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‘आपको कितने पैसे मिले थे लड़की को बदनाम करने के लिए’: जब पत्रकारों के सवाल से हुआ अजीत अंजुम का सामना तो चिचियाकर भागे, Video वायरल

अजीत अंजुम अक्सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के खिलाफ YouTube पर प्रोपेगंडा फैलाने के लिए जाने जाते हैं। वो उस गिरोह का हिस्सा हैं, जो पीएम मोदी को ‘तानाशाह’ बता कर अपनी प्रासंगिता बनाए रखने की चेष्टा करता रहता है। हालाँकि, जब इस गिरोह के लोगों का खुद सवालों से सामने होता है तो वो भाग निकलते हैं। अजीत अंजुम से जब किसी पत्रकार ने सवाल पूछा तो उन्होंने उस पर ही जेल में बंद आसाराम से पैसे लेने का आरोप लगा दिया।

उन्होंने सवाल पूछने वाले पत्रकार को ‘आसाराम का चेला’ बता दिया। बदले में पत्रकारों ने भी उनसे पूछा कि उन्हें कितने पैसे मिले थे? एक पत्रकार ने पूछा, “आपको कितने पैसे मिले थे लड़की को बदनाम करने के लिए?” इस दौरान अजीत अंजुम पत्रकारों के सवालों का जवाब देने से इनकार करते हुए लगातार उँगली बता-बता कर कुछ कुछ उलटा-सीधा बोलते रहे। इसके बाद वो कार में बैठ गए और ड्राइवर ने गाड़ी आगे बढ़ा दी। इस तरह बार-बार पीएम मोदी से सवालों के जवाब की अपेक्षा रखने वाले अजीत अंजुम खुद एक सवाल से भाग खड़े हुए।

एक तरह से 2-4 पत्रकारों ने मिल कर अजीत अंजुम को वास्तविकता का भान करा दिया। ये वीडियो कब का है, ये अभी तक सामने नहीं आया है। हालाँकि, ऐसा लग रहा है जैसे ये हाल का ही वीडियो है। एक ट्विटर यूजर ने तो दावा कर दिया कि अजीत अंजुम को चिकेन-पकौड़ा की दुकान से खदेड़ दिया गया। असल में अजीत अंजुम का एक अपुष्ट ट्वीट वायरल होता है जिसमें उन्होंने योगी आदित्यनाथ के दोबारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन जाने के बाद पत्रकारिता छोड़ चिकेन-पकौड़ा का दुकान खोलने की बात कही थी।

हालाँकि, अजीत अंजुम दावा करते हैं कि उन्होंने कभी इस तरह का ट्वीट किया ही नहीं। लोगों ने उनके ताज़ा वीडियो को ‘पकौड़ी माफिया पर जनता की स्ट्राइक’ कह कर भी चलाया। 2020 में भी एक वीडियो सामने आया था, जिसके आधार पर दावा किया गया था कि किसान आंदोलन में प्रदर्शनकारियों ने अजीत अंजुम की पिटाई की। नवंबर 2023 में मध्य प्रदेश विधानसभा मतदान के दौरान उन्होंने एक महिला से जबरन अपने सवाल का जवाब लेना चाहा, जिसके बाद लोगों ने उन्हें खदेड़ा था।

पढ़ाई हो गई पूरी, फिर भी हॉस्टल में कब्जा जमाकर बैठे थे: गुजरात यूनिवर्सिटी ने 7 अफगान छात्रों को निकाला, यहीं हुआ था नमाज पर विवाद

गुजरात के अहमदाबाद में स्थित गुजरात यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उन 7 पूर्व छात्रों को हॉस्टल से जाने के लिए कहा है, जो हॉस्टल में अवैध तरीके से जमे हुए थे। इनकी पढ़ाई पूरी हो चुकी है, लेकिन किसी न किसी बहाने से ये हॉस्टल में जमे थे। अब उन्हें हॉस्टल खाली करने के लिए कहा गया है। ये वही यूनिवर्सिटी है, जहाँ नमाज को लेकर भारतीय और विदेशी छात्रों में लड़ाई हो गई है, इसके बाद सभी विदेशी छात्रों को दूसरे हॉस्टल में शिफ्ट कर दिया गया था।

गुजरात यूनिवर्सिटी ने एनआरआई हॉस्टल में हुए नमाज विवाद के बाद सख्त कदम उठाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ने 7 अफगानी छात्रों को निष्कासित कर दिया है। ये छात्र यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में अवैध रूप से रह रहे थे। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बावजूद वो बहाने से हॉस्टल में रह रहे थे। गुजरात यूनिवर्सिटी ने पूर्व छात्रों के लिए नोटिस जारी किया, उसमें से 5 ने हॉस्टल छोड़ भी दिया है।

इस समय गुजरात यूनिवर्सिटी में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में लगभग 100 से अधिक विदेशी छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इसमें अफगानिस्तान के 7 पूर्व छात्र हॉस्टल में पढ़ाई पूरी होने के बाद भी रुके थे। ऐसा करना नियमों के खिलाफ था, जिसके बाद यूनिवर्सिटी ने ये कदम उठाया। इसकी सूचना अफगानिस्तान के वाणिज्य दूतावास को भी दी गई थी।

गुजरात विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. निरजा गुप्ता के मुताबिक , अफगानिस्तान के 7 छात्र पूर्व छात्रों की श्रेणी में आए। वे किसी न किसी कारण से हॉस्टल में रह रहे थे। अब इन छात्रों को हॉस्टल में छात्र बनकर न रहकर अपने देश लौटने की व्यवस्था की गई है। कुलपति ने यह भी कहा है कि इन सात छात्रों में से 5 पहले ही कैंपस छोड़ चुके हैं, जबकि बाकी दो से भी नियमों का पालन करने की उम्मीद की जाती है।

