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‘मुझे यकीन नहीं है कि मुस्लिम ने मारा’: बदायूँ में हिंदू बच्चों को कसाई की तरह रेत दिया, सोशल मीडिया में इस्लामी-लिबरल बता रहे ‘विवाद-मनगढ़ंत कहानी’

उत्तर प्रदेश के बदायूँ में कल शाम (19 मार्च, 2024) को साजिद ने दो हिन्दू बच्चों आयुष और हनी की उनके ही घर में गला रेत कर हत्या कर दी। आरोपित साजिद का एनकाउंटर हो गया है। इस घटना में जावेद नाम का आरोपित भी संलिप्त बताया जा रहा है। हालाँकि, अब इन हत्यारों के बचाव में भी इस्लामी कट्टरपंथी उतर आए हैं।

इस्लामी कट्टरपंथी और लिबरल इस मामले में जहाँ यह सिद्ध करने में जुटे हैं कि साजिद-जावेद और मृतक बच्चों के परिवार के बीच पुराना विवाद था। इसके जरिए वह इस हत्या को एक आपसी विवाद का रंग देना चाह रहे हैं। कुछ कट्टरपंथियों को यह चिंता है कि साजिद और जावेद की दुकान पर बदायूँ की आम जनता ने गुस्सा क्यों निकाला।

लगातार ट्विटर पर घृणा फैलाने और खुद को पीस पार्टी का प्रवक्ता बताने वाला शादाब चौहान इस मामले में इस बात से अधिक चिंतित दिखा कि साजिद और जावेद की दुकान पर आम जनता ने गुस्सा निकाला। शादाब ने इस बात पर जोर दिया कि जावेद और साजिद के खिलाफ गुस्सा ना दिखाया जाए।

उसने यह नैरेटिव भी बढ़ाने की कोशिश की कि दोनों परिवारों के बीच विवाद था इसीलिए हत्या हुई और फिर घर जलाया गया। हालाँकि, यह स्पष्ट है कि आरोपितों का घर नहीं जलाया गया बल्कि जहाँ वह सैलून चलाते थे वहाँ तोड़फोड़ हुई है। शादाब ने एक आरोपित साजिद के एनकाउंटर को भी गलत ठहराया।

वहीं एक और बाबू खान नाम के अकाउंट ने इस बात पर जोर दिया कि अमीर हत्या करके बचते हैं और बच्चों की गला रेत कर हत्या करने वाला गरीब मुस्लिम हैं। बाबू खान ने हत्या के प्रति संवेदनशीलता ना जता कर इस मामले में हिन्दू मुस्लिम एंगल देखा और बताया कि हत्यारे मुस्लिम हैं इसीलिए उनका एनकाउंटर हुआ है।

एक और अबरार हसन ने इस बात में मुस्लिम हत्यारों की बजाय मॉब लिंचिंग जैसे मुद्दों का प्रलाप किया।

एक और व्यक्ति ने इस मामले पर बता डाला कि यह ‘संघ’ की साजिश है। उसने बताया कि बच्चों की उस्तरा से गला रेतने की हत्या पहले बनाई हुई कहानी है। उसने इसे चुनाव से भी जोड़ दिया।

उसने इस बात पर विश्वास करने से भी मना कर दिया कि हत्या मुस्लिम है।

समाचार चैनल आजतक द्वारा इस सम्बन्ध में चलाई गई खबर के कमेन्ट सेक्शन में कई मुस्लिम इसे झूठी खबर बताने लगे। उन्होंने इस बात जोर दिया कि आरोपित मुस्लिम है इसलिए एनकाउंटर हुआ है।

अभी इस मामले में पुलिस की जाँच चल रही है और जावेद नाम के आरोपित की तलाश हो रही है। बच्चों का पोस्टमार्टम अभी किया जाना बाकी है। बदायूँ में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी मात्रा में फ़ोर्स तैनात किया गया है।

साजिद ने 2 हिन्दू बच्चों को मार डाला, तीसरे की भी गर्दन पर वार: कमरे में बंद कर उस्तरे से बारी-बारी काटा, पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुआ हत्यारा

उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले में साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। यहाँ 2 नाबालिग हिन्दू बच्चों का गला काट कर उनका क़त्ल किए जाने की खबर है। तीसरे बच्चे की भी गर्दन पर वार किया गया है। उसका इलाज अस्पताल में चल रहा है। पुलिस स्टेशन पर मृतकों के परिजनों सहित हिन्दू संगठन के सदस्यों का जमावड़ा लगा हुआ है। ‘जय श्री राम’ के नारे भी गूँज रहे हैं। पीड़ित परिजनों का आरोप है कि मृतक बच्चों का गला काट कर खून भी पिया गया है।

दोनों बच्चों की हत्या करने वाले आरोपित का नाम साजिद है। पुलिस ने भाग रहे साजिद को मुठभेड़ में मार गिराया है। मौके पर भारी संख्या में पुलिस और पैरामिलिट्री के जवान तैनात कर दिए गए हैं। घटना मंगलवार (19 मार्च, 2024) की है।

