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शाही ईदगाह पर मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट का झटका, कहा- श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े सभी मामलों की एक साथ होगी सुनवाई

उत्तर प्रदेश के मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह ढाँचे के बीच भूमि विवाद के मुकदमों का इलाहाबाद हाईकोर्ट में हस्तांतरण के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सोमवार (15 अप्रैल 2024) को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को तगड़ा झटका दिया है। इसके साथ ही शीर्ष न्यायालय ने शाही ईदगाह मस्जिद की कमिटी की इस याचिका पर नोटिस जारी कर संबंधित पक्षों से जवाब माँगा है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की खंडपीठ ने सोमवार (15 अप्रैल 2024) को मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मुस्लिम पक्ष की दोनों माँगों को खारिज कर दिया। इस फैसले को जहाँ हिंदू पक्ष के लिए राहत की बात मानी जा रही है, वहीं मुस्लिम पक्ष के लिए यह बड़ा झटका भी कहा जा रहा है।

दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह ढाँचे से संबंधित मथुरा की जिला अदालत में चल रहे 15 मुकदमों को अपने यहाँ हस्तांतरित करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट का कहना था कि ये सभी मुकदमे एक ही तरह के हैं, जिनमें एक ही तरह के सबूतों के आधार पर फैसला होना है। इसलिए कोर्ट का समय बचाने के लिए इन सभी मुकदमों की एक साथ सुनवाई हो।

इलाहाबाद हाई कोर्ट का 11 जनवरी 2024 को ‘न्याय के हित में’ दिया गया यह आदेश एक हिंदू वादी द्वारा दायर याचिका पर आया था। हिंदू वादी ने एक याचिका दायर कर माँग की थी मथुरा के जिला न्यायालय में चल श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह से जुड़े 15 मुकदमों को एक साथ किया जाए और उसकी सुनवाई हाई कोर्ट में हो।

हिंदू पक्ष ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दिए गए अपने आवेदन में कहा था कि मथुरा जिला अदालत के दीवानी न्यायाधीश (वरिष्ठ संभाग) के समक्ष 25 सितंबर 2020 को दायर मूल मुकदमे और 13.37 एकड़ जमीन से संबंधित अन्य मुकदमों को समाहित कर दिया जाए। हिंदू पक्ष की बात को स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने ऐसा करने का निर्णय दिया था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह निर्णय मुस्लिम पक्ष को पसंद नहीं आया। मथुरा के विवादित शाही ईदगाह ढाँचे से जुड़ी मुस्लिम कमिटी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया। मुस्लिम पक्ष ने ना सिर्फ हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की माँग सुप्रीम कोर्ट से की, बल्कि इलाहाबाद हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई पर भी रोक लगाने की माँग की।

वही, इसी पीठ के समक्ष इसी मुद्दे से संबंधित मस्जिद समिति द्वारा दायर एक और एसएलपी भी सूचीबद्ध थी। इसमें दिसंबर 2023 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें शाही ईदगाह ढाँचे का निरीक्षण करने के लिए एक कोर्ट कमिश्नर की नियुक्ति की अनुमति दी गई थी। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम रोक को अगस्त तक जारी रखने का आदेश दिया।

शीर्ष अदालत ने 16 जनवरी को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के इस आदेश के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी थी। आज सोमवार (15 अप्रैल 2024) को सुप्रीम कोर्ट ने 5 अगस्त 2024 से शुरू होने वाले सप्ताह में मामलों को दोबारा सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया और कहा कि सुनवाई की अगली तारीख तक अंतरिम आदेश लागू रहेगा। शीर्ष न्यायालय ने साफ कहा कि उसने हाई कोर्ट में लंबित मुकदमों की सुनवाई पर रोक नहीं लगाई है।

रामनवमी पर अयोध्या आने वाले सभी भक्तों को दर्शन देंगे रामलला, 5 मिनट तक सूर्य की किरणें करेंगी प्रभु के ललाट पर तिलक: सफल रहा परीक्षण

राम नवमी के मौके पर सूर्य की किरणों से भगवान राम का तिलक हो इसके लिए वैज्ञानिक मिलकर प्रयास कर रहे हैं। तकनीकी व्यवस्था करके कोशिश चल रही है कि कैसे भी रामनवमी के पावन अवसर पर एक निश्चित अवधि के लिए सूर्य की किरणें भगवान राम के मस्तक को छुएँ और श्रद्धालु उस क्षण के दिव्य दर्शन कर पाएँ।

इस संबंध में राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने कहा, “राम नवमी पर यहाँ आने वाले सभी भक्तों के लिए भगवान राम के ‘दर्शन’ की सुविधा सुनिश्चित की गई है। वैज्ञानिकों द्वारा कोशिश की जा रही है कि सूर्य की किरणें दोपहर 12.16 बजे 5 मिनट के लिए भगवान के माथे पर पड़ें। इसके लिए महत्वपूर्ण तकनीकी की व्यवस्था की जा रही है। इसे सफल बनाने के लिए ट्रस्ट और वैज्ञानिक मिलकर काम कर रहे हैं।”