परिसर में नमाज पढ़ने को लेकर हुआ था विवाद

बता दें कि 16 मार्च को यूनिवर्सिटी हॉस्टल के ए ब्लॉक में सार्वजनिक तौर पर नमाज पढ़ने को लेकर विदेशी छात्रों और स्थानीय छात्रों के बीच मारपीट हो गई थी। यहाँ विदेशी मुस्लिम छात्र सार्वजनिक रूप से नमाज पढ़ रहे थे तो एक स्थानीय हिंदू छात्र ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन एक विदेशी छात्र ने स्थानीय छात्र पर हमला कर दिया। इस घटना के बाद मामला बिगड़ गया और जवाब में स्थानीय छात्रों ने भी विदेशी छात्रों के साथ मारपीट की।

इस घटना के बाद विदेश मंत्रालय भी हरकत में आ गया था, तो अफगानिस्तान और गाम्बिया के प्रतिनिधिमंडल ने यूनिवर्सिटी का दौरा किया था। इस घटना के बाद विदेशी छात्रों को नए हॉस्टल में शिफ्ट कर दिया गया था और अब उनमें से 7 को यूनिवर्सिटी से जाने को कहा गया है, क्योंकि वो नियमों के खिलाफ यूनिवर्सिटी कैंपस में रह रहे थे।

‘राज्यों में लड़ते हैं, दिल्ली में एकजुट हो जाते हैं’: PM मोदी ने बिहार में I.N.D.I. गठबंधन को बताया भ्रष्टाचारियों-देशविरोधियों का ठिकाना, बोले – मैं ग़रीब का बेटा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (7 अप्रैल, 2024) को बिहार के नवादा में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया, जिसमें LJP(R) के चिराग पासवान, JDU अध्यक्ष व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, HAM(S) के संतोष सुमन और RLM संस्थापक उपेंद्र कुशवाहा जैसे बड़े नेताओं का जमावड़ा लगा। रैली में नीतीश कुमार ने 2005 से पहले के बिहार के जंगलराज की याद दिलाते हुए कहा कि पति-पत्नी के शासनकाल में कैसी स्थिति थी ये सबको पता है।

बिहार की धरती को प्रणाम करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इस महान धरती में चंद्रगुप्त मौर्य का शौर्य है, आचार्य चाणक्य की बौद्धिक क्षमता है और इसमें देश को दिशा देने का सामर्थ्य है। उन्होंने कहा कि ये क्षेत्र बिहार के पहले मुख्यमंत्री बिहार केसरी श्रीकृष्ण बाबू की जन्मभूमि भी है। उन्होंने नवादा को लोकनायक श्री जयप्रकाश नारायण की भी कर्मभूमि बताया। पीएम ने कहा कि मोदी, देश से गरीबी खत्म करने के मिशन में जुटा है। उन्होंने जिक्र किया कि कैसे वो भी ग़रीबी को जीकर ही यहाँ तक पहुँचे हैं।

उन्होंने खुद को गरीब का बेटा और गरीब का सेवक करार देते हुए ऐलान किया कि वो जब तक देश के हर भाई-बहन की ग़रीबी दूर नहीं कर लेंगे, चैन से नहीं बैठेंगे। पीएम ने अपने अंदाज़ में कहा कि मोदी की गारंटियाँ I.N.D.I. गठबंधन को पसंद नहीं आ रही हैं। उन्होंने ध्यान दिलाया कि कैसे I.N.D.I. गठबंधन के एक बहुत बड़े नेता ने कहा है कि मोदी जो आपको गारंटी देता है, उस पर बैन लगना चाहिए। बकौल पीएम मोदी, ये लोग कहते हैं, मोदी का गारंटी देना ही गैर-कानूनी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विरोधियों से सवाल किया कि अरे, इतने डर गए हो क्या? मोदी की गारंटी से घबरा रहे हो क्या? उन्होंने आगे कहा कि मोदी गारंटी इसलिए देता है, क्योंकि उसके पास गारंटी पूरी करने का माद्दा है, साफ नीयत है। मोदी गारंटी इसलिए देता है क्योंकि वो गारंटी पूरी करने के लिए जी-तोड़ मेहनत करता है। प्रधानमंत्री के अनुसार, I.N.D.I. गठबंधन के पास न विजन है, न विश्वसनीयता है। दिल्ली में जो लोग एक साथ खड़े होते हैं, अलग-अलग राज्यों वही एक-दूसरे को गाली देते हैं।

उन्होंने कहा, “बिहार में तो आपस में ही सिर-फुटव्वल मची है। ये मजबूरी में साथ आए लोग हैं और इनकी मजबूरी का एक ही नाम है- सत्ता का स्वार्थ। I.N.D.I. गठबंधन यानी भ्रष्टाचारियों का ठिकाना। I.N.D.I. गठबंधन यानी देशविरोधी नफरती ताकतों का ठिकाना। I.N.D.I. गठबंधन वाले सनातन धर्म को समाप्त करने की बात करते हैं। I.N.D.I. गठबंधन वाले भारत के एक और विभाजन करने की बात करते हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता खुलेआम बयान दे रहे हैं कि वो दक्षिण भारत को अलग कर देंगे।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने जो अपना घोषणापत्र जारी किया है, उसमें भी मुस्लिम लीग के विचारों की छाप है। बकौल पीएम मोदी, कॉन्ग्रेस ने ‘घोषणापत्र’ नहीं, ‘तुष्टिकरण पत्र’ जारी किया है। पीएम मोदी ने कहा कि देश में विकास के जो काम हुए हैं, जिन ऊँचाइयों को देश ने छुआ है उसकी झलक NDA को मिल रहे जनसमर्थन में दिख रही है। उन्होंने लाल किले से दिए गए अपने भाषण को याद किया – ‘यही समय है, सही समय है’। उन्होंने कहा कि कई शताब्दियों के बाद ये समय आया है।

