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संगीनों का साया, फौज के जवान, पहाड़ की चढ़ाई… पाकिस्तानी क्रिकेटरों की कुछ ऐसे हो रही ‘ट्रेनिंग’, लोगों ने पूछा – खेलने जा रहे या आतंकी हमला करने?

पाकिस्तान क्रिकेट टीम इन दिनों अलग ही वजह से चर्चा में है। पाकिस्तानी क्रिकेट टीम को खेल के मैदान से बाहर एक ऐसा अभ्यास कर रही है, जिसको लेकर क्रिकेट प्रेमी सवाल उठा रहे हैं। इस बात का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें पाकिस्तानी क्रिकेटर आर्मी के जवानों के साथ ट्रेनिंग करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

सोश मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर सेना के सदस्य हाथों में बंदूक लेकर नजर रख रहे हैं। आमतौर पर बल्लेबाजी, गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण से जुड़े क्रिकेटरों को सैनिक की तरह ट्रेनिंग लेने पर लोगों ने इस पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि इस तरह की ट्रेनिंग से क्रिकेट के मैदान पर तो फायदा मिलना नहीं है, ऊपर से खिलाड़ियों के चोटिल होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

इफ्तिखार अहमद ने शेयर किया वीडियो

इफ्तिखार अहमद ने वीडियो शेयर करते हुए उसके कैप्शन में लिखा भी कि ये तरीका है एक चैंपियन टीम बनाने का? अब चैंपियन टीम पाकिस्तान बन पाता है या नहीं ये तो क्रिकेट के मैदान पर आने वाला वक्त तय कर देगा।

आजम खान का चढ़ाई पूरी करना रहा खास मोमेंट

इस वीडियो में आप देख सकते हैं कैसे पाकिस्तानी खिलाड़ी हाथों में चट्टान के टुकड़े लिए पहाड़ की चढ़ाई कर रहे हैं। खिलाड़ी आगे-आगे और हथियारों से लैस पाकिस्तानी आर्मी के जवान उनके पीछे-पीछे। एक बार जब खिलाड़ी ऊपर चढ़ जाते हैं तो पहले बैठकर सुस्ताते हैं। कुछ ही देर में भारी-भरकम शरीर वाले आजम खान भी अपनी चढ़ाई पूरी करते दिखते हैं। ये देख साथी खिलाड़ी तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनकी हौसलाआफजाई करते हैं।

आजम खान को मिला ये प्रोत्साहन इस वजह से था क्योंकि ये टीम बॉन्डिंग का सेशन था। ऐसे में एक भी खिलाड़ी अगर इसे नहीं पूरा करता तो ये सेशन अधूरा माना जा सकता था। लेकिन, आजम खान ने इसे पूरा कर अपने साथी खिलाड़ियों के भरोसे को जीतने का काम किया।

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के ट्रेनिंग पर सोशल मीडिया पर लोग काफी कमेंट भी कर रहे हैं। एक पाकिस्तानी यूजर ने कहा कि हमारे क्रिकेटरों का ऐसा अपमान क्यों। क्या इससे उनके कौशल में सुधार होगा? मुझे उनके लिए खेद है। एक दूसरे यूजर ने कहा कि इस शिविर का उद्देश्य क्या था? क्या सेना को लगा कि उनमें अनुशासन की कमी है?” हालाँकि, ये पहली बार नहीं है, जब क्रिकेट टीम ने सैन्य अभ्यास में भाग लिया हो। इससे पहले पाक क्रिकेटरों ने रस्सियों पर चढ़ने और ऊँची दीवारों से कूदने जैसी अभ्यासों में भाग लिया था।

सपा MLA इरफान सोलंकी जेल भिजवाने वाली महिला की नातिन लापता, भाई के साथ गई थी स्कूल: रेलवे स्टेशन के पास मिली लावारिस साइकिल

कानपुर से समाजवादी पार्टी के विधायक हाजी इरफ़ान सोलंकी को जेल भिजवाने वाली महिला की नातिन लापता हो गई है। गुरुवार (4 अप्रैल 2024) को महिला की 14 वर्षीया नातिन अपने भाई के साथ स्कूल गई थी, लेकिन लौटकर घर नहीं आई। गुमशुदा की साइकिल रेलवे स्टेशन के पास लावारिस हालत में बरामद हुई है। पुलिस ने शुक्रवार (5 अप्रैल 2024) को केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

घटना गाजीपुर जिले के कोतवाली नगर थाना क्षेत्र की है। लापता नाबालिग के अब्बा असलम ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया है कि गुरुवार (4 अप्रैल) को कक्षा 9 में पढ़ने वाली उनकी 14 वर्षीया बेटी साइकिल से अपने भाई के साथ स्कूल गई थी। दोपहर 1 बजे जब स्कूल की छुट्टी हुई तो लड़की के भाई ने अपनी बहन को खोजना शुरू किया, लेकिन वह नहीं मिली।

