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लोकसभा चुनाव तक कॉन्ग्रेस को मिली मोहलत, सुप्रीम कोर्ट से बोला आयकर विभाग- अभी नहीं करेंगे ₹3500 करोड़ की वसूली

आयकर विभाग द्वारा 3500 करोड़ रुपए की टैक्स की माँग के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुँची कॉन्ग्रेस को फिलहाल राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान आयकर विभाग ने सोमवार (1 अप्रैल 2024) को कहा कि लोकसभा चुनावों के मद्देनजर वह कॉन्ग्रेस के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेगा, क्योंकि वह पार्टी के लिए परेशानी खड़ी करना नहीं चाहता है।

बार एंच बेंच के अनुसार, इस मामले की सुनवाई जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच में हुई। आयकर विभाग की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (SG Mehta) पेश हुए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केस की अगली सुनवाई 24 जुलाई के लिए तय की है।

मामले की सुनवाई करते हुए बेंच ने कहा, “इन अपीलों में जो मुद्दे उठे हैं उन पर अभी निर्णय होना बाकी है, लेकिन अब की स्थिति को ध्यान में रखते हुए (आयकर) विभाग इस मामले को तूल नहीं देना चाहता है और कहता है कि इस संबंध में लगभग ₹3,500 करोड़ की कर माँग को लेकर कोई भी कठोर कदम नहीं उठाया जाएगा। इस मामले को जुलाई के दूसरे सप्ताह में सूचीबद्ध करें।”

एसजी मेहता ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने इस साल आयकर बकाया के लगभग ₹134 करोड़ का भुगतान किया है। इसके बाद पहले से निर्धारित मानदंडों के आधार पर अब ₹1,700 करोड़ की अतिरिक्त माँग की गई है। केंद्र सरकार के वकील ने अदालत को आश्वस्त किया कि लंबित बकाये की वसूली लोकसभा चुनाव के बाद तक के लिए टाल दी जाएगी।

वहीं, कॉन्ग्रेस की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “27, 28, 29 मार्च को… एक ब्लॉक मूल्यांकन हुआ… उन्होंने (आयकर प्राधिकरण) संपत्तियों की कुर्की से 135 करोड़ रुपये एकत्र किए हैं… हम (कॉन्ग्रेस) कोई लाभ कमाने वाला संगठन नहीं हैं और केवल एक राजनीतिक दल हैं।”

बता दें कि आयकर विभाग द्वारा मूल्यांकन वर्ष 2014-15, 2015-16 और 2016-17 के पुनर्मूल्यांकन शुरू किया गया था। इसके बाद पार्टी इस पर रोक लगाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट पहुँची थी। हालाँकि, हाई कोर्ट ने कॉन्ग्रेस की इस याचिका को 22 मार्च को खारिज कर दिया था।

इसके बाद आयकर विभाग ने मूल्यांकन वर्ष 2017-18, 2018-19, 2019-20 और 2020-21 के लिए भी पुनर्मूल्यांकन शुरू कर दिया। इसके खिलाफ भी कॉन्ग्रेस दिल्ली हाई कोर्ट पहुँची, लेकिन 28 मार्च 2024 को उच्च न्यायालय इसे भी खारिज कर दिया।

इसके ठीक एक दिन बाद 29 मार्च 2024 को कॉन्ग्रेस ने कहा कि उसे मूल्यांकन वर्ष 2017-18 और 2020-21 के लिए 1,823 करोड़ रुपए के कर चुकाने के नोटिस मिले। आयकर विभाग ने पार्टी को तीन और नोटिस जारी किए हैं, जिससे कुल कर माँग 3,567 करोड़ रुपए हो गई हैं।

विला में OTT प्लेटफॉर्म के लिए बना रहे थे ब्लू फिल्म, 5 लड़कियों सहित कुल 13 गिरफ्तार: पॉर्न रैकेट का भंडाफोड़, कई राज्यों के युवक-युवतियाँ शामिल

महाराष्ट्र के पुणे में पुलिस ने अश्लील वीडियो बनाने वाले रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में कुल 13 आरोपितों की गिरफ्तारी की गई है। इन लोगों में कई राज्यों के युवक और युवतियाँ शामिल हैं। माना जा रहा है कि ये वीडियो तमाम OTT प्लेटफॉर्म के लिए बनाए जा रहे थे। पुलिस ने कुल 18 लोगों पर FIR दर्ज किया है जिसमें शूटिंग के लिए अपना विला किराए पर देने वाला मकान मालिक भी शामिल है। पुलिस ने यह कार्रवाई शनिवार (30 मार्च 2024) को की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना लोनावला के पाटन गाँव में बने अर्णव विला की है। यहाँ पुलिस को कुछ बाहरी लड़के और लड़कियों की मौजूदगी की सूचना मिली। सूचना में इन सभी के द्वारा ब्लू फिल्म बनाने की भी बात कही गई थी। मिली सूचना पर पुलिस ने टीम गठित कर के 30 मार्च को अर्णव विला पर दबिश दी। पुलिस अधिकारी कार्तिक के मुताबिक सूचना सही पाई गई। विला में कुल 15 लोग पॉर्न फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। शूटिंग के बाद इन फिल्मों को वेबसाइट और एप पर डालने की तैयारी थी।