बिहार के नवादा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें इस मौके को गँवाना नहीं है, इसीलिए 2024 का ये चुनाव बहुत अहम हो गया है। उन्होंने अपनी सरकार के बड़े फैसलों की बात की। साथ ही बिहार में आधुनिक इंफ़्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेसवे निर्माण, रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण, ‘वन्दे भारत’ ट्रेनों, डिजिटल क्रांति से मोबाइल तक पहुँची सरकारी सेवाओं की बात की और साथ ही कहा कि पूरी दुनिया में आज भारत का डंका बज रहा है। उन्होंने कहा कि ये मोदी के कारण नहीं हो रहा,

अम्मी दावत दे दो 18 बार हो चुका है मेरा निकाह… जब हैदराबाद की लड़की का आया कॉल, यूँ ही PM मोदी ने नहीं कहा सब देखें यह इंटरव्यू

माधवी लता (Maadhavi Latha) हैदराबाद से बीजेपी की उम्मीदवार हैं। उनका मुकाबला ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता असदुद्दीन ओवैसी से है। इंडिया टीवी के रजत शर्मा की ‘आप की अदालत’ को दिया माधवी लता का इंटरव्यू चर्चा में है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से यह इंटरव्यू देखने की अपील की है।

बेबाकी से जवाब देने के लिए माधवी लता की सराहना करते ही पीएम मोदी ने एक्स/ट्विटर पर लिखा है, “माधवी लता जी, आपका ‘आप की अदालत’ एपिसोड असाधारण है। आपने बेहद तार्किक तरीके से काफी ठोस मुद्दे उठाए हैं। मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं। मैं सभी से आज (7 अप्रैल 2024) सुबह 10 बजे या रात 10 बजे इस कार्यक्रम का दोबारा प्रसारण देखने का भी आग्रह करता हूँ। आप सभी को इससे काफी उपयोगी जानकारी मिलेगी।”

यह इंटरव्यू करीब 1 घंटे 25 मिनट का है। इसमें अपनी जीवन यात्रा, ओवैसी से मुकाबले, हैदराबाद के मुस्लिम इलाकों में सामाजिक कार्यों, गरीब मुस्लिमों की स्थिति से जुड़े सवालों का माधवी लता (Madhvi Latha in Aap Ki Adalat) ने बेबाक तरीके से जवाब दिया। कई चौंकाने वाले खुलासे भी उन्होंने इस दौरान किए हैं। इनमें से एक खुलासा हैदराबाद की मुस्लिम बच्चियों की बिक्री को लेकर है। उन्होंने 16 साल की लड़की से 70 साल के अरब के व्यक्ति के निकाह से लेकर, मध्य-पूर्व में एक लड़की के 18 बार निकाह होने की घटना के बारे में बताया है।

रजत शर्मा ने माधवी लता से पूछा कि आप पर आरोप लगते हैं कि आप हैदराबाद को बदनाम करती हैं। आप कहती हैं कि यहाँ लड़कियाँ बेची जाती हैं। जवाब में एक घटना का जिक्र करते हुए बीजेपी उम्मीदवार ने कहा, “15 दिन पहले की बात है। एक लड़की ने मिडिल ईस्ट से अपनी वालिदा (अम्मी) को कॉल कर कहा कि यदि आपके पास पैसे हैं तो वहाँ (हैदराबाद) दावत दे दीजिए। आपकी बेटी की 18 बार शादी हुई है।” उन्होंने आगे बताया कि 16 साल की एक लड़की की शादी अरब के 70 साल के आदमी से होती है।

माधवी लता ने हैदराबाद की गलियों में ऐसे कई पसमांदा मुस्लिमों के घरों का जिक्र किया जिनकी आवाज उनकी चारदीवारी से बाहर नहीं निकलती है। इन घरों की हालात बयाँ करते हुए उन्होंने बताया, “वे गरीबी के दलदल से बाहर निकलने के लिए बेटियों की 3-4 बार शादियाँ करवा देते हैं, क्योंकि उन पैसों से पीछे 7-8 बच्चों को खाना मिलता है। कई लड़कियाँ बिक जातीं हैं अपने घर में खाना लाने के लिए।”

मुस्लिम महिलाओं को भड़काने के आरोपों पर भी माधवी लता से सवाल पूछा गया। रजत शर्मा ने कहा कि आप पर आरोप लगते हैं कि आप जिन मुस्लिम महिलाओं से बार-बार मिलने जाती हैं उनको भड़काती हैं। उनको कहती हैं कि घरों से बाहर निकलो। कुछ काम करो। बच्चे पैदा नहीं करो।

जवाब में माधवी लता ने कहा, “मदरसों को मैं मदद भिजवाती हूँ, मेडिकल कैंप्स फ्री में लगवाती हूँ, फ्री में दवाइयाँ हमलोग देते हैं। रोजा-इफ्तार के टाइम पर खाना भिजवाते हैं। कपड़े और अन्य मदद भी देते हैं। लेकिन ये लोग हमसे कहते हैं कि अम्मा आप ये सब कर रहे हैं लेकिन कहीं भी नहीं बताना कि हमारे मदरसे का नाम क्या है। हम कैसे दिखते हैं और क्या करते हैं, क्योंकि हमें धमकी दी जाती है। मौलाना हमारे टीम मेंबर्स को कहते हैं कि आप आएँगे तो टाँग तोड़ देंगे। चुपचाप आना है और चुपचाप चले जाना है।”