आखिरकार भाई घर आ गया और अपने परिजनों को इसकी जानकारी दी। नाबालिग लड़की के परिजनों ने अपने परिचितों और रिश्तेदारों के घर जाकर उसकी खोजबीन शुरू की। हालाँकि, तमाम कोशिशों के बावजूद लड़की का कुछ भी अता-पता नहीं चल पाया। गुमशुदा के पास एक मोबाइल फोन होना भी बताया गया है। पुलिस ने यह केस IPC की धारा 363 के तहत दर्ज कर लिया।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जाँच शुरू की। उसके बाद देर रात गाजीपुर रेलवे स्टेशन के पास लड़की की साइकिल लावारिस हालात में मिली। अब पुलिस CCTV फुटेज, मोबाइल कॉल डिटेल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स साक्ष्यों के आधार पर लड़की की तलाश में जुटी है। इस संबंध में नाबालिग के अब्बा द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में गुमशुदा लड़की की नानी नजीर फातिमा का बयान भी सामने आया है। नजीर ने बताया कि उन्होंने सपा विधायक हाजी इरफ़ान सोलंकी पर अपने घर में आगजनी की FIR दर्ज करवा रखी है। इस मामले में इरफ़ान सोलंकी देवरिया जेल में बंद हैं। बकौल फातिमा, विधायक इरफ़ान के ऊपर केस दर्ज करवाने के अलावा उनकी किसी से कोई रंजिश नहीं है।

बताते चलें कि हाजी इरफ़ान सोलंकी पर लगे आगजनी के आरोपों में अदालत कुछ ही दिनों में अपना फैसला सुना सकती है। गुमशुदा लड़की मंगलवार (2 अप्रैल 2024) को ही अपनी नानी के घर कानपुर से गाजीपुर अपने अब्बू के साथ गई थी। बताते चलें कि अभी हाल ही में सपा विधायक इरफ़ान सोलंकी ने अपने इनकाउंटर की आशंका जताते हुए खुद को UP पुलिस के साथ असुरक्षित बताया है।

‘कॉन्ग्रेस के घोषणा-पत्र पर मुस्लिम लीग की छाप, बचे-खुचे पर वामपंथी हावी’: अजमेर में गरजे PM मोदी, सहारनपुर में बोले – पुराणों में लिखा है माँ शक्ति से लड़ने वालों का क्या हुआ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए धुआँधार प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। इसी क्रम में वो शनिवार (6 अप्रैल, 2024) को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और राजस्थान के अजमेर में पहुँचे। यूपी-राजस्थान में 105 सीटें हैं, जो भाजपा के ‘400 पार’ वाले नारे के लिए खासी महत्वपूर्ण हैं। राजस्थान में हाल ही में भाजपा की सरकार भी बनी है, यूपी में 2017 से ही पार्टी सत्ता में है। ऐसे में संगठन में जोश फूँकने के लिए पीएम मोदी लगातार दौरा कर रहे हैं।

राजस्थान के अजमेर में क्या बोले PM मोदी

6 अप्रैल, यानी भाजपा के स्थापना दिवस का जिक्र करते हुए राजस्थान के अजमेर में पीएम मोदी ने इसे एक संयोग बताया कि इसी दिन उन्हें पुष्कर क्षेत्र में आने का मौका मिला। ब्रह्माजी को निर्माता बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भाजपा भी नए भारत के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में कभी-कभी ऐसे मौके आते हैं, जब देश के नागरिकों का एक फैसला अगले सैकड़ों वर्षों का भविष्य तय करता है और 2024 का ये चुनाव ऐसा ही एक अवसर है।

पीएम मोदी ने कहा कि आज याद ​कीजिए, कितने दशकों तक हमारे देश में जोड़-तोड़ वाली सरकारें चलीं। उन्होंने बताया कि कैसे गठबंधन की मजबूरियाँ और हर किसी के अपने स्वार्थ – इन सब में देश का हित पीछे छूट गया था। पीएम मोदी ने याद दिलाया कि कैसे कॉन्ग्रेस के समय में गाँव, गरीब, किसान, मजदूर, युवा, महिला – इन सभी का जीना मुश्किल हो गया था। उन्होंने याद किया कि कैसे हर दिन अखबारों में या तो घोटालों की खबरें छपती थीं या आतंकी हमलों की खबरें आती थीं, लेकिन 2014 से देश में एक बड़े बदलाव की शुरुआत हुई।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस जहाँ रहती है, वहाँ विकास नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने ना कभी गरीब की परवाह की और ना ही कभी वंचितों-शोषितों-युवाओं के बारे में सोचा। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के लिए यही कहा जा सकता है – एक तो करेला, दूसरा नीम चढ़ा। बकौल पीएम मोदी, कॉन्ग्रेस एक तो परिवारवादी पार्टी है और दूसरा उतनी ही भ्रष्टाचारी पार्टी। कॉन्ग्रेस के घोषणा-पत्र को झूठ का पुलिंदा बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हर पन्ने पर भारत के टुकड़े करने की बू आ रही है। उन्होंने कहा कि के घोषणा पत्र में वही सोच झलकती है, जो सोच आज़ादी के समय मुस्लिम लीग में थी।

