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त्रिपुरा में PM मोदी ने कॉन्ग्रेस-कम्युनिस्टों को एक साथ घेरा: कहा- एक चलाती थी ‘लूट ईस्ट पॉलिसी’ दूसरे ने बना रखा था ‘लूट का अड्डा’

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने त्रिपुरा में एक विशाल रैली की है। पीएम मोदी ने यहाँ ध्यान दिलाया कि वह अकेले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो अपने कार्यकाल के दौरान 50 बार से अधिक उत्तरपूर्व के दौरे पर आए हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल की उपलब्धियाँ गिनाई और साथ ही वामपंथियों तथा कॉन्ग्रेस पार्टी पर हमला भी बोला।

प्रधानमंत्री मोदी ने त्रिपुरा में कॉन्ग्रेस और वामपंथी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि उनकी सरकार के दौरान गरीबों को कोई भी लाभ नहीं मिलता था। पीएम मोदी ने यहाँ ऐलान किया कि उनकी सरकार के दोबारा सत्ता में आने पर 3 करोड़ और घर बनाए जाएँगे।

पीएम मोदी ने यहाँ लोगों से अपील की कि वह और लोगों को इस योजना के विषय में बताएँ। उन्होंने कहा कि जितना हमने 10 सालों में काम किया वह केवल ट्रेलर है, आगे होने वाला काम त्रिपुरा को समृद्धि कि की तरफ ले जाएगा। पीएम ने कहा कि वह प्रत्येक घर के 70 वर्ष से अधिक नागरिकों को मुफ्त इलाज सुविधा उपलब्ध करवाएँगे।

पीएम मोदी ने यहाँ HIRA (हाइवे, इन्टरनेट, रेलवे और एयरवे) का सिद्धांत दोहराया और बताया कि राज्य में 3 हजार करोड़ से अधिक की फोर लेन सड़कें बनाई जा रही हैं। पीएम मोदी ने यहाँ कहा कि दिल्ली में कॉन्ग्रेस सरकार के होने पर लोगों का मोबाइल बिल हजारों में होता।

त्रिपुरा में पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस सरकार उत्तर पूर्व के लिए लूट ईस्ट पालिसी चलाती थी, मोदी सरकार ने इस पर ताले लगा दिए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस और कम्युनिस्टो ने मिलकर त्रिपुरा को लूट का अड्डा बना दिया। उन्होंने कहा कि यह लोग त्रिपुरा में साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं जबकि केरल में आपस में नहीं बन रही। पीएम मोदी का यह भाषण आप यहाँ देख सकते हैं।

पीएम मोदी ने त्रिपुरा में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी उत्तर प्रदेश में हार कर केरल भाग गए थे और अब केरल के मुख्यमंत्री ने उनके खिलाफ हल्ला बोल दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि राहुल गाँधी केरल में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को जेल की सलाखों के पीछे डालना चाहते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि अगर लोगों ने कॉन्ग्रेस-कम्युनिस्ट को वोट दिया तो उसका कोई काम नहीं जबकि भाजपा को दिया वोट राष्ट्र में मजबूत सरकार लाएगा।

ईद पर मिथिला की जिस धरोहर को मुस्लिमों ने किया था अपवित्र, रामनवमी पर हिंदुओं ने किया उसका शुद्धिकरण: दरभंगा राजपरिवार के कपिलेश्वर सिंह ने की अगुवाई

बिहार में एक जिला है – दरभंगा। बिहार के जिस इलाके को मिथिला कहते हैं, दरभंगा उसका एक अहम हिस्सा है। मैथिलि भाषी दरभंगा क्षेत्र की स्थिति अब ये है कि वहाँ मुस्लिमों की जनसंख्या 23% के पार हो गई है। इसका एक दुष्प्रभाव ईद के दिन देखने को मिला, जब दरभंगा के दिवंगत महाराज रामेश्वर सिंह की प्रतिमा का मुस्लिम भीड़ ने अपमान किया। कुछ मुस्लिम उनकी प्रतिमा पर पाँव रख कर बैठ गए। दरभंगा राज परिसर में ईद पर भारी भीड़ जुटी हुई थी, उसी वक्त ये घटना हुई।

चौरंगी चौक पर रामेश्वर सिंह की प्रतिमा के साथ इस तरह के दुर्व्यवहार के कारण दरभंगा के लाखों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँची, जो आज भी उनका सम्मान करते हैं। श्यामा माई मंदिर में मुस्लिम समाज के लोगों को बोटिंग का आनंद लेते हुए भी देखा गया। इस दौरान भी अभद्रता का आरोप लगा, जिस कारण बोटिंग रोकनी पड़ी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को मौके पर पहुँचना पड़ा। पुलिस ने कहा कि नाबालिग बच्चों ने कुछ हरकत की थी, जिन्हें समझा-बुझा कर हटा दिया गया।

दरभंगा पुलिस का कहना है कि विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र अंतर्गत हुई इस घटना में बच्चे शामिल थे। वहीं पुलिस ने तालाब में अभद्रता की बात से इनकार करते हुए कहा कि पुजारी और गार्ड्स के अलावा अन्य लोगों से भी थानाध्यक्ष ने पूछताछ की तो उन्होंने इस घटना से अनभिज्ञता जाहिर की। पुलिस के अनुसार, कोई साक्ष्य नहीं मिला। जबकि लोगों का कहना था कि दरभंगा महाराज की प्रतिमा के साथ उद्दंडता पूरे मैथिल समाज का अपमान है, मिथिला का अपमान है।