यह घटना बदायूँ के सिविल लाइंस की बताई जा रही है। यहाँ बाबा कॉलोनी के एक मकान में विनोद का परिवार तीसरी मंजिल पर रहता है। विनोद की पत्नी ब्यूटी पॉर्लर में काम करती हैं। विनोद गाजीपुर में पानी की टंकी की ठेकेदारी करते हैं। घटना के समय पति घर से बाहर थे। उनके 3 बच्चे घर पर ही मौजूद थे। मंगलवार की शाम 6 बजे उनके घर में साजिद पहुँचा। वो बच्चों को चीज खिलाने के बहाने घर के अंदर ले गया। कमरे में बंद कर के उसने सभी बच्चों की बारी-बारी से गर्दनें काटी। गर्दन काटने के लिए उस्तरे का प्रयोग किया गया है।

मृतक बच्चों के नाम 14 वर्षीय आयुष और 6 वर्षीय हनी बताए जा रहे हैं। साजिद ने तीसरे बच्चे की भी गर्दन काटने का प्रयास किया। हालाँकि, वो खुद को जैसे-तैसे छुड़ा कर भाग निकला। घायल बच्चे का इलाज अस्पताल में चल रहा है। बच्चों की चीख पुकार सुन का आसपास के लोग मौके पर जमा होने लगे। लोगों का जमावड़ा देख कर साजिद मौके से भाग निकला। पीड़ित परिजनों का आरोप है कि कत्ल के बाद साजिद बच्चों का खून पी रहा था। IG रेंज का कहना है कि खून आदि पीने के आरोपों की जाँच करवाई जा रही है।

फरार आरोपित की पुलिस ने तलाश शुरू की। आखिरकार साजिद पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस उसे अपने साथ ले जा रही थी। तभी साजिद ने पुलिस पर हमला करते हुए भागने का प्रयास किया। पुलिस ने साजिद को आमने-सामने की मुठभेड़ में मार गिराया है। घटना से नाराज लोगों ने शहर के एक सैलून में भी तोड़फोड़ की है।

यह सैलून साजिद और उसके भाई जावेद का बताया जा रहा है। हालात संभालने के लिए पैरामिलिट्री फ़ोर्स को तैनात किया गया है। जब शवों को पुलिस कब्ज़े में ले कर जा रही थी, तब बच्चों की माँ सड़क पर गिर कर बेहोश हो गईं थी। कुछ ही देर में पुलिस चौकी पर हिन्दू संगठनों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया। पुलिस चौकी पर ‘जय श्री राम’ के नारे लगने शुरू हो गए हैं। लोगों ने पुलिस द्वारा पीड़ित परिवार पर ही सख्ती करने का आरोप लगाया है। हालाँकि, पुलिस नाराज लोगों को समझाने में जुटी हुई है।

सुप्रीम कोर्ट ने NCP की ‘घड़ी’ अजित पवार को सौंपी, लेकिन लगा दी एक शर्त: शरद पवार को मिला ‘तुरही बजाता आदमी’

सुप्रीम कोर्ट ने एनसीपी के चुनाव निशान को लेकर फैसला दिया है कि लोकसभा चुनाव में फिलहाल अजित पवार घड़ी सिंबल का ही इस्तेमाल करेंगे। कोर्ट ने शरद पवार गुट के लिए ‘तुरहा बजाता व्यक्ति’ चुनाव निशान निर्धारित किया है। सुप्रीम कोर्ट ने शरद पवार की अजित पवार गुट को घड़ी सिंबल न देने की माँग नामंजूर कर दी।

सुप्रीम कोर्ट में एनसीपी के चुनाव निशान को लेकर आदेश आया है। इस आदेश से अजित पवार गुट को राहत मिली है, हालाँकि ये अस्थाई है। सुप्रीम कोर्ट ने अजित पवार गुट को एनसीपी के चुनाव निशान घड़ी के इस्तेमाल की इजाजत तो दे दी है, साथ ही कोर्ट ने अजित पवार गुट से ये भी कहा कि वो सार्वजनिक रूप से विज्ञापन देकर बताएं कि उनके चुनाव चिह्न घड़ी का मामला अदालत में है।

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि एनसीपी अजित पवार को अंग्रेजी, हिंदी, मराठी के अखबारों में विज्ञापन देकर बताएं कि उनके इलेक्शन सिंबल घड़ी का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इस पर अंतिम निर्णय कोर्ट में सुनवाई के बाद ही होगा। एनसीपी-अजित पवार को घड़ी चुनाव चिह्न के कोर्ट में विचाराधीन होने को हर टेम्प्लेट, ऐड, ऑडियो-वीडियो क्लिप में भी बताना होगा।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (19 मार्च 2024) को एनसीपी-शरद चंद्र पवार को चुनाव चिह्न ‘तुरही बजाता आदमी’ को मंजूरी दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने शरद गुट को लोकसभा चुनाव एनसीपी-शरदचंद्र पवार नाम से ही लड़ने की परमिशन दे दी। कोर्ट ने चुनाव आयोग को भी निर्देश दिया कि वह लोकसभा-विधानसभा चुनावों के लिए दूसरों को तुरही बजाता आदमी चिह्न न दे।

