुसार, पिछले साल जब वो रफीक और उसकी बीवी के साथ रहती थी, तभी रफीक ने अपनी बीवी के सामने उसका रेप किया था और इस साल अप्रैल में दोनों मियाँ-बीवी दलित महिला से कहे लगे कि उसे कुमकुम नहीं लगाना बुर्का पहनना है और पाँच समय नमाज भी पढ़नी है।

महिला ने शिकायत में कहा है कि उसे जातिगत गालियाँ दी जाती थीं क्योंकि वो पिछड़ी जाति से आती है। उसे कहा गया था कि उसे अपने पति को तलाक देकर इस्लाम कबूलना ही होगा। अगर वो ऐसा नहीं करती तो उसे मार दिया जाएगा और उसकी अश्लील तस्वीरें भी वायरल कर दी जाएँगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में सौनदत्ती में महिला ने 7 लोगों के खिलाफ शिकायत दी है। केस को कर्नाटक धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार संरक्षण अधिनियम, आईटी कानून की प्रासंगिक धाराओं, एससी/एसटी अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की बलात्कार, अपहरण, आपराधिक धमकी की धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले कर्नाटक में एक कॉन्ग्रेस नेता की बेटी की सरेआम हत्या का मामला सामने आया था। घटना का आरोपित नेहा के साथ पढ़ने वाला फयाज था। रिपोर्टों से पता चला था कि फयाज उसके साथ रिलेशनशिप में आना चाहता था, लेकिन नेहा के मना करने के बाद उसने उसे मारने का फैसला किया और कॉलेज कैंपस के बाहर आकर उसे चाकू घोंप- घोंपकर मार डाला।

बेटी नेहा की हत्या पर कॉन्ग्रेस नेता को अपनी ही कॉन्ग्रेसी सरकार पर भरोसा नहीं: CBI जाँच की माँग, कर्नाटक पुलिस पर दबाव में काम करने का आरोप

फयाज के हाथों मारी गई नेहा के पिता और कॉन्ग्रेस पार्षद निरंजन हिरेमठ ने इस मामले अब सीबीआई जाँच की माँग की है। उन्होंने इस मामले में कर्नाटक पुलिस की कार्रवाई पर असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि हुबली कमिश्नर इस मामले में राज्य सरकार को गलत रिपोर्ट दे रही हैं।

नेहा के पिता निरंजन हिरेमठ ने कहा, ”नेहा की हत्या के मामले में मैंने 8 लोगों के नाम स्पष्ट रूप से दिए हैं। उन्होंने एक भी व्यक्ति को नहीं गिरफ्तार किया है। इसलिए मेरा भरोसा अब जाँच से उठता जा रहा है। मामले को भटकाने की कोशिश हो रही है। अगर उनसे यह जाँच नहीं हो रही तो जाँच को सीबीआई को सौंप दिया जाना चाहिए। कमिश्नर खुद एक महिला हैं तब भी वह एक युवती को हत्या को गंभीरता से नहीं ले रहीं। वह किसी दबाव में काम कर रही हैं। कमिश्नर का ट्रांसफर करके जाँच सीबीआई को दी जानी चाहिए।”

निरंजन हिरेमठ ने नेहा की हत्या के मामले में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और गृह मंत्री जी परमेश्वरा पर भी गलत बयान देने के आरोप लगाए। उनके अनुसार, हुबली की कमिश्नर जाँच की गलत रिपोर्ट दे रही हैं, जिस कारण कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेता गलत बयानी कर रहे हैं। उन्होंने माँग की कि हुबली की कमिश्नर को हटाया। उन्होंने कहा कि उनका विश्वास टूट गया है, वह अपनी ही पार्टियों के नेताओं से इस मामले में तेज जाँच और कार्रवाई की माँग करते हैं।

इससे पहले रविवार (21 अप्रैल, 2024) शाम को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केन्द्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी भी निरंजन से मिलने पहुँचे। उन्होंने भी फयाज के हाथों नेहा की हत्या में सीबीआई जाँच की माँग की और कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री जाँच को डिरेल करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण के चलते ऐसा हो रहा है। नड्डा ने कहा कि अगर राज्य की पुलिस से जाँच नहीं हो पा रही तो मामला सीबीआई को सौंप दिया जाए।

