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बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में ब्लास्ट के बाद जिस टोपी को छोड़ गया था शाजिब, वही NIA के लिए बन गया सुराग: बंगाल में मास्टरमाइंड अब्दुल ताहा के साथ छिपा था

NIA ने बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में धमाका करने वाले दो आतंकी अब्दुल मतीन ताहा और मुस्सविर हुसैन शाजिब को पश्चिम बंगाल के दीघा से पकड़ लिया। एजेंसी 40 दिनों की मशक्कत के बाद इन आतंकियों को पकड़ पाई। इस पूरी कवायद में एजेंसी को कई छोटे छोटे सुराग लगे, जिनकी सहायता से इन दोनों को पकड़ा गया।

बेंगलुरु के व्यस्त रामेश्वरम कैफे में धमाका करने वाले आतंकी मुस्स्विर और इस हमले के मास्टरमाइंड अब्दुल मतीन ताहा की पहचान स्थापित करने के लिए एजेंसी आसपास के कई सीसीटीवी कैमरा की जाँच की थी। आनेजाने वालों का डाटा निकाला था। इस में एक आतंकी कैफे में हाथ धोने की जगह पर बम रखते हुए देखा गया था। NIA ने और भी जाँच की जिससे उसे इस आतंकी के धमाका स्थल तक आने की जानकारी निकाली।

NIA को यहाँ से इसके कुछ फुटेज मिले थे जिनमें वह सिटीबस में आते जाते देखा गया था। वह कैफे से 100 मीटर दूर एक स्टॉप पर बस से आया था और इसी से वापस भी गया था। इसके अलावा एक और सीसीटीवी से एक संदिग्ध आदमी टोपी लगाए दिखा था। NIA को यहाँ से एक टोपी भी मिली थी। बताया गया कि यह टोपी आतंकी ने कपड़े बदलने वाली जगह पर छोड़ी थी। इस टोपी पर एक निशान बना हुआ था, यह अपने आप में विशेष था और इस तरह की बहुत कम संख्या में टोपियाँ बनी थी।

NIA के जाँच करने पर पता चला कि यह टोपी चेन्नई से खरीदी गई थी। इनके विषय में यह भी जानकारी सामने आई थी कि यह फर्जी या बिना किसी आईडी के लॉज या होटल में रुकते थे। एजेंसी को शक था कि यह लोग ऐसे होटल और लॉज में रुकते हैं जहाँ आईडी की माँग नहीं की जाती। यह लोग हिन्दू नामों का उपयोग करके फर्जी आईडी का भी उपयोग करते थे।

NIA ने इसको लेकर भी देश के उन सभी जगहों पर नजर बनाई थी जहाँ इनके जाने की संभावना थी। इनको एजेंसी लगातार ट्रैक कर रही थी। एजेंसी को एक बड़ी सफलता तब हाथ लगी जब उसने इनके मददगार मुजम्मिल को पकड़ा। मुजम्मिल ने इन्हें शहर से बाहर भागने में मदद की थी।

NIA को जब इस बात की पुख्ता जानकारी हो गई तब उसने पश्चिम बंगाल के दीघा में छापा मार कर इन दोनों आतंकी पकड़ लिया। इन्हें शुक्रवार (12 अप्रैल, 2024) को कोर्ट में पेश करके रिमांड पर लिया जाएगा। दोनों को 12 अप्रैल की सुबह गिरफ्तार किया गया। इसी के साथ अब कैफे में हुए धमाके की पूरी सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।

यह दोनों आतंकी धमाके के पहले से ही सुरक्षा एजेंसियों की राडार पर थे। बताया गया है कि यह दोनों 2020 से ही गायब थे। यह अल हिन्द मॉड्यूल में शामिल थे। NIA की दबिश पर यह गायब हो गए थे। इसके बाद से यह आतंक की प्लानिंग कर रहे थे। इन्होने मिलकर बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में मार्च 2023 में धमाके को अंजाम दिया।

गौरतलब है कि 1 मार्च, 2024 को बेंगलुरु के वाइटफील्ड इलाके में स्थित रामेश्वरम कैफे में दोपहर में एक धमाका हुआ था। इस धमाके में 9 लोग घायल हुए थे। धमाके के पीछे की जानकारी बाद में निकल कर सामने आई थी। इसके बाद इस मामले की जाँच NIA ने चालू कर दी थी। तब से ही एजेंसी उनको पकड़ने का प्रयास कर रही थी।

गुरु ग्रंथ साहिब को रोड जाम करने के लिए ढाल नहीं बना सकते प्रदर्शनकारी, राज्य सरकार ले एक्शन: पंजाब-हरियाणा HC ने भगवंत मान सरकार-चंडीगढ़ प्रशासन को लताड़ा

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा है कि प्रदर्शनकारी गुरु ग्रंथ साहिब को ढाल बना कर महीनों तक सड़क नहीं जाम कर सकते। उनके खिलाफ प्रशासन को कार्रवाई करनी होगी। हाई कोर्ट ने प्रदर्शन करने वालों पर कार्रवाई ना करने को लेकर पंजाब की भगवंत मान सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन को लताड़ लगाई। हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी चंडीगढ़ और मोहाली सीमा को ब्लॉक करने को लेकर सुनवाई के दौरान की।

हाई कोर्ट के कार्यकारी चीफ जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया और जस्टिस लापिता बैनर्जी की बेंच ने कहा कि कई मौकों के बाद भी पंजाब सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन ने रोजाना इस सड़क पर चलने वाले लोगों को कोई राहत नहीं पहुँचाई। आमजन लगातार सीमा पर बंदी सिखों को छोड़ने की माँग करने वाले प्रदर्शनकारियों के रास्ता जाम करने के कारण परेशानियाँ झेलते रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि कुछ प्रदर्शनकारी यहाँ अपने साथ गुरु ग्रंथ साहिब लेकर बैठते हैं, यह कोई कारण नहीं हो सकता कि इन लोगों के खिलाफ पंजाब सरकार कार्रवाई ना करे।

हाई कोर्ट ने कहा, “केवल इस बात के आधार पर कि कुछ प्रदर्शनकारी गुरु ग्रंथ साहिब को रखकर धार्मिक भावनाओं का सहारा ले रहे हैं और इसे ढाल बना रहे हैं, इससे पंजाब को यह बहाना नहीं मिल जाता कि वह इन धर्म की आड़ लेने वालों पर कार्रवाई ना करे।” हाई कोर्ट ने कहा कि कुछ प्रदर्शनकारियों के धरना-प्रदर्शन के कारण चंडीगढ़-मोहाली-पंचकूला के निवासी लगातार कठिनाइयाँ झेल रहे हैं।

कोर्ट ने यह टिप्पणियाँ एक याचिका की सुनवाई के दौरान की। यह याचिका के NGO द्वारा दायर की गई थी। इसने इन प्रदर्शनकारियों के हटाए जाने की माँग की थी। याचिका में कहा गया था कि इस धरना प्रदर्शन की वजह से रोजाना के यात्रियों को बड़ी समस्याएँ झेलनी पड़ रही थीं। कोर्ट ने इस दौरान इस बात का उल्लेख किया कि उसने पिछली सुनवाई में पंजाब के डीजीपी तक को बुलाया था और यह सुनिश्चित करने को कहा था कि को प्रदर्शनकारी यहाँ ना रुके। कोर्ट ने कहा कि पंजाब और चंडीगढ़ मिलकर इस मामले में देरी कर रहे हैं।

हाई कोर्ट ने इस मामले में कहा, “जो तस्वीरें यहाँ रिकॉर्ड में रखी गई हैं, उसने साफ़ जाहिर है कि प्रदर्शनकारियों की कोई बड़ी भीड़ यहाँ नहीं है। गाँवों से आने वाले अधिकांश प्रदर्शनकारी खेतों में फसल कटाई में व्यस्त हैं। यह सड़क से रुकावट हटाने का सबसे बढ़िया समय है। लेकिन पंजाब और चंडीगढ़ इसमें देरी कर रहे हैं। अब इसके क्या कारण हैं, यह वही सही से बता सकते हैं।” कोर्ट ने कहा कि प्रशासन को अपनी नींद से जागना होगा और सुप्रीम कोर्ट के रोड रोकने को लेकर आदेश का पालन करना होगा।

कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई अब 18 अप्रैल, 2024 को करेगा। इस मामले में दाखिल की गई जनहित याचिका में कहा गया था कि यह प्रदर्शन जनवरी 2023 से चल रहा है, जिससे स्कूली बच्चों और आमजन, दोनों को असुविधा हो रही है।

प्रदर्शनकारी केंद्र सरकार से बेअदबी के मामलों में सख्त सजा और कुछ सिख कैदियों जिन्हें बंदी सिख के नाम से भी जाना जाता है, की जल्द रिहाई की माँग कर रहे हैं। इन बंदी सिखों में 1993 दिल्ली बम विस्फोट का दोषी देविंदरपाल सिंह भुल्लर और पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह का हत्यारा कैदी बलवंत सिंह राजोआना शामिल हैं।

ताज होटल में बैठक, प्रति जोन ₹5 करोड़… दिल्ली के शराब घोटाले में K कविता की भूमिका से CBI ने कोर्ट में उठाया पर्दा, बताया- मुख्य साजिशकर्ता में से एक

दिल्ली के शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तारी के बाद तिहाड़ जेल में बंद भारत राष्ट्र समिति (BRS) की नेता के. कविता को CBI ने गुरुवार (11 अप्रैल) को गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले उनसे जेल में पूछताछ की थी। CBI ने उनह्ें शुक्रवार (12 अप्रैल 2024) को दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया।

तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी कविता को विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा की अदालत में पेश करके सीबीआई ने पाँच दिन की रिमांड माँगी। सीबीआई ने कहा कि वह शराब नीति मामले की प्रमुख साजिशकर्ताओं में से एक हैं। इस दौरान सीबीआई ने कोर्ट में साउथ ग्रुप को लेकर भी दलील दी।

सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि साउथ ग्रुप के एक शराब कारोबारी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात कर के दिल्ली में कारोबार करने के लिए उनसे सहयोग माँगा था। इसके बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उस कारोबारी को सहयोग करने का आश्वासन दिया था। सीबीआई ने सरकारी गवाह बने एक पूर्व आरोपित दिनेश अरोड़ा के बयान का भी हवाला दिया।

सीबीआई ने कहा कि अरोड़ा ने कहा है कि एक आरोपित (अभिषेक बोइनपल्ली) ने उसे बताया कि विजय नायर को करोड़ों का भुगतान किया गया। सीबीआई ने अदालत को बताया कि बयान और व्हाट्सएप चैट फ़ाइल में संलग्न हैं। सीबीआई ने आगे कहा कि कविता के सीए बुच्ची बाबू की चैट से पता चलता है कि वह अपने प्रॉक्सी के माध्यम से इंडो स्पिरिट्स में थोक लाइसेंस में साझेदारी कर रही थी।

सीबीआई आगे बताया कि चैट से यह भी पता चला कि कविता ने कंपनी की एनओसी प्राप्त करने में राघव मगुंटा की सहायता करने की कोशिश की थी। ताज होटल दिल्ली में आयोजित बैठक में शरत रेड्डी के साथ-साथ बाबू, बोइनपल्ली आदि उपस्थित थे। इसमें यह निर्णय लिया गया कि इंडो स्पिरिट्स को परनोड रिचर्ड के थोक विक्रेता के रूप में नियुक्त किया जाएगा।

सीबीआई ने आगे बताया कि मार्च और मई 2021 में जब उत्पाद शुल्क नीति तैयार की जा रही थी, तब अरुण पिल्लई, बुची बाबू और बोइनपल्ली दिल्ली में रह रहे थे और विजय नायर के माध्यम से लाभ प्राप्त कर रहे थे। कविता को दिल्ली में शराब कारोबार का आश्वासन दिया गया। नवंबर-दिसंबर 2021 में कविता को पहले तय किए गए प्रति जोन 5 करोड़ रुपए की दर से 25 करोड़ रुपए का भुगतान करने के लिए कहा।

सीबीआई ने तर्क दिया कि वह कविता से पहले पूछताछ कर चुकी है और सबूतों को देखते हुए उन्हें गिरफ्तार किया गया है। सीबीआई ने कहा जाँच में पता चला कि कविता उत्पाद शुल्क नीति की प्रमुख साजिशकर्ताओं में से एक है। वह अनुचित आधार का हवाला देते हुए जाँच में शामिल नहीं हुईं। इसलिए उससे पूछताछ नहीं की जा सकी। वह फिलहाल जेल में बंद थी।

सीबीआई ने कहा कि पूछताछ के दौरान कविता ने अपनी भूमिका के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं दिया। उनके जवाब सीबीआई द्वारा बरामद दस्तावेजों के विपरीत हैं। वह उन तथ्यों को छिपा रही हैं, जो विशेष रूप से उसकी जानकारी में हैं। इससे पहले भी वह नोटिस के बावजूद जाँच में शामिल नहीं हुई हैं।

सीबीआई का कहना है कि शराब नीति से जुड़ी बड़ी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए कविता का सबूतों एवं अन्य लोगों से आमना-सामना कराने की जरूरत है। वह मुख्य सरगना या साजिशकर्ता हैं। इसमें और लोग भी शामिल हैं। उसने सहायता की है। मुख्य पैसा इन्होंने ही सर्वाइव करवाया था।

सीबीआई ने आगे कहा कि इसमें और लोग कौन शामिल हैं, उसका जवाब नहीं है अभी। इसका पता लगाने के लिए पाँच दिन की रिमांड चाहिए। इसके बाद दोनों पक्षों को सुनकर कोर्ट ने अपना सुनाते हुए कविता को पाँच दिन की रिमांड पर सीबीआई के हवाले कर दिया।

बता दें कि कविता को प्रवर्तन निदेशालय ने 15 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया था। उन्हें पहले ED की हिरासत में रखा गया और फिर बाद में न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। हाल ही में कोर्ट ने सीबीआई को जेल में कविता से पूछताछ की इजाजत दी थी। सीबीआई ने 6 अप्रैल को जेल में कविता से पूछताछ की और 11 अप्रैल को उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

हाल ही में न्यायाधीश ने कविता को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। इसके पीछे कोर्ट ने तर्क दिया कि प्रथम दृष्टया कविता दिल्ली के शराब घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध से संबंधित सबूतों को नष्ट करने और गवाहों को प्रभावित करने के प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल रही हैं। वे ऐसा फिर कर सकती हैं।

‘बखिया उधेड़ देंगे आपकी’ : पतंजलि मामले में जस्टिस अमानुल्लाह की टिप्पणी पर बवाल, पूर्व न्यायधीशों ने याद दिलाई शब्दों की गरिमा

भ्रामक प्रचार करने के आरोप में पतंजलि और बाबा रामदेव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई चर्चा में है। कारण है जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की सख्त टिप्पणी। 10 अप्रैल को बाबा राम देव और पतंजलि के एमडी बाल कृष्ण द्वारा जब बिन शर्त के लिए माफी माँगने के लिए हलफनामा दायर किया गया तो कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान जस्टिस अमानुल्लाह ने उत्तराखंड के राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण के प्रति गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था- “हम आपकी बखिया उधेड़ देंगे।”

जस्टिस अनानुल्लाह की टिप्पणी से अब पूर्व जज नाराज हैं। उनका कहना है कि अदालती कार्यवाही ने संयम के मानदंड स्थापित किए हैं, लेकिन जो भाषा जस्टिस ने सुनवाई के समय प्रयोग की वो सड़क पर मिलने वाली धमकी जैसी है। पूर्व जजों और पूर्व मुख्याधीशों ने सलाह दी है कि जस्टिस अमानुल्लाह को खुद को आवश्यक न्यायिक आचरण से परिचित कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट के दो निर्णयों को देखना अच्छा होगा। ये कृष्णा स्वामी बनाम भारत संघ (1992) और सी रविचंद्रन अय्यर बनाम जस्टिस ए एम भट्टाचार्जी (1995) ) केस हैं।

कृष्णा स्वामी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि संवैधानिक अदालत के जजों का आचरण समाज में सामान्य लोगों से कहीं बेहतर होना चाहिए। न्यायिक व्यवहार के मानक, बेंच के अंदर और बाहर दोनों जगह, सामान्य रूप से ऊँचे होते हैं… ऐसा आचरण जो चरित्र, अखंडता में जनता के विश्वास को कमजोर करता है या जज की निष्पक्षता को कम बनाता है, उसे त्याग दिया जाना चाहिए। जज से यह अपेक्षा की जाती है कि वह स्वेच्छा से उच्च जिम्मेदारियों के लिए उपयुक्तता की पुष्टि करते हुए आचरण के संपूर्ण मानक स्थापित करेगा।

दूसरा मामला, रविचंद्रन केस का है जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, “न्यायिक कार्यालय मूलतः एक सार्वजनिक ट्रस्ट है। इसलिए, समाज यह उम्मीद करने का हकदार है कि एक न्यायाधीश उच्च निष्ठावान, ईमानदार व्यक्ति होना चाहिए और उसके पास नैतिक शक्ति, नैतिक दृढ़ता और भ्रष्ट या द्वेषपूर्ण प्रभावों के प्रति अभेद्य होना आवश्यक है। उससे न्यायिक आचरण में औचित्य के सबसे सटीक मानक रखने की अपेक्षा की जाती है। कोई भी आचरण जो अदालत की अखंडता और निष्पक्षता में जनता के विश्वास को कमजोर करता है, न्यायिक प्रक्रिया की प्रभावकारिता के लिए हानिकारक होगा…”

बता दें कि जस्टिस अमानुल्लाह की तरह 2005 में जस्टिस बीएन अग्रवाल की पीठ ने भी ऐसी टिप्पणी की थी। उस समय बिहार के तत्कालीन राज्यपाल, वरिष्ठ राजनेता बूटा सिंह, बार-बार बेदखली के आदेशों की अनदेखी करते हुए, दिल्ली में एक सरकारी बंगले पर अनधिकृत रूप से कब्जा कर रहे थे। तब जज ने कहा था, “बिहार के राज्यपाल दिल्ली में बंगला लेकर क्या कर रहे हैं? उन्हें यहां बंगला आवंटित नहीं किया जा सकता। उन्हें बाहर फेंक दीजिए।” इसके अलावा नुपूर शर्मा वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सूर्यकांत और पारदीवाला ने कहा था कि नूपुर शर्मा की ‘फिसली जुबान’ ने पूरे देश में आग लगा दी है और उन्हें पूरे देश से माफी माँगनी चाहिए।

भ्रष्ट लोगों के खिलाफ चलता है ED का चाबुक, महज 3% नेताओं पर केस, 97% पर क्यों बात नहीं करता विपक्ष? इंटरव्यू में PM मोदी ने उघेड़ी विपक्ष की बघिया

देश में ईडी का डंका भ्रष्ट लोगों के खिलाफ चलता रहा है। कुल 3 प्रतिशत लोग ही नेता हैं, जिनके खिलाफ ईडी ने कार्रवाई की है। 97 प्रतिशत लोगों का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं, विपक्ष उनके बारे में क्यों नहीं बात करता? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक इंटरव्यू में कहा कि ईडी भ्रष्ट लोगों के खिलाफ कार्रवाई करती है और ये कार्रवाई चलती रहेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी नेताओं पर भ्रष्टाचार के मामलों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई कहे जाने जैसी बातों को गलत बताया है।

समाचार पत्र हिन्दुस्तान के साथ साक्षात्कार में पीएम मोदी ने कहा, ‘ईडी के पास भ्रष्टाचार के जितने मामले हैं, उनमें से केवल तीन फीसदी ही राजनीति से जुड़े व्यक्तियों के हैं। बाकी 97% मामले अधिकारियों और अन्य अपराधियों से संबंधित हैं। इनके विरुद्ध भी कार्रवाई हो रही है। जिन लोगों को भ्रष्ट व्यवस्था में फायदा दिखता है, वो लोगों के सामने गलत तस्वीर पेश कर रहे हैं।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ईडी ने भ्रष्ट अफसरों, नौकरशाहों, आतंकी फंडिंग से जुड़े अपराधियों, ड्रग्स तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की है। ईडी ने हजारों करोड़ की संपत्तियाँ जब्त की है। ये कार्रवाई रुकने वाली नहीं है, बल्कि जारी रहेगी। पीएम मोदी ने बताया कि साल 2014 से पहले ईडी ने सिर्फ 5 हजार की संपत्ति अटैच की थी, जबकि पिछले 10 सालों में 1 लाख करोड़ से ज्यादा की संपत्तियाँ अटैच की गई हैं। वहीं, साल 2014 से पहले ईडी ने सिर्फ 34 लाख की नकदी बरामद की थी, ये बरामदगी पिछले 10 साल में 2200 करोड़ रुपए हो गई है।

पीएम मोदी कहा कि अगर इन पैसों को गरीबों के कल्याण में लगाया जाता, तो बहुत सारे लोगों को लाभ होता। इन पैसों से युवाओं को रोजगार मिल सकता था, तो कई इन्फ्रा परियोजनाओं को पूरा किया जा सकता था। भ्रष्टाचार की वजह से देश के लोगों को परेशानी होती है। पीएम मोदी ने कहा कि वो भ्रष्टाचारियों को छोड़ने वाले नहीं है।

बिचौलियों की भूमिका समाप्त करने के बारे में पीएम मोदी ने कहा कि हमारी सरकार के डीबीटी योजना के माध्यम से 10 करोड़ से ज्यादा फर्जी नाम वालों को हटाया है। ऐसे लोग दुनिया में आए ही नहीं, फिर भी कागजों पर उनके नाम से कोई पैसा बना रहा था। इससे करीब 3 हजार करोड़ रुपए बचे। अब बताइए, विपक्ष नरेटिव बना रहा है कि ईडी सिर्फ राजनीतिक भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। ये सच नहीं है। ईडी ने सभी भ्रष्टाचारियों के खिलाफ अभियान छेड़ा हुआ है। जो लोग गलत हैं, वो डर रहे हैं।

सावन में मटन, नवरात्रि में मछली… PM मोदी ने राहुल-तेजस्वी को घेरा: कहा- इनकी सोच मुगलिया, पूछा- वीडियो दिखाकर किसे खुश कर रहे

पीएम नरेन्द्र मोदी ने जम्मू के उधमपुर में कॉन्ग्रेस-राजद नेताओं पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने नवरात्रि-सावन में मांस खाने की वीडियो पोस्ट करने को मुगलों जैसी मानसिकता बताया है। उन्होंने कॉन्ग्रेस के राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा में शामिल ना होने को लेकर भी प्रश्न उठाए हैं।

पीएम मोदी जम्मू के उधमपुर से लोकसभा प्रत्याशी केन्द्रीय राज्य मंत्री डॉ जितेन्द्र सिंह के समर्थन में जनसभा को संबोधित करने पहुँचे हैं। यहाँ प्रधानमंत्री ने जम्मू कश्मीर के विकास और बदलती परिस्थितयों समेत कॉन्ग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर हिन्दुओं की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया है।

पीएम मोदी ने यहाँ कहा, “ये लोग सावन में एक सजायाफ्ता अपराधी के घर जाकर मांस बनाकर मौज ले रहे हैं। उसका वीडियो भी बनाते हैं और देश के लोगों को चिढ़ाते हैं। कानून और मोदी किसी को कुछ खाने से नहीं रोकते। इन लोगों की मंशा दूसरी होती है।”

उन्होंने इस कृत्य की तुलना मुगलों के हिन्दू मंदिर ध्वंस करने से की। उन्होंने कहा,”जैसे मुग़ल जब आक्रमण करते थे तो राजा को पराजित करने में संतोष नहीं होता था। जब तक मंदिर तोड़ते नहीं थे, उनको संतोष नहीं होता था। उनको इसमें मजा आता था। ऐसे ही सावन के महीने में मटन की वीडियो दिखा कर देश के लोगों को चिढ़ाना चाहते हैं।”

गौरतलब है कि राहुल गाँधी का एक वीडियो सावन के महीने में सामने आया था जहाँ वह राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के साथ मांस खा रहे थे। इसके अलावा हाल ही में नवरात्रि के दौरान उनके ही बेटे तेजश्वी यादव के हेलीकाप्टर में मछली खाने का वीडियो सामने आया था।

उधमपुर में पीएम मोदी ने पूछा कि नवरात्रि के दिनों में मांस खाने का वीडियो दिखा कर किसे खुश किया जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि उनके इस बयान के बाद उनको गालियाँ दी जाएँगी। पीएम मोदी ने कहा कि लोग यह सब काम इसीलिए करते हैं कि भारत की मान्यताओं पर हमला हो। पीएम मोदी ने इसे मुगलिया सोच और तुष्टिकरण की राजनीति बताया। पीएम मोदी का यह वक्तव्य यहाँ सुना जा सकता है।

पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का न्योता ठुकरा दिया। पीएम मोदी ने पूछा कि कॉन्ग्रेस ने किस दबाव में यह काम किया। उन्होंने कहा कि यह लोग राम मंदिर को चुनावी मुद्दा बताते हैं, देश के लिए यह आस्था-विश्वास का मुद्दा है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने अपनी सरकार के समय दिन रात राम मंदिर का विरोध किया।

पीएम मोदी ने यहाँ कहा, “ये चुनाव सिर्फ सांसद चुनने का नहीं है, बल्कि ये चुनाव देश में एक मजबूत सरकार बनाने का चुनाव है। और सरकार जब मजबूत होती है, तो जमीन पर चुनौतियों के बीच भी, चुनौतियों को चुनौती देते हुए काम करके दिखाती है।”

यहाँ पीएम मोदी ने शाहपुर कंडी बाँध का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने इस बाँध का प्रोजेक्ट लटकाए रखा। मोदी सरकार में पाकिस्तान को जाने वाला पानी रोका गया। पीएम मोदी ने कहा कि जितना नुकसान जम्मू कश्मीर का परिवारवादी पार्टियों ने किया उतना किसी ने नहीं किया।

‘चुनाव के बाद केंद्रीय बल चले जाएँगे, TMC के साथ रहना होगा’: ममता के विधायक ने जनता को खुलेआम धमकाया, BJP समर्थकों को कह चुके हैं ‘नमकहराम’

लोकसभा चुनाव से पहले बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस के विधायक हमीदुल रहमान 11 अप्रैल को जनता को सरेआम धमकाते हुए मिले। गरुवार (11 अप्रैल 2024) को उत्तर दिनाजपुर जिले के माझियाली गाँव में एक सार्वजनिक बैठक के दौरान लोगों से कहा कि केंद्रीय अर्धसैनिक बल 26 तारीख तक सिर्फ बंगाल में रहेगा उसके बाद तो टीएमसी के साथ ही उन्हें रहना होगा।

रहमान ने जनता को धमकाते हुए कहा, “अपना वोट बर्बाद करने की या कोई हरकत करने की हिम्मत मत करना। केंद्रीय बल 26 तारीख को चला जाएगा और आप लोग हमारे बलों के साथ ही रह जाएँगे। उस समय फिर जो होगा उसकी शिकायत मत करना वो तुम्हारी अपनी किस्मत होगी।”

हमीदुल रहमान ने मतदाताओं को साल 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद की याद और 2023 में हुए पंचायत चुनावों के बाद की याद दिलाई जब टीएमसी ने चुनाव जीतने के बाद ‘खेला होबे’ के नाम पर जगह-जगह भाजपा समर्थकों, कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा की थी।

बता दें कि इससे पहले भाजपा समर्थकों को इन्हीं हमीदुल रहमान ने ‘नमकहराम’ कहा था। उन्होंने घोषणा की थी कि चुनाव के बाद इन लोगों से वह सख्ती से निपटेंगे। रहमान ने कहा था, “हमारे पूर्वजों ने कहा है कि उन लोगों को धोखा मत दो जो तुम्हें खाना खिलाते हैं…चुनाव के बाद, हमें उन लोगों से मिलना होगा जो हमें धोखा देंगे। बेईमान लोगों के साथ खेला होबे (हिंसा का खेल खेला जाएगा)। हम चाहते हैं कि दीदी (इसका जिक्र करते हुए) सीएम बनें।” उनके इस बयान के बाद भाजपा ने शिकायत दर्ज कराई थी।

गौरतलब है कि एक ओर टीएमसी विधायक सामान्य जनता को खुलेआम धमका रहे हैं और दूसरी ओर राज्य में भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले होने शुरू हो गए हैं। 24 मार्च को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के कैनिंग उपखंड के माथेर दिघी गाँव में तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों की भीड़ ने कई भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला किया था। इस दौरान उन्होंने भाजपा के कैनिंग पुरबा मंडल नंबर 3 के मंडल अध्यक्ष और कई अन्य कार्यकर्ताओं की पिटाई की थी। इस हमले का आरोप भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने हुसैन शेख नामक व्यक्ति पर लगाया है, जो टीएमसी विधायक शौकत मोल्ला का करीबी सहयोगी बताया जाता है। उन्होंने चुनाव आयोग से शेख के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने का अनुरोध किया था।

उससे पहले 23 मार्च की सुबह एक भाजपा कार्यकर्ता शांतनु घोराई का शव उसके घर के पास धान के खेत में पाया गया था। यह घटना पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के खड़गपुर उपखंड के पिंगला गाँव में हुई थी। कार्यकर्ता के पिता ने टीएमसी पर हत्या का आरोप लगाया था। उन्होंने बताया था कि शांतनु को भाजपा का समर्थन करने पर धमकी आती थी। उसकी हड्डी तोड़ने और जान से मारने की बात होती थी।

बेंगलुरु रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट: NIA ने बंगाल से मुस्सविर हुसैन और अब्दुल ताहा को पकड़ा, इन्होंने ही किया था धमाका-प्लानिंग

बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे धमाका मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने पश्चिम बंगाल से दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि यह दोनों धमाके के मुख्य आरोपित आतंकी अब्दुल मतीन ताहा और मुस्सविर हुसैन शाजेब हैं। इन दोनों से पूछताछ की जा रही है।

यह जानकारी सामने आई है कि NIA ने इन दोनों को कोलकाता के नजदीक किसी जगह से गिरफ्तार किया है। यह दोनों लम्बे समय से फरार थे। NIA ने इनके ऊपर ₹10-10 लाख इनाम रखा हुआ था। बताया गया कि यह दोनों यहाँ अपनी पहचान बदल कर रह रहे थे। इससे पहले इनके चेन्नई में छुपे होने की जानकारी सामने आई थी। इन दोंनो के नाम बदल कर यात्रा और होटल में रुकने का भी खुलासा हुआ था।

NIA ने बेंगलुरु रामेश्वरम कैफे धमाका मामले में एक आरोपित मुजम्मिल शरीफ को गिरफ्तार किया था। इस पर आरोप है कि इसने आतंकी अब्दुल मतीन ताहा और मुवस्सिर हुसैन को छुपने और शहर छोड़ कर भागने में सहायता की थी। उसने बम बनाने के लिए भी सामान इन आतंकियों को उपलब्ध करवाया था। वह अभी NIA की गिरफ्त में है और उससे पूछताछ चल रही है।

बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में धमाके की योजना बनाने वाले आतंकी अब्दुल मतीन ताहा ने हिन्दू नाम विग्नेश डी और सुमित अपनाए हुए थे। इनका उपयोग वह अलग अलग जगह जाने और रहने में करता था। रामेश्वरम कैफे जाकर धमाके को अंजाम देने वाला मुस्सविर हुसैन, मोहम्मद जुनैद सैयद नाम के पहचान पत्रों पर फर्जी दस्तावेज बनाए हुए था।

NIA ने इन दोनों भगोड़े आतंकियों की तस्वीर जारी करके इनके विषय में जानकारी देने को कहा था। बताया गया है कि यह दोनों 2020 से ही गायब थे। यह अल हिन्द मॉड्यूल में शामिल थे। NIA की दबिश पर यह गायब हो गए थे। इसके बाद से यह आतंक की प्लानिंग कर रहे थे। इन्होने मिलकर बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में मार्च 2023 में धमाके को अंजाम दिया।

गौरतलब है कि 1 मार्च, 2024 को बेंगलुरु के वाइटफील्ड इलाके में स्थित रामेश्वरम कैफे में दोपहर में एक धमाका हुआ था। इस धमाके में 9 लोग घायल हुए थे। धमाके के पीछे की जानकारी बाद में निकल कर सामने आई थी। इसके बाद इस मामले की जाँच NIA ने चालू कर दी थी। तब से ही एजेंसी उनको पकड़ने का प्रयास कर रही थी।

सज्जाद ने कुल्हाड़ी से बीवी और 7 बच्चों (4 बेटी+3 बेटा) को काट डाला, क्योंकि नहीं भर पा रहा था सबके पेट: मरने वाले बच्चों की उम्र 8 महीने से 10 साल के बीच