सुप्रीम कोर्ट ने शरद गुट की उस याचिका पर सुनवाई की थी, जिसमें कहा गया था कि अजित गुट अपने फायदे के लिए शरद पवार का नाम और फोटो इस्तेमाल कर रहा है। हालाँकि अब अजित पवार ने साफ कर दिया है कि वो शरद पवार की जगह यशवंतराव चव्हाण का नाम और फोटो इस्तेमाल कर रहे हैं।

ऑटो में बज रहा था भगवान राम का भजन, मदरसे के सामने घेर कर ड्राइवर उमेश यादव की पिटाई: भीड़ में धारदार हथियार लेकर वार्ड पार्षद भी शामिल, ऑटो भी तोड़ डाला

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से बेंगलुरु जैसा एक मामला सामने आया है। यहाँ मदरसे के आगे भगवान राम का भजन बजाने से नाराज मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने ऑटो ड्राइवर उमेश यादव की पिटाई कर दी। हमले में धारदार हथियारों का प्रयोग किया गया है। पीड़ित की ऑटो को भी पत्थर मार कर तोड़ डाला गया है। जान बचा कर भाग रहे ड्राइवर को जान से मारने की भी धमकी दी गई। आरोपितों के नाम दानिश, शफीक, शानू और शमीम हैं। घटना गुरुवार (14 मार्च 2024) की है। ड्राइवर द्वारा पुलिस में शिकायत करने के बाद आरोपितों द्वारा भी एक महिला के माध्यम से पीड़ित पर FIR दर्ज करवा दी गई है।

यह घटना लखनऊ कमिश्नरेट उत्तरी क्षेत्र में आने वाले थानाक्षेत्र इंटौजा की है। यहाँ 15 मार्च को शेख टोला निवासी पीड़ित उमेश यादव ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। उमेश ने बताया कि वो 14 मार्च (गुरुवार) को दर्शन के लिए अपनी ऑटो से पूर्वी देवी मंदिर गए थे। मंदिर से लौटते हुए जब उमेश शेख मोहल्ले के एक मदरसे के सामने पहुँचे तो उन्हें दानिश, शफीक और शमीम ने रोक लिया। ये तीनों मदरसे के अंदर से निकल कर बाहर आए थे। इन सभी ने उमेश यादव से भगवान राम का धार्मिक गाना बंद करने को कहा।

उमेश यादव ने उनकी बात मानने से इनकार कर दिया तो तीनों ने मिल कर हमला बोल दिया। आरोप है कि इस हमले में लाठी और डंडों का प्रयोग किया गया। इसी दौरान वार्ड का सभासद शानू भी वहाँ धारदार हथियार ले कर पहुँच गया। शानू ने भी उमेश पर हमला बोल दिया। इस हमले में उमेश घायल हो गए। हमलावरों ने पत्थरों से मार कर उनकी ऑटो को भी तोड़ डाला। एक वायरल वीडियो में ऑटो के टूटे शीशे और अंदर पड़े पत्थर साफ देखे जा सकते हैं।

शिकायत में उमेश ने आगे बताया है कि जब वो जान बचा कर भाग रहे थे तो आरोपितों द्वारा उनको जान से मार डालने की भी धमकी दी गई थी। पुलिस में शिकायत दे कर उन्होंने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने उमेश यादव की शिकायत पर IPC की धारा 427, 506 और 323 के तहत कार्रवाई की है। वहीं उमेश द्वारा FIR दर्ज करवाने के एक दिन बाद 16 मार्च को घटनास्थल पर खुद को मौजूद बता कर एक मुस्लिम महिला ने उमेश पर क्रॉस FIR दर्ज करवाई है।

इस FIR में मुस्लिम महिला ने उमेश पर शराब पी कर ऑटो में फूहड़ गाने बजाने का आरोप लगाया है। इस शिकायत पर भी पुलिस ने IPC की धारा 294 और 506 के तहत कार्रवाई की है। दोनों मामलों की जाँच सब इंस्पेक्टर धर्मेंद्र जैन को सौंपी गई है। ऑपइंडिया के पास दोनों FIR मौजूद है। बताते चलें कि कर्नाटक के बेंगलुरु में भी 17 मार्च 2024 (शुक्रवार) को अजान के समय अपनी दुकान में हनुमान चलीसा बजा रहे एक हिन्दू युवक पर हमला हुआ था। कर्नाटक पुलिस इस मामले में FIR दर्ज कर के कार्रवाई कर रही है।

यहाँ के मगरमच्छ हम हैं… जहाँगीर नेशनल यूनिवर्सिटी (JNU) का टीजर आ गया, टुकड़े-टुकड़े का मंसूबा पालने वाले हो रहे बेनकाब

उर्वशी रौतेला और विनय शर्मा की फिल्म ‘जेएनयू: जहांगीर नेशनल यूनिवर्सिटी’ काफी समय से चर्चा में बनी हुई है। अब इस फिल्म का मंगलवार (19 मार्च 2024) को टीजर रिलीज कर दिया गया है। इसके टीजर में छात्र राजनीति और यूनिवर्सिटी के अंदर चल रही राजनीति को दिखाने की कोशिश की गई है। इस फिल्म में कॉलेज जाने वाले छात्रों का वो चेहरा दिखाया जाएगा, जो रोमांस से दूर राजनीति के बारे में क्या सोचता है और क्या करना चाहता है। वहीं, जेएनयू जैसी यूनिवर्सिटी किस तरह से ‘देश विरोधी कामों’ का अड्डा बन चुकी है, उसका भी ताना-बाना इस फिल्म में दिखाया जाने वाला है।

