नॉर्वे में मस्जिद के सामने कुरान जलाने वाले साल्वान मोमिका की मौत की खबरें झूठी थीं। खुद साल्वान ने एक्स पर ट्वीट करके इन खबरों का खंडन किया है। अपने ट्वीट में साल्वान ने कहा है कि उनकी मौत की खबर इसलिए फैलाई गई थी ताकि कभी कोई इस्लाम की आलोचना न करे। इसके साथ उन्होंने एक फोटो भी डाली है जिसमें वो ठेंगा दिखा रहे हैं। वहीं फोटो के साथ डाले गए पोस्ट में नॉर्वे प्रशासन की आलोचना है।
अपने एक्स अकॉउंट पर उन्होंने लिखा, “जिन न्यूजपेपर और न्यूज साइट ने मेरी मौत की खबर प्रकाशित की हैं वो फर्जी है और उसका मकसद सिर्फ उन लोगों को डराना है जो इस्लाम पर संदेह करते हैं या उनकी आलोचना करते हैं। इसलिए मैं बस कहना चाहता हूँ कि ये तुम्हारी अफवाह फैलाने वाली और फर्जी मीडिया हमें बिलकुल नहीं डरा सकती। मैं जिंदा हूँ और तब तक सरेंडर नहीं करूँगा जब नॉर्वे प्रशासन अन्याय करेगा।”
The newspapers and news sites that published the news of my death in Norway are false and their goal is to intimidate everyone who doubts or criticizes Islam. Therefore, I say, your rumors and false media will not scare us. I am alive and will not surrender despite the injustice… pic.twitter.com/PwmDwY9THa
साल्वान कहते हैं, “इन लोगों ने पहले मुझे किसी से भी बात करने से रोका, उसके बाद मुझे कोर्ट ले गए। जहाँ कोर्ट ने मुझ पर इल्जाम लगाए- ‘तुम इसलिए हिरासत में लिए गए हो क्योंकि तुम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो।’ बेवकूफ जज को शायद इस्लाम से ज्यादा प्यार था, इसलिए मैंने कहा कि न ही जेल और न ही तुम्हारी कोर्ट मुझे डरा सकती है। ऐसा लगता है कि तुम इस्लाम से खुश हो कि वो तुम्हारे देश को कब्जा रहे हैं और तुम्हारी बेटियों का रेप हो रहा है। इसके बाद पुलिस मुझे कोर्ट के बाहर ले गई और मुझे एक जेल में रखा गया जो मानवाधिकार संगठन के सुपरविजन से बाहर था। इन्होंने मुझे मीडिया और प्रेस किसी से बात नहीं करने दी।”
अपने अगले ट्वीट में साल्वान ने कहा, “नॉर्वे में मेरे साथ जो हुआ वह मुझे सद्दाम हुसैन के दमनकारी तानाशाही शासन की याद दिलाता है…जब उन्होंने मुझे गिरफ्तार किया तो मुझसे कहा गया, ‘आप नॉर्वे की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं।’ यह सब केवल इसलिए कहा गया क्योंकि मैंने अपनी स्वतंत्रता का प्रयोग किया था, अपनी राय व्यक्त की थी और कुरान को जलाया था। अब जिस पुस्तक को मैं लिख रहा हूँ उसमें नॉर्वे का उल्लेख ‘जन्नत’ के रूप में करूँगा। जहाँ मूर्ख हैं और मूर्खों का शासन है जो इस्लाम से प्यार करते हैं।”
What happened to me in Norway reminds me of the oppressive dictatorial regime of Saddam Hussein, and thus Norway shot democracy when it arrested me and told me, “You pose a threat to Norwegian national security.” All of this is only because I exercised my freedom, expressed my… pic.twitter.com/93Q6sW07T2
गौरतलब है कि साल्वान मोमिका पहले ईरान की फ़ौज के पूर्व नेता थे। बाद में वो इस्लाम के सबसे बड़े आलोचकों में से एक बन गए। साल 2023 के जून में स्टॉकहोम में साल्वॉन मोमिका ने सबसे बड़ी मस्जिद के सामने कुरान जलाया था, जिसके वीडियो और तस्वीरें चारों तरफ वायरल हुई थीं। किसी ने उनका समर्थन किया था, किसी ने उनके लिए सिर तन से जुदा की माँग की थी और फिर सोशल मीडिया पर खबर आई थी कि साल्वान की लाश मिली है। हालाँकि मीडिया में या नॉरवे प्रशासन द्वारा इस संबंध में कोई पुष्टि नहीं की गई थी।
पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में स्थितियाँ सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। एक भाजपा कार्यकर्ता ने आरोप लगाया है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) से जुड़े गुंडों ने उसका घर जलाकर राख कर दिया। TMC कार्यकर्ताओं पर महिलाओं को साड़ी बाँटने और वोट के लिए धमकाने का भी आरोप लगा है।
भाजपा कार्यकर्ता सुब्रत मंडल ने आरोप लगाया है कि TMC कार्यकर्ताओं ने बुधवार (10 अप्रैल, 2024) की रात को उनके खुलना गाँव में स्थित घर को आग लगा दी। इस घटना के बाद घर पूरी तरीके से जल कर राख हो गया। गाँववालों ने आग बुझाने की कोशिश की लेकिन तब तक देर हो गई और घर का तिनका तिनका जल उठा। हालाँकि, TMC नेताओं ने इस घटना में हाथ होने से इनकार किया है। सुब्रत के घर से सामने आई तस्वीरों से दिखता है कि आगजनी के बाद केवल कुछ बाँस के खम्भे बचे हैं।
TMC नेताओं का कहना है कि इस आगजनी में उनका कोई रोल नहीं है और सुब्रत मंडल के घर में आग पारिवारिक विवाद के चक्कर में लगी है। TMC नेता सुरेश मंडल ने कहा है कि घर पारिवारिक विवाद की वजह से जला और इसे अब साम्प्रदायिक रंग दिया जा रहा है। TMC नेताओं का कहना है कि इस मामले में पुलिस की जाँच से सब सामने आ जाएगा।
आगजनी के कारण घर खोने वाले सुब्रत मंडल ने यह भी आरोप लगाया है कि TMC सरकार ने उन्हें सभी सुविधाओं से वंचित कर रखा है क्योंकि वह भाजपा से जुड़े हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका घर जलाने के पीछे उनका TMC की सदस्यता ना लेना है।
साड़ी बाँट महिलाओं को धमका रहे TMC कार्यकर्ता
जहाँ एक ओर पूरा देश संदेशखाली में महिलाओं के साथ हुए अत्याचार पर चकित है तो वहीं TMC नेताओं की गुंडागर्दी अब भी नहीं रुक रही है। रिपब्लिक बांग्ला ने बताया है कि TMC कार्यकर्ता संदेशखाली में महिलाओं को साड़ी बाँट कर उनसे वोट की माँग कर रहे हैं। महिलाओं को चेताया जा रहा है कि अगर वह TMC को वोट नहीं देती तो उन्हने इसके परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।
