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6 साल में 6099 को ही दिया फायदा, बताया 1 साल में ही कर दिया 113693 का इलाज: RTI से केजरीवाल सरकार के ‘आरोग्य कोष’ में भी उजागर हुआ घपला

RTI के जरिए अरविंद केजरीवाल सरकार के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। विवेक पांडे द्वारा मार्च में फाइल की गई आरटीआई से पता चला है कि दिल्ली सरकार ने ‘दिल्ली आरोग्य कोष’ योजना को लेकर जनता को भ्रमित किया।

विवेक ने अपनी आरटीआई में जवाब माँगा था कि 2018 से 2024 के बीच दिल्ली सरकार की ‘आरोग्य डाक स्कीम’ में कितने लोगों ने फ्री इलाज पाया और इसमें कितना खर्चा आया। 11 मार्च 2024 को विवेक पांडे की इस आरटीआई का जवाब आया जो कि मीडिया को दी जा रही जानकारी से एकदम अलग और हैरान करने वाला था।

आरटीआई से खुलासा

आरटीआई से पता चलता है कि 31 मार्च 2018 से 24 जनवरी 2024 के बीच 6,099 मरीजों को मुफ्त इलाज दिया। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के अनुसार, 887 मरीज 2018-2019 में, 863 मरीज 2019-2020 में, 801 मरीज 2020-2021 में, 1084 मरीज 2021-2022 में, 1295 मरीज 2022-2023 में, और 1169 मरीज 2023-2024 में इस योजना से लाभान्वित हुए।

इस प्रकार पिछले 6 वर्षों में रोगियों की कुल संख्या लगभग 6099 है जिन्हें इस योजना का लाभ मिला। आगे आरटीआई के जवाब में 6099 लोगों के मुफ्त इलाज की सुविधा के लिए दिल्ली सरकार द्वारा किए गए खर्चे का विवरण भी दिया गया।

आरटीआई में पूछे गए सवाल

आरटीआई के अनुसार, AAP सरकार ने इस प्रक्रिया में कुल ₹66 करोड़ खर्च किए हैं। इनमें ₹9.65 करोड़ तो 2018-2019 में खर्च हुए, वहीं 2019-2020 में ₹8.33 करोड़ हुए। इसी तरह 2020-2021 में ₹8.63 करोड़ , 2021-2022 में ₹6.44 करोड़ , 2021-2022 में ₹11.36 करोड़ , 2022-2023 में ₹11.92 करोड़ और 2023-2024 में ₹10.2 करोड़ खर्च हुए हैं।

अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें भ्रमित करने वाली क्या बात है। तो आपको बता दें कि एक योजना के तहत लाभान्वित की संख्या कम होना धोखाधड़ी नहीं है, लेकिन उन लाभान्वितों को कई गुना बढ़ाकर अपना प्रचार करना जनता को भ्रमित करना ही है।

इंडियन एक्सप्रेस में 1 जनवरी को एक रिपोर्ट छपी थी। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था जनवरी 2023 से लेकर अक्टूबर 2023 के बीच कि इस योजना के तहत 1, 13, 693 लोग लाभान्वित हुए हैं। इतना ही नहीं इसमें ये भी दावा था कि 2022-2023 के तहत 1, 27, 785 लोगों ने मुफ्त इलाज पाया।

फोटो साभार: इंडियन एक्सप्रेस

रिपोर्ट दिल्ली सरकार के सूत्रों के हवाले से बनी थी जो कि साफ है कि उसके आँँकड़े और स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक द्वारा दिए गए आँकड़े अलग-अलग है। 1 साल में 1 लाख तो दूर पिछले 5 सालों में ये आँकड़ा एक लाख तक नहीं पहुँचा है।

अगर आरटीआई की मानें तो केवल 6099 लोगों को इस योजना का लाभ मिल पाया वो भी 2018 से अब तक, लेकिन केजरीवाल सरकार के सूत्रों ने इसे अलग ही तरीके से मीडिया में पेश कराया।

खास बात ये है कि आरटीआई जहाँ बता रही है कि 2022-2023 में 1295 कुल मरीजों को इलाज मिला वहीं दिल्ली सरकार के सूत्र का कहना था कि 1295 मरीज तो सिर्फ EWS के थे।

अब ये बात साफ नहीं है कि आखिर आरटीआई से आए आँकड़ों और दिल्ली सरकार के सूत्रों के दिए आँकड़ों में इतना कैसे फर्क है। लेकिन लाभान्वितों में इतना बड़ा अंतर देखकर कुछ गड़बड़ का अंदाजा को लगाया जा सकता है।