पीएम मोदी ने कहा, “मुस्लिम लीग के उस समय के विचारों को कॉन्ग्रेस आज भारत पर आज थोपना चाहती है। मुस्लिम लीग की छाप वाले इस घोषणा पत्र में जो बचा-खुचा हिस्सा था, उस पर वामपंथी हावी हो गए हैंं। आज कॉन्ग्रेस के पास न सिद्धांत बचे हैं और न ही नीतियाँ बची हैं। ऐसा लग रहा है, कॉन्ग्रेस सब कुछ ठेके पर दे चुकी है, पूरी कॉन्ग्रेस पार्टी को आउट सोर्स कर चुकी है। हमने संसद में तीन दशक से लटका हुआ ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से हमारी माताओं-बहनों के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में 33% आरक्षण पक्का कर दिया है।”

राजस्थान के अजमेर में पीएम मोदी ने कहा कि जनता के पैसों को लूटना ये लोग अपना खानदानी हक समझते थे। उन्होंने कहा कि मोदी ने बीते 10 वर्षों में लूट की बीमारी का परमानेंट इलाज कर दिया है, मोदी ने इनकी लूट की दुकान का शटर गिरा दिया है। बकौल प्रधानमंत्री, इसीलिए ये बौखलाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी, चुनाव जीतने के लिए रैली नहीं कर रही है, भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए रैली कर रही है। साथ ही ऐलान किया कि ये कितना भी बोलते रहे, भ्रष्टाचार के खिलाफ मोदी की लड़ाई जारी रहेगी।

UP के सहारनपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पीएम मोदी ने कहा कि 2024 का चुनाव सिर्फ सरकार बनाने का चुनाव नहीं है, बल्कि ये चुनाव विकसित भारत बनाने के लिए है। सहारनपुर को माँ शक्ति का स्थान बताते हुए उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान के हर कोने में शक्ति की उपासना हमारी स्वाभाविक, आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि हम वो देश हैं जो कभी भी शक्ति उपासना को नकारते नहीं हैं, लेकिन ये देश का दुर्भाग्य है कि I.N.D.I. अलायंस के लोग चुनौती दे रहे हैं कि उनकी लड़ाई शक्ति के खिलाफ है।

पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि जिन-जिन लोगों ने शक्ति को नष्ट करने का प्रयास किया है, उन सबका क्या हाल हुआ है, ये इतिहास और पुराणों में अंकित है। उन्होंने कहा कि 10 वर्ष पहले जब वो सहारनपुर आए थे तब देश घोर निराशा, घोर संकट के दौर से गुजर रहा था, और उन्होंने ‘देश झुकने नहीं दूँगा, देश रुकने नहीं दूँगा’ की गारंटी दी थी। पीएम मोदी ने कहा कि आज हिंदुस्तान के हर कोने से एक ही आवाज आ रही है, महिलाएँ भी बोल रही हैं, बुजुर्ग भी बोल रहे हैं, गाँव भी बोल रहा है, शहर भी बोल रहे हैं – फिर एक बार मोदी सरकार।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस की सरकारें जो कई दशकों में नहीं कर पाई, वो भाजपा ने 10 साल में करके दिखाया है और इसलिए ही पूरा देश कह रहा है – 4 जून, 400 पार! उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस जितने साल सत्ता में रही, उसने कमीशन खाने को प्राथमिकता दी। बकल पीएम मोदी, I.N.D.I. अलायंस कमीशन के लिए है, जबकि NDA, मोदी सरकार मिशन के लिए है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में रामलला का भव्य मंदिर, चुनावी घोषणा नहीं, बल्कि हमारा मिशन रहा है, इस वर्ष रामनवमी में हमारे प्रभु राम टेंट में नहीं, बल्कि भव्य मंदिर में दर्शन देंगे।

पीएम मोदी सहारनपुर में बोले, “भारत को एक मजबूत देश बनाना भाजपा की प्रतिबद्धता है। यानी जैसी भाजपा की नीयत है, जैसी निष्ठा है, नीतियां भी वैसी ही बनती हैं। इसीलिए आज हर हिंदुस्तानी अनुभव से कह रहा है – नीयत सही, तो नतीजे सही। भाजपा देश के हर नागरिक की परेशानी कम कर रही है। हर किसी के लिए नए अवसर बना रही है। सहारनपुर की लकड़ी की नक्काशी और यहाँ के लोगों के कौशल की ख्याति तो दूर-दूर तक है। इसलिए योगी जी हों या मोदी, हमें आपका ध्यान है। इसलिए हम दोनों एक बात बार-बार बोलते हैं – Vocal for Local.”

