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‘केवल अल्लाह हू अकबर बोलो’: हिंदू युवकों की ‘जय श्री राम’ बोलने पर पिटाई, भगवा लगे कार में सवार लोगों का सर फोड़ा-नाक तोड़ी

कॉन्ग्रेस सत्ता वाले कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में तीन हिन्दू युवकों को जय श्री राम के नारे लगाने से रोक कर पिटाई की गई। मुस्लिम युवकों ने उनके साथ मारपीट की और उनसे अल्लाह हू अकबर के नारे लगवाए। इस घटना का वीडियो वायरल हो गया है। मामले में FIR दर्ज कर ली गई है।

जानकारी के अनुसार, बेंगलुरु के चिक्क्बेताहल्ली इलाके में बुधवार (17 अप्रैल, 2024) को तीन युवक, बिनायक, डी पवन कुमार और राहुल रामनवमी के अवसर पर अपनी गाड़ी में भगवा झंडा लगा कर जा रहे थे। युवक साथ ही जय श्री राम का उद्घोष भी कर रहे थे। इतने में दो बाइक सवार मुस्लिम युवक ने आकर हिन्दू युवकों को रोक लिया।

यह मुस्लिम युवक इन युवकों को रोक कर परेशान करने लगे। वायरल वीडियो में दिखता है कि इनमें से एक मुस्लिम युवक कहता है कि नो जय श्री राम, ऑनली अल्लाह हू अकबर। वह इन युवकों को धमकाता है कि वह जय श्री राम के नारे ना लगाएँ। यहाँ मौजूद मुस्लिम युवकों ने हिन्दू युवकों से लड़ाई करना चालू कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके बाद मुस्लिम युवक यहाँ से गए और अपने कुछ और साथियों को ले आए। इन्होंने हिन्दू युवकों पर लाठियों से प्रहार कर दिया। इस हमले में एक हिन्दू युवक के सर पर जबकि एक की नाक पर चोट आई। दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद इन हिन्दू युवकों से जबरन अल्लाह हू अकबर भी बुलवाया गया। जय श्री राम के नारे लगाने पर हमला करने दो मुस्लिम युवकों की पहचान समीर और फरमान के रूप में हुई है। इस मामले में पुलिस ने FIR दर्ज करके कुछ आरोपितों को गिरफ्तार भी किया है।

बेंगलुरु के डीसीपी बीएम लक्ष्मी प्रसाद ने बताया, “तीन युवक गाड़ी में बैठ कर भगवा झंडा लिए हुए थे और जय श्री राम का नारा लगा रहे थे। इतने दो युवकों ने उनकी गाड़ी रोक कर उनसे नारे ना लगाने को कहा। उन पर अल्लाह हू अकबर के नारे लगाने का दबाव बनाया गया। जब गाड़ी में बैठे हिन्दू युवक बाहर निकले तो हमलावरों ने अपने साथियों को बुलाकर उन पर हमला कर दिया जिसमें एक युवक की नाक चोटिल हो गई।”

बताया गया है कि इस मामले में कुल पाँच लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है, जिसमें से तीन लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। आरोपितों के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को भडकाने और दंगे समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

छतों से पत्थरबाजी, फेंके बम, खून से लथपथ हिंदू श्रद्धालु: बंगाल के मुर्शिदाबाद में रामनवमी शोभायात्रा को बनाया निशाना, देखिए Videos

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में रामनवमी के जुलूस पर पथराव और बमबाजी की खबर है। घटना में कई श्रद्धलुओं को चोटें आईं हैं। कुछ की स्थित गंभीर बताई जा रही है। बुधवार (17 अप्रैल 2024) को हुई इस घटना के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। वीडियो में पत्थर फेंकते लोग और सड़क पर बम फटते साफ दिख रहे हैं।

इन्हीं में से एक वीडियो साझा करते हुए भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी की तुष्टिकरण की नीति पर सवाल खड़े किए हैं। भाजपा ने लिखा, “पश्चिम बंगाल में रामनवमी की शोभा यात्राओं की सुरक्षा करने में ममता बनर्जी नाकाम साबित हुई हैं। ये स्थिति भयावह है। मुर्शिदाबाद के रेजिनगर में हिंदुओं को निशाना बनाया गया जो उस क्षेत्र में अल्पसंख्यक हैं।”

इस वीडियो में कई लोग ऊँची छतों पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। वो वहाँ से नीचे ईंट-पत्थर फेंक रहे हैं। नीचे शोभायात्रा में शामिल लोग हैं जिनमें चीख पुकार मची दिख रही है। वीडियो में हेलमेट पहने कुछ पुलिसकर्मी भी दिख रहे हैं। वो छत से पत्थर फेंक रहे उपद्रवियों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। हालाँकि उनकी अपील का कोई भी असर हमलावरों पर होता नहीं दिख रहा है। 23 सेकेंड के इस वीडियो में नीचे खड़े लोग शोरगुल करते सुनाई दे रहे हैं।

भाजपा नेता जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने इस घटना पर अपना बयान जारी किया है। जगन्नाथ ने इस हमले के पीछे प्रशासनिक लापरवाही को मुख्य तौर पर जिम्मेदार बताया है। जगन्नाथ का आरोप है कि पहले से हमले की आशंका होने के बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने सुरक्षा के कोई भी ठोस कदम नहीं उठाए थे। उन्होंने चुनाव आयोग से दोषी अधिकारी पर कार्रवाई करने की माँग की है। जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने जो वीडियो जारी किया है उसमें पश्चिम बंगाल पुलिस के साथ पैरामिलिट्री के जवान भी हालात को काबू करने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। बॉडी प्रोटेक्टर और हेलमेट पहने जवान दुकानों के आगे खड़े हो कर किसी को रोकने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं।

विश्व हिंदू परिषद ने इस घटना की जानकारी देते हुए पीड़ितों के साथ एकजुटता दिखाई है। उन्होंने अपने एक्स पर लिखा, “बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के शक्तिपुर में आज रामनवमी की शोभायात्रा पर हुए हमले में रामभक्तों के घायल होने तथा अनेकों के गंभीर होने के समाचार आ रहे हैं। ममता बनर्जी की धमकियाँ और स्थानीय पुलिस प्रशासन व शासन का नि:सहाय होना किस बात का संकेत है?”