‘जेएनयू’ के टीजर में यूनिवर्सिटी के छात्रों की कहानी दिखाई जा रही है, जो क्लासरूम से ज्यादा समाचारों में छाए रहते हैं। ये फिल्म ‘जेएनयू’ में पढ़ाई के नाम पर हो रही राजनीति को उजागर करेगी। इसके साथ ही टीजर में इलेक्शन के दौरान के माहौल को दिखाया गया है। इस फिल्म के टीजर के एक सीन में टीवी की बहू रश्मि देसाई भी दिख रही हैं, जो ये कहती नजर आ रही हैं कि इलेक्शन जीतने के लिए जो जरूरत पड़े वो करें। इतना ही नहीं फिल्म के एक सीन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बड़ा होर्डिंग भी नजर आ रहा है। कुल मिलाकर यह फिल्म ‘जेएनयू’ और भारतीय राजनीति में उसके महत्व पर केंद्रित है।

इस फिल्म टीजर में रवि किशन भी पुलिस के रोल में काफी धांसू दिख रहे हैं। इसके अलावा टीजर में उर्वशी रौतेला की भी एक झलक देखने को मिली है, जिसे देखकर ऐसा लग रहा है फिल्म में वो रिपोर्टर के किरदार में नजर आने वाली हैं। खास बात ये है कि जेएनयू की पहचान जिन गलत चीजों के लिए बनती जा रही थी, उन्हीं मुद्दों को इस फिल्म में दिखाया जाने वाला है, जिसमें बॉलीवुड के मंझे कलाकार नजर आएँगे। ये फिल्म 5 अप्रैल को सिनेमाघरों में दस्तक देगी।

बता दें कि इस फिल्म का पोस्टर 12 मार्च 2024 को जारी किया था। जिसमें एक हाथ भारत के नक्शे को पकड़े हुए दिखाई दे रहा था। फिल्म का पोस्टर जारी होते ही वायरल हो गया। वहीं फिल्म का टीजर रिलीज कर दिया गया है, जिसने आते ही सोशल मीडिया पर बवाल मचा दिया है।

‘जेएनयू: जहांगीर नेशनल यूनिवर्सिटी’ फिल्म को महाकाल मूवीज के बैनर तले बनाया गया है। फिल्म का निर्देशन विनय शर्मा ने किया है। वहीं इसका निर्माण प्रतिमा दत्ता ने किया है। यह फिल्म इस साल पांच अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। फिल्म की शूटिंग का शेड्यूल पूरा हो चुका है। पार्थ नवले ने सिनेमैटोग्राफी और संजय सांकला ने एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली है। कलाकारों में उर्वशी रौतेला, सिद्धार्थ बोडके, रवि किशन, पीयूष मिश्रा, विजय राज, रश्मि देसाई, सोनाली सहगल और कई अन्य नाम शामिल हैं। इस फिल्म के टीजर को सोशल मीडिया पर भी जोरदार प्रतिक्रिया मिल रही है।

Ustaad Bhagat Singh Teaser: जबरदस्त एक्शन अवतार में दिखे ‘पॉवर स्टार’ पवन कल्याण, बॉक्स ऑफिस पर नोट के साथ चुनावी वोट पर भी नजर

तेलुगु सिनेमा के पॉवर स्टार कहे जाने वाले पवन कल्याण राजनीति की दुनिया में तहलका मचा रहे हैं, तो एक बार फिर से बड़े पर्दे पर भी आने को तैयार हैं। पवन कल्याण की फिल्म ‘उस्ताद भगत सिंह’ का टीजर रिलीज हुआ है, जिसमें वो दमदार पुलिस वाले के किरदार में दिख रहे हैं। इस फिल्म में वो भरपूर एक्शन करते नजर आएँगे, जिसके लिए उन्हें जाना जाता है।

उस्ताद भगत सिंह का टीजर 1.02 मिनट का है और इसमें पवन कल्याण को पुलिस वाले की वर्दी में एक्शन करते हुए दिखाया गया है। टीजर फिल्म की कहानी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं देता है। टीजर में कुछ एक्शन सीन्स भी हैं जो दर्शकों को उत्साहित करते हैं। इनमें पवन कल्याण खलनायकों से लड़ते हुए और गोली चलाते हुए दिखाई दे रहे हैं। पवन कल्याण टीजर में दमदार दिख रहे हैं। उनका डायलॉग डिलीवरी और बॉडी लैंग्वेज प्रभावशाली है। टीजर को दर्शकों से काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला है।

