राजस्थान के अलवर में एक नाबालिग दलित बालिका को एक मुस्लिम युवक जबरन अपहरण करके अपने साथ ले गया। मुस्लिम युवक ने इसके बाद नाबालिग को इस्लाम कबूल करवा कर उसके साथ निकाह कर लिया। नाबालिग के साथ जबरन दुष्कर्म भी किया गया। बालिका के परिजनों ने इस मामले में मुस्लिम युवक के विरुद्ध मामला दर्ज करवाया है।
जानकारी के अनुसार, अलवर के बगड़ का तिराहा की रहने वाली एक 17 वर्षीय दलित बालिका 13 अप्रैल, 2024 को अपने घर से पास के बाजार के लिए गई थी। बालिका ने कहा था कि वह अपनी पायल सही करवाने के लिए बाजार जा रही है। हालाँकि, बालिका इसके बाद शाम तक नहीं लौटी। परिजनों ने इसके बाद उसकी तलाश चालू की।
परिजनों को तलाश करने पर पता चला कि पास के गाँव का साबिर बालिका को लेकर गया था। इस जानकारी के बाद बालिका के परिजन साबिर के घर पहुँचे। साबिर के परिजनों ने दलित परिवार को गुमराह किया और बताया कि बालिका को ढूँढने में उसकी मदद करेंगे।
इसके बाद भी परिजनों को बालिका का कोई सुराग नहीं लगा। इसके बाद वह एक बार फिर साबिर के घर पुलिस के साथ पहुँचे जहाँ उन्हें पता चला कि उनकी नाबालिग बेटी को इस्लाम कबूल करवा दिया गया है और जबरन उसका साबिर के साथ निकाह करवा दिया गया है।
दलित बालिका के परिजनों ने आरोप लगाया कि साबिर ने उनकी बच्ची के साथ दुष्कर्म भी किया है। इस मामले में दलित बालिका के परिजनों ने रामगढ़ थाने में FIR दर्ज करवाई है। पुलिस ने साबित के खिलाफ POCSO और अपहरण समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया है। साबिर के विरुद्ध SC/ST एक्ट में भी मामला दर्ज किया गया है।
पीड़ित परिवार के साथ उनके समाज के लोग भी काफी आक्रोशित हैं। पुलिस का कहना है कि वह अभी इस मामले में जाँच कर रही है। मामले की जाँच पुलिस उपाधीक्षक ओमप्रकाश विश्नोई को सौंपी गई है।
रामनवमी को लेकर इस बार लोगों का उत्साह चरम पर है। सन् 1527 के बाद ये पहली बार है जब अयोध्या के भव्य मंदिर में रामलला विराज रहे हैं और रामनवमी मनाई जा रही है। ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ ने तस्वीरें जारी कर के जानकारी दी है कि श्रीरामनवमी की पावन बेला में राम जन्मभूमि मंदिर में प्रभु श्री रामलला सरकार का दिव्य अभिषेक किया गया। इसमें देखा जा सकता है कि दुग्ध और चंदन समेत विभिन्न पदार्थों से रामलला का अभिषेक किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस अवसर पर देशवासियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा, “यह पहली रामनवमी है, जब अयोध्या के भव्य और दिव्य राम मंदिर में हमारे राम लला विराजमान हो चुके हैं। रामनवमी के इस उत्सव में आज अयोध्या एक अप्रतिम आनंद में है। 5 शताब्दियों की प्रतीक्षा के बाद आज हमें ये रामनवमी अयोध्या में इस तरह मनाने का सौभाग्य मिला है। यह देशवासियों की इतने वर्षों की कठिन तपस्या, त्याग और बलिदान का सुफल है।”
साथ ही प्रधानमंत्री ने ‘राम काज कीन्हें बिनु मोहि कहाँ विश्राम’ वाली रामचरितमानस की चौपाई के साथ रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा वाली अपनी तस्वीर भी शेयर की। साथ ही पीएम मोदी ने भगवान श्रीराम को लेकर अपने वक्तव्य का वीडियो भी शेयर किया है। उन्होंने कहा कि राम भारत की आस्था है, राम भारत का आधार है। साथ ही वीडियो में सोनू निगम द्वारा गाया गया भजन भी है। पीएम मोदी कहते हैं कि ये पहली रामनवमी है जब अयोध्या में भव्य राम मंदिर में रामलला विराजमान हो चुके हैं।
उन्होंने बताया, “राम भारत की आस्था है, राम भारत का आधार है, राम भारत का विचार है, राम भारत का विधान है, राम भारत की चेतना है, राम भारत का चिंतन है, राम भारत की प्रतिष्ठा है, राम भारत का प्रताप है। राम प्रवाह है, राम प्रभाव है, राम नेति भी है, राम नीति भी है। राम नित्यता भी है, राम निरंतरता भी है। राम विभु है, विशद है, राम व्यापक है, विश्व है, विश्वात्मा है। राम विवाद नहीं, राम समाधान है।” उन्होंने प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दौरान ये बातें कही थीं। रामनवमी पर दोपहर में रामलला का ‘सूर्य तिलक’ भी होना है।
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से लव जिहाद का एक काफी गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ के सतारा पुलिस स्टेशन में ताहेर पठान, तैयब पठान, आयेशा पठान और लैलाबी पठान के खिलाफ एक 27 वर्षीय हिन्दू बालिका को जानबूझ कर फंसाने और उसे इस्लाम में धर्मान्तरित करने का मामला सामने आया है।