फोटो साभार: इंडियन एक्सप्रेस

इसके अतिरिक्त दिलचस्प बात यह है कि दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सितंबर 2022 में दावा किया था कि पिछले 5 वर्षों (2017-2022) में दिल्ली आरोग्य कोष योजना के तहत 4.3 लाख से अधिक मरीजों को मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलीं। अब आरटीआई में 2017 का आँकड़ा तो नहीं है लेकिन जिस तरह बाकी वर्षों के आँकड़े हैं उससे ये पता लगाया जा सकता है कि मात्र एक साल में इतने लाभान्वित तो नहीं हुए होंगे।

मनीष सिसोदिया ने यह भी दावा किया था कि दिल्ली सरकार ने पिछले 5 वर्षों (2017-2022) में दिल्ली आरोग्य कोष योजना के तहत ₹168.4 करोड़ खर्च किए। हालाँकि, 2018-2024 की अवधि के लिए आरटीआई उत्तर में स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों में मात्र ₹66 करोड़ का व्यय दिखाया गया है।

आरटीआई से हुए खुलासे पर विवेक पांडे ने ट्वीट भी किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि दिल्ली सरकार ने दावा किया कि 168 करोड़ खर्च हुए और 4.2 लाख मरीज लाभान्वित हुए। मगर, आरटीआई तो बताती है कि केवल 6099 मरीज ही लाभान्वित हुए। विवेक का पूछना है कि आखिर बाकी का सारा फंड गया कहाँ पर?

ज्ञानवापी ढाँचे के व्यास तहखाने में जारी रहेगी पूजा, भोजशाला में ASI सर्वे पर नहीं लगेगी रोक: वाराणसी से धार तक मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से झटका

सुप्रीम कोर्ट में दो अलग-अलग मामलों की सुनवाई में मुस्लिम पक्ष को तगड़ा झटका लगा है। काशी स्थित ज्ञानवापी ढाँचा मामले में सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने व्यास तहखाने में पूजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। वहीं, मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला में जारी ASI की सर्वे पर भी रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

ज्ञानवापी मामले पर सुनवाई के दौरान CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस जेबी परदीवाला की बेंच ने कहा कि 31 जनवरी 2024 के आदेश के चलते नमाज प्रभावित नहीं हुई है। ज्ञानवापी ढाँचा परिसर में स्थित व्यास तहखाने में हिंदुओं द्वारा की जा रही पूजा के खिलाफ अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमिटी ने याचिका लगाई थी। अब इस याचिका पर जुलाई के तीसरे सप्ताह में सुनवाई होगी।

सुनवाई के दौरान मस्जिद पक्ष के वकील हुजैफा अहमदी ने कहा कि निचली अदालत ने व्यास तहखाने में पूजा के अपने आदेश को लागू करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया था, लेकिन सरकार ने उसे तुरंत लागू कर दिया। हाई कोर्ट ने भी इस मामले राहत नहीं दी। हुजैफा ने सर्वोच्च न्यायालय से माँग की कि परिसर में स्थित व्यास तहखाने में पूजा पर तुरंत रोक लगाई जाए।

सुनवाई के दौरान भारत के CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, “तहखाने का प्रवेश दक्षिण से और मस्जिद का उत्तर से है। दोनों एक-दूसरे को प्रभावित नहीं करते हैं। फिलहाल पूजा और नमाज दोनों अपनी-अपनी जगह जारी रहे।” मस्जिद कमिटी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें हिंदुओं को पूजा करने की अनुमति देने वाले निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा गया था।

दूसरी तरफ धार के भोजशाला में ASI की जारी सर्वे पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगाने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एएसआई सर्वे के नतीजे के आधार पर उसकी अनुमति के बिना कोई फैसला न लिया जाए। बता दें कि भोजशाला पर मुस्लिम भी दावा करते हैं। इसी को लेकर हिंदुओं की याचिका पर ASI सर्वे कराई जा रही है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर ASI द्वारा भोजशाला का जारी सर्वे 11वें दिन भी जारी रहा। ASI के अधिकारी सुबह लगभग 8 बजे विवादित स्थल पहुँच गए और आगे का शुरू कर दिया। इस दौरान सुरक्षा के पर्याप्त प्रबंध किए गए हैं और भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है।

भोजशाला को लेकर हिंदू समाज का दावा है कि यह माता वाग्देवी का मंदिर है, जिसे राजा भोज परमार ने बनवाया था। इतिहास में भी इस बात के प्रमाण मिलते हैं कि अंग्रेज यहाँ से माँ सरस्वती की प्रतिमा निकाल कर इंग्लैंड ले गए, जो आज भी लंदन के संग्रहालय में सुरक्षित है। वहीं, मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है, जो 11वीं सदी है।

