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‘मुझे मारा, कार में घुसने की कोशिश की’: माँ काली की पूजा कर लौट रहीं BJP की महिला उम्मीदवार पर बंगाल में हमला, लॉकेट चटर्जी ने बताया- TMC नेता थे मौजूद

लॉकेट चटर्जी पश्चिम बंगाल की हुगली लोकसभा सीट से बीजेपी की प्रत्याशी हैं। 6 अप्रैल 2024 को उनकी कार पर ‘भीड़’ ने हमला कर दिया। चटर्जी बंसुरिया इलाके के एक मंदिर में काली पूजा पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर लौट रहीं थी।

लॉकेट चटर्जी के अनुसार हमलावर भीड़ कहाँ से आई थी यह न तो स्थानीय लोगों को पता है और न ही पुलिस को। उन्होंने घटना के दौरान मौके पर सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के नेताओं के मौजूद होने की बात कही है। साथ ही बताया है कि भीड़ में शामिल एक व्यक्ति ने दो बार उन्हें मारा और उनकी कार में घुसने की कोशिश की। भाजपा ने पुलिस पर चुप्पी साधने का आरोप लगाते हुए कहा है कि यह हमला वोटरों को डराने के लिए किया गया है।

न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में लॉकेट चटर्जी ने हमले के बारे में बताया है। हर दिन की तरह वे 6 अप्रैल की रात करीब 9:30 बजे चुनाव प्रचार खत्म कर आदिशक्ति गाँव के रास्ते बंसुरिया की तरफ जा रही थी। वहाँ कालीतला नाम के एक जगह से उन्हें काली पूजा का निमंत्रण मिला था। पूजा करने और लोगों से मिलकर जब वे निकलने लगी तो ‘भीड़’ ने उन्हें घेर लिया। लंबे-लंबे डंडे में काले झंडे लगाए लोग ‘गो बैक’ के नारे लगा रहे थे।

चटर्जी के अनुसार ‘भीड़’ ने चारों तरफ से उनकी कार को घेर लिया। जब उनके सुरक्षाकर्मी ‘भीड़’ को हटाने की कोशिश कर रहे थे और वे खुद इस घटना का वीडियो बना रहीं थी तो एक व्यक्ति ने 2 बार उन पर हमला किया। कथित तौर पर इस व्यक्ति ने चटर्जी के कार में घुसने की कोशिश की। लेकिन उनके ड्राइवर ने उसे धक्का देकर बाहर किया और गेट को लॉक कर दिया।

लॉकेट चटर्जी ने बताया है कि भीड़ हिंसा पर उतारू थी। उन्हें गंभीर रूप से घायल करना चाहती थी। उनकी सूचना पर जब पुलिस मौके पर आई तो वह ‘भीड़’ में शामिल लोगों की पहचान करने में विफल रही। आरोप है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस की नेत्री शिल्पी चटर्जी और इसी पार्टी का वार्ड पार्षद रंजीत इस ‘हिंसक भीड़’ के साथ खड़ा दिखा था। चुनाव आयोग से शिकायत करते हुए लॉकेट चटर्जी ने शिल्पी सहित अन्य आरोपितों को जेल भेजने की माँग की है।

इस हमले का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में नारेबाजी करती भीड़ को सुरक्षाकर्मियों से उलझते देखा जा सकता है। कुछ लोग कार का बोनट भी पीट रहे हैं। भाजपा नेत्री ने इस हमले के पीछे का मकसद वोटरों को डराने की साजिश बताया है। उन्होंने कहा है कि यह हमला उन्हें रोकने का प्रयास है जो सफल नहीं होगा। भाजपा का आरोप है कि ममता बनर्जी की पश्चिम बंगाल पुलिस इस मामले में चुप बैठी है।

अपनी दुकान में ‘हनुमान चालीसा’ सुनने पर हुई जिस मुकेश की पिटाई, अब उन पर सुलेमान की अम्मी ने कराई FIR: कहा- म्यूजिक बजा 3 हजार नमाजियों को किया तंग

17 मार्च 2024 को कर्नाटक के बेंगलुरु में मुकेश की उनके दुकान में घुसकर पिटाई की गई थी। कथित तौर पर ‘नमाज’ के समय वे अपनी दुकान में ‘हनुमान चालीसा’ सुन रहे थे। अब पीड़ित मुकेश के खिलाफ उनके साथ मारपीट करने के आरोपितों में से एक सुलेमान की अम्मी महजबीन ने FIR करवाई है। इसमें मुकेश पर तेज आवाज में म्यूजिक बजाकर नमाजियों को तंग करने और उसे समझाने की कोशिश करने पर सुलेमान सहित अन्य के खिलाफ मारपीट का आरोप लगाया गया है।

महजबीन की शिकायत पर कर्नाटक पुलिस ने पीड़ित मुकेश के खिलाफ 27 मार्च को केस दर्ज किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक महजबीन ने मुकेश के खिलाफ 18 मार्च को ही बेंगलुरु के हलासुरु गेट पुलिस स्टेशन में शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया था कि पास की मस्जिद में नमाज के दौरान मुकेश तेज आवाज में म्यूजिक बजा रहा था। जब सुलेमान ने अपने साथियों सहित इस संबंध में जाकर पूछताछ की तो मुकेश ने उन पर हमला कर दिया। इस शिकायत पर पुलिस ने एक गैर संज्ञेय रिपोर्ट दर्ज कर ली थी।