बताया गया है कि TMC कार्यकर्ता संदेशखाली की इन महिलाओं को हरे रंग की साड़ी रात के अँधेरे में बाँट रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि यह साड़ियाँ भी TMC की तरफ से नहीं खरीदी गई हैं। यह साड़ियाँ पश्चिम बंगाल की आपदा राहत अथॉरिटी द्वारा खरीदी हुई साड़ियाँ हैं। इन्ह्ने बाढ़ में राहत सामग्री के रूप में खरीदा गया था। इन पर स्पष्ट रूप से इस बात की मोहर लगी हुई है। मोहर दिखाती है कि यह साड़ियाँ 2019 में खरीदी गईं थी। इससे साफ़ होता है कि यह पाँच वर्षों से किसी गोदाम में पड़ी हुई थीं और अब वोटरों के लिए निकाली गई हैं।
रिपब्लिक बांग्ला से बात करते हुए संदेशखाली की महिलाओं ने कहा कि TMC कार्यकर्ता रात में उनके पास साड़ियाँ लेकर आते हैं और उनको TMC के चुनाव चिन्ह पर वोट देने को कहते हैं। TMC कार्यकर्ताओं पर महिलाओं ने धमकाने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि TMC कार्यकर्ता उनको धमकी देते हैं कि TMC को वोट ना देने पर उनकी उंगलियाँ काट दी जाएँगी, उन्हें मार दिया जाएगा। यह सारा काम अँधेरे में होते हैं।
महिलाओं का आरोप है कि उनके पास आने वाले लोग गुंडे शेख शाहजहाँ के लोग हैं और वह अभी TMC के इस पूर्व नेता से डरते हैं। उनका कहना है कि वह तभी एकदम निश्चित होकर वोट दे सकती हैं जब शाहजहाँ के खिलाफ सही से CBI जाँच हो।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के बशीरहाट जिले में पड़ने वाले संदेशखाली से कई चौंकाने वाले खुलासे हुए थे। कई महिलाओं ने यहाँ के TMC नेता शेख शाहजहाँ और उसके गुंडों पर यौन शोषण, जमीन कब्जाने और मारने पीटने के आरोप लगाए थे। इस मामले में कुछ FIR भी दर्ज हुई थीं। शेख शाहजहाँ को इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। उसके खिलाफ ED और सीबीआई दोनों ही एजेंसियाँ जाँच कर रही हैं।
इंटरनेट पर मुफ्त के ज्ञान के सबसे बड़े स्रोतों में से एक विकिपीडिया पर वामपंथियों का कब्जा सारी दुनिया जानती है। विकिपीडिया पर प्रकाशित लेख अधिकांशत: वामपंथ या फिर इस्लामिक विचारधारा की तरफ झुकाव वाले होते हैं। इन्हें राष्ट्रवादियों से खास चिढ़ होती है। इसीलिए विकिपीडिया के कई लेखों में तथ्यात्मक गलतियों का भंडार मिलता है। विकिपीडिया का इस्लामिक झुकाव तो है ही, हिंदू विरोधी विचारों को भी इस पर खूब बढ़ावा मिलता है। हिंदुओं को बदनाम करने का मौका ये प्लेटफॉर्म बिल्कुल भी नहीं छोड़ता। ऐसा ही एक मामला पाकिस्तान के पहले कानून एवं श्रम मंत्री जोगेंद्र नाथ मंडल के विकिपीडिया पेज से जुड़ा सामने आया है।
बता दें कि पाकिस्तान के पहले कानून मंत्री जोगेंद्र नाथ मंडल ने पाकिस्तान में हिंदुओं के कल्तेआम और हिंदू विरोधी दंगों के साथ ही पाकिस्तान के मुस्लिमों के दबदबे वाले प्रशासन में दलित विरोध पूर्वाग्रहों के कारण साल 1950 में इस्तीफा दे दिया और वो भारत आ गए। जोगेंद्र नाथ मंडल भारत क्यों आए, ये वाकया काफी मशहूर है। उन्होंने 9 अक्टूबर 1950 को लंबा इस्तीफा पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने हिंदुओं के खिलाफ दंगों और दलित उत्पीड़क नीतियों को इसकी वजह बताया था।
हालाँकि, अब विकिपीडिया ने इस प्रसिद्ध ऐतिहासिक घटनाक्रम से छेड़छाड़ की कोशिश की है। विकिपीडिया के पेज पर दावा किया गया है कि पाकिस्तान के पहले कानून मंत्री और श्रम मंत्री जोगेंद्र नाथ मंडल कोलकाता में अपने बीमार बेटे के लिए भारत आए थे। विकिपीडिया के इस लेख में दावा किया गया है, “जोगेंद्र नाथ मंडल साल 1950 में भारत वापस लौटने के लिए मजबूत हो गए। आम तौर पर ऐसा माना जाता है कि उन्होंने पाकिस्तान में अपने खिलाफ जारी हुए गिरफ्तारी वारंट की वजह से ये कदम उठाया। हालाँकि वो भारत इसलिए आए, क्योंकि उनका इकलौता बेटा जगदीशचंद्र मंडल, जो उस समय कोलकाता में पढ़ रहा था, वो बीमार पड़ गया था और मंडल उसकी देखभाल के लिए वापस लौट आए थे।”
ये मामला अर्थशास्त्री और आईआईएम कोझिकोड के प्रोफेसर कौशिक गंगोपाध्याय नेएक्स पर उठाया। उन्होंने 11 अप्रैल को कोलकाता स्थित भारतीय पर्यावरण और मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. मोहित रे का एक लेख पोस्ट किया, जिसमें विस्तार से बताया गया है कि विकिपीडिया के लेखों में किस तरह से इतिहास को बदला जा रहा है।
इस लेख का शीर्षक है: ‘इस्लामिक और सेकुलर उदारवादियों को खुश करने के लिए विकिपीडिया कैसे झूठ फैलाता है: एक केस स्टडी’। इस पोस्ट में पाकिस्तान के पहले कानून मंत्री के इस्तीफे का उल्लेख किया गया है, जिसमें लिखा है, “काफी सोच विचार और आंतरिक संघर्ष के बाद मैं इस नतीजे पर पहुँचा हूँ कि पाकिस्तान में हिंदुओं के रहने के लिए कोई जगह नहीं है। यहाँ उनका भविष्य अंधकारमय है क्योंकि उन पर धर्म परिवर्तन या फिर मौत में से एक चुनने का दबाव है। अधिकतर उच्च वर्ग के संपन्न हिंदू और राजनीतिक रूप से जागरुक दलितों ने पूर्वी बंगाल को त्याग दिया है। जो हिंदू पाकिस्तान में किसी भी मजबूरी वश रह जाएँगे, मुझे डर है कि एक न एक दिन प्लानिंग के तहत उन्हें या तो इस्लाम में कन्वर्ट करा दिया जाएगा, या फिर उनका सफाया कर दिया जाएगा।”
How Wikipedia Lies to Appease Islamists and Secularist Liberals: A Case Study
Why Jogendranath Mandal, Law and Labour Minister of Pakistan, fled from Pakistan to India?