उन्होंने कहा, “हम औरतों से यह नहीं कहते कि आप बच्चे पैदा न करिए। हम उनसे कहते हैं कि कितने भी बच्चे पैदा करिए पांडवों को पैदा करिए, कौरवों को पैदा मत करिए। हम उनसे ये कहते हैं कि आप बच्चों को पैदा कर रहे हैं लेकिन उन्हें खाना, कपड़ा, पढ़ाई नहीं दे रहे हैं तो देश को क्या दे रहे हैं। देश को ऐसे बच्चे दीजिए जिन पर नाज हो।”

कॉन्ग्रेस के ‘न्याय पत्र’ को असम के CM ने बताया तुष्टिकरण का पिटारा, कहा- भारत नहीं, पाकिस्तान के चुनाव के लिए बनाया गया है घोषणा पत्र

लोकसभा चुनाव 2024 के लिए कॉन्ग्रेस ने अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया है। इस घोषणापत्र में तमाम बातें ऐसी हैं, जो राहुल गाँधी की चुनावी रैलियों के गारंटियों सरीखी ही हैं, जिनका धरातल की सच्चाई से कोई लेना देना नहीं, वहीं कई सारे वादे भारत के समाज के ढाँचे को तोड़ने वाले भी हैं। कॉन्ग्रेस के घोषणा पत्र पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के घोषणापत्र को देखकर लगता है, मानो उसे भारत में नहीं, बल्कि पाकिस्तान में चुनाव लड़ना है।

हिमंता ने मीडिया से वार्ता में कहा, “यह तुष्टिकरण का घोषणा पत्र है। कॉन्ग्रेस का घोषणापत्र ऐसा लगता है, जैसे यह भारत में नहीं बल्कि पाकिस्तान के चुनाव के लिए है।” हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि कॉन्ग्रेस की मानसिकता समाज को बाँटना और सत्ता में आना है।

हिमंता ने कहा, “कोई नहीं चाहता है कि ट्रिपल तलाक फिर आए। कोई नहीं चाहता कि बाल विवाह दोबारा आना चाहिए। कोई नहीं चाहता कि एक ही व्यक्ति 2-3 बार शादी करे, हिंदू हो या मुस्लिम। कॉन्ग्रेस के लोग ही ये सोच लाते हैं, समाज को उन्हें बाँटना है। और समाज को बाँटकर उन्हें सत्ता में आना है। कॉन्ग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति की हम निंदा करते हैं। और कॉन्ग्रेस का जो मेनिफेस्टो है, जो देखने से ऐसा लगता कि ये भारत के चुनाव के लिए नहीं, बल्कि पाकिस्तान के चुनाव के लिए ही ये घोषणा पत्र बनाया गया है।”

उन्होंने ये वीडियो एक्स पर भी शेयर किया है। हिमंता ने एक्स पर लिखा, “कॉन्ग्रेस को पाकिस्तान से चुनाव लड़ना है, इसीलिए ऐसा घोषणापत्र बनाया है जिससे बहुविवाह, ट्रिपल तलाक़ जैसे काले कानूनों को वापस लाया जाए।”

बता दें कि असम में लोकसभा चुनाव चरणों में होना है। असम में पहले तीन चरण में 19 अफ्रैल. 26 अप्रैल और 7 मई को मतदान होगा। यहाँ 6 जून को नतीजे आएँगे। असम में लड़ाई त्रिकोणीय है, जिसमें बीजेरी, असम और AIUDF के बीच लड़ाई है।

भारत में अब नई प्राइवेट कंपनी के जरिए अपना संचालन करेगी BBC: नए FDI नियमों और टैक्स चोरी वाली रेड के बाद फैसला, पहली बार अपनी किसी यूनिट को अलग किया

पिछले वर्ष भारतीय आयकर विभाग के अधिकारियों ने BBC के दफ्तर में तलाशी ली थी और उनसे इनकम टैक्स चोरी को लेकर पूछताछ की थी। अंतरराष्ट्रीय मीडिया कंपनी पर टैक्स चोरी का आरोप लगा था। अब सामने आया है कि BBC ने भारत में अपनी यूनिट को अलग कर दिया है। यानी, इनका संचालन पहले की तरह होता रहेगा लेकिन इसका स्वामित्व एक भारतीय कंपनी के पास होगा। इस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को भारत में BBC के 4 पूर्व कर्मचारियों ने मिल कर ही शुरू किया है।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने अपनी एक खबर में ये जानकारी दी है। पूरी दुनिया में ये पहली बार है, जब किसी देश में BBC अपनी यूनिट को एक अलग कंपनी के रूप में चलाएगी। अगले ही सप्ताह से ये व्यवस्था शुरू हो जाएगी। इसके लिए ‘कलेक्टिव न्यूज़रूम’ नामक एक कंपनी की स्थापना की गई है। अंग्रेजी, हिंदी, गुजरती, पंजाबी, मराठी, तमिल और तेलुगु में BBC अपनी सेवाएँ देना जारी रखेगा। इसके लिए भारत में स्थित इसके दफ्तर पहले की तरह ही काम करते रहेंगे।

रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि BBC ने इस कंपनी में 26% हिस्सेदारी खरीदने के लिए भारत सरकार के पास ज़रूरी अनुमतियों के लिए आवेदन भी कर दिया है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए ‘कलेक्टिव न्यूज़रूम’ की CEO रूपा झा ने कहा कि BBC के लिए इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है जब उसने अपना कंटेंट प्रकाशित करने की जिम्मेदारी किसी अन्य संस्था को दी हो। उन्होंने कहा कि हम अपनी पत्रकारिता से कोई समझौता नहीं करेंगे और BBC पूरी तरह हमारे पीछे है।

रूपा झा BBC में सीनियर न्यूज़ एडिटर रही हैं, अब ‘कलेक्टिव न्यूज़रूम’ के 4 संस्थापक निवेशकों में से एक हैं। बता दें कि 2020 में आए नए FDI नियमों के तहत किसी भारतीय कंपनी में अधिकतम 26% विदेशी निवेश ही लिया जा सकता है। इससे पहले ‘बीबीसी इंडिया’ भारत में BBC का सारा कामकाज देखती थी, जिसके 99% से अधिक शेयर्स ब्रिटेन स्थित BBC के पास था। BBC के भारतीय ब्यूरो में 200 कर्मचारी हैं, जो UK से बाहर उसका सबसे बड़ा ऑपरेशन है।

मई 1940 से ही BBC भारत में काम कर रहा है। BBC ने 2002 में गुजरात में हुए दंगों को लेकर प्रोपेगंडा डॉक्यूमेंट्री भी बनाई थी। रूपा झा ने कहा कि BBC भारत में अपनी उपस्थिति हटाना नहीं चाहता था और न कर्मचारियों को निकालना चाहता था, इसीलिए कानूनी सलाहों के आधार पर इस विकल्प का चयन किया गया। BBC के डिप्टी CEO जोनाथन मुनरो ने कहा कि नई कंपनी के गठन का वो स्वागत करते हैं, क्योंकि BBC ने हमेशा ऑडिएंस फर्स्ट की नीति के तहत काम किया है।

29 घंटे तक झेला टॉर्चर, फिर फंदे से झूल गया सिद्धार्थन: वायनाड में छात्र की मौत के मामले में CBI ने 20 पर दर्ज की FIR, वामपंथी गुंडे थे शामिल

केरल के वायनाड स्थित पुक्कोड़ यूनिवर्सिटी में पशु विज्ञान के छात्र जेएस सिद्धार्थन ने 18 फरवरी 2024 को फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। केरल पुलिस ने अपनी जाँच में पाया है कि सिद्धार्थन को करीब 29 घंटों तक टॉर्चर किया गया था। अब यह केस सीबीआई को सौंप दी गई है। केंद्रीय जाँच एजेंसी ने 5 अप्रैल 2024 को इस मामले में 20 लोगों पर एफआईआर दर्ज की है।

20 वर्षीय सिद्धार्थन के परिजनों ने वामपंथी छात्र संगठन SFI के सदस्यों पर टॉर्चर का आरोप लगाते हुए CBI जाँच की माँग की थी। आसिफ खान और मोहम्मद धनीस सहित कुल 20 पर FIR दर्ज की गई है। इन पर आत्महत्या के लिए मजबूर करने व रैंगिंग अधिनियम सहित अन्य धाराओं में कार्रवाई की गई है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी इस घटना का संज्ञान लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक CBI ने जिन आरोपितों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है, उसमें स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (SFI) के 4 नेता नामजद हैं। इसमें यूनियन अध्यक्ष अरुण के, इकाई सचिव अमल इहसन, सदस्य आसिफ खान और अभिषेक पाल शामिल हैं। अन्य नामजदों के नाम अखिल के, काशिनाथन आर एस, अरुण के, अजय जे, अल्तफ ए, मुहम्मद धनीश, श्रीहरि आरडी, अमीन अकबर अली, सऊद रिसाल ईके, आकाश आरडी, रेहान बिनॉय, डान्स दाई, नासिर वी, अभि वी, बिलगेट थानिक्कोडे और आदित्यन हैं।

FIR में बताया गया है कि 16 फरवरी 2024 को इन सभी आरोपितों ने सिद्धार्थन को सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक टॉर्चर किया था। प्रताड़ना का यह दौर अगले दिन 17 फरवरी को भी चला था। रैंगिंग के नाम पर सिद्धार्थन को बेरहमी से बेल्टों से पीटा गया था। लगातार 29 घंटे प्रताड़ित होने के बाद सिद्धार्थन को लगने लगा कि वह यूनिवर्सिटी में पढ़ाई जारी नहीं रख सकता है। इसी मानसिक तनाव के चलते उसने आत्महत्या कर ली। 18 फरवरी को सिद्धार्थन ने दोपहर 12:30 से 1:45 के बीच हॉस्टल के बाथरूम में फाँसी लगा ली थी।

CBI ने आरोपितों के खिलाफ IPC में आपराधिक साजिश रचने की धारा 120, आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा 306, चोट पहुँचाने की धारा 323, अवैध तौर पर बंधक बनाने की धारा 342, हमला करने की धारा 355 और धमकाने की धारा 506 के साथ केरल रैंगिंग निषेध अधिनियम की धारा 4/3 के तहत कार्रवाई की है। FIR के आधार पर मामले की जाँच शुरू कर दी गई है। अभी तक कुल 18 छात्रों को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर चुकी है।

सीबीआई को केस सौंपे जाने से पहले केरल पुलिस ने CRPC की धारा 174 के तहत यह मामला दर्ज किया था। यह धारा किसी की असामयिक मृत्यु पर लगाई जाती है। तब पुलिस ने यूनिवर्सिटी के ही एक अन्य छात्र कृष्णलाल के बयान को केस का आधार बनाया था। केरल पुलिस द्वारा यह केस वायनाड के विथिरी पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। तब जाँच अधिकारी सब इंस्पेक्टर प्रशोभ पीवी ने अपनी केस डायरी में यह लिखा था कि सिद्धार्थन को उसके सीनियर और सहपाठी छात्रों ने शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया था।