बता दें कि राम नवमी पर इस प्रयोग को करने से पहले शुक्रवार (12 अप्रैल 2024) को राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के सूर्य तिलक का सफल ट्रायल किया गया था। इसकी सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी सामने आई है। इसमें देखा गया था कि दर्पण के जरिए भगवान सूर्य ने प्रभु के मस्तक पर तिलक किया था। यह परीक्षण 12:00 बजे पूरा हुआ था।

अब इसी तकनीक से 17 अप्रैल को भी कोशिश की जा रही है ताकि सूर्यदेव अपनी किरणों से प्रभु के ललाट की शोभा बढ़ाएँ। बताया जा रहा है कि करीब 4 से 5 मिनट कक सूर्यदेव रामलला का तिलक करेंगे। इस काम के लिए सूर्य की किरणों को सबसे पहले अलग-अलग तीन दर्पणों के माध्यम से डायवर्ट किया जाएगा, फिर पीतल की पाइप के जरिए किरणों को लेंस के माध्यम से रामलला के मस्तक पर लेकर जाया जाएगा।

गरीब घटे-कारोबार बढ़ा, इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर विज्ञान तक बुलंदी… लेखक अमीश त्रिपाठी ने बताया क्यों PM मोदी को करेंगे वोट, कहा – चाहिए चाणक्य वाला नेतृत्व

लेखक अमीश त्रिपाठी ने लोकसभा चुनाव 2024 से पहले एक लेख के जरिए बताया है कि आखिर वो क्यों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए भाजपा को वोट करना चाहेंगे। ‘Shiva Trilogy’ की पुस्तकों के लेखक अमीश त्रिपाठी ने कहा कि उन्होंने राजनीति पर कुछ न बोलने का नियम बनाया हुआ था, लेकिन वो खुद के बनाए इस नियम को तोड़ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट ऐलान किया कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी राष्ट्रीय सरकार को समर्थन देते हैं। उन्होंने कहा कि ये बहुत ज़रूरी है कि भाजपा उम्मीदवारों के माध्यम से पीएम मोदी को वोट किया जाए।

अमीश त्रिपाठी ने अपने इस निर्णय के पीछे की सोच को समझाते हुए कहा कि ग़रीबी में नाटकीय रूप से कमी आई है, भारत की वित्तीय स्थिति और राजस्व मजबूत हुआ है, इंफ़्रास्ट्रक्चर में व्यापक सुधार आया है जो वो मुंबई में देख सकते हैं जहाँ वो रहते हैं और वाराणसी में भी ये स्पष्ट दिखता है जहाँ से उनका परिवार ताल्लुक रखता है, GDP विकास दर बढ़ रहा है, स्टार्टअप्स को सहायता मिल रही है, छोटे कारोबार के लिए कर्ज मिल रहे हैं, विज्ञान एवं तकनीक में निवेश किया जा रहा है जो उनके पाठकों खासकर युवाओं से उन्हें सुनने को मिला है।

अमीश त्रिपाठी ने इन कारणों के अलावा गिनाया कि जन-कल्याणकारी योजनाएँ भी आम लोगों तक सीधे पहुँच रही है, जबकि पूर्व में इसमें गड़बड़ी होती थी। हालाँकि, उन्होंने नरेंद्र मोदी को वोट करने के पीछे का महत्वपूर्ण कारण बताया कि 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जिस वैश्विक व्यवस्था का जन्म हुआ था वो अब खात्मे की ओर है। IIM कलकत्ता से पढ़े अमीश त्रिपाठी का मानना है कि विश्व के अलग-अलग हिस्सों में युद्ध चल रहा है, पुराने गठबंधन टूट रहे हैं।

अमीश त्रिपाठी का मानना है कि पीढ़ियों में एक बार आने वाले कोरोना जैसी महामारी के प्रभावों से निपटने के लिए दुनिया साथ नहीं आ पा रही, अमीर विकसित देशों में भी ऋण संकट है, समुद्री डकैती का मुद्दा है, युद्ध में इस्तेमाल होने वाले अत्याधुनिक हथियारों की कीमत हुई है जिस कारण हूती विद्रोही सुएज नहर को रोक सकते हैं, पर्यावरण की समस्या है। इन समस्याओं को टाइम बम करार देते हुए अमीश त्रिपाठी ने कहा कि इनमें से अधिकतर से निपटने के लिए दुनिता तैयार नहीं है, जबकि ये फटने के लिए बेचैन हैं।

अमित त्रिपाठी ऐसे लेखक हैं जिनके पुस्तकों की 75 लाख से भी अधिक प्रतियाँ बिक चुकी हैं। उन्होंने कहा, “जब कोई वैश्विक व्यवस्था चरमराती है, तो आमतौर पर अराजकता, उथल-पुथल और अक्सर युद्ध का समय आ जाता है। हम अराजकता और गहन बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं। और अभी दुनिया खुद को अपने पान पर खड़ी कर पाती है या नहीं, ये अगले सदियों तक की वैश्विक व्यवस्था का निर्णय करेगा। ऐसे संवेदनशील समय में हमें एक उम्दा नेतृत्व चाहिए। प्रथम एवं द्वितीय विश्व युद्ध के समय अमेरिका के पास असाधारण नेतृत्व था। इससे मौजूदा वैश्विक ऑर्डर का जन्म हुआ, जो USA के लिए फायदेमंद रहा।”