अब रामनवमी के दिन बड़ी संख्या में लोगों ने जुटान कर प्रतिमा का और आसपास के इलाके का शुद्धिकरण किया है। इसका नेतृत्व दरभंगा रियासत के उत्तराधिकारी कपिलेश्वर सिंह ने किया। युवा कपिलेश्वर सिंह ने रामनवमी को महान पर्व करार देते हुए राम को स्नेह-सौहार्द का प्रतीक पुरुष और अपना आदर्श करार दिया। उन्होंने कहा कि राम की शालीनता दुर्बलता नहीं बल्कि सबलता का परिचायक है, उन्होंने अन्याय का विरोध कर अन्यायियों का अंत किया था।

कपिलेश्वर सिंह ने कहा, “सन् 1577 में इसी दिन मेरे पूर्वजों को मिथिला की रियासत प्राप्त हुई थी। मेरे दादा कामेश्वर सिंह तक इस वंश के राजा हुए। मेरे परदादा रामेश्वर सिंह राजर्षि, विशुद्ध सनातनी, ‘हिन्दू धर्म महामण्डल’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष, और आध्यात्मिक पुरुष थे। उनकी चिता पर ही माधवेश्वर श्मसान परिसर में माँ श्यामा माई विराजती हैं। ये मिथिला और नेपाल तक के धर्मावलम्बियों के लिए आस्था का केंद्र है। यहाँ का तालाब पवित्र नदियों के जल से अभिसंचित है। तालाब में वोटिंग पर रोक लगा कर इसकी शुचिता बनाए रखने में लोग सहयोग करें। “

उन्होंने जूते-चप्पल पहन कर रामेश्वर सिंह की प्रतिमा पर चढ़े जाने का विरोध करते हुए कहा कि वो अब अपने पितृ-पुरुषों की मूर्तियों की सुरक्षा के लिए उनके इर्दगिर्द ग्रील का घेरा लगाएँगे। दरभंगा महाराज की प्रतिमा के सामने नृत्य की प्रस्तुति भी दी गई और मिथिला की कला का प्रदर्शन किया गया। माँ श्यामा माई मंदिर में पूजन-अर्चन किया गया। गंगा-यमुना समेत 5 पवित्र नदियों के जल से शुद्धिकरण हुआ। साथ ही चेताया गया है कि आगे से दरभंगा की विरासत का सम्मान किया जाए।

चुनावों से पहले बंगाल में एक के बाद एक कई धमाके, लकड़ी मिल के पीछे छुपाकर रखे गए थे बम: कॉन्ग्रेस ने TMC विधायक रबीउल आलम को बताया जिम्मेदार

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में मंगलवार (16 अप्रैल 2024) को एक के बाद एक कई धमाके हुए। जाँच में पता चला कि ये बम विस्फोट हैं। घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई है। बम एक जगह छिपाकर रखे गए थे, जो गर्मी की वजह से फट गए। कॉन्ग्रेस ने इस विस्फोट के पीछे तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के विधायक रबीउल आलम को जिम्मेदार बताया है। वहीं, TMC ने इसे कॉन्ग्रेस की करतूत करार दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना मुर्शिदाबाद के रेजीनगर इलाके की है। मंगलवार (16 अप्रैल 2024) की दोपहर में नाजीरपुर पश्चिमी में पड़ने वाले पारा इलाके में अचानक जोरदार धमाका हुआ। पहले तो लोगों ने समझा कि किसी बिजली के ट्रांसफर में ब्लास्ट हुआ है। कुछ देर के अंदर एक के बाद एक करके कई धमाके होने लगे, तब जाकर लोगों को पता चला कि ये बम धमाके हैं।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस पाया कि एक लकड़ी के गोदाम के पास कई बम छिपाकर रखे गए थे। विस्फोट कम क्षमता वाले बमों के थे। तेज गर्मी की वजह से ये बम खुद ही फट गए। मौके पर बम निरोधक दस्ता भी पहुँचा है। पुलिस ने इलाके को सील करके तलाशी अभियान चलाया है। कहा जा रहा है कि शायद अब कोई जीवित बम नहीं बचा हो।

इस मामले में केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी गई है। इन धमाकों में अभी तक कोई हताहत नहीं हुआ है। पुलिस ने यह भी बताया कि चुनाव के मद्देनजर पूरे जिले में तलाशी अभियान चलाया गया है। माना जा रहा है कि चुनाव को देखते हुए ये बम छिपाकर रखे गए थे। इन धमाकों के बाद राजनैतिक आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया है। कॉन्ग्रेस और TMC इसे एक-दूसरे की करतूत बता रहे हैं।

रेजीनगर ब्लॉक से कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष मिंटू सिंह ने बम धामके को TMC के स्थानीय विधायक रबीउल आलम चौधरी और उसके सहयोगियों की करतूत बताया है। मिंटू सिंह का आरोप है कि बमों को रबीउल आलम की लकड़ी मिल के पीछे छिपाकर रखा गया था। कॉन्ग्रेस नेता ने इन बम धमाकों की उच्चस्तरीय जाँच कराने और आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

वहीं, तृणमूल कॉन्ग्रेस ने कॉन्ग्रेस के आरोपों से इनकार किया है। TMC नेताओं का आरोप है कि लोकसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता ही बम बना रहे थे। तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता नियामत शेख ने कहा कि कॉन्ग्रेस समर्थित गुंडे इलाके में आतंक फ़ैलाने और कानून व्यवस्था को प्रभावित करने के लिए बारूद जमा कर रहे हैं। मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तार नहीं हुई है।

इसी तरह की एक अन्य घटना में मुर्शिदाबाद के सागरपारा पुलिस स्टेशन के चक्रामप्रसाद इलाके में सॉकेट बम से भरा एक बैग बरामद किया गया है। बम मिलने की सूचना के आधार पर पुलिस ने सोमवार (15 अप्रैल 2024) को इलाके की तलाशी ली और एक खाली मैदान से ताजा सॉकेट बम से भरा बैग बरामद किया।