डिप्टी एसपी कार्तिक ने आगे बताया कि अश्लील फिल्म बनाने वाले कुल 15 लोगों पर केस दर्ज किया गया है। इसमें से 13 की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें से 5 लड़कियाँ है। इसके अतिरिक्त मकान मालिक और केयर टेकर सहित 3 अन्य लोगों पर भी FIR दर्ज की गई है। इन सभी 18 आरोपितों पर IPC की धारा 292, 293 के अलावा आईटी एक्ट की धारा 67, 68 और स्त्री अशिष्ट रूपण (प्रतिषेध) अधिनियम की धारा 3, 4, 6, 7 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस का कहना है कि अश्लील वीडियो बनाने वाले इस पूरे चेन की जाँच पड़ताल की जा रही है।

गिरफ्तार आरोपितों के पास से कैमरे और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बरामद हुए हैं। इन सभी की जाँच करवाई जा रही है। इस घटना के बाद फरार 5 आरोपितों की तलाश के लिए दबिश दी जा रही है। गिरफ्तार आरोपितों को पुलिस ने अदालत में पेश किया है। गौरतलब है कि भारत में अश्लील वीडियो बनाना कानूनन प्रतिबंधित है।

‘शादीशुदा हूँ, पर हम दोस्त बन सकते हैं’: रावण को बीफ परोसती माँ सीता, हनुमान जी की पूँछ बन गई एंटीना… पॉन्डिचेरी यूनिवर्सिटी में हिन्दू विरोधी नाटक के विरोध में ABVP का मार्च

पॉन्डिचेरी यूनिवर्सिटी में भगवान राम और माँ सीता पर आपत्तिजनक नाटक के खिलाफ ABVP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) ने विरोध प्रदर्शन किया है। संगठन ने विश्वविद्यालय पर हिन्दू भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप लगाया है। ABVP की तमिलनाडु यूनिट इसे लेकर मुखर है। PU के ये छात्र जिस नाटक को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, उसे शुक्रवार (29 मार्च, 2024) को आयोजित किया गया था। ‘डिपार्टमेंट ऑफ परफार्मिंग आर्ट्स’ ने इसे आयोजित किया था।

इसमें रामायण को लेकर मजाक बनाया गया था। इसमें दिखाया गया कि माँ सीता रावण को बीफ परोस रही हैं। साथ ही हनुमान जी के किरदार के साथ भी छेड़छाड़ की गई। ‘Ezhini 2k14’ कार्यक्रम के तहत ये प्ले किया गया था। इस प्ले का नाम ‘सोमायणम’ रखा गया था। इसमें माँ सीता के किरदार का नाम ‘गीता’ और नृत्य करते हुए रावण को ‘भावना’ नाम दिया गया। वहीं सीता हरण वाले दृश्य में दिखाया गया कि माँ सीता रावण को गोमांस खाने के लिए दे रही हैं।

इसमें सीता वाले किरदार से कहलवाया गया है, “मैं शादीशुदा हूँ, लेकिन हम दोस्त बन सकते हैं।” ABVP ने कहा है कि रामायण का इस तरह अपमानजनक चित्रण करोड़ों हिन्दुओं को ठेस पहुँचाने वाला है। PU में सक्रिय वामपंथी दलों के छात्र संगठनों पर इस नाटक की योजना बनाने और इसे क्रियान्वित करने का आरोप है। इसी तरह हनुमान जी को इस नाटक में ‘कांजनेय’ दिखाया गया। इसमें हनुमान जी की पूँछ को एंटीना के रूप में दिखाया गया, और बताया गया कि वो इसी का इस्तेमाल कर के भगवान राम के साथ संचार स्थापित करते हैं।

ABVP का आरोप है कि ऐसे कृत्यों के जरिए सांप्रदायिक घृणा फैलाने का भी काम किया गया। संगठन ने कहा कि वो ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी (FoE)’ में यकीन करती है, लेकिन इसमें जिम्मेदारी का भाव होना चाहिए। इस ड्रामा को लिखने और इसका निर्देशन करने वाले MPA 1st ईयर के पुष्पराज सहित इसमें शामिल अभिनेताओं मिथुन कृष्णा, श्रीपार्वती, आदित्य बेबी और विशाख भसी को यूनिवर्सिटी से निकाले जाने की माँग की गई है। साथ ही HoD श्रवण वेलु के खिलाफ भी कार्रवाई की माँग हुई है।