मुख्य आरोपित ताहेर पठान ने युवती से हिन्दू बन कर पहचान बढ़ाई और उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाए। आरोपित ने हिन्दू युवती को बुर्का पहनने गोमांस खाने पर मजबूर किया। ताहेर ने लड़की को इस्लाम में भी परिवर्तित किया। पुलिस ने इस मामले में धारा 376, 376 (2), 377, 420, 323, 504, 506 और 34 के तहत मामला दर्ज किया है।
ऑपइंडिया ने इस मामले में दर्ज की गई FIR की कॉपी हासिल की है। FIR में दी गई जानकारी के अनुसार, हिन्दू युवती की मुलाक़ात ताहेर से एक शोरूम में 2020 में हुई थी। ताहेर ने यहाँ हिन्दू युवती से खुद को एक गुजराती हिन्दू बताया था। ताहेर ने हिन्दू युवती को बताया कि उसका नाम समर पटेल है और उसकी शादी भी नहीं हुई है। इसके बाद दोनों में जान पहचान बढ़ गई और आपस में शारीरिक सम्बन्ध भी बन गए।
FIR में बताया गया है कि ताहेर हिन्दू पीड़िता की मर्जी के बगैर लगातार उससे शारीरिक सम्बन्ध बनाता रहा। उसने हिन्दू युवती की अभद्र वीडियो भी बनाई और अपनी बात मनवाने के लिए धमकाता रहा। पूरे मामले के दो वर्षों के बाद हिन्दू पीड़िता को पता चला कि समीर पटेल असल में ताहेर पठान है।
जब हिन्दू पीड़िता ने ताहेर से रिश्ता खत्म करने की बात तो उसने धमकाया कि वह उसकी निजी फोटो इन्टरनेट पर लीक कर देगा। ताहेर ने हिन्दू युवती को धमका कर इस्लाम में धर्मान्तरित करवाया और निकाह करने का दबाव डाला। इस दौरान हिन्दू पीड़िता गर्भवती भी हो गई। ताहेर पठान ने हिन्दू युवती से मारपीट की, उसे प्रताड़ित किया और उसके बच्चे की कोख में ही हत्या कर दी। इसके बाद उसका धर्म परिवर्तन करवाया और उसे गोमांस खाने पर मजबूर किया और बुर्का पहनाया।
पीड़िता ने FIR में बताया, “मुझे एक मौलाना के पास ले जाया गया जहाँ मुझे एक महीने तक एक पेय पिलाया गया, इससे मुझे नशा आ जाता था। इसके बाद मुझे नमाज अदा करवाई जाती थी और कुरान पढ़वाई जाती थी।” पीड़िता को यह भी पता चला कि असल में ताहेर पठान पहले से ही शादीशुदा था और उसके 4 बच्चे थे। उसने हिन्दू पीड़िता को फंसाया और इस काम में उसके पिता तैयब पठान, उसकी माँ लैलाबी पठान और उसकी पहली बीवी आयेशा पठान ने भी साथ दिया और उसके साथ मारपीट की।
ऑपइंडिया द्वारा जुटाई जानकारी के अनुसार, पीड़िता शिकायत पहलेही दर्ज करवाना चाहती थी लेकिन उसका किसी ने साथ नहीं दिया। हिन्दू समुदाय के कुछ लोग और सुदर्शन टीवी का एक रिपोर्टर बाद में उसकी सहायता के लिए आगे आया और लव जिहाद के इस मामले में FIR दर्ज करवाई। अब इस मामले में पुलिस आगे जाँच कर रही है।
म्यांमार में कैसे रोहिंग्या मुस्लिमों ने 2017 में बड़ी संख्या में हिन्दुओं और बौद्धों का नरसंहार किया था। अब एक बार फिर से रखाइन प्रान्त में हुई उस घटना को इस्लामी आतंकी दोहराने की कोशिश कर रहे हैं। म्यांमार के आरकान प्रांत में 1600 से भी अधिक हिन्दुओं एवं 120 बौद्ध समाज के लोगों को बंधक बनाया गया है। मामला बुथिडुआंग का है। इलाके में अराजकता और अस्थिरता का माहौल है। अब सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि फ़ौज ही ये सब करवा रही है।
‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, सूत्रों ने बताया कि म्यांमार की फ़ौज की तरफ से इस्लामी कट्टरपंथियों को ये काम सौंपा गया है कि वो मुल्क के स्थानीय समुदायों को आतंकित करें। धर्म को आधार बना कर नरसंहार की साजिश रची जा रही है। इसी क्रम में 1600 से अधिक हिन्दुओं और 120 से अधिक बौद्धों को बंधक बनाया गया है। अब इनकी रिहाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इलाके में मजहबी एवं नस्लीय दंगों के कारण लोगों को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ रहा है।
गुरुवार (11 अप्रैल, 2024) को 2 युवकों की लाश पड़ी मिली, जिनकी हत्या गला रेत कर की गई थी। नवंबर 2023 से ही म्यांमार की फ़ौज आराकान आर्मी से लड़ रही है और उसके बाद ये पहली इस तरह की घटना थी। म्यांमार की फ़ौज ने ‘आराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी (ARSA)’ और ‘आराकान रोहिंग्या आर्मी (ARA)’ को ‘आराकान आर्मी (AA)’ के खिलाफ लड़ने के लिए हथियार से लेकर सैन्य प्रशिक्षण तक दिया है। रोहिंग्या आतंकी न सिर्फ घरों को लूट रहे हैं, बल्कि लोगों का अपहरण कर रहे हैं और उनके घर को आग के हवाले भी कर दे रहे हैं।
Myanmar Rohingyas groups have held 100s of Hindu & Baudha hostages in thr Rekhine region.