इस पूरे विवाद की शुरुआत 1902 से बताई जाती है। कहा जाता है कि धार के शिक्षा अधीक्षक काशीराम लेले ने मस्जिद के फर्श पर संस्कृत के श्लोक खुदे देखे थे। उन्होंने इसे भोजशाला बताया था। साल 1935 में धार के परमार महाराजा ने इमारत के बाहर तख्ती टंगवा दी, जिस पर भोजशाला और मस्जिद कमाल मौलाना लिखा था। तब से यह मामला जारी है।

ई-रिक्शा ड्राइवर राहुल और साथी सौरभ को पीटा, गुड्डू माली को चाकू घोंपा, पुलिस पर पत्थर फेंके: ‘अपने इलाके में’ राम का भजन सुन भड़की इस्लामी भीड़, लहराए फरसा-तलवार

मध्य प्रदेश के सागर जिले में सांप्रदायिक विवाद की खबर है। यहाँ ई-रिक्शा पर भगवान राम का गाना बजा रहे हिन्दू ड्राइवर की पिटाई और पत्थरबाजी की गई है। पत्थरबाजी रोकने के प्रयास में पुलिस के कई जवान घायल हुए हैं। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोली छोड़ने पड़े। शनिवार (30 मार्च, 2024) को हुई इस घटना से नाराज हिन्दू संगठनों ने थाने के आगे प्रदर्शन किया है और आरोपितों के घरों पर बुलडोजर चलाने की माँग उठाई है। FIR दर्ज कर के अब तक 15 आरोपितों को हिरासत में लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना सागर शहर के 12 मुहाल इलाके की है। यहाँ शनिवार (30 फरवरी, 2024) रंग पंचमी की रात लगभग 10 बजे ई-रिक्शा चलाने वाला 27 वर्षीय राहुल राठौर अपने साथी सौरभ के साथ 12 मुहाल इलाके से गुजर रहा था। उसके ई-रिक्शा में भगवान राम का गाना बज रहा था। इसी क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने राहुल को रोका और गाना बंद करने के लिए कहा। राहुल का आरोप है कि गाना बंद करने एक बावजूद लगभग 100 हमलावरों की भीड़ ने उनकी पिटाई शुरू कर दी।

भीड़ ने बीच-बचाव कर रहे सौरभ की भी पिटाई कर दी। कुछ लोगों ने ई-रिक्शे को भी पत्थरों से पीट कर चकनाचूर कर दिया। इस दौरान बेकाबू हो चुकी भीड़ 12 मुहाल इलाके में रहने वाले गुड्डू माली की दुकान तक पहुँच गई। फूल बेचने वाले गुड्डू माली के सीने में चाकू घोंपने का प्रयास किया गया। हमले में गुड्डू घायल हो गए जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। मामले की जानकारी होने पर राहुल और सौरभ की तरफ से भी लोग जमा होने लगे। दोनों पक्षों में गाली-गलौज पर पत्थरबाजी शुरू हो गई।

बताया जा रहा है कि मुस्लिम पक्ष के हमलावरों ने अपने घरों से पत्थरबाजी करने के साथ फरसे और तलवारें भी लहराईं थीं। इस बीच पुलिस भी मौके पर पहुँच गई। इस्लामी भीड़ पुलिस वालों पर भी हमलावर हो गई। कुछ पुलिसकर्मी पत्थरों के हमले में घायल भी हो गए जिनका इलाज चल रहा है। हालात को काबू करने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। हिंसक भीड़ द्वारा पुलिस के वाहनों को भी क्षतिग्रस्त करने का प्रयास किया गया। मौके पर भारी पुलिस बल लगा कर हालत को फिलहाल काबू में कर लिया गया है।

घायलों की तरफ से पुलिस को तहरीर दी गई है। इस तहरीर में हमलावरों में नानू, गुड्डू, इजाद और अब्बू सहित कई अन्य लोगों को नामजद किया गया है। दर्ज हुई कुल 3 FIR में कई अन्य अज्ञात भी हैं जिनको चिह्नित कर के खोजबीन की जा रही है। अब तक 15 हमलावरों को हिरासत में लिया गया है। हिन्दू संगठन के सदस्यों ने हमलावरों और पत्थरबाजों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग को ले कर थाने पर हंगामा किया है। आरोपितों के घरों पर बुलडोजर चलाने की भी माँग उठ रही है।

सुप्रिया श्रीनेत की जुबान पर चुनाव आयोग ने चलाई कैंची, कहा- बोलने से पहले ध्यान रखो: कंगना रनौत को टिकट मिलने पर पूछ रही थी ‘भाव’

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में कॉन्ग्रेस महिला प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत को चुनाव आयोग द्वारा फटकार लगाई गई है। आयोग ने उन्हें आगे से उनके बयानों को लेकर सावधान रहने को कहा है।