तिहाड़ी हुए दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल: दिल्ली की कोर्ट ने शराब घोटाले में 15 अप्रैल तक के लिए जेल भेजा, ED ने बताया- पूछताछ में नहीं कर रहे हैं सहयोग

शराब घोटाला मामले में जेल में बंद दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की न्यायिक हिरासत आज 15 अप्रैल तक बढ़ा दी गई है। प्रवर्तन निदेशालय ने कोर्ट को बताया था कि केजरीवाल उन्हें पूछताछ में समर्थन नहीं कर रहे हैं। इसके बाद अदालत ने उनकी हिरासत को बढ़ा दिया। अब बताया जा रहा है कि तिहाड़ जेल के नंबर पाँच में रहेंगे

जानकारी के मुताबिक ईडी ने कोर्ट से कहा था, “हम अरविंद केजरीवाल की ज्यूडिशियल कस्टडी की माँग करते हैं। केजरीवाल हमें कोई सहयोग नहीं कर रहे हैं। वो हमें गुमराह कर रहे हैं। इन्होंने हमें बताया कि विजय नायर इन्हें नहीं रिपोर्ट करते हैं। आतिशी को करते हैं।”

ईडी ने यह भी बताया कि केजरीवाल अपने फोन का पासवर्ड नहीं शेयर कर रहे हैं इसलिए ईडी इनकी कस्टडी की माँग करती है। जाँच एजेंसी ने कस्टडी माँगते हुए अदालत को यह भी दलील दी कि वो एक मोबाइल फोन से डेटा निकाला गया है और उसका एनालिसिस कर रहे हैं।

इसके अलावा ईडी ने यह भी बताया कि उन्हें केजरीवाल के घर की तलाशी के दौरान 4 डिजिटल डिवाइस मिले थे। जब सीएम से इसका पासवर्ड माँगा गया तो उन्होंने इसे देने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि अपने वकीलों से बात करने के बाद ही वो शेयर करेंगे।

उल्लेखनीय है कि जहाँ अरविंद केजरीवाल की हिरासत 15 दिन और बढ़ गई है। वहीं केजरीवाल ने जेल में रहने के लिए तीन किताबों की माँग की है। उन्होंने इसमें रामायण, महाभारत और पत्रकार नीरजा चौधरी द्वारा लिखित हाऊ प्राइम मिनिस्टर डिसाइड की माँग की है। इससे पहले उन्होंने दवा, स्पेशल डाइट और किताब देने की माँग की थी।

बता दें कि इस मामले के अलावा केजरीवाल से जुड़ा एक अन्य मामला कोर्ट में सुना गया। यह केस उनके द्वारा जेल से जारी किए गए सरकारी आदेश से संबंधित था। हालाँकि एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने सुनवाई करते हुए उसकी याचिका को खारिज कर दिया।

इस बीच केजरीवाल की एक वीडियो भी सामने आई है। इस वीडियो में केजरीवाल कोर्ट में जाते हुए कहते हैं- जो पीएम मोदी कर रहे हैं वो देश के लिए अच्छा नहीं है।

मथुरा के विवादित शाही ईदगाह में कृष्ण कूप की पूजा, शीतला अष्टमी पर पहुँची हिन्दू महिलाएँ: श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष समेत 7 हिरासत में

मथुरा के विवादित शाही ईदगाह ढाँचा के भीतर हिन्दू महिलाओं ने कृष्ण कूप पर पूजा की है। महिलाओं ने शीतला अष्टमी के मौके पर पारम्परिक रूप से बसौडे की पूजा अर्चना सम्पन्न की है। इस मामले में पूजा के अधिकार को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका पर सोमवार (1 अप्रैल, 2024) को सुनवाई भी होनी है।

जानकारी के अनुसार, विवादित शाही ईदगाह ढाँचा परिसर में स्थित इस कृष्ण कूप पर 34 हिन्दू महिलाएँ सोमवार सुबह (1अप्रैल, 2024) पहुँची। इन महिलाओं ने सुबह 5 बजे पारम्परिक रूप से पूजा संपन्न की। महिलाओं ने शीतला माता की भी पूजा की। हालाँकि, इस कुएँ की पूजा और किसी को नहीं करने दी गई।

कृष्ण कूप की पूजा के लिए जाने वाले अन्य सात व्यक्तियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इन लोगों में श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। इन लोगों ने पहले ही इस मामले में ऐलान कर रखा था कि वह शीतला अष्टमी के दिन जरुर पूजा करेंगे। इसको लेकर इस परिसर में पुलिस बल तैनात किया गया है। इस कुएँ में पूजा को लेकर CM योगी आदित्यनाथ को पत्र भी लिखा जा चुका है।