गौरतलब है कि कर्नाटक के हुबली में गुरुवार (18 अप्रैल, 2024) को फयाज नाम के एक युवक ने नेहा नाम की हिन्दू युवती की चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी। वह नेहा का पहले इन्तजार कर रहा था और जब वह कॉलेज से बाहर आई तो उसने चाकुओं से हमला कर दिया। नेहा की इस हमले में मौत हो गई। फयाज को इस हमले के बाद पकड़ लिया गया था।

बताया जा रहा है कि फयाज युवती पर उसके साथ रिलेशनशिप में आने का दबाव बना रहा था और लड़की ने इससे इनकार कर दिया। ऐसे में फयाज उसका महीनों पीछा करता था। घटना वाले दिन जब नेहा उसके सामने आई तो उसने उसके गले पर वार किए, जो बताते हैं कि उसकी मंशा नेहा को जान से ही मारने की थी।

पुलिस की जाँच में भी सामने आया है कि फयाज अपने दोस्तों से बोलते हुए फिरता था कि जिस लड़की ने उसका ऑफर ठुकराया है वो उसे खत्म कर देगा। मामले के बारे में बताते हैं सिटी पुलिस कमिशनर रेणुका एस सुकुमार ने कहा वे दोनों (पिछले साल तक) बीसीए साथ में पढ़ रहे थे। लेकिन, बीसीए के बाद नेहा ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और फयाज ने छोड़ दी।

‘माँ-बहनों का सोना लेकर घुसपैठियों में बाँटना चाहती है कॉन्ग्रेस, अर्बन नक्सलियों के चंगुल में पार्टी’: PM मोदी ने याद दिलाया ‘देश की संपत्ति पर पहला हक़ मुस्लिमों का’ वाला बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (21 अप्रैल 2024) को राजस्थान के बांसवाड़ा में जनसभा को संबोधित किया और कॉन्ग्रेस पर तीखा हमला बोला। पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस पर अब वामपंथियों और अर्बन नक्सलियों का कब्जा हो चुका है। वो उसके चंगुल में फंस गई है। पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस पर माओवाद अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस अब माँ-बहनों का सोना लेकर ‘घुसपैठियों को बाँटना’ चाहती है। पीएम ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने ये बातें अपनी घोषणापत्र में की है। प्रधानमंत्री मोदी ने कॉन्ग्रेस पार्टी पर आदिवासियों के कल्याण की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया।

बांसवाड़ा में भाजपा प्रत्याशी महेंद्रजीत मालवीय के समर्थन में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “कॉन्ग्रेस अब वामपंथियों और अर्बन नक्सलियों के चंगुल में फँस गई है। कॉन्ग्रेस ने अपने मैनिफेस्टो में जो कहा है वह गंभीर और चिंताजनक है। यह माओवाद की सोच को धरती पर उतारने की कोशिश है। उन्होंने कहा है कि अगर कॉन्ग्रेस की सरकार बनी तो हर एक की संपत्ति का सर्वे किया जाएगा। हर व्यक्ति की जाँच की जाएगी। हमारी बहनों के पास कितना सोना है, इसकी जाँच की जाएगी। सरकारी कर्मचारियों के पास कितना पैसा है इसकी जाँच की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि हमारी बहनों के पास जो गोल्ड है उसे समान रूप से वितरित किया जाएगा। क्या सरकार को आपकी संपत्ति लेने का अधिकार है? ‘मंगलसूत्र’ सोने की कीमत का मुद्दा नहीं है, उनके जीवन के सपनों से यह जुड़ा हुआ है।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “वो (कॉन्ग्रेस) सबकुछ ले लेंगे और सबको विपतरित कर देंगे। और पहले जब उनकी सरकार (मनमोहन सिंह सरकार) थी तो कहा था कि देश की संपत्ति पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। इसका मतलब ये संपत्ति इक्ट्ठा करके किसको बाटेंगे? जिनके ज्यादा बच्चे होंगे उनको बांटेंगे। घुसपैठियों को बाँटेगें…. क्या आपके कमाई का पैसा घुसपैठियों को दिए जाएँगे। आपको मंजूर है ये…ये कॉन्ग्रेस का मेनिफेस्टो कह रहा है। माताओं-बहने के सोने का हिसाब लेंगे और फिर उस संपत्ति को बाँट देंगे। और उनको बांटेंगे, जिनको मनमोहन सिंह की सरकार ने कहा था कि संपत्ति पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। भाइयों बहनों ये अर्बन नक्सल की सोच, मेरी माँ-बहनों ये आपका मंगलसूत्र भी बचने नहीं देंगे, ये यहाँ तक जाएँगे।”