बाद में शिकायतकर्ता ने मुकेश पर कार्रवाई के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अदालत के निर्देश पर 27 मार्च को हलासुरु पुलिस थाने में मुकेश के खिलाफ FIR दर्ज की गई। महजबीन ने अपनी शिकायत में बताया है कि मुकेश के म्यूजिक बजाने से रमजान के दौरान मस्जिद में नमाज पढ़ रहे 3000 नमाजी परेशान हुए थे। उन्होंने मुकेश पर अपने बेटे को गंदी-गंदी गालियाँ देने और जान से मार डालने की धमकी का भी आरोप लगाया है। मुकेश पर FIR IPC की धारा 323 (चोट पहुँचाना), 504 (शांति भंग के इरादे से जान बूझकर विवाद करना) और 506 (धमकी देना) के तहत दर्ज की गई है।

पुलिस ने अभी तक मुकेश पर कोई कार्रवाई नहीं की है। उन्हें पूछताछ के लिए थाने भी नहीं बुलाया गया है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया है कि मुकेश की FIR में आरोपित सुलेमान, शाहनवाज़, रोहित, दानिश, तरूणा और अन्य लोग कुछ दिनों पहले ही जमानत पर छूट कर आए हैं। फिलहाल पुलिस महजबीन की शिकायत पर जाँच कर रही है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

क्या है हनुमान चालीसा बजाने पर पिटाई का मामला

17 मार्च 2024 बेंगलुरु के नगराथपेट इलाके में सिद्दन्ना लेआउट के पास अपनी मोबाइल शॉप में मुकेश भक्ति गाने सुन रहे थे। इसी दौरान सुलेमान अपने कुछ साथियों के साथ उनकी दुकान पर धमक गया। पहले धमकी दी फिर मारपीट की गई। इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था। घटना के विरोध में व्यापारियों ने एकजुटता दिखाते हुए प्रदर्शन किया था। इसके बाद पुलिस ने 6 आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। मुकेश ने आरोप लगाया था कि रमजान के महीने में उन्हें हिन्दू देवी-देवताओं के भजन बजाने से रोका गया था। हालाँकि पुलिस ने मामले में किसी साम्प्रदायिक एंगल से इनकार किया था।

CAA लेंगे वापस, अनुच्छेद 370 करेंगे बहाल, FDI पर कसेंगे लगाम: CPIM के घोषणा पत्र में देशविरोधी वादों की भरमार

देश की प्रमुख वामपंथी राजनीतिक पार्टियों में से एक भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है। इस घोषणा पत्र में सीएए को वापस लेने, आर्टिकल 270 को बहाल करने, प्राइवेट सेक्टर में भी आरक्षण देने और एफडीआई पर लगाम कसने की बात कही गई है। वामपंथी पार्टी सीपीआई-एम ने 4 अप्रैल 2024 को दिल्ली में अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी किया।

बता दें कि सीपीआई-एम के पास लोकसभा में सिर्फ 3 सीटें हैं, लेकिन उसने अपने 44 पन्ने के घोषणापत्र [पीडीएफ] में अपने नापाक एजेंडे को विस्तार से रखा है। सीपीआईएम ने मोदी सरकार द्वारा लागू की गई दूरदर्शी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को रद्द करने की कसम खाई है। इसने पार्टी के सत्ता में आने पर निजी क्षेत्र में शिक्षा और रोजगार में जाति-आधारित आरक्षण शुरू करने का भी आश्वासन दिया है। सीपीआई-एम के घोषणा पत्र में देशविरोधी बातों की भरमार हैं, जिनके बारे में विस्तार से बताया जा रहा है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने उन कानूनों को रद्द करने का वादा किया है, जो ऐतिहासिक रूप से आतंकवादियों और अपराधियों के खिलाफ इस्तेमाल किए गए हैं। इसमें गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) को निरस्त करना शामिल है। इतना ही नहीं, सीपीआईएम ने भ्रष्टाचार विरोधी कानून, धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) को बदलने और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी केंद्रीय एजेंसियों से उनकी शक्तियाँ छीनने का वादा किया है।

इसके अलावा इसने अपने समर्थकों को नागरिकता संशोधन अधिनियम को खत्म करने का आश्वासन दिया है, जो एक मानवीय कानून है जिसका उद्देश्य अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के सताए हुए धार्मिक अल्पसंख्यकों की नागरिकता को तेजी से ट्रैक करना है जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में अवैध रूप से रह रहे हैं। इतना ही नहीं, पार्टी ने मौत की सजा के प्रावधान को पूरी तरह से हटाने का भी वादा किया है, जो मौजूदा समय में 2012 के कुख्यात निर्भया मामले जैसे दुर्लभतम मामलों में ही दिया जाता है।