इससे पहले इस कृष्ण कूप पर पूजा के अधिकार को इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका भी दाखिल की गई थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट के समक्ष यह याचिका श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेन्द्र प्रताप सिंह ने लगाई थी। उन्होंने कहा हथा कि शाही ईदगाह विवादित ढाँचा में सीढ़ियों के पास बने कुँए पर लम्बे समय से हिन्दू पूजा करते आए हैं, लेकिन अब मुस्लिम इसमें व्यवधान उत्पन्न कर रहे हैं। यह कुआँ हिन्दुओं के लिए धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है और इसका निर्माण श्रीकृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने करवाया था।

इस कुएँ पर महिलाएँ होली के त्यौहार के बाद शीतला माता की पूजा करती हैं। यह पूजा लम्बे समय से होती आई है। लेकिन जबसे श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर हिन्दुओं ने सर्वे सहित अन्य माँगे चालू की हैं, तबसे मुस्लिम पक्ष इस पूजा में व्यवधान डालने लगा है। अब इस पूजा को करवाने के लिए प्रशासन को भारी पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ती है। पिछले वर्ष भी ऐसा ही हुआ था।

याचिका लगाने वाले महेन्द्र प्रताप सिंह का कहना था कि मुस्लिम पक्ष का यह रवैया तब है जब यहाँ पूजा को लेकर कोर्ट का रोक जैसा कोई आदेश नहीं है। उन्होंने बताया था कि यहाँ लोग अपने बच्चों का मुंडन आदि करवाते थे। यहाँ पर हिन्दुओं का पूजा का अधिकार सुरक्षित हो सके, ऐसे में हाई कोर्ट में याचिका लगाई गई थी।

गौरतलब है कि यह शाही ईदगाह वर्तमान में विवादित है और इसको लेकर न्यायालयों में कई याचिकाएँ पड़ी हुई हैं। हिन्दू पक्ष का कहना है कि मथुरा में स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के बराबर में बनी शाही ईदगाह वाला ढाँचा जबरन वही बना दिया गया जहाँ भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इस जगह पर कब्जा करके ढाँचा बनाया गया है। यहाँ अभी भी कई ऐसे सबूत हैं जो कि यह सिद्ध करते हैं कि यहाँ पहले एक मंदिर हुआ करता था।

हिन्दू पक्ष का दावा है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म राजा कंस के कारागार में हुआ था और यह जन्मस्थान शाही ईदगाह के वर्तमान ढाँचे के ठीक नीचे है। सन् 1670 में मुगल आक्रांता औरंगज़ेब ने मथुरा पर हमला कर दिया था और केशवदेव मंदिर को ध्वस्त करके उसके ऊपर शाही ईदगाह ढाँचा बनवा दिया था और इसे मस्जिद कहने लगे। 13.37 एकड़ जमीन पर दावा करते हुए हिन्दू यहाँ से शाही ईदगाह ढाँचे को हटाने की माँग करते रहे हैं।

नाम अब्दुल, पर सुमित बनकर घूमता था: बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट का मास्टरमाइंड कर रहा था ‘हिंदू पहचान’ का इस्तेमाल, फर्जी आधार कार्ड भी बनवा रखा था

बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में धमाका करने वाले आतंकियों अब्दुल मतीन ताहा और मुसव्विर हुसैन पर NIA ने ₹10-10 लाख का इनाम घोषित किया है। यह आतंकी धमाके के लिए हिन्दू पहचान का इस्तेमाल कर रहे थे। यह आतंकी हिन्दू नामों का उपयोग अलग-अलग जगह रुकने और यात्रा के लिए करते थे। यह खुलासा NIA जाँच में हुआ है।

जानकारी के अनुसार, बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में धमाके की योजना बनाने वाले आतंकी अब्दुल मतीन ताहा ने हिन्दू नाम विग्नेश डी और सुमित अपनाए हुए थे। इनका उपयोग वह अलग अलग जगह जाने और रहने में करता था। रामेश्वरम कैफे जाकर धमाके को अंजाम देने वाला मुसव्विर हुसैन, मोहम्मद जुनैद सैयद नाम के पहचान पत्रों पर फर्जी दस्तावेज बनाए हुए था।

इन दोनों पर NIA ने ₹10 लाख का इनाम घोषित किया है। इनकी फोटो भी जारी की गई हैं। बताया गया है कि यह दोनों 2020 से ही गायब हैं। यह अल हिन्द मॉड्यूल में शामिल थे। NIA की दबिश पर यह गायब हो गए थे। इसके बाद से यह आतंक की प्लानिंग कर रहे थे। इन्होने मिलकर बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में मार्च 2023 में धमाके को अंजाम दिया।