डेढ़ दशक तक कई बैंकों में काम कर चुके अमीश त्रिपाठी कहते हैं कि वैश्विक इतिहास के ऐसे नाजुक समय में हमें ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो गहन प्रेरणा व उम्दा क्षमताओं से लैस हो, मेहनती हो, जनसमूह को अपने साथ लेकर चले। उन्होंने माना कि कई ऐसे लोग हैं जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हैं, कई नहीं करते हैं। जो पीएम मोदी के विरोधी हैं, उनसे लेखक ने अपील की कि इतिहास के इस बड़े मोड़ पर हमें स्पष्ट बहुमत वाली एक मजबूत सरकार की आवश्यकता है जो दुनिया के साथ अच्छा तालमेल बिठा कर ये सुनिश्चित कर सके कि उथल-पुथल के इस दौर में भी भारत शीर्ष पर पहुँचे।

लंदन स्थित ‘द नेहरू सेंटर’ में 2019 में भारत सरकार द्वारा निदेशक के रूप में नियुक्त किए जाने के बाद से कूटनीतिक कार्यों में भी सक्रिय रहे अमीश त्रिपाठी ने कहा कि अगर भारत मजबूत है तो हम सबके पास मजबूत होने का मौका है। उन्होंने कहा कि पिछले (1950-1990) दशकों की तरह भारत अगर कमजोर बना रहा, तो हम भी कमजोर होंगे। अमीश त्रिपाठी का कहना है कि हम इस दौर में बड़े देशों से समझौते कर के अपने राष्ट्रीय हित के परिणाम निकलवाते हैं, जैसे रूस से भारत ने कच्चा तेल खरीदा।

अमीश त्रिपाठी ने कहा कि ऐसे नाजुक दौर में हमारे देश और हमारी सभ्यता को चाणक्य जैसे नेतृत्व की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सत्ता में बने रहना हमारी ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि वो अपने लोकसभा क्षेत्र में NDA उम्मीदवार के लिए वोट करेंगे। बता दें कि भारत में 7 चरणों में लोकसभा चुनाव होना है, जिसके परिणाम 4 जून, 2024 को आएँगे। भाजपा ने इस बार ‘400 पार’ का नारा दिया है और पीएम मोदी धुआँधार रैलियाँ कर रहे हैं।

‘कुछ गुट कर रहे न्यायपालिका को कमजोर करने की कोशिश’: CJI को 21 पूर्व जजों ने लिखी चिट्ठी, 600+ वकीलों ने भी ‘दबाव’ पर जताई थी चिंता

सुप्रीम कोर्ट चार पूर्व न्यायधीश और हाई कोर्ट के 17 पूर्व न्यायधीशों सहित कुल 21 पूर्व न्यायाधीशों ने देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ को पत्र लिखा है। इसमें पूर्व न्यायाधीशों ने कुछ ‘गुटों’ द्वारा न्यायपालिका को कमजोर करने और न्यायिक प्रणाली में जनता के विश्वास को कम करने का आरोप लगाते हुए चिंता जताई है। इससे पहले 28 मार्च 2024 को देश के 600 से अधिक वकीलों ने CJI को पत्र लिखकर न्यायपालिका पर उठते सवाल को देखते हुए वो चिंता जताई थी।

CJI को लिखे पत्र में 21 पूर्व न्यायाधीशों ने लिखा, “हम कुछ गुटों द्वारा दबाव, गलत सूचना और सार्वजनिक अपमान के माध्यम से जानबूझकर न्यायपालिका को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसको लेकर हम अपनी साझा चिंता व्यक्त कर रहे हैं। हमारे संज्ञान में आया है कि संकीर्ण राजनीतिक हितों और व्यक्तिगत लाभ से प्रेरित ये तत्व प्रयास कर रहे हैं हमारी न्यायिक प्रणाली में जनता के विश्वास कम हो।”

पूर्व जजों ने आगे लिखा, “हम गलत सूचना फैलाने की रणनीति और न्यायपालिका के खिलाफ जनता की भावनाओं को भड़काने को लेकर चिंतित हैं। यह न केवल अनैतिक है, बल्कि हमारे लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांतों के लिए भी हानिकारक है। उन न्यायिक निर्णयों की चयनात्मक रूप से प्रशंसा करने की प्रथा है जो किसी के विचारों से मेल खाते हैं, जबकि उन लोगों की तीखी आलोचना किया जाता है जो न्यायिक समीक्षा और कानून के शासन के सार को कमजोर नहीं करते हैं।”

पूर्व जजों ने पत्र में आगे लिखा कि इस तरह की गतिविधियों से न सिर्फ न्यायपालिका की शुचिता का असम्मान होता है, बल्कि जजों की निष्पक्षता के सिद्धांतों के सामने चुनौतियाँ भी खड़ी हो जाती हैं। इन समूहों द्वारा अपनाई जा रही योजना काफी परेशान करने वाली भी है, जो न्यायपालिका की छवि धूमिल करने के लिए आधारहीन सिद्धांत गढ़ती है और अदालती फैसलों को प्रभावित करने का प्रयास करती है।