पीएम मोदी ने रैली के दौरान सवालिया लहजे में पूछा कि ‘आदिवासी समाज में क्षमता नहीं थी क्या? .. जरा सोचिए कॉन्ग्रेस की क्या मानसिकता है। 2014 में आपने इस सेवक को आर्शीवाद दिया। आज इस देश की पहली नागरिक, देश की राष्ट्रपति, आदिवासी समाज की एक बेटी हैं। यही असली भागीदारी है।” पीएम मोदी ने कहा कि यही बाबा साहब (आंबेडकर) की ‘स्पिरिट’ है।

उन्होंने आगे कहा, “पूरी दुनिया ने इसकी तारीफ की लेकिन कॉन्ग्रेस और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ का विरोध किया। इससे पहले उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने हमेशा दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों को डराया।”

पीएम मोदी ने कहा, ”आज भी ये कभी लोकतंत्र, संविधान, आरक्षण को लेकर भाँति-भाँति का झूठ फैला रहे है। भांति-भांति का डर दिखा रहे है लेकिन कॉन्ग्रेस को पता नहीं है यह भारत हर प्रकार से डर से बाहर निकल चुका है और इसलिये इनका झूठ नहीं चल पा रहा है।” PM ने कहा, ”आज देखिये देशभर में जिन-जिन राज्यों में आदिवासी आबादी अधिक है वहां कॉन्ग्रेस या तो सत्ता से बाहर है या फिर तीसरे चौथे नंबर पर है। कॉन्ग्रेस के विरूद्ध यह आदिवासी समाज का आक्रोश है। इस आक्रोश के ठोस कारण हैं।”

इमरान खान की ‘जादूगरनी’ बीवी को फ़ौज के मुखिया ने फँसाया? बोले पूर्व PM – ये जंगलराज, छोड़ूँगा नहीं

जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने देश के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर पर अपनी बीवी बुशरा बीबी की कैद के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार होने का आरोप लगाया है। पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान ने पाक आर्मी चीफ पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अगर उनकी बीवी को कुछ होता है, तो वो मुनीर को छोड़ेंगे नहीं।

अदियाला जेल में पत्रकारों से बातचीत में इमरान खान ने पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर पर अपनी बीवी की कैद के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार होने का आरोप लगाते हुए अनुचित सजा और धमकियों का दावा किया।

इमरान खान के आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट पर एक लंबी पोस्ट शेयर की गई है, जिसमें लिखा है, ”मेरी बीवी को दी गई सजा में जनरल आसिम मुनीर सीधे तौर पर शामिल हैं।” उन्होंने दावा किया कि बुशरा को दोषी ठहराने वाले न्यायाधीश ने कहा है कि उन्हें यह फैसला देने के लिए मजबूर किया गया था।

इमरान खान ने धमकी देते हुए कहा, “अगर मेरी बीवी को कुछ हुआ तो मैं असीम मुनीर को नहीं छोड़ूँगा, जब तक मैं जिंदा हूँ मैं असीम मुनीर को नहीं छोड़ूँगा। मैं उनके असंवैधानिक और गैरकानूनी कदमों का पर्दाफाश करूँगा।”

खान ने कहा कि देश में जंगल का कानून है और सब कुछ “जंगल के राजा” द्वारा किया जा रहा है। जंगल के राजा का मतलब सेना प्रमुख मुनीर से है। उन्होंने आरोप लगाया, ”जंगल का राजा चाहे तो नवाज शरीफ के सारे मामले माफ कर दिए जाते हैं और जब वह चाहे तो हमें पाँच दिन में तीन मामलों में सजा दे दी जाती है।”