पीएम मोदी ने कहा कि ये क्षेत्र अपनी कृषि उत्पादकों के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने बताया कि पिछले 10 साल से उनकी सरकार लगातार अपने किसान भाइयों के लिए काम कर रही है, किसान की छोटी-छोटी जरूरत को लेकर सरकार संवेदनशील है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि कैसे आज देश में छोटे किसानों की पीएम किसान निधि के जरिए मदद की जा रही है, अकेले सहारनपुर में ही 3 लाख से ज्यादा किसानों के खाते में 860 करोड़ रुपए सीधे भेजे जा चुके हैं।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि सपा की स्थिति तो ये है कि यहाँ उन्हें हर घन्टे अपने उम्मीदवार बदलने पड़ रहे हैं। वहीं कॉन्ग्रेस की स्थिति को और भी विचित्र बताते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी को तो उम्मीदवार ही नहीं मिल रहे। बकौल पीएम मोदी, कॉन्ग्रेस जिन सीटों को अपना गढ़ मानती थी, वहाँ भी उसे उम्मीदवार उतारने की हिम्मत ही नहीं हो रही है। उनका इशारा रायबरेली-अमेठी की तरफ था। प्रधानमंत्री ने कहा कि त्तर प्रदेश में 2 लड़कों की जो फिल्म पिछली बार फ्लॉप हो चुकी है, उन 2 लड़कों की फिल्म को इन लोगों ने फिर से रिलीज किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “मुझे समझ नहीं आता कि काठ की इस हांडी को ये I.N.D.I. गठबंधन वाले कितनी बार चढ़ाएँगे। कॉन्ग्रेस के घोषणा पत्र में पूरी तरह मुस्लिम लीग की छाप है और इसका जो कुछ हिस्सा बचा रह गया, उसमें वामपंथी पूरी तरह हावी हो चुके हैं। अब हम भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के मिशन में जुटे हैं। वहीं दूसरी तरफ हमारे विरोधी सत्ता पाने के लिए तड़प रहे हैं। मैं देश का पहला ऐसा चुनाव देख रहा हूँ, जहाँ विपक्ष जीत का दावा नहीं कर रहा है, बल्कि विपक्ष केवल इसीलिए चुनाव लड़ रहा है, ताकि भाजपा की सीटें 370 से कम की जा सकें और NDA की सीटें 400 से कम की जा सकें।”

‘दूसरे देशों की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में दखल देना हमारी नीति नहीं’: कनाडा के आरोपों पर भारत ने दी कड़ी प्रतिक्रिया, चुनावों में हस्तक्षेप का लगाया था आरोप

कनाडा ने उसके चुनावों में हस्तक्षेप करने का आरोप भारत पर लगाया है। इसको लेकर भारत भड़क गया है। भारत ने कहा कि कनाडा द्वारा लगाए गए बेबुनियाद हैं। भारत के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार (5 अप्रैल 2024) को कहा, “दूसरे देशों की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में दखल देना भारत सरकार की नीति नहीं है। यह कनाडा ही है, जो हमारे आंतरिक मामलों में दखल दे रहा है।”

दरअसल, कनाडा की मीडिया में वहाँ की खुफिया एजेंसी कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (CSIS) के हवाले से रिपोर्ट आई कि भारत और पाकिस्तान ने कनाडा में साल 2019 और 2021 में हुए संघीय चुनावों में हस्तक्षेप करने का प्रयास किया। कनाडा का यह आरोप यह पिछले साल खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच चल रहे राजनयिक विवाद के बीच भी आया है।

वहाँ की मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि विदेशी हस्तक्षेप की जाँच कनाडा का संघीय आयोग कर रहा है। इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमने कनाडाई आयोग की जाँच के बारे में मीडिया रिपोर्टें देखी है। हम कनाडाई चुनावों में भारतीय हस्तक्षेप के ऐसे सभी आधारहीन आरोपों को दृढ़ता से खारिज करते हैं।”

जायसवाल ने कहा, उन्होंने कहा, “दूसरे देशों की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप करना भारत सरकार की नीति नहीं है। इसके विपरीत कनाडा ही है, जो हमारे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है।” बता दें कि खालिस्तानी आतंकी निज्जर की पिछले साल हत्या कनाडा के सरे शहर में कर दी गई थी। इसका आरोप भी कनाडा ने भारत पर ही लगाया था। इसके बाद दोनों देशों को रिश्ते बिगड़ गए थे।

कैनेडियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (सीबीसी) ने बताया कि साल 2019 और 2021 के चुनावों में भारत, चीन, रूस और अन्य देशों ने हस्तक्षेप किया था। इसकी जाँच कर रहे संघीय जाँच आयोग के हिस्से के रूप में CSIS द्वारा चुनावी हस्तक्षेप का आरोप इन देशों पर लगाने वाले अवर्गीकृत दस्तावेज़ पेश किए गए थे।

CSIS ने अपने दस्तावेज़ों में आरोप लगाया कि साल 2021 में भारत सरकार ने हस्तक्षेप करने का इरादा किया था और संभवतः गुप्त गतिविधियाँ संचालित की थीं। इन गतिविधियों में कनाडा में एक भारतीय सरकारी प्रॉक्सी एजेंट का उपयोग करना भी शामिल था। CSIS ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान सरकार ने अपने हितों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से यहाँ की राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश की।

खुफिया एजेंसी ने आरोप लगाया कि साल 2021 में भारत सरकार की विदेशी हस्तक्षेप गतिविधियाँ छोटी संख्या में चुनावी जिलों तक केंद्रित थीं। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि भारत सरकार ने इस धारणा के कारण उन चुनावी जिलों को निशाना बनाया कि भारतीय-कनाडाई मतदाताओं का एक हिस्सा खालिस्तानी आंदोलन या पाकिस्तान समर्थक राजनीतिक रुख के प्रति सहानुभूति रखता है।