Everyone knows why exactly Jogendranath Mandal, a leader of the dalit Hindus and the first Law and Labour… pic.twitter.com/wbTZv6Yq45
हाालँकि विकिपीडिया संपादन, जो Achintya2023 ने किया, उसने इन जानकारियों को पूरी तरह से छिपा दिया और दावा किया कि मंडल अपने बीमार बेटे जगदीशचंद्र मंडल को देखने के लिए भारत आए थे। हालाँकि विकिपीडिया का लेख पाकिस्तान में दलितों या अनुसूचित जातिओं के उत्पीड़न को लेकर चिंता का तो उल्लेख करता है, लेकिन मंडल द्वारा उनके पत्र में लिखे गए हिंदुओं के नरसंहार की बात पूरी तरह से छिपा जाता है।
कौशिक गंगोपाध्याय ने कहा कि बांग्ला विकिपीडिया में इससे भी ज्यादा बेईमानी की गई है। “बंगाली विकिपीडिया में बेईमानी और भी नीचे चली गई है, जिसमें पाकिस्तान में हिंदुओं के खिलाफ नरसंहार और नरसंहार को तो छुपा दिया गया है, लेकिन सामाजिक अन्याय और पक्षपातपूर्ण रवैये के आधे-अधूरे सच का उल्लेख किया गया है।” बेटे की बीमारी का दावा जोड़ते हुए विकीपीडिया संपादक ने द डिक्लाइन ऑफ द कास्ट क्वेश्चन: जोगेंद्रनाथ मंडल और बंगाल में दलित राजनीति की हार नामक पुस्तक का हवाला दिया। यह पुस्तक इतिहासकार और प्रोफेसर द्वैपायन सेन द्वारा लिखी गई है।
ऑपइंडिया ने किताब को देखा और पाया कि दावा करने के लिए किताब को गलत तरीके से कोट किया गया है। हालाँकि इसमें ये जरूर कहा गया है कि जोगेंद्र नाथ मंडल अपने बेटे को देखने के लिए कलकत्ता आए थे जो उस समय शहर में पढ़ रहा था, लेकिन यह दावा नहीं करता है कि यही उनके भारत लौटने की वजह था। किताब बताती है कि उन्होंने इसे भारत आने के लिए सिर्फ एक बहाने के तौर पर इस्तेमाल किया था, क्योंकि उन्हें चिंता थी कि अगर उन्होंने भारत लौटने का इरादा जाहिर किया तो उन पर हमला किया जाएगा।
भारत लौटने के बाद मंडल ने दावा किया कि वह खुद बीमार पड़ गए और प्रधान मंत्री लियाकत अली खान को पत्र लिखकर अपने मंत्रालय को किसी और को देने के लिए कहा। बाद में मंडल ने लियाकत अली खान को एक लंबा इस्तीफा भेजा, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान को छोड़ने की वजहों का विस्तार से जिक्र किया। पत्र में साफ तौर पर लिखा गया है कि पाकिस्तान में हिंदुओं का नरसंहार हो रहा है और पाकिस्तान में दलितों के लिए जो वादे किए गए थे, उन्हें भी पूरे नहीं किए गए।
इस किताब में भारत आने से पहले मंडल के कराची में रहने के दिनों की भी जानकारी है। इसमें बताया गया है कि मंडल पाकिस्तानी सरकार के विश्वासघात से निराश हो गए थे, क्योंकि पाकिस्तानी सरकार ने दलितों के कल्याण के लिए किए गए वादों को कभी पूरा नहीं किया। एक तरफ अंबेडकर ने भारत विभाजन की विभीषिका के दौरान पाकिस्तान के सभी दलितों को भारत आने का आह्वान किया था, तो मंडल ने मुस्लिम-दलित एकता की उम्मीद में इसका विरोध किया था। 1948 में कराची में हुए हिंदू विरोधी दंगों के दौरान भी उन्होंने हिंदुओं से पाकिस्तान में रहने की अपील की थी।
जोगेंद्र नाथ मंडल पाकिस्तान में दलितों और हिंदुओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर हो रही हिंसा का विरोध करते रहे, लेकिन पाकिस्तानी सरकार ने उनकी अपीलों को नजरअंदाज ही किया। पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे हो रहे थे, तो उस समय भी दलितों की चिंता उन्हें हो रही थी। वो बड़ी दुविधा में फंसे थे, क्योंकि एक तरफ वो दलितों को पाकिस्तान छोड़ने के लिए कह नहीं पा रहे थे, चूँकि वो खुद पाकिस्तान के कानून मंत्री थे, तो दूसरी तरफ वो पाकिस्तान में दलितों की सुरक्षा की गारंटी भी नहीं ले पा रहे थे।
उनके इस्तीफे से ये बात साफ है कि वो पाकिस्तान में मंत्री होते हुए भी हिंदू विरोधी दंगों, नीतियों को नहीं रोक पा रहे थे, तो दलितों के अंधकारमय होते भविष्य को बचाने में भी खुद को असमर्थ पा रहे थे। यही वजह है कि वो इस्तीफा देकर भारत लौटने के बारे में विचार कर रहे थे। हालाँकि ये आसान नहीं था, क्योंकि उन्हें शक था कि उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद अगर उन्होंने प्रधानमंत्री का विरोध करते हुए उनकी इच्छा के खिलाफ जाकर इस्तीफा दिया, तो उनके खिलाफ हिंसा हो सकती थी। हो सकता था कि वो अपने घर में ही सुरक्षित नहीं रह पाते।
यही वजह रही कि मंडल अपने बेटे की बीमार का बहान लेकर कोलकाता आ गए और फिर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को कुछ समय बाद अपना इस्तीफा भेज दिया। ऐसे में ये बात साफ है कि उन्होंने पाकिस्तान से खुद को सुरक्षित निकालने के लिए अपने बेटे की बीमारी का बहाना किया और पाकिस्तान सरकार की हिंदू और दलित विरोधी नीतियों की वजह से पाकिस्तान को छोड़ दिया।
पाकिस्तान के पहले कानून मंत्री रहे जोगेंद्र नाथ मंडल ने अपने इस्तीफे में मुस्लिम लीग द्वारा 16 अगस्त 1946 को डायरेक्ट एक्शन डे, अक्टूबर 1946 के नोआखाली दंगे, पाकिस्तान की हिंदू विरोधी नीति, 10 फरवरी 1950 को ढाका के हिंदू विरोधी दंगों, जिसमें 10 हजार लोगों की जान गई, उनका उल्लेख किया है। उन्होंने अपने इस्तीफे में ये भी बताया था कि पूर्वी पाकिस्तान से हिंदुओं को साफ करने की सरकार की योजना, देश में हिंदुओं का निराशाजनक भविष्य, हिंदुओं का जबरन धर्म परिवर्तन, नागरिक स्वतंत्रता को खत्म करने वाले कानून आदि की वजह से उन्होंने पाकिस्तान की सरकार और देश को छोड़ा।