हिंदू लड़की से मोबाइल नंबर माँग रहा था अख्तर अंसारी, भाई नीरज ने किया विरोध तो रॉड से कर दिया हमला: अरमान-अफजल सहित 6 ने घोंपा छूरा

झारखंड के गिरडीह में सोमवार (15 अप्रैल 2024) को अख्तर अंसारी, अरमान, शाहिद, वारिस, अफजल और आंसूफ अंसारी ने नीरज नाम के एक युवक को चाकू मार दिया। आरोप है कि अख्तर अंसारी उसकी बहन से मोबाइल नंबर माँग रहा था। इसकी जानकारी मिलते ही नीरज पहुँचा और आरोपितों ने उसे चाकू मार दी। नीरज को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। पुलिस ने अरमान सहित दो हमलावर को गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना गिरडीह जिले के थाना क्षेत्र धनवार की है। यहाँ के गाँव गोरहंद में सोमवार की शाम लगभग 5 बजे एक हिन्दू लड़की डैम से पानी भरने गई थी। डैम के पास उसी गाँव का अख्तर अंसारी भी मौजूद था। उसने लड़की से उसका मोबाइल नंबर माँगने लगा। लड़की ने अख्तर को अनसुना कर दिया और अपने घर आकर पूरी बात बताई।

अपनी बहन की बात सुनकर नीरज गुस्सा हो गया और डैम की तरह गया, जहाँ अख्तर अंसारी था। नीरज रास्ते में ही अख्तर अंसारी मिल गया। नीरज ने अख्तर से उसकी बहन का नंबर माँगने को लेकर सवाल किया। इस बात को लेकर नीरज और अख्तर में बहस हो गई। बात तू-तू, मैं-मैं पर आई तो आसपास से गुजर रहे लोगों ने बीच-बचाव कर के दोनों को अलग किया।

थोड़ी देर बाद नीरज डैम के पास फिर से शौच के लिए गया। यहाँ अख्तर अंसारी पहले से घात लगाए बैठा था। उसके साथ आंसूफ अंसारी, वारिस, अरमान, अफ़ज़ल और शाहिद भी पहले से ही मौजूद थे। इन सभी ने मिलकर पहले नीरज को बेरहमी से मारा। हमला लोहे की रॉड से किया गया, जिसमें नीरज का सिर फट गया। आरोपितों ने नीरज के पेट और पीठ में चाकू घोंप दी।

इसके बाद हमलावर 18 साल के नीरज को घायल अवस्था में छोड़कर फरार हो गए। पीड़ित के परिजनों ने नीरज को गिरडीह के अस्पताल में भर्ती करवाया। हालत गंभीर देखकर नीरज को धनबाद रेफर कर दिया गया है। मामला दो समुदायों के बीच की होने की वजह से गाँव में तनाव फ़ैल गया है, जिसको देखते हुए वहाँ पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

धनवार थाना प्रभारी पुलिस नंदू कुमार ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि इस मामले कमें दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तार हमलावरों में अरमान अंसारी भी शामिल है। बाकी हमलावर घर छोड़कर फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में दबिश दे रही है। पुलिस ने फरार हमलावरों को जल्द गिरफ्तार करने की बात कही है।

2023-24 में ₹3.5 लाख करोड़ कम हुआ भारत का व्यापार घाटा, ₹45,000 करोड़ बढ़ा इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात: जानें कैसे मोदी सरकार में बदला विदेश व्यापार का लेखा-जोखा

भारत की विदेशों पर निर्भरता मोदी सरकार में लगातार कम हो रही है। विदेशों से भारत में आने वाला सामान लगातार कम हो रहा है जबकि भारत का निर्यात इसी दौरान बढ़ रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और दवाई जैसे क्षेत्रों में भारत अपनी धमक दुनिया में दर्ज करवा रहा है। इन क्षेत्रों में भारत चीन को अब चुनौती दे रहा है। एप्पल जैसी बड़ी कम्पनियाँ अब भारत से बड़े स्तर पर निर्यात कर रही हैं। दूसरे देशों से निर्भरता घटाने के साथ ही भारत वैश्विक दबाव का सामना भी बखूबी कर रहा है।

हाल ही में भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 के आयात-निर्यात के आँकड़े जारी किए हैं। इनसे पता चलता है कि भारत की विदेशों पर निर्भरता घटते जा रही है। भारत विदेशों से कम सामान मँगा रहा है जबकि विदेशों में अधिक सामान भेज रहा है। इसी के साथ भारत का आईटी क्षेत्र भी मजबूत हो रहा और विदेशों में भारत के सेवा क्षेत्र के निर्यात भी बढ़ रहे हैं। भारत ने आंतरिक जरूरतों का ध्यान रखते हुए कई सामानों के निर्यात पर रोक भी लगाई और जब उसके दोस्तों को आवश्यकता हुई तो उसने निर्यात की अनुमति भी दी।

विदेशी व्यापार घाटा ₹3.5 लाख करोड़ घटा

यदि किसी देश का विदेशों से होने वाला आयात उसके निर्यात से अधिक है तो इसके बीच के अंतर को व्यापार घाटा कहते हैं। यदि किसी देश का निर्यात उसके आयात से अधिक होता है तो वह व्यापार अधिभार (ट्रेड सरप्लस) कहा जाता है। भारत के सम्बन्ध में हमेशा आयात, निर्यात से अधिक रहता है क्योंकि हम ईंधन के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हैं। हालाँकि, भारत ने इन सब चुनौतियों से लड़ते हुए 2023-24 में अपना व्यापार घाटा घटाने में सफलता पाई है।