दस्तावेज़ में आगे कहा गया है कि सीएसआईएस ने ख़ुफ़िया जानकारी जुटाई, जो इशारा करता है कि भारत सरकार के प्रॉक्सी एजेंट ने भारतीय समर्थक उम्मीदवारों को अवैध वित्तीय सहायता प्रदान करके लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप करने का प्रयास किया। यह वित्तीय योगदान उम्मीदवार के लिए अज्ञात रहा हो सकता है।

हालाँकि, सीएसआईएस के निदेशक डेविड विग्नॉल्ट ने सार्वजनिक जाँच में कहा कि इंटेल दस्तावेज़ आवश्यक रूप से तथ्यात्मक नहीं हो सकते हैं। उन्होंने कहा आगे की जाँच की आवश्यकता है, क्योंकि ये दस्तावेज़ संभवतः अपुष्ट, एकल-स्रोत या अपूर्ण हो सकते हैं।

हिंदू विवाह में कन्यादान एक अनिवार्य रस्म नहीं, सात फेरे ही शादी के लिए काफी: इलाहाबाद हाई कोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि कन्यादान हिंदू विवाह के लिए एक अनिवार्य रस्म नहीं है। कोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 में केवल सात फेरे को हिंदू विवाह के लिए अनिवार्य रस्म माना गया है। कन्यादान का उल्लेख अधिनियम में नहीं है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने 22 मार्च 2024 को ये फैसला सुनाया, उन्होंने कहा कि कन्यादान हिंदू विवाह की अनिवार्य शर्त नहीं है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के अनुसार, ‘सात फेरे’ को विवाह की एकमात्र अनिवार्य रस्म माना गया है। ‘कन्यादान’ एक सांस्कृतिक रस्म है जिसमें पिता अपनी बेटी को दूल्हे को सौंपता है। यह रस्म पितृत्व से स्त्रीत्व की यात्रा का प्रतीक है। हाई कोर्ट ने कहा कि ‘कन्यादान’ एक महत्वपूर्ण रस्म हो सकती है, लेकिन यह विवाह की वैधता के लिए आवश्यक नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि यह रस्म महिलाओं के खिलाफ भेदभाव का कारण बन सकती है।

हाई कोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह की धारा 7 कहती है कि हिंदू विवाह विवाह के किसी भी पक्ष के पारंपरिक संस्कारों और समारोहों के अनुसार संपन्न किया जा सकता है। प्रावधान में कहा गया है कि जहाँ ऐसे संस्कारों और समारोहों में सप्तपदी (दूल्हा और दुल्हन द्वारा पवित्र अग्नि के सामने संयुक्त रूप से सात कदम उठाना) शामिल है, सातवाँ कदम उठाने पर विवाह पूर्ण और बाध्यकारी हो जाता है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट का ध्यान इस ओर तब गया, जब कोर्ट ने देखा कि लखनऊ की एक सत्र अदालत में कुछ गवाहों को बुलाने के लिए समन जारी किया गया था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि 2015 में विवाह के संचालन का समर्थन करने के लिए प्रस्तुत किए गए विवाह प्रमाण पत्र के संबंध में गवाहों के पहले के बयानों में कुछ अंतर थे। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि विवाह के दौरान कन्यादान किया गया था या नहीं, यह जाँचने के लिए दो गवाहों (एक महिला और उसके पिता) की दोबारा जाँच की जानी थी, क्योंकि कन्यादान हिंदू विवाह का एक अनिवार्य हिस्सा है।

हालाँकि 6 मार्च को ट्रायल कोर्ट ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 311 के तहत गवाहों को वापस बुलाने की याचिकाकर्ता की याचिका को खारिज कर दिया था , जो अदालत को किसी मामले में उचित निर्णय की आवश्यकता के अनुसार किसी भी गवाह को बुलाने का अधिकार देता है। ट्रायल कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में अपील की थी।

हालाँकि, हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की अपील को खारिज कर दिया और कहा कि हिंदू विवाह की वैधता को कन्यादान हुआ है या नहीं, इस बात से नहीं जाँचा जा सकता। कोर्ट ने कहा, “कन्यादान की रस्म निभाई गई या नहीं, यह मामले के उचित निर्णय के लिए आवश्यक नहीं होगा और इसलिए, इस तथ्य को साबित करने के लिए सीआरपीसी की धारा 311 के तहत गवाहों को नहीं बुलाया जा सकता है।” कोर्ट ने कहा कि धारा 311 के तहत जरूरी गवाहों को बुलाया जा सकता है, लेकिन कन्यादान की बात को साबित करने की जरूरत नहीं है।

‘मेरी बेटी का मानसिक उत्पीड़न कर रहा AMU का डीन जफ़र नोमानी’: छात्रा की प्रोफेसर माँ ने कुलपति से की शिकायत, आरोपित ने कहा – आहत हूँ, उसकी मदद करता था