जोगेंद्र नाथ मंडल ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि पीएम लियाकत अली खान ने उन्हें झूठे बयान देने के लिए मजबूर किया था। उन्होंने लिखा, “मैं अब अपनी अंतरात्मा पर झूठे दिखावे और झूठ का बोझ नहीं उठा सकता, ऐसे में मैंने आपके मंत्री के रूप में अपना इस्तीफा देने का फैसला किया है।”
ये पूरा मामले ये बताने के लिए काफी है कि विकिपीडिया के लेख में पाकिस्तान के पहले कानून मंत्री जोगेंद्र नाथ मंडल के पाकिस्तान छोड़कर भारत वापस आने की वजहों के बारे में गलत जानकारी दी गई है और लेख में ऐतिहासिक तथ्यों में फेरबदल किया गया है। ये हो सकता है कि वो अपने बीमार बेटे को देखने के लिए भारत आए हों, लेकिन पाकिस्तान छोड़ने की इकलौती वजह उनके बेटे की बीमारी नहीं थी। उन्होंने साफ तौर पर अपने इस्तीफे में लिखा है कि उन्होंने हिंदू विरोधी नीतियों और दलितों के लिए किए गए वादों को पूरा न करने के कारण पाकिस्तान और पाकिस्तानी सरकार को छोड़ा। जबकि विकिपीडिया के लेख में पाकिस्तान में हिंदुओं के बारे में उनकी चिंताओं पर पूरी तरह से चुप्पी साध ली गई है।
ये लेख मूल रूप से राजू दास द्वारा अंग्रेजी भाषा में लिखा गया है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
महाराष्ट्र के मुंबई क्षेत्र के काशीगाँव पुलिस स्टेशन ने बुधवार (10 अप्रैल 2024) को शहर के मीनाक्षी नगर मीरा रोड क्षेत्र में पशु वध की गतिविधि में शामिल होने पर नईम सैफ कुरैशी नाम के एक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। ऑपइंडिया को मिली जानकारी के अनुसार, आरोपित ने अपने दो अज्ञात साथियों के साथ मिलकर इस्लामी त्योहार ईद से एक दिन पहले एक गाय की हत्या कर दी थी।
पुलिस ने नईम को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ कर रही है। हालाँकि, 9 अप्रैल की रात को गाय की हत्या के दौरान आरोपितों के साथ आए उसके दो साथी पुलिस को देखकर मौके से भाग गए। इस मामले में IPC की धारा 429 और 32 और महाराष्ट्र पशु संरक्षण अधिनियम की धारा 5C, 9A, 9B और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 3 और 11 के तहत FIR दर्ज की गई है।
ऑपइंडिया को मिली एफआईआर कॉपी के मुताबिक, घटना 9 अप्रैल 2024 की रात की बताई जा रही है। काशीगाँव पुलिस स्टेशन के पुलिस कॉन्स्टेबलों को सूचना मिली थी कि मुंबई के मीनाक्षी नगर इलाके में गाय की कत्ल की घटना हो रही है। इसके बाद पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और घटनास्थल से हत्या के बाद मवेशी की खाल और खून के अवशेष बरामद किए।
पुलिस ने मवेशी के इन अवशेषों के आसपास कुल तीन लोगों को भी देखा। हालाँकि, पुलिस कॉन्स्टेबल को पास आता देखकर तीनों संदिग्ध मौके से भागने की कोशिश की। उनमें से दो आरोपित भागने में सफल रहे, जबकि एक आरोपित को पुलिस ने दौड़कर पकड़ लिया। हिरासत में लिए गए आरोपित की पहचान नईम कुरैशी के रूप में की गई।
आरोपित नईम कुरैशी से जब पुलिस ने पूछताछ की तो उसने अन्य दो आरोपितों की पहचान बताने से इनकार कर दिया। पुलिस ने मौके से एक बड़ा चाकू, एक करस्सी और मवेशियों की खाल बरामद की है। पुलिस ने घटनास्थल से खून के नमूने लेकर जाँच के लिए भेज दिया है। कॉन्स्टेबल चैतन्य नाराले ने FIR दर्ज कराई है। जिस समय उन्हें सूचना मिली, उस समय वे काशीगाँव पुलिस स्टेशन में ड्यूटी पर थे।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने रविवार (7 अप्रैल 2024) को पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का एक छोटा वीडियो एक्स पर पोस्ट किया। इस वीडियो में ओवैसी लोगों को संबोधित कर रहे हैं, जिसमें ओवैसी कह रहे हैं कि वो ‘गाजी’ के रूप में जीना या मरना पसंद करते हैं। उन्होंने अपने साथी मुस्लिमों से भी गाजी के तौर पर जीने-मरने की बात कही। बता दें कि गौरतलब है कि इस्लामिक पुस्तकों में गाजी का मतलब अल्लाह के बताए रास्ते पर चलने वाला इस्लामिक लड़ाका होता है। एक गाजी काफिरों (मतलब इस्लाम को न मानने वालों) के खिलाफ लड़ता है। वह या तो काफिरों और अनेकेश्वरवादियों को मार डालता है या लड़ाई में मारा जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि असदुद्दीन ओवैसी भारत में मुस्लिमों से आख़िर क्या करने को कह रहे हैं?
इस वीडियो में असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ”तुम हमको मारना चाहते हो तो मारो प्यारे, कौन रोक रहा है तुमको? मेरी जिंदगी अल्लाह ने लिख दी, जब मैं अपनी माँ के पेट में था। मेरी जिल्लत, मेरी इज्जत सबकुछ अल्लाह लिख चुका है। तुम क्या लोगे मुझसे? अरे याद रखो, दुनिया में रहेंगे तो गाजियों की तरह रहेंगे, या फिर मौत आएगी तो शहादत को पसंद करेंगे। हम अपने माता-पिता को शर्मिंदा नहीं होने देंगे, इंशाल्लाह!”