भारत देश को अलग-थलग करने की खतरनाक योजना

यह सुनिश्चित करने के लिए कि भारत विदेशी निवेशकों को प्रोत्साहित न करे, सीपीआईएम ने अपने घोषणापत्र में घोषणा की है कि वह वित्त, रक्षा, उच्च शिक्षा और मीडिया जैसे विभिन्न क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रवाह पर लगाम लगाएगा। (घोषणापत्र में पेज नंबर- 17, 21, 36 और 42)

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने भी QUAD (चतुर्भुज सुरक्षा संवाद), भारत-अमेरिका रक्षा फ्रेमवर्क समझौते और I2U2 समूह जैसे गठबंधनों से बाहर निकलकर देश को विश्व स्तर पर अलग-थलग करने का इरादा जताया है। बता दें, QUAD संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत के बीच एक गठबंधन है, I2U2 समूह में भारत, इज़राइल, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और अमेरिका शामिल हैं। अपने घोषणापत्र के 25वें पृष्ठ पर, सीपीआईएम ने कहा कि वह भारत से परमाणु हथियारों को खत्म कर देगी और इस तरह देश को पाकिस्तान जैसे दुष्ट और शत्रु देशों के हमलों के प्रति संवेदनशील बना देगी।

सामाजिक एवं आर्थिक अराजकता की स्थिति पैदा करना

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने भी अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए के विवादास्पद संवैधानिक प्रावधानों को बहाल करके केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में अशांति वापस लाने का आश्वासन दिया है, जिन्हें अगस्त 2019 में मोदी सरकार ने रद्द कर दिया था। इसने स्कूली पाठ्यपुस्तकों और उच्च कक्षाओं के पाठ्यक्रम को ‘सांप्रदायिक पूर्वाग्रह और पूर्वाग्रह’ से मुक्त करने का भी वादा किया है, जिसका अनिवार्य रूप से मतलब है कि किताबों को मार्क्सवादी विचारधारा वाले बच्चों का ब्रेनवॉश करने के लिए फिर से डिजाइन किया जाएगा। (घोषणापत्र का पृष्ठ 15)।

सीपीआईएम ने यह भी घोषणा की है कि वह सजा, फंसाने और जबरन धर्मांतरण के बढ़ते खतरे का मुकाबला करने के लिए कई राज्यों द्वारा बनाए गए धर्मांतरण विरोधी कानूनों को रद्द कर देगी। ऐसे कानून के अभाव में अपराधियों का हौसला वैसे ही बढ़ जाएगा, जैसा कि धर्मांतरण विरोधी कानून बनने से पहले था। अपने घोषणापत्र के पेज नंबर- 27 पर पार्टी ने घोषणा की कि वह ‘नई पेंशन योजना’ को समाप्त कर देगी और इससे देश की अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ेगा। यही नहीं, सीपीआई-एम ने स्थिति को और खतरनाक बनाने के लिए ‘संकटग्रस्त किसानों’ के संस्थागत ऋण और निजी ऋण दोनों को माफ करने का वादा किया है।

विदेश नीति

सीपीआईएम ने घोषणापत्र के पेज 24 पर विदेश नीति के सेक्शन में चीन के साथ सर्वांगीण संबंधों को बढ़ावा देने की बात कही है। इसमें कहा गया है कि पार्टी “चीन के साथ सीमा विवाद को बातचीत से सुलझाने और सर्वांगीण संबंधों को बढ़ावा देने” के पक्ष में है। जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, पार्टी ने इज़राइल के साथ सभी सुरक्षा और सैन्य संबंधों को खत्म करने का वादा किया है, और इज़राइल के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की मांँग की है। वह 1967 से पहले की सीमाओं वाला एक फ़िलिस्तीन राज्य बनाना चाहता है और पूर्वी येरुशलम को राजधानी बनाना चाहता है। जबकि सीपीआई (एम) चीन के साथ संबंधों को बढ़ावा देना चाहती है, वह अमेरिका के साथ सभी रणनीतिक गठबंधनों से हटना चाहती है।

निष्कर्ष: सीपीआई-एम ने मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम 2019 (चुनावी घोषणा पत्र का पेज नंबर-27) को रद्द करने की घोषणा की है, जिसमें यातायात नियमों के उल्लंघन के लिए भारी जुर्माना लगाया गया है।

सीपीआईएम ने सरकार द्वारा वित्त पोषित पीएमजेएवाई/आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना को वापस लेने का भी आश्वासन दिया है, जिसने गरीब लोगों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में काफी सुधार किया है। (पेज नंबर-37)

पार्टी ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (2023) को इस बहाने से खत्म करने का वादा किया है कि यह ‘डिजिटल अधिनायकवाद’ को प्रोत्साहित करता है।(घोषणापत्र पेज नंबर-41)

साफ है कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की नज़र भारत को पूर्ण आर्थिक और सामाजिक अराजकता की स्थिति में धकेलने की तरफ है, जो उसके घोषणा पत्र से भी साफ जाहिर हो रहा है।