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में पढ़ने वाली एक छात्रा की माँ ने अपनी बेटी के मानसिक उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करवाई है। कुलपति को भेजी गई शिकायत में उन्होंने लॉ डिपार्टमेंट के डीन डॉ जफर एम नोमानी और उसके ऑफिस के कुछ अन्य स्टाफ को आरोपित किया है। शिकायत करने वाली अभिभावक खुद एक प्रोफेसर हैं जो इस समय अरब की एक यूनिवर्सिटी में पढ़ाती हैं। ऑपइंडिया से बात करते हुए आरोपित डीन ने खुद को बेकसूर बताते हुए सफाई के तौर पर इस घटना में बिना कारण अपना नाम घसीटे जाने की बात कही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला AMU के विधि संकाय (लॉ फैकेल्टी) का है। सऊदी अरब के एक विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर तैनात एक महिला ने कुलपति को शिकायत भेजी है। अपनी शिकायत में महिला प्रोफेसर ने बताया है कि उनकी बेटी AMU में BALLB की 8वें सेमेस्टर की छात्रा है। आरोप है कि 5वें सेमेस्टर के बाद से ही उनकी बेटी अंकों की दिक्कत झेलती आ रही है। बताया गया है कि डीन ने जफर नोमानी ने पीड़िता छात्रा द्वारा 28 जनवरी 2023 को दी गई परीक्षा के नंबर पुरस्कार सूची में दर्ज नहीं किए।

शिकायत में आगे यह बताया गया है कि पीड़िता को कभी टीचर मोहिब अनवर तो कभी मोहम्मद यासीन के पास दौड़ाया गया। यह दौड़-धूप न सिर्फ लॉ फैकेल्टी के ऑफिस बल्कि आरोपित टीचरों के घर तक होना बताया गया है। छात्रा ने परेशान हो कर अपनी माँ को सारी बात बताई। अरब में कार्यरत छात्रा की माँ ने भी AMU के लॉ फैकेल्टी से जुड़े स्टाफ और डीन से अपने बेटी की दिक्क्तों के समाधान की अपील की। हालाँकि, शिकायतकर्ता का मानना है कि उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई।

अब छात्रा की माँ ने कुलपति को सीधी शिकायत भेज कर डीन और लॉ संकाय के अन्य आरोपित स्टाफ कर एक्शन लेने की माँग की है।

मुझ पर लग रहे आरोप बेबुनियाद

ऑपइंडिया ने इस मामले में AMU के आरोपित डीन डॉ जफर नोमानी को सम्पर्क किया। डॉ नोमानी ने हमें बताया कि पीड़िता की शिकायत का उनसे कोई संबंध नहीं है, बावजूद इसके उन्हें बेवजह मामले में घसीटा जा रहा है। डॉ नोमानी ने यह भी कहा कि उन्होंने खुद से सीधा जुड़ा काम न होने के बावजूद भी पीड़िता छात्रा की बहुत मदद की लेकिन फिर भी न जाने क्यों उनको ही टारगेट किया जा रहा है। अंत में उन्होंने कहा कि वो अभी भी इस बात के लिए काफी प्रयासरत हैं कि पीड़ित छात्रा की दिक्कतों का कैसे भी हल निकल आए। इसी के साथ उन्होंने लग रहे आरोपों से खुद को आहत बताया।

मनीष सिसोदिया को नहीं मिली राहत, राउज एवेन्यू कोर्ट ने 18 अप्रैल तक बढ़ाई हिरासत: पटपड़गंज के लोगों के नाम लिख चिट्ठी, AAP ने कर दिया खेल!

दिल्ली के शराब नीति घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को जेल में ही रहना होगा। राउज एवेन्यू कोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिली है, बल्कि कोर्ट ने उनकी न्यायिक हिरासत को 18 अप्रैल तक बढ़ा दिया है। राउज़ एवेन्यू कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई अब 18 अप्रैल को होगी। कोर्ट ने ईडी से यह बताने के लिए कहा कि अब तक एक-एक आरोपित द्वारा दस्तावेज़ों की जाँच के लिए कितना समय लिया गया।

दिल्ली शराब घोटाला से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में तिहाड़ जेल में बंद मनीष सिसोदिया की दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में पेशी हुई। इस दौरान 207 सीआरपीसी अनुपालन में देरी को लेकर ईडी और आरोपित पक्ष के बीच बहस हुई। इस दौरान जज ने दस्तावेजों के निरीक्षण में देरी पर दोनों से सवाल पूछे। कोर्ट ने ईडी से जवाब माँगा है कि प्रत्येक आरोपी ने अब तक दस्तावेजों के निरीक्षण में कितना समय लिया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होगी।

दिल्ली की अदालत ईडी और सीबीआई दोनों मामलों में आम आदमी पार्टी नेता मनीष सिसोदिया की दूसरी जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस केस को स्पेशल जज कावेरी बावेजा सुन रही थीं।

मनीष सिसोदिया पटपड़गंज के लोगों के लिए एक चिट्ठी लिखी थी। चिट्ठी में जेल से जल्द बाहर आने की बात लिखी थी। सिसोदिया ने लिखा था कि हमने आजादी के लिए गोरे अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी थी और आज के अंग्रेजों से भी लड़ाई लग रहे हैं। खास बात ये है कि मनीष सिसोदिया ने ये चिट्ठी 15 मार्च को ही लिखी थी, लेकिन आम आदमी पार्टी इस चिट्ठी को इतने दिनों तक दबा कर बैठी थी। आम आदमी पार्टी ने मनीष सिसोदिया की चिट्ठी 5 अप्रैल को सार्वजनिक की।