Mmr military regime provided arms to R trrst orgs.
Just few years back ARSA trrsts massacred 99 Hindus. This is story shouldn't be forget while keeping illegal infiltration in mind.
बागी समूहों ने रोहिंग्या संगठनों से अपील की है कि वो धार्मिक विभाजन का शिकार न बनें, साथ ही बिना जाति-धर्म का भेदभाव किए बिना सभी नागरिकों की रक्षा के लिए खुद को प्रतिबद्ध भी बताया है। 2017 में रखाइन में 100 से अधिक हिन्दुओं का बेरहमी से क़त्ल कर दिया गया था। इनमें कई महिलाएँ और बच्चे भी थे। म्यांमार की फ़ौज ने AA के खिलाफ रोहिंग्या जनसमूह का विरोध प्रदर्शन भी करवाया था। अब मौक़ा पाकर यही रोहिंग्या हिन्दुओं एवं बौद्धों का दमन कर रहे हैं।
ब्रिटेन में एक स्कूल की मुस्लिम छात्रा ने स्कूल परिसर में नमाज बैन के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की, जिस पर उसे झटका लगा है। हाई कोर्ट ने छात्रा की अपील की खारिज कर दिया और साफ कहा कि अगर स्कूल में पढ़ना है तो स्कूल के नियमों के हिसाब से ही चलना होगा। अगर स्कूल का कोई भी नियम छात्रा या उसके माता-पिता को नहीं पसंद तो वो स्कूल छोड़ने के लिए आजाद हैं।
ये मामला ब्रिटेन के सबसे सख्त स्कूलों में से एक ब्रेंट में स्थिल मिशेला कम्यूनिटी स्कूल से जुड़ा है। इस स्कूल में धार्मिक शिक्षा पर सख्ती से रोक है। इस स्कूल के कंपाउंड में किसी भी तरह के धार्मिक कार्य करने पर रोक है। इस स्कूल में 700 बच्चे पढ़ते हैं, जिसमें आधे से अधिक मुस्लिम हैं। इस स्कूल में नमाज पर बैन लगाने के बावजूद मार्च 2023 में 30 स्कूली बच्चों ने अपना स्वेटर बिछाया और उसपर नमाज पढ़ी। इसके बाद स्कूल ने कड़ा कदम उठाया और सभी को चेतावनी दी। इसी के बाद स्कूली छात्रा ने हाई कोर्ट में अपील की थी।
इस मामले में हाई कोर्ट की जस्टिस लिंडेन ने 83 पेजों के फैसले में कहा कि इस स्कूल में एडमिशन से पहले सभी बच्चों और उनके माता-पिता को बताया जाता है कि इस स्कूल में धार्मिक क्रिया कलापों की कोई जगह नहीं है। इस स्कूल को गैर आस्था स्कूल के तौर पर बनाया गया है। हाई कोर्ट के फैसले के बाद संस्थापक और मुख्य शिक्षक कैथरीन बीरबलसिंह ने कहा कि यह फैसला “सभी स्कूलों की जीत” है।
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान स्कूल ने कहा, “स्कूलों को एक बच्चे और उसकी माँ को अपना दृष्टिकोण बदलने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए क्योंकि उन्होंने फैसला किया है कि उन्हें स्कूल में कुछ पसंद नहीं है। अगर माता-पिता को मिशेला जैसी चीज़ पसंद नहीं है, तो उन्हें अपने बच्चों को हमारे पास भेजने की ज़रूरत नहीं है।”
भारत में हिजाब को लेकर हुआ था जबरदस्त बवाल
बता दें कि फरवरी 2022 में कर्नाटक के उडुपी में एक सरकारी कॉलेज में क्लासरूम में हिजाब पहनने पर बैन लगाने के बाद विवाद शुरू हुआ था। इस नियम को और भी कई संस्थानों ने लागू कर दिया और बाद में उस समय की बसवराज बोम्मई सरकार ने एक आदेश जारी किया। इस आदेश में शैक्षिक संस्थानों के अंदर हिजाब पहनने पर बैन लगा दिया गया था। आदेश में कहा गया कि ऐसी ड्रेसिंग को अनुमति नहीं दी जाएगी, जो समानता, अखंडता और सार्वजनिक कानून व्यवस्था को खराब करे। आदेश को लेकर विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए, जिसके चलते कुछ दिनों के लिए शैक्षिक संस्थानों को बंद करना पड़ा।
फिर यह मामला हाईकोर्ट पहुँचा और 15 मार्च, 2022 को फैसला आया। हाई कोर्ट ने कहा कि हिजाब पहनना इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ऋतुराज अवस्थी ने राज्य सरकार के इस आदेश को भी सही ठहराया कि स्कूल-कॉलेज में यूनिफॉर्म का पूरी तरह से पालन होना चाहिए। ये मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुँचा था और सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था। हालाँकि 2023 में विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस की जीत हुई सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री बनने के बाद सिद्धारमैया ने स्कूल-कॉलेज में हिजाब पहनने पर लगे बैन को हटा दिया।
जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव 2024 की तारीख़ें नज़दीक आ रहीं हैं वैसे ही चुनावी सरगर्मी भी अपने चरम पर जा रहीं हैं। जहाँ कुछ दल देश और विकास को अपना मुद्दा बना चल रहे हैं तो कुछ लोगों की राजनीति महज अपनी जाति के ही इर्द-गिर्द घूम रही है। जातिगत जनगणना जैसी माँगों के बीच जातिवादी राजनीति में ठाकुर पूरन सिंह का नाम हाल ही में उभर कर सामने आया है। पूरन सिंह पश्चिम उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में राजपूतों (क्षत्रियों) के सम्मेलन करवा रहे हैं। इन सभी सम्मेलनों में जो एक चीज कॉमन है वो है भारतीय जनता पार्टी का विरोध।
ऑपइंडिया ने जब पूरन सिंह के पुराने जीवन के बारे में पड़ताल की तो पता चला कि उन पर खुद ही एक राजपूत (क्षत्रिय) को गोली मारने का केस दर्ज है। 6 साल पहले एक क्षत्रिय पर हुए इस हमले में पूरन सिंह का साथ एक मुस्लिम व्यक्ति ने दिया था। ठाकुर पूरन सिंह के नेतृत्व में सहारनपुर, मेरठ और मुजफ्फरनगर आदि जिलों में ‘स्वाभिमान महापंचायत’ नाम से कई सम्मेलन आयोजित किए गए। इन सम्मेलनों में उन्होंने उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों से भी क्षत्रिय समाज के लोगों के शिरकत करने का दावा किया।
सबसे हालिया पंचायत मंगलवार (16 अप्रैल, 2024) को मेरठ के खेड़ा गाँव में हुई। इन सभी पंचायतों में ठाकुर पूरन सिंह ने तमाम लोगों के आगे खुद को क्षत्रिय समाज का हमदर्द साबित करने की कोशिश करते हुए भारतीय जनता पार्टी को वोट न देने की अपील की। खेड़ा की पंचायत में तो पूरन सिंह ने कुछ अन्य मंचासीन लोगों के साथ लोटे में नमक डाल कर शपथ भी ली। इन BJP विरोध स्वरूपी पंचायतों की वीडियो और खबरें फैक्ट चेक के नाम पर मजहबी एजेंडा चलाने वाले मोहम्मद जुबैर जैसे लोग सबसे ज्यादा शेयर कर रहे हैं।
भले ही आज ठाकुर पूरन सिंह घूम-घूम कर क्षत्रिय स्वाभिमान पंचायत कर रहे हैं लेकिन पूर्व में उन पर साथियों सहित राजपूत समाज के ही एक व्यक्ति पर गोली चलाने की FIR दर्ज हो चुकी है। यह घटना 13 जनवरी, 2018 की है। तब उत्तर प्रदेश के शामली जिले में पड़ने वाले थाना क्षेत्र थाना भवन में क्षत्रिय वर्ण के सतीश कुमार पुंडीर ने शिकायत दर्ज करवाई थी। अपनी शिकायत में उन्होंने बताया था कि 13 जनवरी, 2018 को ही शाम लगभग 5 बजे खुद को भारतीय किसान संगठन का अध्यक्ष बताने वाले ठाकुर पूरन सिंह और राजू सिंह 4-5 वाहनों में भर कर उनके पास आए थे।
पूरन ने सतीश सिंह पुंडीर से नाराजगी जताते हुए पूछा कि उन्होंने राजू सिंह के खिलाफ थाने में शिकायत क्यों दी। सतीश सिंह ने ठाकुर पूरन सिंह को बैठ कर बातचीत का प्रस्ताव दिया। थोड़ी देर गन्ना विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में बातचीत हुई थी लेकिन पूरन सिंह के साथी राजू सिंह नाम के व्यक्ति ने बीच में विवाद शुरू कर दिया। आरोप है कि राजू सिंह द्वारा जब गाली-गलौज दी जाने लगी तो सतीश सिंह पुंडीर उठ कर वहाँ से चले गए।
सतीश सिंह को जाता देख कर राजू सिंह अपने साथियों के साथ मिल कर उनकी तरफ मारने दौड़ा। इस दौरान हमलावरों ने सतीश की तरफ बंदूक तान कर जान से मारने की नीयत से गोली भी चला दी थी।
सतीश सिंह पर गोली चलाने वालों में हाजी अफसर भी
सतीश सिंह ने अपनी शिकायत में बताया था कि उन पर गोली चलाने वालों में पूरन सिंह का साथी और सहयोगी हाजी अफसर अली भी शामिल था। हाजी अफसर अली मूल रूप से शामिल के गाँव भैंसानी का निवासी है। पूरन सिंह, राजू और हाजी अफसर के साथ मुजफ्फरनगर जिले के अंकुर राणा और रोहित को भी हमले में नामजद किया गया था। इनके अतिरिक्त 20-25 अन्य अज्ञात हमलावरों का भी FIR में जिक्र है। माना जा रहा है कि इस अज्ञात भीड़ में ज्यादातर पूरन सिंह के साथी हाजी अफसर अली के गुर्गे थे। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।
FIR कॉपी
तब शामली पुलिस ने ठाकुर सतीश सिंह पुंडीर पर जानलेवा हमले के आरोप में पूरन सिंह, राजू सिंह, अंकुर राणा, रोहित और हाजी अफसर को नामजद करते हुए 20-25 अज्ञात हमलावरों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इन सभी पर IPC की धारा 147, 148, 149, 307, 323, 504 और 452 के तहत कार्रवाई की गई थी। 16 मई, 2018 को पुलिस ने इस केस में अपनी जाँच पूरी कर के चार्जशीट दाखिल कर दी थी। पुलिस ने अपनी जाँच में सतीश सिंह पुंडीर द्वारा ठाकुर पूरन सिंह और उनके साथी अफसर अली सहित अन्य नामजदों पर लगाए गए आरोप सही पाए थे।
बवाल की आशंका से नहीं हुई गिरफ्तारी, सजा देने की माँग
16 मई को शामली की कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने के दौरान पुलिस ने पाँचों नामजद आरोपितों की गिरफ्तार न किए जाने का कारण भी बताया था। पुलिस ने बताया कि हमलावर पूरन सिंह व अन्य आरोपित किसान संगठन से जुड़े हुए हैं इसलिए उनकी गिरफ्तारी से समाज में शांति व्यवस्था प्रभावित होती। इसी के साथ पुलिस ने उस समय लोकसभा उपचुनाव भी पास होने की दलील दी थी। पुलिस ने अदालत से पूरन सिंह, हाजी अफसर अली, अंकुर राणा, रोहित, और राजू सिंह को दंडित करने की भी गुजारिश की है।
अपनी शिकायत में पीड़ित ठाकुर सतीश सिंह पुंडीर ने पूरन सिंह व हाजी अफसर अली सहित अन्य आरोपितों द्वारा खुद पर दोबारा हमले की भी आशंका जताई थी। उन्होंने बताया था कि चीनी मिल के गार्डों के अलावा उत्तर प्रदेश पुलिस ने मौके पर पहुँच कर उनकी जान बचाई थी। सतीश सिंह ने भी आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की थी।
मथुरा की बीजेपी सांसद हेमा मालिनी पर की गई अभद्र टिप्पणी के मामले में चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। चुनाव आयोग ने कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला पर 48 घंटे का प्रतिबंध लगा दिया है। रणदीप सुरजेवाला अगले 48 घंटों तक किसी भी तरह की चुनावी गतिविधि का हिस्सा नहीं बन पाएँगे और चुनाव प्रचार से भी दूर रहेंगे। मंगलवार (16 अप्रैल 2024) की शाम 6 बजे से अगले 48 घंटों तक रणदीप सिंह सुरजेवाला न तो प्रचार कर पाएँगे और न ही मीडिया से संवाद कर पाएँगे।
कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला ने हरियाणा के कैथल के गाँव फरल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “हमें लोग विधायक, एमपी क्यों बनाते है। हम हेमा मालनी तो हैं नहीं कि $%$#@ के लिए बनाते है।”
रणदीप सुरजेवाला के खिलाफ उठाए कदमों में 48 घंटों तक का पूर्ण बैन है, जिसमें वो रैली, जनसभा नहीं कर सकेंगे और न ही सार्वजनिक बैठकें, रोड शो, मीडिया को इंटरव्यू दे सकेंगे। चुनाव आयोग ने अपने नोटिस में कहा है, “आयोग, भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 और इस संबंध में सक्षम अन्य सभी शक्तियों के तहत, उन्हें (रणदीप सुरजेवाला को) 16 अप्रैल (मंगलवार) शाम 6:00 बजे से 48 घंटे तक किसी भी सार्वजनिक बैठक, सार्वजनिक जुलूस, सार्वजनिक रैलियाँ, रोड शो और साक्षात्कार, मीडिया में सार्वजनिक बयान देने से रोकता है।”
बता दें कि सुरजेवाला ने हरियाणा के कैथल (कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र) में अभद्र बयान गिया था। उन्होंने इंडिया गुट के उम्मीदवार सुशील गुप्ता के समर्थन में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था, ‘हमें लोग विधायक, सांसद क्यों बनाते हैं? हम हेमा मालिनी तो हैं नहीं कि चाटने के लिए बनाते हैं।’ अपने बयान पर विवाद बढ़ने के बाद सुरजेवाला ने सफाई दी थी और कहा था, ‘मेरा इरादा उनका (हेमा मालिनी) अपमान करना या फिर उन्हें आहत करना नहीं था। वायरल वीडियो में मेरे बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है।’ उनके इस बयान पर 9 अप्रैल को चुनाव आयोग ने कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
सुप्रिया श्रीनेत को लगाई थी फटकार
बता दें कि इस महीने की शुरुआत में चुनाव आयोग ने कॉन्ग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत को फटकार लगाई थी। इस मामले में सुप्रिया श्रीनेत के इंस्टा अकॉउंट से कंगना रनौत की फोटो शेयर करके उसपर अभद्र टिप्पणी की गई थी। इसमें कहा गया था कि मंडी में भाव क्या चल रहा है। इसके बाद इस मामले में बहुत बवाल हुआ और शिकायत चुनाव आयोग तक पहुँची। इस बीच सुप्रिया ने भी एक वीडियो डालकर इस पर सफाई दी। हालाँकि इससे फायदा कुछ नहीं हुआ।
अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई ने एजेण्डाबाज पत्रकार करण थापर का एक टेक्स्ट मैसेज सार्वजनिक किया गया, जिसमें उन्होंने कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर के खिलाफ कदम न उठाने की चेतावनी दी थी। जय अनंत देहाद्राई ने आरोप लगाया था कि ताज होटल में पूर्व केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर ने एक महिला का यौन शोषण किया। जय अनंत देहाद्राई, TMC की महुआ मोइत्रा के पूर्व प्रेमी हैं। उनकी ही शिकायत पर महुआ मोइत्रा की न सिर्फ सांसदी गई, बल्कि उनके खिलाफ ED-CBI की जाँच भी शुरू हुई।
करण थापर ने ‘The Wire’ के माध्यम से बयान जारी करते हुए कहा कि ये टेक्स्ट मैसेज उन्होंने अक्टूबर 2022 में भेजा था, जिसे जय अनंत देहाद्राई अब सार्वजनिक कर रहे हैं ताकि इसके कंटेंट को तोड़-मरोड़ सकें और इसका गलत मतलब प्रचारित कर सकें। करण थापर का कहना है कि उस समय शशि थरूर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ रहे थे और उन्हें बदनाम करने की मंशा के साथ जय अनंत देहाद्राई ने कई अज्ञात महिलाओं के साथ यौन शोषण किए जाने का आरोप लगाते हुए मैसेज भेजे।
करण थापर का कहना है कि जय अनंत देहाद्राई ने उनके जिस मैसेज का स्क्रीनशॉट शेयर किया है, उसमें जिस महिला का नाम छिपाया गया है उसे वो अच्छी तरह जानते हैं और उन्होंने उस महिला से संपर्क किया था तो उसने किसी भी प्रकार के ऐसे आरोपों को नकार दिया। बकौल करण थापर, उन्होंने जय अनंत देहाद्राई को कॉल किया ताकि वो उन्हें शशि को बदनाम करना बंद करें, लेकिन उन्होंने कॉल नहीं उठाया तो टेक्स्ट मैसेज करना पड़ा, जिसे अब सार्वजनिक कर दिया गया है।
करण थापर ने अपने बयान में लिखा है, “मेरा इरादा सादा और स्पष्ट था – जय अनंत देहाद्राई को शशि को बदनाम करने से रोकना और जिस महिला का नाम छिपाया गया है उसकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने से रोकना। जय अनंत देहाद्राई बिना कुछ छिपाए मैसेज सार्वजनिक करते तो सब कुछ स्पष्ट होता। उन्होंने दावा किया कि मैं ‘गंदे शशि’ को बचा रहा हूँ, ये बेवकूफाना है क्योंकि उन्हें बचाव की ज़रूरत नहीं है और मैं नहीं मानता कि वो किसी भी तरह से गंदे हैं। मैं सिर्फ उस महिला को बचा रहा था जिसका नाम छिपाया गया है।”
करण थापर का कहना है कि अगर वकील जय अनंत देहाद्राई इज्जतदार व्यक्ति हैं तो उन्होंने बिना कुछ छिपाए पूरा मैसेज सार्वजनिक करना चाहिए। साथ ही उन्होंने इस पर हैरानी जताई कि लोकसभा चुनाव 2024 से पहले ही इस मैसेज को क्यों सार्वजनिक किया गया है। जय अनंत देहाद्राई ने करण थापर के बयान का जवाब देते हुए कहा कि वो शशि से बात में निपटेंगे। फिर उन्होंने करण थापर के पलटवार का जवाब जारी करते हुए कहा कि वो उनके बयान से निराश हैं।
जय अनंत देहाद्राई के अनुसार, करण थापर ने एक आदतन यौन अपराधी का बचाव करने के बाद प्रायश्चित करने की बजाए उन्होंने झूठ बोलना और उनका बचाव करना चुना है। उन्होंने कहा कि करण थापर का टेक्स्ट मैसेज एक दुष्ट व्यक्ति का बचाव करने के लिए थे, उन्हें अपनी हरकत पर भयाकुल होना चाहिए, शर्म आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसे और स्पष्ट करने की ज़रूरत नहीं है, करण थापर का स्वागत है कि वो उनके द्वारा भेजे गए मैसेज सार्वजनिक करें लेकिन सच्चाई है कि ऐसा कोई मैसेज है ही नहीं।
जय अनंत देहाद्राई ने कहा, “करण थापर ने कई बार फोन कॉल कर के मुझसे याचना की कि मैं चुप रहूँ, क्योंकि इससे कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में उनके प्रदर्शन पर असर पड़ेगा। मैं इससे परेशान हुआ। दबाव के कारण मैंने उनका कॉल उठाने बंद कर दिए, जिसकी व्याकुलता उनके मैसेज में झलक रही है। करण थापर मुझे इज्जतदार होने की सलाह देते हैं। जबकि उन्होंने ही पीड़िता की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने का काम किया। उलटा उन्होंने मुझे ये कह कर चुप कराने की कोशिश की कि इससे पीड़िता परेशान होगी।”