इससे पहले NIA ने रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट मामले में एक आरोपित मुजम्मिल शरीफ को पकड़ा था। इस पर आरोप है कि इसने अब्दुल मतीन ताहा और मुवस्सिर हुसैन को छुपने और शहर छोड़ कर भागने में सहायता की थी। उसने बम बनाने के लिए भी सामान इन आतंकियों को उपलब्ध करवाया था। वह अभी NIA की गिरफ्त में है और उससे पूछताछ चल रही है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी मुस्लिम आतंकियों के हिन्दू नाम उपयोग करने की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। अक्टूबर 2022 में मंगलुरु में चलते ऑटो में हुए प्रेसर कुकर ब्लास्ट में भी यह सामने आया था कि आतंकी शारिक ने प्रेमराज नाम का एक आधार बना रखा था।

यह आधार एक रेलवे कर्मचारी प्रेमराज का था जो कि इसे एक बार बस में भूल गया था। शारिक ने इस पर तस्वीर बदल कर इसे अपना नाम दे दिया था और अपनी आतंकी गतिविधियाँ इसी के सहारे चला रहा था। शारिक भी इसी अल हिन्द मॉड्यूल का हिस्सा था और अब्दुल मतीन ताहा से जुड़ा हुआ था।

शारिक मैंगलूरू का ही रहने वाला था और इस धमाके के पहले वह आतंक समर्थक पोस्टर बनाने के मामले में पकड़ा गया था और जमानत पर बाहर आ गया था। शारिक एक रेडीमेड कपड़े की दुकान चलाता था। उसे इस ऑटो धमाके के बाद दुबारा पकड़ लिया गया था। उनसे कुछ और युवाओं को भी आतंकी बनाया था।

गौरतलब है कि 1 मार्च, 2024 को बेंगलुरु के वाइटफील्ड इलाके में स्थित रामेश्वरम कैफे में दोपहर में एक धमाका हुआ था। इस धमाके में 9 लोग घायल हुए थे। धमाके के पीछे की जानकारी बाद में निकल कर सामने आई थी। इसके बाद इस मामले की जाँच NIA ने चालू कर दी थी। तब से ही इसमें शामिल आतंकियों को पकड़ने का प्रयास जारी है।

कच्चातिवु द्वीप छोड़ने को तैयार थे नेहरू, बेटी इंदिरा ने श्रीलंका को दे ही दिया: विदेश मंत्री जयशंकर ने कॉन्ग्रेस-DMK का ‘इतिहास’ खोला, कहा- जनता को जानने का हक

1974 में इंदिरा गाँधी द्वारा श्रीलंका को सौंपे गए कच्चातिवु द्वीप का मुद्दा अब केंद्र सरकार मुखर होकर उठा रही है। तमिलनाडु में भाजपा अध्यक्ष अन्नामलाई की आरटीआई के बाद पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉन्ग्रेस को इस मामले पर घेरा और अब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि ये द्वीप श्रीलंका को देने का काम किसने किया, लेकिन हमें ये जानने का भी अधिकार है कि इसे छिपाने का प्रयास किसने किया।

विदेश मंत्री जयशंकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “1974 में साल भारत और श्रीलंका के बीच एक समझौता हुआ था। दोनों देशों ने उसपर हस्ताक्षर किए थे। उसके बाद कॉन्ग्रेस की तब की सरकार ने एक समुद्री सीमा खींची और समुद्री सीमा खींचने में कच्चातिवु को सीमा के श्रीलंकाई पक्ष पर रखा गया।”

जयशंकर कहते हैं, “हम जानते हैं कि यह किसने किया, यह नहीं पता कि इसे किसने छुपाया। हमारा मानना है कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि यह स्थिति कैसे उत्पन्न हुई।”

उन्होंने जानकारी दी कि 20 सालों में 6184 भारतीय मछुआरों को श्रीलंका में हिरासत लिया गया है और इसी समयकाल में 1175 भारतीय मछली पकड़ने वाली नौकाओं को भी श्रीलंका ने जब्त किया है। उन्होंने बताया कि पिछले 5 सालों में कच्चातिवु मुद्दा और मछुआरे का मुद्दा संसद में विभिन्न दलों द्वारा बार-बार उठाया गया है। यह संसद के सवालों, बहसों और सलाहकार समिति में सामने आया है।