इस चिट्ठी में उन्होंने अपनी स्थिति की तुलना स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ अंग्रेजों द्वारा किए गए अत्याचारों से की है और शिक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता जतायी है। सिसोदिया ने यह उम्मीद भी जतायी कि वह जल्द ही जेल से बाहर आएंगे। उन्होंने कहा, ”जल्द ही आपसे बाहर मिलूँगा। अंग्रेज शासकों को भी सत्ता का अहंकार था और उन्होंने लोगों को झूठे मामलों में जेल भेजा था।” 

बता दें कि हाल ही में संजय सिंह को दिल्ली शराब घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बेल दी थी। आप के संयोजक और सीएम अरविंद केजरीवाल इसी केस में जेल में बंद हैं। उन्हें तिहाड़ के जेल नंबर 2 में रखा गया है।

पहले कपड़े फाड़ कर किया नग्न, फिर पीटते हुए बाजार में घुमाया: पंजाब पुलिस ने 3 दिनों बाद दर्ज की FIR, हमलावर अब तक फरार

पंजाब के तरनतारन जिले में एक 55 वर्षीया महिला को नग्न घुमाए जाने का मामला सामने आया है। आरोपितों के नाम कुलविंदर कौर, गुरचरण और शरणजीत सिंह हैं। इनके द्वारा पहले महिला की पिटाई की गई, फिर कपड़े फाड़ कर काफी देर तक निर्वस्त्र घुमाया गया। सभी हमलावर पीड़िता के बेटे द्वारा अपने परिवार की लड़की द्वारा लव मैरिज करने से नाराज थे। नामजद आरोपितों के साथ 2 अन्य अज्ञात लोगों पर भी FIR दर्ज कर ली गई है।

घटना रविवार (31 मार्च, 2024) की है जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। भाजपा व अन्य विपक्षी दलों ने पंजाब की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना तरनतारन जिले के कस्बा वल्टोहा की है। यहाँ की रहने वाली पीड़िता के बेटे का पड़ोसी लड़की से अफेयर था। मार्च महीने में ही दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली। जब इस घटना की जानकारी लड़की के घर वालों को हुई तो वो नाराज हो गए। 31 मार्च को लड़की की माँ कुलविंदर कौर अपने 2 बेटों शरणजीत और गुरचरण सिंह के साथ पीड़िता के घर तक शाम लगभग 6 बजे पहुँच गईं। इनके साथ 2 अज्ञात लोग भी थे। घटना के समय लड़का और लड़की घर पर नहीं थे। लड़के की माँ मौजूद मिलीं।

जैसी ही पीड़िता बाहर निकली, सभी पाँचों आरोपितों ने मिल पर उस पर हमला कर दिया। इन सभी ने पहले 55 वर्षीया पीड़िता की पिटाई की फिर उसके कपड़े फाड़ डाले। अंत में इन सभी ने पीड़िता को नग्न कर के घुमाया और बाकायदा उसकी वीडियो भी बनाई। जैसे-तैसे पीड़िता ने आरोपितों के चंगुल से खुद को छुड़ा कर एक दुकान में शरण ली और खुद को बचाया। बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। भाजपा सहित तमाम अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने इस घटना को पंजाब की बिगड़ती कानून-व्यवस्था का एक उदहारण बताया है।

पंजाब पुलिस ने 31 मार्च को घटी इस घटना की FIR 3 अप्रैल 2024 को दर्ज की है। थाना प्रभारी सुनीता बावा ने मीडिया को बताया कि 3 नामजद और 2 अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इन सभी पर IPC की धारा 354, 354- बी, 354- डी, 323 और 149 के तहत कार्रवाई की गई है। घटना के बाद सभी आरोपित फरार चल रहे हैं जिनकी तलाश में दबिश दी जा रही है। पंजाब राज्य महिला आयोग ने भी इस घटना का संज्ञान लिया है और पुलिस से रिपोर्ट तलब की है।

ED की समन के बावजूद पेश नहीं हुए AAP विधायक अमानतुल्लाह खान, कोर्ट में केस चलाने के लिए अर्जी: वक्फ बोर्ड घोटाले से जुड़ा है मामला

दिल्ली में आम आदमी पार्टी के विधायक और दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान पर ईडी का शिकंजा कस गया है। ईडी ने कोर्ट से अमानतुल्लाह खान के खिलाफ ट्रायल चलाने की माँग की है। बता दें कि दिल्ली सरकार के मंत्रियों आतिशी और सौरभ भारद्वाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया था कि ईडी आम आदमी पार्टी के 4 और नेताओं को गिरफ्तार करने वाली है। हालाँकि अमानतुल्लाह खान का नाम उन्होंने नहीं लिया था, लेकिन इस केस में आतिशी और भारद्वाज द्वारा बताए नाम से इतर अमानतुल्लाह खान के खिसाफ ईडी ने सख्त रुख अपना लिया है। इस केस में अमानतुल्लाह खान की गिरफ्तारी भी हो सकती है, क्योंकि 11 मार्च को दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वक्फ बोर्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आप विधायक अमानतुल्ला खान के समन में शामिल नहीं होने के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने शुक्रवार (05 अप्रैल 2024) को राउज एवेन्यू कोर्ट में शिकायत दर्ज की। एजेंसी ने पीएमएल अधिनियम की धारा 50 (समन जारी करने की शक्ति) के तहत जारी समन का पालन नहीं करने और जाँच में शामिल नहीं होने के लिए आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 190 और 200 के तहत अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट दिव्या मल्होत्रा ​​की अदालत में शिकायत दर्ज की।