पुलिस ने सिद्धार्थन द्वारा आत्महत्या करने की वजह इसी प्रताड़ना को बताया था। जाँच अधिकारी ने अदालत में आरोपितों पर धाराएँ बढ़ाने के लिए अर्जी भी दी थी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी इस घटना का संज्ञान लिया है। आयोग की एक टीम 8 अप्रैल को वायनाड पहुँचने वाली है। यह टीम पीड़ित के परिजनों और पुलिस अधिकारियों से मिलेगी।

गौरतलब है कि टॉर्चर के दौरान सिद्धार्थन को खाना भी नहीं दिया गया था। उसे पहले सबके आगे सिर्फ अंडरवियर पहना कर पीटा गया और बाद एक सुनसान जगह पर बंद कर पिटाई की गई। बताया जा रहा है कि वैलेंटाइन डे पर एक लड़की के साथ डांस करने की वजह से वामपंथी छात्र सिद्धार्थन से नाराज थे। उन्होंने उससे इसके लिए माफी भी मँगवाई थी। उसे कॉलेज के 130 छात्रों के आगे प्रताड़ित किया गया था। घटना के बाद कॉलेज प्रशासन ने मामले को दबाने का प्रयास किया था। आंतरिक जाँच के लिए बनी कमेटी के आगे कई शिक्षकों ने भी मुँह खोलने से इनकार कर दिया था।

‘मुझे मारा, कार में घुसने की कोशिश की’: माँ काली की पूजा कर लौट रहीं BJP की महिला उम्मीदवार पर बंगाल में हमला, लॉकेट चटर्जी ने बताया- TMC नेता थे मौजूद

लॉकेट चटर्जी पश्चिम बंगाल की हुगली लोकसभा सीट से बीजेपी की प्रत्याशी हैं। 6 अप्रैल 2024 को उनकी कार पर ‘भीड़’ ने हमला कर दिया। चटर्जी बंसुरिया इलाके के एक मंदिर में काली पूजा पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर लौट रहीं थी।

लॉकेट चटर्जी के अनुसार हमलावर भीड़ कहाँ से आई थी यह न तो स्थानीय लोगों को पता है और न ही पुलिस को। उन्होंने घटना के दौरान मौके पर सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के नेताओं के मौजूद होने की बात कही है। साथ ही बताया है कि भीड़ में शामिल एक व्यक्ति ने दो बार उन्हें मारा और उनकी कार में घुसने की कोशिश की। भाजपा ने पुलिस पर चुप्पी साधने का आरोप लगाते हुए कहा है कि यह हमला वोटरों को डराने के लिए किया गया है।

न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में लॉकेट चटर्जी ने हमले के बारे में बताया है। हर दिन की तरह वे 6 अप्रैल की रात करीब 9:30 बजे चुनाव प्रचार खत्म कर आदिशक्ति गाँव के रास्ते बंसुरिया की तरफ जा रही थी। वहाँ कालीतला नाम के एक जगह से उन्हें काली पूजा का निमंत्रण मिला था। पूजा करने और लोगों से मिलकर जब वे निकलने लगी तो ‘भीड़’ ने उन्हें घेर लिया। लंबे-लंबे डंडे में काले झंडे लगाए लोग ‘गो बैक’ के नारे लगा रहे थे।

चटर्जी के अनुसार ‘भीड़’ ने चारों तरफ से उनकी कार को घेर लिया। जब उनके सुरक्षाकर्मी ‘भीड़’ को हटाने की कोशिश कर रहे थे और वे खुद इस घटना का वीडियो बना रहीं थी तो एक व्यक्ति ने 2 बार उन पर हमला किया। कथित तौर पर इस व्यक्ति ने चटर्जी के कार में घुसने की कोशिश की। लेकिन उनके ड्राइवर ने उसे धक्का देकर बाहर किया और गेट को लॉक कर दिया।

लॉकेट चटर्जी ने बताया है कि भीड़ हिंसा पर उतारू थी। उन्हें गंभीर रूप से घायल करना चाहती थी। उनकी सूचना पर जब पुलिस मौके पर आई तो वह ‘भीड़’ में शामिल लोगों की पहचान करने में विफल रही। आरोप है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस की नेत्री शिल्पी चटर्जी और इसी पार्टी का वार्ड पार्षद रंजीत इस ‘हिंसक भीड़’ के साथ खड़ा दिखा था। चुनाव आयोग से शिकायत करते हुए लॉकेट चटर्जी ने शिल्पी सहित अन्य आरोपितों को जेल भेजने की माँग की है।

इस हमले का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में नारेबाजी करती भीड़ को सुरक्षाकर्मियों से उलझते देखा जा सकता है। कुछ लोग कार का बोनट भी पीट रहे हैं। भाजपा नेत्री ने इस हमले के पीछे का मकसद वोटरों को डराने की साजिश बताया है। उन्होंने कहा है कि यह हमला उन्हें रोकने का प्रयास है जो सफल नहीं होगा। भाजपा का आरोप है कि ममता बनर्जी की पश्चिम बंगाल पुलिस इस मामले में चुप बैठी है।

अपनी दुकान में ‘हनुमान चालीसा’ सुनने पर हुई जिस मुकेश की पिटाई, अब उन पर सुलेमान की अम्मी ने कराई FIR: कहा- म्यूजिक बजा 3 हजार नमाजियों को किया तंग