इससे पहले पीएम मोदी ने भी कच्चातिवु पर होलते हुए कॉन्ग्रेस और डीएमके पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि बयानबाजी के अलावा, द्रमुक ने तमिलनाडु के हितों की रक्षा के लिए कुछ नहीं किया है। कच्चातिवु पर उभरते नए विवरणों ने डीएमके के दोहरे मानकों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है कॉन्ग्रेस और डीएमके पारिवारिक इकाइयाँ हैं। वे केवल इस बात की परवाह करते हैं कि उनके अपने बेटे और बेटियाँ बढ़ें। उन्हें किसी और की परवाह नहीं है। कच्चातीवु पर उनकी कठोरता ने हमारे गरीब मछुआरों और विशेष रूप से मछुआरों के हितों को नुकसान पहुँचाया है।

बता दें कि 1974 में इंदिरा गाँधी ने श्रीलंका के साथ एक समझौता करते हुए उनको कच्चातिवु द्वीप गिफ्ट में सौंप दिया था। वहीं 1961 में नेहरू इस द्वीप के मुद्दे पर पहले ही कह चुके थे कि उन्हें ये मामला संसद में नहीं उठाना। अगर जरूरत पड़ेगी तो वह इस द्वीप पर दावा छोड़ने से पहले विचार नहीं करेंगे।

फोटो साभार: न्यूज 18

इसी तरह न्यूज 18 पर प्रकाशित रिपोर्ट और उसमें दिए गए दस्तावेज बताते हैं कि जब ये द्वीप श्रीलंका के पास गया उसके बाद ये मुद्दा डीएमके द्वारा उठाया गया। पार्टी के नेता इसके विरोध में उतरे, लेकिन तब पार्टी के चीफ करुणानिधी ने इस केंद्र का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।

दस्तावेज यह भी बताते हैं कि मुख्यमंत्री ने विदेश सचिव को आश्वासन दिया था कि वह इस मुद्दे को ज्यादा उठने नहीं देंगे और न इसे बढ़ा-चढ़ाकर बताएँगे। इसके बाद विदेश सचिव ने उनकी तारीफ भी की थी। हालाँकि करुणानिधि ने यह भी कहा था कि उनके सामने विपक्ष को समझाना एक कठिनाई होगी। इसमें लिखा है कि करुणानिधि ने कहा था कि तेल स्ट्राइक की जानकारी दिए बिन विपक्ष को वो इस कॉन्फिडेंस में नहीं ले सकते कि उन्हें समझौता करना क्यों जरूरी था।

फोटो साभार: न्यूज 18

करुणानिधि चाहते थे इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री सबको समझाएँ, लेकिन तब विदेश सचिव ने यह कहा था कि उनकी जानकारी के अनुसार, प्रस्ताव केवल एक या दो वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों को ही पता था और उन्होंने कहा कि शायद प्रधानमंत्री विपक्ष के साथ इस पर चर्चा करने से पहले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के विचार इस पर जानना चाहेंगी।

‘तेली का बेटा (नरेंद्र मोदी) अयोध्या के राम मंदिर में पूजा कैसे कर सकता है’: TMC नेता ने प्रधानमंत्री की जाति पर दिखाई घृणा, OBC के अपमान पर बीजेपी ने घेरा

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के नेता पिजुष पांडा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर एक जातिवादी टिप्पणी की है। पांडा ने कहा है कि पीएम मोदी तेली होकर अयोध्या राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कैसे कर सकते हैं। पांडा ने पीएम मोदी के बचपन में चाय बेचने को लेकर भी काफी आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। पांडा के इस बयान पर बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने चुनाव आयोग से कार्रवाई की माँग की है। पिजुष के इस बयान का वीडियो भी वायरल हो रहा है।

वायरल वीडियो में पिजुष पांडा कहते हैं, “नरेन्द्र मोदी अहंकारी हैं, वह तेली (जाति) के बेटे हैं, वह राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा और पूजा कैसे कर सकते हैं जहाँ किसी ब्राम्हण को नहीं बुलाया गया। फिर ब्राम्हणों का क्या काम है, मैं अपना जनेऊ प्रधानमंत्री कार्यालय भेज दूँगा। मैं कोंटई बस स्टैंड पर बैठ का जूते पॉलिश करूँगा।”

पिजुष पांडा ने पीएम मोदी पर जातिवादी टिप्पणी के अलावा और भी कई बातें कहीं। उन्होंने पीएम मोदी की डिग्री और चाय बेचने को लेकर भी प्रश्न उठाए। पांडा ने कहा कि आज से 50-60 साल पहले देश में कम्प्यूटर और टाइपराइटर नहीं थे लेकिन पीएम मोदी की डिग्री कम्प्यूटराइज्ड है।