भारत व्यापार घाटा

वित्त वर्ष 2023-24 में भारत का व्यापार घाटा 78.12 बिलियन डॉलर (लगभग ₹6.40 लाख करोड़) रहा। इससे पहले 2022-23 में यह घाटा 121.6 बिलियन डॉलर (लगभग ₹10 लाख करोड़) रहा था। यानी बीते वर्ष के मुकाबले में इसमें 43.48 बिलियन डॉलर (लगभग ₹3.5 लाख करोड़) की कमी आई है। यानी देश का ₹3.5 लाख करोड़ देश से बाहर जाने से बचा। विदेशी व्यापार घाटे के कारण देश के खजाने पर जोर पड़ता है, इस बार यह कम हुआ है।

2023-24 के दौरान देश के भीतर विदेशों से आने वाले सामानों में 2022-23 के मुकाबले 38 बिलियन डॉलर (लगभग ₹3.1 लाख करोड़) की कमी आई है। इसका अर्थ है कि हम अपनी जरूरत का सामन देश के भीतर ही बना रहे हैं और विदेशों से कम मँगा रहे हैं। दूसरी तरफ सेवाओं के आयात में 5 बिलियन डॉलर (लगभग ₹40,000 करोड़) की कमी आई है। सेवाओं के आयात में कमी का अर्थ है कि भारत तकनीकी रूप से भी आत्मनिर्भर हो रहा है। सेवा क्षेत्र के अधिकांश आयात-निर्यात आईटी और फाइनेंस क्षेत्र से सम्बंधित होते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स के आयात को मिल रही नई रफ़्तार

मोदी सरकार में सबसे बड़ी छलाँग इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में भारत ने लगाई है। इन इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात भी अब बड़े स्तर पर हो रहा है। भारत आज से कुछ वर्ष अपने इलेक्ट्रॉनिक सामानों के लिए चीन पर निर्भर था जबकि अब वह उन्हें दूसरे देशों को बेंच रहा है। रिपोर्ट बताती है कि वित्त वर्ष 2023-24 में भारत ने 29.12 बिलियन डॉलर (लगभग ₹2.4 लाख करोड़) के इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात किया है। यह 2022-23 में 23.55 बिलियन डॉलर (₹1.9 लाख करोड़) था। इसमें एक वर्ष में ही 23% से अधिक की वृद्धि हुई है।

इलेक्ट्रॉनिक्स के निर्माण को देश में नई रफ़्तार मोदी सरकार में मिली है। एक रिपोर्ट के अनुसार, केवल एप्पल कम्पनी ने ही 2023-24 के दौरान भारत में 14 बिलियन डॉलर से अधिक का निर्माण किया। एप्पल ने भारत से 2023-24 में 12 बिलियन डॉलर (₹1.2 लाख करोड़) से अधिक का निर्यात किया है।

भारत से 2023-24 के दौरान 16 बिलियन डॉलर (₹1.3 लाख करोड़) से अधिक के स्मार्टफ़ोन निर्यात किए गए हैं। इस सफलता में बड़ा हिस्सा मोदी सरकार द्वारा लाई गई PLI स्कीम का है। इसके अंतर्गत भारत में निर्माण करने वाली कम्पनियों को सरकार सब्सिडी देती है।

दवा के निर्यात में भी तेजी

इलेक्ट्रॉनिक्स के अलावा भारत ने दवाइयों के निर्यात में भी बड़ी सफलता हासिल की है। भारत ने वर्ष 2023-24 में 27.85 बिलियन डॉलर (₹2.2 लाख करोड़) से अधिक की दवाओं का निर्यात किया है। दवाओं के क्षेत्र में विश्व के कई देश भारत पर निर्भर हैं। सस्ती दरों में अच्छी गुणवत्ता की दवाई बनाने के कारण भारत विश्वास के दवाखाने के नाम से जाना गया है। यह 2013-14 दौरान मात्र ₹90,483 करोड़ के आसपास था।

कई वस्तुओं के मामले में कम हुई विदेशों पर निर्भरता

2023-24 के दौरान भारत की कई वस्तुओं के मामले में निर्भरता विदेशों पर कम हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 के दौरान खाद के लिए विदेशों पर निर्भरता घटी है। 2023-24 में भारत को विदेशों से 40% कम खाद और रसायन मँगाने पड़े।

भारत खाद के क्षेत्र में अब बड़े स्टार पर आत्मनिर्भर हो गया है। खाने के तेल के आयात में भी 28% की कमी आई है। कोयले के आयात में भी 21% की कमी आई है। इसके उलट भारत से विदेशों को जाने वाले देरी उत्पादों में 12.3% की बढ़त, फल और सब्जियों में 13% की बढ़त और मसालों के निर्यात में 12.3% की बढ़त हुई।

(1 डॉलर = ₹82)

‘लाल आतंक’ पर छत्तीसगढ़ के प्रहार से छलनी हुई कॉन्ग्रेस, जवानों का रक्त भूल नक्सलियों के एनकाउंटर को बता रही ‘फेक’: सर्जिकल स्ट्राइक पर भी माँगा था सबूत

भारत दशकों से ‘लाल आतंक’ से त्रस्त रहा है। बिहार-झारखंड से लेकर छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र तक, नक्सलियों ने लगातार खून बहाए। बिहार में तो एक दौर ऐसा था जब लोगों को रात-रात भर जाग कर हथियारों के साथ घर-परिवार की सुरक्षा करनी शुरू कर दी थी। छत्तीसगढ़ में तो नक्सलियों ने कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का ही खात्मा कर दिया, नरसंहार के जरिए। अब उसी छत्तीगसढ़ में सुरक्षा बलों ने 29 नक्सलियों को मार गिराया है। नक्सलियों के खिलाफ ये सबसे बड़े ऑपरेशन्स में से एक है।