सुप्रिया श्रीनेत के साथ बंगाल में भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष पर भी चुनाव आयोग सख्त हुआ। दोनों पार्टियों के नेताओं को निर्वाचन आयोग ने आचार संहिता का उल्लंघन करने को दोषी माना है। उन्हें कहा गया है भविष्य में बयानबाजी करतते हुए ये लोग थोड़ सतर्क रहें।

इससे पहले कॉन्ग्रेस की महिला नेता सुप्रिया श्रीनेत के बयान और दिलीप घोष के बयान पर नोटिस जारी करके उनसे जवाब माँगा गया था। दोनों नेताओं ने अपने जवाब में स्वीकार किया कि उन्होंने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए निजी हमले किए। जवाब पाने के बाद निर्वाचन आयोग ने इन्हें चेतावनी दी कि आगे से ऐसे बयान न दिए जाएँ।

आयोग ने कहा, “वह आश्वस्त है कि दोनों नेताओं ने निम्न स्तर का व्यक्तिगत हमला किया और यह आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन है। उन्हें आदर्श आचार संहिता की अवधि के दौरान सार्वजनिक बयानों में सावधानी बरतने की चेतावनी दी गई है। आयोग द्वारा सोमवार से इन दोनों नेताओं के चुनाव संबंधी संवाद पर विशेष और अतिरिक्त निगरानी रखी जाएगी।”

आयोग ने अपने चेतावनी नोटिस की कॉपी पार्टी के अध्यक्षों को भी भेज दी है ताकि वे भी अपनी पार्टी के नेताओं को चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन और आपत्तिजनक बयानबाजी को लेकर आगाह कर सकें।

गौरतलब है कि सुप्रिया श्रीनेत के इंस्टा अकॉउंट से कंगना रनौत की फोटो शेयर करके उसपर अभद्र टिप्पणी की गई थी। इसमें कहा गया था कि मंडी में भाव क्या चल रहा है। इसके बाद इस मामले में बहुत बवाल हुआ और शिकायत चुनाव आयोग तक पहुँची। इस बीच सुप्रिया ने भी एक वीडियो डालकर इस पर सफाई दी। हालाँकि इससे फायदा कुछ नहीं हुआ।

वहीं दिलीप घोष ने भी ममता बनर्जी के लिए कहा था- “जब दीदी गोवा जाती हैं तो वह गोवा की बेटी बन जाती हैं, त्रिपुरा में वह कहती हैं मैं त्रिपुरा की बेटी हूँ। तय करें कि आपका पिता कौन है। ये ठीक बात नहीं है।” जिसके कारण दोनों नेताओं को नोटिस जारी हुआ था।

72 हूर के लालच में पढ़ने लगा कलमा, रखने लगा रोजा: जिम में कसरत करने जाता था हिंदू नाबालिग, डॉक्टर फैजान ने ब्रेनवॉश कर बना दिया ‘मुस्लिम’

हरियाणा के फरीदाबाद में एक डॉक्टर पर 16 साल के नाबालिग हिन्दू के धर्मांतरण का आरोप लगा है। डॉक्टर का नाम नाम फैज़ान अहमद बताया जा रहा है जिसने रूस में पढ़ाई की है। इस हरकत में डॉक्टर की बीवी भी शामिल बताई जा रही है। आरोप है कि फैज़ान अहमद के सम्पर्क में आने के बाद से नाबालिग को कलमा पढ़ाया गया। इसके बाद वह 72 हूरों के लालच में रोजे रखने लगा और नमाज़ पढ़ने लगा। रविवार (31 मार्च, 2024) को डॉक्टर और पीड़ित बच्चे के परिजनों में नोकझोंक भी हुई। पुलिस ने इस मामले का संज्ञान लिया है और जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना फरीदाबाद के थाना क्षेत्र BPTP की है। यहाँ के ओमेक्स स्पा सोसाइटी में एक हिन्दू परिवार जनवरी 2023 तक रहा था। आरोप है कि तब इसी परिवार का 15 वर्षीय लड़का सोसाइटी में ही बने जिम में जाया करता था। इसी जिम में डॉक्टर फैज़ान अहमद भी आता था। रूस में पढ़ा डॉक्टर फैज़ान भी इसी ओमेक्स स्पा सोसाइटी में ही अपनी पत्नी के साथ रहता है। नाबालिग के परिजन लगभग 1 साल पहले गुरुग्राम में शिफ्ट हो गए। यहाँ भी नाबालिग से फैज़ान अहमद की फोन पर बातचीत बरकरार रही।