बता दें कि 49 वर्षीय बुशरा बीबी को भ्रष्टाचार के मामले के साथ-साथ 71 वर्षीय खान के साथ अवैध विवाह के मामले में भी दोषी ठहराया गया है। वर्तमान में उन्हें इस्लामाबाद के उपनगरीय इलाके में उनके ही बानी गाला स्थित घर में हिरासत में रखा गया है, जबकि इमरान खान जेल में बंद हैं।

गौरतलब है कि बुशरा बीबी को पाकिस्तान में जादूगरनी कहा जाता है। आरोप ये भी लगते हैं कि इमरान खान को प्रधानमंत्री पद तक पहुँचाने में उन्होंने जादू-टोने का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में ऐसी अफवाह है कि बुशरा बीबी के पास रहस्यमयी शक्तियाँ हैं।

‘मुस्लिमों के लिए आरक्षण माँग रही हैं माधवी लता’: News24 ने चलाई खबर, BJP प्रत्याशी ने खोली पोल तो डिलीट कर माँगी माफ़ी

जहाँ एक तरफ लोकसभा चुनाव 2024 का पहला चरण संपन्न हो चुका है और भाजपा ज़ोर-शोर से ‘400 पार’ के नारे को हकीकत में बदलने में जुटी हुई है, मीडिया में भी फर्जी खबरों का दौर शुरू हो गया है। अब इसका शिकार बनी हैं हैदराबाद से AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ भाजपा द्वारा उतारी गई उम्मीदवार कॉमपेल्ला माधवी लता। News24 ने उनके नाम से फर्जी खबर भी चला दिया। माधवी लता हैदराबाद में सक्रियता से चुनाव प्रचार कर रही हैं और राष्ट्रीय मीडिया में भी उन्हें खूब कवरेज मिल रही है।

News24 ने माधवी लता की तस्वीर लगा कर उनके नाम पर बयान चलाया, “अरब, सैयद और शिया मुस्लिमों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलता है। हम तो सभी मुस्लिमों के लिए रिजर्वेशन माँग रहे हैं।” इस ट्वीट को लाखों लोग देख चुके थे और हजारों लोगों ने इस पर रिप्लाई किया था। हालाँकि, माधवी लता ने इसका खंडन किया, तब जाकर सच्चाई सामने आई और News24 की पोल खुली। उनके आधिकारिक ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से बताया गया कि भाजपा प्रत्याशी ने किसी भी मंच से ऐसा कुछ नहीं कहा है जो इस मीडिया चैनल ने ट्वीट किया है।

माधवी लता के सोशल मीडिया हैंडल से अपील की गई, “हम लोगों से अनुरोध करते है कि ऐसी अफवाहों पर ध्यान ना दें। हम ऐसी किसी भी टिप्पणी से इनकार करते हैं। मीडिया चैनलों को अफवाहें फैलाते देखना निराशाजनक है।” इस खंडन के सामने आते ही News24 की भी अक्ल ठिकाने आई और उसने ट्वीट को डिलीट कर दिया। उसने माफ़ी माँगते हुए लिखा, “महोदया, भूल से हुए इस ट्वीट को डिलीट कर दिया गया है। इस मानवीय गलती के लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं।”

यानी, मानवीय भूल की आड़ में News24 ने अपनी इज्जत बचाने की कोशिश की। बता दें कि इस चैनल का स्वामित्व ‘B.A.G फिल्म्स एन्ड मीडिया लिमिटेड’ के पास है, जिसकी चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर अनुराधा प्रसाद हैं। अनुराधा प्रसाद के पति राजीव शुक्ला ‘कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी (CWC)’ के सदस्य होने के अलावा पार्टी के राज्यसभा सांसद भी हैं। वो मनमोहन सिंह की UPA सरकार में मंत्री रहे हैं। राजीव शुक्ला BCCI के उपाध्यक्ष भी हैं, पहले वो पत्रकार हुआ करते थे।

कॉन्ग्रेस उम्मीदवार 3 अदद प्रस्तावक भी नहीं जुटा पाए, रद्द हुआ नामांकन: सपना BJP को सत्ता से बाहर करने का, ग्राउंड पर फिसड्डी