उस्ताद भगत सिंह फिल्म का निर्देशन हरीश शंकर ने किया है और इसे नवीन यरनेनी और वाई. रविशंकर ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म का संगीत देवी श्री प्रसाद ने दिया है। इसका बीजीएम (बैक ग्राउंड म्यूजिक) भी शानदार है, जो फिल्म के मूड को सेट करता है और दर्शकों को उत्साहित करता है। टीजर की सिनेमाटोग्राफी अच्छी है। एक्शन सीन्स अच्छी तरह से शूट किए गए हैं।

इस फिल्म में पवन कल्याण के अलावा श्रीलीला, आशुतोष राणा, नवाब शाह, बी.एस. अविनाश, गौतमी और छम्मक चंद्रा भी हैं, जो काफी प्रभावशाली दिख रहे हैं। फिल्म की कहानी अभी तक सामने नहीं आई है, लेकिन टीजर से पता चलता है कि यह एक एक्शन फिल्म होगी। इस फिल्म को साल 2016 में आई तमिल फिल्म ‘Theri’ की रीमेक बताया जा रहा है।

“उस्ताद भगत सिंह” एक बहुप्रतीक्षित फिल्म है। जिसमें पवन कल्याण एक बार फिर एक्शन अवतार में नजर आएंगे। टीजर से पता चलता है कि फिल्म एक हाई-ऑक्टेन एक्शन एंटरटेनर होगी। फिल्म में कई धमाकेदार दृश्य और संवाद होंगे। फिल्म का टीजर दर्शकों को पसंद आया है और फिल्म से काफी उम्मीदें हैं। ये फिल्म 2024 में रिलीज होगी और यह देखना दिलचस्प होगा कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कितना अच्छा प्रदर्शन करती है।

बता दें कि तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में पवन कल्याण का सिक्का चलता है। उन्हें पावर स्टार कहा जाता है। वो तीन दशकों से तेलुगु इंडस्ट्री पर राज कर रहे हैं। पवन कल्याण सिर्फ शानदार एक्टर ही नहीं बल्कि सक्सेसफुल प्रोड्यूसर भी हैं। उन्होंने अपने करियर में शोहरत के साथ-साथ दौलत भी खूब कमाई है। उनकी नेट वर्थ 110 करोड़ रुपए से अधिक की है। उन्होंने जनसेना नाम की राजनीतिक पार्टी बनाई है। इस लोकसभा चुनाव में उन्होंने एनडीए के साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया है और वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भी मंच साझा कर चुके हैं।

कई बार रेप के बाद कक्षा 6 की छात्रा हुई गर्भवती, आदिल ने दी मुँह खोलने पर हत्या की धमकी: शिकायत करने गए पिता से भी परिवार ने की अभद्रता

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में एक नाबालिग लड़की से रेप का मामला सामने आया है। रेप का आरोप आदिल नाम के युवक पर लगा है। लगातार बलात्कार किए जाने की वजह से 14 वर्षीया पीड़िता गर्भवती हो गई थी। आदिल ने किसी से बताने पर पीड़िता को जान से मार डालने की धमकी भी दी थी। पुलिस ने सोमवार (18 मार्च 2024) को FIR दर्ज कर के आदिल को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जाँच और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

यह मामला गाजियाबाद कमिश्नरेट के थाना क्षेत्र मुरादनगर का है। यहाँ 18 मार्च को पीड़िता के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया है कि वह परिवार सहित मुरादनगर में रहता है। पीड़िता की उम्र 13-14 साल बताई जा रही है जो पिछले कई दिनों से पेट में दर्द होने की शिकायत कर रही थी। 18 मार्च को लड़की के पिता ने अपनी बेटी को डॉक्टर को दिखाया। रिपोर्ट में पीड़िता के गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। मामला सामने आने पर खुद पीड़िता काफी डर सी गई थी।

पीड़िता के पिता ने अपनी बेटी को हिम्मत दी तो लड़की ने आदिल का नाम लिया। शौक़ीन का बेटा आदिल मुरादनगर का ही निवासी है। पीड़िता ने बताया कि कई दिनों पहले वह आदिल के घर गई थी। यहाँ आदिल ने उस से बलात्कार किया था। इसके बाद आदिल ने पीड़िता को कहीं भी मुँह खोलने पर डराया-धमकाया और कई बार रेप किया। लगातार हुए रेप की वजह से पीड़िता गर्भवती हो गई। पीड़िता और आदिल एक ही समुदाय से हैं। पीड़िता के अब्बा ने आदिल पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। लड़की के अब्बा की शिकायत पर पुलिस ने 18 मार्च को ही आदिल पर FIR दर्ज कर ली।

यह FIR IPC की धारा 376 (2) और 506 के अलावा पॉक्सो एक्ट की धारा 4(2) के तहत दर्ज हुई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। पुलिस ने 18 मार्च को ही रात में दबिश दे कर आदिल को गिरफ्तार कर लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता कक्षा 6 की छात्रा है। उसके अब्बा मेहनत-मजदूरी कर के परिवार पालते हैं। जब लड़की के अब्बा आरोपित के घर शिकायत ले कर पहुँचे तो उनसे भी अभद्रता की गई। फ़िलहाल पीड़िता का मेडिकल परीक्षा और काउंसिलिंग करवाई जा रही है। मामले में जाँच व अन्य कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

तेजस्वी सूर्या को कर्नाटक पुलिस ने हिरासत में लिया: हनुमान चालीसा बजाने पर दुकानदार की हुई थी पिटाई, विरोध प्रदर्शन करने पहुँचे थे BJP नेता

बेंगलुरु में हनुमान चालीसा बजाने पर एक दुकानदार पर हुए हमले के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में बीजेपी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग की। इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए भाजयुमो अध्यक्ष और बेंगलुरु के सांसद तेजस्वी सूर्या को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

विरोध प्रदर्शन से पहले बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने दुकानदार मुकेश से मुलाकात भी की थी। बीजेपी सांसद सूर्या ने आरोप लगाया कि पुलिस से शिकायत करने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उन्होंने कहा, “स्थानीय बीजेपी नेताओं, मेरे और पीसी मोहन के हस्तक्षेप के बाद ही एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने इस मामले में सिर्फ तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि हमारी माँग है कि सीसीटीवी में दिख रहे सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। इस मामले की पेशेवर और निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।” हालाँकि अब इस मामले में पुलिस ने दो अन्य लोगों समेत कुल पाँच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

इसी मामले में मंगलवार (19 मार्च) को बीजेपी द्वारा विरोध-प्रदर्शन किया गया। इस विरोध प्रदर्शन में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सांसद तेजस्वी सूर्या भी शामिल हुए। जहाँ कर्नाटक पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लॉ एंड ऑर्डर मेंटेन करने के लिए हल्का बल प्रयोग भी किया। तेजस्वी सूर्या ने प्रदर्शनकारियों से वापस जाने का आग्रह किया।

केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे और बीजेपी विधायक एस सुरेश कुमार उन लोगों में शामिल थे, जिन्हें पुलिस ने एहतियातन हिरासत में ले लिया। पुलिस ने कहा कि घटना के सिलसिले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से दो को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया है। बीजेपी ने पीड़ित मुकेश की दुकान से शांतिपूर्ण जुलूस निकालने का आह्वान किया था, जिसमें लोगों ने ‘हनुमान चालीसा’ का जाप किया गया।

बता दें कि कुछ युवाओं ने रविवार (17 मार्च 2024) को जुमा मस्जिद रोड पर अपनी दुकान में ‘अजान’ के दौरान लाउडस्पीकर पर मुकेश द्वारा ‘हनुमान चालीसा’ बजाने पर आपत्ति जताई और इसके बाद उसके साथ मारपीट की। सुरेश कुमार ने आरोप लगाया, “हनुमान चालीसा बजाने वाले व्यापारी पर इस तरह का हमला होते देखना बेहद दर्दनाक है। समाज में शांति भंग करने की कोशिश की जा रही है।”

3 साल की बच्ची से रेप के बाद हत्या, प्राइवेट पार्ट पर नाखून और शरीर पर दाँतों के निशान: बाथरूम में ले गया था नाबालिग किशोर, सबूत मिटाने वाला चाचा भी गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के विलासपुर में एक 3 वर्षीया बच्ची से रेप का मामला सामने आया है। रेप की वजह से बच्ची की मौत हो गई है। बलात्कार का आरोप एक 15 वर्षीय नाबालिग पर लगा है। नाबालिग आरोपित ने बाथरूम में ले कर कर बच्ची से रेप किया था। घटना के बाद आरोपित फरार है। घटना से नाराज पीड़िता के परिजनों ने अस्पताल के बाहर हंगामा किया है। पुलिस ने केस दर्ज कर के आरोपित को हिरासत में ले लिया है। सबूत मिटाने के आरोप में नाबालिग के चाचा को भी गिरफ्तार किया गया है। घटना रविवार (17 मार्च, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला विलासपुर के थानाक्षेत्र सिरगिट्टी का है। यहाँ 17 मार्च को थाने पर पीड़िता की माँ ने शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में बताया गया है कि रविवार को उनकी 3 वर्षीया बच्ची घर एक बाहर खेल रही थी। कुछ ही देर में वो लापता हो गई। परिजनों ने काफी खोजबीन की पर वो नहीं मिली। तभी किसी ने बताया कि बच्ची को पड़ोस में रहने वाला 15 वर्षीय किशोर अपने साथ बाथरूम के अंदर ले गया है। बच्ची की माँ कुछ पड़ोसियों के साथ बाथरूम तक पहुँची तो दरवाजा अंदर से बंद मिला।

काफी देर खटखटाने के बाद भी दरवाजा अंदर से नहीं खोला गया। आखिरकार सभी ने मिल कर दरवाजे को तोड़ डाला। अंदर आरोपित और बच्ची दोनों मौजूद थे। बच्ची बेहोश हो चुकी थी। वह खून से लथपथ थी। बच्ची के प्राइवेट पार्ट पर नाखूनों से घाव किए गए थे जिस से लगातार खून निकल रहा था। कहा यह भी जा रहा है कि रेप के दौरान जब बच्ची दर्द से चीखी थी तब आरोपित ने दाँतों से उसे कई हिस्सों में काट डाला था। पीड़िता के परिजन बच्ची को ले कर अस्पताल पहुँचे। डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया।

पीड़िता की मौत की जानकारी मिलते ही उसके परिजनों ने अस्पताल के बाहर हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना पर पुलिस पहुँची और लोगों को समझा कर शाँत किया। फ़ौरन ही केस दर्ज कर के आरोपित किशोर को हिरासत में ले लिया गया। उस पर पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। आरोपित के चाचा पर भी सबूतों को मिटाने की कोशिश करने का आरोप है। इस हरकत की वजह से किशोर के चाचा को भी IPC की धारा 201 के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

10 करोड़ घरों में पहुँचा गैस सिलिंडर, महिलाओं को मिली धुएँ से आजादी: उज्ज्वला से बदल गई करोड़ों घरों की किस्मत

ये साल 2014 है, मैं गाँव में रहने वाले एक रिश्तेदार के यहाँ बैठा हूँ। इस परिवार की आर्थिक हालत बाकी करोड़ों भारतीय परिवारों की तरह ही बहुत अच्छी नहीं है। इस घर में एक महिला देश में पाए जाने वाले अतिथि भाव के चलते चाय बना रही हैं, यह महिला मेरी दूर की मौसी लगती हैं। हालाँकि, चाय से कम और चूल्हे से धुआँ अधिक उठ रहा है। दरअसल, इस घर में एक अदद एलपीजी सिलिंडर नहीं है। महिला, जो कि मौसी हैं, लकड़ी और कोयले से जलने वाले चूल्हे पर चाय-खाना बनाने पर मजबूर हैं। यह उज्ज्वला योजना से पहले का दौर है।

दरअसल, यह कहानी आज से 10 वर्ष पूर्व देश के करोड़ों परिवारों की थी जहाँ महिलाएँ धुएँ के बीच खाना बनाने को मजबूर थीं। इससे जहाँ एक और खाना बनाने में देरी होती थी, उनके स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था। हालाँकि, इस समस्या का समाधान यानी गैस सिलिंडर जो कि स्वच्छ ईंधन है, उसका कनेक्शन लेना मुश्किल काम था। सामान्य मेहनत मजदूरी करके अपना घर चलाने वाला कोई व्यक्ति एलपीजी कनेक्शन लेने के लिए पैसे इकट्ठा ही नहीं कर पाता था। जिस परिवार की मैंने कहानी बयान की, वह भी उनमें से एक है।

लेकिन यह तस्वीर 2014 के बाद बदलना चालू हुई। 2014 के आम चुनाव देश में 30 वर्षों के बाद एक स्पष्ट बहुमत वाली सरकार ले कर आए थे। इसके मुखिया नरेन्द्र मोदी थे। पीएम मोदी ने सत्ता में आने के साथ ही देश की मूलभूत समस्याओं को एक एक करके चालू किया। इसके अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना, जन धन योजना और सौभाग्य जैसी योजनाएँ चालू की गई। इसी के साथ चालू हुई उज्ज्वल योजना।

उज्ज्वला योजना से पहले मात्र आधे घरों में था एलपीजी सिलिंडर

उज्ज्वला योजना के शुरू होने से पहले देश के लगभग आधे घरों में ही गैस सिलिंडर की सुविधा थी। इनमें से भी बड़ी सँख्या में कनेक्शन शहरों में थे। एलपीजी की सुविधा ग्रामीण क्षेत्रों में नगण्य थी। आँकड़े बताते हैं कि 2014 में देश के मात्र 55% जबकि 2016 में जब उज्ज्वला योजना चालू की गई थी तब देश के 61% घरों में ही गैस सिलिंडर की पहुँच थी।

2016 में देश के लगभग 16 करोड़ परिवारों के पास एलपीजी कनेक्शन था। इसके अलावा देश में एलपीजी कनेक्शन देने के लिए गैस एजेंसियाँ भी कम थी। 2016 में देश में मात्र 13896 एलपीजी वितरक थे, जिनसे सीमित क्षेत्रों तक ही गैस सिलिंडर पहुँच पाते थे। इन्हीं कारणों से महिलाएँ लकड़ी और कोयले के चूल्हों पर खाना बनाने को मजबूर थीं।

धुएँ से मुक्ति पाने का संघर्ष उज्ज्वला

उज्ज्वला योजना की शुरुआत 1 मई, 2016 को की गई थी। इसका लक्ष्य था कि देश में गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले प्रत्येक परिवार के पास एलपीजी कनेक्शन हो। उज्ज्वला योजना के तहत पहले लक्ष्य रखा गया था कि देश के 5 करोड़ BPL परिवारों को एलपीजी कनेक्शन दिया जाएगा।

उज्ज्वला योजना के अंतर्गत सरकार ने परिवारों को एलपीजी कनेक्शन देने के साथ ही उन्हें गैस चूल्हा, रेगुलेटर और अन्य सामग्री भी देने का निर्णय लिया। यह योजना क्रांतिकारी साबित होने वाली थी। योजना की शुरुआत उत्तर प्रदेश के बलिया से की गई थी। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के शुरू होने के बाद मात्र एक वर्ष में ही 2.2 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शन दिए गए। यानी देश के 2 करोड़ से अधिक परिवारों तक स्वच्छ ईंधन पहुँचा और साथ ही उन्हें धुएँ वाले चूल्हे से मुक्ति मिल गई।

केंद्र सरकार ने उज्ज्वला योजना में इतनी तेज गति से काम किया कि पहले वर्ष में लक्ष्य से अधिक कनेक्शन दिए गए। दरअसल, पहले वर्ष में सरकार ने 1.5 करोड़ कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा था लेकिन स्पष्ट नीति और भ्रष्टाचार रहित व्यवस्था के कारण यह आँकड़ा कहीं आगे पहुँच गया। उज्ज्वला का लाभ लेने वालों की सँख्या दो वर्ष के भीतर 3.6 करोड़ पहुँच गई। यानी दो तिहाई लक्ष्य लगभग दो वर्ष में ही पूरा कर लिया गया था। इसके बाद लगातार यह संख्या बढ़ती रही।

समय से पहले पूरे हुए लक्ष्य

केंद्र सरकार ने सबसे पहले 5 करोड़ घरों तक एलपीजी कनेक्शन का लक्ष्य रखा था। हालाँकि, अप्रैल 2018 में इस योजना का और विस्तार कर दिया गया तथा इसका लक्ष्य बढ़ा कर 8 करोड़ घरों तक कर दिया गया। इस योजना के तहत अब अन्य वर्गों की महिला लाभार्थियों को जोड़ने का भी निर्णय लिया गया। 8 करोड़ घरों तक स्वच्छ ईंधन पहुँचाने का लक्ष्य मार्च 2020 तक का था। हालाँकि, इसमें भी तेज गति से काम हुआ और यह लक्ष्य अगस्त 2019 में पा लिया गया।

इसके बाद अगस्त 2019 में उज्ज्वला 2.0 की शुरुआत की गई। यह इस योजना का दूसरा चरण था। इसके अंतर्गत सरकार ने 1 करोड़ और ऐसे घरों को स्वच्छ ईंधन देने का निर्णया लिया था जो योजना के पहले चरण में रह गए थे। इसी तरह यह लक्ष्य भी समय से पहले अगस्त 2019 में पूरा हो गया था और देश में उज्ज्वला के लाभार्थियों की सँख्या बढ़ कर 9 करोड़ पहुँच गई थी। योजना को विस्तार देते हुए सरकार ने इसमें 60 लाख लाभार्थी और जोड़े।

समय के अनुसार योजना को विस्तार देते हुए सितम्बर 2023 में इस योजना का तीसरा चरण भी लाया गया। इसके अंतर्गत 75 लाख अतिरिक्त उज्ज्वला लाभार्थी बनाने का लक्ष्य रखा गया। वर्तमान में यह चरण चल रहा है। इसके तहत लक्ष्य रखा गया है कि कुल लाभार्थियों की सँख्या को 10.35 करोड़ तक पहुँचाया जाए।

उज्ज्वला योजना का लाभ उत्तर प्रदेश के तराई इलाके में पड़ने वाले जिले लखीमपुर खीरी की रहने वाली सुनीता को भी मिला है। वह इस बारे में बताती हैं, “पहले खाना पकाने का इंतजाम करने के लिए लकड़ी चुनने जाना पड़ता था। बरसात में सूखी लकड़ी ना मिलने से बड़ी दिक्कत होती थी। इसके बाद भी धुएँ वाला चूल्हा फूंकना पड़ता था। गर्मियों में समस्या और भी बढ़ जाती थी। धुएँ से आँखों में जलन होती थी। जब से उज्ज्वला का लाभ मिला है, तब से सारी समस्याएँ दूर हो चुकी हैं। ना अब बाहर लकड़ी लेने जाना पड़ता है और ही बरसात की चिंता रहती है।”

10 करोड़ से अधिक घरों में पहुँची उज्ज्वला योजना

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ऐसी योजना बन कर उभरी है, जिसका देश के अधिकाँश परिवारों ने लाभ उठाया है। इस योजना के आँकड़े बताते हैं कि अब तक देश में 10.32 करोड़ लोग इसका लाभ लेकर धुएँ वाले चूल्हे से मुक्ति पा चुके हैं। 2011 की जनसँख्या के अनुसार, देश में परिवारों की सँख्या लगभग 25 करोड़ है। उज्ज्वला के आँकड़ों से स्पष्ट है कि देश की आबादी का लगभग 50% हिस्सा इस योजना से लाभान्वित हुआ है।

उज्ज्वला के जरिए मात्र महिलाओं को चूल्हे से ही मुक्ति नहीं मिल रही बल्कि इससे सरकार को सही लाभार्थियों तक सहायता पहुँचाने में भी आसानी हो रही है। मोदी सरकार उज्ज्वला के लाभार्थियों को लगातार अधिक रियायती दरों पर एलपीजी सिलिंडर उपलब्ध करवाती रही है। हाल ही में मोदी सरकार ने निर्णय लिया है कि वह उज्ज्वला के लाभार्थियों को ₹300 की सब्सिडी हर सिलिंडर पर देगी। मोदी सरकार ने निर्णय लिया है कि वह उज्ज्वला के लाभार्थियों को प्रति वर्ष 12 सिलिंडर पर यह लाभ उपलब्ध करवाएगी।