ये लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

केरल में अरुणाचल के श्रमिक की मॉब लिचिंग: महिला सहकर्मी से मिलने पर लोगों ने खंभे से बाँधकर पीटा, लहूलुहान हालत में छोड़ा; मौत के बाद 10 अरेस्ट

केरल के मुवत्तुपुझा में मॉब लिंचिंग की एक घटना में दस लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अरुणाचल प्रदेश के रहने वाले 24 वर्षीय प्रवासी श्रमिक अशोक दास गुरुवार (4 अप्रैल 2024) को अपनी एक महिला सहकर्मी से मिलने जा रहे थे। इसी दौरान भीड़ ने कथित तौर पर उन्हें रोका और एक खंभे से बाँधकर बुरी तरह पीटा। इस घटना में शुक्रवार (5 अप्रैल) को अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

दरअसल, अशोक दास नौकरी की तलाश में नॉर्थ ईस्ट के राज्य अरुणाचल प्रदेश से केरल आए थे। वे मुवत्तुपुझा के वलाकम में किराए के मकान में रह रहे थे। अशोक एक रेस्टोरेंट में रसोइये के रूप में काम कर रहे थे। इसी इलाके में उनकी एक महिला परिचित रहती थी। वे घटना वाले दिन उससे मिलने के लिए गए थे।

FIR के अनुसार, स्थानीय लोगों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया। भीड़ उनसे सवाल-जवाब करने लगी। जब उन्होंने गुस्साई भीड़ से बचने के लिए भागने की कोशिश की तो भीड़ ने उन्हें दौड़ाकर पकड़ लिया और रोड के किनारे एक लैंप पोस्ट से बाँध दिया और बर्बर तरीक से पीटा और लहूलुहान हालत में सड़क पर छोड़कर चले गए।

इस पिटाई से उनकी छाती और सिर में गहरी चोटें आईं। अशोक को गंभीर हालत में नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालाँकि, उनकी हालत की गंभीरता को देखते हुए उन्हें कोलेनचेरी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रेफर कर दिया गया। यहाँ पर उनका इलाज चल रहा था, लेकिन चोटों के कारण 5 अप्रैल को उनकी मौत हो गई।

इस घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज करके लोगों की पहचान शुरू कर दी। प्रारंभ में एक लोक सेवक के आदेश का पालन करने में विफलता के लिए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 174 के तहत मामला दर्ज किया गया था। हालाँकि, प्रारंभिक जाँच के बाद आरोप में आईपीसी की धारा 302 को भी शामिल कर दिया गया है, जो हत्या से संबंधित है।

केरल पुलिस ने इस मामले में 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। बाकियों की तलाश की जा रही है। पुलिस का कहना कि वह उन परिस्थितियों का पता लगाने की कोशिश कर रही है, जिनके कारण यह हमला हुआ। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जिस महिला से अशोक दास मिलने के लिए गए थे, उसने उनके कोई खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं कराई है।

बता दें कि पिछले साल मई में बिहार के एक श्रमिक की भी केरल के मलप्पुरम जिले में चोरी के आरोप में भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। मृतक की पहचान राजेश माँझी के रूप में हुई थी। भीड़ ने चोरी के शक में उसे पकड़ा और फिर बाँधकर पिटाई की थी। पुलिस को इस मामले में 9 लोगों को हिरासत में लिया गया।

CAA वापस लेने की ‘गारंटी’ तक नहीं दी, ये RSS की पिछलग्गू पार्टी: केरल के वामपंथी मुख्यमंत्री विजयन ने कॉन्ग्रेस पर बोला हमला

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने लोकसभा चुनाव 2024 में अपने सबसे बड़े सहयोगी कॉन्ग्रेस को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। पिनराई विजयन ने कॉन्ग्रेस को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का पिछलग्गू बताते हुए कॉन्ग्रेस की गारंटियों पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने अपने घोषणापत्र में ‘सीएए को वापस लेने’ की बात ही नहीं कही है, जो संघ की विचारधारा को ही आगे बढ़ा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार (6 अप्रैल 2024) को केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इंडी गठबंधन की अपनी ही सहयोगी पार्टी कॉन्ग्रेस को निशाने पर लेते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस हिंदुत्व की राजनीति से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने में विफल रही। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर संघ परिवार जैसा रुख अपनाने का भी आरोप लगाया।

केरल के अलप्पुझा में लोगों को संबोधित करते हुए पिनराई विजयन ने कहा , “सीपीआई (एम) ने घोषणापत्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि वो सीएए कानून को रद्द करेगी, लेकिन कॉन्ग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में इस मुद्दे पर एकदम चुप्पी साध रखी है। बता दें कि सीपीआई (एम) ने अपने घोषणापत्र में गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम और धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) समेत कई “कठोर” कानूनों की आलोचना की है और सत्ता में आने पर उन्हें खत्म करने का वादा किया है।

नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के मुखर विरोधी विजयन ने पहले ही घोषणा कर रखी है कि केरल में वो इस कानून को लागू नहीं होने देंगे। इस बात को याद दिलाते हुए विजयन ने कहा, “कई घटनाओं के बावजूद कॉन्ग्रेस इस कानून पर खुलकर कुछ भी नहीं बोलती है। उसका यह रुख नागरिकता संशोधन कानून पर कॉन्ग्रेस पार्टी के रवैये पर सवाल उठाता है। कॉन्ग्रेस का रुख हमेशा संघ परिवार के साथ जुड़ा रहा है।”

पी विजयन ने कहा, “पिछले पाँच साल के अनुभव से लोग समझ गए हैं कि कॉन्ग्रेस पार्टी को वोट देने का कोई मतलब नहीं है। वामपंथी दल देश में खतरनाक नीतियाँ लागू करने वाली भाजपा को उखाड़ फेंकने के लिए लोगों से वोट माँग रहे हैं। हम चंद वोटों के लिए अपनी राजनीति नहीं बदलते।” विजयन ने टिप्पणी की कि आगामी चुनाव राष्ट्र की दिशा तय करेंगे, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कॉन्ग्रेस को वोट देना व्यर्थ होगा।

भारतीय जनता पार्टी के बारे में उन्होंने कहा, “हम यह चुनाव भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए लड़ रहे हैं और इसीलिए हम राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा विरोधी मोर्चे में सक्रिय रूप से शामिल हुए हैं। हम एक बात स्पष्ट करना चाहेंगे। केरल में भाजपा को न केवल सभी 20 सीटों पर हार का सामना करना पड़ेगा, बल्कि वे इस बार किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में दूसरा स्थान हासिल करने में भी असफल रहेंगी।। बता दें कि केरल में 20 लोकसभा सीटें हैं और यहाँ आम चुनाव के दूसरे चरण के दौरान 26 अप्रैल को मतदान होना है। वोटों की गिनती 4 जून को होनी है।

कॉन्ग्रेस के एक दिन बाद सीपीआईएम ने जारी किया अपना घोषणापत्र

गौरतलब है कि गुरुवार (4 अप्रैल 2024) को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए अपना घोषणापत्र जारी किया था। सीपीआई-एम के पास लोकसभा में सिर्फ 3 सीटें हैं। उसने अपने 44 पन्ने के घोषणापत्र [पीडीएफ] में अपने नापाक एजेंडे को विस्तार से रखा है। सीपीआईएम ने  मोदी सरकार द्वारा लागू की गई दूरदर्शी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को रद्द करने की कसम खाई है। इसने पार्टी के सत्ता में आने पर निजी क्षेत्र में शिक्षा और रोजगार में जाति-आधारित आरक्षण शुरू करने का भी आश्वासन दिया है।

नमाज पढ़ने जा रहे अमरोहा से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी दानिश अली को मुस्लिमों की भीड़ ने घेरा, कार में तोड़फोड़ की कोशिश की: माँगा 5 साल के कामों का हिसाब

उत्तर प्रदेश के अमरोहा में शुक्रवार (5 अप्रैल 2024) को कॉन्ग्रेस के मुस्लिम सांसद उम्मीदवार दानिश अली के विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए। दानिश अली जब शाम को नमाज पढ़ने के लिए जा रहे थे, तब मुस्लिमों की भीड़ ने उनके काफिले को घेर लिया और उनकी कार में तोड़फोड़ करने का प्रयास किया। इस दौरान भीड़ ने दानिश अली के खिलाफ नारे लगाए और जमकर हंगामा किया।

दरअसल, दानिश अली पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से सांसद थे, लेकिन हाल ही में उन्हें उत्तर प्रदेश की अमरोहा लोकसभा सीट से कॉन्ग्रेस पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए टिकट दिया है। कॉन्ग्रेस का टिकट मिलने पर स्थानीय मुस्लिम भड़क उठे और उनके खिलाफ जमकर हंगामा किया। आरोप है कि जा रहा है कि प्रदर्शन करने वाले समाजवादी पार्टी से जुड़े थे।

दानिश अली अपने समर्थकों के साथ शुक्रवार को अमरोहा के जामा मस्जिद का दौरा किया। इसके बाद उन्होंने स्थानीय लोगों से वोट माँगने के लिए नौगाँव सादात में प्रचार अभियान भी चलाया। नौगाँव सादात के नई बस्ती में स्थित जामा मस्जिद में नमाज के लिए जाने के दौरान उनकी कार को स्थानीय मुस्लिमों की एक बड़ी भीड़ ने घेर लिया।

भीड़ में खुद को घिरा हुआ पाकर दानिश अली कार में बैठे रहे। हंगामे के बीच एक युवक ने कार के बोनट पर चढ़ने का प्रयास किया। गुस्साई भीड़ ने दानिश अली से पिछले पाँच वर्षों में उनके प्रदर्शन खासकर नौगाँव सादात में उनके द्वारा किए गए कामों लेकर जवाब माँगा। हालाँकि, इस दौरान कई लोगों को गुस्साई भीड़ को शांत करने की कोशिश करते भी देखा गया।