गुजरात में बीजेपी के सामने कॉन्ग्रेस है, साथ में आम आदमी पार्टी भी। एक तरफ बीजेपी 400+ के लक्ष्य के साथ लोकसभा चुनाव लड़ रही है, तो उसे रोकने की ख्वाहिश पाले कॉन्ग्रेस के प्रत्याशी नामांकन के लिए प्रस्तावक तक नहीं जुुटा पा रहे। गुजरात के सूरत में कुछ ऐसी ही बात सामने आई है कि अब कॉन्ग्रेस की जगहंसाई हो रही है। यही नहीं, कॉन्ग्रेस प्रत्याशी नीलेश कुंभाणी का नामांकन भी खारिज हो गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सूरत लोकसभा सीट से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी नीलेश कुंभाणी का फार्म चुनाव आयोग ने लोकप्रतिनिधित्‍व अधिनियम – 1951 के तहत रद्द कर दिया। भाजपा उम्‍मीदवार मुकेश दलाल के वकील की ओर से कॉन्ग्रेस प्रत्‍याशी के नामांकन में बताये गए तीन प्रस्‍तावकों के हस्‍ताक्षर फर्जी होने की शिकायत की गई थी। दरअसल, सूरत में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी नीलेश कुंभाणी के लिए उनके नजदीकी रिश्तेदारों का उनके प्रस्तावक होने का दावा किया गया था, लेकिन कथित प्रस्तावकों ने कहा कि उन्होंने सूरत के कॉन्ग्रेस कैंडिडेट नीलेश कुंभाणी के लिए प्रस्तावक की भूमिका निभाई ही नहीं है।

इसके बाद बीजेपी प्रत्याशी ने कॉन्ग्रेस प्रत्याशी नीलेश कुंभाणी के प्रस्तावकों के फर्जी होने की शिकायत चुनाव आयोग में दर्ज कराई। हालाँकि चुनाव आयोग ने कॉन्ग्रेस प्रत्याशी को 24 घंटे का समय दिया था कि वो अपने प्रस्तावकों को पेश करें, लेकिन कॉन्ग्रेस प्रत्याशी नीलेश कुंभाणी ऐसा कर पाने में विफल रहे, जिसके बाद अब चुनाव आयोग ने सूरत के कॉन्ग्रेस प्रत्याशी नीलेश कुंभाणी का नामांकन खारिज कर दिया है।

सूरत जिले के पीठासीन अधिकारी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि कॉन्ग्रेस उम्‍मीदवार नीलेश कुंभाणी के नामांकन पत्र में बताए गए तीनों प्रस्‍तावक रमेश भाई पोलरा, जगदीश भाई सावलिया और ध्रुविन धीरूभाई धामेलिया ने उनके समक्ष हाजिर होकर शपथ पत्र देकर बताया है कि नामांकन में अंकित हस्‍ताक्षर उनके नहीं है।

कॉन्ग्रेस ने सूरत कलेक्‍टर व पुलिस आयुक्‍त पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए हाई कोर्ट अपील करने की बात कही है। कॉन्ग्रेस प्रत्‍याशी के वकील बी एम माँगुकिया का आरोप है कि तीनों प्रस्‍तावक उनके संपर्क में नहीं हैं, उनके अपहरण की भी आशंका कॉन्ग्रेस ने जताई है। वकील मांगूकिया का आरोप है कि कॉन्ग्रेस की ओर जिला के पीठासीन अधिकारी और पुलिस आयुक्‍त को इसकी शिकायत की गई लेकिन उस पर कोई जाँच करने की जगह कॉन्ग्रेस प्रत्‍याशी का नामांकन ही रद्द कर दिया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने नीलेश कुंभाणी को मिल रहे जनसमर्थन से घबराकर उनका नामांकन ही खारिज करा दिया है।

क्‍या कहता है लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम-1951?

लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम-1951 की धारा 36 (2) के अनुसार पीठासीन अधिकारी प्रत्‍याशी के नामांकन पत्र को लेकर उठाई गई सभी तरह की आपत्ति की जाँच करेगा। तथा 36(2) ग के अनुसार नामांकन पत्र की प्रमाणिकता और प्रत्‍याशी एवं प्रस्‍तावक के हस्‍ताक्षर खामीयुक्‍त अथवा फर्जी पाए जाते हैं तो नामांकन पत्र को रद्द कर दिया जाता है।