17 मार्च 2024 को कर्नाटक के बेंगलुरु में मुकेश की उनके दुकान में घुसकर पिटाई की गई थी। कथित तौर पर ‘नमाज’ के समय वे अपनी दुकान में ‘हनुमान चालीसा’ सुन रहे थे। अब पीड़ित मुकेश के खिलाफ उनके साथ मारपीट करने के आरोपितों में से एक सुलेमान की अम्मी महजबीन ने FIR करवाई है। इसमें मुकेश पर तेज आवाज में म्यूजिक बजाकर नमाजियों को तंग करने और उसे समझाने की कोशिश करने पर सुलेमान सहित अन्य के खिलाफ मारपीट का आरोप लगाया गया है।

महजबीन की शिकायत पर कर्नाटक पुलिस ने पीड़ित मुकेश के खिलाफ 27 मार्च को केस दर्ज किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक महजबीन ने मुकेश के खिलाफ 18 मार्च को ही बेंगलुरु के हलासुरु गेट पुलिस स्टेशन में शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया था कि पास की मस्जिद में नमाज के दौरान मुकेश तेज आवाज में म्यूजिक बजा रहा था। जब सुलेमान ने अपने साथियों सहित इस संबंध में जाकर पूछताछ की तो मुकेश ने उन पर हमला कर दिया। इस शिकायत पर पुलिस ने एक गैर संज्ञेय रिपोर्ट दर्ज कर ली थी।

बाद में शिकायतकर्ता ने मुकेश पर कार्रवाई के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अदालत के निर्देश पर 27 मार्च को हलासुरु पुलिस थाने में मुकेश के खिलाफ FIR दर्ज की गई। महजबीन ने अपनी शिकायत में बताया है कि मुकेश के म्यूजिक बजाने से रमजान के दौरान मस्जिद में नमाज पढ़ रहे 3000 नमाजी परेशान हुए थे। उन्होंने मुकेश पर अपने बेटे को गंदी-गंदी गालियाँ देने और जान से मार डालने की धमकी का भी आरोप लगाया है। मुकेश पर FIR IPC की धारा 323 (चोट पहुँचाना), 504 (शांति भंग के इरादे से जान बूझकर विवाद करना) और 506 (धमकी देना) के तहत दर्ज की गई है।

पुलिस ने अभी तक मुकेश पर कोई कार्रवाई नहीं की है। उन्हें पूछताछ के लिए थाने भी नहीं बुलाया गया है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया है कि मुकेश की FIR में आरोपित सुलेमान, शाहनवाज़, रोहित, दानिश, तरूणा और अन्य लोग कुछ दिनों पहले ही जमानत पर छूट कर आए हैं। फिलहाल पुलिस महजबीन की शिकायत पर जाँच कर रही है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

क्या है हनुमान चालीसा बजाने पर पिटाई का मामला

17 मार्च 2024 बेंगलुरु के नगराथपेट इलाके में सिद्दन्ना लेआउट के पास अपनी मोबाइल शॉप में मुकेश भक्ति गाने सुन रहे थे। इसी दौरान सुलेमान अपने कुछ साथियों के साथ उनकी दुकान पर धमक गया। पहले धमकी दी फिर मारपीट की गई। इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था। घटना के विरोध में व्यापारियों ने एकजुटता दिखाते हुए प्रदर्शन किया था। इसके बाद पुलिस ने 6 आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। मुकेश ने आरोप लगाया था कि रमजान के महीने में उन्हें हिन्दू देवी-देवताओं के भजन बजाने से रोका गया था। हालाँकि पुलिस ने मामले में किसी साम्प्रदायिक एंगल से इनकार किया था।

CAA लेंगे वापस, अनुच्छेद 370 करेंगे बहाल, FDI पर कसेंगे लगाम: CPIM के घोषणा पत्र में देशविरोधी वादों की भरमार

देश की प्रमुख वामपंथी राजनीतिक पार्टियों में से एक भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है। इस घोषणा पत्र में सीएए को वापस लेने, आर्टिकल 270 को बहाल करने, प्राइवेट सेक्टर में भी आरक्षण देने और एफडीआई पर लगाम कसने की बात कही गई है। वामपंथी पार्टी सीपीआई-एम ने 4 अप्रैल 2024 को दिल्ली में अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी किया।

बता दें कि सीपीआई-एम के पास लोकसभा में सिर्फ 3 सीटें हैं, लेकिन उसने अपने 44 पन्ने के घोषणापत्र [पीडीएफ] में अपने नापाक एजेंडे को विस्तार से रखा है। सीपीआईएम ने मोदी सरकार द्वारा लागू की गई दूरदर्शी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को रद्द करने की कसम खाई है। इसने पार्टी के सत्ता में आने पर निजी क्षेत्र में शिक्षा और रोजगार में जाति-आधारित आरक्षण शुरू करने का भी आश्वासन दिया है। सीपीआई-एम के घोषणा पत्र में देशविरोधी बातों की भरमार हैं, जिनके बारे में विस्तार से बताया जा रहा है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने उन कानूनों को रद्द करने का वादा किया है, जो ऐतिहासिक रूप से आतंकवादियों और अपराधियों के खिलाफ इस्तेमाल किए गए हैं। इसमें गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) को निरस्त करना शामिल है। इतना ही नहीं, सीपीआईएम ने भ्रष्टाचार विरोधी कानून, धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) को बदलने और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी केंद्रीय एजेंसियों से उनकी शक्तियाँ छीनने का वादा किया है।