बताया जा रहा है कि पिछले 6 महीने से नाबालिग के व्यवहार में तमाम बदलाव आने लगे। वह रोज़े रखने लगा और नमाज़ भी अदा करना शुरू कर दिया। जब बच्चे को उसके घर वालों ने समझाने की कोशिश की तो वह नाराजगी जताने लगा। उसने अपने घर वालों को जन्नत मिलने और एक ही अल्लाह जैसे तर्क देने शुरू कर दिए। पीड़ित के पिता ने बताया, “डॉक्टर द्वारा मेरे बेटे को डराया गया कि अगर इस्लाम कबूल कर लोगे तो जन्नत जाओगे और 72 हूरें मिलेंगी वर्ना जहन्नुम में जाना पड़ेगा। आप शैतान के हवाले कर दिए जाओगे।’

नाबालिग पीड़ित अपने परिवार की एकलौती संतान है। फिलहाल उसने हाल में ही कक्षा 12 की परीक्षा पास की है और अब दिल्ली से BBA की तैयारी कर रहा है। पीड़ित के परिजनों ने अन्य अभिभावकों से भी अपील की है कि अगर उनके बच्चे भी मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप आदि प्रयोग कर रहे हैं तो उन पर कड़ी नजर रखी जाए। उन्होंने कहा कि उनका बेटा गलत लोगों के चंगुल में फँस कर उन बातों पर यकीन करने लगा है जिसका कोई आधार ही नहीं है।

रविवार कोई पीड़ित के परिजन गुरुग्राम से फरीदाबाद डॉक्टर के घर शिकायत ले कर पहुँचे। उन्होंने डॉक्टर पर अपने बेटे का ब्रेनवॉश करने का आरोप लगाया। कहा जा रहा है कि डॉक्टर फैज़ान विदेश यात्रा पर है। उसके घर में मौजूद लोगों ने अपनी गलती मानने से इनकार कर दिया और मामले से पल्ला झाड़ लिया। इस बात पर बच्चे के घर वालों से डॉक्टर के परिजनों की नोकझोंक भी हुई। पीड़ित की माँ का यह भी कहना था कि फैज़ान ने उनके बेटे को कई खतरनाक ग्रुपों में भी जोड़ रखा है। इस नोकझोंक और पीड़ितों के बयान का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।

फरीदाबाद पुलिस ने इस घटना का संज्ञान लिया है। BPTP थाने के प्रभारी ने मीडिया को बताया है कि वायरल वीडियो का संज्ञान ले कर जाँच शुरू कर दी गई है। पीड़ित छात्र के परिजनों को थाने पर भी बुलवाया गया है। हालाँकि इस मामले में अभी तक FIR नहीं दर्ज हुई है। मामले के तूल पकड़ते ही विश्व हिन्दू ने भी इस विवाद में इंट्री की है। विहिप ने पुलिस से आरोपित डॉक्टर के खिलाफ जाँच करवा के कड़ी कार्रवाई की माँग उठानी शुरू कर दिया है।

‘आतिशी और सौरभ भारद्वाज को रिपोर्ट करता था विजय नायर’: ED के सामने केजरीवाल ने दो मंत्रियों के लिए नाम, कोर्ट में खुलासे के बाद सुनीता का मुँह ताकने लगे मंत्री

दिल्ली शराब घोटाले में गिरफ्तार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लेकर दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट में सोमवार (1 अप्रैल 2024) को सुनवाई हुई। कोर्ट ने केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 15 अप्रैल तक बढ़ा दी है। इस दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बताया कि पूछताछ में सीएम केजरीवाल ने अपने दो मंत्री सौरभ भारद्वाज और आतिशी का नाम लिया है। ED ने कोर्ट में पहली बार इन दोनों का नाम लिया है।

ED ने अदालत को बताया कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पूछताछ में बताया कि घोटाले का आरोपित विजय नायर सौरभ भारद्वाज और आतिशी को रिपोर्ट करते थे। जब ED यह बात कह रही थी, तब कोर्ट रूम में मौजूद अरविंद केजरीवाल चुप थे। इससे पहले 5 अक्टूबर 2023 को सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने भी कोर्ट में यही बात कही थी।

दरअसल, इससे पहले 28 मार्च 2024 को राऊज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीएम केजरीवाल ने लंबा-चौड़ा भाषण दिया था। उनके खिलाफ ED ने सी अरविंद के बयान का हवाला दिया था। इसको लेकर मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कोर्ट रूम में कहा था, मेरे घर पर ढेरों मंत्री आते रहते हैं। वो आपस में खुसुर-फुसुर करते रहते हैं, डॉक्युमेंट्स देते हैं।” उन्होंने पूछा था कि क्या ये बयान एक वर्तमान मुख्यमंत्री को गिरफ्तार करने के लिए पर्याप्त है।