पिजुष पांडा ने कहा, “वह (पीएम मोदी) कौन से स्टेशन पर चाय बेंचते थे? क्या आपको नाम पता है? किस स्टेशन पर भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री चाय बेचा करते थे? बहुत जल्द वह पूर्व प्रधानमंत्री हो जाएँगे। अगर कोई मुझे यह बता देगा कि वह किस स्टेशन पर चाय बेचा करते थे तो मैं राजनीति से संन्यास ले लूँगा।” गौरतलब है कि यह सर्वविदित है पीएम मोदी गुजरात के वडनगर रेलवे स्टेशन पर चाय बेचा करते थे। यहाँ पर उनकी वह चाय की दुकान अब भी सुरक्षित है।

पांडा ने पीएम मोदी की शिक्षा को लेकर कहा, “वह 70 साल के हैं, कोई बता सकता है कि 50 साल पहले जारी किए गए प्रमाण पत्र कहाँ हैं, तब पेन से लिख कर जारी किए जाते थे, लेकिन मोदी जी के प्रमाणपत्र कम्यूटर से जारी हैं। 50 साल पहले देश में कम्यूटर और टाइपराइटर भी नहीं थे। वह बहुत बड़े धोखेबाज हैं, एकदम फर्जी हैं।”

पांडा के पीएम मोदी पर ‘तेली’ शब्द वाली जातिवादी टिप्पणी करने और अभद्र भाषा के इस्तेमाल करने का यह वीडयो सुवेंदु अधिकारी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर डाला है। उन्होंने इस मामले में चुनाव आयोग से कार्रवाई की माँग की है। अधिकारी ने माँग की है कि ऐसे नेताओं को पूरे चुनाव में प्रचार करने से रोका जाए।

अधिकारी ने OBC समुदाय के अपमान को लेकर देश के पिछड़ा वर्ग आयोग से भी कार्रवाई की माँग की है और कहा है कि पांडा ने जूते पॉलिश करने को छोटा काम बता कर उनका भी अपमान किया है। अधिकारी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ऐसे नेताओ को खुली छूट दे रखी है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी पीएम मोदी पर काफी बार निजी हमला किया जा चुका है। हाल ही में तमिलनाडु सरकार में मंत्री DMK नेता टीएम अनबर्सन ने पीएम मोदी को टुकड़ों में फाड़ने की बात कही थी। DMK के एक और मंत्री ने पीएम मोदी को गाली दी थी।

माफिया मुख्तार अंसारी के समर्थन में कॉन्स्टेबल फैयाज ने लगाया स्टेटस, लिखा- अलविदा शेर-ए-पूर्वांचल… UP पुलिस ने सस्पेंड करने के लिए EC को भेजी रिपोर्ट

लखनऊ में यूपी पुलिस के एक सिपाही ने गैंगस्टर मुख्तार अंसारी को आखिरी विदाई देने के लिए दो पोस्ट स्टेटस पर लगाए। इन पोस्ट में उसने गैंगस्टर की तो तारीफ की हुई थी और दूसरी तरफ उसने उन लोगों का मखौल उड़ाया हुआ था जिन्हें कभी मुख्तार द्वारा प्रताड़ित किया जाता था।

सिपाही का नाम फयाज खान है। उसने मुख्तार अंसारी को अपने स्टेटस में शेर-ए-पूर्वांचल कहा था। साथ ही ये भी कहा था कि जिन लोगों के बाप-दादा मुख्तार से डरते थे वो आज योगी सरकार के दम पर उछल रहे हैं।

सामने आई जानकारी के अनुसार, फयाज खान ने मुख्तार अंसारी के लिए दो स्टेटस लगाए थे। एक स्टेटस में उसने अलविदा कहते हुए लिखा था- “जिंदा रहेगा वो तो दिलों में आवाम के, ऐ दिन ना उसकी मौत पे रंजो मलाल कर। हिम्मत नहीं थी सामने आकर लड़े कोई धोखे से मारा शेर को पिंजरे में डालकर। अलविदा शेर-ए-पूर्वांचल मुख्तार अंसारी।”

दूसरे स्टेटस में उसने लिखा था- “शेर की खुराहट से जिनके आका बाप दादा की पैंट गीली हो जाती थी, वो आज बाबा की माया के नारे लगा रहे हैं।”

उसके इन दोनों स्टेटस देखने के बाद स्क्रीनशॉट लेकर उसकी शिकायत डीसीपी को दी और डीसीपी ने तुरंत एक्शन में आकर फयाज खान की बर्खास्तगी की रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेजी। डीसीपी ने बताया कि कॉन्स्टेबल द्वारा पुलिस नियमालवी का उल्लंघन किया गया है।

उन्होंने कहा कि उन्हें बीकेटी के एसएचओ ने जो आख्या भेजी थी उससे स्पष्ट हो रहा है कि फयान खान ने उत्तर प्रदेश पुलिस सोशल मीडिया पॉलिसी और 1991 नियमों का उल्लंघन किया गया है। ऐसे में कॉन्सटेबल फयाज खान के सस्पेंस की परमिशन के लिए चुनाव आयोग को पत्र भेज दिया गया।