सबसे पहले तो ये समझने की जरूरत है कि गाजी का मतलब आखिर क्या होता है? गाजी शब्द की पैदाइश अरबी भाषा में हुई, जिसमें ग़ज़व का अर्थ लड़ाई है। गाज़ी का अर्थ है लड़ने वाला, या योद्धा। इस्लामी संदर्भ में गाज़ी शब्द स्पेशल माना जाना है। इस्लाम में गाज़ी का मतलब वह व्यक्ति है जो इस्लाम और उसकी शिक्षाओं के लिए जिहाद में लड़ता है। जिहाद का मूल मतलब काफिरों और गैर-इस्लामियों या इस्लाम त्यागने वालों के खिलाफ धर्म की लड़ाई है। यह हर किसी और हर उस चीज़ के खिलाफ लड़ाई है जो इस्लाम में विश्वास नहीं करता है। इस प्रकार गाजी का मतलब अनिवार्य रूप से एक जिहादी है जो गैर-मुस्लिमों के खिलाफ लड़ने को तैयार है। इस युद्ध में वह या तो मरने या दूसरों को मारने के लिए तैयार रहता है।
सुन्नन अन-नसाई 2625 (पुस्तक 24, हदीस 7) के अनुसार, गाजी अल्लाह के तीन सबसे प्रिय मेहमानों में से एक हैं। इस्लामिक धर्मग्रंथों की एक वेबसाइट पर इस हदीस की व्याख्या में कहा गया है, “अबू हुरैरा द्वारा सुनाई गई हदीस के अनुसार, अल्लाह के दूत ने तीन प्रकार के लोगों का उल्लेख किया है जिन्हें अल्लाह का मेहमान माना जाता है। इनमें एक गाजी, एक हज यात्री और एक मुतामिर शामिल हैं। गाज़ी वह है जो इस्लाम और उसकी शिक्षाओं के लिए जिहाद में लड़ता है। हज यात्री वह व्यक्ति होता है जो अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार मक्का की तीर्थयात्रा करता है यदि उसके पास ऐसा करने के लिए पर्याप्त संसाधन हों। अंत में, मुतामिर वह व्यक्ति होता है जो ज्ञान प्राप्त करने या अल्सेलाह से ईनाम पाने करने के लिए व्यापार या शिक्षा जैसे किसी भी उद्देश्य के लिए यात्रा करता है। इन तीनों को अल्लाह का अतिथि माना जाता है और उसके लिए किए गए कामों या प्रयासों के हिसाब से उन्हें ईनाम भी दिया जाता है।
एक गाजी की मदद करना भी गाजी होने के बराबर
इस्लामी किताबों में सिर्फ गाजी को ही सम्मान नहीं मिला, बल्कि उन लोगों को भी सम्मान मिलता है, जो गाजी की मदद करता है। या फिर गाजी के परिवार के सदस्यों की मदद करता है या देखरेख की जिम्मेदारी लेता है। साहिह अल-बुखारी 2843 ( किताब 56, हदीस 59) ने इसे विस्तार से बताया है। यह उन लोगों के लिए इनाम की बात करता है, जो गाजी के बच्चों या परिवार की देखभाल करते हैं और उनकी मदद करते हैं या फिर गाजियों को इस्लाम के लिए लड़ने के लिए तैयार करते हैं। इस हदीस के अनुसार , पैगंबर मुहम्मद ने कहा, “जो अल्लाह के रास्ते पर जाने के लिए एक गाजी को तैयार करता है, उसे एक गाजी के बराबर इनाम दिया जाता है। और जो अल्लाह की राह में जाने वाले गाजी के परिजनों की ठीक से देखभाल करता है, उसे भी गाजी के बराबर इनाम दिया जाता है।
इसके अलावा, रियाद अस-सलीहिन (किताब 11 हदीस 22) के अनुसार, पैगंबर मुहम्मद ने कहा था, “वह जो अल्लाह के रास्ते में एक गाजी (लड़ाकू) को तैयार करता है, ऐसा लगता है जैसे उसने खुद लड़ाई में भाग लिया हो; और जो गाज़ी की अनुपस्थिति में उसके आश्रितों की देखभाल करता है, वह मानो स्वयं लड़ाई में भाग लेता है।
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘हम गाजियों की तरह जिएँगे’
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि ‘हम (खुद और अन्य मुस्लिम जिनका वह दावा करते हैं कि वह प्रतिनिधित्व करते हैं) गाजियों की तरह रहेंगे।’ एआईएमआईएम प्रमुख के इस भाषण के बाद स्वाभाविक रूप से उठने वाले सवालों को इस्लामिक धर्मग्रंथ में इस शब्द के स्पष्ट अर्थ और संदर्भ को देखते हुए हेरफेर करना आसान नहीं है। क्या ओवेसी का मतलब यह है कि वह और भारत में जिन मुस्लिमों का वह नेतृत्व करने का दावा करते हैं, वे देश में गैर-मुस्लिमों के खिलाफ लड़ाई कर रहे हैं? क्या इसका मतलब यह है कि गाजी बनकर ओवैसी और उसके साथी गैर-मुस्लिमों, काफिरों, इस्लाम त्यागने वालों को मारना चाहते हैं या ऐसी उनपर हुक्म करने की इच्छा रखते हैं?
असदुद्दीन ओवैसी ने बलिदान और मौत को वरीयता देने की बात कही है, जैसे ही वो गाजी शब्द पर आए, वैसे ही ‘मैं’ की जगह ‘हम’ कहने लगे। इसका मतलब साफ है कि वो अन्य मुस्लिमों को भी गाजी बनने के लिए उकसा रहा है। ऐतिहासिक रूप से, मुहम्मद बिन कासिम, गजनी के महमूद, मुहम्मद गोरी, अलाउद्दीन खिलजी, बाबर, औरंगजेब आदि इस्लामी अत्याचारियों को इस्लामिक हलकों में गाज़ियों के रूप में पहचाना जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्होंने भारत पर हमला किया, जोकि अनेकेश्वरवादियों और गैर-मुस्लिमों का देश है। उन्होंने यहाँ रहने वाले लोगों को लूटा और मार डाला, क्योंकि वे गैर-मुस्लिम थे। इस तरह से वे ग़ाज़ी कहलाने के योग्य हो गए। खुद को और अपने साथियों को ग़ाज़ी कहकर, असदुद्दीन ओवेसी यकीनन खुद को और उन्हें मानने वालों को इन गाजियों से जोड़ रहे हैं।
क्या इस क्लिप को पोस्ट करने के समय में कोई संदेश छिपा है?
AIMIM ने यह वीडियो क्लिप 7 अप्रैल को पोस्ट किया – हिंदू नव वर्ष से ठीक दो दिन पहले, जो 9 अप्रैल को चैत्र नवरात्रि और गुड़ी पड़वा के साथ शुरू हुआ था। 17 अप्रैल को, देश राम नवमी मनाएगा – हिंदू देवता भगवान राम का जन्म उत्सव। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अयोध्या में उनके जन्मस्थान पर बने भव्य मंदिर में भगवान की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह पहली राम नवमी होगी।
पिछले कुछ सालों में देश के विभिन्न हिस्सों में रामनवमी जुलूसों और शोभा यात्राओं पर हमले हुए हैं। खास तौर पर 2022 और 2023 में, भारत में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने शांतिपूर्ण जुलूसों पर पथराव और हमले किए। इसके बाद कानूनी कार्रवाई में जब दंगाइयों के घरों को जमींदोज किया गया, तो ये खुद को पीड़ित दिखाने लगे। और अब रामनवमी से कुछ ही दिन पहले ओवैसी ने गाजियों वाली अपील की है।
बता दें कि इस साल 2024 की रामनवरी 17 अप्रैल को है, जो लोकसभा चुनाव 2024 के पहले चरण के मतदान के लिए प्रचार का आखिरी दिन है। 19 अप्रैल को देश के 21 राज्यों के 102 लोकसभा सीटों पर मतदान होना है। अब तक के चुनाव प्रचार में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी अपने विरोधियों पर भारी पड़ती दिख रही है। बीजेपी उम्मीदवार और हिंदू शेरनी माधवी लता हैदराबाद में असदुद्दीन ओवैसी को चुनौती दे रही हैं और ओवैसी पर भारी पड़ती दिख रही हैं। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी और एनडीए अजेय दिख रहे हैं, तो दूसरी तरफ हताश हो चुके विपक्ष को ये तक नहीं समझ आ रहा कि वो मोदी का सामना कैसे करें। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए ओवैसी के इस वीडियो पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में लिखा गया है। मूल लेख को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
:देश भर में आज गुरुवार (11 अप्रैल 2024) को रमजान के अंतिम दिन मुस्लिमों द्वारा ईद-उल-फितर मनाया जा रहा है। इस दौरान मुस्लिम समाज के लोगों ने मस्जिदों सहित विभिन्न जगहों पर ईद की नमाज पढ़ी। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ और पंजाब के लुधियाना जैसी कुछ जगहों पर नमाज के बाद फिलिस्तीन के समर्थन में नारे लगाए गए और पोस्टर लहराए गए।
अलीगढ़ शहर के पुरानी ईदगाह में नमाज के बाद कुछ युवक हाथों में फिलिस्तीन के समर्थन में पोस्टर लेकर उसके लिए दुआ माँगी। इन बैनर-पोस्टर पर ‘फ्री फिलिस्तीन’ लिखा हुआ था। इतना ही नहीं, अलीगढ़ में लोगों ने ‘मस्जिदे अक्सा जिंदाबाद’, ‘बैतूल मुकद्दस जिंदाबाद’, ‘गाजा जिंदाबाद’, ‘फिलिस्तीन जिंदाबाद’ और ‘नारा-ए-तकबीर अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगाए गए।
नारे लगाते हुए और हाथों में फ्री फिलिस्तीन के बैनर देखकर पुलिस हाथ-पाँव फूल गए। उसने हड़बड़ी में ने तीन युवकों को गाड़ी में बैठा लिया। पुलिस को ऐसा करते हुए देखकर मुस्लिमों ने हंगामा शुरू कर दिया। आखिरकार पुलिस ने तीनों के नाम-पते पूछकर जाने दिया। इनमें एक शाहजमाल निवासी अबरार बताया गया है। सीओ अभय पांडे ने बताया कि युवकों को हिदायत देकर जाने दिया गया है।
इतना ही नहीं, यूपी में सार्वजनिक जगहों पर नमाज पढ़ना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद अलीगढ़ में कुछ युवकों ने सड़क पर नमाज पढ़ी और कानून की धज्जियाँ उड़ाने की कोशिश की। सड़कों पर नमाज पढ़ने वाले ये सभी लोग शाहजमल ईदगाह जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही बीच सड़क पर बैठकर नमाज पढ़ने लगे। इसको लेकर जब उनके पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ईदगाह पहुँचने पर देर हो जाती।
दरअसल, ईद को देखते हुए चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात थी। मस्जिदों और नई एवं पुरानी ईदगाह के आसपास पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई थी। इस दौरान खुफिया तंत्र भी सतर्क रहा। हालाँकि, फिलिस्तीन के समर्थन में नारे लगाकर और बैनर दिखाकर माहौल खराब करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने स्थिति को संभाल लिया।
वहीं, पंजाब के लुधियाना में भी ऐसा ही हुआ। फिलिस्तीन और गाजा के पक्ष में दुआ पढ़ी गई। लुधियाना के जामा मस्जिद पर फिलिस्तीन का झंडा लहराया गया। यहाँ नमाज पढ़ने आने वाले अधिकांश लोगों के हाथों में फिलिस्तीन के समर्थन में और इजरायल के विरोध में बैनर थे। इस दौरान फिलिस्तीन के समर्थन में नारे लगाए जाने की बात भी कही जा रही है।
लुधियाना में शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उस्मान लुधियानवी ने कहा कि ईद के दिन फिलीस्तीन के मजलूम मुस्लिमों को नहीं भुलाया जा सकता। उनका इजरायल द्वारा नरसंहार किया गया है। उसकी गुंडागर्दी को सहन नहीं किया जा सकता। इजरायल का हर एक कदम गैर-इंसानी और गैर-कानूनी है। उन्होंने कहा कि आवाज उठाना मुस्लिमों की जिम्मेदारी है।
बता दें कि ऐसा सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि दुनिया भर के मुस्लिम देश गाजा और फिलिस्तीन को लेकर दुआ पढ़ रहे हैं। फिलिस्तीन और गाजा के मुस्लिमों की सलामती की दुआ माँग रहे हैं। बताते चलें कि पिछले साल अक्टूबर में फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर अचानक हमला करके 250 लोगों मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद इजरायल ने गाजा पर जबरदस्त कार्रवाई की थी।
महाराष्ट्र के पुणे में फर्जी शेयर ट्रेडिंग कराने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ करके पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन लोगों ने शेयर ट्रेडिंग के नाम पर कई लोगों को लाखों रुपए का चूना लगाया है। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान जुनैद मुख्तार कुरैशी, सलमान मंसूर शेख, अब्दुल अजीज अंसारी, आरिफ अनवर खान और तौफिक गफ्फार शेख के रूप में की गई है।
अपराध शाखा के डीसीपी संदीप डोईफोडे के अनुसार, पुणे जिले के पिंपरी चिंचवड़ शहर के कई निवासियों की शिकायतों के बाद अधिकारियों ने इसकी जाँच शुरू की। एक महिला से इस गैंग ने 31.6 लाख रुपए की धोखाधड़ी की थी। एडवांस तकनीकी का उपयोग करते हुए पिंपरी चिंचवड़ पुलिस की साइबर सेल ने फर्जी शेयर ट्रेडिंग एप्लिकेशन से जुड़े पाँच संदिग्धों की पहचान करके उन्हें पकड़ लिया।
डोईफोडे ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान पुणे पुलिस ने 7 लाख रुपए नकद, 7 मोबाइल फोन, नकदी गिनने की एक मशीन, विभिन्न बैंकों के 8 डेबिट कार्ड और विभिन्न बैंकों के 12 चेकबुक बरामद किए। उन्होंने कहा, “जाँच के दौरान यह पाया गया कि सभी पाँच आरोपितों ने लगभग 120 बैंक खातों के माध्यम से कई लोगों से करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी की।” इनमें से 80 बैंक खाते पुणे में हैं।
पुलिस अधिकारी के मुताबिक, इस गैंग का एक विदेशी लिंक भी था, क्योंकि उन्हें विदेशी लोगों से भी पैसा मिलता था। इस पैसे को वो क्रिप्टोकरेंसी में बदल देते थे और हॉन्गकॉन्ग में अपने हैंडलर्स के पास भेज देते थे। पुलिस अधिकारी के अनुसार, आरोपित बेरोजगार थे और शेयर ट्रेडिंग में रुचि लेने वाले लोगों को वे निशाना बनाते थे।
अपराध शाखा के डीसीपी संदीप डोईफोडे ने आगे बताया, “बाद में इस गैंग के लोग निशाना बनाए गए लोगों को एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ते थे और बेहतर रिटर्न के लिए निवेश करने के लिए कहते थे। निवेश करने के कुछ दिनों के बाद ये लोग ग्रुप में शांत हो जाते थे और जमाकर्ताओं के मैसेज का जवाब भी नहीं देते थे। इस संबंध में पिंपरी चिंचवाड़ में 75 शिकायतें दर्ज कराई गई थीं।
दरअसल, पिंपरी चिंचवड़ पुलिस की साइबर सेल ने बुधवार (10 अप्रैल 2024) को 4 करोड़ रुपए के ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग रैकेट का खुलासा किया, जिसमें फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग ऐप, मनी म्यूल अकाउंट (ऐसे व्यक्ति जो किसी और को कमीशन के लिए पैसे ट्रांसफर करने के लिए अपने बैंक खाते का उपयोग करने की अनुमति देते हैं) और का उपयोग शामिल है।
पुलिस अधिकारी के मुताबिक, “तिंगरेनगर निवासी जुनैद मुख्तार कुरैशी (21) ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग करता था। इससे पहले वह एक कॉल सेंटर में काम करता था। शेयर ट्रेडिंग के दौरान वह सबसे पहले हॉन्गकॉन्ग स्थित हैंडलर के संपर्क में आया। उसने अपना नाम ‘ग्रेग’ बताया था। उसने कुरेशी से उनकी गतिविधि को सुविधाजनक बनाने के लिए उनके लिए म्यूल अकाउंट के लिए कहा।”
इसके बाद कुरैशी ने सलमान मंसूर शेख (22), अब्दुल अजीज अंसारी (23), आरिफ अनवर खान (29) और तौफीक गफ्फार शेख (22) को अपने साथ शामिल किया। वे सब मिलकर अपने दोस्तों और सहयोगियों के 120 मनी म्यूल खातों को बिना किसी संदेह के सुरक्षित करने में कामयाब रहे। इन्हीं खातों में वे पैसे मँगाते थे और उसे निकालकर हॉन्गकॉन्ग भेजकर क्रिप्टो में कमीशन लेते थे।
एक अन्य पुलिस अधिकारी ने TOI को बताया कि सलमान, अब्दुल अजीज और तौफीक लोहेगाँव रोड के रहने वाले हैं, जबकि आरिफ कोंढवा का रहने वाला है। कुरैशी को छोड़कर बाकी चार लोग भोजन और पार्सल डिलीवरी सहित छोटे-मोटे काम करते थे। डीसीपी डोइफाइड ने नागरिकों से केवल स्वतंत्र और प्रामाणिक शेयर ट्रेडिंग निवेश कंपनियों के माध्यम से ही निवेश करने की सलाह दी है।
उत्तर प्रदेश की सुल्तानपुर लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी और मौजूदा सांसद मेनका गाँधी ने कॉन्ग्रेस पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के पास न तो कोई बड़ा लीडर है और न ही कोई बड़ा आइडिया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गाँधी ने रॉबर्ट वाड्रा पर तंज कसते हुए कहा कि देश दामादों से आगे बढ़ चुका है। बता दें कि रॉबर्ट वाड्रा कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति हैं, उन्होंने कुछ दिन पहले ये कहा था कि अमेठी की जनता चाहती है कि वो अमेठी से चुनाव लड़ें।
इंडिया टीवी से बातचीत में मेनका गाँधी ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी पूरी तरह से भटक चुकी है। पार्टी के पास न तो कोई बड़ा नेता है और न ही पार्टी के पास कोई आईडिया है। वो घिसे-पिटे नारों से काम चला रही है। इस दौरान उनसे जब पूछा गया कि सुल्तानपुर से सटी अमेठी लोकसभा सीट पर गाँधी परिवार के दामाद चुनाव लड़ने के संकेत दे रहे हैं, तो उन्होंने जबरदस्त तंज कसा। उन्होंने कहा कि देश दामादों से आगे निकल चुका है। उन्हें तो राजनीति का अनुभव भी नहीं है।
बता दें कि मेनका गाँधी सुल्तानपुर लोकसभा सीट से लगातार दूसरी बार चुनाव मैदान में हैं। वो 2019 में भी यहाँ से चुनाव जीती थी और एक बार फिर से सुल्तानपुर से ही चुनाव मैदान में हैं। वहीं, उनके बेटे और सुल्तानपुर से साल 2014 में लोकसभा सांसद रहे वरुण गाँधी को इस बार बीजेपी ने टिकट नहीं दिया है। वो मौजूदा समय में पीलीभीत से सांसद हैं। हालाँकि पीलीभीत सीट मेनका गाँधी की पारंपरिक सीट मानी जाती है।
मेनका गाँधी से जब पूछा गया कि बीजेपी ने वरुण गाँधी को टिकट क्यों नहीं दिया, तो उन्होंने इसे पार्टी का फैसला बताया और कहा कि टिकट देने या न देने का फैसला पार्टी का होता है, मेरा नहीं। मेनका गाँधी ने कहा कि पीलीभीत से हमारा लगाव हार-जीत और राजनीति से ऊपर उठकर है।
इस मौके पर उनसे जब प्रशांत किशोर की बात पर सवाल पूछा गया कि राहुल गाँधी को पॉलिटिक्स से ब्रेक ले लेना चाहिए, तो उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर का कहना सही है। कॉन्ग्रेस के पास न तो कोई नेता है और न ही कोई आईडिया है। राहुल गाँधी को कोई सलाह देने पर उन्होंने कहा कि सलाह उसे दी जाती है, जो सुने। इस दौरान उन्होंने सोनिया गाँधी पर पूछे गए सवाल का कोई जवाब नहीं दिया।
अमेरिका के फिलाडेल्फिया में ईद के मौके पर मस्जिद के पास गोलीबारी की घटना प्रकाश में आई। घटना में 3 लोग घायल हो गए। पुलिस ने इस संबंध में 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक 15 साल का लड़का भी है। पुलिस को उसके पास से भी बंदूक मिली है।
फिलाडेल्फिया पुलिस ने बताया कि शहर में एक बड़ी मस्जिद के बाहर ईद-उल-फितर का कार्यक्रम आयोजित किया गया था, लेकिन अचानक दोपहर 2:30 बजे वहाँ 30 राउंड गोलियाँ चलीं, जिसके बाद अफरा-तफरी मच गई। घटना में 15 साल के संदिग्ध के अलावा एक व्यक्ति और बच्ची को चोट आई है।
At least three people were shot and injured on Wednesday at an event where about 1,000 people were celebrating Eid al-Fitr in Philadelphia, the police said. Five people were arrested, including a teenager who was shot by an officer, officials said. https://t.co/anVRWmUCZM
प्रशासन ने बताया है कि गोलीबारी के वक्त इलाके में 1 हजार से ज्यादा लोग मौजूद थे। जैसे ही गोली की आवाज आई, सबने पास में बने पार्क, स्कूल और मस्जिद के पास भागना शुरू कर दिया। कुछ लोग फायरिंग से बचने के लिए पेड़ों के पीछे भी छिपे। इस भगदड़ की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।
#BREAKING UPDATE: Three people were injured and five people — including an armed teen who was shot by an officer — are in custody following a shooting at a large Eid al-Fitr event in West Philly, police said. Latest details HERE: https://t.co/xZYsAdJlchpic.twitter.com/QO84GPihKu
पुलिस अब पूरी घटना की जाँच कर रही है। प्रत्यक्षदर्शियों से पूछा जा रहा है कि घटना के वक्त आखिर हुआ क्या था। एक चश्मदीद ने बताया है कि वो गोलियाँ चलने से पहले अपने कार के पास तक गईं थीं कि अचानक उन्हें वहाँ फायरिंग की आवाजें सुनाईं दीं। इसके बाद उन्होंने अपने रिश्तेदारों की सुरक्षा देखते हुए वापस बुला लिया। उसने लोगों को भागते हुए भी देखा। प्रत्यक्षदर्शियों ने मस्जिद के पास हुई इस घटना को जीवन का सबसे भयानक मंजर बताया है। वहीं पुलिस का कहना है ये घटना दो गुटों के बीच हुई झड़प के कारण हुई है।
साल 2020 के हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के सरगनाओं में से एक उमर खालिद की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान 9 अप्रैल 2024 को चौंकाने वाले खुलासे हुए। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील अमित प्रसाद ने कोर्ट में जो खुलासे किए, उससे लोग संभवत: अब भी अनजान हैं। उन्होंने उमर खालिद का अन्य सेलिब्रिटी के साथ किए गए चैट के बारे में बताया, जो नैरेटिव बदलकर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के उद्देश्य से किया गया था।
दिल्ली दंगों के तुरंत बाद एक अनुकूल कहानी बनाने के लिए उमर खालिद जिन लोगों से बात कर रहा था, उनमें अभिनेत्री स्वरा भास्कर, अभिनेता सुशांत सिंह, एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव, कॉन्ग्रेस नेता जिग्नेश मेवाणी, वामपंथी पत्रकार रघु कर्नाड, रसिका महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा स्वाति चतुर्वेदी, तीस्ता सीतलवाड, आकार पटेल, एमनेस्टी इंटरनेशनल, अज़हर खान और कौशिक राज से भी चैट की।
उमर खालिद अभिनेत्री स्वरा भास्कर के करीबी संपर्क में था। स्वरा के साथ अपनी चैट में उमर खालिद ने उनसे डॉक्टर कफील खान के पक्ष में एक कहानी बनाने के लिए कहा था। एक अन्य चैट में उसने स्वरा से कहा था कि कोलकाता के पार्क सर्कस में शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी उनकी मौजूदगी चाहते हैं। अभिनेता जीशान अयूब की बीवी रसिका ने उमर खालिद को एक हिंदू के रूप में समर्थन दिया था।
जिस व्हाट्सएप चैट का उल्लेख उमर खालिद के वकील त्रिदीप पेस ने किया था, उसमें सुशांत सिंह ने 11 जून 2020 को उमर खालिद के निर्देशानुसार द क्विंट से लिंक साझा किया था। इसमें मीडिया पोर्टल ने दावा किया था कि पुलिस ने खालिद, ताहिर हुसैन और अन्य पर 8 जनवरी 2020 को एक बैठक के दौरान साजिश रचने का आरोप है। ऐसा ही लिंक पत्रकार कर्नाड को भी भेजा गया था।
इसके बाद उमर खालिद और योगेंद्र यादव के बीच हुए चैट को भी कोर्ट को साझा किया गया। बता दें कि पुलिस की चार्जशीट में इसकी साजिश रचने वालों में यादव भी शामिल हैं। CAA को लेकर जामियाी में भड़की हिंसा के बाद 7 दिसंबर को उमर खालिद और योगेन्द्र यादव ने शजरील इमाम से मुलाकात की थी। फिर अगले दिन जंगपुरा में इन तीनों की अन्य लोगों के साथ बैठक हुई।
चार्जशीट के मुताबिक, इस बैठक में इसी बैठक में चक्का जाम करने की योजना बनाई गई। शरजील इमाम को दिल्ली और उसके आसपास के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रों को संगठित करने के लिए कहा गया। यह भी निर्णय लिया गया कि यूनाइटेड अगेंस्ट हेट और स्वराज्य अभियान जैसे संगठन इसमें हरसंभव तरीके से एक-दूसरे की मदद करेंगे।
सरकारी वकील ने इस दौरान उमर खालिद और मोहम्मद जुबैर की कंपनी AltNews के एक ‘पत्रकार’ के बीच हुई बातचीत को भी पढ़ा। AltNews ने पूछा कि क्या वे उमर खालिद को उद्धृत कर सकते हैं, लेकिन उमर खालिद ने कहा कि वह अपना नाम दिखाना चाहता है। AltNews ने उसकी बात मान ली। यह बातचीत इस बात पर थी कि उमर खालिद से जुड़ी कहानी किस तरह लिखी जानी चाहिए।
सरकारी वकील ने यह बताया कि जब उमर खालिद जेल में है तो मीडिया प्लेटफार्मों पर गलत सूचना फैलाकर उसके पक्ष में एक कहानी बनाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। एसपीपी ने बताया कि द वायर की अरफा खानम शेरवानी ने उमर खालिद के पिता और पूर्व सिमी आतंकवादी एसक्यूआर इलियास का एक साक्षात्कार चलाया। इससे पता चला कि कैसे इलियास नैरेटिव बनाकर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए झूठ बोल रहा है।
सुनवाई के बाद उमर खालिद के कई समर्थकों ने दावा किया कि सरकारी वकील द्वारा उल्लेखित तथ्यों का कोई महत्व नहीं है, क्योंकि उमर खालिद लोगों से बात करने के लिए स्वतंत्र थे। तीस्ता, आकार आदि जैसे अन्य लोग जेल में रहने के दौरान उनका समर्थन करने के लिए स्वतंत्र थे। हालाँकि, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि वे बड़े मुद्दे से (शायद जानबूझकर) चूक गए।
इन लोगों से उमर खालिद के घनिष्ठ समन्वय था और यह बताता है कि दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों की साजिश रचकर हिंसा की खबर को विश्व स्तर पर चलाई गई थी। यह साजिश को बताता है और किसी आरोपित की जमानत अर्जी पर फैसला करते समय एक महत्वपूर्ण कारक बन जाता है।
(यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में नूपुर जे शर्मा ने लिखी है। आप इस लिंक पर क्लिक करके इसे विस्तार से पढ़ सकते हैं।)