ED की ओर से कोर्ट में पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू ने दलील दी कि विजय नायर सीएम केजरीवाल के करीबी रहे हैं। उन्होंने सीएम कैंप कार्यालय में भी काम किया है। हालाँकि, सीएम केजरीवाल इसका जवाब देने से बचते रहे कि नायर ने सीएम कैंप कार्यालय में काम करने वाले लोगों के बारे में जानकारी नहीं होने का दावा क्यों किया था।

ED जब कोर्ट में आतिशी और सौरभ भारद्वाज का जिक्र कर रही थी, तब भारद्वाज वहीं मौजूद थे। वे अपना नाम सुनकर चौंक गए। भारद्वाज ने अपने साथ खड़ी अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल की तरफ देखा। इस दौरान सुनीता केजरीवाल ने भी सौरभ भारद्वाज की तरफ देखा। 

बता दें कि इससे पहले मनीष सिसोदिया की मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने 5 अक्टूबर 2023 को इस बात का जिक्र किया था। सिंघवी ने कोर्ट को बताया था कि विजय नायर सौरभ भारद्वाज और आतिशी को रिपोर्ट करता था। सीएम केजरीवाल को नहीं।

दरअसल, विजय नायर कुछ साल तक आम आदमी पार्टी (AAP) के कम्युनिकेशन प्रभारी रहे हैं। वो एंटरटेनमेंट जगत के जाना-माना नाम हैं। नायर ने इंडी बैंड्स (Indie bands) के लिए मैनेजमेंट कंपनी OML यानी ओनली मच लाउडर शुरू की थी। बाद में उन्होंने स्टैंडअप कॉमेडी और लाइव म्यूजिक शो पर फोकस किया। ये एक एंटरटेनमेंट और इवेंट मीडिया कंपनी है।

विजय नायर इसके सीईओ और डायरेक्टर रहे हैं। साल 2018 में विजय नायर का नाम विवादों में तब आया, जब #MeToo कैंपेन के दौरान उन पर आरोप लगे। हालाँकि, कंपनी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। CBI की FIR में कहा गया है कि मनीष सिसोदिया के सहयोगी अर्जुन पांडे ने शराब कारोबारी समीर महेंद्रू से 2 से 4 करोड़ रुपए लिए थे, जो विजय नायर की ओर से ली गई थी।

जानिए कौन हैं सुधीर मेहता और समीर मेहता जो करेंगे ₹5000 करोड़ दान, पिता की जन्म शताब्दी पर किया ऐलान

टोरेंट ग्रुप को चलाने वाले अरबपति भाइयों सुधीर मेहता और समीर मेहता ने समूह के संस्थापक व अपने पिता उत्तमभाई नाथलाल पटेल की जन्म शताब्दी पर रविवार (31 मार्च 2024) को बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि उनके समूह ने सामाजिक कार्यों के लिए 5000 करोड़ रुपए दान करने का संकल्प लिया है।

यह योगदान टोरेंट समूह की कंपनियों के वैधानिक सीएसआर योगदान के अतिरिक्त करेंगे। इस दान का मैनेजमेंट UNM फाउंडेशन द्वारा किया जाएगा। वह इस दान का प्रयोग आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा के साथ-साथ पारिस्थितिकी और कला को बढ़ावा देने के लिए करेंगे।

बता दें कि फार्मास्युटिकल से लेकर पावर, गैस के क्षेत्र में जाना-माना ये समूह इस दान के साथ ही उस लिस्ट में शामिल हो गया है जिन्होंने सामाजिक परोपकार के लिए इतना बड़ा दान दिया हो। समूह द्वारा जारी की गई विज्ञप्ति में कहा गया है कि वो 1 अप्रैल से पाँच साल तक यूएनएम फाउंडेशन को 5,000 करोड़ रुपए यानी करीब 600 मिलियन डॉलर का दान देना शुरू करेंगे।

गौरतलब है कि टोरेंट के संस्थापक और अरबपति भाइयों के पिता उत्तमभाई नाथलाल पटेल ने साल 1959 में इस समूह की स्थापना की थी। आज के समय में ये एक बहुकराष्ट्रीय समूह है जो कि गुजरात के अहमदबादा में स्थित है। अब इस समूह को उत्तमभाई नाथलाल मेहता के बेटे सुधीर और समीर द्वारा चलाया जाता है।

शनिवार (30 मार्च 2024) को इन दोनों भाइयों ने अपने पिता की जन्म शताब्दी एक समारोह आयोजित करके मनाई। टोरेंट समूह के अध्यक्ष समीर मेहता ने इस मामले में कहा, “यूएनएम फाउंडेशन इस राशि का उपयोग अद्वितीय सामाजिक कार्य करने के लिए प्रयोग में लाएगा। बिन जाति, धर्म, लिंग देखे बिना आर्थिक स्तर से कमजोर लोगों को इसका लाभ दिया जाएगा।”