आपको ये जान कर आश्चर्य होगा कि मृतकों में एक दर्जन से भी अधिक महिलाएँ हैं, जो खतरनाक हथियारों के साथ पुरुष नक्सलियों की सुरक्षा में आगे रहती थीं। राज्य पुलिस के ‘डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG)’ और ‘बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स (BSF)’ ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। एक तरह से देखा जाए तो ये पिछले एक दशक का सबसे बड़ा ऑपरेशन है नक्सलियों के खिलाफ, क्योंकि अभी भी तलाशी अभियान जारी है। इससे पहले 2016 में 30 और 2021 में 25 नक्सली मारे गए थे।

लेकिन, इस बार खास बात ये है कि सुरक्षा बलों की तरफ से कोई क्षति नहीं हुई है। ये ऑपरेशन काँकेड़ जिले के छोटेबेठिया थाना क्षेत्र अंतर्गत चलाया गया। AK-47 से लेकर राइफल और गोला-बारूद के अलावा कई हथियार बरामद किए गए। बस्तर के आईजी सुंदर राज P ने स्पष्ट कर दिया है कि कुल 30 हथियार बरामद हुए हैं, नक्सलियों के साहित्य भी बड़ी मात्रा में मिले हैं। जो 2 बड़े नक्सली मारे गए हैं, वो हैं – शंकर राव और ललिता। बस्तर में इस साल 79 नक्सलियों को ढेर किया जा चुका है।

पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि मारे गए लोगों में सभी नक्सली हैं, किसी के ग्रामीण होने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि आरोप लगाने वालों का काम ही यही है। उन्होंने बताया कि नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई निर्णायक मोड़ पर है, नक्सलियों का सफाया जारी रहेगा और आगे भी सुरक्षा बल बढ़त बनाए रहेंगे। पुलिस का मानना है कि वो सही दिशा में जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इसे बड़ी सफलता करार देते हुए कहा है कि जबसे नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं तब से नक्सलवाद-आतंकवाद में कमी आई है और छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार बनने के बाद नक्सल विरोधी अभियान में गति आई है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पिछले 3 महीने में ही 80 से ज्यादा नक्सली ढेर हुए हैं, 125 से ज्यादा गिरफ्तार हुए हैं और 150 से अधिक ने आत्म-समर्पण किया है। उन्होंने नक्सलवाद को उखाड़ फेंकने का प्रण भी दोहराया। जहाँ एक तरफ भाजपा नक्सलवाद पर प्रहार की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस पार्टी ये साबित करने में लगी है कि ये एक फर्जी मुठभेड़ था। वैसे ये कॉन्ग्रेस की पुरानी फितरत है। जब वो पाकिस्तान में भारत की सर्जिकल या एयर स्ट्राइक पर देश की सेना के खिलाफ जाकर बयान दे सकते हैं तो फिर नक्सलियों का समर्थन कौन सी बड़ी बात है उनके लिए।

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, जिन्हें हाल के चुनाव में करारी हार मिली है, उन्होंने काँकेड़ मुठभेड़ पर सवाल उठाते हुए कहा है कि भाजपा के शासनकाल में फर्जी एनकाउंटर होते हैं। उन्होंने अपनी सरकार में नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक कदम उठाए जाने का दावा करते हुए भाजपा सरकार पर जनजातीय समाज के लोगों की फर्जी गिरफ़्तारी का आरोप भी मढ़ दिया। उन्होंने दावा किया कि कवर्धा में ही लोगों को धमकाया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने पूर्ववर्ती के आरोपों का कड़ा जवाब दिया है।

उन्होंने कहा सलाह दी कि हर चीज पर सवाल नहीं खड़ा करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर ये घटना किसी भी तरह से फर्जी है तो भूपेश बघेल ये प्रमाणित करें। वहीं गृह मंत्री विजय शर्मा ने चुनौती दी कि भूपेश बघेल इस मुठभेड़ को फर्जी साबित करें, या फिर जवानों से माफ़ी माँगें। असल में भूपेश बघेल एक तो कॉन्ग्रेस नेता हैं उपर से हाल ही में उनकी हार हुई है, शायद इसी कारण वो उलूल-जलूल बयान दे रहे हैं। सुरक्षा बलों ने अभी 17 नक्सली कमांडरों की सूची बनाई है जिनके खिलाफ तलाशी अभियान तेज़ की जाएगी।

पिछले 15 दिनों में ही छत्तीसगढ़ में 42 नक्सली मारे जा चुके हैं। अब सामने आ रहा है कि ‘ऑपरेशन प्रहार’ चलाया जाएगा, जिसके जरिए उन नक्सलियों को निशाना बनाया जाएगा जो युवकों का ब्रेनवॉश कर उन्हें हथियार उठाने के लिए उकसाते हैं। मांडवी हिड़मा इस 17 सदस्यीय सूची में सबसे ऊपर है, जिसके सुकमा के जंगलों में छिपे होने की आशंका है। इसी तरह मुपल्ला लक्ष्मणा राव माड़ के घने जंगलों में छिपा हुआ है। 51 वर्षीय हिड़मा AK-47 चलाने में दक्ष है।

नक्सलियों की धर-पकड़ और उन्हें ढेर करने के लिए हमारे जवाब अब आधुनिक तकनीक का भी सहारा ले रहे हैं। उन्हें जंगलों में ख़ाक छाननी होती है, अपनी जान खतरे में डालनी होती है, परिवार से दूर रहना पड़ता है – तब जाकर नक्सल वारदातें कम होती हैं और आम लोग चैन से सोते हैं। लेकिन, भूपेश बघेल जैसे नेता सुरक्षा बलों पर ही सवाल उठाते हैं। अब जब विरोध हो रहा है तो भूपेश बघेल अपने बयान से पलट गए और जवानों को बधाई देने लगे।

NIA जज को माँगनी पड़ी माफी, क्योंकि नमाज के लिए नहीं रोकी कोर्ट की कार्यवाही: मुस्लिम वकील पहुँच गया HC, जस्टिस शमीम अहमद ने बताया ‘धार्मिक भेदभाव’

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने NIA के विशेष न्यायाधीश वीएस त्रिपाठी को एक मुस्लिम वकील मोहम्मद इदरीस पर ‘टिप्पणी’ करने को लेकर समन जारी किया। इसके बाद जज त्रिपाठी ने हाई कोर्ट के समक्ष 15 अप्रैल 2024 को बिना शर्त माफी माँग ली। दरअसल, जज त्रिपाठी ने पाया कि इदरसी नमाज में भाग लेने के लिए बार-बार अदालत से बाहर जाते थे। इसलिए उन्होंने आरोपितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक न्याय मित्र नियुक्त कर दिया था।

NIA के विशेष जज के इस टिप्पणी के बाद मोहम्मद इदरीस ने हाई कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट के जस्टिस शमीम अहमद ने इसे धार्मिक आधार पर भेदभाव बताया और जज त्रिपाठी को समन भेज दिया। जज त्रिपाठी ने हाई कोर्ट में पहुँचकर जज के समाने बिना शर्त के माफी माँग ली।

यह घटना दो मुस्लिम मौलवियों- मोहम्मद उमर गौतम और मुफ्ती काजी जहाँगीर आलम कासमी और अन्य के खिलाफ आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान हुआ। इन दोनों पर उत्तर प्रदेश के आतंकवाद विरोधी दस्ते (UP ATS) द्वारा जबरन धर्म परिवर्तन का आरोप लगाया गया है। इनकी सुनवाई के दौरान यह घटना घटी।

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायाधीश NIA/ATS, लखनऊ) विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने जनवरी में अदालत की सहायता के लिए अतिरिक्त वकील के रूप में एमेकस क्यूरी को नियुक्त किया था। दरअसल, कुछ मुस्लिम वकीलों के शुक्रवार (जुमे) की नमाज में जाने के लिए कोर्ट को कुछ समय के लिए स्थगित करने का अनुरोध किया था।

ट्रायल जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने मुस्लिम वकीलों के इस प्रार्थना को ठुकरा दिया था और आदेश दिया था कि जब भी मुस्लिम वकील नमाज में शामिल होने के लिए जाएँगे तो न्याय मित्र अभियुक्तों का कोर्ट में प्रतिनिधित्व करेंगे। इसे मुस्लिम वकीलों ने अपने साथ धार्मिक भेदभाव बताया और इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुँच गए।

इस मामले पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश शमीम अहमद ने निचली अदालत द्वारा पारित आदेशों पर पिछले महीने रोक लगा दी थी। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद ट्रायल कोर्ट ने मुस्लिम वकीलों को आरोपियों का प्रतिनिधित्व करने की अनुमति दी थी, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के आवेदन पर फैसला नहीं किया था।

न्यायाधीश शमीम अहमद ने 3 अप्रैल 2024 के आदेश में ट्रायल कोर्ट के जज त्रिपाठी के आचरण पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि न्यायाधीश स्थगन आदेश की गंभीरता को समझने में विफल रहे और बहुत ही मनमाने ढंग से आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि वकीलों की गैर-मौजूदगी में ट्रायल हुआ, क्योंकि वे एक निश्चित धर्म से संबंधित हैं।

हाई कोर्ट ने कहा, “यह धर्म के आधार पर ट्रायल कोर्ट की ओर से स्पष्ट भेदभाव को दर्शाता है, जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 15 में निहित मौलिक अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है।” न्यायालय ने यह भी कहा कि एक न्यायाधीश द्वारा व्यक्तिगत आचरण में लिप्त होकर कदाचार करना, उनकी न्यायिक अखंडता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

हाई कोर्ट ने आगे कहा, “यह न्यायिक कदाचार को दर्शाता है, जो एक कार्यात्मक न्यायपालिका के लिए आवश्यक चीज़ों के मूल को तोड़ देता है, जिसके तहत नागरिक मानते हैं कि उनके न्यायाधीश निष्पक्ष हैं। न्यायपालिका लोगों के विश्वास और भरोसे के बिना अस्तित्व में नहीं रह सकती। इसलिए, न्यायाधीशों को कानूनी और नैतिक मानकों के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।”

इसके बाद NIA के जज त्रिपाठी सोमवार (15 अप्रैल 2024) को न्यायाधीश शमीम अहमद के सामने पेश हुए और बिना शर्त माफी माँगी। उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने गलतफहमी के तहत आदेश पारित किया है और भविष्य में सतर्क रहेंगे। उनके वकील ने व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने के लिए कुछ समय माँगा, जिसके बाद अदालत ने उन्हें दो दिन का समय दिया है।

इस मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल 2024 को होगी। याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता मोहम्मद आमिर नकवी, जिया उल कय्यूम, अभिषेक सिंह और अजीत प्रताप सिंह ने किया। न्यायाधीश विवेकानन्द शरण त्रिपाठी का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने किया। वहीं, सरकार की ओर से अधिवक्ता शिवनाथ तिलहरी ने पैरवी की।

‘पूजा-पाठ पाखंडी करते हैं, इस देश में हजारों राम मंदिर’: रामनवमी पर सपा सांसद रामगोपाल यादव ने उगला जहर, लोगों ने बताया ‘रामद्रोही’

देश और दुनिया भर में आज बुधवार (17 अप्रैल 2024) को हिन्दू समाज रामनवमी का पर्व श्रद्धा एवं भक्ति भाव से मना रहा है। अयोध्या में रामभक्तों की भारी भीड़ उमड़ी है। इस मौके पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने राम मंदिर पर आपत्तिजनक बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि पूजा-पाठ पाखंडी लोग करते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि रामजन्मभूमि जैसे हजारों मंदिर हैं। उनके इस बयान की काफी आलोचना हो रही है।