बता दें कि जय अनंत देहाद्राई ने जो स्क्रीनशॉट शेयर किया था, उसमें करण थापर ने उन्हें लिखा था, “जय, चूँकि तुम मुझसे बात नहीं करते हो इसीलिए मैंने सोचा कि मैं तुम्हें टेक्स्ट करूँ। अगर तुम सब कुछ सार्वजनिक कर देते हो और उनकी प्रतिष्ठा व राजनीतिक करियर को हानि पहुँचाओगे, तबाह करोगे तो इसका शशि पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि वो चुनाव हारने जा रहे हैं। तुमने मुझे बताया है कि उन्होंने इससे पहले कई बार ऐसा किया, तो मुझे लगता है कि लोग इस बारे में जानते हैं।”
छत्तीसगढ़ के कांकेर में बीएसएफ ने स्थानीय पुलिस और स्पेशल फोर्स के साथ मिलकर बड़ा ऑपरेशन चलाया, जिसमें टॉप कमांडर समेत कम से कम 29 नक्सली ढेर हो गए हैं। मारे गए टॉप नक्सल कमांडर का नाम शंकर राव था, जिसपर 25 लाख का ईनाम घोषित था। गुप्त सूचना के आधार पर बीएसएफ ने कांकेर जिले के छोटेबेठिया पुलिस थाना इलाके में ये अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान तीन सुरक्षाबल भी घायल हो गए। सुरक्षा बलों ने 29 नक्सलियों के शवों को बरामद कर लिया है।
सूत्रों का कहना है कि इस ऑपरेशन में और भी नक्सली मारे गए या घायल हुए हैं। अभी भी पूरे इलाके में सर्च अभियान चलाया जा रहा है। 29 शवों के बरामद होने के अलावा भारी मात्रा में हथियारों की बरामदगी भी हुई है।
#UPDATE | Bodies of 29 naxals recovered in the ongoing encounter between Police and Naxals in the forest area of the Chhotebethiya police station limits of the Kanker district.#Chhattisgarh
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस और नक्सलियों के बीच इस मुठभेड़ में 7 एके सीरीज की राइफल्स, इंसास राइफल्स और 3 लाइट मशीन गन भी बरामद हुई है। इस मुठभेड़ को खुफिया सूचना के आधार पर बीएसएफ और फॉरेस्ट रिजर्व गार्ड के साथ स्थानीय पुलिस ने अंजाम दिया, जिसमें नक्सलियों की पूरी बटालियन की कमर टूट गई।
रिपोर्ट के अनुसार मुठभेड़ में मारे गए नक्सली कमांडर का नाम शंकर राव बताया गया है। कांकेर के एसपी कल्याण एलिसेला ने कहा है कि मुठभेड़ में मारे गए सभी 29 लोग नक्सली हैं। शंकर राव 25 लाख रुपये का इनामी नक्सली था। घटनास्थल से पुलिस को 7 AK27 राइफल के साथ एक इंसास राइफल और तीन LMG बरामद हुई हैं। इसके साथ ही सेल्फ लोडिंग राइफलें (एसएलआर), कार्बाइन, 303 बोर की राइफलें भी बरामद हुई हैं।
पुलिस के मुताबिक घटना आज डेढ़ से दो बजे के बीच की है। कांकेर के छोटेबेटिया थाना क्षेत्र के बीनागुंडा और कोरोनार के बीच हापाटोला के जंगल में ये मुठभेड़ हुई। डीआरजी और बीएसएफ की संयुक्त टीम की नक्सलियों से मुठभेड़ हुई।
इस मुठभेड़ में 25 लाख के ईनामी टॉप नक्सल कमांडर शंकर राव के सात ही महिला नक्सली ललिता भी मारी जा चुकी है। कांकेर एसपी ने बताया कि सर्चिग अभियान अब भी जारी है। इस मुठभेड़ में जो तीन जवान घायल हुए, उनकी स्थिति सामान्य और खतरे से बाहर है। घायल जवानों को बेहतर उपचार के जरूरी इंतजाम किए गए हैं।
बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नक्सलवाद को इस साल के आखिर तक खत्म करने का लक्ष्य रखा है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बीएसएफ की तैनाती नक्सल प्रभावित इालोकं में की गई है, जिसके नतीजे सामने आ रहे हैं।
लोकसभा चुनाव 2024 के लिए आम आदमी पार्टी ने अपने 40 स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में दिल्ली शराब नीति घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग केस के चलते तिहाड़ जेल में बंद आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल का नाम नंबर एक पर है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल का नाम इस लिस्ट में नंबर दो पर है। इस लिस्ट को देखकर लोग हैरान हो रहे हैं और तमाम सवाल कर रहे हैं। कोई कह रहा है कि तिहाड़ के अंदर से लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार होगा, तो कोई कह रहा है कि क्या अरविंद केजरीवाल की आत्मा स्टार प्रचारक नंबर 1 की हैसियत से चुनाव प्रचार करेगी?