पत्र में आगे कहा गया, “हम न्यायपालिका के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं और इसकी गरिमा एवं निष्पक्षता बचाए रखने के लिए हर तरह की मदद करने के लिए तैयार हैं। हम उम्मीद करते हैं कि इस चुनौतीपूर्ण समय में आपका मार्गदर्शन और नेतृत्व न्याय एवं समानता के स्तंभ के तौर पर न्यायपालिका की सुरक्षा करेगा।”

600+ वकीलों की CJI को चिट्ठी

इससे पहले 28 मार्च 2024 को हरीश साल्वे, मनन कुमार मिश्रा, आदिश अग्रवाल, चेतन मित्तल, पिंकी आनंद, हितेश जैन, उज्ज्वला पवार, उदय होला, स्वरुपमा चतुर्वेदी जैसे बड़े नामों सहित 600+ वकीलों ने CJI को चिट्ठी लिखी थी। इसमें कहा गया था कि देश का एक ख़ास वर्ग अदालत पर दबाव डालना चाहता है और इसकी स्वायत्तता कम करने की कोशिश में है। चिट्ठी में कहा गया था कि राजनीतिक लोगों से जुड़े मामले और भ्रष्टाचार से संबंधित केसों में ये अधिक हो रहा है।

वकीलों ने कहा था कि इस खास ग्रुप कई तरीकों से न्यायपालिका के कामकाज को प्रभावित करने की कोशिश करता है, जिनमें न्यायपालिका के तथाकथित सुनहरे युग के बारे में गलत नैरेटिव पेश करने से लेकर अदालतों की मौजूदा कार्यवाहियों पर सवाल उठाना और अदालतों में जनता के विश्वास को कम करना शामिल हैं। वकीलों ने कहा था कि ये खास समूह चुनावों के दौरान अधिक सक्रिय हो जाता है।

CJI को लिखे पत्र में आगे कहा गया था कि ये ग्रुप अपने पॉलिटिकल एजेंडे के आधार पर अदालती फैसलों की सराहना या फिर आलोचना करता है। असल में ये ग्रुप ‘माई वे या हाईवे’ वाली थ्योरी में विश्वास करता है। साथ ही बेंच फिक्सिंग की थ्योरी भी इन्हीं की गढ़ी हुई है। वकीलों ने आरोप लगाया है कि ये अजीब है कि नेता किसी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हैं और फिर अदालत में उनका बचाव करते हैं। ऐसे में अगर अदालत का फैसला उनके मनमाफिक नहीं आता तो वे कोर्ट के भीतर ही या फिर मीडिया के जरिए अदालत की आलोचना करना शुरू कर देते हैं।

इस पत्र में कहा गया था कि कुछ तत्व जजों को प्रभावित करने या फिर कुछ चुनिंदा मामलों में अपने पक्ष में फैसला देने के लिए जजों पर दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं और ऐसा सोशल मीडिया पर झूठ फैलाकर किया जा रहा है। इनके ये प्रयास निजी या राजनीतिक कारणों से अदालतों को प्रभावित करने का प्रयास है, जिन्हें किसी भी परिस्थिति में सहन नहीं किया जा सकता। पत्र में कहा गया था कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी ऐसा ही देखने को मिला था। 

PM मोदी ने विपक्ष पर साधा था निशाना

इन वकीलों के पत्र सामने आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था, “दूसरों को डराना-धमकाना और दबाना कॉन्ग्रेस की पुरानी संस्कृति रही है। 5 दशक पहले ही उन्होंने ‘प्रतिबद्ध न्यायपालिका’ की बात की थी। वो बेशर्मी से दूसरों से तो प्रतिबद्धता चाहते हैं, लेकिन खुद राष्ट्र के प्रति किसी भी प्रतिबद्धता से बचते हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा था, “इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि 140 करोड़ भारतवासी उन्हें अस्वीकार कर रहे हैं।” दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इशारा न्यायपालिका में अपनी चलाने की कोशिश में लगे रहने वाले कॉन्ग्रेस समर्थित वकीलों के गिरोह की तरफ था।

केरल में जिन वामपंथियों को आतंकी कहती है कॉन्ग्रेस, दिल्ली में उनके साथ ही बैठकर बनाती है रणनीति: पलक्कड़ में बोले PM मोदी, कहा- नव वर्ष नई राजनीति का आरम्भ होगा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केरल के पलक्कड़ में लोकसभा चुनाव रैली में कहा है कॉन्ग्रेस ने भारत को दुनिया के सामने एक कमजोर देश के रूप में पेश किया गया था। आज मोदी सरकार ने भारत को एक मजबूत देश बनाया है। पीएम मोदी ने यहाँ कहा कि उनकी सरकार केरल के विकास के लिए काम करती रहेगी।

पीएम मोदी पलक्कड़ की दो लोकसभा सीट, थ्रिसुर और अलाथुर से NDA उम्मीदवार टी एन सरासु और सुरेश गोपी के लिए चुनाव प्रचार करने पहुँचे। उन्होंने यहाँ केरल के विकास को लेकर भाजपा की नीतियाँ भी सामने रखीं। उन्होंने यहाँ लेफ्ट और कॉन्ग्रेस पर हमला बोला।