रामगोपाल यादव बुधवार (17 अप्रैल 2024) को समाचार एजेंसी ANI से बात कर रहे थे। पत्रकार ने अयोध्या में मंदिर निर्माण के बाद प्रथम रामनवमी पर्व पर देश भर में हर्षोल्लास को लेकर सवाल किया। जवाब में रामगोपाल ने कहा, “रामनवमी तो हमेशा बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती रही है। जो कुछ लोगों ने इसे पेटेंट करा लिया है, उनकी बपौती नहीं है रामनवमी। करोड़ों लोग हजारों वर्षों से इसे मनाते आ रहे हैं।”

अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर पर भी सपा नेता रामगोपाल यादव ने आपत्तिजनक बयान दिया है। उन्होंने कहा, “एक राम मंदिर नहीं, हजारों राम मंदिर इस देश में हैं। इसमें (राम मंदिर में) तो इन्होंने (मोदी सरकार ने) अधूरा प्राण प्रतिष्ठा करवाया है। भगवान राम उन्हें दंड दें।” रामगोपाल ने मंदिर निर्माण के दौरान कुछ साधु-संतों द्वारा उठाई गई आपत्तियों का भी जिक्र किया।

पत्रकार ने रामगोपाल यादव से सवाल किया कि क्या वो रामनवमी पर कोई पूजा-पाठ कर रहे हैं। इसके जवाब में उन्होंने कहा, “पहले होती रही हो, लेकिन मैंने तो कभी पूजा नहीं किया। मैं दिखावा नहीं करता। मैं पाखंडी नहीं हूँ। पाखंडी लोग ये सब करते हैं।” रामगोपाल ने कहा कि वे भगवान का नाम लेते हैं। उन्होंने खुद को असली भक्त बताया है।

सोशल मीडिया पर समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव के इस बयान की खूब आलोचना हो रही है। दीपक शर्मा नाम के यूजर ने रामगोपाल यादव को चुनाव का इंतज़ार करने की नसीहत दी है। उन्होंने दावा किया है कि यादव समाज ही इस बार रामगोपाल यादव का विरोध करेगा। उन्होंने कहा, “इंतजार कर रामद्रोही, इंतजार कर।”

पत्रकार सुशांत सिन्हा ने रामगोपाल यादव से सवाल किया है कि रामनवमी में जो हिन्दू रामनवमी में पूजा कर रहे हैं, क्या वो सब पाखंडी हैं?

आशुतोष यादव अभिषेक ने रामगोपाल यादव के बयान को जहरीला करार दिया है। उन्होंने दावा किया है कि इस बार यादव समाज मुँह पर वोट की थप्पड़ मारकर जवाब देगा।

इन सभी के अलावा, X यूजर अजीत झा ने भी रामगोपाल के शब्दों पर आपत्ति जताई है। उन्होंने लिखा, “नाम रामगोपाल यादव। माता-पिता राम-कृष्ण की भक्ति में नाम रखा होगा। मगर सियासत के चक्कर में ये कह रहे हैं ‘पूजा करने वाले पाखंडी हैं’। सीधे-सीधे सनातन का अपमान नहीं तो क्या है? हिम्मत है तो नमाज पढ़ने या चर्च में जाने वालों को बारे में कुछ कह दें।”

नॉर्थ-ईस्ट को कॉन्ग्रेस ने सिर्फ समस्याएँ दी, BJP ने सम्भावनाओं का स्रोत बनाया: असम में बोले PM मोदी, CM हिमंता की थपथपाई पीठ

लोकसभा चुनाव 2024 के लिए प्रचार अभियान के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (17 अप्रैल, 2024) को असम के नलबाड़ी में एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने रामनवमी को ऐतिहासिक अवसर कह कर जनता को बधाई देते हुए अयोध्या में भव्य रामंदिर में रामलला के ‘सूर्य अभिषेक’ का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के इंतजार के बाद ये अवसर आया है। पीएम मोदी ने कहा कि 4 जून को नतीजा क्या होने जा रहा है, ये साफ दिखाई दे रहा है और इसलिए लोग कहते हैं – 4 जून, 400 पार! फिर एक बार मोदी सरकार।

पीएम मोदी ने कहा कि BJP वो पार्टी है, जो सबका साथ-सबका विकास के मंत्र पर चलती है। उन्होंने कहा कि NDA सरकार की योजनाओं में कोई भेदभाव नहीं होता, उनका लाभ हर किसी को मिलता है। साथ ही बताया कि अब NDA ने ठाना है कि देश के हर नागरिक तक पहुँच कर, जिस सुविधा का वो पात्र है, वो सुविधा उसे दी जाएगी। बकौल पीएम मोदी, आज पूरे देश में मोदी की गारंटी चल रही है और नॉर्थ-ईस्ट तो खुद ही मोदी की गारंटी का गवाह है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के नलबाड़ी में आगे कहा कि जिस नॉर्थ-ईस्ट को कॉन्ग्रेस ने सिर्फ समस्याएँ दी थीं, उस नॉर्थ-ईस्ट को BJP ने सम्भावनाओं का स्रोत बना दिया है। पीएम मोदी ने इस दौरान जनसभा में उपस्थित लोगों से कहा कि सभी अपना मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट जला कर भगवान राम को प्रणाम करें। इसके बाद सभी ने फ्लैशलाइट चालू की और ‘सूर्य तिलक’ का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि प्रभु राम के जन्मदिन मनाने के लिए भगवान सूर्य किरण के रूप में उतर रहे हैं, पूरे देश में उत्साह का माहौल है और 500 साल बाद अपने घर में श्रीराम बर्थडे मना रहे।