बता दें कि फयाज खान के द्वारा अपडेट किए गए दोनों स्टेटस के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हैं। डीसीपी अभिजीत आर शंकर ने इस मामले में कार्रवाई को लेकर कहा है- “हमने सबूतों के साथ रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेज दी है। अगर वे इसे स्वीकार करते हैं तो हम कॉन्स्टेबल के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।”

हार्ट अटैक से हुई मुख्तार की मौत

गौरतलब है कि माफिया मुख्तार अंसारी की पिछले 28 मार्च 2024 को मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया था कि उसकी मौत हार्ट अटैक से हुई थी। हालाँकि मुख्तार के समर्थक प्रशासन पर इल्जाम लगाते रहे। उसके जनाजे में भी सैंकड़ों लोग आए थे। जानकारी के अनुसार गैंगस्टर मुख्तार के खिलाफ 61 केस दर्ज थे। इनमें हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, धोखाधड़ी, गुंडा एक्ट, आर्म्स एक्ट, गैंगस्टर एक्ट, सीएलए एक्ट से लेकर लेकर एनएसए तक शामिल थे। उसे करीब 8 मामलों में सजा हो गई थी बाकी में सुनवाई चल रही थी।

कोटा में जुमे की शाम राम बारात पर हमला, कई लोग घायल: मस्जिद के सामने DJ को तोड़ा, लैपटॉप भी छतिग्रस्त

राजस्थान के कोटा में शुक्रवार (29 मार्च 2024) को बड़ा बवाल हो गया। यहाँ स्थानीय मेले में चल रही रामलीला से जुड़ी राम बारात निकाली जा रही थी, तभी मस्जिद के पास पीछे से आई इस्लामी भीड़ ने हमला बोल दिया। इस भीड़ ने डीजे और सारा सामान तो तोड़ा ही, महिलाओं तक को नहीं छोड़ा। इस्लामी भीड़ के इस हमले में कई हिंदू पुरुष और महिलाएँ घायल हो गए।

ये मामला कैथून कस्बे का है। जहाँ राम बारात निकल रही थी। राम बारात में शामिल लोगों का आरोप है कि मुस्लिमों की भीड़ ने बारात पर हमला कर दिया और डीजे बंद करवाकर तार और लैपटॉप तोड़ दिए। इस हमले में कई लोग घायल हो गए। इसके बाद गुस्साए लोग थाने के बाहर इकट्ठा हो गए और मुस्लिम भीड़ पर कार्रवाई की माँग को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान भारी संख्या में जुटे लोगों ने न्याय माँगा और नारेबाजी की, जिन्हें हटाने के लिए पुलिस ने जमकर लाठियाँ भाँजी।

इस मामले में ग्रामीण एसपी करण शर्मा ने कहा कि राम बारात निकल रही थी। मस्जिद के सामने से राम बारात निकल रही थी। इस दौरान नमाज चल रही थी. डीजे बजाने की बात को लेकर विवाद हुआ था। किसी ने डीजे के वायर निकाल दिए। इसको लेकर दोनों पक्ष में कहासुनी हुई। फिलहाल स्थिति कंट्रोल में है।

बताया जा रहा है कि मुस्लिम पक्ष नमाज के समय डीजे बजाने व नारेबाजी करने का मामला दर्ज करवाया है पुलिस दोनों पक्षों के आरोपों की जाँच कर रही है पुलिस कस्बे में फ्लैग मार्च कर रही है और कोटा जिले के दूसरे थाना क्षेत्र के पुलिस अधिकारियों ने आकर मोर्चा संभाला।

जानकारी के मुताबिक, कैथून कस्बे में होली के अवसर पर 7 दिनों का मेला लगता है। इस मेले में रामलीला का भी आयोजन किया जाता है। इसी रामलीला से जुड़ी राम बारात संकट मोचन हनुमान मंदिर से रवाना हुई, जिसे नहर कृषि मंडी नहर तक पहुँचना था। इस दौरान जब ये बारात मस्जिद के सामने से होकर गुजरी, तब मुस्लिमों ने राम बारात पर हमला कर दिया।

विहिप के सह प्रांत मंत्री योगेश रेनवाल ने कहा कि राम बारात में शामिल लोगों पर हमले के बाद जब पीड़ितों ने हमलावरों पर कार्रवाई की माँग की, तो पुलिस ने उन पर ही लाठीचार्ज किया। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस ने निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की कैथून कस्बे को बंद कर प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं, पुलिस ने कहा कि कुछ आरोपितों को हिरासत में लिया गया है और उनसे पूछताछ चल रही है।