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वादे किए 300+, कैंडिडेट 300 भी नहीं मिले: इतिहास की सबसे कम सीटों पर चुनाव लड़ रही कॉन्ग्रेस, क्या पार्टी के सफाए के बाद पूर्ण होगी राहुल गाँधी की यात्रा

लोकसभा चुनाव 2024 के लिए पहले चरण के मतदान में कुछ ही दिन का वक्त है। इस चुनाव में बीजेपी ने 370+ तो एनडीए ने 400+ का लक्ष्य रखा है। एनडीए अपने दो दर्जन से अधिक सहयोगियों के साथ मुकाबला कर रही है, तो इसके जवाब में बना इंडी गठबंधन लगातार पीछे होता दिख रहा है। अभी तक शीट शेयरिंग का मुद्दा उलझा रहा। कई सीटों पर इंडी गठबंधन के दल फ्रेंडली फाइट भी कर रहे हैं, यानी आपस में ही लड़ाई। वहीं, बात इंडी गठबंधन के मुख्य घटक दल बन चुके (गठबंधन बनाने वाले नीतीश कुमार ही बाहर) कॉन्ग्रेस की करे, तो पूरी तरह से न सिर्फ कन्फ्यूज बल्कि असहाय भी नजर आ रही है।

ऐसा लगता है, मानो वो लोकसभा चुनाव 2024 की लड़ाई में पहले ही हथियार डाल चुकी हो, क्योंकि इस बार कॉन्ग्रेस न सिर्फ अपने इतिहास में सबसे कम सीटों पर चुनाव लड़ रही है, बल्कि उसे ढंग के कैंडिडेट तक नहीं मिल रहे हैं। वो दूसरी पार्टियों के नेताओं के बच्चों को अपने टिकट पर चुनाव लड़ा रही है, यूपी की प्रयागराज सीट ऐसी ही एक सीट है। खैर, बड़े कैनवस पर देखें तो लोकसभा चुनाव 2024 में कॉन्ग्रेस 300 सीटों पर भी चुनाव लड़ती नहीं दिख रही है। आज (15 अप्रैल 2024) तक कॉन्ग्रेस महज 278 सीटों पर ही उम्मीदवार खड़े कर सकी है।

इस बार कॉन्ग्रेस की हालत इतनी खराब क्यों है?

एक तरफ तो कॉन्ग्रेस देश की सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में चुनाव लड़ रही है, तो दूसरी तरफ वो ऐतिहासिक रूप से सबसे कम सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पंजाब में वो दिल्ली, गुजरात, हरियाणा की अपनी ही सहयोगी आम आदमी पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़ रही है, तो केरल में वामदलों के खिलाफ। यूपी में ऐतिहासिक रूप से सबसे कम 17 सीटों पर ही कॉन्ग्रेस चुनाव लड़ रही है, तो पश्चिम बंगाल में वो 20 सीटों तक सिमट रही है। बिहार में कॉन्ग्रेस को एक चौथाई सीटें भी नहीं मिली हैं, तो मध्य प्रदेश में भी एक सीट पर वो चुनाव नहीं लड़ रही है। गजब बात ये है कि मध्य प्रदेश की खजुराहो सीट पर इंडी गठबंधन ही चुनाव से बाहर है, क्योंकि जिस सपा को खजुराहो सीट दी गई थी, उसके कैंडिडेट का पर्चा ही खारिज हो चुका है।

कॉन्ग्रेस पार्टी राजस्थान और गुजरात में भी अपने दम पर सभी सीटों पर नहीं लड़ पा रही है, तो हरियाणा में भी उसे आम आदमी पार्टी की बैसाखी की जरूरत पड़ रही है। असम में भी कॉन्ग्रेस की यही हालत है। जम्मू कश्मीर में भी कॉन्ग्रेस की ऐसी ही हालत है, क्योंकि पीडीपी के साथ गठबंधन नहीं होने की वजह से कश्मीर घाटी की तीनों सीटों पर पीडीपी ने अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं।

एक तरफ बीजेपी देश के 16 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों में अकेले चुनाव लड़ रही है, तो कॉन्ग्रेस 12 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों में। इन 18 (राज्य और केंद्र शाषित प्रदेशों में कुल 79 लोकसभा सीट) में कॉग्रेस उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, गोवा, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम में अपने दम पर चुनाव लड़ रही है, लेकिन इसमें भी पंजाब, सिक्किम में उसे आम आदमी पार्टी और सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा जैसे सहयोगियों से ही लड़ाई लड़नी पड़ रही है, ऐसी ही हालत दो केंद्र शासित प्रदेशों दिल्ली और जम्मू-कश्मीर का भी है। यहाँ आम आदमी पार्टी के साथ साझेदारी दिल्ली में है, तो जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ, यहाँ पीडीपी अलग चुनाव लड़ रही है। वहीं, कॉन्ग्रेस 6 केंद्र शासित प्रदेशों लक्षद्वीप, अंडमान निकोबार, लद्दाख, पुड्डुचेरी, चंडीगढ़, दमन दीव और दादरा नागर हवेली में अकेले ही चुनाव लड़ रही है।

इस बार कॉन्ग्रेस की सबसे कम सीटें, जानें पुराना इतिहास

अब बात करते हैं मुख्य मुद्दे की। अभी तक कॉन्ग्रेस ने देश भर की कुल 278 लोकसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की है। कॉन्ग्रेस ने कभी भी 400 से कम सीटों पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे। शुरुआत से लेकर अभी तक के आँकड़ों पर गौर करें, तो साल 1952 के पहले लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस ने 479 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 364 सीटों पर जीत दर्ज की। 1957 में ये आँकड़ा बढ़कर 490 तक पहुँचा और जीत का आँकड़ा भी 370 तक पहुँच गया। कॉन्ग्रेस ने 1962 में 487 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 361 सीटों पर जीत मिली। साल 1967 के चुनाव में 512 सीटों पर चुनाव लड़कर कॉन्ग्रेस को 284 सीटों पर जीत मिली। 1971 में कॉन्ग्रेस ने 441 सीटों पर ही चुनाव लड़ा, लेकिन 352 सीटों पर कॉन्ग्रेस को जीत मिली। पाकिस्तान से युद्ध में जीत का भी इसमें बड़ा हाथ रहा।

साल 1977 में आपातकाल के बाद पहले चुनाव में कॉन्ग्रेस ने 492 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन 154 सीटों पर ही जीत मिली और उसे पहली बार पूर्ण रूप से विपक्ष में बैठना पड़ा लेकिन 1980 में कॉन्ग्रेस ने 491 सीटों पर उम्मीदवार उतारते हुए 352 सीटों पर जीत दर्ज कर सत्ता में वापसी की। साल 1984 में इंदिरा गाँधी की हत्या से उपजी सहानुभूति की लहर में कॉन्ग्रेस ने 492 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 405 सीटों पर प्रचंड जीत हासिल की, जो अब तक का रिकॉर्ड भी है।