इसके अलावा इसने अपने समर्थकों को नागरिकता संशोधन अधिनियम को खत्म करने का आश्वासन दिया है, जो एक मानवीय कानून है जिसका उद्देश्य अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के सताए हुए धार्मिक अल्पसंख्यकों की नागरिकता को तेजी से ट्रैक करना है जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में अवैध रूप से रह रहे हैं। इतना ही नहीं, पार्टी ने मौत की सजा के प्रावधान को पूरी तरह से हटाने का भी वादा किया है, जो मौजूदा समय में 2012 के कुख्यात निर्भया मामले जैसे दुर्लभतम मामलों में ही दिया जाता है।

भारत देश को अलग-थलग करने की खतरनाक योजना

यह सुनिश्चित करने के लिए कि भारत विदेशी निवेशकों को प्रोत्साहित न करे, सीपीआईएम ने अपने घोषणापत्र में घोषणा की है कि वह वित्त, रक्षा, उच्च शिक्षा और मीडिया जैसे विभिन्न क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रवाह पर लगाम लगाएगा। (घोषणापत्र में पेज नंबर- 17, 21, 36 और 42)

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने भी QUAD (चतुर्भुज सुरक्षा संवाद), भारत-अमेरिका रक्षा फ्रेमवर्क समझौते और I2U2 समूह जैसे गठबंधनों से बाहर निकलकर देश को विश्व स्तर पर अलग-थलग करने का इरादा जताया है। बता दें, QUAD संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत के बीच एक गठबंधन है, I2U2 समूह में भारत, इज़राइल, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और अमेरिका शामिल हैं। अपने घोषणापत्र के 25वें पृष्ठ पर, सीपीआईएम ने कहा कि वह भारत से परमाणु हथियारों को खत्म कर देगी और इस तरह देश को पाकिस्तान जैसे दुष्ट और शत्रु देशों के हमलों के प्रति संवेदनशील बना देगी।

सामाजिक एवं आर्थिक अराजकता की स्थिति पैदा करना

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने भी अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए के विवादास्पद संवैधानिक प्रावधानों को बहाल करके केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में अशांति वापस लाने का आश्वासन दिया है, जिन्हें अगस्त 2019 में मोदी सरकार ने रद्द कर दिया था। इसने स्कूली पाठ्यपुस्तकों और उच्च कक्षाओं के पाठ्यक्रम को ‘सांप्रदायिक पूर्वाग्रह और पूर्वाग्रह’ से मुक्त करने का भी वादा किया है, जिसका अनिवार्य रूप से मतलब है कि किताबों को मार्क्सवादी विचारधारा वाले बच्चों का ब्रेनवॉश करने के लिए फिर से डिजाइन किया जाएगा। (घोषणापत्र का पृष्ठ 15)।

सीपीआईएम ने यह भी घोषणा की है कि वह सजा, फंसाने और जबरन धर्मांतरण के बढ़ते खतरे का मुकाबला करने के लिए कई राज्यों द्वारा बनाए गए धर्मांतरण विरोधी कानूनों को रद्द कर देगी। ऐसे कानून के अभाव में अपराधियों का हौसला वैसे ही बढ़ जाएगा, जैसा कि धर्मांतरण विरोधी कानून बनने से पहले था। अपने घोषणापत्र के पेज नंबर- 27 पर पार्टी ने घोषणा की कि वह ‘नई पेंशन योजना’ को समाप्त कर देगी और इससे देश की अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ेगा। यही नहीं, सीपीआई-एम ने स्थिति को और खतरनाक बनाने के लिए ‘संकटग्रस्त किसानों’ के संस्थागत ऋण और निजी ऋण दोनों को माफ करने का वादा किया है।

विदेश नीति

सीपीआईएम ने घोषणापत्र के पेज 24 पर विदेश नीति के सेक्शन में चीन के साथ सर्वांगीण संबंधों को बढ़ावा देने की बात कही है। इसमें कहा गया है कि पार्टी “चीन के साथ सीमा विवाद को बातचीत से सुलझाने और सर्वांगीण संबंधों को बढ़ावा देने” के पक्ष में है। जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, पार्टी ने इज़राइल के साथ सभी सुरक्षा और सैन्य संबंधों को खत्म करने का वादा किया है, और इज़राइल के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की मांँग की है। वह 1967 से पहले की सीमाओं वाला एक फ़िलिस्तीन राज्य बनाना चाहता है और पूर्वी येरुशलम को राजधानी बनाना चाहता है। जबकि सीपीआई (एम) चीन के साथ संबंधों को बढ़ावा देना चाहती है, वह अमेरिका के साथ सभी रणनीतिक गठबंधनों से हटना चाहती है।

निष्कर्ष: सीपीआई-एम ने मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम 2019 (चुनावी घोषणा पत्र का पेज नंबर-27) को रद्द करने की घोषणा की है, जिसमें यातायात नियमों के उल्लंघन के लिए भारी जुर्माना लगाया गया है।

सीपीआईएम ने सरकार द्वारा वित्त पोषित पीएमजेएवाई/आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना को वापस लेने का भी आश्वासन दिया है, जिसने गरीब लोगों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में काफी सुधार किया है। (पेज नंबर-37)

पार्टी ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (2023) को इस बहाने से खत्म करने का वादा किया है कि यह ‘डिजिटल अधिनायकवाद’ को प्रोत्साहित करता है।(घोषणापत्र पेज नंबर-41)

साफ है कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की नज़र भारत को पूर्ण आर्थिक और सामाजिक अराजकता की स्थिति में धकेलने की तरफ है, जो उसके घोषणा पत्र से भी साफ जाहिर हो रहा है।

ये लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें