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‘आतिशी और सौरभ भारद्वाज को रिपोर्ट करता था विजय नायर’: ED के सामने केजरीवाल ने दो मंत्रियों के लिए नाम, कोर्ट में खुलासे के बाद सुनीता का मुँह ताकने लगे मंत्री

दिल्ली शराब घोटाले में गिरफ्तार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लेकर दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट में सोमवार (1 अप्रैल 2024) को सुनवाई हुई। कोर्ट ने केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 15 अप्रैल तक बढ़ा दी है। इस दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बताया कि पूछताछ में सीएम केजरीवाल ने अपने दो मंत्री सौरभ भारद्वाज और आतिशी का नाम लिया है। ED ने कोर्ट में पहली बार इन दोनों का नाम लिया है।

ED ने अदालत को बताया कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पूछताछ में बताया कि घोटाले का आरोपित विजय नायर सौरभ भारद्वाज और आतिशी को रिपोर्ट करते थे। जब ED यह बात कह रही थी, तब कोर्ट रूम में मौजूद अरविंद केजरीवाल चुप थे। इससे पहले 5 अक्टूबर 2023 को सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने भी कोर्ट में यही बात कही थी।

दरअसल, इससे पहले 28 मार्च 2024 को राऊज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीएम केजरीवाल ने लंबा-चौड़ा भाषण दिया था। उनके खिलाफ ED ने सी अरविंद के बयान का हवाला दिया था। इसको लेकर मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कोर्ट रूम में कहा था, मेरे घर पर ढेरों मंत्री आते रहते हैं। वो आपस में खुसुर-फुसुर करते रहते हैं, डॉक्युमेंट्स देते हैं।” उन्होंने पूछा था कि क्या ये बयान एक वर्तमान मुख्यमंत्री को गिरफ्तार करने के लिए पर्याप्त है।

ED की ओर से कोर्ट में पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू ने दलील दी कि विजय नायर सीएम केजरीवाल के करीबी रहे हैं। उन्होंने सीएम कैंप कार्यालय में भी काम किया है। हालाँकि, सीएम केजरीवाल इसका जवाब देने से बचते रहे कि नायर ने सीएम कैंप कार्यालय में काम करने वाले लोगों के बारे में जानकारी नहीं होने का दावा क्यों किया था।

ED जब कोर्ट में आतिशी और सौरभ भारद्वाज का जिक्र कर रही थी, तब भारद्वाज वहीं मौजूद थे। वे अपना नाम सुनकर चौंक गए। भारद्वाज ने अपने साथ खड़ी अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल की तरफ देखा। इस दौरान सुनीता केजरीवाल ने भी सौरभ भारद्वाज की तरफ देखा। 

बता दें कि इससे पहले मनीष सिसोदिया की मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने 5 अक्टूबर 2023 को इस बात का जिक्र किया था। सिंघवी ने कोर्ट को बताया था कि विजय नायर सौरभ भारद्वाज और आतिशी को रिपोर्ट करता था। सीएम केजरीवाल को नहीं।

दरअसल, विजय नायर कुछ साल तक आम आदमी पार्टी (AAP) के कम्युनिकेशन प्रभारी रहे हैं। वो एंटरटेनमेंट जगत के जाना-माना नाम हैं। नायर ने इंडी बैंड्स (Indie bands) के लिए मैनेजमेंट कंपनी OML यानी ओनली मच लाउडर शुरू की थी। बाद में उन्होंने स्टैंडअप कॉमेडी और लाइव म्यूजिक शो पर फोकस किया। ये एक एंटरटेनमेंट और इवेंट मीडिया कंपनी है।

विजय नायर इसके सीईओ और डायरेक्टर रहे हैं। साल 2018 में विजय नायर का नाम विवादों में तब आया, जब #MeToo कैंपेन के दौरान उन पर आरोप लगे। हालाँकि, कंपनी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। CBI की FIR में कहा गया है कि मनीष सिसोदिया के सहयोगी अर्जुन पांडे ने शराब कारोबारी समीर महेंद्रू से 2 से 4 करोड़ रुपए लिए थे, जो विजय नायर की ओर से ली गई थी।

जानिए कौन हैं सुधीर मेहता और समीर मेहता जो करेंगे ₹5000 करोड़ दान, पिता की जन्म शताब्दी पर किया ऐलान

टोरेंट ग्रुप को चलाने वाले अरबपति भाइयों सुधीर मेहता और समीर मेहता ने समूह के संस्थापक व अपने पिता उत्तमभाई नाथलाल पटेल की जन्म शताब्दी पर रविवार (31 मार्च 2024) को बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि उनके समूह ने सामाजिक कार्यों के लिए 5000 करोड़ रुपए दान करने का संकल्प लिया है।

यह योगदान टोरेंट समूह की कंपनियों के वैधानिक सीएसआर योगदान के अतिरिक्त करेंगे। इस दान का मैनेजमेंट UNM फाउंडेशन द्वारा किया जाएगा। वह इस दान का प्रयोग आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा के साथ-साथ पारिस्थितिकी और कला को बढ़ावा देने के लिए करेंगे।

बता दें कि फार्मास्युटिकल से लेकर पावर, गैस के क्षेत्र में जाना-माना ये समूह इस दान के साथ ही उस लिस्ट में शामिल हो गया है जिन्होंने सामाजिक परोपकार के लिए इतना बड़ा दान दिया हो। समूह द्वारा जारी की गई विज्ञप्ति में कहा गया है कि वो 1 अप्रैल से पाँच साल तक यूएनएम फाउंडेशन को 5,000 करोड़ रुपए यानी करीब 600 मिलियन डॉलर का दान देना शुरू करेंगे।

गौरतलब है कि टोरेंट के संस्थापक और अरबपति भाइयों के पिता उत्तमभाई नाथलाल पटेल ने साल 1959 में इस समूह की स्थापना की थी। आज के समय में ये एक बहुकराष्ट्रीय समूह है जो कि गुजरात के अहमदबादा में स्थित है। अब इस समूह को उत्तमभाई नाथलाल मेहता के बेटे सुधीर और समीर द्वारा चलाया जाता है।

शनिवार (30 मार्च 2024) को इन दोनों भाइयों ने अपने पिता की जन्म शताब्दी एक समारोह आयोजित करके मनाई। टोरेंट समूह के अध्यक्ष समीर मेहता ने इस मामले में कहा, “यूएनएम फाउंडेशन इस राशि का उपयोग अद्वितीय सामाजिक कार्य करने के लिए प्रयोग में लाएगा। बिन जाति, धर्म, लिंग देखे बिना आर्थिक स्तर से कमजोर लोगों को इसका लाभ दिया जाएगा।”

‘शपथ लेने के अगले दिन ही आएगा धमाधम काम’: RBI की 90वीं वर्षगाँठ पर PM ने जाहिर कर दिए ‘मोदी 3.0’ के इरादे, बोले – आपके पास 100 दिन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से कहा है कि वह अपनी तैयारी करके रखें क्योंकि उनके तीसरी बार पीएम बनने के बाद RBI के पास काफी काम आने वाला है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह बात रिजर्व बैंक के 90 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में कही।

पीएम मोदी ने रिजर्व बैंक के कर्मचारियों से कहा, “अभी मैं 100 दिन चुनाव में व्यस्त हूँ, आपको समय है, आपलोग सोच कर रखिए, क्योंकि शपथ लेने के अगले दिन ही धमाधम काम आने वाला है।” पीएम मोदी ने इस दौरान अपने तीसरी बार चुने जाने को लेकर विश्वास दिखाया।

प्रधानमंत्री ने इस दौरान भारतीय रिजर्व बैंक की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक की पहचान आज विश्व में उसके पेशेवर रवैये और काम के प्रति समर्पण को लेकर होती है। उन्होंने कहा 90 साल पर पहुँचना एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

रिजर्व बैंक द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने देश की आर्थिक स्थिति और देश के बैंकों में बीते वर्षों में आए बदलाव को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि जब वह 2014 में रिजर्व बैंक की 80वीं वर्षगाँठ में शामिल हुए थे तब स्थिति पूरी तरह से अलग थी। उन्होंने कहा कि तब हर व्यक्ति भारत के बैंकिंग क्षेत्र को लेकर आशंकाओं से भरा हुआ था।

उन्होंने कहा कि बीते 10 वर्षों में काफी कुछ बदल गया है और देश का बैंकिंग मॉडल भी काफी मजबूत हो गया है। उन्होंने कहा कि अब बैंकिंग क्षेत्र मुनाफे में है और कर्ज की भी गति काफी तेज है। पीएम मोदी ने आँकड़े पेश करते हुए कहा कि 2014 में देश के बैंकों का नोंन परफोर्मिंग एसेट (NPA) लगभग 11% के आसपास था जबकि यह घट कर अब 3% हो गया है।

पीएम ने इस दौरान सरकारी बैकों को मजबूत करने के लिए उठाए गए क़दमों को भी बताया। उन्होंने कहा कि देश के सरकारी बैंकों को मजबूत करने के लिए उन्हें ₹3 लाख करोड़ की पूँजी उपलब्ध करवाई गई। बैंकिंग में प्रशासन को मजबूत किया गया।

रिज़र्व बैंक के इस कार्यक्रम में पीएम मोदी नें कहा कि पिच्च्ले 10 वर्षों में जितना विकास हुआ है वह केवल एक ट्रेलर है। देश को आगे ले जाने के लिए काफी कुछ करना अभी बाकी है। भारतीय रिजर्व बैंक के 90 वर्ष पूरे होने पर पीएम मोदी ने एक सिक्का भी जारी किया।

लोकसभा चुनाव तक कॉन्ग्रेस को मिली मोहलत, सुप्रीम कोर्ट से बोला आयकर विभाग- अभी नहीं करेंगे ₹3500 करोड़ की वसूली

आयकर विभाग द्वारा 3500 करोड़ रुपए की टैक्स की माँग के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुँची कॉन्ग्रेस को फिलहाल राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान आयकर विभाग ने सोमवार (1 अप्रैल 2024) को कहा कि लोकसभा चुनावों के मद्देनजर वह कॉन्ग्रेस के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेगा, क्योंकि वह पार्टी के लिए परेशानी खड़ी करना नहीं चाहता है।

बार एंच बेंच के अनुसार, इस मामले की सुनवाई जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच में हुई। आयकर विभाग की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (SG Mehta) पेश हुए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केस की अगली सुनवाई 24 जुलाई के लिए तय की है।

मामले की सुनवाई करते हुए बेंच ने कहा, “इन अपीलों में जो मुद्दे उठे हैं उन पर अभी निर्णय होना बाकी है, लेकिन अब की स्थिति को ध्यान में रखते हुए (आयकर) विभाग इस मामले को तूल नहीं देना चाहता है और कहता है कि इस संबंध में लगभग ₹3,500 करोड़ की कर माँग को लेकर कोई भी कठोर कदम नहीं उठाया जाएगा। इस मामले को जुलाई के दूसरे सप्ताह में सूचीबद्ध करें।”

एसजी मेहता ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने इस साल आयकर बकाया के लगभग ₹134 करोड़ का भुगतान किया है। इसके बाद पहले से निर्धारित मानदंडों के आधार पर अब ₹1,700 करोड़ की अतिरिक्त माँग की गई है। केंद्र सरकार के वकील ने अदालत को आश्वस्त किया कि लंबित बकाये की वसूली लोकसभा चुनाव के बाद तक के लिए टाल दी जाएगी।

वहीं, कॉन्ग्रेस की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “27, 28, 29 मार्च को… एक ब्लॉक मूल्यांकन हुआ… उन्होंने (आयकर प्राधिकरण) संपत्तियों की कुर्की से 135 करोड़ रुपये एकत्र किए हैं… हम (कॉन्ग्रेस) कोई लाभ कमाने वाला संगठन नहीं हैं और केवल एक राजनीतिक दल हैं।”

बता दें कि आयकर विभाग द्वारा मूल्यांकन वर्ष 2014-15, 2015-16 और 2016-17 के पुनर्मूल्यांकन शुरू किया गया था। इसके बाद पार्टी इस पर रोक लगाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट पहुँची थी। हालाँकि, हाई कोर्ट ने कॉन्ग्रेस की इस याचिका को 22 मार्च को खारिज कर दिया था।

इसके बाद आयकर विभाग ने मूल्यांकन वर्ष 2017-18, 2018-19, 2019-20 और 2020-21 के लिए भी पुनर्मूल्यांकन शुरू कर दिया। इसके खिलाफ भी कॉन्ग्रेस दिल्ली हाई कोर्ट पहुँची, लेकिन 28 मार्च 2024 को उच्च न्यायालय इसे भी खारिज कर दिया।

इसके ठीक एक दिन बाद 29 मार्च 2024 को कॉन्ग्रेस ने कहा कि उसे मूल्यांकन वर्ष 2017-18 और 2020-21 के लिए 1,823 करोड़ रुपए के कर चुकाने के नोटिस मिले। आयकर विभाग ने पार्टी को तीन और नोटिस जारी किए हैं, जिससे कुल कर माँग 3,567 करोड़ रुपए हो गई हैं।

विला में OTT प्लेटफॉर्म के लिए बना रहे थे ब्लू फिल्म, 5 लड़कियों सहित कुल 13 गिरफ्तार: पॉर्न रैकेट का भंडाफोड़, कई राज्यों के युवक-युवतियाँ शामिल

महाराष्ट्र के पुणे में पुलिस ने अश्लील वीडियो बनाने वाले रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में कुल 13 आरोपितों की गिरफ्तारी की गई है। इन लोगों में कई राज्यों के युवक और युवतियाँ शामिल हैं। माना जा रहा है कि ये वीडियो तमाम OTT प्लेटफॉर्म के लिए बनाए जा रहे थे। पुलिस ने कुल 18 लोगों पर FIR दर्ज किया है जिसमें शूटिंग के लिए अपना विला किराए पर देने वाला मकान मालिक भी शामिल है। पुलिस ने यह कार्रवाई शनिवार (30 मार्च 2024) को की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना लोनावला के पाटन गाँव में बने अर्णव विला की है। यहाँ पुलिस को कुछ बाहरी लड़के और लड़कियों की मौजूदगी की सूचना मिली। सूचना में इन सभी के द्वारा ब्लू फिल्म बनाने की भी बात कही गई थी। मिली सूचना पर पुलिस ने टीम गठित कर के 30 मार्च को अर्णव विला पर दबिश दी। पुलिस अधिकारी कार्तिक के मुताबिक सूचना सही पाई गई। विला में कुल 15 लोग पॉर्न फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। शूटिंग के बाद इन फिल्मों को वेबसाइट और एप पर डालने की तैयारी थी।

डिप्टी एसपी कार्तिक ने आगे बताया कि अश्लील फिल्म बनाने वाले कुल 15 लोगों पर केस दर्ज किया गया है। इसमें से 13 की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें से 5 लड़कियाँ है। इसके अतिरिक्त मकान मालिक और केयर टेकर सहित 3 अन्य लोगों पर भी FIR दर्ज की गई है। इन सभी 18 आरोपितों पर IPC की धारा 292, 293 के अलावा आईटी एक्ट की धारा 67, 68 और स्त्री अशिष्ट रूपण (प्रतिषेध) अधिनियम की धारा 3, 4, 6, 7 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस का कहना है कि अश्लील वीडियो बनाने वाले इस पूरे चेन की जाँच पड़ताल की जा रही है।

गिरफ्तार आरोपितों के पास से कैमरे और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बरामद हुए हैं। इन सभी की जाँच करवाई जा रही है। इस घटना के बाद फरार 5 आरोपितों की तलाश के लिए दबिश दी जा रही है। गिरफ्तार आरोपितों को पुलिस ने अदालत में पेश किया है। गौरतलब है कि भारत में अश्लील वीडियो बनाना कानूनन प्रतिबंधित है।

‘शादीशुदा हूँ, पर हम दोस्त बन सकते हैं’: रावण को बीफ परोसती माँ सीता, हनुमान जी की पूँछ बन गई एंटीना… पॉन्डिचेरी यूनिवर्सिटी में हिन्दू विरोधी नाटक के विरोध में ABVP का मार्च

पॉन्डिचेरी यूनिवर्सिटी में भगवान राम और माँ सीता पर आपत्तिजनक नाटक के खिलाफ ABVP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) ने विरोध प्रदर्शन किया है। संगठन ने विश्वविद्यालय पर हिन्दू भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप लगाया है। ABVP की तमिलनाडु यूनिट इसे लेकर मुखर है। PU के ये छात्र जिस नाटक को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, उसे शुक्रवार (29 मार्च, 2024) को आयोजित किया गया था। ‘डिपार्टमेंट ऑफ परफार्मिंग आर्ट्स’ ने इसे आयोजित किया था।

इसमें रामायण को लेकर मजाक बनाया गया था। इसमें दिखाया गया कि माँ सीता रावण को बीफ परोस रही हैं। साथ ही हनुमान जी के किरदार के साथ भी छेड़छाड़ की गई। ‘Ezhini 2k14’ कार्यक्रम के तहत ये प्ले किया गया था। इस प्ले का नाम ‘सोमायणम’ रखा गया था। इसमें माँ सीता के किरदार का नाम ‘गीता’ और नृत्य करते हुए रावण को ‘भावना’ नाम दिया गया। वहीं सीता हरण वाले दृश्य में दिखाया गया कि माँ सीता रावण को गोमांस खाने के लिए दे रही हैं।

इसमें सीता वाले किरदार से कहलवाया गया है, “मैं शादीशुदा हूँ, लेकिन हम दोस्त बन सकते हैं।” ABVP ने कहा है कि रामायण का इस तरह अपमानजनक चित्रण करोड़ों हिन्दुओं को ठेस पहुँचाने वाला है। PU में सक्रिय वामपंथी दलों के छात्र संगठनों पर इस नाटक की योजना बनाने और इसे क्रियान्वित करने का आरोप है। इसी तरह हनुमान जी को इस नाटक में ‘कांजनेय’ दिखाया गया। इसमें हनुमान जी की पूँछ को एंटीना के रूप में दिखाया गया, और बताया गया कि वो इसी का इस्तेमाल कर के भगवान राम के साथ संचार स्थापित करते हैं।

ABVP का आरोप है कि ऐसे कृत्यों के जरिए सांप्रदायिक घृणा फैलाने का भी काम किया गया। संगठन ने कहा कि वो ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी (FoE)’ में यकीन करती है, लेकिन इसमें जिम्मेदारी का भाव होना चाहिए। इस ड्रामा को लिखने और इसका निर्देशन करने वाले MPA 1st ईयर के पुष्पराज सहित इसमें शामिल अभिनेताओं मिथुन कृष्णा, श्रीपार्वती, आदित्य बेबी और विशाख भसी को यूनिवर्सिटी से निकाले जाने की माँग की गई है। साथ ही HoD श्रवण वेलु के खिलाफ भी कार्रवाई की माँग हुई है।

तिहाड़ी हुए दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल: दिल्ली की कोर्ट ने शराब घोटाले में 15 अप्रैल तक के लिए जेल भेजा, ED ने बताया- पूछताछ में नहीं कर रहे हैं सहयोग

शराब घोटाला मामले में जेल में बंद दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की न्यायिक हिरासत आज 15 अप्रैल तक बढ़ा दी गई है। प्रवर्तन निदेशालय ने कोर्ट को बताया था कि केजरीवाल उन्हें पूछताछ में समर्थन नहीं कर रहे हैं। इसके बाद अदालत ने उनकी हिरासत को बढ़ा दिया। अब बताया जा रहा है कि तिहाड़ जेल के नंबर पाँच में रहेंगे

जानकारी के मुताबिक ईडी ने कोर्ट से कहा था, “हम अरविंद केजरीवाल की ज्यूडिशियल कस्टडी की माँग करते हैं। केजरीवाल हमें कोई सहयोग नहीं कर रहे हैं। वो हमें गुमराह कर रहे हैं। इन्होंने हमें बताया कि विजय नायर इन्हें नहीं रिपोर्ट करते हैं। आतिशी को करते हैं।”

ईडी ने यह भी बताया कि केजरीवाल अपने फोन का पासवर्ड नहीं शेयर कर रहे हैं इसलिए ईडी इनकी कस्टडी की माँग करती है। जाँच एजेंसी ने कस्टडी माँगते हुए अदालत को यह भी दलील दी कि वो एक मोबाइल फोन से डेटा निकाला गया है और उसका एनालिसिस कर रहे हैं।

इसके अलावा ईडी ने यह भी बताया कि उन्हें केजरीवाल के घर की तलाशी के दौरान 4 डिजिटल डिवाइस मिले थे। जब सीएम से इसका पासवर्ड माँगा गया तो उन्होंने इसे देने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि अपने वकीलों से बात करने के बाद ही वो शेयर करेंगे।

उल्लेखनीय है कि जहाँ अरविंद केजरीवाल की हिरासत 15 दिन और बढ़ गई है। वहीं केजरीवाल ने जेल में रहने के लिए तीन किताबों की माँग की है। उन्होंने इसमें रामायण, महाभारत और पत्रकार नीरजा चौधरी द्वारा लिखित हाऊ प्राइम मिनिस्टर डिसाइड की माँग की है। इससे पहले उन्होंने दवा, स्पेशल डाइट और किताब देने की माँग की थी।

बता दें कि इस मामले के अलावा केजरीवाल से जुड़ा एक अन्य मामला कोर्ट में सुना गया। यह केस उनके द्वारा जेल से जारी किए गए सरकारी आदेश से संबंधित था। हालाँकि एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने सुनवाई करते हुए उसकी याचिका को खारिज कर दिया।

इस बीच केजरीवाल की एक वीडियो भी सामने आई है। इस वीडियो में केजरीवाल कोर्ट में जाते हुए कहते हैं- जो पीएम मोदी कर रहे हैं वो देश के लिए अच्छा नहीं है।

मथुरा के विवादित शाही ईदगाह में कृष्ण कूप की पूजा, शीतला अष्टमी पर पहुँची हिन्दू महिलाएँ: श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष समेत 7 हिरासत में

मथुरा के विवादित शाही ईदगाह ढाँचा के भीतर हिन्दू महिलाओं ने कृष्ण कूप पर पूजा की है। महिलाओं ने शीतला अष्टमी के मौके पर पारम्परिक रूप से बसौडे की पूजा अर्चना सम्पन्न की है। इस मामले में पूजा के अधिकार को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका पर सोमवार (1 अप्रैल, 2024) को सुनवाई भी होनी है।

जानकारी के अनुसार, विवादित शाही ईदगाह ढाँचा परिसर में स्थित इस कृष्ण कूप पर 34 हिन्दू महिलाएँ सोमवार सुबह (1अप्रैल, 2024) पहुँची। इन महिलाओं ने सुबह 5 बजे पारम्परिक रूप से पूजा संपन्न की। महिलाओं ने शीतला माता की भी पूजा की। हालाँकि, इस कुएँ की पूजा और किसी को नहीं करने दी गई।

कृष्ण कूप की पूजा के लिए जाने वाले अन्य सात व्यक्तियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इन लोगों में श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। इन लोगों ने पहले ही इस मामले में ऐलान कर रखा था कि वह शीतला अष्टमी के दिन जरुर पूजा करेंगे। इसको लेकर इस परिसर में पुलिस बल तैनात किया गया है। इस कुएँ में पूजा को लेकर CM योगी आदित्यनाथ को पत्र भी लिखा जा चुका है।

इससे पहले इस कृष्ण कूप पर पूजा के अधिकार को इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका भी दाखिल की गई थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट के समक्ष यह याचिका श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेन्द्र प्रताप सिंह ने लगाई थी। उन्होंने कहा हथा कि शाही ईदगाह विवादित ढाँचा में सीढ़ियों के पास बने कुँए पर लम्बे समय से हिन्दू पूजा करते आए हैं, लेकिन अब मुस्लिम इसमें व्यवधान उत्पन्न कर रहे हैं। यह कुआँ हिन्दुओं के लिए धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है और इसका निर्माण श्रीकृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने करवाया था।

इस कुएँ पर महिलाएँ होली के त्यौहार के बाद शीतला माता की पूजा करती हैं। यह पूजा लम्बे समय से होती आई है। लेकिन जबसे श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर हिन्दुओं ने सर्वे सहित अन्य माँगे चालू की हैं, तबसे मुस्लिम पक्ष इस पूजा में व्यवधान डालने लगा है। अब इस पूजा को करवाने के लिए प्रशासन को भारी पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ती है। पिछले वर्ष भी ऐसा ही हुआ था।

याचिका लगाने वाले महेन्द्र प्रताप सिंह का कहना था कि मुस्लिम पक्ष का यह रवैया तब है जब यहाँ पूजा को लेकर कोर्ट का रोक जैसा कोई आदेश नहीं है। उन्होंने बताया था कि यहाँ लोग अपने बच्चों का मुंडन आदि करवाते थे। यहाँ पर हिन्दुओं का पूजा का अधिकार सुरक्षित हो सके, ऐसे में हाई कोर्ट में याचिका लगाई गई थी।

गौरतलब है कि यह शाही ईदगाह वर्तमान में विवादित है और इसको लेकर न्यायालयों में कई याचिकाएँ पड़ी हुई हैं। हिन्दू पक्ष का कहना है कि मथुरा में स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के बराबर में बनी शाही ईदगाह वाला ढाँचा जबरन वही बना दिया गया जहाँ भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इस जगह पर कब्जा करके ढाँचा बनाया गया है। यहाँ अभी भी कई ऐसे सबूत हैं जो कि यह सिद्ध करते हैं कि यहाँ पहले एक मंदिर हुआ करता था।

हिन्दू पक्ष का दावा है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म राजा कंस के कारागार में हुआ था और यह जन्मस्थान शाही ईदगाह के वर्तमान ढाँचे के ठीक नीचे है। सन् 1670 में मुगल आक्रांता औरंगज़ेब ने मथुरा पर हमला कर दिया था और केशवदेव मंदिर को ध्वस्त करके उसके ऊपर शाही ईदगाह ढाँचा बनवा दिया था और इसे मस्जिद कहने लगे। 13.37 एकड़ जमीन पर दावा करते हुए हिन्दू यहाँ से शाही ईदगाह ढाँचे को हटाने की माँग करते रहे हैं।

नाम अब्दुल, पर सुमित बनकर घूमता था: बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट का मास्टरमाइंड कर रहा था ‘हिंदू पहचान’ का इस्तेमाल, फर्जी आधार कार्ड भी बनवा रखा था

बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में धमाका करने वाले आतंकियों अब्दुल मतीन ताहा और मुसव्विर हुसैन पर NIA ने ₹10-10 लाख का इनाम घोषित किया है। यह आतंकी धमाके के लिए हिन्दू पहचान का इस्तेमाल कर रहे थे। यह आतंकी हिन्दू नामों का उपयोग अलग-अलग जगह रुकने और यात्रा के लिए करते थे। यह खुलासा NIA जाँच में हुआ है।

जानकारी के अनुसार, बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में धमाके की योजना बनाने वाले आतंकी अब्दुल मतीन ताहा ने हिन्दू नाम विग्नेश डी और सुमित अपनाए हुए थे। इनका उपयोग वह अलग अलग जगह जाने और रहने में करता था। रामेश्वरम कैफे जाकर धमाके को अंजाम देने वाला मुसव्विर हुसैन, मोहम्मद जुनैद सैयद नाम के पहचान पत्रों पर फर्जी दस्तावेज बनाए हुए था।

इन दोनों पर NIA ने ₹10 लाख का इनाम घोषित किया है। इनकी फोटो भी जारी की गई हैं। बताया गया है कि यह दोनों 2020 से ही गायब हैं। यह अल हिन्द मॉड्यूल में शामिल थे। NIA की दबिश पर यह गायब हो गए थे। इसके बाद से यह आतंक की प्लानिंग कर रहे थे। इन्होने मिलकर बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में मार्च 2023 में धमाके को अंजाम दिया।

इससे पहले NIA ने रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट मामले में एक आरोपित मुजम्मिल शरीफ को पकड़ा था। इस पर आरोप है कि इसने अब्दुल मतीन ताहा और मुवस्सिर हुसैन को छुपने और शहर छोड़ कर भागने में सहायता की थी। उसने बम बनाने के लिए भी सामान इन आतंकियों को उपलब्ध करवाया था। वह अभी NIA की गिरफ्त में है और उससे पूछताछ चल रही है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी मुस्लिम आतंकियों के हिन्दू नाम उपयोग करने की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। अक्टूबर 2022 में मंगलुरु में चलते ऑटो में हुए प्रेसर कुकर ब्लास्ट में भी यह सामने आया था कि आतंकी शारिक ने प्रेमराज नाम का एक आधार बना रखा था।

यह आधार एक रेलवे कर्मचारी प्रेमराज का था जो कि इसे एक बार बस में भूल गया था। शारिक ने इस पर तस्वीर बदल कर इसे अपना नाम दे दिया था और अपनी आतंकी गतिविधियाँ इसी के सहारे चला रहा था। शारिक भी इसी अल हिन्द मॉड्यूल का हिस्सा था और अब्दुल मतीन ताहा से जुड़ा हुआ था।

शारिक मैंगलूरू का ही रहने वाला था और इस धमाके के पहले वह आतंक समर्थक पोस्टर बनाने के मामले में पकड़ा गया था और जमानत पर बाहर आ गया था। शारिक एक रेडीमेड कपड़े की दुकान चलाता था। उसे इस ऑटो धमाके के बाद दुबारा पकड़ लिया गया था। उनसे कुछ और युवाओं को भी आतंकी बनाया था।

गौरतलब है कि 1 मार्च, 2024 को बेंगलुरु के वाइटफील्ड इलाके में स्थित रामेश्वरम कैफे में दोपहर में एक धमाका हुआ था। इस धमाके में 9 लोग घायल हुए थे। धमाके के पीछे की जानकारी बाद में निकल कर सामने आई थी। इसके बाद इस मामले की जाँच NIA ने चालू कर दी थी। तब से ही इसमें शामिल आतंकियों को पकड़ने का प्रयास जारी है।

कच्चातिवु द्वीप छोड़ने को तैयार थे नेहरू, बेटी इंदिरा ने श्रीलंका को दे ही दिया: विदेश मंत्री जयशंकर ने कॉन्ग्रेस-DMK का ‘इतिहास’ खोला, कहा- जनता को जानने का हक