इसके बाद कॉन्ग्रेस गिरावट की ओर आई। साल 1989 में कॉन्ग्रेस ने 510 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन सिर्फ 197 सीटों पर ही जीत मिली, तो 1991 में 492 सीटों पर लड़कर 232 सीटों पर जीत मिली। 1996 में कॉन्ग्रेस ने सर्वाधिक 529 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन 140 सीटें ही मिल पाई, जबकि 1998 में 477 सीटों पर चुनाव लड़कर उसे 141 सीटें मिली। 1999 में 453 सीटों पर लड़कर कॉन्ग्रेस 114 सीटें ही जीत पाई, तो 2004 में 417 सीटों पर लड़कर 145 सीटें जीत पाई। सबसे कम सीटों पर कॉन्ग्रेस ने इसी साल चुनाव लड़ा, लेकिन यूपीए गठबंधन के तहत कॉन्ग्रेस की अगुवाई में सरकार बनी।

साल 2009 में कॉन्ग्रेस ने यूपीए 2 के लिए 440 सीटों पर चुनाव लड़ा और 206 सीटें जीतकर दोबारा सरकार बनाई, लेकिन 2014 में कॉन्ग्रेस पार्टी को 463 सीटों पर लड़ने के बावजूद सिर्फ 44 सीटें मिली, जो उसका अब तक का सबसे बुरा चुनावी प्रदर्शन रहा। साल 2019 में 421 सीटों पर लड़कर महज 52 सीटों पर जीत मिली। इसमें से भी बड़ी संख्या में इस्तीफे हो चुके हैं। और इस बार तो कॉन्ग्रेस पार्टी अभी तक महज 278 सीटों पर उम्मीदवार खड़े कर पाई है। ऐसा लगता है कि पार्टी बामुश्किल 20 सीटों पर और उम्मीदवार खड़े कर पाएगी और कुल आँकड़ा 300 के अंदर या आसपास ही सिमट कर रह जाएगा। ऐसे में कॉन्ग्रेस का चुनावी प्रदर्शन क्या होगा, ये सोचने वाली बात है, क्योंकि जितनी सीटों पर बीजेपी ने अकेले 2019 में जीत दर्ज की, उससे भी कम सीटों पर लड़ना ये दिखाता है कि कॉन्ग्रेस इस लोकसभा चुनाव में पहले ही हार मान चुकी है।

राहुल गाँधी की यात्राओं वाले राज्यों में भी दिक्कतें

कॉन्ग्रेस ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए दो साल पहले से ही माहौल बनाना शुरू कर दिया था। साल 2022 के आखिर में कॉन्ग्रेस ने भारत जोड़ो यात्रा निकाली। ये न्याय यात्रा करीब 139 दिनों तक 14 राज्यों में कन्याकुमारी से लेकर श्रीनगर तक चली। इसके बाद 2023-24 में भारत जोड़ो न्याय यात्रा निकाली। इस यात्रा की भी अगुवाई राहुल गाँधी ने की। पूरब से पश्चिम तक ये यात्रा 15 राज्यों से गुजरी। यानी दो यात्राओं में 14+15 राज्यों में पहुँचने वाली कॉन्ग्रेस की यात्राओं का भी कोई बहुत फायदा नहीं पहुँचा। बल्कि इन राज्यों में कॉन्ग्रेस को नुकसान होता ही दिख रहा है।

राहुल गाँधी की यात्राओं के बीच कई सहयोगियों ने इंडी गठबंधन को छोड़ दिया। खास तौर पर भारत जोड़ो न्याय यात्रा के समय। मुंबई से लेकर दिल्ली, पंजाब, यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल और अरुणाचल प्रदेश तक पार्टी को झटके लगे। 15 राज्यों की इस यात्रा में कॉन्ग्रेस पार्टी को गुजरात, मध्य प्रदेश से लेकर तकरीबन हर उस जगह पर झटका लगा, जहाँ या तो राहुल गाँधी पहुँच चुके थे, या पहुँचने वाले थे। इस यात्रा को भी तय समय से पहले ही खत्म करना पड़ा। कॉन्ग्रेस द्वारा जारी मैप के मुताबिक, राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा करीब 100 लोकसभा सीटों से होकर गुजरी, इनमें से आधी से अधिक सीटों पर कॉन्ग्रेस का उम्मीदवार ही नहीं है। रही बात अमेठी और रायबरेली की, तो वहाँ अभी तक कॉन्ग्रेस पार्टी उम्मीदवार का नाम भी तय नहीं कर सकी है।

कॉन्ग्रेस के पास नहीं उम्मीदवार, निर्विरोध जीत रही बीजेपी

देश के पूर्वोत्तर का सबसे अहम राज्य है अरुणाचल प्रदेश। पूर्वोत्तर में भारत-चीन की तनातनी का केंद्र। यहाँ पर भारतीय जनता पार्टी प्रचंड बहुमत में है। विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। 19 अप्रैल को अरुणाचल में विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होगी। हैरानी की बात है कि देश के सबसे पुराने दल कॉन्ग्रेस के पास यहाँ से हर सीट पर उम्मीदवार तक नहीं हैं। बीजेपी के कम से कम 5 प्रत्याशियों को विधानसभा चुनाव में निर्विरोध जीत मिली है, जिसमें मुख्यमंत्री पेमा खांडू भी हैं। कॉन्ग्रेस की दुर्गति देखिए कि अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा की 60 सीटे हैं, लेकिन उसने सिर्फ 34 सीटों पर उम्मीदवार उतारे।

अरुणाचल में राहुल गाँधी भारत जोड़ो न्याय यात्रा के तहत गए थे। तब पार्टी के पास कुछ विधायक थे, लेकिन उनकी भारत जोड़ो न्याय यात्रा का असर ऐसा हुआ, कि एक विधायक छोड़कर बाकी सारे विधायक बीजेपी में शामिल हो गए, यहाँ तक कि कॉन्ग्रेस पार्टी के विधायक दल के नेता भी। ये कॉन्ग्रेस की खत्म होती ताकत का सबूत नहीं, तो और क्या है?

वैसे एक तरफ तो चुनाव आयोग लोकसभा चुनाव की घोषणा कर रहा था, तो दूसरी तरफ राहुल गाँधी अपनी यात्रा में ही बिजी रहे। सहयोगी सीट बँटवारे की गुहार लगाते-लगाते अलग होते गए, लेकिन राहुल गाँधी की यात्रा नहीं रुकी। इस बीच, कॉन्ग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए 44 पन्नों का जो घोषणा पत्र जारी किया है, उसमें 300 से ज्यादा वादे कर दिए हैं और उम्मीदवार पार्टी को 300 भी नहीं मिल पाए हैं। ऐसे में क्या ये माना जाएगा कि लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे जब 4 जून को आएँगे, तब तक राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस के दफ्तर पर ताला लगा चुके होंगे?

गर्भवती पत्नी को दवा दिलाने जा रहा था अंकित, AAP कार्यकर्ता ने चाकू घोंप-घोंप कर मार डाला: पंजाब के जालंधर की घटना, 6 पर FIR

पंजाब के जालंधर जिले में एक युवक की चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी गई है। युवक के पूरे शरीर पर ताबड़तोड़ 17 वार किए गए जिससे उसकी आँतें तक बाहर आ गईं। हमले में मृतक की गर्भवती पत्नी भी घायल हो गईं। उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। हत्या का आरोप आम आदमी पार्टी (AAP) के कार्यकर्ता करण मल्ली और उसके साथियों पर लगा है। पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। घटना रविवार (14 अप्रैल 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना जालंधर के बस्ती शेख मोहल्ले में पड़ने वाले चाय आम की है। 26 वर्षीय मृतक का नाम अंकित जंबा है। वह प्लास बनाने वाली फैक्ट्री का मालिक था। 4 साल पहले अंकित की शादी मनीषा से हुई थी। मनीषा 4 माह की गर्भवती थी। रविवार को अंकित बाइक से अपनी पत्नी का इलाज करवाने अस्पताल जा रहा था। इसी बीच चाय आम के पास उसकी बाइक आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता करण मल्ली ने रोक ली। करण के साथ 5 अन्य शामिल लोग बताए जा रहे हैं।

अंकित द्वारा बाइक रोकते ही इन सभी ने उस पर धारदार हथियार से ताबड़तोड़ वार करने शुरू किए। अंकित के पेट, पीठ और सिर में चाकू घोंपे गए। घटनास्थल पर मौजूद मनीषा ने अपने पति को बचाने की बहुत कोशिश की लेकिन वो नाकाम रहीं। इसी बीच बचाव में मनीषा भी घायल हो गईं। हमलावरों ने अंकित पर कुल 17 वार किए। 5 मिनट तक लगातार अंकित पर वार करने के बाद हमलावर मौके से भाग निकले। हमले के दौरान अंकित की पत्नी लोगों से मदद माँगती रही लेकिन किसी ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया।

बाद में पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी गई। पुलिस ने अंकित को अस्पताल में भर्ती करवाया जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया। अंकित की पत्नी मनीषा हमले में गंभीर रूप से घायल हो गईं हैं जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस ने करण मल्ली, सोनू, अजय और सन्नी सहित कुल 6 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इन सभी पर हत्या, हत्या का प्रयास और अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

हत्या के पीछे आरोपितों और मृतक के बीच पुरानी रंजिश बताई जा रही है। बताया गया कि लगभग ढाई साल पहले अंकित जंबा और करण मल्ली में किसी बात को ले कर झगड़ा हुआ था। तब, अंकित ने करण के खिलाफ हत्या के प्रयास की FIR दर्ज करवाई थी। उस समय अंकित पर हमला करने में कुछ निहंग भी शामिल थे। हालाँकि पुलिस ने करण की भी तहरीर पर क्रॉस केस दर्ज किया था। इस मामले में अंकित जंबा को भी जेल भेजा गया था। मनीषा का कहना है कि तब से करण उनके पति को मारने की लगातार कोशिशें कर रहा था। इस की सूचना पंजाब पुलिस को भी दी गई थी लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

मृतक के भाई मनी ने आरोप लगाया है कि हमलावर करण आपराधिक सोच का है जो जालंधर के मल्ली इलाके में नशे का कारोबार करता है। अंकित की हत्या के बाद उनके परिजनों और रिश्तेदारों ने अस्पताल में हंगामा किया। मृतक के घर वालों ने आरोपितों की गिरफ्तारी न होने तक शव का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। तनाव को देखते हुए अस्पताल में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। फिलहाल अभी तक किसी हमलावर की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

ईरान का बम-मिसाइल इजरायल के लिए दिवाली के फुसकी पटाखे: पेट्रियट, एरो, आयरन डोम, डेविड स्लिंग… शांत कर देता है सबकी गरमी, अब आ रहा इन सबका बाप!

हाल ही में इजरायल पर ईरान ने 300 रॉकेट दागे, जिनमें से 297 को यहूदी देश ने मार गिराया। एक को तो अंतरिक्ष तक खदेड़ कर मार गिराया गया। इसी तरह हमास ने भी 5000 से भी अधिक रॉकेट्स के साथ अक्टूबर 2023 में इजरायल पर हमला किया था, लेकिन उनमें से अधिकतर हवा में ही मार गिराए गए। रक्षा तकनीक के मामले में इजरायल इतना उन्नत है कि वो असंभव को संभव कर पाता है। इसके मुख्य स्तम्भ हैं – आयरन डोम, एरो, पेट्रियट और डेविड्स स्लिंग। आइए, इनके बारे में समझते हैं।

इजरायल का आयरन डोम – मिसाइलों के लिए काल

अरबों डॉलर की अमेरिकी मदद से इजरायल ने मिसाइलों के इस काल को विकसित किया है, अमेरिका ने हमास के हमले के बाद इजरायल को अरबों डॉलर की और भी सहायता दी है। ये एंटी-मिसाइल तकनीक मिसाइलों का पता लगाता है, फिर हवा में ही उसे मार गिराता है। ‘राफेल एडवांस डिफेंस सिस्टम्स’ और ‘इजरायल एरोस्पेस इंडस्ट्रीज’ ने मिल कर इसे बनाया है। 2011 में निर्मित ये आयरन डोम शॉर्ट रेंज रॉकेट्स व अन्य हवाई हमलों को हवा में ही नाकाम कर देता है।

इसमें एक राडार यूनिट लगा है जो इजरायल की तरफ आने वाली मिसाइलों की पहचान करता है। इसके बाद इसका डेटा बैटल मैनेजमेंट एवं कंट्रोल यूनिट को भेजा जाता है, जो इस खतरे की पहचान करता है। फिर एक फायरिंग यूनिट ऐसे मिसाइल को लॉन्च करता है जिसमें राडार लगा होता है और वो आने वाले खतरे को नष्ट कर देता है। किसी रिहायशी इलाके या इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह करने की मंशा हो दुश्मन की, तब ये मिसाइल/रॉकेट्स को मार गिराता है।

ये तकनीक राडार द्वारा खतरे को भाँपने और विश्लेषण के माध्यम से उसे पहचानने पर आधारित है। इसकी सफलता दर 90% से अधिक है। 2000 से अधिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर के ये अपनी क्षमता जाहिर कर चुका है। ये एक मल्टी-मिशन सिस्टम है। ये हर मौसम में काम करता है, दिन हो या रात। इसके संचालन में तुलनात्मक रूप से खर्च भी कम आता है। ये जहाजों तक को सुरक्षित करता है। बारिश हो, बादल नीचे आ गए हों या धूल उड़ रहे हों – ये काम करता रहता है।

David’s Sling: इजरायल के एयर डिफेन्स का मिडिल लेयर

डेविड्स स्लिंग इजरायल के एयर डिफेंस का मिडिल लेयर है। ये बैलिस्टिक एवं क्रूज मिसाइलों को भाँप कर उनकी पहचान करता है, साथ ही माध्यम से लेकर लॉन्ग रेंज तक की मिसाइलों का भी पता लगा लेता है। ये 2017 से संचालन में है। इसे ‘राफेल एडवांस्ड डिफेन्स सिस्टम्स’ और अमेरिका के डिफेन्स कांट्रेक्टर Raytheon ने मिल कर विकसित किया है। 25 से 186 मील तक की रेंज में फायर की गई मिसाइलों/रॉकेट्स को ये जवाबी हमले से नष्ट कर देता है।

अगस्त 2008 में इजरायल-अमेरिका ने इसके लिए प्रोजेक्ट पर हस्ताक्षर किए थे। इसे ‘Magic Wand’ (जादुई छड़ी) भी कहा जाता है। ईरान, सीरिया, हमास और लेबनान की तरफ से आने वालों खतरों को ये नष्ट करता है। Raytheon के ‘स्टनर मिसाइल्स’ का इस्तेमाल कर खतरे को भाँपता है। एक लॉन्चर 16 मिसाइलों से लैस हो सकता है। पूरे इजरायल के लिए 2 डेविड्स स्लिंग बैटरी काफी है। एक बार इजरायल ने सीरिया की तरफ से आने वाली मिसाइलों को नष्ट करने के लिए 2 इंटरसेप्टर छोड़े थे, लेकिन उन मिसाइलों ने दिशा बदल ली जिसके बाद इजरायल ने एक इंटरसेप्टर को खुद को नष्ट करने का आदेश दिया, दसरा सीरिया में कहीं गिरा।

Arrow: टॉप लेवल सर डिफेन्स सिस्टम

इजरायल ने Arrow 2 एवं 3 सिस्टम विकसित की है। अगर किसी इसाइल को पृथ्वी के वातावरण से बाहर फायर किया गया है, उसकी भी पहचान कर के ये उसे नष्ट कर सकता है। इसे इजरायल का टॉप लेवल एयर डिफेन्स सिस्टम कहा जाता है। 2017 में इसका निर्माण पूरा हुआ था। Arrow 3 का परीक्षण 2023 में ही हुआ है। यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा फायर की गई मिसाइल की इसने पहचान की थी, जिसका निशाना इजरायल का एलिअट शहर था।

इसे भी अमेरिका के साथ मिल कर ही विकसित किया गया है। Arrrow 2 विस्फोटकों का भी इस्तेमाल करता है, जबकि 3 में ये व्यवस्था नहीं है। इंटर्सेप्शन के माध्यम से ही ये डैमेज कर देता है। ये लॉन्ग रेंज की मिसाइलों को पकड़ने की क्षमता रखता है। इसे विकसित किया जाना 1980 के दशक में ही शुरू हो गया था। 90 के दशक में इजरायल ने Arrow 1 से काम चलाया, लेकिन 2000 में इसका दूसरा वर्जन आ गया। ये ऊपरी वातावरण में हिट एन्ड कील सिस्टम पर काम करता है।

Patriot: इजरायली हवाई सुरक्षा का बुजुर्ग सदस्य

ये भी अमेरिका की मदद से ही विकसित किया गया सिस्टम है। ये इजरायल की एंटी-मिसाइल तकनीक का सबसे पुराना सदस्य है। 1991 में प्रथम खाड़ी युद्ध के समय इसका इस्तेमाल किया गया था। इराक द्वारा फायर की जाने वाली मिसाइलों की ये उस समय पहचान करता था। इराक में तब सद्दाम हुसैन का शासन था। अब ये एयरक्राफ्ट्स एवं ड्रोन को मार गिराने के काम आता है। अभी Arrow 2 का इस्तेमाल जिस काम के लिए किया जाता है, कभी इसकी जगह Patriot था।

सितंबर 2014 में इसने सीरिया से आ रहे एक एयरक्राफ्ट को मार गिराया था, जिसमें लोग भी सवार थे। ये कम्युनिकेशन, कमांड एवं कंट्रोल पर काम करता है। साथ ही राडार सर्विलांस और मिसाइल गाइडेंस से लैस है। ये एक मोबाइल एयर डिफेन्स सिस्टम है, ट्रक और करें की मदद से जिसमें मिसाइलों को रीलोड किया जाता है। इसमें एक कंट्रोल स्टेशन होता है, जिसे इसका हार्ट कहा जाता है। इसमें इन्फॉर्मेशन कोऑर्डीनशन सेंटर और इलेक्ट्रिक पॉवर प्लांट भी होता है।

Iron Beam: इजरायल की रक्षा तकनीक का भविष्य

Iron Beam को भी राफेल द्वारा ही बनाया जा रहा है, जो इजरायल की रक्षा तकनीक का भविष्य है। मोर्टार से लेकर रॉकेट तक को ये नष्ट करेगा। अभी के काइनेटिक इंटरसेप्टर सिस्टम कुछ खतरों की पहचान नहीं कर पाते हैं, इसीलिए नई तकनीक की ज़रूरत है। ये एक मल्टीलेयर डिफेन्स सिस्टम है, ये प्रकाश की गति से इंगेजमेंट करेगा और इसमें अनगिनत मैगजीन्स होंगे और इंटर्सेप्शन पर खर्च भी कम आएगा। इजरायल HEL सिस्टम, LITE बीम और आयरन बीम बना रहा है।

Iron Beam 100 KW का क्लास हाई एनर्जी लेजर वेपन सिस्टम (HELWS) होगा, ये अपनी तरह की पहली ऐसी व्यवस्था होगी। ये RAM और UAVs को पकड़ सकेगा। ये कुछ सौ मीटर की दूरी से लेकर कई किलोमीटर तक के क्षेत्र में खतरों को तबाह करेगा। इसे कई प्लेटफॉर्म्स पर इंटीग्रेट किया जा सकता है। ये पिनपॉइंट एक्यूरेसी के साथ काम करता है। अपनी कम से कम क्षति होती है। प्रति इंटर्सेप्शन खर्च न के बराबर होता है।

शाही ईदगाह पर मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट का झटका, कहा- श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े सभी मामलों की एक साथ होगी सुनवाई

उत्तर प्रदेश के मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह ढाँचे के बीच भूमि विवाद के मुकदमों का इलाहाबाद हाईकोर्ट में हस्तांतरण के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सोमवार (15 अप्रैल 2024) को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को तगड़ा झटका दिया है। इसके साथ ही शीर्ष न्यायालय ने शाही ईदगाह मस्जिद की कमिटी की इस याचिका पर नोटिस जारी कर संबंधित पक्षों से जवाब माँगा है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की खंडपीठ ने सोमवार (15 अप्रैल 2024) को मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मुस्लिम पक्ष की दोनों माँगों को खारिज कर दिया। इस फैसले को जहाँ हिंदू पक्ष के लिए राहत की बात मानी जा रही है, वहीं मुस्लिम पक्ष के लिए यह बड़ा झटका भी कहा जा रहा है।

दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह ढाँचे से संबंधित मथुरा की जिला अदालत में चल रहे 15 मुकदमों को अपने यहाँ हस्तांतरित करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट का कहना था कि ये सभी मुकदमे एक ही तरह के हैं, जिनमें एक ही तरह के सबूतों के आधार पर फैसला होना है। इसलिए कोर्ट का समय बचाने के लिए इन सभी मुकदमों की एक साथ सुनवाई हो।

इलाहाबाद हाई कोर्ट का 11 जनवरी 2024 को ‘न्याय के हित में’ दिया गया यह आदेश एक हिंदू वादी द्वारा दायर याचिका पर आया था। हिंदू वादी ने एक याचिका दायर कर माँग की थी मथुरा के जिला न्यायालय में चल श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह से जुड़े 15 मुकदमों को एक साथ किया जाए और उसकी सुनवाई हाई कोर्ट में हो।

हिंदू पक्ष ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दिए गए अपने आवेदन में कहा था कि मथुरा जिला अदालत के दीवानी न्यायाधीश (वरिष्ठ संभाग) के समक्ष 25 सितंबर 2020 को दायर मूल मुकदमे और 13.37 एकड़ जमीन से संबंधित अन्य मुकदमों को समाहित कर दिया जाए। हिंदू पक्ष की बात को स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने ऐसा करने का निर्णय दिया था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह निर्णय मुस्लिम पक्ष को पसंद नहीं आया। मथुरा के विवादित शाही ईदगाह ढाँचे से जुड़ी मुस्लिम कमिटी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया। मुस्लिम पक्ष ने ना सिर्फ हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की माँग सुप्रीम कोर्ट से की, बल्कि इलाहाबाद हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई पर भी रोक लगाने की माँग की।

वही, इसी पीठ के समक्ष इसी मुद्दे से संबंधित मस्जिद समिति द्वारा दायर एक और एसएलपी भी सूचीबद्ध थी। इसमें दिसंबर 2023 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें शाही ईदगाह ढाँचे का निरीक्षण करने के लिए एक कोर्ट कमिश्नर की नियुक्ति की अनुमति दी गई थी। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम रोक को अगस्त तक जारी रखने का आदेश दिया।

शीर्ष अदालत ने 16 जनवरी को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के इस आदेश के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी थी। आज सोमवार (15 अप्रैल 2024) को सुप्रीम कोर्ट ने 5 अगस्त 2024 से शुरू होने वाले सप्ताह में मामलों को दोबारा सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया और कहा कि सुनवाई की अगली तारीख तक अंतरिम आदेश लागू रहेगा। शीर्ष न्यायालय ने साफ कहा कि उसने हाई कोर्ट में लंबित मुकदमों की सुनवाई पर रोक नहीं लगाई है।

रामनवमी पर अयोध्या आने वाले सभी भक्तों को दर्शन देंगे रामलला, 5 मिनट तक सूर्य की किरणें करेंगी प्रभु के ललाट पर तिलक: सफल रहा परीक्षण

राम नवमी के मौके पर सूर्य की किरणों से भगवान राम का तिलक हो इसके लिए वैज्ञानिक मिलकर प्रयास कर रहे हैं। तकनीकी व्यवस्था करके कोशिश चल रही है कि कैसे भी रामनवमी के पावन अवसर पर एक निश्चित अवधि के लिए सूर्य की किरणें भगवान राम के मस्तक को छुएँ और श्रद्धालु उस क्षण के दिव्य दर्शन कर पाएँ।

इस संबंध में राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने कहा, “राम नवमी पर यहाँ आने वाले सभी भक्तों के लिए भगवान राम के ‘दर्शन’ की सुविधा सुनिश्चित की गई है। वैज्ञानिकों द्वारा कोशिश की जा रही है कि सूर्य की किरणें दोपहर 12.16 बजे 5 मिनट के लिए भगवान के माथे पर पड़ें। इसके लिए महत्वपूर्ण तकनीकी की व्यवस्था की जा रही है। इसे सफल बनाने के लिए ट्रस्ट और वैज्ञानिक मिलकर काम कर रहे हैं।”

बता दें कि राम नवमी पर इस प्रयोग को करने से पहले शुक्रवार (12 अप्रैल 2024) को राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के सूर्य तिलक का सफल ट्रायल किया गया था। इसकी सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी सामने आई है। इसमें देखा गया था कि दर्पण के जरिए भगवान सूर्य ने प्रभु के मस्तक पर तिलक किया था। यह परीक्षण 12:00 बजे पूरा हुआ था।

अब इसी तकनीक से 17 अप्रैल को भी कोशिश की जा रही है ताकि सूर्यदेव अपनी किरणों से प्रभु के ललाट की शोभा बढ़ाएँ। बताया जा रहा है कि करीब 4 से 5 मिनट कक सूर्यदेव रामलला का तिलक करेंगे। इस काम के लिए सूर्य की किरणों को सबसे पहले अलग-अलग तीन दर्पणों के माध्यम से डायवर्ट किया जाएगा, फिर पीतल की पाइप के जरिए किरणों को लेंस के माध्यम से रामलला के मस्तक पर लेकर जाया जाएगा।

गरीब घटे-कारोबार बढ़ा, इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर विज्ञान तक बुलंदी… लेखक अमीश त्रिपाठी ने बताया क्यों PM मोदी को करेंगे वोट, कहा – चाहिए चाणक्य वाला नेतृत्व

लेखक अमीश त्रिपाठी ने लोकसभा चुनाव 2024 से पहले एक लेख के जरिए बताया है कि आखिर वो क्यों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए भाजपा को वोट करना चाहेंगे। ‘Shiva Trilogy’ की पुस्तकों के लेखक अमीश त्रिपाठी ने कहा कि उन्होंने राजनीति पर कुछ न बोलने का नियम बनाया हुआ था, लेकिन वो खुद के बनाए इस नियम को तोड़ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट ऐलान किया कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी राष्ट्रीय सरकार को समर्थन देते हैं। उन्होंने कहा कि ये बहुत ज़रूरी है कि भाजपा उम्मीदवारों के माध्यम से पीएम मोदी को वोट किया जाए।

अमीश त्रिपाठी ने अपने इस निर्णय के पीछे की सोच को समझाते हुए कहा कि ग़रीबी में नाटकीय रूप से कमी आई है, भारत की वित्तीय स्थिति और राजस्व मजबूत हुआ है, इंफ़्रास्ट्रक्चर में व्यापक सुधार आया है जो वो मुंबई में देख सकते हैं जहाँ वो रहते हैं और वाराणसी में भी ये स्पष्ट दिखता है जहाँ से उनका परिवार ताल्लुक रखता है, GDP विकास दर बढ़ रहा है, स्टार्टअप्स को सहायता मिल रही है, छोटे कारोबार के लिए कर्ज मिल रहे हैं, विज्ञान एवं तकनीक में निवेश किया जा रहा है जो उनके पाठकों खासकर युवाओं से उन्हें सुनने को मिला है।

अमीश त्रिपाठी ने इन कारणों के अलावा गिनाया कि जन-कल्याणकारी योजनाएँ भी आम लोगों तक सीधे पहुँच रही है, जबकि पूर्व में इसमें गड़बड़ी होती थी। हालाँकि, उन्होंने नरेंद्र मोदी को वोट करने के पीछे का महत्वपूर्ण कारण बताया कि 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जिस वैश्विक व्यवस्था का जन्म हुआ था वो अब खात्मे की ओर है। IIM कलकत्ता से पढ़े अमीश त्रिपाठी का मानना है कि विश्व के अलग-अलग हिस्सों में युद्ध चल रहा है, पुराने गठबंधन टूट रहे हैं।

अमीश त्रिपाठी का मानना है कि पीढ़ियों में एक बार आने वाले कोरोना जैसी महामारी के प्रभावों से निपटने के लिए दुनिया साथ नहीं आ पा रही, अमीर विकसित देशों में भी ऋण संकट है, समुद्री डकैती का मुद्दा है, युद्ध में इस्तेमाल होने वाले अत्याधुनिक हथियारों की कीमत हुई है जिस कारण हूती विद्रोही सुएज नहर को रोक सकते हैं, पर्यावरण की समस्या है। इन समस्याओं को टाइम बम करार देते हुए अमीश त्रिपाठी ने कहा कि इनमें से अधिकतर से निपटने के लिए दुनिता तैयार नहीं है, जबकि ये फटने के लिए बेचैन हैं।

अमित त्रिपाठी ऐसे लेखक हैं जिनके पुस्तकों की 75 लाख से भी अधिक प्रतियाँ बिक चुकी हैं। उन्होंने कहा, “जब कोई वैश्विक व्यवस्था चरमराती है, तो आमतौर पर अराजकता, उथल-पुथल और अक्सर युद्ध का समय आ जाता है। हम अराजकता और गहन बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं। और अभी दुनिया खुद को अपने पान पर खड़ी कर पाती है या नहीं, ये अगले सदियों तक की वैश्विक व्यवस्था का निर्णय करेगा। ऐसे संवेदनशील समय में हमें एक उम्दा नेतृत्व चाहिए। प्रथम एवं द्वितीय विश्व युद्ध के समय अमेरिका के पास असाधारण नेतृत्व था। इससे मौजूदा वैश्विक ऑर्डर का जन्म हुआ, जो USA के लिए फायदेमंद रहा।”

डेढ़ दशक तक कई बैंकों में काम कर चुके अमीश त्रिपाठी कहते हैं कि वैश्विक इतिहास के ऐसे नाजुक समय में हमें ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो गहन प्रेरणा व उम्दा क्षमताओं से लैस हो, मेहनती हो, जनसमूह को अपने साथ लेकर चले। उन्होंने माना कि कई ऐसे लोग हैं जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हैं, कई नहीं करते हैं। जो पीएम मोदी के विरोधी हैं, उनसे लेखक ने अपील की कि इतिहास के इस बड़े मोड़ पर हमें स्पष्ट बहुमत वाली एक मजबूत सरकार की आवश्यकता है जो दुनिया के साथ अच्छा तालमेल बिठा कर ये सुनिश्चित कर सके कि उथल-पुथल के इस दौर में भी भारत शीर्ष पर पहुँचे।

लंदन स्थित ‘द नेहरू सेंटर’ में 2019 में भारत सरकार द्वारा निदेशक के रूप में नियुक्त किए जाने के बाद से कूटनीतिक कार्यों में भी सक्रिय रहे अमीश त्रिपाठी ने कहा कि अगर भारत मजबूत है तो हम सबके पास मजबूत होने का मौका है। उन्होंने कहा कि पिछले (1950-1990) दशकों की तरह भारत अगर कमजोर बना रहा, तो हम भी कमजोर होंगे। अमीश त्रिपाठी का कहना है कि हम इस दौर में बड़े देशों से समझौते कर के अपने राष्ट्रीय हित के परिणाम निकलवाते हैं, जैसे रूस से भारत ने कच्चा तेल खरीदा।

अमीश त्रिपाठी ने कहा कि ऐसे नाजुक दौर में हमारे देश और हमारी सभ्यता को चाणक्य जैसे नेतृत्व की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सत्ता में बने रहना हमारी ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि वो अपने लोकसभा क्षेत्र में NDA उम्मीदवार के लिए वोट करेंगे। बता दें कि भारत में 7 चरणों में लोकसभा चुनाव होना है, जिसके परिणाम 4 जून, 2024 को आएँगे। भाजपा ने इस बार ‘400 पार’ का नारा दिया है और पीएम मोदी धुआँधार रैलियाँ कर रहे हैं।

‘कुछ गुट कर रहे न्यायपालिका को कमजोर करने की कोशिश’: CJI को 21 पूर्व जजों ने लिखी चिट्ठी, 600+ वकीलों ने भी ‘दबाव’ पर जताई थी चिंता

सुप्रीम कोर्ट चार पूर्व न्यायधीश और हाई कोर्ट के 17 पूर्व न्यायधीशों सहित कुल 21 पूर्व न्यायाधीशों ने देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ को पत्र लिखा है। इसमें पूर्व न्यायाधीशों ने कुछ ‘गुटों’ द्वारा न्यायपालिका को कमजोर करने और न्यायिक प्रणाली में जनता के विश्वास को कम करने का आरोप लगाते हुए चिंता जताई है। इससे पहले 28 मार्च 2024 को देश के 600 से अधिक वकीलों ने CJI को पत्र लिखकर न्यायपालिका पर उठते सवाल को देखते हुए वो चिंता जताई थी।

CJI को लिखे पत्र में 21 पूर्व न्यायाधीशों ने लिखा, “हम कुछ गुटों द्वारा दबाव, गलत सूचना और सार्वजनिक अपमान के माध्यम से जानबूझकर न्यायपालिका को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसको लेकर हम अपनी साझा चिंता व्यक्त कर रहे हैं। हमारे संज्ञान में आया है कि संकीर्ण राजनीतिक हितों और व्यक्तिगत लाभ से प्रेरित ये तत्व प्रयास कर रहे हैं हमारी न्यायिक प्रणाली में जनता के विश्वास कम हो।”

पूर्व जजों ने आगे लिखा, “हम गलत सूचना फैलाने की रणनीति और न्यायपालिका के खिलाफ जनता की भावनाओं को भड़काने को लेकर चिंतित हैं। यह न केवल अनैतिक है, बल्कि हमारे लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांतों के लिए भी हानिकारक है। उन न्यायिक निर्णयों की चयनात्मक रूप से प्रशंसा करने की प्रथा है जो किसी के विचारों से मेल खाते हैं, जबकि उन लोगों की तीखी आलोचना किया जाता है जो न्यायिक समीक्षा और कानून के शासन के सार को कमजोर नहीं करते हैं।”

पूर्व जजों ने पत्र में आगे लिखा कि इस तरह की गतिविधियों से न सिर्फ न्यायपालिका की शुचिता का असम्मान होता है, बल्कि जजों की निष्पक्षता के सिद्धांतों के सामने चुनौतियाँ भी खड़ी हो जाती हैं। इन समूहों द्वारा अपनाई जा रही योजना काफी परेशान करने वाली भी है, जो न्यायपालिका की छवि धूमिल करने के लिए आधारहीन सिद्धांत गढ़ती है और अदालती फैसलों को प्रभावित करने का प्रयास करती है।

पत्र में आगे कहा गया, “हम न्यायपालिका के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं और इसकी गरिमा एवं निष्पक्षता बचाए रखने के लिए हर तरह की मदद करने के लिए तैयार हैं। हम उम्मीद करते हैं कि इस चुनौतीपूर्ण समय में आपका मार्गदर्शन और नेतृत्व न्याय एवं समानता के स्तंभ के तौर पर न्यायपालिका की सुरक्षा करेगा।”

600+ वकीलों की CJI को चिट्ठी

इससे पहले 28 मार्च 2024 को हरीश साल्वे, मनन कुमार मिश्रा, आदिश अग्रवाल, चेतन मित्तल, पिंकी आनंद, हितेश जैन, उज्ज्वला पवार, उदय होला, स्वरुपमा चतुर्वेदी जैसे बड़े नामों सहित 600+ वकीलों ने CJI को चिट्ठी लिखी थी। इसमें कहा गया था कि देश का एक ख़ास वर्ग अदालत पर दबाव डालना चाहता है और इसकी स्वायत्तता कम करने की कोशिश में है। चिट्ठी में कहा गया था कि राजनीतिक लोगों से जुड़े मामले और भ्रष्टाचार से संबंधित केसों में ये अधिक हो रहा है।

वकीलों ने कहा था कि इस खास ग्रुप कई तरीकों से न्यायपालिका के कामकाज को प्रभावित करने की कोशिश करता है, जिनमें न्यायपालिका के तथाकथित सुनहरे युग के बारे में गलत नैरेटिव पेश करने से लेकर अदालतों की मौजूदा कार्यवाहियों पर सवाल उठाना और अदालतों में जनता के विश्वास को कम करना शामिल हैं। वकीलों ने कहा था कि ये खास समूह चुनावों के दौरान अधिक सक्रिय हो जाता है।

CJI को लिखे पत्र में आगे कहा गया था कि ये ग्रुप अपने पॉलिटिकल एजेंडे के आधार पर अदालती फैसलों की सराहना या फिर आलोचना करता है। असल में ये ग्रुप ‘माई वे या हाईवे’ वाली थ्योरी में विश्वास करता है। साथ ही बेंच फिक्सिंग की थ्योरी भी इन्हीं की गढ़ी हुई है। वकीलों ने आरोप लगाया है कि ये अजीब है कि नेता किसी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हैं और फिर अदालत में उनका बचाव करते हैं। ऐसे में अगर अदालत का फैसला उनके मनमाफिक नहीं आता तो वे कोर्ट के भीतर ही या फिर मीडिया के जरिए अदालत की आलोचना करना शुरू कर देते हैं।

इस पत्र में कहा गया था कि कुछ तत्व जजों को प्रभावित करने या फिर कुछ चुनिंदा मामलों में अपने पक्ष में फैसला देने के लिए जजों पर दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं और ऐसा सोशल मीडिया पर झूठ फैलाकर किया जा रहा है। इनके ये प्रयास निजी या राजनीतिक कारणों से अदालतों को प्रभावित करने का प्रयास है, जिन्हें किसी भी परिस्थिति में सहन नहीं किया जा सकता। पत्र में कहा गया था कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी ऐसा ही देखने को मिला था। 

PM मोदी ने विपक्ष पर साधा था निशाना

इन वकीलों के पत्र सामने आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था, “दूसरों को डराना-धमकाना और दबाना कॉन्ग्रेस की पुरानी संस्कृति रही है। 5 दशक पहले ही उन्होंने ‘प्रतिबद्ध न्यायपालिका’ की बात की थी। वो बेशर्मी से दूसरों से तो प्रतिबद्धता चाहते हैं, लेकिन खुद राष्ट्र के प्रति किसी भी प्रतिबद्धता से बचते हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा था, “इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि 140 करोड़ भारतवासी उन्हें अस्वीकार कर रहे हैं।” दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इशारा न्यायपालिका में अपनी चलाने की कोशिश में लगे रहने वाले कॉन्ग्रेस समर्थित वकीलों के गिरोह की तरफ था।

केरल में जिन वामपंथियों को आतंकी कहती है कॉन्ग्रेस, दिल्ली में उनके साथ ही बैठकर बनाती है रणनीति: पलक्कड़ में बोले PM मोदी, कहा- नव वर्ष नई राजनीति का आरम्भ होगा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केरल के पलक्कड़ में लोकसभा चुनाव रैली में कहा है कॉन्ग्रेस ने भारत को दुनिया के सामने एक कमजोर देश के रूप में पेश किया गया था। आज मोदी सरकार ने भारत को एक मजबूत देश बनाया है। पीएम मोदी ने यहाँ कहा कि उनकी सरकार केरल के विकास के लिए काम करती रहेगी।

पीएम मोदी पलक्कड़ की दो लोकसभा सीट, थ्रिसुर और अलाथुर से NDA उम्मीदवार टी एन सरासु और सुरेश गोपी के लिए चुनाव प्रचार करने पहुँचे। उन्होंने यहाँ केरल के विकास को लेकर भाजपा की नीतियाँ भी सामने रखीं। उन्होंने यहाँ लेफ्ट और कॉन्ग्रेस पर हमला बोला।

पीएम मोदी ने यहाँ केरल के नए वर्ष को लेकर बात की। उन्होंने कहा, “यह नया वर्ष एक नया आरम्भ लेकर आया है। यह नव वर्ष नई राजनीति का आरम्भ होगा। केरल अब संसद में मजबूत आवाज भेजेगा। इसीलिए केरल अब फिर एक बार, मोदी सरकार कह रहा है।”

पीएम मोदी ने कहा, ”केरल के नव वर्ष विशु के मौके पर भाजपा ने अपना संकल्प पत्र जारी किया। यह भारत के विकास का संकल्प पत्र है। इसमें मोदी की गारंटी दी गई है। मोदी की गारंटी मतलब 3 करोड़ नए घर बनेंगे। केरल में भी हजारों गरीबों को नए घर मिलेंगे। केरल के हर जन औषधि केंद्र पर लोगों को 80% छूट के साथ सस्ती दवाई मिलती रहेगी।”

पीएम मोदी ने पलक्कड़ की सुन्दरता को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा, “भाजपा ने विकास और विरासत दोनों को अपने संकल्प पत्र में शामिल किया है। पलक्कड़ तो गेटवे ऑफ़ केरल कहा जाता है, यहाँ की प्राकृतिक सुन्दरता किसी का भी मन मोह लेती है। यहाँ कितने भव्य मंदिर हैं, चर्च हैं, आस्था के स्थल हैं। हम अगले पाँच सालों में इस विरासत को ग्लोबल बनाएँगे।”

केरल के इन्फ्रा विकास को लेकर पीएम मोदी ने कहा, “हम केरल को हाइवे, एयरपोर्ट और हाई स्पीड वन्दे भारत रेलवे से जोड़ेंगे। मैं वादा करता हूँ हम इन सारे कामों के लिए आगे बढ़ेंगे। यहाँ पर्यटन की काफी संभावना है। जितना लाभ लिया जाना चाहिए, उतना नहीं लिया गया है।” आप पीएम मोदी का यह भाषण नीचे लगे लिंक पर सुन सकते हैं।

पीएम मोदी ने यहाँ वामपंथी दलों और कॉन्ग्रेस के गठजोड़ पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस केरल के भीतर लेफ्ट वालों को आतंकी बताती है और दिल्ली में दोनों गलबहियाँ करते हैं। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस और लेफ्ट केरल को पीछे धकेल रहे हैं। यह लोग यहाँ हाइवे प्रोजेक्ट तक रोक रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि लेफ्ट वालों का उद्देश्य होता है कि जहाँ उनका शासन हो वहाँ कुछ भी ना बचे और कुछ भी सही ना हो। उन्होंने कहा कि यही लेफ्ट वालों ने त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में भी किया। पीएम मोदी ने केरल में राजनीतिक हत्याओं पर बात की। उन्होंने कहा कि यहाँ साम्प्रदायिक तत्वों में असामाजिक तत्वों को सरकार का संरक्षण मिला है।

केरल में होने वाले भ्रष्टाचार का मुद्दा भी पीएम मोदी ने उठाया। उन्होंने कहा कि करुवन्नुर सहकारी बैंक में सीपीएम के लोगों ने घोटाला किया। उन्होंने सीपीएम के लोगों पर केरल के गरीबों को संकट में डालने का आरोप भी लगाया।

दिल्ली शराब घोटाला: 23 अप्रैल तक जेल में ही रहेंगी K कविता, CBI ने कोर्ट को बताया- न जाँच में कर रही हैं सहयोग, न दे रही सवालों के सही जवाब

दिल्ली के शराब घोटाला मामले में बीआरएस नेता के कविता की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। उनके मामले में सुनवाई करते हुए आज (15 अप्रैल 2024) राउज एवेन्यू कोर्ट ने फिर उन्हें झटका दिया और 23 अप्रैल 2024 तक उनकी न्यायिक हिरासत को बढ़ा दिया।

के कविता ने कोर्ट से निकलते हुए मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, “ये कस्टडी सीबीआई की नहीं है, ये भाजपा की है। जो कुछ भी भाजपा बाहर बोल रही है। सीबीआई वही सवाल सिर्फ अंदर बार-बार 2 साल से पूछ रही है। यहाँ कुछ नया नहीं है।”

वहीं सीबीआई ने कोर्ट में कविता पर आरोप लगाया कि वो जाँच में सहयोग नहीं कर रही हैं। जाँच एजेंसी ने कहा कि पूछताछ के दौरान के कविता कहीं से कहीं तक संतोषजनक जवाब देती नहीं मिलीं।

सीबीआई की मानें तो बीआरएस नेता के कविता के जवाब और इन्वेस्टिगेशन के दौरान उन्हें बरामद हुए दस्तावेज विरोधाभासी थे। इसके अलावा उन पर शराब कारोबारी शरद रेड्डी के साथ कारोबार में शामिल होने की भी बात है। फिलहाल के लिए कोर्ट ने उनकी न्यायिक हिरासत को 23 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दिया है।

बता दें कि इससे पहले दिल्ली के शराब घोटाले में के कविता को ईडी द्वारा 12 अप्रैल को कोर्ट में पेश किया गया था। उस समय भी कोर्ट को यगही बताया गया था कि कविता संतोषजनक जवाब नहीं दे रहीं।

ईरान की सेना ने जिस जहाज को पकड़ा, उस पर मौजूद 17 भारतीयों से मिल सकेंगे अधिकारी: S जयशंकर के कॉल के बाद तेहरान का फैसला

ईरान और इजरायल के बीच युद्ध के माहौल के बीच भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दोनों देशों के विदेश मंत्रियों से बातचीत की है। विदेश मंत्री जयशंकर की माँग पर ईरान ने अपने कब्जे में जहाज एमएससी अराईज पर मौजूद भारतीयों को सहायता को अनुमति दे दी है। यह जहाज इजरायल से जुड़ा है, इस पर 17 भारतीय मौजूद हैं।

विदेश मंत्री जयशंकर ने रविवार (14 अप्रैल, 2024) रात्रि को ईरान के विदेश मंत्री डॉ आमिर अबदोल्लाहियन से फ़ोन पर बात की। इस बातचीत के दौरान दोनों ने इजरायल-ईरान के तनाव को लेकर चिंताएँ साझा कीं। विदेश मंत्री जयशंकर ने इस दौरान ईरान के कब्जे में जहाज एमएससी अराईज पर मौजूद 17 भारतीयों को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने माँग की कि इन भारतीयों को तुरंत रिहा किया जाए।

ईरानी विदेश मंत्रालय की तरफ से बातचीत को लेकर जारी की गई जानकारी में कहा गया है कि वह 17 भारतीयों की भारत के प्रतिनिधि से मुलाकात की अनुमति देगा। ईरानी विदेश मंत्री अब्दोल्लाहियन ने विदेश मंत्री जयशंकर से गाजा और फिलिस्तीन में शांति को लेकर बात की।

गौरतलब है कि ईरान की सेना ने 13 अप्रैल, 2024 को होरमुज़ की खाड़ी में एक जहाज एमएससी अराईज को अपने कब्जे में ले लिया था। पुर्तगाल के झंडे तले चलने वाला यह जहाज UAE से भारत की तरफ आ रहा था। ईरानी सेना के कमांडो ने इस पर हेलिकॉप्टर से उतर कर इसे अपने कब्जे में लिया था। इसकी वीडियो भी सामने आई थी। इसके चालक दल के सभी सदस्यों को भी ईरान ने अपने कब्जे में ले लिया था।

इसके बाद यह जानकारी सामने आई थी कि इस पर 17 भारतीय मौजूद हैं। भारत सरकार ने इस जानकारी के बाद तुरंत ही अपने नागरिकों की रिहाई के लिए प्रयास चालू कर दिए थे। इसी क्रम में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री से बात की। विदेश मंत्री जयशंकर ने इजरायल के विदेश मंत्री इजराइल कात्ज़ से भी बात की है।

गौरतलब है कि ईरान और इजरायल वर्तमान में आमने सामने हैं। इजरायल ने 1 अप्रैल, 2024 को ईरान के सीरियाई दूतावास पर हवाई हमला कर दिया था जिसमें कई ईरानी सैन्य अफसर मारे गए थे। इसके बाद ईरान ने इसका बदला लेने की बात कही थी। ईरान ने 14 अप्रैल, 2024 की रात को इजरायल की तरफ ड्रोन और मिसाइल दागे थे। अभी इजरायल ने इसका कोई कड़ा जवाब नहीं दिया है लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव चरम सीमा पर है।