नौगाँव सादात विधानसभा सीट से विधायक समरपाल सिंह के बेटे प्रतीक ने नाराज लोगों को समझाने की पूरी कोशिश की। इकट्ठी भीड़ के तितर-बितर होने के बाद ही दानिश अली की कार आगे बढ़ पाई। भीड़ में मौजूद लोगों ने पूरी घटना को अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया। बाद में शाम को सांसद की कार के घेराव वाले दो वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गए।

बता दें कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने अमरोहा लोकसभा क्षेत्र से दानिश अली को अपना उम्मीदवार बनाया है। इससे पहले दानिश अली ने साल 2019 के लोकसभा चुनावों में बसपा के टिकट पर जीत हासिल की थी। हालाँकि, पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में उन्हें बसपा से निलंबित कर दिया था।

लिव-इन रिलेशनशिप में रही महिला भी भरण-पोषण की हकदार: MP हाई कोर्ट ने कहा- शारीरिक संबंध बनाए गए इसलिए देना होगा गुजारा भत्ता

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में महिलाओं के अधिकारों को मान्यता देते हुए बड़ा फैसला दिया है, जिसमें मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा कि एक पुरुष के साथ काफी समय तक रहने वाली महिला अलग होने पर भरण-पोषण की हकदार है, भले ही वे कानूनी रूप से विवाहित न हों।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक याचिकाकर्ता के मामले की सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया, जिसने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसके साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रही महिला को 1,500 रुपये का मासिक भत्ता देने का आदेश दिया था।

हाई कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि अगर कपल के बीद “सहवास का सबूत” है, तो मेंटिनेंस से इनकार नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के निष्कर्ष को माना, जिसमें बताया गया कि पुरुष और महिला पति और पत्नी के रूप में रह रहे थे। यही नहीं, कोर्ट ने अपने फैसले में ये भी कहा कि रिश्ते के दौरान जन्मे बच्चे ने महिला के भरण-पोषण के अधिकार को मजबूत किया है।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्णय भारत में लिव-इन रिलेशनशिप के मामले में कानूनी वैधता पर रोशनी डालता है। इस साल उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कानून लाया गया है, जिसमें लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वालों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया।

बता दें कि शादी का झूठा वादा करने और रेप के एक मामले में फरवरी 2024 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि लिव-इन रिलेशनशिप में ब्रेकअप के बाद महिलाओं के लिए अकेले रहना मुश्किल होता है।

जस्टिस सिद्धार्थ की बेंच ने कहा था, “लिव-इन रिलेशनशिप टूटने के बाद एक महिला के लिए अकेले रहना मुश्किल होता है। बड़े पैमाने पर भारतीय समाज ऐसे रिश्तों को स्वीकार्य नहीं मानता है। इसलिए महिला के पास वर्तमान मामले की तरह अपने लिव-इन पार्टनर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।”

इस मामले में महिला ने आईपीसी की धारा 376 और 406 के तहत मामला दर्ज कराया था। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपी उसके साथ डेढ़ साल तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहा, इस दौरान वह गर्भवती हो गई। हालाँकि बाद में उसने उससे शादी करने से इनकार कर दिया।

‘मौलाना तौकीर को विदेश से हो रही फंडिंग, ED करे जाँच’: मुस्लिम महिला बोली- जीते हैं ऐश की जिंदगी, हिंदू और मुस्लिम के बीच फैलाते हैं नफरत

अपने विवादित बयानों के लिए कुख्यात बरेली के मौलाना तौकीर रजा के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जाँच की माँग उठी है। यह माँग आला हजरत खानदान की बहू और आला हजरत हेल्पिंग समिति चलाने वाली निदा खान द्वारा उठाई गई है। निदा ने मौलाना तौकीर के खिलाफ ED की जाँच की माँग करते हुए कहा कि उन्हें बाहर से फंडिंग हो रही है और हिन्दुओं और मुस्लिमों में दरार डालते रहते हैं।

निदा खान ने तमाम केस होने के बावजूद अब तक मौलाना तौकीर की गिरफ्तारी न होने पर हैरानी जताई है। शनिवार (6 मार्च 2024) को एक वीडियो जारी करते हुए निदा खान ने कहा कि उन्हें धमकी मिल रही। बुर्का पहन कर बनाए गए इस वीडियो की शुरुआत निदा ने अपना परिचय आला हजरत खानदान की बहू के रूप में दिया है। उनके इस बयान को वीडियो में 3:07 मिनट पर सुना जा सकता है।

निदा खान ने वीडियो में कहा है कि वो मौलाना तौकीर के बारे में ये पढ़ती और सुनती आई हैं कि उन्होंने बहुत सारे धरने-प्रदर्शन किए हैं। उदहारण के तौर पर निदा ने CAA और NRC का नाम लिया। मौलाना तौकीर पर हिन्दू और मुस्लिमों को आपस में लड़ाने का आरोप लगाते हुए निदा ने उनके अंतिम धरने में साम्प्रदायिक तनाव फैलने की बात कही है।