‘शपथ लेने के अगले दिन ही आएगा धमाधम काम’: RBI की 90वीं वर्षगाँठ पर PM ने जाहिर कर दिए ‘मोदी 3.0’ के इरादे, बोले – आपके पास 100 दिन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से कहा है कि वह अपनी तैयारी करके रखें क्योंकि उनके तीसरी बार पीएम बनने के बाद RBI के पास काफी काम आने वाला है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह बात रिजर्व बैंक के 90 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में कही।

पीएम मोदी ने रिजर्व बैंक के कर्मचारियों से कहा, “अभी मैं 100 दिन चुनाव में व्यस्त हूँ, आपको समय है, आपलोग सोच कर रखिए, क्योंकि शपथ लेने के अगले दिन ही धमाधम काम आने वाला है।” पीएम मोदी ने इस दौरान अपने तीसरी बार चुने जाने को लेकर विश्वास दिखाया।

प्रधानमंत्री ने इस दौरान भारतीय रिजर्व बैंक की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक की पहचान आज विश्व में उसके पेशेवर रवैये और काम के प्रति समर्पण को लेकर होती है। उन्होंने कहा 90 साल पर पहुँचना एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

रिजर्व बैंक द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने देश की आर्थिक स्थिति और देश के बैंकों में बीते वर्षों में आए बदलाव को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि जब वह 2014 में रिजर्व बैंक की 80वीं वर्षगाँठ में शामिल हुए थे तब स्थिति पूरी तरह से अलग थी। उन्होंने कहा कि तब हर व्यक्ति भारत के बैंकिंग क्षेत्र को लेकर आशंकाओं से भरा हुआ था।

उन्होंने कहा कि बीते 10 वर्षों में काफी कुछ बदल गया है और देश का बैंकिंग मॉडल भी काफी मजबूत हो गया है। उन्होंने कहा कि अब बैंकिंग क्षेत्र मुनाफे में है और कर्ज की भी गति काफी तेज है। पीएम मोदी ने आँकड़े पेश करते हुए कहा कि 2014 में देश के बैंकों का नोंन परफोर्मिंग एसेट (NPA) लगभग 11% के आसपास था जबकि यह घट कर अब 3% हो गया है।

पीएम ने इस दौरान सरकारी बैकों को मजबूत करने के लिए उठाए गए क़दमों को भी बताया। उन्होंने कहा कि देश के सरकारी बैंकों को मजबूत करने के लिए उन्हें ₹3 लाख करोड़ की पूँजी उपलब्ध करवाई गई। बैंकिंग में प्रशासन को मजबूत किया गया।

रिज़र्व बैंक के इस कार्यक्रम में पीएम मोदी नें कहा कि पिच्च्ले 10 वर्षों में जितना विकास हुआ है वह केवल एक ट्रेलर है। देश को आगे ले जाने के लिए काफी कुछ करना अभी बाकी है। भारतीय रिजर्व बैंक के 90 वर्ष पूरे होने पर पीएम मोदी ने एक सिक्का भी जारी किया।

लोकसभा चुनाव तक कॉन्ग्रेस को मिली मोहलत, सुप्रीम कोर्ट से बोला आयकर विभाग- अभी नहीं करेंगे ₹3500 करोड़ की वसूली

आयकर विभाग द्वारा 3500 करोड़ रुपए की टैक्स की माँग के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुँची कॉन्ग्रेस को फिलहाल राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान आयकर विभाग ने सोमवार (1 अप्रैल 2024) को कहा कि लोकसभा चुनावों के मद्देनजर वह कॉन्ग्रेस के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेगा, क्योंकि वह पार्टी के लिए परेशानी खड़ी करना नहीं चाहता है।

बार एंच बेंच के अनुसार, इस मामले की सुनवाई जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच में हुई। आयकर विभाग की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (SG Mehta) पेश हुए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केस की अगली सुनवाई 24 जुलाई के लिए तय की है।

मामले की सुनवाई करते हुए बेंच ने कहा, “इन अपीलों में जो मुद्दे उठे हैं उन पर अभी निर्णय होना बाकी है, लेकिन अब की स्थिति को ध्यान में रखते हुए (आयकर) विभाग इस मामले को तूल नहीं देना चाहता है और कहता है कि इस संबंध में लगभग ₹3,500 करोड़ की कर माँग को लेकर कोई भी कठोर कदम नहीं उठाया जाएगा। इस मामले को जुलाई के दूसरे सप्ताह में सूचीबद्ध करें।”

एसजी मेहता ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने इस साल आयकर बकाया के लगभग ₹134 करोड़ का भुगतान किया है। इसके बाद पहले से निर्धारित मानदंडों के आधार पर अब ₹1,700 करोड़ की अतिरिक्त माँग की गई है। केंद्र सरकार के वकील ने अदालत को आश्वस्त किया कि लंबित बकाये की वसूली लोकसभा चुनाव के बाद तक के लिए टाल दी जाएगी।