असम में पीएम मोदी ने भाजपा के संकल्प-पत्र के बारे में बताते हुए कहा कि कम दाम पर लोगों को सोलर पैनल दिए जाएँगे, ताकि उनका बिजली बिल जीरो हो जाएगा और साथ ही जब लोग इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदेंगे तो सोलर वाली बिजली से उसकी चार्जिंग भी होगी और ट्रेवलिंग/पेट्रोल-डीजल का खर्च बचेगा। पीएम मोदी ने स्वयंसहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं का जिक्र करते हुए कहा कि 3 करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाए जाने का लक्ष्य है। उन्होंने इस दौरान MSP बढ़ाने का जिक्र किया, साथ ही बताया कि पीएम-किसान के तहत असम के किसानों को 5400 करोड़ रुपए से अधिक मिले।

प्रधानमंत्री ने कहा, “मुस्लिम बहनों को तीन तलाक की टेंशन से हमने मुक्ति दिलाई, इस कुप्रथा के खिलाफ कानून बनने से न सिर्फ मुस्लिम बहनों बल्कि उनके पूरे परिवार को इसका फायदा मिला। असम का विकास इसका सबूत है कि जब नीयत सही हो तो नतीजे भी सही आते हैं। असम में 10 वर्षों में 2500 किलोमीटर नेशनल हाइवे बने हैं। आज देश का सबसे बड़ा रिवर ब्रिज भूपेन हजारिका के नाम पर असम में है, सबसे बड़ा रेलरोड ब्रिज यहीं हैं। असम के 5 जिलों में कैंसर अस्पताल खोलने की योजना चल रही है।”

पीएम मोदी ने बताया कि 90,000 करोड़ रुपए की लागत से गैस ग्रीड तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मानस नेशनल पार्क एन्ड टाइगर रिजर्व की बात करते हुए कहा कि उनकी सरकार में बाघों की संख्या बढ़ी है, वन क्षेत्र बढ़ा है। उन्होंने बताया कि राइनो का शिकार रुका है, वो काजीरंगा में रात में रुकने वाले पहले पीएम हैं। असम के महान योद्धा लाचित बरफुकन की 400वीं जयंती देश भर में मनाई गई, यहाँ के गमछा का ब्रांड एम्बेस्डर वो खुद हैं। उन्होंने कहा कि वो असम के कपड़े पहनते हैं तो कॉन्ग्रेस वाले मजाक बनाते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि CM हिमंता बिस्वा सरमा ने इतना काम किया है कि असम में कॉन्ग्रेस का स्कोप ही खत्म हो गया है। पीएम मोदी ने इस दौरान ये भी कहा कि 2014 में वो एक उम्मीद लेकर आए थे, 2019 में जब वो आए ततो एक विश्वास लेकर आए, और 2024 में वो असम की धरती पर गारंटी लेकर आए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि अगले 5 वर्षों में गरीबों के लिए 3 करोड़ और नए मकान बनाए जाएँगे। उन्होंने कहा कि इसका फायदा बिना भेदभाव सबको मिलेगा।

घर में पानी माँगने आया मस्जिद का इमाम, महिला को अकेले देख किया रेप: FIR के बाद हुआ फरार, छत्तीसगढ़ के सूरजपुर की घटना

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में एक मस्जिद के इमाम पर एक महिला से घर में घुस कर रेप करने का आरोप लगा है। आरोपित इमाम का नाम गुलाम गौस है जो पानी माँगने के लिए महिला के घर में घुस गया था।

पीड़िता द्वारा शिकायत करने पर उसके पति को जान से मार डालने की धमकी भी दी गई। घटना बुधवार (10 अप्रैल, 2024) की है जिसकी शिकायत पीड़िता ने 5 दिनों बाद दर्ज करवाई है। केस दर्ज होते ही इमाम फरार हो गया है जिसकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना सूरजपुर जिले के चौकी क्षेत्र बसदेयी की है। यहाँ के एक गाँव में बनी मस्जिद में इमाम गुलाम गौस स्थानीय लोगों को नमाज़ पढ़ाता है। मस्जिद के कुछ ही दूर पर 26 वर्षीय पीड़िता का घर है। इमाम और पीड़िता के पति में जान-पहचान थी। 10 अप्रैल की शाम इमाम पीड़िता के घर पहुँचा। तब महिला घर पर अकेली थी। गुलाम गौस पीड़िता से उसके पति के बारे में पूछते हुए घर के अंदर घुस गया। पहले से परिचय होने के नाते महिला ने उसे घर में आने दिया।

पीड़िता ने इमाम को बताया कि उनके शौहर घर पर नहीं है। इस पर गुलाम गौस ने पानी माँगा जिसे लेने के लिए पीड़िता घर के अंदर चली गई। महिला जब पानी ले कर लौटी तो इमाम ने उसे बदनीयती से पकड़ लिया। पीड़िता ने विरोध करना चाहा तो उसके शौहर को जान से मार डालने की धमकी दी गई।

इसके बाद गुलाम गौस ने पीड़िता के घर पर ही उसका रेप किया। रेप के बाद वह महिला को धमकाते हुए भाग निकला। इस घटना के बाद दुःखी पीड़िता गुमसुम रहने लगी। धीरे-धीरे उसकी तबियत भी बिगड़ने लगी। जब उसके शौहर ने इस कारण पूछा तो इमाम की सच्चाई खुली।

मामले की जानकारी होने के बाद पीड़िता के शौहर ने नजदीकी बसदेयी पुलिस चौकी में इमाम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस शिकायत पर गुलाम गौस के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। यह FIR IPC की धारा 376, 342, 458 और 506 के तहत दर्ज की गई है। FIR दर्ज होते ही गुलाम गौस फरार हो गया। पुलिस इमाम की तलाश में दबिश दे रही है। मीडिया से बात करते हुए SHO सूरजपुर विमलेश दुबे ने आरोपित को जल्द गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया है। आरोपित और पीड़िता एक ही समुदाय से हैं।