वीडियो में आगे कहा गया है कि अभी उत्तर प्रदेश में लॉ एन्ड आर्डर बेहद सख्त है, जिसकी वजह से मौलाना तौकीर रजा दंगा फैलाने में नाकाम हैं। साल 2010 में हुए बरेली दंगों की याद दिलाते हुए निदा ने उसके आरोपित के तौर पर मौलाना तौकीर का नाम लिया है। निदा ने हैरानी जताते हुए कहा है कि 3 गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद मौलाना तौकीर रजा खुलेआम घूम रहे हैं।

तौकीर की कथित बीमारी पर भी निदा ने सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि तौकीर रजा की मेडिकल रिपोर्ट कभी बाहर नहीं आती है। इस बार भी मेडिकल रिपोर्ट गायब बताई गई है। निदा ने आगे बताया है कि मौलाना तौकीर रज़ा और उनका बेटा दोनों ही ऐश-ओ-आराम की जिंदगी जीते हैं। तौकीर का बेटा ऑस्ट्रेलिया में रहता है। उन्होंने मौलाना तौकीर को मिलने वाले पैसों के स्रोत पर सवाल उठाया है।

निदा ने पूछा कि तौकीर के पास न तो कोई व्यापर है और न ही कोई फैक्ट्री, फिर से वे भारत में और उनका बेटा ऑस्ट्रेलिया में मजे की जिंदगी कैसे बीता रहा है। उन्होंने सरकार से पैसों की जाँच ED से कराने की माँग की। तौकीर को मिल रहे पैसों को निदा ने ‘नफरत फैलाने वाली फंडिंग’ बताया है। उन्होंने तौकीर को विक्टिम कार्ड खेलने में माहिर और लोगों को अपनी बातों से ब्रेनवॉश करने वाला बताया।

निदा खान का यह भी दावा है कि मौलाना तौकीर रजा के खिलाफ आवाज उठाने के बाद उनको लगातार धमकियाँ मिल रही हैं। इनमें निदा के कत्ल की भी धमकी शामिल है। निदा ने मौलाना तौकीर रजा के समर्थकों को भी आड़े हाथों लिया और अंत में कहा कि मौलाना तौकीर के पास कोई फंडिंग तो है। इस फंडिंग उन्होंने देश के लिए हानिकारक बताई है।

‘जय श्री राम’ नारा, RLD भी साथ, महिलाओं में उत्साह… गाजियाबाद में PM मोदी का भव्य रोडशो: रैपिड मेट्रो से लेकर एक्सप्रेसवे तक मिला, दुरुस्त कानून-व्यवस्था से व्यापारी खुश

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भव्य रोडशो किया, जिसमें हजारों कार्यकर्ताओं का हुजूम उम्दा। उनके साथ-साथ यूपी के CM योगी आदित्यनाथ भी थे। गाजियाबाद से भाजपा ने इस बार जनरल (रिटायर्ड) VK सिंह की जगह अतुल गर्ग को टिकट दिया है। वहीं कॉन्ग्रेस ने I.N.D.I. गठबंधन की तरफ से डॉली शर्मा को उतारा है। 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा यहाँ 5 लाख से भी अधिक वोटों से विजयी रही थी। वहीं 2014 के चुनाव में जीत का आँकड़ा 5.67 लाख से भी अधिक रहा।

अतुल गर्ग गाजियाबाद शहर विधानसभा क्षेत्र के विधायक हैं, रोडशो जहाँ किया गया वो इलाका भी इसी क्षेत्र में पड़ता है। अतुल गर्ग के पिता दिनेश चंद्र गाजियाबाद के मेयर रहे हैं। ऐसे में पीएम मोदी ने रोडशो के जरिए सन्देश दिया है कि VIP सीटों पर भी सामान्य कार्यकर्ताओं को मौक़ा दिया जा सकता है। 2009 में गाजियाबाद से भाजपा के राजनाथ सिंह ने जीत दर्ज की थी। 2022 के विधानसभा चुनावों में इस लोकसभा क्षेत्र के पाँचों विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस रोडशो में जयंत चौधरी के राष्ट्रीय लोकदल (RLD) ने भी भागीदारी की। RLD के बैनरों के साथ बड़ी संख्या में कार्यकर्ता इस रोडशो का हिस्सा बने। RLD कुछ हफ़्तों पहले ही I.N.D.I. गठबंधन छोड़ कर NDA का हिस्सा बनी है। दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किए जाने के बाद मेरठ में इस पर केंद्रित एक रैली भी हुई। गाजियाबाद में एक्सप्रेसवे से लेकर रैपिड मेट्रो तक की सुविधा मोदी-योगी सरकार ने विकसित की है।

गाजियाबाद में व्यापारी वर्ग का बड़ा प्रभाव है, ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राज में कानून-व्यवस्था के दुरुस्त होने का फायदा उन्हें भी मिला है। गाजियाबाद की मेयर सुनीता दयाल भी भाजपा की ही हैं। महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। अतुल गर्ग और सुनीता दयाल वैश्य समाज से आते हैं। ऐसे में इस रोडशो के जरिए सबको साधा जा रहा है। गाजियाबाद स्थित साहिबाबाद से जीतने वाले सुनील शर्मा पूरे यूपी में सबसे अधिक मामले से जीत दर्ज करने वाले नेता रहे।