उन्होंने कहा, “बंगाल में केंद्रीय सुरक्षा बल की तैनाती आवश्यक हो गई है ताकि हिंदुओं की रक्षा की जा सकें! अविलंब कार्रवाई व सुरक्षा जरूरी है। विश्व हिंदू परिषद घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए सभी पीड़ितों के साथ खड़ी है।”

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी पथराव की घटना में घायल लोगों की वीडियो साझा करते हुए लिखा, “बंगाल के मुर्शिदाबाद में जिहादी बे-लगाम हैं और उनके बीच में रामभक्त संकट में पड़े हैं। लगता है ममता दीदी की राम नवमी धमकियाँ का जिहादियों ने पालन किया है! स्थानीय पुलिस प्रशासन व शासन नि:सहाय व मूकदर्शक है। केंद्रीय सुरक्षा बल कमान संभाल कर शेष हिंदूओं की रक्षा करें, यह अविलंब जरूरी है।”

इस वीडियो में जुलूस के बीच बम फटते दिख रहा है। इसके अलावा तस्वीरों में किसी रामभक्त के सिर से खून आता नजर आ रहा है तो किसी के कपड़े रक्त से सने हैं। लोगों को हड़बड़ी में इधर-उधर भागते भी देखा जा सकता है।

मालूम हो कि बंगाल में रामनवमी जैसे मौकों पर हिंदुओं द्वारा शोभा यात्रा निकालना मुश्किल हो गया है। मुर्शिदाबाद में कई जगह से मिले देसी बम रिकवर किए जाने की खबरों के बीच यह घटना देखने को मिली, जहाँ रामभक्तों पर खुले में देसी बम फेंके गए और कोई कुछ नहीं कर पाया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना में 20 से ज्यादा लोग घाटल हुए हैं। एक महिला को गंभीर चोटें आई हैं जिसे मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज एंव अस्पताल में भर्ती कराया दया है। बाकियों को लोकल अस्पताल में भर्ती किया गया है।

बता दें पिछले साल भी बंगाल के हावड़ा में यही हाल हुआ था जिसके मद्देनजर कुछ दिन पहले ही कोलकाता हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को कहा भी था कि वह सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करें और सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों को बोलें। इसके बाद पता चला कि रामनवमी के मौके पर राज्य में सुरक्षा के लिए कोलकाता में 5000 पुलिसकर्मी लगाए गए हैं ताकि हालात नियंत्रित रह सकें लेकिन बावजूद इसके यह भयावह घटना घटी है।

किटी पार्टी में गई थी 40 साल की सिख महिला, देर तक नहीं लौटी घर: बेटे का आरोप- मोहम्मद आमिश ने धर्मांतरण कराके किया निकाह, जेवर और पैसे भी हड़पे

उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में किटी पार्टी में शामिल होने गई 40 साल की सिख महिला को धर्मान्तरण कराकर मुस्लिम बना दिया गया है। बाद में पीड़िता से निकाह भी कर लिया गया। महिला के जेवर और रुपए भी हड़प लिए गए हैं। मुख्य आरोपित मोहम्मद आमिश बताया जा रहा है। पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी है। घटना गुरुवार (11 अप्रैल 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना शाहजहाँपुर के थाना क्षेत्र सदर बाजार की है। यहाँ 40 वर्षीया एक महिला के 20 साल के बेटे ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में बताया गया है कि शहर के गोविन्दगंज इलाके में 11 मार्च को महिलाओं ने एक किटी पार्टी का प्रोग्राम आयोजित किया था। इसी प्रोग्राम में उसकी माँ भी शामिल होने गई थी। हालाँकि, रात हो जाने के बावजूद वह घर नहीं लौटी।

काफी रात होने तक जब महिला घर नहीं पहुँची तो परिजनों को चिंता हुई। उन्होंने काफी खोजबीन की, लेकिन महिला का कुछ पता नहीं चला। आखिरकार पीड़िता के परिजनों ने थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने भी महिला की तलाश शुरू की। तलाशी के दौरान शहर के कई CCTV फुटेज खंगाले गए। एक फुटेज में मोहम्मद आमिश महिला के साथ जाता दिखा।

आमिश शाहजहाँपुर के ही काँट थाना क्षेत्र के कमलनयनपुर गाँव का रहने वाला है। पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि मोहम्मद आमिश ने महिला का ब्रेनवॉश करके उसके साथ निकाह कर लिया है। इतना ही नहीं, पीड़िता का नया नाम निकहत खान रखने की भी बात कही गई है। पीड़ित बेटे के मुताबिक, अभी उसकी माँ ने उसके पिता से तलाक भी नहीं लिया है। इसलिए यह निकाह गैर-कानूनी है।

ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। इसमें महिला के बेटे ने पुलिस को बताया है कि निकाह और धर्मान्तरण के लिए मोहम्मद आमिश ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई शासकीय नियमावली का भी पालन नहीं किया है। बकौल शिकायतकर्ता, उसकी माँ घर से जाने के दौरान जेवर और रुपए भी अपने साथ लेकर गई थी, जिसे अब मोहम्मद आमिश ने हड़प लिया है।

आरोप है कि पुलिस में शिकायत से नाराज होकर आरोपित ने पीड़ित परिवार को व्हाट्सएप पर कॉल करके जान से मारने की धमकी दी है। शाहजहाँपुर पुलिस ने थाना सदर बाजार में FIR दर्ज करके मामले की जाँच शुरू कर दी है। मोहम्मद आमिश पर IPC की धारा 366, 406, 504 और 506 के साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 के तहत कार्रवाई की गई है।

हलाल-हराम के जाल में फँसा कनाडा, इस्लामी बैंकिंग पर कर रहा विचार: RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भारत में लागू करने की कोशिश की थी

कनाडा ने 6 अप्रैल 2024 को कहा है कि वह हलाल मॉर्टगेज जैसे वैकल्पिक वित्तपोषण उत्पादों के लिए नए उपायों का पता लगाने की योजना बना रहा है। वहाँ के बजट रिपोर्ट में कहा गया है, “कनाडा वैकल्पिक वित्तपोषण उत्पादों के एक जीवंत और बढ़ते बाजार का घर है, जिसमें हलाल मॉर्टगेज भी शामिल है। यह मुस्लिम कनाडाई और अन्य समुदायों को हाउसिंग मार्केट में भाग लेने में सक्षम बनाता है।”

इसमें लिखा है, “बजट 2024 घोषणा में उपभोक्ता सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए इन उत्पादों के टैक्स में बदलाव या वित्तीय सेवा प्रदाताओं के लिए एक नया नियामक शामिल हो सकता है। कनाडा सरकार ने वित्तीय सेवा प्रदाताओं और विविध समुदायों से परामर्श करना शुरू कर दिया है कि ‘घर का मालिक बनने के इच्छुक सभी कनाडाई लोगों’ की जरूरतों को पूरा करने के लिए संघीय नीतियों में क्या सुधार किया जा सकता है।”

दरअसल, शरिया कानून ब्याज को सूदखोरी मानती है। मॉर्टगेज या गिरवी को शरिया के अनुरूप या ‘हलाल’ बनाने के लिए इस्लामी दुनिया में सक्रिय वित्तीय संस्थान अक्सर गिरवी और ऋण उत्पाद पेश करते हैं, जिनमें पारंपरिक ब्याज का भुगतान नहीं होता है। कनाडा में कुछ वित्तीय संस्थान ऐसे कुछ मॉर्टगेज पेशकश करते हैं, लेकिन कनाडा के पाँच सबसे बड़े बैंकों के पास ऐसी कोई पेशकश नहीं है।

कनाडा हलाल मॉर्टगेज विकल्पों की संभावना तलाश रहा है। इसके तहत कनाडा के पाँच सबसे बड़े बैंकों को मुस्लिमों के लिए हलाल मॉर्टगेज का एक अलग खंड रखने के लिए प्रेरित कर सकता है। अक्टूबर 2022 में सीटीवी न्यूज़ की एक रिपोर्ट में उल्लेख किया गया था कि विशेषज्ञों का मानना ​​है कि मुस्लिम कनाडाई घर खरीदने से ‘छूट गए’, क्योंकि उनके पास हलाल गिरवी का विकल्प नहीं था।

कनाडा के एक इस्लामी वित्तीय संस्थान ‘मंज़िल’ के सीईओ मोहम्मद सवाफ ने सीटीवी को बताया, “वे (कनाडा के मुस्लिम) मूल रूप से खुद को इस पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली से बाहर रख रहे हैं, क्योंकि यह उनके धार्मिक या नैतिक सिद्धांतों के साथ मेल नहीं खाता है। इसलिए उनका वित्तपोषण तक पहुँच बहुत मुश्किल हो जाता है।”

सवाफ़ के अनुसार, हलाल मॉर्टगेज के तहत दो विकल्प हैं: ‘मुराबाहा’ और ‘मुशरका’। मुराबाहा के तहत, वित्तीय संस्थान एक मध्यस्थ है और विक्रेता से सीधे संपत्ति खरीदता है। फिर कंपनी इसे एम्बेडेड लाभ दर के साथ ग्राहक को तुरंत बेच देती है। मुशरका के तहत विक्रेता और खरीदार एक समझौते में जाते हैं, जहाँ विक्रेता का नाम घर के मालिक के तौर पर रहता है।

जैसे ही खरीदार मॉर्टगेज का भुगतान करता है, संपत्ति में विक्रेता की इक्विटी कम हो जाती है। वहीं, मुराबाहा को भुगतान चक्र पूरा करने में लगभग 10-15 साल लगते हैं, जबकि मुशरका के मामले में भुगतान चक्र पूरा करने में लगभग 25-30 साल लगते हैं। संपत्ति की लागत से ऊपर की राशि का उल्लेख वित्तीय संस्थान द्वारा लिए गए ब्याज के रूप में नहीं, बल्कि ‘अतिरिक्त शुल्क’ के रूप में किया गया है।

रघुराम राजन ने भारत में इस्लामी बैंकिंग शुरू करने की कोशिश की थी

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कॉन्ग्रेस के शासन काल के दौरान साल 2008 में भारत में इस्लामी बैंकिंग प्रणाली का प्रस्ताव रखा था। अगस्त 2007 में योजना आयोग ने रघुराम राजन की अध्यक्षता में वित्तीय क्षेत्र सुधारों पर एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। उस समय वे शिकागो विश्वविद्यालय में ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थे।

इस समिति ने साल 2008 में ‘ए हंड्रेड स्मॉल स्टेप्स’ शीर्षक से अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इस रिपोर्ट की पृष्ठ संख्या 72 पर ‘वित्तीय समावेशन के लिए बुनियादी ढाँचे में सुधार’ शीर्षक का एक खंड है, जहाँ ब्याज मुक्त बैंकिंग के विचार पर चर्चा की गई है। उस अनुभाग में एक पैराग्राफ में लिखा है, “एक और क्षेत्र, जो व्यापक रूप से समावेशन के लिए वित्तीय बुनियादी ढाँचे के दायरे में आता है, वह है ब्याज मुक्त बैंकिंग का प्रावधान।”

इसमें आगे कहा गया है, “कुछ धर्म ब्याज देने वाले वित्तीय साधनों के उपयोग पर रोक लगाते हैं। ब्याज मुक्त बैंकिंग उत्पादों की अनुपलब्धता के परिणामस्वरूप कुछ भारतीय, जिनमें समाज के आर्थिक रूप से वंचित तबके के लोग भी शामिल हैं, सक्षम नहीं हो पाते हैं। यह अनुपलब्धता भारत को क्षेत्र के अन्य देशों से बचत के पर्याप्त स्रोतों तक पहुँच से भी वंचित कर देती है।”

हालाँकि, रिपोर्ट में इस्लामी बैंकिंग या शरिया काूनन बैंकिंग जैसे शब्दों का उल्लेख नहीं है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से इस्लामी बैंकिंग की ओर इशारा करता है। रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत में कुछ एनबीएफसी द्वारा ब्याज मुक्त बैंकिंग प्रदान की जाती है, लेकिन इसे बैंकिंग प्रणाली सहित बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए। हालाँकि, आरबीआई ने भारत में शरिया बैंकिंग की अनुमति नहीं दी है।

हालाँकि, कंपनियों के शरिया-अनुपालक सूचकांक देश में उपलब्ध हैं। जून 2022 में ऑपइंडिया ने बताया कि कुछ X (तब ट्विटर) यूजर ने शरिया-अनुपालक म्यूचुअल फंड की पेशकश के लिए टाटा समूह की आलोचना की। हालाँकि, अधिकांश निवेशक और आमतौर पर लोग इस बात से अनजान हैं कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की कंपनियों के लिए ‘शरिया सूचकांक’ है।

क्या है शरिया इंडेक्स?

सरल शब्दों में कहें तो शरिया सूचकांक को उन कंपनियों के सूचकांक के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जो शरिया कानून का अनुपालन करती हैं। सूचकांकों में सूचीबद्ध होने से पहले इन कंपनियों की एक अधिकृत बोर्ड द्वारा जाँच की जाती है। मूल रूप से इन सूचकांकों में केवल वे कंपनियाँ शामिल हैं, जो हलाल उत्पादों और सेवाओं से संबंधित हैं और हराम वस्तुओं का कारोबार नहीं करती हैं।

उदाहरण के लिए, अल्कोहल वाली पेय कंपनियों को शरिया सूचकांक में शामिल नहीं किया जा सकता, क्योंकि इस्लाम में शराब हराम है। ऐसे सूचकांक दुनिया भर में मौजूद हैं और भारत में इस तरह के चार मुख्य सूचकांक हैं। ये हैं- एसएंडपी बीएसई 500 शरिया इंडेक्स, बीएसई टैसिस शरिया 50 इंडेक्स, निफ्टी 500 शरिया इंडेक्स और निफ्टी 50 शरिया इंडेक्स हैं।

शरिया सूचकांकों में शामिल करने के लिए कंपनियों की स्क्रीनिंग करने वाले बोर्ड को इस्लामी कानून या शरिया को नियंत्रित करने वाले कुरान के सिद्धांतों से अच्छी तरह वाकिफ होना आवश्यक है। शरिया-अनुपालक सूचकांक 2000 के दशक के अंत से भारत में काम कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, एनएसई के शरिया सूचकांक 2008 में लॉन्च किए गए थे।

(यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है। आप इस लिंक पर क्लिक करके इसे विस्तार में पढ़ सकते हैं।

हिन्दुओं के घरों पर पत्थरबाजी, पलट दी अभिमन्यु की दुकान: अधिकतर हमलावर मुस्लिम नाबालिग, बोले पीड़ित- पलायन के लिए किया जा रहा मजबूर

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में हिन्दुओं के कुछ मकानों पर पत्थरबाजी की गई है। पत्थरबाजी का आरोप मुस्लिम समुदाय के 5 लोगों पर लगा है, जिनके खिलाफ नामजद FIR दर्ज की गई है। शुक्रवार (12 अप्रैल 2024) को पुलिस ने मामले में 2 लोगों को गिरफ्तार किया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि हमले के पीछे उन्हें डराकर भगाने की साजिश है। बजरंग दल का आरोप लगाया है कि मुस्लिम समुदाय के कुछ उपद्रवी न सिर्फ हिन्दू लड़कियों से छेड़खानी करते हैं, बल्कि पान खाकर घरों पर थूकते भी हैं।

यह मामला गाजीपुर जिले के थाना क्षेत्र दिलदारनगर का है। यहाँ के गाँव उसिया में रहने वाले शिव विलास गुप्ता ने 12 मार्च को शिकायत दर्ज करवाई कि 5 अप्रैल 2024 को 2 उपद्रवियों ने उनके घर पर पत्थरबाजी की थी। इस दौरान घर में लगे CCTV कैमरे को भी निशाना बनाया गया। इस घटना के बाद 9-10 अप्रैल की रात कुछ उपद्रवी शिव विलास के घर पर पत्थरबाजी करने लगे।

पीड़ित ने बताया है कि पत्थरबाजी के दौरान उन्होंने मुस्लिम समुदाय के 5 आरोपितों की CCTV फुटेज से पहचान की है। आशंका है कि इनमें से कुछ नाबालिग भी हो सकते हैं। शिकायत में 5 नामजदों सहित 2 अज्ञात पर पत्थरबाजी का आरोप लगाया गया है। पीड़ित ने इन आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। इन सभी पर IPC की धारा 147, 352 और 427 के तहत कार्रवाई की गई है।

मैं ही नहीं, कई हिन्दू पीड़ित

ऑपइंडिया को शिव विलास ने बताया कि वह मेडिकल स्टोर चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उन्होंने कहा कि पत्थरबाजी से अकेले वो नहीं, बल्कि उसिया गाँव के कई हिन्दू प्रभावित हैं। शिव के अनुसार, गाँव में हिन्दू और मुस्लिम आबादी लगभग बराबर है। पीड़ित को यह पता ही नहीं है कि उसके घर को निशाना क्यों बनाया गया। उनका दावा है कि हमलावरों से उनका पूर्व में किसी तरह का विवाद नहीं है।

अभिमन्यु की भी दुकान तोड़ी गई

जिस रात शिव विलास गुप्ता के घर पर हमला हुआ था, उसी रात उसिया गाँव के अभिमन्यु चौरसिया की दुकान को भी निशाना बनाया गया था। अभिमन्यु चौरसिया ने 11 अप्रैल 2024 को इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई है। अभिमन्यु ने बताया कि 9 अप्रैल की रात को उनके पान के ठेले को पलट दिया गया था। इसी रात बदमाशों द्वारा कई अन्य हिन्दुओं के घरों को भी क्षतिग्रस्त किया गया था।

मुस्लिम त्योहारों पर किया जाता है नुकसान

अपनी शिकायत में अभिमन्यु ने दावा किया है कि हिन्दुओं को प्रताड़ित करने की बात उसिया गाँव में आए दिन की है। बकौल अभिमन्यु, मुस्लिम त्योहारों में हिन्दुओं को अक्सर नुकसान उठाना पड़ता है। हमलावरों को आपराधिक सोच वाला बताते हुए अभिमन्यु ने भी उनको ही नामजद किया है, जिनके खिलाफ शिव विलास गुप्ता ने FIR दर्ज करवाई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

छेड़ते हैं लड़कियाँ, थूकते हैं पान खाकर

बजरंग दल के गाजीपुर सह-संयोजक शिवम चौबे ने इस घटना पर ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया कि घटना के बाद वो गाँव में गए थे। गाँव में उपद्रव की वजह बढ़ रही मुस्लिम आबादी को बताते हुए शिवम ने कहा कि सिर्फ पत्थरबाजी ही नहीं, बल्कि अक्सर पान खाकर हिन्दुओं के घरों पर थूका जाता है और बहन बेटियों को भी छेड़ा जाता है।

बकौल शिवम, हमलावरों के घर वाले अवैध धंधे करते हैं जिसकी वजह से उनके पास पैसे होते हैं। इन पैसे से वो अपने अपराधों की पैरवी करते हैं। ऑपइंडिया के पास घटना के वीडियो फुटेज भी मौजूद हैं। इन फुटेज में कुछ लोग पत्थरबाजी करते देखे जा सकते हैं। ऑपइंडिया ने SHO दिलदारनगर को कॉल किया, लेकिन उनका आधिकारिक नंबर नॉट रीचबल आया।

थाना प्रभारी से बात होने के बाद खबर को अपडेट किया जाएगा। हालाँकि हमारे द्वारा जुटाई गई जानकारी के मुताबिक FIR में नामजद सभी आरोपित नाबालिग हैं। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया है। हालाँकि जरूरी कानूनी कार्रवाई के बाद उनको जमानत मिल गई। मामले की जाँच चल रही है।

मणिपुर में कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार अंगोमचा बिमोल अकोइजम ने जारी किया व्यक्तिगत घोषणा पत्र, राज्य में NRC लागू करने की कही बात: JNU के हैं प्रोफेसर

लोकसभा चुनाव 2024 के लिए लगभग हर दल ने अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी कर दिया है। हालाँकि, इस मामले में कॉन्ग्रेस थोड़ी अलग निकली है। मणिपुर में कॉन्ग्रेस पार्टी के लोकसभा उम्मीदवार अंगोमचा बिमोल अकोइजम ने अपना व्यक्तिगत घोषणा पत्र जारी किया है। दिलचस्प बात ये है कि जिस मुद्दे का कॉन्ग्रेस पार्टी चुप्पी साधे रहती है, उसका अकोइजम ने समर्थन किया है।

दरअसल, बिमोल अकोइजम दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के प्रोफेसर हैं। कॉन्ग्रेस ने उन्हें इनर मणिपुर निर्वाचन क्षेत्र से अपना उम्मीदवार बनाया है। अकोइजम ने अपने ‘व्यक्तिगत घोषणा पत्र’ में राज्य में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू करने का वादा किया गया है। उनके घोषणा पत्र में 13 एजेंडे शामिल हैं, जिन्हें वह सांसद चुने जाने पर लागू करने का आश्वासन दिया है।

चुनाव लड़ने को लेकर उन्होंने कहा, “चुनाव लड़ने का मेरा निर्णय एक सही निर्णय है, क्योंकि मैं व्यवस्था को बदलना और साफ़ करना चाहता था और गंदी राजनीति से परे जाना चाहता था। जो लोग राज्य में अराजकता कायम रखना चाहते हैं, वे चुनावी परिदृश्य में मेरी उपस्थिति से बहुत परेशान हैं। यही एक कारण है कि मेरा अभियान बाधित हुआ है और मैं एकमात्र उम्मीदवार हूँ जिसे निशाना बनाया गया है।”

उन्होंने आगे कहा, “मेरी बैठक की अनुमति अधिकारी द्वारा रद्द कर दी गई है। कुछ लोग मुझे चुनाव से हटने के लिए मजबूर कर रहे हैं और मेरी आवाज को दबाने का ठोस प्रयास कर रहे हैं। इसके बावजूद, लोगों की इच्छा की जीत होगी। इसके लिए उन्हें अंतिम निर्णय लेना होगा।”

अपने घोषणा पत्र में उन्होंने कहा है, “मेरा उद्देश्य लोगों के नेतृत्व वाले, मुद्दा-आधारित शासन व्यवस्था को बढ़ावा देना है, जो सभी मणिपुरियों को लाभ पहुँचाने वाले समाधानों को प्राथमिकता देता है। मैं सद्भाव और समृद्धि द्वारा चिह्नित भविष्य की कल्पना करता हूँ, जहाँ समावेशी शासन और न्यायसंगत नीतियों के माध्यम से सामूहिक समृद्धि को प्राथमिकता दी जाती है।”

अकोइजम के वादों में जनसंख्या नीति और NRC का समर्थन करना भी शामिल है। ANI से बात करते हुए अकोइजम ने कहा कि राज्य में ‘कानूनी नागरिकों’ की पहचान के लिए एक संस्थागत तंत्र की जरूरत है। उन्होंने कहा, “जब 2003 में संसद में संशोधन पेश किया गया था तो कॉन्ग्रेस ने इसका समर्थन किया था। मणिपुर विधानसभा में 2022 में NRC की माँग करते हुए प्रस्ताव पारित किया गया।”

उन्होंने आगे कहा, “मणिपुर के कॉन्ग्रेस विधायकों ने उस प्रस्ताव का समर्थन किया था। इसलिए, मुझे लगता है कि यह कहना बिल्कुल सही नहीं है कि कॉन्ग्रेस NRC के खिलाफ है। व्यक्तिगत रूप से मैं इसके पक्ष में हूँ। आप इसे किसी अन्य नाम से बुला सकते हैं, लेकिन हमारे पास यह अंतर करने के लिए एक संस्थागत तंत्र होना चाहिए कि कौन नागरिक है और कौन नहीं।”

उनके घोषणा पत्र की बातें:

1) जारी रही हिंसा के लिए जवाबदेही तय करना और आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों के लिए न्याय
2) मैतेई के लिए अनुसूचित जनजाति का दर्जा जैसे संवैधानिक संरक्षण का समर्थन
3) जनसंख्या नीति और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्ट्रार (NRC) का समर्थन
4) आर्थिक विकास कार्यबल का गठन करना
5) शैक्षिक सशक्तिकरण की पहल
6) अंतर-सामुदायिक संवाद और सहयोग पहल
7) शासन की जवाबदेही और निरीक्षण पहल
8) स्वदेशी कला और सांस्कृतिक एकीकरण केंद्र
9) सामाजिक-आर्थिक एवं शिक्षा स्थिति मूल्यांकन समिति का गठन
10) प्रतिमान बदलाव: सैन्य दृष्टिकोण से नागरिक शासन की ओर
11) ब्रांड मणिपुर का पुनर्निर्माण
12) प्रशासनिक सुधार
13) भारतीय संघीय राजनीति के तहत मणिपुर की स्थिति को मजबूत करना

त्रिपुरा में PM मोदी ने कॉन्ग्रेस-कम्युनिस्टों को एक साथ घेरा: कहा- एक चलाती थी ‘लूट ईस्ट पॉलिसी’ दूसरे ने बना रखा था ‘लूट का अड्डा’

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने त्रिपुरा में एक विशाल रैली की है। पीएम मोदी ने यहाँ ध्यान दिलाया कि वह अकेले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो अपने कार्यकाल के दौरान 50 बार से अधिक उत्तरपूर्व के दौरे पर आए हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल की उपलब्धियाँ गिनाई और साथ ही वामपंथियों तथा कॉन्ग्रेस पार्टी पर हमला भी बोला।

प्रधानमंत्री मोदी ने त्रिपुरा में कॉन्ग्रेस और वामपंथी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि उनकी सरकार के दौरान गरीबों को कोई भी लाभ नहीं मिलता था। पीएम मोदी ने यहाँ ऐलान किया कि उनकी सरकार के दोबारा सत्ता में आने पर 3 करोड़ और घर बनाए जाएँगे।

पीएम मोदी ने यहाँ लोगों से अपील की कि वह और लोगों को इस योजना के विषय में बताएँ। उन्होंने कहा कि जितना हमने 10 सालों में काम किया वह केवल ट्रेलर है, आगे होने वाला काम त्रिपुरा को समृद्धि कि की तरफ ले जाएगा। पीएम ने कहा कि वह प्रत्येक घर के 70 वर्ष से अधिक नागरिकों को मुफ्त इलाज सुविधा उपलब्ध करवाएँगे।

पीएम मोदी ने यहाँ HIRA (हाइवे, इन्टरनेट, रेलवे और एयरवे) का सिद्धांत दोहराया और बताया कि राज्य में 3 हजार करोड़ से अधिक की फोर लेन सड़कें बनाई जा रही हैं। पीएम मोदी ने यहाँ कहा कि दिल्ली में कॉन्ग्रेस सरकार के होने पर लोगों का मोबाइल बिल हजारों में होता।

त्रिपुरा में पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस सरकार उत्तर पूर्व के लिए लूट ईस्ट पालिसी चलाती थी, मोदी सरकार ने इस पर ताले लगा दिए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस और कम्युनिस्टो ने मिलकर त्रिपुरा को लूट का अड्डा बना दिया। उन्होंने कहा कि यह लोग त्रिपुरा में साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं जबकि केरल में आपस में नहीं बन रही। पीएम मोदी का यह भाषण आप यहाँ देख सकते हैं।

पीएम मोदी ने त्रिपुरा में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी उत्तर प्रदेश में हार कर केरल भाग गए थे और अब केरल के मुख्यमंत्री ने उनके खिलाफ हल्ला बोल दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि राहुल गाँधी केरल में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को जेल की सलाखों के पीछे डालना चाहते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि अगर लोगों ने कॉन्ग्रेस-कम्युनिस्ट को वोट दिया तो उसका कोई काम नहीं जबकि भाजपा को दिया वोट राष्ट्र में मजबूत सरकार लाएगा।

ईद पर मिथिला की जिस धरोहर को मुस्लिमों ने किया था अपवित्र, रामनवमी पर हिंदुओं ने किया उसका शुद्धिकरण: दरभंगा राजपरिवार के कपिलेश्वर सिंह ने की अगुवाई

बिहार में एक जिला है – दरभंगा। बिहार के जिस इलाके को मिथिला कहते हैं, दरभंगा उसका एक अहम हिस्सा है। मैथिलि भाषी दरभंगा क्षेत्र की स्थिति अब ये है कि वहाँ मुस्लिमों की जनसंख्या 23% के पार हो गई है। इसका एक दुष्प्रभाव ईद के दिन देखने को मिला, जब दरभंगा के दिवंगत महाराज रामेश्वर सिंह की प्रतिमा का मुस्लिम भीड़ ने अपमान किया। कुछ मुस्लिम उनकी प्रतिमा पर पाँव रख कर बैठ गए। दरभंगा राज परिसर में ईद पर भारी भीड़ जुटी हुई थी, उसी वक्त ये घटना हुई।

चौरंगी चौक पर रामेश्वर सिंह की प्रतिमा के साथ इस तरह के दुर्व्यवहार के कारण दरभंगा के लाखों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँची, जो आज भी उनका सम्मान करते हैं। श्यामा माई मंदिर में मुस्लिम समाज के लोगों को बोटिंग का आनंद लेते हुए भी देखा गया। इस दौरान भी अभद्रता का आरोप लगा, जिस कारण बोटिंग रोकनी पड़ी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को मौके पर पहुँचना पड़ा। पुलिस ने कहा कि नाबालिग बच्चों ने कुछ हरकत की थी, जिन्हें समझा-बुझा कर हटा दिया गया।

दरभंगा पुलिस का कहना है कि विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र अंतर्गत हुई इस घटना में बच्चे शामिल थे। वहीं पुलिस ने तालाब में अभद्रता की बात से इनकार करते हुए कहा कि पुजारी और गार्ड्स के अलावा अन्य लोगों से भी थानाध्यक्ष ने पूछताछ की तो उन्होंने इस घटना से अनभिज्ञता जाहिर की। पुलिस के अनुसार, कोई साक्ष्य नहीं मिला। जबकि लोगों का कहना था कि दरभंगा महाराज की प्रतिमा के साथ उद्दंडता पूरे मैथिल समाज का अपमान है, मिथिला का अपमान है।

अब रामनवमी के दिन बड़ी संख्या में लोगों ने जुटान कर प्रतिमा का और आसपास के इलाके का शुद्धिकरण किया है। इसका नेतृत्व दरभंगा रियासत के उत्तराधिकारी कपिलेश्वर सिंह ने किया। युवा कपिलेश्वर सिंह ने रामनवमी को महान पर्व करार देते हुए राम को स्नेह-सौहार्द का प्रतीक पुरुष और अपना आदर्श करार दिया। उन्होंने कहा कि राम की शालीनता दुर्बलता नहीं बल्कि सबलता का परिचायक है, उन्होंने अन्याय का विरोध कर अन्यायियों का अंत किया था।

कपिलेश्वर सिंह ने कहा, “सन् 1577 में इसी दिन मेरे पूर्वजों को मिथिला की रियासत प्राप्त हुई थी। मेरे दादा कामेश्वर सिंह तक इस वंश के राजा हुए। मेरे परदादा रामेश्वर सिंह राजर्षि, विशुद्ध सनातनी, ‘हिन्दू धर्म महामण्डल’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष, और आध्यात्मिक पुरुष थे। उनकी चिता पर ही माधवेश्वर श्मसान परिसर में माँ श्यामा माई विराजती हैं। ये मिथिला और नेपाल तक के धर्मावलम्बियों के लिए आस्था का केंद्र है। यहाँ का तालाब पवित्र नदियों के जल से अभिसंचित है। तालाब में वोटिंग पर रोक लगा कर इसकी शुचिता बनाए रखने में लोग सहयोग करें। “

उन्होंने जूते-चप्पल पहन कर रामेश्वर सिंह की प्रतिमा पर चढ़े जाने का विरोध करते हुए कहा कि वो अब अपने पितृ-पुरुषों की मूर्तियों की सुरक्षा के लिए उनके इर्दगिर्द ग्रील का घेरा लगाएँगे। दरभंगा महाराज की प्रतिमा के सामने नृत्य की प्रस्तुति भी दी गई और मिथिला की कला का प्रदर्शन किया गया। माँ श्यामा माई मंदिर में पूजन-अर्चन किया गया। गंगा-यमुना समेत 5 पवित्र नदियों के जल से शुद्धिकरण हुआ। साथ ही चेताया गया है कि आगे से दरभंगा की विरासत का सम्मान किया जाए।

चुनावों से पहले बंगाल में एक के बाद एक कई धमाके, लकड़ी मिल के पीछे छुपाकर रखे गए थे बम: कॉन्ग्रेस ने TMC विधायक रबीउल आलम को बताया जिम्मेदार

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में मंगलवार (16 अप्रैल 2024) को एक के बाद एक कई धमाके हुए। जाँच में पता चला कि ये बम विस्फोट हैं। घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई है। बम एक जगह छिपाकर रखे गए थे, जो गर्मी की वजह से फट गए। कॉन्ग्रेस ने इस विस्फोट के पीछे तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के विधायक रबीउल आलम को जिम्मेदार बताया है। वहीं, TMC ने इसे कॉन्ग्रेस की करतूत करार दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना मुर्शिदाबाद के रेजीनगर इलाके की है। मंगलवार (16 अप्रैल 2024) की दोपहर में नाजीरपुर पश्चिमी में पड़ने वाले पारा इलाके में अचानक जोरदार धमाका हुआ। पहले तो लोगों ने समझा कि किसी बिजली के ट्रांसफर में ब्लास्ट हुआ है। कुछ देर के अंदर एक के बाद एक करके कई धमाके होने लगे, तब जाकर लोगों को पता चला कि ये बम धमाके हैं।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस पाया कि एक लकड़ी के गोदाम के पास कई बम छिपाकर रखे गए थे। विस्फोट कम क्षमता वाले बमों के थे। तेज गर्मी की वजह से ये बम खुद ही फट गए। मौके पर बम निरोधक दस्ता भी पहुँचा है। पुलिस ने इलाके को सील करके तलाशी अभियान चलाया है। कहा जा रहा है कि शायद अब कोई जीवित बम नहीं बचा हो।

इस मामले में केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी गई है। इन धमाकों में अभी तक कोई हताहत नहीं हुआ है। पुलिस ने यह भी बताया कि चुनाव के मद्देनजर पूरे जिले में तलाशी अभियान चलाया गया है। माना जा रहा है कि चुनाव को देखते हुए ये बम छिपाकर रखे गए थे। इन धमाकों के बाद राजनैतिक आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया है। कॉन्ग्रेस और TMC इसे एक-दूसरे की करतूत बता रहे हैं।

रेजीनगर ब्लॉक से कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष मिंटू सिंह ने बम धामके को TMC के स्थानीय विधायक रबीउल आलम चौधरी और उसके सहयोगियों की करतूत बताया है। मिंटू सिंह का आरोप है कि बमों को रबीउल आलम की लकड़ी मिल के पीछे छिपाकर रखा गया था। कॉन्ग्रेस नेता ने इन बम धमाकों की उच्चस्तरीय जाँच कराने और आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

वहीं, तृणमूल कॉन्ग्रेस ने कॉन्ग्रेस के आरोपों से इनकार किया है। TMC नेताओं का आरोप है कि लोकसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता ही बम बना रहे थे। तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता नियामत शेख ने कहा कि कॉन्ग्रेस समर्थित गुंडे इलाके में आतंक फ़ैलाने और कानून व्यवस्था को प्रभावित करने के लिए बारूद जमा कर रहे हैं। मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तार नहीं हुई है।

इसी तरह की एक अन्य घटना में मुर्शिदाबाद के सागरपारा पुलिस स्टेशन के चक्रामप्रसाद इलाके में सॉकेट बम से भरा एक बैग बरामद किया गया है। बम मिलने की सूचना के आधार पर पुलिस ने सोमवार (15 अप्रैल 2024) को इलाके की तलाशी ली और एक खाली मैदान से ताजा सॉकेट बम से भरा बैग बरामद किया।

हिंदू लड़की से मोबाइल नंबर माँग रहा था अख्तर अंसारी, भाई नीरज ने किया विरोध तो रॉड से कर दिया हमला: अरमान-अफजल सहित 6 ने घोंपा छूरा

झारखंड के गिरडीह में सोमवार (15 अप्रैल 2024) को अख्तर अंसारी, अरमान, शाहिद, वारिस, अफजल और आंसूफ अंसारी ने नीरज नाम के एक युवक को चाकू मार दिया। आरोप है कि अख्तर अंसारी उसकी बहन से मोबाइल नंबर माँग रहा था। इसकी जानकारी मिलते ही नीरज पहुँचा और आरोपितों ने उसे चाकू मार दी। नीरज को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। पुलिस ने अरमान सहित दो हमलावर को गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना गिरडीह जिले के थाना क्षेत्र धनवार की है। यहाँ के गाँव गोरहंद में सोमवार की शाम लगभग 5 बजे एक हिन्दू लड़की डैम से पानी भरने गई थी। डैम के पास उसी गाँव का अख्तर अंसारी भी मौजूद था। उसने लड़की से उसका मोबाइल नंबर माँगने लगा। लड़की ने अख्तर को अनसुना कर दिया और अपने घर आकर पूरी बात बताई।

अपनी बहन की बात सुनकर नीरज गुस्सा हो गया और डैम की तरह गया, जहाँ अख्तर अंसारी था। नीरज रास्ते में ही अख्तर अंसारी मिल गया। नीरज ने अख्तर से उसकी बहन का नंबर माँगने को लेकर सवाल किया। इस बात को लेकर नीरज और अख्तर में बहस हो गई। बात तू-तू, मैं-मैं पर आई तो आसपास से गुजर रहे लोगों ने बीच-बचाव कर के दोनों को अलग किया।

थोड़ी देर बाद नीरज डैम के पास फिर से शौच के लिए गया। यहाँ अख्तर अंसारी पहले से घात लगाए बैठा था। उसके साथ आंसूफ अंसारी, वारिस, अरमान, अफ़ज़ल और शाहिद भी पहले से ही मौजूद थे। इन सभी ने मिलकर पहले नीरज को बेरहमी से मारा। हमला लोहे की रॉड से किया गया, जिसमें नीरज का सिर फट गया। आरोपितों ने नीरज के पेट और पीठ में चाकू घोंप दी।

इसके बाद हमलावर 18 साल के नीरज को घायल अवस्था में छोड़कर फरार हो गए। पीड़ित के परिजनों ने नीरज को गिरडीह के अस्पताल में भर्ती करवाया। हालत गंभीर देखकर नीरज को धनबाद रेफर कर दिया गया है। मामला दो समुदायों के बीच की होने की वजह से गाँव में तनाव फ़ैल गया है, जिसको देखते हुए वहाँ पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

धनवार थाना प्रभारी पुलिस नंदू कुमार ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि इस मामले कमें दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तार हमलावरों में अरमान अंसारी भी शामिल है। बाकी हमलावर घर छोड़कर फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में दबिश दे रही है। पुलिस ने फरार हमलावरों को जल्द गिरफ्तार करने की बात कही है।