पाकिस्तान के लाहौर में गुरुवार (11 अप्रैल 2024) को एक शख्स ने अपनी पत्नी और 7 बच्चों को कुल्हाड़ी से मौत के घाट उतार दिया। आरोपित शख्स का कहना है कि वो अपने परिवार का लालन-पालन करने में असमर्थ था इसलिए उसने ऐसा किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हत्यारे का नाम सज्जाद खोखर है। उसने अपनी 42 साल की बीवी कौसर और उसके सात बच्चों को कुल्हाड़ी से मौत के घाट उतारा। इन सात बच्चों में 4 बेटियाँ और 3 बेटे थे। इनकी उम्र 8 महीने से 10 साल तक की थी।

पंजाब पुलिस का कहना है कि व्यक्ति मानसिक तौर पर परेशान था क्योंकि उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी और अक्सर वह अपनी पत्नी से लड़ाई लड़ता रहता था। पुलिस ने आरोपित सज्जाद को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में उसने पुलिस के आगे अपना गुनाह भी कबूला है और ऐसा करने के पीछे का कारण भी बताया है।

पुलिस ने कहा कि सज्जाद अपने परिवार वालों को खिला नहीं पा रहा था इसलिए उसने ये हत्या की। गुनाह करने के कुछ घंटे बाद ही आरोपित ने खुद को पुलिस के आगे सरेंडर भी कर दिया। इस मामले में पंजाब की मुख्यमंत्री बनीं मरियम नवाज शरीफ ने अपनी संवेदनाएँ प्रकट की हैं।

बता दें कि पाकिस्तान में बीवी और इतने बच्चों की हत्या की ये कोई पहली खबर नहीं है। इससे पहले साल 2019 की एक घटना सामने आई थी। जब मोहम्मद अजमल ने अपनी बीवी समेत 6 बच्चों, सास और दो सालियों को मारा डाला था। इसी तरह 2022 में आई एक खबर के अनुसार, पाकिस्तान में एक शख्स ने अपनी बीवी को 6 बच्चों के सामने मारकर उसे उबाल दिया था।

लखनऊ से गायब हो गए मौलाना मंजर अली, खोजते-खोजते 2 बीवी थाने पहुँची, गोंडा में तीसरी बीवी के पास मिले: किसी को नहीं थी 3 निकाह की खबर

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक दिलचस्प वाकया सामने आया है। यहाँ एक मौलाना की गुमशुदगी की जाँच का अंत तीसरे निकाह के खुलासे के रूप में हुआ। मौलाना की गुमशुदगी की FIR उनकी दो बेगमों ने करवाई थी। पता चला कि मौलाना के तीन बीवियाँ हैं। पुलिस ने मौलाना को गोंडा से सकुशल बरामद किया है।

जानकारी के अनुसार, लखनऊ के सआदतगंज की रहने वाली एक महिला ने 19 फरवरी को अपने पति मौलाना मंजर अली की गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस के पास दर्ज करवाई। महिला ने कहा कि उनके पति अचानक ही 16 फरवरी, 2024 को घर से कहीं गायब हो आगे और लौटे नहीं हैं। उनका कोई अता पता नहीं है।

पुलिस ने इसके बाद मौलाना की तलाश चालू की। इतने में ही एक और महिला भी थाने पहुँच कर मौलाना के बारे में पता लगाने लगी। महिला ने भी यही दावा किया कि उसके पति मौलाना मंजर अली कई दिनों से गायब हैं और उनका कोई सुराग नहीं लग रहा। पुलिस ने इसके बाद दोनों घटनाओं की समानताओं के बारे में जाँच की।

पुलिस जाँच में सामने आया कि दोनों महिलाओं द्वारा जिन मंजर अली के गायब होने की बात की जा रही है, वह एक ही आदमी हैं। उन्होंने दो निकाह कर रखे हैं और इसकी जानकारी उनकी दोनों ही बीवियों को नहीं है। पुलिस ने इसके बाद मौलाना का फ़ोन और उनकी अन्य जानकारियों के साथ तलाश चालू की।

पुलिस की तलाश में इस पूरी कहानी में एक और मोड़ आ गया। मौलाना मंजर अली को पुलिस ने सकुशल उत्तर प्रदेश के ही गोंडा से बरामद कर लिया लेकिन इसमें एक और खुलासा भी हुआ। मौलाना मंजर अली को पुलिस ने गोंडा से एक अन्य महिला के साथ तलाशा जो कि उनकी तीसरी बेगम निकली, इसी के साथ पता चला कि मौलाना की दो नहीं बल्कि तीन बीवियाँ हैं।

ऐसे में इस पूरे वाकये में सामने आया कि मौलाना ने तीन निकाह कर रखे थे और उनकी तीनों ही बीवियों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। मौलाना ने बताया कि वह लखनऊ वाली अपनी दोनों बीवियों से परेशान थे इसीलिए गोंडा तीसरी के पास चले आए थे। मौलाना मंजर अली को अभी पुलिस ने उनकी बीवियों के हवाले कर दिया है।