1974 में इंदिरा गाँधी द्वारा श्रीलंका को सौंपे गए कच्चातिवु द्वीप का मुद्दा अब केंद्र सरकार मुखर होकर उठा रही है। तमिलनाडु में भाजपा अध्यक्ष अन्नामलाई की आरटीआई के बाद पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉन्ग्रेस को इस मामले पर घेरा और अब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि ये द्वीप श्रीलंका को देने का काम किसने किया, लेकिन हमें ये जानने का भी अधिकार है कि इसे छिपाने का प्रयास किसने किया।

विदेश मंत्री जयशंकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “1974 में साल भारत और श्रीलंका के बीच एक समझौता हुआ था। दोनों देशों ने उसपर हस्ताक्षर किए थे। उसके बाद कॉन्ग्रेस की तब की सरकार ने एक समुद्री सीमा खींची और समुद्री सीमा खींचने में कच्चातिवु को सीमा के श्रीलंकाई पक्ष पर रखा गया।”

जयशंकर कहते हैं, “हम जानते हैं कि यह किसने किया, यह नहीं पता कि इसे किसने छुपाया। हमारा मानना है कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि यह स्थिति कैसे उत्पन्न हुई।”

उन्होंने जानकारी दी कि 20 सालों में 6184 भारतीय मछुआरों को श्रीलंका में हिरासत लिया गया है और इसी समयकाल में 1175 भारतीय मछली पकड़ने वाली नौकाओं को भी श्रीलंका ने जब्त किया है। उन्होंने बताया कि पिछले 5 सालों में कच्चातिवु मुद्दा और मछुआरे का मुद्दा संसद में विभिन्न दलों द्वारा बार-बार उठाया गया है। यह संसद के सवालों, बहसों और सलाहकार समिति में सामने आया है।

इससे पहले पीएम मोदी ने भी कच्चातिवु पर होलते हुए कॉन्ग्रेस और डीएमके पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि बयानबाजी के अलावा, द्रमुक ने तमिलनाडु के हितों की रक्षा के लिए कुछ नहीं किया है। कच्चातिवु पर उभरते नए विवरणों ने डीएमके के दोहरे मानकों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है कॉन्ग्रेस और डीएमके पारिवारिक इकाइयाँ हैं। वे केवल इस बात की परवाह करते हैं कि उनके अपने बेटे और बेटियाँ बढ़ें। उन्हें किसी और की परवाह नहीं है। कच्चातीवु पर उनकी कठोरता ने हमारे गरीब मछुआरों और विशेष रूप से मछुआरों के हितों को नुकसान पहुँचाया है।

बता दें कि 1974 में इंदिरा गाँधी ने श्रीलंका के साथ एक समझौता करते हुए उनको कच्चातिवु द्वीप गिफ्ट में सौंप दिया था। वहीं 1961 में नेहरू इस द्वीप के मुद्दे पर पहले ही कह चुके थे कि उन्हें ये मामला संसद में नहीं उठाना। अगर जरूरत पड़ेगी तो वह इस द्वीप पर दावा छोड़ने से पहले विचार नहीं करेंगे।

फोटो साभार: न्यूज 18

इसी तरह न्यूज 18 पर प्रकाशित रिपोर्ट और उसमें दिए गए दस्तावेज बताते हैं कि जब ये द्वीप श्रीलंका के पास गया उसके बाद ये मुद्दा डीएमके द्वारा उठाया गया। पार्टी के नेता इसके विरोध में उतरे, लेकिन तब पार्टी के चीफ करुणानिधी ने इस केंद्र का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।

दस्तावेज यह भी बताते हैं कि मुख्यमंत्री ने विदेश सचिव को आश्वासन दिया था कि वह इस मुद्दे को ज्यादा उठने नहीं देंगे और न इसे बढ़ा-चढ़ाकर बताएँगे। इसके बाद विदेश सचिव ने उनकी तारीफ भी की थी। हालाँकि करुणानिधि ने यह भी कहा था कि उनके सामने विपक्ष को समझाना एक कठिनाई होगी। इसमें लिखा है कि करुणानिधि ने कहा था कि तेल स्ट्राइक की जानकारी दिए बिन विपक्ष को वो इस कॉन्फिडेंस में नहीं ले सकते कि उन्हें समझौता करना क्यों जरूरी था।

फोटो साभार: न्यूज 18

करुणानिधि चाहते थे इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री सबको समझाएँ, लेकिन तब विदेश सचिव ने यह कहा था कि उनकी जानकारी के अनुसार, प्रस्ताव केवल एक या दो वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों को ही पता था और उन्होंने कहा कि शायद प्रधानमंत्री विपक्ष के साथ इस पर चर्चा करने से पहले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के विचार इस पर जानना चाहेंगी।