रोडशो में लोगों ने ‘जय श्री राम’ का नारा भी लगाया। रोडशो के दौरान पीएम मोदी और सीएम योगी लगातार लोगों को कमल का निशान दिखाते रहे। गाजियाबाद भाजपा के लिए सुरक्षित सीट है, फिर भी पीएम मोदी द्वारा यहाँ मेहनत करना ये संदेश भी देता है कि भाजपा नेताओं/कार्यकर्ताओं को कहीं कोई कमी नहीं छोड़नी है। बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी इस रोडशो में भागीदारी की। बता दें कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर की महिला के नाम पर ही आवास आवंटित होता है, लखपति दीदी योजना के तहत महिलाओं को स्वरोजगार के लिए मदद दी जा रही है और प्रोत्साहित किया जा रहा है, ‘नारी वंदन अधिनियम’ के जरिए लोकसभा चुनाव में उन्हें 33% आरक्षण मिला।

जिस सज्जाद की कई बार की मदद, उसी ने बनाया बंधक: बेटे को जान से मारने की धमकी देकर 5 दिनों तक दलित महिला से रेप, UP पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में एक दलित महिला से रेप का मामला सामने आया है। यहाँ जान-पहचान के ऑटो चालक सज्जाद ने पीड़िता को चाय में नशा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया है। पीड़िता को आरोपित द्वारा 5 दिनों तक बंधक भी बनाकर रखा गया। घटना 19 मार्च 2024 की है। पुलिस ने सज्जाद के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके उसे 3 अप्रैल 2024 को गिरफ्तार कर लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना जौनपुर के थाना क्षेत्र रामपुर की है। यहाँ की एक महिला ने पुलिस में शिकायत दी है। महिला का पति महाराष्ट्र के मुंबई में रहता है, जबकि देवर और देवरानी पुणे शहर में रहते हैं। पीड़िता के देवर-देवरानी कुछ दिनों के लिए गाँव आए थे। उन्हें 19 मार्च को वापस पुणे जाना था। ट्रेन पकड़ने के लिए इन दोनों को वाराणसी जंक्शन पहुँचना था।

लगभग 60 किलोमीटर दूर स्टेशन तक जाने के लिए पीड़िता ने गाँव के ही रहने वाले साबिर उर्फ़ सज्जाद को सम्पर्क किया। सज्जाद का निजी ऑटो है। दोनों परिवारों में पहले से जान-पहचान थी। पीड़िता के परिजनों ने पूर्व में कई बार सज्जाद की मदद भी की थी। सज्जाद पीड़िता के देवर-देवरानी को वाराणसी तक छोड़ने के लिए राजी हो गया। पीड़िता भी उसी ऑटो में बैठकर उन्हें छोड़ने वाराणसी गई।

बताया जा रहा है कि वापसी में जब महिला अकेली रह गई थी, तब सज्जाद ने बावतपुर क्षेत्र में चाय पीने के बहाने ऑटो रोक लिया। यहाँ उसने पीड़िता को भी चाय पिलाई। महिला का कहना है कि चाय पीने के बाद उसको चक्कर आने लगा और थोड़ी ही देर में वह बेहोश हो गई। होश आने पर पीड़िता ने खुद को एक कमरे में पाया और सामने सज्जाद मौजूद था।

सज्जाद को देखकर पीड़िता जोर-जोर से चिल्लाने लगी। इस पर आरोपित ने पीड़िता के बच्चे की हत्या की धमकी देकर चुप करवाया और उसका रेप किया। महिला का आरोप है कि सज्जाद ने उसे 5 दिनों तक बंधक बनाकर रखा और इस दौरान आरोपित ने उससे कई बार बलात्कार किया। इधर घर न पहुँचने पर महिला के बेटे ने अपने मुंबई में काम कर रहे पिता को इसकी जानकारी दी।

महिला के पति ने पुणे में रहने वाले अपने भाई को भी इसकी जानकारी दी। आखिरकार पूरा परिवार 23 मार्च को वापस गाँव पहुँच गया। किसी अनहोनी की आशंका के चलते पीड़िता के घर वालों ने जौनपुर के थाना सुरेरी में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवाई। बताया जा रहा है कि मामला पुलिस तक पहुँचने की भनक सज्जाद को भी लग गई। उसने डरकर महिला को 24 मार्च को छोड़ दिया।

पीड़ित महिला आरोपित सज्जाद की कैद से छूटकर सीधे अपने घर पहुँची और परिजनों को पूरे मामले की जानकारी दी। पीड़िता के घर वालों ने आरोपित सज्जाद पर कड़ी कार्रवाई की माँग उठाना शुरू कर किया। कुछ समय तक पुलिस भी अपराध और थाना क्षेत्र के चलते ऊहापोह की स्थिति में बनी रही।

आखिरकार सुरेरी थाना पुलिस ने घटना के लगभग 15 दिनों बाद FIR दर्ज करके सज्जाद को गिरफ्तार कर लिया। साबिर पर IPC की धारा 376, 323, 328, 343 और 506 के तहत कार्रवाई की गई है। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करवाकर पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।