पीएम मोदी ने यहाँ केरल के नए वर्ष को लेकर बात की। उन्होंने कहा, “यह नया वर्ष एक नया आरम्भ लेकर आया है। यह नव वर्ष नई राजनीति का आरम्भ होगा। केरल अब संसद में मजबूत आवाज भेजेगा। इसीलिए केरल अब फिर एक बार, मोदी सरकार कह रहा है।”

पीएम मोदी ने कहा, ”केरल के नव वर्ष विशु के मौके पर भाजपा ने अपना संकल्प पत्र जारी किया। यह भारत के विकास का संकल्प पत्र है। इसमें मोदी की गारंटी दी गई है। मोदी की गारंटी मतलब 3 करोड़ नए घर बनेंगे। केरल में भी हजारों गरीबों को नए घर मिलेंगे। केरल के हर जन औषधि केंद्र पर लोगों को 80% छूट के साथ सस्ती दवाई मिलती रहेगी।”

पीएम मोदी ने पलक्कड़ की सुन्दरता को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा, “भाजपा ने विकास और विरासत दोनों को अपने संकल्प पत्र में शामिल किया है। पलक्कड़ तो गेटवे ऑफ़ केरल कहा जाता है, यहाँ की प्राकृतिक सुन्दरता किसी का भी मन मोह लेती है। यहाँ कितने भव्य मंदिर हैं, चर्च हैं, आस्था के स्थल हैं। हम अगले पाँच सालों में इस विरासत को ग्लोबल बनाएँगे।”

केरल के इन्फ्रा विकास को लेकर पीएम मोदी ने कहा, “हम केरल को हाइवे, एयरपोर्ट और हाई स्पीड वन्दे भारत रेलवे से जोड़ेंगे। मैं वादा करता हूँ हम इन सारे कामों के लिए आगे बढ़ेंगे। यहाँ पर्यटन की काफी संभावना है। जितना लाभ लिया जाना चाहिए, उतना नहीं लिया गया है।” आप पीएम मोदी का यह भाषण नीचे लगे लिंक पर सुन सकते हैं।

पीएम मोदी ने यहाँ वामपंथी दलों और कॉन्ग्रेस के गठजोड़ पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस केरल के भीतर लेफ्ट वालों को आतंकी बताती है और दिल्ली में दोनों गलबहियाँ करते हैं। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस और लेफ्ट केरल को पीछे धकेल रहे हैं। यह लोग यहाँ हाइवे प्रोजेक्ट तक रोक रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि लेफ्ट वालों का उद्देश्य होता है कि जहाँ उनका शासन हो वहाँ कुछ भी ना बचे और कुछ भी सही ना हो। उन्होंने कहा कि यही लेफ्ट वालों ने त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में भी किया। पीएम मोदी ने केरल में राजनीतिक हत्याओं पर बात की। उन्होंने कहा कि यहाँ साम्प्रदायिक तत्वों में असामाजिक तत्वों को सरकार का संरक्षण मिला है।

केरल में होने वाले भ्रष्टाचार का मुद्दा भी पीएम मोदी ने उठाया। उन्होंने कहा कि करुवन्नुर सहकारी बैंक में सीपीएम के लोगों ने घोटाला किया। उन्होंने सीपीएम के लोगों पर केरल के गरीबों को संकट में डालने का आरोप भी लगाया।

दिल्ली शराब घोटाला: 23 अप्रैल तक जेल में ही रहेंगी K कविता, CBI ने कोर्ट को बताया- न जाँच में कर रही हैं सहयोग, न दे रही सवालों के सही जवाब

दिल्ली के शराब घोटाला मामले में बीआरएस नेता के कविता की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। उनके मामले में सुनवाई करते हुए आज (15 अप्रैल 2024) राउज एवेन्यू कोर्ट ने फिर उन्हें झटका दिया और 23 अप्रैल 2024 तक उनकी न्यायिक हिरासत को बढ़ा दिया।

के कविता ने कोर्ट से निकलते हुए मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, “ये कस्टडी सीबीआई की नहीं है, ये भाजपा की है। जो कुछ भी भाजपा बाहर बोल रही है। सीबीआई वही सवाल सिर्फ अंदर बार-बार 2 साल से पूछ रही है। यहाँ कुछ नया नहीं है।”

वहीं सीबीआई ने कोर्ट में कविता पर आरोप लगाया कि वो जाँच में सहयोग नहीं कर रही हैं। जाँच एजेंसी ने कहा कि पूछताछ के दौरान के कविता कहीं से कहीं तक संतोषजनक जवाब देती नहीं मिलीं।

सीबीआई की मानें तो बीआरएस नेता के कविता के जवाब और इन्वेस्टिगेशन के दौरान उन्हें बरामद हुए दस्तावेज विरोधाभासी थे। इसके अलावा उन पर शराब कारोबारी शरद रेड्डी के साथ कारोबार में शामिल होने की भी बात है। फिलहाल के लिए कोर्ट ने उनकी न्यायिक हिरासत को 23 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दिया है।

बता दें कि इससे पहले दिल्ली के शराब घोटाले में के कविता को ईडी द्वारा 12 अप्रैल को कोर्ट में पेश किया गया था। उस समय भी कोर्ट को यगही बताया गया था कि कविता संतोषजनक जवाब नहीं दे रहीं।

ईरान की सेना ने जिस जहाज को पकड़ा, उस पर मौजूद 17 भारतीयों से मिल सकेंगे अधिकारी: S जयशंकर के कॉल के बाद तेहरान का फैसला

ईरान और इजरायल के बीच युद्ध के माहौल के बीच भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दोनों देशों के विदेश मंत्रियों से बातचीत की है। विदेश मंत्री जयशंकर की माँग पर ईरान ने अपने कब्जे में जहाज एमएससी अराईज पर मौजूद भारतीयों को सहायता को अनुमति दे दी है। यह जहाज इजरायल से जुड़ा है, इस पर 17 भारतीय मौजूद हैं।

विदेश मंत्री जयशंकर ने रविवार (14 अप्रैल, 2024) रात्रि को ईरान के विदेश मंत्री डॉ आमिर अबदोल्लाहियन से फ़ोन पर बात की। इस बातचीत के दौरान दोनों ने इजरायल-ईरान के तनाव को लेकर चिंताएँ साझा कीं। विदेश मंत्री जयशंकर ने इस दौरान ईरान के कब्जे में जहाज एमएससी अराईज पर मौजूद 17 भारतीयों को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने माँग की कि इन भारतीयों को तुरंत रिहा किया जाए।

ईरानी विदेश मंत्रालय की तरफ से बातचीत को लेकर जारी की गई जानकारी में कहा गया है कि वह 17 भारतीयों की भारत के प्रतिनिधि से मुलाकात की अनुमति देगा। ईरानी विदेश मंत्री अब्दोल्लाहियन ने विदेश मंत्री जयशंकर से गाजा और फिलिस्तीन में शांति को लेकर बात की।

गौरतलब है कि ईरान की सेना ने 13 अप्रैल, 2024 को होरमुज़ की खाड़ी में एक जहाज एमएससी अराईज को अपने कब्जे में ले लिया था। पुर्तगाल के झंडे तले चलने वाला यह जहाज UAE से भारत की तरफ आ रहा था। ईरानी सेना के कमांडो ने इस पर हेलिकॉप्टर से उतर कर इसे अपने कब्जे में लिया था। इसकी वीडियो भी सामने आई थी। इसके चालक दल के सभी सदस्यों को भी ईरान ने अपने कब्जे में ले लिया था।

इसके बाद यह जानकारी सामने आई थी कि इस पर 17 भारतीय मौजूद हैं। भारत सरकार ने इस जानकारी के बाद तुरंत ही अपने नागरिकों की रिहाई के लिए प्रयास चालू कर दिए थे। इसी क्रम में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री से बात की। विदेश मंत्री जयशंकर ने इजरायल के विदेश मंत्री इजराइल कात्ज़ से भी बात की है।

गौरतलब है कि ईरान और इजरायल वर्तमान में आमने सामने हैं। इजरायल ने 1 अप्रैल, 2024 को ईरान के सीरियाई दूतावास पर हवाई हमला कर दिया था जिसमें कई ईरानी सैन्य अफसर मारे गए थे। इसके बाद ईरान ने इसका बदला लेने की बात कही थी। ईरान ने 14 अप्रैल, 2024 की रात को इजरायल की तरफ ड्रोन और मिसाइल दागे थे। अभी इजरायल ने इसका कोई कड़ा जवाब नहीं दिया है लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव चरम सीमा पर है।

संदेशखाली में उमड़ा भगवा सैलाब, ‘जय भवानी-जय शिवाजी’ के नारों से गूँजा 4 किमी लंबा जुलूस: लोग बोले- बंगाल में कमल खिलना तय

लोकसभा चुनावों के बीच बंगाल में पोइला बैशाख के मौके पर भारतीय जनता पार्टी की महिला मोर्चा ईकाई और बशीरहाट जिला संगठन ने संदेशखाली के राजबाड़ी इलाके में जुलूस निकाला। इस दौरान पार्टी के दिग्गज नेता सुवेंदु अधिकारी भी उनके साथ रहे। अधिकारी ने इस जुलूस की एक वीडियो को शेयर भी किया है।

वीडियो में देख सकते हैं कि काफी मात्रा में भाजपा समर्थक सड़कों पर हैं। हाथ में तिरंगे के साथ भारतीय जनता पार्टी का झंडा है और साथ में कमल का निशान है। सुवेंदु अधिकारी ने इसे शेयर करते हुए कहा- “पोइला बैशाख के शुभ अवसर पर भाजपा महिला मोर्चा और भाजपा बशीरहाट संगठनात्मक जिले ने संदेशखाली के राजबाड़ी क्षेत्र में एक रंगारंग और आनंदमय जुलूस का आयोजन किया। मैंने भी जुलूस में भाग लिया और हजारों लोगों के साथ चला। भाजपा बंगाल कार्यकर्ताओं ने, बंगाली नव वर्ष के शुभ अवसर पर लोगों से मिलकर उन्हें शुभकामानाएँ दीं।”

इस वीडियो को देखने के बाद अब हैरानी जताई जा रही है कि आखिर बंगाल में भगवे की सुनामी कहाँ से आई। कुछ लोग ये भी दावा कर रहे है कि 4 किलोमीटर तक निकाले गए इस जुलूस में लोग ‘जय भवानी-जय शिवाजी’ के जोर-जोर से नारे लगा रहे थे और शाहजहाँ और औरंगजेब के खिलाफ भी नारेबाजी की जा रही थी।

अमित ठाकुर ने लिखा, “यही तो बंगाल को बदल रहा है। पोइला बैशाक आयोजन में जनता का सैलाब उमड़ आया है। बंगाल में कमल खिलना तय है।”

सनी राज लिखते हैं- संदेशखाली में सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भगवे का लहर। तृणमूल कॉन्ग्रेस के लिए ये डराने वाले विजुल्स हैं।

अभिषेक भारद्वाज कहते हैं- संदेशखाली में भगवे की लहर देखी गई है, अब जाकर लगता है कि बंगाल के लोग बदलाव चाहते हैं।

बता दें कि बंगाल का संदेशखाली पिछले कई समय से चर्चा में था।फरवरी माह में यहाँ की महिलाओं ने टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ के विरुद्ध आवाज बुलंद करते हुए बताया था कि किस तरीके से उनके साथ टीएमसी के गुंडे उनपर अत्याचार करके उनकी जमीन कब्जा रहे थे और उनका शोषण कर रहे थे… जब संदेशखाली की यह आवाज राष्ट्र के कोने-कोने तक पहुँची तो इस मामले पर एक्शन लिया गया और आखिर में जाकर शेख शाहजहाँ की गिरफ्तारी हुई। अब इसी जगह से भाजपा ने संदेशखाली की एक पीड़िता रेखा पात्रा को टिकट देकर चुनावी मैदान में उतारा है।

पालघर में संतों को ‘भीड़’ ने पीट-पीटकर मार डाला, सोते रहे उद्धव ठाकरे: शिवसैनिक ने ही किया खुलासा, कहा- राहुल गाँधी के कहने पर नहीं कराई CBI जाँच

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिव सेना के एक नेता ने दावा किया है कि उद्धव ठाकरे ने पालघर में हुई हिन्दू साधुओं की भीड़ हत्या की सीबीआई जाँच राहुल गाँधी के दबाव में नहीं करवाई थी। महाराष्ट्र के पालघर में अप्रैल, 2020 में दो हिन्दू साधुओं और उनके ड्राइवर की भीड़ ने पीट-पीट कर हत्या कर दी थी।

इस मामले को लेकर शिवसेना के प्रवक्ता किरण पावसकर ने कहा, “पालघर में हिन्दू साधुओं की हत्या तब हुई थी जब तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सो रहे थे और उनके गृह मंत्री अनिल देशमुख पैसों की उगाही करने में व्यस्त थे। इससे यह शक होता है कि साधुओं को महाराष्ट्र सरकार के इशारे पर मारा गया था। इस घटना के बाद उद्धव ठाकरे ने बहुत ढीलाढाला सा जवाब दिया था और इसकी जाँच को लेकर कोई कदम नहीं उठाए। उनकी सरकार के इस मामले को सीबीआई को ना सौंपने के कारण जाँच में काफी देरी हुई।”

पावसकर ने आरोप लगाया कि घटना के महीनों बाद तक कोई ख़ास कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि इसी कारण से जूना अखाड़ा को सीबीआई जाँच की माँग को लेकर सुप्रीम कोर्ट की शरण लेनी पड़ी, लेकिन तब भी उद्धव सरकार ने सीबीआई जाँच का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई को यह मामला इसलिए नहीं सौंपा गया क्योंकि उद्धव सरकार कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के दबाव में थी।”

गौरतलब है कि साधुओं की हत्या के दौरान राज्य में उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली महा विकास अघाड़ी की सरकार थी। इसमें शिवसेना के साथ कॉन्ग्रेस और एनसीपी भी शामिल थी। साधुओं की हत्या के मामले ने देश खूब सुर्खियाँ बटोरी थीं। इसके बाद सीबीआई जाँच की माँग उठी थी। हालाँकि, उद्धव सरकार ने इस मामले की जाँच राज्य की सीआईडी को दे दी थी। जूना अखाड़ा ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और सीबीआई जाँच की माँग की थी जिसका उद्धव सरकार ने विरोध किया था।

राज्य में सत्ता बदलने के बाद भाजपा-शिवसेना (बालासाहेब) की सरकार ने इस मामले की सीबीआई जाँच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी डाली थी और इसके आदेश दिए थे। शिंदे सरकार ने इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली थी।

क्या है मामला…

16 अप्रैल 2020 में कल्पवृक्ष गिरि और सुशील गिरि नाम के दो साधुओं और उनके ड्राइवर को पालघर में भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला था। जब यह घटना हुई थी, तब दोनों साधु मुंबई से सूरत की यात्रा कर रहे थे। इस दौरान 200 से अधिक लोगों की भीड़ ने उन्हें रोक लिया था और पथराव करने के बाद उनकी कार को उलट दिया था। भीड़ ने साधुओं की इतनी पिटाई की कि उन्होंने दम तोड़ दिया था।

इस घटना के बाद जून 2020 में पंच दशाबन जूना अखाड़े के साधुओं और दो मृतक साधुओं के रिश्तेदारों ने मामले की जाँच कर रहे राज्य के अधिकारियों पर पक्षपात करने का आरोप लगाया था। इसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट से एनआईए/सीबीआई जाँच की माँग की थी।

पत्रकार ने कन्हैया कुमार से पूछा सवाल, समर्थक ने PM मोदी की माँ को दी गाली… कॉन्ग्रेस नेता ने हँसते हुए कहा- अभिधा और लक्षणा में ही हो बात: FIR दर्ज

कॉन्ग्रेस नेता कन्हैया कुमार के समर्थकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को माँ की गाली दी है। संबंधित वीडियो को ‘भाजपा छत्तीसगढ़’ ने एक्स अकॉउंट से शेयर किया है। वीडियो सामने आने के बाद इस मामले में बिलासपुर थाने में एफआईआर हो गई है और आरोपित की पहचान करके उसे हिरासत में भी ले लिया गया है।

आरोपित का नाम अरविंद कुमार सोनी है। बिलासपुर की एएसपी (ग्रामीण) ने बताया कि उन्होंने सोनी को मस्तूरी गाँव से पकड़ा है। उसी ने कन्हैया कुमार के मीडिया से बात करने के बीच पीएम को गाली दी थी।

बता दें कि इस संबंध में भाजपा ने वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा था “घिनौनी कॉन्ग्रेस…कॉन्ग्रेस के टुकड़े-टुकड़े गैंग वाले नेता के समक्ष प्रधानमंत्री जी को माँ की गाली दी गई और वहाँ मौजूद कॉन्ग्रेसियों ने इस पर कुछ नहीं कहा। देश देख रहा है कैसे ये मानसिक तौर पर दिवालिया पार्टी महिलाओं के प्रति अपनी सोच प्रदर्शित कर रही है।”

वीडियो में क्या है?

वीडियो में देख सकते हैं कि कन्हैया कुमार अपने समर्थकों के बीच घिरे हैं और मुस्कुराते हुए जा रहे हैं। पीछे से लोग ‘कन्हैया कुमार जिंदाबाद’ के नारे भी लगा रहे हैं। इस दौरान एक पत्रकार उनसे कहता है कि वो पीएम मोदी को कायर कह चुके, तोता ज्योतिशी बता चुके हैं, उन्हें रावण भी बोल चुके हैं… इतने पर कन्हैया कुछ प्रतिक्रिया देते, इससे पहले एक आवाज पीछे से सुनाई पड़ती है, जिसमें कहा जाता है- मोदी माद$%^* है। ये शब्द वहाँ खड़े सभी लोगों को सुनाई पड़ता है लेकिन कन्हैया ऐसी भाषा का प्रयोग करने से मना करने की बजाय, मुस्कुराते हुए कहते हैं- अभिधा और लक्षणा में ही हो बात।

अब इस वीडियो को शेयर करके सोशल मीडिया पर कन्हैया कुमार और आरोपित के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की जा रही है। एक्स पर चर्चित अकॉउंट मिस्टार सिन्हा ने इस वीडियो को शेयर करते हुए कहा कि देश विरोधी कन्हैया कुमार की रैली में ऐसे नारे लगाए गए… जो कि हैरान करने वाला नहीं है लेकिन पीएम के विरुद्ध ऐसा कहा जाना किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होना चाहिए।

अमित ठाकुर ने चुनाव आयोग को टैग करते हुए इस मामले पर संज्ञान लेने को कहा है। उन्होंने ईसी को टैग करते हुए कहा, “जिस शब्द का प्रयोग इस कॉन्ग्रेसी कन्हैया कुमार ने किया है चुनाव प्रचार के नाम पर कहीं से स्वीकार्य नहीं है।”

मेघ अपडेट्स द्वारा दी गई जानकारी को देखें तो बताया गया है कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता और उत्तर पूर्वी दिल्ली में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी कन्हैया कुमार का साझी गिरफ्तार कर लिया गया है, क्योंकि उसने पीएम मोदी के लिए अपशब्द कहे थे। इस ट्वीट के साथ उन्होंने एक शख्स की तस्वीर भी लगाई है।

लोग माँग कर रहे हैं कि ऐसी हरकत करने वालों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए, तभी कोई पीएम पद पर बैठे शख्स के लिए ऐसी भाषा प्रयोग करने से पहले दो बार सोचेगा वरना ये स्थिति और बुरी होगी। हर चुनाव में ऐसी हरकतें होना आम हो गया है। कभी पीएम मोदी को चोर कहा जाता है तो कभी उन्हें कहा जाता है कि उनका परिवार नहीं है और कभी-कभी इस तरह भद्दी गाली दे दी जाती है।