वहीं, कॉन्ग्रेस की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “27, 28, 29 मार्च को… एक ब्लॉक मूल्यांकन हुआ… उन्होंने (आयकर प्राधिकरण) संपत्तियों की कुर्की से 135 करोड़ रुपये एकत्र किए हैं… हम (कॉन्ग्रेस) कोई लाभ कमाने वाला संगठन नहीं हैं और केवल एक राजनीतिक दल हैं।”

बता दें कि आयकर विभाग द्वारा मूल्यांकन वर्ष 2014-15, 2015-16 और 2016-17 के पुनर्मूल्यांकन शुरू किया गया था। इसके बाद पार्टी इस पर रोक लगाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट पहुँची थी। हालाँकि, हाई कोर्ट ने कॉन्ग्रेस की इस याचिका को 22 मार्च को खारिज कर दिया था।

इसके बाद आयकर विभाग ने मूल्यांकन वर्ष 2017-18, 2018-19, 2019-20 और 2020-21 के लिए भी पुनर्मूल्यांकन शुरू कर दिया। इसके खिलाफ भी कॉन्ग्रेस दिल्ली हाई कोर्ट पहुँची, लेकिन 28 मार्च 2024 को उच्च न्यायालय इसे भी खारिज कर दिया।

इसके ठीक एक दिन बाद 29 मार्च 2024 को कॉन्ग्रेस ने कहा कि उसे मूल्यांकन वर्ष 2017-18 और 2020-21 के लिए 1,823 करोड़ रुपए के कर चुकाने के नोटिस मिले। आयकर विभाग ने पार्टी को तीन और नोटिस जारी किए हैं, जिससे कुल कर माँग 3,567 करोड़ रुपए हो गई हैं।

विला में OTT प्लेटफॉर्म के लिए बना रहे थे ब्लू फिल्म, 5 लड़कियों सहित कुल 13 गिरफ्तार: पॉर्न रैकेट का भंडाफोड़, कई राज्यों के युवक-युवतियाँ शामिल

महाराष्ट्र के पुणे में पुलिस ने अश्लील वीडियो बनाने वाले रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में कुल 13 आरोपितों की गिरफ्तारी की गई है। इन लोगों में कई राज्यों के युवक और युवतियाँ शामिल हैं। माना जा रहा है कि ये वीडियो तमाम OTT प्लेटफॉर्म के लिए बनाए जा रहे थे। पुलिस ने कुल 18 लोगों पर FIR दर्ज किया है जिसमें शूटिंग के लिए अपना विला किराए पर देने वाला मकान मालिक भी शामिल है। पुलिस ने यह कार्रवाई शनिवार (30 मार्च 2024) को की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना लोनावला के पाटन गाँव में बने अर्णव विला की है। यहाँ पुलिस को कुछ बाहरी लड़के और लड़कियों की मौजूदगी की सूचना मिली। सूचना में इन सभी के द्वारा ब्लू फिल्म बनाने की भी बात कही गई थी। मिली सूचना पर पुलिस ने टीम गठित कर के 30 मार्च को अर्णव विला पर दबिश दी। पुलिस अधिकारी कार्तिक के मुताबिक सूचना सही पाई गई। विला में कुल 15 लोग पॉर्न फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। शूटिंग के बाद इन फिल्मों को वेबसाइट और एप पर डालने की तैयारी थी।

डिप्टी एसपी कार्तिक ने आगे बताया कि अश्लील फिल्म बनाने वाले कुल 15 लोगों पर केस दर्ज किया गया है। इसमें से 13 की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें से 5 लड़कियाँ है। इसके अतिरिक्त मकान मालिक और केयर टेकर सहित 3 अन्य लोगों पर भी FIR दर्ज की गई है। इन सभी 18 आरोपितों पर IPC की धारा 292, 293 के अलावा आईटी एक्ट की धारा 67, 68 और स्त्री अशिष्ट रूपण (प्रतिषेध) अधिनियम की धारा 3, 4, 6, 7 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस का कहना है कि अश्लील वीडियो बनाने वाले इस पूरे चेन की जाँच पड़ताल की जा रही है।

गिरफ्तार आरोपितों के पास से कैमरे और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बरामद हुए हैं। इन सभी की जाँच करवाई जा रही है। इस घटना के बाद फरार 5 आरोपितों की तलाश के लिए दबिश दी जा रही है। गिरफ्तार आरोपितों को पुलिस ने अदालत में पेश किया है। गौरतलब है कि भारत में अश्लील वीडियो बनाना कानूनन प्रतिबंधित है।