ईडी के अनुसार, अमानतुल्लाह खान ने 23 जनवरी, 31 जनवरी, 9 फरवरी, 19 फरवरी, 26 फरवरी और 4 मार्च को पूछताछ के लिए जारी किए गए समन का पालन नहीं किया है। अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट (एसीएमएम) दिव्या मल्होत्रा ​​ने मामले को 6 अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

इस मामले में अमानतुल्लाह ने अग्रिम जमानत लेने की कोशिश की थी, लेकिन कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। ईडी ने आरोप लगाया है कि अमानतुल्लाह खान ने वक्फ बोर्ड में पैसों के बदले अवैध तरीके से कर्मचारियों की भर्तियाँ कर ‘अपराध के जरिए बड़ी रकम’ प्राप्त की और अपने सहयोगियों के नाम से प्रॉपर्टी में निवेश किया। वक्फ बोर्ड घोटाले के मामले में ईडी ने अमानतुल्लाह खान को नवंबर 2023 में गिरफ्तार भी किया था।

गौरतलब है कि ईडी ने साल 2016 में ही इस केस की जाँच शुरू की थी, जिसमें दिल्ली वक्फ बोर्ड में अवैध तरीके से लोगों को नौकरियाँ दी गई और बदले में उनके पैसे लिए गए।इससे दिल्ली सरकार को वित्तीय नुकसान हुआ, लेकिन अमानतुल्लाह को पर्सनल फायदा पहुँचा। अमानतुल्लाह खान पर वक्फ की संपत्तियों को अवैध तरीके से पट्टे पर देने के भी आरोप हैं, जिसके बदले खान को पैसे मिले।

ईडी ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस भी दर्ज दिया। जिसमें अमानतुल्लाह खान पर अपने सहयोगियों के माध्यम से प्रॉपर्टी खरीदने का मामला दर्ज हुआ। इस मामले में अमानतुल्लाह खान ने दिल्ली की अदालत में जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी, जो खारिज हो गई। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने भी 11 मार्च को उनकी अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज कर दी।

‘You Bloody Fool’: टीवी पर LIVE बहस के दौरान कॉन्ग्रेस की सुप्रिया श्रीनेत ने खोया आपा, BJP प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला को देने लगीं गाली

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत की शांति में खलल डालने वाले आतंकियों को बख्शा नहीं जाएगा और चाहे वो पाकिस्तान में ही क्यों न छिपे हों, उनका हिसाब-किताब किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे आतंकियों को मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा, वो पाकिस्तान में भागेंगे तो उन्हें घर में घुस कर मारा जाएगा। अब इस मुद्दे पर बहस के दौरान कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भाजपा के प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला को गाली दे दी। ये ‘CNN News18’ की मंच पर हुआ।

असल में राजनाथ सिंह ने ‘द गार्डियन’ के उस रिपोर्ट का जवाब दिया था, जिसमें कहा गया था कि 2019 में पुलवामा में हुए हमलों के बाद से भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी RAW अब तक 20 ऐसे लोगों को विदेश में ठिकाने लगा चुकी है, जिन्हें देश अपना दुश्मन मानता है। पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI के हवाले से ये दावा किया गया था। भारत ने इस रिपोर्ट को प्रोपेगंडा करार दिया है। राजस्थान के चूरू में पीएम मोदी ने कहा था कि नया भारत घर में घुस कर मारता है। उनका इशारा सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक पर था।

शहज़ाद पूनावाला ने इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान सुप्रिया श्रीनेत को उनकी गलती याद दिलाई। असल में सुप्रिया श्रीनेत ने भारतीय सेना के नॉर्दर्न कमांड में ‘डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन्स’ का नाम गलत लिया था। उन्होंने बताया कि 2020 में इस पद पर कौन थे और 2024 में कौन हैं। शहज़ाद पूनावाला ने सुप्रिया श्रीनेत पर झूठ बोलने का आरोप लगाया, जिसके बाद कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता ने ‘यू ब्लडी फूल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। वीडियो में 31:12 पर इसे देखा जा सकता है।

इतना ही नहीं, सुप्रिया श्रीनेत ने अपने इन शब्दों को दोहराया भी। जब एंकर ने उन्हें टोका तो वो एंकर जका जैकब से ही लड़ने लगीं। शहजाद पूनावाला ने कहा कि रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट पर झूठ की पोल खुलने के बाद सुप्रिया श्रीनेत ने उन्हें गाली दी। हाल ही में सुप्रिया श्रीनेत ने कंगना रनौत का भी अपमान किया था। इस महिला विरोधी टिप्पणी के बाद चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस जारी किया था। शहज़ाद पूनावाला ने बताया कि राजदीप सरदेसाई के शो में भी सुप्रिया श्रीनेत उन्हें ‘गुंडा’ कह चुकी हैं।