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2023-24 में ₹3.5 लाख करोड़ कम हुआ भारत का व्यापार घाटा, ₹45,000 करोड़ बढ़ा इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात: जानें कैसे मोदी सरकार में बदला विदेश व्यापार का लेखा-जोखा

भारत की विदेशों पर निर्भरता मोदी सरकार में लगातार कम हो रही है। विदेशों से भारत में आने वाला सामान लगातार कम हो रहा है जबकि भारत का निर्यात इसी दौरान बढ़ रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और दवाई जैसे क्षेत्रों में भारत अपनी धमक दुनिया में दर्ज करवा रहा है। इन क्षेत्रों में भारत चीन को अब चुनौती दे रहा है। एप्पल जैसी बड़ी कम्पनियाँ अब भारत से बड़े स्तर पर निर्यात कर रही हैं। दूसरे देशों से निर्भरता घटाने के साथ ही भारत वैश्विक दबाव का सामना भी बखूबी कर रहा है।

हाल ही में भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 के आयात-निर्यात के आँकड़े जारी किए हैं। इनसे पता चलता है कि भारत की विदेशों पर निर्भरता घटते जा रही है। भारत विदेशों से कम सामान मँगा रहा है जबकि विदेशों में अधिक सामान भेज रहा है। इसी के साथ भारत का आईटी क्षेत्र भी मजबूत हो रहा और विदेशों में भारत के सेवा क्षेत्र के निर्यात भी बढ़ रहे हैं। भारत ने आंतरिक जरूरतों का ध्यान रखते हुए कई सामानों के निर्यात पर रोक भी लगाई और जब उसके दोस्तों को आवश्यकता हुई तो उसने निर्यात की अनुमति भी दी।

विदेशी व्यापार घाटा ₹3.5 लाख करोड़ घटा

यदि किसी देश का विदेशों से होने वाला आयात उसके निर्यात से अधिक है तो इसके बीच के अंतर को व्यापार घाटा कहते हैं। यदि किसी देश का निर्यात उसके आयात से अधिक होता है तो वह व्यापार अधिभार (ट्रेड सरप्लस) कहा जाता है। भारत के सम्बन्ध में हमेशा आयात, निर्यात से अधिक रहता है क्योंकि हम ईंधन के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हैं। हालाँकि, भारत ने इन सब चुनौतियों से लड़ते हुए 2023-24 में अपना व्यापार घाटा घटाने में सफलता पाई है।

भारत व्यापार घाटा

वित्त वर्ष 2023-24 में भारत का व्यापार घाटा 78.12 बिलियन डॉलर (लगभग ₹6.40 लाख करोड़) रहा। इससे पहले 2022-23 में यह घाटा 121.6 बिलियन डॉलर (लगभग ₹10 लाख करोड़) रहा था। यानी बीते वर्ष के मुकाबले में इसमें 43.48 बिलियन डॉलर (लगभग ₹3.5 लाख करोड़) की कमी आई है। यानी देश का ₹3.5 लाख करोड़ देश से बाहर जाने से बचा। विदेशी व्यापार घाटे के कारण देश के खजाने पर जोर पड़ता है, इस बार यह कम हुआ है।

2023-24 के दौरान देश के भीतर विदेशों से आने वाले सामानों में 2022-23 के मुकाबले 38 बिलियन डॉलर (लगभग ₹3.1 लाख करोड़) की कमी आई है। इसका अर्थ है कि हम अपनी जरूरत का सामन देश के भीतर ही बना रहे हैं और विदेशों से कम मँगा रहे हैं। दूसरी तरफ सेवाओं के आयात में 5 बिलियन डॉलर (लगभग ₹40,000 करोड़) की कमी आई है। सेवाओं के आयात में कमी का अर्थ है कि भारत तकनीकी रूप से भी आत्मनिर्भर हो रहा है। सेवा क्षेत्र के अधिकांश आयात-निर्यात आईटी और फाइनेंस क्षेत्र से सम्बंधित होते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स के आयात को मिल रही नई रफ़्तार

मोदी सरकार में सबसे बड़ी छलाँग इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में भारत ने लगाई है। इन इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात भी अब बड़े स्तर पर हो रहा है। भारत आज से कुछ वर्ष अपने इलेक्ट्रॉनिक सामानों के लिए चीन पर निर्भर था जबकि अब वह उन्हें दूसरे देशों को बेंच रहा है। रिपोर्ट बताती है कि वित्त वर्ष 2023-24 में भारत ने 29.12 बिलियन डॉलर (लगभग ₹2.4 लाख करोड़) के इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात किया है। यह 2022-23 में 23.55 बिलियन डॉलर (₹1.9 लाख करोड़) था। इसमें एक वर्ष में ही 23% से अधिक की वृद्धि हुई है।

इलेक्ट्रॉनिक्स के निर्माण को देश में नई रफ़्तार मोदी सरकार में मिली है। एक रिपोर्ट के अनुसार, केवल एप्पल कम्पनी ने ही 2023-24 के दौरान भारत में 14 बिलियन डॉलर से अधिक का निर्माण किया। एप्पल ने भारत से 2023-24 में 12 बिलियन डॉलर (₹1.2 लाख करोड़) से अधिक का निर्यात किया है।

भारत से 2023-24 के दौरान 16 बिलियन डॉलर (₹1.3 लाख करोड़) से अधिक के स्मार्टफ़ोन निर्यात किए गए हैं। इस सफलता में बड़ा हिस्सा मोदी सरकार द्वारा लाई गई PLI स्कीम का है। इसके अंतर्गत भारत में निर्माण करने वाली कम्पनियों को सरकार सब्सिडी देती है।

दवा के निर्यात में भी तेजी

इलेक्ट्रॉनिक्स के अलावा भारत ने दवाइयों के निर्यात में भी बड़ी सफलता हासिल की है। भारत ने वर्ष 2023-24 में 27.85 बिलियन डॉलर (₹2.2 लाख करोड़) से अधिक की दवाओं का निर्यात किया है। दवाओं के क्षेत्र में विश्व के कई देश भारत पर निर्भर हैं। सस्ती दरों में अच्छी गुणवत्ता की दवाई बनाने के कारण भारत विश्वास के दवाखाने के नाम से जाना गया है। यह 2013-14 दौरान मात्र ₹90,483 करोड़ के आसपास था।

कई वस्तुओं के मामले में कम हुई विदेशों पर निर्भरता

2023-24 के दौरान भारत की कई वस्तुओं के मामले में निर्भरता विदेशों पर कम हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 के दौरान खाद के लिए विदेशों पर निर्भरता घटी है। 2023-24 में भारत को विदेशों से 40% कम खाद और रसायन मँगाने पड़े।

भारत खाद के क्षेत्र में अब बड़े स्टार पर आत्मनिर्भर हो गया है। खाने के तेल के आयात में भी 28% की कमी आई है। कोयले के आयात में भी 21% की कमी आई है। इसके उलट भारत से विदेशों को जाने वाले देरी उत्पादों में 12.3% की बढ़त, फल और सब्जियों में 13% की बढ़त और मसालों के निर्यात में 12.3% की बढ़त हुई।

(1 डॉलर = ₹82)

‘लाल आतंक’ पर छत्तीसगढ़ के प्रहार से छलनी हुई कॉन्ग्रेस, जवानों का रक्त भूल नक्सलियों के एनकाउंटर को बता रही ‘फेक’: सर्जिकल स्ट्राइक पर भी माँगा था सबूत

भारत दशकों से ‘लाल आतंक’ से त्रस्त रहा है। बिहार-झारखंड से लेकर छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र तक, नक्सलियों ने लगातार खून बहाए। बिहार में तो एक दौर ऐसा था जब लोगों को रात-रात भर जाग कर हथियारों के साथ घर-परिवार की सुरक्षा करनी शुरू कर दी थी। छत्तीसगढ़ में तो नक्सलियों ने कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का ही खात्मा कर दिया, नरसंहार के जरिए। अब उसी छत्तीगसढ़ में सुरक्षा बलों ने 29 नक्सलियों को मार गिराया है। नक्सलियों के खिलाफ ये सबसे बड़े ऑपरेशन्स में से एक है।

आपको ये जान कर आश्चर्य होगा कि मृतकों में एक दर्जन से भी अधिक महिलाएँ हैं, जो खतरनाक हथियारों के साथ पुरुष नक्सलियों की सुरक्षा में आगे रहती थीं। राज्य पुलिस के ‘डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG)’ और ‘बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स (BSF)’ ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। एक तरह से देखा जाए तो ये पिछले एक दशक का सबसे बड़ा ऑपरेशन है नक्सलियों के खिलाफ, क्योंकि अभी भी तलाशी अभियान जारी है। इससे पहले 2016 में 30 और 2021 में 25 नक्सली मारे गए थे।

लेकिन, इस बार खास बात ये है कि सुरक्षा बलों की तरफ से कोई क्षति नहीं हुई है। ये ऑपरेशन काँकेड़ जिले के छोटेबेठिया थाना क्षेत्र अंतर्गत चलाया गया। AK-47 से लेकर राइफल और गोला-बारूद के अलावा कई हथियार बरामद किए गए। बस्तर के आईजी सुंदर राज P ने स्पष्ट कर दिया है कि कुल 30 हथियार बरामद हुए हैं, नक्सलियों के साहित्य भी बड़ी मात्रा में मिले हैं। जो 2 बड़े नक्सली मारे गए हैं, वो हैं – शंकर राव और ललिता। बस्तर में इस साल 79 नक्सलियों को ढेर किया जा चुका है।

पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि मारे गए लोगों में सभी नक्सली हैं, किसी के ग्रामीण होने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि आरोप लगाने वालों का काम ही यही है। उन्होंने बताया कि नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई निर्णायक मोड़ पर है, नक्सलियों का सफाया जारी रहेगा और आगे भी सुरक्षा बल बढ़त बनाए रहेंगे। पुलिस का मानना है कि वो सही दिशा में जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इसे बड़ी सफलता करार देते हुए कहा है कि जबसे नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं तब से नक्सलवाद-आतंकवाद में कमी आई है और छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार बनने के बाद नक्सल विरोधी अभियान में गति आई है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पिछले 3 महीने में ही 80 से ज्यादा नक्सली ढेर हुए हैं, 125 से ज्यादा गिरफ्तार हुए हैं और 150 से अधिक ने आत्म-समर्पण किया है। उन्होंने नक्सलवाद को उखाड़ फेंकने का प्रण भी दोहराया। जहाँ एक तरफ भाजपा नक्सलवाद पर प्रहार की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस पार्टी ये साबित करने में लगी है कि ये एक फर्जी मुठभेड़ था। वैसे ये कॉन्ग्रेस की पुरानी फितरत है। जब वो पाकिस्तान में भारत की सर्जिकल या एयर स्ट्राइक पर देश की सेना के खिलाफ जाकर बयान दे सकते हैं तो फिर नक्सलियों का समर्थन कौन सी बड़ी बात है उनके लिए।

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, जिन्हें हाल के चुनाव में करारी हार मिली है, उन्होंने काँकेड़ मुठभेड़ पर सवाल उठाते हुए कहा है कि भाजपा के शासनकाल में फर्जी एनकाउंटर होते हैं। उन्होंने अपनी सरकार में नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक कदम उठाए जाने का दावा करते हुए भाजपा सरकार पर जनजातीय समाज के लोगों की फर्जी गिरफ़्तारी का आरोप भी मढ़ दिया। उन्होंने दावा किया कि कवर्धा में ही लोगों को धमकाया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने पूर्ववर्ती के आरोपों का कड़ा जवाब दिया है।

उन्होंने कहा सलाह दी कि हर चीज पर सवाल नहीं खड़ा करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर ये घटना किसी भी तरह से फर्जी है तो भूपेश बघेल ये प्रमाणित करें। वहीं गृह मंत्री विजय शर्मा ने चुनौती दी कि भूपेश बघेल इस मुठभेड़ को फर्जी साबित करें, या फिर जवानों से माफ़ी माँगें। असल में भूपेश बघेल एक तो कॉन्ग्रेस नेता हैं उपर से हाल ही में उनकी हार हुई है, शायद इसी कारण वो उलूल-जलूल बयान दे रहे हैं। सुरक्षा बलों ने अभी 17 नक्सली कमांडरों की सूची बनाई है जिनके खिलाफ तलाशी अभियान तेज़ की जाएगी।

पिछले 15 दिनों में ही छत्तीसगढ़ में 42 नक्सली मारे जा चुके हैं। अब सामने आ रहा है कि ‘ऑपरेशन प्रहार’ चलाया जाएगा, जिसके जरिए उन नक्सलियों को निशाना बनाया जाएगा जो युवकों का ब्रेनवॉश कर उन्हें हथियार उठाने के लिए उकसाते हैं। मांडवी हिड़मा इस 17 सदस्यीय सूची में सबसे ऊपर है, जिसके सुकमा के जंगलों में छिपे होने की आशंका है। इसी तरह मुपल्ला लक्ष्मणा राव माड़ के घने जंगलों में छिपा हुआ है। 51 वर्षीय हिड़मा AK-47 चलाने में दक्ष है।

नक्सलियों की धर-पकड़ और उन्हें ढेर करने के लिए हमारे जवाब अब आधुनिक तकनीक का भी सहारा ले रहे हैं। उन्हें जंगलों में ख़ाक छाननी होती है, अपनी जान खतरे में डालनी होती है, परिवार से दूर रहना पड़ता है – तब जाकर नक्सल वारदातें कम होती हैं और आम लोग चैन से सोते हैं। लेकिन, भूपेश बघेल जैसे नेता सुरक्षा बलों पर ही सवाल उठाते हैं। अब जब विरोध हो रहा है तो भूपेश बघेल अपने बयान से पलट गए और जवानों को बधाई देने लगे।

NIA जज को माँगनी पड़ी माफी, क्योंकि नमाज के लिए नहीं रोकी कोर्ट की कार्यवाही: मुस्लिम वकील पहुँच गया HC, जस्टिस शमीम अहमद ने बताया ‘धार्मिक भेदभाव’

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने NIA के विशेष न्यायाधीश वीएस त्रिपाठी को एक मुस्लिम वकील मोहम्मद इदरीस पर ‘टिप्पणी’ करने को लेकर समन जारी किया। इसके बाद जज त्रिपाठी ने हाई कोर्ट के समक्ष 15 अप्रैल 2024 को बिना शर्त माफी माँग ली। दरअसल, जज त्रिपाठी ने पाया कि इदरसी नमाज में भाग लेने के लिए बार-बार अदालत से बाहर जाते थे। इसलिए उन्होंने आरोपितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक न्याय मित्र नियुक्त कर दिया था।

NIA के विशेष जज के इस टिप्पणी के बाद मोहम्मद इदरीस ने हाई कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट के जस्टिस शमीम अहमद ने इसे धार्मिक आधार पर भेदभाव बताया और जज त्रिपाठी को समन भेज दिया। जज त्रिपाठी ने हाई कोर्ट में पहुँचकर जज के समाने बिना शर्त के माफी माँग ली।

यह घटना दो मुस्लिम मौलवियों- मोहम्मद उमर गौतम और मुफ्ती काजी जहाँगीर आलम कासमी और अन्य के खिलाफ आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान हुआ। इन दोनों पर उत्तर प्रदेश के आतंकवाद विरोधी दस्ते (UP ATS) द्वारा जबरन धर्म परिवर्तन का आरोप लगाया गया है। इनकी सुनवाई के दौरान यह घटना घटी।

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायाधीश NIA/ATS, लखनऊ) विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने जनवरी में अदालत की सहायता के लिए अतिरिक्त वकील के रूप में एमेकस क्यूरी को नियुक्त किया था। दरअसल, कुछ मुस्लिम वकीलों के शुक्रवार (जुमे) की नमाज में जाने के लिए कोर्ट को कुछ समय के लिए स्थगित करने का अनुरोध किया था।

ट्रायल जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने मुस्लिम वकीलों के इस प्रार्थना को ठुकरा दिया था और आदेश दिया था कि जब भी मुस्लिम वकील नमाज में शामिल होने के लिए जाएँगे तो न्याय मित्र अभियुक्तों का कोर्ट में प्रतिनिधित्व करेंगे। इसे मुस्लिम वकीलों ने अपने साथ धार्मिक भेदभाव बताया और इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुँच गए।

इस मामले पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश शमीम अहमद ने निचली अदालत द्वारा पारित आदेशों पर पिछले महीने रोक लगा दी थी। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद ट्रायल कोर्ट ने मुस्लिम वकीलों को आरोपियों का प्रतिनिधित्व करने की अनुमति दी थी, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के आवेदन पर फैसला नहीं किया था।

न्यायाधीश शमीम अहमद ने 3 अप्रैल 2024 के आदेश में ट्रायल कोर्ट के जज त्रिपाठी के आचरण पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि न्यायाधीश स्थगन आदेश की गंभीरता को समझने में विफल रहे और बहुत ही मनमाने ढंग से आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि वकीलों की गैर-मौजूदगी में ट्रायल हुआ, क्योंकि वे एक निश्चित धर्म से संबंधित हैं।

हाई कोर्ट ने कहा, “यह धर्म के आधार पर ट्रायल कोर्ट की ओर से स्पष्ट भेदभाव को दर्शाता है, जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 15 में निहित मौलिक अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है।” न्यायालय ने यह भी कहा कि एक न्यायाधीश द्वारा व्यक्तिगत आचरण में लिप्त होकर कदाचार करना, उनकी न्यायिक अखंडता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

हाई कोर्ट ने आगे कहा, “यह न्यायिक कदाचार को दर्शाता है, जो एक कार्यात्मक न्यायपालिका के लिए आवश्यक चीज़ों के मूल को तोड़ देता है, जिसके तहत नागरिक मानते हैं कि उनके न्यायाधीश निष्पक्ष हैं। न्यायपालिका लोगों के विश्वास और भरोसे के बिना अस्तित्व में नहीं रह सकती। इसलिए, न्यायाधीशों को कानूनी और नैतिक मानकों के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।”

इसके बाद NIA के जज त्रिपाठी सोमवार (15 अप्रैल 2024) को न्यायाधीश शमीम अहमद के सामने पेश हुए और बिना शर्त माफी माँगी। उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने गलतफहमी के तहत आदेश पारित किया है और भविष्य में सतर्क रहेंगे। उनके वकील ने व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने के लिए कुछ समय माँगा, जिसके बाद अदालत ने उन्हें दो दिन का समय दिया है।

इस मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल 2024 को होगी। याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता मोहम्मद आमिर नकवी, जिया उल कय्यूम, अभिषेक सिंह और अजीत प्रताप सिंह ने किया। न्यायाधीश विवेकानन्द शरण त्रिपाठी का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने किया। वहीं, सरकार की ओर से अधिवक्ता शिवनाथ तिलहरी ने पैरवी की।

‘पूजा-पाठ पाखंडी करते हैं, इस देश में हजारों राम मंदिर’: रामनवमी पर सपा सांसद रामगोपाल यादव ने उगला जहर, लोगों ने बताया ‘रामद्रोही’

देश और दुनिया भर में आज बुधवार (17 अप्रैल 2024) को हिन्दू समाज रामनवमी का पर्व श्रद्धा एवं भक्ति भाव से मना रहा है। अयोध्या में रामभक्तों की भारी भीड़ उमड़ी है। इस मौके पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने राम मंदिर पर आपत्तिजनक बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि पूजा-पाठ पाखंडी लोग करते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि रामजन्मभूमि जैसे हजारों मंदिर हैं। उनके इस बयान की काफी आलोचना हो रही है।

रामगोपाल यादव बुधवार (17 अप्रैल 2024) को समाचार एजेंसी ANI से बात कर रहे थे। पत्रकार ने अयोध्या में मंदिर निर्माण के बाद प्रथम रामनवमी पर्व पर देश भर में हर्षोल्लास को लेकर सवाल किया। जवाब में रामगोपाल ने कहा, “रामनवमी तो हमेशा बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती रही है। जो कुछ लोगों ने इसे पेटेंट करा लिया है, उनकी बपौती नहीं है रामनवमी। करोड़ों लोग हजारों वर्षों से इसे मनाते आ रहे हैं।”

अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर पर भी सपा नेता रामगोपाल यादव ने आपत्तिजनक बयान दिया है। उन्होंने कहा, “एक राम मंदिर नहीं, हजारों राम मंदिर इस देश में हैं। इसमें (राम मंदिर में) तो इन्होंने (मोदी सरकार ने) अधूरा प्राण प्रतिष्ठा करवाया है। भगवान राम उन्हें दंड दें।” रामगोपाल ने मंदिर निर्माण के दौरान कुछ साधु-संतों द्वारा उठाई गई आपत्तियों का भी जिक्र किया।

पत्रकार ने रामगोपाल यादव से सवाल किया कि क्या वो रामनवमी पर कोई पूजा-पाठ कर रहे हैं। इसके जवाब में उन्होंने कहा, “पहले होती रही हो, लेकिन मैंने तो कभी पूजा नहीं किया। मैं दिखावा नहीं करता। मैं पाखंडी नहीं हूँ। पाखंडी लोग ये सब करते हैं।” रामगोपाल ने कहा कि वे भगवान का नाम लेते हैं। उन्होंने खुद को असली भक्त बताया है।

सोशल मीडिया पर समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव के इस बयान की खूब आलोचना हो रही है। दीपक शर्मा नाम के यूजर ने रामगोपाल यादव को चुनाव का इंतज़ार करने की नसीहत दी है। उन्होंने दावा किया है कि यादव समाज ही इस बार रामगोपाल यादव का विरोध करेगा। उन्होंने कहा, “इंतजार कर रामद्रोही, इंतजार कर।”

पत्रकार सुशांत सिन्हा ने रामगोपाल यादव से सवाल किया है कि रामनवमी में जो हिन्दू रामनवमी में पूजा कर रहे हैं, क्या वो सब पाखंडी हैं?

आशुतोष यादव अभिषेक ने रामगोपाल यादव के बयान को जहरीला करार दिया है। उन्होंने दावा किया है कि इस बार यादव समाज मुँह पर वोट की थप्पड़ मारकर जवाब देगा।

इन सभी के अलावा, X यूजर अजीत झा ने भी रामगोपाल के शब्दों पर आपत्ति जताई है। उन्होंने लिखा, “नाम रामगोपाल यादव। माता-पिता राम-कृष्ण की भक्ति में नाम रखा होगा। मगर सियासत के चक्कर में ये कह रहे हैं ‘पूजा करने वाले पाखंडी हैं’। सीधे-सीधे सनातन का अपमान नहीं तो क्या है? हिम्मत है तो नमाज पढ़ने या चर्च में जाने वालों को बारे में कुछ कह दें।”

नॉर्थ-ईस्ट को कॉन्ग्रेस ने सिर्फ समस्याएँ दी, BJP ने सम्भावनाओं का स्रोत बनाया: असम में बोले PM मोदी, CM हिमंता की थपथपाई पीठ

लोकसभा चुनाव 2024 के लिए प्रचार अभियान के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (17 अप्रैल, 2024) को असम के नलबाड़ी में एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने रामनवमी को ऐतिहासिक अवसर कह कर जनता को बधाई देते हुए अयोध्या में भव्य रामंदिर में रामलला के ‘सूर्य अभिषेक’ का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के इंतजार के बाद ये अवसर आया है। पीएम मोदी ने कहा कि 4 जून को नतीजा क्या होने जा रहा है, ये साफ दिखाई दे रहा है और इसलिए लोग कहते हैं – 4 जून, 400 पार! फिर एक बार मोदी सरकार।

पीएम मोदी ने कहा कि BJP वो पार्टी है, जो सबका साथ-सबका विकास के मंत्र पर चलती है। उन्होंने कहा कि NDA सरकार की योजनाओं में कोई भेदभाव नहीं होता, उनका लाभ हर किसी को मिलता है। साथ ही बताया कि अब NDA ने ठाना है कि देश के हर नागरिक तक पहुँच कर, जिस सुविधा का वो पात्र है, वो सुविधा उसे दी जाएगी। बकौल पीएम मोदी, आज पूरे देश में मोदी की गारंटी चल रही है और नॉर्थ-ईस्ट तो खुद ही मोदी की गारंटी का गवाह है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के नलबाड़ी में आगे कहा कि जिस नॉर्थ-ईस्ट को कॉन्ग्रेस ने सिर्फ समस्याएँ दी थीं, उस नॉर्थ-ईस्ट को BJP ने सम्भावनाओं का स्रोत बना दिया है। पीएम मोदी ने इस दौरान जनसभा में उपस्थित लोगों से कहा कि सभी अपना मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट जला कर भगवान राम को प्रणाम करें। इसके बाद सभी ने फ्लैशलाइट चालू की और ‘सूर्य तिलक’ का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि प्रभु राम के जन्मदिन मनाने के लिए भगवान सूर्य किरण के रूप में उतर रहे हैं, पूरे देश में उत्साह का माहौल है और 500 साल बाद अपने घर में श्रीराम बर्थडे मना रहे।

असम में पीएम मोदी ने भाजपा के संकल्प-पत्र के बारे में बताते हुए कहा कि कम दाम पर लोगों को सोलर पैनल दिए जाएँगे, ताकि उनका बिजली बिल जीरो हो जाएगा और साथ ही जब लोग इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदेंगे तो सोलर वाली बिजली से उसकी चार्जिंग भी होगी और ट्रेवलिंग/पेट्रोल-डीजल का खर्च बचेगा। पीएम मोदी ने स्वयंसहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं का जिक्र करते हुए कहा कि 3 करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाए जाने का लक्ष्य है। उन्होंने इस दौरान MSP बढ़ाने का जिक्र किया, साथ ही बताया कि पीएम-किसान के तहत असम के किसानों को 5400 करोड़ रुपए से अधिक मिले।

प्रधानमंत्री ने कहा, “मुस्लिम बहनों को तीन तलाक की टेंशन से हमने मुक्ति दिलाई, इस कुप्रथा के खिलाफ कानून बनने से न सिर्फ मुस्लिम बहनों बल्कि उनके पूरे परिवार को इसका फायदा मिला। असम का विकास इसका सबूत है कि जब नीयत सही हो तो नतीजे भी सही आते हैं। असम में 10 वर्षों में 2500 किलोमीटर नेशनल हाइवे बने हैं। आज देश का सबसे बड़ा रिवर ब्रिज भूपेन हजारिका के नाम पर असम में है, सबसे बड़ा रेलरोड ब्रिज यहीं हैं। असम के 5 जिलों में कैंसर अस्पताल खोलने की योजना चल रही है।”

पीएम मोदी ने बताया कि 90,000 करोड़ रुपए की लागत से गैस ग्रीड तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मानस नेशनल पार्क एन्ड टाइगर रिजर्व की बात करते हुए कहा कि उनकी सरकार में बाघों की संख्या बढ़ी है, वन क्षेत्र बढ़ा है। उन्होंने बताया कि राइनो का शिकार रुका है, वो काजीरंगा में रात में रुकने वाले पहले पीएम हैं। असम के महान योद्धा लाचित बरफुकन की 400वीं जयंती देश भर में मनाई गई, यहाँ के गमछा का ब्रांड एम्बेस्डर वो खुद हैं। उन्होंने कहा कि वो असम के कपड़े पहनते हैं तो कॉन्ग्रेस वाले मजाक बनाते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि CM हिमंता बिस्वा सरमा ने इतना काम किया है कि असम में कॉन्ग्रेस का स्कोप ही खत्म हो गया है। पीएम मोदी ने इस दौरान ये भी कहा कि 2014 में वो एक उम्मीद लेकर आए थे, 2019 में जब वो आए ततो एक विश्वास लेकर आए, और 2024 में वो असम की धरती पर गारंटी लेकर आए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि अगले 5 वर्षों में गरीबों के लिए 3 करोड़ और नए मकान बनाए जाएँगे। उन्होंने कहा कि इसका फायदा बिना भेदभाव सबको मिलेगा।

घर में पानी माँगने आया मस्जिद का इमाम, महिला को अकेले देख किया रेप: FIR के बाद हुआ फरार, छत्तीसगढ़ के सूरजपुर की घटना

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में एक मस्जिद के इमाम पर एक महिला से घर में घुस कर रेप करने का आरोप लगा है। आरोपित इमाम का नाम गुलाम गौस है जो पानी माँगने के लिए महिला के घर में घुस गया था।

पीड़िता द्वारा शिकायत करने पर उसके पति को जान से मार डालने की धमकी भी दी गई। घटना बुधवार (10 अप्रैल, 2024) की है जिसकी शिकायत पीड़िता ने 5 दिनों बाद दर्ज करवाई है। केस दर्ज होते ही इमाम फरार हो गया है जिसकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना सूरजपुर जिले के चौकी क्षेत्र बसदेयी की है। यहाँ के एक गाँव में बनी मस्जिद में इमाम गुलाम गौस स्थानीय लोगों को नमाज़ पढ़ाता है। मस्जिद के कुछ ही दूर पर 26 वर्षीय पीड़िता का घर है। इमाम और पीड़िता के पति में जान-पहचान थी। 10 अप्रैल की शाम इमाम पीड़िता के घर पहुँचा। तब महिला घर पर अकेली थी। गुलाम गौस पीड़िता से उसके पति के बारे में पूछते हुए घर के अंदर घुस गया। पहले से परिचय होने के नाते महिला ने उसे घर में आने दिया।

पीड़िता ने इमाम को बताया कि उनके शौहर घर पर नहीं है। इस पर गुलाम गौस ने पानी माँगा जिसे लेने के लिए पीड़िता घर के अंदर चली गई। महिला जब पानी ले कर लौटी तो इमाम ने उसे बदनीयती से पकड़ लिया। पीड़िता ने विरोध करना चाहा तो उसके शौहर को जान से मार डालने की धमकी दी गई।

इसके बाद गुलाम गौस ने पीड़िता के घर पर ही उसका रेप किया। रेप के बाद वह महिला को धमकाते हुए भाग निकला। इस घटना के बाद दुःखी पीड़िता गुमसुम रहने लगी। धीरे-धीरे उसकी तबियत भी बिगड़ने लगी। जब उसके शौहर ने इस कारण पूछा तो इमाम की सच्चाई खुली।

मामले की जानकारी होने के बाद पीड़िता के शौहर ने नजदीकी बसदेयी पुलिस चौकी में इमाम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस शिकायत पर गुलाम गौस के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। यह FIR IPC की धारा 376, 342, 458 और 506 के तहत दर्ज की गई है। FIR दर्ज होते ही गुलाम गौस फरार हो गया। पुलिस इमाम की तलाश में दबिश दे रही है। मीडिया से बात करते हुए SHO सूरजपुर विमलेश दुबे ने आरोपित को जल्द गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया है। आरोपित और पीड़िता एक ही समुदाय से हैं।

शंख का नाद, घड़ियाल की ध्वनि, मंत्रोच्चार का वातावरण, प्रज्जवलित आरती… भगवान भास्कर ने अपने कुलभूषण का किया तिलक, रामनवमी पर अध्यात्म में एकाकार हुआ विज्ञान

रामनवमी के पुनीत अवसर पर बुधवार (17 अप्रैल, 2024) को अयोध्या के राम मंदिर में रामलला का ‘सूर्य तिलक’ किया गया। भगवान भास्कर की किरणों ने रामलला के मस्तक तक पहुँच कर उनके मुख को सुशोभित किया। इसे ‘सूर्य अभिषेक’ भी कहा जाता है। ऑप्टिक्स और मेकेनिक्स के माध्यम से भारत के वैज्ञानिकों ने ये कमाल किया है। इसके तहत सूर्य की किरणों को पाइप और दर्पण के माध्यम से सीधे राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला के मस्तक तक पहुँचाया गया।

बता दें कि ये कोई नई चीज नहीं है, बल्कि प्राचीन काल में ही कई मंदिरों में इस तरह का आर्किटेक्चर होता था कि सूर्य की किरणें देवता का अभिषेक करती थीं। अबकी IIT रूड़की के शोधकर्ताओं को ये जिम्मेदारी सौंपी गई थी। तिलक का आकार 58 mm का था और दोपहर 12 बजे ढाई मिनट तक अभिषेक चला। गर्भगृह की छत से सूर्य की किरणों को मंदिर में प्रवेश कराया गया, जिसके लिए IR फ़िल्टर से लैस अपर्चर का इस्तेमाल किया गया। दक्षिण दिशा से ये किरणें अंदर आईं।

इसके बाद 4 लेंस और 4 दर्पणों का एक नेटवर्क तैयार किया गया था, जिन्हें खास ऐंगल्स पर सेट किया गया ताकि रामलला के ललाट तक तिलक पहुँचे। पहले ही इसका ट्रायल कर लिया गया था। इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाले लेंस और दर्पणों का इस्तेमाल किया गया है। इन्हें उक्त उपकरण के गियरबॉक्स में लगाया गया था। पीतल और कांस्य की धातु का उपयोग किया गया था। इस गियरबॉक्स को सूर्य पंचांग के हिसाब से सेट किया गया है, ताकि हर साल रामनवमी पर सटीक तरीके से ‘सूर्य तिलक’ का कार्यक्रम संपन्न हो सके।

बता दें कि भगवान राम सूर्यवंशी थे, अर्थात उनका जन्म सूर्य के कुल में ही हुआ था। रामनवमी के अवसर पर राम मंदिर को सजाया गया था, गर्भगृह को फूलों से सजाया गया था। रामलला का दुग्ध एवं चन्दन से अभिषेक हुआ, उनका विशेष शृंगार किया गया। शंख की ध्वनि, घड़ियाल की नाद, मंत्रोच्चार और आरती के बीच जब पर्दा हटा तो रामलला के मस्तक पर सूर्य तिलक देख कर लोगों ने प्रणाम किया। आध्यात्मिक और ऐतिहासिक रूप से भी ये एक महत्वपूर्ण दृश्य था, क्योंकि सन् 1527 के बाद पहली बार रामलला अयोध्या में भव्य मंदिर में विराजे हैं।

18 महीने में होती थी जितनी बारिश, उतना पानी 1 दिन में दुबई में बरसा: 75 साल का रिकॉर्ड टूटने से मध्य-पूर्व के रेगिस्तान में त्राहिमाम, ओमान में बाढ़ ने ली 19 की जान

संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और अन्य खाड़ी देशों में मंगलवार (16 अप्रैल, 2024) को एकाएक हुई रिकॉर्ड बारिश ने भारी तबाही मचाई है। UAE के दुबई में जहाँ जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया तो वहीं ओमान में 19 लोगों को जान गँवानी पड़ी है। दोनों देशों में सड़कों पर पानी भरा हुआ है जबकि हवाई यातायात ठप है।

जानकारी के अनुसार, मंगलवार को दुबई में अचानक से हुई बारिश ने पुराने सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। रात 9 बजे तक पिछले 75 वर्ष में सबसे अधिक बारिश हुई। बताया गया कि दुबई में कुछ ही घंटों के दौरान 127 मिलीमीटर की बारिश हो गई। इतनी बारिश यहाँ लगभग डेढ़ साल में होती है।

दुबई में एकाएक हुई बारिश के कारण सड़कों पर काफी पानी भर गया। पानी निकासी की सारी व्यवस्थाएँ फेल हो गईं। रेगिस्तान में बसे होने के कारण दुबई में पानी निकासी की व्यवस्था कुछ हिस्सों में अच्छी नहीं है, इसके कारण और भी समस्या हुई। जन जीवन एकदम रुक गया।

बारिश का सबसे बुरा प्रभाव दुबई के एयरपोर्ट पर देखने को मिला जहाँ कई फीट पानी भर गया और जहाज तैरते नजर आए। इस कारण अधिकांश उड़ानें रद्द हो गईं। एयरपोर्ट को लम्बे समय के लिए बंद करना पड़ा। एयरपोर्ट को शहर से जोड़ने वाली सड़कें भी बंद हो गईं। दुबई एयरपोर्ट के बंद होने से विश्व के अन्य हिस्से भी प्रभावित हुए। दुबई विश्व का दूसरा सबसे व्यस्त एयरपोर्ट है। अभी तक यातायात सामान्य नहीं हो सका है। दुबई में सड़क परिवहन के अलावा मेट्रो आदि को भी बंद करना पड़ा।

UAE के एक हिस्से में 287 मिलीमीटर तक की बारिश रिकॉर्ड की गई। एक व्यक्ति के बारिश के कारण बहने की भी सूचना है। दुबई के मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि आने वाले दिनों में बारिश और प्रचंड रूप धारण कर सकती है। दुबई के अलावा पड़ोसी देश ओमान में भी बारिश ने काफी कहर मचाया।

ओमान में लगातार तीन दिनों तक हुई बारिश के कारण 19 लोगों की मौत हो गई। इन मृतकों में बड़ी तादाद बच्चों की है। यह बच्चे स्कूल की एक गाड़ी बहने से मारे गए। ओमान के बड़े हिस्से में कामकाज को रोक दिया गया है और स्कूल भी बंद कर दिए गए हैं। ओमान में बारिश से प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित जगह पर लोगों को पहुँचाया जा रहा है।

भारत घुसकर मारेगा तो बचाने नहीं आएगा अमेरिका: PM मोदी की चेतावनी पर USA ने क्लियर किया स्टैंड, आतंकी निज्जर पर भी नहीं गली एजेंडाबाज पत्रकारों की दाल

नया भारत अब न सिर्फ आतंकियों को घर में घुस कर मारेगा, बल्कि उन्हें बचाने के लिए अमेरिका भी नहीं आएगा। USA के ताज़ा बयान से इतना तो साफ़ हो गया है। अमेरिका के डिपार्टमेंट स्पोक्सपर्सन मैथ्यू मिलर ने मंगलवार (16 अप्रैल, 2024) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कई सवालों के जवाब दिए। इस दौरान भारत की चुनावी रैलियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान को लेकर भी सवाल किए गए।

एक पत्रकार ने कहा कि भारत के PM और रक्षा मंत्री ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा है कि भारत आतंकियों को मारने के लिए सीमा पार करने में संकोच नहीं करेगा। पत्रकार ने एक प्रोपेगंडा के तहत सवाल पूछते हुए ये तक दावा कर दिया कि इस तरह भारत ने कनाडा में खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या, अमेरिका के न्यूयॉर्क में गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या के प्रयास और पाकिस्तान में हत्याओं में संलिप्तता स्वीकार कर ली है। उक्त पत्रकार ने पूछा कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन के प्रशासन के लिए ये चिंता का विषय है?

इस पर जवाब देते हुए मैथ्यू मिलर ने कहा, “जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, संयुक्त राज्य अमेरिका इसके बीच में नहीं पड़ेगा। लेकिन, हम भारत और पाकिस्तान दोनों को तनाव से बचने और बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।” इसके बाद अगला सवाल किया गया कि अमेरिका अपने देश में हत्या की साजिश में शामिल विदेशी आरोपितों पर पाबंदियाँ लगाता है, क्या भारत के खिलाफ भी ऐसी कार्रवाई होगी? एक बार फिर एजेंडे के तहत पूछा गया कि भारत को छूट दिए जाने का कारण क्या है।

इस पर अमेरिकी डिपार्टमेंट स्पोक्सपर्सन ने कहा, “मैं किसी भी कार्रवाई के संबंध में नहीं बताने जा रहा हूँ। इसका अर्थ ये नहीं है कि कोई प्रतिबंध लगाया जाने वाला है। अगर आप मुझसे प्रतिबंधों के बारे में पूछते हैं तो ये एक ऐसा विषय है जिस पर हम सार्वजनिक चर्चा नहीं करते।” बता दें कि बिहार के जमुई में पीएम मोदी ने कहा था कि आज का भारत घर में घुस कर मारता है। वहीं राजनाथ सिंह ने कहा था कि भारत की जमीन पर किसी वारदात को अंजाम दिया जाता है तो आतंकियों को मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा, अगर वो पाकिस्तान भागेंगे तो वहाँ भी उन्हें मारा जाएगा।

रामनवमी पर भी कॉन्ग्रेस ने दिखाई हिंदू घृणा: तेलंगाना में शोभायात्रा की नहीं दी अनुमति, राजस्थान में शिकायत कर हटवाए भगवा झंडे

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में रामनवमी की जुलूस की अनुमति रद्द कर दी गई है। गोशमहल से BJP के विधायक T राजा सिंह ने ये दावा किया है। उन्होंने बताया कि रामनवमी के 1 दिन पहले मंगलवार (16 अप्रैल, 2024) को रात साढ़े 8 बजे उन्हें तेलंगाना पुलिस ने एक पत्र भेज कर सूचित किया है कि इस वर्ष रामनवमी की शोभा-यात्रा की अनुमति रद्द की जाती है। उन्होंने बताया कि पत्र में 14 अप्रैल की तारीख़ लिखी है, अब इस मुद्दे को हल करने के लिए काफी कम समय बचा है। उधर राजस्थान के जयपुर से कॉन्ग्रेस की शिकायत पर भगवा झंडे हटाए जाने का मामला सामने आया है।

तेलंगाना: विधायक T राजा सिंह को रामनवमी शोभा-यात्रा की अनुमति नहीं

विधायक T राजा सिंह ने कहा कि वर्षों से हमारी रामनवमी की शोभा-यात्रा भक्ति का प्रतीक रही है, जिसमें सिर्फ तेलंगाना ही नहीं बल्कि देश भर से लाखों रामभक्त आते रहे हैं। उन्होंने इसे हिन्दुओं की स्वतंत्रता को अनुचित रूप से बाधा पहुँचाने जाने की कोशिश बताते हुए बेहद निराशाजनक करार दिया। उन्होंने कहा कि हमें कॉन्ग्रेस सरकार से इस तरह के फैसले की ही आशंका थी, जो KCR सरकार के नक्शेकदम पर ही चल रही है। उन्होंने ‘जय श्री राम’ लिख कर सोशल मीडिया पर वो पत्र भी शेयर किया।

बता दें कि ये शोभा-यात्रा आकाशपुरी हनुमान मंदिर से लेकर रामकोटी स्थित हनुमान व्यायामशाला तक जानी थी। इसे अनीता टॉवर, पुराना पुल, गाँधी प्रतिमा, जुम्मेरात बाजार, चूड़ी बाजार, बेगम बाजार चत्री, स्वस्तिक मिर्ची, सित्तम्बर बाजार मस्जिद, गौलीगुड़ा गुरुद्वारा, कोटी महिला कॉलेज और सुल्तान बाजार से होकर गुजरना था। इसके लिए सुबह 10 बजे से लेकर रात 10 बजे तक का समय माँगा गया था। हालाँकि, तेलंगाना पुलिस ने इस माँग को रद्द कर दिया है।

राजस्थान: कॉन्ग्रेस की शिकायत पर हटाए गए भगवा झंडे

उधर राजस्थान की राजधानी जयपुर में हिन्दू संगठन सड़क पर हैं। वहाँ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में भले ही सरकार भाजपा की हो, लेकिन अभी लोकसभा चुनाव के कारण प्रशासन चुनाव आयोग के अंतर्गत है और कॉन्ग्रेस की शिकायत पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई ने हिन्दुओं को नाराज़ कर दिया है। जयपुर में जगह-जगह लगे भगवा ध्वज को हटाया गया है। ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ के कार्यकर्ताओं ने कॉन्ग्रेस का पुतला फूँक कर इस कदम के खिलाफ विरोध जताया है। हिन्दू संगठनों ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी को चुनाव और राम नाम से कोई लेना-देना नहीं है।

जयपुर शहर लोकसभा क्षेत्र से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार प्रताप सिंह खाचरियावास ने वकील मंगल सिंह के माध्यम से जिला मजिस्ट्रेट में लिखित शिकायत दायर कर दावा किया कि परकोटा के बाजारों में लोकसभा चुनाव 2024 में एक विशेष पार्टी को फायदा पहुँचाने के लिए भगवा ध्वज लगाए गए हैं। उन्होंने इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करार दिया। इसके बाद रातोंरात नगर निगम ने झंडे उतरवा दिए। हवामहल से बिधायक बालमुकुंदाचार्य ने ने कलक्टर से शिकायत कर ये ध्वज वापस लगाने की माँग की है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को भगवा ध्वज और राम नाम से आपत्ति है।