आम आदमी पार्टी के स्टार प्रचारकों की लिस्ट में तिहाड़ जेल में ही बंद मनीष सिसोदिया का भी नाम है, तो हर जगह से जमानत खारिज करवाकर बैठे सत्येंद्र जैन का भी। इस लिस्ट में पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी हैं, जो कुछ दिन पहले ही तिहाड़ जेल में 6 महीने रहने के बाद जमानत पर रिहा हुए हैं, तो राघव चड्ढा का भी नाम है। राघव चड्ढा इस पूरे विवाद के दौरान विदेश में बैठे रहे।
वरिष्ठ पत्रकार रंगनाथ सिंह ने लिखा, “आम आदमी पार्टी की स्टार प्रचारक लिस्ट में अरविन्द केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल नम्बर दो हो गयी हैं। सुनीता जी का स्थान, पंजाब के सीएम भगवंत मान और दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया से भी ऊपर है। फिर अन्य सांसदों का नीचे रहना स्वाभाविक है। अरविंद जी पॉलिटिक्स बदलने आए थे!”
आम आदमी पार्टी की स्टार प्रचारक लिस्ट में अरविन्द केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल नम्बर दो हो गयी हैं। सुनीता जी का स्थान, पंजाब के सीएम भगवंत मान और दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया से भी ऊपर है। फिर अन्य सांसदों का नीचे रहना स्वाभाविक है। अरविंद जी पॉलिटिक्स बदलने आए थे! pic.twitter.com/TvrDFfwYQk
कंचन गुप्ता नाम के एक्स यूजर ने लिखा, “दिलचस्प, आप ने दिल्ली शराब घोटाले के तिहाड़ जेल में बंद अभियुक्त को ‘स्टार कैंपेनर’ बनाया है। दूसरे स्टार कैंपेनर के तौर पर सुनीत केजरीवाल हैं। वो आम आदमी पार्टी या सरकार में कोई पद नहीं रखती हैं, अभी तक वो किसी लिस्ट में भी नहीं थी, वो बस अरविंद केजरीवाल की पत्नी हैं। भ्रष्टाचार? राजशाही? परिवार? हाँ!”
Interesting. #AAP lists #DelhiLiquorScam accused in Tihar as 'Star Campaigners'. The 'Star Campaigner' listed at #2 Is Sunita Kejriwal — she holds no post in either AAP or Government; she was on no list till now; she is @ArvindKejriwal 's wife. Corruption? Dynasty? Family? Ha! pic.twitter.com/LV11zRUXt9
— Kanchan Gupta (Hindu Bengali Refugee)?? (@KanchanGupta) April 16, 2024
अशोक राय नाम के एक्स यूजर ने लिखा, “AAP के प्रचार करने के लिए केजरीवाल तिहाड़ जेल में और प्रचार के लिए आत्मा भटक रही है।”
AAP के प्रचार करने के लिए केजरीवाल तिहाड जेल में और प्रचार के लिए आत्मा भटक रही है
सौरभ भट्टाचार्य नाम के यूजर ने लिखा, “सारे MP MLA और धूप में धूल खांखते हुए पार्टी के नेताओं को पछाड़ते हुए केजरीवाल जी की पत्नी ने पार्टी में दूसरे स्थान पर कब्जा किया। वाह नेता जी वाह, ये पार्टी भी परिवारवाद की हुई शिकार।”
सारे MP MLA और धूप में धूल खांखते हुए पार्टी के नेताओं को पछाड़ते हुए केजरीवाल जी की पत्नी ने पार्टी में दूसरे स्थान पर कब्जा किया।
वाह नेता जी वाह ये पार्टी भी परिवारवाद की हुई शिकार
— Saurav Bhattacharya ? (@sauravb55255278) April 16, 2024
रोहित सिंह नाम के एक्स यूजर ने लिखा, “‘हम तो अलग हैँ जी’ जो चिल्लाते थे, मगर सुनीता केजरीवाल का नंबर सीएम मान से ऊपर है। ये राजनीति बदलने आये थे ??? फिर बाक़ी परिवार वाली पार्टी में क्या बुराई थी, जो एक आइटम और के आए?।”
हम तो अलग है जी जो चिल्लाते थे , मगर सुनीता केजरीवाल का नंबर सीएम मान से ऊपर है ! ये राजनीति बदलने आये थे ??? फिर बाक़ी परिवार वाली पार्टी में क्या बुराई थी जो एक आइटम और के आये ?
खास बात ये है कि इस लिस्ट में दिल्ली सरकार के दो अहम मंत्रियों आतिशी और सौरभ भारद्वाज को भी जगह मिली है, लेकिन 4 तिहाड़ियों से भी नीचे। अरविंद केजरीवाल पहले नंबर पर हैं, तो मनीष सिसोदिया चौथे नंबर पर। संजय सिंह सातवें नंबर के स्टार प्रचारक हैं, तो एक अन्य तिहाड़ी सत्येंद्र जैन दसवें नंबर के। जबकि आतिशी का नाम 11वें नंबर पर है और सौरभ भारद्वाज का 12वें नंबर पर।